Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति$का (सिसविवल) संख्या 10733-10734 वर्ष 2019)
लक्ष्मी सिंसह और अन्य .…अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
रेखा सिंसह और अन्य .…प्रत्यर्थी3 (गण)
विनणय
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना
अनुमति प्रदत्त।
JUDGMENT
2. 1 अक्टूबर 2018 को सिजला पं$ाय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश क े नब्बे विनवाति$ सदस्यों में से $ौंसठ सदस्यों ने पं$ाय अध्यक्ष सुश्री रेखा सिंसह, प्रर्थीम प्रत्यर्थी3 क े विवरूद्ध अविवश्वास प्रस् ाव (संक्षेप में, "प्रस् ाव") पेश विकया र्थीा।
3. इसक े बाद सिजला न्याया ीश, इलाहाबाद ने प्रस् ाव पर विव$ार करने क े लिलए बुलाई गई सिजला पं$ाय की बैठक में पीठासीन अति कारी क े रूप में काय करने क े लिलए अति रिरक्त सिजला न्याया ीश, इलाहाबाद को नाविम विकया र्थीा।
4. 25 अक्टूबर 2018 को हुई सिजला पं$ाय की बैठक में उपस्थिस्र्थी इक्यावन सदस्यों में से अड़ ालीस सदस्यों ने प्रस् ाव क े पक्ष में म दान विकया र्थीा, दो सदस्यों ने प्रस् ाव क े विवरुद्ध म दान विकया र्थीा और एक म को अमान्य करार विदया गया र्थीा। उसी विदन, पीठासीन अति कारी ने घोर्षणा की र्थीी विक प्रस् ाव सिजला mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2020 INSC 440 पं$ाय क े क ु ल विनवाति$ सदस्यों क े आ े से अति क बहुम से पारिर विकया गया र्थीा।
5. प्रर्थीम प्रति वादी द्वारा $ुनौ ी विदए जाने पर उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने 13 मा$ 2019 क े आक्षेविप विनणय द्वारा प्रस् ाव को अनुमोविद करने वाली सिजला पं$ाय बैठक विदनांक 25 अक्टूबर 2018 क े कायवृत्त को इस आ ार पर रद्द कर विदया है विक इनमें से क ु छ सदस्यों ने म दान की गोपनीय ा क े विनयम का उल्लंघन विकया र्थीा। अदाल में $लाए गए सीसीटीवी फ ु टेज पर अवलम्ब लिलया गया र्थीा, ाविक यह देखा जा सक े विक कु छ सदस्यों ने म पत्र प्रदर्शिश विकए र्थीे या उनक े आ$रण से उनक े म दान क े रीक े का प ा $ला र्थीा।
6. उत्तर प्रदेश क्षेत्र पं$ाय और सिजला पं$ाय अति विनयम, 1961 की ारा 28(8) में कहा गया है विक अविवश्वास प्रस् ाव को गुप्त म पत्र द्वारा विन ारिर रीक े से म दान क े लिलए रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश (सिजला पं$ाय ) (अविवश्वास क े प्रस् ावों पर म दान) विनयमावली 1966 (संक्षेप में, '1966 विनयम') का विनयम 4 पीठासीन अति कारी पर ऐसी व्यवस्र्थीा विकए जाने का क व्य और दातियत्व डाल ा है सिजससे म पत्र की गोपनीय ा सुविनतिp हो सक े । हमारा ध्यान विनयावली, 1966 क े विनयम 7 क े उप-विनयम (2) की ओर भी आकर्षिर्ष विकया गया, सिजसमें सदस्यों को अपने नाम का खुलासा विकए विबना अपनी पसंद का संक े देने क े लिलए म पत्र पर एक विनर्षिदष्ट ति$ह्न लगाने की आवश्यक ा हो ी है और विकसी हस् ाक्षर या विकसी अन्य ति$ह्न को विन ारिर कर ा है सिजससे म पत्र की गोपनीय ा भंग हो सक ी है। इसक े अलावा हम विनयमावली, 1966 क े विनयम 7 क े उप-विनयम (3) का भी उल्लेख कर सक े हैं, सिजसमें सदस्यों को अपने द्वारा बनाए गए ति$ह्न को छिछपाने क े लिलए अपने म पत्र को मोड़ना हो ा है और उसे म पेटी में डालना हो ा है। उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश में विन ारिर विकया विक 1966 की विनयमावली का विनयम 4 और 7 का उल्लंघन हुआ र्थीा और आगे कहा विक अविवश्वास प्रस् ाव क े दौरान वोट को प्रदर्शिश करना राज्य द्वारा इसे प्रशासिस करने वाली वै ाविनक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व्यवस्र्थीा क े उल्लंघन में र्थीा। इसलिलए उच्च न्यायालय ने 25 अक्टूबर 2018 को पारिर अविवश्वास प्रस् ाव क े कायवृत्त को अपास् कर विदया।
7. उपरोक्त विनष्कर्ष को $ुनौ ी दे े हुए, या$ी ने हमारे सक्षम प्रस् ु विकया है विक आक्षेविप विनणय म दान की गोपनीय ा क े संबं में इस न्यायालय क े न्यातियक अव ारणों क े अनुरूप नहीं है, विवशेर्ष रूप से एस रघबीर सिंसह विगल बनाम एस गुर$रण सिंसह टोहरा और अन्य[1] में इस न्यायालय क े संविव ान पीठ क े फ ै सले क े अनुरूप नहीं है।
8. याति$काक ाओं ने दावा विकया विक म पत्र की गोपनीय ा का सिसद्धां सावजविनक नीति पर आ ारिर है सिजसका उद्देश्य यह सुविनतिp करना है विक म दा ा विबना विकसी डर या विकसी क े पक्ष में और विबना विकसी प्रकटीकरण की आशंका क े अपना वोट डाल सक ें । एस. रघबीर सिंसह विगल (उपरोक्त) में इन पहलुओं पर प्रकाश डाला गया र्थीा, सिजसमें लोक प्रति विनति त्व अति विनयम, 1951 (संक्षेप में 'आरपी अति विनयम') की ारा 94 का संदभ विदया गया र्थीा, सिजसमें कहा गया है विक उसने $ुनाव में विकसको वोट विदया र्थीा यह ब ाने क े लिलए विकसी गवाह या अन्य व्यविक्त की आवश्यक ा नहीं होगी। प्राव ान क े महत्व को स्पष्ट कर े हुए, म पत्र की गोपनीय ा को उति$ रूप से संवै ाविनक लोक ांवित्रक व्यवस्र्थीा में एक विनर्षिववाद और आ ारभू त्व क े रूप में ब ाया गया र्थीा क्योंविक म दा ा विकसी भी बा ा से मुक्त म ाति कार क े प्रयोग में पूरी रह से स्व ंत्र होना $ाविहए, सिजसमें प्रकटीकरण की बा ा भी शाविमल है। यहां क विक इस बा की दूर या स्पष्ट संभावना है विक विकसी समय, कानून की बाध्य ा क े ह एक म दा ा को यह खुलासा करने क े लिलए मजबूर विकया जा सक ा है विक उसने विकसक े लिलए म दान विकया है, यह एक सकारात्मक बा ा क े रूप में काय करेगा और म ाति कार क े प्रयोग की स्व ंत्र ा पर रोक लगाएगा। म पत्र की गोपनीय ा क े म दा ाओं क े अति कार की रक्षा करना कानून की नीति है, यद्यविप यह अति कार एक ऐसी $ीज है सिजसका दावा क े वल म दा ा स्वयं ही अनुति$ प्रकटीकरण क े विवरुद्ध कर सक ा है। आरपी अति विनयम 1 1980 सप्लीमेंटरी एससीसी 53 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की ारा 94 म दा ा क े पक्ष में एक विवशेर्षाति कार प्रदान कर ी है सिजसमें कोई भी उसे यह ब ाने क े लिलए मजबूर नहीं कर सक ा है विक उसने विकसक े लिलए म दान विकया र्थीा, लेविकन विवशेर्षाति कार ब समाप्त हो जा ा है जब म दा ा विवशेर्षाति कार को छोड़ने का फ ै सला कर ा है और इसक े बजाय स्वंय यह प्रकट कर ा है विक उसने विकसे वोट विदया र्थीा। म दा ा को ऐसा करने से कोई नहीं रोक सक ा है और न ही विकसी की छिशकाय पर विव$ार विकया जा सक ा है, सिजसमें वह व्यविक्त भी शाविमल है जो म दा ा क े मुंह को बन्द रखना $ाह ा है विक उसने यह क्यों प्रकट विकया विक उसने विकसक े लिलए म दान विकया है। एक बार जब म दा ा विवशेर्षाति कार छोड़ने और स्वयं को प्रकट करने का विवकल्प $ुन ले ा है, ो ारा 94 या आरपी अति विनयम क े विकसी अन्य प्राव ान का उल्लंघन नहीं हो ा है। म दा ा द्वारा प्रकटीकरण में कोई अवै ा शाविमल नहीं है।
9. याति$काक ाओं ने कहा विक उपरोक्त उविक्त क े बावजूद, उच्च न्यायालय ने गल रीक े से अव ारिर विकया है विक स्वैस्थि}छक त्यजन सिसद्धां अविवश्वास प्रस् ाव पर म दान करने वाले सिजला पं$ाय क े सदस्यों क े संबं में मामले पर लागू नहीं हो सक ा है। इस रह का प्रस् ाव सही है या नहीं, इसका परीक्षण एक उपयुक्त मामले में विकया जाना $ाविहए और हम उस पर कोई विटप्पणी करने से विवर हैं क्योंविक विवति क े प्रश्न पर हमारे समक्ष पूरी रह से क नहीं विदया गया र्थीा। हालाँविक याति$काक ाओं ने कहा विक इस महत्वपूण प्रश्न क े संबं में कु छ सिसद्धां ों पर प्रकाश डाला जाना $ाविहए।
10. याति$काक ाओं ने क विदया विक इस न्यायालय ने कई अवसरों पर[2] और जैसा विक हाल ही में छिशव सेना बनाम भार संघ[3] में विनद€श विदया है विक विवश्वास म या अविवश्वास म, जैसा भी मामला हो, को सदन क े पटल पर बहुम स्र्थीाविप करने क े लिलए एक खुले म पत्र द्वारा सं$ालिल विकया जाना $ाविहए और इसे वीतिडयो रिरकॉर्डिंडग 2 जी परमेश्वर बनाम भार संघ, (2018) 16 एससीसी 46, भार संघ बनाम हरिरश $न्द्र सिंसह राव, (2016) 16 एससीसी 744. 3 (2019) 10 एससीसी 809 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा विकया जाना $ाविहए ाविक पारदर्शिश ा सुविनतिp हो सक े । इससे पहले, क ु लदीप नैयर और अन्य बनाम भार संघ और अन्य 4 में, इस न्यायालय की पां$ न्याया ीशों की एक संवै ाविनक पीठ ने अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी खुली म पत्र प्रणाली की संवै ाविनक वै ा की जां$ की और उसे बरकरार रखा, सिजसे आरपी अति विनयम में अति विनयम 40 वर्ष 2003 क े एक संशो न द्वारा लाया गया र्थीा जो राज्यों की परिरर्षद क े $ुनावों क े लिलए र्थीा। इसमें याति$काक ा ने क विदया विक खुली म पत्र प्रणाली गोपनीय ा क े सिसद्धां का उल्लंघन कर ी है जो स्व ंत्र और विनष्पक्ष $ुनाव का सार है और सार्थी ही म दा ा की अछिभव्यविक्त की स्व ंत्र ा जो संविव ान की मूल विवशेर्ष ाओं में से एक है। संवै ाविनक वै ा की $ुनौ ी को खारिरज कर े हुए, संवै ाविनक खंडपीठ ने वाद विबन्दु II: म दान की गोपनीय ा क े ह विन ारिर विकया र्थीा विकः "404. इस अदाल ने पाया विक ारा 94 म दा ा क े विवशेर्षाति कार क े रूप में र्थीी विक उसे यह जानकारी देने क े लिलए मजबूर करने से ब$ाया जाए विक उसने विकस उम्मीदवार को वोट विदया र्थीा। यविद म दा ा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी मज[3] से अपने होंठ खोलने का विवकल्प $ुन ा है और विवशेर्षाति कार का त्याग कर ा है ो उसे कोई भी $ीज रोक ी नहीं है। यह देखा गया विक प्राव ान एक "गवाह या अन्य व्यविक्त" को संदर्शिभ कर ा है। इस प्रकार, यह दोनों जगह म दा ा की रक्षा करने क े लिलए है, जब अदाल में विकसी व्यविक्त को गवाह क े रूप में विदखाया जा ा है और जब अदाल क े बाहर उससे सवाल विकया जा सक ा है विक उसने क ै से म दान विकया। यह पाया गया विक ऐसा कोई प्राव ान मौजूद नहीं र्थीा जो म दा ा को विकसी भी दंड क े लिलए कहे, यविद वह स्वे}छा से यह ब ाना $ाह ा है विक उसने क ै से या विकसक े लिलए म दान विकया। XX XX XX 4 (2006) 7 एससीसी 1 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
409. इस प्रकार, $ुनावों में भी यह म दान की गोपनीय ा क े सिसद्धां पर आ ारिर हो ी है, म दा ा को यह $ुनना हो ा है विक वह यह ब ाना $ाह ा है विक उसने विकसक े लिलए म दान विकया र्थीा या गोपनीय ा को बरकरार रखना $ाह ा है। यविद वह ऐसा $ाह ा है, ो वह अपना विवशेर्षाति कार छोड़ सक ा है और उस स्थिस्र्थीति में, म पत्र की गोपनीय ा ही रहनी $ाविहए। ऐसी ब भी हो सक ा है जब ोखा ड़ी, जालसाजी या अन्य अवै काय हो और प्रकटीकरण न्याय क े प्रशासन क े उद्देश्य को पूरा कर ा हो।"
11. उन्होंने क ु लदीप नैयर (उपरोक्त) और एस. रघबीर सिंसह विगल (उपरोक्त) क े फ ै सलों को भी संदर्शिभ विकया, सिजसमें कहा गया र्थीा विक अदाल ों द्वारा लागू विकया जाने वाला प्रार्थीविमक सिसद्धां और परीक्षण $ुनाव की शुद्ध ा है, यानी स्व ंत्र और विनष्पक्ष $ुनाव। म दान की गोपनीय ा $ुनाव की शुद्ध ा क े सिसद्धां का एक सहायक है। दनुसार, एस. रघबीर सिंसह विगल (उपरोक्त) में यह देखा गया विक गोपनीय ा कानून में विनविह एक पूण सिसद्धां नहीं है, बस्थिल्क $ुनाव की शुद्ध ा क े व्यापक जनविह को बनाए रखने की आवश्यक ा हो ी है। गोपनीय ा स्व ंत्र और विनष्पक्ष $ुनावों क े आ ार से अलग, अलगाव में या टकराव में नहीं खड़ी हो सक ी है। क ु लदीप नैयर (उपरोक्त) में, संविव ान पीठ ने अवलोकन विकया विक एस रघबीर सिंसह विगल (उपरोक्त) में इस अदाल ने इस आशंका को खारिरज कर विदया र्थीा विक आरपी अति विनयम की ारा 94 में विनविह गोपनीय ा क े सिसद्धां को सावजविनक विह में लागू विकए गए विनर्षे क े रूप में छोड़ा नहीं जा सक ा है और यह ारिर करने क े लिलए सावजविनक नीति पर आ ारिर है विक जहां इस रह का विनर्षे है, अदाल ों को अछिभत्यजन (छोड़ने) क े सिसद्धां को लागू करने में ीमा होना $ाविहए। विफर भी, गोपनीय ा क े इस विवशेर्षाति कार को म दा ा स्वे}छा से छोड़ सक ा है क्योंविक विवशेर्षाति कार की अव ारणा ही इसे छोड़ने का अति कार रख ी है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गोपनीय ा म दा ा क े लाभ क े लिलए है और जनविह में अति विनयविम सिसद्धां को आगे बढ़ाने क े लिलए प्रदान की जा ी है।
12. कानून की पूव क्त स्थिस्र्थीति को अरिरकाला नरसा रेड्डी बनाम वेंकट राम रेड्डी रेड्डीगरी और एक अन्य[5] में दोहराया गया र्थीा विक म दान का गोपनीय ा का सिसद्धां म दा ाओं क े लाभ क े लिलए है ाविक वे स्व ंत्र रूप से अपना वोट डाल सक ें । हालांविक यह सिसद्धां सावजविनक नीति पर आ ारिर है, लेविकन यह उसी व्यविक्त पर विनभर है और अन्य कोई व्यविक्त ऐसे लाभ को नहीं छोड़ सक ा।
13. हालांविक, यह ध्यान विदया जाना $ाविहए विक याति$काक ाओं द्वारा उद्धृ उपरोक्त सभी मामले आरपी अति विनयम और उसक े ह बनाए गए विनयमों से संबंति हैं। यह कानून की एक स्पष्ट स्थिस्र्थीति है विक जब विनवा$न विवति से संबंति वै ाविनक प्राव ानों की व्याख्या की बा आ ी है, ो विवति शास्त्र इस विवर्षय पर प्राव ानों क े सख् अर्थीान्वयन को अविनवाय कर ा है। श्री बनवारी दास बनाम श्री सुमेर $ंद और अन्य में 6, विदल्ली नगर विनगम अति विनयम, 1957 का हवाला दे े हुए, यह देखा गया विक एक विनवा$न प्रति स्प ा विवति में कायवाही नहीं है या साम्या में मुकदमा नहीं है, बस्थिल्क विवशुद्ध रूप से एक वै ाविनक कायवाही है, सिजसक े लिलए प्राव ान का सख् ी से अर्थी लगाया जाना $ाविहए। इसलिलए भ्रष्ट आ$रण को रोकने क े लिलए $ुनाव प्राव ानों से जुड़े मामलों में भी, अदाल और विटŒब्यूनल को न्यातियक रूप से काय करना $ाविहए न विक सिजज्ञासु रीक े से काय करना $ाविहए। अदाल सामान्य विवति और साम्या क े सिसद्धां ों को लागू करक े अं र को पाट नहीं सक ी है और एक स्पष्ट विवलोपन नहीं लगा सक ी है। इसलिलए उत्तर प्रदेश क्षेत्र पं$ाय और सिजला पं$ाय अति विनयम 1961 व विनयमावली 1966, विवशेर्ष रूप से विनयमावली 1966 क े विनयम 4, 7 और 12 क े बी$ परस्पर विŽया र्थीा उपरोक्त न्यायविनणयों में इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति क सिसद्धां ों क े गहन विवश्लेर्षण क े लिलए मौजूदा मुद्दों क े उति$ विन ारण क े लिलए यह आवश्यक है। 5 (2014) 5 एससीसी 312 6 (1974) 4 एससीसी 817 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. यह देखा जाना $ाविहए विक विनवा$न विवति क े मूलभू सिसद्धां ों में से एक स्व ंत्र और विनष्पक्ष $ुनावों की व्यवस्र्थीा से संबंति है सिजससे $ुनावों की शुद्ध ा सुविनतिp हो। म पत्रों की गोपनीय ा का सिसद्धां संवै ाविनक लोक ंत्र की एक महत्वपूण अछिभ ारणा है सिजसका उद्देश्य इस लक्ष्य की प्राविप्त है। सवाल यह है विक क्या $ुनाव प्रविŽया क े दौरान व्यविक्तग म दा ाओं द्वारा गोपनीय ा का अछिभत्यजन (छोड़ना) स्वीकाय है, ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यों में जैसी विक व मान में है, जहां उत्तर प्रदेश क्षेत्र पं$ाय और सिजला पं$ाय अति विनयम 1961 और विनयमावली 1966 में अविवश्वास प्रस् ाव में म दान करने का आदेश विदया गया है, यह गुप्त म दान द्वारा होगा और विवस् ृ क र्थीा विवश्लेर्षण की आवश्यक ा हो ी है। क्या यह विवति ः अवै है, या स्वीकाय है, या स्व ंत्र, विनष्पक्ष और शुद्ध विनवा$न क े सिसद्धां पर प्रभाव को ध्यान में रख े हुए प्रत्येक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों पर विनभर कर ा है, यह एक ऐसा प्रश्न है जहां हम उच्च न्यायालय क े क में कु छ हद क कमी पा े हैं।
15. यह विक हमारे सामने सुनवाई क े दौरान अपीलक ा की ओर से पेश हुए विवद्वान वरिरष्ठ वकील ने सुनवाई क े पहले विदन ही सुझाव विदया र्थीा विक पहले प्रति वादी क े विवरूद्ध प्रस् ाव पर विफर से वोट देने या नए सिसरे से म दान करने क े लिलए रखा जा सक ा है। द्नुसार हमने प्रर्थीम प्रति वादी क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता को इसक े संबं में विनद€श प्राप्त करने का विनद€श विदया, सिजसक े लिलए मामला स्र्थीविग कर विदया गया र्थीा। सुनवाई की अगली ारीख को यह कहा गया विक अविवश्वास प्रस् ाव नए सिसरे से पेश विकए जाने पर यह सुझाव स्वीकाय है। याति$काक ाओं ने एक नया प्रस् ाव दायर करने की आवश्यक ा पर आपलित्त ज ाई, क्योंविक इसका म लब यह होगा विक 1 अक्टूबर 2018 क े प्रस् ाव को, सिजसे 25 अक्टूबर 2018 को म दान क े लिलए रखा गया र्थीा, को खारिरज कर विदया समझा जाएगा, भले ही इक्यावन में से अड़ ालीस सदस्य मौजूद हों, अर्थीा उपस्थिस्र्थी सदस्यों में से लगभग 95% ने प्रस् ाव क े समर्थीन में म दान विकया र्थीा। सार्थी ही, पहले प्रति वादी क े अति वक्ता ने जोर देकर कहा र्थीा विक पहले प्रति वादी को सिजला पं$ाय का समर्थीन प्राप्त है और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इसलिलए उसे विवश्वास है विक पेश विकया गया कोई अविवश्वास प्रस् ाव असफल हो जाएगा।
16. उपरोक्त क े आलोक में हमें लग ा है विक न्याय का उद्देश्य भी प्राप्त होगा, यविद 1 अक्टूबर 2018 क े प्रस् ाव को सिजला न्याया ीश द्वारा विनय ति छिर्थी व समय पर स्वयं सिजला न्याया ीश द्वारा या पीठासीन अति कारी क े रूप में उसक े नाविम ी अपर सिजला न्याया ीश द्वारा गुप्त म पत्र क े माध्यम से सिजला पं$ाय की बैठक में पुनः म दान क े लिलए रखा जाएगा, जो आज से दो महीने क े बाद की नहीं होगी। हमारी राय में, व मान मामले की थ्यात्मक स्थिस्र्थीति में, संबंति क• और पक्षकारों क े रुख को देख े हुए यह एक उति$ और विनष्पक्ष विदशाविनद€श होगा।
17. विवति क े प्रश्न को अविनण[3] छोड़ े हुए, अपीलों का दनुसार उपरोक्त श • में विनस् ारण विकया जा ा है। ख$€ क े लिलए कोई आदेश नहीं है। ……………………… (न्यायमूर्ति ए. वी. रमना) ……………………… (न्यायमूर्ति संजीव खन्ना) ……………………… (न्यायमूर्ति क ृ ष्ण मुरारी) नई विदल्ली; 19 जून 2020. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA