Ramesh Singh v. Uttar Pradesh State & Ors.

Supreme Court of India · 03 Mar 2020
S. Abdul Nazeer; Indu Malhotra
Civil Appeal No. 1918 of 2020
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the High Court's order setting aside the dismissal of a Basic Education Officer for irregular appointments and directed a fresh disciplinary inquiry conducted in accordance with natural justice.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील संख्या 1918/2020
रमेश सिंसह .......अपीलार्थी&
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य .........प्रत्यर्थी&
विनर्ण0य
न्यायमूर्ति , इंदु मल्होत्रा
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT

1. अपीलार्थी& को जनवरी 2003 में सिजला बेसिसक शिशक्षा अतिAकारी, सिजला बस् ी क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा। अपीलार्थी& सिजला बेसिसक शिशक्षा अतिAकारी गोरखपुर प्रभारी र्थीे, जब उन्होंने बी.एड्. की तिडग्री रखने वाले 400 उम्मीदवारों को सिजला गोरखपुर में बेसिसक स्क ू लों (प्रार्थीविमक स्क ू लों) में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और अप्रैल से जून 2003 क े दौरान सिजला बस् ी में 121 उम्मीदवारों को सहायक शिशक्षकों क े पद क े लिलए विनयुविक्त पत्र जारी विकए।

2. राज्य ने काया0लय आदेश 24.07.2003 विदनांविक क े माध्यम से अपीलक ा0 को विनलंबन क े अAीन रखा, और उत्तर प्रदेश सिसविवल सेवा (अनुशासन और अपील) विनयम, 1999 क े अन् ग0 अनुशासनात्मक/विवभागीय जांच क े विनदVश विदए। राज्य ने संयुक्त विनदेशक, बेसिसक शिशक्षा को जांच अतिAकारी विनयुक्त विकया। आरोप-पत्र 21.08.2003 को दायर विकया गया र्थीा सिजसमें यह आरोप लगाया गया र्थीा विक अपीलार्थी& द्वारा की गई सहायक अध्यापकों की विनयुविक्तयां अविनयविम र्थीीं, क्योंविक वे उ.प्र. बेसिसक शिशक्षा (शिशक्षक) सेवा विनयम, 1981 ("1981 विनयम") क े विनयम 16 और 19 (3) का उल्लंघन कर रहे र्थीे।

3. अपीलक ा0 ने विदनांक 09.11.2003 को आरोप-पत्र पर अपना जवाब प्रस् ु विकया और अपने लिखलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार विकया। यह क 0 विदया गया र्थीा विक विनयुविक्तयां उनक े द्वारा उच्च न्यायालय द्वारा पारिर पूव0 क े आदेशों और वरिरष्ठ अतिAकारिरयों क े विनदVशों क े अनुपालन में की गई र्थीीं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

4. जांच अतिAकारी ने अपीलक ा0 को आरोप पत्र में उसक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों का दोषी पाया। विदनांक 19.06.2004 को जांच अतिAकारी की रिरपोर्ट0 अनुशासनात्मक प्रातिAकरर्ण को भेज विदया गया।

5. अपीलक ा0 ने विनलंबन क े आदेश को रिरर्ट यातिचका (सी) 52287/2005, क े माध्यम से चुनौ ी दी, सिजसमें उच्च न्यायालय ने अं रिरम आदेश विदनांक 28.07.2005 क े माध्यम से विनलंबन क े आदेश पर रोक लगा दी।

6. रिरर्ट यातिचका क े लंबन क े दौरान, उप सतिचव बेसिसक शिशक्षा विवभाग ने आदेश विदनांविक 10.01.2006 क े माध्यम से सेवा से हर्टाने का दण्ड प्रस् ाविव विकया। अपीलार्थी& ने आदेश विदनांविक 10.01.2006 को रिरर्ट यातिचका (सी) सं. 14083/2006 दायर कर े हुए चुनौ ी दी, सिजसमें अं रिरम आदेश विदनांविक 08.03.2006 क े माध्यम से उच्च न्यायालय ने प्रस् ाविव सजा क े उपरोक्त आदेश पर स्र्टे का विनदVश विदया।

7. जांच आख्या क े आAार पर, सरकार ने उ.प्र. सिसविवल सेवा (अनुशासन और अपील) विनयम, 1999 क े प्रावAानों क े ह सेवा से विनष्कासन की बड़ी सजा देने का फ ै सला विकया और मामले को सरकारी आदेश विदनांविक 17.10.2005 क े माध्यम से उत्तर प्रदेश लोक सेवा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आयोग को विनर्दिदष्ट विकया। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपीलार्थी& को 21.12.2006 विदनांविक पत्र क े माध्यम से सेवा क े दण्ड को मंजूरी दी। सेवा से हर्टाने का आदेश राज्यपाल द्वारा 21.04.2008 विदनांविक को पारिर विकया गया र्थीा।

8. अपीलार्थी& ने रिरर्ट यातिचका (सी) संख्या 28842/2008 में विनष्कासन क े आदेश को चुनौ ी दी, सिजसमें उच्च न्यायालय ने 20.06.2008 विदनांविक क े अं रिरम आदेश क े माध्यम से रद्द कर विदया, सिजसमें विनदVशिश विकया गया विक 21.04.2008 विदनांविक को खारिरज विकए गए आदेश क े संचालन, काया0न्वयन और विनष्पादन पर स्र्टे रहेगा। अं रिरम आदेश क े पश्चा व &, राज्य सरकार ने विदनांक 19.05.2010 को दण्ड क े प्रस् ाविव आदेश को वापस ले लिलया। परिरर्णामस्वरूप, उच्च न्यायालय ने विदनांक 25.05.2010 को रिरर्ट यातिचका को इस अवलोकन क े सार्थी खारिरज कर विदया विक अनुशासनात्मक काय0वाही 6 महीने की अवतिA क े भी र अतिAमान ः कानून क े अनुरूप संपन्न हो सक ी है। अपीलार्थी& को अनुशासनात्मक काय0वाही क े सार्थी सहयोग करने क े लिलए विनदVशिश विकया गया र्थीा।

9. अनुशासनात्मक प्रातिAकारी ने जांच रिरपोर्ट0 क े सार्थी एक दूसरा कारर्ण ब ाओ नोविर्टस जारी विकया। अपीलार्थी& ने अन्य बा ों क े सार्थी -सार्थी क 0 विदया विक सश 0 विनयुविक्तयों को न्यायालय क े आदेशों क े अनुरूप विनAा0रिर वे नमान क े विवरूद्ध Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विकया गया र्थीा, और सरकार से दबाव बनाया गया र्थीा। प्रारम्भ से ही की गई सभी विनयुविक्तयों को शून्य घोविष कर विदया गया। सातिक्षयों क े प्रस् ुति करर्ण क े माध्यम से सुनवाई और साक्ष्य जोड़ने क े विकसी भी अवसर क े विबना जांच आयोसिज की गई र्थीी।

10. अनुशासनात्मक प्रातिAकारी ने अपीलार्थी& को व्यविक्तग सुनवाई की अनुमति प्रदान की। अनुशासनात्मक प्रातिAकारी ने अपीलार्थी& क े विवरूद्ध लगाए गए सभी आरोपों को सही पाया और विदनांक 27.06.2017 को सेवा से विनष्कासन का आदेश पारिर विकया।

11. अपीलार्थी& ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरर्ट ए. सं. 31098/2017 क े माध्यम से 27.06.2017 विदनांविक क े आदेश को चुनौ ी दी। उच्च न्यायालय ने 10.05.2018 विदनांविक को लागू विकए गए आक्षेविप विनर्ण0य और आदेश क े माध्यम से आंशिशक रूप से रिरर्ट यातिचका की अनुमति दी। उच्च न्यायालय ने अवAारिर विकया विक जांच अतिAकारी ने यह प ा लगाने क े लिलए क ु छ अशिभलिललिख नहीं विकया है विक क्या अपीलार्थी& को मौलिखक जांच करने की ारीख, समय और स्र्थीान को सूतिच करने क े लिलए नोविर्टस विदया गया र्थीा या नहीं। अपीलार्थी& ने स्पष्ट रूप से यह दलील दी र्थीी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विक जांच अतिAकारी ने सुनवाई का कोई अवसर नहीं विदया र्थीा। दंड क े आदेश को पारिर कर े समय अनुशासनात्मक प्रातिAकारी ने प्राकृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का अनुपालन कर े हुए एक वैA जांच की अविनवाय0 आवश्यक ा की अनदेखी की। इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय ने महसूस विकया विक अपीलार्थी& क े इस क 0 पर विवचार करना उतिच नहीं होगा विक विनयुविक्तयाँ उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश क े अनुपालन में की गई ंऔर उच्च अतिAकारिरयों क े विनदVशों का पालन विकया गया, चूँविक इसे अशिभलेख पर साक्ष्य क े सराहना की आवश्यक ा होगी। हालांविक, उच्च न्यायालय ने इस क 0 को खारिरज कर विदया विक जांच अतिAकारी पक्षपा ी र्थीा, जांच अतिAकारी की ओर से पक्षपा क े विकसी भी त्व को प्रकर्ट करने क े लिलए अशिभलेख पर कोई सामग्री नहीं र्थीी। न्यायालय ने क े.सी. भार ी सिजन्हें एक वष0 क े लिलए एक वे न वृतिद्ध रोककर, और उनक े सेवा लेखपत्र में एक परिरनिंनदा प्रविवविष्ट से कम सजा दी गई र्थीी, क े मामले क े सार्थी अपीलक ा0 की समान ा क े विववाद को खारिरज कर विदया । उच्च न्यायालय ने विनष्कष0 विनकाला विक चूंविक जांच प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े उल्लंघन में आयोसिज की गई र्थीी, इसलिलए 27.06.2017 विदनांविक को सेवा से बखा0स् गी क े आदेश को रद्द कर विदया गया र्थीा। मामले को आरोप-पत्र क े चरर्ण से नए सिसरे से जांच करने क े लिलए अनुशासनात्मक प्रातिAकारी को प्रेविष विकया गया र्थीा। यह विनदVशिश विकया गया र्थीा विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अपीलार्थी& को जांच क े दौरान, विनलंबन क े ह माना जाएगा और उसे विनयमानुसार गुजारा भत्ता विदया जाएगा। न्यायालय ने आकस्थिस्मक और कठोर रीक े से निंनदा विकया सिजसमें अनुशासनात्मक प्रातिAकारिरयों ने बड़े पैमाने क े भ्रष्टाचार क े गंभीर आरोपों की जांच करने का काम विकया र्थीा जहां विवतिA की विनAा0रिर प्रविzया का पालन विकए बगैर अपीलार्थी& द्वारा सैकड़ों विनयुविक्तयां की गई र्थीीं। अनुशासनात्मक प्रातिAकरर्ण को एक विनदVश जारी विकया गया र्थीा विक वह मुख्यमंत्री की मंजूरी क े सार्थी एक जांच अतिAकारी की विनयुक्त करे, सिजसको अनुशासनात्मक काय0वाही क े परिरर्णाम से अवग कराया जाए।

12. उक्त विनर्ण0य से पीविड़ होकर अपीलार्थी& ने इस न्यायालय क े समक्ष व 0मान विवशेष अवकाश यातिचका दायर की। इस न्यायालय ने आदेश विदनांक 09.07.2018 को नोविर्टस जारी विकया गया विक क्या अपीलार्थी& को विनलंबन पर जारी रखा जाना चाविहए, और क्या अनुशासनात्मक प्रातिAकारी को इस मामले की रिरपोर्ट0 मुख्यमंत्री को देनी चाविहए। आक्षेविप विनर्ण0य क े अनुसरर्ण में, राज्य ने काया0लय ज्ञापन 11.10.2018 विदनांविक क े माध्यम से आरोप-पत्र क े चरर्ण से विफर से जांच शुरू करने की मंजूरी प्रदान की। 31.10.2018 विदनांविक को एक और आदेश द्वारा, इस न्यायालय ने 11.10.2018 को काया0लय ज्ञाप क े संचालन पर रोक लगाने का आदेश विदया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

13. हमने पक्षों क े लिलए विवद्व अतिAवक्ता को सुना, और अशिभलेख का परिरशीलन विकया। यह मुद्दा जो हमारे विवचार क े लिलए है विक क्या 521 उम्मीदवार, जो सहायक अध्यापकों क े पद क े लिलए बी.एड. तिडग्री Aारक हैं, को जारी विकए गए विनयुविक्त पत्र को विनयमों क े द्वारा विनय अविनवाय0 प्रविzया का संचालन विकया गया।

14. अपीलार्थी& की रफ से अतिAवक्ता ने प्रस् ु विकया विक अपीलार्थी& क े विनरं र विनलंबन न्यायसंग नहीं र्थीा, और यह विक उसक े मुववि}ल ने विनयुविक्तयों को मा. उच्च न्यायालय क े पूव0 क े आदेश, और उच्च प्रातिAकारिरयों क े विनदVश क े अनुरूप भी बनाया गया र्थीा।

14.1. सतिचव, बेसिसक शिशक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिशक्षा क े सभी प्रभागीय सहायक विनदेशकों (बेसिसक) उ.प्र. को एक पत्र 10.04.2003 विदनांविक पर आभारिर विकया गया, सिजसमें यह विनदVश विदया गया र्थीा विक सिजला बेसिसक शिशक्षा अतिAकारिरयों द्वारा शिशक्षकों की विनयुविक्त क े संबंA में उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विकये गए आदेशों का अनुपालन विकया जाए।

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14.2. विदनांक 18.4.2003 क े पत्र क े माध्यम से आगे यह प्रस् ु विकया गया विक, अपीलार्थी& उ.प्र. बेसिसक शिशक्षा विनदेशक से विवद्यालयों में सहायक अध्यापक क े पद पर उम्मीदवारों की विनयुविक्त क े लिलए विनदVश जारी करने का अनुरोA कर चुका र्थीा, सिजनक े पास B.Ed./L.T./B.P.Ed./C.P.Ed की योग्य ा र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

14.3. विदनांक 21.04.2003 को एक और पत्र द्वारा, अपीलार्थी& ने सतिचव, बेसिसक शिशक्षा, उ.प्र. सरकार को सूतिच विकया, विक सिजला गोरखपुर में शिशक्षकों क े पद रिरक्त र्थीे, और सहायक शिशक्षकों क े पद पर उम्मीदवारों की विनयुविक्त क े लिलए B.Ed./L.T./B.P.Ed./C.P.Ed की योग्य ा रखने वाले का कोई प्रावAान नहीं र्थीा।

14.4. दोपरान् अपीलार्थी& ने विदनांक 25.04.2003 को एक अतिAसूचना जारी की सिजसमें कहा गया र्थीा विक विदनांक 23.04.2003 को आयोसिज मुख्यमंत्री, और बेसिसक शिशक्षा मंत्री, बेसिसक शिशक्षा सतिचव, उ.प्र. सरकार क े सार्थी विवचार-विवमश0 द्वारा का B.Ed./L.T का अनुसरर्ण कर े हुए उम्मीदवारों को विनयुविक्त आदेश जारी करने का विनर्ण0य लिलया गया र्थीा। यह भी उल्लेख विकया गया र्थीा विक उन्हें यह विनदVश विदया गया र्थीा विक यविद विनयुविक्त त्काल नहीं की गई ो उनक े विवरूद्ध विवभागीय काय0वाही शुरू की जाएगी।

14.5. दनुसार, अपीलार्थी& ने मई से जून 2003 की अवतिA क े दौरान बेसिसक स्क ू लों में सहायक अध्यापकों क े 521 पदों पर विनयुविक्तयाँ कीं।

14.6. यह आगे प्रस् ु विकया गया विक अपीलार्थी& ने उ.प्र. राज्य क े लिलए मुख्य स्र्थीायी अतिAवक्ता की परामश0 मांगी। विदनांक 01.05.2003 को पत्र क े माध्यम से मुख्य स्र्थीायी अतिAवक्ता द्वारा यह कहा गया विक विदनांक 10.04.2003 को सरकार का आदेश सामान्य प्रक ृ ति में र्थीा। अपीलार्थी& को सरकार की सहमति से विनर्ण0य लेने का परामश0 विदया गया र्थीा चूँविक ऐसे मामलों क े सदृश राज्य प्रभाविव हो सक े हैं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

14.7. अपीलार्थी& ने सतिचव, बेसिसक शिशक्षा परिरषद को विदनांक 06.05.2003 को एक अन्य पत्र से संबोतिA विकया, सिजसमें इन विनदVशों का माँगा जाना र्थीा विक क्या उच्च न्यायालय क े आदेशों /विनदVशों क े अनुसार B.Ed./L.T./B.PEd./C.P.Ed की उच्च योग्य ा रखने वाले उम्मीदवारों की विनयुविक्त की जा सक ी है।

14.8. सतिचव बेसिसक शिशक्षा ने आदेश विदनांक 28.05.2003 क े माध्यम से सभी प्रभागीय सहायक विनदेशक (बेसिसक शिशक्षा) को विनदVशिश विकया विक शिशक्षकों क े पद पर उम्मीदवारों की विनयुविक्तयाँ क े वल उन्हीं मामलों में विकया जाए, सिजनमें अंति म /अं रिरम आदेश विदनांक 02.06.2003 को उच्च न्यायालय द्वारा द्वारा पारिर विकए गए र्थीे।

14.9. अपीलार्थी& ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंड पीठ क े एक पूव0 विनर्ण0य विवशेष अपील संख्या 21(एसबी)/1993 में भरोसा रखा। उच्च न्यायालय ने विफरोज आलम खान बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य 1986 UP LBC 674 क े मामले में पूव0 क े एक विनर्ण0य पर संज्ञान लिलया सिजसमें यह विनदVशिश विकया गया र्थीा विक यविद बेसिसक स्क ू लों में सहायक अध्यापक क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए पया0प्त संख्या में बी.र्टी.सी. प्रशिशतिक्ष उम्मीदवार उपलब्A नहीं र्थीे, जो उम्मीदवार विनयुविक्त क े लिलए योग्य हैं जैसा विक विवज्ञापन में कहा गया र्थीा, उन्हें विनयुक्त विकया जा सक ा है। उस मामले में उच्च न्यायालय ने इस न्यायालय क े विनर्ण0य को मो. रिरयाज़ुल उस्मान घनी एवं अन्य बनाम सिजला और सत्र न्यायाAीश, नागपुर को संदर्भिभ विकया र्थीा। सिजसमें विनम्नानुसार अवAारिर विकया गया र्थीा: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds “21. कोई मानदंड जो विकसी अभ्यर्थी& को विकसी पद क े लिलए इस सिसद्धां पर उसक े अतिAकारों को विवचारिर विकये जाने का विनषेAात्मक प्रभाव रख ा है यह विक अभ्यर्थी& क े पास विवविह योग्य ा से अतिAक उच्च योग्य ा रख ा है, जो क 0 संग नहीं हो सक ा है। हम इस बा की सराहना नहीं कर पा रहे हैं विक सिजन उम्मीदवारों क े पास एससीसी परीक्षा क े समकक्ष योग्य ा र्थीी, उन पर भी विवचार नहीं विकया जा सक ा है। हम ात्कालिलक मामले क े थ्यों पर यह कह रहे हैं और इसे साव0भौविमक आवेदन क े विनयम क े रूप में प्रति पाविद नहीं विकया जाना चाविहए।” (प्रभाव वर्तिA )

15. हमने उत्तर प्रदेश बेसिसक शिशक्षा (र्टीचस0) सेवा विनयमावली, 1981 का परिरशीलन विकया है, सिजसमें उ.प्र. में बेसिसक स्क ू लों में सहायक अध्यापकों की विनयुविक्त की प्रविzया प्रति पाविद है। विनयम 2 का उप-विनयम (1)(बी) "सक्षम प्रातिAकारी" को परिरभाविष कर ा है सिजसक े अन् ग0: "(ख) विनयम 3 में विनर्दिदष्ट शिशक्षकों क े संबंA में 'विनयुविक्त प्रातिAकरर्ण' का अर्थी0 है सिजला बेसिसक शिशक्षा अतिAकारी" विनयम 8 सहायक शिशक्षकों क े पद क े लिलए शैक्षशिर्णक योग्य ा विनAा0रिर कर ा है: “8. शैक्षशिर्णक योग्य ाएँ - (1) खंड(क) में विनर्दिदष्ट पद पर विनयुविक्त क े लिलए उम्मीदवारों की आवश्यक योग्य ा: पद शैक्षशिर्णक योग्य ाएँ....... (ii) जूविनयर बेसिसक स्क ू लों क े सहायक अध्यापक और सहायक अध्याविपका भार में विवतिA द्वारा स्र्थीाविप एक विवश्वविवद्यालय से स्ना क की उपातिA अर्थीवा सरकार द्वारा मान्य ा प्राप्त एक उपातिA क े सार्थी एक समकक्ष शिशक्षक क े रूप में एक बुविनयादी शिशक्षक प्रमार्णपत्र, विवशिशष्ट बेसिसक र्टीचस0 प्रमार्णपत्र(बीर्टीसी), निंहदुस् ानी शिशक्षक प्रमार्णपत्र, जूविनयर शिशक्षक प्रमार्णपत्र, शिशक्षर्ण Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रमार्णपत्र अर्थीवा सरकार द्वारा मान्य ा प्राप्त कोई अन्य प्रशिशक्षर्ण पाठ्यzम क े समकक्ष विनयम 16 में इन विनयमों क े ह विकसी भी पद पर विनयुविक्त करने क े लिलए चयन सविमति क े गठन का प्रावAान प्रदान विकया गया है: “16. चयन सविमति का गठन - इन विनयमों क े ह विकसी भी पद पर विनयुविक्त क े लिलए उम्मीदवारों क े चयन क े लिलए, एक चयन सविमति का गठन करना होगा – क) निंप्रसिसपल, सिजला शिशक्षा और प्रशिशक्षर्ण संस्र्थीान - चेयरमैन ख) सिजला बेसिसक शिशक्षा अतिAकारी - सदस्य–सतिचव ग) सिजला मुख्यालय में शासकीय कन्या इंर्टर कॉलेज क े निंप्रसिसपल - सदस्य घ) सिजला गैर-औपचारिरक शिशक्षा अतिAकारी - सदस्य ड़) च) निंहदू, उदू0 या अन्य भाषाओं में एक विवशेषज्ञ, सिजलातिAकारी द्वारा नाविम जैसा भी मामला हो - सदस्य विनयम 19(3) में चयन सविमति की अनुशंसा क े अति रिरक्त कोई विनयुविक्त न विकया जाना प्रावAाविन है। “19. विनयुविक्त – ……. (3) चयन सविमति की अनुशंसा क े अति रिरक्त एवं हसीलदार द्वारा जारी विनवास प्रमार्ण पत्र क े प्रस् ु करने को छोड़कर सीAी भ & क े मामले में कोई विनयुविक्त नहीं की जाएगी।" (प्रभाव वर्तिA )

16. पूव क्त विनयमों क े परिरशीलन से प ा चल ा है विक सिजला बेसिसक शिशक्षा अतिAकारी क े रूप में अपीलार्थी& होने क े ना े, प्रति पाविद उपरोक्त विनयम 16 एवं 19(3) क े विवचार क े द्वारा विनयुविक्त प्रातिAकारी को क े वल चयन सविमति की अनुशंसा क े आAार पर अनुसार विनयुविक्तयाँ करने का अतिAकार विदया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds यह प्रत्यर्थी&-राज्य का मामला है विक अपीलार्थी& ने 1981 विनयमों का पालन विकए विबना विनयुविक्तयां की। राज्य द्वारा अपीलार्थी& क े विवरूद्ध भ्रष्टाचार क े गंभीर आरोप लगाए गए हैं, सिजसकी अनुशासनात्मक प्रातिAकारी द्वारा पूर्ण0 ः जांच में दृढ़ संकल्प की आवश्यक ा होगी। यह ध्यान रखना उतिच है विक इन सभी विनयुविक्तयों को राज्य द्वारा प्रारम्भ ः शून्य घोविष विकया गया र्थीा, जैसा विक अपीलार्थी& क े प्रत्युत्तर विदनांक 04.12.2012 क े दूसरे कारर्ण ब ाओ नोविर्टस में उल्लेख विकया गया र्थीा। अपीलार्थी& की यह दलील विक विनयुविक्तयां उच्च न्यायालय द्वारा पारिर पहले क े आदेश क े अनुपालन में की गई र्थीीं, और वरिरष्ठ पदातिAकारिरयों क े विनदVशों क े ह, जांच में विवचार विकए जाने की आवश्यक ा होगी।

17. हम उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विकए गए आक्षेविप विनर्ण0य को अनुशासनात्मक प्रातिAकारी क े मामले को छ ू र्ट देने क े लिलए बरकरार रख े हैं, जो आरोप पत्र क े चरर्ण से आयोसिज विकया जाएगा। अनुशासनात्मक प्रातिAकारी अपीलार्थी& को सुनवाई का पूरा अवसर देने क े बाद प्राकृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े अनुसार जांच का संचालन करेगा, सिजसे मौलिखक और दस् ावेजी साक्ष्य दोनों को प्रस् ु करने की अनुमति दी जाएगी। पक्षों को कोई अनावश्यक स्र्थीगन नहीं विदया जाएगा। जांच की अवतिA क े दौरान अपीलार्थी& का विनलंबन जारी रहेगा। जांच को 4 माह की अवतिA क े अन्दर पूर्ण0 करने का विनदVश विदया गया है। हम आक्षेविप विनर्ण0य को इस सीमा क संशोतिA कर े हैं विक जांच अतिAकारी मुख्य सतिचव द्वारा विनयुक्त विकया जाए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds इस आदेश की एक प्रति मुख्य सतिचव को प्रेविष कर दी जाए। यह स्पष्ट विकया जा ा है विक मामले क े गुर्ण-दोष पर विकसी भी राय की कोई अशिभव्यविक्त नहीं है। सिसविवल अपील खारिरज की जा ी है। लंविब आवेदन को, यविद कोई हो, दनुसार विनस् ारिर विकए जा े हैं। दनुसार आदेश विदया गया।........................................ (न्यायमूर्ति, एस. अब्दुल नजीर)....................................... (न्यायमूर्ति, इंदु मल्होत्रा) नई विदल्ली; 3 माच0,2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds