Full Text
भारिीय सवोच्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अतिकाररिा
दीवानी अपील संख्या 2365/2020
(एस. एल. पी (दीवानी) सं. 2307/2019 से उत्पन्न)
तनशा तप्रया भातिया ....अपीलार्थी
बनाम
भारि संघ एवं एक अन्य ...प्रत्यर्थीगण
संग
फौजदारी अपील सं. 413/2020
(एस. एल. पी (फौ.) सं. 10668/2015 से उत्पन्न)
ररि यातिका (फौजदारी) सं. 24/2012
ररि यातिका (फौजदारी) सं. 1/2016
तनणणय
न्यायमूतिण ए.एम. खानतवलकर
JUDGMENT
1. यह मुक़दमा ननयोक्ता और कममचारी क े ररश्ते क े संदर्म में राज्य-नागररक क े परस्पर व्यवहार क े बीच कानूनी संतुलन बनाने क े बारे में सवाल उठाता है। राज्य की छतरी क े तहत रोज़गार का स्वरूप जनिल है एवं प्रायः यह ननर्ाए जाने वाले कर्त्मव्य क े स्वरुप को ननर्ामररत करता है और उनक े द्वारा प्रयोग नकए जाने वाले अनर्कार इसक े साथ सहसम्बद्ध होने चानहए| अथामत नजतना उच्च पद एवं नजम्मेदाररयां, वृहत जननहत में व्यक्तक्तगत अनर्कार का क्षेत्र एवं स्वरुप प्रतीपानुपाती होने चानहए| फलस्वरूप वतममान मामले जैसी पररक्तथथनतयााँ उत्पन्न हुईं नजसमें राष्ट्र ीय सुरक्षा क े गंर्ीर मामले से ननपिने वाले राज्य संथथान की सुरक्षा तथा आसूचना अनर्कारी क े रूप में वहााँ ननयोनजत नकसी व्यक्तक्त क े वैयक्तक्तक नहत क े बीच संतुलन की न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंर्ुत्व क े आर्ारर्ूत संवैर्ाननक मूल्ों क े आलोक में नवनर्क जााँच की जा रही है|
2. यह संयुक्त ननर्मय "पहचान" क े आर्ार पर अनुसंर्ान और नवश्लेषर् नवंग (र्ती, क ै डर और सेवा) ननयम, 1975 (संक्षेप में, "1975 ननयम") क े ननयम 135 क े तहत अपीलाथी की अननवायम सेवाननवृनर्त् की कारमवाई से संबंनर्त और उससे उत्पन्न होने वाले सर्ी चार मामलों का ननपिान करेगा| एसएलपी (दीवानी) संख्या 2307/2019 से उत्पन्न होने वाली दीवानी अपील संख्या 2365/2020 में अपीलाथी की मुख्य निकायत को समानहत करते हुए प्रमुख मामले क े तौर पर ननपिा गया है| दीवानी अपील संख्या 2365/2020 @ तवशेष अनुमति यातिका (दीवानी) सं. 2307/2019
3. अनुमनत प्रदाननत|
4. प्राथनमक चुनौती प्रत्यथीगर् द्वारा दायर ररि यानचका (दीवानी) संख्या 2735/2010 में नदनांक 7.1.2019 को पाररत ननर्मय (संक्षेप में आक्षेनपत ननर्मय) को है, नजसक े ज़ररये नई नदल्ली क्तथथत नदल्ली उच्च न्यायालय (संक्षेप में, 'उच्च न्यायालय') ने अपीलाथी क े अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि को बरकरार रखा और ओ.ए संख्या 50/2010 में क ें द्रीय प्रिासननक अनर्करर् (संक्षेप में अनर्करर्) द्वारा नदनांक 16.3.2010 को पाररत आदेि को पलि नदया नजसमें अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि को ननरस्त करते हुए अपीलाथी को वापस सेवा में बहाल करने का आदेि नदया गया था|
5. संक्षेप में कहा जाए तो 22.2.1988 को, अपीलाथी ने अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् सेवा (आरएएस) क े तहत "सीर्ी र्ती" क े रूप में अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग (संक्षेप में "संगठन" या "नवर्ाग") ज्वाइन नकया था| उन्हें ननदेिक, प्रनिक्षर् संथथान (गुड़गांव) क े पद सनहत सेवा क े कायमकाल क े दौरान नवनर्न्न नवर्ाग सौंपे गए जहां वह 2.7.2004 से अगस्त, 2007 तक पदथथानपत रहीं। 3.8.2007 को, अपीलाथी को नई नदल्ली क्तथथत मुख्यालय में ननदेिक क े रूप में पदथथानपत नकया गया। गुड़गांव और नदल्ली में तैनाती क े दौरान, अपीलाथी को क्रमिः श्री अिोक चतुवेदी और श्री सुनील उक े क े साथ बातचीत करनी होती थी, जो उस समय नवनर्न्न क्षमताओं में संगठन में काम कर रहे थे।
6. 7.8.2007 को, अपीलाथी ने संगठन क े प्रर्ारी सनचव (आर) क े रूप में कायमरत श्री अिोक चतुवेदी और उस समय संगठन में संयुक्त सनचव क े रूप में कायमरत श्री सुनील उक े क े क्तखलाफ यौन उत्पीड़न की निकायत दजम कराई। अपीलाथी ने आरोप लगाया नक आरोनपत अनर्काररयों ने त्वररत पदोन्ननत हानसल करने हेतु संगठन क े अंदर चल रहे सेक्स रैक े ि में िानमल होने क े नलए कहकर उसका उत्पीड़न नकया और उपक ृ त करने से इन्कार करने पर उसे सताया गया| इस प्रकार र्ूल-चूक को लेकर आरोपों का नसलनसला िुरू हुआ जो मुक़दमेबाज़ी में पररर्त होकर वतममान क े चार मुक़दमों तक पहुाँच गया है|
7. संगठन ने लगर्ग तीन महीने क े अंतराल क े बाद तवशाखा और अन्य बनाम राजस्र्थान राज्य और अन्य में थथानपत नदिाननदेिों क े अनुसार एक निकायत सनमनत का गठन कर यौन उत्पीड़न क े आरोपों का जवाब नदया और संगठन की एक मनहला अनर्कारी सुश्री िनि प्रर्ा को तीन सदस्य निकायत सनमनत क े अध्यक्ष क े रूप में ननयुक्त नकया। इस प्रकार गनठत निकायत सनमनत में तवशाखा (उक्त) में नदए गए नदिाननदेिों क े अनुसार नकसी ग़ैर-सरकारी संगठन या अन्य ननकाय क े प्रनतनननर् क े रूप में तीसरे पक्ष को िानमल नहीं नकया जो यौन उत्पीड़न क े मुद्दे से पररनचत हो| पररर्ामस्वरूप, 1.11.2007 को राष्ट्र ीय सुरक्षा पररषद सनचवालय (NSCS) क े ननदेिक डॉ तारा करथा को जोडकर सनमनत को पुनगमनठत नकया गया।
8. उल्लेखनीय है नक कई अनुस्मारक क े बावजूद, अपीलाथी ने सनमनत क े समक्ष घोनषत कायमवाही में र्ाग लेने से इन्कार कर नदया और इस तरह से इन्कार का ननम्ननलक्तखत कारर्ों का हवाला नदया: “(i) नविाखा नदिाननदेिों क े अनुसार नवर्ागीय सनमनत क े गठन करने की आवश्यकता; और, (ii) सनमनत को श्री अिोक चतुवेदी क े क्तखलाफ कायमवाही करने का कोई अनर्कार नहीं था, क्ोंनक सनमनत क े अध्यक्ष उनक े क्तखलाफ आरोपों की जााँच करने क े नलए पयामप्त रूप से वररष्ठ नहींथे।
9. नवर्ागीय निकायत सनमनत ने अपनी एकपक्षीय ररपोिम में यह कहा नक श्री सुनील उक े क े क्तखलाफ यौन उत्पीड़न का कोई र्ी आरोप सानबत नहीं नकया जा सका है। इस ररपोिम क े बाद प्रर्ानमंत्री कायामलय में एक बहु-चनचमत घिना सामने आई जहााँ अपीलाथी ने ख़बरों क े अनुसार 19.08.2008 को आत्महत्या करने का प्रयास नकया| हमें प्रर्ानमंत्री कायामलय में इस घिना क े तथ्यात्मक पहलू पर नवस्तृत रूप से नववेचना करने की आवश्यकता नहीं है, लेनकन वतममान मुकदमेबाजी क े उद्देश्य से, यह उल्लेख करने क े नलए पयामप्त है नक इस घिना क े कारर्, अपीलाथी का नाम और पदनाम मीनडया में व्यापक रूप से सामने आया। इसक े अलावा, इस घिना से उत्पन्न अपीलाथी क े क्तखलाफ आपरानर्क मामले को महानगर दंडानर्कारी, पनियाला हाउस न्यायालय, नई नदल्ली द्वारा नदनांक 21.9.2013 को रद्द कर नदया गया।
10. इस घिना क े बाद श्री अिोक चतुवेदी क े क्तखलाफ निकायतों की जााँच-पड़ताल करने क े नलए र्ारतीय प्रिासननक सेवा क े एक सेवाननवृर्त् अनर्कारी सुश्री राठी नवनय झा की अध्यक्षता में तत्कालीन प्रर्ान मंत्री द्वारा एक और सनमनत का गठन नकया गया था। सनमनत ने श्री अिोक चतुवेदी क े क्तखलाफ आरोपों को दो पहलुओं से ननपिा- प्रथम यह नक अपीलाथी की निकायत नमलने पर तवशाखा (उपरोक्त) क े नदिाननदेिों क े अनुसार कायम न करने का आरोप; दू सरी बात, यौन उत्पीड़न क े दायरे में आने वाले क ृ त्य में वास्तव में नलप्त होने क े आरोप। इस समय, हम क े वल पहले आरोप को लेकर नचंनतत हैं, जो सनचव (आर) द्वारा इस न्यायालय क े ज़ररए तवशाखा (उपरोक्त) में पाररत नवस्तृत नदिाननदेिों क े अनुसार कायम करने में की गई चूक है। राठी नवनय झा सनमनत ने इस ननष्कषम क े साथ जांच संपन्न की नक अनर्लेख पर मौजूद साक्ष्य क े आर्ार पर अपने सहयोनगयों क े हाथों अपीलाथी क े यौन उत्पीड़न का कोई मामला नहीं बनता| हालााँनक, सनमनत ने कई महत्वपूर्म निप्पनर्यों को दजम नकया नजनका इस ननर्मय क े बाद क े नहस्से में उनचत समय पर उल्लेख नकया जाएगा।
11. इसक े अलावा, प्रर्ानमंत्री कायामलय में उपरोक्त घिना क े बाद, मंनत्रमंडल सनचवालय ने पत्र सूचना कायामलय क े माध्यम से, नदनांक 19.8.2008 को “सुश्री ननिा नप्रया र्ानिया द्वारा आत्महत्या क े प्रयास से संबंनर्त तथ्य पत्र” नामक िीषमक से एक प्रेस नोि जारी नकया| इस प्रेस नोि में घिना, नवर्ाग क े र्ीतर अपने सहयोनगयों क े क्तखलाफ उनकी निकायतें और उनक े माननसक स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञाननक क्तथथनत क े बारे में जानकारी थी। यह उल्लेख करना उनचत है नक अपीलाथी की अिांत माननसक क्तथथनत क े बारे में निप्पर्ी, अक्तखल र्ारतीय आयुनवमज्ञान संथथान (AIIMS) क े मनोनचनकत्सा नवर्ाग क े प्रमुख से सनचव (R) द्वारा मांगी गई एक अनौपचाररक राय पर आर्ाररत थी। उल्लेखनीय है नक इस न्यायलय ने ररि यानचका (फौजदारी) संख्या 24/2012 में नदनांक 19.08.2008 की प्रेस नोि को नदनांक 15.12.2014 क े आदेि क े ज़ररए अपीलाथी क े मानवानर्कारों और व्यक्तक्तगत गररमा का घोर उल्लंघन करार देते हुए रद्द कर नदया| आदेि क े प्रासंनगक र्ाग में इस प्रकार निपण्णी की गई है: “उपरोक्त क े उनचत मूल्ांकन पर, यह नननित रूप से कहा जा सकता है नक नजस आर्ार पर प्रेस नोि जारी की गई थी, उसका कोई आर्ार नहीं है। जैसा नक हम समझते हैं, प्रेस नोि नागररक और ननसंदेह नकसी र्ी रैंक क े पदानर्कारी की प्रनतष्ठा में खोखलापन पैदा करती है| प्रेस नोि जारी करने का कोई कारर् नहीं था| हम समझ सकते हैं नक प्रेस नोि जारी की जाती है नक संबंनर्त व्यक्तक्त क े क्तखलाफ अपरार् दजम नकया गया है क्ोंनक यह एक संज्ञेय अपरार् है लेनकन हम इस तरह क े प्रेस नोि जारी करने की सराहना नहीं कर सकते जो एक अनर्कारी की गररमा, प्रनतष्ठा और गोपनीयता को प्रर्ानवत करता हो| पूवोक्त क े मद्देनजर, हम नदनांक 19.08.2008 की प्रेस नोि को रद्द करते हैं| यह ज़ोर देने की जरूरत नहीं है नक जब हम एक प्रेस नोि या नकसी र्ी चीज़ को रद्द कर देते हैं, तो यह कानून की नजर में मौजूद नहीं होता है और यह समझना होता है नक यह नकसी र्ी समय नकसी र्ी उद्देश्य क े नलए अक्तस्तत्व में नहींथा|"
12. पीएमओ में 19.8.2008 की घिना ने राष्ट्रीय और अंतरामष्ट्र ीय पोिमलों पर मीनडया का र्ारी ध्यान आकनषमत नकया है और मीनडया ररपोिों की एक श्रृंखला में पररर्त हुई, नजससे संगठन क े साथ उसक े संबंर् सनहत अपीलाथी की पहचान सावमजननक चचाम का नवषय बन गई। इस घिना ने र्ुरी का काम नकया नजसक े इदम-नगदम बाद में सावमजननक पहचान की घिनाओं ने आकार नलया और जो अंततः ननयम 135 क े दायरे में अपीलाथी क े एक्सपोजर अथामत पहचान सावमजननक होने का कारर् बनी| उपरोक्त घिनाओं क े आलोक में, अपीलाथी को "उजागर" घोनषत कर नदया गया। इसक े अलावा, संगठन क े काम क े स्वरुप को ध्यान में रखते हुए प्रत्यथीगर् ने अपीलाथी को रोजगार क े नलए अयोग्य घोनषत कर नदया क्ोंनक गोपनीयता और गुप्तता संगठन क े अपररहायम तत्व हैं|
13. एक खुनफया अनर्कारी क े रूप में पहचान सावमजननक होने क े कारर् अपीलाथी की अननयोज्यता की घोषर्ा नदनांक 18.12.2009 को पाररत अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि क े ज़ररए 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े तहत की गई| प्रत्यथीगर् की दुर्ामवना एवं कारमवाई में स्पष्ट् मनमानी क े आर्ार पर ओ.ए संख्या 50/2010 में अपीलाथी ने अनर्करर् क े समक्ष इस आदेि पर आपनर्त् जताई| अनर्करर् ने अपीलाथी की इस आदेि से संबंनर्त चुनौती को सही ठहराते हुए नदनांक 16.03.2010 क े आदेि द्वारा अपीलाथी को नफर से सेवा में बहाली का ननदेि नदया| अनर्करर् ने ननम्न प्रकार निपण्णी की: “हम पक्षकारगर् द्वारा प्रस्तुत सामनियां देख चुक े हैं| उन्हें सुनने क े बाद हमारी पुष्ट् राय है नक अपीलाथी क े साथ ज़बरदस्त मनमानी की गई है और उसक े वैर्ाननक एवं संवैर्ाननक अनर्कारों का हनन हुआ है| ननयम 135 (1) (ए) क े उपाय का समथमन नहीं नकया जा सकता। पररर्ामस्वरूप, हमारा नवचार है नक आवेदक स्वीकायम राहत अथामत पुनः बहाली की हकदार है| हम उक्त ननष्कषम पर आने क े ननम्न कारर् देते हैं।”
14. अपीलाथी की सेवाननवृनर्त् क े बाद, उनकी अनंनतम पेंिन CCS (पेंिन) ननयम, 1972 क े ननयम 69 क े तहत तय की गई, जो नदनांक 10.05.2010 क े आदेि क े द्वारा उनकी सेवाननवृनर्त् की नतनथ से उनकी अननर्क ृ त अनुपक्तथथनत अथामत नदनांक 29.8.2008 से 26.11.2009 तक की अवनर् क े ननयनमत होने तक थी। अनंनतम पेंिन उनक े द्वारा 28.8.2008 को प्राप्त अंनतम वेतन पर अनर्क ृ त थी। उसक े बाद ररि यानचका (दीवानी) संख्या 3704 / 2012 में नदल्ली उच्च न्यायलय ने नदनांक 21.10.2013 को पाररत आदेि क े ज़ररए अननर्क ृ त अनुपक्तथथनत की अवनर् को ननयनमत कर नदया जो नक इस न्यायालय द्वारा एस.एल.पी. (दीवानी) सी.सी. संख्या 6762/2014 में सही ठहराया गया और 19.12.2009 से पेंिन लार् पूरा करने क े नलए अपीलाथी को हकदार बताया|
15. बहरहाल, अनर्करर् ने कहा नक अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि संनवर्ान क े अनुच्छे द 14 और 311 का उल्लंघन है और ननयम 135 को असंवैर्ाननक घोनषत करने से असमथम रहा| यह ननम्न िब्ों पर संतुष्ट् रहा: “20. ……हमें लगता है नक सहायक ननयम एक अनर्कारी, नजसने काफी वषों की सेवा की है, को प्राप्त गारंिीक ृ त अनर्कारों को समाप्त करने क े नलए अपयामप्त है। जैसा नक हमने पाया है नक आवेदक को कानून क े संरक्षर् से वंनचत नकया गया है, जो नक संनवर्ान क े अनुच्छे द 14 क े तहत एक मौनलक अनर्कार है| यह हमारे नलए आवश्यक नहीं है नक हम अनुसंर्ान और नवश्लेषर् नवंग (र्ती, क ै डर और सेवा) ननयम क े ननयम 135 (1) (ए) की संवैर्ाननकता पर आगे नवचार- नवमिम करें या यह घोषर्ा करें नक प्रयोग नकया गया ननयम िून्य है, क्ोंनक यह अनुच्छे द 311 क े खंड (2) का उल्लंघन करता है।”
16. प्रत्यथीगर् द्वारा ररि यानचका (दीवानी) 2735/2010 में उच्च न्यायालय क े समक्ष अनर्करर् क े उक्त आदेि का नवरोर् नकया गया नजसमें उच्च न्यायालय ने एक नवस्तृत ननर्मय द्वारा अनर्करर् क े फ ै सले को नदनांक 7.1.2019 क े आक्षेनपत ननर्मय क े ज़ररए पलि नदया और ननयम 135 क े तहत जारी अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि को बरकरार रखा। 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 की संवैर्ाननक वैर्ता की चुनौती की र्ी उच्च न्यायालय ने जांच की और उसे नकार नदया। िुरुआत में, हम इस मुद्दे से ननपिने को उनचत समझते हैं नक क्ा 1975 क े ननयम 135 को असंवैर्ाननक माना जा सकता है। तनयम 135 की संवैिातनकिा क े सम्बन्ध में प्रस्तुतियााँ
17. हमारे समक्ष अपीलाथी द्वारा यह तक म नदया गया है नक ननयम 135 संनवर्ान क े अनुच्छे द 311 का सीर्े उल्लंघन है जो संघ या राज्य क े अर्ीन नागररक क्षमताओं में ननयोनजत व्यक्तक्तयों पदच्युत करने, पद से हिाने या पंक्तक्त में अवनत करने से संबंनर्त है क्ोंनक कनथत ननयम कममचारी क े उस अनर्कार को संिोनर्त कर उसे नुकसान पहुंचाता है| उसी तक म क े नवस्तार में, यह कहा गया है नक अनुच्छे द 311 क े तहत ननर्ामररत प्रनक्रयात्मक सुरक्षा उपायों का पालन करने में नवफलता अपीलाथी को कानून की समान सुरक्षा से वंनचत करने क े समान है इस प्रकार संनवर्ान क े अनुच्छे द 14 का उल्लंघन होता है। इसक े अलावा, यह र्ी तक म नदया गया है नक संनवर्ान क े अनुच्छे द 309 द्वारा ननयम 135 को बचाया नहींजा सकता है, क्ोंनक अनुच्छे द 309 में र्ती और लोक सेवकों की सेवा की ितों का एक अलग क्षेत्र िानमल है, जबनक सेवा समाक्तप्त क े दौरान अपनाई जाने वाली कानूनी प्रनक्रया नविेष रूप से संनवर्ान क े अनुच्छे द 311 क े दायरे में आती है। इसक े अनतररक्त, कनथत ननयम 135 अस्पष्ट्ता क े दोष से बुरी तरह प्रर्ानवत है।
18. इस प्रस्तुनत को मजबूती प्रदान करने क े नलए अपीलाथी ने करिार तसंह बनाम पंजाब राज्य में कानूनों की िून्यता पर इस न्यायालय द्वारा प्रनतपानदत नसद्धांतों पर ननम्ननलक्तखत िब्ों में र्रोसा नकया है: “130. यह कानूनी न्यायिास्त्र का मूल नसद्धांत है नक यनद क़ानून क े ननषेर् स्पष्ट् रूप से पररर्ानषत नहीं हैं तो यह अस्पष्ट्ता की वजह से िून्य होता है| अस्पष्ट् कानून कई महत्वपूर्म मूल्ों को र्ंग कर देते हैं। इस बात पर जोर नदया जाता है नक कानूनों को सामान्य बुक्तद्ध क े व्यक्तक्त को यह जानने का उनचत अवसर देना चानहए नक क्ा नननषद्ध है, तानक वह उसक े अनुसार कायम कर सक े । अस्पष्ट् कानून ननष्पक्ष चेतावनी नहीं देकर ननदोषों को फ ं सा सकते हैं। ऐसा कानून अर्ेद्य रूप से बुननयादी नीनतगत मामलों को पुनलसकनममयों और न्यायार्ीिों को एक तदथम और व्यक्तक्तपरक आर्ार पर मनमाना और र्ेदर्ावपूर्म उपयोग से जुड़े खतरों क े साथ समार्ान का अनर्कार देता है। इससे र्ी अनर्क यह नक प्रयोग नकए गए अनननित एवं अपररर्ानषत िब् नागररकों को ननस्संदेह रूप से “गैर कानूनी क्षेत्र क े अत्यनर्क बाहर ले जाते हैं...... बजाय तब जबनक नननषद्ध क्षेत्र की पररनर् स्पष्ट् हो।”
19. आगे की प्रस्तुनतयों में अपीलाथी ने अनर्करर् की निपण्णी क े आर्ार पर ननयम की संवैर्ाननकता क े क्तखलाफ अपने तक म र्ी नदए हैं नक ननयम इसक े प्रकािन की अनुमनत प्रदान नहीं करता है और न ही संगठन में सेवारत कममचाररयों को इस तरह क े ननयमों क े अक्तस्तत्व क े बारे में पूवम सूचना क े ननष्पक्ष व्यवहार की सबसे बुननयादी आवश्यकता को संतुष्ट् करता है। यह आिह नकया गया है नक अपीलाथी को ननयम क े अक्तस्तत्व क े बारे में पता नहींथा और ननयमों की प्रनत प्राप्त करने क े बाद र्ी, उसक े नलए इसे गुप्त रखना आवश्यक था।
20. दू सरी ओर, प्रत्यथीगर् ने कहा है नक संनवर्ान क े अनुच्छे द 311 का अननवायम या समय से पहले सेवाननवृनर्त् क े मामले से कोई लेना देना नहीं है क्ोंनक अनुच्छे द 311 पदच्युनत, पद से हिाने या पंक्तक्त में अवननत से जुड़े मामलों तक ही सीनमत है। प्रत्यथीगर् की दलील है नक अनुच्छे द 311 का उपयोग सजा क े रूप में सेवा समाक्तप्त से जुड़े मामलों में नकया जाता है। जबनक, 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े तहत अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि में वास्तव में सजा होना आवश्यक नहींहै|
21. प्रत्यथीगर् का कहना है नक अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करने क े नलए ननयम 135 क े तहत िक्तक्त संनवर्ान क े अनुच्छे द 309 क े परंतुक से आती है जो सेवा की ितों से संबंनर्त हैं; जबनक अनुच्छे द 310 प्रसाद क े नसद्धांत से संबंनर्त है| यह र्ी प्रस्तुत नकया गया है नक अननवायम सेवाननवृनर्त् का एक प्रावर्ान होने क े नाते ननयम 135 में कोई दंडात्मक पररर्ाम िानमल नहीं है जैसा नक मौनलक ननयम 56 (जे) (संक्षेप में "एफआर 56 (जे)") का मामला है। साथ ही भारि संघ बनाम कनणल जे.एन. तसन्हा और एक अन्य में इस न्यायलय की व्याख्या पर ननम्न िब्ों में र्रोसा नकया गया है: “अब मौनलक ननयम 56 (जे) क े व्यक्त िब्ों पर आते है, यह कहता है नक सक्षम प्रानर्कारी को सरकारी कममचारी को सेवाननवृर्त् करने का पूर्म अनर्कार है यनद उसे लगता है नक ऐसा करना जननहत में है। सक्षम प्रानर्कारी को नदया गया अनर्कार पूर्म है| उस िक्तक्त का प्रयोग ननयम में उक्तल्लक्तखत ितों क े अध्यर्ीन नकया जा सकता है, नजनमें से एक यह है नक संबंनर्त प्रानर्कारी को अवश्य लगना चानहए नक ऐसा करना जननहत में है। यनद वो प्रानर्कारी सद्भावनापूवमक वो राय बना लेता है तो उस राय की संिुद्धता को अदालतों क े समक्ष चुनौती नहींदी जा सकती। व्यनथत पक्ष यह तक म देने क े नलए स्वतंत्र है नक अपेनक्षत राय नहीं बनाई गई है या ननर्मय संपानवमक आर्ार पर आर्ाररत है या नक यह एक मनमाना ननर्मय है| प्रत्यथी संख्या 1 की सेवा ितों में से एक यह है नक सरकार पचास साल पूरे होने क े बाद उसे नकसी र्ी समय सेवाननवृर्त् कर सकती है यनद उसे लगता है नक ऐसा करना जननहत में है| अपनी अननवायम सेवाननवृनर्त् क े कारर् सेवाननवृनर्त् से पहले उसक े द्वारा अनजमत अनर्कारों में से कोई र्ी ख़त्म नहीं होता। अननवायम सेवाननवृनर्त् में कोई दीवानी पररर्ाम िानमल नहीं हैं। उक्त ननयम 56 (जे) सरकारी कममचाररयों क े क्तखलाफ कोई दंडात्मक कारमवाई करने क े नलए नहीं है। यह ननयम संनवर्ान क े अनुच्छे द 310 में सनन्ननहत प्रसाद नसद्धांत क े पहलुओं में से एक है। इस ननयम क े तहत प्रदर्त् िक्तक्त का प्रयोग करते हुए सक्षम प्रानर्कारी क े पास नवनर्न्न नवचार आ सकते हैं। क ु छ मामलों में, सरकार को ऐसा लग सकता है कोई नविेष पद नकसी अनर्कारी द्वारा अनर्क उपयोगी ढंग से जननहत में र्ारर् नकया जा सकता है जो र्ारर् करने वाले की तुलना में अनर्क सक्षम हो। हो सकता है नक जो अनर्कारी पद संर्ाल रहा है वह अक्षम न हो लेनकन सक्षम प्रानर्कारी अनर्क क ु िल अनर्कारी रखना पसंद करे। यह र्ी हो सकता है नक क ु छ प्रमुख पदों पर जननहत में यह आवश्यक हो नक वहां ननस्संदेह योग्यता वाला और ईमानदार व्यक्तक्त होना चानहए। इस तथ्य से इन्कार नहीं नकया जा सकता नक सर्ी संगठनों और ज़्यादातर सरकारी संगठनों में बेकार व्यक्तक्त काफी अनर्क हैं और उन्हें हिा देना ही जननहत में होता है| मौनलक ननयम 56 (जे) व्यक्तक्तगत सरकारी कममचारी क े अनर्कारों और जनता क े नहतों क े बीच संतुलन रखता है। हालााँनक सरकारी कममचारी को न्यूनतम सेवा की गारंिी दी जाती है, सरकार को अपने तंत्र को सनक्रय करने और उन लोगों को अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करक े इसे अनर्क क ु िल बनाने क े नलए िक्तक्त दी जाती है जो उसकी राय में जननहत में वहां नहीं होने चानहए|” आक्षेतपि तनणणय में प्रस्तुतिय ंएवं तनष्कषों का तवश्लेषण
22. आक्षेनपत ननर्मय में, 1975 ननयमों क े ननयम 135 क े गैर-प्रकािन क े क्तखलाफ तक म और बाद में नोनिस प्राप्त करने की अपीलाथी की असमथमता को ननम्ननलक्तखत िब्ों में खाररज कर नदया गया: “61. यह ननस्संदेह सच है नक क ु छ प्रमानर्कताएं हैं (बी.क े. श्रीननवासन एवं एक अन्य बनाम कनामिक राज्य, एआईआर 1987 एससी 1054 एक ऐसा है) जो यह दिामता है नक मानदंड संचानलत करने क े नलए इसे प्रकानित नकया जाना चानहए| हालांनक, वतममान मामले में एक नवनचत्र क्तथथनत पैदा हो गई है, क्ोंनक अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग संगठन खुनफया काम में िानमल हैं; तकों क े दौरान, इसक े अनर्वक्ता ने इसे मंनत्रमंडल सनचवालय क े अर्ीन नवंग क े रूप में संदनर्मत नकया। सेवा की ितों का प्रकािन, संगठनात्मक संरचना और संर्वतः नवनर्न्न अनर्काररयों और कममचाररयों क े काम क े प्रवाह को बाहर जाने देने को गोपनीयता क े समझौते क े रूप में माना जाता है नजसे संगठन हर समय बनाए रखने क े नलए लड़ता है। इन मजबूररयों को देखते हुए, इस न्यायालय का मत है नक R&AW क े क ै डर ढांचे का व्यापक प्रचार जननहत में नहीं था। हालांनक, अनर्लेख से यह स्पष्ट् है नक प्राथी को ननयम क े बारे में पता था और उसने CAT को नदए अपने आवेदन में यह नहीं बताया नक उसे अंर्ेरे में रखा गया था; ननयम को चुनौती देने वाली अजी में जो कहा गया है, वह यह है नक पहली बार, अननवायम सेवाननवृनर्त् क े समय उसे पता चला और यह नक ननयमों को गुप्त रखा गया था| र्ारत संघ का जवाब यह है “1975 क े ननयम पूरे देि में R&AW क े सर्ी कायामलयों और मुख्यालय क े नवनर्न्न वगों में रखे गए हैं। R& AW क े सर्ी अनर्काररयों की इन ननयमों तक पहुंच है; लेनकन ये आम तौर पर जनता क े नलए उपलब्ध नहींहोते क्ोंनक वे गुप्त होते हैं।”
62. उपरोक्त तथ्यों से ऐसा लगता है नक यानचकाकताम को ननयमों नविेषकर ननयम 135 क े बारे में पता था। अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि क े बहुत बाद, उसने एक अलग ररि यानचका में इसे चुनौती दी| र्ले ही इस आर्ार पर नवबंर्न लागू नहीं नकया जा सकता है, लेनकन अदालत की राय है नक अनुसंर्ान और नवश्लेषर् नवंग क े स्वरुप और उक्त ननयम को प्रकानित न करने क े नलए बाध्य करने वाली मजबूररयों क े मद्देनज़र, ननयम क े प्रचार का अर्ाव वैर् आर्ार नहींहो सकता है|”
23. ननयम 135 की संवैर्ाननक वैर्ता को चुनौती "उजागर" और "सुरक्षा" जैसे अस्पष्ट् और खुले िब्ों क े उपयोग क े कारर् दुरुपयोग की आिंका पर र्ी आर्ाररत है। भारि संघ एवं एक अन्य बनाम िुलसीराम पिेल पर र्रोसा करते हुए, उच्च न्यायालय ने 'राज्य की सुरक्षा' की पररर्ाषा से 'अस्पष्ट्' और 'खुले अंत' जैसे िब्ों क े प्रयोग को खाररज कर नदया। उच्च न्यायालय ने िुलसीराम पिेल (उपरोक्त) में ननम्ननलक्तखत आदेि क े संदर्म में इस िब् का अथम ननकाला: “141. …राज्य की सुरक्षा" का र्ावाथम पूरे देि या पूरे राज्य की सुरक्षा नहीं है। इसमें राज्य क े एक नहस्से की सुरक्षा िानमल होती है। इसे सिस्त्र नवद्रोह या नवद्रोह तक र्ी सीनमत नहीं नकया जा सकता। कई तरह से राज्य की सुरक्षा प्रर्ानवत हो सकती है| यह रक्षा उत्पादन या इसी प्रकार क े मामलों से सम्बंनर्त रहस्यों या जानकाररयों को दू सरे देिों को देने से, चाहे वे हमारे देि क े दुश्मन हैं अथवा नहीं, अथवा आतंकवानदयों क े साथ गुप्त संबंर् द्वारा र्ी प्रर्नवत हो सकती है| राज्य की सुरक्षा को प्रर्ानवत करने वाले तरीकों का संख्यांकन करना कनठन है| नजस तरह से राज्य की सुरक्षा प्रर्ानवत होती है वह या तो खुली या गुप्त हो सकती है…..”
24. ==== न्यायालय ने दोहराया नक अनुसंर्ान और नवश्लेषर् नवंग खुनफया गनतनवनर्यों को अंजाम देने वाला संगठन है जो राष्ट्र क े सुरक्षा नहतों से संबंनर्त है और इस प्रकार, "राज्य की सुरक्षा" क े र्ाव की व्यापकता को संगठन द्वारा अंजाम दी गई नवनिष्ट् गनतनवनर्यों क े अलोक में देखा जाना चानहए। इस सन्दर्म में आक्षेनपत ननर्मय क े पैरा 65 में ननम्न बातें दजम हैं: “65. प्राथी क े तक म हैं नक "सुरक्षा" र्ाव एक अस्पष्ट् िब् है और इसका कोई अथम नहीं है। उसकी दलील है नक नकसी र्ी अन्य अनर्व्यक्तक्त क े उपयोग क े नबना इस िब् का प्रयोग इसे अस्पष्ट् एवं दुरूपयोग योग्य बनता है| इस संदर्म में, न्यायालय यह दोहराएगा नक R & AW एक संगठन है जो स्वीकायम रूप से उन खुनफया गनतनवनर्यों में लगा हुआ है जो राज्य की सुरक्षा से संबंनर्त है| नकसी र्ी अन्य अनर्व्यक्तक्त की अनुपक्तथथनत में, अनर्व्यक्तक्त "सुरक्षा" का स्वार्ानवक अथम होग- ननयम 135 क े संदर्म में यनद कममचारी या अनर्कारी की गनतनवनर्यां ऐसी हैं नक इसे संगठन या देि की सुरक्षा क े नलए यथोनचत खतरा माना जाता है, तो ननयम लागू हो सकता है। इस संदर्म में, तुलसी राम पिेल (उपरोक्त) की उपरोक्त निप्पनर्यां प्रासंनगक हैं। अदालत ने रेखांनकत नकया है नक राज्य की सुरक्षा को प्रर्ानवत करने वाले नवनर्न्न तरीकों का संख्यांकन करना मुक्तिल है। न्यायालय ने यह र्ी स्पष्ट् नकया था नक राज्य की सुरक्षा में राज्य क े नहस्से की सुरक्षा िानमल है। यनद कोई इन निप्पनर्यों को इस तथ्य क े संदर्म में देखता है नक अनुसंर्ान और नवश्लेषर् नवंग क े सदस्य संनवर्ान क े अनुच्छे द 33 (50 वें संिोर्न अनर्ननयम, 1984 द्वारा संिोनर्त) क े दायरे में आते हैं, न्यायलय क े नलए यह स्पष्ट् है नक ननयम 135 क े दायरे में आने वाला कोई र्ी कायम इस तरह का होना चानहए जो राष्ट्र की सुरक्षा या ररसचम एं ड अनानलनसस नवंग की सुरक्षा क े नलए खतरा हो। इसक े अलावा, संगठन में इसक े सदस्य और कमी िानमल हैं। इसनलए, अगर नकसी ननर्ामररत मामले में, अनुसंर्ान और नवश्लेषर् नवंग का कोई र्ी सदस्य ऐसे व्यवहार में नलप्त होता है, जो संर्ानवत रूप से उसक े संपूर्म मनोबल को क्षनत पहुंचाता है या असंतोष का कारर् बनता है, तो यह उसकी सुरक्षा क े नलए खतरा बन सकता है। "
25. 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 की संवैर्ाननकता का नवरोर् करने क े नलए, अपीलाथी द्वारा अस्पष्ट्ता और व्यापकता क े आर्ार पर "एक्सपोजर" िब् को चुनौती दी गई थी| इस आपनर्त् से ननपिने क े दौरान, उच्च न्यायालय ने अनर्व्यक्तक्त की स्पष्ट् व्याख्या की और ननम्ननलक्तखत ितों में आपनर्त् को खाररज कर नदया: “66. जहााँ तक आवेदक को "एक्सपोज़र" िब् पर आपनर्त् का संबंर् है, यहााँ एक स्पष्ट् व्याख्या क े बाद, यह स्पष्ट् है नक यनद R & AW क े नकसी र्ी सदस्य की पहचान, जो नक व्यापक रूप से नहीं जानी जानी चानहए,ज्ञात अथवा प्रकानित की जाती है और वह घिना या कारमवाई उसकी सुरक्षा या अपने कनममयों की सुरक्षा या राज्य की सुरक्षा क े नलए वास्तनवक या आिंनकत खतरे का कारर् है, तो यह ननयम लागू होगा| नवनर्न्न क्तथथनतयों की कल्पना करना कनठन है नजसमें अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग कनममयों की पहचान सावमजननक होने से सुरक्षा को खतरा हो सकता है। उदाहरर् स्वरूप, नकसी ऐसे व्यक्तक्त की पहचान जो नकसी वररष्ठ पद पर हो, अपने आप में सुरक्षा या अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग क े नलए खतरा पैदा नहीं कर सकता है। लेनकन नकसी र्ी घिना क े माध्यम से संवेदनिील कायों या सञ्चालन में नकसी र्ी तरह से िानमल इसक े अनर्काररयों की पहचान का सावमजननक होना अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग या राज्य की सुरक्षा से समझौता का कारर् बन सकता है| ऐसा होने का एक तरीका यह है नक अगर इस तरह क े नकसी व्यक्तक्त की सच्चाई सामने आ जाती है तो वह ित्रु ताकतों द्वारा जांच क े नलए खुला हो सकता है और ऐसे मौकों पर र्ी खतरों का सामना करना पड़ सकता है, नजससे संगठन क े रहस्य स्वैक्तच्छक या अन्यथा ज़ानहर हो सकते है जो देि की सुरक्षा क े नलए खतरा हो सकता है। इसनलए, अनर्व्यक्तक्त "सुरक्षा" और "एक्सपोज़र" का उपयोग अस्पष्ट् या मनमाना नहीं है लेनकन संदर्म और R & AW क े अंतननमनहत उद्देश्यों क े मद्देनजर राज्य की सुरक्षा या अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग की सुरक्षा और संबंनर्त व्यक्तक्त की सावमजननक पहचान मुराद है।" संवैिातनकिा क िुनौिी का तनिाणरण
26. अगर कोई कानून मौनलक अनर्कारों क े साथ असंगत है या उसका अपमान करता है तो संनवर्ान का अनुच्छे द 13 लागू होगा। उस सूरत में, इस तरह का कानून असंगनत की हद तक िून्य होगा। खण्ड (3) क े आर्ार पर, िब् "कानून", नजसका इस्तेमाल अनुच्छे द 13 में नकया गया है, में एक सांनवनर्क "ननयम" र्ी िानमल है और इस प्रकार ननयम 135 की संवैर्ाननकता को अनुच्छे द 311 सहपनठत अनुच्छे द 14 क े उल्लंघनकारी होने क े कारर् संनवनर्यों की संवैर्ाननकता का ननर्ामरर् करने क े नलए सामान्य नसद्धांतों की कसौिी पर वैर् रूप से परखा जा सकता है|
27. संनवर्ान का अनुच्छे द 311 लोक सेवकों की बखामस्तगी, हिाने या पद घिाने क े मामलों में प्राक ृ नतक न्याय क े आवश्यक नसद्धांतों का प्रकिीकरर् है और यह सुनननित करने क े नलए सरकार पर कतमव्य डालता है नक लोक सेवक क े क्तखलाफ ऐसे नकसी र्ी फ ै सले से पहले जााँच की जाती है नजस में इस तरह क े फ ै सले क े क्तखलाफ सुनवाई और अभ्यावेदन का अवसर नदया गया हो| प्राक ृ नतक न्याय क े उपयुमक्त नसद्धांत र्ी आमतौर पर अनुच्छे द 14 क े तहत नननहत हैं, क्ोंनक प्रश्नगत लोक सेवक को इससे वंनचत करना मनमानेपन क े अवगुर् से फ ै सला को कलंनकत करेगा और लोक सेवक को कानून क े समान संरक्षर् से वंनचत करेगा| अनुच्छे द 311 में इस प्रकार कहा गया है: “311. संघ या राज्य क े अिीन तसतवल हैतसयि में तनय तजि व्यक्तिय ं का पदच्युि तकया जाना, पद से हिाया जाना या पंक्ति में अवनि तकया जाना| (1) नकसी व्यक्तक्त को जो संघ की नसनवल सेवा का या अक्तखल र्ारतीय सेवा का या राज्य की नसनवल सेवा का सदस्य है अथवा संघ या राज्य क े अर्ीन कोई नसनवल पद र्ारर् करता है, उसकी ननयुक्तक्त करने वाले प्रानर्कारी क े अर्ीनथथ नकसी प्रानर्कारी द्वारा पदच्युत नहींनकया जाएगा या पद से नहींहिाया जाएगा | (2) यथापूवोक्त नकसी व्यक्तक्त को, ऐसी जांच क े पिात् ही, नजसमें उसे अपने नवरुद्ध आरोपों की सूचना दे दी गई है और उन आरोपों क े संबंर् में सुनवाई का युक्तक्तयुक्त अवसर दे नदया गया गया है, पदच्युत नकया जाएगा या पद से हिाया जाएगा या पंक्तक्त में अनवत नकया जाएगा, अन्यथा नहीं: परंतु जहां ऐसी जांच क े पिात उस पर ऐसी कोई िाक्तस्त अनर्रोनपत करने की प्रथथापना है वहां ऐसी जांच क े दौरान नदए गए साक्ष्य क े आर्ार पर अनर्रोनपत की जा सक े गी और ऐसे व्यक्तक्त को प्रथथानपत िाक्तस्त क े नवषय में अभ्यावेदन करने का अवसर देना आवश्यक नहीं होगा: परंतु यह और नक यह खंड वहां लागू नहींहोगा जहां नकसी व्यक्तक्त को ऐसे आचरर् क े आर्ार पर पदच्युत नकया जाता है या पद से हिाया जाता है या पंक्तक्त में अनवत नकया जाता है नजसक े नलए आपरानर्क आरोप पर उसे नसद्धदोष ठहराया गया है; या (क) जहां नकसी व्यक्तक्त को पदच्युत करने या पद से हिाने या पंक्तक्त में अनवत करने क े नलए सिक्त प्रानर्कारी का यह समार्ान हो जाता है नक नकसी कारर् से, जो उस प्रानर्कारी द्वारा लेखबद्ध नकया जाएगा, यह युक्तक्तयुक्त रूप से साध्य नहींहै नक ऐसी जांच की जाए; या (ख) जहां, यथाक्तथथनत, राष्ट्र पनत या राज्यपाल का यह समार्ान हो जाता है नक राज्य की सुरक्षा क े नहत में यह समीचीन नहींहै नक ऐसी जांच की जाए | (3) यनद यथापुवोक्त नकसी व्यक्तक्त क े संबंर् में यह प्रश्न उठता है नक खंड (2) में नननदमष्ट् जांच करना युक्तक्तयुक्त रूप से साध्य है या नहींतो उस व्यक्तक्त को पदच्युत करने या पद से हिाने या पंक्तक्त में अवनत करने क े नलए सिक्त प्रानर्कारी का उस पर नवननिय अंनतम होगा|"
28. और नवश्लेषर् क े नलए, 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े मूलपाठ का उल्लेख करना र्ी उनचत है, जो इस प्रकार है: “135. अतनवायण सेवातनवृति पर अंतिम लाभ: (1) संगठन क े नकसी र्ी अनर्कारी को ननम्ननलक्तखत में से नकसी र्ी आर्ार पर अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् नकया जा सकता है (क) एक खुनफया अनर्कारी क े रूप में उजागर हो गया हो या सुरक्षा कारर्ों से संगठन में अननयोज्य हो (ख) नवकलांगता या अपने कतमव्यों क े ननष्पादन में उसे लगने वाली चोिें। (2) उप ननयम (1) क े तहत नकसी अनर्कारी क े सेवाननवृर्त् होने पर, उसे ये नदया जा सकता है (i) उस वेतन पर आर्ाररत पेंिन जो नक उसने सेवाननवृनर्त् की सामान्य आयु तक प्राप्त नकया होता यनद वह सेवा में रहा होता और चयन क े आलावा नकसी अन्य तरीक े से इन ननयमों क े अंतगमत पदोन्ननत प्राप्त की होती अथवा वह अनर्कतम वेतन जोनक उसने उस िेड में प्राप्त नकया होता नजसमें वह थथायी था या उसकी सेवाननवृनर्त् क े समय वह ननयनमत रूप से ननयुक्त था यनद वह सेवाननवृनर्त् की आयु तक उस िेड में ननरंतर सेवा कर रहा होता, बितें नक नकसी र्ी क्तथथनत में ये पेंिन बारह सौ पचहर्त्र रूपये से कम नहींहोगी। (ii) तत्समय प्रवृर्त् ननयमों क े अंतगमत स्वीकायम पररवार पेंिन तथा मृत्यु सह सेवाननवृनर्त् िैचुिी (3) उपननयम 2 क े अंतगमत स्वीकायम पेंिन, मृत्यु सह सेवाननवृनर्त् िैचुिी और पररवार पेंिन क े अनतररक्त सम्बद्ध व्यक्तक्त को उसकी अननवायम सेवाननवृनर्त् से ठीक पूवम उसक े द्वारा प्राप्त मानसक वेतन क े बारह गुर्ा क े बराबर पुनवामस अनुदान र्ी नदया जाएगा | (4) संथथा का प्रमुख अपने नववेकानुसार सम्बद्ध अनर्कारी को उप-ननयम (2) क े अंतगमत देय पूर्म पेंिन को एकमुश्त में बदलने की अनुमनत देगा जोनक सेवाननवृनर्त् की सामान्य आयु प्राप्त करने पर सेवाननवृर्त् होने वाले व्यक्तक्त को स्वीकायम रानि क े पररवनतमत मूल् क े बराबर होगी |
29. अनुच्छे द 311 क े मूलिब्ों क े अवलोकन से पता चलता है नक यह अनुच्छे द तब लागू होता है जब नकसी लोक सेवक को पदच्युत नकया जाता है, हिाया जाता है या पंक्तक्त में अवनत नकया जाता है। “पदच्युत” नकया जाना, “पद से हिाया जाना” या “पंक्तक्त में अवनत” िब् का उपयोग उन क्तथथनतयों को कवर करने क े इरादे की ओर स्पष्ट् रूप से इिारा करता है जहां एक लोक सेवक को दंडात्मक पररर्ाम नदया जा रहा है। इस प्रकार जब तक लोक सेवक क े क्तखलाफ कारमवाई का स्वरुप दंडात्मक न हो, तब तक अनुच्छे द 311 क े अनुसार सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े साथ जांच करने की आवश्यकता नबल्क ु ल नहींउठती। लोक सेवक क े नवरूद्ध नवचाररत कारमवाई का स्वरुप अनुच्छे द 311 क े तहत सुरक्षा उपायों को आकनषमत करने क े नलए दंडात्मक होना चानहए। अनुच्छे द 311 की नीनत, उद्देश्य और कायमक्षेत्र को इस न्यायालय द्वारा बॉम्बे राज्य बनाम सौभाग िंद एम द शी में स्पष्ट् नकया गया है, नजसमें न्यायालय ने इस प्रकार निपण्णी की: “10. अब, अनुच्छे द 311 (2) में अंतननमनहत नीनत यह है नक जब नकसी कममचारी क े क्तखलाफ सजा क े माध्यम से कारमवाई करने का प्रस्ताव नकया जाता है और नजसमें उसक े द्वारा पहले से अनजमत लार् की समाक्तप्त िानमल होगी, उसे सुने जाने और आदेि क े क्तखलाफ कारर् बताने का अवसर नदया जाना चानहए। लेनकन वो नवचार लागू नहीं नहीं हो सकता है जहां आदेि दंडात्मक नहीं हो और पहले से अनजमत लार्ों का कोई नुकसान नहीं हुआ है, और ऐसे में कोई कारर् नहीं है नक रोजगार की ितों और सेवा क े ननयमों को प्रर्ाव नहीं नदया जाना चानहए। इस प्रकार, यह तय करने क े नलए वास्तनवक मानदंड नक क्ा एक कममचारी की सेवाओं को समाप्त करने वाला आदेि बखामस्तगी या ननष्कासन में से एक है, यह पता लगाना है नक क्ा इसमें पहले से अनजमत लार्ों का कोई नुकसान िानमल है या नहीं। इस जांच क े अनुसार, ननयम 165 ए क े तहत आदेि को बखामस्तगी या ननष्कासन में से एक नहीं माना जा सकता क्ोंनक इसमें नपछली सेवाओं क े नलए आनुपानतक पेंिन का नुकसान िानमल नहींहै।
30. सवाल यह है नक क्ा 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े तहत की गई कारमवाई का स्वरुप दंडात्मक है या अननवायम सेवाननवृनर्त् क े रूप में बखामस्तगी है तानक संनवर्ान क े अनुच्छे द 311 क े तहत सुरक्षा उपायों को आकनषमत नकया जा सक े ? इस परीक्षा क े नलए वास्तनवक पड़ताल यह देखना है नक क्ा अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि अनुपयुक्तता की नचंता या कदाचार की सज़ा क े रूप में उत्पन्न हुआ है| वतममान मामले में, अपीलाथी को अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि का बस ननिाना बनाया गया है और अनुच्छे द 311 क े तहत पररकक्तल्पत बखामस्तगी, ननष्कासन या रैंक में कमी क े रूप मे अपीलाथी क े क्तखलाफ कोई कारमवाई नहींकी गई है। सौभागिंद एम द शी (उपरोक्त) में, बखामस्तगी क े आदेि और अननवायम सेवाननवृनर्त् क े बीच अंतर को ननम्ननलक्तखत िब्ों में समझाया गया था: “9….ननयमों क े तहत, बखामस्तगी का आदेि एक सरकारी कममचारी को दी गई सजा है, जब यह पाया जाता है नक वह कदाचार या अयोग्यता का दोषी या इस जैसा है, और इसका स्वरुप दंडात्मक है क्ोंनक इसमें पेंिन की हानन िानमल है जो पहले से ही प्रदान की गई सेवा क े संबंर् में ननयमों क े तहत अनजमत हुई होती| ननष्कासन का आदेि र्ी बखामस्तगी क े आदेि क े समान है, और इसमें समान पररर्ाम िानमल हैं, उनक े बीच एकमात्र अंतर यह है नक बखामस्त कममचारी पुनननमयुक्तक्त हेतु योग्य नहीं है, जबनक ननष्कानषत नकया गया योग्य है| सेवातनवृति का आदेश पदच्युति और तनष्कासन क े आदेश द न ं से अलग ह िा है, इस में तनयम द्वारा तनिाणररि सजा का रूप नहीं ह िा और इसमें क ई दंडात्मक पररणाम शातमल नहींह िा क् ंतक सेवातनवृि व्यक्ति उसक े द्वारा की गई सेवा क े अनुपाि में पेंशन का हकदार ह िा है|”
31. उिर प्रदेश राज्य बनाम श्री श्याम लाल शमाण में इस न्यायालय ने ननम्ननलक्तखत िब्ों में अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेिों क े अथम और प्रर्ाव क े सम्बन्ध में नवनर्न्न सुझाव रखे: “इन फ ै सलों से ननम्ननलक्तखत सुझाव ननकाले जा सकते हैं| सबसे पहले, यह पता लगाने में नक क्ा अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि सजा का आदेि है, यह पता लगाना होगा नक क्ा अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि में आरोप या कलंक या अनर्योग या दुव्यमवहार का पहलू या संबंनर्त अनर्कारी क े क्तखलाफ अक्षमता का कोई तत्व था। दू सरे, अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि दंड का सूचक होगा यनद इस आदेि में पहले से अनजमत लार् की हानन िानमल होगी। तीसरे, 25 साल की सेवा पूरी होने पर अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि या आगे की सेवा समाप्त करने क े नलए जननहत में अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि बखामस्तगी या ननष्कासन का आदेि नहीं होगा क्ोंनक सजा का कोई तत्व नहीं है। चौथे, अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि को इस आर्ार पर दंडात्मक आदेि नहीं माना जाएगा नक र्नवष्य की अपेक्षाओं क े नुकसान की संर्ावना है, अथामत्, अनर्कारी को तब तक उसका वेतन नहीं नमलेगा, जब तक नक वह सेवाननवृनर्त् की आयु प्राप्त नहीं कर लेता है, या सेवा में क ु छ साल रहने क े नलए अनुमनत नहीं नमलने और अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् होने पर बढी हुई पेंिन नहींनमलेगी।”
32. उक्त संदनर्मत अननवायम सेवाननवृनर्त् को ननयंनत्रत करने वाले थथानपत कानूनी दृनष्ट्कोर् क े अलोक में अनुच्छे द 311 सहपनठत अनुच्छे द 14 क े तहत इसक े क्तखलाफ चुनौती पर ध्यान देने क े नलए ननयम 135 क े आयाम पर नवचार करते हैं। नकसी कममचारी को अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करने का मूल स्रोत "प्रसाद नसद्धांत" से नलया गया है, जैसा नक र्ारत में स्वीकार नकया जाता है जो संनवर्ान क े अनुच्छे द 310 से उत्पन्न होता है। ननयम 135 इस तरह क े ननर्मय लेने हेतु सारतत्व क े रूप में कायम करने क े नलए क े वल क ु छ आर्ारों को ननर्ामररत करता है और िक्तक्त का स्रोत संनवर्ान क े अनुच्छे द 309 सहपनठत अनुच्छे द 310 में नननहत है| ननयम 135 को एक नविेष प्रावर्ान क े रूप में उक े रा गया है और आवश्यकता क े नसद्धांत पर इसका आर्ार है। यह अक े ला प्रावर्ान अनुच्छे द 309 क े वगम क े एक छोिे उप-समूह बनाता है और उन "खुनफया अनर्काररयों" की "पहचान सावमजननक" होने क े मामलों से सख्ती से ननपिता है जो सुरक्षा कारर्ों से संगठन में अननयोज्य हो गए थे। ननयम 135 क े उप ननयम (1) से संक े त नमलता है नक अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि क े वल उसमें नननदमष्ट् नवस्तृत आर्ारों पर पाररत नकया जा सकता है अथामत एक ख़ुनिया अनर्कारी क े रूप में पहचान का सावमजननक होना, संगठन में सुरक्षा कारर्ों से अननयोज्य होना या अपने कतमव्यों क े ननवमहन में एक अनर्कारी द्वारा प्राप्त नवकलांगता/चोिें। इस प्रकार समझा गया, ननयम वस्तुननष्ठ है, अच्छी तरह से व्यक्त और बोर्नीय है। इसक े अलावा, उक्तल्लक्तखत कारर् यह स्पष्ट् करता है नक ननयम 135 में ऐसी पररक्तथथनतयााँ िानमल हैं, नजनक े अक्तस्तत्व से संगठन की अखंडता पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रनतक ू ल प्रर्ाव पड़ेगा यनद अनर्कारी खुनफया अनर्कारी क े रूप में उजागर हो जाता है और सुरक्षा कारर्ों से संगठन में अननयोज्य हो जाता है। संर्वतः यह न तो कदाचार या अक्षमता का मामला होगा और न ही इस तरह का तानक दंडात्मक पररर्ामों को आकनषमत नकया जा सक े । यह नकसी र्ी तरह से कममचारी क े प्रनत उसक े आचरर् क े बारे में नहींहै, बक्तल्क संगठन द्वारा नकए गए कायों की संवेदनिीलता क े स्वरुप क े संदर्म में जननहत क े कारर् है। इसनलए, ननयम 135 क े तहत आदेि श्याम लाल (उपरोक्त) में उल्लेक्तखत प्रथम सुझाव क े अनुसार है और अपीलाथी क े क्तखलाफ कोई आरोप, कलंक या अनर्योग िानमल नहींहै।
33. संनक्षप्त में दोहराएाँ तो, ननयम 135 एक नननित कालक्रम की पररकल्पना करता है और एक खुनफया अनर्कारी क े उजागर होने या (व्यक्तक्तगत, संगठनात्मक या राष्ट्र ीय) सुरक्षा क े कारर्ों से अननयोज्य होने पर सनक्रय होता है। अनर्व्यक्तक्त "खुलासा", "अननयोज्यता" और "सुरक्षा" इस ननयम क े प्रमुख घिक हैं और सही सार और प्रर्ाव को समझने क े नलए कालानुक्रनमक और प्राक ृ नतक क्रम में समझा जाना चानहए।
34. इसक े अलावा, यह नज़क्र करना उनचत है नक ननयम 135 में संदनर्मत आर्ार कहीं र्ी इसे अनर्कारी की ओर से नकसी चूक या गलत कायम क े पररर्ाम क े रूप में नहीं देखता और दंडात्मक कारमवाइयों क े नवपरीत, वे ननवतममान अनर्कारी को कलंनकत नहीं करते हैं या उनक े द्वारा पहले से अनजमत लार्ों का नुकसान इसमें िानमल नहीं है और न ही सजा का कोई तत्व है। ननयम 135 क े उप-ननयम (2), (3) और (4) इस दृनष्ट्कोर् को सुदृढ करते हैं क्ोंनक ये उस लोक सेवक को पेंिन, िेच्युिी, एकमुश्त रानि आनद जैसे उनचत लार् प्रदान करते हैं नजन्हें अननवायम सेवाननवृनर्त् का ननिाना बनाया गया है। इस प्रकार, कममचारी को पहले से अनजमत लार्ों क े नकसी र्ी नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता है। हम ऐसा इसनलए कहते हैं क्ोंनक इस तरह क े ननयम की नविेषताओं का परीक्षर् मकसद क े आसपास या इसक े कानून क े पीछे अंतननमनहत इरादे पर क ें नद्रत नहीं है बक्तल्क, यह ननवतममान कममचारी क े क्तखलाफ इस तरह क े ननयम क े संचालन क े पररर्ाम और प्रर्ाव में नननहत है। अननवायम सेवाननवृनर्त् क े ऐसे आदेि क े बदले ननयम सेवाननवृर्त् कममचारी को नकसी र्ी लार् से वंनचत नहीं करता है और इस प्रकार, अपने र्नवष्य क े नलए सेवाननवृर्त् कममचारी क े क्तखलाफ कोई कलंक या कोई नागररक पररर्ाम नहीं होता है। इसनलए, इस ननयम का प्रयोग श्याम लाल (उपरोक्त) क े दू सरे सुझाव से मेल खाता है जो अननवायम सेवाननवृनर्त् क े गैर-कलंनकत आदेि में मुनाफ े क े नकसी र्ी नुकसान पर नवचार करता है| संक्षेप में, मात्र अननवायम सेवाननवृनर्त् अनुच्छे द 311 (2) को आकनषमत नहीं करती। नवनर् क े घोनषत दृनष्ट्कोर् को स्पष्ट् रूप से समझने क े नलए हम दलीप तसंह बनाम पंजाब राज्य और भारि संघ एवं अन्य बनाम दुलाल दि को उपयोगी ढंग से संदनर्मत कर सकते हैं|
35. इसे और मज़बूत करने क े नलए हम श्याम लाल (उपरोक्त) क े आदेि क े तीसरे नहस्से पर आते हैं जो अननवायम सेवाननवृनर्त् क े न्यायसंगत आदेि में सजा क े तत्व की अनुपक्तथथनत आवश्यक बनाता है| इस परीक्षा को िुरू करने क े नलए, हम सत्यवीर तसंह और अन्य बनाम भारि संघ और अन्य में ननर्मय का एक संनक्षप्त हवाला देकर संगठन क े कममचाररयों को ननयंनत्रत करने वाले ननयमों की सही योजना और प्रर्ाव को उजागर करने को महत्वपूर्म समझते हैं नजसमें इस न्यायालय ने क ें द्रीय लोक सेवा (वगीकरर्, ननयंत्रर् और अपील) ननयम, 1965 (संक्षेप में "CCS (CCA) ननयम) क े ननयम 19 क े तहत दुराचार, अनुिासनहीनता, र्मकी और अपमान क े आर्ार पर अनुच्छे द 311 क े तहत नकसी र्ी जांच क े नबना अनुच्छे द से जुड़े प्रावर्ानों की रोिनी में संगठन क े दो कममचाररयों को बखामस्त कर नदया।“ इस प्रकार, यह स्पष्ट् हो जाता है नक अन्य नवर्ागों की तरह इस संगठन क े नकसी कममचारी की बखामस्तगी क े मामले में र्ी, अनुच्छे द 311 क े तहत प्रनक्रया क े साथ CCS (CCA) ननयम का सहारा नलया जा सकता है और आमतौर पर लेने की संर्ावना है| इसनलए, 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 को अननवायम सेवाननवृनर्त् क े गैर-दंडात्मक प्रर्ाव क्षेत्र क े साथ कड़ाई से ननपिने क े नलए एक नविेष प्रावर्ान क े रूप में बनाया गया है और वह र्ी उप-ननयम (1) क े खंड (ए) और (बी) में नननदमष्ट् नवनिष्ट् पररक्तथथनतयों में खुनफया अनर्कारी क े क्तखलाफ| जबनक, उपरोक्त चचाम क े अनुसार पदच्युनत/ननष्कासन/रैंक में कमी क े मामले या सेवा की समाक्तप्त की कोई अन्य दंडात्मक कारमवाई नजसमें कममचारी का कलंक िानमल है, को CCS (CCA) ननयमों में अलग से िानमल नकया गया है|
36. अप्रनतरोध्य ननष्कषम यह है नक ननयम 135 क े तहत की गई नकसी र्ी कारमवाई क े प्रर्ाव में कममचारी क े नलए कोई दंडात्मक पररर्ाम िानमल नहीं है और इसनलए इसे बखामस्तगी या ननष्कासन की कारमवाई क े समान नहीं रखा जा सकता और इस ननयम क े तहत कारमवाई करते समय नकसी जााँच या सुनवाई क े नकसी अवसर की आवश्यकता नहीं है जैसा नक अनुच्छे द 311 क े तहत पररकक्तल्पत नकया गया है| समान रूप से, यह ध्यान देने की ज़रुरत है नक र्नवष्य की क ु छ कररयर संर्ावनाओं का मात्र नुकसान अपने आप में अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि को अमान्य करने क े नलए कोई आर्ार नहीं है। क्ोंनक यह नकसी मामले में नकसी र्ी आदेि का अननवायम पररर्ाम हो सकता है। वैर्ाननक आदेि की अवैर्ता क े दोष को आकनषमत करने क े नलए नजस बात की आवश्यकता है वो न्यायालय क े नववेक को जागृत करने क े नलए कम से कम एक न्यूनतम मानक की अवैर्ाननकता है। श्याम लाल (उपरोक्त) और शुभिंद एम द शी (उपरोक्त) की व्याख्या प्रत्यक्ष रूप से लागू होगी।
37. दू सरी तरह से कहा जाए तो ननयम 135 क े तहत कारमवाई अनुच्छे द 311 द्वारा ननयंनत्रत नहीं है और न ही यह उसका उल्लंघन है चूंनक ये दोनों प्रावर्ान अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं इस प्रकार इस ननयम (1975 क े ननयमों का ननयम 135) क े अंतगमत की गई कारमवाई से पूवम संनवर्ान क े अनुच्छे द 311 क े तहत प्रदर्त् सुरक्षा उपायों को करने की ज़रुरत नहीं है| क्ोंनक ननयम 135 क े तहत कारमवाई अलग है और संगठन सन्दर्म में जननहत में नवनिष्ट् पररक्तथथतयों में और सरकार क े प्रमुख द्वारा उच्चतम स्तर पर की जाती है इसनलए कानून क े समान संरक्षर् से इन्कार क े कारर् अनुच्छे द 14 क े उल्लंघन का सवाल ही नहींउठता।
38. इस ननयम की संवैर्ाननकता का नवरोर् करते हुए, अपीलाथी ने यह र्ी तक म नदया है नक इस ननयम को प्रनतननयुक्तगर् पर लागू न करना र्ेदर्ावपूर्म है और अनुच्छे द 14 का उल्लंघन है। आक्षेनपत ननर्मय में इस ननवेदन को ख़ाररज करते हुए इस प्रकार निपण्णी की गई: “नकसी प्रनतननयुक्तगर् की सेवाएाँ नवर्ाग क े उस कममचारी जैसी नहीं होतीं जो इसक े ननयमों और ितों से बंर्ा है। यनद एक प्रनतननयुक्तगर् काल्पननक रूप से "उजागर" होता या "खुद को उजागर करता है" और उससे सुरक्षा खतरा पैदा होता है, तो नननित रूप से क ें द्र सरकार अननवायम सेवाननवृनर्त् सनहत अन्य तंत्रों का सहारा ले सकते हैं: (बिते कममचारी ननयम 56 (जे) क े तहत ितों को पूरा करे; यह र्ी सहारा हो सकता है- यनद कममचारी "घिना" क े नलए दोषी है और तथ्य ऐसा न्यायसंगत ठहराते हैं तो अनुच्छे द 311 का आह्वान (2) (ग) का प्रयोग और तुरंत बखामतागी या इसी प्रकार की सजा का सहारा नलया जायेगा| दू सरे अनर्काररयों की इस ननयम द्वारा ननयंनत्रत न होने की संर्ावना या नक अन्य मामलों में इसे लागू नहीं नकया गया था, इसनलए, इसे मनमाना या अमान्य ठहराने का आर्ार नहींहो सकता।”
39. प्रनतननयुक्तगर् एक ऐसा कममचारी होता है नजसे उसक े मूल नवर्ाग की ओर से नकसी अन्य नवर्ाग को सौंपा गया है। कममचाररयों की प्रनतननयुक्तक्त पर कानून पूर्म रूप से थथानपत है। जहााँ तक अनुिासनात्मक ननयंत्रर् क े मामले का संबंर् है यूपी राज्य एवं अन्य बनाम राम नरेश लाल में इस न्यायालय ने निप्पर्ी की है नक प्रनतननयुक्तगर् अपने मूल नवर्ाग क े ननयमों द्वारा ननयंनत्रत रहेगा और अपने मूल नवर्ाग क े अनुिासनात्मक ननयंत्रर् में माना जाता है जब तक नक थथानान्तररती नवर्ाग में थथायी रूप से िानमल न नकया जाए। क ु नाल नंदा बनाम भारि संघ एवं एक अन्य में यह र्ी निपण्णी की गई नक प्रनतननयुक्तक्त का मूल नसद्धांत यह है नक संबंनर्त व्यक्तक्त हमेिा और नकसी र्ी समय अपने मूल नवर्ाग में वापस लाया जा सकता है। व्यक्तक्त को उसक े मूल नवर्ाग में वापस र्ेजकर सुरक्षा कारर् सनहत संगठन (अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग ) पर पड़ने वाले नकसी र्ी प्रनतक ू ल प्रर्ाव को िाला जा सकता है| इसनलए, प्रनतननयुक्त संगठन/नवर्ाग में सीर्ी र्ती होने वाले उस व्यक्तक्त की तुलना में पूरी तरह से अलग है जो एक खुनफया अनर्कारी क े रूप में उजागर होता है या सुरक्षा क े कारर्ों से संगठन में अननयोज्य हो जाता है। प्रनतननयुक्त को उसक े मूल नवर्ाग में वापस लाया जा सकता है और कदाचार क े मामलों में, उसक े मूल नवर्ाग को ननयंनत्रत करने वाली सेवा की ितों क े अनुसार उसक े क्तखलाफ आवश्यक कारमवाई र्ी की जा सकती है| उस अथम में, एक प्रनतननयुक्त और एक सीर्ी र्ती होने वाले व्यक्तक्त को समान रूप से नहीं रखा जाता है और इस प्रकार उनक े साथ होने वाले र्ेद-र्ावपूर्म व्यवहार की दलील उपलब्ध नहींहै| इसमें र्ेदर्ाव िानमल नहीं होगा और न ही अनुच्छे द 14 का उल्लंघन होगा। तदनुसार, हमें ननयम 135 की संवैर्ाननक वैर्ता की चुनौती को नकारना ही होगा।
40. इस मोड़ पर हम यह र्ी उल्लेख करना आवश्यक समझते हैं नक अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि से पहले 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े तहत जांच क े उल्लेक्तखत न होने का मात्र तथ्य, ननयम की संवैर्ाननकता क े क्तखलाफ नहीं जाता है। इसक े अनतररक्त, ननयम नकसी र्ी जांच का ननषेर् नहीं करता है और अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि क े समान है नजसमें ननवतममान कममचाररयों क े इस तरह क े ननर्मय की प्रनक्रया में र्ाग लेने का अनर्कार कानून में पररकक्तल्पत नहींहै, क्ोंनक इस तरह की कारमवाई का अंतननमनहत आर्ार संगठन का व्यापक नहत और सुरक्षा है; और कममचारी का कोई दोषी आचरर् नहीं। इसक े अलावा, ननयम 135 एक ऐसी र्ाषा को िानमल करता है जो स्वरुप में स्वयं मागमदिमक है। "उजागर होना" और "सुरक्षा कारर्ों से अननयोज्यता" िब्ों का प्रयोग महत्वहीन नहीं है, बक्तल्क, वे इस तरह क े आदेि को पाररत करने में सक्षम प्रानर्कारी क े नलए सवोत्क ृ ष्ट् उर्त्ेजक क े रूप में कायम करते हैं। ननयम 135 क े तहत सुरक्षा कारर्ों से उजागर होना और कममचारी का अननयोज्य होना क ै से होता है इसका अननवायम ननर्ामरर् एक पूवम ितम और सुरक्षा दोनों है, और उस संबंर् में सक्षम प्रानर्कारी की व्यक्तक्तपरक संतुनष्ट् की तह में िानमल है। अपनी संतुनष्ट् तक पहुंचने क े नलए, प्रानर्कारी अपने स्वयं क े स्रोतों से जानकारी लेने क े नलए स्वतंत्र है। इस प्रकार, ऐसे मामलों में जब ननयम 135 क े घिक व्याप्त पररक्तथथनतयों क े आलोक में संतुष्ट् होते है तो जांच क े माध्यम से संबंनर्त अनर्कारी को अवसर देने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है क्ोंनक इस तरह की जााँच का अंतननमनहत उद्देश्य प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों या संबंनर्त अनर्कारी की संतुनष्ट् नहींहै बक्तल्क यह संगठन क े सक्षम प्रानर्कारी को मामले नक अनुक ू लता क े संबंर् में ननयम को इस्तेमाल करने हेतु व्यक्तक्तपरक तरीक े से खुद को संतुष्ट् करने में सक्षम बनाने क े नलए है| इसनलए नननदमष्ट् मामलों से ननपिने का एक नविेष ननयम होने पर प्रश्नगत संगठन की संरचना क े संदर्म में व्यापक जननहत में ननयम 135 क े अंतननमनहत प्रनक्रया को प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों की कठोरता से नहलाया नहींजा सकता।
41. अनुच्छे द 309 क े संदर्म में चुनौती पर वापस लौिते हुए यह निपण्णी करना पयामप्त है नक 1975 क े ननयम अपीलाथी को ननयंनत्रत करने वाली "सेवा की ितों" क े तहत आते हैं और संनवर्ान क े अनुच्छे द 309 क े परंतुक क े तहत बनाये गए हैं| वाक्ांि "सेवा की ितें" गनर्तीय पररिुद्धता का वाक्ांि नहीं है और इसको व्यापक अथम में समझा जाना चानहए| "सेवा की ितें" वाक्ांि का प्राक ृ नतक, तानक म क और व्याकरनर्क अथम में वेतन, र्ुगतान की समयावनर्, वेतनमान, महंगाई र्र्त्ा, ननलंबन और यहां तक नक सेवा की समाक्तप्त से संबंनर्त ितों की एक व्यापक क्षेत्र िानमल है। अपीलाथी का तक म है नक चूंनक अनुच्छे द 311 में कममचारी की बखामस्तगी, ननष्कासन और पद में किौती का क्षेत्र िानमल है इसका सवतः मतलब यह है नक यह मामले अनुच्छे द 309 से अलग हैं, हमारे हवाले नहींकरता|
42. अनुच्छे द 309 और 311 क े संयुक्त पाठ से पता चलता है नक अनुच्छे द 311 उन मामलों तक ही सीनमत है, नजनमें नकसी कममचारी क े क्तखलाफ जांच िुरू की गई है और दंडात्मक कारमवाई नकए जाने की मांग की गई है। जबनक, अनुच्छे द 309 में सेवा की ितों का व्यापक पररदृश्य िानमल है और अनुच्छे द 311 की तुलना में व्यापक आर्ार रखता है। इसमें मात्र बखामस्तगी, ननष्कासन, या पद में कमी क े परे सेवा की ितें र्ी िानमल होंगी| यह बताना महत्वपूर्म है नक अननवायम सेवाननवृनर्त् सनहत सेवा समाक्तप्त से संबंनर्त ितें अनुच्छे द 309 क े तहत नवचाररत इस व्यापक आर्ार क े प्रर्ावक्षेत्र में आते हैं| प्रदायि क ु मार ब स बनाम माननीय कलकिा उच्च न्यायालय क े मुख्य न्यायािीश में इस न्यायालय ने संनवर्ान क े अनुच्छे द 309 क े दायरे और कायमक्षेत्र को छु आ और यह व्याख्या की सेवा से बखामस्तगी या ननष्कासन क े मामले अनर्व्यक्तक्त "सेवा की ितें" क े प्रर्ाव क्षेत्र में आते हैं|
43. हम आगे ध्यान दें नक आम तौर पर यह कहना सही है नक अनुच्छे द 309 क े तहत बनाई गई सेवा की ितों को ननयंनत्रत करने वाले ननयम अनुच्छे द 311 सनहत संनवर्ान क े अन्य प्रावर्ानों क े अध्यर्ीन हैं| अनुच्छे द 309 क े क े िुरुआती िब् “इस संनवर्ान क े प्रावर्ानों क े अध्यर्ीन” उसी अनुरूपता की ओर इिारा करते हैं| हालााँनक, यह अध्यार्ीनता खंड अननवायम सेवाननवृनर्त् को ननयंनत्रत करने वाले ननयमों पर काम नहीं करेगा। क्ोंनक उपरोक्त चचाम क े अनुसार अननवायम सेवाननवृनर्त् की कानूनी अवर्ारर्ा सरकार का एक गैर-दंडात्मक उपाय है और अनुच्छे द 311 क े संचालन से नबलक ु ल दू र है जब तक नक अननवायम सेवाननवृनर्त् क े रूप में ननष्कासन या बकामश्तागी का मामला नहीं है| अगर ननष्कासन, बकामश्तागी या पद में कमी का ननयम होता, तो इसे अनुच्छे द 311 क े तहत सुरक्षा उपायों द्वारा ननयंनत्रत नकया जाता। उिर प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम बाबू राम उपाध्याय में यह र्ी निपण्णी नक गई है नक नकसी ननयम की वैर्ता अनुच्छे द 311 से तर्ी प्रर्ानवत होगी जब वह अनुच्छे द 311 द्वारा दी गई सुरक्षा को प्रर्ानवत करना चाहे और अन्यथा नहीं जैसा नक वतममान मामले में है। 44. आइए अब 1975 ननयम क े ननयम 135 क े क्तखलाफ चुनौती क े अगले आर्ार को संबोनर्त करते हैं|
44. अब हम 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े क्तखलाफ चुनौती क े अगले आर्ार पर ध्यान देते हैं अथामत ननयम 135 में प्रयुक्त “सुरक्षा” और “उजागर होना” का व्यापक तात्पयम है और उनका उपयोग ननयम की अस्पष्ट्ता और मनमानी क े अवगुर् को आकनषमत करता है। अपीलाथी ने इस चुनौती को अस्पष्ट्ता क े आर्ार पर थथानपत करने क े नलए करिार तसंह (उपरोक्त) क े पूवम उद् र्ृत उद्धरर् पर र्रोसा नकया है|
45. यह संनवनर्यों नक व्याख्या का थथानपत नसद्धांत है नक नकसी क़ानून में इस्तेमाल नकए जाने वाले िब्ों को उस नविेष क़ानून क े आलोक में समझा जाना चानहए और उससे अलग नहीं। ननयम 135 में प्रयुक्त अनर्व्यक्तक्त "सुरक्षा" है, जैसा नक अनुच्छे द 311 में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली अनर्व्यक्तक्त "राज्य की सुरक्षा" से अलग है। ननयम बनाने वाली संथथा द्वारा इस अनर्व्यक्तक्त को व्यापक बनाना अनर्व्यक्तक्त क े पीछे समावेिी इरादे की ओर इिारा करता है। िब् "सुरक्षा" िब् "सुरनक्षत" से ननकला है, लॉ लेक्तक्सकन क े अनुसार नजसका अथम होता है नकसी चीज़ को खतरे से परे रखना| यह समझा जाता है नक एक खुनफया अनर्कारी का उजागर होना न क े वल संगठन क े नलए बक्तल्क संबंनर्त अनर्कारी क े नलए र्ी खतरनाक हो सकता है और इसनलए अनर्व्यक्तक्त "सुरक्षा" को संगठनात्मक और व्यक्तक्तगत नहतों को खतरे से परे सुरनक्षत रखने क े रूप में समझा जाना चानहए और इसमें संगठन की सुरक्षा क े साथ- साथ राज्य की सुरक्षा सीर्े िानमल है। इसी तरह, अनर्व्यक्तक्त "एक्सपोजर" इस ढंग से जनता क े बीच एक ख़ुनिया अनर्कारी क े सावमजननक पहचान को संदनर्मत करता है जो सुरक्षा कारर्ों से संगठन में ऐसे अनर्कारी को अननयोज्य ठहरता है|
46. यह उल्लेखनीय है नक र्ारतीय संवैर्ाननक न्यायिास्त्र में नवनर्वत अनर्ननयनमत कानून को तब तक अस्पष्ट्ता क े आर्ार पर ननष्फल नहींनकया जा सकता जब तक नक इस तरह की अस्पष्ट्ता मनमानी क े दायरे में नहीं आती। नगरपातलका सतमति, अमृिसर एवं अन्य बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य में हम उपयोगी रूप से इस न्यायलय क े सुझाव को संदनर्मत कर सकते हैं| लेनकन अस्पष्ट्ता क े आर्ार पर ननयम 135 को चुनौती तर्ी बरक़रार रखी जा सकती है अगर यह ननयम उस क्तथथनत को जानने क े नलए सार्ारर् बुक्तद्ध क े व्यक्तक्त को उनचत अवसर प्रदान नहीं करता है नजसमें ननयम संचानलत होगा। वतममान मामले में ख़ुनिया अनर्कारी क े रूप में संगठन में कायमरत सदस्य क े दृनष्ट्कोर् से समझदार व्यक्तक्त का पैमाना लागू होगा| संगठन में कायमरत सदस्य, और नविेष रूप से प्रथम श्रेर्ी क े ख़ुनिया अनर्कारी को "एक खुनफया अनर्कारी क े रूप में उजागर", "संगठन में अननयोज्य" या "सुरक्षा का कारर्" की अनर्व्यक्तक्त क े कायम क्षेत्र, नवनिष्ट् सन्दर्म और तात्पयम को जानना चानहए| संगठन में कायमरत सदस्य एक ख़ुनिया अनर्कारी क े रूप में पहचान उजागर होने क े अंतरराष्ट्र ीय दुष्पररर्ाम से नननित रूप से अवगत होगा| इसनलए ननयम की असंवैर्ाननकता क े अवगुर् को आकनषमत करने क े नलए उपरोक्त अनर्व्यक्तक्तयों क े उपयोग में कोई अंतननमनहत अस्पष्ट्ता या मनमानीपन नहीं है| लेनकन इस ननयम क े तहत िक्तक्त का प्रयोग करने क े कायमपानलका क े कायम से मन्मननपन की बू अनत है क े नहीं यह एक अलग-अलग मामले क े आर्ार पर अलग से पड़ताल का नवषय है और न्यायालय द्वारा सामान्य घोषर्ा आवश्यक नहीं है। अंत में इस आर्ार पर चुनौती खाररज की जानत है और इसनलए समझा जाता है नक इस आक्षेनपत ननर्मय में इस चुनौती का सही जवाब नदया जा चूका है| लेनकन ननयम 135 की संवैर्ाननकता क े संबंर् में उच्च न्यायालय क े आदेि को बरकरार रखने क े बावजूद, हमारा नवचार है नक उच्च न्यायालय ने आक्षेनपत ननर्मय में "सुरक्षा" की अनर्व्यक्तक्त का जो अथम बताया है उसका व्यापक तात्पयम है| सुरक्षा को खतरा नकस बात से होगा नक ननयम 135 का इस्तेमाल नकया जाए, इस संबंर् में आक्षेनपत आदेि क े पैरािाफ 65 में इस प्रकार निपण्णी की गई है| “..... इसनलए, यनद नकसी नविेष मामले में, अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग का कोई र्ी सदस्य ऐसे व्यवहार में नलप्त होता है नजससे उसक े समि मनोबल क े र्ंग होने की संर्ावना है या यह असंतोष की ओर ले जाता है तो यह उसकी सुरक्षा क े नलए खतरा बन सकता है।"
47. हम मानते हैं नक यह निप्पर्ी "सुरक्षा क े कारर्ों" या सुरक्षा खतरा क े कारर् की अनर्व्यक्तक्त क े उपयोग क े वास्तनवक दायरे की ओर हमारा मागमदिमन नहीं करती है और ननयम 135 क े दरवाज़े अपररकक्तल्पत क्षेत्रों की ओर खोलता है| इस प्रकार, यह निप्पर्ी हमारे द्वारा ननयम 135 की अब तक व्याख्या क े अलोक में समाप्त हो जाएगी और नकसी र्ी उदहारर् क े उद्देश्यों क े नलए, या अन्यथा प्रर्ावी नहींहोगी। अतनवायण सेवातनवृति क े आदेश की वैििा
48. ननयम 135 की संवैर्ाननक वैर्ता की चुनौती का नकारात्मक जवाब देने और अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करने की िक्तक्त क े अक्तस्तत्व क े सवाल का ननपिारा करने क े बाद हम अगली समस्या क े ननर्ामरर् पर आते हैं क्ा वतममान मामले की वास्तनवक क्तथथनत में प्रत्यथीगर् द्वारा अननवायम सेवाननवृनर्त् की िक्तक्त का उपयोग न्यायसंगत एवं नवनर्-सम्मत है| अपीलाथी क े अनुसार, प्रत्यथीगर् ने दुर्ामवनापूर्म तरीक े से कारमवाई की है और अपने वररष्ठों (अनर्काररयों ) की नाजायज मांगों को पूरा करने से इंकार क े कारर् ननयम 135 का प्रयोग अपीलाथी क े अत्याचार का कायम है| अपीलारथी ने यह र्ी तक म नदया है नक अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करने की िक्तक्त का प्रयोग क े वल एफआर 56 (जे) क े अनुसार नकया जा सकता है।
49. आक्षेनपत ननर्मय में अपीलाथी की दलीलों का जवाब ननम्न िब्ों में नदया गया है:- “78. इसनलए, अगर लोक कममचारी की सेवाओं की आवश्यकता उन कारर्ों से समय से से पहले समाप्त हो जाती हैं जो संबंनर्त संथथा क े सेवा ननयमों, ननयम और ितों क े नलए उप्तुक्त हों और दुर्ामवनापूर्म न हों या नकसी र्ी गंर्ीर प्रनक्रयात्मक असंगनत से िस्त न हों तो न्यायलय फ ै सले में हस्तक्षेप नहींकरेंगे| इस मामले की पररक्तथथनतयों को इस पररप्रेक्ष में देखने से यह स्पष्ट् हो जाता है नक र्ारत संघ क े उच्च स्तर पर यानी क ै नबनेि सनचव, PMO और कानून एवं न्याय मंत्रालय क े स्तर पर, नवनर्न्न नवकल्पों को तलाि नकया गया। ऐसा नहींहै नक ननयम 135 को इस्तेमाल करने का नवकल्प सरकार द्वारा तलाि नकया गया एकमात्र नवकल्प था। नोनिंग्स से पता चलता है नक प्रर्ानमंत्री ने सर्ी दृनष्ट्कोर्ों से ननर्मय क े प्रर्ाव पर नवचार करना चाह था| जानहर है, कममचारी/अनर्कारी यानी प्राथी क े साथ- साथ समि रूप से सेवा पर प्रर्ाव की नचंता र्ी थी। गौरतलब है नक िनि प्रर्ा सनमनत की नसफाररिों में प्रनतक ू ल निप्पर्ी क े देखने क े बाद प्रर्ानमंत्री र्ी चाहते थे नक सर्ी सरकारी स्तरों पर निकायत तंत्रों की त्वररत िुरुआत सुनननित की जानी चानहए। क ै नबनेि सनचव की एक नोनिंग में क ें द्रीय नसनवल सेवा (पेंिन) ननयम, 1972 क े ननयम 9 क े तहत सनचव स्तर क े अनुसंर्ान एवं नवश्लेषर् नवंग क े सेवाननवृर्त् प्रमुख श्री नत्रपाठी क े क्तखलाफ अनुिासनात्मक कायमवाही करने का नवकल्प सुझाया। अनर्लेख पर मौजूद इन सर्ी तथ्यों और सामनियों को देखते हुए यह नहीं माना जा सकता नक सरकार ने इसे अपररहायम नवकल्प यानी ननयम 135 लागू करने क े नवकल्प क े रूप में चुनने क े नलए दुर्ामवनापूर्म तरीक े से काम नकया।" शक्ति क े दुभाणवनापूणण प्रय ग क े संबंि में
50. बाद ननयनत क े दावे का समथमन करने क े नलए बैक ुं ठ नार्थ दास और एक अन्य बनाम मुख्य तजला तितकत्सा अतिकारी, बारीपदा और एक अन्य पर र्ी यह ज़ोर देते हुए र्रोसा नकया गया है नक अननवायम सेवाननवृनर्त् का ननर्मय नवस्तृत औपचाररक प्रनक्रया क े तहत और नपछले प्रदिमन क े ररकॉडम क े अलोक में नकया जाना चानहए|
51. स्पष्ट् रूप से नवनर्-िासन द्वारा ननयंनत्रत समाज में, िासन व्यवथथा में बाद ननयनत या मनमानी की उपक्तथथनत सामानजक व्यवथथा क े मूलर्ूत मूल्ों पर प्रहार करती है। सरकार क े तीन अंगों सनहत प्रत्येक सावमजननक अनर्कारी, सदािायी, अदू नषत और उनचत ढंग से अपने कायों का ननवमहन करने क े नलए बाध्य हैं| िक्तक्त का दुर्ामवनापूर्म प्रयोग दर असल िक्तक्त क े साथ क्तखलवाड़ है| िक्तक्त क े दुर्ामवनापूर्म प्रयोग से संबंनर्त नवनर् पूर्म रूप से थथानपत है जो बहुत सारे मामलों में पाए जाते हैं| बाद ननयनत क े दाग़ से दू र रहने क े नलए िक्तक्त क े प्रयोग हेतु इस तरह नक िक्तक्त प्रदान करने वाली संनवनर्/नवनर् क े दायरे में प्रयोग नकया जाना चानहए। कोई र्ी इस्तेमाल जो नवनर् द्वारा थथानपत सीमा को लांगता है; या इस तरह क े इस्तेमाल क े प्रनत असंगत या अप्रासंनगक कारकों से प्रेररत है; या दुर्ामवनापूर्म इरादे या व्यक्तक्तगत दुश्मनी द्वारा ननदेनित; या नजससे मन्मननपन नक दुगमन्ध आए तो वह कानून नक नज़र में ननरस्त मन जायेगा| एस प्रिाप तसंह बनाम पंजाब राज्य, एक्सप्रेस न्यूजपेपसण प्राइवेि। तलतमिेड और अन्य। बनाम भारि संघ और अन्य, जे.डी. श्रीवास्तव बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य, और जयिंद लाल सेतठया बनाम पतिम बंगाल राज्य में इस न्यायलय द्वारा लगातार इस कानूनी दृनष्ट्कोर् की व्याख्या नक गई है| वतममान मामले में तथ्य की क्तथथनत उपयुमक्त कारकों में से नकसी को र्ी आकनषमत नहींकरती है।
52. नविेष रूप से अपीलाथी ने उन संबंनर्त व्यक्तक्तयों को पक्षकार प्रत्यथी नहीं बनाया हैं नजनक े क्तखलाफ दुर्ामवना क े आरोप लगाये गए हैं| इसनलए, उन आरोपों को आगे नहीं बढाया जा सकता है। हम पुरुष िम क ु मार झा बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य की व्याख्या पर उपयोगी ढंग से ध्यान देते हैं जो िक्तक्त क े दुर्ामवनापूर्म इस्तेमाल क े आरोप से ननमिते हुए नवनर् क े उक्त दृनष्ट्कोर् को ननम्न िब्ों में दजम करता है:- “22. िक्तक्त क े दुर्ामवनापूर्म इस्तेमाल क े संबंर् में उच्च न्यायालय ने माना नक न तो पयामप्त नववरर् अनर्लेख पर रखे गए और न ही अनर्काररयों को पक्षकार प्रत्यथीगर् क े रूप में िानमल नकया गया, तानक उन्हें जवाबी हलफनामा दायर करक े क्तथथनत को स्पष्ट् करने में सक्षम बनाया जा सक े । नवनिष्ट् सामिी क े अर्ाव और अनर्काररयों की अनुपक्तथथनत में, न्यायालय इस दलील को बरकरार नहीं रखने में सही था नक यह कारमवाई दुर्ामवनापूर्म थी। ” पररर्ामस्वरूप दुर्ामवनापूर्म कारमवाई का आर्ार वास्तव में नवचार क े नलए नहींबचता| बुक्ति प्रय ग न करने क े सम्बन्ध में
53. बुक्तद्ध क े प्रयोग न करने की चुनौती का नवश्लेषर् करने हेतु हम प्रासंनगत घिनाक्रम क े पता लगाने को उपयुक्त समझते है तानक कायमवानहयों की कड़ी को समझा जा सक े | नतनथ घिना 01.02.2007 – 31.01.2009 श्री अिोक चतुवेदी सनचव (आर), मंनत्रमंडल सनचवालय, र्ारत सरकार बन गए और 31.01.2009 तक इस पद पर रहे | 03.08.2007 अपीलाथी नई नदल्ली मुख्यालय में ननदेिक क े रूप में पद थथानपत थी | 07.08.2007 अपीलाथी ने यौन उत्पीडन की निकायत की | 26.10.2007 अपीलाथी ने श्री अिोक चतुवेदी, सनचव (आर) क े नवरुद्ध प्रर्ानमंत्री कायामलय में नलक्तखत निकायत की | 12.11.2007 अपीलाथी ने ननदेिक, िरेननंग इंक्तिट्यूि (प्रनिक्षर् संथथा), गुडगााँव क े रूप में ज्वाइन नकया | 08.08.2008 अपीलाथी क े अनुनचत बतामव, अननर्क ृ त संवाद, आपनर्त्जनक सन्देि, मीनडया आनद से संपक म क े सम्बन्ध में संथथा को बहुत सारी निकायतें प्राप्त हुई और सनचव (आर) द्वारा प्रारंनर्क जााँच का आदेि नदया गया | श्री ए.क े. अनी ने जााँच की और अपीलाथी ने सूचना नमलने पर र्ी जााँच में िानमल होने से इन्कार कर नदया | 19.08.2008* प्रारंनर्क जााँच की सूचना अपीलाथी को दी गयी जो प्रर्ानमंत्री कायामलय की घिना का कारर् बना और राष्ट्रीय और अंतरामष्ट्रीय मीनडया में इसकी व्यापक कबरेज हुई | 10.09.2008 – 11.09.2008 प्रारंनर्क जााँच में पाया गया नक अपीलाथी क े क्तखलाफ अनर्कांि आरोपों में दम था और जे.एस. (एस ए) को नदनांक 09.10.2008 को ररपोिम सौप दी गयी नजन्होंने नदनांक 11.09.2008 को इसे सनचव (आर) को सौप नदया | 22.09.2008** अपीलाथी की अननवायम सेवा ननवृनत का प्रस्ताव सनचव (आर) द्वारा रखा गया | 04.04.2009 अनुच्छे द 311 क े तहत जााँच क े नबना सेवा ननवृनत नकये जाने की अपनी आिंका क े सम्बन्ध में अपीलाथी ने सनचव (पी.जी. एवं समन्वय) श्री अजीत सेठ को पत्र नलखा | 17.04.2009 संयुक्त सनचव (प्रनिक्षर्) क े कायामलय में नचल्लाने, वस्त्र उतारने आनद की घिना | 18.04.2009** प्रर्ानमंत्री कायामलय में ननदेिक श्री क े. एस. अचर द्वारा अपीलाथी क े नवरुद्ध ननयम 135 क े प्रयोग हेतु प्रस्ताव | 05.05.2009** अपीलाथी क े नवरुद्ध नकसी दूसरी कायमवाही की संर्ावना का पता लगाने हेतु बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एवं प्रर्ानमंत्री क े मुख्य सनचव ने की | बैठक इस नतीजे पर पहुचींनक ननयम 135 सबसे उनचत नवकल्प था | 11.05.2009** अननवायम सेवा ननवृनत क े प्रस्ताव पर त्वररत ननर्मय हेतु सनचव (आर) का मंनत्रमंडल सनचव से अनुरोर् | 13.05.2009** ननयम 135 क े अंतगमत अननवायम सेवा ननवृनत का सुझाव देते हुए मंनत्रमंडल सनचवालय द्वारा प्रर्ानमंत्री कायामलय को गुप्त नोि र्ेजा गया | 27.07.2009* सवोच्च न्यायालय पररसर में अपीलाथी द्वारा कपडे फाड़ने की घिना | 03.10.2009 & 13.10.2009** ननरंतर सनकी व्यवहार क े कारर् अपीलाथी की अननवायम सेवा ननवृनत क े प्रस्ताव पर िीघ्र ननर्मय हेतु सनचव (आर) द्वारा मंनत्रमंडल सनचव से अनुरोर् नकया गया | 13.11.2009** िरेननंग क ैं पस में ननदेिक क े घर में अपीलाथी द्वारा जबरदस्ती प्रवेि क े सम्बन्ध में सूचना देते हुए सनचव (आर) का का मंनत्रमंडल सनचव से संवाद | 26.11.2009* अपीलाथी ने क े न्द्रीय प्रिासन अनर्करर् में आत्म हत्या का प्रयास नकया | 07.12.2009** प्रस्ताव पर िीघ्र ननर्मय हेतु सनचव (आर) द्वारा एक और अनुरोर् | 16.12.2009 अननवायम सेवा ननवृनत क े अनुमोदन पर प्रर्ानमंत्री कायामलय का मंजूरी से अवगत करने वाला संवाद | 18.12.2009 राष्ट्पनत क े नाम से मंनत्रमंडल सनचवालय द्वारा अननवायम सेवा ननवृनत का आदेि जारी नकया गया | * उजागर होने की घिनाएाँ ** प्रनकयात्मक कदम
54. वतममान मामले क े तथ्यपरक पैमाने क े मद्देनज़र, हम उपयुमक्त श्रृंखला से क ु छ महत्वपूर्म घिनाओं को उत्कीर्म करना उनचत समझते हैं। घिनाओं क े उपयुमक्त अनुक्रम में आंतररक संचार की कड़ी का पता चलता है नजसक े बाद नदनांक 18.12.2009 का आदेि अंततः पाररत नकया गया। सनचव (आर) द्वारा P.M.O को र्ेजा गया नदनांक 11.5.2009 का गुप्त नोि, 21.7.2009 क े पत्र द्वारा र्ारत क े तत्कालीन सॉनलनसिर जनरल की राय, कानूनी मामलों क े नवर्ाग, क ें द्रीय कानून और न्याय मंत्रालय की राय और पीएमओ नोि नजसमें ननयम 135 क े आह्वान को एकमात्र व्यवहायम नवकल्प क े रूप में ननर्ामररत नकया गया था ये सब एक साथ जााँच की एक सम्पूर्म कड़ी बनती है जो अननवायम सेवाननवृनर्त् क े सवाल पर प्रत्यथीगर् द्वारा बुक्तद्ध क े उनचत इस्तेमाल को दिामता है| यह थथानपत नवनर् है नक न्यानयक समीक्षा का दायरा अननवायम सेवाननवृनर्त् क े मामलों में बहुत सीनमत है और बुक्तद्ध क े उनुप्योग या दुर्ामवना जैसे नसनमत आर्ार पर स्वीक ृ नत योग्य है| प्यारे म हन लाल बनाम झारखंड राज्य और अन्य पर ध्यान नदया जा सकता है| उक्त ऊपर-उद् र्ृत घिनकरम इतना स्पष्ट् है नक हमारे पास यह कहने क े अलावा कोई और ननष्कषम नहींबचता नक अननवायम सेवाननवृनर्त् की कारमवाई नयसंगत नवकल्प थी। यह समझना नक कोई दू सरा नवकल्प र्ी संर्ाव था, यह नहीं समझता नक अपीलाथी को अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करने का सक्षम प्रानर्कारी का ननर्मय अप्रासंनगक, दुर्ामवनापूर्म, नवक ृ त, अनुनचत या मनमाने नवचारों से प्रेररत था। बुक्तद्ध क े उनचत इस्तेमाल की पूवम-ितम पूरी होती नदख रही है क्ूंनक 22.9.2008 से 18.12.2009 तक 15 महीनों क े दौरान संगठन और पीएमओ क े बीच चचाम, आदान-प्रदान और परामिम की श्रृंखला क े बाद ननर्मय हुआ है।
55. इसक े अलावा, अपीलाथी क े क्तखलाफ 8.8.2008 से िुरू होने वाली प्रारंनर्क जांच, घिनाओं की श्रृंखला में एक महत्वपूर्म नबक्तडंग ब्लॉक बनाती है और हमारे ध्यान चाहती है। साथी अनर्काररयों द्वारा अपीलाथी क े क्तखलाफ की गई निकायतों की एक श्रृंखला क े बाद इस जांच का आदेि नदया गया था। इस तरह की निकायतें दुव्यमवहार, अननर्क ृ त संचार, अश्लील एसएमएस, मीनडया संपक म आनद से संबंनर्त हैं। इस जांच की सूचना 19.8.2008 को (पीएमओ घिना क े नदन) अपीलाथी को दी गई थी, और जांच में उसे िानमल होने क े नलए कहा गया था| लेनकन अपीलथी ने र्ाग लेने से इन्कार कर नदया जो जांच की एकपक्षीय ररपोिम का कारर् बना और इसमें यहा ननष्कषम सामने आया नक अपीलथी क े क्तखलाफ अनर्कांि आरोप की पुनष्ट् होती है। यह ररपोिम 11.9.2008 को सनचव (आर) को सौंपी गई| और ररपोिम नमलने क े 11 नदन बाद अपीलाथी क े क्तखलाफ ननयम 135 क े इस्तेमाल का पहला प्रस्ताव सनचव (आर) द्वारा 22.9.2008 को नकया गया। उक्त कारमवाइयों नक ननरंतरता बुक्तद्ध क े उनुप्योग क े आरोप को छु िलाती है क्ूंनक ऐसा लगता है नक अनर्लेख पर मौजूद सामिी क े अलोक में कड़ाई से प्रस्ताव पेि नकया गया|
56. इस प्रकार, वतममान मामले में अपीलाथी सामिी वस्तुगत रूप से बुक्तद्ध क े अनुप्रयोग क े तथ्य को थथानपत नहीं कर सका और नविेष रूप से क्ोंनक जनता तथा नविेष रूप से मीनडया में अपीलाथी क े उजागर होने की क्रनमक घिनाओं क े सामने आने क े बाद सरकार क े प्रमुख द्वारा उच्चतम स्तर पर अंनतम ननर्मय नलया गया है। दू सरे िब्ों में, अगर हम अपीलाथी और तत्कालीन सनचव (आर), श्री अिोक चतुवेदी क े बीच व्यक्तक्तगत दुश्मनी क े तक म को स्वीकार र्ी कर लें, तो र्ी यह अपीलाथी क े मामले में सहायक नहीं हो सकता क्ूंनक अननवायम सेवाननवृनर्त् क े ननर्मय पर अंनतम अनर्कार पीएमओ क े पास था और पीएमओ में तत्कालीन सनचव (आर) द्वारा प्रर्ाव क े इस्तेमाल क े संबंर् में कोई सबूत नहींहै। इस प्रकार क े आरोप में, असल पूवामिह को प्रमार् द्वारा सानबत करने की आवश्यकता है और कानून की यह आवश्यकता इस मामले में उत्पन्न थाथ्य्परक दृनष्ट्कोर् से समथमन हानसल करने में नवफल है।
57. ऐसा कहने क े बाद हम उच्चतम स्तर पर नलए गए ननर्मयों और संवैर्ाननक चुनौती की जांच करने में न्यायालय क े दृनष्ट्कोर् पर बल देना आवश्यक समझते हैं| व्यवथथा क े उच्च स्तर पर की गई कारमवाई क े पक्ष में वास्तव में वैर्ता का कोई सवतः नसद्ध तक म नहीं हो सकता| लेनकन पीएमओ जैसे संवैर्ाननक कायामलयों को पनवत्र संनवर्ान क े माध्यम से र्ारत की जनता द्वारा संवैर्ाननक नववास सौंपा गया है। इस तरह का संवैर्ाननक नववास अपने र्ीतर एक अंतननमनहत अपेक्षा को समानहत करता है नक इस तरह क े पदानर्काररयों से उत्पन्न होने वाली कारमवाइयााँ जननहत और संवैर्ाननक औनचत्य क े सद्भावनापूर्म नवचारों से प्रेररत होती हैं। संवैर्ाननक अनुप्रयोग की अवर्ारर्ा क े रूप में संवैर्ाननक र्रोसे को बहुत सारे ननर्मयों में इस न्यायालय द्वारा नवनर्वत रूप से स्वीकार नकया गया है। मन ज नरूला बनाम भारि संघ में पांच न्यायार्ीिों की एक पीठ ने इस प्रकार निपण्णी की:- “92. दिकों पहले एडमंड बक म ने जो कहा था उसे दोहराने नक ज़रूरत है: “सर्त्ा रखने वाले सर्ी व्यक्तक्तयों को इस नवचार से दृढता और गंर्ीरता से प्रर्ानवत होना चानहए नक वे र्रोसे की बदौलत काम करते हैं और उस नववास में अपने आचरर् क े नलए एक महान स्वामी क े प्रनत जवाबदेह है, समाज क े लेखक और संथथापक|”
93. AIR 1951 SC 332 क े सन्दर्म में नदल्ली नवनर् अनर्ननयम 1912 में इस न्यायलय ने यह मत व्यक्त नकया नक संवैर्ाननक नववास का नसद्धांत हमारे संनवर्ान पे लागू होता है क्ूंनक यह प्रनतनननर्क लोकतंत्र का आर्ार डालता है| न्यायालय ने आगे कहा नक तदनुसार नवर्ानमंडल को अपने प्राथनमक कतमव्य अथामत कानून क े ननर्ामरर् को त्यागने की अनुमनत नहीं दी जा सकती है| र्ले ही यह नवर्ायी िक्तक्त क े प्रयोग क े संदर्म में कहा गया, नफर र्ी वतममान संदर्म में इसका अनर्प्राय है क्ूंनक नकसी र्ी प्रनतनननर्क लोकतंत्र में, संवैिातनक तवश्वास क े तसिांि की पररकल्पना हर उच्च संवैिातनक अतिकारी में की जानी िातहए।” (बल नदया गया) ऐसे पदानर्काररयों पर नकया गया संवैर्ाननक नववास रा.रा.क्षे. तदल्ली सरकार बनाम भारि संघ और तकह िा ह ल हन बनाम जतिलहू और अन्य में र्ी प्रनतनबंनबत नकया गया है नजसमें इस न्यायालय ने दसवीं अनुसूची क े तहत िक्तक्तयों का प्रयोग करते हुए संसद क े सदनों क े अध्यक्ष/सर्ापनत क े पदों में जताए गए संवैर्ाननक नववास क े संदर्म में इस प्रकार निपण्णी की: “ञ] वह तक म नक न्यानयक कायों का अध्यक्ष/सर्ापनत को देने क े अनर्कार का संस्कार स्वयं में ही राजनैनतक पक्षपात की सम्भावना क े आर्ार पर प्रावर्ान का दुरूपयोग होगा अनुनचत है और ख़ाररज नकया जाता है| संसदीय लोकताक्तिक प्रर्ाली में अध्यक्ष/सर्ापनत प्रमुख र्ूनमका ननर्ाते हैं और सदन क े अनर्कार एवं नविेषानर्कार क े रक्षक हैं| उनसे आिा की जाती है नक वे संसदीय लोकतंत्र क े कायों में महत्वपूर्म ननर्मय लेंगे| दसवीं अनुसूची क े तहत मामलों पर ननर्मय करने की िक्तक्तयों का ऐसे अनर्कारी को नदया जाना अपवादात्मक नहींसमझा जाना चानहए|” मौतलक तनयम 56 (जे) और पेंशन तनयम ंक े तनयम 9 क े बारे में
58. अगली पड़ताल पीआर 56 (जे) क े अनुसार कारमवाई में नवफलता क े आरोप से संबंनर्त है। सामान्य बोल-चाल में लोक सेवक की अननवायम सेवाननवृनर्त् एफआर 56 (जे) में ननर्ामररत प्रनक्रया द्वारा ननयंनत्रत होती है क्ूंनक मौनलक ननयम 2 में यह प्रावर्ान है नक "मौनलक ननयम उन सर्ी सरकारी करमचाररयों पर लागू होते हैं, नजनका वेतन नसनवल अनुमानों नवकलनीय हो और सरकारी कममचाररयों क े नकसी र्ी अन्य वगम पर लागू होता है नजसक े नलए राष्ट्र पनत सामान्य या नविेष आदेि द्वारा, उन्हें लागू करने की घोषर्ा कर दें|” इस प्रकार, एफआर 56 (जे) सामान्य रूप से लागू होने वाला ननयम है| इस तक म का नवश्लेषर् करने क े नलए, इस ननयम क े प्रासंनगक नहस्से को पुन: प्रस्तुत करना आवश्यक है जो ननम्न प्रकार है: ““एफ.आर. 56 (जे) इस ननयम में क ु छ र्ी सक्तम्मनलत होने क े बावजूद, यनद उपयुक्त प्रानर्कारी की यह राय है नक ऐसा करना जननहत में है, तो उसे नकसी र्ी सरकारी कममचारी को 55 साल का होने क े बाद न्यूनतन तीन महीने का नलक्तखत नोनिस देकर सेवाननवृर्त् करने का पूर्म अनर्कार होगा...|”
59. यह स्पष्ट् है नक एफआर 56 (जे) में दोहरा तत्व िानमल है- प्रथम यह नक नकसी कममचारी को सेवाननवृर्त् करने का सरकार का पूर्म अनर्कार और दू सरा यह नक वह नवनिष्ट् पररक्तथथनत नजसमें इस तरह क े अनर्कार का प्रयोग नकया जा सकता है अथामत सावमजननक नहत की आवश्यकता। इस ननयम में ननवतममान कममचारी को न्यूनतन तीन महीने की पूवम सूचना का प्रावर्ान है| दू सरी ओर 1975 क े ननयमों का ननयम 135 इस व्यवथथा से अलग है। यह प्रश्नगत संगठन में गुप्तचर अनर्काररयों क े समूह से संबंनर्त नविेष प्रावर्ान है| एफआर 56 (जे) और ननयम 135 क े बीच मौनलक अंतर क्रमिः "सावमजननक नहत" और "सुरक्षा" उक्तक्तयों क े उपयोग में नननहत है। सुरक्षा का मुद्दा नविेष प्रावर्ान में नविेष थथान रखता है जो सुरक्षा कारर्ों से लागू होता है| दू सरी ओर, एफआर 56 (जे) आम तौर पर सावमजननक नहत क े संदर्म में है। एफआर 56 (जे) क े अक्तस्तत्व क े दौरान 1975 में बनाए गए ननयम 135 को एक नविेष प्रावर्ान क े रूप में उक े रा गया था| यह उल्लेख करना उनचत है नक ननयम 135 नकसी कममचारी को अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् करने क े नलए सरकार क े नननहत अनर्कार की उपक्तथथनत की पहचान करता है और ऐसी कारमवाई करने क े नलए क ु छ नविेष आर्ारों का स्पष्ट् रूप से उल्लेख करता है। इसनलए, ननयम 135 एफआर 56 (जे) से सुनवचाररत अंतर प्रस्तुत करता है और इसक े लागू होने की पूवम ितम क े रूप में “उजागर होने” एवं सुरक्षा कारर्ों से “अननयोज्यता” की नविेष पररक्तथथतयां िानमल हैं| नननित रूप से, ननयम 135 में संगठन क े खुनफया अनर्कारी की अननवायम सेवाननवृनर्त् की सर्ी पररक्तथथनतयों और मामले समानहत नहीं है। क्ूंनक इसमें वनर्मत क्तथथनतयों से परे इसकी कोई उपयोनगता नहीं है| अतः अननवायम सेवाननवृनर्त् को न्यायसंगत ठहराने वाली अन्य सर्ी क्तथथनतयां (ननयम 135 में िानमल नहीं) जननहत क े संदर्म में एफआर 56 (जे) द्वारा ननयंनत्रत होती रहेंगी। इस प्रकार, ननयम 135 एक नविेष प्रावर्ान है और एफआर 56 (जे) में ननर्ामररत आर्ार और प्रनक्रया से स्वतंत्र होकर संचानलत होता है। दू सरे िब्ों में, जब ननयम 135 क े घिक संतुष्ट् हो जाते हैं, तो अनुच्छे द 309 क े अथम क े र्ीतर, ननयम 135 संगठन क े खुनफया अनर्कारी की 'सेवा की ितम' क े रूप में सनक्रय हो जाएगा और एक सामान्य प्रावर्ान होने क े नाते, एफ आर 56 (जे) को जननहत में ननयम 135 में ननर्ामररत सीमा से आगे क े आर्ार पर लागू नकया जा सकता है। इस प्रकार, एफआर 56 (जे) जैसे सामान्य प्रावर्ान को नविेष प्रावर्ान (ननयम 135) क े रूप में जगह देनी चानहए, जैसा नक एस सी जैन बनाम हररयाणा राज्य और एक अन्य में उल्लेक्तखत है।
60. एफआर 56 (जे) में ननर्ामररत प्रनक्रयात्मक मानकों से संक े त लेते हुए अपीलाथी ने जोर नदया नक ननयम 135 को लागू करने में प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों का पालन न करने से नदनांक 18.12.2009 का अंनतम आदेि मनमाना हो गया। यद्यनप हम पहले ही स्पष्ट् िब्ों में कह चुक े हैं नक 1975 क े ननयमों का ननयम 135 प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों की कठोरता से बाध्य नहीं हैं, हम यह जोड़ना आवश्यक समझते हैं नक कायमपानलका क े सर्ी ननर्मयों में प्राक ृ नतक न्याय एक सवमव्यापी पूवम ितम नहीं है और इसकी प्रयोज्यता की सीमा असंख्य क्तथथनतयों में नर्न्न होती है। न्यू प्रकाश ि्ांसप िण क ं पनी तलतमिेड बनाम न्यू सुवणाण ि्ांसप िण क ं पनी तलतमिेड में इस न्यायालय ने संक्षेप में प्राक ृ नतक न्याय क े ननयमों की ननरपेक्षता/ननरंक ु िता क े क्तखलाफ निप्पर्ी की और कहा नक इस तरह क े ननयम मामले क े तथ्यों को ननयंनत्रत करने वाले अलग-अलग सांनवनर्क ननयमों क े साथ नर्न्न होते हैं| नवनिष्ट् सांनवनर्क ननयमों क े आलोक में ऐसे नसद्धांतों क े अपवाद पर बोलते हुए, इस न्यायालय ने भारि संघ बनाम कनणल जे.एन. तसन्हा और एक अन्य में एक े क ृ पाक और अन्य बनाम भारि संघ और अन्य को अनुमोदन क े साथ उद् र्ृत करते हुए इस प्रकार निप्पर्ी की:- “8....यह सच है नक यनद प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों क े साथ सांनवनर्क प्रावर्ान को पढा जा सकता है, तो न्यायालयों को ऐसा करना चानहए क्ोंनक यह माना जाना चानहए नक नवर्ानमंडल और सांनवनर्क प्रानर्कारी प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों क े अनुसार कायम करने का इरादा रखते हैं| लेनकन अगर दू सरी ओर नविेष रूप से या आवश्यक नननहताथम द्वारा सांनवनर्क प्रावर्ान प्राक ृ नतक न्याय क े नकसी र्ी या सर्ी नसद्धांतों क े इस्तेमाल को िानमल नहीं करता है तो न्यायालय नवर्ानयका या सांनवनर्क प्रानर्कारी क े अनर्कार की अनदेखी नहीं कर सकता और प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों क े संबंनर्त प्रावर्ान का मतलब नहीं ननकाल सकता है। क्ा प्राक ृ नतक न्याय क े नकसी र्ी नसद्धांत क े अनुसार प्रदर्त् िक्तक्त का प्रयोग नकया जाना चानहए या नहीं, यह िक्तक्त प्रदान करने वाले प्रावर्ान क े व्यक्त िब्ों, प्रदर्त् िक्तक्त क े स्वरुप, नजस उद्देश्य क े नलए इसे प्रदान नकया जाता है और उस िक्तक्त क े प्रयोग क े प्रर्ाव पर ननर्मर करता है|” संर्वतः प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों का बुक्तद्धरनहत नवस्तार न्याय क े स्वर्ाव क े क्तखलाफ होगा। मेनका गांिी बनाम भारि संघ एवं एक अन्य क े पिात् युग क े बहुत सारे ननर्मय में इसे दोहराया गया है| प्रबंि तनदेशक, ईसीआईएल, हैदराबाद और अन्य बनाम बी करुणाकर और अन्य में इस न्यायालय ने मेनका (उपरोक्त) क े बाद क े दृनष्ट्कोर् को इस प्रकार संक्षेप में प्रस्तुत नकया:- “20. कानून की उत्पनर्त् का प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों से पता लगाया जा सकता है, जैसा नक ननम्ननलक्तखत मामलों में प्रकि हुआ है: एक े क ृ पाक बनाम र्ारत संघ, (1969) 2 एससीसी 262 में यह माना गया नक नकसी र्ी कानून द्वारा कवर नहीं नकए गए क्षेत्रों में प्राक ृ नतक न्याय क े ननयम संचानलत होते हैं। वे देि क े कानून को समाप्त करने की बजाये उनकी कमी पूरी करते हैं| वे सनन्ननहत ननयम नहीं हैं और उनका उद्देश्य न्याय देना या घोर अन्याय को रोकना है| यनद यह उनका उद्देश्य है, तो कोई कारर् नहीं है नक उन्हें प्रिासननक कायमवाही पर लागू नहीं नकया जाए, खासकर उस समय जब अर्म न्यानयक जााँच से प्रिासननक पूछताछ को अलग करने वाली रेखा खींचना आसान न हो। प्रिासननक जांच में अन्यायपूर्म ननर्मय अर्म-न्यानयक जांच में ननर्मय की तुलना में कहीं अनर्क प्रर्ावी हो सकता है। यह र्ी निपण्णी की गई नक हाल क े वषों में प्राक ृ नतक न्याय की अवर्ारर्ा में काफी बदलाव आया है। नकसी नविेष मामले में प्राक ृ नतक न्याय का कौन सा नविेष ननयम लागू होना चानहए, यह बहुत हद तक उस मामले क े तथ्यों एवं पररक्तथथनतयों, उस कानून क े ढााँचे नजसक े तहत जांच होती है और अनर्करर् क े गठन / या उस उद्देश्य क े नलए ननयुक्त व्यक्तक्तयों क े ननकाय पर ननर्मर करेगा| जब र्ी नकसी न्यायालय क े समक्ष यह निकायत की जाती है नक प्राक ृ नतक न्याय क े क ु छ नसद्धांत का उल्लंघन हुआ है, तो न्यायालय को यह तय करना होगा नक उस मामले क े तथ्यों पर न्यायसंगत ननर्मय क े नलए उस ननयम का पालन आवश्यक था या नहीं। अब यह ननयम नक जांच सद्भाव से और पूवामिह क े नबना और मनमाने ढंग से या अनुनचत रूप से नहीं होनी चानहए, प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों में िानमल है।
21. अध्यक्ष, खनन परीक्षा बोडम बनाम रामजी, (1977) 2 एससीसी 256 में न्यायालय ने यह निपण्णी की है नक प्राक ृ नतक न्याय कोई अननयंनत्रत घोड़ा नहींहै, न ही कोई घात में बैठी बारूदी सुरंग, न ही कोई न्यानयक इलाज| कारमवाई का ननिाना बनाये गए व्यक्तक्त, रूप, नविेषता और प्रत्येक क्तथथनत क े तथ्यों और पररक्तथथनतयों पर आनश्रत और इस तरह क े आवश्यक प्रनक्रयात्मक िुद्धता क े मूल तत्व क े प्रनत अगर ननर्मय लेने वाला ननष्पक्षता नदखाता है तो प्राक ृ नतक न्याय क े उल्लंघन की निकायत नहीं की जा सकती। तकसी भी मामले की प्रशासतनक वास्ततवकिाओं और अन्य कारक ं क े संदभण क े तबना प्राक ृ तिक न्याय का अप्राक ृ तिक तवस्तार क्ष भकारी ह सकिा है। अदालिें कानून क सामान्य िरीक े से या प्राक ृ तिक न्याय क कलाक ृ ति मात्र क े रूप में नहीं देख सकिीं न ही वे उतिि अवसर की अविारणा क ठ स ढााँिे में तफि कर सकिे हैं। यतद न्यायालय पररक्तस्र्थिय ं की सम्पूणणिा से संिुष्ट है तक प्रतिक ू ल आदेश से दक्तिि पक्ष उतिि अवसर से वंतिि नहीं रहा है, ि न्यायालय ज़रुरि से अतिक पररशुि या कट्टर नहीं ह गा मान प्राक ृ तिक न्याय क े तनयम पतवत्र शास्त्र र्थे।
22. इंक्तिट्यूि ऑि चािमडम एकाउंिेंि्स ऑि इंनडया बनाम एल.क े. रत्ना, (1986)4 SCC 537, चरर् लाल साहू बनाम र्ारत संघ, (1990) 1 एस सी सी 613 (र्ोपाल गैस लीक नडजािर क े स) एवं सी.बी. गौतम बनाम र्ारत संघ, (1993) 1 एस सी सी 78, में नसद्धांत नक कानून क े अननर्क ृ त अंतराल में प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांत अवश्य लागू नकए जाने चानहए जब तक नक इसक े नवपरीत कोई, को दोहराया गया है|” (बल नदया गया)
61. 1975 क े ननयमों का ननयम 135 खुनफया अनर्कारी क े उजागर होने की पररक्तथथनतयों में लागू होता है और ऐसे खुनफया अनर्कारी की पहचान उजागर होने से संगठन र्ी बहुत ज़्यादा प्रनतक ू ल ढंग से उजागर होता है और उनचत ढंग से प्रश्नगत संगठन की सत्यननष्ठा पर दीघमकानलक प्रर्ाव सनहत लज्जाजनक सुरक्षा चूक क े तौर पर सामने आ सकता है| नजन पररक्तथथतयों में ननयम 135 लागू होता है उनमें तात्कानलकता का अथम िानमल है| नननवमवाद रूप से जााँच में िानमल होने क े नाम पर संगठन में उजागर अनर्कारी की ननरंतर मौजूदगी से संथथागत तथा राष्ट्र ीय सुरक्षा नहत खतरे में पड़ जाएं गे| यह उजागर करना हम आवश्यक समझते हैं नक उजागर अनर्कारी की जानकारी या नमलीर्गत क े नबना र्ी ऐसा पररर्ाम सामने आ सकता है| इस तरह उजागर होने से संबंनर्त कथन मात्र से नकसी र्ी रूप में ऐसे अनर्कारी पर कलंक या दोष नहीं मढा जाता| ननयम 135 ज़रूरी नननहताथों क े ज़ररए इन नसद्धांतों क े अनुपालन को स्पष्ट् रूप से ख़ाररज करता है| दू सरे िब्ों में प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों का कड़ाई से पालन इस नविेष प्रावर्ान को बनाने क े उद्देश्य को ही समाप्त कर सकता है| हम एक्स-आमीमेनज प्र िेक्शन सतवणसेज प्राइवेि तलतमिेड बनाम भारि संघ एवं अन्य की व्याख्या को उपयोग ढंग से संदनर्मत कर सकते हैं नजस में इस प्रकार निपण्णी की गई है: “16. राष्ट्र ीय सुरक्षा क े नहत में क्ा है? यह कानून का सवाल नहीं, नीनत का नवषय है। कोई चीज़ राज्य क े नहत में है या नहीं यह तय करना न्यायलय का काम नहीं| इसे कायमपानलका पर छोड़ देना चानहए| गृह नवर्ाग क े राज्य सनचव बनाम रहमान, (2003) 1 एसी 153 में लॉडम हॉफमैन को उद् र्ृत नकया गया है: “...राष्ट्र ीय सुरक्षा क े मामले में कानून का सवाल नहीं है। यह ननर्मय एवं नीनत का मामला है| नििेन और अनर्कांि अन्य देिों क े संनवर्ान क े तहत कोई चीज़ राष्ट्र ीय सुरक्षा क े नहत में है या नहीं, इस संबंर् में ननर्मय न्यानयक ननर्मय का मामला नहीं है | इसकी नज़म्मेदारी कायमपानलका पर है|” “17. इस प्रकार, राष्ट्ीय सुरक्षा की क्तस्र्थति में, पक्षकार प्राक ृ तिक न्याय क े तसिांि ं क े सख्त पालन पर ज र नहीं दे सकिा| ऐसे मामल ं में मिलब तनकालना और सांतवतिक छ ू ि प्रदान करना न्यायलय की तज़म्मेदारी है यतद क्षेत्र क तनयंतत्रि करने वाले तनयम सुस्पष्ट नहीं हैं| लेनकन मामला नविेष क े तथ्यों पर ननर्मरता जताते हुए खुद को संतुष्ट् करना न्यायालय क े ऊपर होगा नक न्यायोनचत तथ्य हैं नक नहीं तथा उस संबंर् में न्यायालय को फाइल मााँगा कर देखने का अनर्कार है नक क्ा यह मामला ऐसा है नजसमें राष्ट्र ीय सुरक्षा नहत िानमल है| जब राज्य का यह पक्ष हो नक मामले में राष्ट्र यी सुरक्षा िानमल है तो न्यायालय प्रर्ानवत पक्ष को कारर् नहींबताएगा|” (बल नदया गया)
62. ग़ौरतलब है नक वतममान मामले में अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि सरकार क े उच्चतम स्तरों 8.8.2008 से िुरू होने वाली प्रारंनर्क जांच की श्रृंखला क े बाद (उपरोक्त अनुसार) हुआ था और हमारी राय में इस तरह की प्रारंनर्क जााँच उनचत है क्ूंनक प्रारंनर्क जांच क े बाद ही सक्षम प्रानर्कारी नकसी नविेष मामले में ननर्ामररत आर्ार क े अक्तस्तत्व क े बारे में खुद को संतुष्ट् कर सकता है। हमारा बार-बार यह र्ी कहना है नक इस तरह की जांच में संबंनर्त अनर्कारी की र्ागीदारी अननवायम सेवाननवृनर्त् क े नवनर्िास्त्र से संबंनर्त मूलतत्व या प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों क े कठोर पालन द्वारा अननवायम नहीं है। इस तरह क े नसद्धांतों को संगठन या राज्य की सुरक्षा क े कारर्ों को सीमाबद्ध करने वाले व्यापक जननहत को खतरे में डालकर मुफ्त सवारी की पेिकि नहीं की जा सकती है। कई बार कठोर होने क े बावजूद, नवचारार्ीन ननयम क े अस्पष्ट् प्रावर्ान नवर्ायी आिय क े क्तखलाफ न्यानयक रचनात्मकता क े नकसी र्ी तत्व को प्रर्ानवत करने क े नलए कोई थथान नहीं देते हैं (राजस्र्थान राज्य बनाम लीला जैन एवं अन्य तथा श्री नसीरुद्दीन बनाम राज्य पररवहन अपीलीय अतिकरण देखें) हम मानते हैं नक 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 में पूवम सूचना या प्राक ृ नतक न्याय क े नसद्धांतों का पालन करने की नकसी आवश्यकता को िानमल नहींनकया गया है। पेंशन दावा क े संबंि में
63. अपीलाथी ने नवनर्न्न नबन्दुओं पर पेंिन ननयमों क े संदर्म में उच्च न्यायालय क े समक्ष सेवाननवृनर्त् क े आदेि का नवरोर् नकया था लेनकन इस अपील द्वारा अपीलाथी ने क े वल ननम्ननलक्तखत प्रश्न उठाया है: “(बी) सीसीएस (पेंिन) ननयम, 1972 क े ननयम 9 (1) क े तहत, क्ा र्ारत का राष्ट्र पनत नकसी अन्य प्रानर्करर् क े कममचारी की पेंिन को संिोनर्त करने क े नलए अपनी िक्तक्त को सौंप सकता है? ज़ानहर है र्ारत क े राष्ट्र पनत इस िक्तक्त को नहींकर सकते| इसका मतलब यह है नक जहां नकसी कममचारी की पेंिन को संिोनर्त नकया जाना है, उसका ननर्मय राष्ट्र पनत द्वारा मामले क े आर्ार पर नलया जाना है| संर्वतः ननयम 135 जैसा एक सामान्य ननयम नहीं हो सकता है जो सीसीएस (पेंिन) ननयम, 1972 की अनदेखी कर कममचाररयों क े नकसी खास समूह की पेंिन को ननयंनत्रत कर सकता है| ननयम 135 का अक्तस्तत्व वास्तव में एक ऐसा मामला है जहां अपनी मज़ी से रॉ अनर्काररयों को हिाने क े नलए रॉ क े क ु छ अनर्काररयों ने िक्तक्त अपने हाथों में ले ली|”
64. यह प्रश्न 10.5.2010 क े आदेि से उत्पन्न हुआ है, नजसक े ज़ररये प्रत्यथीगर् ने पूर्म पेंिन क े बजाय अपीलाथी को अनंनतम पेंिन दी। अपीलाथी का तक म है नक इस आदेि क े पररर्ामस्वरूप अपीलाथी क े अंनतम पेंिन और उसक े अनंनतम पेंिन क े नहस्से को पेंिन ननयमों क े ननयम 9 द्वारा ननर्ामररत मागम को अपनाए नबना रोक नदया गया था। यह र्ी ननवेदन नकया गया है नक ननयम 135 क े खंड (2) (4) सेवाननवृर्त् अनर्कारी क े पेंिन प्रावर्ानों से अलग हैं और पेंिन ननयमों क े ननयम 9 (1) का उल्लंघन हैं नजसक े तहत क े वल र्ारत क े राष्ट्र पनत मामले क े आर्ार पर ऐसी िक्तक्त का प्रयोग कर सकते हैं। इसनलए, 1975 क े ननयम का ननयम 135 खराब है और इन्हें बरकरार नहीं रखा जा सकता।
65. प्रत्यथीगर् का तक म था नक पेंिन ननयमों का ननयम 9 अपीलाथी क े मामले पर लागू नहीं होता है और यह प्रावर्ान क े वल उस कममचारी पर लागू होगा जो नकसी नवर्ागीय या न्यानयक कायमवाही में सेवा की अवनर् क े दौरान कदाचार या लापरवाही का दोषी पाया गया हो| इस प्रकार प्रत्यथीगर् का तक म है नक पेंिन का अनुदान 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े प्रावर्ानों क े अनुसार न्यायपूवमक नकया गया था।
66. प्रनतद्वंद्वी प्रनतनवरोर् की पड़ताल करने क े नलए, हम पहले ननयम 9(1) पर ध्यान देना उनचत समझते हैं जो इस प्रकार है: “9. पेंशन र कने अर्थवा वापस लेने का राष्ट्पति का अतिकार। (1) राष्ट्र पनत स्वयं को पेंिन या िेच्युिी, या दोनों, पूर्म या आंनिक रूप से रोकने अथवा पूर्म या आंनिक रूप से थथाई तौर पर या नविेष अवनर् क े नलए पेंिन वापस लेने और सरकार को हुई नकसी र्ी आनथमक क्षनत क े पूरे या क ु छ नहस्से की पेंिन या िेच्युिी से वसूली का आदेि देने का अनर्कार अपने पास सुरनक्षत रखते हैं यनद नकसी नवर्ागीय या न्यानयक कायमवाही में, पेंिनर्ोगी को सेवाननवृनर्त् क े बाद दोबारा ननयोज्यता पर दी गई सेवा सनहत सेवा की अवनर् क े दौरान गंर्ीर कदाचार या लापरवाही का दोषी पाया जाता है:.............”
67. अपीलाथी यह प्रनत नवरोर् करने में सही हो सकती है नक नकसी अनर्कारी का पेंिन रोकने या वापस लेने की िक्तक्त ननयम 9 द्वारा सीनमत है | यह थथानपत नवनर् है नक ननयम 9 क े तहत पेंिन में पररवतमन की िक्तक्त का प्रयोग नवर्ागीय अथवा न्यानयक कायमवाही करने क े पिात् कममचारी क े क्तखलाफ कदाचार या लापरवाही क े नतीजे पर पहुाँचने क े अध्यार्ीन है | इस न्यायालय में डी.वी. कपूर बनाम भारि संघ एवं अन्य में इस प्रकार निपण्णी की है:- “8. समझा जाता है नक पूर्म या आंनिक रूप से थथायी तौर पर अथवा नकसी नविेष अवर्ी क े नलए पेंिन रोकने का अनर्कार राष्ट्र पनत क े पास सुरनक्षत है अथवा न्यूनतम क े अध्यर्ीन सरकारी कममचारी द्वारा सरकार को होने वाली नकसी र्ी आनथमक क्षनत क े पूरे या क ु छ नहस्से की पेंिन से वसूली की जा सकती है| पूवम ितम यह है नक नकसी र्ी नवर्ागीय जााँच अथवा न्यानयक कायमवाही में पेंिन र्ोगी को उसकी मूल सेवा अथवा दुबारा ननयोजता की अवर्ी क े दौरान कदाचार या लापरवाही का दोषी पाया जाए| उसकी ितम यह है नक यह ननष्कषम होना चानहए नक दोषी कायामलय में सावमजाननक कतमव्य को अंजाम देने में कदाचार अथवा लापरवाही का दोषी है जैसा नक ननयम 8(5) में पररर्ानषत है, स्पष्ट्ीकरर् (ख) जो एक समावेिी पररर्ाषा है अथामत कायमक्षेत्र नकसी नविेष मामले में तथ्यों और पररक्तथथयों पर ननर्मर व्यापक संक े त है | चालाकी पर ननर्मर बहुत सारी पररक्तथथनत उत्पन्न होती है नजससे कदाचार या अननयमता को अंजाम नदया जाता है | ‘गंर्ीर कदाचार अथवा लापरवाही’ िब्ों क े प्रर्ाव क्षेत्र और अथम की जााँच करना आवश्यक नहीं है और नकन पररक्तथथयों क े तहत इस संबंर् में ननष्कषों को नसद्ध माना गया है | यह काफी है नक इस मामले में आरोप यह है की लन्दन क्तथथत र्ारतीय उच्च आयोग से नवदेि मंत्रालय, र्ारत सरकार, नई नदल्ली कायामलय में थथानान्तरर् क े बाद ड्यूिी पर नहींजाने में अपीलाथी अनड़यल कदाचार की दोषी थी| जााँच अनर्कारी ने पाया की र्ले ही अपीलाथी ने ड्यूिी पर जाने क े अपने कतमव्य में लापरवाही की है लेनकन इस कारर्वि वे अिल नहींथें नक अपने पत्नी की बीमारी क े कारर् वो नहीं जा सक े और उन्होंने सहानुर्ूनत नदखाते हुए अपीलाथी को मामले पर नवचार करने की नसफाररि की और राष्ट्र पनत ने इस ननष्कषम को स्वीकार कर नलया लेनकन संघीय लोक सेवा आयोग क े परामिम से िेच्युिी एवं पेंिन क े र्ुगतान को रोकने का फ ै सला नकया |
9. जैसा नक देखा गया राष्ट्र पनत द्वारा िक्तक्त का प्रयोग पूवम ितम से बर्ा हुआ है नक नवर्ागीय जााँच अथवा न्यानयक कायमवाही में यह ननष्कषम दजम होना चानहए नक आरोपी पेंिनर्ोगी ने पद पर रहते हुए अपने कतमव्यों क े पालन में गंर्ीर कदाचार अथवा लापरवाही की हो | ऐसे नकसी ननष्कषम क े आर्ाव में सजा क े तौर पर पूर्म अथवा आंनिक रूप से थथायी तौर पर अथवा नकसी नविेष अवर्ी क े नलए पेंिन रोकने या न्यूतम 60 रूपये क े अध्यार्ीन कममचारी क े पेंिन से पूर्म या आंनिक रूप से आनथमक क्षनत की वसूली का आदेि देने का राष्ट्र पनत क े पास कोई कानूनी अनर्कार नहींहै |”
68. ननयम 9 का उद्देश्य र्ारत क े राष्ट्र पनत में घिाने/पररवतमन की नननहत िक्तक्त द्वारा नकसी कममचारी क े पेंिन र्ोगी अनर्कार को अनतररक्त संरक्षर् प्रदान करना है | लेनकन यह एक सामान्य ननयम है न नक व्यापक उपयोग का अनतमहत्वपूर्म प्रावर्ान| संनवर्ान क े अनुच्छे द 309 क े अंतगमत बनाया गया यह ननयम अपने नवनिष्ट् क्षेत्र में लागू होता है और ननयम 135 जैसे अन्य नविेष ननयमों का उल्लंघन नहीं कर सकता | संक्षेप में यह ननयम (ननयम 9) 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 को ननयंनत्रत नहींकरता और नहींकर सकता है जो अनुच्छे द 309 से अपना स्वतंत्र प्रानर्कार प्राप्त करता है | चूंनक दोनों ननयम अनुच्छे द 309 से उत्पन्न होते हैं इसनलए एक ननयम की अवैर्ाननकता का प्रश्न इस तक म पर आर्ाररत नहीं हो सकता नक यह पेंिन क े एक ही नवषय से सम्बंनर्त होने क े बावजूद एक दू सरे ननयम से अलग काम करता है | उपरोक्तानुसार ननयम 135 क े अंतगमत िक्तक्त का प्रयोग करते हुए अननवायम सेवा ननवृनत की कायमवाही नजन मामलों में की गयी उनमे कममचारी क े क्तखलाफ कदाचार अथवा लापरवाही क े नकसी र्ी ननष्कषम की कल्पना उसी रूप में मौजूद नहीं | यह नवर्ागीय अथवा न्यानयक कायमवाही से पहले नहीं नकया गया | ननयम 135 एक नविेष व्यवथथा क े रूप में एक अलग ढंग से ननष्कासन एवं ननष्कासन क े पिात् लार् क े क ु छ खास पहलू ओं को समानहत अपने आप में एक पूर्म संनहता है और सामान्य प्रावर्ानों से कम नकसी दू सरे ननयम द्वारा ननयंनत्रत नहींहोती| ननयम 135 तथा ननयम 9 क े बीच कोई अनतव्यापन नहींहै |
69. अपीलाथी को पेंिन देने क े संबंर् में, अपीलाथी अक्षरिः तः ननयम 135 क े खंड (2) (4) क े तहत सर्ी लार्ों का हकदार होगा। आक्षेनपत ननर्मय में प्रत्यथीगर् को अपीलाथी क े नवनर्न्न लार्ों को सुरनक्षत करने का ननदेि नदया गया है, नजसमें 2023 में अनुमाननत सेवाननवृनर्त् की तारीख क े अनुसार पदोन्ननत और पेंिन की तारीख का ननर्ामरर् र्ी िानमल है। प्रत्यथीगर् द्वारा उस ननदेि को हमारे समक्ष चुनौती नहींदी गई है। ननयम 135 क े तहत सेवाननवृर्त् कममचारी की पेंिन को अनुमाननत सेवाननवृनर्त् की तारीख क े अनुसार ननर्ामररत नकया जाना है, न नक वास्तनवक सेवाननवृनर्त् की तारीख क े अनुसार। यह, हमारे नवचार में, ननयम क े लार्कारी, संतुनलत और सुरक्षात्मक दृनष्ट्कोर् को दिामता है क्ोंनक यह सुरक्षा (संगठन या राज्य) और ननवतममान कममचारी क े व्यक्तक्तगत नहत सनहत सावमजननक नहत क े प्रनतस्पर्ी नवचारों से ननपिने का प्रयास करता है। इस प्रकार, हम प्रत्यथीगर् को खंड (2) (4) में नननहत अनुबंर् और नविेष रूप से उच्च न्यायालय द्वारा अपीलाथी को नदए गए लार् को अक्षरिः और सही संकल्प क े साथ पालन करने का ननदेि देते हैं यनद पहले से ऐसा नहींनकया गया।
70. हमारा ध्यान उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेनपत आदेि क े ज़ररये अपीलाथी की सेवाननवृनर्त् की तारीख 18.12.2009 से 31.12.2012 क े थथगन आदेि पर आकनषमत नकया है। आदेि संर्वतः न्याय नहत में पाररत नकया गया है, जैसा नक आक्षेनपत ननर्मय क े पररच्छे द 79 से स्पष्ट् है, नजसमें उच्च न्यायालय ने इस प्रकार अंनकत नकया है: "79... साथ ही साथ, इस मामले की नवनिष्ट्ता और पररक्तथथनतयां प्राथी सुश्री र्ानिया को र्ी राहत का पात्र बनती हैं...” आक्षेनपत ननर्मय में इस तरह क े थथगन का आदेि देने क े नलए कोई अन्य तक म दजम नहीं नकया गया है। हम मामले की अजीब पररक्तथथनतयों क े प्रनत सचेत हैं, हालांनक, हमें उच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए उपाय पर आपनर्त् है क्ोंनक यह ननयम 135 क े प्रर्ाव क्षेत्र से परे है| अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि र्ारत क े राष्ट्र पनत क े नाम से पाररत नकया गया था, नजसका प्रासंनगक नहस्सा इस प्रकार है:- “...इसनलए, रॉ (आरसी एं ड एस) ननयम, 1975 क े ननयम 135 में नननहत प्रावर्ानों क े अनुसार, सुश्री ननिा नप्रया र्ानिया को अननवायम रूप से सरकारी सेवा से ित्काल प्रभाव से सेवातनवृि तकया जािा है|” (बल नदया गया)
71. अननवायम रूप से नकसी अनर्कारी को सेवाननवृर्त् करने का ननर्मय नविुद्ध रूप से मौजूद पररक्तथथनतयों क े मद्देनजर कायमपानलका का कायम है। न्यायालय द्वारा जांच इस बात की परीक्षा तक सीनमत है नक क्ा इस तरह का आदेि दुर्ामवनापूर्म अथवा असंगत नवचारों से प्रेररत है| जब इस तरह क े आदेि को पूरी तरह से अदालत में बरकरार रखा जाता है, जैसा नक उच्च न्यायालय ने सही नकया है तो इस तरह क े आदेि क े तकनीकी पहलू ओं को बदलने या संिोनर्त करने का कोई सवाल ही नहीं है नजसमें वह तारीख र्ी िानमल है नजससे इसे प्रर्ावी होना चानहए। “तत्काल प्रर्ाव” िब्ों क े उपयोग से यह स्पष्ट् हो जाता है नक अननवायम सेवाननवृनर्त् का आदेि तुरंत प्रर्ावी होना था और ऐसे आदेि की तारीख न्यानयक समीक्षा की िक्तक्त का प्रयोग करने की आड़ में न्यायालय द्वारा थथनगत नहीं की जा सकती। नबना नकसी कानूनी आर्ार क े ऐसा करने से घृनर्त पररर्ाम हो सकता है और ननर्मय क े ननष्कषम क े नसद्धांत को खतरे में डालने सनहत जनिल मुद्दे में बदल सकता है। यनद हम यह मान र्ी लें नक न्यायालय ने इस पर एक न्यायसंगत उपाय क े रूप में नवचार नकया, तो हमारा नवचार है नक सेवाननवृनर्त् की तारीख को थथनगत नकए नबना र्ी इसे हानसल नकया जा सकता था। 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े उप ननयम (2) में स्पष्ट् रूप से अनुमाननत सेवाननवृनर्त् की तारीख क े अनुसार पेंिन क े आकलन क े साथ साथ अनजमत पदोन्ननत का प्रावर्ान है। हालााँनक इस मामले क े नवनचत्र तथ्यों में इस दृनष्ट्कोर् क े प्रनत हमारी अस्वीक ृ नत क े बावजूद, सेवाननवृनर्त् की तारीख क े थथगन क े संबंर् में उच्च न्यायालय क े आदेि को संिोनर्त नहीं करेंगे क्ोंनक प्रत्यथीगर् द्वारा इसका नवरोर् नहीं नकया गया है और इसक े बजाय नबना आपनर्त् क े इसका अनुपालन नकया गया है।
72. हमें प्रत्यथीगर् द्वारा सूनचत नकया गया है नक सेवाननवृनर्त् क े थथगन क े आदेि क े बदले, पररर्ामी लार् पहले ही अपीलाथी को हस्तांतररत कर नदए गए हैं। इसनलए, हम यह स्पष्ट् करते हैं नक थथगन आदेि क े संबंर् में हमारी निप्पनर्यां उच्च न्यायालय क े आदेि क े संदर्म में अपीलाथी को पहले से ही हस्तांतररत लार्ों को प्रर्ानवत नहींकरेंगी, और उस संबंर् में अनतररक्त र्ुगतान की अपीलाथी से कोई वसूली नहीं होगी। मामले की अजीब-व-गरीब पररक्तथथनतयों क े प्रनत सचेत होने क े नाते, हम उसक े नलए बहाली का कोई आदेि देने क े इच्छु क नहींहैं।
73. अपीलाथी ने संगठन में सेवारत अनर्काररयों की पेंिन ननयमों की प्रयोज्यता से संबंनर्त ननर्मयों पर र्रोसा नकया है| अपीलाथी का यह प्रनतनवरोर् पेंिन ननयमों की तुलना में 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 की प्रयोज्यता क े कायम क्षेत्र की अनदेखी करता है। पेंिन ननयमों क े ननयम 2 (एच) में स्पष्ट् रूप से कहा गया है नक उक्त ननयम (पेंिन ननयम)उन व्यक्तक्तयों पर लागू नहीं होंगे, नजनकी सेवा क े ननयम और ितें तत्समय प्रवृर्त् नकसी अन्य कानून द्वारा या उसक े तहत संचानलत होती हैं। ननयम 135, जैसा नक पहले उल्लेख नकया गया है, संगठन में सेवारत अनर्काररयों को ननयंनत्रत करने वाली सेवा की ितों का र्ाग गनठत करता है और इस प्रकार, ननयम 135 में िानमल क्षेत्र में पेंिन ननयम लागू नहीं होंगे। हालााँनक ननयम 135 क े दायरे क े बाहर आने वाले क्षेत्र सीसीएस ननयमों क े अनुसार ननयंनत्रत होंगे और जरूर होने चानहए जैसा नक पेंिन ननयमों क े ननयम 69 क े तहत अपीलाथी क े अनंनतम पेंिन को मंजूरी देने वाले नदनांक 10.05.2010 क े नवर्ागीय आदेि में दोहराया गया है | इस प्रकार दोनों क े बीच कोई िकराव नहींहै।
74. इस मुद्दे पर चचाम समाप्त करने से पहले ननयम 135 क े खंड (2) (4) क े संबंर् में दो नचंताओं को दू र करना हम अपने ऊपर अननवायम समझते हैं | प्रथम, खंड (2) (4) में “सकता” अनर्व्यक्तक्त क े प्रयोग का तात्पयम और दू सरे अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् अनर्काररयों को ननयम की प्रनत की अनुपलब्धता।
75. यह आर्ारर्ूत है नक पेंिन कममचारी का एक बहुमूल् सांनवनर्क अनर्कार है और सरकार की मंिा अथवा खुिी द्वारा ननयंनत्रत नहींहोता है। इसक े नलए स्पष्ट् अपवादों क े अर्ाव में, उसक े वंचन में पररर्त होने वाले नकसी र्ी प्रावर्ान की सख्त न्यानयक पड़ताल होनी चानहए | डीएस नाकारा एवं अन्य बनाम भारि संघ में इस न्यायालय द्वारा कानून क े इस दृनष्ट्कोर् की संक्षेप में व्याख्या की गई है जो इस प्रकार है: ‘20. पेंिन की पूवम ननर्ामररत र्ारर्ा नक ननयोक्ता की इच्छा या क ृ पा क े आर्ार पर एक ऐक्तच्छक इनाम क े रूप में दावा न करने योग्य और इसनलए, न्यायालय क े माध्यम से पेंिन का कोई अनर्कार लागू नहीं नकया जा सकता है को देवकी नंदन प्रसाद बनाम तबहार राज्य (1971)2 SCC 330 में संनवर्ान पीठ क े ननर्मय द्वारा दबा नदया गया है नजसमें इस न्यायालय ने आनर्काररक रूप से फ ै सला सुनाया नक पेंिन एक अनर्कार है और इसका र्ुगतान सरकार क े नववेक पर ननर्मर नहीं करता है, लेनकन ननयमों द्वारा ननयंनत्रत है और उन ननयमों क े र्ीतर आने वाला कोई सरकारी कममचारी पेंिन का दावा करने का हकदार है। आगे यह कहा गया नक पेंिन का अनुदान नकसी क े नववेक पर ननर्मर नहीं करता है। यह क े वल सेवा और अन्य संबद्ध मामलों क े संबंर् में रानि को ननर्ामररत करने क े उद्देश्य से है यह नक प्रानर्कारी क े नलए इस आिय का आदेि पाररत करना आवश्यक है परन्तु नकसी अनर्कारी को पेंिन प्राप्त करने का अनर्कार ऐसे आदेि क े कारर् नहीं परन्तु ननयमों क े आर्ार पर नदया जाता है। इस दृनष्ट्कोर् की पंजाब राज्य बनाम इकबाल तसंह (1976)2 एससीसी 1 में पुन: पुनष्ट् की गई”
76. वास्तव में, 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े खंड (2) और (3) यह दिामते है नक इस ननयम क े तहत अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् कममचारी को पेंिन का अनुदान अनर्व्यक्तक्त “सकता है” से पहले है। यह र्ारर्ा देता है नक ननवतममान कममचारी को पेंिन का अनुदान सक्षम प्रानर्कारी क े नववेक क े अध्यार्ीन है। इस प्रावर्ान में अनर्व्यक्तक्त “सकता है” को नजस पररक्तथथनत में रखा गया है उसे “होगा” ही पढा जाय| नही तो, यह तक म नदया जा सकता है नक ननयम 135 क े तहत अननवायम सेवाननवृर्त् अनर्कारी को पेंिन लार् से वंनचत नकया जा सकता है। इसक े पररर्ामस्वरुप न क े वल ननयम 135 में संदनर्मत आकक्तस्मक क्तथथनत क े कारर् संबंनर्त कममचारी की नौकरी जाएगी बक्तल्क वह अपने आजीनवका क े स्रोत से र्ी वंनचत हो जाएगा (र्ले ही उसक े क्तखलाफ कायमवाही दीवानी पररर्ाम से प्रर्ानवत नहीं करना है)। वास्तव में, ननयम 135 को संबंनर्त कममचारी क े क्तखलाफ कायमवाही क े स्वरुप में लार्कारी, संतुनलत और सुरक्षात्मक प्रावर्ान क े रूप में ढाला गया है। हम इस ननयम को इस तरह से संचानलत करने की अनुमनत देने क े नलए अत्यनर्क नवसंगत पाते हैं तानक नकसी अनर्कारी को पेंिन लार् से वंनचत करने की गुंजाइि छोड़ दी जा सक े जो संगठनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने क े नलए अपनी इच्छा क े नबना सेवाननवृर्त् कर नदया गया है। नविेष रूप से एक नविेष प्रावर्ान होने क े नाते यह ननयम संबंनर्त अनर्कारी क े न्यूनतम आयु अथवा सेवा की अवनर् को ननर्ामररत नहीं करता और क्तथथनत की आवश्यकताएं सेवा की अल्पावनर् क े र्ीतर र्ी इस ननयम क े प्रयोग की मांग कर सकती हैं। ऐसी पररक्तथथनतयों में, संगठन की अखंडता क े संदर्म में जननहत क े कारर् अपनी गलती क े नबना बेदखल नकए जाने वाले ऐसे अनर्कारी क े पेंिन क े सांनवनर्क अनर्कार को दरनकनार करना ननरथमक एवं वास्तव में, संनवर्ान क े तहत मौनलक अनर्कारों का हनन होगा |
77. हम इस तथ्य से सावर्ान हैं नक अनुच्छे द 33 क े तहत संसद द्वारा बनाए गये गुप्तचर संगठन (अनर्कार पर रोक) अनर्ननयम, 1985, खुनफया अनर्काररयों पर इसक े प्रयोग क े सम्बन्ध में र्ाग 3 द्वारा प्रदर्त् क ु छ अनर्कारों पर अंक ु ि लगता है । लेनकन, यह संघ बनाने क े अनर्कार, बोलने की स्वतंत्रता आनद क े संबंर् में प्रनतबंर्ों तक सीनमत है और नकसी अनर्कारी की आजीनवका क े अनर्कार पर अंक ु ि लगाने क े नलए अपने दायरे को नहीं बढाता, वह र्ी तब जब अनर्कारी को ननयम 135 क े तहत अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् नकया जा रहा हो | यह उक्त कानून का उद्देश्य और मंिा नहींहो सकती थी। यहां तक नक पेंिन ननयमों में, ननयम 40 एकमात्र प्रावर्ान है जो अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् अनर्कारी की पेंिन को नववेकार्ीन "सकता है" प्रावर्ान क े अध्यार्ीन करता है। लेनकन, यह ननयम तब लागू होता है जब दंड क े रूप में उक्त सेवाननवृनर्त् का आदेि नदया जाता है और इस प्रकार, यह 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 की तुलना में एक अलग पायदान पर खड़ा है जो अनर्कारी क े आचरर् से जुड़ा नहीं है और न ही इसका कोई दीवानी या फौजदारी पररर्ाम होता है |
78. अब तक यह अच्छी तरह से थथानपत हो चुका है नक नवर्ानयका द्वारा अनर्ननयनमत प्रावर्ान क े माध्यम से प्राप्त नकये जाने वाले उद्देश्य को प्रर्ावी करना और उसकी ननष्फलता को रोकना न्यायालय का कतमव्य है। इस कतमव्य को पूरा करने क े नलए व्याख्या क े थथानपत मापदंड इस न्यायालय को “सकता है” और “होगा” क े प्रावर्ानों क े प्रयोग क े वास्तनवक अथम की जांच करने में सक्षम बनाते हैं, जैसा नक इस न्यायालय द्वारा डीक े बसु बनाम पतिम बंगाल एवं अन्य राज्य में द हराया गया है| "13. सरदार गोनवंद राव बनाम मध्य प्रदेि राज्य, AIR 1965 SC 1222 से िुरू हुई इस न्यायालय क े ननर्मयों की एक लंबी पंक्तक्त ने तक म की उपरोक्त पंक्तक्त का पालन नकया है और आनर्काररक रूप से कहा है नक िब् “हो सकता है” या “करेगा” का उपयोग अपने आप से जरूरी नहींहै नक एक ननदेनिका और दू सरा अननवायम है, लेनकन, नजस संदर्म में उक्त अनर्व्यक्तक्तयााँ हैं योजना क े रूप में र्ी उपयोग नकया गया है और कानून क े अंतननमनहत उद्देश्य यह ननर्ामररत करेगा नक क्ा नवर्ायी मंिा वास्तव में क े वल िक्तक्त प्रदान करना था या इस तरह क े सम्मेलन का उपयोग करने क े नलए कतमव्य क े साथ था।
14. आनर्काररक पररसमापक बनाम र्रती र्न (पी) नलनमिेड, में (1977) 2 एससीसी 166, इस न्यायालय ने इस प्रकार कानूनी क्तथथनत को अनर्व्यक्त नकया: "7. वास्तव में यह कहना नबल्क ु ल सही है नक “हो सकता है” िब् कर्ी-कर्ी 'चानहए' या 'करेगा' का अथम प्राप्त करता है। हालांनक, यह िब् हमेिा िक्तक्त प्रदान करने का संक े त देता है। वह िक्तक्त, उस संदर्म क े संबंर् में हो सकती है नजसमें यह होता है, और इसक े अभ्यास क े नलए नजन आवश्यकताओं पर नवचार नकया गया है, उन्होंने इसे एक दानयत्व क े रूप में संलग्न नकया है जो तथ्यों और पररक्तथथनतयों पर एक नननित तरीक े से अपने प्रयोग को मजबूर करता है नजससे उस तरह से प्रयोग करने का दानयत्व उत्पन्न होता है। दू सरे िब्ों में, यह संदर्म है जो एक नननित तरीक े से अपने प्रयोग को मजबूर करने में िक्तक्त क े साथ दानयत्व को संलग्न कर सकता है। संदर्म, कानूनी और तथ्यात्मक दोनों उस िक्तक्त को प्रदान कर सकते हैं जो दानयत्व देती है।
8. इस प्रकार, ऐसे मामलों में सदैव अवर्ाररत नकया जाने वाला प्रश्न यह है नक क्ा “हो सकता है” िब् क े प्रयोग द्वारा प्रदर्त् िक्तक्त क े साथ यह बाध्यता जुडी है नक साक्ष्य द्वारा दनिमत नकए जाने वाली क ु छ नवनर्क रूप से नवनहत ितों की पूनतम पर नकसी नविेष प्रकार का आदेि पाररत नकया जाना चानहए। यनद कानून नववेक क े नलए कोई थथान नहीं छोड़ता है तो िक्तक्त को अन्यू कानूनी प्रावर्ानों द्वारा इंनगत तरीक े से प्रयोग नकया जाना चानहए जो कानूनी संदर्म प्रदान करते हैं। नफर र्ी तथ्यों को थथानपत करना चानहए नक कानूनी ितें पूरी हो गई हैं। एक िक्तक्त का प्रयोग तब र्ी नकया जाता है जब न्यायालय नविेष रूप से इसका उपयोग करने क े नलए नकसी आवेदन नजसमें आवेदक इसे प्रयोग करने की इच्छा रखता है को अस्वीकार कर देता है। जहां तथ्यों क े आर्ार पर नकसी आवेदन को स्वीकार या इन्कार करने क े नलए िक्तक्त पयामप्त है, यह ननदेिक या नववेकार्ीन है। यह ऐसी िक्तक्त प्रदान करना नहीं है जो िब् “हो सकता है” इंनगत करता है जो इसक े प्रयोग क े साथ दानयत्व को नकन्तु इसक े नवनर्क और तथ्यात्मक प्रयोग को जोडती है|””
79. वतममान मामले में, जैसा नक ऊपर चचाम की गई है, नववेकार्ीन तरीक े से “सकता है” प्रावर्ान क े उपयोग का बहुत ही अन्यायपूर्म पररर्ाम हो सकता है और नववेक क े मनमाने प्रयोग की गुंजाइि छोड़ सकता है। इस प्रकार, संदर्म, उद्देश्य, नवर्ायी मंिा और कममचाररयों क े पक्ष में लार्प्रद प्रावर्ानों की अस्पष्ट्ताओं क े समार्ान की सामान्य नीनत को ध्यान में रखते हुए, हम मानते हैं नक ननयम 135 में प्रयुक्त अनर्व्यक्तक्त "हो सकता है" को “होगा” समझा जाना चानहए और नबना नकसी अपवाद क े अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् अनर्कारी को, इस ननयम की र्ावना क े अनुरूप, नविेष पेंिन लार् प्रदान करने क े नलए सक्षम प्रानर्कारी पर इसे अननवायम बनाना चानहए। ऐसा करते समय, हम नवर्ायी मंिा की अपनी र्ारर्ा को नहीं बदल रहे हैं, बक्तल्क, हम क े वल क े हर तसंह एवं अन्य बनाम राज्य (तदल्ली प्रशासन) में नसद्धांत क े अनुरूप, नवर्ानयका क े इरादे को आगे बढाने क े नलए दो अलग-अलग अनर्प्राय क े बीच चयन करने की िक्तक्त का प्रयोग कर रहे हैं।
80. क्ा ननयम 135 क े तहत अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् नकए जाने वाले अनर्काररयों को उक्त ननयमों की प्रनत अवश्य दी जानी चानहए, इस पहलू पर हमारी सुनवचाररत राय है नक नजन अनर्काररयों की सेवा ननयम 135 क े तहत समाप्त की जा रही है, उन्हें कम से कम अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि क े साथ प्रासंनगक लागू ननयमों का ननचोड़ प्रदान नकया जाना चानहए तानक संबंनर्त कममचारी कानून क े अनुसार दावा करने क े नलए लागू ननयम क े तहत पात्रता और लार्ों क े बारे में जान सक े । फौजदारी अपील सं 413/2020 @ तव.अनु.या.(फ़ौ) सं.10668/2015
81. अनुमनत प्रदाननत|
82. इस अपील द्वारा अपीलाथी ने 2015 क े फौ.नव.मु. 4497 में उच्च न्यायालय द्वारा नदनांक 2.11. 2015 को पाररत अंनतम ननर्मय और आदेि का नवरोर् नकया है, नजसक े द्वारा दंड प्रनक्रया संनहता, 1973 (संक्षेप में सीआरपीसी), की र्ारा 197 क े तहत मंजूरी क े अर्ाव में प्रत्यथीगर् को आरोपी क े रूप में बुलाने से इंकार करने वाले सीआर सं 18/2015 में अनतररक्त सत्र न्यायार्ीि, पनियाला हाउस न्यायालय, नई नदल्ली द्वारा नदनांक 10.9.2015 को पाररत आदेि और सीसी सं. 475/13 में महानगर दंडानर्कारी, पनियाला हाउस न्यायालय, नई नदल्ली द्वारा नदनांक 28.4.2015 को पाररत आदेि को उच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया। हमारे सामने नवचार क े नलए संनक्षप्त सवाल यह है नक क्ा दंड प्रनक्रया संनहता की र्ारा 197 क े तहत पूवम मंजूरी क े नबना प्रत्यथीगर् को सम्मन जारी करने से इन्कार करना न्यायसंगत और उनचत है।
83. अपीलाथी ने आरोप लगाया है नक प्रत्यथीगर् द्वारा उसकी मनोवैज्ञाननक मनःक्तथथनत पर निप्पर्ी दजम करना मनगढंत था और सनमनत क े सदस्यों क े रूप में उनक े आनर्काररक कतमव्यों क े दायरे में नहींथा, तानक उन्हें दंड प्रनक्रया संनहता की र्ारा 197 क े तहत सुरक्षा प्रदान की जा सक े । यह र्ी आरोप लगाया गया नक सुश्री राठी नवनय झा की अध्यक्षता में एक अन्य सनमनत का गठन इस बात का सबूत है नक प्रत्यथीगर् द्वारा गनठत पहली सनमनत क े पास कानूनी अनर्कार नहीं था और इस प्रकार, यह नहीं कहा जा सकता नक ऐसी सनमनत क े सदस्यों ने अपने आनर्काररक कतमव्यों क े दायरे में काम नकया है। इस बात पर र्ी जोर नदया गया नक चूाँनक इसे सी. सी. एस. (आचरर्) ननयम, 1964 (संक्षेप में, आचार ननयम") क े ननयम 19 और तवनीि नारायण एवं अन्य बनाम भारि संघ एवं एक अन्य क े नसद्धांत क े आर्ार पर मंज़ूरी क े प्रस्ताव को तीन मास क े र्ीतर अस्वीकार नहीं नकया गया इसनलए इसे मंज़ूर समझा गया| अपीलाथी ने अपनी निकायत में, र्ारतीय दंड संनहता, 1860 की र्ारा 167 (संक्षेप में "आईपीसी") क े तहत ननजी प्राइवेि प्रत्यथीगर् क े क्तखलाफ अपीलाथी की यौन उत्पीड़न की निकायत की जांच क े नलए गनठत सनमनत की ररपोिम क े साथ छे ड़-छड क े ज़ररये अपरार् करने का आरोप लगाया था। नवचारर् न्यायालय ने दंड संनहता प्रनक्रया की र्ारा 197 क े तहत मंजूरी क े अर्ाव क े कारर् ननजी प्रत्यथीगर् को सम्मन जारी करने से इन्कार कर नदया और उच्च न्यायालय ने नवचारर् न्यायालय क े आदेि को बरकरार रखा।
84. प्रनतनवरोर् क े गुर् में जाने से पहले, हम समझते हैं नक नवर्ाग ने नदनांक 10.2.2012 क े एक नवस्तृत आदेि क े ज़ररये मंजूरी क े नलए अपीलाथी क े अनुरोर् पर पहले ही फ ै सला सुनाया था । उस आदेि को प्रत्यथी द्वारा अनर्लेख पर लाया गया है और हम इसक े प्रासंनगक ननचोड़ को पुन: प्रस्तुत करने क े नलए आवश्यक मानते हैं, जो इस प्रकार है: "13. यहााँ तक नक सनमनत क े सदस्य श्रीमती िनि प्रर्ा और श्रीमती अंजनल पांडे क े नवरुद्ध उनक े द्वारा ननष्कषम क े क्र.सं. 3 पर दजम ननष्कषम क े संबंर् में आरोप लगाये हैं जो ननम्नानुसार है: “3. सुश्री र्ानिया की जान लेने की र्मकी, दू सरे लोगों से उन्हें खतरे का आरोप और बाद क े अवसरों पर उसका व्यवहार (संलग्नक-ग) अिांत मनोक्तथथनत को इंनगत करता है। ऐसे में परामिम से उन्हें फायदा हो सकता है|”
14. जबनक, जानहर है, यह निपण्णी सनमनत द्वारा इस तथ्य क े मद्देनजर की गई थी नक प्राथी सुश्री ननिा नप्रया र्ानिया ने अपनी जान लेने की र्मकी दी थी। यह इस पृष्ठर्ूनम में था, नक सनमनत क े सर्ी सात सदस्यों ने सवमसम्मनत से निपण्णी की थी नक उसका व्यवहार अिांत मनोक्तथथनत को दिामता है और इस तरह क े परामिम से उन्हें लार् हो सकता है। इसनलए, श्रीमती िनि प्रर्ा और श्रीमती अंजनल पांडे नजन्होनें सनमनत क े पांच अन्य हस्ताक्षरकताम सदस्यों क े साथ 19 मई, 2008 की ररपोिम पर हस्ताक्षर नकए थे को नकसी र्ी तरह की दुर्ामवना का नज़म्मेदार नहीं माना जा सकता। । इसक े मद्देनजर श्रीमती िनि प्रर्ा और श्रीमती अंजनल पांडे क े नवरुद्ध र्ारतीय दंड संनहता की र्ारा 167 या र्ारा 44 क े तहत कोई मामला नहींबनता। xxxxxx xxxxxx xxxxxx
19. अब, प्रासंनगक ररकॉडम, नदनांक 10.02.2010 की निकायत क े अवलोकन और दंड प्रनक्रया संनहता की र्ारा 200 तथा र्ारतीय दंड संनहता की र्ारा 167 एवं 44 क े तहत मुख्य महानगर दंडानर्कारी, नजला न्यायालय, द्वारका की अदालत में दायर संलग्नक क े साथ साथ अपरानर्क निकायत की पूरी तरह से जााँच करने क े बाद सक्षम प्रानर्कारी इस बात से संतुष्ट् है नक सुश्री ननिा नप्रया र्ानिया क े अनुरोर् अनुसार र्ारतीय दंड संनहता की र्ारा 167 एवं 44 क े तहत श्रीमती िनि प्रर्ा, संयुक्त सनचव तथा श्रीमती अंजनल पाण्डेय, ननदेिक (वतममान संयुक्त सनचव) पर मुक़दमा चलाने क े नलए दंड संनहता प्रनक्रया की र्ारा 197 क े तहत अनुमनत देने का कोई मामला नहीं बनता| इसनलए, नदनांक 10.02.2010 की अपनी निकायत में सुश्री ननिा नप्रया र्ानिया द्वारा की गई दरखास्त को नामंजूर नकया जाता है|”
85. र्ारा 197 क े तहत मंजूरी देने क े बारे में कानून का दृनष्ट्कोर् अच्छी तरह से तय है। अपने आनर्काररक कतमव्यों क े दौरान उनक े द्वारा नकए गए क ृ त्यों क े क्तखलाफ मूखमतापूर्म निकायतों से लोक सेवकों की रक्षा क े नलए इस प्रावर्ान को बनाया गया है। लोक सेवकों क े क्तखलाफ संज्ञान लेने क े नलए दंड संनहता प्रनक्रया की र्ारा 197 क े तहत मंज़ूरी कानून में आवश्यक है। नफर र्ी, हम मंजूरी क े सवाल क े गुर् पर ध्यान नहीं देना चाहते हैं क्ोंनक अपीलाथी ने ननजी प्रत्यथीगर् क े क्तखलाफ मंजूरी देने से इन्कार करने वाले नदनांक 10.2.2012 क े आदेि का नवरोर् नहीं नकया है और नकसी र्ी चुनौती क े अर्ाव में यह कानून क े अनुसार काम करता रहता है|
86. इसक े अनतररक्त, अपीलाथी ने प्रनतनवरोर् नकया है नक नदनांक 19.8.2008 क े प्रेस नोि को रद्द करने वाले 2012 की ररि यानचका (फौजदारी) सं. 24 में इस न्यायालय का 15.12.2014 का आदेि प्रत्यथीगर् क े क्तखलाफ उसक े आरोप को मज़बूत बनता है| नदनांक 10.2.2012 का आदेि लागू रहने तक इस ननवेदन को आगे नहीं बढाया जा सकता।
87. इसी तरह, पुतलस तनरीक्षक एवं एक अन्य बनाम बट्टेनपिला वेंकि रत्नम एवं एक अन्य में यह व्याख्या नक र्ारतीय दंड संनहता की र्ारा 167 क े तहत आरोपों से जुड़े मामलों में कोई मंजूरी आवश्यक नहीं है, इसका कोई लार् नहीं होगा क्ोंनक अपीलाथी ने ननजी प्रत्यथीगर् क े क्तखलाफ मंज़ूरी देने से इंकार करने वाले सक्षम प्रानर्कारी क े नदनांक 10.2.2012 क े ननर्मय को अनुमनत दी है| इसनलए, हमें इस अपील में बताये गए आर्ार पर और बात करने की ज़रुरत नहीं है| इस प्रकार. यह अपील ख़ाररज की जाती है| 2012 की ररि यातिका (फौजदारी) सं. 24
88. इस ररि यानचका में, यानचकाकताम संनवर्ान क े अनुच्छे द 32 क े तहत इस न्यायालय की अनर्काररता को लागू करने की मांग की है और तवशाखा (उपरोक्त) में इस न्यायालय द्वारा ननर्ामररत नदिाननदेिों क े अनुरूप सीसीएस (सीसीए) ननयमों में आवश्यक संिोर्न करने क े नलए प्रत्यथीगर् को उनचत ननदेि जारी करने का अनुरोर् नकया है| मुख्यतः यानचकाकताम का प्रयास यौन उत्पीड़न की निकायतों से संबंनर्त सीसीएस (सीसीए) ननयमों में ननर्ामररत प्रनक्रया को जांच क े नलए रखना है।
89. यानचकाकताम ने प्रनतनवरोर् नकया है नक ये ननयम यौन उत्पीडन की पीनडता को उसकी निकायत की जांच क े दौरान पयामप्त र्ागीदारी प्रदान नहीं करते हैं। यह र्ी कहा गया है नक आरोनपत अनर्कारी क े पास जांच प्रनक्रया में र्ागीदारी क े व्यापक अनर्कार हैं| जबनक पीनड़त/निकायतकताम क े पास ऐसे समान अनर्कार नहीं हैं। यह जोर नदया गया है नक ये ननयम निकायत सनमनत को उसक े दस्तावेजों. उसक े गवाहों या सनमनत की संरचना क े क्तखलाफ उसकी आपनर्त्यों को ध्यान में रखने क े नलए बाध्य नहीं करते हैं, नजससे अनुनचतता और प्राक ृ नतक न्याय का वंचन होता है।
90. यानचकाकताम द्वारा आगे कहा गया है नक इन ननयमों में पीनड़ता/निकायतकताम को निकायत सनमनत की ररपोिम उपलब्ध कराने का प्रावर्ान नहींहै और नदनांक 2.8.2016 का कायामलय ज्ञापन र्ी इस कमी को सुर्ारने में असमथम हैं क्ोंनक यह क े वल तर्ी लागू होता है जब निकायत सनमनत आरोनपत अनर्कारी क े क्तखलाफ नकसी र्ी कारमवाई की नसफाररि नहीं करती है, नजससे उन क्तथथनतयों को छोड़ नदया जाता है नजनमें कारमवाई की नसफाररि की गई है और अपयामप्त पाई गई है। इसक े अलावा, यह र्ी कहा गया है नक नदनांक 2.8.2016 क े कायामलय ज्ञापन क े अनुसार, अनुिासनात्मक प्रानर्करी क े समक्ष रखे जाने क े बाद ही पीनड़त/निकायतकताम को ऐसी ररपोिम दी जा सकती है और प्रानर्कारी नकसी र्ी कारमवाई की नसफाररि नहीं करने क े ननर्मय पर पहुंच गया हो। यानचकाकताम द्वारा की गई नवनिष्ट् प्राथमना इस प्रकार है: “1. क ें द्रीय लोक सेवा (वगीकरर्, ननयंत्रर् और अपील) (CCS (CCA) ननयम, 1965 में संिोर्न करने क े नलए प्रत्यथी सं. 1 को ननदेि देने वाला ररि या कोई अन्य आदेि जारी नकया जाये, नजसक े तहत क ें द्र सरकार क े कममचाररयों क े क्तखलाफ जााँच की जाती है तानक उसकी निकायत पर िुरू की गई जांच की प्रनक्रया में यौन उत्पीड़न की पीनडता को इस माननीय न्यायालय क े नविाखा नदिाननदेि, 1997 का अनुपालन करते हुए उसका उसे उनचत प्रनतनननर्त्व नदया जा सक े ”
91. दू सरी ओर, प्रत्यथीगर् ने प्रस्तुत नकया है नक नदनांक 16.07.2015 क े कायामलय ज्ञापन क े प्रावर्ान में स्पष्ट् रूप से निकायत सनमनत द्वारा पालन की जाने वाली प्रनक्रया को ननर्ामररत नकया गया है और पीनड़त/ निकायतकताम प्रनक्रया में पयामप्त रूप से िानमल है। इसक े अलावा, निकायत सनमनत को जांच प्रानर्कारी का दजाम नदया गया है और CCS (CCA) ननयमों क े ननयम 14 क े अनुसार यह प्रनक्रया संचानलत होती है । इसक े अलावा, यह प्रस्तुत नकया गया है नक नदनांक 16.07.2015 का कायामलय ज्ञापन अपने पैरा 10 क े द्वारा निकायत सनमनत की संरचना क े संबंर् में पक्षपात की आिंका को नसद्ध करता है, जो इस प्रकार है: “10. उक्त ननयम 14(2) क े अनुसार चूाँनक निकायत सनमनत जााँच प्रानर्कारी क े रूप में र्ी कायम करती है इसनलए इस बात का ध्यान रखा जाना चानहए नक जााँच क े समय वह ननष्पक्षता बरकरार रहे | इस नबंदु पर कोई र्ी नवफलता जांच करते समय पक्षपात क े आरोपों को आमंनत्रत कर सकती है और जांच दू नषत करती है । ननदेिों क े अनुसार, जब जााँच प्रानर्कारी क े क्तखलाफ पक्षपात क े आरोप प्राप्त होते हैं, तो इस तरह क े जााँच प्रानर्कारी को तब तक जांच पर रोक लगाने की आवश्यकता होती है जब तक नक अनुिासन प्रानर्कारी पक्षपात क े आरोपों पर ननर्मय नहीं लेता। इसक े अनतररक्त, यनद इस आर्ार पर सनमनत क े नकसी सदस्य क े नवरुद्ध पक्षपात क े आरोप थथानपत हो जाते हैं तो उस सनमनत को जांच करने की अनुमनत नहींदी जा सकती”
92. यानचकाकताम को निकायत सनमनत की ररपोिम की आपूनतम क े संबंर् में, प्रत्यथीगर् ने कहा नक नदनांक 02.08.2016 क े कायामलय ज्ञापन क े अनुसार, जब निकायत सनमनत ने आरोनपत अनर्कारी क े क्तखलाफ नकसी र्ी कारमवाई की नसफाररि नहीं की है, अनुिासन प्रानर्कारी निकायत सनमनत की ररपोिम की एक प्रनत पीनड़त/ निकायतकताम को उपलब्ध कराएगी और अंनतम ननष्कषम पर पहुाँचने से पहले उसक े अभ्यावेदन पर नवचार करेगी। गौरतलब है नक, यह ननवेदन यानचकाकताम द्वारा उठाए गए प्रनतनवरोर् क े अनुरूप है और इस प्रकार की जांच करने की आवश्यकता है।
93. कायमथथल पर यौन उत्पीड़न की निकायतों से ननपिने क े नलए अपनाई गई जांच प्रनक्रया को कानून में एक पनवत्र दृनष्ट्कोर् माना गया है और नकसी र्ी बहाने से कमजोर नहीं नकया जा सकता है। इस न्यायालय ने, बहुत सारे फ ै सले में, यह स्पष्ट् नकया है नक ननष्पक्षता और तक म िीलता नवनर् द्वारा थथानपत नकसी र्ी प्रनक्रया क े अनर्न्न अंग हैं। लेनकन, वतममान मामले में, हम यह निपण्णी करने क े इच्छु क हैं नक यानचकाकताम द्वारा मांगी गई राहत मूखमतापूर्म है।
94. यानचकाकताम ने क ु छ नबन्दुओं पर CCS (CCA) ननयमों में पररवर्मन करने क े नलए प्रत्यथीगर् (कानममक एवं प्रनिक्षर् नवर्ाग) को ननदेि जारी करने का आह्वान नकया है। सही कहा जाए तो नवनर्/ननयम बनाने वाले अनर्काररयों क े सम्बन्ध में इस न्यायालय द्वारा प्रयोग की जाने वाली िक्तक्तयों की रूपरेखा की बाबत नवनर् पूर्मरूप से थथानपत है और न्यानयक संयम (अंक ु ि) तथा िक्तक्तयों क े पृथक्करर् क े नसद्धांतों पर आर्ाररत है। दू सरे िब्ों में, न्यायालय को नकसी नविेष ननयम बनाने क े नलए नवनर्/ननयम बनाने वाले ननकायों को ननदेि जारी करने क े नलए अननच्छु क होना चानहए और खासतौर पर उस समय जब ननयमों की कनथत खानमयां वतममान नवषय-वस्तु का नहस्सा र्ी न हों| संभागीय प्रबंिक, अरावली ग ल्फ क्लब एवं एक अन्य बनाम िंदर हास एवं एक अन्य में, मोनिेथक्ू क े द क्तस्पररि ऑफ लॉज पर र्रोषा करते हुए इस न्यायालय ने न्यानयक िक्तक्तयों क े ननचोड़ की व्याख्या करते हुए इस प्रकार निपण्णी की है:- “21 (अपनी पुस्तक 'द क्तस्पररि ऑफ लॉज’ में) फ्ांस क े नवचारक मोनिेथक्ू द्वारा पहली बार सुझाया गया िक्तक्तयों क े पृथक्करर् का नसद्धांत मोिे तौर पर र्ारत क े सन्दर्म में र्ी है। अपनी पुस्तक “द क्तस्पररि ऑफ लॉज” क े अध्याय XI में मोनिेथक्ू नलखते हैं: “जब नवर्ानयका और कायमपानलका की िक्तक्तयां एक ही व्यक्तक्त अथवा दंडानर्काररयों क े एक ही ननकाय क े पास आ जाती है तो कोई स्वतंत्रता नहीं हो सकती है, क्ोंनक आिंकाएं उत्पन्न हो सकती हैं, ऐसा न हो नक वही राजा अथवा सेनेि दमनकारी नवनर् को ननरंक ु ि रीनत से ननष्पानदत करने क े नलए लागू करे|” “तफर, क ई स्विंत्रिा नहीं रह जािी, अगर न्यातयक शक्ति क तविायी और कायणकारी से अलग नहीं तकया जाए। अगर यह तविातयका (शक्तिय ं) क े सार्थ शातमल ह जाय ि ल ग ंक े जीवन और स्विंत्रिा में एकपक्षीय तनयंत्रण आ जायेगा; क् ंतक न्यायािीश िब तविायक ह गा। अगर यह कायणपातलका क े शक्तिय ं में शातमल ह जाय ि न्यायािीश तहंसा और उत्पीड़न क े सार्थ व्यवहार कर सकिा है। यतद एक ही आदमी या एक ही तनकाय, िाहे वह क ु लीन ह या ल ग ं का, उन िीन शक्तिय ं अर्थाणि कानून ं क लागू करने, सावणजातनक प्रस्ताव ं क तनष्पातदि करने और व्यक्तिय ं क े मुकद्दम ं का तविारण करने क े तलए प्रय ग करे ि सब क ु छ समाप्त ह जाएगा|” (जोर नदया गया ) स शल एक्शन फ रम फॉर मानव अतिकार एवं एक अन्य बनाम भारि संघ, तवति एवं न्याय मंत्रालय एवं अन्य में, इस न्यायालय ने पुनः इसी पहलू की छानबीन करते हुए ननम्नानुसार निपण्णी की है:- "40. हम इससे पहले र्ी कह चुक े हैं नक राजेि िमाम बनाम उर्त्र प्रदेि राज्य, (2018)10 एससीसी 472 में जारी नकये गए क ु छ ननदेि नवर्ायी क्षेत्र में प्रवेि करने की सामथ्यम रखते हैं | सुरेि सेठ बनाम इंदौर नगर ननगम (2005)13 एससीसी 287 में तीन न्यायार्ीिों की एक पीठ ने इस प्रकार ननर्मय नदया (सुरेि सेठ मामला, एससीसी पीपी 288-89, पैरा 5)
5. हमारी राय में यह तय करना जनता क े चुने हुए प्रनतनननर्यों का नीनतगत मामला है और इस संबंर् में इस न्यायालय द्वारा कोई र्ी ननदेि नहीं जारी नकया जा सकता है। इसक े अलावा यह न्यायालय नवर्ानयका को नकसी नविेष प्रकार का कानून बनाने क े नलए कोई ननदेि जारी नहीं कर सकता है। हमारी संवैर्ाननक व्यवथथा क े तहत संसद और नवर्ान सर्ाएं कानून बनाने क े नलए संप्रर्ु िक्तक्त का प्रयोग करते हैं और कोई र्ी बाहरी िक्तक्त अथवा प्रानर्कारी कोई नविेष कानून बनाने क े नलए ननदेि जारी नहीं कर सकते| सवोच्च न्यायालय कममचारी कल्ार् एसोनसएिन बनाम र्ारत संघ, (1989)4 एससीसी 187 में यह माना गया है नक कोई र्ी अदालत नकसी नवर्ानयका को नकसी नविेष कानून को बनाने का ननदेि नहीं दे सकती। इस प्रकार, जब कायमपानलका से संबंनर्त कोई प्रानर्कारी नवर्ानयका की अनर्क ृ त प्रानर्कारी क े अनुक ू ल एक अर्ीनथथ कानून क े माध्यम से नवर्ायी िक्तक्त का प्रयोग करता है, तो ऐसे कायमपानलका से सम्बंनर्त प्रानर्कारी को कोई कानून बनाने क े नलए नहीं कहा जा सकता नजसे अनर्क ृ त नवर्ायी प्रानर्कारी क े तहत इसे करने का अनर्कार प्राप्त है।.....”
95. नफर र्ी, हमारी राय में, यानचकाकताम ने दो अलग-अलग व्यवथथा क े तहत की गई दो अलग जााँच को एक संयुक्त प्रनक्रया क े रूप में भ्रनमत नकया है। कायमथथल पर यौन उत्पीड़न की निकायतों से ननपिने क े नलए कानूनी व्यवथथा को कायमथथल पर मनहलाओं क े यौन उत्पीड़न अनर्ननयम, 2013 (इसक े बाद 2013 अनर्ननयम) और उसक े तहत बनाए गए ननयमों द्वारा अच्छी तरह से नचनत्रत नकया गया है। 2013 क े अनर्ननयम क े तहत ननर्ामररत प्रनक्रया और कायमथथल पर मनहलाओं क े यौन उत्पीड़न (रोकथाम, ननषेर् और ननवारर्) ननयम, 2013 (संक्षेप में, 2013 ननयम), या तो निकायत या जााँच क े मामलों में कोई प्रथथान नहीं हो सकता। ऐसी प्रनक्रया की पनवत्रता नननवमवाद है। 2013 अनर्ननयम क े तहत जांच तथ्य खोज करने वाली एक अलग जांच है। 2013 अनर्ननयम क े तहत तथ्य-खोज जांच क े पिात्, प्रासंनगक नवर्ागीय ननयमों (वतममान मामले में CCS (CCA) ननयमों) क े तहत नवर्ागीय जााँच हेतु मामला नवर्ाग क े पास जाता है और उसक े बाद कारमवाई होती है| उक्त नवर्ागीय जााँच एक ऐसी आंतररक व्यवथथा है नजसमें प्रनतर्ानगयों पर रोक होती है और सुने जाने क े अनर्कार का मुद्दा सख्त एवं सिीक हैं| प्रनक्रया की गोपनीयता का उनचत ध्यान रखते हुए, इस तरह की जांच का दायरा दोषी कममचारी और संबंनर्त नवर्ाग क े बीच सीनमत है। दोनों जााँच को एक-दू सरे क े साथ नमलाया नहीं जा सकता और दोनों क े नलए समान प्रनक्रयात्मक मानकों को ननर्ामररत नहीं नकया जा सकता। नवर्ागीय जााँच, अनर्योजन, दंड, कायमवाही, जांच ररपोिम पर कारमवाई, अपील आनद क े मामलों में सरकारी सेवकों क े आचरर् क े संबंर् में, CCS (CCA) ननयम नकसी र्ी नवर्ागीय कारमवाई क े नलए एक स्व-नननहत संनहता क े रूप में काम करते हैं और जब तक नक मौजूदा ननयम को स्वीकायम आर्ार पर इस न्यायालय क े समक्ष चुनौती नहीं दी जाती, हम न्यायालय क े नकए इसका नवस्तार करना अनावश्यक समझते हैं।
96. कायामलय ज्ञापन क े रूप में प्रत्यथी द्वारा जारी अनर्सूचनाओं का स्वरूप नवर्ागीय ननदेिों का है और इसका उद्देश्य 2013 क े अनर्ननयम और उसक े अंतगमत बनाये गए ननयमों की कमी पूरी करता है । इस तरह की अनर्सूचनाएं, 2013 क े अनर्ननयम क े नवपरीत संचानलत नहीं होतीं. बक्तल्क वे उसे आगे बढने का काम करती हैं। उदाहरर् क े नलए, नदनांक 02.08.2016 का कायामलय ज्ञापन ननम्न प्रकार है:- "3. एसएचडब्ल्यूडब्ल्यू (पीपीआर) अनर्ननयम, 2013 की र्ारा 18 (1) क े अनुसार, यह तय नकया गया है नक यौन उत्पीड़न क े आरोप क े सर्ी मामलों में, ननम्ननलक्तखत प्रनक्रया अपनाई जा सकती है...”
97. पूवोक्त कायामलय ज्ञापन क े अवलोकन मात्र से यह स्पष्ट् हो जाता है नक उक्त अनर्सूचना 2013 क े अनर्ननयम क े तहत ननर्ामररत प्रनक्रया को आगे बढाती है और नकसी र्ी तरीक े से, उसक े ताक़त को कम नहीं करती है। यह यानचकाकताम का तक म नहीं है नक 2013 का अनर्ननयम स्वयं प्रनक्रयात्मक कनमयों से िस्त है। इसक े अलावा, यनद वतममान प्रनक्रयात्मक व्यवथथा हमारे संवैर्ाननक न्यायिास्त्र में पररकक्तल्पत न्यायसंगत, ननष्पक्ष और उनचत प्रनक्रयात्मक मानकों की कमी है, तो न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप आवश्यक है। गौरतलब है नक इस मामले में तथ्यात्मक पैमाना 2013 क े अनर्ननयम से पहले क े युग से संबंनर्त है और पूरी तरह से तवशाखा (उपरोक्त) में इस न्यायालय द्वारा जारी नदिाननदेिों द्वारा ननयंनत्रत था। इसे अलग ढंग से यूाँ कहा जा सकता है नक इस यानचका में यानचकाकताम द्वारा उठाए गए नवषय वस्तु या मुद्दों का वतममान मामले पर कोई प्रर्ाव नहीं पड़ता। इसनलए, यानचकाकताम की ओर से नवचारार्ीन तक म की पड़ताल काल्पननक या व्यथम सैद्धांनतक अभ्यास क े अलावा और क ु छ नहींहोगी।
98. उपरोक्त क े अलोक में, हम मानते हैं नक इस ररि यानचका में दावा की गई राहत में कोई दम नहींहै| जीवन क े अतिकार क े उल्लंघन हेिु संवैिातनक मुआवजा
99. अब हम मामले क े तथ्यात्मक पैमाने क े आलोक में यानचकाकताम क े मौनलक अनर्कारों क े उल्लंघन क े नलए मुआवजे क े अनुदान की प्राथमना पर नवचार करेंगे। वास्तव में, दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुनतयों क े दौरान नवनर्न्न आरोप और प्रत्यारोप लगाये गए हैं| लेनकन हम इस प्राथमना पर नवचार क े नलए थथानपत तथ्यों तक खुद को सीनमत रखेंगे। ननसंदेह यानचकाकताम ने 7.8.2007 को यौन उत्पीड़न की निकायत दजम की। सुश्री िनि प्रर्ा की अध्यक्षता वाली सनमनत को निकायत की जांच सौंपने क े बाद, सनमनत को आरोनपत अनर्काररयों में से एक क े नवरुद्ध जााँच करने क े नलए अक्षम पाया गया और उस अनर्कारी क े नवरुद्ध जांच अंततः सुश्री राठी नवनय झा की अध्यक्षता वाली सनमनत को सौंपी गई| गौरतलब है नक 19.8.2008 को प्रर्ान मंत्री कायामलय में हुई घिना और उसकी व्यापक मीनडया कवरेज क े बाद ही ऐसा नकया गया। इसक े अलावा, अगस्त 2007 में की गई निकायत को तीन महीने से अनर्क की देरी से पहले यौन उत्पीड़न सनमनत को हस्तानांतररत नहीं नकया गया। प्रत्यथीगर् की नढलाई क े संबंर् में 26.10.2007 को पीएमओ को नलक्तखत निकायत क े बाद नदसंबर, 2007 में हस्तानांतररत नकया गया। नवर्ागीय सनमनत क े अनुनचत गठन से यह देरी उजागर हो गई। इस संबंर् में, सुश्री राठी नवनय झा सनमनत द्वारा प्रस्तुत जांच ररपोिम में इस प्रकार निपण्णी की गई: “(iii) नविाखा नदिाननदेिों क े अनुसार यौन उत्पीड़न से संबंनर्त नवर्ागीय सनमनत र्ी ठीक से गनठत नहीं की गई| इस आवश्यकता क े अनुसार, निकायत सनमनत में "तीसरे पक्ष को एक गैर सरकारी संगठन या अन्य ननकाय क े प्रनतनननर् क े रूप में होना चानहए था जो यौन उत्पीड़न क े मुद्दे से पररनचत हो"। जबनक यौन उत्पीड़न से संबंनर्त सनमनत का पुनगमठन 1.11.2007 को नकया गया था। राष्ट्र ीय सुरक्षा पररषद सनचवालय की ननदेिक सुश्री तारा करथा को अप्रैल 2008 में ही इस सनमनत क े सदस्य क े रूप में ननयुक्त नकया गया था। यह स्पष्ट् नहींहै नक सुश्री तारा करथा एक गैर सरकारी संगठन या यौन उत्पीड़न क े मुद्दे से पररनचत व्यक्तक्त का प्रनतनननर्त्व करने क े नलए नकस तरह से योग्य है। अतः इस नहसाब से र्ी, यह नविाखा नदिाननदेिों क े अनुसार गनठत सनमनत नहींथी|”
100. यौन उत्पीड़न की निकायत का अनुनचत ननपिान र्ी जांच ररपोिम क े बाद क े ननष्कषों में प्रकि होता है नजसे इस प्रकार पेि नकया जाता है: "मई 2008 में पेि की गई यौन उत्पीडन संबंर्ी नवर्ागीय सनमनत की ररपोिम की पड़ताल ने थथानपत नकया नक सुश्री ननिां नप्रया र्ानिया की निकायत का समय पर ध्यान या उनचत जांच और ननवारर् नहीं नकया गया। िाइल पर श्री अिोक चतुवेदी की नलक्तखत निप्पनर्यां निकायत पर तत्काल ध्यान सुनननित करने क े नलए उनकी नचंता या सम्मान क े अर्ाव को दिामती हैं। यह नविाखा नदिाननदेिों की आवश्यकताओं क े संबंर् में श्री अिोक चतुवेदी क े ज्ञान की कमी को र्ी दिामती है। इसक े अलावा, यौन उत्पीड़न सन्बन्धी नवर्ागीय सनमनत को निकायत हस्तानांतररत नकये जाने क े बावजूद, सनचव (आर) ने नविाखा नदिाननदेिों क े अनुसार सनमनत क े गठन पर ध्यान नहीं नदया। अतः यह कायम नविाखा मागमननदेिों का घोर उल्लंघन था”
101. इसनलए, इस पर नववाद नहीं है नक यौन उत्पीड़न क े संबंर् में यानचकाकताम की निकायतें नवर्ाग में अपने वररष्ठों की कायमनवनर् संबंर्ी अज्ञानता और ढीले रवैये को दिामने वाली घिनाओं का निकार हो गईं। हम यह र्ी उल्लेख करते हैं नक नदनांक 19.8.2008 क े प्रेस नोि क े संबंर् में इस न्यायालय ने उनकी मनोवैज्ञाननक क्तथथनत पर अनुनचत हमलों पर कड़ी आपनर्त् जताई थी और यानचकाकताम की गररमा, प्रनतष्ठा और नननजता का उल्लंघन करने क े नलए नदनांक 15.12.2014 क े आदेि क े ज़ररए इस नोि को पूर्म रूप से रद्द कर नदया था। मौनलक अनर्कारों क े उल्लंघन क े संबंर् में इस तरह क े सारगनर्मत ननष्कषम क े बावजूद, यानचकाकताम को मुआवजे की कोई राहत नहींदी गई और संर्वतः उस समय उसक े द्वारा इसे पाने नक कोनिि र्ी नहींगई।
102. 2013 अनर्ननयम की व्यवथथा, नविाखा नदिाननदेि और मनहलाओं क े क्तखलाफ र्ेदर्ाव क े सर्ी रूपों क े उन्मूलन पर कन्वेंिन (CEDAW) क े अनुसार गैर ित्रुतापूर्म कायम वातावरर् गररमामय रोजगार का मूल अंग है। कायमथथल पर यौन उत्पीड़न क े मामलों क े संबंर् में कानून का दृनष्ट्कोर् उत्पीड़न क े वास्तनवक क ृ त्यों क े मामलों तक ही सीनमत नहीं है लेनकन उन क्तथथनतयों को र्ी िानमल नकया गया है, नजनमें मनहला कममचारी को कायमथथल पर प्रनत-नदन क े कामकाज में पक्षपात, ित्रुता, र्ेदर्ावपूर्म रवैया और अपमान का ननिाना बनाया जाता है। कोई र्ी अन्य दृनष्ट्कोर् अपनाने से कानून का उद्देश्य ननष्फल हो जायेगा| संर्वतः जब कानूनी मिीनरी िुरू करने क े प्रयास क े जवाब में लापरवाही या िालमिोल (जानबूझकर या अन्यथा) नकया जाता है तो न क े वल कानून की सहायता की व्यक्तक्तगत गुहार बक्तल्क कानून क े िासन द्वारा संचानलत समाज क े मूलर्ूत नसद्धांत र्ी खतरे में पड़ जाते हैं नजससे व्यापक जननहत को खतरा पैदा होता है| समय पर और सक्षम मंच द्वारा जांच से इन्कार, अननवायम रूप से न्याय से वंनचत करने और मौनलक अनर्कार क े उल्लंघन क े तौर पर सामने आता है| वतममान मामले का तथ्यात्मक पैमाना यौन उत्पीडन क े संबंर् में सनचव (आर) की संवेदनिीलता क े अर्ाव से पररपूर्म है| अथामत उक्त निकायत पर कारमवाई करने में लगने वाला समय और नविाखा नदिाननदेिों क े उल्लंघन में पहली निकायत सनमनत (इरादतन या गर-इरादतन) का अनुनचत गठन, अर्द्र व्यवहार और यानचकाकताम क े मौनलक अनर्कारों का उल्लंघन और नविेष रूप से संनवर्ान क े अनुच्छे द 14 और 21 क े उल्लंघन को र्यावह रूप से जन्म देता है|
103. इस अदालत ने समय क े साथ, अन्य राहत क े अलावा मौनद्रक नलहाज़ से मुआवजे प्रदान करक े जीवन क े अनर्कार क े गंर्ीर उल्लंघन को सुर्ारने की न्यानयक नीनत नवकनसत की है। एस नंबी नारायणन बनाम तसबी मैथ्यू और अन्य में इस न्यायालय ने जीवन क े अनर्कार क े उल्लंघन क े नलए मुआवजा हेतु सावमजननक कानून क े उपाय को लागू करने क े नलए अपनी िक्तक्त का यह निपण्णी करते हुए प्रयोग नकया नक जीवन खुद आत्मसम्मान की मांग करता है| इसने ननम्न प्रकार निपण्णी की:- “40.... व्यक्तक्त की गररमा को उस समय झिका लगता है जब उसक े साथ मनोनचनकत्सा संबंर्ी व्यवहार नकया जाता है। इंसान न्याय क े नलए उस समय गुहार लगता है जब उसे लगता है नक असंवेदनिील क ृ त्य ने उसक े आत्मसम्मान को सूली पर चढा नदया है। वह सावमजननक कानूनी उपाय क े तहत मुआवजे की मांग करता है|” नीलाभिी बेहरा (श्रीमिी) उफ ण लतलिा बेहरा (उच्चिम न्यायालय कानूनी सहायिा सतमति क े माध्यम से) बनाम उड़ीसा राज्य और अन्य तथा रुदुल साह बनाम तबहार राज्य एवं एक अन्य पर र्ी ध्यान नदया जाए|
104. वतममान मामले में, यानचकाकताम ने यौन उत्पीड़न की अपनी निकायत को अनुनचत तरीक े से ननपिाए जाने क े कारर् अत्यनर्क असंवेदनिील और अर्द्र पररक्तथथनतयों का सामना नकया था। उक्त निकायत की जााँच का पररर्ाम पर ध्यान नदए नबना, यानचकाकताम क े मौनलक अनर्कारों का स्पष्ट् रूप से हनन हुआ था। पररक्तथथनतयों को समि रूप से देखते हुए, हम इसे यानचकाकताम को उसक े जीवन और सम्मान क े अनर्कार क े उल्लंघन क े नलए 1,00,000/ रूपये का मुआवजा देने क े नलए एक उपयुक्त मामला मानते हैं। यनद नवनर्वत जााँच में यानचकाकताम की उक्त निकायत में यह आरोप का मामला होता (जो यानचकाकताम करने में नवफल रहा है) तब र्ी सबसे खराब और उसक े मौनलक अनर्कारों का उल्लंघन है जो उपयुक्त (उच्च) मुआवजा रानि की मांग करता है। बहरहाल, नकसी र्ी तरह, आज से छह सप्ताह क े र्ीतर उक्त ननर्ामररत मुआवजा रानि सीर्े यानचकाकताम को र्ुगतान की जाए या इस न्यायालय की रनजिरी में जमा की जाए| 2016 की ररि यातिका (फौजदारी) संख्या 1
105. यानचकाकताम ने उसक े यौन उत्पीडन, उसक े क्तखलाफ र्ा.दं.सं. क े तहत नकए गए नवनर्न्न अपरार् और संनवर्ान क े अनुच्छे द 14, 15, 21 और 22 क े तहत उसक े मौनलक अनर्कारों क े उल्लंघन क े नलए मुआवजे की रानि क े रूप में अपनी बेिी की उच्च निक्षा का र्ुगतान करने क े नलए उर्त्रदाताओं को यह ननदेि देने क े नलए परमादेि की ररि जारी करने की प्राथमना क े साथ यह ररि यानचका दायर की है| हमारे समक्ष यानचका की मुख्य प्राथमना इस प्रकार है: “परमादेि/या कोई अन्य उपयुक्त ररि / आदेि / ननदेि जारी नकए जाए नक प्रत्यथीगर् यानचकाकताम क े नदनांक 11.08.15 क े पत्र का जवाब दें और यानचकाकताम क े अत्यनर्क यौन उत्पीड़न तथा र्ारतीय दंड संनहता की र्ारा 499, 500, 503, 506, 186, 339 और 341 क े तहत उनक े अनर्काररयों द्वारा उनक े क्तखलाफ नकए गए दंडनीय अपरार्ों क े मुआवज़े क े रूप में यानचकाकताम की छोिी बेिी की उच्च निक्षा क े नलए र्ुगतान करें जैसा नक ररकॉडम पर नवनर्न्न अदालती आदेिों से सानबत होता है।”
106. यानचकाकताम अपने ननवेदन क े समथमन में नवनर्न्न मंचों क े समक्ष होने वाली कारमवाइयों को अनर्लेख पर लाई हैं नक ननजी प्रत्यथीगर् ने उसक े क्तखलाफ आपरानर्क र्मकी, मानहानन और सदोष अवरोर् क े कायम नकए हैं। उसने इस बात पर र्ी जोर नदया नक नदनांक 8.12.2009 नक उसकी नगरफ़्तारी से संनवर्ान क े अनुच्छे द 22 क े तहत उसक े मौनलक अनर्कार का हनन हुआ क्ूंनक प्रत्यथीगर् द्वारा अवैर् रूप से नगरफ्तारी की गई थी।
107. दू सरी ओर, प्रत्यथीगर् का यह प्रनतनवरोर् है नक यानचकाकताम ऐसे नकसी र्ी मुआवजे का हकदार नहीं है। इस प्रनतनवरोर् क े समथमन में, प्रत्यथीगर् ने ननम्ननलक्तखत ननवेदन पेिा नकया है:- “3. यह नक यानचकाकताम ने 11.08.2015 को र्ारत क े माननीय प्रर्ान मंत्री को रु 26,00,000 की नवर्त्ीय सहायता क े बारे में एक अभ्यावेदन नदया था नजसकी उन्हें इंनडयन स्क ू ल ऑफ नबजनेस, हैदराबाद (201617 का कोसम) में एमबीए कोसम में अपनी बेिी क े िुल्क क े र्ुगतान हेतु आवश्यकता थी। उपलब्ध ररकॉडम क े अनुसार, पीएमओ ने नदनांक 18.08.2015 क े पत्र द्वारा उसक े नदनांक 11.08.2015 क े अभ्यावेदन को मानव संसार्न नवकास मंत्रालय क े उच्च निक्षा नवर्ाग को र्ेज नदया। इसक े बाद, उच्च निक्षा नवर्ाग ने नववनवद्यालय अनुदान आयोग क े परामिम से मामले की जांच की| यूजीसी ने सूनचत नकया था नक इंनडयन स्क ू ल ऑफ नबजनेस, हैदराबाद इसक े द्वारा बनाई गई सूची में नहीं है और यूजीसी क े दायरे में नहीं है। इसक े अलावा, उच्च निक्षा नवर्ाग ने बताया था नक इंनडयन स्क ू ल ऑफ नबजनेस, हैदराबाद एक ननजी नबजनेस स्क ू ल है और इंनडयन स्क ू ल ऑफ नबजनेस में प्रवेि क े नलए आनथमक सहायता देने की उस मंत्रालय की कोई योजना नहीं है।"
108. अननवायम रूप से सेवाननवृर्त् सरकारी कममचारी होने क े नाते, यानचकाकताम क े सेवाननवृनर्त् क े बाद क े लार्ों का अनर्कार उस पर लागू होने वाले सेवा ननयमों क े तहत प्रावर्ानों तक ही सीनमत होगा। यानचकाकताम को 1975 क े ननयमों क े ननयम 135 क े अनुसार, अनुमाननत सेवाननवृनर्त् की तारीख क े आर्ार पर पेंिन सनहत सेवाननवृनर्त् क े पिात् नवनर्न्न लार् नदए गए। यानचकाकताम क े मौनलक अनर्कारों क े हनन क े संबंर् में 2012 की ररि यानचका (फौजदारी) संख्या 24 में हम पहले ही इस पहलू पर नवचार कर चुक े हैं तथा उस संबंर् में मुआवजा दे चुक े हैं| नवचारार्ीन ररि यानचका में बताये गए मूल कारर् क े संदर्म में यानचकाकताम को नकसी र्ी तरह का मुआवज़ा नहीं नदया जा सकता|
109. 2012 की ररि यानचका (दीवानी) 3704 में उच्च न्यायलय क े आदेि पर र्रोसा करते हुए यानचकाकताम का यह प्रनतनवरोर् है नक अनर्लेख पर मौजूद न्यायलय क े नवनर्न्न आदेि प्रत्यथीगर् क े अनर्काररयों द्वारा यानचकाकताम क े क्तखलाि आपरानर्क र्मकी और ग़लत ढंग से बंर्क बनाने क े क ृ त्य को नसद्ध करते हैं| हम उक्त आदेि से कनथत रूप से ननकाले गए इस ननष्कषम को नसरे से ख़ाररज करते हैं| उक्त ररि यानचका में उच्च न्यायालय क े समक्ष ननर्मय की गुंजाइि अनुपक्तथथनत की अवनर् क े ननयनमतीकरर् और पररर्ामी लार्ों क े अनुदान तक सीनमत थी। तवशाखा (उपरोक्त) नदिाननदेिों का पालन करने में कायमनवनर् संबंर्ी अनुनचत व्यवहार क े इदम-नगदम घूमती निप्पनर्यां, यानचकाकताम का पररर्ामी थथानांतरर् और और पक्षकारों क े बीच नवनर्न्न प्रकार क े प्रत्यारोप, नकसी र्ी तरह से अनर्काररयों क े आपरानर्क दानयत्व पर ननर्मय नहीं है। वास्तव में, अब तक क े नकसी र्ी पूवमवती मामले में अनर्काररयों क े आपरानर्क दानयत्व का सवाल नहीं उठाया गया है। इस प्रकार, नवचारार्ीन आरोपों क े बहाने कोई अनतररक्त मुआवजा यानचकाकताम को नहीं नदया जा सकता| इसनलए, यह यानचका नवफल होगी और उक्त ितों क े साथ इसका ननपिान नकया जाता है|
110. मामले की अजीब पररक्तथथनतयों को ध्यान में रखते हुए 2019 की नविेष अनुमनत यानचका (दीवानी) संख्या 2307 में दायर 2019 क े अंतवमती आवेदन संख्या 79011 क े सन्दर्म में यह आदेि नदया जाता है नक यानचकाकताम से आज से अगले तीन महीने तक जुमामने क े रूप में कोई नकराया नहीं वसूल नकया जायेगा| लेनकन इस आदेि क े बाद, अननवायम सेवाननवृनर्त् क े आदेि क े अंनतम होने क े साथ, प्रत्यथीगर् आज से तीन महीने की अवनर् समाप्त होने क े बाद मौजूदा ननयमों क े अनुसार सरकारी आवास खाली कराने और उनचत कानून प्रनक्रया का पालन करने क े नलए स्वतंत्र हैं|
111. अंत में, हमें यह निपण्णी करने की ज़रुरत है नक यानचकाकताम/अपीलाथी ने व्यक्तक्तगत रूप से पेि होकर बहस की, अत्यंत गररमा क े साथ खुद को प्रस्तुत नकया और न्यायालय क े प्रनत गररमापूर्म आचरर् नदखाया| इस मामले से जुड़ी अंतननमनहत र्ावनात्मक अपील क े बावजूद, यानचकाकताम / अपीलाथी ने कानूनी नसद्धांतों क े संदर्म में नकसी अन्य ननपुर् अनर्वक्ता की तरह अपना मामला प्रस्तुत नकया।
112. तदनुसार, ननम्न ितों और ननदेिों क े साथ हम अपने समक्ष चार मामलों का ननपिान करते हैं| (i) हम मानते हैं नक 1975 क े ननयमों का ननयम 135 मान्य हैं और असंवैर्ाननकता क े अवगुर् से िस्त नहीं है| इसक े अलावा, ननयम 135 क े उप- ननयम (2) में आने वाली अनर्व्यक्तक्त "हो सकता है" को प्रावर्ान क े उद्देश्य को सही प्रर्ाव देने हेतु "होगा" पढा जाए। (ii) अपीलाथी/ यानचकाकताम क े नवरुद्ध ननयम 135 क े तहत पाररत अननवायम सेवाननवृनर्त् का आक्षेनपत आदेि मान्य एवं वैर् है और इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय का ननर्मय, वतममान ननर्मय में नकए गए संिोर्न की सीमा तक बरक़रार रखा जाता है| (iii) अपीलाथी/ यानचकाकताम को प्रदान की जाने वाली पेंिन की गर्ना उच्च न्यायालय द्वारा ननदेनित अनुमाननत सेवाननवृनर्त् की नतनथ क े अनुसार की जाएगी न नक वास्तनवक अननवायम सेवाननवृनर्त् की नतनथ से और इस सम्बन्ध में अनतररक्त रानि, यनद हो, आज से छह सप्ताह क े र्ीतर उसे दी जाएगी| (iv) प्रत्यथी(गर्) (र्ारत संघ) को अपीलाथी/यानचकाकताम की यौन उत्पीडन की उसकी निकायत क े अनुनचत ढंग से ननपिने क े नलए उसकी जीवन एवं गररमा क े मौनलक अनर्कार क े उल्लंघन क े बदले रू. 1,00,000/- (मात्र एक लाख) का मुआवजा देने का ननदेि नदया जाता है| मुआवजे की रानि का र्ुगतान अपीलाथी/यानचकाकताम को उसक े बैंक खाते में सीर्े जमा कर या इस न्यायालय में जमा कर नकया जाए और नकसी र्ी सूरत में छह सप्ताह क े र्ीतर नकया जाए| (v) अपीलाथी/यानचकाकताम को उसका आनर्काररक ननवास खाली करने और उसका िांनतपूर्म कब्ज़ा देने क े नलए आज से तीन महीने का समय नदया जाता है| इसक े अनतररक्त, यानचकाकताम से आज से अगले तीन महीने तक जुमामना क े रूप में कोई नकराया नहींवसूल नकया जायेगा|
113. तद् नुसार अपील, ररि यानचका एवं लंनबत अंतरवती आवेदनों का उपरोक्त ितों क े अनुसार ननपिान नकया जाता है| ……………….. न्यायमूतिण (ए.एम्. खानतवलकर) ……………….. न्यायमूतिण (तदनेश माहेश्वरी) नई तदल्ली 24 अप्रैल, 2020 अस्वीकरर्: देिी र्ाषा में ननर्मय का अनुवाद मुकद्द ् मेबाज़ क े सीनमत प्रयोग हेतु नकया गया है तानक वो अपनी र्ाषा में इसे समझ सक े एवं यह नकसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नहीं नकया जाएगा| समस्त कायामलयी एवं व्यावहाररक प्रयोजनों हेतु ननर्मय का अंिेज़ी स्वरूप ही अनर्प्रमानर्त माना जाएगा और कायामन्वयन तथा लागू नकए जाने हेतु उसे ही वरीयता दी जाएगी|