Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 3093 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 23478 वर्ष 2019 से उद्भू )
न्यू इंति0या एश्योरेंस क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
श्रीम ी सोमव ी एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
सह
सिसविवल अपील संख्या 3094 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 4801 वर्ष 2020 से उद्भू )
न्यू इंति0या एश्योरेंस क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
श्रीम ी संगी ा एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
सह
सिसविवल अपील संख्या 3095 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 4643 वर्ष 2020 से उद्भू )
न्यू इंति0या एश्योरेंस क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
अज़म ी खा ून एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
सह
सिसविवल अपील संख्या 3096 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 5441 वर्ष 2020 से उद्भू )
&ोलमं0लम एमएस जनरल बीमा क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
उमारानी एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
सह mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
सिसविवल अपील संख्या 3097 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 6381 वर्ष 2020 से उद्भू )
न्यू इंति0या एश्योरेंस क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
श्रीम ी पिंपकी एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
सह
सिसविवल अपील संख्या 3098 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 7556 वर्ष 2020 से उद्भू )
न्यू इंति0या एश्योरेंस क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
नानक &ंद एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
सह
सिसविवल अपील संख्या 3099 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिस) संख्या 8250 वर्ष 2020 से उद्भू )
ओरिरएंटल एश्योरेंस क
ं पनी लिलविमटे0 ...... अपीलार्थी9
बनाम
श्रीम ी रिंरक
ू देवी एवं अन्य ...... प्रत्यर्थी9
विनर्णय
न्यायमूर्ति अशोक भूर्षर्ण
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT
2. विवति क े सामान्य प्रश्नों को उठाने वाली इन अपीलों को एक सार्थी सुना गया और इस सामान्य विनर्णय द्वारा अभिभविनर्ण[9] विकया गया। इन अपीलों का विनर्णय करने क े लिलए, सिसविवल अपील संख्या................. विवशेर्ष अनुमति याति&का (सिसविवल) संख्या 23478 वर्ष 2019 से उद्भू ), न्यू इंति0या एश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम श्रीम ी सोमव ी एवं अन्य क े थ्यों को विवस् ार से समझना और अन्य अपीलों क े थ्यों को संक्षेप में समझना पयाप्त है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. ये अपीलें मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण (एमएसीटी) द्वारा दावेदारों क े पक्ष में दो शीर्ष[, अर्थीा "सार्थीी की क्षति " और "प्रेम और स्नेह का नुकसान" क े ह मुआवजे क े आदेश से उद्भू उच्च न्यायालय क े विनर्णयों क े विवरूद्ध ीन बीमा क ं पविनयों, अर्थीा ् न्यू इंति0या एश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0, &ोलमं0लम एमएस जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 और द ओरिरएंटल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 द्वारा दायर की गई हैं, सिसविवल अपील सं.........../2020 (विवशेर्ष अनुमति याति&का (दीवानी) संख्या 23478 वर्ष 2019 से उद्भू ), न्यू इंति0या एश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम श्रीम ी सोमव ी एवं अन्य
4. श्रीम ी सोमव ी क े पति राम सिजयावन की मृत्यु विदनांक 06.12.2001 को वाहन दुर्घटना में हो गयी और उनक े परिरवार में उनकी विव वा श्रीम ी सोमव ी और सा नाबालिलग हैं। मोटर वाहन अति विनयम, 1988 की ारा 166 क े ह दायर की गई दावा याति&का संख्या 7 वर्ष 2002 में रु. 15,25,000/- क े मुआवजे का दावा विकया गया र्थीा। 22.03.2003 विदनांविक विनर्णय द्वारा एमएसीटी ने 9% ब्याज क े सार्थी रु.1,67,000/- क े दावे की अनुमति दी। श्रीम ी सोमव ी देवी और अन्य द्वारा उच्च न्यायालय में एफ.ए.एफ.ओ. संख्या 1894 वर्ष 2003 में एक अपील दायर की गई। उच्च न्यायालय ने दावेदारों की अपील को स्वीक ृ ति दी और रू. 12,54,000/- क े मुआवजे का आदेश विदया। यह अपील बीमा क ं पनी द्वारा 25.02.2019 विदनांविक उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े विवरूद्ध दायर की गई है। इस अपील में दो शीर्ष[ अर्थीा, मद सं. (vi) ) और
(vi) i) i) ) क े अन् ग मुआवजे क े अनुदान को &ुनौ ी दी गई है, जो विनम्नलिललिख प्रभाव क े हैं:- “(vi) ) प्रे और स्नेह की हाविन = Rs. 4,00,000/- (प्रत्येक आठ दावेदारों को रू. 50,000/- )। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
(vi) i) i) ) दावेदार/अपीलार्थी9 संख्या 2 से 8 का पै ृक क्षति क े लिलए मुआवजा = Rs. 2,80,000/- (प्रत्येक दावेदार को रू. 40,000/-)”
5. इस न्यायालय ने विदनांक 24.04.2019 को नोविटस जारी कर े हुए विनम्नलिललिख आदेश पारिर विकया:- "आदेश विवलम्ब क्षम्य। &ार सप्ताह में वापसी योग्य नोविटस जारी की जाय जो इस मुद्दे क सीविम हो विक क्या इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजा और प्रेम व स्नेह का नुकसान दोनो क े लिलए आदेश विदया जा सक ा र्थीा। इसक े अलावा, दास् ी सेवा अनुमन्य है। अगले आदेश क, आक्षेविप आदेश क े खण्0 (VI) ) में वर्णिर्ण दावेदारों को देय 2 मुआवजे राभिश का भुग ान स्र्थीविग रहेगा। जो विनम्नव है: “प्रेम और स्नेह की क्षति = रु. 4,00,000/- (50,000/- प्रत्येक आठ दावेदारों को) ”
6. इस न्यायालय द्वारा जारी नोविटस क े अनुसरर्ण में, प्रत्यर्थी9गर्ण प्रस् ु हुए और प्रत्युत्तर र्थीा लिललिख कर्थीन दालिखल विकया । सिसविवल अपील नंबर..../2020 ( विवअया (सिस) सं. 4801 वर्ष 2020 से उद्भू ), न्यू इंति0या एश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम संगी ा देवी एवं अन्य Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
7. प्रत्यर्थी9 संगी ा देवी क े पति संजय क ु मार की मृत्यु 12.01.2015 को मोटर वाहन दुर्घटना में हो गयी। प्रत्यर्थी9गर्ण द्वारा एमएसीपी दावा याति&का सं. 862 वर्ष 2016 दायर की गयी सिजस दावा याति&का को मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण द्वारा 9% ब्याज क े सार्थी रु. 17,71,000/- का मुआवजा दे े हुए स्वीकार विकया गया। दावेदारों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम नानू राम @ &ुह्रू राम एवं अन्य (2018)18 एससीसी 130 क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय क े आ ार पर उच्च न्यायालय ने रू. 50,000/- की दर से 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े लिलए प्रत्येक आठ दावेदारों को मुआवजा का आदेश विदया और इसी प्रकार रु. 40,000/- की दर से 'सार्थीी की क्षति ' क े लिलए प्रत्येक आठ दावेदारों को मुआवजा का आदेश विदया। विदल्ली उच्च न्यायालय क े फ ै सले से व्यभिर्थी होकर बीमा क ं पनी ने उच्च न्यायालय क े आदेश को &ुनौ ी दे े हुए अपील दायर की है। सिसविवल अपील सं...../2020 ( विवअया (सिस) सं. 4643 वर्ष 2020 से उद्भू ), न्यू इंति0या एश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम अजम ी खा ून एवं अन्य
8. मोहम्मद हसीबुल बस्सन की मृत्यु 29.10.2007 को एक मोटर वाहन दुर्घटना में हो गयी। प्रत्यर्थी9गर्ण द्वारा दावा याति&का दायर की गयी सिजसे मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण द्वारा ब्याज क े सार्थी रु. 17,32,776/- का मुआवजा दे े हुए स्वीकार विकया गया। अपीलक ा ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने प्रत्येक सा दावेदारों को 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े लिलए 50,000/- रुपये और प्रत्येक सा दावेदारों को 'सार्थीी की क्षति ' क े लिलए 40,000/- रुपये की दर से मुआवजे को मंजूरी दी। विदल्ली उच्च न्यायालय क े विनर्णय से व्यभिर्थी बीमा क ं पनी ने अपील की है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिसविवल अपील सं.........../2020 (विव अ या (सिस) सं. 5441 वर्ष 2020 से उद्भू ), &ोलमं0लम एमएस जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम उमारानी एवं अन्य
9. मृ क क ृ ष्र्णासामी क े सार्थी 07.09.2014 को एक वाहन दुर्घटना हो गयी सिजनकी बाद में मृत्यु हो गयी। प्रत्यर्थी9गर्ण द्वारा दावा याति&का दायर की गई सिजसे स्वीकार कर े हुए मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा न्यायाति करर्ण ने रु. 13,60,000/- क े मुआवजे को मंजूरी दी। बीमा क ं पनी द्वारा अपील दायर की गई। उच्च न्यायालय द्वारा 'सार्थीी की क्षति ' क े ह एक लाख रुपये की राभिश और 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े ह ीन लाख की पुवि• की गई, सिजसे बीमा क ं पनी ने इस अपील में &ुनौ ी दी है। सिसविवल अपील सं........../2020 ( विवअया (सिस) सं. 6381 वर्ष 2020 से ं पनी लिलविमटे0 बनाम श्रीम ी पिंपकी और अन्य
10. विदनेश क ु मार नाम क े व्यवि‚ की मोटर वाहन दुर्घटना में ने 11.06.2014 को मृत्यु हो गई। प्रत्यर्थी9गर्ण द्वारा दायर दावा याति&का को मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण द्वारा रु 13,01,776/- क े मुआवजे क े सार्थी मंजूरी दी गयी। दावेदारों ने उच्च न्यायालय क े समक्ष अपील दायर की सिजसने मुआवजे को बढ़ा विदया। उच्च न्यायालय ने 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े ह प्रत्येक &ार दावेदारों को 50,000/- रुपये और 'सार्थीी की क्षति ' क े लिलए प्रत्येक &ार दावेदारों को 40,000/- रुपये की दर से मुआवजे को मंजूरी दी। उच्च न्यायालय क े विनर्णय से व्यभिर्थी बीमा क ं पनी ने यह अपील की है। सिसविवल अपील सं......../2020 ( विव अ या (सिस) सं. 7556 वर्ष 2020 से Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ं पनी लिलविमटे0 बनाम नानक &ंद एवं अन्य
11. गौरव की मृत्यु 23.09.2010 को एक मोटर वाहन दुर्घटना में हो गयी। मृ क क े मा ा-विप ा द्वारा दावा याति&का दायर की गई र्थीी, सिजसे रू. 4,83,348/- क े मुआवजे क े सार्थी मंजूरी दी गयी। दावेदारों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की सिजसे स्वीकार कर लिलया गया। उच्च न्यायालय ने 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े ह प्रत्येक दो दावेदारों को 50,000/- रुपये और 'सार्थीी की क्षति ' क े लिलए प्रत्येक दो दावेदारों को 40,000/- रुपये की दर से मुआवजे को मंजूरी दी। उच्च न्यायालय क े विनर्णय से व्यभिर्थी होकर यह अपील दायर की गयी। सिसविवल अपील सं........./2020 ( विवअया (सिस) No. 8250 वर्ष 2020 से उद्भू ), द ओरिरएंटल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम श्रीम ी रिंरक ू देवी एवं अन्य
12. बीरबल क ु मार क े सार्थी 27.07.2008 एक दुर्घटना हो गयी सिजसमें उनकी मृत्यु हो गई। प्रत्यर्थी9गर्ण द्वारा दायर की गयी बीस लाख रू. का दावा करने वाली दावा याति&का को मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण द्वारा रु. 5,80,000/- क े मुआवजे को मंजूरी दे े हुए स्वीकार विकया गया। बीमा क ं पनी ने अपील दायर की। विट†ब्यूनल ने प्रत्येक दावेदार अर्थीा पत्नी,दो बच्चे और विप ा को 40,000/- रु. की दर से सं ान विवर्षयक मुआवजा क ु ल रु. 1,60,000/- की मंजूरी दी। बीमा क ं पनी द्वारा दायर अपील में उच्च न्यायालय ने &ार दावेदारों में से प्रत्येक को 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े ह मुआवजे को और बढ़ा कर 50,000/- रुपये की दर से क ु ल राभिश दो लाख रुपये कर विदया। उच्च न्यायालय क े फ ै सले से व्यभिर्थी बीमा क ं पनी ने यह अपील की है।
13. हमने अपीलक ा क े लिलए विवद्व अति व‚ा र्थीा दावेदारों क े लिलए विवद्व अति व‚ा को सुना। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. इन सभी अपीलों में, विव&ार क े लिलए एकमात्र विवर्षय है दो शीर्ष[,अर्थीा, (ए) सार्थीी की क्षति, और (बी) प्रेम और स्नेह की क्षति क े ह दावेदार को विदया जाने वाला मुआवजा। 'सार्थीी' क े संबं में, प्रश्न यह है विक क्या क े वल पत्नी ही सार्थीी की क्षति क े ह मुआवजे क े लिलए हकदार है या यह बच्चों और मा ा विप ा को भी प्रदान विकया जा सक ा है।
15. अपीलक ाओं क े विवद्व अति व‚ा का क है विक नेशनल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम प्रर्णय सेठी और अन्य (2017)16 एससीसी 680 क े मामले में इस न्यायालय की संविव ान पीठ ने यह प्रति पाविद विकया है विक क े वल ीन पारंपरिरक शीर्ष हैं अर्थीा ् (i) ) 'संपलित्त का नुकसान', (i) i) ) 'सार्थीी की क्षति ' और (i) i) i) ) 'अंति म संस्कार व्यय', सिजसक े लिलए संविव ान पीठ द्वारा विन ारिर राभिश क्रमशः रु. 15,000/-, रु. 40,000/- और रु. 15,000/- है। इस प्रकार, पारंपरिरक शीर्ष क े ह क ु ल राभिश रु. 70,000/- र्थीी और पारंपरिरक शीर्ष[ क े ह राभिश रु. 70,000/- से अति क नहीं हो सक ी।
16. यह कहा गया है विक 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' शीर्ष क े ह दी गई राभिश पूरी रह से अति कारिर ा रविह है और 'सार्थीी की क्षति ' क े ह दी गई राभिश रु. 40,000/- से अति क नहीं हो सक ी है और 'सार्थीी की क्षति ' की राभिश क े वल पत्नी को देय है जो रु. 40,000/- की हकदार है और अति करर्ण और उच्च न्यायालयों ने सार्थीी की क्षति की राभिश प्रत्येक दावेदार, यानी पत्नी,बच्चों और मा ा-विप ा स्वीक ृ कर गल ी की है।
17. यह कहा गया है विक संविव ान पीठ क े बाद भी, इस न्यायालय ने पारंपरिरक शीर्ष[ 'संपलित्त की हाविन' क े ह रु. 15,000/-, 'सार्थीी की क्षति ' क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ह रु. 40,000/- और 'अंति म संस्कार ख&' क े लिलए रु. 15,000/- की मंजूरी दी है। यह कहा गया है विक प्रर्णय सेठी क े मामले में विनर्णय क े बाद, इस न्यायालय ने प्रर्णय सेठी क े मामले में विनर्णय क े अनुसार भुग ान को पारंपरिरक शीर्ष[ क े ह सीविम रखा र्थीा, 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े सार्थी-सार्थी प्रत्येक दावेदार को 'सार्थीी की क्षति ' शीर्ष क े ह मुआवजा देने का उच्च न्यायालय का आक्षेविप विनर्णय इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति क े विवपरी है और इसे अपास् विकया जाना &ाविहए।
18. द् ओरिरयंटल इंश्योरेंस क ं पनी लिल. बनाम श्रीम ी रिंरक ू देवी एवं अन्य क े मामले में अपीलक ा की ओर से प्रस् ु विवद्व अति व‚ा द्वारा एक अति रिर‚ कर्थीन विकया गया है। विवद्वान अति व‚ा का कहना है विक यद्यविप एमएसीटी ने &ार दावेदारों को 'सार्थीी की क्षति ' क े 40,000 रू. की दर से मुआवजा की मंजूरी देकर त्रुविट की है, लेविकन बीमा क ं पनी द्वारा दायर अपील में उच्च न्यायालय ने 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े ह मुआवजे को और बढ़ा विदया है। जब दावेदारों ने अपील दायर नहीं की, ो बीमा क ं पनी द्वारा दायर अपील पर मुआवजा नहीं बढ़ाया जा सक ा र्थीा। विवद्वान अति व‚ा का आगे कहना है विक उच्च न्यायालय ने अपीलक ा द्वारा अपील क े सार्थी जमा की गई वै ाविनक राभिश को विदल्ली उच्च न्यायालय में खोले गए एएएसआरए फ ं 0 में जमा करने का विनदŒश देकर और त्रुविट की है, ऐसा विनदŒश नहीं विदया जाना &ाविहए र्थीा क्योंविक अपीलक ा द्वारा विवति का सारवान प्रश्न उठाया गया है और अपील स्वीकार विकये जाने योग्य है।
19. अपीलार्थी9 क े अति व‚ा क े कर्थीन का खं0न कर े हुए दावेदारों की ओर से प्रस् ु विवद्वान अति व‚ा ने क विदया है विक प्रत्येक दावेदार को 40,000/- रुपये की दर से 'सार्थीी की क्षति ' क े ह मुआवजा विदया जाना इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति क े अनुरूप है। यह कहा गया है विक 'सार्थीी की क्षति ' शीर्ष क े ह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मुआवजा विदए जाने की संकीर्ण व्याख्या नहीं हो सक ी। 'सार्थीी की क्षति ' शीर्ष क े ह मुआवजा ठीक ही न क े वल पत्नी को विदया गया है बल्कि•क बच्चों और मा ा विप ा को भी विदया गया है। दावेदार क े विवद्व अति व‚ा ने उच्च न्यायालय क े विनर्णयों का समर्थीन विकया है।
20. पक्षकारों क े विवद्व अति व‚ाओं ने इस न्यायालय क े विवभिभन्न विनर्णयों का भी अवलंब लिलया है सिजनका उल्लेख कर्थीनों पर विवस् ार से विव&ार कर े समय विकया जाएगा।
21. हमने पक्षकारों क े विवद्वान अति व‚ाओं क े कर्थीनों पर विव&ार विकया और अभिभलेख का परिरशीलन विकया।
22. 'प्रति कर' एक व्यापक पद है सिजसमें नुकसान क े लिलए दावा सल्किम्मलिल है। प्रति कर कारिर की गयी क्षति क े लिलए प्रायति‘ क े द्वारा हो ा है।
23. मोटर वाहन अति विनयम, 1988 की ारा 166 क े ह विकसी दावे में मुआवजे का दावेदार न्यायोति& मुआवजे का हकदार हो ा है। न्यायसंग मुआवजा समान और उति& होना &ाविहए। जीवन की क्षति का समान मात्रा में मुआवजा नहीं विदया जा सक ा, लेविकन मोटर वाहन अति विनयम क े ह वै ाविनक प्राव ान विव ायन का एक सामासिजक विहस्सा है सिजसे परिरवारिरक सदस्य की क्षति की भरपाई, क ु छ हद क क्षति की भरपाई और दावेदार को न्यायसंग सीमा क मुआवजा प्रदान करवाने क े उद्देश्य से अति विनयविम विकया गया है।
24. हम महाप्रबं क क े रल राज्य सड़क परिरवहन विनगम, वित्रवेंद्रम बनाम सुसम्मा र्थीॉमस (श्रीम ी) एवं अन्य, (1994)2 एससीसी 176 क े मामले में इस न्यायालय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े विनर्णय का उल्लेख कर सक े हैं। मोटर वाहन अति विनयम, 1939 क े ह मुआवजे की अव ारर्णा पर विव&ार कर े हुए विनर्णय क े प्रस् र 5 में इस न्यायालय ने विनम्नव ारिर विकया:- "5. मात्रा का विन ारर्ण इस बा से होना &ाविहए विक त्कालीन समाज " विकस राभिश को इ ना उति& मानेगा विक गल काय करने वाला व्यवि‚ अपने पड़ोसिसयों क े सामने सिसर उठाकर कह सक े विक उसने सही काय विकया है।" मंजूर की गयी राभिश अत्य•प नहीं होनी &ाविहए क्योंविक एक मु‚ समाज में विवति जीवन को उदार ा पूवक मू•यवान मान ा है। इस सब का अर्थी यह है विक दी गई राभिश स्वीक ृ विवति क मानकों से उति& और न्यायसंग होनी &ाविहए।
25. उपरो‚ मामले में भी, इस न्यायालय ने 'सार्थीी की क्षति ' क े पारंपरिरक शीर्ष क े ह राभिश को मंजूरी विदया र्थीा।
26. एक अन्य विनर्णय सिजस पर ध्यान देने की आवश्यक ा है, वह है सरला वमा (श्रीम ी) एवं अन्य बनाम विदल्ली परिरवहन विनगम एवं एक अन्य, (2009)6 एससीसी 121, सिजसमें विनर्णय क े प्रस् र 16 में 'न्यायोति& मुआवजे' को स्प• कर े हुए इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख प्रति पाविद विकया: "5..."न्यायोति& मुआवजा पयाप्त मुआवजा हो ा है जो मामले क े थ्यों और परिरल्किस्र्थीति यों क े अनुसार उति& और न्यायसंग हो, विकसी गल क ृ त्य क े कारर्ण हुए नुकसान की भरपाई करने क े लिलए, जहाँ क पैसा यह कर सक े ो मुआवजे क े लिलए सुस्र्थीापति सिसद्धान् ों को अपनाकर। इसका उद्देश्य लाभ का स्रो या बहु भारी भरकम नहीं है।
27. इस न्यायालय ने पत्नी को 'सार्थीी की क्षति ' शीर्ष क े ह राभिश भी प्रदान की। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
28. हमें नेशनल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 (उपरो‚) क े मामले में ०संविव ान पीठ क े विनर्णय पर भी ध्यान देने की आवश्यक ा है सिजसमें इस न्यायालय क े पूवव 9 विनर्णयों को ध्यान में रखा गया है जहां सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजे को मंजूरी दी गयी र्थीी। पैराग्राफ 46 में, विनम्नलिललिख प्रति पाविद विकया गया र्थीा:-
क्षति और अंति म संस्कार क े ख&[ से संबंति है। सं ोर्ष देवी क े मामले में, दो-न्याया ीश पीठ ने पारंपरिरक विवति का पालन विकया और शव को ले जाने क े लिलए रु.5000/-, अंति म संस्कार ख& क े रूप में रु. 10,000/- और सार्थीी की क्षति क े लिलए रु. 10,000/- को मंजूरी दी। सरला वमा क े मामले में, न्यायालय ने संपलित्त क े नुकसान क े लिलए रु. 5000/- अंति म संस्कार क े लिलए रु. 5000/- और रू. 10,000/- सार्थीी की क्षति क े लिलए स्वीक ृ विकया। राजेश (2013) 9 एससीसी 54 क े मामले में, न्यायालय ने सार्थीी की क्षति क े लिलए रु. 1,00,000/- और अंति म संस्कार ख&[ क े लिलए रु. 25,000/- की अनुमति दी। इसने नाबालिलग बच्चों की देखभाल और मागदशन को हुई क्षति क े लिलए रू. 1,00,000/- भी स्वीक ृ विकया। न्यायालय ने इसे इस सिसद्धां क े आ ार पर बढ़ाया विक सामासिजक-आर्णिर्थीक मुद्दे पर एकरूप ा और ल्किस्र्थीर ा प्राप्त करने क े लिलए बनाए गए विकसी सिसद्धान् को समय समय पर जां&ना &ाविहए और विवति क सिसद्धान् ों से उसका विमलान करना &ाविहए जैसा विक सन् ोर्ष देवी (2012) 6 एससीसी क े मामले में ारिर विकया गया है।
421. पुनर्विव&ार क े सिसद्धां पर, इसने पारंपरिरक शीर्ष[ क े ह अलग- अलग राभिश य की। न्यायालय ने सिजस &ीज पर विव&ार विकया वह है मंहगाई का थ्य और मू•य सू&कांक। यह सार्थीी की क्षति की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अव ारर्णा से भी द्रविव है। हम ऐसा इसलिलए सो& े हैं क्योंविक इस संबं में जो कहा गया है। हम उद्धृ कर े हैं: (राजेश मामला):- “17. विवति क भार्षा शैली में, "सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजा" दूसरे सार्थीी का उसक े /उसकी सार्थीी क े सार्थी संग- सार्थी,देखभाल,सहाय ा,सुख,मागदशन,सांत्वना,स्नेह और शारीरिरक संबं का अति कार है। यह विक नुकसान क े गैर विवत्तीय शीर्ष[ को हमारे न्यायालयों द्वारा उति& रूप से समझा नहीं गया है। साह&य, प्रेम,देखभाल और संरक्षर्ण इत्याविद की क्षति, दूसरे सार्थीी को पाने का अति कार है और उसे उति& रूप से मुआवजा विमलना &ाविहए। सार्थीी की क्षति क े लिलए गैर विवत्तीय नुकसान की अव ारर्णा दुविनया क े दूसरे विहस्सों विवशेर्षकर संयु‚ राज्य अमेरिरका, आस्ट†ेलिलया इत्याविद में मुआवजे का एक बड़ा शीर्ष हो ा है। आंग्ल न्यायालयों ने अस्र्थीायी विवकलांग ा क े दौरान भी दूसरे सार्थीी क े मुआवजा पाने क े अति कार को मान्य ा दी है। सार्थीी की क्षति क े मुआवजे क े रूप में न्यायालयों ने दूसरे सार्थीी को आगामी वर्ष[ में हुए स्नेह, सुख,सान्त्वना, साह&य, समाज, सहाय ा, संरक्षर्ण, देखभाल और शारीरिरक संबं ों क े नुकसान की भरपाई का प्रयास विकया है। दूसरे देशों और क्षेत्राति कार में विदये जाने वाले मुआवजे क े विवपरी, &ूंविक विवति क उत्तराति कारी को विवत्तीय नुकसान क े लिलए पयाप्त रूप से मुआवजा विदया जा ा है, इस शीर्ष क े ह बड़ी नराभिश स्वीक ृ करना उति& नहीं होगा। इसलिलए हमारा म है विक यही न्यायसंग और कसंग होगा विक न्यायालय सार्थीी की क्षति क े लिलए कम से कम एक लाख रूपया की मंजूरी दे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
29. पैरा 52 में, संविव ान पीठ ने कहा विक पारंपरिरक शीर्ष जैसे 'संपलित्त की हाविन', 'सार्थीी की क्षति ' और 'अंति म संस्कार का ख&' क े ह कसंग राभिशयां क्रमशः रु.15,000/-, रु. 40,000/- और रु. 15,000/- होना &ाविहए। / - क्रमशः। अनुच्छेद 52 में, विनम्नलिललिख विन ारिर विकया गया है: "52. जहां क पारंपरिरक शीर्ष[ का संबं है, हमारे लिलए राजेश क े मामले में व्य‚ विकये गये विव&ार से सहम होना मुल्किश्कल है। इसने रु. 25,000/- अंत्येवि• ख& क े लिलए, रु. 1,00,000/- सार्थीी की क्षति क े लिलए और रु. 1,00,000/- नाबालिलग बच्चों की देखभाल और मागदशन क े लिलए स्वीक ृ विकया। देखभाल क े नुकसान और नाबालिलग बच्चों से संबंति शीर्ष मौजूद नहीं है। हालांविक राजेश क े मामले में सं ोर्ष देवी क े मामले को संदर्णिभ विकया गया है, लेविकन यह उसका अनुसरर्ण कर ा प्र ी नहीं हो ा। कहने की आवश्यक ा नहीं है विक पारंपरिरक और परंपराग शीर्ष[ का विन ारर्ण प्रति श क े आ ार पर नहीं विकया जा सक ा क्योंविक यह स्वीकाय मानदं0 नहीं होगा। आय क े विन ारर्ण क े विवपरी, उ‚ शीर्ष[ को परिरमाभिर्ण विकया जाना है। विकसी भी परिरमार्णीकरर्ण का एक उति& आ ार होना &ाविहए। इस थ्य पर कोई विववाद नहीं हो सक ा है विक मू•य सू&कांक, बैंक ब्याज में विगरावट, कई क्षेत्रों में दरों में वृतिद्ध पर ध्यान देना होगा। न्यायालय इससे बेखबर नहीं रह सक ा। इस मामले में स्प• विनयम रहा है। अन्यर्थीा, इसक े विन ारर्ण में अत्यति क कविठनाई होगी और जब क स्प• विनयम का प्रयोग नहीं विकया जा ा, ब क विकसी भी प्रकार की ल्किस्र्थीर ा की कमी क े कारर्ण अत्यति क भिभन्न ा होगी, सिजसक े परिरर्णामस्वरूप, अति करर्णों और न्यायालयों द्वारा पारिर आदेशों क े विदशाहीन होने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संभावना है। इसलिलए, हमें लग ा है विक यह उति& रकम य करना प्र ी हो ा है। हमें ऐसा लग ा है विक पारंपरिरक शीर्ष[ क े ह उति& राभिशयां अर्थीा ् संपलित्त की हाविन, सार्थीी की क्षति और अंत्येवि• व्यय क्रमशः रु. 15,000/-, रु. 40,000/- और रु. 15,000/- होना &ाविहए। उ‚ शीर्ष[ क े पुनरावलोकन का सिसद्धां एक स्वीकाय सिसद्धां है। लेविकन पुनरीक्षर्ण थ्य-क ें विद्र या मात्रा-क ें विद्र नहीं होना &ाविहए। हमें लग ा हैं विक जो राभिश हमने विन ारिर की है, उसे हर ीन साल में प्रति श क े आ ार पर बढ़ाया जाना और ीन साल की अवति में 10% की दर से वृतिद्ध होना उपयु‚ होगा। हम ऐसा इसलिलए करने क े लिलए ैयार हैं क्योंविक इससे उन शीर्ष[ क े संबं में ल्किस्र्थीर ा आएगी। ”
30. पैराग्राफ 59.[8] में, न्यायालय ने आगे कहा विक पारंपरिरक शीर्ष की राभिश को हर ीन साल में 10% की दर से बढ़ाया जाना &ाविहए। पैराग्राफ 59.[8] में, विनम्नव ् ारिर विकया गया: - "59.8. पारंपरिरक शीर्ष[ अर्थीा ् संपलित्त की हाविन, सार्थीी की क्षति और अंति म संस्कार व्यय क े ह उति& राभिशयां क्रमशः रू. 15,000/- रु. 40,000/- और रू. 15,000/- होना &ाविहए। उ‚ राभिश को प्रत्येक ीन वर्ष में 10% की दर से बढ़ाया जाना &ाविहए।"
31. अगला विनर्णय सिजस पर ध्यान देने की आवश्यक ा है वह है मैग्मा जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम नानू राम उफ &ुहरू राम और अन्य, (2018) 18 एससीसी 130, सार्थीी की क्षति की अव ारर्णा को प्रस् र 21,22 और 23 में व्याख्यातिय विकया गया र्थीा जो इस प्रकार हैं: - "21. प्रर्णय सेठी (उपरो‚) क े मामले में इस न्यायालय की एक संविव ान पीठ ने उन विवभिभन्न शीर्ष[ पर विव&ार विकया सिजनक े ह मृत्यु क े मामले में मुआवजा विदया जाना है। इनमें से एक प्रमुख सार्थीी की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क्षति है। विवति क भार्षा में, "सार्थीी की क्षति " एक सारगर्णिभ शब्द है सिजसमें 'दाम्पत्य सार्थीी की क्षति ', 'मा ा विप ा क े सहारे की क्षति ', और 'सं ानीय संबं ी की क्षति ' शाविमल है। सार्थीी की क्षति क े ह मुआवजे क े अति कार में मृ क से विमलने वाला सार्थी, देखभाल, सहाय ा, सुख, मागदशन, सांत्वना और स्नेह शाविमल होगा, सिजसका उसक े परिरवार को क्षति हुई है। दम्पलित्त क े संबं में, इसमें मृ पति या पत्नी क े सार्थी शारीरिरक संबं शाविमल होंगे।
21.1. दाम्पत्य सार्थीी की क्षति को आम ौर पर पति -पत्नी क े रिरश् े से संबंति अति कारों क े रूप में परिरभाविर्ष विकया जा ा है, जो जीविव पति या पत्नी को " दूसरे क े सार्थी, समाज, सहयोग, स्नेह, और हर दाम्पत्य संबं में दूसरे की सहाय ा क े लिलए मुआवजे की अनुमति दे ा है। ।" 21.[2] मा ा-विप ा की क्षति क े लिलए मुआवजा, बच्चे को मा ा-विप ा की असामतियक मृृृृत्यु पर "पै ृृृृक सहाय ा,सुरक्षा, स्नेह, समाज, अनुशासन, मागदशन और प्रभिशक्षर्ण" क े स्वीक ृ विकया जा ा है।
21.3. विकसी बच्चे की आकल्किस्मक मृत्यु क े मामले में सं ानीय क्षति क े मुआवजे का अति कार मा ा-विप ा का हो ा है। विकसी दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु मृ क क े मा ा-विप ा और परिरवार को बहु झटका और पीड़ा हो ी है। मा ा-विप ा क े लिलए अपने जीवनकाल में अपने बच्चे को खोना सबसे बड़ी पीड़ा हो ी है। बच्चों का उनक े प्यार, स्नेह, सहयोग और परिरवार में उनकी भूविमका क े लिलए महत्व हो ा है।
22. सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजा एक विवशेर्ष विप्रज्म हो ा है जो वास् विवक संबं ों की ल्किस्र्थीति और मू•य क े बारे में बदल े मानदं0ों को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दशा ा है। आ ुविनक दुविनया भर क े न्यायालयों ने माना है विक एक बच्चे की क्षति क े लिलए मुआवजे का मू•य विकसी बच्चे की मृत्यु क े मामले में विदए गए मुआवजे क े आर्णिर्थीक मू•य से कहीं अति क है। इसलिलए अति कांश न्यायालय मा ा-विप ा को बच्चे की मृत्यु पर उसकी क्षति क े लिलए मुआवजा देने की अनुमति दे े हैं। मा ा-विप ा को दी जाने वाली राभिश मृ बच्चे क े प्यार, स्नेह, देखभाल और सार्थी की हाविन क े लिलए मुआवजा हो ा है।
23. मोटर वाहन अति विनयम एक लाभकारी अति विनयम है सिजसका उद्देश्य वास् विवक दावों क े मामलों में पीविड़ ों या उनक े परिरवारों को अनु ोर्ष प्रदान करना है। ऐसे मामले में जहां मा ा-विप ा ने अपने नाबालिलग बच्चे, या अविववाविह बेटे या बेटी को खो विदया है, वहां मा ा- विप ा सं ानीय क्षति शीर्ष क े ह मुआवजा पाने क े हकदार हो े हैं। अति विनयम क े ह मोटर वाहन दुर्घटनाओं में अपने मा ा-विप ा को खोने वाले बच्चों को पै ृक क्षति का मुआवजा प्रदान विकया जा ा है। कु छ उच्च न्यायालयों ने इस आ ार पर मुआवजे को स्वीक ृ ी दी है। हालांविक, उन सिसद्धां ों क े संबं में कोई स्प• ा नहीं र्थीी सिजन पर सं ानीय क्षति का मुआवजा विदया जा सक ा है।"
32. मैग्मा जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 क े मामले में दो-न्याया ीशों की पीठ ने मृ क क े विप ा और बहन को 40,000/- रुपये की राभिश का आदेश विदया। प्रस् र 24 इस प्रकार है:- "24. सार्थीी की क्षति क े रूप में प्रदान की जाने वाली मुआवजे की राभिश, प्रर्णय सेठी (उपरो‚) क े मामले में प्रति पाविद 'सार्थीी की क्षति ' क े ह मुआवजा देने क े सिसद्धां ों द्वारा शासिस होगी। व मान मामले में, हम मृ क क े विप ा और बहन प्रत्येक को सं ानीय क्षति क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ह 40,000 रू. की राभिश क े मुआवजे का आदेश देना उति& समझ े हैं।"
33. यूनाइटे0 इंति0या इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम सतिं दर कौर उफ स पिंवदर कौर और अन्य, (2020) SCC ऑनलाइन 410 क े मामले में ीन-न्याया ीशों की पीठ ने मैग्मा जनरल इंश्योरेंस क े मामले में दो-न्याया ीशों की पीठ क े विव&ार की अभिभपुवि• की र्थीी। ीन-न्याया ीश पीठ ने प्रस् र 53 से 65 में ीन पारंपरिरक शीर्ष[ पर विव&ार विकया। ीन पारंपरिरक शीर्ष[ पर ीन-न्याया ीश पीठ की पूरी परिर&&ा विनम्नव है: - "53. प्रर्णय सेठी (उपरो‚) क े मामले में, संविव ान पीठ ने कहा विक मृत्यु क े मामलों में, मुआवजा क े वल ीन पारंपरिरक शीर्ष[ अर्थीा संपलित्त का नुकसान, सार्थीी की क्षति और अंति म संस्कार व्यय क े ह विदया जाएगा।
54. न्यायालय ने माना विक पारंपरिरक और परंपराग शीर्ष[ को प्रति श क े आ ार पर विन ारिर नहीं विकया जा सक ा है, क्योंविक यह स्वीकाय मानदं0 नहीं होगा। आय क े विन ारर्ण क े विवपरी, उ‚ शीर्ष[ को परिरमाभिर्ण करना होगा, जो एक उति& आ ार पर आ ारिर होना &ाविहए। यह देखा गया विक मू•य सू&कांक, बैंक ब्याज में विगरावट, दरों में वृतिद्ध जैसे कारक, ऐसे पहलू हैं सिजन पर ध्यान विदया जाना &ाविहए। न्यायालय ने माना विक पारंपरिरक शीर्ष[ अर्थीा ् संपलित्त की हाविन, सार्थीी की क्षति और अंति म संस्कार व्यय क े ह उति& राभिशयां, क्रमशः 15,000/- रुपये, 40,000/- रुपये और 15,000/- रुपये होना &ाविहए। न्यायालय का विव&ार र्थीा विक इन पारंपरिरक शीर्ष[ क े ह प्रदान की जाने वाली राभिश में प्रत्येक ीन वर्ष[ में 10% की वृतिद्ध की जानी &ाविहए, सिजससे इन शीर्ष[ क े संबं में एकरूप ा आएगी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ए) संपलित्त का नुकसान – रु. 15,000 विदया जाय बी) सार्थीी की क्षति
55. विवति क भार्षा में सार्थीी की क्षति क े ह मुआवजा को ऐति हासिसक रूप से क े वल पति या पत्नी को विदया जाने वाला मुआवजा का संकीर्ण अर्थी दे विदया गया र्थीा यानी देखभाल, सहाय ा, आराम, मागदशन, समाज, सांत्वना, स्नेह और अपने सार्थीी क े सार्थी यौन संबं का दूसरे सार्थीी क े अति कार क े रूप में। साह&य, प्रेम, देखभाल और सुरक्षा आविद की हाविन, सिजसे पाने का पति /पत्नी हकदार है, की उति& प्रति पूर्ति की जानी &ाविहए। सार्थीी की क्षति से होने वाली लिलए गैर- विवत्तीय क्षति की अव ारर्णा विवभिभन्न न्यायालयों जैसे संयु‚ राज्य अमेरिरका, ऑस्ट†ेलिलया, आविद में मुआवजा देने क े लिलए प्रमुख शीर्ष[ में से एक है। आंग्ल न्यायालयों अस्र्थीायी विवकलांग ा की अवति क े दौरान भी मुआवजे पाने क े पति या पत्नी क े अति कार को मान्य ा दी है।
56. मैग्मा जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम नानू राम और अन्य, 12 क े मामले में इस न्यायालय ने "सार्थीी की क्षति " पद का विनव&न एक सारगर्णिभ शब्द क े रूप में विकया, सिजसमें दाम्पत्य सार्थी, पै ृक सार्थी और सं ानीय सार्थी शाविमल है। सार्थीी की क्षति क े ह मृ क से विमलने वाले सार्थी, देखभाल, सहाय ा, सुख, मागदशन, सांत्वना और स्नेह की क्षति शाविमल होगा, जो उसक े परिरवार क े लिलए एक नुकसान है। दम्पलित्त क े सन्दभ में, इसमें मृ पति या पत्नी क े सार्थी शारीरिरक संबं शाविमल होंगे।
57. पै ृक सार्थीी की क्षति क े ह मुआवजा, मा ा-विप ा की असामतियक मृत्यु पर मा ा-विप ा की सहाय ा, संरक्षर्ण, स्नेह, समाज, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुशासन, मागदशन और प्रभिशक्षर्ण क े लिलए बच्चे को विदया जा ा है।
58. सं ानीय क्षति क े ह मुआवजा विकसी बच्चे की दुर्घटना में मृत्यु क े मामले में मा ा-विप ा का अति कार हो ा है। विकसी दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु मृ क क े मा ा-विप ा और परिरवार को बहु झटका और पीड़ा हो ी है। मा ा-विप ा क े लिलए अपने जीवनकाल में अपने बच्चे को खोना सबसे बड़ी पीड़ा हो ी है। बच्चों का उनक े प्यार, स्नेह, सहयोग और परिरवार में उनकी भूविमका क े लिलए महत्व हो ा है।
59. आ ुविनक दुविनया भर क े न्यायालयों ने माना है विक एक बच्चे की क्षति क े लिलए मुआवजे का मू•य विकसी बच्चे की मृत्यु क े मामले में विदए गए मुआवजे क े आर्णिर्थीक मू•य से कहीं अति क है। इसलिलए अति कांश न्यायालय मा ा-विप ा को बच्चे की मृत्यु पर उसकी क्षति क े लिलए मुआवजा देने की अनुमति दे े हैं। मा ा-विप ा को दी जाने वाली राभिश मृ बच्चे क े प्यार, स्नेह, देखभाल और सार्थी की हाविन क े लिलए मुआवजा हो ा है।
60. मोटर वाहन अति विनयम एक लाभकारी अति विनयम है सिजसका उद्देश्य वास् विवक दावों क े मामलों में पीविड़ ों या उनक े परिरवारों को अनु ोर्ष प्रदान करना है। ऐसे मामले में जहां मा ा-विप ा ने अपने नाबालिलग बच्चे, या अविववाविह बेटे या बेटी को खो विदया है, वहां मा ा- विप ा सं ानीय क्षति शीर्ष क े ह मुआवजा पाने क े हकदार हो े हैं।
61. पै ृक क्षति क े लिलए मुआवजा उन बच्चों को विदया जा ा है जो मोटर वाहन दुर्घटनाओं क े कारर्ण अपने मा ा-विप ा की देखभाल और सुरक्षा खो दे े हैं। 62. सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजे की राभिश प्रर्णय सेठी (उपरो‚) क े मामले में विकये गये विन ारर्ण क े अनुसार विमलेगी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
63. इस स् र पर, हम सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजे क े अनुदान, और प्रेम और स्नेह क े संबं में एकरूप ा प्रदान करना आवश्यक समझ े हैं। कई अति करर्ण और उच्च न्यायालय सार्थीी की क्षति क े लिलए और प्रेम और स्नेह की हाविन दोनों क े लिलए मुआवजा दे े रहे हैं। प्रर्णय सेठी (उपरो‚) क े मामले में संविव ान पीठ ने क े वल ीन पारंपरिरक शीर्ष[ को मान्य ा दी है सिजसक े ह मुआवजा विदया जा सक ा है। संपलित्त की हाविन, सार्थीी की क्षति विन और अंति म संस्कार व्यय।
64. मैग्मा जनरल (उपरो‚) क े मामले में, इस न्यायालय ने सार्थीी की क्षति पद की एक व्यापक व्याख्या दी सिजसमें पति -पत्नी का सार्थी, मा ा-विप ा का सार्थी र्थीा सं ानीय सार्थी शाविमल हैं। प्रेम और स्नेह का नुकसान सार्थीी की क्षति क े ह माना जा ा है।
65. अति करर्णों और उच्च न्यायालयों को सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजे का आदेश देेने क े लिलए विनदŒभिश विकया जा ा है जोविक एक वै परंपराग शीर्ष है। प्रेम और स्नेह क े लिलए अलग शीर्ष क े ह मुआवजा देने का कोई औति&त्य नहीं है। सी) अंति म संस्कार व्यय - रु. 15,000 विदया जाय"
34. उपरो‚ मामले में ीन -न्याया ीशों की पीठ ने 'सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजा' पद की व्यापक व्याख्या को मंजूरी दे े हुए, सिजसमें सार्थीी की क्षति पै ृक क्षति और सं ानीय क्षति को शाविमल होना ब ाया। ीन -न्याया ीशों की पीठ ने हालांविक आगे कहा विक 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' को 'सार्थीी की क्षति ' क े अन् ग समझा जा ा है, इसलिलए, 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े लिलए एक अलग शीर्ष क े ह मुआवजा देने का कोई औति&त्य नहीं है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
35. प्रर्णय सेठी क े मामले में भी संविव ान पीठ ने पारंपरिरक शीर्ष क े ह 'प्रेम और स्नेह क े नुकसान' क े लिलए कोई मुआवजा शाविमल नहीं विकया है, सिजसे अब यूनाइटे0 इंति0या इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 (उपरो‚) में ीन-न्याया ीशों की पीठ द्वारा दोहराया गया है। इस प्रकार अब यह आति कारिरक रूप से सुस्र्थीाविप है विक 'प्रेम और स्नेह की क्षति ' क े ह कोई मुआवजा नहीं विदया जा सक ा है।
36. 'सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजा' पद को ब्लैक्स लॉ ति0क्शनरी, 10 वें संस्करर्ण में परिरभाविर्ष विकया गया है। ब्लैक्स लॉ ति0क्शनरी भी त्प‘ा सं ानीय क्षति का मुआवजा, पै ृक क्षति का मुआवजा और दाम्पत्य क्षति का मुआवजा को विनम्नव ध्या व्य रखा है: - " सार्थीी की क्षति का मुआवजा (क ं सोर्विटयम) 1. वह लाभ जो एक व्यवि‚, विवशेर्ष रूप से एक पति या पत्नी, दूसरे से प्राप्त करने का हकदार है, सिजसमें सार्थीी की क्षति क े लिलए उससे प्राप्त होने वाला साह&य, सहयोग, स्नेह, सहाय ा, विवत्तीय सहाय ा, और (पति /पत्नी क े बी&) यौन संबं क े क्षति का दावा शाविमल हो ा है। • सं ानीय क्षति का मुआवजा मा ा विप ा को एक बच्चे द्वारा विदया जाने वाला संग-सार्थी, स्नेह और साह&य। • पै ृक क्षति का मुआवजा बच्चे को मा ा-विप ा द्वारा विदया जाने वाला संग-सार्थी, स्नेह और साह&य। • दाम्पत्य क्षति का मुआवजा दम्पलित्त द्वारा एक-दूसरे को विदया जाने वाला संग-सार्थी, स्नेह और साह&य।
37. मैग्मा जनरल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 (उपरो‚) र्थीा यूनाइटे0 इंति0या े मामलों में, ीन न्याया ीश पीठ ने यह प्रति पाविद विकया विक सार्थीी की क्षति का मुआवजा दाम्पत्य क्षति क Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सीविम नहीं है और इसमें पै ृक क्षति का मुआवजा र्थीा सं ानीय क्षति का मुआवजा भी शाविमल है। यूनाइटे0 इंति0या इंश्योरेंस क े मामले में प्रस् र 87 में इसीलिलए, सभी ीनों दावेदारों को 'सार्थीी की क्षति का मुआवजा' प्रदान विकया गया र्थीा। प्रस् र 87 नी&े उद्धृ विकया गया है: - "87. जहां क पारंपरिरक शीर्ष[ का संबं है, मृ क स पाल सिंसह अपने पीछे एक विव वा और ीन बच्चों को अपने आभिश्र क े रूप में छोड़ गये। प्रर्णय सेठी (उपरो‚) और मैग्मा जनरल (उपरो‚) क े मामलों में विदये गये विनर्णयों क े आ ार पर, पारंपरिरक शीर्ष[ क े ह विनम्नलिललिख राभिशयां प्रदान की जा ी हैं: i) ) संपलित्त की हाविन: 15,000 रुपये i) i) ) सार्थीी की हाविन: ए) दाम्पत्य हाविन: 40,000 रुपये बी) पै ृक हाविन: 40,000 x 3 = 1,20,000 रुपये i) i) i) ) अंति म संस्कार व्यय: रुपये 15,000”
38. अपीलक ा क े विवद्वान अति व‚ा का कर्थीन है विक प्रर्णय सेठी क े मामले में क े वल दाम्पत्य क्षति क े मुआवजे का उल्लेख विकया है और प्रर्णय सेठी क े विनर्णय में विकसी अन्य 'सार्थीी की क्षति क े मुआवजे' का उल्लेख नहीं विकया गया र्थीा, इसलिलए, पै ृक क्षति क े मुआवजे और सं ानीय क्षति क े मुआवजे को अनुमति देने का कोई औति&त्य नहीं है। प्रर्णय सेठी क े मामले में संविव ान पीठ ने 'सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजा' क े लिलए 40,000/- रुपये की राभिश का उल्लेख विकया है, लेविकन संविव ान पीठ ने इस बा समा ान नहीं विकया विक क्या 40,000/- रुपये का मुआवजा क े रूप में देय है। प्रर्णय सेठी क े मामले का वा&न इस प्रकार नहीं विकया जा सक ा विक यह ऐसी उप ारर्णा प्रति पाविद कर ा है विक सार्थीी की क्षति का मुआवजा क े वल पत्नी को देय है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
39. यूनाइटे0 इंति0या इंश्योरेंस क े मामले में ीन- न्याया ीशों की पीठ ने स्प• रूप से यह प्रति पाविद विकया है विक दाम्पत्य क्षति क े मुआवजे क े अलावा पै ृक क्षति और सं ानीय क्षति का मुआवजा देय हो ा है। हम स्वयं को ीन न्याया ीशों की पीठ द्वारा आबद्ध पा े हैं। इसलिलए, हम अपीलक ा क े विवद्वान अति व‚ा क े इस कर्थीन को स्वीकार नहीं कर सक े हैं विक प्रत्येक दावेदार को प्रदान की गई 'सार्थीी की क्षति का मुआवजा' राभिश पोर्षर्णीय नहीं है।
40. इस प्रकार, हमने प्रत्येक दावेदार को सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजे का आदेश देने वाले उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनर्णय को विवति क े अनुरूप पाया सिजसमें इस अपील क े अन् ग विकसी हस् क्षेप की आवश्यक ा नहीं है। र्थीाविप, हम अपीलक ा क े विवद्वान अति व‚ा क े इस कर्थीन को स्वीकार कर े हैं विक 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े अलग शीर्षक क े ह मुआवजा देने का कोई औति&त्य नहीं है। अपीलक ा द्वारा दायर की गयी अपील 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े ह मुआवजे क े आदेश क े सन्दभ में स्वीकार विकये जाने योग्य है।
41. हम अपीलक ा क े विवद्वान अति व‚ा द्वारा अवलंविब इस न्यायालय क े ीन- न्याया ीशों की खं0पीठ क े विनर्णय - संगी ा आय और अन्य बनाम ओरिरएंटल ं पनी लिलविमटे0 और अन्य, (2020) एससीसी ऑनलाइन 513 का भी संज्ञान ले सक े हैं। अपीलक ा क े अति व‚ा का कहना है विक इस न्यायालय ने 'सार्थीी की क्षति क े ह मुआवजे' क े रूप में क े वल रु. 40,000/- की राभिश का आदेश विदया है जो इस बा का संक े है विक बच्चों को 'सार्थीी की क्षति का मुआवजा ' नहीं विदया जा सक ा है। उपरो‚ मामले में, मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण ने विव वा को सार्थीी की क्षति क े ह 20,000/- रुपये और नाबालिलग बेटी को 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े लिलए 10,000/- रुपये का आदेश विदया। उच्च न्यायालय ने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सार्थीी की क्षति की राभिश को 20,000/- रुपये से र्घटाकर 10,000/- रुपये कर विदया। विनर्णय का पैरा 16 विनम्नलिललिख आशय वाला है: - "16. विव वा को देय सार्थीी की क्षति का मुआवजा उच्च न्यायालय द्वारा 20,000 रुपये (एमएसीटी द्वारा विदए गए अनुसार) से र्घटाकर 10,000 रुपये कर विदया गया; नाबालिलग बेटी को प्रेम और स्नेह की क्षति क े लिलए दी गई राभिश 10,000 रुपये से र्घटाकर 5,000 रुपये कर दी गयी। हालांविक, अंति म संस्कार क े ख& क े लिलए एमएसीटी द्वारा प्रदान की गई 5,000 रुपये की राभिश को बरकरार रखा गया र्थीा। ”
42. उपरो‚ मामले में इस न्यायालय ने विव&ारर्ण को मृ क की आय क सीविम कर विदया और न ो कोई दावा विकया गया र्थीा और न ही कोई विव&ारर्ण इस बा पर विकया गया विक सार्थीी की क्षति का मुआवजा अन्य विवति क उत्तराति कारिरयों को भी विदया जाना &ाविहए। अन्य विवति क उत्तराति कारिरयों का सार्थीी की क्षति क े लिलए मुआवजे का कोई दावा न होने क े कारर्ण, इस न्यायालय ने सार्थीी की क्षति क े लिलए 40,000 / - का आदेश विदया। उपरो‚ विनर्णय से ऐसा कोई विनष्कर्ष नहीं विनकाला जा सक ा विक इस न्यायालय ने यह ारिर विकया विक सार्थीी की क्षति का मुआवजा क े रूप में देय है सार्थीी की क्षति का मुआवजा बच्चों और मा ा-विप ा देय नहीं है।
43. इस पर ध्यान देना प्रासंविगक है विक यूनाइटे0 इंति0या इंश्योरेंस लिलविमटे0 क े मामले, जो संगी ा आया क े उपरो‚ ीन-न्याया ीशों पीठ क े क ु छ समय बाद विदया गया र्थीा, सिजसका उपरो‚ संज्ञान लिलया गया है, यह बा विवविनर्विद• रूप से प्रति पाविद की गयी र्थीी विक दाम्पत्य और पै ृक दोनों क्षति यों क े लिलए मुआवजा देय हो ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
44. हम सिसविवल अपील सं. 2885 वर्ष 2020 क े एम.ए&.उमा माहेश्वरी और अन्य बनाम यूनाइटे0 इंति0या इंश्योरेंस क े मामले में इस न्यायालय क े एक और ीन-न्याया ीश पीठ क े विनर्णय को ध्यान में रख सक े हैं। उपरो‚ मामले में, अति करर्ण ने पत्नी को सार्थीी की क्षति क े ह एक लाख रुपये और सभी अपीलक ाओं को प्रेम और स्नेह क े लिलए ीन लाख रुपये की राभिश का आदेश विदया र्थीा। उच्च न्यायालय ने उ‚ मामले में बीमा क ं पनी द्वारा दायर अपील में मुआवजे की राभिश को कम कर विदया र्थीा। उच्च न्यायालय ने माना विक पत्नी को सार्थीी की क्षति क े रूप में एक लाख रुपये की राभिश देकर सार्थी ही पहले अपीलक ा को ' प्रेम और स्नेह क े नुकसान' क े लिलए एक लाख रुपये देकर अति करर्ण ने त्रुविट की र्थीी। दावेदार द्वारा दायर की गयी अपील को स्वीकार कर े हुए इस न्यायालय ने एमएसीटी क े आदेश को बरकरार रखा।
45. उपरो‚ फ ै सले में, यद्यविप ीन-न्याया ीशों की पीठ द्वारा प्रदत्त, सार्थीी की क्षति क े लिलए एक लाख रुपये क े मुआवजे और प्रेम और स्नेह क े लिलए ीन लाख रुपये क े मुआवजे को कोई &ुनौ ी नहीं दी गयी र्थीी। अपील क े वल दावेदारों द्वारा दायर की गई र्थीी न विक बीमा क ं पनी द्वारा। न्यायालय ने 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े ह दी गई राभिश क े सही होने पर फ ै सला नहीं सुनाया र्थीा।
46. हम सिसविवल अपील संख्या........./2020 ( विवअया(सिस)संख्या 8250 वर्ष 2020 से उद्भू ), ओरिरएंटल इंश्योरेंस क ं पनी लिलविमटे0 बनाम श्रीम ी रिंरकू देवी और अन्य में विदये गये क पर भी ध्यान दे सक े हैं। जैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, हमारा यह विव&ार है विक उच्च न्यायालय द्वारा प्रत्येक दावेदार को 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े लिलए 50,000/- रुपये की दर से मुआवजा देने का आदेश अनुति& है सिजसे इस अपील में अपास् विकया जा रहा है। हम, आगे, उपरो‚ अपील में, प्रस् र 9 में उच्च न्यायालय क े उस विनदŒश को भी अपास् कर े हैं, सिजसक े द्वारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ब्याज क े सार्थी सांविवति क राभिश को आसरा विनति में जमा करने का विनदŒश विदया गया र्थीा।
47. परिरर्णामस्वरूप, सभी अपीलें आंभिशक रूप से स्वीकार की जा ी हैं। पारंपरिरक शीर्ष 'प्रेम और स्नेह की हाविन' क े ह मुआवजे विदया जाना अपास् विकया जा ा है। पुरस्कार अलग रखा गया है। मोटर दुर्घटना दावा अति करर्ण देय राभिश की पुनगर्णना करेगा विवति क े अनुसार कायवाही करेगा।
48. दनुसार सभी अपीलें आंभिशक रूप से स्वीकार की जा ी हैं। कोई लाग नहीं।............................ (न्यायमूर्ति अशोक भूर्षर्ण)...........................… (न्यायमू्र्ति सुभार्ष रेड्डी) नई विदल्ली सिस ंबर,07,2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA