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भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 2236/2020
(विवशेष अनुमति याति*का (दीवानी) संख्या 5650/2019 से उत्पन्न)
राजस्थान राज्य सड़क परिरवहन विनगम लिलविमटेड और अन्य
…….अपीलाथ@ (गण)
बनाम
श्रीम ी मोहनी देवी और अन्य
….… प्रति वादी (गण)
विनणEय
ए. एस. बोपन्ना, न्याया ीश
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. यहां प्रति वादी राजस्थान उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर एकल पीठ सिसविवल रीट याति*का संख्या 2839/2012 में याति*काक ाE था। रिरट याति*का दालिNल करने क े लिलए प्रेरिर करने वाले संतिक्षप्त थ्य यह है विक इसमें प्रति वादी ने अपने विदवंग पति क े सेवाविनवृलिS लाभों का दावा विकया था, जो अपीलक ाE सड़क परिरवहन विनगम क े अलवर तिडपो में विदनांक 15.03.1979 को क ं डक्टर क े पद पर विनयुक्त विकया गया था। लाभों का दावा इस आ ार पर विकया गया था विक उनक े पति को त्यागपत्र देने क े बजाय स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृS माना जाए।
3. सेवा क े दौरान, प्रत्यथ@ क े पति ने स्वास्थ्य कारणों को इंविग कर े हुए विदनांक 28.07.2005 को स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए एक आवेदन विदया था। 2020 INSC 337 स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े उक्त आवेदन पर कोई आदेश पारिर नहीं विकया गया और प्रति वादी का पति सेवा में बना रहा।
4. इसक े बाद, प्रति वादी क े पति ने विदनांक 03.05.2006 को अपना इस् ीफा सौंप विदया क्योंविक उसने दावा विकया विक वह अवसाद में था और उसकी स्वास्थ्य च्छिस्थति और विबगड़ गई थी। अति कारिरयों ने विदनांक 31.05.2006 को उनका इस् ीफा स्वीकार कर लिलया था, उन्हें अपने क Eव्यों से मुक्त कर विदया गया था और लाभों का भुग ान कर विदया गया था।
5. इसक े बाद, प्रति वादी क े पति ने ुरं एक आवेदन प्रस् ु विकया सिजसमें कहा गया है विक उसने 'इस् ीफा' का उल्लेN करने में गल ी की है और वह स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए अपने पहले क े आवेदन को देN े हुए सेवाविनवृS होना *ाह ा है। आवेदन में यह भी उल्लेN विकया गया है विक 28 जुलाई, 2005 को उनक े पहले आवेदन पर अति कारिरयों द्वारा कोई विनणEय नहीं लिलया गया था और इसलिलए उसे परिरणामी सेवाविनवृलिS लाभों क े साथ स्वेZ[ा से सेवाविनवृS माना जाना *ाविहए। प्रति वादी ने अपने पति की मृत्यु क े बाद ऐसी प्राथEना क े साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा NटNटाया।
6. विवद्व एकल न्याया ीश ने अभिभविन ाEरिर विकया विक प्रत्यथ@ क े पति ने एक आवेदन प्रस् ु विकया था सिजसमें स्वास्थ्य की विगर ी हुई च्छिस्थति को इंविग विकया गया था और ऐसे कमE*ारी को काम करने क े लिलए मजबूर करना उत्पीड़न का कायE होगा। इसक े अति रिरक्त, यह विनणEय विदया गया विक स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS आवेदन पर पेंशन योजना क े Nंड 19 डी (2) क े अनुसार विन ाEरिर अवति क े भी र विनणEय नहीं लिलया गया था और आरएसआरटीसी स्थायी आदेशों क े Nंड 18 डी (2) पर विनभEर ा रNी गई थी, सिजसक े अनुसार विनगम का एक कमE*ारी सिजसने पेंशन योग्य सेवा प्रदान की थी, स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS प्राप्त करने का हकदार था।इसने अभिभविन ाEरिर विकया विक प्रत्यथ@ क े पति को सेवाविनवृS माना जाएगा, भले ही उसने शील क ु मार जैन बनाम द न्यू इंतिडया एश्योरेंस क ं पनी लिलविमटेड 2012 (1) एसएलआर 305 में अति कभिथ कानून क े मद्देनजर अपने सेवाविनवृलिS को त्यागपत्र ब ा े हुए एक और आवेदन विदया था। इस प्रकार, अपीलार्थिथयों को प्रत्यथ@ क े पति को स्वेZ[ा से सेवाविनवृS होने क े रूप में मानने और सेवाविनवृS लाभों को जारी करने का विनदmश विदया गया था, सिजसका वह हकदार था।
7. असं ुष्ट होकर, अपीलक ाEओं द्वारा यहां Nंड पीठ विवशेष अपील रिरट संख्या 1261/2018 में एक अपील दायर की गई थी। हालांविक, विवद्व एकल न्याया ीश क े क E में Nण्ड पीठ द्वारा कोई कमी नहीं पाई गई और विवद्व Nण्ड पीठ ने अपील को Nारिरज कर विदया। अपीलाथ@गण द्वारा इस अपील में इसका विवरो विकया गया है।
8. उपरोक्त पृष्ठभूविम में हमने डॉ रिर ु भारद्वाज, अपीलक ाEओं क े विवद्वान अति वक्ता, श्री एस. महेंद्रन, प्रति वाविदयों क े विवद्वान वकील को सुना और अपील दस् ावेजों का अवलोकन विकया।
9. यहाँ पर विव*ार करने क े लिलए जो संतिक्षप्त प्रश्न उठ ा है वह यह है विक क्या प्रति वादी क े पति ने सेवा से स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS की मांग करने क े लिलए एक अपरिरहायE अति कार प्राप्त विकया था और उस प्रकाश में क्या उच्च न्यायालय इस विनष्कषE पर पहुं*ने क े लिलए न्यायोति* था विक प्रति वादी क े पति द्वारा विदनांक 03.05.2006 को प्रस् ु विकए गए पश्चात्व @ त्यागपत्र को स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए एक आवेदन क े रूप में माना जाए और स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े प्राव ान क े ह विनयोक्ता/ कमE*ारी क े विवति क संबं की समाविप्त को माना जाए।
10. उपरोक्त पहलू पर विव*ार करने क े लिलए, व Eमान मामले में थ्यात्मक मैविटxक्स का अवलोकन यह इंविग करेगा विक प्रति वादी का पति विदनांक 15.03.1979 को अलवर तिडपो में अपीलक ाE परिरवहन विनगम की सेवा में शाविमल हुआ था। स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS की मांग करने वाला आवेदन विदनांक 28.07.2005 को प्रस् ु विकया गया था, सिजस अवति क प्रति वादी क े पति ने विनःसंदेह 25 वषE से अति क की सेवा की थी। जहाँ क सेवा की पूणE अवति को देN े हुए स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए आवेदन करने की पात्र ा का संबं है, प्रति वादी क े पति ने ऐसा अति कार प्राप्त कर लिलया था। हालांविक, अपीलक ाE परिरवहन विनगम ने आवेदन को स्वीकार कर स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS देना उति* नहीं समझा। उस परिरच्छिस्थति में, प्रति वादी क े पति ने विदनांक 03.05.2006 को अपना 'त्यागपत्र' सौंप विदया, सिजसे अपीलक ाE परिरवहन विनगम ने स्वीकार कर लिलया गया और विदनांक 31.05.2006 को कायEमुक्त कर विदया गया। प्रति वादी का क E है विक उसक े ुरं बाद एक आवेदन विकया गया था सिजसमें यह संक े विदया गया था विक अनजाने में 'त्यागपत्र' शब्द का उल्लेN विकया गया था और े पति का इरादा स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए अपने अनुरो को नवीनीक ृ करना था। हालाँविक, अपीलक ाE परिरवहन विनगम द्वारा इस रह क े बाद क े आवेदन पर विव*ार नहीं हुआ और जैसा विक सूति* विकया गया है, प्रति वादी क े पति को विदनांक 31.05.2006 को कायEमुक्त कर विदया गया था और सेवा से इस् ीफा देने वाले कमE*ारी क े संबं में देय सभी सेवा लाभों का भुग ान विकया गया था, जो सिजसे े पति ने स्वीकार कर लिलया।विनर्विववाद च्छिस्थति यह भी है विक प्रति वादी क े पति की बाद में मृत्यु विदनांक 14.04.2011 को हो गई। पति की मृत्यु क े पश्चा, प्रति वादी ने एकल पीठ दीवानी रिरट याति*का संख्या 2839/2012 में राजस्थान उच्च न्यायालय, Nंडपीठ जयपुर क े समक्ष रिरट याति*का दायर की थी। विवद्वान एकल न्याया ीश ने प्रति वादी क े मामले पर विव*ार कर े हुए क े वल उस कानूनी च्छिस्थति पर ध्यान विदया, जो इस न्यायालय द्वारा उन मामलों क े थ्यों में प्रति पाविद की गई थी, सिजन्हें संदर्थिभ विकया गया था और विनयमों क े Nंड 19 डी (2) क े संदभE में, इस विनष्कषE पर पहुं*े विक स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए आवेदन को स्वीकार कर लिलया गया था और इसलिलए, अपीलक ाEओं को विनदmश विदया विक वे प्रति वादी क े पति को कायEमुक्त की ारीN से सेवाविनवृS समझा जाये और सेवाविनवृलिS क े लाभों का भुग ान करें। Nंडपीठ ने उक्त च्छिस्थति को दोहराया है।
11. पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता को सुनने क े बाद, हम पा े हैं विक व Eमान मामले में विनणEय लेने क े लिलए जो थ्यात्मक पहलू प्रासंविगक थे, उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश क े दौरान संदर्थिभ नहीं विकया गया है, बच्छि•क क े वल यह मान लिलया गया है विक स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े आवेदन को स्वीकार कर लिलया गया माना जाना *ाविहए जब कोई अस्वीक ृ ति नहीं थी। जैसा विक स्वयं प्रति वादी द्वारा दायर विकए गए आपलिS कथन से देNा गया है, राजस्थान सिसविवल सेवा पेंशन विनयम, 1996 क े विनयम 50 में स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS लेने का अति कार विन ाEरिर विकया गया है। जैसा विक ऊपर ब ाया गया है, *ूंविक यह 20 साल की अहEक सेवा प्रदान कर ा है, इसलिलए प्रति वादी का पति आवेदन करने क े लिलए योग्य था। हालांविक, ध्यान देने योग्य बा यह है विक इसका उपविनयम (2) में यह उपबं है विक कमE*ारी द्वारा दी गई स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS की सू*ना को विनयुविक्त प्राति कारी द्वारा स्वीक ृ ति की आवश्यक ा होगी। मौजूदा मामले में, विनर्विववाद च्छिस्थति यह है विक कोई स्वीक ृ ति नहीं थी और उस परिरच्छिस्थति में प्रति वादी क े पति ने विदनांक 03.05.2006 को अपना त्यागपत्र सौंप विदया था। यद्यविप उच्च न्यायालय ने माविन स्वीक ृ ति को इंविग विकया है, यह ात्कालिलक थ्यों में न्यायोति* नहीं होगा क्योंविक उच्च न्यायालय द्वारा सिजस च्छिस्थति पर ध्यान नहीं विदया गया है वह यह है विदनांक 28/07/2005 जब प्रति वादी क े पति ने स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए आवेदन विकया था प्रति वादी क े पति को कदा*ार का आरोप लगा े हुए पहले ही *ाजEशीट संख्या 7352 विदनांविक 16/12/2004 और संख्या 4118 विदनांविक 11/07/2005 जारी कर दी गई थी। हालांविक प्रति वादी, आपलिS बयान क े माध्यम से यह दावा करना *ाह ी है विक उसक े पति क े लिNलाफ लगाए गए आरोप उति* नहीं थे, मामले का वह पहलू व Eमान विव*ार क े लिलए प्रासंविगक नहीं होगा क्योंविक कानून की च्छिस्थति अZ[ी रह से स्थाविप है लंविब अनुशासनात्मक कायEवाही मे यविद स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए आवेदन प्रस् ु विकया जा ा है ो स्वीक ृ ति क े लिलए कोई पूणE अति कार नहीं होगा *ूंविक विनयोक्ता अगर जां* क े साथ आगे बढ़ने का इZ[ ु क है ो वह स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े लिलए आवेदन पर विव*ार नहीं करने का हकदार होगा। अ ः स्वीकार करने की बाध्य ा नहीं होगी। व Eमान थ्यों में आरोप पत्र से संबंति कायEवाही को आगे बढ़ाया गया और अंति म आदेश विदनांक 03.09.2005 क े माध्यम से पूरा विकया गया। वे न वृति‚ रोकने की सजा दी गई ऐसी परिरच्छिस्थति में, स्वैच्छिZ[क सेवाविनवृलिS क े आवेदन पर विव*ार नहीं विकया जाना न्यायोति* होगा।
12. जैसा विक उल्लेN विकया गया है विक जां* पूरी हो *ुकी थी और उसक े बाद जब े पति ने विदनांक 03.05.2006 को इस् ीफा सौंप विदया, ो उस पर कारEवाई की गई, उसे स्वीकार कर लिलया गया, उसे 31.05.2006 को कायEमुक्त कर विदया गया और सेवां लाभों का भुग ान विकया गया सिजसे उसने स्वीकार कर लिलया था। अपने जीवनकाल क े दौरान विदनांक 14.04.2011 क पति ने इस संबं में कोई मुद्दा नहीं उठाया। इसक े बाद ही प्रति वादी ने उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट याति*का दायर की है। मुख्य रूप से यह ध्यान विदया जाना *ाविहए विक जब स्वैच्छिZ[क े लिलए आवेदन विदनांक 28.07.2005 को दायर विकया गया था और विनयोक्ता द्वारा उस पर अनुक ू ल रूप से विव*ार नहीं विकया गया था, विदनांक 3 मई 2006 को इस् ीफा प्रस् ु करने क े बजाय, यविद कोई कानूनी अति कार उपलब् था, ो उति* प्रविƒया क े ह उति* कानूनी कायEवाही शुरू करक े आवेदन को स्वीकार करने की मांग की जानी *ाविहए थी। इसक े बजाय, प्रति वादी क े पति ने स्वैच्छिZ[क े आवेदन को स्वीकार न करने की च्छिस्थति को स्वीकार कर लिलया था और इसक े बाद अपना इस् ीफा सौंप विदया है। सेवां लाभ प्राप्त करक े इस् ीफ े की स्वीक ृ ति पर कारEवाई की गई। यविद यह च्छिस्थति है, जब रिरट याति*का देर से वषE 2012 में दायर की गई थी और वह भी उस कमE*ारी की मृत्यु क े बाद सिजसने अपने जीवनकाल क े दौरान कोई भिशकाय नहीं की थी, ो प्रति वादी द्वारा की गई प्राथEना पर विव*ार करना उति* नहीं था। इसलिलए, उच्च न्यायालय ने समव @ आदेश पारिर करने में त्रुविट की है।
13. प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता प्रस् ु करेंगे विक भले ही यह त्यागपत्र का मामला हो, प्रति वादी का मृ पति उपदान क े भुग ान का हकदार था क्योंविक उसने अहEक सेवा में रNा था। अपीलक ाE क े विवद्वान वकील का क E होगा विक उपदान की राभिश का भुग ान कर विदया गया था। उस संबं में, उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट अपील क े पैरा 9 में विकए गए संदभE से यह संक े विमल ा है विक हालांविक इस् ीफा स्वीकार कर े समय प्रति वादी क े पति को विकए गए भुग ान का संदभE विदया गया है, लेविकन यह Nुलासा नहीं कर ा है विक उपदान की राभिश का भुग ान कर विदया गया है। इसक े अलावा, इस न्यायालय क े समक्ष दायर अपील में अपीलक ाEओं ने उपदान का भुग ान न करने को सही ठहराने की मांग की है क्योंविक प्रति वादी क े पति ने सेवा से इस् ीफा दे विदया था।जैसा विक उSरदा ाओं क े विवद्वान अति वक्ता ने उपयुक्त कहा है, उपदान भुग ान अति विनयम, 1972 की ारा 4(1)(बी) प्राव ान कर ी है विक यविद रोजगार की समाविप्त 5 साल की विनरं र सेवा क े बाद हो ी है ो उपदान देय होगी और इस रह की समाविप्त में इस् ीफा भी शाविमल होगा। उस दृविष्टकोण में, यविद उपदान राभिश का भुग ान प्रति वादी क े पति को नहीं विकया गया है, ो इसका भुग ान करने का दातियत्व बना रहेगा और प्रति वादी संख्या न.[1] अति विनयम क े प्राव ानों क े अनुसार इसे प्राप्त करने का हकदार होगा। इस संबं में यह विनदmश विदया जा ा है विक अपीलक ाE दनुसार उपदान की गणना करेंगे और यविद पहले से भुग ान नहीं विकया गया है ो प्रति वादी संख्या न.[1] को इसका भुग ान करेंगे। ऐसा भुग ान इस ति भिथ से *ार सप्ताह क े भी र विकया जाएगा।
14. परिरणामस्वरुप, अपील स्वीकार की जा ी है। एकल पीठ सिसविवल रिरट याति*का संख्या 2839/2012 में विदनांक 01.11.2017 क े आदेश को बरकरार रN े हुए Nंड पीठ विवशेष अपील (रीट) संख्या 1261/2018 में पारिर विनणEय विदनांक 19/11/2018 को विनरस् विकया जा ा है। उपरोक्त विनदmश क े अनुसार उपदान राभिश का भुग ान इस ारीN से *ार सप्ताह क े भी र उपदान संदाय अति विनयम, 1972 क े प्राव ानों क े अनुसार प्रति वादी संख्या 1 को विकया जाएगा।
15. लंविब आवेदन, यविद कोई हो, का विनस् ारण विकया जा ा है। न्याया ीश (आर. भानुमति ) न्याया ीश (ए. एस. बोपन्ना) नई विदल्ली 15 अप्रैल, 2020 यह अनुवाद आर्विटविफभिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुवास' क े जरिरए अनुवादक की सहाय ा से विकया गया है। अस्वीकरण: यह विनणEय पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविम उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुवाविद विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और आति कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनणEय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाभिणक होगा और विनष्पादन और कायाEन्वयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।