Uttar Pradesh State Road Transport Corporation v. Rajendri Devi & Ors.

Supreme Court of India · 08 Jun 2020 · 2020 INSC 417
R. F. Nariman; Rohinton Fali Nariman; Naveen Sinha; B. R. Gavai
Civil Appeal No. 2526 of 2020
civil appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that a transport corporation exercising effective control over a vehicle operated under contract is liable to pay compensation beyond the insurance company's limit in motor accident claims.

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प्रति वेद्य
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील सं. 2526 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति%का (सिसविवल) सं. 25793 वर्ष 2017 से उद्भू )
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिरवहन विनगम .... अपीलार्थी7
बनाम
राजेन्द्री देवी एवं अन्य .... प्रत्यर्थी7
विन र्ण य
न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई।

2. व मान मामले में एक 45 वर्ष क े व्यविG की मृत्यु हो गई जो विक साईविकल पर सवार र्थीा और बस द्वारा उसे 16.08.2001 को टक्कर मार विदया गया र्थीा। वाहन दुर्घटना दावा प्रातिPकरर्ण ए स्मिRमनपश्चा ् एमएसीटी से सन्दर्भिभ ) ने पाया विक यह बस क े %ालक, सिजसे विक अपीलार्थी7 - उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिरवहन विनगम द्वारा इसक े और बस मालिलक क े बी% एक करार द्वारा भाड़े पर लिलया गया र्थीा, द्वारा ेज और लापरवाही से %लाने का परिरर्णाम है। अं ः यह पा े हुए विक उसकी आय 18000 प्रति वर्ष में से एक ति हाई र्घटा कर 13 से गुर्णा कर रू. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2020 INSC 417

1.65 लाख + 8% ब्याज एमएसीटी द्वारा प्रदान विकया गया लेविकन राजRर्थीान राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम क ै लाश नार्थी कोठारी (1997) 7 एससीसी 481 (“क ै लाश नार्थी कोठारी”) क े मामले में यह कहा गया विक यह क े वल अपीलार्थी7 - विनगम क े लिलए है विक वह पूरी राशिश का भुग ान करे न विक बीमा कम्पनी। विनम्नव Pारिर विकया गया:- “15. बस एक विनजी बस है यह यूपीएसआरटीसी क े अPीन %ल ी र्थीी। बीमा कम्पनी क े विवद्वान अतिPवGा ने क विदया है विक बस क े यूपीएसआरटीसी क े अPीन होने क े कारर्ण अनु ोर्ष की सिजम्मेदारी यूपीएसआरटीसी पर हो गई र्थीी क्योंविक बस पर विनयंत्रर्ण Rवामी का नहीं बस्मिjक विनगम का र्थीा जो विक %ालकों क े कायk को विनयंवित्र कर ा र्थीा। कम्पनी क े विवद्वान अतिPवGा ने राजRर्थीान राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम क ै लाश नार्थी कोठारी 1997 अतिPविनयम 1148 को उद्धृ विकया है। मुझे लग ा है विक संदर्भिभ क े स लॉ व मान मामले पर पूरी रह लागू हो ा है। यूपीएसआरटीसी ओपी सं. 3 न विक ओपी सं. 1 और 2 अवार्ड का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी है।"

3. उच्च न्यायालय में 27.09.2016 विदनांविक विनर्णय द्वारा क ै लाश नार्थी कोठारी (उपरोG) क े इसी विनर्णय को यह Rपष्ट कर े हुए संदर्भिभ विकया गया और माना गया विक अपीलार्थीा7 अक े ले ही पीविड़ क े परिरवार को अनु ोर्ष राशिश, सिजसका आदेश विकया गया है, का भुग ान करने का उत्तरदायी है। विनगम और वाहन Rवामी क े करार को संदर्भिभ कर े हुए यह भी कहा गया है विक- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj “अपीलार्थी7 क े विवद्वान अतिPवGा द्वारा अनु ोर्ष क े भुग ान क े अपने दातियत्व से ब% विनकलने क े लिलए अपीलार्थी7 और Rवामी क े बी% करार क े उपबंP 10 पर अतिPक जोर विदया गया है। आक्षेविप अवार्ड में उG करार का संदभ नहीं विदया गया है। अपील की मेमो में ऐसा कोई आPार नहीं विदखाया गया है विक इसे प्रातिPकरर्ण क े समक्ष नहीं दायर विकया गया र्थीा लेविकन इस पर विव%ार नहीं विकया गया। विकसी भी दृविष्टकोर्ण से यविद करार में ऐसा उपबंP हो ो भी यह अपीलार्थी7 और Rवामी क े बी% है और यह अतिPविनयम क े उपबन्Pों से विनःसृ होने वाले दावेदार क े अनु ोर्ष पाने क े अतिPकार को प्रभाविव नहीं करेगा। अ ः अपीलार्थी7 क े विवद्वान अतिPवGा द्वारा लिलए गये पहले क में कोई बल नहीं है और यह Rवीकार करने योग्य नहीं है।"

4. सभी पक्षकारों की ओर से उपस्मिRर्थी विवद्वान अतिPवGाओं को सुनने क े पश्चा हमारा यह म है विक क ै लाश नार्थी कोठारी (उपरोG) सिजसका अवलम्ब लिलया गया है, इस कारर्ण से Rवयं ही अलग है क्योंविक विनर्णय में विनम्न बा कही गई है:- “3.........बीमा कम्पनी ने दावा याति%का क े प्रत्युत्तर में यह दलील विदया विक दुर्घटना क े समय बस आरएसआरटीसी क े विनयंत्रर्ण में र्थीी इसलिलए अनु ोर्ष क े भुग ान का दातियत्व आरएसआरटीसी पर र्थीा और बीमा कम्पनी उत्तरदायी नहीं र्थीी। बीमा कम्पनी द्वारा आगे यह दलील दी गई विक विकसी भी स्मिRर्थीति में बीमा कम्पनी का उत्तरदातियत्व सीविम र्थीा और इसका दातियत्व एक दुर्घटना में विकए जाने वाले सभी दावों क े सम्बन्P में रू. 75000 से अतिPक नहीं हो सक ा।......… 4.............विवर्षय सं. 2 भी दावा याति%काक ा क े पक्ष में विनर्ण[7] विकया गया लेविकन यह कहा गया विक बीमा पॉलिलसी की श k और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj अतिPविनयम क े प्रासंविगक प्रावPानों क े आलोक में बीमा कम्पनी का उत्तरदातियत्व सीविम र्थीा और दुर्घटना क े सम्बन्P में 75000 रुपये की क ु ल राशिश क र्थीा। XXXXXXXXXXXX 7..............बीमा कम्पनी की ओर से प्रR ु विवद्वान अतिPवGा ने विवर्षय सं. 2 क े विनष्कर्षk को प्रश्नांविक नहीं विकया है और यह कहा है विक विवविनर्दिदष्ट राशिश बीमा कम्पनी द्वारा भुग ान की जा %ुकी है।........” इसक े अलावा मोटर वाहन अतिPविनयम ( त्समय) की Pारा (19) में दी गई "Rवामी" की परिरभार्षा का अवलम्ब ले े हुए न्यायालय ने विनम्नव Pारिर विकया विक:- “17. अतिPविनयम की Pारा 2(19) में दी गई Rवामी की परिरभार्षा व्यापक नहीं है अ ः इसका वृहद् संदभ में, विकसी मामले क े थ्य एवं परिरस्मिRर्थीति यों क े आलोक में अर्थी विकया जाना %ाविहए। विकसी मामले में Rवामी शब्द क े अन् ग वाR विवक कब्जा और विनयंत्रर्ण रखने वाला व्यविG और वह व्यविG सिजसक े विनद~शन और आदेश में %ालक बस %लाने क े लिलए बाध्य है, आ े हैं। विकसी मामले में "Rवामी” का अर्थी क े वल पंजीक ृ Rवामी क सीविम कर विदए जाने से, जहाँ वाहन विकराये पर लेने वाले क े वाR विवक विनयंत्रर्ण और कब्जे में हो, विकसी दुर्घटना की स्मिRर्थीति में दातियत्व क े विनवहन क े उद्देश्य क े लिलए उति% नहीं होगा। अपने कम%ारी क े द्वारा विनयोजन क े दौरान विकए गये अपक ृ त्य क े लिलये "Rवामी” का उत्तरदातियत्व प्रति विनतिPक हो ा है और प्रत्येक मामले में यह क े वल थ्य का विवर्षय होगा विक दुर्घटना की स्मिRर्थीति में प्रति विनतिP दातियत्व विकस पर र्डाला जाए।.....” Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj (मूल में प्रभाव वर्तिP ) इस दृविष्ट से यह Pारिर विकया गया विक %ूंविक बीमा कम्पनी का दातियत्व 75000 रुपये क सीविम र्थीा सिजसका भुग ान कर विदया गया है, मामले क े थ्य क े आPार पर बीमा कम्पनी और भुग ान क े लिलए उत्तरदायी नहीं होगी। इस आPार पर उस मामले में 75000 रुपये से अतिPक देय राशिश विनगम पर र्डाल दी गयी।

5. एक पश्चा व 7 विनर्णय – उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम क ु लसुम एवं अन्य (2011) 8 एससीसी 142 (“क ु लसुम”) विव%ारर्ण क े लिलए आये विवतिPक प्रश्न पर विनम्नव Pारिर विकया:- “3. व मान एवं सम्बद्ध अपीलों में विव%ारर्ण क े लिलए आया विवतिPक प्रश्न विनम्नव रखा गया है: यविद कोई बीविम वाहन (व मान मामले में विमनी बस) विनगम क े सार्थी करार समझौ े क े अन् ग, विनगम क े पक्ष में विदए गये परविमट क े आPार पर य रूप पर %ल रहा हो, ो दुर्घटना की स्मिRर्थीति में क्या बीमा क ं पनी अनु ोर्ष देने क े लिलए उत्तरदायी होगी या यह विनगम और Rवामी की सिजम्मेदारी होगी?” इसक े बाद मोटर वाहन अतिPविनयम, 1988 की Pारा 2(30)1 क े ह "Rवामी" की परिरभार्षा का उल्लेख विकया और 1939 क े अतिPविनयम की Pारा 2(19)2 में "Rवामी" की परिरभार्षा क े सार्थी इसकी ुलना की। 1 “2(30) “Rवामी" से वह व्यविG अशिभप्रे है सिजसक े नाम में मोटर यान रसिजRटर है और जहां ऐसा व्यविG अवयRक है, वहां उस अवयRक का संरक्षक अशिभप्रे है और उस मोटर यान क े संबंP में जो अपक्रय करार या पट्टे क े करार या आर्ड्मान क े करार पर लिलया गया है, वह व्यविG अशिभप्रे है सिजसका उस यान पर उस करार क े अPीन कब्जा है;” 2 “2(19)"Rवामी" से वह व्यविG अशिभप्रे है जो एक मोटर वाहन पर कब्जा रखने वाला अवयRक व्यविG है, ऐसे अवयRक का संरक्षक, और उस मोटर यान क े संबंP में जो अपक्रय करार पर लिलया गया है, वह व्यविG अशिभप्रे है सिजसका उस यान पर उस करार क े अPीन कब्जा है;” Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj इसक े बाद क ै लाश नार्थी कोठारी (उपरोG) को विनम्नव Pारिर विकया गया: "16. क ै लाश नार्थी कोठारी [ राजRर्थीान राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम क ै लाश नार्थी कोठारी (1997) 7 एससीसी 481] में बीमा क ं पनी की देनदारी जहां राजRर्थीान राज्य सड़क परिरवहन विनगम क े सार्थी अनुबंP क े अनुसार बस %ल रही र्थीी, क े संबंP में एक प्रश्न उठा र्थीा। हालाँविक, उG मामला 1939 क े पहले क े मोटर वाहन अतिPविनयम से संबंतिP र्थीा। पुराने अतिPविनयम की Pारा 2(19) में "Rवामी" की परिरभार्षा को ध्यान में रख े हुए, इसे प्रR र 17 में विनम्नानुसार Pारिर विकया गया है: (एससीसी पीपी. 487-88) “17. अतिPविनयम की Pारा 2(19) में दी गई Rवामी की परिरभार्षा व्यापक नहीं है अ ः इसका वृहद् संदभ में, विकसी मामले क े थ्य एवं परिरस्मिRर्थीति यों क े आलोक में अर्थी विकया जाना %ाविहए। विकसी मामले में Rवामी शब्द क े अन् ग वाR विवक कब्जा और विनयंत्रर्ण रखने वाला व्यविG और वह व्यविG सिजसक े विनद~शन और आदेश में %ालक बस %लाने क े लिलए बाध्य है, आ े हैं। विकसी मामले में "Rवामी” का अर्थी क े वल पंजीक ृ Rवामी क सीविम कर विदए जाने से, जहाँ वाहन विकराये पर लेने वाले क े वाR विवक विनयंत्रर्ण और कब्जे में हो, विकसी दुर्घटना की स्मिRर्थीति में दातियत्व क े विनवहन क े उद्देश्य क े लिलए उति% नहीं होगा। अपने कम%ारी क े द्वारा विनयोजन क े दौरान विकए गये अपक ृ त्य क े लिलये "Rवामी” का उत्तरदातियत्व प्रति विनतिPक हो ा है और प्रत्येक मामले में यह क े वल थ्य का विवर्षय होगा विक दुर्घटना की स्मिRर्थीति Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj में प्रति विनतिP दातियत्व विकस पर र्डाला जाए। इस मामले में बस क े मालिलक श्री संजय क ु मार उस विवशेर्ष रूट पर बस नहीं %ला सक े र्थीे सिजसक े लिलए उनक े पास परविमट नहीं र्थीा और वह वाR व में उस रूट पर बस नहीं %लवा रहे र्थीे। %ालक की सेवा पूरे विनयंत्रर्ण क े सार्थी आरएसआरटीसी को हR ां रिर कर दी गई र्थीी सिजसक े विनद~श, विनदेश और आदेश क े अन् ग र्घटना क े विदन र्ड्राइवर को उस अभागी बस को %लाना या नहीं %लाना र्थीा यात्री आरएसआरटीसी द्वारा विकराया लेकर ले आए ले जाए जा े र्थीे। अ ः श्री संजय क ु मार का उस बस में यात्रा करने वाले यावित्रयों द्वारा आरएसआरटीसी को विदए जाने वाले विकराए से कोई लेना देना नहीं र्थीा। बस का %ालक यद्यविप विक मालिलक का कम%ारी र्थीा उस समय बस क े सं%ालन क े लिलए आरएसआरटीसी क े परिर%ालक क े आदेश और आज्ञा क े मा ह र्थीा। जहाँ क उस बस क े यावित्रयों का प्रश्न है उनक े करार का संबंP क े वल आरएसआरटीसी से र्थीा सिजसे उन्होंने उस बस में यात्रा करने क े लिलए विकराया विदया र्थीा और इसलिलए बस में यात्रा कर े समय उनकी सुरक्षा की सिजम्मेदारी आरएसआरटीसी की र्थीी। उनक े करार का संबंP बस क े मालिलक श्री संजय क ु मार से विबjक ु ल नहीं र्थीा। यविद यह क े वल %ालक की सेवाओं क े हR ां रर्ण का विवर्षय हो ा न विक मालिलक से आरएसआरटीसी को र्ड्राइवर क े विनयंत्रर्ण क े हR ां रर्ण का, ो मामला क ु छ अलग हो ा। लेविकन मामले क े थ्य और करार (उपरोG) की श 4 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj से 7 क े आPार पर आरएसआरटीसी क े सार्थी अनुबंP क े अन् ग बस %लाने वाले %ालक द्वारा विकए गये अपक ृ त्य क े लिलए आरएसआरटीसी को प्रति विनतिPक रूप से सिजम्मेदार ठहराया जाना %ाविहए। सामान्य विवतिPक अवPारर्णा और उससे उत्पन्न उपPारर्णा विक एक विनयोGा अर्थीा वह व्यविG सिजसे कम%ारी को विनयोसिज करने और हटाने का अतिPकार है सामान्य ः अपने विनयोजन क े दौरान और अपने प्रातिPकार क े क्षेत्र में कम%ारी द्वारा विकये गये अपक ृ त्य क े लिलए प्रति विनतिPक रूप से उत्तरदायी हो ा है, एक खण्र्डनीय उपPारर्णा हो ी है" (मूल में प्रभाव वर्तिP ) XXXXXXXXXXXXXXXXXX “18. हमारे सुचिं%ति विव%ार से "Rवामी" की परिरभार्षा में पुराने अतिPविनयम और नये अतिPविनयम में विकए गये आमूल और विवशिशष्ट परिरव नों से क ै लाश नार्थी {राजRर्थीान राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम क ै लाश नार्थी कोठारी (1997) 7 एससीसी 481} वाले मामले की व मान मामले क े थ्यों पर कोई प्रयोज्य ा नहीं है। हम इस अपील और संबद्ध अपीलों में उठने वाले विवशिशष्ट प्रश्न से सहम नहीं हैं क्योंविक इन अपीलों में उठाया गया प्रश्न न ो सीPे न ो सारवान रूप से क ै लाश नार्थी {राजRर्थीान राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम क ै लाश नार्थी कोठारी (1997) 7 एससीसी 481} वाले मामले में विवर्षय र्थीा। इस प्रकार उसका संदभ हमारे लिलए मददगार नहीं है। व मान मामले में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj कशिर्थी रूप से यह न्यायालय पुराने अतिPविनयम की Pारा 2(19) में दी गई "Rवामी” की परिरभार्षा पर विव%ार कर रहा र्थीा।" अं ः, बीमा कम्पनी को यह कह े हुए उत्तरदायी ठहराया गया: “29. व मान मामले में %ालक बस क े मालिलक अजय विवशेन द्वारा विनयोसिज र्थीा लेविकन Rपष्ट ः प्रR ु विकये गये करार क े उपबंP 4.[4] क े आPार पर %ालक को परिर%ालक क े विनद~शों क े आPार पर बस %लाना र्थीा सिजसे विनगम द्वारा विनयुG विकया गया र्थीा। उG %ालक विनगम क े आदेशों से भी बाध्य र्थीा। इस प्रकार यह अनुमान लगाया जा सक ा है विक बस पर प्रभावी विनयंत्रर्ण और आदेश अपीलार्थी7 का र्थीा।

30. इस प्रकार सभी व्यावहारिरक उद्देश्यों क े लिलए प्रासंविगक अवतिP में विनगम विवविनर्दिदष्ट अवतिP क े लिलए बस का Rवामी बन गया र्थीा। यविद विनगम विवविनर्दिदष्ट अवतिP क े लिलए ही Rवामी बन गया र्थीा और वाहन मूल मालिलक क े द्वारा बीविम कराया जा %ुका र्थीा, यह माना जाएगा विक वाहन को अस्मिR त्वमान बीमा पॉलिलसी क े सार्थी विनगम को हR ां रिर विकया गया र्थीा और इस प्रकार बीमा कम्पनी अनु ोर्ष राशिश क े भुग ान क े उत्तरदातियत्व से ब% नहीं पाएगी।

31. अनु ोर्ष क े भुग ान का उत्तरदातियत्व सांविवतिPक उपबन्P पर आPारिर है। वाहन का अविनवाय बीमा ीसरे पक्ष क े लाभ क े लिलए हो ा है। अविनवाय बीमा करवाने का मालिलक का दातियत्व क े वल ीसरे पक्ष क े सम्बन्P में हो ा है न विक संपलित्त क े सम्बन्P में। वाहन क े बीविम हो जाने पर मालिलक एवं कोई अन्य व्यविG मालिलक की सहमति से वाहन का प्रयोग कर सक ा है। अतिPविनयम की Pारा 146 यह उपबन्P नहीं कर ी विक कोई व्यविG जो Rव ंत्र रूप से वाहन का प्रयोग कर ा है, एक अलग बीमा पॉलिलसी लिलया जाना %ाविहए। अतिPविनयम में अविनवाय बीमा का उद्देश्य सामासिजक न्याय को बढ़ाने क े हे ु अतिPविनयविम विकया गया है।

6. क ु लसुम (उपरोG) क े मामले में प्रति पाविद विवतिP व मान मामले क े थ्यों पर पूरी रह से लागू हो ी है और उपबंP 10 पर आPारिर क जो विनम्नव है- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj “उपबंP 10.: दूसरा पक्ष (बस मालिलक) का %ालक से विकसी भी गल ी, %ूक, दुर्घटना या अन्य अवैP क ृ त्य क े लिलए पूर्ण उत्तरदातियत्व होगा और इस संबंP में विकसी अनु ोर्ष या बकाया क े भुग ान का उत्तरदातियत्व बस क े मालिलक या अतिPविनयम क े अन् ग बीमा कम्पनी का होगा। विकसी भी स्मिRर्थीति में पहला पक्ष (या%ी विनगम) %ालक की गल ी, %ूक, दुर्घटना या अन्य अवैP क ृ त्य क े लिलए उत्तरदायी नहीं होगा। यविद न्यायालय इत्याविद क े आदेश क े अनुपालन में प्रर्थीम पक्ष द्वारा कोई भुग ान विकया जा ा है ो प्रर्थीम पक्ष उसे वसूलने क े लिलए अतिPक ृ होगा।" क े वल विनगम और बस मालिलक क े बी% है और ऐसे विकसी व्यविG को बाध्य नहीं कर ा जो उपरोG करार का विहRसा नहीं है, पीविड़ को ो विबjक ु ल नहीं।

7. मामले पर इस दृष्टकोर्ण क े आलोक में अपील को Rवीक ृ विकया जा ा है और एमएसीटी द्वारा Rवीक ृ ति राशिश अब ब ाई गई दर पर आज से ीन माह की अवतिP क े भी र क े वल बीमा कम्पनी द्वारा देय होगा।....................................… (न्यायमूर्ति रोहिंहटन फाली नरीमन)......................................... (न्यायमूर्ति नवीन सिसन्हा).......................................... (न्यायमूर्ति बी. आर. गवई) नई विदल्ली, जून 08, 2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj