Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 2463 वर्ष 2015
सहायक महाप्रबं क, भार ीय स्टेट बैंक और अन्य ...अपीलार्थी.गण
बनाम
रा ेश्याम पाण्डेय …प्रत्यर्थी.गण
सह
सिसविवल अपील सं. 2287- 2288 वर्ष 2010
सिसविवल अपील सं. 5035-5037 वर्ष 2012
सिसविवल अपील सं. 10813 वर्ष 2013
विनणय
न्यायमूर्ति अरुण विमश्रा, mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
JUDGMENT
1. अन् र्निनविह प्रश्न यह है विक क्या प्रत्यर्थी. कमचारीगण 15 वर्ष की सेवा पूरी करने पर भार ीय स्टेट बैंक स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना (संक्षेप में, “वर्ष 2000 में बनाई गई वीआरएस”) क े अनुसार पेंशन क े हकदार हैं।
2. वीआरएस क े ह पेंशन की अनुज्ञविZ को लेकर न्याया ीशों क े बीच म विवरो होने क े कारण मामले को वृहद पीठ को संदर्भिभ विकया गया है।
3. भार सरकार की स्वीक ृ ति से इंतिडयन बैंक एसोसिसएशन (आईबीए) ने एक स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना बनाई। भार ीय स्टेट बैंक (संक्षेप में 'एसबीआई') क े क ें द्रीय विनदेशक मंडल ने 27.12.2000 को आयोसिज अपनी बैठक में इस योजना को अंगीक ृ विकया और 15 वर्ष की सेवा पूरी करने पर योजना में उपबंति लाभों क े सार्थी बैंक क े कमचारिरयों को सेवाविनवृI कर वीआरएस योजना लागू करने का अनुमोदन विकया । यह योजना आईबीए द्वारा जारी विकए गये विदशाविनदcशों को ध्यान में रख े हुए ैयार की गई र्थीी। उप प्रबं विनदेशक और कारपोरेट विवकास अति कारी द्वारा 26.12.2000 विदनांविक ज्ञापन इसमें अं र्निनविह प्रस् ावों को मंजूरी देने और ज्ञापन क े संलग्नक 'ख' क े रूप में लगी योजना को अंगीक ृ करने क े त्तिलए विदया गया र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. 26.12.2000 विदनांविक ज्ञापन का आ ार आईबीए द्वारा 31.8.2000 विदनांविक पत्रांक क े माध्यम से दी गई सलाह र्थीी सिजसमें यह कहा गया र्थीा विक उन्होंने 13.6.2000 को भार सरकार, विवI मंत्रालय (बैंकिंकग प्रभाग) की सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों क े मुख्य कायकारी अति कारिरयों क े सार्थी हुई बैठक में विवI मंत्री क े सार्थी विवचार-विवमश विकया र्थीा । सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों में मानव संसा न और जनशविj विनयोजन की समीक्षा की गयी और सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों से संबंति समस्याओं की जांच करने और उपयुj उपचारात्मक उपाय सुझाने क े त्तिलए एक सविमति का गठन विकया गया। सविमति ने वर्ष 1990 में शुरू विकये गये आर्भिर्थीक सु ारों र्थीा उच्च स्र्थीापना लाग और सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों में कम उत्पादक ा पर विवचार विकया। यह महसूस विकया गया विक बैंक अपने मानव संसा न को विवभिभन्न उपायों क े माध्यम से व्यापार रणनीति क े अनुरूप परिरसंपत्तिIयों में परिरवर्ति कर े हैं। उपलब् आंकड़ों से संक े विमल ा है विक सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों में 43% कमचारी 46 + आयु वग में र्थीे, और क े वल 12% ही 25-35 आयु वग में र्थीे। यह महसूस विकया गया विक इस पैटन का बैंकों की गति शील ा, प्रभिशक्षण, कौशल विवकास और उच्च स् रीय पदों क े त्तिलए उIराति कार योजनाओं क े त्तिलए गंभीर विनविह ार्थी है। कमचारिरयों की बहु ाय र्थीी। इस च्छिस्र्थीति को सु ारने क े त्तिलए सविमति ने सरकार क े सामने दो योजनाएं रखीं, जो र्थीी - अध्ययन अवकाश और स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI। 13. 7. 2000 विदनांविक पत्र क े माध्यम से आईबीए ने योजनाओं पर बैंकों क े बोडw द्वारा विवचार विकये जाने और अंगीक ृ करने हे ु प्रसारिर करने क े त्तिलए सरकार से अनापत्तिI मांगी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सरकार ने 29. 8. 2000 को ब ाया विक उसे संबंति विनदेशक मंडल द्वारा योजना को अपनाने और लागू करने पर कोई आपत्तिI नहीं है। उसने सलाह विदया विक बैंक पत्र क े संलग्नक में दी गई योजनाओं की मूल विवशेर्ष ाओं क े आ ार पर अध्ययन अवकाश और स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI की इन योजनाओं को अपना सक े हैं। योजना में सभी स्र्थीायी कमचारिरयों क े त्तिलए 15 वर्ष की सेवा की पात्र ा का उपबं र्थीा। इसमें भार सरकार द्वारा स्वीकृ अनुग्रह राभिश और अन्य लाभों का उपबं विकया गया र्थीा जो प्रदान की जानी र्थीी, (i) यर्थीाच्छिस्र्थीति, ग्रेEयुटी अति विनयम/सेवा ग्रेEयुटी क े अनुसार ग्रेEयुटी क े रूप में (ii) पेंशन (पेंशन का संराशीक ृ मूल्य) /भविवष्य विनति में बैंक क े अंशदान क े रूप में; और (iii) विनयमों क े अनुसार अवकाश नकदीकरण क े रूप में।
5. विदनांक 27.12.2000 को ज्ञापन में विनविह प्रस् ावों को एसबीआई द्वारा मंजूरी विदये जाने क े बाद, 29.12.2000 को एक परिरपत्र जारी विकया गया र्थीा सिजसमें यह उल्लेख र्थीा विक आईबीए ने सलाह विदया है विक चूंविक विवI मंत्रालय द्वारा गविठ सविमति ने जनशविj को युविjसंग बनाने क े त्तिलए वीआरएस शुरू करने की सिसफारिरश की र्थीी, भार सरकार को वीआरएस को अपनाने और लागू करने में कोई आपत्तिI नहीं है। 29.12.2000 विदनांविक परिरपत्र में यह स्पष्ट रूप से कहा गया र्थीा विक क ें द्रीय विनदेशक मंडल ने “ आईबीए क े विदशाविनदcशों को ध्यान में रखकर बनाई गयी ” एसबीआई की स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना को अपनाने और और कायाच्छिन्व करने का अनुमोदन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया र्थीा। योजना की कॉपी संलग्नक ख क े रूप में लगाई गयी र्थीी। यह योजना 15.1.2001 से 31.1.2001 क खुली र्थीी। ऩकल आवेदन और सार्थी ही पेंशन क े त्तिलए अन्य संबंति फॉम भी प्रसारिर विकये गये जो परिरपत्र का विहस्सा र्थीे। परिरपत्र में यह भी स्पष्ट विकया गया र्थीा विक अनुग्रह राभिश क े अति रिरj ग्रेEयुटी, भविवष्य विनति विनयमों क े अनुसार भविवष्य विनति योगदान, एसबीआई कमचारी पेंशन विनति विनयमों क े ह पेंशन और अवकाश नकदीकरण प्रदान विकए जाएंगे।
6. योजना की मुख्य बा लाभों का 15 वर्ष की सेवा पूण होने पर विदया जाना र्थीा। लाभों क े त्तिलए पात्र ा उन लोगों को प्रदान की गई र्थीी सिजन्होंने 31.12.2000 को 15 वर्ष की सेवा पूरी कर ली र्थीी।
7. एसबीआई ने कहा है विक इसने योजना क े अन् ग योजना या इसक े विकसी भी खंड को रूपां रिर करने, संशोति करने या रद्द करने और इसे विकसी भी उपयुj ति भिर्थी से प्रभावी करने का अति कार आरतिक्ष रखा र्थीा। उप प्रबं विनदेशक-सह-सीडीओ इस उद्देश्य क े त्तिलए सक्षम प्राति कारी र्थीे। चूंविक विवविनर्निदष्ट प्रश्न उठाए गए र्थीे, इसत्तिलए उप प्रबं विनदेशक द्वारा 15.1.2001 को एक स्पष्टीकरण जारी विकया गया र्थीा, सिजसमें एक प्रश्न विक- सेवाविनवृत्तिI की प्रासंविगक ति भिर्थी को पेंशनयोग्य सेवा क े 15 वर्ष पूण करने वाला कोई कमचारी पेंशन लाभ का हकदार होगा- क े जवाब में, योजना क े पैरा 6 (सी) को दोहराया गया र्थीा, और यह भी उल्लेख विकया गया र्थीा विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मौजूदा विनयमों क े अनुसार,सिजन कमचारिरयों ने 20 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी नहीं की र्थीी, वे पेंशन क े त्तिलए अह नहीं र्थीे।
8. उप महाप्रबं क द्वारा जारी स्पष्टीकरण योजना क े रूपां रण या संशो न क े रूप में नहीं र्थीा। स्पष्टीकरण में उप महाप्रबं क ने प्राव ानों को उद्धृ विकया और क े वल एक विनयम की च्छिस्र्थीति ब ाई विक पेंशन योग्य सेवा20 वर्ष र्थीी। यह संसूचन स्पष्टक र्थीा और यर्थीा अनुमोविद और अंगीकृ एसबीआई वीआरएस योजना पर इसका रूपां रणकारी प्रभाव नही र्थीा। 9.(a). रा ेश्याम पांडे ने 26.9.2006 विदनांविक पत्र व्यवहार क े द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर रिरट आवेदन में बैंक द्वारा पेंशन का भुग ान अस्वीक ृ विकए जाने का विवरो विकया । वह एसबीआई वीआरएस योजना क े ह 31.03.2001 को सेवाविनवृI हुए। 18.03.2001 को बैंक ने कमचारी क े स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े प्रस् ाव को स्वीकार विकया। वह 59 वर्ष 3 महीने की उम्र क े र्थीे और सेवाविनवृत्तिI की आयु प्राZ होने में 9 महीने शेर्ष र्थीे। 31.3.2001 को जब वीआरएस प्रभावी हुआ वह 19 वर्ष 9 महीने और 18 विदन पेंशन योग्य सेवा दे चुक े र्थीे। उन्हें 60 वर्ष की आयु पूण होने पर सेवाविनवृI होना र्थीा सिजससे 20 वर्ष से क ु F अति क की पेंशन योग्य सेवा हो जा ी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (b). उच्च न्यायालय में ारिर विकया विक कमचारी का मामला विनयम 22(i) (a) क े विद्व ीय भाग क े अं ग आ ा र्थीा वह 11.11.1993 को और उसक े पश्चा बैंक की सेवा में संलग्न र्थीे और 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूरी हो चुकी र्थीी और आगे सेवाविनवृI होने की ति भिर्थी क े पूव 58 वर्ष क े हो गए र्थीे। उच्च न्यायालय ने कहा विक स्पष्टीकरण वीआरएस योजना का विहस्सा नहीं र्थीा। कमचारी विनयम से परे अनुबं ात्मक सेवाविनवृत्तिI क े अनुसार सेवाविनवृI हुआ। अनुबं को माना जाना र्थीा। भविवष्य विनति विनयम क े विनयम 22(i) में खंड (a) कमचारिरयों को 10 साल की पेंशन योग्य सेवा क े पश्चा पेंशन का लाभ देने क े त्तिलए अं र्निवष्ट विकया गया र्थीा चाहे भले ही उन्होंने देर से सेवा शुरू की हो। उच्च न्यायालय ने पाया विक मामला विनयम 22(i)(a) क े अं ग आ ा र्थीा। अनुज्ञZ लाभ अस्वीक ृ नहीं विकया जा सक ा। यविद कोई संविवद पक्ष विकसी अनुमन्य खंड का लाभ लेने का हकदार है ो उसे नकारा नहीं जा सक ा। (c). अध्यक्ष, भार ीय स्टेट बैंक एवं अन्य बनाम विमविहर कु मार नंदी एवं अन्य (C.A. Nos. 5035-5037/2012) क े मामले में कलकIा उच्च न्यायालय ने अं ः न्यायालयीय अपील को विनरस् कर े हुए विवद्व एकल न्याया ीश क े आदेश की अभिभपुविष्ट की और पेंशन क े भुग ान का विनदcश विदया। कमचारी की विनयुविj 21.5.1988 को हुई र्थीी उसने 15.1.2001 को वीआरएस का चयन विकया। स्वीक ृ ति 17.3.2001 को प्रदान की गई सिजसक े द्वारा उसे सूतिच विकया गया विक उसे 31.3.2001 को उसकी सेवाओं से मुj कर विदया जाएगा। 2.8.2001 विदनांविक पत्र क े द्वारा कमचारी को रू. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 1024/- प्रति माह की पेंशन प्रदान की गई। लेविकन 30.8.2001 विदनांविक पत्र व्यवहार क े द्वारा पेंशन विनति विनयम क े विनयम 22 में संशो न क े दृविष्टग पेंशन भुग ान आदेश और सार्थी ही सारांशीक ृ मूल्य का भुग ान रोक विदया गया। यद्यविप पेंशन विनति विनयम में संशो नों को 31.3.2001 से प्रभावी विकया गया, और सेवाविनवृत्तिI की आयु को 22.5.1998 से 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई र्थीी इससे पेंशन विनति हे ु प्रवेश की आयु को विनयम 22(i)(a) में विवविनर्निदष्ट आयु बढ़ाकर 58 वर्ष करने की आवश्यक ा उत्पन्न हो गई र्थीी ाविक वे कमचारी जो 60 वर्ष की आयु पूण होने पर 22.5.1998 को या उसक े पश्चा 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूरी कर सेवाविनवृI हुए हैं या सेवाविनवृI हो रहे है, पेंशन क े त्तिलए अह हो सक ें । (d). एसबीआई क े क ें द्रीय बोड ने 30.1.2001 को आयोसिज बैठक में संलग्नक एक में विदए गए विनयमों 8 और 22(i)(a) में संशो न को स्वीक ृ प्रदान की। एसबीआई कमचारी पेंशन विनति क े न्यासिसयों ने 30.10.2001 को अपनी बैठक में संशोति विनयमों को अंगीक ृ विकया। परिरणामस्वरुप 8.11.2001 को एक परिरपत्र जारी विकया गया। संशो न को 31.3.2001 से प्रभावी विकया गया, सिजस ति भिर्थी को इसे अति सूतिच विकया गया, यद्यविप इसे एसबीआई न्यास पेंशन फ ं ड क े न्यासिसयों द्वारा अक्टूबर 2001 में अंगीक ृ विकया गया। (e). उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने ारिर विकया विक प्रत्यर्थी.- कमचारी 17.3.2001 को, सिजस ति भिर्थी को उसका प्रस् ाव स्वीकार विकया गया, विनयमानुसार पेंशन पाने का पात्र र्थीा। 31.3.2001 को संशोति विनयम mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रकाभिश विकए गए सिजससे पेंशन पाने का मौजूदा हक भिFन गया। वीआरएस योजना में इस बा का उल्लेख र्थीा विक पेंशन 31.3.2001 को विवद्यमान विनयमों क े अनुसार देय होगी। कमचारिरयों क े पास पेंशन विनयमों में भविवष्य में होने वाले ऐसे संशो नों को जानने का कोई सा न नहीं र्थीा जो उनक े विह ों क े विवरुद्ध हो े। यविद वह थ्य को जान ा ो उसने योजना का चयन न विकया हो ा। विनयोjा द्वारा ऐसी च्छिस्र्थीति में बर ा गया मौन उसकी ओर से ोखा करने क े ुल्य र्थीा। उच्च न्यायालय ने संविवदा अति विनयम की ारा 17 और संविवदा अति विनयम की ारा 19 क े दृष्टां (d) का अवलंब त्तिलया। उच्च न्यायालय ने आगे यह ारिर विकया विक इस बा का खुलासा करना विनयोjा का दातियत्व र्थीा विक भविवष्य में उनकी सेवा क े अंति म ति भिर्थी पर संशो न होगा सिजससे उनका पेंशन का अति कार भिFन जाएगा। इसे मनमाना और गल होने क े अति रिरj और क ु F नहीं कहा जा सक ा। इस प्रकार उच्च न्यायालय ने ारिर विकया विक यह काय भार क े संविव ान क े अनुEFेद 14 का उल्लंघन कर ा है। कमचारी ब्याज क े सार्थी पेंशन क े अनु ोर्ष का हकदार है।
10. रमेश प्रसाद विनगम (उपरोj) ने 1984 में त्तिलविपक श्रेणी में सेवा प्रारंभ की र्थीी और 2.3.1985 को स्र्थीाई हुए र्थीे उन्होंने 15 वर्ष की सेवा पूण कर 57 वर्ष की आयु होने पर वीआरएस क े त्तिलए आवेदन विकया र्थीा। स्पष्टीकरण आं रिरक परिरपत्र र्थीा । यह कमचारी की जानकारी में नहीं र्थीा, ऐसे में वह पेंशन का हकदार र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 11.(a). C.A. Nos. 2287-88/2010 में एमपी हल्लान ने क्लक क े रूप में 18.5.1981 से सेवाएं शुरू की। वीआरएस क े अं ग स्वीक ृ ति 17.3.2001 को दी गई। 27.3.2001 को उन्होंने वीआरएस आवेदन को वापस लेने का आवेदन विकया क्योंविक सेवाविनवृत्तिI 31.3.2001 से प्रभावी होनी र्थीी। बैंक ने 18.4.2001 को आवेदन इस आ ार पर अस्वीक ृ कर विदया गया विक आवेदन वापस लेने की अंति म ति भिर्थी 15.2.2001 र्थीी। कमचारी ने एसबीआई कमचारी पेंशन विनति विनयम (ए च्छिस्मन्पश्चा 'पेंशन विनयम' से संदर्भिभ ) क े ह पेंशन विनति विनयम क े अं ग पेंशन का दावा विकया। 12.4.2001 को पत्र त्तिलखकर कमचारी का स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI को वापस लेने का आवेदन, पेंशन और अवकाश में नगदीकरण का दावा 4.7.2001 को पुनः अस्वीक ृ कर विदया गया। त्पश्चा उन्होंने पंजाब एवं हरिरयाणा उच्च न्यायालय में रिरट यातिचका दायर की। (b). उच्च न्यायालय ने वीआरएस से वापसी संबं ी दावे को विनरस् कर विदया। जैसा विक वापस लेने की आत्तिखरी ति भिर्थी बी चुकी र्थीी और स्वीकृ ति प्रदान की जा चुकी र्थीी। लेविकन पेंशन विनयमों की विनयम संख्या 22 को ध्यान में रखकर उच्च न्यायालय ने म व्यj विकया विक, कमचारी ने 31.3.2001 को 19 वर्ष 10 महीने से ज्यादा की सेवाएं पूण कर ली र्थीी। इसत्तिलए विनयम 22 क े खंड 1 का प्रर्थीम भाग प्रयोज्य नहीं है। आगे खंड (a) का ीसरा भाग इसत्तिलए प्रयोज्य नहीं है, विक उसने 10 वर्ष की सेवा पूण कर ली र्थीी। लेविकन 60 वर्ष की आयु पूण नहीं की र्थीी। कमचारी का मामला विनयम 22 क े खंड (a) क े दूसरे विहस्से क े अं ग आ ा र्थीा, जो विकसी सदस्य को पेंशन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्राZ करने योग्य बना ा र्थीा, यविद विकसी कमचारी ने 1.11.1993 को बैंक की सेवा को 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा को पूण कर त्तिलया है और 58 वर्ष की आयु का हो गया है। कमचारी ने जनवरी 2001 में विवद्यमान पेंशन विनयमों क े ह आवेदन विकया र्थीा। वैकच्छिल्पक रूप से यविद कोई कमचारी 1.11.1993 को या उसक े पश्चा बैंक की सेवा में है, 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूण करने पर और 58 वर्ष की आयु प्राZ होने पर पेंशन का हकदार होगा। इस प्रकार उसने विनयम 22 क े खंड 1 क े विवभाग क े विद्व ीय भाग क े श को पूरा विकया, क्योंविक वह 11.11.1993 को बैंक की सेवा में र्थीा और 58 वर्ष की आयु पूण कर चुका र्थीा और 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा दे चुका र्थीा। इसत्तिलए विनयम 22 क े ह वह पेंशन और अवकाश क े वार्निर्षक नगरीकरण बकाया का 9% ब्याज क े सार्थी बकाया का हकदार र्थीा।
12. बैंक की ओर से यह कहा गया विक वीआरएस 2000 में उपबं र्थीा विक प्रासंविगक ति भिर्थी अर्थीा 31.3.2001 पर एसबीआई पेंशन विनति विनयमों क े ह पेंशन प्रदान की जानी र्थीी। दूसरे शब्दों में, यविद कमचारी पेंशन विनयमों क े ह पेंशन का हकदार र्थीा ना विक अन्यर्थीा। वर्ष 1986 में पेंशन विनयम क े विनयम 22 (1)में उपबं जोड़ा गया र्थीा द्नुरूप स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI से संबंति सभी मामलों में 20 वर्ष की सेवा अवति पूण करने पर पेंशन प्रदान की जानी र्थीी। एसबीआई वीआरएस का चयन करने वाले कमचारी विनयम 22 (i)(c) से शासिस होंगे क्योंविक यह स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े अं ग आ ा है। विनयम 22(iii) क े अं ग कोई सदस्य सिजसे खंड 22 (i)(c) क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अं ग सेवाविनवृI होने की अनुमति दी गई है, आनुपाति क पेंशन का हकदार होगा जोविक 20 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा क े पूण होने पर होगी । अह ा खंड 3 का पेंशन की अनुज्ञविZ से कोई लेना-देना नहीं है। आगे यह माना गया विक वे कमचारी जो 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूण कर चुक े हैं और 60 वर्ष की आयु क े हैं, पेंशन क े हकदार हैं जबविक वीआरएस क े अं ग कमचारी 15 वर्ष की अवति पूण होने पर पेंशन नहीं पाएंगे और उसक े त्तिलए 20 वर्षw की सेवा आवश्यक र्थीी, कमचारिरयों का क विक यह विवभेदकारी होगा, गल आ ार पर विनभर है। एसबीआई पेंशन विनयमों या एसबीआई वीआरएस को कोई चुनौ ी नहीं दी गई है। बैंक ने आरक्षण नीति क े ह 60 वर्ष की आयु प्राZ होने पर पेंशन योग्य सेवा अवति 10 वर्ष होने का उपबं विकया। बैंक देर से आने वाले जैसे भू पूव सैविनकों, जो सशस्त्र बलों में काय करने क े बाद बैंक में सेवा प्रारंभ कर े हैं,को विनयुj कर ा है सिजनकी सेवाविनवृत्तिI की अायु प्राZ करने क े पूव मात्र 10 वर्ष की सेवा बची हो ी है। ऐसे विवभिशष्ट श्रेणी क े कमचारिरयों को ही लाभ देने क े त्तिलए ही 60 वर्ष की सेवाविनवृत्तिI आयु प्राZ होने पर 10 वर्ष की सेवा अवति का उपबं विनयम 22(i)(a) में विकया गया।
13. अपीलार्थी.गण ने आगे कहा है विक 20 वर्ष की अवति का प्राव ान स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े मामलों में विकया गया है ाविक यह सुविनतिश्च विकया जा सक े विक ऐसे कमचारी सिजनक े प्रभिशक्षण में बैंक ने काफी न खच विकया है, वे सेवाविनवृत्तिI लेने से पहले पयाZ अवति क काय करें। यह बैंक द्वारा अपनाए जाने वाली एक समान नीति है । वर्ष 2002 में विवविनयमन 28 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संशोति विकया गया सिजससे 15 वर्ष की सेवा अवति का प्राव ान विकया गया। यह उन कमचारिरयों पर लागू हो ा है जो बैंक कमचारी पेंशन विवविनयमन, 1995 से शासिस हो े हैं । ये विवविनयमन एसबीआई कमचारिरयों पर लागू नहीं हो े हैं क्योंविक एसबीआई पेंशन विनयम उन्हें शासिस कर ा है। एसबीआई कमचारी भविवष्य विनति, ग्रेEयुटी और विनयमों क े ह 20 वर्ष की सेवा पूण करने पर पेंशन क े हकदार हो े हैं। इस प्रकार एसबीआई क े कमचारिरयों की अन्य राष्ट्रीयक ृ बैंकों क े कमचारिरयों क े सार्थी ुलना नहीं हो सक ी। बैंक द्वारा 11.01.2000 विदनांविक स्पष्टीकरण का भी अवलंब त्तिलया गया है । अब 19 वर्ष से अति क बी चुक े हैं और उन सभी लोगों, जो 1.4.2001 की ति भिर्थी से सेवाविनवृI हुए, को पेंशन देना बैंक पर भारी विवIीय भार डालेगा।
14. कमचारीगण की ओर से यह कहा गया है विक उच्च न्यायालय द्वारा विदया गया विनणय उपयुj है अपीलों में हस् क्षेप क े त्तिलए कोई मामला नहीं बन ा। वीआरएस का सार 15 वर्ष की सेवा पूण होने पर पेंशन की अनुज्ञविZ और अन्य लाभ र्थीे । एक बार एसबीआई क े क ें द्रीय बोड द्वारा योजना क े अनुमोविद और अंगीक ृ हो जाने क े पश्चा कमचारिरयों क े विवरुद्ध स्पष्टीकरण नहीं विदया जा सक ा। स्पष्टीकरण का अर्थी संशो न रूपां रण या बोड द्वारा यर्थीा अनुमोविद और अंगीक ृ वीआरएस योजना का विनरस् ीकरण नहीं र्थीा । 1995 क े पेंशन विवविनयमन में संशो न सावजविनक क्षेत्र क े अन्य बैंकों द्वारा भू लक्षी प्रभाव से 2002 में विकया गया र्थीा। हालांविक योजना 2000mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2001 में चलायी और कायाच्छिन्व की गयी र्थीी। हालांविक 1995 क े विवविनयमन को संशोति करने से पहले वीआरएस योजना क े त्तिलए लाभ को विवस् ारिर कर विदया गया र्थीा । एसबीआई ने योजना को पूरी रीक े से अंगीक ृ विकया और 20 वर्ष की अह ा का उपबं करने वाला पेंशन विनयम 22 क े वल उन्हीं मामलों में लागू हो ा है जहां कमचारी सामान्य ौर पर यर्थीाच्छिस्र्थीति 10 वर्ष या 20 वर्ष पूण होने पर सेवाविनवृI ले े हैं। 15 वर्ष की सेवा पूण होने पर अह ा और लाभ का उपबं करने वाली विवविनर्निदष्ट योजना में वीआरएस त्तिलया गया र्थीा जो विक संपन्न अनुबं का विहस्सा र्थीा । बैंक इसकी श c बदलने क े त्तिलए स्व ंत्र नहीं र्थीा। यविद बैंक क े क को स्वीकार विकया जा ा है ो एक ऐसी च्छिस्र्थीति उत्पन्न हो जाएगी विक वे कमचारी जो सेवाविनवृत्तिI की आयु प्राZ कर चुक े हैं वीआरएस लेने क े सक्षम वीआरएस लेने क े हकदार हो े। बैंक ने कमचारिरयों को ोखा विदया है और यह काय उतिच नहीं कहा जा सक ा। एक बार कोई प्रस् ाव स्वीकृ हो गया और उसक े बाद विनयमों को संशोति करना या 31. 3. 2000 क विनयमों को संशोति न करना एसबीआई द्वारा शविj क े प्रयोग पर विनभर र्थीा सिजसका प्रभाव पेंशन से वंतिच करना हो सक ा र्थीा जबविक प्रस् ाव को वापस लेने का विवकल्प भी उपलब् नहीं र्थीा क्योंविक यह सेवा का अच्छिन् म विदन र्थीा। विनयम 22 संशोति विकया गया र्थीा वह भी भू लक्षी प्रभाव से। इस प्रकार वह कमचारी जो अन्य सेवाओं से सेवाविनवृI होने क े पश्चा काय आरंभ विकए हैं, 58 वर्ष की आयु पूण कर चुक े हैं, और 1. 11. 1993 को रोजगार में र्थीे, पेंशन क े हकदार र्थीे । उन्हें पेंशन क े लाभ से भी वंतिच कर विदया गया है जो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अन्यर्थीा उन्हें उपलब् हो ा। यविद पेंशन नहीं दी जानी र्थीी ो मात्र अनुग्रह राभिश पाने क े त्तिलए पेंशन Fोड़ देना उनक े त्तिलए लाभ का सौदा नहीं र्थीा। विनयम को संशोति करना, यविद ऐसा करना आवश्यक र्थीा ो, एसबीआई का दातियत्व र्थीा। अन्यर्थीा भी विनयम क े अनुसार दी जाने वाली 'पेंशन' पद का अर्थी र्थीा विक 15 वर्ष की सेवा पूण करने वाले कमचारिरयों, जो सक ु लर और वीआरएस योजना में विवविनर्निदष्ट लाभों को विदए जाने क े त्तिलए अह र्थीे, आनुपाति क पेंशन दी जाए। 11. 1. 2000 को जारी विकया गया स्पष्टीकरण क े वल वीआरएस योजना क े प्राव ान और विनयम की विवद्यमान च्छिस्र्थीति को दर्भिश कर ा र्थीा। इसका प्रभाव विकसी भी रूप में लाभों से वंतिच करना नहीं हो सक ा र्थीा जो विक 15 वर्ष की स्र्थीाई पेंशन योग्य सेवा अवति पूण करने पर कमचारिरयों को विमला र्थीा। एक ओर, सिजन कमचारिरयों ने दस साल क सेवा की और सेवाविनवृत्तिI की आयु प्राZ की, वे पेंशन क े हकदार र्थीे और 15 साल क सेवा प्रदान करने वाले एक स्र्थीायी कमचारी को उसी से वंतिच करने क े त्तिलए, प्रति भेदभावपूण, अनुतिच और मनमाना होगा। एक बार जब यह योजना जारी हुई और अनुमोविद हो गई, ो बैंक भार क े संविव ान क े अनुEFेद 12 क े दायरे में राज्य होने क े ना े, इसक े त्तिलए भेदभाव करने और गल रीक े से काय करने की अनुमति नहीं होगी। वीआरएस ने एक स्व ंत्र अनुबं का गठन विकया और बैंक पर बाध्यकारी र्थीा। यह लाभ पात्र कमचारिरयों से नहीं त्तिलया जा सक ा र्थीा सिजन्होंने नए कौशल को शाविमल करने क े सार्थी-सार्थी कायबल को युविjसंग बनाने क े त्तिलए बैंक द्वारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वीआरएस स्वीकार विकया र्थीा। इस प्रकार, योग्य ा से परे होने वाली अपील, बखास् गी क े लायक है।
15. मुख्य प्रश्न यह है विक क्या एसबीआई क े क ें द्रीय बोड द्वारा अनुमोविद और अपनाई गई योजना क े ह, स्र्थीायी सेवा क े 15 साल पूरे होने पर कमचारिरयों क े त्तिलए पेंशन स्वीकाय है। संबंति सवाल यह है विक क्या कमचारिरयों को योजना की आवश्यक श w क े विवपरी गल और मनमाने ढंग से पेंशन क े लाभ से वंतिच विकया गया है।
16. सबसे पहले, पैक े ज की प्रक ृ ति पर विवचार करना आवश्यक है, सिजसे एसबीआई क े क ें द्रीय विनदेशक मंडल द्वारा विदनांक 27.12.2000 की अपनी बैठक में प्रस् ाव में स्वीकार कर त्तिलया र्थीा। जैसा विक पहले ही उल्लेख विकया गया है, कायबल को युविjसंग बनाने क े त्तिलए अभ्यास विकया गया र्थीा क्योंविक यह महसूस विकया गया र्थीा विक क्योंविक यह महसूस विकया गया र्थीा विक बैंक आवश्यक ा से अति क कमचारिरयों से युj र्थीे। आईबीए ने सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों का सामना करने वाले मुद्दों क े बारे में एसबीआई को सलाह दी। एसबीआई क े क ें द्रीय विनदेशक मंडल को सौंपे गए ज्ञापन में, विनम्नत्तिलत्तिख थ्यों का उल्लेख विकया गया र्थीा विक योजना को सही रीक े से अपनाये जाने और जनशविj योजना की आवश्यक ा है: "आईबीए क े पास उपलब् आँकड़े ब ा े हैं विक सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों में 43% कमचारीगण 46+ आयुवग में हैं, और क े वल 12% 25-35 आयुवग mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में हैं। इस पैटन क े बैंकों क े त्तिलए गति शील ा, प्रभिशक्षण, कौशल क े विवकास और उच्च स् र क े पदों क े त्तिलए पदारोहण की योजनाओं क े संदभ में गंभीर विनविह ार्थी हैं। यह, जहां भी मौजूद है, अति क जनशविj क े सार्थी विमलकर नए कौशल को शाविमल करने और उतिच क ै रिरयर की प्रगति क े रास् े में आएगा। सविमति ने एक स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना शुरू करने की सिसफारिरश की है जो बैंकों को अपने मानव संसा नों को अनुक ू त्तिल करने और अपनी व्यावसातियक रणनीति को ध्यान में रख े हुए एक सं ुत्तिल आयु और कौशल प्रोफ़ाइल प्राZ करने क े अपने प्रयास में सहाय ा करेगी। आईबीए ने सलाह दी है विक भार सरकार ने इस बा से अवग कराया है विक उन्हें स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना को अपनाने और लागू करने क े त्तिलए विनदेशक क े प्रस् ावों क े अपने संबंति बोडw क े समक्ष रखने पर कोई आपत्तिI नहीं है। यह सलाह दी गई है विक बैंक बोड की स्वीक ृ ति प्राZ करने क े बाद योजना को अपना सक े हैं और इसे सही रीक े से लागू कर सक े हैं. ” (प्रभाव वर्ति ) '' a) विवदेशी बैंकों और नए विनजी क्षेत्र क े बैंकों क े सापेक्ष बैंक की उच्च स्र्थीापना लाग चिंच ा का विवर्षय है। बैंक में क ु ल खचw क े त्तिलए कमचारिरयों क े खचw का प्रति श क्रमशः विवदेशी बैंकों और नए विनजी क्षेत्र क े बैंकों क े त्तिलए
7.66 और 3.04 क े प्रति श क े मुकाबले 21.85 है। यहाँ क विक यविद हम इसे अन्य सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों क े सार्थी ुलना करें, ो भी हमारा अनुपा प्रति क ू ल है। d) बड़ी संख्या में शाखाओं, जनशविj क े लेखाकरण और अन्य कायw क े कम्प्यूटरीकरण क े सार्थी, जो पुस् कों क े सं ुलन क े त्तिलए आवश्यक र्थीे, अब अति शेर्ष प्रदान विकया जा ा है। यह इन शाखाओं में जनशविj को युविjसंग बनाने की अत्यावश्यक ा को इंविग कर ा है। जहां हमने इन शाखाओं में कमचारिरयों क े उपयोगी पुनर्निवकास क े त्तिलए भिशफ्ट बैंकिंकग और सZविदवसीय बैंकिंकग क े माध्यम से कदम उठाए हैं वहीं अभी भी इस क्षेत्र में सु ार की गुंजाइश है। इनमें से अति कांश शाखाएँ महानगरीय और शहरी क ें द्र में च्छिस्र्थी हैं। संयोग से, स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजनाओं क े संबं में अन्य बैंकों क े अनुभव से प ा चल ा है विक इन क ें द्रों से अति क म संख्या में आवेदन प्राZ हुए हैं। f) 46+ आयु वग क े सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों में 43% प्रति श कमचारिरयों क े औस क े विनविमI इस आयु वग क े 47% कमचारी हैं। इसमें से 1/5 वां 56 और उससे अति क आयु वग में हैं। इसे सी े शब्दों में कहें, ो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 21,824 कमचारी सेवाविनवृत्तिI की आयु क पहुंचेंगे और माच 2005 क सेवाविनवृI होंगे। उपयुj कारकों क े प्रकाश में, यह देखा जाएगा विक बैंक की जनशविj संख्या और ैना ी में आगामी वर्षw में प्रमुख परिरव न से गुजरना होगा। इसक े अति रिरj, बैंक क े विवभिभन्न प्रकार क े व्यवसाय और बैंकिंकग क्षेत्र में इसकी विवशेर्ष भूविमका को देख े हुए, मात्रात्मक मापदंडों पर अत्यति क जोर देना अनुतिच होगा। जनशविj आयोजना पर एक दृविष्टकोण पेपर अनुलग्नक 'ए' में रखा गया है। जनशविj विनयोजन क े विवभिभन्न पहलुओं पर विवचार कर े हुए, हमारे दृविष्टकोण में स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना को भार ीय स्टेट बैंक में जनशविj को अति कार देने क े त्तिलए एक मध्यम उपकरण क े रूप में विनयोसिज विकया जाना चाविहए। " पूव j क े प्रकाश में, यह स्पष्ट है विक वीआरएस योजना को आवश्यक ा से अति क कमचारिरयों को कम करने क े त्तिलए एक उपकरण क े रूप में ैयार विकया गया र्थीा। क ें द्रीय बोड को सौंपे गए ज्ञापन में विनम्नत्तिलत्तिख महत्वपूण पहलू शाविमल र्थीे: "उपयुj को ध्यान में रख े हुए, आईबीए क े विदशाविनदcश और अन्य बैंकों से प्राZ प्रति पुविष्ट, 'एसबीआई स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना (एसबीआई वीआरएस)' का प्रारूप ैयार विकया जा ा है और अनुलग्नक-'बी' में अनुमोदन क े त्तिलए रखा जा ा है. यह उन कमचारिरयों क े त्तिलए एसबीआई वीआरएस शुरू करने का प्रस् ाव है, सिजन्होने विदनांक 31-12-2000 क 40 वर्ष की आयु पूरी कर ली है अर्थीवा 15 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, जो विक आईबीए द्वारा अवग और भार सरकार अनुमोविद की गई है। आईबीए योजना क े संदभ में, बैंक की सविमति विकसी अन्य श्रेणी को अयोग्य क े रूप में विनर्निदष्ट कर सक े हैं। हम विनगरानी और संरक्षण कमचारी-वग को बाहर करने का प्रस् ाव रख े हैं क्योंविक इन पदों को कम नहीं विकया जा सक ा है। हम योजना से अत्यति क क ु शल और योग्य कमचारिरयों को बाहर करने का भी प्रस् ाव रख े हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एसबीआई वीआरएस प्रक ृ ति में स्वैच्छिEFक होगा। योजना क े ह सेवाविनवृत्तिI लेने का विनणय क े वल कमचारी क े पास है। प्रबं न योजना क े ह स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े अनुरो को स्वीकार करने या न करने क े त्तिलए विववेक को बनाए रखेगा। हमें यह सुविनतिश्च करना होगा विक एक ओर, हमारे बैंक को कमचारिरयों की शविj क े अति कारों द्वारा लाभाच्छिन्व विकया जाए, दूसरी ओर, बहु बड़ी संख्या में कमचारिरयों का कोई भी अचानक पलायन बैंक क े सामान्य संचालन को अच्छिस्र्थीर नहीं कर ा है। योजना की आकर्षक विवशेर्ष ाओं पर विवचार कर े हुए, अनुग्रह राभिश, इत्याविद क े संदभ में, बड़ी संख्या में आवेदन अपेतिक्ष हैं। हालांविक, बैंक को अपनी आवश्यक ाओं क े अनुसार बविहवाह को विनयंवित्र करना होगा। इस उद्देश्य की पूर्ति क े त्तिलए यह आवश्यक होगा विक बैंक क े प्रबं में यह विववेकाति कार बनाए रखा जाए विक प्रत्येक प्रवग क े कमचारिरयों को एसबीआई वीआरएस क े अ ीन सेवाविनवृI होने की अनुज्ञा दी जाए और हम ऐसे विववेकाति कार को बनाए रखने का प्रस् ाव कर े हैं।" (प्रभाव वर्ति ) यह उन कमचारिरयों क े त्तिलए वीआरएस प्रस् ु करने का प्रस् ाव र्थीा, सिजन्होंने 31.12.2000 को भार सरकार द्वारा अनुमोविद और आईबीए द्वारा अवग कराया गया र्थीा 15 साल की सेवा पूरी कर ली र्थीी। इसत्तिलए, यह इस बा को महत्व दे ा है विक आईबीए योजना क े संदभ में सिजसे अनुमोविद और संप्रेविर्ष विकया गया र्थीा, बैंकों की सविमति को विकसी अन्य श्रेणी को अपात्र क े रूप में विनर्निदष्ट करने की अनुमति र्थीी। एसबीआई विनगरानी और संरक्षण कमचारी-वग को बाहर करने क े त्तिलए प्रस् ाविव अपनी आवश्यक ा पर विवचार कर ा है क्योंविक इन पदों को कम नहीं विकया जा सक ा है। योजना से अत्यति क क ु शल और योग्य कमचारिरयों को बाहर करने का भी प्रस् ाव विकया गया र्थीा। क ें द्रीय बोड को सौंपे गए ज्ञापन में विनति परिरव्यय का भी प्रस् ाव विनम्नानुसार है: "विनति परिरव्यय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बैंक क े बीमांकक से प्राZ अनुमान क े अनुसार, यविद 10% कमचारी सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए चुन े हैं ो एसबीआई वीआरएस क े कायान्वयन क े त्तिलए लगभग 2100 करोड़ रुपये की आवश्यक ा होगी। विवश्लेविर्ष विववरण विनम्नानुसार है: अनुग्रह-राभिश 1300.00 करोड़ रु. अवकाश नकदीकरण 180.00 करोड़ रु. उपदान क े त्तिलए अति रिरj प्राव ान 140.00 करोड़ रु. पेंशन क े त्तिलए अति रिरj प्राव ान 480.00 करोड़ रु. (ये अनुमान भार सरकार से स्पष्टीकरण प्राZ करने पर अनुग्रह-राभिश क े प्रयोजन क े त्तिलए 'वे न' क े घटकों क े रूप में परिरव न कर सक ा है) ” पेंशन क े त्तिलए एक प्राव ान विकया गया र्थीा। बैंक ने विकसी भी या सभी खंडों को परिरवर्ति करने, संशोति करने या रद्द करने का अति कार सुरतिक्ष रखा। उप प्रबं विनदेशक और सीडीओ सक्षम प्राति कारी होंगे। योजना क े संशो न क े संबं में प्रासंविगक खंड विनम्नत्तिलत्तिख है: "योजना की ब्दीली बैंक को योजना क े विकसी भी या सभी खंडों को परिरवर्ति करने, संशोति करने या रद्द करने और विकसी भी ारीख से प्रभावी प्रभाव देने का अति कार सुरतिक्ष है। उप प्रबं विनदेशक और सीडीओ इस उद्देश्य क े त्तिलए सक्षम प्राति कारी होंगे। ” सेवाविनवृत्तिI की प्रभावी ति भिर्थी 31.3.2001 र्थीी। प्रासंविगक खंड यहां विनकाला गया है: “सेवाविनवृत्तिI का प्रभावी ति भिर्थी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जबविक एसबीआई वीआरएस कमचारिरयों क े त्तिलए 15 जनवरी 2001 से 31 जनवरी 2001 (दोनों विदन शाविमल) खुला रहेगा, एसबीआईवीआरएस क े ह सेवाविनवृत्तिI 31 माच 2001 से प्रभावी करने का प्रस् ाव है। "
17. विदनांक 31.8.2000 को एसबीआई क े क ें द्रीय बोड को प्रस् ु ज्ञापन में पत्र को संलग्न विकया गया, यह समझने क े त्तिलए भी अत्यं महत्वपूण है विक क ें द्रीय बोड ने क्या स्वीकार विकया र्थीा। आईबीए क े 31.8.2000 विदनांविक क े पत्र का प्रासंविगक भाग यहां अव रिर विकया गया है: “भार सरकार, विवI मंत्रालय (बैंकिंकग तिडवीजन) द्वारा सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों क े मुख्य कायकारी अति कारी को संबोति पत्र DO सं. 11/1 / 99-IR विदनांक 22.05.2000 को आमंवित्र विकया गया है, सिजसमें बैंकों को सूतिच विकया गया है विक वे विवभिभन्न स् रों पर सव त्क ृ ष्ट मानव संसा न अपनाने क े त्तिलए विवस् ृ जनशविj योजना बनाएं ाविक प्रत्येक बैंक की व्यावसातियक रणनीति और आवश्यक ाओं को ध्यान में रखा जा सक े । इस बैठक में विवI मंत्री क े पास 13 जून, 2000 को सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों क े मुख्य कायकारी अति कारिरयों क े सार्थी सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों में मानव संसा न और जनशविj योजना की समीक्षा की गई और इस संबं में सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों से जुड़े मुद्दों की जांच करने और उपयुj उपचारात्मक उपायों का सुझाव देने क े त्तिलए एक सविमति का गठन विकया गया। " "इस च्छिस्र्थीति को परिरच्छिस्र्थीति यों की मांग को इस ात्कात्तिलक ा क े सार्थी उपचारिर विकया है विक, सविमति ने सरकार क े समक्ष दो योजनाएं, नाम ः, विवश्रामावकाश और स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना रखी हैं, जो मानव संसा न को अनुक ू त्तिल करने और प्राZ करने क े त्तिलए उनकी सं ुत्तिल आयु और कौशल क े सार्थी व्यावसातियक रणनीति यों को ध्यान में रख े हुए बैंकों की सहाय ा करेगी। दोनों योजनाओं की मुख्य विवशेर्ष ाएं अनुबं में दी गई हैं। आईबीए ने अपने पत्र विदनांक 13 जुलाई 2000 क े माध्यम से, अपने सविमति यों द्वारा विवचार और अंगीकार करने क े त्तिलए योजनाओं को बैंकों को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रसारिर करने क े त्तिलए सरकार से कोई आपत्तिI नहीं मांगी है। सरकार ने हमें अवग कराया है विक उन्हें उपरोj योजनाओं को अपनाने और लागू करने क े त्तिलए अपने संबंति विनदेशक मंडल क े समक्ष दो योजनाओं को रखने से कोई आपत्तिI नहीं है। यह सलाह दी गई है विक बैंक अपने सविमति की स्वीक ृ ति प्राZ करने और उन्हें सही रीक े से लागू करने क े बाद अनुलग्नक में दी गई योजनाओं की आवश्यक विवशेर्ष ाओं क े आ ार पर विवश्राम और स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए इन योजनाओं को अपना सक े हैं। " (प्रभाव वर्ति ) "बैंकों से विनम्नत्तिलत्तिख का विवशेर्ष नोट लेने का भी अनुरो विकया जा ा है:
1. आयकर अति विनयम की ारा 10 (10 सी) विनयम 2BA क े सार्थी पढ़ी जा ी है।
2. विवI अति विनयम 2000 द्वारा लाए गए संशो नों क े अनुसार, जब क बैंक ारा10 (10 सी) क े ह बनाए गए विनयमों का अनुपालन कर ा है, ब क मुख्य आयुj या आयकर क े महाविनदेशक से पूव अनुमोदन, जैसा भी मामला हो, वीआरएस क े त्तिलए आवश्यक नहीं है।
3. अनुग्रह राभिश क े 5 लाख या ऐसी सीमा जो आयकर अति क े अं ग विवविह हो, से अति क होने पर आयकर स्रो पर ही काटा जायेगा।
4. न्यून म पात्र सेवा पर पहुंचने क े त्तिलए क े वल पूण वर्षw की सेवा की गणना की जाएगी। इसक े अ ीन, Fह महीने और उससे अति क की सेवा क े अंश को अनुग्रह राभिश की गणना क े उद्देश्य से एक वर्ष क े रूप में माना जाएगा।
5. वीआरएस क े त्तिलए आवेदन को अस्वीकार करने या वीआरएस क े त्तिलए अयोग्य क े रूप में वग.क ृ कमचारिरयों क े मामले में अपवाद बनाने क े त्तिलए समझदारी का प्रयोग कर े समय, विनणय उन कमचारिरयों क े बीच भेदभावपूण नहीं होना चाविहए सिजन्हें समान रूप से रखा गया है और इसक े कारणों को दज विकया जाना चाविहए।
6. विवभिभन्न श्रेभिणयों/वग क े कमचारी क े त्तिलए वीआरएस स्वीकार करने क े त्तिलए सक्षम प्राति कारी को विनदेशक मंडल द्वारा स्पष्ट रूप से प्रति पाविद विकया जाना चाविहए।
7. योजना को प्रभावी करने से पहले बैंकों को श्रम कानूनों क े ह जरूर ों का अनुपालन सुविनतिश्च करना चाविहए. '' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
18. आईबीए क े पत्र विदनांविक 31.8.2000 में वीआरएस योजना की मुख्य विवशेर्ष ाओं को स्पष्ट विकया गया है विक 15 साल की सेवा वाले सभी स्र्थीायी कमचारी सेवाविनवृI होने क े पात्र र्थीे। पात्र व्यविjयों को भी विनर्निदष्ट विकया गया है। अयोग्य श w में, अनुबं में यह उल्लेख विकया गया र्थीा विक ऐसे कमचारी सेवा क े प्रत्येक पूण वर्ष क े त्तिलए 60 विदनों क े वे न की अनुग्रह-राभिश क े हकदार होंगे अर्थीवा महीनों की सेवा की संख्या, जो भी कम हो, क े त्तिलए वे न Fोड़ विदया गया है। ग्रेEयुटी, पेंशन क े रूपां रिर मूल्य सविह पेंशन, भविवष्य विनति की ओर बैंकों का योगदान, और F ु ट्टी नकदीकरण विनयमानुसार अन्य लाभ स्वीकाय र्थीे। इस प्रकार, योजना ऐसे सभी कमचारिरयों को पेंशन अनुदान करने की र्थीी, सिजन्होंने योजना में विनर्निदष्ट 15 साल की सेवा और अन्य लाभों को पूरा करने पर वीआरएस का विवकल्प चुना र्थीा। भार सरकार, विवI मंत्रालय, आर्भिर्थीक मामलों क े विवभाग, (बैंकिंकग प्रभाग), विक इसने आईबीए को विदनांक 29.8.2000 क े अनुमोदन पत्र की सूचना दी, इसे एसबीआई को भी भेजा गया र्थीा, उसी का अव रण यहां विकया गया है:
2. आईबीए द्वारा भेजा गया मसौदा प्रारूप परिरपत्र र्थीोड़ा संशोति कर विदया गया है। संशोति मसौदे की प्रति इसक े सार्थी संलग्न है।
3. यह अनुरो विकया जा ा है विक बैंकों को जारी परिरपत्र की एक प्रति अभिभलेख क े त्तिलए बैंकिंकग प्रभाग को भेजी जाए। भवदीय हस् ाक्षरिर /- (यू.पी. सिंसह) विनदेशक (आईआर) "
19. विदनांक 27.12.2000 को विवचार क े त्तिलए प्रस् ु कायक्रम संकल्प क े सार्थी क ें द्रीय एसबीआई बोड को विनम्नानुसार अव रिर विकये जा े हैं: "कायक्रम सं. 3 जन-शविj योजना और एसबीआई स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना (एसबीआई वीआरएस) विदनांक 26 विदसंबर 2000 को उप प्रबं विनदेशक और कॉप रेट विवकास अति कारी द्वारा प्रस् ु ज्ञापन की सिसफारिरश की, सिजसमें कहा गया र्थीा विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसमें ब ाए गए कारणों क े त्तिलए, ज्ञापन में विनविह प्रस् ावों क े त्तिलए भी अनुमोदन विकया जाना चाविहए। ज्ञापन क े अनुलग्नक 'बी' में योजना में विनविह प्राव ानों क े संदभ में जनशविj विनयोजन और एसबीआईवीआरएस की शुरुआ क े त्तिलए घोविर्ष दृविष्टकोण को अपनाना। ज्ञापन की प्रति यां बैठक में उपच्छिस्र्थी विनदेशकों क े समक्ष रखी गई र्थीीं। ''अनुमोविद '' (सील)
20. ज्ञापन क े अनुलग्नक ‘बी’ में वीआरएस शाविमल र्थीा। आईबीए क े विदशाविनदcशों को देख े हुए वीआरएस ैयार विकया गया र्थीा। योजना क े खंड 5/6 क े ह योजना में विनर्निदष्ट भू पूव और अन्य लाभों की अनुग्रह राभिश यहां प्रस् ु की गई है: “5. अनुग्रहात्मक राभिश: एसबीआई वीआरएस क े ह सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए अनुरो करने वाले स्टाफ सदस्यों को सक्षम प्राति कारी द्वारा स्वीकार कर त्तिलया गया है, उन्हें सेवा क े प्रत्येक पूण वर्ष क े त्तिलए 60 विदनों क े वे न (वे न प्लस स्र्थीाई वे न वृतिद्ध प्लस महंगाई भIा) की अनुग्रह राभिश का भुग ान विकया जाएगा (इस प्रयोजन क े त्तिलए Fह महीने और उससे अति क की सेवा क े अंश को एक वर्ष क े रूप में त्तिलया जाएगा और दनुसार Fह महीने से कम की सेवा को नहीं विगना जाएगा) या महीने की सेवा की संख्या, जो भी कम हो, क े त्तिलए वे न Fोड़ विदया जा ा है। एक महीने क े अंश, यविद कोई हो, को नजरअंदाज कर विदया जाएगा। 'प्रासंविगक ति भिर्थी' का अर्थी है वह ारीख सिजस पर कमचारी योजना क े ह स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए अनुरो की स्वीक ृ ति क े परिरणामस्वरूप बैंक की स्वीक ृ ति क े परिरणामस्वरूप बैंक की सेवा में रहना बंद कर दे ा है. अनुग्रह राभिश की गणना क े त्तिलए, 60 विदनों की योजना में उसिल्लत्तिख वे न को 2 महीने क े वे न (उस महीने क े त्तिलए वे न क े संदभ में सिजसमें कमचारी को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI पर सेवा से मुj विकया जा ा है ) क े बराबर त्तिलया जाना है। आयकर 5.00 लाख रुपये से अति क की अनुग्रह-राभिश क े स्रो पर काटा जाएगा अर्थीवा इस रह की अन्य उच्च म संबंति ति भिर्थी को जैसा आयकर अति विनयम क े ह विन ारिर हो। लाभ विनम्नानुसार र्थीे: “6. अन्य लाभ (क) सुसंग ारीख को विवद्यमान अनुदेशों क े अ ीन संदेय उपदान। (ख) सुसंग ति भिर्थी को भार ीय स्टेट बैंक कमचारी भविवष्य विनति विनयम क े अनुसार भविवष्य विनति अभिभदाय। (ग) भार ीय स्टेट बैंक कमचारी पेंशन विनति विनयम क े अनुसार सुसंग ारीख को पेंशन (पेंशन क े परिरवर्ति मूल्य सविह )। (घ) सुसंग ति भिर्थी पर, लागू होने पर, विवशेर्षाति कार अवकाश क े सं ुलन का नकदीकरण। (ड़) अति कारिरयों/अन्य को दी गई अनुक ू ल सुविव ाओं जैसे आवास, टेलीफोन, कार, आवास ऋण की विनरं र ा आविद को अति कारिरयों क े त्तिलए विवस् ारिर विकया जाएगा। सक्षम प्राति कारी क े विववेक से, व मान विव रण क े अनुसार एसबीआई वीआरएस क े ह अन्य सेवाविनवृI होने वाले। हालांविक, भौति क सुविव ाओं क े अव ारण क े ऐसे मामलों में, कमचारी द्वारा सुविव ा क े समपण क े बाद ही देय राभिश का 50% जारी विकया जाएगा। हालांविक, इस राभिश क े त्तिलए कोई ब्याज का भुग ान नहीं विकया जाएगा। एसबीआई वीआरएस क े ह सेवाविनवृत्तिI की ति भिर्थी से पूव अन्य सभी बकाया ऋणों /अविग्रमों को चुकाया जाना होगा, सिजसमें विवफल रहने पर कमचारी को देय अनुग्रह-राभिश और अन्य सावति लाभों की राभिश बकाया ऋणों/अविग्रमों क े त्तिलए विवविनयोसिज की जाएगी; और शेर्ष क े वल कमचारी को देय होगा।''
21. सबसे महत्वपूण रूप से, आईबीए की योजना 15 साल की सेवा पूरी होने पर पेंशन प्रदान करने क े त्तिलए र्थीी, जो विक विदनांक 27.12.2000 को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सविमति द्वारा स्वीकार की गई। योजना क े खंड 6 में विनर्निदष्ट पेंशन को पेंशन विनति विनयमों क े संदभ में काम विकया जाना र्थीा, सिजसमें पेंशन का परिरवर्ति मूल्य भी शाविमल र्थीा। एसबीआई द्वारा अपनाए गए वीआरएस में यह उल्लेख नहीं विकया गया र्थीा विक 15 वर्ष पूरे होने पर व्यविj पेंशन क े लाभ का हकदार नहीं होगा। दूसरी ओर, भार सरकार द्वारा अनुमोविद आईबीए क े प्रस् ाव को एसबीआई द्वारा पूण ः स्वीकार विकया गया र्थीा। जब आईबीए क े प्रस् ावों क े मानदंड में, आवश्यक विवशेर्ष ा यह र्थीी विक एक कमचारी 15 साल की सेवा पूरी होने पर पेंशन पाने का हकदार र्थीा। विनयमों क े संदभ में "पेंशन" पद का अर्थी पेंशन विनयमों क े विनयम 23 में प्रदान की गई गणना की श w क े अनुसार 15 वर्ष की सेवा पूरी करने पर आनुपाति क पेंशन होगी। वीआरएस एक स्व ंत्र अनुबं है और सिजस पृष्ठभूविम में इसे चलाई गई र्थीी, 15 साल की सेवा पूरी होने पर पेंशन वीआरएस 2000 की योजना का एक अविनवाय विहस्सा र्थीी, जैसा विक सरकार द्वारा अनुमोविद और आईबीए द्वारा चलाई गई र्थीी और सभी बैंकों द्वारा अपनाया गया र्थीा, और पेंशन विनयम दनुसार संशोति विकए जाने र्थीे।
22. भार सरकार ने आईबीए को 1995 क े विवविनयमों क े विवविनयमन 29 में संशो न करने का सुझाव विदया ाविक कमचारी पेंशन का लाभ न खो सक ें, आईबीए ौर- रीकों पर काम कर सक ा है और पेंशन विवविनयमों में विकए जाने क े त्तिलए आवश्यक संशो नों का सुझाव दे सक ा है। यह सुविनतिश्च mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने क े त्तिलए विक कमचारिरयों को पेंशन का लाभ विमल ा है। भार सरकार क े विदनांक 5.9.2000 क े पत्र को यहां अव रिर विकया गया है:
23. एसबीआई ने योजना क े ह प्रस् ु आवेदन को वापस लेने क े संबं में विदनांक 10.1.2001 को एक परिरपत्र जारी विकया। यह विनणय त्तिलया गया विक कमचारी त्तिलत्तिख अनुरो करक े विदनांक 15.2.2001 को या उससे पहले आवेदन वापस ले सक ा है।
24. विदनांक 15.1.2001 को स्पष्टीकरण जारी विकया गया र्थीा, जो विक 15 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूरी करने पर कमचारी पेंशन लाभ क े हकदार होंगे अर्थीवा नहीं। विनम्नत्तिलत्तिख एक प्रासंविगक विहस्सा है: “3. क्या कमचारी, प्रासंविगक ति भिर्थी (एसबीआई वीआरएस क े ह सेवाविनवृत्तिI की ारीख) क े अनुसार पेंशनभोगी सेवा क े 15 वर्ष पूरे करने वाले कमचारी पेंशन लाभ क े हकदार होंगे या नहीं? इस संबं में, हम एक स्टाफ परिरपत्र पत्र संख्या CDO/81 विदनांक 30/12/2000 क े आवरण क े ह अग्रेविर्ष योजना क े प्रस् र 6(सी) क े संदभ में आमंवित्र कर े हैं। एसबीआई वीआरएस क े ह सेवाविनवृI होने वाले कमचारी को पेंशन का भुग ान संबंति ति भिर्थी (पेंशन क े परिरवर्ति मूल्य सविह ) पर भार ीय स्टेट बैंक कमचारी पेंशन विनति विनयमों द्वारा शासिस होगा। हालांविक, मौजूदा विनयमों क े अनुसार, सिजन कमचारिरयों ने पेंशन सेवा क े 20 साल पूरे नहीं विकए हैं, वे पेंशन क े त्तिलए पात्र नहीं हैं। ” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उIर से यह स्पष्ट है विक स्टाफ परिरपत्र विदनांक 30.12.2000 को दोहराया गया र्थीा। वीआरएस क े ह सेवाविनवृI होने वाले कमचारी को पेंशन का भुग ान प्रासंविगक ति भिर्थी, यानी विदनांक 31.3.2001 पर विनयमों द्वारा शासिस विकया जाएगा। उसी समय, मौजूदा विनयम की च्छिस्र्थीति से संक े विदया गया र्थीा विक सिजन कमचारिरयों ने 20 साल की पेंशन सेवा पूरी नहीं की र्थीी, वे पेंशन क े त्तिलए पात्र नहीं र्थीे। यह स्पष्ट नहीं विकया गया र्थीा विक योजना क े प्रस् र 6(सी) का अर्थी और उद्देश्य क्या र्थीा। यह उल्लेख नहीं विकया गया र्थीा विक कमचारी भार सरकार द्वारा अनुमोविद और आईबीए द्वारा चलाई गई और एसबीआई क े क ें द्रीय बोड द्वारा अपनायी गई योजना क े अनुसार 15 वर्षw की सेवा पर पेंशन का हकदार नहीं होगा। म क े रूप में उपरोj स्पष्टीकरण, बोड द्वारा पारिर वीआरएस या प्रस् ाव क े विकसी भी खंड में परिरव न, संशो न अर्थीवा रद्द करने का कारण नहीं कहा जा सक ा है, न ो ऐसा कहा ही गया र्थीा। यह ब ाना आवश्यक र्थीा विक 15 वर्ष की सेवा पूण करने पर, कमचारिरयों को पेंशन का भुग ान नहीं विकया जाएगा। मौजूदा विनयम की च्छिस्र्थीति सभी को ज्ञा र्थीी, जबविक योजना को 15 वर्ष की सेवा पूण करने पर पेंशन प्रदान करने क े त्तिलए ैयार विकया गया र्थीा।
25. एसबीआई क े पेंशन विनयमों क े विनयम 22 क े रूप में यह विदनांक 09.03.2001 क मौजूद है और इसमें संशोति अव रण इस प्रकार हैं: मौजूदा विनयम mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “22 (i) एक सदस्य बैंक की सेवा से सेवाविनवृI होने पर इन विनयमों क े ह पेंशन का हकदार होगा - (क) 20 वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा बश c उन्होंने 50 वर्ष की आयु प्राZ कर ली है अर्थीवा यविद वह विदनांक 01.11.93 को या उसक े बाद बैंक की सेवा में है, ो दस वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा बश c विक उसने 58 वर्ष की आयु प्राZ कर ली हो। (ख) उस आयु क े विनरपेक्ष बीस वर्ष पूण होने क े पश्चा ् यविद वह अनुमोविद तिचविकत्सा प्रमाणपत्र द्वारा अपनी सेवाविनवृत्तिI मंजूर करने क े त्तिलए सक्षम प्राति कारी को सं ुष्ट करेगा या अन्यर्थीा विक वह आगे सविक्रय सेवा क े त्तिलए असमर्थी है; (ग) बीस वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा ्, उस आयु क े विनरपेक्ष जो वह त्तिलत्तिख रूप में अपने अनुरो पर प्राZ कर चुका है; (घ) पच्चीस वर्ष की पेंशन योग्य सेवा क े बाद। संशोति विनयम “22 (i) एक सदस्य बैंक की सेवा से सेवाविनवृI होने पर इन विनयमों क े ह पेंशन का हकदार होगा- (क) 20 वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा बश c उन्होंने 50 वर्ष की आयु प्राZ कर ली है अर्थीवा यविद वह विदनांक 01.11.93 को या उसक े बाद बैंक की सेवा में है, ो दस वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा बश c विक उसने 58 वर्ष की आयु प्राZ कर ली हो अर्थीवा यविद वह 22. 05. 1998 को या उसक े बाद बैंक की सेवा में है। दस वर्ष पूण होने क े पश्चा, पेंशनभोगी सेवा प्रदान करने क े त्तिलए वह साठ वर्ष की आयु प्राZ कर चुका है। (ख) बीस वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा ्, उस आयु क े विनरपेक्ष जो वह प्राZ कर चुका है, यविद वह अनुमोविद तिचविकत्सा प्रमाणपत्र द्वारा अपनी सेवाविनवृत्तिI मंजूर करने क े त्तिलए सक्षम प्राति कारी को सं ुष्ट करेगा या अन्यर्थीा विक वह आगे सविक्रय सेवा क े त्तिलए असमर्थी है; (ग) बीस वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा, भले ही वह त्तिलत्तिख रूप में अपने अनुरो पर प्राZ की गई हो; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (घ) पच्चीस वर्ष की पेंशनभोगी सेवा क े पशचा."
26. विनयम 22 से यह स्पष्ट है विक पेंशन एक कमचारी क े त्तिलए इस प्रकार स्वीकाय है:
1) 20 वर्ष की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा बश c विक वह 50 वर्ष की आयु प्राZ कर चुका हो; या 2) यविद वह विदनांक 01.11.1993 को बैंक की सेवा में है, 10 वर्ष की पेंशनभोगी सेवा प्रदान की है, उसक े पश्चा ् बश c विक उसने 50 वर्ष की आयु प्राZ कर ली हो; या 3) यविद वह विदनांक 22.05.1998 को या उसक े बाद 10 साल की पेंशनभोगी सेवा पूण करने क े पश्चा बैंक की सेवा में है, बश c विक वह 60 वर्ष की आयु प्राZ कर चुका हो।
27. विनयम 22 (1) (सी) को पेंशन फ ं ड विनयमों में शाविमल विकया गया सिजसमें सेवा क े 20 साल पूरे होने पर बैंक ने वीआरएस शुरू करने क े त्तिलए अन्य बा ों क े सार्थी विनणय त्तिलया र्थीा जो 20.09.1986 से प्रभाव में आया। असंशोति विनयम 22 (i) (ए) में सेवाविनवृत्तिI की सामान्य आयु 58 वर्ष विन ारिर की गइ र्थीी। इसक े बाद, 22. 5. 1998 को सरकार द्वारा जारी विदशा विनदcशों क े अनुसार, सेवाविनवृत्तिI की आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई। दनुसार, विनयम 22 (i) (ए) को 30. 1. 2001 को संशोति करने का प्रस् ाव विकया गया र्थीा, और 58 वर्षw क े बजाय, 60 वर्ष की सेवाविनवृत्तिI की आयु को शाविमल विकया जाना र्थीा। 28. 5. 1998 को, एसबीआई क े क ें द्रीय बोड की कायकारी सविमति ने संबंति सेवा विनयमों क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लंविब संशो न में 60 वर्ष की आयु को अपनाया। संशो न को 31. 3. 2001 को अति सूतिच विकया गया और 30.10.2001 को एसबीआई कमचारी पेंशन फ ं ड क े ट्रच्छिस्टयों द्वारा अनुमोविद विकया गया।
28. भार सरकार क े विनणय क े द्वारा राष्ट्रीयक ृ बैंकों से संबंति वीआरएस की इस रह की योजना को लागू कर विदया र्थीा। पंजाब और सिंस बैंक में, इसे 12.01.2000 से 31.12.2000 क; पंजाब नेशनल बैंक 1.11.2000 से 30.11.2000 क; बैंक ऑफ इंतिडया: 15.11.2000 से 14.12.2000 क; यूविनयन बैंक ऑफ इंतिडया: 01.12.2000 से 31.12.2000 क; यूनाइटेड बैंक ऑफ इंतिडया: 01.01.2001 से 31.01.2001 क जारी रहना र्थीा। एसबीआई में, उj योजना को क ें द्रीय बोड ने 27.12.2000 को अपनाया र्थीा।
29. भार ीय स्टेट बैंक का गठन एसबीआई अति विनयम, 1955 क े ह विकया गया र्थीा। राष्ट्रीयक ृ बैंकों को बैंकिंकग क ं पनी (उपक्रमों का अति ग्रहण और अं रण) अति विनयम, 1970 क े अन् ग ले त्तिलया गया र्थीा। अति विनयम 1970 क े ह, पंजाब नेशनल बैंक (कमचारी) पेंशन विवविनयम, 1995 को बनाया गया। विवविनयमन 28, सेवाविनवृत्तिI की आयु प्राZ करने पर पेंशन प्रदान कर ा है, और विवविनयमन 29 द्वारा 20 साल की अहकारी सेवा पूरी करने क े बाद स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI पर पेंशन प्रदान कर ा है। उपयुj बैंकों क े त्तिलए विवविनयमन 29 (5) लागू हो ा है, बश c विक विवविनयमन क े ह स्वेEFा से सेवाविनवृI होने वाले कमचारी की अहकारी सेवा को पांच साल से अति क mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की अवति क नही बढ़ाया जाएगा, इस श क े अ ीन विक ऐसे कमचारी द्वारा प्रदान की गई क ु ल अहकारी सेवा 33 वर्ष से अति क नहीं होगी।
30. वी.आर.एस. 2000, बैंक ऑफ इंतिडया और अन्य बनाम ओ. पी. स्वणकार और अन्य, (2003) 2 एस. सी. सी. 721 क े वाद में विवविनयम, 1995 क े विवविनयम 29 (5) क े संदभ में इस न्यायालय क े समक्ष विवचार क े त्तिलए आया र्थीा। न्यायालय ने यह अभिभविन ारिर विकया विक यह स्कीम संविवदात्मक है और 15 वर्ष की सेवा पूरी होने पर पेंशन संबं ी लाभ क े त्तिलए उपबं की गई है। एच.ई.सी. स्वैच्छिEFक सेवाविनवृI कमचारी कल्याण सोसाइटी बनाम हैवी इंजीविनयरिंरग कारपोरेशन त्तिलविमटेड, (2006) 3 एस. सी. 708 वाद क े विनणय का अनुसरण विकया गया
31. योजना की प्रस् ावना क े कारण, विवविनयम 1995 क े विवविनयम 28 में संशो न करने का प्रस् ाव विदया गया र्थीा। इसे 1.9.2000 से पूवव्यापी प्रभाव क े सार्थी वर्ष 2002 में संशोति विकया गया र्थीा। संशो न क े माध्यम से, विवविनयमन 28 में इस प्रकार एक परन् ुक डाला गया है:
mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रयोजन क े त्तिलए विवरतिच की जाए, न्यून म 15 वर्ष की अवति की ामील करने क े पश्चा ् दी जाएगी। " (प्रभाव वर्ति )
32. सिजन कमचारिरयों ने 2000/2001 में विनर्निदष्ट अवति क े भी र 15 साल की सेवा पूरी करने पर वी.आर.एस. का विवकल्प चुना र्थीा, उन्हें पेंशन का लाभ विदया गया र्थीा। 2002 में पूवव्यापी प्रभाव क े सार्थी विवविनयमों में संशो न विकया गया। हालांविक, विवविनयमन 29 (5) क े ह लाभ को उन लोगों/कमचारिरयों क नहीं बढ़ाया गया र्थीा सिजन्होंने 5 साल की अहकारी सेवा जोड़कर 20 साल की सेवा पूरी की र्थीी। उj बैंकों क े त्तिलए लागू विवविनयम 29 (1) और 29 (5) यहां विदए गए हैं: “29. स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI पर पेंशन– (1) विकसी भी समय 1 नवंबर, 1993 को या उसक े पश्चा ्, विकसी कमचारी द्वारा अहकारी सेवा क े बीस वर्ष पूरे विकए जाने क े पश्चा ् वह सेवा से सेवाविनवृI होने वाले विनयुविj प्राति कारी को त्तिलत्तिख रूप में कम से कम ीन मास की अवति से पहले सूचना देकर: बश c विक यह उप -विवविनयमन उस कमचारी पर लागू नहीं होगा जो प्रति विनयुविj पर है या विवदेश में अध्ययन अवकाश पर है जब क विक उसे स्र्थीानां रिर नहीं विकया जा ा है या भार में वापस नहीं विकया जा ा है, उसने भार में पद का प्रभार विफर से शुरू कर विदया है और कम से कम एक वर्ष की अवति की सेवा की है: आगे कहा गया है विक यह उप-विवविनयमन उस कमचारी पर लागू नहीं होगा जो एक स्वायI विनकाय या एक सावजविनक क्षेत्र क े उपक्रम या क ं पनी या संस्र्थीा या विनकाय में स्र्थीायी रूप से अवशोविर्ष होने क े त्तिलए सेवा से सेवाविनवृत्तिI चाह ा है, चाहे वह विनगविम हो या नहीं, सिजस समय वह प्रति विनयुविj पर है स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI की मांग कर ा है: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बश c विक यह उप -विवविनयमन उस कमचारी पर लागू नहीं होगा, सिजसे विवविनयमन 2 क े खंड (1) क े अनुसार सेवाविनवृI माना जा ा है। x x x (5) इस विवविनयम क े अ ीन स्वैच्छिEFक रूप से सेवाविनवृI होने वाले कमचारी की अहक सेवा में, पांच वर्ष से अनति क की अवति क, इस श क े अ ीन वृतिद्ध की जाएगी विक ऐसे कमचारी द्वारा दी गइ कु ल अहक सेवा विकसी भी दशा में 33 वर्ष से अति क नहीं होगी और वह उसे सेवाविनवृत्तिI की ारीख से आगे नहीं ले जाएगी।
33. विवचारा ीन योजना ओ.पी. स्वणकार और अन्य(उपरोj) में विवचार क े त्तिलए आई र्थीी। सिजसमें एसबीआई CA सं. 356165/2002 में अपीलक ाओं में से एक र्थीा, इस न्यायालय द्वारा एक सामान्य विनणय द्वारा अपील का फ ै सला विकया गया र्थीा। यह अंविक विकया गया विक पेंशन की गणना क े त्तिलए विनयमों क े अनुसार पेंशन का संदभ विदया गया र्थीा, और सिजन कमचारिरयों ने 15 साल की सेवा पूरी की र्थीी, उन्हें पेंशन और अन्य लाभों क े सार्थी वीआरएस 2000 का लाभ विदया जाना र्थीा। आईबीए ने पेंशन विवविनयमों, 1995 में संशो न क े त्तिलए सभी सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों को 11.12.2000 को एक पत्र त्तिलखा। आईबीए ने उल्लेख विकया विक कमचारिरयों को वीआरएस 2000 क े अनुसार पेंशन का भुग ान विकया जाना र्थीा। वे उसी क े अनुपा क े अनुसार पेशंन क े पात्र होंगे, जैसे की विवविनयमन 28 में संशो न विकया गया हो। सरकार और विनदेशक मंडल की विवभिशष्ट मंजूरी क े सार्थी बनाई गई विवशेर्ष/ दर्थी योजना क े ह 15 वर्ष की सेवा प्रदान करने क े बाद स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए आवेदन करने वाले कमचारी प्रदान की गई सेवा की अवति क े त्तिलए उसी क े अनुपा पेंशन क े त्तिलए पात्र होंगे, जैसे विक वे उस ति भिर्थी को सेवाविनवृत्तिI की आयु प्राZ करने पर सेवाविनवृI होने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वाले र्थीे। पत्र ने स्पष्ट कर विदया विक भार सरकार ने सेवा क े 15 साल पूरे होने पर विनयमों क े अनुसार पेंशन को मंजूरी दी। योजना स्र्थीायी सेवा क े 15 साल पूरे होने पर सेवाविनवृI होने वाले कमचारिरयों को पेंशन का लाभ देने क े त्तिलए र्थीी, और भार सरकार यह भी चाह ी र्थीी विक आईबीए ने बैंकों को उनक े पेंशन विनयमों में आवश्यक संशो न करने की सलाह दे। जैसा विक परिरभिशष्ट में उसिल्लत्तिख है। इस प्रकार, वीआरएस योजना का सार पेंशनभोगी सेवा क े 15 साल पूरे होने पर विनयमों क े अनुसार अनुपाति क पेंशन का लाभ विदया गया र्थीा।
34. यह स्पष्ट है विक इस योजना का आ ार नए कायबल को शाविमल करने की जरूर र्थीी, सिजनमें आ ुविनक प्रौद्योविगकी, विवदेशी मुद्रा, उद्यम पूंजी, ई- कॉमस, न प्रबं न, आविद जैसे नए कौशल का पयाZ ज्ञान हो।, विवI मंत्रालय ने अपने विदनांविक 22. 5. 2000 पत्र में ब ाया। बैंकों को ओवरस्टॉफ़ विकया गया र्थीा और प्रभावी प्रबं न और जनशविj योजना क े त्तिलए, कायबल और कौशल को कसंग बनाने क े त्तिलए वीआरएस शुरू करने की वांFनीय ा महसूस की गई र्थीी। इसत्तिलए क ें द्र सरकार द्वारा एक सविमति का गठन विकया गया र्थीा। सविमति की रिरपोट क े अनुसरण में, वीआरएस को फ्र े म करने क े त्तिलए एक नीति ग विनणय त्तिलया गया। योजना उन कमचारिरयों पर लागू हो ी है, सिजन्होंने आवेदन की ारीख को 15 साल की सेवा पूरी की। उसमें विनर्निदष्ट कमचारी अन्यर्थीा विनयमों/विवविनयमों क े ह 15 साल पूरे होने पर स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI लेने क े त्तिलए पात्र नहीं र्थीे। अन्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बैंकों द्वारा जारी योजना क े ह, एसबीआई वीआरएस क े रूप में समान राह स्वीकाय र्थीा। पंजाब नेशनल बैंक की योजना यहां प्रस् ु की गई है: “7. X X X " अनुग्रहात्मक राभिश योजना क े ह स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI की मांग करने वाला कमचारी प्रस् र (ए) या (बी) में नीचे उसिल्लत्तिख अनुग्रह राभिश का हकदार होगा, जो भी कम हो: (क) सेवा क े प्रत्येक पूण वर्ष क े त्तिलए 60 विदन का वे न (वे न जमा ठहराव वे न और विवशेर्ष वे न और महंगाई राह ); अर्थीवा (ख) शेर्ष सेवा क े महीनों की सं. क े त्तिलए वे न; अन्य लाभ अर्थीवा योजना क े ह स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI पाने वाले कमचारी इस योजना क े ऊपर प्रस् र 6 में उसिल्लत्तिख भू पूव राभिश क े अलावा विनम्नत्तिलत्तिख लाभों क े त्तिलए पात्र होंगे: (i) यर्थीाच्छिस्र्थीति, उपदान संदाय अति विनयम, 1972 क े अनसुार उपदान या सेवा विनयमों क े अ ीन संदेय उपदान क े अनुसार उपदान या जैसी च्छिस्र्थी ी हो उसी क े अनुसार या व मान विवविनयमों क े अनुसार। (ii)(ए) पीएनबी (कमचारी) पेंशन विवविनयम, 1995 क े अनुसार पेंशन (पेंशन का विन ारिर मूल्य सविह )। अर्थीवा (बी) मौजूदा विनयमों क े अनुसार पीएफ क े प्रति बैंक का योगदान। (iii) मौजूदा विनयमों क े अनुसार F ु ट्टी लेना. (प्रभाव वर्ति ) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
35. एस.बी.आई. वी.आर.एस. सविह सभी योजनाओं में पात्र ा मानदंड, स्पष्ट रूप से प्रदान कर ा है विक 15 वर्ष की सेवा और विवशेर्ष आयु पूरी करने वाले कमचारी आवेदन करने क े त्तिलए पात्र होंगे। सिजन लाभों क े वे हकदार र्थीे, उन्हें समाZ कर विदया गया र्थीा। अन्य बैंकों में, पेंशन, पेंशन विवविनयमन, 1995 क े अनुसार र्थीी। इस प्रकार, एक कमचारी की पात्र ा पर, योजना में उपलब् राह की स्वीकाय ा अर्थीा ्,अनुग्रह की राभिश और पेंशन सविह अन्य लाभों का भुग ान योजना क े अनुसार विकया जाना र्थीा. अन्यर्थीा, 15 साल की सेवा क े सार्थी एक कमचारी को सेवाविनवृI करने का कोई उद्देश्य नहीं र्थीा क्योंविक वे सभी राष्ट्रीयक ृ बैंकों और एसबीआई में 20 साल की सेवा समाZ होने से पहले विनयमों क े अनुसार सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए पात्र नहीं र्थीे। सभी वीआरएस में विनयमों/विवविनयमों क े अनुसार पेंशन की स्वीकाय ा का संदभ विदया गया र्थीा, सिजसका अर्थी है विक आनुपाति क पेंशन प्रदान विकए विनयमों क े अनुसार स्वीकाय होगी, इस न्यायालय ने इसे ओपी स्वणकार (उपरोj) क े वाद में अंविक विकया है, इस प्रकार। “49. विनर्निववाद रूप से एक प्रस् ाव व्यविjयों क े एक समूह को सामूविहक रूप से बनाया जा सक ा है जो व्यविjग रूप से स्वीकार करने में सक्षम है, लेविकन सिजस प्रश्न को प्रस् ु विकया जाना है और उIर विदया जाना है वह यह है विक क्या सेवा न्यायशास्त्र क े संबं में है; त्काल मामले में भार ीय संविवदा अति विनयम क े सिसद्धां लागू होंगे। यह '' बैंकों '' का विवभिशष्ट मामला है विक ये योजनाएं संविवदा क े जरिरए चलाई गई र्थीीं। इसमें कोई वै ाविनक आकार नहीं है। विवविनयमों क े ह बनाए गए पेंशन योजना का संदभ पेंशन की गणना क े त्तिलए बनाया गया र्थीा। ” (प्रभाव वर्ति ) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
36. आे.पी. स्वणकार (उपरोj), इस न्यायालय ने यह देखा विक कमचारिरयों ने वीआरएस क े त्तिलए आवेदन करने क े त्तिलए कायवाही की होगी, भले ही उन्होंने क े वल 15 साल की सेवा पूरी कर ली हो, जो विक एक अहकारी सेवा नहीं र्थीी, बैंक क े पेंशन विवविनयमों क े ह, वे वीआरएस योजना क े संदभ में लाभ क े हकदार होंगे। न्यायालय ने इस प्रकार अभिभविन ारिर विकया है:- "89. इसक े अलावा, बड़ी सं. में कमचारिरयों ने अपना प्रस् ाव क े वल भी वापस ले त्तिलया है जब उपयुj विवविनयम 28 में एक परं ुक जोड़ने की मांग की गई हो। इस योजना क े संदभ में, विवविनयम 29 क े उपविवविनयमन (4) का लाभ प्राZ करने क े त्तिलए अपेतिक्ष कमचारी उससे वंतिच हो जाएंगे। इस विववाद में यह नहीं है विक पेंशन प्राZ करने की अहक अवति 20 वर्ष र्थीी। विवविनयमन 29 में विनविह कानूनी विवविनयमन क े संदभ में क े वल 20 वर्ष पूरा होने पर, कोई कमचारी स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI का विवकल्प चुन सक ा है और उसक े संदभ में, वह उसमें विवविनर्निदष्ट लाभों का हकदार होगा। उj विवविनयमों का विवविनर्निदष्ट ः संगणना क े प्रयोजन क े त्तिलए उल्लेख विकया गया है सिजसमें अहक अवति की ओर 5 वर्ष की F ू ट का उपबं कर े हुए विवविनयम 29 क े उपविवविनयमन (4) का आह्वान सच्छिम्मत्तिल होगा। कमचारी इस आ ार पर आगे बढ़े होंगे विक इस थ्य क े बावजूद विक उन्होंने क े वल 15 वर्ष की सेवा प्रदान की है, जो विवविनयमों क े अ ीन अहक सेवा नहीं है, वे स्कीम क े विनबं नानुसार पेंशन संबं ी लाभों क े हकदार होंगे। विवविनयम 28 पेंशन क े परं ुक का पुरःस्र्थीापन करक े पूण पेंशन क े स्र्थीान पर अनुपाति क बनाने की मांग की गई र्थीी (प्रभाव वर्ति )
37. ओपी स्वणकार और अन्य(उपरोj) क े वाद में यह अभिभविन ारिर विकया गया विक यह स्कीम कानूनी विवविनयमों का भाग नहीं र्थीी यह अनुबं क े दायरे में र्थीा। ऐसा होने क े कारण, क ें द्र सरकार को संसद क े समक्ष रखने की आवश्यक ा नहीं र्थीी; और दूसरी बा, यविद वही एक विवविनयमन र्थीा, ो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विन ारिर विनयम क े वल विनदcभिशका है और अविनवाय नहीं है। इस न्यायालय ने जन मोहम्मद नूर मोहम्मद बागबन बनाम गुजरा राज्य ए.आइ.आर 1966 (2) एससी 386 आैर एटलस साइविकल इण्डसविट्रज त्तिलविम. बनाम हरिरयाणा राज्य क े विनणयों पर अवलम्ब त्तिलया और यह अभिभर्निन ारिर विकया विक इस योजना को विवति में अनुतिच नहीं कहा जा सक ा है, इस प्रकार: “124. सबसे पहले, योजना वै ाविनक विवविनयमन का विहस्सा नहीं है। यह अनुबं क े दायरे में र्थीा। ऐसा होने क े कारण, क ें द्र सरकार क े त्तिलए संसद क े समक्ष इसे रखना आवश्यक नहीं र्थीा।
125. दूसरे, भले ही वही एक विवविनयमन र्थीा, प्रति पादन करने का विनयम क े वल एक विनदcभिशका है और अविनवाय नहीं है।
126. जन मोहम्मद वाद ए.आइ.आर. 1966 एससी 385 में विवति विनम्नत्तिलत्तिख शब्दों में वर्भिण है: (ए. आई. आर. पी.पी. 39495, प्रस् र
18) “18. अं में, 1939 क े बॉम्बे अति विनयम 22 क े ह बनाए गए विनयमों की वै ा को रद्द कर विदया गया। बॉम्बे अति विनयम की ारा 26 (1) द्वारा, राज्य सरकार अति विनयम क े प्राव ानों को पूरा करने क े उद्देश्य से विनयम बनाने क े त्तिलए अति क ृ र्थीी। यह उप ारा (5) द्वारा उपबंति विकया गया र्थीा विक ारा 26 क े अ ीन बनाए गए विनयम संसद् क े प्रत्येक सदन क े समक्ष रखे जाएंगे इसक े बाद क े सत्र में विव ातियका और उसक े बाद एक प्रस् ाव द्वारा संशोति या रद्द विकया जा सक ा है सिजसमें दोनों सदनों सहमति व्यj कर े हैं, और इस रह क े विनयम, आति कारिरक राजपत्र में अति सूचना क े बाद, दनुसार संशोति या रद्द विकए गए माना जाएगा। यातिचकाक ा द्वारा यह आग्रह विकया गया र्थीा विक 1939 क े बॉम्बे अति विनयम 22 क े ह बनाए गए विनयमों को पहले सत्र में विव ान सभा या विव ान परिरर्षद क े समक्ष नहीं रखा गया र्थीा, और इसत्तिलए उनकी कोई कानूनी वै ा नहीं र्थीी। 1939 क े अति विनयम 22 क े ह बंबई की प्रां ीय सरकार द्वारा 1941 में बनाए गए र्थीे। उस समय, सत्र में कोई विव ानमंडल नहीं र्थीा, विद्व ीय विवश्वयुद्ध से उत्पन्न आपा काल क े दौरान विव ानमंडल को विनलंविब mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर विदया गया र्थीा। बॉम्बे लेसिजस्लेविटव असेंबली का अति वेशन 1941 क े बाद पहली बार 20.5.1946 में आयोसिज विकया गया र्थीा और 24.5.1946 में इस सत्र का सत्रावसान हुआ। बॉम्बे लेसिजस्लेविटव असेंबली का दूसरा अति वेशन 15.7.1946 को आयोसिज विकया गया र्थीा और 3.9.1946 को बंबई लेसिजस्लेविटव काउंसिसल का और 291946 को विव ान सभा क े समक्ष र्थीा 13.9.1946 को विव ान परिरर्षद क े समक्ष दूसरे सत्र में विव ान सभा पटल पर विनयम रखे गए र्थीे। 1939 क े बॉम्बे अति विनयम 22 की ारा 26 (5) में कहा गया है विक विनयमों ने क े वल उस ारीख से वै ा हासिसल की है सिजस विदन उन्हें विव ानमंडल क े सदनों क े समक्ष रखा गया र्थीा। विनयम उस ारीख से वै हैं सिजस विदन वे ारा 26 (1) क े ह बनाए गए हैं। यह सही है विक विव ानमंडल ने यह विवविह विकया है विक विनयम विव ान-मंडल क े सदनों क े समक्ष रखे जाएंगे किंक ु विव ान-मंडल क े सदनों क े समक्ष विनयम रखने में असफल ा विनयमों की विवति मान्य ा को प्रभाविव नहीं कर ी, क े वल इसत्तिलए विक उन्हें विव ानमंडल क े सदनों क े समक्ष नहीं रखा गया है. यह मान े हुए विक विव ानमंडल क े सदनों क े समक्ष विनयमों को रखने में विवफल ा क े कारण ारा 26 क े उप ारा (5) क े प्राव ानों का उल्लंघन विकया गया र्थीा, हमारा विवचार है विक ारा 26 की उप ारा (5) उन उद्देश्यों क े संबं में है सिजनक े त्तिलए यह विकया गया है, और सिजस संदभ में यह हो ा है, उसे अविनवाय नहीं माना जा सक ा है। विनयम वर्ष 1941 से प्रव न में रहे हैं और 1964 क े गुजरा अति विनयम 20 की ारा 64 क े आ ार पर वे प्रव न में बने रहे हैं
127. एटलस साइविकल इंडस्ट्रीज (1979) 2 एससीसी 196 क े वाद में इसी म को दोहराया गया है
128. इसत्तिलए, हमारी राय है विक विवचारा ीन योजना को विवति में अनुतिच नहीं कहा जा सक ा है। ”
38. न्यायालय ने वापसी क े प्राव ान क े बारे मेंअभिभर्निन ारिर विकया विक योजना क े प्रासंविगक खंड ने एक लागू करने योग्य अति कार बनाया है यविद स्टेट बैंक अपनी नीति का पालन करने में विवफल रहा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
39. हमारी राय में, एसबीआई वीआरएस में अनुज्ञेय लाभों क े सन्दभ में, जैसे पेंशन, पेंशन विनयमों क े अनुसार होगा, जो पेंशन की संगणना क े प्रयोजन क े त्तिलए र्थीा। यह स्कीम क े पढ़ने से स्पष्ट है विक ओ. पी. स्वणकार और अन्य (उपरोj) क े प्रस् र 49 में उसिल्लत्तिख कमचारिरयों क े त्तिलए आनुपाति क पेंशन अनुज्ञेय र्थीी। राष्ट्रीयक ृ बैंकों की योजनाओं में भी इसी प्रकार की अभिभव्यविj का प्रयोग विकया गया र्थीा। इस न्यायालय ने स्कीम में यह उल्लेख विकया है विक पेंशन की संगणना का अर्थी विनयमों क े अनुसार पेंशन है। एसबीआई पेंशन विनयम क े विनयम 23 में विकसी पेंशन की संगणना का सूत्र विदया गया है।
40. यह अत्यं महत्व का विवर्षय है विक क े न्द्रीय बोड ने अपनी बैठक में ारीख 27.12.2000 को “संयुj ज्ञापन में अं र्निवष्ट प्रस् ावों क े त्तिलए” अनुमोदन प्रदान विकया र्थीा ज्ञापन क े स्पष्ट अवलोकन से यह स्पष्ट हो जा ा है विक 31.8.2000 विदनांविक आईबीए क े पत्र को क े न्द्रीय बोड को प्रस् ु ज्ञापन क े भाग क े रूप में संलग्न विकया गया र्थीा। ज्ञापन में, यह उल्लेख विकया गया र्थीा विक "भार सरकार ने यह सूतिच विकया र्थीा विक उन्हें स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI योजना को अपनाने और कायाच्छिन्व करने क े त्तिलए विनदेशक क े प्रस् ावों क े अपने-अपने बोड क े समक्ष रखने पर बैंकों को कोई आपत्तिI नहीं है। इसने सलाह दी विक बैंक अपने बोड का अनुमोदन प्राZ करने क े पश्चा ् और इसे “सत्यपूण” में लागू कर सक े हैं। ज्ञापन में यह भी विनविह है विक सेवा क े 15 वर्ष पूरे करने वाले कमचारी भार सरकार द्वारा अनुमोविद और आईबीए द्वारा प्रदI वीआरएस क े विह ाति कारी र्थीे। भार सरकार द्वारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुमोदन और आईबीए द्वारा दी गई योजना, में 15 वर्ष की सेवा पूरी होने पर पेंशन क े लाभ प्रदान करना र्थीा, यह योजना की एक अविनवाय श र्थीी। परिरभिशष्ट, 'जो ज्ञापन का विहस्सा र्थीा' ने अन्य बा ों क े सार्थी पेंशन का लाभ प्रदान विकया, सिजसमें 20 वर्ष की सेवा की अवति पूरी होने बाद पेंशन में संगभिण मूल्य भी शाविमल है। एक बार एसबीआई ने ज्ञापन में विनविह प्रस् ावों को स्वीकार कर त्तिलया, जब हम विबना श अनुमोविद विकए गए र्थीे, ो यह स्पष्ट हो गया और संदेह से परे हो गया विक वीआरएस (परिरभिशष्ट बी) में विनयमों क े अनुसार पेंशन का लाभ प्रदान करने की अभिभव्यविj क े रूप में क े वल एक कमचारी द्वारा प्रदान की गई योग्य ा सेवा पर या 15 वर्ष से अति क सेवा क े त्तिलए आनुपाति क पेंशन लाभ प्रदान करने क े त्तिलए र्थीा।
41. आईबीए ने बैंकों को विनयमों में संशो न करने की सलाह दी। भार सरकार, विवI मंत्रालय ने भी विनयमों में संशो न करने क े त्तिलए बैंक को विदनांक 5.9.2001 को एक पत्र जारी विकया। विनयमों में संशो न का प्रस् ाव र्थीा। योजना 2000 में लागू होने क े बाद, पंजाब नेशनल बैंक सविह राष्ट्रीयक ृ बैंकों ने 2002 में पूवव्यापी प्रभाव से अपने विनयमों में संशो न विकया। हालाँविक, थ्य यह है विक बैंकिंकग क ं पनी अति विनयम, 1970 द्वारा शासिस बैंकों द्वारा वीआरएस योजनाओं को लागू विकया गया र्थीा, पेंशन का भुग ान करक े, हालांविक प्रासंविगक समय में 20 साल की अहकारी सेवा क े त्तिलए विवविनयमन 1995 क े विवविनयमन 28 को प्रदान विकया गया र्थीा। एक बार भार सरकार द्वारा गविठ सविमति की सिसफारिरशों क े आ ार पर वीआरएस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की एक विवशेर्ष योजना, आईबीए द्वारा ैयार और जारी की गई र्थीी। सभी विनष्पक्ष रूप से, इसे उस रूप में सही रीक े से लागू करने की आवश्यक ा र्थीी सिजसमें इसे 27.12.2000 को एसबीआई क े विनदेशक मंडल द्वारा अनुमोविद और अपनाया गया र्थीा। यविद विनदेशक मंडल की राय र्थीी विक यह योजना उन्हें स्वीकाय नहीं र्थीी, ो वे इसे अस्वीकार कर सक े र्थीे या कह सक े र्थीे विक वे 15 साल की सेवा पूरी होने पर पेंशन का भुग ान करने क े प्रस् ाव को अस्वीकार कर सक े र्थीे जो एक योजना का सार र्थीा बैंक क े कायबल को कम करने और अन्य उद्देश्यों को प्राZ करने क े त्तिलए। बहरहाल, इसक े विवपरी, संकल्प विदनांक 27.12.2000 इंविग कर ा है विक आईबीए/ सरकार क े प्रस् ावों को विबना श अनुमोविद विकया गया र्थीा। इस प्रकार, यविद अन्य बैंकों द्वारा विकए गए पेंशन विनयमों में संशो न करना आवश्यक र्थीा, भार ीय स्टेट बैंक का यह क व्य है विक वह अपने विनयमों में संसो न या ो अन्य बैंकों क े योजना क े पूण या लागू होने क े बाद या वी.आर.एस को प्रभावी करने से पहले करे।
42. यह उल्लेख करना भी महत्वपूण है विक एसबीआई ने सरकार द्वारा अनुमोविद और आई. बी. ए. द्वारा जारी योजना को स्वीकार कर त्तिलया र्थीा यविद एसबीआई ने स्वीकार करने से इनकार कर विदया र्थीा या उसे परिरवर्ति करना चाहा र्थीा ो उसक े त्तिलए यह आवश्यक र्थीा विक वह अपनी योजना क े बारे में भार सरकार की स्वीक ृ ी ले। ारा 49 क े अनुसार, क ें द्र सरकार को विनयम बनाने की शविj है। ारा 50 क ें द्र सरकार की विवविनयम बनाने की शविj से संबंति है। ारा 50 (1) में यह उपबं है विक क े न्द्रीय बोड, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भार ीय रिरजव बैंक से परामश करने क े पश्चा ् और क े न्द्रीय सरकार की पूव मंजूरी से विवविनयम बना सक ा है ारा 50 (2) (ओ) क े ह, राज्य बैंक क े कमचारिरयों क े लाभ क े त्तिलए सेवाविनवृत्तिI पेंशन और अन्य न क े संबं में क ें द्र सरकार की पूव मंजूरी क े सार्थी विवविनयम बनाए जा सक े हैं। ारा 50 (2) (ओ) क े अनुसार: “50 क ें द्रीय बोड की विनयम बनाने की शविj-(1) क ें द्रीय बोड, रिरजव बैंक से परामश करने क े पश्चा ् और क े न्द्रीय सरकार की पूव मंजूरी क े सार्थी [राजपत्र में अति सूचना द्वारा ] उस अति विनयम क े सार्थी असंग नही होना चाविहए आैर उनक े ह ऐसे सभी मामलों क े त्तिलए बनाए गए विनयम, सिजनक े त्तिलए इस अति विनयम क े उन उपबं ों को प्रभावी करने क े प्रयोजन क े त्तिलए उपबं समीचीन है, (2) विवभिशष्ट या और पूवगामी शविj की व्यापक ा पर पूवगामी प्रभाव डाले विबना, ऐसे विवविनयम विनम्नत्तिलत्तिख क े त्तिलए उपबं कर सक ें गे– X X X (आे) स्टेट बैंक या स्टेट बैंक क े कमचारिरयों या ऐसे कमचारिरयों क े आभिश्र ों क े फायदे क े त्तिलए या स्टेट बैंक क े प्रयोजनों क े त्तिलए आैर सेवाविनवृत्तिI भIे,वार्निर्षविकयां आैर एसे विकसी फ ं ड का सिजसक े ह पेशंन देय हो क े त्तिलए सेवाविनवृत्तिI पेंशन की स्र्थीापना आैर रखरखाव करना;]
43. इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक एसबीआई का क ें द्रीय बोड क ें द्र सरकार द्वारा अनुमोविद योजना से अलग नहीं हो सक ा र्थीा, न ही क ें द्र सरकार की मंजूरी क े विबना इसे लागू कर सक ा र्थीा। यविद वह इस योजना को संशोति या परिरवर्ति करना चाह ा र्थीा, जैसा विक भार सरकार द्वारा अनुमोविद है, ो अनुमोदन क े त्तिलए अपनी संशोति योजना को क ें द्र सरकार की स्वीकृ ति लेना र्थीा। भार सरकार की मंजूरी क े विबना वीआरएस की कोई योजना ैयार नहीं की जा सक ी र्थीी। वास् व में, क ें द्रीय बोड ने भार सरकार द्वारा अनुमोविद आईबीए क े प्रस् ाव को स्वीकार कर त्तिलया। यविद एसबीआई का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रुख स्वीकार कर त्तिलया जा ा है, ो इसकी योजना वै हो ी क्योंविक भार सरकार की मंजूरी क े विबना कोई संशो न नहीं विकया जा सक ा र्थीा। वास् व में, ऐसा कोई संशो न नहीं विकया गया र्थीा, जैसा विक ऊपर आयोसिज विकया गया र्थीा।
44. एक बार यह स्कीम एसबीआई को अनुEFेद 12 क े अ ीन राज्य का परिरकरण होने क े कारण अनुमोविद कर विद गयी ो यह न्यायसंग आैर व्यपदेशन क े सिसद्धां से आबद्ध हो ा है विक उसने आईबीए द्वारा जारी ज्ञापन और स्कीम की अं वस् ुओं को स्वीकार कर त्तिलया र्थीा और ऐसे ज्ञापन को, सिजसमें स्र्थीायी पेंशन संबं ी सेवा क े 15 वर्ष देने पर पेंशन का प्रस् ाव अं र्निवष्ट र्थीा, अनुमोविद करने क े आ ार पर आवेदनों को आमंवित्र विकया र्थीा, वह बाद में विनयमों क े आश्रय का दावा करक े या विनयमों में संशो न न करक े या ऐसा स्पष्टीकरण जारी करक े, जो बोड क े संकल्प की भावना क े प्रति क ू ल र्थीा, इन सबका बहाना से अपने दातियत्व से बचा नही जा सक ा है यह क ें द्रीय विनदेशक बोड द्वारा त्तिलए गए विनणय क े कारण पेंशन क े लाभ से कमचारिरयों को वंतिच करने क े त्तिलए एक अनुतिच और अ ार्निकक कारवाई होगी।
45. एसबीआई क ें द्रीय विनदेशक मंडल क े संकल्प द्वारा बाध्य है। यह योजना भार सरकार की मंजूरी क े सार्थी र्थीी और एसबीआई को Fोड़कर सभी बैंकों द्वारा सही अर्थीw में स्वीकार और लागू की गयी र्थीी। कमचारिरयों क े आर्भिर्थीक विह की अवहेलना क े त्तिलए अस्पष्ट स्पष्टीकरण जारी करक े बेह र सौदेबाजी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की शविj होने क े आ ार पर इसे गल रीक े से काय करने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है। स्पष्टीकरण का क ें द्रीय बोड क े संकल्प को विफर से त्तिलखने या सुपरसीचिंडग करने का प्रभाव नहीं र्थीा और न ही एसबीआई क े क ें द्रीय बोड द्वारा पारिर संकल्प में संशो न करने का प्रभाव र्थीा।
46. वीआरएस योजना एसबीआई द्वारा अपनी मज. से नहीं चलायी गई र्थीी। यह एक अभ्यास क े अनुसार र्थीा जो आईबीए द्वारा बैंक में कमचारिरयों क े आयु समूह को देख े हुए, एक नए कौशल की आवश्यक ा, और जनशविj को युविjसंग बनाने क े त्तिलए आ ुविनक प्रौद्योविगकी क े हाल क े घटनाक्रमों क े मद्देनजर विकया गया र्थीा; एक विनणय त्तिलया गया र्थीा। विवशेर्ष उपाय क े रूप में 15 साल की सेवा पूरी करने क े बाद पेंशन प्रदान करने क े त्तिलए सरकार क े स् र पर विनणय त्तिलया गया र्थीा, बैंक इसे उस रीक े से लागू करने क े त्तिलए बाध्य र्थीे या नहीं र्थीे। एसबीआई क े क ें द्रीय विनदेशक मंडल ने वीआरएस योजना में अविनवाय रूप से अन्य लाभों क े सार्थी पेंशन प्रदान नहीं करने क े विकसी भी आरक्षण क े विबना सरकार और आईबीए क े वीआरएस प्रस् ाव को स्वीकार कर त्तिलया। राज्य क े परिरकरण की कारवाई अनुEFेद 14 का अति क्रमण नहीं हो सक ी है इसे मनमाने ढंग से काय करने की अनुमति नहीं दी जा सक ी। अनुEFेद 15 और 16 समान ा प्रदान कर े हैं और भेदभाव क े विवरुद्ध संरक्षण प्रदान कर े हैं।
47. हालांविक उप महाप्रबं क को वीआरएस में संशो न, परिरव न या रद्द करने क े त्तिलए क ें द्रीय विनदेशक मंडल द्वारा अति क ृ विकया गया र्थीा। बाद में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2002 में अन्य बैंकों द्वारा विनयमों में संशो न विकया गया। इस प्रश्न क े उIर में यह नहीं कहा गया र्थीा विक वीआरएस योजना क े ह, 15 साल की अहकारी सेवा प्रदान करने वाला व्यविj पेंशन का हकदार नहीं होगा। न ही यह एसबीआई क े क ें द्रीय बोड क े विदनांविक 27.12.2000 क े संकल्प में कहा गया र्थीा। इसक े अलावा, उप महाप्रबं क ने बोड द्वारा अनुमोविद बा ों पर विवचार विकए विबना अलगाव में वीआरएस योजना की व्याख्या करने की कोभिशश की। बोड क े संकल्प को समझने क े त्तिलए न क े वल योजना बच्छिल्क ज्ञापन को भी एक सार्थी पढ़ा जाना चाविहए। एक बार जब पेंशन प्रदान करने क े आईबीए प्रस् ाव वाले ज्ञापन को पूण रूप से अनुमोविद विकया गया र्थीा, ो विनदेशक मंडल क े अन्यर्थीा स्पष्ट और अस्पष्ट संकल्प को कम करने क े त्तिलए स्पष्टीकरण विकसी भी मूल्य का नहीं हो सक ा है। स्र्थीायी सेवा क े 15 साल पूरे होने पर पेंशन क े त्तिलए कमचारिरयों क े दावे को जो उनका अति कार र्थीा, को विवफल करने क े त्तिलए उप महाप्रबं क क े पास ऐसी कोई व्यापक और मनमानी शविj नहीं र्थीी। उप महाप्रबन् क की कायवाही को संकल्प क े अनुसार नहीं कहा जा सक ा है। पेंशन योजना का सार र्थीा, इससे वंतिच करने को अति क ृ नहीं कहा जा सक ा है, इस रह की कायवाही को क े वल अनुतिच और असम्यक ् र्थीा भार क े संविव ान क े अनुEFेद 14, 16 और 21 क े स्पष्ट या उल्लंघनकारी कहा जा सक ा है।
48. विफर भी एक और पहलू सिजसे अनदेखा नहीं विकया जा सक ा है, वह यह है विक बैंक ने योजना में उल्लेख विकया है विक लाभ विनयम क े अनुसार स्वीकाय होगा जो विनयुविj विदनांक अर्थीा ् 31.3.2001 को लागू हो ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक जब वीआरएस योजना चलाई गई र्थीी, ो यह विनयमों क े संशो न क े अवलोकन में र्थीा जो आईबीए और भार सरकार द्वारा अपने संसूचना विदनांक 5.9.2001 में सुझाया गया र्थीा ाविक कमचारी पेंशन क े लाभ से वंतिच न हों।
49. सवाल यह उठ ा है विक यविद बैंक वीआरएस क े प्रस् ाव को स्वीकार कर ा है, और अपने विनयमों में बदलाव नहीं कर ा है, ो क्या कमचारिरयों को विकसी ऐसी घटना पर पेंशन क े लाभ से वंतिच विकया जा सक ा है सिजस पर उनका कोई विनयंत्रण नहीं र्थीा। यह और क ु F नहीं, बच्छिल्क अनुतिच और मनमाने काय का परिरणाम होगा यविद एसबीआई ने योजना पर काय करने का इरादा नहीं विकया, सिजस पर उसे स्वीकार नहीं विकया जाना चाविहए र्थीा, और एक बार जब उसने वीआरएस को मंजूरी दे दी र्थीी, ो इसे अपने विनयमों का संशो न करना आवश्यक र्थीा, जैसे विक वर्ष 2000 में योजना क े कायाच्छिन्व होने क े बाद वर्ष 2002 में अन्य बैंकों द्वारा विकया गया र्थीा। अन्यर्थीा भी, एक बार जब इसने भार सरकार क े प्रस् ाव को स्वीकार कर त्तिलया, ो यह अनुEFेद 14 और 16 क े प्राव ानों का उल्लंघन होगा, यविद इसे इस आड़ में अपने दातियत्व से बाहर विनकलने की अनुमति दी जाये विक बैंक ने अपने विनयमों में संशो न नहीं विकया या पेंशन मौजूदा विनयमों क े अनुसार स्वीकाय नहीं र्थीी, मुख्य रूप से जब योजना ने 15 साल पूरे होने पर पेंशन क े त्तिलए पात्र ा प्रदान विकया, सिजसने स्व ंत्र संविवदा का गठन विकया। यविद बैंक को विनयम की च्छिस्र्थीति क े कारण योजना से F ु टकारा पाने की अनुमति दी जा ी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है, ो यह योजना स्वयं शून्य और अप्रव नीय हो जाएगी। बैंक एक काल्पविनक रीक े से काय नहीं कर सक ी है, विवशेर्ष रूप से वीआरएस क े ह सेवाविनवृत्तिI क े संबं में जो संविवदात्मक र्थीा और पेंशन क े लाभ से वंतिच र्थीा, उस अति कार से जो कमचारिरयों ने क ें द्रीय विनदेशक मंडल द्वारा पारिर संकल्प और ज्ञापन क े मद्देनजर ज्ञापन और एसबीआई-बीआरएस को अपना े हुए पेंशन प्राZ करने क े त्तिलए अर्जिज विकया गया र्थीा।
50. (ए). संविवदा क े अन् ग अति कारों को अलग नहीं विकया जा सक ा है, और वे न्यायालय द्वारा प्रव नीय हो े हैं। बैंक को पहले व्यपदेशन करने और बाद में अपने दातियत्व से बच विनकलने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है। "दुव्यपदेशन" करना अनुम नहीं है। संविवदा अति विनयम की ारा 19 क े अ ीन जब सहमति प्रपीड़न, कपट या 'दुव्यपदेशन' द्वारा अभिभप्राZ की जा ी है ब व्यभिर्थी पक्षकार क े विवकल्प पर करार शून्यकरणीय है। सेन्ट्रल इनलैण्ड़ वाटर ट्रान्सपोट कॉरपोरेशन त्तिलविमटेड और अन्य बनाम ब्रोजो नार्थी गांगुली और अन्य, (1986) 3 एससीसी 156 में, इस न्यायालय ने सेन्ट्रल इनलैण्ड़ वाटर ट्रान्सपोट कॉरपोरेशन त्तिलविमटेड और उसक े कमचारिरयों क े बीच विनयोजन की संविवदा और विनयमों पर भी विवचार विकया। इस संदभ में, इस प्रकार अवलोकन विकया: “75. भार ीय संविवदा अति विनयम की ारा 19 क े अन् ग, जब विकसी करार में सहमति प्रपीड़न, कपट या दुव्यपदेशन द्वारा प्राZ है, ो उस पक्षकार क े सिजसकी सहमति ऐसे प्राZ की गयी र्थीी, क े विवकल्प पर करार शून्यकरणीय संविवदा है। यह विववाद उIरदा ाओं में से विकसी का भी मामला नहीं है विक उस पर कोई प्रपीड़न विकया गया र्थीा या उस पर कोई कपट या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दुव्यपदेशन विकया गया र्थीा। ारा 19-ए क े अन् ग, जब विकसी करार क े त्तिलए सहमति असम्यक असर द्वारा प्राZ हो ी है, ो उस पक्षकार क े सिजसकी सहमति ऐसे प्राZ की गयी र्थीी, क े विवकल्प पर करार शून्यकरणीय संविवदा हो ी है और न्यायालय इस रह की विकसी भी संविवदा को या ो पूरी रह से अपास् कर सक ा है या यविद पक्षकार जो इससे बचने का हकदार र्थीा, ने इसक े अन् ग कोई लाभ प्राZ विकया है, ो न्यायालय ऐसे विनयमों व श w पर जैसा उतिच समझें, कर सक ा है। ारा 16 की उप ारा (1) विनम्नत्तिलत्तिख रूप में "असम्यक ् असर" को परिरभाविर्ष कर ी है:
16. “असम्यक असर” परिरभाविर्ष - (1) विकसी संविवदा क े बारे में यह कहा जा ा है विक वह “असम्यक असर” से प्रेरिर है जहां पक्षकारों क े बीच चल रहे संबं ऐसे हैं विक एक पक्षकार दूसरे की इEFा पर हावी होने की च्छिस्र्थीति में है और दूसरे पर अनुतिच लाभ अभिभप्राZ करने की उस च्छिस्र्थीति का उपयोग कर ा है।” ारा 16 की उप- ारा (2) क े ाच्छित्वक प्राव ान इस प्रकार हैं: “ (2) विवभिशष्ट रूप से और पूवगामी सिसद्धां की व्यापक ा पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना, विकसी व्यविj को विकसी अन्य की इEFा पर हावी होने की च्छिस्र्थीति में समझा जा ा है– (a) जहां वह अन्य पर एक वास् विवक या स्पष्ट प्राति कार रख ा है.... ” हमें ारा 23 और 24 को Fोड़कर भार ीय संविवदा अति विनयम क े अन्य ाराओं क े सार्थी खुद को परेशान करने की आवश्यक ा नहीं है। ारा 23 में कहा गया है विक विकसी करार का प्रति फल या उद्देश्य वै है जब क विक अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी न्यायालय इसे लोक नीति क े विवपरी नहीं मान ी है। यह ारा आगे प्राव ान कर ी है विक प्रत्येक करार सिजसका उद्देश्य या प्रति फल विवति विवरूद्ध है, शून्य है। ारा 24 क े ह, यविद एक या एक से अति क उद्देश्यों क े त्तिलए एक ही प्रति फल का कोई भी विहस्सा, या कोई एक या विकसी भी उद्देश्य क े त्तिलए कई mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रति फल में से विकसी एक का कोई भी विहस्सा विवति विवरूद्ध है, ो करार शून्य है। हालाँविक, यह करार हमेशा अपनी संपूण ा में शून्य नहीं हो ा है, इसक े त्तिलए यह सुस्र्थीाविप विकया गया है विक यविद एक और समान वै प्रति फल क े त्तिलए कई अलग-अलग वचन विदए जा े हैं, और उनमें से एक या एक से अति क ऐसे हैं जैसे कानून प्रवर्ति नहीं करेगा, यह ऐसा नहीं होगा जो बाकी को प्रव नीय होने से स्वंय रोक ा हो। विपकरिंरग बनाम इल्फ्र ै कोम्बी रे क ं. (1868) एलआर 3 सीपी 235 (पेज 250 पर) में न्याया ीश विवल्स द्वारा कर्थीनीय सामान्य विनयम जो इस प्रकार है: "सामान्य विनयम यह है विक, जहां आप विकसी प्रसंविवदा क े कानूनी विहस्से से अवै को अलग नहीं कर सक े हैं, संविवदा पूरी रह से शून्य है; लेविकन जहां आप उन्हें अलग कर सक े हैं, चाहे अवै ा संविवति द्वारा बनाई गई हो या सामान्य कानून द्वारा, आप बुरे विहस्से को अस्वीकार कर सक े हैं और अEFे को बनाए रख सक े हैं।" (प्रभाव वर्ति ) (b). ब्रोजो नार्थी गांगुली (उपरोj) में, इस न्यायालय ने अनर्थीक सौदेबाजी की अव ारणा और विववेक क े त्तिलए कोई संबं नहीं विदखाने वाली कायw क े रूप में; जो सही या कसंग क े सार्थी असंग है, पर विवचार विकया, इस प्रकार अवलोकन विकया: “76. एक अनर्थीक सौदा विकस शीर्ष क े अ ीन आएगा? यविद यह असम्यक असर क े शीर्ष क े अं ग आ ा है, ो यह शून्यकरणीय हो जाएगा, लेविकन यविद यह लोक नीति क े विवरो में होने क े शीर्ष क े नीचे आ ा है, ो यह शून्य होगा। भार में विकसी भी न्यायालय क े समक्ष संविवदा की विवति क े ह विनणय क े त्तिलए हमारे सामने इस प्रकार का कोई मामला नहीं है और न ही विकसी अन्य देश में न्यायालय क े पूव दृष्टां ों में कोई मामला हमें इंविग विकया गया है। शब्द 'अनर्थीक' 'को शॉटर ऑक्सफोड इंत्तिग्लश तिडक्शनरी, र्थीड एतिडशन, वॉल्यूम II, पेज 2288 में परिरभाविर्ष विकया गया है, जब इसका उपयोग कायw क े संदभ में विकया जा ा है, जैसे "विववेक क े त्तिलए कोई विवचार नहीं विदखा े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हुए; जो सही या उतिच क े सार्थी असंग हो।" इसत्तिलए, एक अनर्थीक सौदेबाजी वह होगी जो सही या उतिच क े सार्थी असंग है।" (प्रभाव वर्ति ) (c). संविवदा पर तिचट्टी को आ ुविनक समय में संविवदा की स्व ंत्र ा क े पुराने विवचारों क े बारे में ब्रज नार्थी गांगुली (उपरोj) में संदर्भिभ विकया गया र्थीा, 25 वां संस्करण, वॉल्यूम 1, प्रस् र 4, तिचट्टी ने अवलोकन विकया: “79. इस संबं में, यह नोट करना उपयोगी है विक आ ुविनक समय में संविवदा की स्व ंत्र ा क े पुराने विवचारों क े बारे में तिचट्टी को क्या कहना है। संविवदा पर तिचट्टी, 25 वां संस्करण, वॉल्यूम 1, प्रस् र 4, में प्रासंविगक उद्धरण पाए जाने हैं, और इस प्रकार हैं: "इन विवचारों को आज काफी हद क अपनी अपील खोनी है। 'संविवदा की स्व ंत्र ा', यह कहा गया है, 'क े वल इस हद क एक उतिच सामासिजक आदश है विक संविवदा करने वाले पक्षकारों क े बीच सौदेबाजी करने की शविj की समान ा को माना जा सक ा है, और बड़े पैमाने पर समुदाय क े आर्भिर्थीक विह ों को कोई हाविन नहीं पहुंचाई जा ी है। ' संविवदा की स्व ंत्र ा बहु कम महत्व की हो ी है जब विकसी पक्ष क े पास प्रस् ाविव श w को स्वीकार करने या प्रस् ाविव सेवाओं या माल क े विबना काय करने क े मध्य कोई विवकल्प नहीं हो ा। लोक उपयोविग ा उपक्रमों द्वारा की गयी कई संविवदायें और अन्य एक पक्षकार द्वारा पहले से विनतिश्च की गई श w क े एक सेट का रूप ले े हैं और दूसरे पक्षकार द्वारा उन पर चचा नहीं की जा सक ी। इनको फ्र ें च अति वjा द्वारा 'संविवदा द' अडेसिसयन' कहा जा ा है व्यापारी अक्सर न व्यविjग श w पर संविवदा कर े हैं, बच्छिल्क उन पर कर े हैं जो एक व्यापार संघ द्वारा य विकए गए एक मानक संविवदा क े रूप में हो े हैं। और कमचारी क े विनयोजन क े विनबं नों का विन ारण उसक े व्यापार संघ और उसक े विनयोजक क े बीच करार करक े या विनयोजन की सांविवति क स्कीम द्वारा विकया जा सक ा है। र्थीाविप इस रह क े संव्यवहार संविवदा हो े हैं इसक े हो े हुए भी विक इसमें संविवदा की स्व ंत्र ा की काफी हद क कमी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जहां संविवदा की स्व ंत्र ा अनुपच्छिस्र्थी है, उपभोjाओं या लोक क े सदस्यों क े त्तिलए नुकसान, क ु F हद क, परामश क े त्तिलए प्रशासविनक प्रविक्रयाओं और कानून द्वारा समायोसिज विकया गया है। कई संविवति याँ संविवदा में उन श w को ब ा ी हैं, सिजन्हें पक्षकारों को बाहर करने क े त्तिलए मना विकया जा ा है, या घोविर्ष कर े हैं विक संविवदा में क ु F प्राव ान शून्य होंगे। और न्यायालयों ने कमजोरों पर आर्भिर्थीक रूप से मजबू पक्षकार द्वारा लगाए गए अपवाद खंडों को लागू करने से इनकार करने क े त्तिलए कई उपकरण विवकसिस विकए हैं, हालांविक उन्होंने अपने आप में विकसी भी सामान्य शविj (संविवति को Fोड़कर) को मोटे ौर पर घोविर्ष करने क े त्तिलए मान्य ा नहीं दी है विक अपवाद खंड प्रव नीय नहीं होगा जब क यह कसंग नहीं है। पुनः, हाल ही में, क ु F न्याया ीशों ने 'सौदेबाजी की शविj की असमान ा' क े आ ार पर संविवदात्मक दातियत्वों से राह की संभावना को मान्य ा दी है।" फ्रांसीसी “द'अडेसिसयन संविवदा कह े हैं, "अमेरिरकन "अडेसिसयन संविवदा" या "अडेसिसयन की संविवदा" कह े हैं। "अडेसिसयन संविवदा" को ब्लैक लॉ तिडक्शनरी में 5 वें संस्करण, पृष्ठ 38 पर परिरभाविर्ष विकया गया है, विनम्नानुसार: "अडेसिसयन संविवदा – माल और सेवाओं क े उपभोjाओं को प्रस् ाविव मानकीक ृ संविवदा प्रारूप में सौदेबाजी करने क े त्तिलए उपभोjा को वास् विवक अवसर विदए विबना आवश्यक रूप से इसे 'स्वीकार करने या Fोड़ देने' क े आ ार पर और ऐसी श w क े अ ीन जो उपभोjा प्रारूप संविवदा में मौनस्वीक ृ करने क े सिसवाय वांभिF उत्पाद या सेवाएं प्राZ नहीं कर सक ा है। अडेसिसयन संविवदा की विवभिशष्ट विवशेर्ष ा यह है विक कमजोर पक्ष क े पास अपनी श w क े अनुसार कोई वास् विवक विवकल्प नहीं हो ा है। ऐसी हर संविवदा अनर्थीक नहीं है। ''
80. अमरीकी विवति क े अ ीन च्छिस्र्थीति विवति क े पुनःस्र्थीापन में ब ाई गई है-विद्व ीय, जैसा विक अमेरिरकन विवति संस्र्थीान, खंड II द्वारा अंगीकार विकया गया है और प्रख्याविप विकया गया है जो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संविवदाओं की विवति क े बारे में ारा 208 में पृष्ठ 107 पर डील कर ा है, इस प्रकार है: "§ 208. अप्रति सध्य संविवदा या श Í यविद संविवदा या श उस समय अनर्थीक है, जब संविवदा की जा ी है, ो न्यायालय संविवदा को लागू करने से इनकार कर सक ा है, या विबना अनर्थीक श क े संविवदा क े शेर्ष भाग को लागू कर सक ा है, या विकसी भी अनर्थीक श की प्रयोज्य ा को विकसी अनर्थीक परिरणाम को हटाने क सीविम कर सक ा है।” इस ारा क े अन् ग दी गई विटप्पभिणयों में, पृष्ठ 107 पर यह ब ाया गया है: "सद्भाव और विनष्पक्ष व्यवहार क े दातियत्व की रह (§ 205), अनर्थीक संविवदा या श w क े विवरूद्ध नीति विवभिभन्न प्रकार क े आचरण पर लागू हो ी है। इसका विन ारण विक एक संविवदा या श अनर्थीक है या नहीं है, इसकी परिरच्छिस्र्थीति, उद्देश्य और प्रभाव क े दृविष्टग विकया जा ा है। सुसंग कारकों में संविवदा की प्रविक्रया में कमजोरिरयों शाविमल हैं जैसे विक संविवदात्मक क्षम ा, कपट और अन्य अमान्य कारणों क े रूप में अति क विवभिशष्ट विनयमों में शाविमल हैं; नीति उन विनयमों क े सार्थी भी ओवरलैप हो ी है जो विवशेर्ष रूप से सौदेबाजी को प्रस् ु कर े हैं या लोक नीति क े आ ार पर श Í अप्रव नीय हैं। अनर्थीक संविवदाओं या श w क े विवरूद्ध नीति बनाना कभी-कभी भार्षा क े प्रति क ू ल विनमाण द्वारा, प्रस् ाव और स्वीक ृ ति क े विनयमों में हेरफ े र करक े या विन ारण द्वारा विकया जा ा है विक खंड लोक नीति क े विवपरी या संविवदा क े प्रमुख उद्देश्य क े विवपरी है। एक समान वाभिणच्छिज्यक संविह ा § 2-302 विटप्पणी 1.... एक सौदेबाजी क े वल इसत्तिलए अनर्थीक नहीं है क्योंविक इसक े पक्षकार सौदेबाजी की च्छिस्र्थीति में असमान हैं, और न ही इसत्तिलए विक असमान ा कमजोर पक्ष को जोत्तिखमों क े आवंटन का परिरणाम दे ा है। बच्छिल्क सौदेबाजी की शविj की घोर असमान ा, एक सार्थी श w क े सार्थी अनुतिच रूप से मजबू पक्षकार क े अनुक ू ल होने क े संक े की पुविष्ट कर सक ी है विक संव्यवहार में ोखे या मजबूरी क े त्व शाविमल र्थीे, या यह विदखा सक ा है विक कमजोर पक्ष क े पास कोई सार्थीक विवकल्प नहीं र्थीा, कोई वास् विवक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवकल्प नहीं र्थीा, या वास् व में सहमति नहीं र्थीी या अनुतिच श w की सहमति क े त्तिलए प्रकट हो ा है।” (प्रभाव वर्ति ) संयुj राज्य अमेरिरका में एक क़ानून है सिजसे सावभौविमक वाभिणच्छिज्यक संविह ा कहा जा ा है, जो माल की विबक्री से संबंति अनुबं ों पर लागू हो ा है। हालांविक यह क़ानून माल की विबक्री से जुड़े अनुबं ों क े त्तिलए अप्रयोज्य है, लेविकन यह संयुj राज्य अमेरिरका में 'गैर-विबक्री' मामलों में बहु प्रभावशाली साविब हुआ है। इसका उपयोग कई बार या ो सादृश्य द्वारा विकया गया है या क्योंविक यह माल की विबक्री क े त्तिलए अपने सांविवति क प्रयोज्य ा से परे जाने वाली विनष्पक्ष ा क े एक आम ौर पर स्वीक ृ सामासिजक रवैये को मू रूप देने क े त्तिलए महसूस विकया गया र्थीा। रिरपोटर क े नोट में उj ारा 208 को पी 112 पर ब ाया गया है: "यह जोर विदया जाना है विक अडेसिसयन (मानक) संविवदा स्वयं में अनर्थीक नहीं है, और यह विक सभी अनर्थीक संविवदायें अडेसिसयन की संविवदायें नहीं हैं। विफर भी, सिज ना अति क मानकीक ृ करार और सिज ना कम पक्षकार सार्थीक रूप से सौदेबाजी कर सक े है, उ ना अति क संवेदनशील संविवदा या श अनर्थीक ा का दावा करेगा।” (प्रभाववर्ति ) इस प्रकार वर्ष 1982 में बटरवर्थीस द्वारा प्रकाभिश 'द लॉ ऑफ अनजस्ट कॉन्ट्रेक्ट' में जॉन आर. पेडेन द्वारा पृष्ठ 28-29 पर इस च्छिस्र्थीति का सारांश विदया गया है: “........... अनर्थीक ा न्याय की अरस् ूवादी अव ारणा और रोमन विवति लासिजयो एनोर्निमस क े सार्थी प्रारंभ होने वाले चक्र क े अं को दर्भिश कर ा है जो बदले में मध्यकालीन चच की न्यायोतिच मूल्य और सूदखोरी क े ति रस्कार की संकल्पना का आ ार बना। इन दशनों ने सत्रहवीं और अठारहवीं श ाब्दी क े दौरान, चांसरी न्यायालय की विववेका ीन शविjयाँ सिजसमें इसने सभी प्रकार क े अनुतिच संव्यवहार को रोक विदया, क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रयोग क पहुँच गयी। इसक े बाद उन्नीसवीं श ाब्दी में आर्भिर्थीक व्यविjवाद क े प्रति आंदोलन ने अपनी संविवदा बनाने क े त्तिलए पार्निटयों की स्व ंत्र ा पर जोर देकर इन शविjयों क े प्रयोग को कड़ा बना विदया। यद्यविप संविवदा सवदा पालनीय क े सिसद्धां का प्रभुत्व र्थीा, सहमति सिसद्धां ने अभी भी उन अपवादों को मान्य ा दी जहां एक पक्षकार वैश्वासिसक सम्बन् द्वारा प्रभुत्व रख ा र्थीा, या दवाब क े ह संविवदा में प्रवेश विकया या ोखा ड़ी का परिरणाम र्थीा। हालांविक, ये अपवाद सीविम र्थीे और इनको सख् ी से साविब विकया जाना र्थीा। यह सुझाव विदया जा ा है विक दीवानी और सामान्य विवति दोनों अति कारिर ाओं में विपFले 30 वर्षw क े दौरान न्यातियक और विव ायी प्रवृत्तिI लगभग वापस उसी च्छिस्र्थीति पर आ गई है। न्यायालय और संसद दोनो ने कमजोर पक्षों को कठोर संविवदाओं से अति क सुरक्षा प्रदान की है। कई अति कारिर ाओं में इसमें अनर्थीक संविवदाओं से राह देने की एक सामान्य शविj शाविमल र्थीी, सिजससे एक लॉन्चिंन्चग किंबदु प्राZ हो ा है, सिजससे न्यायालयों को अनर्थीक ा क े एक आ ुविनक सिसद्धां को विवकसिस करने का अवसर प्राZ हो ा है। यूसीसी क े अनुEFेद
2. 302 पर अमेरिरकी विनणय इस नए क्षेत्र में क ु F दूरी य कर चुक े हैं.......... ” उपयुj उद्धरण में प्रयुj “लैसिसयो एनोर्निमस” अभिभव्यविj “लैसिसयो अल्ट्रा तिडविमतिडयम वेल एनोर्निमस” को विनर्निदष्ट कर ा है सिजसका रोमन विवति में अर्थी दुभर संविवदा क े त्तिलए विकसी एक पक्षकार द्वारा उठायी गयी क्षति जब वह अन्य द्वारा विवर्षय-वस् ु क े मूल्य क े आ े से अति क की सीमा क क्ष विकया गया र्थीा, उदाहरण क े त्तिलए, जब एक विवक्र े ा को बेची गई संपत्तिI का आ ा मूल्य नहीं विमला र्थीा, या क्र े ा ने दुगनी कीम से अति क का भुग ान विकया र्थीा। उपरोj प्रस् र में विनर्निदष्ट सूविj “पैक्टा सन्ट सवcन्डा” का अर्थी '' संविवदाओं को रखा जाना है"। (प्रभाववर्ति ) इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक सौदेबाजी की शविj की असमान ा क े कारण, अनुतिच श Í, मजबू पक्ष क े अनुतिच पक्ष में ोखे या मजबूरी का एक त्व शाविमल हो सक ा है, या यह विदखा सक ा है विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कमजोर पक्ष क े पास कोई सार्थीक विवकल्प नहीं र्थीा। ब्रोजो नार्थी गांगुली (उपरोj) में न्यायालय ने यह भी अवलोकन विकया विक संविवदा की विवति क े क्षेत्र में, कशील ा या विनष्पक्ष ा का परीक्षण उभरकर आया है।यहां क विक एक अनुतिच खंड भी लागू नहीं विकया जा सक ा है क्योंविक यह अनर्थीक होगा।“ यहां इस मामले में उतिच अभिभप्राय यह है विक एसबीआई क े क ें द्रीय विनदेशक मंडल द्वारा पारिर संकल्प क े अनुसार पेंशन स्पष्ट रूप से स्वीकाय है, सिजसे अस्वीकार करने की मांग की गई है, यह एसबीआई क े त्तिलए विनयमों में संशो न करने क े त्तिलए र्थीा। इस रह की कायवाही अनर्थीक होगी, और पेंशन का भुग ान करने क े दातियत्व क े सार्थी एसबीआई वीआरएस को लागू करने क े त्तिलए न्यायालयों को ऐसी च्छिस्र्थीति में शविjहीन नहीं कहा जा सक ा है। (d). इस न्यायालय ने ब्रोजो नार्थी गांगुली (उपरोj) में विनविह प्रव नीय ा और कसंग संविवदाओं क े प्रव न पर इस प्रकार विवचार विकया: “83 विफर भी एक और सिसद्धां सिजसने हाल क े वर्षw में संविवदा क े कानून क े क्षेत्र में अपना उद्भव विकया है, वह संविवदा में एक खंड की न्यायसंग ा या विनष्पक्ष ा का परीक्षण है जहां सौदेबाजी की शविj की असमान ा है। लॉड डेकिंनग, एमआर, कम से कम इंग्लैण्ड़ में ो इस सिसद्धां क े प्रस् ावक और शायद प्रणे ा है। विगलेस्पी ब्रदस एंड क ं पनी त्तिलविमटेड बनाम राय बाउल्स ट्रांसपोट त्तिलविमटेड, (1973) क्यूबी 400 में, जहां सवाल यह र्थीा विक क्या एक अनुबं में क्षति पूर्ति खंड, अपने वास् विवक विनमाण पर, क्षति पूर्ति ारी की अपनी लापरवाही से उत्पन्न देय ा से क्षति पूरक को राह दे ा है, लॉड डेकिंनग ने कहा (पृष्ठ 415-416 पर): mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “अब समय आ सक ा है जब संविवदा का अर्थी लगाने की इस प्रविक्रया को आगे नहीं बढ़ाया जा सक ा है इसकी अनुमति देने क े त्तिलए शब्द बहु स्पष्ट हैं। क्या अदाल ें ब शविjहीन हैं? क्या वे पक्षकार को अपने अनुतिच खंड को लागू करने की अनुमति देना चाह े हैं, भले ही यह अनर्थीक होने क इ ना अनुतिच हो, या अनुतिच रूप से लागू हो। जब यह इस किंबदु पर आ जा ा है, ो मैं कहूंगा, जैसा विक मैंने कई साल पहले कहा र्थीा: 'ऐसा सामान्य विवति की स क ा है जो संविवदा की स्व ंत्र ा की अनुज्ञा दे े समय यह देख ी है विक इसका दुरुपयोग नहीं विकया गया है! जॉन ली एंड सन (ग्रान्र्थीम) त्तिलविमटेड बनाम रेलवे एच्छिक्सक्यूविटव, (1949) 2 ऑल ईआर 581 यह विकसी पक्षकार को सामान्य विवति में अपने दातियत्व से स्वयं को मुj करने की अनुमति नहीं देगा, जब ऐसा करना उसक े त्तिलए बहु अनर्थीक होगा।” (प्रभाववर्ति ) उपरोj मामले में, अपील क े न्यायालय ने क्षति पूरक की रक्षा को नकार विदया विक क्षति पूर्ति खंड क्षति पूर्ति ारी की लापरवाही को कवर नहीं कर“ ी। लॉयड्स बैंक त्तिलविमटेड बनाम बुंडी (1974) 3 ऑल ईआर 757 में लॉड डेकिंनग ने पहली बार 'सौदेबाजी की शविj की असमान ा' क े अपने सिसद्धां को स्पष्ट रूप से अभिभव्यj विकया र्थीा। उन्होंने मामले क े इस विहस्से पर ब ा े हुए अपनी चचा शुरू की (पृष्ठ 763 पर): “हमारी पुस् कों में ऐसे कई मामले हैं सिजनमें अदाल ें एक अनुबं, या संपत्तिI क े अन् रण को अपास् कर देंगी, जब पक्षकार समान श w पर सहम नहीं हुए हैं, जब एक सौदेबाजी की शविj में इ ना मजबू हो ा है और दूसरा इ ना कमजोर हो ा है विक, सामान्य विनष्पक्ष ा क े रूप में, यह सही नहीं है विक मजबू को कमजोर को विनराशा में डालने की अनुमति दी जाए। अभी क इन आपवाविदक मामलों को प्रत्येक को अपने आप में एक अलग श्रेणी माना गया है। लेविकन मुझे लग ा है विक समय आ गया है जब हमें उन्हें एक करने क े त्तिलए एक सिसद्धां खोजना चाविहए। मैं एक रफ उन संविवदाओं या संव्यवहारों को रख ा हूँ जो कपट या दुव्यपदेशन या गल ी क े त्तिलए शून्य हैं। वे सभी स्र्थीाविप सिसद्धां ों द्वारा शासिस हैं। मैं क े वल वहां जा ा हूं जहां mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सौदेबाजी की शविj की असमान ा रही है, जैसे विक अदाल क े हस् क्षेप को गुणावगुण देना।” (प्रभाव वर्ति ) इसक े बाद उन्होंने विवभिभन्न वगw क े मामलों का उल्लेख विकया और अं ः इन शब्दों में एक सामान्य सिसद्धां (पृष्ठ 765 पर) विनकाला: “सब विमलाकर मैं सुझाव दूंगा विक इन सभी उदाहरणों से एक अक े ला सूत्र विनकल ा है। वे 'सौदेबाजी की शविj की असमान ा' पर विनभर कर े हैं। इसक े आ ार पर, आंग्ल विवति एक व्यविj को राह दे ा है, जो स्व ंत्र सलाह क े विबना, उन श w पर एक संविवदा में प्रवेश कर ा है जो बहु अनुतिच है या उस प्रति फल पर सम्पत्तिI हस् ां रिर कर ा है जो बहु ही अपयाZ है, जब उसकी सौदेबाजी की शविj उसक े अपनी आवश्यक ाओं या इEFाओं या अपने स्वयं क े अज्ञान या दुबल ा से, असम्यक ् प्रभाव या अन्य द्वारा उस पर या दूसरे क े लाभ क े त्तिलए दवाब क े कारण गंभीर रूप से विबगड़ जा ी हैं। जब मैं 'असम्यक ् ' शब्द का उपयोग कर ा हूं, ो मेरा म लब यह नहीं है विक सिसद्धां विकसी भी गल काम क े सबू पर विनभर कर ा है। वह व्यविj जो एक अनुतिच लाभ चाह ा है, स्वयं द्वारा दूसरों को होने वाली परेशानी से अनभिभज्ञ मात्र अपने विनजी विह से चात्तिल हो सक ा है, उस संकट क े अविनEFा से वह दूसरे क े त्तिलए ला रहा है। मैंने विकसी की इEFा को 'अति शासिस ' होने या विकसी क े द्वारा 'हावी' होने क े विकसी संदभ से भी परहेज विकया है। जो अत्यति क आवश्यक ा में है, वह जान-बूझकर एक सबसे अनुतिच सौदेबाजी क े त्तिलए सहमति दे सक ा है, क े वल उस बा ा को दूर करने क े त्तिलए सिजसमें वह खुद को पा ा है। पुनः, मेरा यह म लब नहीं है विक हर संव्यवहार को स्व ंत्र सलाह से बचाया जा ा है। लेविकन इसकी अनुपच्छिस्र्थीति घा क हो सक ी है। इन स्पष्टीकरणों क े सार्थी, मुझे उम्मीद है विक इस सिसद्धां को मामलों को सुलझाने क े त्तिलए प्राZ विकया जाएगा। ' (प्रभाव वर्ति ) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (e). न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा विक संविवदायें, जो दुव्यपदेशन का परिरणाम हैं, को लागू नहीं विकया जा सक ा है, और सौदेबाजी की शविj की असमान ा अदाल क े हस् क्षेप को अवसर प्रदान कर ी है। ए. स्क्रोडर म्यूविÓक पच्छिब्लशिंशग क ं पनी त्तिलविमटेड बनाम मैकाले (पूव में इंस्टोन) (1974) 1 डब्ल्यूएलआर 1308 में, लॉड तिडप्लॉक ने पृष्ठ 1315-16 पर इस प्रकार विनम्नत्तिलत्तिख अवलोकन विकए: "84..... "माय लॉड्स, इस अपील में विवचारा ीन संविवदा यह है सिजसक े द्वारा प्रत्यर्थी. ने उस रीति पर विनबÕ न स्वीकार विकए, सिजसमें वह अगले दस वर्षw क े त्तिलए एक गी लेखक क े रूप में उसकी अजन शविj का लाभ उठाएगा। क्योंविक इसे व्यापार क े अवरो में एक संविवदा क े रूप में वग.क ृ विकया जा सक ा है, अवरो जो प्रति वादी ने स्वीकार विकए उन सीविम वगw क े भी र आ गये, सिजसक े संबं में अदाल ें अभी भी वचनदा ा क े अपने विवति क क व्य को पूरा करने से राह देने की शविj रख ी हैं। यह विन ारिर करने क े त्तिलए विक क्या यह मामला उसी रह का है सिजसमें उस शविj का प्रयोग विकया जाना चाविहए, जो वास् व में आपक े लॉडभिशप ने संविवदा करने क े समय गी लेखक और प्रकाशक की सापेक्ष सौदेबाजी की शविj का आकलन करने क े त्तिलए विकया है और यह य करने क े त्तिलए विकया है विक क्या प्रकाशक ने गी कार वचन से सटीक रूप से अपनी बेह र सौदेबाजी की शविj का उपयोग विकया र्थीा जो उसक े त्तिलए गल र्थीा। आपक े लॉडभिशप को यह पूF ाF करने क े त्तिलए सरोकार नहीं विकया गया है विक क्या वास् व में अवरो ों क े कारण गी लेखक की प्रति भा क े फल से जन ा को वंतिच विकया गया है, और न ही इस संभावना का आकलन करने क े त्तिलए विक यविद संविवदा को अपने पूण रूप में चलाने की अनुमति दी गई ो वे भविवष्य में वंतिच होंगे। मेरे विवचार में, यह स्वीकार करना विक एक संविवदा क े प्राव ानों को लागू करने से इनकार करना विह कारी है, सिजसक े ह एक पक्ष शोर्षण क े त्तिलए दूसरे पक्ष क े लाभ क े त्तिलए सहम mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हो ा है या वह अपनी अजन की शविj का शोर्षण करने से बच ा है, लोक नीति सिजसे अदाल लागू कर रही है व्यापार की स्व ंत्र ा को सामान्य जन ा को लाभ क े बारे में कु F 19 वीं सदी का आर्भिर्थीक सिसद्धां नहीं है, बच्छिल्क उन लोगों का संरक्षण है सिजनकी सौदेबाजी की शविj उन लोगों द्वारा बाध्य विकए जाने पर कमजोर है, सिजनकी सौदेबाजी की शविj मजबू है ऐसे सौदेबाजी में प्रवेश कर े हैं जो अप्रति सध्य है। बेंर्थीम और लेजेज फ े अर(करार की स्व ंत्र ा) क े प्रभाव में 19 वीं सदी में अदाल ों ने आम ौर पर संविवदा क े त्तिलए अप्रति सध्य सौदेबाजी क े विवरूद्ध लोक नीति को लागू करने की प्रर्थीा को Fोड़ विदया, जैसा विक वे सूदखोरी समझे जाने वाले विकसी संविवदा क े मामले में कर े र्थीे, लेविकन नीति दंड ाराओं क े त्तिलए और जब् ी क े त्तिखलाफ राह और व्यापार क े अवरो में संविवदा क े विवशेर्ष वगw क े त्तिलए भी अपनी प्रयोज्य ा में बच गई। यविद कोई व्यापार क े अवरो क संविवदाओं क े मामलों में 19 वीं सदी क े न्याया ीशों क े क को देख ा है ो व मान आर्भिर्थीक सिसद्धां ों क े त्तिलए भुग ान विकए गए विदखावटी प्रेम को पा ा है, लेविकन यविद कोई यह देख ा है विक उन्होंने जो विकया उसक े सम्बन् में उन्होंने क्या कहा, ो उन्हें प ा चल ा है विक उन्होंने सौदेबाजी को अभिभखच्छिण्ड कर विदया यविद उन्होंने इसे पक्षकारों क े बीच अप्रति सध्य माना और इसे बरकरार रखा यविद उन्हें लगा विक यह ऐसा नहीं र्थीा। इसत्तिलए मैं यह अभिभविन ारिर करू ं गा विक इस अपील का संबं व्यापार क े अवरो क संविवदा क े प्रकार क े संबं में सिजस प्रश्न का उIर विदया जाना चाविहए वह यह है विक: क्या सौदेबाजी उतिच र्थीी! ऋजु ा का परीक्षण विन:संदेह यह है विक क्या संविवदा क े अन् ग वचनदा ा को प्राZ लाभों क े अनुरूप और वचनग्रही ा क े विवति सम्म विह ों क े संरक्षण दोनो क े त्तिलए अवरो युविjयुj रूप से आवश्यक हैं। इस परीक्षण क े उद्देश्य क े त्तिलए, संविवदा क े सभी प्राव ानों को ध्यान में रखा जाना चाविहए।” (f). वह श जो मजबू पक्षकार को उसक े सामान्य विवति क दातियत्व से F ू ट दे ा है, को प्रभाव नहीं विदया जाना चाविहए सिसवाय जब यह उतिच हो, जैसा विक लेविवसन बनाम पेटेंट स्टीम कापcट क ं पनी त्तिलविमटेड, (1949) 2 ऑल ईआर 581 में 584 पर ब्रजो नार्थी गांगुली (उपरोj) में देखा गया है: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “85. लेविवसन बनाम पेटेंट स्टीम कापcट क ं पनी त्तिलविमटेड में लॉड डेकिंनग, एमआर की विटप्पभिणयां भी उपयोगी हैं और इन्हें उद्धृ विकया जाना अपेतिक्ष है। ये अवलोकन इस प्रकार हैं (पृष्ठ 79 पर): "ऐसी परिरच्छिस्र्थीति यों में, जैसी विक यहां विवति आयोग ने 1975 में सिसफारिरश की र्थीी विक ऐसी श Í जो मजबू पक्षकार को उसक े सा ारण विवति क दातियत्व से F ू ट दे ी है, को ब क े सिसवाय प्रभावी नहीं विकया जाना चाविहए जब वह युविjयुj हो: विवति आयोग और स्काविटश विवति आयोग रिरपोट, अपवाद खण्ड़, दूसरी रिरपोट (1975) (5 अगस्, 1975), विवति आयोग सं. 69 (एच. सी. 605), पीपी 62, 174 देखे; और संसद क े समक्ष अब एक विव ेयक है, जो युविjयुj ा क े परीक्षण को प्रभावी बना ा है। यह कानून सु ार का एक आभारी खण्ड़ है: लेविकन मुझे नहीं लग ा विक हमें उस विव ेयक को कानून में पारिर करने क े त्तिलए इं जार करने की आवश्यक ा है। आप कभी नहीं जान े विक विकसी विव ेयक क े सार्थी क्या हो सक ा है। इस बीच, सामान्य कानून क े अपने सिसद्धां हैं जो पहुँच क े त्तिलए ैयार हैं। विगलेस्पी ब्रदस एंड क ं पनी त्तिलविमटेड बनाम राय बौल्स ट्रांसपोट त्तिलविमटेड (1973) क्यूबी 400 में, मैंने सुझाव विदया ो अपवाद या सीमा खंड को प्रभाव नहीं विदया जाना चाविहए यविद यह अनुतिच र्थीा, या यविद मामले की परिरच्छिस्र्थीति यों में इसे लागू करना अनुतिच होगा। मुझे कोई कारण नहीं विदख ा विक आज मानक रूप संविवदा में विकसी भी दर पर इसे क्यों लागू नहीं विकया जाना चाविहए, जहां सौदेबाजी की शविj की असमान ा है। ” (g). न्यायालयों को आशय क े अनुसार संविवदा का अर्थी लगाना होगा। इस संबं में, ब्रोजो नार्थी गांगुली (उपरोj) में, न्यायालय ने इस प्रकार प्रश्न पर विवचार विकया: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “87. अनुतिच संविवदा श अति विनयम, 1977 क े अति विनयमन से पहले, फोटो प्रोडक्शन त्तिलविमटेड बनाम सिसक ु रिरकोर ट्रांसपोट त्तिलविमटेड (1980) एसी 827 क े वाद में, हाउस ऑफ लॉड्स ने प्रति वाविदयों क े मानक श w वाली मुविद्र रूप संविवदा में अपवाद खंड को बरकरार रखा। यह विनणय इस आ ार पर आगे बढ ा प्र ी हो ा है विक पक्षकार व्यवसायी र्थीे और वे असमान सौदेबाजी की शविj नहीं रख े र्थीे। हाउस ऑफ लॉड ने इस वाद में संविवदा में कशील ा या उतिच ा का परीक्षण क े खण्ड़ को अस्वीकार नहीं विकया जहाँ पक्षकार सौदेबाजी की च्छिस्र्थीति में समान नहीं हैं। इसक े विवपरी, लॉड विवल्वरफॉस, लॉड तिडप्लॉक और लॉड स्क े रमैन क े कर्थीन यह दशा े हैं विक हाउस ऑफ लॉड उपयुj मामले में इस परीक्षण को स्वीकार करेगें। लग ा है विक हाउस ऑफ लॉड्स उपयुj मामले में उस परीक्षण को स्वीकार करेगा। लॉड विवल्बरफोस ने अपने भार्षण में, अनुतिच अनुबं विनयम अति विनयम, 1977 का उल्लेख करने क े बाद, कहा (पृष्ठ 843 पर): “यह अति विनयम उपभोjा संविवदाओं और मानक विनबं नों क े आ ार पर लागू हो ा है और अपवाद खंडों को जो उसक े संबं में न्यायोतिच और युविjयुj है लागू विकया जाना सुविनतिश्च करेगा। यह महत्वपूण है विक संसद संविवदा क े पूरे क्षेत्र पर कानून बनाने से परहेज की। इस अति विनयम क े बाद, आम ौर पर वाभिणच्छिज्यक मामलों में, जब पक्षकार असमान सौदेबाजी की शविj क े नहीं हो े हैं, और जब जोत्तिखम आम ौर पर बीमा द्वारा पैदा हो ी है ो न क े वल न्यातियक हस् क्षेप क े त्तिलए मामला हो ा है, बच्छिल्क सब रह से यह कहा जाएगा और ऐसा लग ा है विक संसद का इरादा है विक वह पक्षकारों को अपने जोत्तिखम का विवभाजन करने क े त्तिलए स्व ंत्र Fोड़ दें और वे अपने विनणयों क े त्तिलए जैसा उतिच समझें। (प्रभाव वर्ति ) लॉड तिडप्लॉक ने कहा (पृष्ठ 850-51 ): '' चूंविक विकसी वाभिणच्छिज्यक संविवदा में विवति द्वारा अन् र्निनविह दातियत्व वे हैं जो वर्षw से न्यातियक सहमति द्वारा या संसद द्वारा विकसी कानून को पारिर कर े समय उन्हें दातियत्व की रह मानी गयी हैं सिजन्हें बुतिद्धसम्पन्न व्यवसायी यह महसूस करेगा विक वह विकसी विवभिशष्ट प्रकार क े संविवदा में विकए जाने पर स्वीकार कर रहा र्थीा, अन् र्निनविह दातियत्व से, जो एक अर्थी में अपवजन खंड क े अभिभव्यj शब्दों का अर्थीान्वयन करने में अं वत्तिल होंगे, विकसी विवभिशष्ट विकस्म क े संविवदा में आने पर न्यायालय का दृविष्टकोण यह विवविनश्चय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने में सुसंग विवचार है विक पक्षकारों द्वारा शब्दों को सहन करने क े आशय काय अर्थी है (प्रभाव वर्ति ) लाड स्कारमन लाड विवलबरफोस(पृष्ठ 853 पर) से सहमति ज ा े हुए उन काय का वणन विकया जो सदन क े समक्ष पक्षकारों क े मध्य उत्पन्न एक वाभिणच्छिज्यक विववाद सिजसको उन्हें स्वयं देखभाल करना हैं क े रूप में अपील से उत्पन्न हुआ हैं और ब जोड़ा इन परिरच्छिस्र्थीति यों में कौन से पक्षकार अभिभव्यj या विववतिक्ष रूप से सहमति व्यj कर े हैं वह महत्व रख ा है। और न्यायलय का क व्य यह है विक वह अपने अभिभप्राय क े अनुसार उनक े मध्य संविवदा का अर्थीान्वयन करे।
88. जैसा विक ऊपर दृविष्टग है, न्यातियक विनणयों क े अलावा, संयुj राज्य अमेरिरका और यूनाइटेड किंकगडम ने वै ाविनक रूप से मान्य ा दी है, कम से कम संविवदा संबं ी कानून क े कति पय क्षेत्रों में, विक अनुतिच व्यवहार हो सक ा है (या विनष्पक्ष ा की कमी, यविद कोई उस वाक्यांश को पसंद कर ा है) अनुबं या एक अनुबं में एक खंड जहां पार्निटयों क े बीच सौदेबाजी की शविj की असमान ा है, हालांविक परिरच्छिस्र्थीति यों से उत्पन्न हो ी हैं जो उनक े विनयंत्रण में नहीं हो ी हैं या च्छिस्र्थीति यों क े परिरणामस्वरूप उनकी रचना नहीं हो ी है। अन्य कानूनी प्रणात्तिलयां भी समान परिरच्छिस्र्थीति यों में दज एक संविवदात्मक संव्यवहार की न्यातियक समीक्षा की अनुमति दे ी हैं। उदाहरणार्थी, जमन दीवानी संविह ा की ारा 138 (2) में यह उपबं है विक कोई संव्यवहार शून्य है जब कोई व्यविj व्यभिर्थी च्छिस्र्थीति, अनुभवहीन ा, विनणय क्षम ा की कमी या उसकी गंभीर कमजोरी का नीय लाभ प्राZ करने का वचन या प्राZ करने क े त्तिलए दूसरे की इEFाओं का 'शोर्षण' कर ा है जो स्पष्ट रूप से बदले में विदये गये पालन क े आनुपाति क नहीं है। फ्र ें च विवति क े अनुसार यह च्छिस्र्थीति काफी हद क समान है। (h). ब्रोजो नार्थी गांगुली (उपरोj) क े मामले में, यह इंविग विकया गया विक न्यायालय को ऐसे मामले में क्या करना चाविहए जो इस प्रकार है: “89. क्या ब हमारे न्यायलय को समय क े सार्थी आगे बढ़ना चाविहए? क्या वे अभी भी अस्पष्ट अव ारणाओं और बाहरी विवचार ाराओं से तिचपक े रहेंगे? क्या हमें आज क े विहसाब से अपनी सोंच को नहीं बदलना चाविहए? क्या सभी न्यायशास्त्रीय विवकास हमें पास कर देना चाविहए, सिजससे हम 19 वीं श ाब्दी क े सिसद्धां ों क े ढेर में भद्दे हो जा े हैं? क्या बलवान को कमजोर को दबाने की अनुमति दी जानी चाविहए? क्या उन्हें कमजोरों क े ऊपर शासन करने की अनुमति दी जानी चाविहए? क्या न्यायालयों को मौन ारण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर लेना चाविहए और कमजोर पर अत्याचार हो े देना चाविहए। हमारे देश में एक संविव ान है। हमारे न्याया ीश संविव ान और विवति यों को बनाए रखने की शपर्थी से बं े हैं इस देश क े सभी नागरिरकों को सामासिजक और आर्भिर्थीक न्याय विदलाने क े त्तिलए संविव ान बनाया गया र्थीा। संविव ान का अनुEFेद 14 विवति क े समक्ष समान ा और विवति यों क े समान संरक्षण की गारंटी दे ा है। मामले क े इस भाग पर उपयुj विवचार-विवमश से संबंति सिसद्धां सही और क क े अनुरूप है सिजसका उद्देश्य सामासिजक और आर्भिर्थीक न्याय को सुरतिक्ष करना और अनुEFेद 14 में महान समान ा खंड क े अति देश क े अनुरूप है। यह सिसद्धां यह है विक अदाल ें इसे लागू नहीं करेंगी और जब ऐसा करने क े त्तिलए 15 कहा जाएगा ो अनुतिच एवं अ ार्निकक संविवदा या संविवदा में कोई अनुतिच एवं अ ार्निकक खण्ड़ सिजसमें पक्षकार सौदेबाजी क े शविj में समान न हों, को हटा देंगी। इस प्रकार क े सभी सौदेबाजी की एक पूण सूची देना मुच्छिश्कल है। कोई भी न्यायालय उन विवभिभन्न च्छिस्र्थीति यों की कल्पना नहीं कर सक ी है जो लोगों क े मामलों में उत्पन्न हो सक ी हैं। कोई क े वल क ु F दृष्टां देने का प्रयास कर सक ा है। उदाहरण क े त्तिलए, उपरोj सिसद्धां वहां लागू होगा जहां सौदेबाजी की शविj की असमान ा संविवदा क े पक्षकारों की आर्भिर्थीक शविj में मह ी असमान ा का परिरणाम है। यह उन परिरच्छिस्र्थीति यों में लागू होगा जहां असमान ा परिरच्छिस्र्थीति यों का परिरणाम हो और वे परिरच्छिस्र्थीति यां चाहे पक्षकारों द्वारा विनर्निम हो या न हो। यह उन परिरस्र्थीति यों पर लागू होगा सिजनमें कमजोर पक्षकार एक ऐसी च्छिस्र्थीति में हो सिजसमें वह मजबू पक्षकार द्वारा आरोविप श w पर क े वल वस् ुओं या सेवाओं या आजीविवका क े सा न प्राZ कर सक ा है या उनक े विबना जा सक ा है। यह भी लागू होगा जहां एक आदमी क े पास 15 कोई विवकल्प नहीं है, या कोई सार्थीक विवकल्प नहीं है, बजाय विकसी संविवदा पर अपनी सहमति देने या एक विन ारिर या मानक रूप में किंबदीदार रेखा पर हस् ाक्षर करने या संविवदा क े विकसी भाग में विनयमावली को स्वीकार करने क े त्तिलए चाहें उस संविवदा क े विनयम अनुतिच हों, युविjयुj न हो या साच्छिम्यक न हो। हालांविक यह सिसद्धां वहां लागू नहीं होगा जहां संविवदा क े पक्षकारों की सौदेबाजी की शविj समान या लगभग बराबर हो। यह सिसद्धां लागू नहीं हो सक ा है जहां दोनों पक्ष व्यापारी हैं, और संविवदा एक वाभिणच्छिज्यक संव्यवहार हो। आज क े इस जविटल संसार में विवशाल अवसंरचना वाली बड़ी बड़ी संस्र्थीाएं राज्य क े सार्थी जो सभी रह क े उद्योग एवं वाभिणज्य क े काय कर रही हैं ऐसे में वहां अनविग न परिरच्छिस्र्थीति यां हो सक ी हैं जहां पक्षकारों, जो पूण रूप से असंग और असमान सौदेबाजी की शविj रख े हों, क े मध्य अनुतिच एवं अयुविjयुj सौदेबाजी परिरण हो सक ी हैं। ये वाद न ो विगने जा सक े हैं न पूण रूप से दृविष्ट विकये जा सक े हैं। न्यायालय को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रत्येक मामले को उसक े खुद क े थ्य एवं परिरच्छिस्र्थीति यों क े आ ार पर न्यायविनण. करना चाविहए। (i). न्यायालय ने ब्रोजो नार्थी गांगुली (उपरोj) क े वाद में विनण. विकया विक संविवदा जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभाविव करे और यविद वह अनुतिच दोर्षपूण एवं अयुविjयुj हो ो वह संविवदा शून्यकरणीय हो ी है। अदाल प्रत्येक व्यविj को मजबूर नहीं करेगी, सिजसक े सार्थी बेह र सौदेबाजी की शविj वाले पक्ष ने अनुबं को शून्य घोविर्ष करने क े त्तिलए अदाल में जाने का अनुबं विकया र्थीा और इसक े परिरणामस्वरूप मुकदमेबाजी की बहुल ा होगी। यह अवलोकन: “91.क्या उj वर्भिण प्रकार की संविवदा को शून्य या शून्यकरणीय न्यायविनण. करना चाविहए? यविद संविवदा अनुतिच प्रभाव से प्रभाविव र्थीी, ो भार ीय संविवदा अति विनयम की ारा 19 -क क े ह, यह शून्यकरणीय होगी। हालाँविक, यह शायद ही कभी हो ा है विक भार ीय संविवदा अति विनयम की ारा 16 (1) द्वारा परिरभाविर्ष विकए गए प्रकारों क े संविवदा, सिजनक े त्तिलए ऊपर हमारे द्वारा विनर्निम विकया गया सिसद्धां लागू हो ा है, अनुतिच प्रभाव से प्रेरिर हो े हैं, भले ही वे कई बार पक्षकारों में से एक हो दूसरे पर एक वास् विवक या स्पष्ट अति कार रख ा है। हालांविक, अति कांश मामलों में, ऐसी संविवदाएं परिरच्छिस्र्थीति यों क े दबाव में कमजोर पक्षकार द्वारा की जा ी हैं और सामान्य ः आर्भिर्थीक मामलों में सौदेबाजी शविj की असमान ा परिरणति हो ी है। ऐसे संविवदा ारा 16 (1) में विदए गए “असम्यक प्रभाव” की परिरभार्षा क े अन् ग नहीं आएगें। इसक े अलावा, ऐसे अनुबं ों का बहुम एक मानक या विन ारिर रूप में है या एक सेट से विमलकर बना है। वे संविवदाएं उन व्यविjयों क े मध्य नहीं हैं सिजसमें क े वल उन्हीं व्यविj विवशेर्ष क े त्तिलए श Í हों। विन ारिर या मानक रूपों में अनुबं या जो अनुबं क े विहस्से क े रूप में विनयमों क े एक सेट को मू रूप दे े हैं, पक्षकार द्वारा श्रेष्ठ सौदेबाजी की शविj क े सार्थी बड़ी संख्या में ऐसे व्यविjयों क े सार्थी प्रवेश विकया जा ा है सिजनक े पास बहु कम सौदेबाजी की शविj या कोई सौदेबाजी की शविj नहीं हो ी है। ऐसे संविवदा जो बड़ी संख्या में व्यविjयों या एक समूह या व्यविjयों क े समूह को प्रभाविव कर े हैं, यविद वे अचे न, अनुतिच और अनुतिच हैं, ो सावजविनक विह क े त्तिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हाविनकारक हैं। यह कहने क े त्तिलए विक इस रह का अनुबं क े वल शून्यकरणीय है, प्रत्येक व्यविj को मजबूर करना होगा सिजसक े सार्थी बेह र सौदेबाजी की शविj वाले पक्ष ने अदाल में जाने क े त्तिलए अनुबं को शून्य घोविर्ष विकया र्थीा। इससे क े वल मुकदमेबाजी की बहुल ा होगी, सिजसे विकसी भी अदाल को प्रोत्साविह नहीं करना चाविहए और यह भी सावजविनक विह में नहीं होगा। इस रह क े अनुबं या एक अनुबं में इस रह क े एक खंड को शून्य घोविर्ष विकया जाना चाविहए। जबविक इंग्लैंड में संविवदा का कानून ज्यादा र न्याया ीश द्वारा बनाया गया है, भार में संविवदा संविवति द्वारा अति विनयविम विकया गया है, सिजसका नाम भार ीय संविवदा अति विनयम, 1872 है। यह भार ीय संविवदा अति विनयम क े प्रासंविगक वगw में से एक क े ह आना चाविहए, जो इसे लागू कर ा है वह ारा 23 है। जब इसमें यह कहा गया है विक “विकसी करार का प्रति फल या उद्देश्य विवति सम्म है, अन्यर्थीा न्यायालय इसे लोकनीति क े विवरूद्ध मान ा है।" (j). न्यायालय ने “लोक नीति ” पर भी विवचार विकया। लोकनीति विकसी विवशेर्ष सरकार की नीति नहीं है। यह कु F मामलों को दशा ा है जो जन ा की भलाई और सावजविनक विह से संबंति है। काय लोकनीति क े अ ीनस्र्थी होनें चाविहए। न्यायालय ने संविवदा अति विनयम और लोकनीति क े इस संदभ में विनम्नत्तिलत्तिख अवलोकन विकए: “92. भार ीय संविवदा अति विनयम "लोकनीति " या "लोकनीति विवरूद्ध अभिभव्यविj "को परिरभाविर्ष नहीं कर ा है। अभिभव्यविj "लोकनीति," लोकविनति क े विवरूद्ध "या" लोकनीति क े विवपरी " की सटीक परिरभार्षा देने में असमर्थी हैं। हालांविक,सावजविनक नीति, विकसी विवशेर्ष सरकार की नीति नहीं है। यह क ु F मामलों को दशा ा है जो जन ा की भलाई और सावजविनक विह क े हैं। यह अव ारण विक लोकनीति क्या है, लोगों की भलाई या लोकविह क े त्तिलए क्या सही या गल है समय समय पर बदल ा रहा है। जैसा विक नई अव ारणाएं पुरानी जगह ले ी हैं, संव्यवहार सिजन्हें एक बार लोकनीति क े विवरूद्ध माना गया अब न्यायालय द्वारा अव ारिर की जा रही हैं और उसी रह, जहां लोकनीति क े जाने माने मान्य ाप्राZ शीर्ष हैं वहां न्यायलय ने नये संव्यवहारों एवं परिरवर्ति परिरच्छिस्र्थीति यां क बढ़ाने से जी नहीं चुराया है और समय समय पर लोकनीति क े नये शीर्ष को खोजने से जी नहीं चुराया है। इस संबं में यहां पर दो विवचार हैं - प्रर्थीम mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संकीण दृविष्टकोण विद्व ीय विवस् ृ दृविष्टकोण। प्रर्थीम विवचार ारा क े अनुसार न्यायालय लोकनीति क े नये शीर्ष सृसिज कर े हैं, जबविक विद्व ीय विवचार क े अनुसार विवति विनमात्री न्यातियक अनुसमर्थीन है। "संकीण दृविष्टकोण" क े अनुयातिययों को सावजविनक नीति क े आ ार पर संविवदा को अमान्य नहीं विकया जाएगा जब क विक वे विवशेर्ष आ ार अति कारिरयों द्वारा अEFी रह से स्र्थीाविप नहीं विकया गया र्थीा। कमजोर की आवाज जंसन बनाम ड्रीक्डॉनइन समेविक गोल्ड माइंस त्तिलविमटेड क े मामले में लाड डेवी क े शब्द ज्यादा स्पष्ट और ीव्र सुनाई दी होगी। विवति क विनणय क े त्तिलए लोविकनीति हमेशा से असुरतिक्ष और जोत्तिखमभरा आ ार रहा है। यह वर्ष 1902 में र्थीा, सIर साल पहले, रिरचडसन बनाम मेत्तिलश में न्यायमूर्ति बुज (182434) ऑल ईआर 258, ने सावजविनक नीति को एक बहु ही अविनयंवित्र घोड़ा कहा है, और जब एक बार आपका विनयंत्रण हट ा है ो आपको नहीं प ा विक यह आपको कहां ले जाएगा. " हालांविक मास्टर ऑफ रोल्स लॉड डेकिंनग, ऐबदार घोड़ों से दूर रहने वाले व्यविj नहीं र्थीे और यविद हम शब्दों में बयां करें ो जो हमारी आंखों क े सामने संयविम र्थीे, युवा अलेक्जेंडर ग्रेट टेकिंमग विबकासालस की स्वीर जो उन्होंने एंडबी टाउन फ ु टबॉल क्लब बनाम फ ु टबॉल असन त्तिलविमटेड (1971) सीएच 591 त्तिलविमटेड में कहा को हमारी आँखों क े सामने ाजा कर दे ा है: "अगर काठी पर अEFा आदमी बैठा हो, अविनयंवित्र घोड़े को विनयंत्रण में रखा जा सक ा है। यह बा ाओं को पार कर सक ा है।" अगर कमजोर जमीन Fोड़ विदये हो े, ो न क े वल लोकनीति का सिसद्धां बच्छिल्क कॉमन लॉ या साम्या क े सिसद्धां भी कभी विवकसिस नहीं हो े। सर विवत्तिलयम होल्ड्सवर्थी ने अपने "इंत्तिग्लश विवति क े इति हास," खंड III, पृष्ठ 55 में कहा है: "वास् व में, सामान्य विवति जैसे कानून का एक विनकाय, जो ीरे- ीरे राष्ट्र क े विवकास क े सार्थी विवकसिस हुआ है, आवश्यक रूप से क ु F विनतिश्च सिसद्धां ों को प्राZ कर ा है, और यविद यह इन सिसद्धां ों को बनाए रखना है, ो यह लोकनीति या उसी क े जैसे विकसी अन्य क े आ ार पर, उन प्रर्थीाओं को दबाने क े त्तिलए सक्षम होना चाविहए, जो हमेशा नए प्रEFन्नों क े ह, उन्हें कमजोर या नकारात्मक करना चाह े हैं।" इस प्रकार यह स्पष्ट है विक लोकनीति को विनयंवित्र करने वाले सिसद्धां विवस् ार या संशो न क े उतिच अवसर पर होने चाविहए और सक्षम हैं। वे प्रर्थीायें एक समय में पूरी रह से सामान्य मानी गयी र्थीीं वे आज लोक चे ना क े त्तिलए अविप्रय और दमनकारी हो बन चुकी हैं। यविद लोकनीति, जो विकसी मामले को आEFाविद कर ा है, का कोई शीर्ष न हो, ो अदाल को लोकचे ा क े अनुरूप होना चाविहए और लोकविह और लोकमंगल को ध्यान mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में रख े हुए इस रह की प्रर्थीा को लोकनीति क े विवरो में घोविर्ष करना चाविहए। खास करक े, विकसी भी मामले को य करने में, जो प्राति करण द्वारा आEFाविद हो ा, हमारे न्यायालयों क े पास संविव ान की प्रस् ावना उनक े मागदशन क े रूप में हो ी है। विमसाल कायम कर े हुए, न्यायालय हमेशा हमारे संविव ान में सुरतिक्ष मूल अति कार और नीति विनदcश सिसद्दान् ों से मागदशन प्राZ कर सक ी है।
93. कॉमन लॉ का सामान्य विनयम यह है विक कोई पक्षकार जो विकसी समझौ े को लागू करना चाह ा है, जो लोकनीति क े विवरूद्ध हो उसमें वाद नहीं दायर हो सक ा है। हालांविक स्क्रोडर म्यूविÓक पच्छिब्लशिंशग क ं पनी त्तिलविमटेड बनाम मैकाले (1974) 1 डब्ल्यूएलआर 1308 का मामला यह स्र्थीाविप कर ा है विक जहां विकसी संविवदा को लोक नीति क े विवरूद्ध माना जा ा है, वहां इससे प्रभाविव पक्षकार इसे शून्य घोविर्ष करवाने क े त्तिलए वाद दायर कर सक ी है। मामला अलग हो सक ा है, जहां संविवदा का उद्देश्य विवति विवरूद्ध या अनैति क है। क े दार नार्थी मोटनी बनाम प्रह्लाद राय, ए. आई. आर. 1960 एस. सी. 213 में, उच्च न्यायालय क े विनणय को उलट े हुए और विवचारण न्यायालय द्वारा अपीलार्थी. की स्वत्व को वाद में घोविर्ष कर े हुए पारिर तिडक्री को प्रत्यावर्ति कर े हुए उन प्रत्यर्भिर्थीयों को, जो अपीलार्थी. बेनामीदार क े कब्जे को बहाल करने का विनदेश दे, इस न्यायालय ने इस विवर्षय पर अंग्रेजी और भार ीय विवति पर चचा करने क े पश्चा ् कहा: (पृष्ठ 873 पर) "हमारी राय में, कानून में सही च्छिस्र्थीति यह है विक विकसी को यह देखना है विक क्या अवै ा इस मामले की जड़ क जा ी है विक वादी अवै लेनदेन पर भरोसा विकए विबना अपनी कारवाई नहीं कर सक ा है सिजसमें उसने संविवदा र्थीा। यविद अवै ा ुEF या परेशान करने वाला हो, जैसा विक विवविनस्टन द्वारा कहा गया है और वादी को उस अवै ा पर अपना मामला नहीं Fोड़ ा है, ो लोकनीति यह मांग कर ी है विक प्रति वादी को च्छिस्र्थीति का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाविहए। विनतिश्च रूप से सख् दृविष्टकोण अपनाने पर वादी क े आचरण को देखना चाविहए, और उसे क ु F उप-आश्रय का सहारा लेकर या थ्यों को गल रीक े से ब ाकर अवै ा को रोकने की अनुमति नहीं दी जानी चाविहए। हालांविक यविद मामला स्पष्ट हो और अवै ा को कारवाई क े कारण क े रूप में साविब करने की आवश्यक ा न हो, और वादी को अवै उद्देश्य प्राZ करने से पहले पुनर्निवचारिर विकया गया र्थीा, ो जब क विक यह इस रह की घोर प्रक ृ ति का न हो अदाल की अं रात्मा ठेस पहुंचाए, प्रति वादी की यातिचका प्रबल नहीं होनी चाविहए। " सिजन अनुबं ों क े त्तिलए हमारे द्वारा ऊपर ैयार विकया गया सिसद्धां लागू हो ा है, वे संविवदा नहीं हैं जो अवै ा क े सार्थी दागी हैं, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लेविकन ऐसी संविवदा हैं सिजनमें ऐसी श Í हैं जो इ नी अनुतिच और अयुविjयुj हैं विक वे अदाल की अं रात्मा को झकझोर दे े हैं। वे लोकनीति क े विवरो में हैं और उन्हें शून्य घोविर्ष करने की आवश्यक ा है। ”
51. इस न्यायालय ने विदल्ली परिरवहन विनगम बनाम डीटीसी मजदूर कांग्रेस एवं अन्य (1991) 1 एस.सी.सी 600 में बदल े समय में संविवदा विवति और इसक े विनवचन पर विवचार विकया जो इस प्रकार है: “279. संविवदाओं पर तिचट्टी क े पैरा 4 (25 वां संस्करण, खंड 1) में यह कहा गया है विक "संविवदा की स्व ंत्र ा क े वल इस सीमा क एक युविjयुj सामासिजक आदश है विक संविवदा क े पक्षकारों क े बीच सौदेबाजी करने की शविj की समान ा ग्रहण की जा सक ी है और समग्र रूप से विकसी समुदाय क े आर्भिर्थीक विह को आघा न पहुँचाए।"
280. अंसन संविवदा विवति क े पृष्ठ 6 और 7 पर कहा गया विक बदल ी परिरच्छिस्र्थीति यों में संविवदा की स्व ंत्र ा का क्षेत्र इस प्रकार है: "आज यह च्छिस्र्थीति बहु अलग रह से देखी गयी है। संविवदा की स्व ंत्र ा क े वल इस हद क एक उतिच सामासिजक आदश है विक संविवदा क े पक्षकारों क े बीच सौदेबाजी की शविj की समान ा को माना जा सक ा है, और बड़े पैमाने पर समुदाय क े आर्भिर्थीक विह ों को कोई चोट नहीं पहुंचाई जा ी है। एक सामूविहक समाज क े अति क जविटल सामासिजक और औद्योविगक परिरच्छिस्र्थीति यों में, इसने बहु अति क आदशवादी आकर्षण को रोक विदया है। अब यह महसूस विकया जा ा है विक आर्भिर्थीक समान ा अक्सर विकसी भी वास् विवक अर्थी में मौजूद नहीं हो ी है और समुदाय की जन ा का संरक्षण करने क े त्तिलए व्यविjग विह ों को बनाया जाना चाविहए, इसत्तिलए हमारे सामासिजक दृविष्टकोण में और संविवदा क े त्तिलए विव ातियका की नीति में मौत्तिलक परिरव न हुआ है और विवति आज पक्षकारों की स्व ंत्र ा क े सार्थी कई किंबदुओं पर हस् क्षेप कर ा है विक वे क ै सी संविवदा करना चाह ा है। उदाहरण क े त्तिलए, विनयोjाओं और विनयोसिज क े बीच संबं, यह सुविनतिश्च करने क े त्तिलए बनाए गए क़ानूनों द्वारा विवविनयविम विकया गया है विक कमचारी की काय की च्छिस्र्थीति सुरतिक्ष है, विक वह अति रेक क े त्तिखलाफ ठीक से संरतिक्ष है, और वह अपनी सेवा की श w को जान ा है। विकराए क े अति विनयमों, माल की आपूर्ति (लागू श w) अति विनयम, उपभोjा क्र े तिडट अति विनयम और इसी रह क े अन्य अति विनयमों द्वारा जन ा को आर्भिर्थीक दबाव से संरतिक्ष विकया गया है। ये विव ायी प्राव ान विकसी भी विवपरी श w को अध्यारोही करेंगे जो पार्निटयां अपने त्तिलए कर सक ी हैं। इसक े अलावा, विव ातियका ने उद्योग में प्रति स्प ा को बढ़ावा देने और उपभोjाओं क े विह ों की रक्षा क े त्तिलए प्रति बं ात्मक व्यापार व्यवहार अति विनयम, 1956 और फ े यर ट्रेचिंडग एक्ट, 1973 में हस् क्षेप विकया है। यह हस् क्षेप mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आज विवशेर्ष रूप से आवश्यक है जब सामान्य लोगों द्वारा विकये गये संविवदा व्यविjग संवाद का परिरणाम नहीं हैं। एक विनजी व्यविj क े त्तिलए यह संभव नहीं है विक वह अपने करार की श w को विब्रविटश रेलवे बोड क े सार्थी या विकसी स्र्थीानीय विवद्यु प्राति करण क े सार्थी विनपटारा करे। संविवदा का 'मानक रूप' वे विनयम है। उसे या ो टोटो में इस संविवदा की श w को स्वीकार करना चाविहए या विबना स्वीकार विकये चले जाना चाविहए। चूंविक, इस रह की आवश्यक सेवाओं से खुद को वंतिच करना संभव नहीं है, इसत्तिलए व्यविj को उन श w पर स्वीकार करने क े त्तिलए मजबूर विकया जा ा है। इस थ्य को ध्यान में रख े हुए, यह विबल्क ु ल स्पष्ट है विक संविवदा की स्व ंत्र ा अब काफी हद क भ्रम है।"
52. (क). डी.टी.सी. (उपरोj) में इस बा पर जोर विदया गया है विक अनुबं की अवति उतिच होनी चाविहए और कमचारी को यह जानने का अति कार है और वह अति रेक ा से उतिच रूप से सुरतिक्ष है। क ें द्रीय अं दcशीय जल परिरवहन विनगम त्तिलविमटेड एवं अन्य बनाम वी. ब्रोजो नार्थी गांगुली एवं अन्य(1983) 3 एससीसी 156 क े मामले में अनुमोदन कर े हुए न्यायालय ने यह ारिर विकया जो इस प्रकार है: “282. ब्रोजो नार्थी (1986) 3 एससीसी 156 क े मामले में मैडन जे. ने विवस् ृ रूप से संविवदा की अनुतिच या अनुतिच श w से संबंति कानून क े विवकास पर विवचार विकया और मेरे त्तिलए उसी आ ार को पार करना अनावश्यक है। विवद्व न्याया ीश ने विव रणात्मक न्याय की विनहाई पर मनमाना, अनुतिच, और बेलगाम शविj पर भी विवचार विकया या उसमें परिरकच्छिल्प प्रविक्रया की विनष्पक्ष ा या विनष्पक्ष ा पर विवचार विकया। उसक े संबं में सुसंग मामला विवति संयुj राज्य अमेरिरका क े उच्च म न्यायालय और इंग्लैंड में हाउस आफ लाडस और महाद्वीपीय देशों में विवति क े विवकास क े आलोक में विवस् ार से विनपटा गया र्थीा। विनणय पर अनावश्यक बोझ से बचने क े त्तिलए, मैं उसी क को नहीं दोहरा ा हूं। मैं पूरी रह से क से सहम हूं, और इसक े सभी पहलुओं पर विनष्कर्ष विनकाला गया।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ख). सरकारी संविवदाओं क े परिरव न और असंवै ाविनक श w को लागू करने क े राज्य क े अति कार क े संबं में डी.टी.सी (उपरोj) में इस न्यायलय ने पाया: “283. इस समस्या को इस दृविष्टकोण से भी खोला जा सक ा र्थीा विक क्या राज्य संविवदा, संविवति या विनयम इत्याविद क े भाग क े रूप में असंवै ाविनक श Í आरोविप कर सक ा है। हावड विवति समीक्षा 1959- 60 73 क े पेज संख्या में लगे नोट “असंवैविव ाविनक श ” यह उप ारणा की जा ी है विक राज्य संविवदा में असंवै ाविनक श Í अति रोविप करने की शविj से वंतिच है विक राज्य द्वारा चार क्षेत्रों में उदार ा विदखा सक ा है अर्थीा ् (1) कति पय विक्रयाकलापों में लगे रहने क े अति कार को विवविनयविम करना; (2) सरकारी कल्याण कायक्रम का प्रशासन; (3) सरकारी विनयोजन; और (4) संविवदाओं का प्रापण करने की शविj प्राख्यान की गई है यह आगे पेज 160-203 पर इस प्रकार से लगाया गया र्थीा: "वस् ुओं और सेवाओं क े त्तिलए संविवदा करने वाले लोगों को चुनने क े त्तिलए संप्रभु का संवै ाविनक अति कार, वास् व में, सरकार क े सार्थी आर्भिर्थीक व्यवहार से प्राZ होने वाले लाभों को वापस लेने की शविj है। जैसा विक आर्भिर्थीक क्षेत्र में सरकारी गति विवति बढ़ जा ी है, अनुबंति शविj सरकार को कई अब क की अविनयविम गति विवति यों को विनयंवित्र करने में सक्षम बना ी है। इस प्रकार, सरकार क े संबं में, एक विनजी उद्यमी क े रूप में, संवै ाविनक अति कारों को विबगाड़ने की मकी दे ा है। सरकार, जो एक विनजी व्यविj नहीं है, संविव ान द्वारा संविवदा करने की क्षम ा में सीविम है। संघीय संविवदा शविj इन क ृ त्यों क े संविव ान क े प्राति करण 'आवश्यक और उतिच ' पर आ ारिर है, जो उन कायw को करने क े त्तिलए हैं सिजन्हें यह राष्ट्रीय सरकार को आवंविट कर ा है। जब क सरकारी संविवदाओं में विनयमों और श w द्वारा मांगे गए उद्देश्यों को संवै ाविनक रूप से अति क ृ नहीं विकया जा ा है, ब ये श w को शविj क े अति कारा ी प्रयोग क े अन् ग आएंगी।" पुनः पृष्ठ 1603 पर, आगे इस बा पर जोर विदया गया जो इस प्रकार हैः “जब परिरच्छिस्र्थीति यां सरकार क े सार्थी व्यवहार से व्युत्पन्न होने वाले आर्भिर्थीक लाभों को उन लोगों क सीविम कर ी हैं जो संवै ाविनक अति कारों क े प्रयोग को रोक े हैं, ो इन लाभों क े उपभोग में भागीदारी से अपने अति कारों को बनाए रखने वालों का बविहष्कार विनर्षे का उल्लंघन हो सक ा है, विनय प्रविक्रया में विनविह है पांचवें संशो न क े खंड और चौदहवें संशो न क े समान संरक्षण खंड में स्पष्ट लाभ क े सरकारी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सव त्क ृ ष्ट में अनुतिच भेदभाव क े त्तिखलाफ लाभ प्रदान कर ी है। अं में, सरकार क े सार्थी संविवदात्मक संबं ों से प्राZ होने वाले लाभों में भाग लेने से क ु F अति कारों का प्रयोग करने वालों को अक्षम करना दण्ड़ क े रूप में विनय प्रविक्रया में कमी हो सक ा है। उपरोj कारणों में से विकसी क े अमान्य होने से बचने क े त्तिलए, यह विदखाया जाना चाविहए विक अनुबं क े वै उद्देश्यों को सुरतिक्ष करने, इसक े प्रभावी उपयोग को सुविनतिश्च करने, या संभाविव नुकसान से समाज की रक्षा करने क े त्तिलए लागू श Í आवश्यक हैं, सिजसक े परिरणामस्वरूप सरकार और व्यविj क े बीच संविवदात्मक संबं हो सक े हैं।"
284. येल विवश्वविवद्यालय लॉ स्क ू ल क े प्रोफ े सर विगडो क ै लाबेरी ने अपने '' रिरट्रोएच्छिक्टविवटी, पैरामाउंट पावर और संविवदात्मक परिरव न (1961-62) 71 येल लॉ जनल 1191, ने कहा विक सरकार ऐसे अनुबं कर सक ी है जो संविव ान क े विकसी भी विवभिशष्ट खंड या सामान्य कल्याण क े त्तिलए खच करने की शविj क े त्तिलए आवश्यक और उतिच हैं। संघीय सरकार क े पास संविव ान द्वारा विवशेर्ष रूप से या स्पष्ट रूप से विदए गए लोगों क े अलावा कोई शविj, विनविह या संप्रभु नहीं है। पृष्ठ 1197 पर, यह इस प्रकार कहा गया है: '' सरकार सम्यक प्रविक्रया मानकों क े अनुसार काय कर ी है क्योंविक सम्यक प्रविक्रया खंड विनयम क े विबना उस काय क काफी है। सरकारी संविवदाओं का परिरव न विकसी स्व ंत्र देश में ब भी वांFनीय नहीं है जब वे संपत्तिI का 'अपने कब्जे में ' गविठ नहीं कर े हैं या उस प्रकार की मूलभू औतिचत्य क े प्रश्नों पर प्रभाव डाल े हैं जो सम्यक प्रविक्रया में समाविवष्ट हैं सरकार परिरव न कर सक ी है, लेविकन यविद युद्ध या वाभिणज्य उनकी आवश्यक ा है, न विक व्यापक और अति क अल्पकात्तिलक आ ारों पर विक परिरव न द्वारा सामान्य कल्याण की सेवा की जाएगी। कोई भी अन्य विनयम सरकार को क े वल अपनी इEFा पर ऋण न चुकाने की अनुमति देगा। XXX
286. ब्रोजो नार्थी (उपरोj) मामले में श w क े ' कशील ा या विनष्पक्ष ा' क े सिसद्धां पर विवस् ृ विवचार करने क े बाद और संविवदा की श Í संविवदा क े पक्षकारों की सापेक्ष सौदेबाजी की शविj की ुलना क े सार्थी न्यायालय ने यह ारिर विकया विक इन चचाओं से विनष्कर्निर्ष सिसद्दान् जो यहां पर बनाये गये हैं वे अति कार या वे कारण जो अनुEFेद 14 में समान ा क े आदेश और आर्भिर्थीक न्याय को प्राZ करने या उन अति कारों से संग हैं। जो सिसद्धां विन ारिर विकया गया वह यह र्थीा विक अदाल ें उसे लागू नहीं करेंगी और जब ऐसा करने क े त्तिलए कहा जा ा है, ो एक अनुतिच और अनुतिच mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संविवदा या एक अनुबं में एक अनुतिच और अनुतिच अनुतिच खंड, उन दलों क े बीच दज विकया जा ा है जो सौदेबाजी की शविj में समान नहीं है, उसे रद्द कर देंगी। यह उन च्छिस्र्थीति यों पर लागू होगा सिजनमें कमजोर पक्ष एक ऐसी च्छिस्र्थीति में है सिजसमें वह मजबू पाट. द्वारा लगाए गए श w पर क े वल वस् ुओं या सेवाओं या आजीविवका क े सा न प्राZ कर सक ा है या यविद श c न माने ो उसे उपरोj न प्राZ हो। यह भी लागू होगा जहां एक आदमी क े पास कोई विवकल्प नहीं है, या कोई सार्थीक विवकल्प नहीं है, लेविकन संविवदा पर अपनी सहमति देने क े त्तिलए या विन ारिर या मानक रूप में जो श c लगायी गयी हैं उस पर हस् ाक्षर करने या संविवदा क े भाग क े रूप में विनयमों क े समूह स्वीकार करने क े त्तिलए चाहे उस संविवदा या प्रारूप या विनयम में कोई उपखण्ड़ अनुतिच अयुविjयुj साच्छिम्यक,क ै सा भी हो। हालांविक यह सिसद्धां वहां लागू नहीं होगा जहां पर संविवदा करने वाले पक्षकारों की सौदेबाजी की शविj बराबर या लगभग बराबर है या जहां दोनों पक्ष व्यवसायी हैं, और अनुबं एक वाभिणच्छिज्यक लेनदेन है।
287. आज की जविटल दुविनया में अपने विवशाल अवसंरचनात्मक संगठनों क े सार्थी विवशालकाय विनगमों, राज्य अपने उपकरणों और एजेंसिसयों क े माध्यम से उद्योग और वाभिणज्य और सेवा क े क्षेत्र की लगभग हर शाखा में प्रवेश कर चुका है, यहां पर विवभिभन्न परिरच्छिस्र्थीति यां हो सक ी हैं, सिजसक े परिरणामस्वरूप पूण रूप से अनुपा हीन और असमान सौदेबाजी की शविj रखने वाले पक्षकारों क े बीच अनुतिच और अनुतिच सौदेबाजी हो ी है। इन मामलों की न ो गणना की जा सक ी है और न ही पूरी रह से दर्भिश विकया जा सक ा है। अदाल को प्रत्येक मामले को उनक े थ्यों और परिरच्छिस्र्थीति यों अनुरूप देखना चाविहए।'' (प्रभाव वर्ति ) न्यायालय ने विनण. विकया विक यहां पर अनेक प्रकार की परिरच्छिस्र्थीति यां हो सक ी हैं सिजनक े परिरणामस्वरूप अनुतिच और अयुविjयुj सौदेबाजी हो सक ी है, जो एक असमान सौदेबाजी शविj का परिरणाम हैं। प्रत्येक मामले को उसक े स्वयं क े थ्यों और परिरच्छिस्र्थीति यों पर देखना होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ग). डी.सी. (उपरोj) मामले में, न्यायालय ने यह भी ारिर विकया विक अनुEFेद 14 इस प्रकार मनमानी पर अंक ु श लगाने क े त्तिलए लोकनीति पर प्रकाश डाल ा है जो इस प्रकार: “294. बासेश्वर नार्थी बनाम सीआईटी, ए.आई.आर 1959 एससी 149, एसआर दास, मुख्य न्याया ीश ने ारिर विकया विक अनुEFेद 14 लोविक नीति पर आ ारिर है सिजसको सभी राज्यों ने मान्य ा विकया है, और यह राज्य को फटकार लगा ा है जब जब वह अपने ऊपर भारिर दातियत्व का विनवहन नहीं कर ा है।
295. ईपी रायप्पा बनाम विमलनाडु राज्य (1974) 4 एससीसी 3 क े मामले में न्यायमूर्ति भगव ी (पूव कभिर्थी ) यह अभिभविन ारिर विकया विक अनुEFेद 14 एक वंश है जबविक अनुEFेद 16 एक जाति है। अनुEFेद 16 लोक विनयोजन से संबंति सभी मामलों में समान ा क े सिसद्धां को प्रभावी बना ा है इसत्तिलए मूल सिसद्धां जो अनुEFेद 14 और 16 दोनों की जानकारी दे ा है वह भेदभाव क े त्तिखलाफ समान ा और विनर्षे है। "समान ा कई पहलुओं और आयामों वाली एक गति शील अव ारणा है, और इसे पारंपरिरक और सिसद्धां सीमाओं क े भी र “क ुं चन, पक्का और सीविम ” नहीं विकया जा सक ा है। प्रत्यक्षवादी दृविष्टकोण का मानना है विक समान ा मनमानापन क े विवरो में है। वास् व में, समान ा और मनमानापन पक्क े शत्रु हैं; एक गण ंत्र में कानून क े शासन से संबंति है, जबविक दूसरा, एक पूण राजा की सनक और अहंकार है। जहां कोई अति विनयम मनमाना है वहां उसमें यह अं र्निनविह है विक यह राजनीति क क और संवै ाविनक विवति क े अनुरूप नहीं है और इसत्तिलए अनुEFेद 14 क े अति क्रमण में है और यविद यह लोक विनयोजन से संबंति विकसी मामले को प्रभाविव कर ा है ो यह अनुEFेद 16 का भी अति क्रमण कर ा है। मेनका गां ी मामले (1978) 1 एससीसी 248 में, यह आगे कहा गया र्थीा विक युविjयुj ा का सिसद्धां, विवति ः और सार्थी ही दाशविनक रूप में, जो समान ा या मनमानीपन का एक अविनवाय त्व है, गहराई से अनुEFेद 14 में व्याZ है। रमना मामले (1979) 3 एससीसी 489 में, यह विनण. विकया गया र्थीा विक यह विन ारिर करने क े त्तिलए क े वल एक न्यातियक सूत्र है विक क्या प्रश्न में विव ायी या कायकारी कारवाई मनमाना है और इसत्तिलए समान ा से इनकार कर ी है। यविद वग.करण युविjयुj नहीं है और दो श w अर्थीा ् कसंग संबं और सांठगांठ को पूरा नहीं कर ा है ो अति रोविप विव ायी या कायपालक कारवाई स्पष्ट रूप से मनमाना होगी और अनुEFेद 14 क े अ ीन समान ा की गारंटी का उल्लंघन होगा। इसत्तिलए जहां कहीं राज्य की कारवाई में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मनमानी हो ी है, चाहे वह विव ातियका का हो या कायपात्तिलका का हो या अनुEFेद 12 क े अ ीन "प्राति कारी", अनुEFेद 14 " ुरं कारवाई में आ ा है और ऐसे राज्य कारवाई पर रोक लगा े है" वास् व में, कशील ा और गैर-मनमानी की अव ारणा पूरी संवै ाविनक योजना में व्याZ है और एक सुनहरा ागा है जो संविव ान क े पूरे ाने-बाने क े माध्यम से चल ा है।
302. अनुEFेद 14 सामान्य सिसद्धां है जबविक अनुEFेद 311 (2) राज्य क े अ ीन सभी दीवानी सेवाओं क े त्तिलए लागू विवशेर्ष उपबं है। अनुEFेद 311 (2) में प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों को समाविवष्ट विकया गया है किंक ु अनुEFेद 311 क े खंड (2) क े परं ुक में अनुEFेद 311 (2) में वर्भिण प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े प्रव न को ीन च्छिस्र्थीति यों में वर्भिण अपवाद क े रूप में अपवर्जिज विकया गया है। अनुEFेद 14 सपविठ अनुEFेद 16(1) एवं अनुEFेद 311 का सामंजस्यपूण रूप से विनवचन विकया जाए विक अनुEFेद 311 (2) क े परं ुक में अपवाद क े रूप में प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े लागू विकए जाने को अपवर्जिज कर ा है, इसत्तिलए अनुEFेद 311 (2) की उपयोज्य ा को दीवानी सेवाओं क सीविम रखा जाना चाविहए और दनुसार अर्थी लगाया जाना चाविहए। संविव ान क े अनुEFेद 12 क े अ ीन आने वाले सभी कमचारिरयों क े संबंद में, अनुEFेद 14 और अनुEFेद 21 जैसे अन्य प्रासंविगक लेखों की सविक्रय भूविमका को विबना विकसी अवरो क े प्रयोग की अनुमति दी जानी चाविहए, जब क विक वै ाविनक विनयम स्वयं, अनुEFेद 14, 16, 19 और 21 क े अति देश क े अनुरूप, स्पष्ट रूप से ऐसा अपवाद प्रदान नहीं कर े हैं. (प्रभाव वर्ति ) (घ). राज्य की मनमाना कारवाई विफर चाहे वह विव ातियका, कायपात्तिलका या अनुEFेद 12, 14 और 21 क े ह एक प्राति करण इस रह की कारवाई को रोकने क े त्तिलए प्रभाव में आ ी है। न्यायलय ने इसे डीपीसी (उपरोj) में इस प्रकार ारिर विकया: “303. अनुEFेद 19 (1) (F) प्रत्येक नागरिरक को उड्डयन या पेशे आविद क े अति कार का दे ा है, सिजसमें राज्य क े ह रोजगार में जारी रखने का अति कार शाविमल है जब क विक कायकाल को संविव ान क े मौत्तिलक अति कारों में विनविह योजना क े अनुरूप वै रूप से समाZ नहीं विकया जा ा है। इसत्तिलए, यविद विकसी भी प्रविक्रया को रोजगार क े अति कार से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वंतिच करने या विनरं र रोजगार क े अति कार से वंतिच करने क े त्तिलए प्रदान विकया जा ा है, जब क विक सेवाविनवृत्तिI की आयु क आजीविवका क े अति कार का स्रो नहीं है, ो ऐसी प्रविक्रया न्यायोतिच, उतिच और युविjयुj होनी चाविहए। उवरक विनगम कामगार सिसन्ध्री (पंजीक ृ ) बनाम भार संघ (1981) 1 एस. सी. सी. 568 क े मामले में न्यायलय ने विनण. विकया विक अनुEFेद 19 (1) (F) एक व्यापक और सामान्य अति कार प्रदान कर ा है जो सभी व्यविjयों को अपनी पसंद क े विकसी विवभिशष्ट प्रकार क े काय करने त्तिलए उपलब् है। इसत्तिलए जब भी राज्य की कारवाई मनमानीपूण हो ी है - चाहे वह विव ातियका का हो या कायपात्तिलका का हो या अनुEFेद 12 क े, अनुEFेद 14 और 21 अ ीन विकसी प्राति कारी काय करने दे या ऐसी कारवाई को रद्द कर दे। कशील ा और गैर-मनमानी की अव ारणा पूरे संवै ाविनक आयाम में व्याZ हैं और एक सुनहरा ागा है सिजससे पूरा संविव ान कपड़े की भांति बुना है। इसत्तिलए, क़ानून का प्राव ान, विवविनयमन या विनयम जो एक विनयोjा को विकसी कमचारी की सेवाओं को समाZ करने का अति कार दे ा है, सिजसकी सेवा अविनतिश्च काल क है, जब क विक वह विकसी नोविटस क े या उसक े बदले में वे न क े, ब क वह सेवाविनवृत्तिI की आयु प्राZ नहीं कर ले ा है, संविव ान क े अनुEFेद 14, 19 (1) (जी) और 21 क े आदेश क े अनुरूप अनुरूप होना चाविहए। अन्यर्थीा यह अपने आप में शून्य होगा। मो ी राम डेका, ए.आई.आर. 1964 SC 600, क े मामले में न्यायमूर्ति गजेन्द्रगढ़कर,(पूवकभिर्थी वjव्य) अनुEFेद 311 (2) क े अ ीन विनयम 149 (3) और 148 (3) जो विवविनयमों क े विवविनयम 9 (ख) क े सार्थी पैरी मटेरिरया में हैं, को अविवति मान्य बनाने क े पश्चा ्, अनुEFेद 14 क े आलोक में उनकी विवति मान्य ा पर भी विवचार विकया और इस प्रकार अभिभविन ारिर विकया: (एस.सी.आर. पृष्ठ 731) अ: हम इस बा से सं ुष्ट हैं विक इस आ ार पर विक इस आ ार पर आक्षेविप विनयमों की विवति मान्य ा को चुनौ ी विक वे अनुEFेद 14 का उल्लंघन कर े हैं को भी सफल होनी चाविहए। यह उतिच वग.करण क े परीक्षण पर र्थीा क्योंविक यह सिसद्धां ब लागू विकया गया र्थीा। न्यायमूर्ति सुब्बाराव (पूव j कभिर्थी ) अनुEFेद 311 (2) क े अ ीन विनयम को अविवति मान्य करने क े अलावा एक पृर्थीक किंक ु विनणायक विनणय में यह भी अभिभविन ारिर विकया गया र्थीा विक विनयम ने अनुEFेद 14 का भी अति क्रमण विकया है, यद्यविप उस संबं में कोई विवस् ृ चचा नहीं की गई है लेविकन न्यायमूर्ति दास गुZा ने इस पहलू पर विवस् ृ रूप से विवचार विकया और ारिर विकया विकया (एस.सी.आर. पृष्ठ 770) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "उपरोj मामले में विन ारिर सिसद्धां को व मान विनयम में लागू कर े हुए विनयम की जांच करने पर मुझे ज्ञा हुआ विक यह प्राति कारी द्वारा स्वविववेक क े प्रयोग क े मागदशन करने क े त्तिलए कोई सिसद्धान् या नीति नहीं प्रति पाविद कर ा है विक चयन या वग.करण क े मामले में कौन सेवा से मुविj प्रदान करेगा। मनमानी और अविनयंवित्र शविj को प्राति करण में Fोड़ विदया जा ा है ाविक वह विकसी भी व्यविj को चुन सक े सिजसक े त्तिखलाफ कारवाई की जाएगी। इस प्रकार यह विनयम संबंति प्राति कारी को दो रेलवे सेवकों क े बीच भेदभाव करने में सक्षम बना ा है, सिजनमें से दोनों विनयम 148 (3) समान रूप से एक मामले में कारवाई करक े लागू हो े हैं और इसे दूसरे में नहीं ले े हैं। प्राति करण द्वारा विववेकाति कार क े प्रयोग में विकसी मागदशक सिसद्धां क े अभाव में अ ः विनयमों को अभिभखच्छिण्ड कर विदया जाना चाविहए क्योंविक यह संविव ान क े अनुEFेद 14 की अपेक्षाओं का उल्लंघन कर ा है। "308. रमना (1979) 3 एससीसी 489 (एससीसी पृष्ठ 504, पैरा 10)क े मामले में, यह ारिर विकया गया है विक: ''यह वास् व में अकल्पनीय है विक कानून क े शासन द्वारा शासिस लोक ंत्र में, कायपात्तिलका सरकार या उसक े विकसी भी अति कारी को व्यविj क े विह ों पर मनमाना अति कार होना चाविहए।" "अपनाई गई प्रविक्रया न्याय की मांग क े अनुरूप होनी चाविहए। इति हास से प ा चल ा है विक यह हमेशा सूक्ष्म और प्रEFन्न अति क्रमण हो ा है, जो एक ऐसे अEFे कारण क े त्तिलए स्पष्ट रूप से विकया जा ा है जो विनस्संदेह स्व ंत्र ा की नींव को विमटा दे ा है।" (प्रभाव वर्ति ) (ड़). एक विनयोjा इस रीक े से काय नहीं कर सक ा है जो न्याय औतिचत्य और युविjयुj न हो। न्यायालय ने ारिर विकया- "329. इसत्तिलए मैं मान ा हूं विक यद्यविप अदाल ों क े पास विनवचन प्रविक्रया द्ववारा विवति क े संशो न की शविj नहीं है लेविकन विफर भी इसमें संशो न करने की शविj होनी चाविहए ाविक यह विव ातियका क े मंशा क े अनुरूप हो। नीचे पढ़ने का सिसद्धां संविवति क े विनवचन का एक सिसद्धान् है। लेविकन जब विव ातियका द्वारा इस् ेमाल की जाने वाली अपमानजनक भार्षा स्पष्ट, सटीक, और अस्पष्ट है, ो संविव ान में प्रासंविगक प्राव ानों का उल्लंघन कर े हुए, रिरसॉट को जीवन को उड़ाने क े त्तिलए शून्य कानून में पढ़ने क े सिसद्धां क े त्तिलए नहीं विकया जा सक ा है ाविक इसे असंवै ाविनक ा से बचाया जा सक े या प्रदान विकया जा सक े विव ातियका पर अति कार क्षेत्र। इसी प्रकार, सटीक, स्पष्ट और असंविदग् भार्षा का प्रयोग विनयोjा को मनमाना, बेलगाम और अघोविर्ष शविj प्रदान करने क े त्तिलए नहीं की जा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सक ी जो विक जोविक संविव ान क े अनुEFेद 14 और 21 क े ह परिरकच्छिल्प उतिच, न्यायपूण और कसंग प्रविक्रया को और अपीलार्थी. क े अति वjा द्वारा कहे गये रीकों से प्राति कारिरयों को अज्ञा या अविनतिच्च प्रविक्रया, कारण अंविक करने से नकार ा है।' (प्रभाव वर्ति ) (च). डीटीसी (उपरोj) क े मामले में इस न्यायालय ने भी एस जी जयसिंसहानी बनाम भार संघ, ए.आई.आर. 1967 एस. सी. 1427 मामले का अवलम्ब त्तिलया: “331. “इस संदभ में इस बा पर जोर देना महत्वपूण है विक मनमानापूण शविj का अभाव विवति क े शासन की पहली अविनवाय श है सिजस पर हमारी संपूण संवै ाविनक प्रणाली आ ारिर है। कानून क े शासन द्वारा शासिस एक प्रणाली में, स्वविववेक, जब कायकारी अति कारिरयों द्वारा प्रदान विकया जा ा है, ो उसे परिरभाविर्ष सीमाओं क े भी र सीविम विकया जाना चाविहए। इस दृविष्टकोण से कानून क े शासन का अर्थी है विक विनणय ज्ञा सिसद्धां ों और विनयमों क े आवेदन द्वारा विकए जाने चाविहए और, सामान्य रूप से, ऐसे विनणयों की भविवष्यवाणी की जानी चाविहए, और नागरिरक को प ा होना चाविहए विक वह कहां पर है। यविद कोई विनणय विबना विकसी सिसद्धां क े या विनयम क े त्तिलया जा ा है, ो यह अप्रत्याभिश है, और ऐसा विनणय कानून क े शासन क े अनुसार त्तिलए गए विनणय का विवरो कर ा है (देंखें डाइसी: संवै ाविनक विवति प्रस् ावना, 10 वां संस्करण)। न्यायमूर्ति डगलस ने संयुj राष्ट्र बनाम वंडरत्तिलच 342 यू. एस. 98 में कहा गया है विक विवति अपने उच्च म भिशखर पर पहुंच चुकी है, जब इसने विकसी शासक क े असीविम विववेकाति कार से मनुष्य को मुj कर विदया है, जहाँ स्वविववेक विनरपेक्ष है, वहां व्यविj को हमेशा परेशानी उठानी पड़ ी है। इसे इस भाव में स्वान एविनमी ऑफ क ै विप्रास कहा जा सक ा है। स्वविववेक, जैसा विक लॉड मैन्सफील्ड ने जॉन विवल्क्स (1770) 4 बर 2528 क े मामले में पुरा न पद में कहा है, 'इसका अर्थी है विवति द्वारा मागदर्भिश युविjयुj स्वविववेक से है। यह विनयम द्वारा शासिस होना चाविहए न विक विमजाजा द्वारा।: यह मनमानापूण, अस्पष्ट और काल्पविनक नहीं होना चाविहए। " (प्रभाव वर्ति ) (F). न्यायालय ने इस बा पर जोर विदया विक विनणय का अनुमेय होना चाविहए, यह अविनतिश्च नहीं हो सक ा है। विनणय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ज्ञा सिसद्धां ों और विनयमों का प्रयोग कर त्तिलया जाना है। शविj का प्रयोग मनमाना या स्वेEFाचारी नहीं हो सक ा है। इस न्यायालय ने D.T.C (उपरोj) क े मामले में यह अव ारिर विकया है: ˝332. उपयुj मामले में जहां अनुशासनात्मक उपाय, बखास् गी का जुमाना या सेवा से हटाने और ऐसी च्छिस्र्थीति को पूरा करने क े त्तिलए पयाZ साक्ष्य उपलब् नहीं हैं, ऐसा नहीं है विक प्राति करण क े पास विनयम या विनयम बनाने, आ ार या अभिभलेखों पर सामग्री क े सार्थी अवसर की सूचना देने, सिजस पर उसने कायवाही करने का प्रस् ाव विकया र्थीा, आपत्तिIयों और रिरकॉड कारणों पर विवचार करने सिजसक े आ ार पर उसने कायवाही की र्थीी और उसी को सूतिच करने की कोई शविj नहीं है। सामग्री चाहे सिज नी भी कम हो, इसे आ ार प्रस् ु करना चाविहए। इस न्यून म प्रविक्रया को प्रविक्रया का विहस्सा बनाया जाना चाविहए, क्योंविक शविj का प्रयोग अEFे और प्राति कारी को ज्ञा कारणों से प्रदI प्रासंविगक उद्देश्यों से परे स्वेEFाचारी या द्वेर्षपूण उद्देश्यों क े त्तिलए दुरुपयोग की जा सक ी है। संसूचना क े विबना कारणों को दज विकया जाना सदैव संदेह क े सार्थी देखा जाएगा। इसत्तिलए, मैं मान ा हूं विक विबना विकसी विदशा- विनदcश क े व्यापक विववेक क े सार्थी शविj प्रदान करना, विबना विकसी उतिच, न्यायपूण या कसंग प्रविक्रया क े संवै ाविनक रूप से अनुEFेद 14, 16 (1), 19 (1) (जी) और 21 की दृविष्ट से अस्वीकाय है। पठन क े सिसद्धां को ऐसी च्छिस्र्थीति क नहीं बढ़ाया जा सक ा है।” (प्रभाव वर्ति )
53. उपरोj सिसद्धां ों क े आ ार पर, यह स्पष्ट है विक एक बार क ें द्रीय विनदेशक मंडल ने पेंशन का भुग ान करने क े त्तिलए ज्ञापन स्वीकार कर त्तिलया र्थीा, यविद इसने ज्ञापन में प्रस् ाव को स्वीकार नहीं कर विकया र्थीा ो यह स्पष्ट रूप से कहा जाना चाविहए विक वह सरकार और आईबीए क े प्रस् ावों को स्वीकार करने को ैयार नहीं र्थीा और उसी को अस्वीकार कर ा है। एक बार जब इसने ज्ञापन में विनर्निदष्ट प्रस् ावों को मंजूरी दे दी, जो आईबीए क े पत्र और भार सरकार क े फ ै सले क े आ ार पर र्थीे, ो यह इसे पूरी रह लागू mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने क े त्तिलए बाध्य र्थीा। उसी को स्वीकार कर े हुए, एसबीआई पर 15 साल की सेवा पूरी होने पर पेंशन का भुग ान करने क े त्तिलए बाध्यकारी दातियत्व बनाया गया र्थीा। यह इस थ्य पर भरोसा करक े अपने स्वयं क े विनणय को अमान्य नहीं कर सक ा है विक वह विनयम में संशो न करने में विवफल रहा, जबविक अन्य बैंकों ने बाद में इसे पूवव्यापी प्रभाव क े सार्थी विकया। वे विनयम में संशो न करने या न करने क े त्तिलए विवशेर्ष श्रेष्ठ शविj क े आ ार पर अन्यर्थीा वै विनणय को अमान्य नहीं कर सक े हैं और गल रीक े से काय कर सक े हैं और गल बयानी क े आ ार पर पूरे अनुबं को अनुतिच बना सक े हैं। इस प्रस् ाव को अस्वीकार करना विनदेशक मंडल पर र्थीा। एक बार जब इसने ज्ञापन में प्रस् ाविव 15 साल की सेवा पूरी करने पर पेंशन का भुग ान करने क े प्रस् ाव को स्वीकार कर त्तिलया, हालांविक इस योजना की एसबीआई द्वारा व्याख्या करने की कोभिशश की जा ी है विक पेंशन को स्वीकाय होना चाविहए जैसा विक विनयम में उपबंति है जो आनुपाति क पेंशन को संदर्भिभ कर ा है। ओ.पी स्वणकार एंव अन्य ( उपरोj ) में इस न्यायालय द्वारा उल्लेख विकया गया है, और भार सरकार/आईबीए द्वारा जो विनणय त्तिलया गया र्थीा, उसे क ें द्रीय विनदेशक मंडल द्वारा अपनाया गया र्थीा न विक Fीना गया र्थीा। संविवदात्मक प्रक ृ ति की योजना को संदभ में और थ्यों की पृष्ठभूविम में पढ़ा जाना चाविहए और विनदेशक मंडल द्वारा क्या हल विकया गया है। जब ज्ञापन और योजना को एक सार्थी पढ़ा जा ा है, ो पेंशन की स्वीकाय ा क े संबं में कोई अस्पष्ट ा नहीं है। अस्पष्ट ा क े मामले में और भले ही मामले क े थ्यों की पृष्ठभूविम में दो व्याख्याएं संभव हों, कमचारी क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पक्ष वाली अपनायी जानी चाविहए और र्थीाकभिर्थी 11. 1. 2000 विदनांविक स्पष्टीकरण चाहे पेंशन को अस्वीकार कर ी प्र ी हो अप्राप्य, अवै और विवति विवरुद्ध मानी जानी चाविहए।
54. वीआरएस योजना की पात्र ा उपखंड से यह स्पष्ट है विक 15 साल की पेंशन योग्य सेवा वाले कमचारिरयों क े त्तिलए पात्र ा प्रदान की जा ी है और वे योजना में प्रदान विकए गए लाभों क े हकदार होंगे। पात्र ा खंड, जब लाभ प्रदान करने वाले खंडों क े सार्थी पढ़ा जा ा है, अर्थीा, योजना क े उपखंड 5 और 6, क े सार्थी, ब विकसी भी संदेह क े त्तिलए कोई जगह नहीं Fोड़ ा है और यह स्पष्ट कर ा है विक एसबीआई द्वारा प्रदI 15 साल की सेवा वाले कमचारिरयों को योजना क े लाभ का दावा करने क े त्तिलए पात्र माना गया र्थीा। यह वीआरएस योजना में प्राव ान नहीं र्थीा विक 20 साल की सेवा पूरी करने वाले वृत्तिI-भोगी पेंशन लाभ क े हकदार होंगे। पूव उपदान, ग्रेEयुटी, पेंशन और अवकाश नकदीकरण जैसे पात्र व्यविjयों को पेंशन और अन्य लाभ प्रदान करक े कमचारिरयों को आकर्निर्ष करने क े त्तिलए इस योजना को विवशेर्ष रूप से बनाया गया र्थीा। पेंशन से वंतिच होना उन्हें लाभ क े त्तिलए अयोग्य बना देगा और पात्र ा उपखंड को रद्द कर देगा।
55. एसबीआई की ओर से कहा गया है विक मसौदा योजना ने कहीं भी यह विन ारिर नहीं विकया है विक 15 साल की सेवा पात्र ा होगी या 15 साल की सेवा पूरी होने पर, अवलंबी पेंशन क े त्तिलए पात्र होगा, थ्यात्मक रूप से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गल है। यह भौति क परिरच्छिस्र्थीति यों, दस् ावेजों, और पत्राचार से स्पष्ट है विक विनणय एसबीआई क े क ें द्रीय विनदेशक मंडल सविह सभी स् रों पर त्तिलया गया र्थीा, विक 15 साल की सेवा पूरे होने पर कमचारिरयों को पेंशन का लाभ विदया जाना र्थीा। उस परिरप्रेक्ष्य में, एसबीआई की योजना की अस्पष्ट ा, यविद कोई हो, का कोई फायदा नहीं हो सक ा है क्योंविक यह संदेह की च्छिस्र्थीति से परे स्पष्ट है विक 15 साल की सेवा पूरी होने पर अनुग्रह राभिश क े सार्थी पेंशन विदया जाना योजना का मुख्य भाग र्थीा। यह इस कारण से है विक 15 साल की सेवा पूरी करने वाले वृत्तिI-भोगी को लाभ विदया जाना र्थीा, अन्य राष्ट्रीयक ृ बैंकों क े त्तिलए लागू विवविनयमन 28 को संशोति करने का प्रस् ाव विकया गया र्थीा जैसा विक 29.12.2000 विदनांविक आईबीए और 5. 9. 2000 विदनांविक सरकार क े पत्र में परिरलतिक्ष हो ा है। बाद में, योजना को पहले ही सही रीक े से लागू करने क े बाद 2002 में विवविनयमन में संशो न विकया गया र्थीा। इसमें कोई संदेह नहीं र्थीा विक वीआरएस 15 साल की सेवा पूरी करने वाले सभी पात्र कमचारिरयों को लाभ देना र्थीा। एसबीआई क े विदनांक 29. 12. 2000 क े पत्र से यह स्पष्ट र्थीा विक आईबीए क े विदशाविनदcशों को क ें द्रीय विनदेशक मंडल ने अपनी बैठक में विदनांक 27. 12. 2000 को अनुमोविद विकया र्थीा। एसबीआई उप प्रबं विनदेशक-सह-एसडीओ क े विदनांक 29.
12. 2000 क े पत्र का पैरा 2 विनम्नव उद्धृ है: "2. दनुसार, क ें द्रीय विनदेशक मंडल ने 27. 12. 2000 को आयोसिज अपनी बैठक में, बैंक क े कमचारिरयों क े त्तिलए स्वैच्छिEFक सेवा विनवृत्तिI योजना, अर्थीा ् एसबीआई स्वैच्छिEFक सेवा विनवृत्तिI योजना (एसबीआईवीआरएस) को अपनाने और लागू करने क े त्तिलए अनुमोदन प्रदान विकया है। आईबीए द्वारा जारी विदशा-विनदcशों को ध्यान में रख े हुए '' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एसबीआईवीआरएस '' योजना बनाई गई है। इस योजना की एक प्रति अनुलग्नक 'बी' में रखी गई है। (प्रभाव वर्ति )
56. जैसा विक ओ.पी. स्वणकार एंव अन्य (उपरोj), मामले में उल्लेख विकया गया है, बैंक का कर्थीन यह र्थीा विक यह एक संविवदात्मक योजना र्थीी। विनयमों क े अनुसार,''पेंशन'' पद क े वल आनुपाति क पेंशन को य करने क े प्रयोजन क े त्तिलये ही र्थीा। यह स्पष्ट रूप से उन कमचारिरयों क े त्तिलए योजना खोलने क े त्तिलए र्थीा सिजन्होंने 15 साल की सेवा दी है। इस योजना में यह उपबं नहीं विकया गया र्थीा विक पेंशन क े त्तिलए पात्र ा प्राZ करने क े त्तिलए विनयमानुसार 20 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा प्रदान करने क े त्तिलए अवलंबी की आवश्यक ा र्थीी। एसबीआई की ओर से प्रस् ु क स्वीकार विकए जाने योग्य नहीं है। यह ओ.पी. स्वणकार एंव अन्य (उपरोj) मामले क े पैरा 89 में ऊपर उद्धृ विकया गया र्थीा विक कमचारी को 15 साल की सेवा क े आ ार पर पेंशन लाभ क े त्तिलए आगे बढ़ना र्थीा। न्यायालय ने ओ.पी. स्वणकार एंव अन्य (उपरोj) मामले में आगे कहा विक यह योजना इस प्रकार प्रव नीय है: ˝92. हालांविक, भार ीय स्टेट बैंक का मामला र्थीोड़ा भिभन्न है। सबसे पहले, भार ीय स्टेट बैंक ने योजना में संशो न नहीं विकया र्थीा। यह, जैसा विक यहां देखा गया है, यहां क विक 15 फरवरी क े बाद (sic द्वारा) आवेदनों को वापस लेने की अनुमति है। भार ीय स्टेट बैंक द्वारा जारी की गई योजना में एक उपखंड (उपखंड 7) र्थीा सिजसमें स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए आवेदन पर विवचार करने क े रीक े और माध्यम को रखा गया र्थीा। प्रासंविगक खंड, जैसा विक यहां ब ाया गया है, एक प्रव नीय अति कार बना ा है। यविद स्टेट बैंक अपनी पसंदीदा नीति का पालन करने में विवफल रहा, ो इसे विवशेर्ष रूप से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवति न्यायालय द्वारा लागू करवाया जा सक ा र्थीा। जो विक क ु F विवचारण क े बराबर होगा। "
57. एक अनुबं का गठन कर े समय, समग्र योजना, ज्ञापन और पत्रों की भार्षा और त्संबं ी परिरच्छिस्र्थीति यों को यह प ा लगाने क े त्तिलए पढ़ा जाना चाविहए विक क्या विनदेशक मंडल द्वारा अपने संकल्प विदनांक 27. 12. 2000 में विकए गए विकसी भी विवचलन का महत्वपूण महत्व है। इस मामले में, आईबीए योजना क े अनुमोदन क े अनुसार विनणय त्तिलया गया र्थीा। इसक े बाध्यकारी प्रभाव को इस आ ार पर नहीं बदला जा सक ा है विक कौन से पक्ष आगे कहने क े त्तिलए चुन े हैं, और न ही उन्हें बाहर विनकलने की अनुमति दी जा सक ी है। अनुबं को समग्र रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है। यह पढ़ने पर स्पष्ट है विक चयनक ा बैंक क े पेंशन विवविनयमों क े ह आनुपाति क पेंशन क े त्तिलए पात्र होंगे और इसत्तिलए, बैंक को स्पष्ट ा की कमी का जोत्तिखम है, यविद कोई हो।
58. बैंक ऑफ इंतिडया एंव अन्य वी.क े. मोहनदास एंव अन्य, (2009) 5 एससीसी 313 क े मामले में, सिजसमें कई अन्य बैंक भी पक्षकार र्थीे, यह प्रश्न वीआरएस, 2000 की प्रक ृ ति क े रूप में उत्पन्न हुआ। 2002 में विवविनयमन 28 में विकए गए संशो न, 15 साल की सेवा प्रदान कर े हुए न्यायालय ने उद्देश्यों को नोट विकया। यह योजना आ ार नवम्बर-विदसंबर, 2000 और जनवरी 2001 में यूविनयन बैंक ऑफ इंतिडया में खुली र्थीी। कमचारिरयों ने दावा विकया विक सिजन्होंने 20 वर्ष की सेवा पूरी की र्थीी, वे उj बैंकों को लागू कमचारी पेंशन विवविनयम, 1995 क े विवविनयमन 29 (5) में विनविह प्राव ानों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े लाभ क े हकदार र्थीे। उन्होंने दावा विकया विक विवविनयमन 29 क े ह 20 साल की अहकारी सेवा पूरी करने क े बाद, अति क म 33 वर्षw क े अ ीन सेवा कायकाल में 5 साल की वृतिद्ध क े हकदार र्थीे, जो उन्हें इस आ ार पर नहीं विदया गया र्थीा विक वीआरएस का लाभ 15 साल की सेवा पूरी करने क े त्तिलए उपलब् र्थीा जैसा विक संशोति विवविनयमन 28 में प्रदान विकया गया है, और विवविनयमन 29 लागू नहीं र्थीा। इस न्यायालय अव ारिर विकया विक वीआरएस का लाभ 15 साल की सेवा पूरी करने वाले कमचारिरयों क े त्तिलए उपलब् र्थीा, लेविकन 20 साल की सेवा पूरी करने पर उपलब् अति रिरj लाभ भी स्वीकाय र्थीा जैसा विक विवविनयमन 29 (5) में प्रदान विकया गया र्थीा।
59. वीआरएस की उपरोj समान योजना पर विवचार कर े हुए, इस न्यायालय ने शब्दों क े महत्व क े आ ार पर अनुबं क े विनमाण क े संबं में ारिर विकया। पक्षकारों क े आशय का प ा उस भार्षा से लगाया जाना चाविहए सिजसका उन्होंने उपयोग विकया है और आसपास की परिरच्छिस्र्थीति यों क े मद्देनजर विवचार विकया है, और इसक े ह काय करने में पार्निटयों द्वारा अपनाए गए आचरण क े अध्ययन द्वारा अर्थी को नहीं बदला जा सक ा है। क े. मोहनदास (उपरोj) में यह न्यायालय इस प्रकार अव ारिर विकया गया: ˝28. एक अनुबं का सही विनमाण उपयोग विकए गए शब्दों क े महत्व पर विनभर होना चाविहए, न विक पक्षकारों क े बाद क्या कहना है। न ही अनुबं क े विक्रयांवयन में पक्षकारों का बाद का आचरण अनुबं में प्रयुj स्पष्ट और अस्पष्ट शब्दों क े सही प्रभाव को प्रभाविव कर ा है। पक्षकारों क े आशय का इस् ेमाल उस भार्षा से विकया जाना चाविहए जो उन्होंने इस् ेमाल की है, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आसपास की परिरच्छिस्र्थीति यों और अनुबं की वस् ु क े प्रकाश में माना जा ा है। अनुबं की प्रक ृ ति और उद्देश्य पार्निटयों क े आशय का प ा लगाने में एक महत्वपूण मागदशक है।
29. ओटोमन बैंक ऑफ विनकोसिसया बनाम ओनस चविक्रयन में, लॉड राइट ने ये गंभीर ा से अवलोकन विकया: (एआईआर पी. 29) “.... विक यविद संविवदा स्पष्ट और असंविदग् है, ो उसका सही प्रभाव क े वल पक्षकारों द्वारा उसक े अ ीन काय करने में अपनाए गए आचरण क े अनुक्रम द्वारा नहीं बदला जा सक ा।”
30. गंगा सरन बनाम फम राम चरण राम गोपाल एआईआर 1952 एससी 9 क े मामले में, इस न्यायलय की चार-न्याया ीश पीठ ने कहा: (एआईआर पी. 11, पैरा 6) “6..... चूंविक एक समझौ े का वास् विवक विनमाण उपयोग विकए गए शब्दों क े महत्व पर विनभर होना चाविहए और इस बा पर नहीं विक बाद में पक्षकार क्या कहना चाह े हैं, यह संदर्भिभ करना अनावश्यक है विक पार्निटयों ने इसक े बारे में क्या कहा है।
31. यह एक अनुबं क े विनमाण का एक अEFी रह से मान्य ा प्राZ सिसद्धां भी है विक इसे अपने कई उपखंडों क े सही अर्थी का प ा लगाने क े त्तिलए एक पूरे क े रूप में पढ़ा जाना चाविहए और प्रत्येक उपखंड क े शब्दों की व्याख्या की जानी चाविहए ाविक उन्हें सामंजस्य में लाया जा सक े । अन्य प्राव ान यविद उस व्याख्या क े अर्थी में कोई किंहसा नहीं हो ी है सिजसक े त्तिलए वे स्वाभाविवक रूप से अति संवेदनशील हो े हैं। (पूव Iर रेलवे क ं पनी बनाम लॉड हेन्चिंस्टग्स, 1900 एसी 260)
60. इस योजना में स्पष्ट ा की कमी क े संबं में, क े. मोहनदास (उपरोj) क े मामले में इस न्यायालय ने विवति क मानदण्ड maxim verba chartarum fortius accipiuntur contra proferentem (विवलेख क े शब्दों का विनवचन उसक े विवरूद्ध अति क कडाई से करना चाविहए जो उसका प्रयोग कर ा है।) क े आ ार पर ारिर विकया विक जो संविवदात्मक योजना में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA श w क े विनमाण क े त्तिलए सिजम्मेदार र्थीे,वही स्पष्ट ा की कमी का जोत्तिखम वहन कर े है। न्यायालय ने अव ारिर विकया: ˝32. मौत्तिलक च्छिस्र्थीति यह है विक संविवदात्मक योजना में श w क े विनमाण क े त्तिलए बैंक ही सिजम्मेदार र्थीे विक उस योजना क े ह स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े विवकल्प पेंशन विवविनयम, 1995 क े ह पेंशन क े त्तिलए पात्र होंगे, और इसत्तिलए, वे जोत्तिखम को सहन कर े हैं स्पष्ट ा की कमी, यविद कोई हो। यह एक अनुबं क े विनमाण का एक प्रसिसद्ध सिसद्धां है विक यविद एक पक्ष द्वारा लागू की गई श Í अस्पष्ट हैं, ो उस पक्षकार क े त्तिखलाफ एक व्याख्या को प्रार्थीविमक ा दी जा ी है (विवलेख क े शब्दों का विनवचन उसक े विवरूद्ध अति क कडाई से करना चाविहए जो उसका प्रयोग कर ा है।)
33. पेंशन क े संबं में वीआरएस 2000 लाने क े समय बैंकों का आशय क्या र्थीा? क्या इसमें प्रकट रूप से स्पष्ट नहीं विकया गया र्थीा विक स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI पाने वाले कमचारी पेंशन विवविनयमों क े अनुसार पेंशन क े त्तिलए पात्र होंगे। यविद आशय विवविनयमन 29 और विवशेर्ष रूप से उप-विवविनयमन (5) में प्रदान की गई पेंशन देने का नहीं र्थीा, ो वे योजना में ही ऐसा कह सक े र्थीे। आत्तिखरकार, वीआरएस 2000 क े विनमाण में बहु विवचार विकया गया र्थीा, और यह अत्यति क विवचार-विवमश क े बाद ैयार विकया गया र्थीा। पेंशन विवविनयमों क े अनुसार पेंशन प्रदान कर े समय जो एकमात्र प्राव ान ध्यान में रह सक ा र्थीा, वह विवविनयमन 29 र्थीा। जाविहर है, कमचारिरयों को भी, विवविनयमन 29 (5) का लाभ र्थीा, जब उन्होंने स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए भ. विवविनयमन 28 क े रूप में पेश विकया र्थीा, जैसा विक उस समय मौजूद र्थीा, विबल्क ु ल भी लागू नहीं र्थीा। 30 से 34 क कोई भी विवविनयम आक ृ ष्ट नहीं हुआ।" (प्रभाव वर्ति )
61. क े. मोहनदास (उपयुj) क े मामले में न्यायालय ने यह क विदया विक विवविनयम 28 क े वल 15 वर्ष की पात्र ा प्रदान करने क े त्तिलए लागू होगा जैसा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विक अति विनयम 1995 क े संशो न क े माध्यम से उपबंति है और यह अभिभविन ारिर विकया विक जैसे बैंक अनुEFेद 12 क े अर्थी में “राज्य” हैं, यह ारा 29 (5) क े फायदे को नकारने क े त्तिलए उनकी ओर से एक मनमानी कायवाही होगी और स्कीम और पेंशन विवविनयमों क े त्तिलए सामंजस्यपूण विनमाण होना होगा, इस प्रकार: "35. हम चिंचति हैं; यविद संशोति विवविनयमन 28 को लागू विकया जा ा है, ो यह अनुतिच होगा, जो प्रकाश में नहीं आया र्थीा और जब योजना बनाई गई र्थीी ो बैंकों का आशय नहीं र्थीा। अपील क े व मान बैच क े बैंक सावजविनक क्षेत्र क े बैंक हैं और संविव ान क े अनुEFेद 12 क े अन् ग "राज्य" हैं और संविवदा संबं ी मामलों में भी उनकी कायवाही युविjयुj होनी चाविहए, ऐसा न हो जैसा विक ओ. पी. स्वणकार (2003) 2 एस. सी. सी. 721 में देखा गया है, उसे संविव ान क े अनुEFेद 14 क े रोर्ष को आक ृ ष्ट करना चाविहए।
36. वीआरएस 2000 की श w की कोई भी व्याख्या, चाहे प्रक ृ ति में संविवदात्मक हो, विनष्पक्ष ा की परीक्षा को पूरा करना चाविहए। यह इस रह से माना जाना चाविहए विक सावजविनक क्षेत्र क े बैंकों की ओर से मनमानी और अ कसंग होने से बचा जा ा है, सिजन्होंने अपनी जनशविj क े अति कारों क े अति कार क े उद्देश्य से वीआरएस 2000 लाया र्थीा। बैंकों ने अति शेर्ष जनशविj Fोड़ने का विनणय त्तिलया। विवशेर्ष योजना (वीआरएस 2000) क े विनमाण से, बैंकों का उद्देश्य अपनी शविj को युविjसंग बनाने क े अपने उद्देश्य को प्राZ करना र्थीा क्योंविक वे आवश्यक ा से अति क कमचारिरयों से युj र्थीे। इस प्रकार, विवशेर्ष योजना स्वैच्छिEFक सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए कमचारिरयों को लुभाने क े त्तिलए उन्मुख र्थीी। इस पृष्ठभूविम में, पार्निटयों क े बीच जो विवचार करना र्थीा, वह महत्व और योजना क े त्तिलए सामंजस्यपूण विनमाण को मान ा है, और पेंशन विवविनयम, इसत्तिलए, देना होगा।
37. विवविनयमन 28 में संशो न, सबसे अEFे रूप में कहा जा सक ा है विक कमचारिरयों को 15 साल की सेवा या अति क लेविकन 20 साल से कम सेवा क े सार्थी शाविमल करने का आशय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है। यह आशय भार सरकार, विवI मंत्रालय, आर्भिर्थीक मामलों क े विवभाग (बैंकिंकग प्रभाग) द्वारा कार्निमक सलाहकार, भार ीय बैंक संघ को भेजे गए 5-9-2000 विदनांविक क े संचार से परिरलतिक्ष हो ा है। " (प्रभाव वर्ति ) इसका म र्थीा विक 1995 क े विवविनयमन 28 में संशो न 15 साल की सेवा को शाविमल करने का आशय है, अर्थीा, 15 साल की सेवा वाले कमचारी सिजन्होंने 20 साल की सेवा पूरी नहीं की है। विनयम में संशो न करने क े त्तिलए इसी रह की कायवाही एसबीआई द्वारा की जानी र्थीी, लेविकन यह एक समान योजना शुरू करने क े बाद इसे लेने में विवफल रहा। इसने यह अविनतिश्च बना विदया विक विनय ति भिर्थी क े अनुसार विनयम की च्छिस्र्थीति अर्थीा,
31. 3. 2001. वह हो सक ा है। लेविकन यह स्पष्ट र्थीा विक 15 साल की सेवा क े सार्थी अवलंबी लाभ क े त्तिलए पात्र र्थीा जैसा विक योजना में ही प्रदान विकया गया र्थीा। लाभ उपखंड को पात्र ा मानदंड क े सार्थी पढ़ा जाना चाविहए। एक बार जब एसबीआई द्वारा पूरी रह वीआरएस ैयार विकया गया और अपनाया गया, ो उसने अपने आप में एक पूण संविवदात्मक पैक े ज का गठन विकया।
62. जैसा विक एसबीआई की ओर से आग्रह विकया जा ा है यविद अनुबं अति विनयम की ारा 23 को लागू विकया जा ा है, ो यह बैंक क े त्तिलए क ै से उपयोगी है, यह समझ में नहीं आ ा है। यविद यह माना जा ा है विक मूल योजना विवति /विनयमों क े विवरूद्ध र्थीी, ो पूरी योजना विगर जाएगी। एक बार जब इसने योजना को अपनाया, ो आवेदन आमंवित्र विकए और कमचारिरयों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ने उस पर कायवाही की और योजना क े आ ार पर सेवाविनवृत्तिI हुए, उन्हें एक झटक ें में नहीं Fोड़ा जा सक ा है। यविद इसकी क स्वीकार कर ली जा ी है, ो योजना संपक अति विनयम की ारा 23 का उल्लंघन हो जा ी है, बैंक को बहु ही योजना क े उल्लंघन क े परिरणाम भुग ने होंगे और कमचारिरयों को बहाल करने और उन्हें वे न और अन्य लाभों का भुग ान करने की आवश्यक ा होगी। हालांविक, एसबीआई ने इस योजना को स्वीकार कर त्तिलया, यह उसी रह की वीआरएस योजना क े अनुरूप विनयमों को लाने क े त्तिलए अवलंविब र्थीा जैसा विक अन्य बैंकों द्वारा विकया गया र्थीा। एसबीआई ने विदनांक 27. 12. 2000 को विबना विकसी श योजना को स्वीकार कर त्तिलया। इस प्रकार, विवसंगति प्रस् ाविव करने और विनयमों में संशो न करने क े त्तिलए बैंक की विनच्छिष्क्रय ा का परिरणाम र्थीा। ऐसे परिरदृश्य में, एसबीआई की कायवाही संविव ान क े अनुEFेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन है। स्वयं द्वारा बनाई गई च्छिस्र्थीति बैंक को मनमानी कायवाही का समर्थीन देने क े त्तिलए लाभ आ ारिर नहीं होने वाली है। यविद आवश्यक हो, ो अपने त्तिलए च्छिस्र्थीति को उबारने क े त्तिलए, बैंक विनयमों में संशो न करक े लाभ का विवस् ार करने क े त्तिलए बाध्य र्थीा। एसबीआई द्वारा ही कानून का उल्लंघन विकया गया है, इसकी कायवाही मनमानी है और इसे अपने स्वयं क े गल लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है।
63. पेंशन को मनमाने ढंग से विनपटाया नहीं जा सक ा है और अनुतिच रीक े से नकारा नहीं जा सक ा है। पेंशन की अव ारणा को डी.एस. नाकरा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एंव अन्य बनाम भार संघ, (1983) 1 एससीसी 305 क े मामले में माना गया र्थीा। पेंशन का अति कार अदाल क े माध्यम से लागू विकया जा सक ा है, यह देखा गया: "20. पेंशन की पूव विन ारिर ारणा एक इनाम होने क े ना े, विनयोjा की इEFा या अनुग्रह क े आ ार पर एक उतिच भुग ान एक अति कार क े रूप में दावा नहीं विकया जा सक ा है और इसत्तिलए, न्यायालय क े माध्यम से पेंशन का कोई अति कार लागू नहीं विकया जा सक ा है। देवकीनंदन प्रसाद बनाम विबहार राज्य (1971) 2 एससीसी 330 में संविव ान पीठ, सिजसमें इस न्यायालय ने आति कारिरक रूप से फ ै सला सुनाया विक पेंशन एक अति कार है और इसका भुग ान सरकार क े विववेक पर विनभर नहीं कर ा है, लेविकन विनयमों द्वारा शासिस है और उन विनयमों क े भी र आने वाला एक सरकारी कमचारी पेंशन का दावा करने का हकदार है। आगे यह अभिभविन ारिर विकया गया विक पेंशन का अनुदान विकसी क े विववेकाति कार पर विनभर नहीं कर ा है यह क े वल सेवा और अन्य संबद्ध मामलों क े संबं में राभिश को विन ारिर करने क े उद्देश्य से है जो प्राति करण क े त्तिलए उस प्रभाव क े त्तिलए एक आदेश पारिर करना आवश्यक हो सक ा है, लेविकन अति कारी को पेंशन प्रवाह प्राZ करने का अति कार ऐसे विकसी भी आदेश क े कारण नहीं बच्छिल्क विनयमों क े आ ार पर हो सक ा है। पंजाब राज्य बनाम इकबाल सिंसह, (1976) 2 एससीसी 1 में इस दृविष्टकोण की विफर से पुविष्ट की गई।
22. सामं ी से कल्याण में परिरव न क े दौरान और समाजवादी सोच क े रूप में सम्मान हासिसल विकया। वृद्धावस्र्थीा में सुरक्षा प्रदान करने क े त्तिलए राज्य की बाध्य ा, अवांFनीय इEFा से एक पलायन को मान्य ा दी गई र्थीी और पहले चरण की पेंशन क े रूप में न क े वल विपFली सेवा क े त्तिलए एक इनाम क े रूप में माना गया र्थीा, बच्छिल्क बुढ़ापे में विवनाश से बचने क े त्तिलए कमचारी की मदद करने क े त्तिलए माना गया र्थीा। पारस्परिरक लेनदेन यह र्थीा विक जब कमचारी शारीरिरक और मानसिसक रूप से स क र्थीा, ो उसने सवश्रेष्ठ गुरु का प्रति पादन विकया, सिजससे उसे जीवन क े प न में उसकी देखभाल करने की उम्मीद र्थीी। इसत्तिलए, एक सेवाविनवृत्तिI प्रणाली क े वल लाभ प्रदान करने क े उद्देश्य से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मौजूद है। सेवाविनवृत्तिI लाभों की अति कांश योजनाओं में, सामान्य सेवाविनवृत्तिI क े त्तिलए योग्य सभी को समान राभिश प्राZ हो ी है। (ब्लेकनी, पी. 33 द्वारा सावजविनक कमचारिरयों क े त्तिलए सेवाविनवृत्तिI प्रणाली देखें) इस न्यायालय ने देखा विक प्रस् ावना में परिरकच्छिल्प समाजवादी राज्य का प्रमुख उद्देश्य असमान ा को समाZ करना है। समाजवाद का मूल ढांचा कामकाजी लोगों को जीवन क े अच्छिन् म समय में सुरक्षा प्रदान करना है और विवशेर्ष रूप से शुरू से अन् क सुरक्षा प्रदान कर ा है जब कमचारिरयों ने जीवन भर में सेवा प्रदान की है, ो उन्हें बुढ़ापे में विनराभिश्र, एक अविनयंवित्र रीक े से कायवाही करक े और पूरी बाध्य ा क े त्तिलए चूक क े त्तिलए एक सुविनतिश्च नहीं विकया जा सक ा है। हालांविक कानून क े त्तिखलाफ विववं नहीं हो सक ा है, लेविकन जब विकसी बैंक को इसमें संशो न करने की शविj र्थीी, ो वह अपनी विनच्छिष्क्रय ा का आश्रय नहीं ले सक ा है और एसबीआई को अन्य बैंकों की खोज का पालन करना चाविहए र्थीा और इसे स्वीकृ योजना विकए जाने क े समान विनष्पक्ष रीक े से काय करने की आवश्यक ा र्थीी ।
64. परिरणामस्वरूप, हमारा विवचार है विक सिजन कमचारिरयों ने 15 साल या अति क की सेवा कट-ऑफ की ारीख पर पूरी कर ली है, वे एसबीआई पेंशन फ ं ड विनयमों क े अनुसार एसबीआई वीआरएस क े ह आनुपाति क पेंशन क े हकदार र्थीे। इस रह क े सभी समान कमचारिरयों को 15 साल की सेवा पूरी होने पर वीआरएस क े ह सेवाविनवृI होने वाले लाभों को न्यायालय में भाग लेने की आवश्यक ा क े विबना बढ़ाया जाए। हालांविक, थ्यों और परिरच्छिस्र्थीति यों को देख े हुए, बैंक को ब्याज का भार डालना mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उतिच नहीं होगा। आदेश का अनुपालन विकया जाए और ीन महीने क े भी र बकाया का भुग ान विकया जाए, सिजसमें विवफल रहने पर राभिश का भुग ान इस आदेश की ारीख से 6 प्रति श प्रति वर्ष की दर से ब्याज क े सार्थी विदया जाए। दनुसार अपील का विनस् ारण विकया जा ा है। कोई लाग नहीं।...........................… (न्यायमूर्ति, अरुण विमश्रा).............................… (न्यायमूर्ति, एम.आर. शाह).................................. (न्यायमूर्ति, बी.आर. गवई) नई विदल्ली; 2 माच, 2020 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA