Bharat Sangh v. Lieutenant Colonel S. Bed

Supreme Court of India · 29 Jul 2020
L. Nageshwar Rao; Hemant Gupta; Ravindra
Criminal Appeal No 13 of 2013; Criminal Appeal No 997 of 2013
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the conviction and dismissal of Lieutenant Colonel S. Bedi for outraging the modesty of patients, set aside the commutation to a fine, and clarified pension entitlement rules under the Army Act and Pension Regulations.

Full Text
Translation output
अप्र�तवे
भारतीय सव�च्च न्यायाल
आपरा�धक अपील�य �ेत्�धकार
आपरा�धक अपील संख्या13/2013
भारत संघ एवं अन् …अपीलाथ�गण
बनाम
लेिफ्टन�ट कनर्ल .एस. बेद� …प्रत् (गण)
सह
आपरा�धक अपील संख्या997/2013
लेिफ्टन�ट कनर्एस.एस. बेद� …अपीलाथ�
बनाम
भारत संघ एवं अन् …प्रत्य(गण)
�नणर्
न्यायधीश, एल. नागेश्वर रा
JUDGMENT

1. यह अपील� सशस्त्र बल अ�ध, प्रधान प, नई �दल्ल�(इसक े पश्चात ‘अ�धकरण’ क े रूप म� उिल्ल�) क े �नणर्, िजसक े द्वारासामान् सेना न्यायाल द्वारा भूतपूवर् लेिफ्टन�ट कनर्ल.एस. बेद� क� दोष�सद्�ध क� पुिष्ट क� गई थ, क े �वरुद्दायर क� गई ह�। हालाँ�क, अ�धकरण द्वारा सेवा से पदच्यु करने क� सज़ा को 50,000/- रूपए के जुमार्ने म बदल �दया गया था। भूतपूवर् लेिफ्टन�ट कनर्ल.एस. बेद� द्वाराअपील दायर करने क� अनुम�त देने क े �लए दायर एक आवे दन को अ�धकरण द्वारा खा�रज़ कर �दया गया था अपीलाथ� ने सामान् सेना न्यायाल क े दोष�सद्�ध और50,000/- रूपए के जुमार्ने क �नणर् को बरक़रार रखने क े अ�धकरण क े �नणरय से असंतुष्ट हो कर आपरा�धक अपील संख्या 997/2013 दायर क� है। भारत संघ ने सेवा से पदच्युत करने क� सज को जुमार्ने म� बदलने से असंतुष्ट होकर आपरा�धकअपील संख्या13/2013 दायर क� है। सु�वधा क े �लए, हम प�कार� को जैसा �क उन्ह� आपरा�धक अपील संख्या 997/2013 म� रखा गया है, उसी तरह संद�भर्त कर�गे

2. अपीलाथ� को �दनांक 24.07.1966 को भारतीय सेना मे�डकल कॉप्स म� �नयुक् �कया गया था। वह �दनांक 03.08.1984 को लखनऊ क े बेस हॉिस्पट म� �च�कत्स �वशेष� क े तौर पर तैनात था। �दनांक 15.05.1986 को दो म�हलाओं द्वारा अपीलाथ� क े �खलाफ �शकायत क� गई थी �क उसने जाँच क े दौरान उनक े गुप्तांग को अनु�चत रूप से छूर उनक े साथ दुव्यर्वहार �कया । जीओसी-इन-सी ने अपीलाथ� को सा�य सारांश दजर करने क े �लए संबद् करने क े �नद�श �दए, जो �दनांक 30.09.1986 को समाप्त हुए थ। क ु छ प्र�क्रया सं अ�नय�मतताओं क े कारण, �दनांक 01.10.1986 को सा�य का सारांश रद्द कर �दया गया था और एक नए �सरे से सा�य क े सारांश को दजर करने का �नद�श �दया गया था। सा�य क े सारांश क े आधार पर, संयोजक प्रा�धका ने अपीलाथ� पर सामान् सेना न्यायाल द्वारा�वचारण का �नद�श �दया। �दनांक 29.11.1986 को अपीलाथ� क े �वरुद्ध एक आर-पत्र दायर �कया गय उस पर भारतीय दंड सं�हता (भा.दं.सं.), 1860 क� धारा 354 क े �वपर�त, दो म�हलाओं पर उनका शील भंग करने क े इरादे से आपरा�धक बल का उपयोग करने का, एक नाग�रक अपराध करने का आरोप लगाया गया था। साधारण सेना न्यायाल द्वारा अपीलाथ� को �दनांक 09.12.1986 को दोषी ठहराया गया था और �दनांक 14.01.1987 को सेवा से पदच्यु �कए जाने क� सज़ा द� गयी थी।

3. �दनांक 30.05.1988 को सेना अ�ध�नयम, 1950 क� धारा 164 (2) क े तहत अपीलाथ� द्वारा दायर क� गई या�चका को खा�रज कर �दया गया था। या�चकाकतार् ने दोष�सद्� और सामान् सेना न्यायाल क� सजा को वषर्2010 म� �दल्ल� उच्च न्यायालय के सम� चुनौती थी। अपीलाथ� द्वारा दायर �रट या�चका को �दल्ल� उच न्यायालय ने सशस्त्रअ�धकरण, नई �दल्ल� क� प्रध पीठ को हस्तांत�रत कर �दय था। अ�धकरण ने अपीलाथ� क� सजा को बरकरार रखा, ले�कन सेवा से पदच्युत करन क� सजा को 50,000/- रुपये के जुमार्ने म बदल �दया। असंतुष्ट होने क कारण, अपीलाथ� ने उपरोक्त अपील दाय क�। प्रत्गण ने भी अ�धकरण क े सेवा से पदच्युत करन क� सज़ा को 50,000/- रुपये के जुमार्ने म� बदलने क े फ ै सले से असंतुष्ट होकर अपील दायर क� ह�।

4. श्री श्रीधर पोटा, अपीलाथ� क े �लए उपिस्थतफ़ािज़ल अ�धवक्ता ने प्रस्तुत �कया अपीलाथ� क� सजा पोषणीय नह�ं है क्य��क अ�भलेख पर मौजूद सा�य क� सामान् सेना न्यायाल और अ�धकरण दोन� द्वारा ठ�क से �ववेचना नह�ं क� गई थी। उन्ह�ने कहा �क श्रीम गीता रे क� गवाह�, जो अपीलाथ� क े प� म� है, को ध्यान म� नह�ं रखा गया है। उन्ह�ने आगे कहा �क लेिफ्टन� कनर्ल आ. शमार् क� गवाह� भीअपीलाथ� क े प� म� है। उन्ह�ने तकर् �दया � दोन� �शकायतकतार्ओं को जो बीमार� थी, उसक े �लए उनक� शार��रक जाँच आवश्यक थी। एक दमा से पी�ड़त थी और दूसर� को छोट� आंत क े घाव क� �शकायत थी। उन्ह�ने कहा �कअपीलाथ� 78 वषर का है और 50,000/- रुपये का जुमार्ना पहले ह� जम �कया जा चुका है। श्री श्रीधर के अन, इस न्यायालय द्वाराउनका �नवेदन स्वीकार नह�ं करने क� िस्थ�त, सजा म� बदलाव नह�ं �कया जाना चा�हए।

5. श्री �वक्रमबैनज�, प्रत्यक े �लए उपिस्थ फ़ािज़ल अ�त�रक् लोक अ�भयोजक ने तकर् प्रस्तुत �क अ�भलेख पर पयार्प्त सबूत, जो अपीलाथ� क े अपराध क� ओर इशारा करते ह�, िजनक� सामान्य सेना न्याया और अ�धकरण ने भी उ�चत रू से �ववेचना क� है। प्रत्गण का संबंध क े वल सेवा से पदच्युत करन क े दंड को 50,000/- रूपएक े जुमार्ने म बदलने से है। फ़ािज़ल अ�त�रक्त लोक अ�भयोजक ने तकर् �दया �अ�धकरण द्वारा सजा क बदलना अनु�चत था। अपीलाथ� ने दो रो�गय� क े साथ दुव्यर्वहार �कया था और �वशेष क� गवाह� भी यह दशारती है �क अपीलाथ� को �शकायतकतार्ओं केगुप्तांग को छ ू ने क� कोई आवश्यकता नह�ं थी।

6. हम अपीलाथ� क े इस तकर को स्वीकार करने म� असमथर है �क उसक� सजा अपोषणीय है। �शकायतकतार्ओं के सा�य का अवलोकन यह स्पष्ट करता है �अपीलाथ� ने उनक� शार��रक जाँच क े दौरान उनक े साथ दुव्यर्वह �कया। अ�भ.सा.-13 लेिफ्टन�ट कनर्ल. शमार, �च�कत्स, क े सा�य का यह आशय है �क जो रोगी श्वासनल� संबंधी दमा से पी�ड़त थी उसक� का�डर्यो वस्कुलर प्रणाल� क� जांच करने क� आवश्यकत, िजसम� छाती/स्तन� का अनावरण और स्तन� का स्पश शा�मल था। हालां�क, एक म�हला रोगी क े स्तन� और �नप्पल (स्तन� का अग्र ) को ऐंठना अनावश्य था। जहां तक अन्य �शकायतकतार् का बंध है, लेिफ्टन�ट कनर्ल आ. शमार् ने कह �क उनक े पे ट को जघन सहवधर् से �नप्पल तक पूर� तरह से अनावृत �कया जाना था और पेिप्टक अल्सर क� ज�टलता के मामले, यहां तक �क छाती क े दा� ओर मार कर देखना भी अ�नवायर् ह, िजसम� स्तन� को छूना शा�म है। ले. कनर्ल शमार् ने गवाह� द� �कऐसे मर�ज क े गुप्तांग को छ ू ना और �नप्ल� को ऐंठना पूर� तरह अनावश्य था। �शकायतकतार्ओं द्वार अपीलाथ� को झूठा फ ं साने का कोई मकसद नह�ं था, इस�लए, हम सामान्य सेना न्यायाल और अ�धकरण क े �नष्कषर् कसाथ सहमत है �क अपीलाथ� दो म�हला रो�गय� क े �खलाफ आपरा�धक बल का उपयोग करने क े आरोप म� दोषी है।

7. श्री श्रीधर ने प्रस्तुत �क �क भले ह� सेना न्यायाल द्वारा सेवा से पदच्यु करने क े दंड को बरकरार रखा जाए, ले�कन अपीलाथ� क े सभी प�शन लाभ को जब्त करन स्वतः प्र नह�ं है। उन्ह�ने प्रस्तुत � �क सामान्य सेना न्याया द्वार उसक� प�शन को जब्त करने का कोई भी आदेश, जैसा �क सेना अ�ध�नयम, 1950 क� धारा 71(ज) म� प्रस्ता�वत, नह�ं �कया गया है। इस�लए, अपीलाथ� प�शन क े भुगतान का हकदार है। उन्ह�ने भारत संघ बनाम �ब्रगे�डय पी.क े. द�ा (सेवा�नवृत) और भारत संघ बनाम पी.डी. यादव म� इस न्यायालयद्वार �दए गए �नणर्य�का आश्रय �लय

8. व्यिक्तय� द्वा सेना अ�ध�नयम क े अंतगर् �कए गए अपराध� और सेना न्यायालय द्वारा �सद्धदोष ठहर जाने क े सम्बन्ध जो दंड �दया जा सकता है, वह धारा 71 म� �दया गया है। धारा 71 (घ) सेवा से पदच्यु करने का उल्ले करती है और धारा 71 (ज) म� बढ़े हुए वेतन, प�शन या अन्य�नधार्�र प्रयोजन� आशय से सेवा क े समपहरण का प्रावध है। ऐसा व्यिक्त िजसे सेवा स पदच्युक्या बखार्स्�कया गया हो क े मामले म� ऐसी पद्च्युिक ्त बखार्स्तग क े समय पूरे बकाया वेतन व भ�े तथा अन्य सावर्ज�नक धन जो उसे �दए जाने हेतु बकाया है क े समपहरण का धारा 71(ट) म� प्रावध है। सेना प�शन �व�नयम, 1961 क े �व�नयम 16(क) का उल्ले करना प्रासं� है, िजसक े अनुसार सेवा से पदच्यु �कए गए अ�धकार� क� प�शन का राष्ट्रप�त �ववेका�धकार पर समपहरण �कया जा सकता है।

9. भारत संघ बनाम पी.क े. द�ा (सेवा�नवृत) (सुपरा) म� प्रत्य का कोटर् माशर �कया गया था और से व ा से पदच्युत �कए जान क े अ�त�रक्त तीन साल का सश्र कारावास भी �दया गया था। उसे सेवा�नवृ�� संबंधी लाभ� का भुगतान न �कए जाने म� प्रा�धका�र क� �निश्क्रय क े �खलाफ �शकायत करते हुए उसने �दल्ल� उच न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया �दल्ल� उच् न्यायालय ने माना �क सेवा से पदच्युत �कए जान क े प�रणामस्वरूप स्वयं ह� सेवा�नव संबंधी लाभ� का समपहरण नह�ं होता है। इस न्यायालय के सम� भारत संघ ने यह तकर् �दया था �क प�शन �व�यम क े �व�नयम 16(क) द्वारा प्रस्ता सेवा�नवृ�� संबंधी लाभ� क े समपहरण क� कायर्वाह� लं�बत थी और �दल्ल� उच न्यायालयको �ब्रगे�डयर.क े. द�ा द्वारा दायर क� गयी �रट या�चका को अनुम�त नह�ं प्रदान करनी चा�हए थ इस न्यायालय कामत था �क सेना न्यायाल द्वरा द� जाने वाल� सज़ा से सम्बं�धत धारा 71 और �व�नयम 16(क) का कायर्�ेत्र -अलग है। �व�नयम 16(क) एक ऐसी िस्थ�त पर �वचार करता हैजहां एक अ�धकार� को सेवा से बखार्स्तगी या हए जाने पर पदच्युत �कया जाता है और उसक� प�शन क े �नपटारे क े तर�क े का प्रावधान करतहै। धारा 71(ज) म� कोटर् माशर्ल कपूणर् होने पर प�शन क े समपहरण से सम्बं�धत सज़ा का प्रावधान ह अंततः, यह �नष्कषर् �नकाला गया �क दोन अ�धरोपण� क� प्रकृ�त औ �वषय-वस्त अलग है और धारा 71(ज) और �व�नयम 16(क) क े बीच कोई असंग�त नह�ं है|

10. भारत संघ बनाम पी.डी. यादव (सुपरा) म� इस न्यायालय द्वारा यहमाना गया था �क सेना अ�ध�नयम क� धारा 71 क े तहत द� गई सज़ा और प�शन �व�नयम क े �व�नयम 16(क) क े अंतगर् पा�रत आदेश पुणर्तः �भन् ह�। यह �नवेदन �क सेना अ�ध�नयम क� धारा 71 क े तहत सज़ा देने और �व�नयम 16(क) क े तहत आदेश पा�रत करने क े प�रणामस्वरूदोहरा संकट उत्पन होगा, इस न्यायालय द्वारा स्वी नह�ं �कया गया था।

11. धारा 71 क े तहत कोटर् माशर्ल द्वारा द� जाने वा सज़ा म� अन्य शािस्तय� के अलावअ�धका�रय� क े मामले म� सेवा से पदच्युत करन और प�शन क े उद्देश्से सेवा का समपहरण शा�मल है। �नःसंदेह, अपीलाथ� पर अ�धरो�पत सज़ा क े वल सेवा से पदच्युत �कया जान है। इसम� कोई �ववाद नह�ं है �क अपीलाथ� क� प�शन का समपहरण करने क े �लए प्रत्गण द्वारा धारा71(ज) का सहारा नह�ं �लया गया है। श्री श्रीध यह �नवेदन �क धारा 71(ज) क े तहत पा�रत आदेश क े अभाव म�, अपीलाथ� क� प�शन का समपहरण नह�ं �कया जा सकता है, महत्वपूणर् ह अ�धकरण का �नणर्, िजसक े द्वारा सेवा से पदच्युत करन क� सज़ा को 50,000/- रूपए के जुमार्ने म�बदल �दया गया था, इस अपील क� �वषय-वस्त है, जो �पछले 7 वष� से लं�बत है। अ�भलेख पर यह प्रस्तुत करन े के �लए कुछ भी न है �क प�शन �व�नयम क े �व�नयम 16(क) क े अंतगर् कायर्वाह�शुरू कर द गई है।

12. �दनांक 20.01.2013 क े एक आदेश द्वार, इस न्यायालय ने केवल �नष्दन संबंधी कायर्वा�हय पर रोक लगाई है। इन अपील� क� �वचारधीनता क े मद्देनज़ प�शन �व�नयम क े �व�नयम 16(क) क े तहत कायर्वाह� शुरू न करनाप्रत्गण क े �लए न्यायो�चतहो सकता है| प्रत्गण य�द चाहे, तो वे अपीलाथ� क� प�शन का समपहरण करने क े �लए प�शन �व�नयम क े तहत कायर्वाह� शुरू करने के �लए स्वतंत।

13. अ�धकरण ने यह कहते हुए �क अपीलाथ� का सेवा �रकॉडर बेदाग़ है, पदच्युत करन क� सज़ा को 50,000/- रूपए के जुमार्ने म� बदल �दय अ�धकरण ने सेवा से पदच्युत करन क� सज़ा क े अ�धरोपण को आश्चयर्जन रूप से असंगत पाय। अ�धकरण ने अपीलाथ� क े �खलाफ क� गई �शकायत म� देर� पर भी प्रकाश डाला ह हम अ�धकरण द्वारा पदच्युत करन क� सज़ा को 50,000/- रूपए के जुमार् म� प�रव�तर्त करने के �लए �दए गए कारण� से संतुष् नह�ं ह�। हम, अपीलाथ� द्वार एक �च�कत्सक होते हुए �वश्वास पद का दुरूपयोग कर �कए गए �नंदनीय आचरण, जो �मा योग्य नह�ं ह, को ध्यान म� रखते हुए पदच्युत करन क� सज़ा को बहाल करते ह�। हालाँ�क, हम प्रत्गण को यह �नद�श देते है �क सेना प�शन �व�नयम क े अंतगर्त कायर्वाह� शुरू कर पर फ ै सला लेते समय अपीलाथ� क े समस्त सेवा�रकॉडर और उसक� अ�धक आयु पर भी �वचार �कया जाए। य�द प्रत्गण सेना प�शन �व�नयम क े अंतगर्त कायर्वाह� शु न करने का �नणर्य लते है, तो अपीलाथ� सभी प�शन संबंधी लाभ� का हकदार होगा। अपीलाथ� द्वारा जमा कराई गई 50,000/- रूपए क� रा�शइसेसे उपािजर्त ब्या क े साथ उसे वा�पस कर द� जाए।

14. अपील� का �नपटान �कया जाता है।........................... न्य. (एल. नागेश्वर रा) (हेमंत गुप्त) (र�वन्द्र ) नई �दल्ल, 29 जुलाई, 2020 Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अस्वीकरण: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ के सी� प्रयोग हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक� एव यह �कसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं �कया | समस्त कायार्लयी एवं व्यावहा�रक प्रयोजन� हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स अ�भप्रमा�णत माना जाएगा और कायार्न्वयन तथा लागू �कए जाने ह उसे ह� वर�यता द� जाएगी।