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भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपील अति कारिर ा
सि विवल अपील ं. 2850 वर्ष! 2020
आनंद यादव और अन्य .........अपीलार्थी'
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य .........प्रत्यर्थी'
विन र्ण! य
माननीय न्यायमूर्ति ंजय विकशन कौल
JUDGMENT
1. एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) और एम. एड की तिडग्री ारी स्ना कोत्तरों क े प्रति स्प ' वि? ों ने अनेक वादो को जन्म विदया ?ै, और व !मान विववाद इ ी े उत्पन्न ?ो ा ?ै। इ विववाद का विनपटारा करने क े लिलए विकन् ु प्रा ंविHक थ्यात्मक ंदभ! में अनेक न्यातियक विनर्ण!य मौजूद ?ैं। आHे, विवशेर्षज्ञों क े ुझाव क े आ ार पर इ विववाद का विवश्लेर्षर्ण करने में ंबंति अति कारिरयों क े रुख में क ु छ ?द क प्रत्याव ' बदलाव र?ा ?ै। मामले क े ंतिक्षप्त थ्य इ प्रकार ?ैंः
2. विववाद मूल विवज्ञापन ंख्या 46 ?ै सिज े उत्तर प्रदेश उच्च शिशक्षा ेवा चयन आयोH ( ंक्षेप में 'यू.पी.एच.ई.ए.ए. ी.'), प्रति वादी ंख्या 2, ने माच!, 2014 में जारी विकया र्थीा, सिज में 'शिशक्षाशास्त्र' वि? विवशिभन्न विवर्षयों में ?ायक प्रोफ े रों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2020 INSC 588 क े पद क े लिलए आवेदन आमंवि[ विकए Hए र्थीे। अपीलार्थी'-2 की उम्मीदवारी को इ आ ार पर रद्द कर विदया Hया विक उ ने विवश्वविवद्यालय अनुदान आयोH ( ंक्षेप में यू.जी. ी.), प्रति वादी-4, द्वारा विन ा!रिर न्यून म मानदंडों को पूरा न?ीं विकया, भले ?ी उ क े पा एम. एड. की तिडग्री र्थीी। परिरर्णामस्वरूप उक्त अपीलक ा! ने रिरट यातिचका-ए 61 वर्ष! 2015 को दायर कर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
3. जबविक रिरट यातिचका लंविब र्थीी ब भी पूवeक्त विवज्ञापन क े अनु रर्ण में भ ' प्रविfया लHभH पूरी कर ली Hयी, और एक उत्तरव ' विवज्ञापन, विवज्ञापन ंख्या 47 वर्ष! 2016 जारी कर विदया Hया। रकारी ?ाय ा प्राप्त Hैर- रकारी विवश्वविवद्यालयों में 'शिशक्षाशास्त्र' में ौ पदों वि? विवशिभन्न विवर्षयों में ?ायक प्रोफ े र क े पदों ?े ु पुनः विवज्ञापन विदया Hया। इन पदों क े पा[ ा मानदंड विवज्ञापन क े पैरा 6 में विनर्दिदष्ट विकया Hया र्थीा, सिज का म?त्वपूर्ण! अंश विनम्नानु ार ?ै: “न्यून म शैतिक्षक योग्य ा“
6. अविनवाय! शैतिक्षक योग्य ा इ विवज्ञापन में उसिmलिख ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए विन ा!रिर न्यून म शैक्षशिर्णक योग्य ा विनम्नानु ार ?ै: 6.[1] ंHी और ललिल कला क े अलावा अन्य विवर्षयों क े लिलए ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए 6.1.[1] परास्ना क में ंबंति विवर्षय में 55 प्रति श अंक क े ार्थी अच्छा अकादविमक रिरकॉड! (अर्थीवा ज?ां ग्रेडिंडH प्रर्णाली प्रचलिल ?ै, व?ां पर इ ी क े मान स्कोर क े ार्थी)। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 6.1.[2] विवश्वविवद्यालय अनुदान आयोH (यू. जी. ी.) द्वारा आयोसिज राष्ट्रीय पा[ ा परीक्षा (नेट) या उ.प्र. राज्य स् रीय पा[ ा परीक्षा (ए.ई.टी.) या राज्य स् रीय पा[ ा परीक्षा (ए.एल.ई.टी.) में न्यून म उत्तीर्ण! अंकों प्राप्त विकया ?ो। xxxx xxxx xxxx xxxx इ प्रकार, पा[ ा क े रूप में विनर्दिदष्ट जुड़वां मानदंड, (क) स्ना कोत्तर स् र पर विक ी ंबंति विवर्षय में 55 प्रति श स्कोर अर्थीवा ज?ां पर ग्रेडिंडH प्रर्णाली लाHू ?ै व?ां पर उ ी क े मान स्कोर प्राप्त करना अपेतिक्ष ?ै; और (ब) राष्ट्रीय पा[ ा परीक्षा ( ंक्षेप में 'नेट'), या उ.प्र. राज्य स् रीय पा[ ा परीक्षा (क े लिलए) में उत्तीर्ण! अंक ( ंक्षेप में 'ए.ई.टी.') या यू.जी. ी. द्वारा ंचालिल राज्य स् रीय पा[ ा परीक्षा ( ंक्षेप में 'ए.एल.ई.टी.')।
4. उक्त े उत्पन्न विववाद क े दो प?लू र्थीे: प्रर्थीम, क्या ?ायक प्रोफ े र क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए एम. एड. को एम.ए, (शिशक्षाशास्त्र) क े म ुल्य माना जाना चावि?ए?, और विद्व ीय, भले ?ी यविद इ े म ुल्य मान लिलया जाए ो क्या य? क?ा जा क ा ?ै विक एम. एड. स्ना कोत्तर तिडग्री ?ै?
5. इ मस्या को ?ल करने क े लिलए प्रति वादी-2 ने उक्त विवर्षय पर अपनी राय देने क े लिलए एक चार दस्यीय विवशेर्षज्ञ विमति का Hठन विकया। इ विमति में चार प्रति विy व्यविक्त शाविमल र्थीे: (i) ) प्रोफ े र भूदेव सिं ?, प्रोफ े र एवं विवभाHाध्यक्ष शिशक्षाशास्त्र, बनार वि?न्दू विवश्वविवद्यालय, वारार्ण ी; (ख) प्रोफ े र पी. ी. शुक्ला, शिशक्षाशास्त्र विवभाH, बनार वि?न्दू विवश्वविवद्यालय; (H) प्रोफ े र अविम ा वाजपेयी, शिशक्षाशास्त्र विवभाH, लखनऊ विवश्वविवद्यालय; और (घ) प्रोफ े र पी.क े. ा?ू, शिशक्षाशास्त्र विवभाH, इला?ाबाद विवश्वविवद्यालय।
6. चारों विवशेर्षज्ञों की राय एकम र्थीी। इ प्रकार, प्रोफ े र भूदेव सिं ? क े अनु ार, नेट/जे.आर.एफ. (जूविनयर रिर च! फ ै लोशिशप ) प्रमार्ण प[ क े लिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आयोसिज परीक्षा एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) और एम. एड दोनों विवर्षयों छा[ों क े लिलए मान ?ै जो एक ?ी विदन, एक ?ी पाठ्यfम, एक ?ी विवर्षय और एक ?ी प्रश्नप[ क े ार्थी क े ार्थी आयोसिज करायी Hयी ?ै। फलस्वरूप जो प्रमार्णप[ जारी विकया Hया व? क े वल 'शिशक्षाशास्त्र' क े विवर्षय पर र्थीा और दो तिडग्री में े विक ी का भी अलH े उmेख न?ीं विकया Hया र्थीा। वर्ष! 2016 में जारी विवज्ञापन में उपरोक्त दो योग्य ाओं में े कोई विनर्दिदष्ट न?ीं र्थीी अविप ु क े वल य? विनर्दिदष्ट र्थीा विक ंबंति विवर्षय में अपेतिक्ष अंकों क े ार्थी पोस्ट-ग्रेजुएशन ?ोना चावि?ए। प्रोफ े र पी ी शुक्ला ने य? भी क?ा विक ?ायक प्रोफ े र (शिशक्षर्ण), कला ंकाय, पद ?े ु, एम. एड की तिडग्री ार्थी ?ी, एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) को स्वीकार विकया जाना चावि?ए, सिज े विक अति क े अति क एम. एड. तिडग्री ारी छा[ों ने बी. एड की स्ना क तिडग्री पूरी कर लिलया ?ै। य? दोनों म अन्य दोनों विवशेर्षज्ञों क े म ों े ंH र्थीा।
7. उपरोक्त क े परिरर्णामस्वरूप प्रश्नH पदों पर उ.प्र.उच्च शिशक्षा ेवा चयन आयोH/ प्रति वादी-2 ने विदनांक 11.7.2016 को एक शुति…प[ जारी विकया Hया। इ शुति…प[ को प्रति वादी-3, जो दोनों विवज्ञापनों में आवेदक र्थीा, द्वारा उच्च न्यायालय में रिरट-ए 16127 वर्ष! 2017 क े माध्यम े चुनौ ी विदया Hया। उपरोक्त का मूल्यांकन करने क े लिलए दोनों प?लुओं पर मुतिच रूप े विवचार करना ?ोHा। ब े प?ले, ज?ां क 1.12.1958 े प?ले, यू.जी. ी./प्रति वादी नंबर-.[4] ने विवश्वविवद्यालय अनुदान आयोH अति विनयम, 1956 (इ क े बाद 'यू.जी. ी. अति विनयम' क े रूप में ंदर्भिभ ) की ारा 22 क े प्रयोजनों क े लिलए तिडग्री की एक ूची जारी की र्थीी, सिज में य? विनर्दिदष्ट विकया Hया र्थीा विक मास्टर की तिडग्री, अन्य बा ों क े ार्थी, एक एम.ए. और एम. एड. शाविमल ?ोHा। उक्त ारा विनर्दिदष्ट कर ी ?ै विक तिडग्री प्रदान करने या देने का अति कार का प्रयोH ारा 22 की उप- ारा (1) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े ? स्र्थीाविप या विनHविम विवश्वविवद्यालय ?ी करेHा, जबविक उप- ारा (3) य? तिडग्री क े अर्थी! को ब ा ी ?ै। य? ारा इ प्रकार ?ै:
22. तिडग्री प्रदान करने का अति कार- (1) तिडग्री प्रदान प्रदान करने क े अति कार का प्रयोH क े वल क ें द्रीय अति विनयम, प्रां ीय अति विनयम या राज्य अति विनयम क े ? Hविठ विवश्वविवद्यालय अर्थीवा सिज े ारा 3 क े ? विवश्वविवद्यालय अर्थीवा ं द क े अति विनयम द्वारा विवशेर्ष रूप े शक्त कोई ंस्र्थीान ?ी करेHा। (2) उप- ारा (1) में उपबंति क े सि वाय, कोई भी व्यविक्त अर्थीवा प्राति करर्ण तिडग्री अर्थीवा अनुदान न?ीं प्रदान कर क ा ?ै और और स्वयं को ऐ ा करने का अति कारी न?ीं मानेHा। (3) इ ारा क े लिलए, ''तिडग्री'' े ऐ ी तिडग्री अशिभप्रे ?ै जो क े न्द्रीय रकार की पूव! मंजूरी े इ विनविमत्त राजप[ में अति ूचना द्वारा आयोH द्वारा विवविनर्दिदष्ट की जाए।''
9. विद्व ीय, विदनांक 30.6.2010 को, यू.जी. ी./प्रति वादी-4 ने विवश्वविवद्यालय अनुदान आयोH (विवश्वविवद्यालयों और कॉलेजों में शिशक्षकों और अन्य शैक्षशिर्णक कम!चारिरयों की विनयुविक्त क े लिलए न्यून म योग्य ा और उच्च शिशक्षा में मानकों को बनाये रखने क े लिलए कदम) विवविनयमन, 2010 ( 'यूजी ी विवविनयमन' क े रूप में यर्थीा ंदर्भिभ ) (इन विवविनयमनों, अन्य बा ों क े ार्थी, 2016 और 2018 में ंशो न विकया Hया) जारी विकया। विवविनयमन 4.4.[1] “शिशक्षाशास्त्र” में ?ायक प्रोफ े र, अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी, की अ?! ाओं े ंबंति ?ै और य? विववि? कर ा ?ै विक विक ी भार ीय विवश्वविवद्यालय े कम े कम 55 प्रति श अंकों क े ार्थी ंबंति विवर्षय में मास्टर तिडग्री अर्थीवा विक ी मान्य ाप्राप्त विवदेशी विवश्वविवद्यालय े मकक्ष तिडग्री ार्थी ?ी ार्थी नेट अर्थीवा इ क े मरूप अन्य Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds परीक्षा उत्तीर्ण! विकया ?ो। विवविनयमन 4.4.[7] प्रोफ े रों क े पदों क े लिलए प्रति वादी- 5/राष्ट्रीय शिशक्षक शिशक्षा परिरर्षद ( ंक्षेप में 'ए. ी.टी.ई.') द्वारा विन ा!रिर योग्य ाएं मावि? कर ा ?ै। इ विवविनयमन का म?त्वपूर्ण! अंश इ प्रकार ?ै: 4.4.[7] प्रोफ े रों पद क े लिलए विववि? योग्य ाएं (अ) बी. एड. पाठ्यfम ?े ु योग्य ा:
(i) i) ) ?ायक प्रोफ े र: क. फाउंडेशन पाठ्यfम
1. 50% अंकों क े ार्थी विवज्ञान/मानविवकी/कला में मास्टर तिडग्री(अर्थीवा ज?ां ग्रेडिंडH प्रर्णाली प्रचलिल ?ै, व?ां पर उ क े मकक्ष ग्रेड);
2. कम े कम 55% अंकों क े ार्थी एम.एड़. (अर्थीवा ज?ां पर ग्रेडिंडH प्रर्णाली लाHू ?ै व?ां पर उ क े मकक्ष ग्रेड); और
3. यू.जी. ी./ ऐ ा कोई ंब… विनकाय/राज्य रकार द्वारा मय- मय पर प्र ानाचाय! और व्याख्या ाओं क े लिलए क े लिलए विववि? कोई अन्य श ! आज्ञापक ?ोHी। या
1. 55% अंकों क े ार्थी शिशक्षाशास्त्र में एम.ए. (अर्थीवा ज?ां पर ग्रेडिंडH प्रर्णाली लाHू ?ै, व?ां पर उ क े मकक्ष मकक्ष ग्रेड);
2. कम े कम 55% अंकों क े ार्थी बी. एड. (अर्थीवा ज?ां पर ग्रेडिंडH प्रर्णाली लाHू ?ै, व?ां पर उ क े मकक्ष मकक्ष ग्रेड); और
3. यू.जी. ी./ ऐ ा कोई ंब… विनकाय/राज्य रकार द्वारा मय- मय पर प्र ानाचाय! और व्याख्या ाओं क े लिलए क े लिलए विववि? कोई अन्य श ! आज्ञापक ?ोHी। xxxx xxxx xxxx xxxx Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
10. रिरट यातिचका में प्रति वादी-3 की चुनौ ी देने क े विनम्नलिललिख आ ार ?ै: (i) ) डॉ. प्रीति सिं ? बनाम ए. क े. मंHल और अन्य[1] क े मामले की Hयी ुनवाई में इ न्यायालय ने य? म व्यक्त विकया र्थीा विक एम. एड. तिडग्री एमए (शिशक्षा) तिडग्री क े म ुल्य न?ीं ?ोHी;
(i) i) ) यर्थीापूवeक्त मान म वि?माचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रवीर्ण क ु मार बनाम वि?माचल प्रदेश राज्य और अन्य[2] क े मामले में लिलया Hया सिज ने न्यायालय ने य? अशिभविनर्ण' विकया विक एम. एड. तिडग्री परास्नाक तिडग्री न?ीं ?ै, बल्किल्क क े वल एक प्रशिशक्षर्ण अशिभयोग्य ा ?ै;
(i) i) i) ) विवज्ञापन ंख्या 46 वर्ष! 2014 शिशक्षाशास्त्र में ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए एम.ए (शिशक्षाशास्त्र) की क े वल न्यून म योग्य ा विन ा!रिर विकया Hया, और इ विवज्ञापन क े अनु रर्ण में Hविठ एक विवशेर्षज्ञ विमति ने य? भी क?ा विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) और एम. एड. दो अलH-अलH पाठ्यfम ?ैं और एक दू रे े मान ा न?ीं की जा क ा ?ै;
(i) v) विवज्ञापन ं. 47 वर्ष! 2016, जै ा विक शुरू में जारी विकया Hया र्थीा, एम. एड. ारिरयों को शिशक्षाशास्त्र में ?ायक प्रोफ े र क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए पा[ उम्मीदवार न?ीं बनाया और य? अंति म ति शिर्थी े क ु छ विदन प?ले ?ी आवेदन प[ जमा जमा करने े पूव! विदनांक 11.7.2016 को शुति…प[ जारी कर विदया Hया; और (v) एन. ी.टी.ई. /प्रति वादी-5 ने विदनांक 4.10.2016 अपने जवाब में प्रति वादी-3 (जो अशिभलेख पर न?ीं ?ै ) को क?ा र्थीा विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) शिशक्षक का शैतिक्षक काय!fम न?ीं ?ै, जबविक एम. एड. ?ै। 1 1999[3] अनुपूरक (1) ए. ी. ी. 714 2 2014 ए. ी. ी. ऑनलाइन एच.पी. 4307 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
11. प्रत्यर्थी' 2 ने रिरट यातिचका चुनौ ी विदया और न्यायालय में प्रति शपर्थीप[ प्रस् ु कर क?ा विक विवज्ञापन 47 वर्ष! 2016 में जो योग्य ा विन ा!रिर विकया Hया र्थीा व? य? र्थीा विक 'शिशक्षाशास्त्र' में स्ना कोत्तर उम्मीदवार शिशक्षाशास्त्र विवर्षय में ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए आवेदन कर क ा ?ै। विवशेर्षज्ञ मू? द्वारा ंदर्भिभ इ मामले की पृyभूविम को एक विववादास्पद ब ाया Hया, जो ब उत्पन्न ?ुआ जब क ु छ उम्मीदवारों ने अपने नेट/जे.आर.एफ. प्रमार्णप[ों क े ार्थी अपने आवेदन दायर विकए, सिज में य? दर्भिश विकया Hया विक भले ?ी उनक े पा एम. एड. तिडग्री र्थीी, विफर भी प्रति वादी-4 ने घोर्षर्णा की र्थीी विक वे शिशक्षाशास्त्र में व्याख्या ा पद ?े ु योग्य ा ारर्ण कर े ?ैं। विवशेर्षज्ञों की राय ार्थी ?ी ार्थी प्रति वादी 4 द्वारा जारी पा[ ा प्रमार्ण प[ क े अनुरूप शुति…प[ को जारी विकया Hया र्थीा।
12. एक प?लू जो इ रिरट काय!वा?ी में प्रा ंविHक ?ै व? य? ?ै विक न ो यू.जी. ी. और न ?ी ए. ी.टी.ई को पक्षकार बनाया Hया, बल्किल्क दोनों को पक्षकार बनाये जाने पर विवचार विकया जा क ा र्थीा। इ क े अति रक्त, न क े वल इ वाद े प्रभाविव लोHों को पक्षकार बनाये जाने का दोर्ष लHाया Hया बल्किल्क इ लोHों में े वे लोH जो प्रति विनति की क्षम ा में र्थीे पक्षकार बनाये जाने का दोर्षारोपर्ण विकया Hया। इ प्रकार, उच्च न्यायालय की मदद न?ीं की Hयी क्योंविक क्षम प्राति कारी और प्रभाविव व्यविक्त दोनों जुडे ?ुए र्थीे।
13. इला?ाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने विदनांक 14.5.2018 को आक्षेविप आदेश में, डॉ. प्रीति सिं ?3 मामले में पारिर विनर्ण!य की जांच कर, सिज का 3 उपरोक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अनु रर्ण प्रवीर्ण क ु मार[4] मामले में विकया Hया र्थीा, म व्यक्त विकया विक य? मुद्दा अभी क विन ा!रिर न?ीं विकया Hया र्थीा। य? विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) ंबंति विवर्षय में एक परास्ना क तिडग्री ?ै, जबविक एम.एड. न?ीं ?ै, क्योंविक य? क े वल एक प्रशिशक्षर्ण योग्य ा ?ै। य? विनष्कर्ष! विनकाला Hया विक एम.एड. योग्य ा ारी व्यविक्त को शिशक्षाशास्त्र में ?ायक प्रोफ े र क े पद पर विनयुक्त न?ीं विकया जा क ा ?ै, और परिरर्णामस्वरूप शुति…प[ विदनांविक 11.7.2016 को रद्द कर विदया Hया।
14. पूवeक्त विनर्ण!य क े अनुपालन में प्रत्यर्थी'-2 विदनांक को 5.9.2018 को स्वयं द्वारा आयोसिज करायी Hयी बैठक में विववि? शिशक्षा में ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए योग्य ा को बदलने का विनर्ण!य लिलया ाविक क े वल एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) क े उम्मीदवारों को उक्त पद क े लिलए पा[ माना जा क े ।
15. सिजन उम्मीदवारों क े पा एम. एड. योग्य ाएँ र्थीीं, स्वाभाविवक रूप े वे दुखी र्थीे और ऐ े बार? उम्मीदवारों ने इ न्यायालय क े मक्ष प्रर्थीम ीन प्रत्यर्भिर्थीयों, जो इ न्यायालय क े मक्ष पक्षकार र्थीे, को अशिभयोसिज कर इ े दायर करने क े छ ू ट क े आवेदन एक विवशेर्ष अनुमति यातिचका दायर विकया । इ क े बाद, अन्य अपीलक ा! जो मान रूप े ल्किस्र्थी र्थीे, में शाविमल ?ो Hए और अपीलक ा! क े रूप में प्रत्यारोविप विकए Hए। 13 े 213 क े आदेश विदनांक 31.8.2018। इ विववाद पर विवचार करने क े उपरान् विदनांक 31.8.2018 को आदेश द्वारा यूजी ी को प्रति वादी-4 क े रूप में अशिभयोसिज विकया Hया। अपीलक ा!ओं क े वरिरy वकील, श्री पी.ए. पटवालिलया ने क?ा विक अपीलक ा!ओं का वि? क े वल शिशक्षा में ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए 2016 चयन प्रविfया में भाH लेने में र्थीा, सिज क े लिलए आवेदन की अंति म ति शिर्थी 14.7.2016 र्थीी और सिज क े लिलए शुति…प[ विदनांक 4 उपरोक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 11.7.2016 को जारी विकया Hया र्थीा। दनु ार, इ न्यायालय ने दज! विकया विक विवशेर्ष अवकाश यातिचकाओं का लंबन वर्ष! 2014 में शुरू की Hई चयन प्रविfया क े उम्मीदवारों की विनयुविक्त क े ार्थी क्षम प्राति कारी की काय!वा?ी क े रास् े में न?ीं खड़ी ?ोHी, क्योंविक अपीलक ा! उक्त प्रविfया को चुनौ ी न?ीं दे र?ा र्थीे। इ प्रकार, 2014 की चयन प्रविfया में अल्किन् म विनर्ण!य की मांH की Hई र्थीी।
16. परीक्षा क े स्र्थीHन क े दृविष्टH, विदनांक 12.10.2018 क े आदेश क े श • में, एक अं रिरम आदेश पारिर विकया Hया र्थीा, सिज में उम्मीदवारों को एम. एड. ारिरयो को चयन प्रविfया में भाH लेने क े लिलए अनुमति प्रदान विकया Hया, विकन् ु परिरर्णाम जै े ैयार ?ो जाए उ े ीलबंद लिलफाफ े न्यायालय क े मक्ष पेश विकया जाना र्थीा। य? स्पष्ट विकया Hया विक य? आदेश क े वल उन व्यविक्तयों क ?ी ीविम र्थीा जो उ ारीख को न्यायालय क े मक्ष पक्षकार/मध्यस्र्थी/प्रत्यार्थी' र्थीे और, क्योंविक ऐ ा क?ा Hया विक उन भी ने विदनांक 14.7.2016 को कट-ऑफ जारी ?ोने े प?ले आवेदन प्रस् ु कर विदया र्थीा। बाद वाला पक्ष आदेश विदनांविक 10.12.2018 े स्पष्ट ?ो Hया विक कट -ऑफ ति शिर्थी बदलकर 5.8.2016 ?ो जाएHी क्योंविक इ को क्षम प्राति कारी ने ंशोति विकया Hया र्थीा। पा[ ा मानदंड क े अनुरूप न?ीं ?ोने क े कारर्ण आवेदन की अस्वीकार करे विदये जाने क े ंबं में विक ी भी अन्य शिशकाय को इ न्यायालय क े मक्ष काय!वा?ी का वि?स् ा न?ीं बनाने क े लिलए म व्यक्त विकया Hया और इ े अलH काय!वा?ी में चुनौ ी देना ?ोHा।
17. यूजी ी द्वारा दायर ?लफनामे क े दृविष्टH, आदेश विदनांविक 15.1.2020 क े ंदभ! में एन. ी.टी.ई./प्रति वादी 5 को अशिभयोसिज करना उतिच माना Hया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
18. जमीनी ?कीक य? र्थीी विक 6793 उम्मीदवारों को लिललिख परीक्षा शाविमल ?ोने क े लिलए आमंवि[ विकया Hया र्थीा। विदनांक 12.1.2019 को ?ायक प्रोफ े र (शिशक्षाशास्त्र) क े पद क े लिलए लिललिख परीक्षा ंपन्न ?ुई औ सिज की उत्तर क ुं जी 29.5.2019 को जारी ?ुई। फल उम्मीदवारों को ाक्षात्कार क े लिलए चुना Hया जो 18.2.2020 े 27.2.2020 क आयोसिज विकया Hया र्थीा। दनु ार परिरर्णाम को इ न्यायालय क े मक्ष एक ीलबंद कवर में प्रस् ु विकये जाने की मांH की Hयी। विफर भी परिरर्णाम घोविर्ष न?ीं विकए Hए। कोविवड-19 क े कारर्ण जब य? मामला बाति ?ुआ और अं ः विदनांक 31.7.2020 को य? मामला प्रकाश में आया ब शैतिक्षक अपेक्षाओं क े दृविष्टH मामले को आलिखरकार ुनना उतिच मझा Hया और इ प्रकार, अनुमति प्रदान की Hयी और ब? आHे बढ़ी। इ प्रकार, परिरर्णामों को परिरशीलन करने का अव र उत्पन्न न?ीं ?ुआ।
19. इ स् र पर यू.जी. ी. क े ?लफनामे की ओर रुख करना प्रा ंविHक ?ोHा, सिज में स्पष्ट रूप े क?ा Hया र्थीा विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) और एम. एड. दोनों तिडग्री को मास्टर स् र की तिडग्री क े रूप में विनर्दिदष्ट विकया Hया ?ै। विवश्वविवद्यालय अनुदान आयोH (औपचारिरक शिशक्षा क े माध्यम े मास्टर तिडग्री क े अनुदान ?े ु न्यून म मानक) 14 विवविनयमन, 2003 क े खंड 8 क े अनु ार, एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) तिडग्री प?ली तिडग्री क े बाद न्यून म दो ाल पूरा करने क े बाद ?ी प्रदान की जा क ी ?ै। शपर्थीप[ में यू.जी. ी. विवविनयमों क े विवविनयमन 4.4.[1] का भी ंदभ! विदया Hया ?ै, सिज में अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी 'एक ंबंति विवर्षय में मास्टर तिडग्री स् र' की अपेक्षा र्थीी। इ प्रकार प्रत्यर्थी'-2 द्वारा जारी विवज्ञापन और शुति…प[ को यू.जी. ी. विवविनमनों क े उmंघन में न?ीं पाया Hया, विकन् ु य? माना Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds Hया विक यू.जी. ी. मकक्ष तिडग्री को विन ा!रिर न?ीं कर ा ?ै। य? भी क?ा Hया विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) एक विनयविम पाठ्यfम ?ै, जबविक एम. एड. एक पेशेवर पाठ्यfम ?ै। इ र? की ुल्य ा में जाने क े लिलए ंबंति प्राति करर्ण एन. ी.ई.टी./प्रति वादी 5 र्थीा और अन् ः एन. ी.टी.ई. पर मुकदमा चलाया Hया।
20. नोविट जारी ?ोने ?ोने क े उपरान् एन. ी.टी.ई. ने प्रति शपर्थीप[ दालिखल विकया। दोनों तिडविग्रयों क े दृविष्टकोर्ण और पाठ्यfम में अं र पैरा 13 में विन ा!रिर विकया Hया ?ै: "13. य? क?ा Hया ?ै विक एम. एड. पाठ्यfम विवशेर्ष रूप े उन छा[ों क े लिलए प्रैल्किक्टशनर तिडग्री क े रूप में तिडज़ाइन विकया Hया ?ै, जो पेशेवर क्षे[ में काम करने क े लिलए ज्ञान, कौशल और अनुभव प्राप्त करना चा? े ?ैं। एक पेशेवर तिडग्री क े रूप में, एम. एड. उन छा[ों क े लिलए ?ै, जो स्ना क स्ना क क े उपरान् उ विवर्षय में विवशेर्ष कौशल और व्याव?ारिरक ज्ञान प्राप्त करना चा? े ?ैं जो स्ना क स् र पर न?ीं प्राप्त की जा क ी ?ै। (जै े, एक विनद™शात्मक प्रौद्योविHकीविवद या सिजला ं ा न शिशक्षक क े रूप में)एम. एड. इ अर्थी! में एक अनु ं ान वाली तिडग्री न?ीं ?ै विक छा[ े य? अपेक्षा न?ीं की जा ी विक व? कोई स्व ं[ अनु ं ान परिरयोजना को पूरा करने और बचाव करें। ?ालांविक, एम. एड. पाठ्यfम शो आ ारिर ?ै और छा[ों े अपेक्षा की जा ी ?ै विक वे अनु ं ान- ंबंति पाठ्यfम (जै े, ांल्किख्यकी पाठ्यfम) में भाH लें, जबविक एम.ए. तिडग्री मुख्य रूप े उन छा[ों क े लिलए ?ै जो शो करना चा? े ?ैं अर्थीवा जो स्ना क की पढ़ाई करने क े उपरान् डॉक्टरेट स् र का अध्ययन करना चा? े ?ैं। दनु ार, एम.ए. पाठ्यfम को विवशेर्ष रूप े एक अनु ं ान तिडग्री क े रूप में तिडज़ाइन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विकया Hया ?ै, सिज में छा[ों को शो करने और स्व ं[ अनु ं ान परिरयोजना (मास्टर शो प[) को पूरा करने अपेक्षा की जा ी ?ै। अति कांश ंस्र्थीानों में डॉक्टरेट की पढ़ाई क े लिलए मास्टर क े शो प्रबं को पूरा करना पूव!-आवश्यक ा क े रूप में देखा जा ा ?ै।"
21. जो भी क?ा Hया उ क े दृविष्टH प्रति शपर्थीप[ क े पैरा 14 में य? विनष्कर्ष! विनकाला Hया विक शिशक्षाशास्त्र में ?ायक प्रोफ े र क े लिलए यू.जी. ी. और ए. ी.टी.ई. जै े शीर्ष! विनकायों द्वारा मान्य ा प्राप्त एम. एड. एक मास्टर तिडग्री ?ै और सिजन उम्मीद्वारों क े पा य? तिडग्री ?ै व? भी नेट/ए.एल.ई.टी./जे.आर.एफ. क े लिलए पा[ ?ै, जबविक एम.ए.(शिशक्षाशास्त्र) भी एक मास्टर तिडग्री ?ै, लेविकन एक प्रोफ े शनल मास्टर की तिडग्री न?ीं ?ै और इ लिलए, एम.एड. क े ार्थी एम.ए (शिशक्षाशास्त्र) की ुलना न?ीं की जा क ी ?ै।
22. एन. ी.टी.ई. क े प्रति शपर्थीप[ ने ए. ी.ई.टी द्वारा मान्य ा प्राप्त एकवर्ष'य एम.एड़ पाठ्यfम की एम. ए. (शिशक्षाशास्त्र) े ुल्य ा क े मुद्दे की पुनः जांच करने क े लिलए Hविठ बैठक े जो विनष्कर्ष! विनकला उ की ंलग्न कर विदया। य? बैठक 27 और 28 सि ंबर, 2018 को ?ुयी। विमति क े दस्य विनम्नानु ार र्थीे: मौलाना आजाद राष्ट्रीय उदू! विवश्व वविवद्यालय, ?ैदराबाद में शिशक्षाशास्त्र विवर्षय क े प्रोफ े र एवं पूव! क ु लपति प्रो. मो?म्मद विमयान- विमति क े अध्यक्ष। डॉ. रेर्णु ब[ा, अपर तिचव, यू.जी. ी., नई विदmी – दस्य। भार ीय अध्यापक शिशक्षाशास्त्र ंघ क े अध्यक्ष एवं मौलाना आजाद राष्ट्रीय उदू! विवश्वविवद्यालय, ?ैदराबाद क े पूव! प्रोफ े र प्रो. रमेश घंटा - दस्य। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds डॉ. ए. क े. चौ?ान, अवर तिचव, एन. ी.टी.ई.- ंयोजक। बैठक की पृyभूविम उच्च न्यायालय का विनर्ण!य र्थीा, सिज े ?मारे ामने रखा Hया ?ै। इ विनष्कर्ष! क े म?त्वपूर्ण! विनष्कर्ष! को पुन: प्रस् ु विकया जाना उपयोHी सि … ?ोHा क्योंविक वे विववाद पर ी ा प्रकाश डाल ा और य? विनम्नानु ार ?ैं:
1. य? ऐति ?ासि क रूप े एक सि … थ्य ?ै विक बी. एड. और एम.एड. पाठ्यfम अपने आप में प्रोफ े शनल प्रक ृ ति का ?ै और सिज का उद्देश्य मुख्य रूप े स्क ू ल प्रर्णाली क े लिलए शिशक्षकों को ैयार करना और शिशक्षक शिशक्षर्ण ंस्र्थीानों क े लिलए शिशक्षक ैयर करना भी ?ै। ये पाठ्यfम लHभH विपछली एक दी े अपनी प्रक ृ ति और व्याव ातियक ा े ंबंति विनर्दिववाद रूप े क े चल र?े ?ैं।
2. इन पाठ्यfमों ंरचना े स्पष्ट ?ो जा ा ?ै विक एम. एड. और एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) दोनों विवर्षय लHभH अलH ?ैं। एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) पाठ्यfम ज्यादा र क े वल शैक्षशिर्णक उन्मुखीकरर्ण क े विबना ै…ांति क आ ार क े ार्थी तिडज़ाइन विकया Hया ?ै। इ लिलए, एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) पाठ्यfम को मुख्य रूप े शिशक्षा में एक विवनय ंबं ी पाठ्यfम माना जा ा ?ै, जबविक, बी. एड. और एम. एड. प्रोफ े शनल पाठ्यfम ?ैं। आHे य? स्पष्ट ?ै विक एम.ए (शिशक्षाशास्त्र) प?ली तिडग्री क े बाद 2 ाल की अवति क े पाठ्यfम का ?ै। जबविक बी. एड. प?ली तिडग्री क े बाद एक वर्ष'य पाठ्यfम ?ै और एम. एड. इ क े ंदभ! में एक वर्ष'य पाठ्यfम ?ै। इ का म लब ?ै, एम.एड. की तिडfी प्राप्त करने क े लिलए प?ली तिडग्री क े बाद 2 ाल खच! करना पड़ेHा क्योंविक एम. एड. क े लिलए बी. एड. अविनवाय! ?ै। इ लिलए, अवति और पाठ्यfम की प्रक ृ ति क े दृविष्टकोर्ण े, एम. एड. स्वयं शिशक्षा में एक मास्टर काय!fम ?ै। एम. एड. (शिशक्षाशास्त्र) को भी मास्टर तिडग्री क े रूप में यू.जी. ी. और एन. ी.टी.ई., शीर्ष! विनकाय द्वारा मान्य ा प्रदान की Hयी ?ै और जो अं र ?ै व? य? ?ै विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds एम.एड. एक प्रोफ े शनल तिडग्री ?ै जबविक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र एक ऐ ी तिडग्री ?ै जो शिशक्षा में अनुशा न ंबंति ?ै)।
3. एम. एड. योग्य ाएं नेट/जेआरएफ परीक्षाओं में भाH लेने और शिशक्षा में ?ायक प्रोफ े र क े पद क े लिलए पा[ ?ैं। उपरोक्त विववरर्ण क े दृविष्टH, एम. एड. एक मास्टर पाठ्यfम ?ै।
4. विवश्वविवद्यालयों क े पाठ्यfम पर नज़र डालें ो य? विवविद ?ो ा ?ै विक ज?ां एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) पाठ्यfम को एम. एड की ुलना में देश क े एक ?ी विवश्वविवद्यालय,अर्थीवा अन्य विवश्वविवद्यालयों द्वारा प्रदान विकया जा ा ?ै व?ां पर य? अवलोकन विकया Hया ?ै विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) में शिशक्षा क े ै…ांति क प?लुओं पर ध्यान क ें विद्र विकया Hया ?ै और शिशक्षर्ण या विवद्यालयी अनुभव और ामुदातियक जुड़ाव क े लिलए कोई स्र्थीान न?ीं छोड़ा Hया ?ै। जबविक एम.एड़ एक उन्न पाठ्यfम ?ै व? बी. एड. क े बाद प्रदान विकया जा ा ?ै और य? उन्न स् र पर फाउंडेशन को ! ?ै। इ क े अलावा, पाठ्यfम काय! उपरोक्त क े अलावा तिडज़ाइन विकया Hया ?ै, शैक्षशिर्णक अशिभविवन्या /स्क ू ल और ामुदातियक जुड़ाव अच्छी र? े एकीक ृ ?ैं, जै े विक, कोई भी इन दो को • क े पाठ्यfम का अर्थीा!न्वयन कर क ा ?ै। एम. एड. क े छा[ उ शिशक्षा में ब?ुआयामी ज्ञान रख े ?ैं जबविक जबविक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) छा[ों में व्याव ातियक उन्मुख ा क े विबना शिशक्षा क े ंब… प?लुओं क े ार्थी सि …ांति विक योग्य ा ?ो ी ?ै। 5.एन. ी.टी.ई. बी.एड. क े ार्थी एम.ए./एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) का को ! करा ा ?ै जो ?ायक प्रोफ े र (शिशक्षाशास्त्र) क े पद क े लिलए मान्य ?ै। य?ाँ पा[ ा क े लिलए एम.ए. क े ार्थी ार्थी बी.एड. ?ोना चावि?ए। क्योंविक कोई भी बी. एड. करक े शिशक्षर्ण में ब?ुआयामी ज्ञान और स्क ू ली क े अनुभव प्राप्त ?ो ा ?ै।इ लिलए, य? विनष्कर्ष! विनकाला Hया ?ै विक एम. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds एड. शिशक्षाशास्त्र में ?ायक प्रोफ े र क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए यू.जी. ी. और एन. ी.टी.ई. जै ी शीर्ष! विनकायों द्वारा मान्य ा प्राप्त एक मास्टर तिडग्री ?ै और वे नेट/ए.एल.ई.टी./जे.आर.एफ. क े लिलए भी पा[ ?ैं। दू री रफ एम.ए. भी एक मास्टर तिडग्री ?ै लेविकन एक व्याव ातियक मास्टर तिडग्री न?ीं ?ै। इ लिलए इन दोनों में में ुलना न?ीं विकया जा क ा ?ै। इ लिलए, ज?ां भी, बी.ए. (शिशक्षाशास्त्र) या एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) पाठ्यfम प्रदान विकया जा ा ?ै व?ां एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) क े ार्थी इन को • में पढ़ाने क े लिलए एम.एड. उम्मीदवार भी पा[ ?ैं। अपीलार्भिर्थीयों का मामला:
23. अपीलार्भिर्थीयों क े वरिरy अति वक्ता श्री पी.ए. पटवालिलया सिजन मानकों का कर्थीन विकया ?ै व? विनम्नलिललिख ?ैं: i). एम. एड. की तिडग्री क े बल पर ?ायक प्रोफ े 19 पद पर विनयुक्त की जाने वाली पा[ ा को इ मामले में विन ा!रिर विकए जाने वाले प्रश्न पर जोर देकर क?ा Hया विक न ो अपीलक ा! और न ?ी मान रूप े ल्किस्र्थी उम्मीदवार और न ?ी वै ाविनक अति कारी, प्रति वादी-4 और 5 को उच्च न्यायालय क े मक्ष पक्षकार क े रूप में अशिभयोसिज विकया Hया र्थीा। i) i). अशिभयोसिज विकये जाने पर प्रत्यर्थी'- 4 स्पष्ट रूप े य? म व्यक्त विकया र्थीा विक एम. एड. की तिडग्री वास् व में शिशक्षाशास्त्र में मास्टर की तिडग्री ?ै, लेविकन उन्?ोंने तिडविग्रयों क े बीच मान ा, शविक्त का विन ा!रर्ण न?ीं विकया, सिज क े लिलए प्रति वादी-5 क े ार्थी विनवि? ?ै। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds i) i) i). एन. ी.टी.ई. द्वारा मान्य ा प्राप्त एम. एड. तिडग्री को एम.ए. े ार्थी ुल्य ा क े मुद्दे का पुनः परीक्षर्ण विकये जाने को Hविठ चार दस्य वाली कमेटी क े आ ार पर प्रत्यर्थी'-5 ने पाया विक: (क) अवति और पाठ्यfम क े दृविष्टकोर्ण े, एम. एड. शिशक्षाशास्त्र एक मास्टर को ! ?ै जो विक प्रति वादी-4 और 5 द्वारा मान्य ा प्राप्त ?ैै (ख) एम. एड. एक प्रोफ े शनल तिडग्री ?ै, जबविक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) एक शैक्षशिर्णक तिडग्री ?ै, अर्थीा!, य? शिशक्षा क े क्षे[ में एक तिडग्री ?ै; और (H) और सिजन अभ्यर्भिर्थीयों ने एम. एड. विकया ?ै ?ायक प्रोफ े र े पद पर विनयुक्त ?ोने क े क े लिलए पा[ ?ैं, और बी.ए. (शिशक्षाशास्त्र) एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) को पढ़ा क े ?ैं। i) v. सिजन अभ्यर्भिर्थीयों क े पा एम. एड. की तिडग्री ?ै व? ?ायक प्रोफ े र विनयुविक्त ?ोने क े लिलए पा[ ?ैं और क्या एम. ए. (शिशक्षाशास्त्र)और एम. एड. म ुल्य ?ै, इ मामले में य? प्रश्न अ ंH ?ै। v. यू.जी. ी./प्रति वादी-4 ने एक ाव!जविनक नोविट जारी विकया र्थीा सिज में क?ा Hया र्थीा विक तिडविग्रयों की ुल्य ा का विनर्ण!य रोजHार ंHठन द्वारा विकया जा ा ?ै और प्रस् ु मामले में, प्रति वादी-2 रोजHार ंHठन ?ै, विवशेर्षज्ञ पैनल की राय मांHी, और उ क े बाद, रिरट यातिचका में आक्षेविप, एम.एड. को विनयुविक्त क े लिलए मान्य योग्य ा क े रूप में अनुज्ञा कर विनर्ण!य लिलया Hया। इ प्रकार, विवशेर्षज्ञों क े दृविष्टकोर्ण क े आ ार पर, इ र? क े विनर्ण!य की शु… ा पर वाल न?ीं उठाया जाना चावि?ए अर्थीवा न्यातियक मीक्षा में न?ीं जाना चावि?ए। vi). विवशिभन्न राज्यों क े अनेक ंस्र्थीान ऐ ी विनयुविक्तयों पर एम.एड. तिडग्री ारिरयों पर विवचार कर र?ें ?ैं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds vi) i). प्रीति सिं ?5 क े मामले में पारिर विनर्ण!य इन थ्यों में शिभन्न ?ै क्योंविक उन मामले में शिशक्षाशास्त्र में अलH तिडग्री अपेतिक्ष र्थीी। विक ी मान्य ा प्राप्त कॉलेज क े प्राचाय! क े पद क े लिलए विन ा!रिर योग्य ा े ंबंति विववाद। योग्य ा मानक विनम्नानु ार र्थीा: ंशो न े पूव! ंशो न क े उपरान् (क) प्रर्थीम अर्थीवा अच्छे अंकों क े ार्थी विद्व ीय श्रेर्णी (55 प्रति श अंक/ ा अंको वि? ग्रेड बी) वि? अच्छे अकादविमक प्रदश!न क े ार्थी मास्टर तिडग्री और भार ीय विवश्वविवद्यालय े शिशक्षाशास्त्र में तिडग्री अर्थीवा विवदेशी विवश्वविवद्यालय की मकक्ष तिडग्री (छ ू ट भी दी जाएHी जब विक ी उम्मीदवार ब?ु उच्च मानक क े अपने f े तिडट अनु ं ान काय! विकया ?ै) और कम े कम प्रर्थीम या उच्च विद्व ीय श्रेर्णी ( ा अंकों क े स् र में ग्रेड बी) में अच्छे अकादविमक रिरकॉड! क े ार्थी शिशक्षाशास्त्र में मास्टर तिडग्री और जरूरी न?ीं विक ंबंति विवर्षय में मास्टर तिडग्री ?ो (उच्च श्रेर्णी वाला काय! अनुभव अर्थीवा 27 जनवरी, 1976 े पूव! विवद्यालय द्वारा अनुमोविद शिशक्षक)। (ब) एम. विफल तिडग्री अर्थीवा मास्टर तिडग्री े उच्च कोई मान्य ा प्राप्त तिडग्री अर्थीवा प्रकाशिश काय! जो स्व ं[ अनु ं ान काय! क े लिलए उम्मीदवार की क्षम ा को दशा! ा ?ै: बश ™ विक यविद (ब) क े रूप में दर्भिश योग्य ा रखने वाला उम्मीदवार उपलब् न?ीं ?ै या उपयुक्त न?ीं माना जा ा ?ै, ो चयन विमति की सि फारिरश पर कॉलेज योग्य ा रखने वाले व्यविक्त को (अ) क े रूप (ब) कोई परिरव !न न?ीं 5 उपरोक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds में विनयुक्त कर क ा ?ै। य? उmेख विकया जा क ा ?ै विक शुरू में, अपीलक ा! की विनयुविक्त को नकार विदया Hया र्थीा क्योंविक उ क े पा अपेतिक्ष योग्य ा न?ीं र्थीी, लेविकन बाद में मानदंडों में ंशो न कर उनकी विनयुविक्त क ु लपति द्वारा स्वीकार कर ली Hई। र्थीाविप य? पाया Hया विक ंबंति विनयम जो चयन प्रविfया क े मय लाHू र्थीा उ में दो योग्य ाओं का उपबं र्थीा, अर्थीा!, विक ी भी विवर्षय में मास्टर तिडग्री और भार ीय विवश्वविवद्यालय शिशक्षाशास्त्र में तिडग्री अर्थीवा विवदेशी विवश्वविवद्यालय े मकक्ष तिडग्री। उ में अपीलक ा!, अर्थीा!, चयविन व्यविक्त का शैक्षशिर्णक रिरकॉड! ब?ु उत् ा?जनक न?ीं र्थीा। य? वे कारक ?ैं जो उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विनर्ण!य क े लिलए म?त्वपूर्ण! ?ै और य? दो?री योग्य ा का मूल विवर्षय ?ै सिज क े परिरर्णामस्वरूप विनयुविक्त को खारिरज कर इ न्यायालय विनय!र्ण ुनाया। vi) i) i). डॉ. प्रीति सिं ?6 मामले की विवशिशष्ट विवशेर्ष ा को इ न्यायालय ने डॉ. राम ेवक सिं ? बनाम डॉ. यूपी सिं ? एवं अन्य[7] क े मामले में अवलोकन विकया ज?ां दो?री योग्य ा की ऐ ी कोई आवश्यक ा न?ीं र्थीी। i) x. एम. एड. या एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) योग्य ा वाले उम्मीदवारों को नेट प्रमार्णप[ क े प्राप्त करने क े लिलए एक कॉमन टेस्ट देना पड़ ा र्थीा और फल छा[ों क े मध्य उनकी तिडग्री क े आ ार पर विवभेद न?ीं विकया जा ा ?ै। चूंविक नेट या मकक्ष उत्तीर्ण! ?ोना अविनवाय! ?ै, इ लिलए नेट उत्तीर्ण! ?ोने वाले भी उम्मीदवार विनयुविक्त क े लिलए पा[ ?ैं। x. न्यातियक मीक्षा में योग्य ा की ुल्य ा और इ क े क्षे[ को विन ा!रिर करने क े लिलए कोई जH? न?ीं ?ै, य?ां क विक य? मान लिलया 6 उपरोक्त 7 (1999) 2 ए. ी. ी. 189 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जाए विक एम.एड. तिडग्री एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) तिडग्री क े बराबर न?ीं ?ै, जो क ु छ भी ?ै उ े विवशेर्षज्ञों और विनयुविक्त प्राति करर्ण पर छोड़ विदया जाना चावि?ए। इ ंबं में, ज?ूर अ?मद एवं अन्य बनाम शेख इल्किम् याज अ?मद एवं अन्य[8] क े मामले का अपीलक ा!ओं द्वारा अवलम्ब लिलया Hया जो इ प्रकार ?ै: "26. ?म उ विनष्कर्ष! े ?म ?ै जो ज्योति क े.क े. (2010) 15 ए. ी. ी. 596 क े मामले में और इ क े उपरान् अनी ा (2015) 2 ए. ी. ी. क े मामले में विनकाला Hया। 170. ज्योति क े.क े. (उपरोक्त) में विनर्ण!य विनयम 10 (ए) (i) i) ) क े प्राव ानों पर बदल Hया। इ र? क े विनयम क े अभाव क े चल े य? अनुमान लHाने की अनुमति न?ीं ?ोHी विक उच्च योग्य ा कम योग्य ा को दबा ?ी दे। विक ी पद क े लिलए योग्य ा का विन ा!रर्ण करना भ ' नीति का विवर्षय ?ै। विनयोक्ता क े रूप में राज्य पा[ ा की श ! क े रूप में योग्य ा विन ा!रिर करने का अति कार रख ा ?ै। विन ा!रिर योग्य ा क े दायरे को विवस् ृ करने का काय! उ की भूविमका या न्यातियक मीक्षा क े काय! का वि?स् ा न?ीं ?ै। इ ी र?, योग्य ा की ुल्य ा एक ऐ ा मामला न?ीं ?ै सिज े न्यातियक मीक्षा की शविक्त क े प्रयोH में विन ा!रिर विकया जा क ा ?ै। क्या विक ी विवशेर्ष योग्य ा को मकक्ष माना जाना चावि?ए या न?ीं, य? राज्य का विवर्षय ?ै जै ा भ ' प्राति कारी विन ा!रिर करे। ज्योति क े.क े. (उपरोक्त) में पारिर विनर्ण!य एक विवशिशष्ट वै ाविनक विनयम पर बदल Hया, सिज क े ? एक उच्च योग्य ा ारी को लेना विनम्न योग्य ा ारी की क े ?क का अति ग्र?र्ण ?ो क ा ?ै। व !मान मामले में इ र? क े विनयम की अनुपल्किस्र्थीति अंति म परिरर्णाम क े लिलए एक म?त्वपूर्ण! अं र बना ी ?ै। इ मामले क े दृविष्टH, उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने विवद्वान एकल न्याया ीश क े फ ै ले को 8 (2019) (2)ए. ी. ी. 404 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उलटने और इ विनष्कर्ष! पर आने में विक अपीलक ा! विन ा!रिर योग्य ा को पूरा न?ीं कर े र्थीे, ?ी र्थीे। ?में खण्ड़पीठ क े फ ै ले में कोई [ुविट न?ीं विमली।
27. विक ी पद क े लिलए योग्य ा विन ा!रिर कर े मय, राज्य, विनयोक्ता क े रूप में, वै रूप े ेवा की प्रक ृ ति, क !व्यों क े क ु शल विनव!?न क े लिलए अपेतिक्ष योग्य ा, योग्य ा की काय!क्षम ा और पाठ्यfम की ामग्री वि? कई विवशेर्ष ाओं को ध्यान में रख क ा ?ै। अध्ययन जो एक योग्य ा क े अति ग्र?र्ण की ओर जा ा ?ै। राज्य को अपनी ाव!जविनक ेवाओं की जरूर ों का आकलन करने का अति कार ौंपा Hया ?ै। प्रशा न की योग्य ा, य? ट्राइट लॉ ?ै, प्रशा विनक विनर्ण!यन की परिरति में आ ा ?ै। राज्य एक ाव!जविनक विनयोक्ता क े रूप में ामासिजक दृविष्टकोर्ण पर अच्छे े विवचार कर क ा ?ै सिज में म्पू्र्ण! ामासिजक ंरचना में रोजHार क े अव रों क े विनमा!र्ण विकया जाना अपेतिक्ष ?ो ा ?ै। ये भी नीति े जुड़े ?ुए मामले ?ैं। न्यातियक मीक्षा ेज Hति े ?ोनी चावि?ए। य?ी कारर्ण ?ै विक ज्योति क े.क े. (उपरोक्त) क े मामले में पारिर विनर्ण!य को विवशिशष्ट वै ाविनक विनयम क े ंदभ! में मझा जाना चावि?ए, सिज क े ? उच्च र अ?! ा ारर्ण करना, जो विनम्न र अ?! ा अर्जिज करने की पूव! मान्य ा ?ै, इ पद क े लिलए पया!प्त माना Hया। य? विवशिशष्ट विनयम क े ंदभ! में र्थीा विक ज्योति क े.क े. (उपरोक्त) में विनर्ण!य बदल Hया।" प्रत्यर्थी'-3 का मामला:
24. विवद्वान वरिरy अति वक्ता ुश्री मीनाक्षी अरोड़ा ने ब ाया विक: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds i). विवशिभन्न उच्च न्यायालयों क े न्यातियक घोर्षर्णाएं इ आशय की ?ैं विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) और एम. एड. अलH-अलH पाठ्यfम ?ैं। 14.3.2016 को विनर्ण' रिरट-ए नंबर 65853/2015 में इला?ाबाद उच्च न्यायालय क े एक पूव! अवलोकन का ंदभ! विदया Hया ज?ां पर उत्तर प्रदेश राज्य विवश्वविवद्यालय अति विनयम, 1973 की ारा 27 पर चचा! की Hई र्थीी। इ में प्रत्येक ंकाय को शिशक्षर्ण क े ऐ े विवर्षयों को शाविमल करने की आवश्यक ा ?ै जो विन ा!रिर विकए जा क े ?ैं। अनुभाH ने इ बा पर जोर विदया विक क ै े प्रत्येक ंकाय अपने आप में एक अलH क ै डर ?ै और विक ी भी ंकाय दस्य का एक ंकाय े दू रे में अदला बदली न?ीं ?ो क ा ?ै। इ क े अलावा, कला ंकाय क े ? 'शिशक्षाशास्त्र' क े अध्यापकHर्ण बी. एड. और एम. एड. की पढ़ाई कर र?े छा[ों को शिशक्षा प्रदान न?ीं कर क े ?ैं, और न ?ी वे दोनों क े लिलए परीक्षा का पेपर ेट कर क े ?ैं। i) i). प्रत्यर्थी'- 5 ने विवशेर्ष सि विवल आवेदन ंख्या 2425/2016 क े माध्यम े Hुजरा उच्च न्यायालय क े मक्ष अपना पक्ष रखकर क?ा विक एम.ए.(शिशक्षाशास्त्र) और एम. एड. दो अलH-अलH काय!fम ?ैं और प्रति वादी-4 की ला?, तिडग्री की मान ा उ की क्षम ा क े भी र न?ीं ?ै, क े विवपरी ?ै। i) i) i). मानव ं ा न विवका मं[ालय ने अपने तिचव (ए. ी.टी.ई) क े माध्यम े आर.टी.आई. जवाब में क?ा विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) कॉलेज स् र पर पढ़ाने क े लिलए परास्ना क की तिडग्री ?ै जबविक एम. एड. स्क ू लों में पढाने क े लिलए क े वल एक प्रोफ े शनल तिडग्री ?ै। i) v. विवज्ञापन ं. 47 वर्ष! 2016 का में शिशक्षाशास्त्र (कला ंकाय) में 100 ीटों का प्रकाशन र्थीा और इन रिरविक्तयों में, बी. एड. (शिशक्षक प्रशिशक्षर्ण ंकाय) क े लिलए कोई ीटें न?ीं र्थीीं। इ क े अलावा, यू.जी. ी. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अति विनयम की ारा 22 क े ंदभ! में, बी.ए. क े लिलए स्ना कोत्तर तिडग्री एम.ए. ?ै और बी. एड क े लिलए ?ै। चूंविक दोनों तिडग्री अलH ?ैं, इ लिलए अपीलक ा! प्रश्नH पद क े लिलए योग्य न?ीं ?ैं। जारी प्रत्यर्थी'-4 ने 2014 में जारी अति ूचना में विनर्दिदष्ट विकया विक बी.ए. और एम.ए. कला/मानविवकी/ ामासिजक विवज्ञान की श्रेर्णी में आ े ?ैं, जबविक बी. एड. और एम. एड. शिशक्षकों प्रशिशक्षर्ण श्रेर्णी में आ े ?ैं। vi). प्रत्यर्थी'-4 ने अपने ?लफनामे में क?ा ?ै विक कोई भी छा[ मास्टर तिडग्री पाने क े लिलए ब क पा[ न?ीं ?ोHा जब क विक व? अपनी प?ली तिडग्री क े दो ाल बाद पूरा न कर लिलया ?ो। एम.ए. दो ाल का मास्टर काय!fम ?ै जबविक एम. एड. एक ाल का शिशक्षक प्रशिशक्षर्ण काय!fम ?ै (जै ा विक ब र्थीा)। इ लिलए, विवज्ञापन 47/2016 क े वल दो ाल क े मास्टर तिडग्री क े लिलए र्थीा। vi) i). एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) एक शैक्षशिर्णक तिडग्री ?ै जबविक एम.एड. क े वल एक प्रोफ े शनल तिडग्री ?ै। य? तिडग्री अलH-अलH ?ै और शिशक्षा में दो अलH-अलH श्रेशिर्णयां ?ै और उनक े शीर्ष! विनकाय भी अलH-अलH ?ैं। यू.जी. ी. क े अध्याय 39 क े पैरा 3.0 में इ ंबं में शिशक्षा क े अनुमोविद पाठ्यfम का अवलम्ब लिलया Hया, जो विनम्नानु ार ?ै: अकादविमक अनुशा न क े रूप में शिशक्षा और विक ी क्षे[ में ेवा क े लिलए शिशक्षकों और अन्य प्रोफ े शनलों को ैयार करना शिशक्षा क े पाठ्यfम की दो अलH-अलH श्रेशिर्णयां ?ैं। एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) कला ंकाय में परास्ना क की तिडग्री ?ै और एम. एड एक परास्ना क की शिशक्षा ?ै और दोनों मकक्ष न?ीं ?ैं। एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) विवशु… रूप े अकादविमक ?ै जबविक एम. एड. एक प्रोफ े शनल तिडग्री ?ै और उनक े शीर्ष!विनकाय अलH ?ैं। ये दो पाठ्यfम अलH-अलH ?ैं और शिशक्षा क े अनुशा न की ारा ?ैं, उन्?ें बराबर न?ीं लिलया जा क ा ?ै। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds डॉ. एम.ए. मु ोल और अन्य बनाम ए.डी. ?लHावकर और अन्य[9] में भी इ अं र को मान्य ा प्रदान की Hई ?ै सिज का म?त्वपूर्ण! अंश विनम्नानु ार ?ै:
4. प्रत्यर्भिर्थीयों का य? क ! विक एम. एड. (si) c एम.ए.) विद्व ीय श्रेर्णी एम.ए. (si) c एम.एड.) विद्व ीय श्रेर्णी क े म ुल्य र्थीा य? बा विनराशाजनक ?ै। पूव! वाली तिडग्री म?ज एक शैक्षशिर्णक योग्य ा ?ै जबविक बाद वाली एक प्रोफ े शनल योग्य ा ?ै। विद्व ीय, पूव! वाला पाठ्यfम कम े कम दो वर्ष• का ?ै, जबविक बाद वाला अंशकालिलक पाठ्यfम ?ै जो एक वर्ष! का ?ै। विक ी भी दशा में, आवश्यक योग्य ा क े ंबं में वै ाविनक विनयम ब?ु स्पष्ट ?ै क्योंविक इ में शैतिक्षक परास्ना क तिडग्री और शिशक्षर्ण तिडग्री दोनों की आवश्यक ा ?ो ी ?ै सिज में शिशक्षर्ण तिडग्री पूव! का विवकल्प न?ीं ?ै। शैक्षशिर्णक तिडग्री अर्थीा! मास्ट ! तिडग्री क े ंबं में योग्य ा विन ा!रिर कर े मय, विनयम इ र? की तिडग्री क े लिलए 2 तिडवीजन पर जोर दे ा ?ै। य? शिशक्षर्ण में 2 वीं तिडवीजन तिडग्री पर जोर न?ीं दे ा ?ै। इ क े लिलए उत्तीर्ण! ?ोने की तिडग्री पया!प्त ?ै। इ लिलए, शैक्षशिर्णक योग्य ा को शिशक्षर्ण योग्य ा े प्रति स्र्थीाविप करने का प्रया करने और दोनों योग्य ाओं क े तिडवीजनों में विवविनमय करने े य? इन विनयमों क े ? अपेतिक्ष योग्य ा को विवक ृ करने की कोविट में आ जाएHा....।'' vi) i) i). विदनांक 15.5.2014 को जो विवशेर्षज्ञ राय ली Hयी र्थीी व? विवज्ञापन ंख्या 46 वर्ष! 2014 क े अनु रर्ण में राजर्दिर्ष टंडन मुक्त विवश्वविवद्यालय,इला?ाबाद और इला?ाबाद विवश्वविवद्यालय क े प्रोफ े रों े प्राप्त की Hई र्थीी। एम.एड. तिडग्री ारी अभ्यर्थी' चयन प्रविfया में भाH लेने क े अति कारी न?ीं पाए Hए। वर्ष! 2014 और 2016 में जारी विकये Hये विवज्ञापनों में योग्य ा मान ?ै। प्रश्नH विवज्ञापन ंख्या 47 वर्ष! 2016 9 (1993) 3 ए. ी. ी. 591 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े लिलए Hविठ विवशेर्षज्ञ पैनल ने इ े आँकडों ं आ ारिर न करक े और दोनों पाठ्यfमों क े पाठ्यfम की ुलना विकए विबना अपनी राय दी। व? दृविष्टकोर्ण सिज का ?म अनु रर्ण करना चा? े ?ैं:
25. ?मने अशिभलेखों का विवश्लेर्षर्ण कर पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता क े क• पर विवचार विकया ?ै।
26. रिरट क े ंस्र्थीन क े मय रिरट यातिचका दायर करने क े रीक े क े बारे में और ंबंति अति कारिरयों यू.जी. ी. और एन. ी.टी.ई. को अपनी राय देने क े लिलए उच्च न्यायालय न बुलाकर आक्षेविप आदेश पारिर विकये जाने पर अपनी शंका को व्यक्त कर देना चावि?ए। प्रर्थीम प्राति कारी एक ऐ ा प्राति कारी ?ै सिज का काय! तिडविग्रयों का नामकरर्ण को विन ा!रिर और विनर्दिदष्ट करना ?ै,जबविक विद्व ीय प्राति कारी शिशक्षक की शिशक्षा का प्राति कारी ?ै। पूव! में जो भी ल्किस्र्थीति र?ी ?ो, जै ा विक Hुजरा उच्च न्यायालय पर अवलम्ब लिलये जाने की मांH की Hई ?ै, इ पर और अति क ंदे? न?ीं ?ै। ंबंति अति कारिरयों की अनुपल्किस्र्थीति लिलये Hये विनर्ण!य े भ्रH पै,दा ?ोने की ंभावना ?ै और भ्रH पैदा ?ुआ ?ै।
27. ?मारा य? भी मान े ?ै विक प्रभाविव उम्मीदवार, अर्थीवा उनमें े कम े कम जो प्रति विनति क्षम ा में ?ों, उनको ुना जाना र्थीा और इन अभ्यर्भिर्थीयों को विबना ुने कोई भी विनर्ण!य न?ीं लिलया जा क ा र्थीा।
28. इ प्रकार, ?म य? पा े ?ैं विक य? क े वल इ ी न्यायालय क े मक्ष ?ै विक इ विववाद की म्पूर्ण! रूपरेखा प्रकट ?ो चुकी ?ै और भी ंबंति पक्षकारों क े रूख को जांचने की मांH की Hयी ?ै। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
29. यू.जी. ी./प्रति वादी-4 ने ?मारे ामने जो पक्ष रखा ?ै व? अपनी श • में स्पष्ट ?ै विक यू.जी. ी. अति विनयम की ारा ारा 22 क े ? इ क े द्वारा जारी अति ूचना क े ंदभ! में एम.एड. तिडग्री वास् व में शिशक्षा में एक मास्टर तिडग्री ?ै। इ आशय में य? मामला क्षम प्राति कारी द्वारा एम. एड को स्ना कोत्तर तिडग्री क े रूप में मान्य ा प्रदान विकये जाने की श • ?ल विकया जा ा ?ै।
30. ुल्य ा ंबं ी प्रश्न सिज का प्रत्यर्थी' 4/यू.जी. ी. ने कर्थीन विकया ?ै उ े एन. ी.टी.ई. पर छोड़ विदया जाना र्थीा। इ क े दृविष्टH एन. ी.टी.ई. को एक पक्षकार (प्रत्यर्थी'-5) और उ ने एक बार पुनः अपने रुख को स्पष्ट रूप े प्रकट विकया ?ै। ए. ी.टी.ई. ने दोनों तिडविग्रयों क े बीच इ ना अं र विकया ?ै विक एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) शिशक्षा क े क्षे[ े बंति एक तिडग्री ?ै जबविक एम.एड. एक प्रैल्किक्टशनर तिडग्री ?ै। आक्षेविप विनर्ण!य क े अनु रर्ण में Hविठ एक विमति जो एक विवशेर्षज्ञ विमति ?ै उ को भी ंदर्भिभ विदया Hया ?ै। एक वर्ष'य एम. एड. प्रोग्राम को मान्य ा प्रदान विकये जाने क े दृविष्टH विक ी भी अभ्यर्थी' को एम.एड. की तिडग्री प्राप्त करने क े लिलए प?ली तिडग्री क े बाद दो वर्ष! का मय विब ाना ?ोHा क्योंविक एम. एड. तिडग्री क े लिलए बी. एड. तिडग्री ?ोना अविनवाय! ?ै। इन परिरल्किस्र्थीति यों में य? विनष्कर्ष! विनकाला Hया विक, अवति और पाठ्यfम क े आ ार पर एम.एड. शिशक्षा क े क्षे[ में एक मास्टर प्रोग्राम ?ै और यू.जी. ी. और ए. ी.टी.ई. द्वारा भी इ े उ रूप में मान्य ा प्रदान की Hयी ?ै। एक अर्थी! में य? प्रत्यर्थी'-3 द्वारा उठाए Hए आपलित्तयों में े एक को ठंडे बस् े में डाल दे ा ?ै, जै े शुरू में एम. एड. एक ाल का काय!fम र्थीा, और बाद में 2015 में दो ाल क े काय!fम में परिरवर्ति कर विदया Hया, क्योंविक इ मुद्दे की एन. ी.टी.ई. की एक विवशेर्षज्ञ विमति द्वारा जांच की Hई ?ै, और एन. ी.टी.ई. ने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अपीलक ा!ओं क े पक्ष में विनष्कर्ष! विनकाला। एन. ी.टी.ई. द्वारा प्रस् ु प्रति शपर्थीप[ क े अंति म प्रस् र में इ आशय े स्पष्ट कर्थीन भी विकया Hया ?ै विक एम. एड. े र क े लिलए यू.जी. ी. और एन. ी.टी.ई. जै े शीर्ष! विनकायों द्वारा मान्य ा प्राप्त एक मास्टर तिडग्री ?ै और वे नेट/ए.एल.ई.टी./ जे.आर.एफ. क े लिलए भी पा[ ?ैं।
31. ?म अन्य म?त्वपूर्ण! प?लू का भी उmेख कर क े ?ैं जै े विनयोक्ता अल्किन् म रूप े य? विनर्ण!य करने में विक विक े विनयुक्त विकया जाए, ब े अच्छा न्याया ीश ?ो ा ?ै। य? विवकल्प प्रति वादी-2 का र्थीा सिजन्?ोंने क ु छ अपीलक ा!ओं क े प्रति विनति त्व क े दृविष्टH विवशेर्षज्ञ विमति की ?ाय ा मांHी। विवशेर्षज्ञ विमति को Hविठ करने का म?त्व इ की ंरचना े स्पष्ट ?ो जा ा ?ै। उ विमति ने परीक्षा क े उपरान् अपीलक ा!ओं द्वारा उठाए Hए कदम क े पक्ष में अपनी राय व्यक्त की और विनयोक्ता क े रूप में प्रत्यर्थी'-2 उ पर ?म ?ो Hया और कमेटी क े विनर्ण!य की राय को स्वीकार कर लिलया। य? वास् व में अपीलक ा!ओं या प्रति वाद कर र?े प्रत्यर्थी' पर न?ीं ?ै विक क ै े और विक र? े तिडग्री प्राप्त की जाए जो उन्?ें प्रत्यर्थी'-2 द्वारा विनयुक्त विकये जाने क े पा[ बना दे।
32. ?म य? क?ने में जल्दबाजी कर र?े ?ैं विक य? ?म य? न?ीं मान े ?ै विक प्रत्यर्थी'-2 जै े विक कोई विनयोक्ता अपनी इच्छानु ार काय! न?ीं कर क ा ?ै - वे यू.जी. ी. अति विनयम की श • और उ क े ? बनाये Hये विवविनयमों की श • े विनद™शिश और बं े ?ुए ?ैं, लेविकन ब य?ां पर, एम. एड. तिडग्री का यू.जी. ी. द्वारा जो ?मारे मक्ष जो कर्थीन विकया Hया ?ै उ क े दृविष्टH कोई ंदे? न?ीं र? जा ा ?ै, बल्किल्क प्रा ंविHक विवविनयमों को 2010 े पूव! प्राख्याविप कर मय- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds मय पर ंशोति विकया Hया। तिडविग्रयों की म ुल्य ा ंबं ी प्रश्न पर ए. ी.टी.ई. ने ठीक-ठीक विवचार विकया ?ै और जब य? दो तिडविग्रयों क े कति पय विवशिभन्न प?लुओं को मान्य ा दे र?ा र्थीा ब इ ने स्पष्ट रूप े क?ा ?ै विक ?ायक प्रोफ े रों (शिशक्षाशास्त्र) की नौकरी क े लिलए दोनों तिडविग्रयां मान्य ?ै।
33. ?म देखेंHे विक ऐ ा न?ीं ?ै विक एम. एड. तिडग्री उन भी पदों क े लिलए मान्य ?ै सिजनका विवज्ञापन विवज्ञान, कला और अन्य क े जारी विकया Hया र्थीा। उनकी पा[ ा क े वल ?ायक प्रोफ े पद क े लिलए पाया Hया ?ै, जो पढ़ाए जाने वाले विवर्षय े ी े ंबंति ?ै। ?म इ थ्य पर विवचार न?ीं कर े ?ैं विक एम. एड. और एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) दोनों तिडग्री- ारकों को नेट पा करने क े लिलए एक ?ी परीक्षा देना ?ोHा, विनश्चायक न?ीं ?ै लेविकन य? उन कारकों में े एक ?ै सिज पर विवचार विकया जाना चावि?ए, और एक बार जब विवशेर्षज्ञ विनकाय एन. ी.टी.ई. े र (शिशक्षाशास्त्र) में विनयुविक्त ?े ु म ुल्य ा पर राय बनाने क े बजाय इन प?लुओं को विवचार में ले लिलया ?ो ब य? उतिच न?ीं ?ोHा विक उ क े विवपरी राय बनायी जाए।
34. इ थ्य क े दृविष्टH ?म य? ?मारा म ?ैं विक शिशक्षा े ंबंति मामलों को विनः ंदे? प्रा ांविHक विव ानों और विवविनयमों क े अ ीन शासि र? े ?ुए शिशक्षाविवदों पर छोड़ विदया जाना चावि?ए। विवशेर्षज्ञों क े विनर्ण!य पर विवशेर्षज्ञ विनकाय क े रूप में बैठना इ न्यायालय का काय! न?ीं ?ै, खा कर ब जब विवशेर्षज्ञ भी विवशिशष्ट व्यविक्त ?ों जै ा विक नामों े स्पष्ट ?ै। पूव! में भी इ दृविष्टकोर्ण को न्यातियक ः अनुज्ञा विकया Hया ?ै और ऐ ा न?ीं ?ै विक ?म नयी बा कर र?े ?ैं। ?म इ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ंबं में ज?ूर अ?मद एवं अन्य10 क े मामले में पारिर विनर्ण!य का उmेख करना चा? े ?ैं सिज में न्यायालय ने दो दृविष्टकोर्ण व्यक्त विकया ?ै: (क) य? विनयोजक इ बा पर विवचार करे विक अध्ययन क े अनुfम की योग्य ा और अं व!स् ु की काय!शील ा े पा[ अ?! ाप्राप्त ?ोHी; और (ख) ऐ े मामले शिशक्षाविवदों पर छोड़ विदए जाने चावि?ए।
35. डॉ. प्रीति सिं ?11 क े मामले में पारिर विनर्ण!य को भी ?मने अवलोकन विकया ?ै। उच्च न्यायालय क े आक्षेविप आदेश को ंभव ः मग्र रूप े इ विनर्ण!य पर अनुमान Hया ?ै, मानो कोई मामला विनष् ारिर विकये जाने क े लिलए शेर्ष न?ीं बचा र्थीा, भले ?ी उ अन् र को बाद में पारिर विनर्ण!य डॉ. राम ेवक सिं ?12 मामले क े में मान्य ा विदया Hया ?ै। य? क?ना ?ी ?ै विक प्रायः विक ी मामले में प्रति पाविद कानून उ ना अच्छा ?ो ा ?ै सिज ना उ मामले क े थ्य ?ो ा ?ै। डॉ. प्रीति सिं ?13 का मामला ंबंति विवज्ञापन में दो?री आवश्यक ाओं े ंबंति र्थीा, अर्थीा!, विक ी भी विवर्षय में स्ना कोत्तर और शिशक्षाशास्त्र में तिडग्री। य?ां पर ऐ ी कोई दो?री योग्य ा का प्रति पाविद न?ीं विकया Hया ?ै। इ ना ?ी न?ीं, य? भ ' प्रिंप्रसि पल क े पद क े लिलए र्थीी और व? भी य? मामला ऐ े व्यविक्त े ंबंति र्थीा, सिज ने ब?ु अति क अंक न?ीं प्राप्त विकया र्थीा। मानदंडों में ंशो न करक े भी उम्मीदवार की मदद करने का प्रया विकया Hया र्थीा और इ प्रकार, न्यायालय ने जो विनष्कर्ष! विनकाला व? ?ी ?ै विक व? उतिच न?ीं र्थीा। ?म ंबंति विवज्ञापन क े लिलए विवशिभन्न मानदंडों, ंबंति विवर्षय में अपेतिक्ष तिडग्री, इ मामले में 'शिशक्षाशास्त्र' की तिडग्री, पा[ ा क े लिलए उनक े पा अपेतिक्ष अंंक, पर विवचार कर र?े ?ैं, इ 10 उपरोक्त 11 उपरोक्त 12 उपरोक्त 13 उपरोक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रकार, ?म य? न?ीं मझ पा े विक डॉ. प्रीति सिं ?14 मामले में पारिर विनर्ण!य को व !मान मामले क े थ्यात्मक ंदभ• में एक बाध्यकारी विम ाल क ै े माना जा क ा ?ै, डॉ. राम ेवक सिं ?15 मामले में की Hई विटप्पशिर्णयों क े दृविष्टH, स्पष्ट रूप े डॉ. प्रीति सिं ?16 मामले में बनायी Hयी राय का वास् विवक आ ार क्या र्थीा।
36. ?म उmेख करना चा?ेHे विक, कभी-कभी, विक ी विनर्ण!य क े वास् विवक अनुपा को विबना जांचे, उ को विम ाल क े ौर पर लिलया जा ा ?ै। य? व? ?ै जो आक्षेविप आदेश में प्र ी ?ुआ ?ै। उच्च न्यायालयों क े क ु छ अन्य विनर्ण!य भी ?ैं, ज?ां पर न्यायालय े मांH की Hयी की एम.एड. तिडग्री व्यापक ौर पर मान्य र्थीी भले ?ीं व? एम.ए. (शिशक्षाशास्त्र) क े म ुल्य न?ीं र्थीी। य? स्पष्ट ?ै विक दोनों अलH-अलH तिडविग्रयां ?ैं; और एन. ी.ई.टी ने इ े मान्य ा भी प्रदान विकया जब य? दोनों तिडविग्रयों क े बीच ूक्ष्म अं र पर जोर देकर क? र?ा र्थीा विक एक मास्टर तिडग्री जबविक दू री प्रोफ े शनल तिडग्री ?ै। यविद दो तिडविग्रयां एक जै ी ?ैं ो ुल्य ा ंबं ी कोई प्रश्न ?ी न?ीं र? जा ा ?ै। ुल्य ा ंबं ी प्रश्न क े वल ब उत्पन्न ?ो ा ?ै जब दो अलH-अलH तिडग्री ?ो ी ?ै और जो क ु छ भी विन ा!रिर विकया जाना ?ै चा?े कति पय उद्देश्यों क े लिलए क्यों न ?ो उ को म ुल्य माना जा क ा ?ै। य? ठीक व?ी ?ै जो प्रति वादी-2 और 5 द्वारा ंबंति विवशेर्षज्ञ विमति यों क े Hठन क े परिरर्णामस्वरूप घविट ?ुआ ?ै। विनयोक्ता, अर्थीा! ्, प्रति वादी-2, ने विवशेर्षज्ञ विमति की सि फारिरश को स्वीकार कर लिलया र्थीा। यू.जी. ी. ने य? भी क?ा ?ै विक ज?ां क दो तिडविग्रयों का प्रश्न ?ै, दोनों स्ना कोत्तर तिडग्री ?ैं, और मापक प्राति कारी, प्रत्यर्थी'- 5, विवशेर्षज्ञ विमति क े आ ार पर य? माना ?ै विक शिशक्षामें 14 उपरोक्त 15 उपरोक्त 16 उपरोक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds े र क े पद क े लिलए दोनों को मकक्ष माना जा क ा ?ै। इ प्रकार, य? न वादी पक्षकार, प्रत्यर्थी'-3, और न ?ी इ न्यायालय पर ?ै विक वे क े लिलए विवशेर्षज्ञों क े विनर्ण!य पर अपील न्यायालय की र? व्यव?ार करें। य?ां य? भी उmेख विकया जा क ा ?ै विक वास् व में विदनांक 22.5.2018 को जारी अंति म ूची क े अनु ार वर्ष! 2014 की चयन प्रविfया में प्रत्यर्थी'-3 चयविन ?ो चुका ?ै।
37. इ प्रकार, ?मारी राय य? ?ै विक आक्षेविप विनर्ण!य पोर्षर्णीय न?ीं ?ै और इ े अपास् कर विदया जाना चावि?ए और शुति…प[ विदनांविक 11.7.2016 को जो चुनौ ी विदया Hया ?ै उ े खारिरज विकया जा ा ?ै। परीक्षा परिरर्णाम ैयार कर त्काल उ की घोर्षर्णा की जाए ाविक बेरेजHार अभ्यर्थी' अपनी योग्य ा क े अनु ार विनयुविक्त पा क ें और इ प्रकार विनयुक्त अभ्यर्थी' अपनी शिशक्षा का लाभ उठा क ें ।
38. दनु ार न्यायालय ने अपील अनुज्ञा कर आदेश विदया विक पक्षकार अपना खचा! स्वयं व?न करें।.......................................... माननीय न्यायमूर्ति विकशन कौल.......................................... माननीय न्यायमूर्ति अविनरु… बो......................................... माननीय न्यायमूर्ति क ृ ष्र्ण मुरारी नई विदmी 12 अक्टूबर, 2020. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds भार का उच्च म न्यायालय सि विवल अपील अति कारिर ा सि विवल अपील 2851 वर्ष! 2020 ुशील क ु मार पाण्ड़ेय एवं अन्य.........अपीलार्थी' बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य.........प्रत्यर्थी' आदेश
1. रिरट-ए 61 वर्ष! 2015 में पारिर 14.5.2018 विदनांविक आदेश े उद्भू य? अपील सिज में विवज्ञापन ंख्या 46 वर्ष! 2014 े ंबंति भ ' प्रविfया को चुनौ ी विदया Hया ?ै, ?मारे द्वारा विनर्ण' सि विवल अपील ं. 2850 वर्ष! 2020 को अपीलक ा!ओं क े अति वक्ता द्वारा चुनौ ी न?ीं विदया Hया। ?म 2014 म्पन्न पूरी चयन प्रविfया पर ुनवाई न?ीं करना चा? े ?ैं जो प?ले ?ी पूरी कर ली Hयी ?ै और सिज में अलH े विवज्ञापन विदया Hया र्थीा। इ प्रकार, ?मने अपने विनर्ण!य को 2016 की चयन प्रविfया क ीविम कर विदया ?ै।
2. उपरोक्त चचा!ओं क े परिरर्णामस्वरूप, य? अपील खारिरज की दी जा ी ?ै। ……………………………….. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds …..…..……………………….. माननीय न्यायमूर्ति अविनरु… बो …..……………………………. माननीय न्यायमूर्ति क ृ ष्र्ण मुरारी नई विदmी 12 अक्टूबर, 2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds