Mohammad Asisaf Naseer v. West Watch Company

Supreme Court of India · 24 Apr 2020 · 2020 INSC 363
R. Bhanumati; Vivani Saran
Civil Appeal No 2375 of 2020 @ SLP (C) No 29649 of 2016
2020 INSC 363
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that service of six months' prior notice by registered post receipt suffices under the Rent Control Act for eviction, allowing the landlord's appeal and restoring the eviction order.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 2375/2020
[एस.एल.पी. (सिस.) संख्या 29649/2016 से उत्पन्न]
मोहम्मद आसिसफ नसीर अपीलार्थी7
बनाम
अपनी कम्पनी क
े मा यम से
वेस्ट वाच कम्पनी प्रत्यर्थी7
विन र्ण= य
न्यायमूर्ति विवनी सरन
अनुमति प्रदत्त।
JUDGMENT

2. मकान मालिलक प्रस् ु अपील दायर कर विकराया विनयंत्रर्ण रिरट यातिचका (सिसविवल) संख्या 3457/2016 में पारिर उच्च न्यायालय क े आदेश एवं विनर्ण=य को चुनौ ी विदया है सिIसक े द्वारा अपीलार्थी7 द्वारा दायर बेदखली आवेदन को विनरस् कर विदया गया है, और अपीलार्थी7-मकानमालिलक क े विनमु=विP आवेदन को अनुज्ञा कर विवविह प्राति कारी एवं अपील प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश को अपास् कर विदया गया है।

3. प्रस् ु अपील में मामले क े संतिRप्त थ्य इस प्रकार हैं विक अपीलार्थी7 ने उ.प्र. शहरी भवन (विकराये पर देना, विकराया एवं बेदखली) अति विनयम, 1972 की ारा 21(1)(क) क े ह एक दूकान, सं. 64, 42 वग= फीट, भवन संख्या 31/72 महात्मा गां ी माग=, हIर गंI, लखनऊ को खाली कराने हे ु आवेदन प्रस् ु mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2020 INSC 363 विकया। अपीलार्थी7 का मामला यह र्थीा विक उसने प्रश्नग दुकान को विदनांक 29.10.2004 विवक्रय विवलेख द्वारा अपने स्वयं क े उपयोग क े लिलए खरीदा र्थीा। प्रत्यर्थी7 प्रश्नग दूकान का विकरायेदार र्थीा सिIसका विकराया मासिसक विकराया 15 रूपये प्रति माह र्थीा और वह उसमें घवि]यों क े सु ार काय= एवं विवक्रय का व्यापार कर ा र्थीा। उP दूकान खरीदने क े उपरान्, अपीलार्थी7 ने प्रत्यर्थी7 से उस दूकान को खाली करने को कहा, शुरुआ में प्रत्यर्थी7 राIी हो गया विकन् ु बाद में दूकान खाली करने से मना कर विदया। इस प्रकार अपीलार्थी7 ने दुकान खाली कराने हे ु आवेदन प्रस् ु विकया है। अपीलार्थी7 का मामला यह र्थीा विक प्रत्यर्थी7 (विकरायेदार) एक नी व्यविP है सिIसक े पास दो भवन हैं, और प्रत्यर्थी7 क े परिरवार क े पास लखनऊ शहर में हIर गंI खुर=म नगर एव आई.टी. क्रासिंसग, विनराला नगर क े मुख्य बाIार में अन्य व्यापारिरक आवास है Iो उनक े कब्Iे में है। उससे Iु]ी हुई दूकान संख्या 63, Rेत्रफल करीब 190 वग= मीटर, को भी खाली कराने हे ु अपीलार्थी7 का अन्य आवेदन भी लम्बिम्ब र्थीा। आगे अपीलार्थी7 का मामला यह र्थीा विक अपीलार्थी7 युवा है और प्रश्नग दूकान का Iीर्ण द्धार करने क े उपरान् वह उसमें घवि]यों क े सु ार काय= एवं विवक्रय का काय= करना चाह ा र्थीा क्योंविक उस समय वह अपने विप ा की उस काय= में मदद कर रहा र्थीा, और उसक े पास ऐसे व्यापार को चलाने क े लिलए काफी अनुभव र्थीा, और प्रश्नग दूकान उसक े व्यापार क े लिलए उपयुP सिसद्ध होगी। आगे उसका मामला यह र्थीा विक उसक े परिरवार में वह स्वयं उसकी पत्नी और एक नाबालिलग पुत्री र्थीी और उP दूकान को खाली करने क े लिलए प्रत्यर्थी7 को Rति पूर्ति क े रूप में दो वर्ष= का विकराया देने क े लिलए वह ैयार हो Iाएगा और यह विक अपीलार्थी7 की आवश्यक ा वास् विवक, सदभावनापूव=क, Iरूरी एवं अत्यावाश्यक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds र्थीी। उसने आगे वादा विकया विक भविवष्य में उस विववाविद दूकान को विकराये पर नहीं उठाएगा और उP दूकान को अपने स्वयं क े प्रयोग क े लिलए रखेगा।

4. प्रत्यर्थी7 ने दुकान खाली कराने क े आवेदन पर प्रति वाद विकया और अपना लिललिख Iवाबदावा प्रस् ु विकया सिIसमें उसने माना विक अपीलार्थी7 विववाविद दूकान का मालिलक है। यह कहा गया विक प्रत्यर्थी7 का विप ा सन् 1951 से विववाविद दूकान का विकरायेदार है और वह घवि]यों क े सु ार एवं विवक्रय का व्यापार चला रहा है और यह विक प्रत्यर्थी7 सन् 1960 से अपने विप ा की व्यापार में सहाय ा कर रहा र्थीा। यह कहा गया विक उP दूकान से प्राप्त आय उनक े IीविवकोपाI=न का एकमात्र सा न है और बहु प्रयास क े बावIूद भी उसे हIर गंI Rेत्र में अन्य दूकान नहीं विमल सक ी है, भले ही उसने विकराया विनयंत्रर्ण एवं बेदखली अति कारी, लखनऊ को अन्य दूकान क े आवंटन हे ु आवेदन विदया र्थीा। प्रत्यर्थी7 ने यह भी कहा विक यविद अपीलार्थी7 की Iरूर वास् विवक र्थीी ो वह विकसी खाली दूकान को खरीद ा न विक पुरानी विकरायेदारी वाली दूकान। यह भी कर्थीन विकया गया विक अपीलार्थी7 ने प्रत्यर्थी7 से विववाविद दूकान को खाली करने क े लिलए कभी नहीं कहा और न ही इस संबं में प्रत्यर्थी7 को विकसी प्रकार की सूचना दी गयी। प्रत्यर्थी7 का मामला यह र्थीा विक अपीलार्थी7 Iमीन का व्यापार कर रहा र्थीा और उसका इरादा दूकान को खाली कराने का र्थीा, और उस भवन को विगराने क े उपरान्, बहुमंसिIला इमार बनायी गयी। प्रत्यर्थी7 ने आगे कर्थीन विकया विक उसको विववाविद दूकान की Iरूर है और अपीलार्थी7 से उसको कहीं ज्यादा Iरूर है और भले ही प्रत्यर्थी7 क े पुत्र क े पास अन्य विकरायेदारी दूकान हो सक ी है, विकन् ु उसक े कोई फक = नहीं प]ेगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

5. विवविह प्राति कारी ारिर करने क े उपरान् विक अपीलार्थी7 ने प्रत्यर्थी7 को छः माह पूव= सूचना दी र्थीी क्योंविक ऐसी सूचना देना विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 21(1) क क े परन् ुक क े अ ीन अपेतिR र्थीा और दूकान खाली करने संबं ी आवेदन अपीलार्थी7 द्वारा विवक्रय विवलेख प्राविप्त क े ीन माह क े अवसान क े बाद दालिखल विकया गया, विदनांक 04.102011 को अपने आदेश क े माध्यम से दूकान खाली करने क े आवेदन को अनुज्ञा कर विदया। विवविह प्राति कारी ने यह भी ारिर विकया विक अपीलार्थी7 की Iरूर सदभावनापूर्ण= और Iरूरी र्थीी, और व =मान में लखनऊ में लखनऊ में उसक े पास कोई अन्य दूकान नहीं र्थीी और अभिभलेख में कोई ऐसा साक्ष्य मौIूद नहीं र्थीा सिIससे यह दर्शिश हो ा हो विक प्रत्य 7 (विकरायेदार) आवास हे ु अन्य विवकल्प लाशने का प्रयास विकया हो। उP आ ारों एवं ुलनात्मक कविठनाइयों पर विवचार करने क े उपरान् विवविह प्राति कारी ने दूकान खाली करने क े आवेदन को अनुज्ञा कर विदया।

6. प्रत्यर्थी7 द्वारा दायर अपील को अपर सिIला II (अपील प्राति कारी) अपने आदेश विदनांविक 05.02.2016 द्वारा खारिरI कर विदया सिIसक े द्वारा यह ारिर विकया गया विक विकरायेदार और विकरायेदार का अपीलार्थी7 और प्रत्यर्थी7 क े मध्य संबं प्रत्यर्थी7 को छः माह की अपेतिR सूचना का विदया Iाना साविब हुआ। न्यायालय ने आगे पुनः विवविह प्राति कारी क े दृविwकोर्ण की पुविw कर यह कहा विक अपीलार्थी7 की Iरूर सद्भावनापूर्ण= और अत्यावश्यक र्थीी और इस प्रकार अपील को खारिरI कर विदया गया।

7. उP आदेश से व्यभिर्थी प्रत्यर्थी7 ने विकराया विनयंत्रर्ण रिरट यातिचका संख्या 3457/2016 दायर विकया है सिIसको उच्च न्यायालय प्रार्थीविमक ौर पर यह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ारिर कर विक प्रत्यर्थी7 को बेदखली की सूचना नहीं दी गयी सिIसका विदया Iाना आज्ञापक र्थीा और सूचना भेIी गयी ऐसी उप ारर्णा नहीं की Iा सक ी र्थीी, अनुज्ञा कर विदया है। उच्च न्यायालय ने यह भी अव ारिर विकया विक अपीलार्थी7 का आशय उस पुरानी दूकान को खरीदकर और इसका नवीनीकरर्ण कर एवं मल्टी स्टोरी बनाकर लाभ हे ु बेंचने का र्थीा न विक व्यापार हे ु इसका प्रयोग करने का। रिरट यातिचका को अनुज्ञा कर े हुए उच्च न्यायलय ने यह ारिर विकया विक “पोर्षर्णीय न होने क े कारर्ण अवमुविP आवेदन खारिरI विकया Iा ा है, क्योंविक उस अति विनयम क े की ारा 21 (1)(अ) क े अन् ग= छः माह की पूव= सूचना नहीं दी गयी सिIसका विदया Iाना अपेतिR र्थीा।”

8. उP विनर्ण=य से व्यभिर्थी पRकार ने इस यातिचका को विवशेर्ष अनुमति यातिचका क े माध्यम से दायर विकया है।

9. हमने पRकारों क े विवद्वान अति वPाओं को विवस् ार सुना है और अभिभलेख का परिरशीलन विकया है।

10. उच्च न्यायालय क े विनर्ण=य से यह स्पw हो ा है विक रिरट यातिचका को अनुज्ञा करने का प्रार्थीविमक कारर्ण यह र्थीा विक विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 21(1)(अ) क े अन् ग= यर्थीा अपेतिR सूचना विदये Iाने की उप ारर्णा नहीं की Iा सकी। मकानमालिलक की परेशानी Iो विक विकरायेदार की ुलना में अपेRाक ृ अति क र्थीी उस संबं में विवविह प्राति कारी एवं अपील प्राति कारी द्वारा रिरकार्ड= की गया थ्य क े विनष्कर्ष= को उच्च न्यायालय द्वारा विनर्ण=य पारिर कर े समय बाद वाले में भाग क े वल उल्लेख करने क े सिसवाय पलटा नहीं Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds गया है सिIसको ुलनात्मक परेशानी, Iैसा विक प्राति कारिरयों द्वारा रिरकार्ड= विकया गया, से संबंति थ्य क े विनष्कर्ष= को पलट देना नहीं समझा Iा सक ा है।

11. प्रत्यर्थी7(विकरायेदार) का मामला यह है विक अपीलार्थी7 (मकानमालिलक) द्वारा प्रत्यर्थी7 (विकरायेदार) को कोई भी सूचना नहीं दी गयी सिIसका विदया Iाना विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 21(1)(अ) क े ह अपेतिR र्थीा। विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 21(1)(अ) विनम्नव हैः- “ ारा 21. विकरायेदार क े अति कार से भवन की अवमुविP की प्रविकया- (1) विवविह प्राति कारी, मकानमालिलक क े आवेदन पर, यविद सं ुw हो Iा ा है ो विकरायेदार को विकरायेदारी क े भवन से या उसक े विकसी भाग से विनम्नलिललिख आ ारों पर बेदखली का आदेश पारिर कर सक ा है। (अ) यह विक भवन की, सद्भावनापू्व=क उसक े मौIूदा रूप में या विवध्वंश क े बाद विनमा=र्ण क े लिलए मकान मालिलक द्वारा स्वयं रहने क े लिलए या उसक े विकसी पारिरवारिरक सदस्य या विकसी ऐसे व्यविP क े लिलए सिIसक े लाभ क े लिलए उसने इसे रखा है,विकसी आवासीय या व्यावसातियक उद्देश्य क े लिलए या मकान मालिलक की विकसी साव=Iविनक न्यास का न्यासी होने की म्बिस्र्थीति में न्यास क े उद्देश्य क े लिलए, आवश्यक ा है। (ब)................ बश ‚ यह विक उस म्बिस्र्थीति में Iहां भवन मकान मालिलक द्वारा खरीदे Iाने से पहले विकसी विकरायेदार क े कब्Iे में र्थीा, इस अति विनयम क े प्रव =न से पूव= खरीदा गया हो, ब उपखण्] (अ) में उसिल्ललिख विकन्हीं भी आ ारों पर आवेदन स्वीकार नहीं विकया Iाएगा, Iब क क्रय की ति भिर्थी से ीन वर्ष= का समय न बी गया हो और माकान मालिलक ने ऐसे आवेदन से कम से कम छः माह पूव= विकरायेदार को सूचना न दी हो और ऐसी सूचना उपरोP ीन वर्ष= की अवति समाप्त होने क े पूव= भी दी Iा सक ी है। (प्रभाव वर्ति )

12. उP ारा क े उपरोP परन् ुक क े परिरशीलन से यह स्पw हो ा है विक मकानमालिलक द्वारा विकरायेदार को विकसी विवशेर्ष रीति सूचना देना अति विनयम में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उपबंति नहीं विकया गया है, कहने का अर्थी= यह विक सूचना को लिललिख या मौलिखक विदया Iा सक ा है। यविद इसे लिललिख रूप में विदया Iा ा है ो यह आवश्यक नहीं विक पंIीक ृ र्डाक द्वारा भेIा Iाए. Iरूरी यह विक “मकानमालिलक ने इस संबं में विकरायेदार को सूतिच विकया है।”

13. विवविह प्राति कारी ने इस विनष्कर्ष= पर विवचार कर े हुए विक विकरायेदार को बेदखली की सूचना दी गयी र्थीी, मामले से संबंति अनेक महत्वपूर्ण= थ्यों पर विवचार विकया है। यह बा नहीं है विक क े वल सूचना क े र्डाक द्वारा भेIे Iाने क े कर्थीन पर विवविह प्राति कारी ने सूचना प्रेविर्ष विकये Iाने की उप ारर्णा कर लिलया है। विवविह प्राति कारी ने अभिभविनर्ण[7] विकया है विक “प्रत्यर्थी7 (विकरायेदार) आवेदक को मकानमालिलक मान े हुए उP अति विनयम की ारा 30(1) क े अन् ग= विकराये को न्यायालय में Iमा करने का आवेदन विदया र्थीा।” विवविह प्राति कारी ने यह अभिभलिललिख विकया विक वर्ष= 2006 (25.07.2006) को यह सूचना प्रेविर्ष की गयी र्थीी विक 2007 में प्रत्यर्थी7 द्वारा विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 30 (1) क े ह न्यायालय में विकराया Iमा करने का आवेदन विदया र्थीा सिIसक े उपरान् अपीलार्थी7 ने वर्ष= 2008 में दायर विकया। इस वाद को 29.10.2004 को विवक्रय विवलेख विनष्पाविद करने क े बाद ीन वर्ष„ को दायर विकया गया। थ्य यह र्थीा विक विवविह प्राति कारी ने ारिर विकया विक इस अति विनयम की ारा 21 क े ह छः माह की अपेतिR सूचना 2008 में वाद दायर करने से पूव= सम्मक रूप से मकान मालिलक को विदया गया र्थीा। प्रत्यर्थी7-विकरायेदार अपीलार्थी7-मकानमालिलक को वर्ष= 2007 का विकराया न्यायालय में एक आवेदन क े माध्यम से Iमा कर विदया। इस बा पर विववाद नहीं है विक रसीद की छायाप्रति विदनांविक 25.07.2006 भेIे गये र्डाक प्रमार्ण पत्र क े सार्थी मकान मालिलक ने विवविह प्राति कारी क े समR दायर विकया Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds है और प्रत्यर्थी7 ने Iो काब=न कॉपी Iमा की है उसे विवविह प्राति कारी ने विदनांक 24.01.2011 को खारिरI कर विदया सिIसका आदेश अम्बिन् म हो चुका है, क्योंविक इसको विकरायेदार ने चुनौ ी नहीं विदया र्थीा, इस प्रकार अपीलार्थी7 क े पास र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह रसीद की छायाप्रति को दायर करने का कोई अवसर नहीं र्थीा।

14. विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम, की ारा 34 विवविह प्राति कारी द्वारा साक्ष्य को शपर्थीपत्र पर लेने का उपबं कर ा है विक ारा 34 की उप ारा (1) इस प्रकार हैः " ारा 34 विवभिभन्न प्राति कारिरयों की शविP और उनक े द्वारा अपनायी Iाने वाली प्रविक्रया- (1) सिIलाति कारी, विवविह प्राति कारी, अपील अर्थीवा समीRा प्राति कारी को इस अति विनयम क े ह विकसी Iांच, सुनावाई, अपील एवं समीRा हे ु वहीं शविPयां प्राप्त होंगी Iो शविPयां इनक े संदभ= में सिसविवल प्रविक्रया संविह ा,1908 क े ह वाद क े विवचारर्ण क े विवचारर्ण क े समय प्राप्त हो ी है। यह शविPयां इस प्रकार हैंः- (अ) विकसी व्यविP को समन करना, उसकी उपम्बिस्र्थीति को प्रवर्ति करना र्थीा शपर्थी पर उसकी परीRा कर सक ा है, (ब) शपर्थीपत्रों पर उसकी उपम्बिस्र्थीति सुविनति‡ कर सक ा है, (ग) विकसी भवन, अर्थीवा Rेत्र का विनरीRर्ण, कमीशन Iारी करना, विकसी प्रपत्र अर्थीवा साRी की परीRा कर सक ा है, (घ) विकसी प्रपत्र की Iांच करना अर्थीवा पेश विकये Iाने की अपेRा करना, (]) इस अति विनयम क े ह खच‚ का आदेश दे सक ा है अर्थीवा प्रति भूति की अपेRा कर सक ा है, (च) विकसी विवति पूर्ण= करार अर्थीवा समझौ ा को अभिभलिललिख कर सक ा है और उसक े अनुरूप आदेश दे सक ा है, (छ) कई अन्य मामला Iैसा विवविह विकया Iाए। 2 से8..................................................… प्रभाव वर्ति Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

15. उP क े दृविwग स्पw है विक शपर्थी पर विदया गया साक्ष्य विवविह प्राति कारी क े समR स्वीकाय= र्थीा। व =मान मामले क े थ्यों में Iब अपीलार्थी7 (मकानमालिलक) र्डाक प्रमार्णपत्र क े ह भेIी गयी सूचना, सिIसे विवविह प्राति कारी ने स्वीकार कर लिलया,उसक े रसीद की छायाप्रति क े सार्थी शपर्थीपत्र दालिखल विकया र्थीा और विवविह प्राति कारी द्वारा यर्थीा उसिल्ललिख परिरम्बिस्र्थीति यों से अवग कराया ब विवशेर्ष विनष्कर्ष= अभिभलिलविक विकया गया विक विवविनर्दिदw विनष्कर्ष= को अभिभलिलविक विकया गया विक विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 21 क े ह अपेतिR सूचना अपीलार्थी7 (मकानमालिलक) द्वारा भेI दी गयी र्थीी सिIसे प्रत्यर्थी7 (विकरायेदार) ने स्वीकार कर लिलया र्थीा, यह विवति में पूर्ण=य ः न्यायोतिच है। थ्य क े इस विनष्कर्ष= को अपीलीय प्राति कारी ने सम्यक रूप से माना। हमारे दृविwकोर्ण में थ्य संबं ी ऐसे विनष्कर्ष= (Iो क े वल र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह भेIे Iा चुक े मात्र पर आ ारिर सूचना सूचना क े ामीली की उप ारर्णा मात्र नहीं र्थीी) इन वै आ ारों पर विनकाले Iा चुक े विनष्कर्ष= इस न्यायालय द्वारा प्रभाविव नहीं विकये Iाने चाविहए र्थीे।

16. प्रत्यर्थी7 विकरायेदार क े विवद्वान अति वPा ने अपने क„ क े समर्थी=न में इस न्यायालय द्वारा पारिर राम सुरेश सिंसह बनाम प्रभा सिंसह (2009) 6 एस.सी.सी. 681 का अवलम्ब लिलया Iो अति क महत्वपूर्ण= नहीं होगा क्योंविक यह बा दाम्बिण्]क विवचारर्ण से संबंति है Iहां पर विकशोर की आयु क े विन ा=रर्ण संबं ी प्रश्न विवचारा ीन र्थीा। यह मामला विकशोर न्याय अति विनयम क े प्राव ानों क े ह र्थीा Iहां पर साक्ष्य स्पw रूप से लागू हो े र्थीे, Iो विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम से Iु]े हुए मामलों पर नहीं लागू हो े हैं Iहां पर साक्ष्य शपर्थीपत्र पर विदया Iा सक ा है। विहन्दू विववाह अति विनयम से संबंति यू. श्री बनाम यू. श्रीविनवास (2013) 2 एस.सी.सी. 114 अन्य मामला में भी साक्ष्य अति विनयम लागू हो ा है। वहां पर Iो Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रश्न र्थीा वह क ु छ प्रपत्रों से संबंति र्थीा सिIन्हें दालिखल ो विकया गया र्थीा विकन् ु साविब नहीं विकया गया र्थीा। इसको विबना शपर्थी पत्र क े सार्थी दालिखल विकया गया Iबविक प्रस् ु मामले, शपर्थीपत्र क े सार्थी दालिखल र्डाक प्रमार्णपत्र क े ह रसीद विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 34 क े ह स्वीकाय= है। भिशव क ु मार बनाम हरिरयार्णा राज्य (1194) 4 एस.सी.सी. 445 का मामला औद्योविगक विववाद अति विनयम से संबंति है। उP मामले में न्यायलय ने अभिभविनर्ण[7] विकया विक उस मामले क े थ्यों में Iहां पर विबना अन्य परिरम्बिस्र्थीति यों और प्रमार्ण क े क े वल र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह ामीली पर अवलम्ब लिलया गया, वहां पर सूचना की ामीली की उप ारर्णा नहीं विकया Iा सक ा र्थीा। औद्योविगक विनयमावली क े विनयम 76 ए(2) पर अवलम्ब लिलया गया Iो सूचना क े ामीली विवविनर्दिदw रीति का उपबं कर ा है। व =मान मामले में ऐसी म्बिस्र्थीति नहीं है Iहां पर सूचना को क ै से विदया इस Iाए इस बा का उपबं विकये विबना अति विनयम सूचना विदये Iाने का उपबं कर ा है। इस प्रकार यह मामला प्रस् ु मामले से सी ा महत्व से संबंति नहीं होगा।

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17. इसक े विवपरी, अपीलार्थी7 क े विवद्वान अति वPा ने सुविमत्रा देवी बनाम सम्पूरन सिंसह (2011) 3 एस.सी.सी. 556 का अवलम्ब लिलया है सिIसमें इस न्यायालय ने अभिभविनर्ण[7] विकया विक यह प्रत्येक मामले क े थ्यों पर विनभ=र करेगा विक क्या र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह भेIी गयी सूचना की उप ारर्णा की Iानी चाविहए। यह सच है विक Iैसा विक उP संदर्शिभ विनर्ण=य में विप्रवी कौंसिसल द्वारा अवलोकन विकया गया विक उप ारर्णा उन पत्रों क े सार्थी और अति क बल क े सार्थी लागू होगा सिIन पत्रों को पंIीक ृ र्डाक द्वारा भेIा गया विफर भी Iब थ्य इ ने न्यायोतिच हो ब उन मामलों में भी र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह सूचना भेIी गयी र्थीी, ऐसी उप ारर्णा विकये Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds Iाने की सम्भावना हो ी है। इस मामले क े थ्यों एवं परिरम्बिस्र्थीति यों पर विवचार करने क े उपरान् न्यायालय ने अभिभविनर्ण[7] विकया विक र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह भेIी गयी सूचना ामीली क े लिलए पया=प्त है। रंIू बनाम रेखा घोर्ष (2007) 14 एस.सी.सी. 81 का एक ऐसा मामला र्थीा Iहां पर न्यायालय बेदखली हे ु विकरायेदार को विदये गये एक माह की सूचना संबं ी प्रश्न पर विवचार कर रहा र्थीा। न्यायलय काश् कारी अति विनयम, संपलित्त अं रर्ण अति विनयम एवं बंगाल Iनरल क्लाIेI एक्ट पर विवचार करने क े उपरान् ारिर विकया विक उप ारा (6) क े वल एक माह की सूचना को उपबंति कर ा हैः इस अवस्र्थीा में उP सूचना विकसी भी रीति से दी Iा सक ी है और यह दावा विकया Iा सक ा है विक इसको क े वल अभिभस्वीक ृ ति प्रत्र क े सार्थी पंIीक ृ र्डाक क े द्वारा भेIा Iाना चाविहए। उस मामले क े थ्यों में यह ारिर विकया गया विक र्डाक प्रमार्णपत्र क े ह भेIे गयी सूचना ामीली पया=प्त र्थीी। प्रस् ु प्रकरर्ण ही इसी क े Iैसा है Iहां पर यह अति विनयम उपबंति कर ा है विक मकान मालिलक ने सूचना दे विदया है.........., ऐसी सूचना की रीति विनर्दिदw विकये बगैर, और व =मान मामले क े थ्यों क े आ ार पर, र्डाक प्रमार्णपत्र क े ह भेIी गयी सूचना को समुतिच ामीली ारिर विकया गया Iो सही है। वी.एस. क ृ ष्र्णन बनाम वेस्टफोट= हाई -टेक हॉम्बिस्पटल (2008) 3 एस.सी.सी. 363 क े मामले में न्यायालय ने कम्पनी अति विनमय क े ह सूचना की ामीली संबं ी प्रश्न पर विवचार कर अभिभविनर्ण[7] विकया विक र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह भेIी गयी सूचना की ामीली वहां पया=प्त होगी Iहां पर वे सामाग्री मौIूद हो Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds सिIसने दर्शिश हो ा हो विक सूचना भेI दी गयी, और इस सांविवति क उप ारर्णा को खारिरI करने का भार इसक े विवपरी कर्थीन करने व्यविP पर हो ा है।

18. ऐसा हो सक ा है विक र्डाक प्रमार्ण पत्र क े ह भेIी Iा चुकी सूचना की रसीद मात्र अपने आप में सूचना की ामीली का साक्ष्य न हो, लेविकन यह बा ऐसे थ्य एवं परिरम्बिस्र्थीति से Iु]ा हो सिIनसे दर्शिश हो विक पRकार को सूचना विमल चुकी र्थीी ब इसे उस पRकार पर पया=प्त सूचना की ामीली माना Iा सक ा र्थीा। आगे, पत्यर्थी7 (विकरायेदार) ने स्पw रूप से स्वीकार विकया है विक अपीलक ा= उसका विकरायादार र्थीा (सिIसक े लिलए विवक्रय विवलेख विकरायेदार को विदया र्थीा) और विकराया विनयंत्रर्ण अति विनयम की ारा 30(1) क े ह प्रत्यर्थी7 द्वारा विकराया न्यायालय में Iमा करने का काय= और अन्य व =मान परिरम्बिस्र्थीयों को विवविह प्राति कारी द्वारा विवचार विकया गया है और इससे यह स्पw हो Iाएगा विक सूचना की ामील पया=प्त साक्ष्य र्थीा सिIसे अपीलीय प्राति कारी द्वारा पुw विकया गया है और हमे रिरट न्यायालय क े समव 7 विनष्कर्ष= क े थ्य को बदलने का कोई कारर्ण नहीं प्राप्त हो ा है।

19. आगे, विवविह प्राति कारी और अपीलीय प्राति कारी क े विनष्कर्ष= से स्पर्षट हो Iा ा है विक अपीलार्थी7 (मकानमालिलक) की समस्या प्रत्यर्थी7 (विकरायेदार) से अति क र्थीी इस प्रकार, रिरट अदाल द्वारा विवभिशw रूप से विवचारिर अर्थीवा वग7क ृ रूप हस् Rेविप नहीं विकया गया, विनमु=विP आवेदन अनुज्ञा । थ्य क े ऐसे विनष्कर्ष= में न्यायालय का हस् Rेप विकया Iाना अपेतिR नहीं है।

20. इस दृविwकोर्ण क े आ ार पर हमारी राय है विक यह अपील अनुज्ञा की Iानी चाविहए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds दनुरूप यह अपील अनुज्ञा की Iा ी है। रिरट अदाल का विनर्ण=य अपास् विकया Iा ा है और विवविह प्राति कारी द्वारा अनुज्ञा एवं अपील प्राति कारी द्वारा प्रति ज्ञा अपीलार्थी7 (मकानमालिलक) का विनमु=विP आदेश पुw हो ेे Iा ा है। प्रत्यर्थी7 विकरायेदार को आI की ारीख से छः माह क े अन्दर प्रश्नग परिरसर खाली करने और अपीलार्थी7 (मकानमालिलक) को कब्Iा देने का विनद‚श विदया Iा ा है। खच‚ की बाब कोई आदेश नहीं विदया Iा ा है।.................................. न्यायमूर्ति आर. भानुमति ।................................. न्यायमूर्ति विवनी सरन नई विदल्ली, 24 अप्रैल, 2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds