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भारतीय सव�च्च न्याया
फ़ौजदार� अपील�य अ�धका�रता
फ़ौजदार� अपील सं. 555/2020
[�व.अनु.या.(फौजदार�) सं.3928/2020 से उत्पन]
पर�वंदर क
ं सल .....अपीलाथ�
बनाम
रा.रा.�े. �दल्ल
राज्यऔर अन्य .....प्रत्यथ
आदेश
JUDGMENT
1. अनुम�त प्र�नत|
2. यह आपरा�धक अपील अपीलाथ� द्वारा आपरा�धक अपील सं. 1284/2019 म� �दल्ल� उच्च न्याय, नई �दल्ल� द्वारा�दनांक 27 नवंबर 2019 को पा�रत आदेश से व्य�थत होकर दायर क� गई है| उपरोक्तआदेश द्वार उच्च न्यालय ने अपीलाथ� द्वारा दंड प्र�क्रया सं�हता रा 372 क े तहत दायर अपील, िजसम� �वशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस), उ�र िजला, रो�हणी िजला न्यायाल, �दल्ल� द्वारा समामला सं. 742/2007 म� द� सज़ा को बढ़ाने क� माँग, को ख़ा�रज कर �दया है|
3. यहाँ पर अपीलाथ� भा.दं.सं. क� धारा 364ए सहप�ठत धारा 34 क े तहत पंजीकृ त प्राथ�म सं. 742/2007 �दनां�कत 15.10.2007 म� �शकायतकतार् था और दूसरा प्रत्य यहाँ अ�भयुक्तथा| अपराध क� जाँच क े पश्चात, भा.दं.सं. क� धारा 364ए/302/201 क े तहत दूसरे प्रत्-अ�भयुक् क े �खलाफ आरोप-पत �दनां�कत 11.01.2008 दायर �कया गया था। सुपुदर्ग पर मामला �वशेष न्यायाधी (एनडीपीएस), उ�र िजला, रो�हणी न्यायाल, �दल्ल क� अदालत भेजा गया और दूसरे प्रत्यपर सत मुकद्दम सं. 58259/2016 क े अं त गर्त �वचारण �कया गया| उपयुर्क सत्मुकद्दम सं. 742/2007 म� �दनांक 30 जुलाई, 2019 क े �नणर् द्वार दूसरे प्रत्य को भा.दं.सं. क� धारा 364ए, 302 और 201 क े अधीन दंडनीय अपराध क े �लए दोषी माना गया था| �दनांक 17 अगस् 2019 क े आगामी आदेश द्वाराभा.दं.सं. क� धारा 302, 364ए और 201 क े तहत अपराध क े �लए उसे �नम्नसज़ा सुनाई गई:- “14. उपरोक् अवलोकन� क े मद्देज़र यह न्यायाल �नद�श देता है �क:- क) दोषी को भा.दं.सं. क� धारा 302 क े तहत आजीवन कारावास क� सज़ा द� जाती है और उसे 1 लाख रुए का जुमार्न देने का �नद�श �दया जाता है। जुमार्न का भुगतान नह�ं करने पर उसे पाँच वषर क े साधारण कारावास को भुगतने का �नद�श �दया जाता है| ख) दोषी को भा.दं.सं. क� धारा 364ए क े तहत आजीवन कारावास क� सज़ा द� जाती है और उसे 1 लाख रुपएका जुमार्न देने का �नद�श �दया जाता है। जुमार्न का भुगतान नह�ं करने पर उसे पाँच वषर क े साधारण कारावास को भुगतने का �नद�श �दया जाता है| ग) दोषी को भा.दं.सं. क� धारा 201 क े तहत दंडनीय अपराध क े �लए सात वषर क े कठोर कारावास क� सज़ा द� जाती है और उसे 50,000/- रुए का जुमार्न अदा करने का �नद�श �दया जाता है| जुमार्न का भुगतान नह�ं करने पर उसे एक वषर क े साधारण कारावास को भुगतने का �नद�श �दया जाता है| सभी सज़ाएँ एक साथ चल�गी| दं.प.सं क� धारा 428 का लाभ दोषी को भा.दं.सं. क� धारा 201 क े रूप म��दया जाएगा|
4. �शकायतकतार, जो �क मृतक लड़क े क े �पता ह�, ने अ�त.सत.न्य./�वशेष न्यायाधी (एनडीपीएस) उ�र िजला, रो�हणी न्यायाल, �दल्ल� द्वारा सत्र मामला. 58259/2016 म� द� सज़ा क े आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर क� िजसम� सज़ा को बढ़ा क े मृत्यु दंडदेने क� माँग क� गई| दंड प्र�क्रया सं, 1973 (सं��प्त म�दं.प.सं) क� धारा 372 क े तहत उच्च न्यायालय के समदायर अपील म� यह मामला था �क दूसरे प्रत्-दोषी को �मल� आजीवन कारावास क� सज़ा अपयार्प्त है और मृत्यु दंड म� बढ़ चा�हए| �दनांक 27 नवंबर 2019 क े आ�े�पत �नणर्य द्वार �दल्ल� उच्च न्यायालय ने अपील को चलाने योग्य ना मा हुए खा�रज़ कर �दया|
5. हमने अपीलाथ� क� ओर से उपिस्थ फ़ािज़ल अ�धवक्त श् अिश्वन भारद्वा और रा.रा.�े �दल्ल�राज् क� ओर से उपिस्थत फ़ािज़ल अ�धवक्तश् �चराग एम. श्र को सुना है|
6. अपीलाथ� क े फ़ािज़ल अ�धवक्त द्वार यह तक र ् �दय गया �क हालाँ�क प्रत्यथ�. 2 ने एक �नद�ष बच्च क� हत्य क� थी, सत न्यायाल ने मृत्युदं क� सज़ा देने क े बजाय क े वल आजीवन कारावास क� सज़ा द�| यह तक र ्�दया गया �क दं.प.सं क� धारा 372 क े परंतुक क े मद्देनज़र जोपी�ड़त को अपील दायर करने का अ�धकार देता है �क जब दोषी को कम अपराध हेतु सज़ा द� जाती है तो अपील क े दायरे को क े वल कम अपराध क े �लए ह� सी�मत करने अ�पतु कम सज़ा क े �लए सी�मत नह�ं करने का कोई कारण नह�ं बनता| यह �नवेदन �कया गया �क 15.10.2007 को जब अपीलाथ� क े बेटे का अपहरण �कया गया था और �फरौती क� माँग क� गई थी जो �क दूसरे प्रत्यको भी द� गई थी, ले�कन अपहरण क े उपरांत उसक े बेटे क� बेरहमी से हत्य कर द� गई थी। इस प्रक, यह प्रस् �कया जाता है �क दूसरे प्रत्यक े �लए यह आजीवन कारावास क� सज़ा को बढ़ा कर मृत्य दंड क� सज़ा म� वृद्� क े �लए एक उपयुक् मामला है। फ़ािज़ल अ�धवक्त ने यह प्रस् �कया �क उच् न्यायाल ने दं.प.सं क� धारा 372 क े स्पष अथर क े �वपर�त, दं.प.सं क� धारा 372 क े तहत प्रावध क े साथ-साथ संद�भर्त �नणर्य� पठ�क प्रकासे �वचार नह�ं �कया और अपील को खा�रज कर �दया|
7. दूसर� ओर रा.रा.�े �दल्ल� राज् क� ओर से उपिस्थत फ़ािज़ल अ�धवक्त द्वार यह प्रस् �कया गया �क दं.प.सं क� धारा 372 और धारा 377 क े तहत प्रावध क े पठन से यह स्पष होता है �क दं.प.सं क� धारा 372 क े तहत पी�ड़त द्वारादायर अपील जो अ�भयुक् क े बर� होने क� िस्थ�तया कम अपराध क े �लए दोषी ठहराने अथवा क े वल अपयार्प मुआवज़ा देने क� िस्थ� म� बनाए रखने योग् है, जब�क दं.प.सं क� धारा 377 क े तहत सत न्यायाल द्वार अपयार्प सज़ा क� िस्थ� म� राज् सरकार उच् न्यायाल म� अपील करने का अ�धकार रखती है। फ़ािज़ल अ�धवक्त द्वार यह कहा गया है �क सज़ा क� वृद्� क े �लए पी�ड़त दं.प.सं क� धारा 372 क े तहत अपील दायर नह�ं कर सकता|
8. दोन� प�� क े फ़ािज़ल अ�धवक्तगण को सुनने क े बाद हमने अ�भलेख पर उपलब्ध तथ्य और दंड प्र�क सं�हता, 1973 क े प्रासं� प्रावधा का अवलोकन �कया है|
9. दंड प्र�क सं�हता, 1973 का अध्यायXXIX ‘अपील�’ को संबो�धत करता है और धारा 372 यह स्पष्ट करतहै �क कोई अपील तब तक नह�ं दायर हो सकती जब तक सं�हता द्वारा ऐसाउ�चत ना हो या �फर �कसी और कानून क े तहत जो उस समय कायर्रत ह| यह �ववाद नह�ं है �क तत्का मामले म� अपीलाथ� ने क े वल दं.प.सं क� धारा 372 क े तहत अपील क� है| 2009 क े अ�ध�नयम 5 द्वारादं.प.सं क� धारा 372 म� यह परंतुक डाला गया है| धारा 372 और परंतुक जो बाद म� डाला गया है को �नम्नप्रकार सपढ़ा जाता है:-
372. जब तक अन्यथा उपबं�धत न ह कोई अपील दायर नह�ं क� जा सकती - फ़ौजदार� न्यायालय के �कसी �नणर्य य आदेश से कोई अपील नह�ं क� जा सकती जब तक �क वह इस सं�हता द्वारा या तत्काल�न प्रवृ� �कसी अन्य �व�ध द् उपबिन्धत ह| बशत� �क न्यायालय द्वारा अ�भयुक को दोषमुक्त करने या न्यूनतम अपराध क �लए दोष�सद्ध करने या अपयार्प्त प्र अ�धरो�पत करने वाले आदेश क े �वरुद् पी�ड़त को अपील दायर करने का अ�धकार होगा तथा ऐसी अपील उस न्यायालय म� दायर होगी िजसम� न्यायालय के दोष�सद्� क े आदेश क े �वरुद्ध सामान: अपील दायर होती है| परंतुक का पठन यह स्पष करता है �क जहाँ तक पी�ड़त क े अपील करने क े अ�धकार का संबंध है, यह तीन संभावनाओं तक सी�मत है, अथार्त् अ�भयुक् को बर� करना; अ�भयुक् को कम अपराध क े �लए दोषी मानना; या अपयार्प्त मुआवज लगाने हेतु| हालाँ�क पी�ड़त को अपयार्प मुआवज़ा लगाने क� िस्थ� म� अपील को प्राथ�मक देने का अवसर �दया जाता है, ले�कन साथ ह� साथ पी�ड़त द्वार सज़ा क े आदेश को अपयार्प्मान उस पर प्रश्ठा कर अपील करने का कोई प्रावध नह�ं है, जब�क दं.प.सं क� धारा 377 राज् सरकार को सज़ा बढ़ाने हेतु अपील को प्राथ�मकता ने क� शिक् प्रदान करत है| हालाँ�क, राज् सरकार क े �लए दं.प.सं क� धारा 377 क े तहत अपयार्प सज़ा क े �लए अपील दायर करने का रास्ताखुला है ले�कन उसी तरह अपयार्प सज़ा क े आधार पर दं.प.सं क� धारा 372 क े तहत पी�ड़त द्वार कोई अपील दायर नह�ं क� जा सकती है। यह सुस्था�प है �क अपील का उपाय कानून से सृिजत है| जब तक �क इसे या तो दंड प�क्रय सं�हता अथवा तत्समय प्र �कसी अन् कानून द्वारा पदान नह�ं �कया जाता तब तक पी�ड़त क े कहने पर सज़ा को बढ़ाने वाल� कोई भी अपील सुनवाई योग्यनह�ं है| आगे हम यह दृिष्टक रखते ह� �क उच्च न्यायालय न राष्ट्र�य म�हला आयोग बनाम �द राज्य अन् (2010) 12 एससीसी 599 क े मामले म� �दए गए इस न्यायालय के �नणर्यको संद�भर् कर इस पर भरोसा �कया है और अपील को दायर करने योग्यन मानकर खा�रज़ �कया|
10. उपरोक् कारण� से, हम इस अपील म� कोई गुणागुण नह�ं पाते ह�, िजससे �क उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत आदेश म� हस्त�े �कया जा सक े | अपील को तदनुसार खा�रज �कया जाता है| न्य.,............................ [अशोक भूषण] न्य.,.............................. [आर. सुभाष रेड्ड] नई �दल्ल� 28 अगस्, 2020 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अस्वकरण: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ के सी�मत प् हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं �कया ज| समस्त कायार्लयी एवं व्यावहा� प्रयोजन� हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स्वरूप ह� अत माना जाएगा और कायार्न्वयन तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाए|