Amar Singh v. State

Delhi High Court · 12 Oct 2020
Sanjay Kishan Kaul; Aniruddha Bose; Krishnamurari
Criminal Appeal No 335/2015 and Criminal Appeal No 336/2015
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court acquitted the accused of murder due to unreliable eyewitness testimony, investigative lapses, and contradictions creating reasonable doubt.

Full Text
Translation output
प्र�तवे
भारतीय सव�च् न्यायाल
आपरा�धक अपील�य �ेत्रा�धक
आपरा�धक अपील संख्य 335/2015
अमर �संह ..... अपीलाथ�
बनाम
राज् (रा.रा.�े. �दल्ल) ..... प्रत्य
स�हत
आपरा�धक अपील संख्य 336/2015
इंद्रज �संह ..... अपीलाथ�
बनाम
राज् (रा.रा.�े. �दल्ल) ..... प्रत्य
�नणर्
यह दोन� अपील� उच् न्यायाल द्वार �दनांक 09.05.2014 को
पा�रत आ�े�पत फ
ै सले और आदेश क
े �खलाफ �नद��शत ह�, िजसम�
अपीलकतार्ओ द्वार उनक
े �खलाफ सज़ा क
े आदेश को चुनौती देने क
े �लए
दायर आपरा�धक अपील को खा�रज करते हुए अपीलकतार्ओ को भा.दं.सं.
क� धारा 302 क
े तहत दोषी ठहराया गया था। आरो�पय� म� से एक–
अपीलाथ� - इंद्रज �संह को भी आयुध अ�ध�नयम क� धारा 27 क
े तहत
दोषी पाया गया और दोष�सद्धकरार कर �दया गया व 5000/- रुपय क

जुमारने क
े साथ आजीवन कारावास क� सज़ा सुनाई गई तथा भुगतान न
कृ ष् मुरार�, न्यायाधी
�कए जाने क� िस्थ�त म�3 मह�ने क
े साधारण कारावास क� सज़ा द� गई ।
अ�भयुक्-अपीलकतार, इंद्रज �संह को भी आयुध अ�ध�नयम क� धारा 27

े तहत एक वषर क
े कठोर कारावास क� सज़ा सुनाई गई थी और यह सज़ा
भा.दं.सं. क� धारा 302 क
े तहत उसे पहले से द� गई सज़ा क
े साथ
समवत� चलनी थी।
JUDGMENT

2. सं�ेप म� अ�भयोजन का मामला यह है �क �दनांक 03.08.1990 को, डीडी संख्या18-ए क� प्राि पर, उप �न. जो�गंदर �संह क े साथ उप �न. �ान �संह, कांस्टेब जय �संह और कांस्टेब नर�द पाल सुखदेव माक � ट गल� म� पहुंचे, जो क ु मायूं रेस्तरा क� ओर जाती है, जहां मकान नंबर एच- 801 क े पास भीड़ जमा थी और उन्ह पता चला �क घायल को पीसीआर वाहन म� एम् ले जाया जा चुका है । कांस्टेब नर�द पाल को घटनास्थ पर छोड़कर, उप �न. जो�गंदर �संह अन् पु�लस कमर्चा�रय�क े साथ एम् पहुंचे, जहां उन्ह पता चला �क घायल दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी को 'मृत लाया गया' घो�षत �कया गया था। मृतक क े दो भाई पर�मंदर �संह और अमर �संह, अस्पता म� मौजूद थे। पर�मंदर �संह ने उप �न. जो�गंदर �संह को अपना बयान �दया �क उनक े छह भाई ह� और उनक े तीन भाई-ह�रंदर �संह, र�वंदर �संह और रािजंदर �संह उनक� मां श्रीम प्रकाशव क े साथ मकान नंबर 826/5, अजुर् नगर म� रहते ह�। उनक े सबसे बड़े भाई अमर �संह अपने प�रवार क े साथ मकान नंबर 15/88, गीता कॉलोनी म� रहते ह� और वह अपने प�रवार क े साथ 53/एफ, डी-12 �ेत, सेक्ट-4, बंगला सा�हब मागर, नई �दल्ल म� रहते ह�। उनक� बहन सरोज अपने प�रवार क े साथ 98-ए, बाबा खड़ग �संह मागर पर रहती ह�। लगभग तीन साल पहले, खज़ान �संह नामक एक व्यिक क� हत्य हुई थी और उसक े भाई दे�वंदर �संह उफ़ र ् लाडी को उसक� हत्य क े �लए �गरफ्ता कर �लया गया था और उसक े �खलाफ हत्य का मामला लं�बत था। उसे अदालत से अंत�रम ज़मानत पर �रहा कर �दया गया और वह अपनी बहन सरोज क े साथ ह� रहता था। �दनांक 03.08.1990 को दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी अपनी मां क े घर आया और उसका एक अन्यभाई अमर �संह भी वहां पहुंचा और उन्ह�नेसाथ म� भोजन �कया। रात लगभग 10:00 बजे, पर�मंदर �संह अपने भाइय� दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी और अमर �संह क े साथ अपने-अपने घर जाने क े �लए वहां से �नकले । वे सुखदेव माक � ट म� टैक्स स्ट� क� ओर पैदल जा रहे थे। वह और अमर �संह दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी से लगभग दस कदम आगे थे। रात लगभग 10:10 बजे, जब वे सुखदेव माक � ट क े कोने क े पास पहुँचे, उन्ह�न दे�वंदर �संह उफ़ र ् लाडी क� 'बचाओ-बचाओ' क� आवाज़ सुनी और पीछे मुड़कर देखने पर उन्ह�ने देख �क अमर �संह पुत्र �लखी चंद तथ�शवचरण पुत्र पूरण चंहॉक� से वार कर रहे थे और इन्दर �संह पुत्र खज़ान �स र ्लाडी पर चाक ू से वार कर रहा था | उसका भाई दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी ज़मीन पर �गर गया और इंद्रज �संह ने उस पर चाक ू से कई वार �कये | जब उन्ह�नेअपने भाई को बचाने क� को�शश क�, तो उपरोक् तीन� आरोपी व्यिक्त ने अपने चाक ू और हॉक� को लहराया और धमक� द� �क जो भी दे�वंदर �संह को बचाने क े �लए आएगा, वे उसे भी मार द�गे। इसक े बाद वे सभी भीष्म �पतामहमागर क� ओर भागे, उनका भाई दे�वंदर �संह बेहोश हो गया। सुजान �संह पुत् राम �संह स�हत कई लोग वहां जमा हो गए | क ु छ समय बाद, पीसीआर वैन आई और दे�वंदर �संह को एम् ले गई, जहां उन्ह डॉक्ट ने मृत घो�षत कर �दया ।

3. इस बयान पर, एक मामला दजर �कया गया और �नर��क �रछपाल �संह द्वार जांच क� गई। जांच क े दौरान, �नर��क ने मौक े पर फोटो �खंचवा�, नक्शा मौकातैयार �कया, हॉक� क े एक टूटे हुए टुकड़े को कब्ज़े म� �लय, गंदे सफ े द जूते क� एक जोड़ी, एक स्ट� िस्ट, रक् का नमूना, खून से सना हुआ ज़मीन का टुकडा व मौक े से ज़मीन का टुकडा ज़ब् �कया। �नर��क ने अमर �संह और पर�मंदर �संह क े खून से सने कपड़� को भी ज़ब्तकर �लया, मृतक क े शव का पोस्टमाटर करवाया, गवाह� क े बयान दजर �कए और पोस्टमाटर �रपोटर प्राप्त । �नर��क ने आरोपी व्यिक्त को �गरफ्ता �कया और आरोपी इंद्रज �संह उफ़ र ्इंदर का इंकशाफ� बयान दजर �कया, िजसने हत्य म� इस्तेमा �कया गया चाक ू बरामद कराया । �नर��क ने आरोपी अमर �संह और �शव चरण क े इंकशाफ� बयान भी दजर �कए, िजन्ह�न अपराध म� प्रयोहॉक� बरामद कराई । बरामद सामान को अलग से पुलंदे बनाकर सील कर �दया गया और सीएफएसएल को भेज �दया गया। जांच पूर� होने क े बाद, भा.दं.सं. क� धारा 302/506/34 क े तहत चालान संबं�धत मेट्रोपॉ�ल मिजस्ट् क� अदालत म� दायर �कया गया, िजसने इस मामले को सत न्यायाल म� भेज �दया। सभी आरोपी व्यिक्त ने उनक े �खलाफ लगाए गए आरोप� क े �लए दोषी न होने का �नवेदन �कया और �वचारण हेतु दावा पेश �कया। अ�भयुक् इंद्रज �संह पर अलग से आयुध अ�ध�नयम क� धारा 25 और 27 क े तहत अपराध का आरोप लगाया गया था।

4. अपने मामले को पुष् करने क े �लए अ�भयोजन प� ने सभी 27 गवाह� क� गवाह� कराई थी। दं.प.सं. क� धारा 313 क े तहत उनक े बयान दजर करते समय अपराध म� फ ं साने वाले सभी सा�य आरोपी व्यिक्त क े सम� प्रस्तुत �कये थे, िजसम� उन्ह�न अ�भयोजन क े मामले को पूर� तरह से नकार �दया था।

5. �वचारण न्यालालय इस �नष्कष पर पहुंचा �क अ�भयोजन प� ने आरोपी व्यिक्त क े अपराध को स्पष्ट �कया ह और तदनुसार उन्ह भा.दं.सं. क� धारा 302 सहप�ठत भा.दं.सं. क� धारा 34 क े तहत दंडनीय हत्य क े �लए दोषी ठहराया और आजीवन कारावास क� सज़ा सुनाई। उसी से पी�ड़त होकर, आरोपी अपीला�थर्य�ने उच् न्यायाल क े सम� अपील दायर क�। हालां�क, उच् न्यायाल क े सम� अपील क े लं�बत रहने क े दौरान, अपीलाथ� �शवचरण क� 12 अप्र, 2008 को मृत्यु हो गई और तदनुसार उसक े �खलाफ कायर्वाह समाप् कर द� गई।

6. उच् न्यायाल क े सम� अपीलकतार्ओ द्वार स्था�प मामला यह था �क न क ेवल प्र सूचना �रपोटर दजर करने म� बिल् न्या�य मिजस्ट् को उसक� प्र भेजने म� भी अस्पष्देर� हुई थी। देर� क े �लए �कसी भी आवश्यकऔर स्वीकाय स्पष्ट�क क े अभाव म�, अ�भयोजन का मामला संदेहास्प था | आगे यह कहा गया �क हालां�क अ�भयोजन का मामला घटना क े कारण क�थत रूप सेघटना क े चश्मद� गवाह क े आधार पर है, �फर भी, अमर �संह अ�भ.सा.-11, और अ�भ.सा.-5 ने अ�भयोजन मामले का समथर् नह�ं �कया था और अक ेले बचे चश्मद� गवाह पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 क े एकमात्र सा�य पइस तरह भरोसा करना सुर��त नह�ं था। आगे यह कहा गया �क पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 का आचरण अत्य�ध अप्राकृ� है जो घटना क े समय मौक े पर उसक� उपिस्थ� पर संदेह उत्पन्न करतहै। इस ओर ध्यान �दलायागया �क उसक े घायल भाई को डॉक्ट भारद्वा क े क्ल��नकले जाने का कोई प्रय नह�ं �कया गया था, जो पास ह� म� था। अमर �संह अ�भ.सा.-11, िजन्ह प�द्रोहघो�षत �कया गया था, ने अपनी गवाह� म� कहा है �क घटना क े समय अंधेरा था और �कसी ने भी आरोपी व्यिक्त को नह�ं पहचाना था, िजन्ह झूठा फ ं साया गया है। यह भी तक र �दया गया �क एक अन् चश्मद� गवाह सुजान �संह अ�भ.सा.-5 ने भी अ�भयोजन मामले का समथर् नह�ं �कया है। बचाव प� ने भी मृतक क� एमएलसी, प्रदशर्.सा.-17/ए क� ओर न्यायाल का ध्या यह दशार्ने क े �लए आक�षर् �कया है �क पहले घायल का नाम अ�ात क े रू म� �लखा गया था और उसक े बाद दे�वंदर �संह का नाम ऊपरलेखन द्वार �लखा गया है और घायल को लाने वाले क े नाम और संबंध को दजर करने क े �लए बने कॉलम म� हेड कांस्टेब, धरम �संह पीसीआर का उल्ले �कया गया है और �फर वहां 'भाई’ शब्दजोड़ा गया है। यह भी कहा गया �क एकमात् चश्मद� गवाह मृतक का कर�बी �रश्तेदार है और इस प्रक उसक� एकमात गवाह� पर भरोसा करना सुर��त नह�ं है िजसक� पुिष् नह�ं क� गई है।

7. आगे यह �नवेदन �कया गया �क अपीलाथ� इंद्रज �संह क े �पता क� हत्य कर द� गई थी और मृतक दे�वंदर �संह पर हत्य क े �लए मुकद्दमा चल रहा था और वह ज़मानत पर बाहर था और चूं�क पी�ड़त पर अपीलकतार क े �पता क� हत्य का आरोप था, इस�लए मृतक पी�ड़त क े भाइय� का इस मामले म� अपीला�थर्य�को झूठा फ ं साने का स्पष मकसद था।

8. आरोपी व्यिक्त क� �गरफ्तार और उनक े कहने पर बाद म� बरामदगी को भी इस आधार पर चुनौती द� गई �क बरामदगी क े �लए कोई स्वतं गवाह नह�ं है और पु�लस अ�धकार� अलग-अलग संस्कर दे रहे ह�। बचाव प� ने यह भी कहा �क जो चाक ू बरामद �कया गया था, उसक� नोक क ुं द थी, ऐसे म� पोस्टमाटर �रपोटर म� उिल्ल�ख चोट� का उक् चाक ू क े कारण पंहुचाया जाना संभव नह�ं था । यहां तक �क, इस चाक ू को डॉक्ट से उसक� राय लेने क े �लए भी नह�ं �दखाया गया था �क उक् क ुं द चाक ू से यह चोट� संभव थीं या नह�ं। अपीलाथ� क े बताने पर हॉक� क� बरामदगी को �वचारण न्यायालय नेभी नह�ं माना है ।

9. हालां�क, उच् न्यायाल ने पाया �क आ�े�पत �नणर् �कसी भी कमी या �वकृ �त से ग्र नह�ं है, िजसम� हस्त�े क� आवश्यकता ह, अतः अपील को खा�रज कर �दया।

10. हमने अपीलकतार्ओ क े �लए फािज़ल अ�धवक्त, प्रत्-राज् हेतु फािज़ल अ�धवक्त और प्रत्यक े �लए फािज़ल अ�धवक्त को सुना है।

11. श् दुष्यं दवे, अपीलकतार्ओ क े �लए फ़ािज़ल व�रष् अ�धवक्ता ने �नवेदन �कया �क पूर� घटना स्वाभा�व रू से अनु�चत प्रत होती है। यह भी कहा गया �क अ�भ.सा.-1 क�थत चश्मद� गवाह का आचरण घटना क े समय या उसक े तुरंत बाद प्राकृ� नह�ं है और यह आत्म�वश्ववधर् नह�ं है िजससे मौक े पर उसक� उपिस्थ� बेहद सं�दग् हो जाती है । अन् दो चश्मद� गवाह प�द्रोहहो गए ह� और अ�भयोजन प� द्वार उनक े प्र-पर��ण से क ु छ भी नह�ं पता लगाया जा सका | आगे कहा गया �क एकमात चश्मद� गवाह क� गवाह� क े आधार पर, िजसका आचरण सामान् मानवीय व्यवहार सेअसंगत और अप्राकृ� था, िजससे घटनास्थल पर उसक� उपिस्थ� बेहद सं�दग् हो जाती है, अपीलकतार्ओ क� दोष�सद्�ध और सज़ा अन्य सबूत� से �बना पुिष् �कये अत्य�ध असुर��त है ।

12. सुश् ऐश्वया भाट�, राज् क े �लए उपिस्थ फ़ािज़ल व�रष् अ�धवक्ता ने कड़ा �वरोध करते हुए तक र �दया �क दो न्यायालय ने एक चश्मद� गवाह क� गवाह� क े आधार पर आरोपी अपीलकतार्ओ क े अपराध हेतु समवत� �नणर्य दजर �कये ह�, िजसे उन्ह�ने �वश्वसनी पाया और उसक े आधार पर सज़ा क े �लए कोई कानूनी बाधा नह�ं पाई | उन्ह�न आगे कहा �क एक प�द्रोहगवाह क े सा�य को पूर� तरह से नह�ं छोड़ा जाना चा�हए तथा उसक े प्रासं�ग�हस्स� प, जो कानून म� स्वीकाय ह�, अ�भयोजन प� द्वार भरोसा �कया जा सकता है। उन्ह�न आगे कहा �क ऐसे मामले म� जहां अ�भयोजन का मामला पूर� तरह से चश्मद�द गवाह क�प्रत गवाह� द्वार स्था�प है िजसक� पुिष्ट �च�कत्सीसा�य द्वार हुई हो, जांच म� क ु छ कमी क े कारण सज़ा को स्वीका नह�ं �कया जा सकता है और जांच अ�धकार� क� �वफलता या चूक अ�भयोजन मामले को सं�दग् या �वश्वा क े अयोग् नह�ं ठहरा सकती है |

13. हमने परस्पर �वरोधी �नवेदन�पर �वचार �कया है और अ�भलेख का सावधानीपूवर् अवलोकन �कया है।

14. अ�भयोजन प� ने अन् औपचा�रक गवाह� क े अलावा अपने संस्कर क े समथर् म� तीन चश्मद� गवाह� को पेश �कया, अथार्त, पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1, अमर �संह अ�भ.सा.-11, मृतक क े दो भाई और सुजान �संह अ�भ.सा.-5 | वह�ं अ�भ.सा.-11 और अ�भ.सा.-5 प�द्रोह हो गए। अ�भयोजन प� द्वार अ�भ.सा.-11 का प्र-पर��ण �कया गया | उसने आरोपी व्यिक्तय द्वारा अपने भाई को मारते हुए देखने से सीधे-सीधे इनकार कर �दया । उसने पु�लस को यह बताने क� बात से भी इनकार �कया �क उसने आरोपी अपीलकतार इंद्रज �संह को चाक ू से वार करते देखा था। उन्ह�न पु�लस को यह बताने क� बात से भी इनकार �कया �क वह अपने भाई को बचाने क े �लए भागा था | उसने यह भी कहा �क वह अंधेरे क े कारण दो�षय� क े चेहरे को नह�ं देख पाया था और इस तरह यह नह�ं कह सकता �क आरोपी व्यिक वह� व्यिक ह�, िजन्ह�नेउसक े भाई को मारा था | इस क�थत चश्मद� गवाह ने �वशेष रू से पु�लस को बताने क� बात से इनकार �कया �क तीन� आरो�पय� ने उसक े भाई क� हत्य क� थी और उसने उनक� पहचान अपराधी क े रू म� क� थी |

15. इसी तरह, अ�भयोजन प� द्वार पेश �कये गए अन् चश्मद� गवाह अ�भ.सा.-5 ने हॉक� से लैस दो लड़क� को और एक लड़क े को चाक ू �लए दूसरे लड़क े पर हमला करते हुए देखने क� बात से इनकार कर �दया । उसने तीन� आरो�पय� क� पहचान करने क� बात से भी इनकार �कया। उसने कहा �क जब वह डॉक्ट भारद्वा क े घर क े बाहर से गुजर रहा था, तब वहां 4-5 लोग खड़े थे और उसे उनसे ह� यह पता चला �क डॉक्ट भारद्वा क े घर क े बाहर व्यिक मर गया था। इस चश्मद� गवाह ने भी घटना को देखने क� बात से इनकार कर �दया । अ�भयोजन प� द्वार उसका प्र-पर��ण �कया गया ले�कन उससे क ु छ भी नह�ं पता चला।

16. इस प्रक नीचे क े दो न्यायालय द्वार दजर दोन� अ�भयुक्त अपीला�थर्य� क� अपराध �सद्�ध चश्मद� गवाह अ�भ.सा.-1 क� एकमात गवाह� पर आधा�रत है। एक सामान् �नयम क े रू म� न्यायाल एकमात् चश्मद� गवाह क� गवाह� पर कायर कर सकता है बशत� �क वह पूर� तरह से �वश्वसनी हो। �कसी गवाह क� एकमात गवाह� पर �कसी व्यिक को दोषी ठहराने म� कोई कानूनी बाधा नह�ं है। यह सा�य अ�ध�नयम, 1872 क� धारा 134 का तक र है। ले�कन अगर गवाह� क े बारे म� संदेह है तो न्यायाल पुिष्ट पर ज़ोर द�गे| संख्य व मात् नह�ं बिल् गुणव�ा महत्वपूणर् ह| परम्परागत�सद्धां यह है �क सा�य क े महत्व को देखा जाना चा�हए न �क उसक� संख्या को| यह �सद्धां सा�य अ�ध�नयम क� धारा 134 क� बु�नयाद है| कसौट� यह है �क क्या सा�य म� सत, अकाट्यत, �वश्वसनीयता है तथा यह भरोसेमंद है या अन्था | (देख� सुनील क ु मार बनाम रा.रा.�े. �दल्ल� सरकार राज)

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17. यह मामला मुख् रू से मृतक क े भाई पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 एकमात चश्मद� गवाह क� गवाह� पर �टका है। जैसा �क पहले से ह� ऊपर चचार क� गई है �क सज़ा �कसी एकमात् चश्मद� गवाह क� गवाह� पर आधा�रत हो सकती है, ले�कन तभी जब वह पूर� तरह से �वश्वसनी पाई जाए | स्था�पत कानूनी �सद्धांत क े आलोक म� हम पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 क� गवाह� और घटना क े समय उनक े आचरण क� जांच करने क े �लए आगे बढ़ते ह�।

18. उसक� अपनी गवाह� क े अनुसार, उस दुभार्ग्यपूण रात को लगभग 10:00 बजे, तीन� भाई (पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1, अमर �संह अ�भ.सा.-11 और मृतक दे�वंदर �संह उफ़ र ् लाड) अपने-अपने घर� क े �लए मां क े घर से चले । पर�मंदर �संह और अमर �संह दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी से क ु छ कदम आगे चल रहे थे, जब उन्ह�न उसे 'बचाओ-बाचाओ' �चल्लात हुए सुना, जैसे ह� वे पीछे मुड़े तो उन्ह�न तीन व्यिक्त को अपने भाई दे�वंदर �संह उफ़ र ् लाडी पर हमला करते हुए पाया। आरोपी इंद्रज �संह चाक ू से लैस था, जब�क आरोपी अमर �संह और �शव चरण हॉक� �लए हुए थे। उसने आगे कहा �क वह तीन� आरो�पय� को पहले से ह� जानता था और जब उन्ह�ने हस्त�े करने क� को�शश क� तो उन तीन� व्यिक्तय� ने उन पह�थयार तान �दए और उन्ह मारने क� धमक� द�। मारपीट क े कारण दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी ज़मीन पर �गर गया और बेहोश हो गया और उसक े बाद आरोपी व्यिक वहां से भाग गए। उसने यह भी कहा �क जब वे घायल भाई क� देखभाल कर रहे थे, तब पु�लस वैन वहां आ पहुंची िजसम� दे�वंदर �संह उफ़ र ् लाडी को अस्पता ले जाया गया, जहां उसे मृत लाया गया घो�षत �कया गया। प्र-पर��ण क े दौरान उसने कहा �क पूर� घटना मुिश्क से पांच �मनट चल� और उन्ह�न पु�लस से कोई �शकायत नह�ं क�, ले�कन घटना क े लगभग 15 �मनट बाद पु�लस स्वयंआ गई। उसने प्र-पर��ण म� यह भी स्वीका �कया था �क उसने अपनी मां को सू�चत नह�ं �कया, हालां�क वह पास म� रह रह� थी। उसने यह भी कहा �क वह और उसक े भाई अमर �संह पीसीआर वैन म� घायल दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी क े साथ अस्पता गए। उसने यह भी बयान �कया �क उसने दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाड़ी क� जांच करने वाले डॉक्ट को कहा था �क उसे �कस तरह से चोट� आई थीं । उसने यह भी कहा �क दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी क े �सर पर हॉक� क े वार क े कारण चोट लगी थी, हालां�क उसक े �सर से खून नह�ं �नकला था।

19. पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 और अमर �संह अ�भ.सा.-11 मृतक क े दो भाइय� का अप्राकृ� आचरण, जो हमने अ�भलेख से देखा है �क हालां�क वे घटना क े समय उपिस्थ होने का दावा करते ह�, ले�कन उनक े भाई को हमले से बचाने क े �लए उनक े द्वार कोई प्रय नह�ं �कया गया था । हालां�क अ�भ.सा.-1 ने अपनी मुख् पर��ा म� यह समझाने क� को�शश क� है �क जब उन्ह�न हस्त�े करने और अपने भाई दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी को बचाने क� को�शश क� तो तीन� आरोपी व्यिक्त ने उन पर अपने ह�थयार तान �दए और उन्ह�धमक� द� �क य�द उन्ह�न हस्त�े �कया तो उन्ह भी मार �दया जाएगा। यह ध्यान देना प्रासं� हो सकता है �क अमर �संह अ�भ.सा.-11 ने न तो मुख् पर��ा म� और न ह� अ�भयोजन प� द्वार अपनी िजरह म� प�द्रोहघो�षत �कए जाने क े बाद उनक े भाई र ् लाडी को बचाने क े �लए स्वयं द्वार या अ�भ.सा.-1 पर�मंदर �संह द्वार �कए गए �कसी भी प्रय क े बारे म� बयान �कया है, जब उस पर हमला हुआ था | इसक े �वपर�त अ�भ.सा.-11 ने अपनी मुख् पर��ा म� कहा �क वह अपनी र�ढ़ क� चोट क े कारण भाग नह�ं पाया। िजरह म� उन्ह�न स्पष रू से कहा �क उन्ह�न पु�लस को कभी नह�ं बताया �क जब उन्ह�न बचाने क� को�शश क� तो अ�भयुक् इंद्रज �संह ने चाक ू लहराया और अ�भयुक्त अमर �संह और �शव चरण ने हॉक� लहराते हुए उन्ह�धमक� द� �क जो भी दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी को बचाने क े �लए आएगा, मारा जाएगा | उन्ह�न िजरह म� इस बात से भी इनकार �कया �क उनक े द्वाराकभी भी पु�लस को कोई बयान �दया गया था �क उन्ह�न दो�षय� क� पहचान क� थी या आरोपी इंद्रज �संह ने चाक ू से वार �कया था और आरोपी अमर �संह ने हॉक� से वार �कए थे और मारपीट क े कारण हॉक� का अगला �हस्स टूट गया था और तीसरे आरोपी �शव चरण ने भी हॉक� से वार �कये थे |

20. हमलावर क ेवल हॉक� और चाक ू से लैस थे और �कसी भी आग्नेयास् से लैस नह�ं थे | यह बहुत ह� अप्राकृ� लगता है �क मौक े पर मौजूद दो भाई तीसरे भाई क े साथ मारपीट होने पर भी हस्त�े करने का थोड़ा सा भी प्रय नह�ं करते वह भी क ेवल इस�लए �क हमलावर उन्ह� हॉक� और चाक ू से धमकाएं । प्राकृ� मानव व्यवहा क े �वपर�त यह अप्राकृ� आचरण घटना क े समय मौक े पर चश्मद� गवाह क� उपिस्थ� पर गंभीर संदेह पैदा करता है। इसक े अलावा इस संबंध म� अ�भ.सा.-1 पर�मंदर �संह द्वार बताए गए तथ्, जैसा �क पहले ह� ऊपर चचार क� जा चुक� है, क� पुिष्टअन् भाई अमर �संह अ�भ.सा.-11 द्वार नह�ं क� गई है।

21. घटना क े ठ�क बाद दो भाइय� अ�भ.सा.-1 और अ�भ.सा.-11 का अन्य अप्राकृ� आचरण �फर से मौक े पर उनक� उपिस्थ� को बेहद सं�दग् बनाता है। घटना-स्थ क े पास ह� डॉक्ट भारद्वा का एक मे�डकल क्ल��नकथा और दोन� भाइय� का पहला प्रय घायल भाई को तत्का �च�कत्स सहायता क े �लए क्ल��नक म� ले जाना होना चा�हए था या डॉक्ट भारद्वा क े क्ल��नक से क ु छ �च�कत्सीय सहायता प्रा करना होना चा�हए था। स्वीकृत रूप स पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 क े बयान क े अनुसार पीसीआर वैन लगभग 15 �मनट बाद पहुँची । इस दौरान घायल भाई को क्ल��नक म� ले जाने या क ु छ प्राथ� उपचार क े �लए डॉक्ट भारद्वा को बुलाने का कोई प्रय नह�ं �कया गया | यह पूर� तरह से सामान् मानव व्यवहा क े �वरुद्है ।

22. इसक े अलावा घायल को �कसी अन्यअस्पता ले जाने या यहां तक �क पु�लस को सू�चत करने क े �लए कोई प्रय �कया जाना अ�भक�थत नह�ं है । यह बेहद अप्राकृ� है �क दो सगे भाइय� ने तीसरे भाई क� जान बचाने क े �लए कोई प्रय नह�ं �कया यद्य�प वे घटना-स्थल पर मौजूद थे जब वह गंभीर रू से घायल हो गया था | ऐसा कहा गया है �क पीसीआर वैन क ु मायूं होटल क े सामने घायल व्यिक क े बारे म� �कसी अ�ात व्यिक द्वार द� गई जानकार� क े आधार पर 15 �मनट क े बाद पहुंची थी। अ�भ.सा.-20 म�हला कांस्टेब रेणु ने अपनी गवाह� म� कहा �क उस दुभार्ग्यपूण रात वह पीसीआर वैन म� तैनात थी जब रात को लगभग 10:27 बजे एक अ�ात व्यिक ने यह सू�चत करने क े �लए कॉल �कया �क एक आदमी क ु मायूं होटल, �डफ � स कॉलोनी क े पास बेहोश पड़ा है जो डीडी संख्य-493 क े रू म� दजर् के ई | यह एक अ�ात व्यिक् द्वार द� गई जानकार� पर आधा�रत थी, पीसीआर वैन घटना-स्थ पर पहुंची और घायल को एम् लेकर गई जहां उसे मृत लाया गया घो�षत �कया गया |

23. अ�भयोजन प� क े सं स ्करण के अनुसार, पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 और अमर �संह अ�भ.सा.-11 दो भाई घायल को पीसीआर वैन म� अस्पता ले गए और उसक� मे�डकल जांच क े दौरान मौजूद थे। हालां�क, अ�त�रक् दस्तावे क े खंड-II म� दायर एमएलसी प्रदशर्.सा.-17/ए को देखकर यह पता चलता है �क नाम वाले कॉलम म� शुर म� अ�ात �लखा था िजसे बाद म� दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी क े रूप म� दजर् �कया गया थ| इसी तरह शुर म� �रश्तेदा या दोस् का नाम दजर करने क े �लए बनाए गए कॉलम म� हेड कांस्टेब 'धरम �संह' दजर �कया गया है और दूसर� पंिक्त म�'वी/सी' वी-89 पीसीआर नंबर 1008/पीसीआर’ शब् दजर करने क े बाद 'और भाई' जोड़ा गया है।

24. यह अपने आप म� अ�भयोजन प� क े इस संस्करणपर गंभीर संदेह को जन् देता है �क मृतक क े दो भाई पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 और अमर �संह अ�भ.सा.-11 मौक े पर मौजूद थे और पीसीआर वैन म� घायल को एम् ले गए थे | य�द ऐसा होता, तो स्वाभा�व रू से, उन्ह�न मृतक का नाम और उनक े स्वय क े नाम �दए होते जो पहले-पहल एमएलसी प्रदश अ�भ.सा.-17/ए म� दजर �कए गए होते। डॉक्ट रोमेश लाल अ�भ.सा.-17/ए िजन्ह�न एमएलसी तैयार क� थी, ने अपने सा�य म� कहा है �क हेड कांस्टेब धरम �संह द्वार एम् क े आपातकाल�न क� म� एक शव लाया गया था, िजसक े पूरे शर�र पर तेजधार ह�थयार से लगी कई गहर� चोट� थीं और उन्ह�न एमएलसी अ�भ.सा.-17/ए तैयार क� थी ।

25. यहां �वचार �कए गए तथ् घटना-स्थ क े स्था पर चश्मद� गवाह क� उपिस्थ� को अत्य�धक सं�दग् और असम्भाव् बनाते ह�। चूं�क अ�भ.सा.-1 पर�मंदर �संह क े आचरण म� गंभीर संदेहास्पद पहलू ह� और उनका आचरण स्वाभा�व प्रत नह�ं होता है, इस�लए पुिष्ट के �बना उनक� गवाह� को स्वीकारना सुर��त नह�ं होग, �वशेष रू से तब जब दो अन्यचश्मद� गवाह, िजनम� से एक मृतक का सगा भाई है, प�द्रोह� ह गए ह� |

26. इसक े अलावा, चश्मद�द� क� गवाह� और �च�कत्सीय सा�य क े बीच महत्वपूणर�वसंग�त है। मृतक दे�वंदर �संह उफ़ र ्लाडी क े शव का पोस्टमाटर डॉक्ट एम.एस. सागर अ�भ.सा.-21 द्वार �कया गया था। बाह्य पर��ण म� मृत्यु से पूवर् लगी �नम्न�ल�खत चोट� पर ध्यान –

1. दोन� बाजुओं क े अगले �हस्स� पर व दोन� बाज़ओं व दोन� हाथ� क े �पछले �हस्से पर कईगुम चोट� व रगड़ लगने से आई चोट� |

2. कान क े पास 3 सेमी x 2 सेमी x 0.[5] सेमी आकार का सी.एल.डब्ल्.|

3. दा� ओर खोपड़ी क े पास 3.[6] सेमी. x 3 सेमी. आकार क� गदर् तक फ़ ै ल� गुम चोट� |

4. माथे क े दा� ओर 1 सेमी नीचे 1.[5] x 1 सेमी क� बार�क रेखा क े समान सतह� गहरा कटा घाव ।

5. बा� टांग क े ऊपर� �हस्सेपर गहरा कटा घाव लंबवत रू से आकार 1.[5] x 1 सेमी x मांसपेशी पर गहरा स्पष्ट कटा हुआ गहराई त|

6. बाएं घुटने म� गहरा कटा घाव 5 सेमी x 0.[5] सेमी x हड्ड तक गहरा स्पष्ट कटा हुआ गहराई त|

7. बा� बाजू क े अगले �हस्से परगोल कोहनी पर गहरा कटा घाव 1 सेमी x 1 सेमी का स्पष्ट कटा ह, बाहर क� ओर �नकला हुआ |

8. बा� बाँह क े अगले �हस्से म� कटा घाव जो �क कोहनी क े जोड़ से 6 सेमी नीचे है तथा आकार म� 2.[5] x 1 x हड्डी तक गहराहै स्पष् कटा खुला हुआ तथा कटने क े �नशान जो �क कोहनी क� हड्डी तक मौजूद है |

9. 1.[5] सेमी. x 1 सेमी. x मांसपेशी तक गहरा अन्तःप्रकोष्ठ से 5 सेमी. नीचे बा� बाँह क े अगले �हस्से परसामने क� ओर कटा घाव जो त्वचा के नीचेमांसपेशी और ऊतक क े अंदर क� ओर से साफ़ कटे होने को स्पष्दशार्ता है|

10. छाती क े �नचले �हस्स म� 10 सेमी. नीचे पेट क े दा�हने �हस्से म� बगल क े आस-पास कटा घाव जो मांसपेशी म� 3 सेमी x 1 सेमी �तरछा गहरा है, स्पष्कटा हुआ, जो पेट म� अन्दर तकभेदा हुआ नह�ं है|

11. छाती क� दा�हनी ओर सामने क� तरफ घ�पने का घाव जो �तयर्क रू म� क�ीय सतह तक गया है, िजसका आकार 3.[5] सेमी x 1 सेमी. है तथा जो हंसल� क े 22 सेमी नीचे स्पष्ट कटा हुखुला है और बाहर क� ओर 7वीं पसल� से गुजरता हुआ फ े फड़े क े �नचले बाएं भाग से होते हुए हृदय के बाहर� सतह के पारह्रदय क� बाह्य रक्त सतह गया है | तथा हृदय के �नचले भाग केबाएं कोष म� 2 सेमी. x 1.[5] सेमी. x हृदय के �नचले भाग के कोषक� गहराई तक ह्रदय के �नचल भाग तक कटा घाव |

12. 4 सेमी. x 1 सेमी. आकार का त्वचा तकगहरा घ�पने का घाव जो चोट सं. 11 से 8 सेमी. नीचे �तयर्कहै |

13. चोट सं. 12 से 1.[5] सेमी. नीचे और 2 सेमी. पीछे 1 सेमी. x 1 सेमी. का अन्दर क� ओर से स्पष्ट कटा घ|

14. पेट म� बा� तरफ घ�पने का घाव जो �क पाश्वर् अ�ीरेखा क� तरफ हंसल� से 25 सेमी. नीचे क� ओर 4 सेमी. x 1 सेमी. आकार का है जो�क छोट� एवं बड़ी आँत म� कई घाव करते हुए पेट म� अन्दरतक गया है |

15. पेट म� बा� तरफ 4 सेमी. x 1.[5] सेमी. का कटा घाव जो चोट सं. 14 से 6 सेमी. नीचे एवं 2 सेमी. मध्य क� ओरहै | मृतक क े आंत�रक पर��ण से �ात हुआ:- बा� तरफ छाती और फ े फड़� क े बीच लगभग 500cc खून जमा हुआ पाया गया | बाएं फ े फड़े क े �नचले �हस्से म�3 सेमी. x 1.[5] सेमी. x 4 सेमी. का घ�पने का घाव था | हृदय के पास400cc जमा हुआ खून तथा खून क े थक्के पाए गए | हृदय के �नचले �हस्से म�2.[5] सेमी. x 1 सेमी. x ह्रदय के बाएं कोष क� द�वा क� पूणर् गहराई तक क ं डरा रज्जु (CORDAE TENDENAE) काटते हुए घ�पने का घाव | पेट क े अंदर लगभग 400cc तक रक्तस्रव खून क े थक्केक े साथ छोट� एवं बड़ी आँत म� कई कटे घाव पाए गए | ऐसी राय व्यक्त क� गई �मृत्यु से पूवर् तेज़ धार वाले ह�थया से पहुंचाई गई चोट� क े प�रणामस्वरू उन्ह� धक्का पहुंचा ज उनक� मृत्युका कारण बना | चोट सं. 11 एवं 14 सामान्य तौर पर व्यिक्ततथा समग्र र से मृत्यु का�रत होने के �लए पयार्प्त |

27. इस प्रक, अ�भयोजन प� क े संस्कर क े अनुसार तीन हमलावर� द्वार क ु ल 15 चोट� पहुंचाई गई िजनक े पास, दो हॉक� और एक चाक ू था। पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 ने ज़ोर देकर कहा �क पूर� घटना मुिश्क से पांच �मनट तक चल�। तीन हमलावर� द्वार एक साथ 5 �मनट क� छोट� अव�ध क े भीतर मृतक पर हमला करते हुए इस प्रक क� 15 चोट� पहुँचाना व्यावहा�र रू से असंभव होगा, खासकर तब जब पी�ड़त सामान् तथा स्वस व्यिक था िजसने स्वाभा�व रू से प्र�तर भी �कया होगा। तीन आरोपी व्यिक्त द्वार मृतक को 15 चोट� पहुँचाने म� काफ़� समय लगा होगा| इससे खुद पता चलता है �क तीन अ�भयुक्त क े पास अपराध का�रत करने क े �लए पयार्प समय था और पूर� घटना पांच �मनट क े भीतर नह�ं हो सकती थी, जैसा �क चश्मद� गवाह पर�मंदर �संह अ�भ.सा.-1 ने बताया था। यह तथ् इस तथ् क े साथ भी जुड़ा है �क मृतक क े दो भाई एक मूक दशर् बने रहे, जब तीसरे भाई क े साथ मारपीट क� जा रह� थी, इस तथ् का स्पष सं केत है �क अ�भ.सा.-1 पर�मंदर �संह मौक े पर मौजूद नह�ं था और घटना का चश्मद� गवाह नह�ं था।

28. डॉ. एम.एस. सागर ने पोस्टमाटर �रपोटर म� कहा है �क मौत का कारण मृत्यु से पूव तेज धार वाले ह�थयार से पहुँचाई गई कई चोट� क े कारण सदमा पहुँचना था और चोट संख्य 11 और 14 व्यिक्त और सामू�हक रू से प्राकृ�तढंग से मौत का कारण बनने क े �लए पयार्प थीं। उन्ह�न अपने बयान म� आगे कहा �क चोट� तेज धार वाले ह�थयार से पहुँचाई ग� और चूं�क उन्ह कोई ह�थयार नह�ं �दखाया गया था, इस�लए उन्ह�न कोई राय नह�ं द� है। स्वीकृत रूप, आरोपी अपीलकतार इंद्रज �संह क े इंकशाफ� बयान पर बरामद �कए गए चाक ू क� नोक टूट� हुई थी और यह नुक�ला नह�ं बिल्क कुंद थ। क्य मृतक क े शर�र पर पाए गए घ�पने व काटने क े घाव टूट� हुई नोक वाले चाक ू क े हो सकते ह�, हमार� राय म� यह बेहद सं�दग् है। यह जानने क े �लए डॉक्टरक� राय नह�ं ल� गई है �क क्य इस तरह क� चोट� टूट� हुई नोक वाले चाक ू से पहुँचाई जा सकती ह� या नह�ं ।

29. मामले क े तथ्य और प�रिस्थ�तय म� यह मामला जांच अ�धकार� क� ओर से गंभीर चूक थी। हालां�क, आम तौर पर जांच अ�धकार� क� ओर से मामूल� चूक, अगर अन्यथ �वश्वसनी हो, तो चश्मद� गवाह क� बात को स्वीका करने क े रास्त म� नह�ं आना चा�हए। ले�कन प्रस्त मामले क� प�रिस्थ�तय म� जहां एकमात चश्मद� गवाह का आचरण अप्राकृ� है और �व�भन् अन् सम्बं�धत प�रिस्थ�तया भी ह� जो घटना-स्थ पर उसक� उपिस्थ� को सं�दग् बनाती ह�, जांच अ�धकार� क� ओर से इस तरह क� चूक का बहुत महत् है िजसे नजरअंदाज नह�ं �कया जा सकता है।

30. ऐसी प�रिस्थ�तय म� �च�कत्सय गवाह क� राय प्रा करने क े महत् पर ज़ोर देते हुए इस न्यायाल ने कातर्रेय व अन्य बनाम.प. राज्य मामले म� �नम् रू से अपनी राय द� है:- “हम इस अवसर पर �च�कत्सय गवाह क� राय जानने क े महत् पर जोर देते ह�, िजसने पी�ड़त क� चोट� क� जांच क� थी, ख़ास तौर पर इस �बंदु पर, ऐसे मामले म� �वशेषतः उ�चत न्या प्रदान करनक े �लए जहां पाई गई चोट� वै�ा�नक रूप से एक जैसी ह, उदाहरण- छ ु रे का घाव, और न्यायाल क े सम� समस्य यह है �क क्य ये सभी या इनम� से कोई भी चोट एक या एक से अ�धक ह�थयार क े कारण हो सकती ह� । अ�भयोजन का यह कतर्व है, और समान रूप सेन्यायाल का भी, �क यह ध्यान रखा जाए �क अपराध का क�थत ह�थया, य�द उपलब् है, तो �च�कत्सय गवाह को �दखाया जाए और उसक� राय ल� जाए �क क्य पी�ड़त पर का�रत सभी या कोई चोट उस ह�थयार से पहुँचाई गई है। ऐसा न होने पर कभी-कभी, न्या प्रदान करने म� गलती भी सकती है।”

31. ईश्व �संह बनाम उ�र प्रदेश रा म� इस न्यायाल द्वार पुन: इसे �नम् प्रकार सदेखा गया है:- “अ�भयोजन का यह कतर्व है, और पूर� तरह न्यायाल का भी �क वह देखे �क अपराध का क�थत ह�थयार, य�द उपलब् है, तो �च�कत्सी गवाह को �दखाया जाए और उसक� राय ल� जाए �क क्य पी�ड़त पर सभी या कोई भी चोट उस ह�थयार से का�रत क� जा सकती है। कभी-कभी ऐसा न होने पर न्या प्रदान करन म� गलती भी हो सकती है| अ�भलेख पर मौजूद सा�य� क े आधार पर, यह कहना मुिश्क है �क, मृतक क� चोट ज़ब्त �कए गए टूट� हुई नोक वाले चाक ू से का�रत हुई थी। ये �व�वधताएँ अ�भयोजन मामले क े महत्वपूण �हस्स से संबं�धत ह�, और इन्ह मामूल� �वसंग�तय� क े रू म� खा�रज नह�ं �कया जा सकता है। ऐसे मामले म�, जैसा इस न्यायाल द्वार “�म�र सेन और अन् बनाम उ.प. राज्” म� माना गया �क चश्मद� गवाह को पूणर्तयास्वीका नह�ं �कया जा सकता है|”

32. अपीलकतार्ओ क� दोष�सद्� अ�भ.सा.-1 क� मौ�खक गवाह� पर �टक� हुई है िजसे मृतक क� हत्य क े चश्मद� गवाह क े रू म� पेश �कया गया था। दोन� �वद्वानसत न्यायाधी, साथ ह� उच् न्यायाल ने अ�भ.सा.-1 पर भरोसा जताया है और सामान्यतः यहन्यायालय �नम्न अदालत के म को नकारने म� इच्छुक नह�ं होती है ले�कन चूँ�क �भयोजन क� कहानी म� �न�हत अनु�चतताएं ह� और चश्मद� गवाह का आचरण प्राकृ�तक व्यवह से असंगत है, हम� नह�ं लगता �क एकमात चश्मद� गवाह क� गवाह� पर, िजसक� पुिष्ट भी न हुई ह, अपीलकतार्ओ को दोषी ठहराना सुर��त होगा। “सेल्वराज बनाम त�मलनाडु राज्” मामले म� इस न्यायाल क� तीन न्यायाधश� क� पीठ द्वार भी ऐसा ह� �वचार �कया गया है। जहां सा�य� का मूल्यांकन करते हु, अ�भयोजन क� कहानी को सामान् मानवीय प्रकृ क े अत्यंत �वपर� और असंगत पाया गया था, िजसक े प�रणामतः दो �नचल� अदालत� द्वार दजर अपराध �सद्�ध को खा�रज कर �दया गया था।

33. वतर्मा मामले क े तथ्य पर, यह �बना �कसी संकोच क े कहा जा सकता है �क अ�भयोजन प� क�थत अपराध� को �वश्वसनीय व पुख्त सबूत पेश करक े संदेह से परे सा�बत करने म� बुर� तरह से �वफल रहा है।

34. उपरोक्त चचार्ओ क े मद्देज़र, हम क�थत अपराध� क े �लए अपीलकतार्ओ को दोषी ठहराने क े �लए �नम्नन्यायालय द्वार �दए गए कारण को पयार्प नह�ं मान पा रहे ह�। इसक े �वपर�त, हमारा यह सम्म �वचार है �क अ�भयोजन प� अ�भयुक्तक� अपराध �सद्�ध क संदेह से परे स्था�प करने म� �वफल रहा है। यह घटना उस तर�क े से नह�ं हुई है िजस तरह से अ�भयोजन प� चाहता है �क न्यायाल उस पर �वश्वा करे �क ऐसा हुआ था।

35. चूं�क, अ�भयोजन प� संदेह से परे अ�भयुक्त क े अपराध को सा�बत करने म� बुर� तरह से �वफल रहा है, इस�लए अपीलकतार्ओ को संदेह का लाभ �दया जाना चा�हए। इन प�रिस्थ�तय म�, हम �नम्नन्यायालय द्वारा �दए गए आ�े�पत आदेश� को खा�रज करते ह� और इन अपील� को अनुम�त प्रदान करते । अपीलकतार्ओ को �रहा करने का �नद�श �दया जाता है जब तक �क उनक� �कसी अन् मामले म� आवश्यता न हो।........................(न्यायाधी) (संजय �कशन कॉल) (अ�नरुद बोस) (कृ ष् मुरार�) नई �दल्ल, 12 अक्टूब, 2020 अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ के सी�मत प्रयोग �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन् प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं � जाएगा| समस्त कायार्लयी एवं व्यावहा�रक प्र हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स्वरू अ�भप्रमा�णत मा जाएगा और कायार्न्वयन त लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।