Uttar Pradesh State v. Suresh Kumar Singh & Ors.

Supreme Court of India · 16 Oct 2020
R. F. Nariman; Naveen Sinha; K. M. Joseph
Civil Appeal No. 3498 of 2020
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that unilateral termination of a State agency contract without hearing violates natural justice and writ jurisdiction is maintainable in such cases, directing fresh consideration with due process.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 3498 वर्ष 2020
विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) सं. 5136 वर्ष 2020 से उद्भू
उत्तर प्रदेश राज्य ...अपीलार्थी4
बनाम
सु ीर क
ु मार सिंसह और अन्य ...प्रत्यर्थी4
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 3499 वर्ष 2020
विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) सं. 7351 वर्ष 2020 से उद्भू
और
सिसविवल अपील सं. 3500 वर्ष 2020
विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) सं. 7364 वर्ष 2020 से उद्भू
विन र्ण य
माननीय न्यायमूर्ति आर.एफ. नरीमन
JUDGMENT

1. अनुमति अनुदत्त।

2. उत्तर प्रदेश राज्य भंडारर्ण विनगम ("विनगम") द्वारा विदनांक 06.01.2018 को रेलवे वैगनों, ट्रकों आविद से/में खाद्यान्न/उवरक बैग उ ारने/लोड करने, खाद्यान्न/उवरकों को बैग में भरने, बोरी में भरने, ौलना, मानकीकरर्ण, खाद्यान्न/उवरकों की सफाई इत्याविद और खाद्यान्न/उवरक इत्याविद का रेलवे स्टेशन से विनगम क े गोदामों क अर्थीवा विनगम गोदामों से रेलवे स्टेशन क परिरवहन अर्थीवा विंवध्या'ल (विमर्जाापुर) क्षेत्र में विकसी भी स्र्थीान से विकसी अन्य स्र्थीान पर परिरवहन करने क े लिलए एक ई-टेंडर नोविटस र्जाारी विकया गया। दस विदन बाद विदनांक 16.01.2018 को विनगम द्वारा "प्रशासविनक कारर्णों" क े कारर्ण उक्त विनविवदा रद्द कर दी गई। विदनांक 01. 04. 2018 को, पुनः उसी श ^ क े सार्थी एक ई-टेंडर नोविटश र्जाारी विकया गया और र्जाहां क विंवध्या'ल (विमर्जाापुर) क्षेत्र का संबं है, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह 'एफ.सी.आई. और कथिर्थी सामग्री आविद में खाद्य अनार्जा क े देखभाल और परिरवहन ठेक े दार की विनयुविक्त' क े लिलए र्थीा र्जाो उत्तर प्रदेश क े विनम्नलिललिख तिडपो/क ें द्रों क े लिलए दो वर्ष^ क े लिलए र्थीाः क्रम सं. तिडपो/क ें द्र का नाम कायशील क्षम ा (एम.टी. में) संविवदा का अनुमाविन वार्षिर्षक मूल्य आर.टी.र्जाी.एस./ एन.ई एफ टी क े माध्यम से 20% सुरक्षा राथिश की कमाई सुरक्षा र्जामा (रुपये में) 1 विमर्जाापुर 8430 50000000.00 10000.00 500000.00

2. भवानीपुर पीईर्जाी-1 30000.00 60000000.00 1200000.00 6000000.00

3. भवानीपुर पीईर्जाी-2 10000 10000000.00 200000.00 1000000.00

4. ेंदू (सोनभद्र) 61400 9000000.00 180000.00 900000.00

3. इन 'ार क े लिलए कनीकी बोलिलयां 17.04.2018 को शुरु हुई ं। ब कनीकी रूप से योग्य बोली लगाने वाले का मूल्य विदनांक 23.04.2018 को शुरू हुआ। अब क प्राप्त मूल्य बोलिलयां, र्जाहां क इन 'ार क ें द्रों का संबं र्थीा, इस प्रकार र्थीेः "PEG भवानीपुर-I क ें द्र" क्रम सं. बोलीदार दर

1. माँ भवानी ट्रांसपोट 222% ए.एस.ओ.आर.

2. इकबाल अहमद अंसारी 154% ए.एस.ओ.आर.

3. सुरेश सिंसह 174% ए.एस.ओ.आर. पीईर्जाी भवानीपुर-II क ें द्र क्रम सं. बोलीदार दर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

1. मोहम्मद इकबाल अंसारी 198% ए.एस.ओ.आर.

2. इकबाल अहमद अंसारी 153% ए.एस.ओ.आर.

3. सुरेश सिंसह 174% ए.एस.ओ.आर. विमर्जाापुर क ें द्र

1. मां भवानी ट्रांसपोट 219% ए.एस.ओ.आर

2. इकबाल अहमद अंसारी 139% ए.एस.ओ.आर

3. सुरेश सिंसह 134% ए.एस.ओ.आर

112,850 characters total

4. शकील अहमद 248% ए.एस.ओ.आर ेंदू (सोनभद्र) क ें द्र

1. मां भवानी ट्रांसपोट 180% ए.एस.ओ.आर

2. मरार्जा सिंसह 300% ए.एस.ओ.आर

3. सोनभद्र ट्रांसपोट शब्दों एवं अंकों में विवविनर्षिदष्ट नहीं

4. मनीर्षा इंर्जाीविनरिंरग 225% ए.एस.ओ.आर

5. अर्जाुन सिंसह 25% ए.एस.ओ.आर (र्जाहां ए.एस.ओ.आर. का अर्थी है दरों की अनुसू'ी से ऊपर)"

4. ब विदनांक 04. 05. 2018 को विनगम क े त्कालीन प्रबं विनदेशक ने स्पष्ट रूप से इस आ ार पर उपरोक्त विनविवदा को रद्द कर विदया विक इस रह क े विनविवदा क े सार्थी आगे बढ़ना 'अव्यावहारिरक' है। फलस्वरूप विदनांक 01.06.2018 को, उसी क्षेत्र क े लिलए, अनुबं की समान काय क्षम ा और अनुमाविन वार्षिर्षक मूल्य क े लिलए पूव क्त विनविवदा को पुनः र्जाारी विकया गया। यह कहा र्जाा सक ा है विक इनमें से प्रत्येक विनविवदा दो साल की अवति क े लिलए र्थीी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 3 5. सु ीर क ु मार सिंसह, 2020 क े एस.एल.पी. (सी) नंबर 5136 और 2020 क े एसएलपी (सी) नंबर 7351 से उत्पन्न अपीलों में प्रति वादी नंबर 1 को भवानीपुर-I क ें द्र क े लिलए सफल बोलीदा ा घोविर्ष विकया गया र्थीा, 341% ASOR की दर से, विमर्जाापुर, भवानीपुर-II और ेंदू (सोनभद्र) क े लिलए अन्य सफल विनविवदाकार क्रमशः 314%, 338% और 290% ASOR हैं। विदनांक 13. 07. 2018 को, विनविवदा क े ह काय क े विनष्पादन क े लिलए विनगम और प्रत्यर्थी4 सं.[1] क े बी' एक संविवदा हुई र्जाो उस विदन से शुरू हुआ और एक वर्ष से अति क की अवति क 'ल ा रहा। 6. इसी बी', विदनांक 27.05.2019 को, पूवा•'ल ट्रक मालिलक संघ क े श्री प्रमोद क ु मार सिंसह द्वारा को ई-टेंडर नोविटस विदनांविक 01.06.2018 को र्जाारी करने में हुई विवत्तीय अविनयविम ाओं क े संबं में उ.प्र. राज्य क े प्र ान सति'व को दो थिशकाय ें की गई ं । ब सति'व, उ.प्र. राज्य प्र ान ने इन थिशकाय ों को विदनांविक 30.05.2019 पत्र द्वारा विनगम क े प्रबं विनदेशक को प्रेविर्ष कर विदया। र्जाहां क प्रत्यर्थी4 सं.[1] का संबं है उक्त पत्र इस प्रकार हैः श्री प्रमोद क ु मार सिंसह को ट्रक ओनस एसोसिसएशन की विदनांविक 27.05.2019 की दो संलग्न थिशकाय ों का विवश्लेर्षर्ण करना 'ाविहए, सिर्जासमें विंवध्यां'ल तिडवीर्जान में हैंडलिंलग और ट्रांसपोट संविवदा में होने वाली गंभीर विवत्तीय अविनयविम ाओं क े कारर्ण विनगम को हुए करोड़ों का नुकसान विदखाया गया है। xxx xxx xxx विंवध्यां'ल तिडवीर्जान में विदनांक 16. 04. 2018 को विनविवदा की गई र्थीी, सिर्जासमें विनविवदाओं की कम दर प्राप्त हुई र्थीी। र्जाारी विनविवदाएं विदनांक 05.05.2018 को विबना विकसी कारर्ण क े रद्द कर दी र्जाा ी हैं और विदनांक 16.06.2018 को रद्द विकए गए क ें द्रों की विनविवदा का पुनः विनविवदा विदया गया, सिर्जासमें पुरानी की ुलना में नई विनविवदाओं में दरें बहु अति क हैं और उच्च दरों पर काम आवंविट करक े काम विकया र्जाा रहा है। क ृ पया पूव क्त क े संबं में और संलग्न पत्रों में उसि‰लिख सभी विंबदुओं क े संबं में पां' विदनों क े भी र रिरपोट प्रदान करने का आश्वासन दें।

7. इस पत्र क े परिरर्णामस्वरूप, विनगम क े प्रबं विनदेशक ने इस मामले में एक पूव पक्षीय र्जाां' की, और उत्तरदा ा नंबर 1 का संबं र्थीा, प्रबं विनदेशक विपछले विनविवदा विदनांक 01.04.2018 को रद्द करने में गया, और पहले इन 'ार क े लिलए प्राप्त दरों क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ुलनात्मक विववरर्ण में, विदनांक 01.06.2018 की समान विनविवदा मात्रा की दरों की ुलना में, और बाद की दरें बेहद अति क पाई गई ं । विदनांविक 14. 06. 2019 की अपनी रिरपोट में उन्होंने अं ः विनष्कर्ष विनकालाः यह उ‰ेखनीय है विक ई-टेंडरिंरग प्रविक्रया को विवज्ञापन संख्या 1.1001.23318 विदनांविक 01.04.2018 क े माध्यम से इस आ ार पर रद्द कर विदया गया विक प्राप्त न्यून म दरें अव्यावहारिरक हैं, विकसी भी परिरस्थिस्र्थीति में स्वीकाय नहीं है। इस संबं में, ई-टेंडरिंरग प्रविक्रया प्राप्त करने क े लिलए तिडवीर्जान स् र पर गविठ सविमति ने पीईर्जाी ेंडू (सोनभद्र) क ें द्र को क े वल अव्यावहारिरक माना, र्जाबविक प्र ान कायालय ने इसे स्वीकार कर लिलया क्योंविक यह सभी क े संबं में है। र्जाहां क उदय क ं स्ट्रक्शन द्वारा सिसक्योरिरटी तिडपॉसिर्जाट को र्जाब् करने या उसी क े उत्पादन क े लिलए दायर विकए गए आवेदन क े संबं में थ्य थिछपाने का सवाल है, ो इस संबं में यह र्जााना र्जााना 'ाविहए विक उदय क ं स्ट्रक्शन ने विवज्ञापन संख्या 1.1001.23318 क े माध्यम से क े वल PEG ेंदू क े लिलए आवेदन विकया र्थीा। विदनांक 01.04.2018। इसलिलए, इस आ ार पर अन्य क े लिलए प्राप्त बोलिलयों की अस्वीक ृ ति उति' नहीं र्थीी।"

8. इस बी', आयुक्त, विंवध्या'ल मंडल, विमर्जाापुर ने भी एकपक्षीय र्जाां' की और विदनांक 29.06.2019 को अपनी रिरपोट में विनम्नलिललिललिख विनष्कर्ष विनकालाः

1. राज्य क्षेत्रीय प्रबं क श्री म ुकर गुप्ता ने राज्य महाप्रबं क (विवत्त) उत्तर प्रदेश राज्य भण्डारर्ण विनगम को अग्रेविर्ष अपने पत्र सं. आर.बीए'.एन/विदनांविक 26-05-2018 में उ‰ेख विकया है विक ई-टेंडरिंरग सविमति का गठन क े वल औप'ारिरक ाओं क े उद्देश्य क े लिलए विकया गया है। यह पैराग्राफ की र्जाां' करने से स्पष्ट है विक विनविवदा में औप'ारिरक ा की गई है। विदनांक 12-07-2018 को राज्य प्रबं क ने स्वीक ृ ति का अनुमोदन विकया और विदनांक 13-07-2018 को उत्तर प्रदेश राज्य भंडारर्ण विनगम ने स्वीक ृ ति प्रदान की। विदनांक 13-07-2018 को श्री म ुकर गुप्ता राज्य क्षेत्रीय प्रबं क, उत्तर प्रदेश राज्य भण्डारर्ण विनगम, विंवध्या'ल ने संबंति ठेक े दारों को विनयुविक्त आदेश प्रदान विकया। इसक े र्जारिरए सम्पूर्ण प्रविक्रया में असामान्य स क ा विदखाई गई है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. क्षेत्रीय प्रबं क, उत्तर प्रदेश राज्य भंडारर्ण विनगम क े क ं प्यूटर सलाहकार श्री अनुर्जा शुक्ला को श्री म ुकर गुप्ता द्वारा शाविमल कराया गया र्जाो उति' नहीं है। विनविवदा काय में संविवदात्मक काय को ध्यान में रख े हुए आपलित्तर्जानक है।

3. क े वल पंर्जाीक ृ ठेक े दारों को भाग लेने क े लिलए श रखी गई र्थीी र्जाो आपलित्तर्जानक है। क े वल पंर्जाीक ृ ठेक े दार की भागीदारी क े कारर्ण, ठेक े दारों क े बी' कोई प्रति योविग ा नहीं हुई। सिर्जासक े कारर्ण कई गुना उच्च दर प्राप्त की गई र्थीी। सिर्जासक े र्जारिरए विवभाग को नुकसान हुआ।

4. क्षेत्रीय प्रबं क ने अपने पत्र सं. आर.बी.एन./284/विदनांविक 12-07-2018 क े माध्यम से प्रबं विनदेशक उत्तर प्रदेश राज्य भंडारर्ण विनगम लखनऊ को संबोति विकया। विन ारिर दर क े लिलए 314 प्रति श, 341 प्रति श, 338 प्रति श और 290 प्रति श उच्च दर पर विनयविम ठेक े दारों की विनयुविक्त की सिसफारिरश की पुविष्ट का काय भार ीय उवरक विनगम हैंडलिंलग और परिरवहन को दे विदया गया है। यह उ‰ेख विकया गया है विक य दर से उच्च दर क े बाबर्जाूद क्षेत्रीय प्रबं क ने उच्च दर क े बारे में न ो कोई बार्जाार सव– विकया गया और न ही उन्होंने अपने पत्र में उ‰ेख विकया और उन्होंने गैर -सिर्जाम्मेदार रीक े से स्वीक ृ ति की सिसफारिरश कर दी। अ ः श्री म ुकर गुप्ता, राज्य क्षेत्रीय प्रबं क ने अपने क व्य और सिर्जाम्मेदारी का पालन नहीं विकया है और वह विबना विकसी कारर्ण क े उच्च दर य करने और स्वीकार करने क े लिलए सिर्जाम्मेदार है।5. विनगम मुख्यालय को भी विन ारिर दर से उच्च दर क े संबं में कारवाई करने क े लिलए उपयुक्त नहीं माना गया। मुख्यालय द्वारा र्जाो र्जाां' की गई र्थीी, वह पूरी नहीं की गयी है। 6. इस संबं में स्पष्ट रूप से विवत्तीय नुकसान का विन ारर्ण करना संभव नहीं है क्योंविक न ो इस मामले में, भाग लेने का अवसर विदया गया है और न ही बार्जाार का सव– विकया गया है।उस औप'ारिरक ा क े आ ार पर दर विन ारिर की र्जाा सक ी है। विनति— रूप से नुकसान हुआ है। लेविकन इसे ब ाया नहीं र्जाा सक ा है। अथिभलेख को परिरशीलन और आवश्यक कारवाई हे ु भेर्जाा गया है।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

9. प्रस् ु इन दोनों रिरपोट^ में विवशेर्ष सति'व, उ.प्र. सरकार ने प्रबं विनदेशक को एक पत्र विदनांविक 16.07.2019 लिलखा, सिर्जासमें प्रबं विनदेशक की रिरपोट विदनांविक 14.06.2019 को संदर्भिभ देकर विनष्कर्ष विनकाला गयाः इसमें क्षेत्रीय स् र क े अति कारी (विंवध्या'ल तिडवीर्जान) और उच्च दर स्वीक ृ ति देने वाले अति कारी और त्कालीन प्रबं विनदेशक और मुख्यालय से संबंति अति कारिरयों की भूविमका भी संविदग् प्र ी हो ी है।इसलिलए, मुझे यह कहने का विनद–श विदया गया है विक आप अपने स् र पर मामले की र्जाां' करक े, सरकार को हुए विवत्तीय नुकसान और उसका मूल्यांकन करने क े बाद, संबंति ठेक े दार और संबंति अति कारिरयों से उक्त राथिश की वसूली क े लिलए कारवाई करेंगे। सिर्जान अति कारिरयों/कम'ारिरयों क े लिखलाफ कोई पूव विवभागीय कायवाही लंविब है, उनक े संबं में इन आरोपों को अति रिरक्त 'ार्जाशीट क े रूप में शाविमल करक े कारवाई की र्जााएगी और उन अति कारिरयों/कम'ारिरयों क े लिखलाफ दोर्षी पाया र्जााएगा सिर्जानक े लिखलाफ कोई कायवाही लंविब नहीं है, उन्हें ति'विš करक े कायवाही की र्जााएगी । उपरोक्त उसि‰लिख फम^ को प्रदान की गयी विनयम विवरूद्ध विनविवदाओं को रद्द कर संबंति गोदामों क े सं'ालन और परिरवहन काय क े लिलए विफर से ई -टेंडरिंरग क े माध्यम से ठेक े दारों की विनयुविक्त की र्जााएगी। र्जाल्द से र्जाल्द उक्त कायवाही कर सरकार को सूति' विकया र्जााए।"

10. इस पत्र क े अनुसरर्ण में, उपरोक्त विनविवदाएं विदनांक 26.07.2019 को रद्द कर विनगम क े क ु छ कम'ारिरयों क े लिखलाफ अनुशासनात्मक कायवाही की गई। इन कायवाविहयों क े कारर्ण विदनांक 18.10.2019 की एक रिरपोट आई, सिर्जासमें पूव दरों और व मान दरों क े बी' अं र पाया गया, और यह पाया गया विक पूव में मंर्जाूर राथिश क े सापेक्ष कु ल 4,40,05,369 से अति क भुग ान विकया गया-यह राथिश क े 'ल े विनगम को विवत्तीय नुकसान है।

11. इस बी', प्रत्यर्थी4-1 ने इलाहाबाद में उच्च न्यायालय क े समक्ष र्जाुलाई 2019 में रिरट याति'का सं. 25389 वर्ष 2019 दायर विकया, सिर्जासमें उन्होंने दो वर्ष^ की अवति में से एक वर्ष सफल ापूवक विब ा लेने क े उपरान् विनगम क े सार्थी की गयी संविवदा को 'अवै और मनमानीपूर्ण रीक े से ' समाप्त कर विदया है उसको 'ुनौ ी विदया है, और विदनांविक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 01.06.2018 की विनविवदा को रद्द करने वाला विनगम का आदेश विदनांविक 26.07.2019 अपास् करने क े लिलए करने क े लिलए प्रार्थीना की।

12. उच्च न्यायालय ने इस रिरट याति'का में पारिर विनर्णय विदनांविक 11.12.2019 रिरट, र्जाो एस.एल.पी. (सिसविवल) सं. 5136 वर्ष 2020 क े एस.एल.पी. (सिसविवल) सं. 7351 वर्ष 2020 से उत्पन्न अपीलों में आक्षेविप है, रिरट याति'का में की गयी प्रार्थीना को विन ारिर करने क े बाद अपने समक्ष उत्पन्न 'ार प्रश्न विन ारिर विकए र्जाो इस प्रकार हैंः (क) क्या दो र्जाां' रिरपोट प्रविक्रयात्मक रूप से दोर्षपूर्ण हैं क्योंविक इसक े ह विदए गए विनष्कर्ष थ्य पर आ ारिर नहीं है और इसलिलए विवक ृ हैं। (बी) क्या प्रति वादी प्रबं विनदेशक को एक वर्ष की अवति क े बी र्जााने विबना सू'ना विदये याति'काक ा क े सार्थी लिललिख संविवदा को रद्द करने में उति' र्थीा। (ग) क्या विनगम,एक स्वायत्त विनकाय, को विवशेर्ष रीक े से कारवाई करने क े लिलए विनद–थिश नहीं विकया र्जाा सक ा र्थीा और क्या प्रबं विनदेशक विवशेर्ष सति'व क े कायकारी पद क े ह संविवदा को रद्द करने में सहीं नहीं र्थीा। (घ) क्या प्रबं विनदेशक द्वारा पारिर आदेश पक्षपा क े आ ार पर दूविर्ष है क्योंविक वह स्वयं र्जाां' अति कारी र्थीा और याति'काक ा को अपने ब'ाव करने का अवसर विदये विबना उसने स्वयं र्जाां' की और विफर उसक े द्वारा ैयार रिरपोट क े आ ार पर, उसने संविवदा को रद्द कर विदया।'

13. उच्च न्यायालय ने विनष्कर्ष विनकाला विक 'ूंविक सम्पू्र्ण कायवाही प्रत्यर्थी -1 की पीठ क े पीछे करायी गई र्थीी, और इस बा पर विव'ार कर विक विदनांक 01.06.2018 को विनविवदा सू'ना को विकसी ने भी न्यायालय में 'ुनौ ी नहीं विदया र्थीा, इसलिलए प्राप्त थिशकाय ों का एक एकपक्षीय मूल्यांकन विनगम क े प्रबं विनदेशक और विवद्वान आयुक्त द्वारा र्जाल्दबार्जाी में विकया गया र्थीा, र्जाो कई आ ारों पर अपास् विकये र्जााने योग्य र्थीा, उनमें से एक महत्वपूर्ण- र्जाहां क प्रत्यर्थी4-1 का संबं है- इस कायवाही में नैसर्षिगक न्याय क े सिसद्दान् का पालन नहीं विकया गया है। इसलिलए, उच्च न्यायालय ने अथिभविनर्ण[4] विकयाः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यविद अति कारिरयों ने स्वविववेकानुसार पू्व टेंडर नोविटस को रद्द कर विदया हो ा और उन टेंडर नोविटस को रद्द करने पर कभी सवाल नहीं उठाया गया हो ा, क े वल इसलिलए विक उन पूव टेंडर नोविटसों को रद्द या वापस ले लिलया गया र्थीा ब यह उप ारर्णा नहीं की र्जाा सक ा है विक ीसरा नोविटस सिर्जासमें विनविवदा आमंवित्र विकया गया र्थीा वह कु छ वाह्य प्रति फल क े लिलए र्थीा। यह स' है विक इस बार की कीम ों को विनविवदा की प्रविक्रया में पूव की ुलना में बहु अति क रखा गया र्थीा सिर्जासमें कीम ों को बहु कम उद्धृ विकया गया र्थीा विकन् ु इस आ ार पर पूरी विनविवदा को रद्द नहीं विकया र्जाा सक ा है और इसको न क े वल अंति म रूप विदया गया बस्थिल्क संविवदा भी कर ली गयी र्थीी और संविवदा क े पक्षकार भारी विनवेश कर काम कर रहे र्थीे। अगर यह उस रह का भी मामला हो ा, र्जाहां संविवदा क े पक्षकार विनयमों और श ^ का उ‰ंघन विकये हो े ब यह कहा र्जाा सक ा र्थीा विक विनविवदा रद्द विकये र्जााने योग्य है क्योंविक संविवदा क े विनयमों और श ^ क े उ‰ंघन विकया गया है। लेविकन प्रस् ु मामले में ऐसा कोई भी विनष्कर्ष विनकाला गया है। वे कारर्ण सिर्जानकी वर्जाह से विनविवदा प्रविक्रया, र्जाो पहले ही संविवदा क े विनष्पादन से पूरी की र्जाा 'ुकी र्थीी, संविवदा प्राप्त करने में या'ी द्वारा गल रीका अपनाये र्जााने का कारर्ण विदये विबना विनरस् कर दी गयी है। इस प्रकार याति'काक ा को इस मामले में गल नहीं ठहराया र्जाा सक ा है और इसलिलए, हम गहराई से विव'ार कर मान े हैं विक यविद याति'काक ा पहले से ही करार क े ह काम कर रहा र्थीा और उसक े ऊपर करार क े विनयमों और श ^ का उ‰ंघन करने का कोई आरोप नहीं र्थीा ब प्रत्यर्थी4 करार को एकपक्षीय रद्द करने सही नहीं र्थीे। xxx xxx xxx यह प ा नहीं 'ला है विक विनविवदा आमंवित्र करने वाले नोविटस क े लिखलाफ आवेदन प्रस् ु करने क े 'रर्ण में, याति'काक ा पात्र नहीं र्थीा या कनीकी बोली और विवत्तीय बोली खोलने क े समय याति'काक ा गल रीक े से योग्य हो गया र्थीा और विवत्तीय बोली याति'काक ा को गल रीक े से अनुमोविद विकया गया र्थीा और याति'काक ा और विनगम क े बी' समझौ ा कानून क े लिखलाफ शून्य र्थीा। यविद उपरोक्त सभी ीन 'रर्णों में याति'काक ा को विकसी भी रह से 'ीर्जाों में हेरफ े र करने और विनगम क े अति कारिरयों क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सार्थी विमलकर विकसी भी सासिर्जाश को र' कर विनविवदा प्राप्त करने क े लिलए दोर्षी नहीं ठहराया र्जाा सक ा है, ो प्रबं विनदेशक द्वारा अ'ानक समझौ े को रद्द कर विदया गया है। संपूर्ण नोविटस आमंवित्र विनविवदा खराब र्थीी, विनति— रूप से इस रह क े आदेश को पारिर करने से पहले याति'काक ा को सुनवाई क े अवसर और सुनवाई क े अवसर की आवश्यक ा र्थीी। यह सुस्र्थीाविप विवति है विक प्रशासविनक शविक्त क े प्रयोग में शविक्त का प्रयोग करने वाला प्राति कारी न क े वल अपने विववेक का सम्यक रूप से प्रयोग करे बस्थिल्क उन प्रविक्रयाओं का भी पालन करे सिर्जाससे कायवाही मनमानापूर्ण न बन र्जााए। यह सुस्र्थीाविप विवति सिसद्धान् है विक र्जाो भी मनमानापूर्ण है, वह भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 14 द्वारा बाति हो ा है और व मान मामले में हम पा े हैं विक प्रत्यर्भिर्थीयों आक्षेविप कारवाई प्रत्यर्भिर्थीयों ने सिर्जान प्रविक्रया का पालन विकया वह न क े वल पूर्णरूपेर्ण एकपक्षीय है बस्थिल्क सरकार क े विवशेर्ष सति'व क े कायकारी व्यवस्र्थीापत्र है सिर्जासको अनसुना कर विदया गया र्थीा।'

14. इस प्रकार न्यायालय ने सुनकर विनम्नलिलविक विनष्कर्ष विनकालाः आदेश विदया गया मूल रूप से प्रबं विनदेशक द्वारा ैयार की गई र्जाां' रिरपोट पर आ ारिर है और यह विक र्जाां' पूव पक्षीय रीक े से आयोसिर्जा की गई र्थीी और प्रबं विनदेशक आदेश पारिर करने से पहले याति'काक ा को सुनवाई का कोई अवसर प्रदान करने में विवफल रहा, सिर्जासका प्रभाव है विबना विकसी उति' कारर्ण क े समझौ े को समाप्त करने का प्रभाव यह मानने क े लिलए विक याति'काक ा विकसी भी समय गल ी पर र्थीा। इसलिलए, प्रबं विनदेशक की रफ से इन परिरस्थिस्र्थीति यों में पूवाग्रह क े त्व को खारिरर्जा नहीं विकया र्जाा सक ा है। इसलिलए, विदनांविक 26.7.2019 क े करार को समाप्त करने वाला आदेश कानून में पोर्षर्णीय नहीं है। इस प्रकार, पूवगामी ''ा क े कारर्ण रिरट याति'का सफल हो र्जाा ी है और अनुज्ञा र्जाा ी है। रिरट याति'का में विकया गया आदेश विदनांविक 26.7.2019 (संलग्नक-13) और प्रबं विनदेशक द्वारा प्रस् ु विदनांविक 14.6.2019 की र्जाां' रिरपोट क े सार्थी-सार्थी विवशेर्ष सति'व द्वारा विदनांक 16.7.2019 द्वारा पारिर आदेश को भी रद्द कर विदया गया है। यविद आक्षेविप आदेश क े अनुसरर्ण में कोई कायवाही की गयी है ो वह भी रद्द की र्जाा ी है। र्थीाविप, ख'– संबं ी कोई कोई आदेश नहीं विदया र्जााएगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

15. डॉ. अथिभर्षेक मनु सिंसघवी, विनगम की ओर से उपस्थिस्र्थी वरिरष्ठ अति वक्ता, ने पहली बार प्रति वादी-1 द्वारा दायर रिरट याति'का में प्रार्थीना का र्जावाब देकर न्यायालय क े समक्ष यह क विदया विक उच्च न्यायालय उससे परे 'ला गया सिर्जास 'ीर्जा की मांग की गयी र्थीी। उनक े अनुसार, रिरट याति'का में क े वल विद्व ीय विनविवदा विदनांविक 26.07.2019 क े आदेश को रद्द करने की प्रार्थीना विकया गया। उच्च न्यायालय इस सब से परे र्जााकर न क े वल पूव क्त विनरसन आदेश को रद्द कर विदया, बस्थिल्क प्रबं विनदेशक की र्जाां' रिरपोट विदनांविक 14.06.2019 सार्थी ही विवशेर्ष सति'व क े आदेश विदनांविक 16.07.2019 को रद्द कर विदया और इसक े परिरर्णामस्वरूप र्जाो कारवाही की गयी अर्थीा गैरसिर्जाम्मेदार अति कारिरयों क े विवरूद्ध विवभागीय कायवाही इस रिरट याति'का में 'ुनौ ी का विवर्षयवस् ु कभी नहीं रहा। उन्होंने क विदया विक पहले की विनविवदा विदनांक 01.04.2018 में प्राप्त दरों और विदनांक 01.06.2018 की विनविवदा में य दर र्जान्हें रद्द कर विदया गया र्थीा उनक े बी' ुलना क े आ ार पर, यह स्पष्ट करने क े लिलए असमान ा इ नी ज्यादा र्थीी विक इन 'ार क े लिलए इऩ दरों पर संविवदा नहीं विकया र्जााना 'ाविहए र्थीा। उन्होंने क विदया विक उच्च न्यायालय को इन दरों पर संविवदा करने देने क े परिरर्णामस्वरूप होने वाले भारी विवत्तीय नुकसान की आँकलन करना 'ाविहए, और विनविवदा रद्द करने में हस् क्षेप नहीं करना 'ाविहए, क्योंविक समान काय^ क े लिलए इ नी कम अवति में दरों में भारी वृतिद्ध को देख े हुए इसे मनमाना नहीं माना र्जाा सक ा र्थीा। इसक े अलावा, उन्होंने क विदया विक प्राक ृ ति क न्याय पर मामले क े कानून से प ा 'ला है विक यह एक अनम्य स्ट्रैटर्जाैक े ट नहीं र्थीा, लेविकन इसका उपयोग समझदारी और अच्छी रह से विकया र्जााना र्थीा, और इस प्रस् ाव क े लिलए इस न्यायालय क े कई विनर्णयों का हवाला विदया गया र्थीा विक भले ही प्राकृ ति क न्याय का उ‰ंघन विकया र्जाा सक ा है विकसी विदए गए मामले क े थ्य, यविद अन्यर्थीा इस रह क े उ‰ंघन क े परिरर्णामस्वरूप 12 पूवाग्रह नहीं हो े हैं, ो यह आदेश को अलग करने और प्रभाविव पक्ष को सुनने क े बाद एक आदेश पारिर करने क े लिलए अति कारिरयों को रिरमांड देने क े लिलए विनरर्थीक ा में एक मात्र अभ्यास होगा। उन्होंने यह भी क विदया विक र्जाैसा विक आर्जा की ति थिर्थी पर संविवदा की दो साल की अवति समाप्त हो गई है, और यह वास् विवक ठेक े दार, यानी प्रत्यर्थी4-1, विदनांक 21.03.2020 को दरों (139% ए.एस.ओ.आर.) विमर्जाापुर में में विदये गये उसी काय को कर रहा है, र्जाो पहले क े विनविवदा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दरों से बहु कम है, र्जाैसा विक सफल विनविवदाकार ति लो मा देवी विदनांक 31.09.2019 से कर रही है और र्जाहां क भवानीपुर-II का संबं है, सिर्जासे 221% ए.एस.ओ.आर. प्रदान विकया गया र्थीा। डॉ. सिंसघवी ने यह भी क विदया विक रिरट न्यायालय को संविवदात्मक मामलों में हस् क्षेप नहीं करना 'ाविहए र्थीा, और प्रत्यर्थी4 पर छोड़ देना 'ाविहए र्थीा विक वह उति' अनु ोर्ष क े लिलए न्यायालय में वाद दायर करने क े लिलए पहुं' करे।

16. राज्य की रफ से उपस्थिस्र्थी विवद्वान सॉलिलसिसटर र्जानरल श्री ुर्षार मेह ा ने क विदया विक उनकी एक सीविम भूविमका है और विवभागीय कारवाई करने क े लिलए विवशेर्ष सति'व क े विदनांक 16.07.2019 क े पत्र को अपास् करने क े लिलए अपने क^ को सीविम कर विदया। उन्होंने क विदया विक इस पत्र को उच्च न्यायालय द्वारा अपास् नहीं विकया र्जाा सक ा र्थीा, क्योंविक रिरट याति'काक ा द्वारा इससे पहले ऐसी कोई प्रार्थीना या क नहीं विदया गया र्थीा।

17. प्रत्यर्थी4-1 की ओर से पेश विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री राक े श विद्ववेदी ने क विदया विक उच्च न्यायालय क े विनर्णय में हस् क्षेप नहीं विकया र्जााना 'ाविहए, क्योंविक उनक े मुववि¤ल ने बहु सारे पैसे ख' विकए र्थीे, और एक वर्ष से अति क की अवति क े लिलए संविवदा पर सफल ापूवक विनगम की रफ से विबना विकसी थिशकाय क े काम विकया र्थीा। उन्होंने इस थ्य को दोहराया विक विकसी ने भी अपने ग्राहक को विनविवदा क े विदये र्जााने को 'ुनौ ी नहीं विदया र्थीा, और विनविवदा रद्दकरर्ण अपने ग्राहक की पीठ क े पीछे विकया गया र्थीा। अगर अति कारिरयों ने अपने ग्राहक को सुनने की र्जाहम उठाई हो ी, ो उसका ग्राहक यह ब ा सक ा र्थीा विक आस-पास क े अन्य तिडवीर्जानों में, लगभग समान दरों पर विनविवदाएं दी गई र्थीीं, सिर्जानमें से सभी पर काम विकया गया र्थीा, और सिर्जानमें से विकसी को भी रद्द नहीं विकया गया है। इस प्रकार, उन्होंने क विदया विक उनका मुववि¤ल गंभीर पूवाग्रह से पीविड़ हुआ, सिर्जासमें वह दो वर्ष^ में से क े वल एक वर्ष अपने संविवदा पर काम करने में समर्थी हो पाया र्जाो उसे विदया गया र्थीा। उन्होंने आगे क विदया विक अगर उसे सुनवाई का अवसर विदया र्जाा ा ो उनका मुववि¤ल यह भी ब ा पा ा विक सिर्जान दरों पर विनविवदा र्जाारी की गयी र्थीी उसे उनक े पक्ष में संविवदा की भयावह ा को देख े हुए अनुति' नहीं माना र्जाा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सक ा है। उन्होंने यह भी क विदया विक विमर्जाापुर में कम दर पर विनविवदा देना, र्जाो व मान में उनक े ग्राहक क े माध्यम से संसाति विकया र्जाा रहा है, उस विनविवदा क े सार्थी ुलना नहीं की र्जाा सक ी है र्जाो उसक े मुववि¤ल को भवानीपुर-I में प्रदान की गई र्थीी, क्योंविक, अन्य बा ों क े सार्थी, वहां पर दो संविवदा में विदए गए काय की मात्रा क े बी' बड़ा अं र र्थीा। उन्होंने क विदया विक यह कहना ठीक नहीं है विक उसक े मुववि¤ल क े सार्थी कोई पूवाग्रह कारिर नहीं हुआ है, क्योंविक उसकने संविवदा पर एक वर्ष काम नहीं कर पाया है, संविवदा की अवति अब समाप्त हो रही है, और यविद उनक े मुववि¤ल की संविवदा को अपास् विकया र्जाा ा है ो उनका मुववि¤ल विनगम क े सार्थी विकसी अन्य संविवदा क े लिलए ीन साल की अवति क े लिलए बोली लगाने से वंति' विकया र्जाा ा है। उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े समर्थीन में उन्होंने आगे क विदया विक विनगम द्वारा संविवदा को समाप्त करने की र्जाो कारवाई की गयी वह स्वविववेक पर नहीं की गयी र्थीी और विवशुद्ध रूप से विदनांक 16.07.2019 को विवशेर्ष सति'व, उ. प्र. सरकार क े विनद–श पर की गयी र्थीी। उन्होंने यह भी क विदया विक उनका बयान दर्जा विकया र्जाा सक ा है विक उनका मुववि¤ल करार क े पाति—क विनरस् ीकरर्ण की अवति क े लिलए नुकसान का दावा करने वाला नहीं है, और यह विक विनष्पक्ष ा में, उनक े मुववि¤ल द्वारा र्जामा विकया गया बयाना और सुरक्षा र्जामा को विनगम द्वारा वापस कर विदया र्जााना 'ाविहए।

18. सभी पक्षकारों क े लिलए विवद्वान अति वक्ता को सुनने क े उपरान् एक बा स्पष्ट हो र्जाा ी है। इस थ्य क े बावर्जाूद विक प्रत्यर्थी4-1 द्वारा दायर रिरट याति'का में र्जाो प्रार्थीना की गयी र्थीी उसको आक्षेविप विनर्णय की शुरुआ में विद्व ीय विनविवदा क े विनरस् ीकरर्ण को स्वयं द्वारा पुष्ट कर अपास् कर विदया गया र्थीा, आक्षेविप विनर्णय पर आगे कारवाही की गयी और न क े वल इस रह क े विनरस् ीकरर्ण विदनांविक 26.07.2019 क े पत्र क े माध्यम से रद्द कर विदया, बस्थिल्क आगे कायवाही कर प्रबं विनदेशक की रिरपोट विदनांविक 14.06.2019 की और विवशेर्ष सति'व क े आदेश विदनांविक 16.07.2019 को अपास् कर विदया गया सिर्जासमें अनुशासनात्मक कारवाई को करने और सिर्जाम्मेदार लोगों से विवत्तीय नुकसान की वसूली अपेतिक्ष र्थीी। श्री राक े श विद्ववेदी ने यह भी स्वीकार विकया विक उनक े मुववि¤ल ने विकसी भी राह क े लिलए दोर्षी अति कारिरयों से विकसी भी अनु ोर्ष की मांग नहीं की र्थीी। ऐसा मामला mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA होने क े कारर्ण, हमने आक्षेविप विनर्णय को अपास् कर विदया क्योंविक न्यायालय ने प्रबं विनदेशक की रिरपोट विदनांविक 14.06.2019 और विवशेर्ष सति'व क े आदेश विदनांविक 16.07.2019 को रद्द कर विदया है। इन आदेशों क े अनुसरर्ण में र्जाो परिरर्णामी कारवाही की गयी उसे विवति सम्म होना 'ाविहए।

19. डॉ. सिंसघवी की प्रारंथिभक आपलित्त र्जाो संविवदा क े विवखंडन से संबंति है कायवाही करने क े लिलए प्रत्यर्थी4-1 को रिरट न्यायालय न र्जााकर सिसविवल न्यायालय र्जााने से रोक नहीं लगा सक ी है ए.बी.एल. इंटरनेशनल लिलविमटेड और अन्य बनाम एक्सपोट क्र े तिडट गारंटी कॉप रेशन ऑफ इंतिडया लिलविमटेड और अन्य (2004) 3 एस.सी.सी. 553 क े मामले में, इस न्यायालय ने कहा विक यह काफी समय क अविनर्ण[4] नहीं र्थीा विक संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह कोई रिरट याति'का राज्य क े संविवदात्मक दातियत्व को लागू करने क े लिलए पीविड़ पक्ष क े पहल पर ब पोर्षर्णीय हो ी है र्जाब राज्य मनमाने रीक े से काय कर ा है, र्जाो विनम्नानुसार हैः

8. र्जाैसा विक इस अपील में विदए गए क^ से और सार्थी ही विन'ली दोनें न्यायालयों क े अलग-अलग विव'ारों से देखा र्जाा सक ा है, उनमें से एक प्रश्न र्जाो हमारे समक्ष विव'ारर्णीय है वह यह है विक क्या भार क े ह विकसी पीविड़ पक्षकार द्वारा दायर रिरट याति'का राज्य या राज्य की मशीनरी द्वारा संविवदात्मक दातियत्व क े प्रव न क े लिलए पोर्षर्णीय है।

9. हमारी राय में यह प्रश्न अविनर्ण[4] नहीं रह गया है और इस न्यायालय क े अनेक न्यातियक विनर्णयों में यह स्र्थीाविप ह 'ुका है। क े.एन. गुरुस्वामी बनाम मैसूर राज्य [(1955) 1 एस.सी.आर. 305] में यह न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकयाः

20. अगला सवाल यह है विक क्या अपीलक ा रिरट क े माध्यम से इसकी थिशकाय कर सक ा है। हमारी राय में, वह एक सामान्य मामले में ऐसा कर सक ा र्थीा। अपीलक ा इन संविवदाओं में रुति' रख ा है और उसमें राज्य में प्रवर्ति विवति क े ह समान उप'ार प्राप्त करने और अन्यों की रफ समान अवसर प्रदान विकये र्जााने का अति कार रख ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इसलिलए हम सा ारर्ण अनुक्रम में अपीलक ा को उसकी मांग क े अनुरूप रिरट करने की अनुज्ञा देना 'ाहेगें। लेविकन, उस समय क े 'ल े सिर्जासक े कारर्ण यह मामला हमारे समक्ष पहुं'ा (परिरर्णामस्वरूप अपीलक ा को विकसी भी रह से दोर्षी नहीं ठहराया र्जाा सक ा है, क्योंविक उसने वह सब विकया है सिर्जाससे र्जाल्दी सुनवाई हो सक ी र्थीी ), संविवदा करने क े लिलए मुस्थिश्कल से पन्द्रह विदन का समय ब'ा है... इसलिलए यह रिरट अप्रभावी हो र्जााएगी और क्योंविक विनरर्थीक रिरट र्जाारी करना हमारी परम्परा नहीं है इसलिलए हमें इस अपील को खारिरर्जा कर देना 'ाविहए और अपीलक ा ने अपील र्जाो क प्रस् ु विकये है उसे विवति पर छोड़ देना 'ाविहए।'

10. उक्त मामले में इस न्यायालय की उपरोक्त विटप्पथिर्णयों से यह स्पष्ट है, भले ही उस मामले क े थ्यों क े आ ार पर रिरट र्जाारी नहीं विकया गया र्थीा विफर भी इस न्यायालय ने यह माना है विक विदए गए इन थ्यों पर यविद कोई राज्य संविवदा क े मामले में भी मनमाने रीक े से काय कर ा है, ो एक पीविड़ पक्ष संविव ान क े ह रिरट क े माध्यम से अदाल का दरवार्जाा खटखटा सक ा है और उक्त मामले क े थ्यों क े आ ार पर अदाल को राह देने का अति कार है। क े.एन. गुरुस्वामी बनाम मैसूर राज्य क े मामले में पारिर इस विनर्णय का का बाद में डी.एफ.ओ. बनाम राम सनेही सिंसह [(1971) 3 एस.सी.सी. 864] क े मामले में इस न्यायालय द्वारा अनुसरर्ण कर विनम्नानुसार ारिर विकया गयाः उस आदेश क े माध्यम से उन्होंने प्रति वादी को उस मूल्यवान अति कार से वंति' कर विदया है। हम यह नहीं कह सक े है विक क े वल उस अति कार की उत्पलित्त क े आ ार पर सिर्जासका दावा प्रत्यर्थी4 ने एक सावर्जाविनक प्राति करर्ण की ओर से विकसी भी मनमानी और गैरकानूनी कारवाई क े लिखलाफ राह प्राप्त करने क े लिलए संविवदा कर े समय विकया र्थीा, उसे वाद का सहारा लेना 'ाविहए न विक रिरट क े माध्यम से याति'का का। क े.एन. गुरुस्वामी मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय क े दृविष्टग इसमें कोई संदेह नहीं हो सक ा है विक याति'का पोर्षर्णीय र्थीी, भले ही अनु ोर्ष का अति कार संविवदा क े कथिर्थी विवखण्ड़न से उत्पन्न mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हुआ हो, र्जाहां पर सांविवति क प्राव ानों द्वारा राज्य को दी गयी शविक्त को 'ुनौ ी दी गयी र्थीी।'

11. गुर्जारा राज्य विवत्तीय विनगम बनाम लोटस होटल्स (प्राइवेट) लिलविमटेड [(1983) 3 एस.सी.सी. 379] क े मामले में इस न्यायालय रमना दयाराम शेट्टी बनाम भार ीय अं राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राति करर्ण [(1979) 3 एस.सी.सी. 489] क े मामले में पारिर पूव विनर्णय का अनुसरर्ण कर ारिर विकयाः राज्य की मशीनरी र्जाो अनुच्छेद 12 क े अ ीन "अन्य प्राति कारी" होगी, उस दूसरे पक्षकार क े प्रति क ू ल प्रभाव डालने वाले गंभीर व'न का उ‰ंघन नहीं कर सक ी सिर्जासने उस उपक्रम या वादे पर काय विकया और स्वयं को प्रति क ू ल स्थिस्र्थीति में डाल विदया। राज्य विवत्तीय विनगम अति विनयम क े ह बनाया गया अपीलक ा विनगम अनुच्छेद 12 में 'अन्य प्राति करर्ण' की अथिभव्यविक्त क े अं ग आ ा है और यविद वह इस रह क े वादे से मुकर र्जाा ा है, ो यह नहीं कहा र्जाा सक ा है विक पीविड़ पक्षकार क े लिलए एकमात्र उपाय है संविवदा भंग से हुयी क्षति पूर्ति क े लिलए वाद दायर करेगा और न्यायालय अनुच्छेद 226 क े ह संविवदा क े विवविनर्षिदष्ट अनुपालन क े लिलए बाध्य नहीं कर सक ा र्थीा।

12. विफर भी प्रर्थीम प्रति वादी की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता ने कर्थीन विकया विक इस न्यायालय ने एल.आई.सी. ऑफ इंतिडया बनाम एस्कॉर्ट्सस लिलविमटेड [(1986) 1 एस.सी.सी. 264] क े मामले में एक अलग दृविष्टकोर्ण लिलया है, सिर्जासमें इस न्यायालय ारिर विकयाः (एस.सी.सी. पृष्ठ 344, प्रस् र 102) यविद राज्य द्वारा की गयी कारवाई संविवदात्मक दातियत्वों या अपक ृ त्य से उत्पन्न दातियत्वों से संबंति है, ब न्यायालय आम ौर पर इसकी र्जाां' नहीं कर सक ी है र्जाब क विक कारवाई में कु छ लोक विवति क े गुर्ण इससे संलग्न न हो। मोटे ौर पर, न्यायाल राज्य क े काय^ की र्जाां' ब करेगी यविद वे लोक विवति की परिरति क े ह आ े हैं और यविद वे विनर्जाी वैयविक्तक विवति क े क्षेत्र से संबंति है ब राज्य उन कारवाविहयों की उनकी र्जाां' नहीं करेगी। वैयविक्तक विवति क े क्षेत्र और लोक विवति क े क्षेत्र क े सीमांकन में कविठनाई होगी। सटीक ा क े सार्थी सीमांकन करना असंभव है और हम और ऐसा नहीं करेगें। प्रश्न को प्रत्येक मामले में विवशेर्ष कारवाई mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े संदभ में य विकया र्जााना 'ाविहए, सिर्जास गति विवति में राज्य या राज्य की सा न ा कारवाई कर े समय लगी हुई है, कारवाई का सावर्जाविनक कानून या विनर्जाीकानून 'रिरत्र और अन्य प्रासंविगक परिरस्थिस्र्थीति यों। र्जाब राज्य अर्थीवा उसका कोई अंग कॉरपोरेट र्जाग क े सार्थी व्यापार कर ा है और विकसी कम्पनी क े शेयर को खरीद ा है ब राज्य स्वयं को ऐसे शेयर ीरी को विमले सभी अति कारों क े सार्थी शेयर ारी क े सामान्य रोल और डान्स और रोब्स कल्पना की कर ा है इसक े पीछे कोई कारर्ण नहीं है विक अंश ारी क े रूप में राज्य से यह अपेक्षा की र्जाानी 'ाविहए विक वे अपना कारर्ण ब ाए र्जाब कम्पनी क े संकल्प क े माध्यम से प्रबं न में परिरव न करना 'ाह ा है, र्जाैसे अन्य अंश ारी कर े हैं।

13. हमें नहीं लग ा विक उपरोक्त मामले में यह न्यायालय विकसी भी रह से, यहां विदए गए मामले में पूव विनर्णयों में व्यक्त विकए गए दृविष्टकोर्ण से परे 'ला गया है। यह न्यायालय भार ीय र्जाीवन बीमा विनगम क े मामले में उस मामले क े थ्यों पर आगे बढ़ा और ारिर विकया विक रिरट याति'का क े माध्यम से कोई अनु ोर्ष आम ौर पर एक समुति' उप'ार नहीं हो सक ा है। यह विनर्णय प्रति पाविद नहीं कर ा है विक संविवदा क े मामलों में विकसी विनयम की भांति संविव ान क े ह प्रदत्त न्यायालय क े क्षेत्राति कार को बाहर कर विदया गया है। इसक े विवपरी, "न्यायालय सा ारर्ण या इसकी परीक्षा नहीं कर सक ा है र्जाब क विक कारवाई में क ु छ लोक विवति का गुर्ण संलग्न न हो" पद का प्रयोग स्वयं में संक े कर ा है विक विकसी विदए गए मामले में, अपेतिक्ष थ्यात्मक मैविट्रक्स क े होने पर ही संविव ान क े ह कोई उप'ार प्रदान विकया र्जााएगा। ब विवद्वान अति वक्ता ने इस न्यायालय द्वारा पारिर अन्य विनर्णय उ. प्र. राज्य बनाम वि¬र्जा एंड रूफ क ं पनी (इंतिडया) लिलविमटेड [(1996) 6 एस.सी.सी. 22] का अवलम्ब लिलया र्जाहां पर न्यायालय ने ारिर विकयाः इसक े अलावा, प्रश्नग संविवदा एक उपखण्ड़ विदया गया है सिर्जासमें अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी उपबंति है विक मामले को मध्यस्र्थीम को संदर्भिभ कर विववाद को सुलझाया र्जाा सक ा है। मध्यस्र्थीमय विवति संबं ी प्रश्नों क े सार्थी -सार्थी थ्य संबं ी प्रश्नों दोनों का विन ारर्ण कर सक े हैं। र्जाब संविवदा स्वयं ही संविवदा से उद्भू विववादों क े विनपटारा करने क े ढंग का उपबं कर ी है ब ऐसा कोई कारर्ण नहीं है विक पक्षकारों को उस उप'ार का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुसरर्ण और ग्रहर्ण नहीं करना 'ाविहए और अनुच्छेद 226 क े अ ीन उच्च न्यायालय की असा ारर्ण अति कारिर ा का आह्वान नहीं करना 'ाविहए। इस मामले में एक प्रभावी वैकस्थिल्पक उप'ार संविवदा में ही उपबंति है और न्यायालय क े लिलए एक अच्छा आ ार है विक वे अनुच्छेद 226 क े ह अपनी असा ारर्ण क्षेत्राति कार क े प्रयोग को मना कर दे।

14. हमारी राय में, प्रर्थीम प्रत्यर्थी4 द्वारा प्रस् ु क पर यह विनर्णय पुनः कोई मदद नहीं कर ा है विक संविवदा संबं ी मामलों में संविव ान क े ह उप'ार प्रदान नहीं विकया र्जाा सक ा है। उपरोक्त उद्धरर्ण से यह प ा 'ल ा है विक 'ूंविक उस मामले में संविवदा में मध्यस्र्थी ा संबं ी खंड र्जाुड़ा है इसलिलए न्यायालय ने संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह उप'ार प्रदान करने से मना कर विदया। हमने विवशेर्ष रूप से अपने समक्ष उपस्थिस्र्थी अपील क े पक्षकारों से पूंछ ाछ की है और हमें ब ाया गया है विक प्रश्नग संविवदा में मध्यस्र्थी ा संबं ी ऐसा कोई खंड नहीं है। यह सवविवविद है विक यविद विकसी विववाद क े पक्षकार मध्यस्र्थी ा द्वारा अपने विववाद को विनपटाने क े लिलए सहम हो गए र्थीे और यविद उस संबं में कोई करार हो ा है ब न्यायालय मध्यस्र्थी ा क े माध्यम से उप'ार विदये विबना विकसी अन्य उप'ार प्रदान करने की अनुमति नहीं प्रदान करेंगी र्जाब क विक विववाद क े दोनों पक्षकार विववाद सुलझाने क े लिलए अन्य रीक े पर सहम न हों। 'ूंविक प्रस् ु अपील में ऐसा नहीं है, इसलिलए वि¬र्जा एंड रूफ क ं पनी [(1996) 6 एस.सी.सी. 22] क े मामले में इस न्यायालय ने र्जाो विनष्कर्ष विनकाला वह प्रर्थीम प्रत्यर्थी4 द्वारा प्रस् ु क यह विक संविवदा संबं ी मामलों में रिरट याति'का पोर्षर्णीय नहीं है, की कोई मदद नहीं कर ा है।' 20.इस न्यायालय ने इस सिसद्धां को नोबल संसा न बनाम उड़ीसा राज्य और अन्य (2006) 10 एस.सी.सी. 236 (प्रस् र 15), भार ीय खाद्य विनगम और अन्य बनाम एस.ई.आई.एल. लिलविमटेड और अन्य (2008) 3 एस.सी.सी. 440 (प्रस् र 16), सेंट्रल बैंक ऑफ इंतिडया बनाम देवी इस्पा लिलविमटेड और अन्य (2010) 11 एस.सी.सी. 186 (प्रस् र 28) और सूय क ं स्ट्रक्शंस बनाम उ.प्र. राज्य और अन्य (2019) 16 एस.सी.सी. 794 (प्रस् र 3) क े मामलों में दृढ़ ा से अथिभविन ारिर विकया है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

21. डॉ. सिंसघवी द्वारा उद्धृ विनर्णय विकसी भी रह से पूव क्त सिसद्धां से कम र नहीं हैं। रा ाक ृ ष्र्ण अग्रवाल और अन्य बनाम विबहार राज्य और अन्य (1977) 3 एस.सी.सी. 457 ऐसा विनर्णय र्थीा सिर्जासमें पट्टे क े ह राज्य सरकार को देय रॉयल्टी की दरों में उसक े द्वारा संशो न और उक्त पट्टे को विनरस् ीकरर्ण क े विवरूद्ध दायर रिरट याति'को को पक्षकारों क े बी' हुए संविवदा द्वारा शासिस कहा गया, भार क े अनुच्छेद 14 क े प्राव ानों को आकर्षिर्ष करने क े लिलए राज्य कारवाई क े माध्यम से कोई अनुति' व्यवहार नहीं विकया र्जाा रहा है। इस रह क े सभी सवालों का विनपटारा दीवानी अदाल ों द्वारा विकया र्जााना है, न विक रिरट याति'काओं द्वारा, इस प्रस् ाव से स्पष्ट रूप से असं ोर्ष विकया गया है, क्योंविक इस फ ै सले क े बाद से 'काफी समस्या का समा ान हो 'ुका है', र्जाो आपा काल क े दौरान पारिर विकया गया र्थीा र्जाब व्यविक्तयों क े मौलिलक अति कारों को विनलंविब कर विदया गया र्थीा। इस प्रकार, वेरिरगामो नवीन बनाम आन्ध्र प्रदेश सरकार एवं अन्य (2001) 8 एस.सी.सी. 344, इस न्यायालय ने कहाः "21. इस प्रश्न पर विक सिर्जास उप'ार को उच्च न्यायालय से मांग की गयी है और उसक े द्वारा प्रदान विकया गया है वह विवशुद्ध रूप से संविवदा संबं ी क्षेत्र में उत्पन्न हो ी है और इसलिलए, उच्च न्यायालय को संविव ान क े ह अपनी शविक्त का प्रयोग नहीं करना 'ाविहए और वाई. एस. रार्जाा रेड्डी बनाम ए.पी. माइविंनग कॉपन लिलविमटेड [(1988) 2 ए एलटी 722] में आंध्र प्रदेश च्च न्यायालय क े विनर्णय और हर शंकर बनाम उप आबकारी और करा ान आयुक्त [(1975) 1 एस.सी.सी. 737], रा ाक ृ ष्र्ण अग्रवाल बनाम विबहार राज्य [(1977) 3 एस.सी.सी 457], रामलाल एंड संस बनाम रार्जास्र्थीान राज्य [(1976) 1 एस.सी.सी. 112], थिशव शंकर विमल्स बनाम हरिरयार्णा राज्य [1980 (2 एस.सी.सी. 437] रमना शेट्टी बनाम अं राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राति करर्ण [1979] और एस.सी.सी. 489 में इस न्यायालय द्वारा पारिर विनर्णयों का दृढ़ ापूवक अवलम्ब लेना 'ाविहए। यद्यविप रा ाक ृ ष्र्ण अग्रवाल प्रकरर्ण [(1977) 3 एस.सी.सी. 457] में उत्पन्न इस प्रकार का इस न्यायालय द्वारा पारिर विनर्णयों में से एक है सिर्जासमें संविवदा संबं ी क्षेत्र में न्यातियक समीक्षा से काफी विनष्कर्ष विनकाला र्जाा 'ुका है। सिर्जान मामलों में विनर्णय लेने वाले प्राति कारी ने अपनी वै ाविनक शविक्त से परे 'ले गये अर्थीवा ऐसी शविक्त क े प्रयोग में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्राक ृ ति क न्याय क े विनयमों अर्थीवा सिसद्धां ों का उ‰ंघन विकया अर्थीवा उनका विनर्णय विवकृ है अर्थीवा कोई कहीन आदेश पारिर विकया वहां पर इस न्यायालय ने पक्षकारों और सरकार एवं उसकी एर्जाेंसिसयों क े बी' संविवदा हो र्जााने क े बाद भी हस् क्षेप विकया है । हम द्वारकादास मारफति या एंड संस बनाम बम्बई बंदरगाह क े न्यासी बोड [(1989) 3 एस.सी.सी. 293], महाबीर ऑटो स्टोस बनाम इंतिडयन ऑयल कॉपन [(1990) 3 एस.सी.सी. 752] और श्रीलेखा विवद्यार्थी4 (क ु मारी) बनाम उ.प्र. राज्य [(1991) 1 एस.सी.सी. 212] क े मामले में पारिर इस न्यायालय क े ीन विनर्णयों उ‰ेख कर सक े हैं। र्जाहां पर संविवदा भंग में वै ाविनक दातियत्व का भंग शाविमल है, र्जाब वै ाविनक प्राति करर्ण द्वारा वै ाविनक शविक्त क े प्रयोग में आपलित्तर्जानक आदेश पारिर विकया गया, भले ही विववाद्य संविवदा से उत्पन्न अर्थीवा उससे संबंति है, इसको सावर्जाविनक विवति की परिरति में ले आ ा है क्योंविक वै ाविनक शविक्त का प्रयोग संविवदा से परे है। सरकार का विकसी क े सार्थी सिर्जासक े सार्थी वह 'ाहे व्यापार करने स्व ंत्र ा कशील ा और विनष्पक्ष ा क े सार्थी-सार्थी लोकविह की श ^ क े अ ीन हो ी है। विकसी संविवदा को करने क े प—ा, वै ाविनक प्राव ानों की श ^ क े ह, र्जाैसा विक व मान मामले में है, संविवदा को रद्द करने में ऐसा नहीं कहा र्जाा सक ा है विक मामला विवशुद्ध रूप से संविवदा संबं ी क्षेत्र क े ह आ ा है। इसलिलए, हम यह सुझाव देना उति' नहीं समझ े हैं विक प्रस् ु मामला विवशुद्ध रूप से संविवदा से उत्पन्न हो ा है और इसलिलए, संविव ान क े ह हस् क्षेप करने की प्रार्थीना नहीं विकया र्जाा ा है। यह क भी खारिरर्जा हो गया है। " (प्रभाव वर्ति )

22. ऋविर्ष विकरर्ण लॉसिर्जास्थिस्टक्स बनाम कांडला पोट एवं अन्य क े न्यासी बोड (2015) 13 एस.सी.सी. 233 क े मामले में, इस न्यायालय ने कहा विक अनुच्छेद 226 क े ह दायर रिरट याति'का 'ूंविक एक लोक विवति उप'ार है इसलिलए उसमें 'लोक विवति का त्व' उपस्थिस्र्थी होना 'ाविहए इससे पहले विक अनुच्छेद 226 को लागू विकया र्जााए - देखें प्रस् र 37 और 38 र्जाोशी टेक्नोलॉर्जाीर्जा इंटरनेशनल इंक बनाम भार संघ और अन्य (2015) 7 एस.सी.सी. 728 क े मामले में इस विवर्षय पर विवति का विवस् ृ रूप से प्रति पादन कर न्यायालय ने कहाः" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

69. इस प्रकार पूव क्त सिसद्धां ों में व्यक्त यह स्थिस्र्थीति को उस ''ा क े संदभ में समझना होगा सिर्जासका हमने ऊपर उ‰ेख विकया है इसक े अनुसार, इसमें कोई संदेह नहीं है, संविवदात्मक मामलों में भी रिरट याति'का की पोर्षर्णीया पर पूर्ण रोक नहीं है अर्थीवा र्जाहां थ्य संबं ी प्रश्न पर विववाद है अर्थीवा र्जाहां न संबं ी दावा भी विकया गया है। उसी समय यह उच्च न्यायालय क े विववेकाति कार पर है विक वह क ु छ परिरस्थिस्र्थीति यों क े ह ऐसा करने से मना कर सक ा है। ऐसा भी है विक न्यायालय विनम्नलिललिख परिरस्थिस्र्थीति यों में, "सामान्य ः", इस रह क े विववेकाति कार का प्रयोग नहीं करेगाः

69. 1. न्यायालय ब क इस मुद्दे की र्जाां' नहीं कर सक े गा र्जाब क इस कारवाई में क ु छ लोक विवति क े गुर्ण न हों।

69. 2. र्जाब संविवदा में विववाद क े विनपटारे का कोई विवथिशष्ट रीका उपबंति विकया र्जाा ा है, ो उच्च न्यायालय संविव ान क े अ ीन अपने विववेकाति कार का प्रयोग करने से इनकार कर देगा और पक्षकार से कहेगा विक वे करार में उपबंति रीक े से विववाद का विनपटारा करें, विवशेर्ष ौर से ब र्जाब माध्यस्र्थीम क े माध्यम से विववाद का विनपटारा विकया र्जााना हो। 22 69.3. यविद थ्य संबं ी विववाद क े बहु गंभीर प्रश्न मौर्जाूद हैं सिर्जानकी र्जाविटल प्रक ृ ति हो और उनक े विन ारर्ण क े लिलए मौलिखक साक्ष्य की आवश्यक ा हो।

69. 4. विवशेर्ष रूप से संविवदात्मक दातियत्वों से उत्पन्न होने वाले न संबं ी दावों को आम ौर पर असा ारर्ण परिरस्थिस्र्थीति यों को छोड़कर स्वीकार नहीं विकया र्जाा ा है।

70. इसक े अलावा, इस न्यायालय क े विवथिभन्न विनर्णयों से उत्पन्न विवति क स्थिस्र्थीति, र्जाो राज्य/सावर्जाविनक प्राति करर्ण द्वारा विनर्जाी पक्षकारों क े सार्थी विकए गए संविवदा से संबंति mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवथिभन्न स्थिस्र्थीति यों/पहलुओं से संबंति है, को संक्षेप में विनम्नानुसार प्रस् ु विकया र्जाा सक ा हैः

70. 1. संविवदा करने क े 'रर्ण में, राज्य क े क ृ त्य विवशुद्ध रूप से उसकी कायकारी क्षम ा में हो े हैं और विनष्पक्ष ा क े दातियत्वों से बं े हो े है।

70. 2. राज्य अपनी कायकारी क्षम ा में, संविवदात्मक क्षेत्र में भी, विनष्पक्ष रूप से काय करने क े लिलए बाध्य है और र्थीोडा़ भी भेदभाव नहीं कर सक ा है।

70. 3. उन मामलों में भी र्जाहां प्रश्न संविवदा से पूव 'ुनाव अर्थीवा प्रति स्प 4 दावों क े प्रति फल से संबंति है, संविव ान क े उ‰ंघन का सवाल उठने से थ्यों की र्जाां' कर उसे प ा लगाया र्जााना 'ाविहए। यविद वे थ्य विववाविद हैं और उसमें साक्ष्य का मूल्यांकन विकये र्जााने की आवश्यक ा है, सिर्जासकी शुद्ध ा का क े वल विवस् ृ साक्ष्य लेकर, गवाहों की परीक्षा और सिर्जारह कर सं ोर्षर्जानक परीक्षर्ण विकया र्जाा सक ा है ब इस मामले को संविव ान क े ह की कायवाही में सुविव ार्जानक या सं ोर्षर्जानक ढंग से य नहीं विकया र्जाा सक ा है। ऐसे मामलों में न्यायालय पीविड़ पक्ष को सिसविवल वाद आविद क े वैकस्थिल्पक उपाय का सहारा लेने का विनद–श दे सक ा है।

70. 4. संविव ान क े अ ीन उच्च न्यायालय की रिरट अति कारिर ा का आशय स्वेच्छा से उपग बाध्य ा से ब'ने क े लिलए सुकर बनाना नहीं र्थीा

70. 5. संविवदात्मक दातियत्व से ब'ने क े लिलए रिरट याति'का पोर्षर्णीय नहीं र्थीी। वाथिर्णस्थिज्यक कविठनाई का उत्पन्न होना, संविवदा अनुबंति की श ^ का अनुपालन कविठनाई अर्थीवा असुविव ा संविवदा की श ^ क े सार्थी उसका अनुपालन में कोई औति'त्य प्रदान नहीं कर सक ी है सिर्जासे पक्षकारों ने सो' विव'ार कर स्वीकार विकया र्थीा। यह कभी नहीं हो सक ा है विक एक आज्ञविप्त ारी आज्ञविप्त क े बगैर काय कर सक े र्जाब ऐसा करना उसक े लिलए लाभदायक होः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और यविद वह इसको अपने व्यवसाय क े सं'ालन क े लिलए व्यावसातियक रूप से अनथिभज्ञ पा े हैं ब वह उन श ^ को 'ुनौ ी दे सक े है सिर्जानक े ह वह लाइसेंस लेने क े लिलए सहम हुए र्थीे।

70. 6. आम ौर पर, र्जाहां अनुबं क े उ‰ंघन की थिशकाय की र्जाा ी है, ऐसे उ‰ंघन की थिशकाय करने वाला पक्ष अनुबं क े विवथिशष्ट प्रदशन क े लिलए मुकदमा कर सक ा है, यविद अनुबं विवशेर्ष रूप से प्रदशन करने में सक्षम है। अन्यर्थीा, पक्षकार क्षति पूर्ति क े लिलए वाद दायर कर सक ा है।

70. 7. रिरट वहां पर र्जाारी विकया र्जाा सक ा है र्जाहां कायकारी क ृ त्य विवति विवरूद्ध है या विकसी विनगम क े संबं में भी विवति क े समक्ष समान ा या कानून क े समान संरक्षर्ण से इनकार विकया र्जाा ा है अर्थीवा यविद यह दर्भिश विकया र्जाा सक ा है विक लोक प्राति कारी की कायवाही सुनवाई का अवसर विदये विबना और प्राक े सिसद्धां ों का उ‰ंघन र्थीा सिर्जासक े उपरान् यह ारिर विकया गया विक प्राक े सिसद्धान् ों का अवलोकन विकये विबना कायावाही नहीं की र्जाा सक ा है।

70. 8. यविद विनर्जाी पक्षाकार और राज्य/ ंत्र और/या राज्य की एर्जाेंसी क े बी' संविवदा विकसी प्राइवेट विवति क े ह है और उसमें लोक विवति का कोई त्व नहीं है ब आम ौर पर पीविड़ पक्षकार सामान्य नागरिरक विवति क े ह उप'ार प्रदान करे बर्जााय भार क े संविव ान क े ह उच्च न्यायालय रिरट दायर कर और न्यायालय से असा ारर्ण क्षेत्राति कार क े प्रयोग की मांग करे।

70. 9. राज्य क े सार्थी संविवदा में लोक विवति और प्राइवेट विवति क े बी' का अं र ुं ला हो रहा है। र्थीाविप, यह पूरी रह से ति रस्क ृ नहीं विकया गया है और र्जाहां मामला विवशुद्ध रूप से संविवदा क े प्राइवेट क्षेत्र से है इस न्यायालय ने कहा विक रिरट पोर्षर्णीय नहीं है। लोक विवति और प्राइवेट विवति क े अति कारों और उप'ारों क े बी' द्वंद्व प्रत्येक मामले क े थ्यों पर विनभर करेगा और लोक विवति और प्राइवेट विवति क े उप'ारों क े मध्य अन् र सटीक ा से सीमांकन नहीं विकया र्जाा सक ा है। वास् व में, प्रत्येक मामले की र्जाां' उसक े थ्यों क े आ ार पर की र्जाानी 'ाविहए 'ाहे पक्षकारों क े मध्य संविवदा संबं ी संबं ों में लोक विवति क े त्व मौर्जाूद हों। र्जाब विकसी मामले विवशेर्ष क े थ्यों से प ा 'ल ा है विक काय की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रक ृ ति अर्थीवा विववाद में लोक विवति क े त्व शाविमल हैं ब भार क े अनुच्छेद 226 क े ह रिरट याति'का क े माध्यम से उच्च न्यायालय इस मामले की र्जाां' कर सक ा है विक क्या राज्य या राज्य का ंत्र या एर्जाेंसी की कारवाई विनष्पक्ष, न्यायसंग और न्यायसंग है अर्थीवा प्रासंविगक कारकों पर विव'ार विकया गया है और विनर्णय लेने की प्रविक्रया में अप्रासंविगक कारक पर विव'ार नहीं विकया गया है अर्थीवा यह विनर्णय मनमाना नहीं है।

70. 10. विकसी नागरिरक की मात्र युविक्तयुक्त या विवति सम्म प्रत्याशा, ऐसी स्थिस्र्थीति में, अपने आप में एक अलग प्रव नीय अति कार नहीं हो सक ा है, लेविकन इस पर विव'ार करने और उसे उति' वर्जान देने में विवफल ा विनर्णय को मनमाने ढंग से प्रस् ु कर सक ी है, और इस रह से एक वै अपेक्षा क े उति' विव'ार की आवश्यक ाएं गैर-मनमानी क े सिसद्धां का विहस्सा बन ी हैं।

70. 11. संविवदात्मक दातियत्वों क े ह आने वाले विववादों क े संबं में न्यातियक समीक्षा का क्षेत्र अति क सीविम हो सक ा है और संविदग् मामलों में पक्षकारों को विवशुद्ध रूप से संविवदात्मक विववादों क े न्यायविनर्णयन क े लिलए प्रदत्त उपायों क े माध्यम से उनक े अति कारों को विनवासिस विकया र्जाा सक ा है।'

23. यह कहा र्जाा सक ा है विक प्रत्येक मामला सिर्जासमें कोई नागरिरक/व्यविक्त अपने मौलिलक अति कारों क े उ‰ंघन क े लिलए रिरट कोट क े दरवार्जाा खटखटा ा है, वह ऐसा मामला है सिर्जासमें एक 'लोक विवति का त्व' सतिन्नविह है र्जाो उन मामलों से थिभन्न क े वल संविवदा क े भंग और उसकी क्षति पूर्ति से संबंति हैं। र्जाब कभी राज्य क े विवरुद्ध प्राक े भंग की दलील दी र्जाा ी है यविद उक्त दलील पोर्षर्णीय है ब वह संविव ान में राज्य की मनमाना कारवाई है, र्जाो भार क े प्राव ानों को आकर्षिर्ष कर ी है- देखेंः नवाबखान अब्बासखान बनाम गुर्जारा राज्य (1974) 2 एससीसी 121 पैरा 7, इसलिलए व मान मामला एक ऐसा मामला है सिर्जासमें एक 'लोक विवति क े त्व' शाविमल है सिर्जासमें याति'काक ा (प्रत्यर्थी4-1) रिरट याति'का प्रस् ु रिरट न्यायालय का दरवार्जाा खटखटाया सिर्जासमें उसने न सुने र्जााने का आरोप लगाया और कहा विक सम्पू्र्ण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कायवाही सिर्जासक े 'ल े विनविवदा र्थीा उसका वाद खारिरर्जा कर विदया वह उसकी अनुपस्थिस्र्थी में थ्यों क े एकपक्षीय मूल्यांकन क े आ ार पर विकया गया।

24. डॉ. सिंसघवी ने सिर्जान अन्य विनर्णयों को अपने लिललिख कर्थीन में उद्धृ विकया वह इन थ्यों पर थिभन्न हैं, क्योंविक ये सभी लोक-विह मुकदमों अर्थीवा विनविवदा आवेदकों से संबंति है, सिर्जान्हें बदला र्जाा 'ुका है, उन्होंने अनुच्छेद 226 क े ह प्रस् ाविव परिरयोर्जाना क े लिखलाफ स्टे आदेश मांग कर े हुए रिरट कोट का दरवार्जाा खटखटा या हैं, सिर्जाससे काफी विवलंविब हो सक ा हैं और उसकी लाग बढ़ सक ी है र्जाो लोक विह क े विवरूद्ध है। यह इन स्थिस्र्थीति यों में है विक इस रह की रिरट याति'काओं को स्वीकार करने और अं रिरम आदेशों को पारिर करने से पू्व, रिरट कोट को परस्पर विवरो ी सावर्जाविनक विह ों का मूल्यांकन करने क े लिलए बहु साव ान रहना 'ाविहए, और क े वल भी हस् क्षेप करना 'ाविहए र्जाब रिरट याति'का को स्वीकार करने में लोक विह शाविमल हो। यह वही विनष्कर्ष है र्जाो रौनक इंटरनेशनल लिलविमटेड बनाम आई.वी.आर. क ं स्ट्रक्शन लिलविमटेड और अन्य (1999) 1 एस.सी.सी. 492 पैराग्राफ 11 से 13,24 और 25 क े मामले में अथिभविनर्ण[4] विकया गया र्थीा। इसी क े र्जाैसा प्रभाव रखने वाला विनर्णय र्जागदीश मंडल बनाम उड़ीसा राज्य और अन्य (2007) 14 एससीसी 517 पैरा 22 क े मामले में पारिर विकया गया है।

25. इसी रह, विमथिशगन रबर (इंतिडया) लिलविमटेड बनाम कनाटक राज्य और अन्य (2012) 8 एस.सी.सी. 216 क े मामले में न्यायालय द्वारा पारिर सवश्रेष्ठ विनर्णय पुनः रिरट कोट से संबंति है र्जाो सावर्जाविनक विह को ध्यान रख े हुए विनविवदा प्रदान विकये र्जााने में हस् क्षेप नहीं कर ा है। देखेंः पैराग्राफ 23 और 24। टाटा सेलुलर बनाम भार संघ (1994) 6 एस.सी.सी. 651 (प्रस् र 70 और 71), और रार्जास्र्थीान राज्य 26 हाउसिंसग बोड और अन्य बनाम र्जाी.एस. इन्वेस्टमेंर्ट्सस एंड अन्य (2007) 1 एस.सी.सी. 477 (प्रस् र 10) क े मामले में पारिर विनर्णय इस आशय क े हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

26. दोनों विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ताओं ने प्राक े सिसद्धान् सुने र्जााने क े अति कार पर 'ुप हो गये। डॉ. सिंसघवी ने क विदया विक यह न्यायालय क े हार्थीों में विदया गया कोई नम्य उपकरर्ण नहीं है, लेविकन यह फलदायी होगा र्जाहां पर कोई पूवाग्रह कारिर नहीं हो ा है और र्जाहां विकसी आदेश को अपास् करने क े लिलए यह कोई विनस्थिष्क्रय औप'ारिरक ा हो र्जााएगा, क्योंविक अथिभलेख पर मौर्जाूद सभी थ्यों को मान लिलया गया है सिर्जासमें प्रत्यर्थी4-1 द्वारा क ु छ भी र्जाोड़ा अर्थीवा घटाया नहीं र्जाा सक ा है। दूसरी ओर, श्री विद्ववेदी ने क विदया विक यह एक ऐसा मामला है र्जाहां पर उनक े मुववि¤ल को न सुनकर आदेश को पारिर विकये गये है और प्राक ृ ति क न्याय की पूरी ौर से अवहेलना विकया गया है सिर्जासक े परिरर्णामस्वरूप उनका मुववि¤ल को गंभीर रूप से पूवाग्रह कारिर हुआ है।

27. प्राक ृ ति क न्याय उ ना प्रा'ीन सिर्जान ा विक पृथ्वी पर र्जान्मा प्रर्थीम व्यविक्त -बाइविबल 'एडम' र्जाे.आर. लुकास ने अपनी पुस् क 'ऑन र्जास्थिस्टस' क े पृष्ठ 86 में कहा है: इसलिलए, क ृ त्य की सुनवाई कर े समय हम यह प ा 'ले विक विकसी व्यविक्त ने गल विकया, वहां पर ऐसे क की आवश्यक ा हो ी है विक हमें अशुद्ध अनुमान को ठीक करने क े लिलए कस्थिल्प प्रति विनति को अनुमति देनी 'ाविहए या उसको दोर्षी ठहराने वाले आशय को अस्वीकार या अन्यर्थीा कारवाई को अस्वीकार करना 'ाविहए। भगवान को एडम से प्रश्न करने की आवश्यक ा पड़ी 'क्या ुमने उस पेड़ को खा लिलया है सिर्जासको मैंने ुझको खाने क े लिलए कहा र्थीा विक इस पेड़ को ुझे नहीं खाना 'ाविहए?' क्योंविक यह र्जारूरी र्थीा विक एडम को ब क दोर्षी नहीं ठहराया र्जााना 'ाविहए या उसे दंतिड नहीं विकया र्जााना 'ाविहए र्जाब क विक उसने उसी काम को नहीं विकया हो। अगर उसने साक्ष्य विदया हो ा या अगर उसने एडम को इस गल फहमी क े ह खाने क े लिलए उकसाया हो ा विक यह अन्य अत्यक्त वृक्ष से आया र्थीा ब एडम ने पाप नहीं लग ा और उसे ईडन से बाहर नहीं विनकाला र्जााना 'ाविहए र्थीा। यविद क े वल अथिभयुक्त आरोप स्वीकार कर ा है या आरोप का सामना कर ा ब अथिभयुक्त अपने आ'रर्ण को विकसी अन्य रीक े से दृढ़ ापूवक ब ा नहीं कर सक ा है, क्या हम ार्षिकक रूप से विनष्कर्ष विनकाल क े अति कारी है सिर्जासको अथिभयुक्त ने वास् व में विकया।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

28. इस न्यायालय द्वारा पूव में पारिर विनर्णयों में क ु छ में प्राक ृ ति क न्याय की अवहेलना को अपने आप में प्रभाविव व्यविक्त क े प्रति पूवाग्रह से ग्रसिस माना गया और पू्रवाग्रह क े साक्ष्य, प्राक ृ ति क न्याय की अवहेलना का स्व ंत्र साक्ष्य अनावश्यक माना गया। इस विनयम का एकमात्र अपवाद वहां उत्पन्न हो ा है र्जाहां "स्वीक ृ या विनर्षिववाद" थ्यों पर क े वल एक विनष्कर्ष संभव हो ा है, और कानून क े ह क े वल एक दंड अनुमन्य हो ा है। ऐसे मामलों में, न्यायालय प्राक े पालन को बाध्य करने क े लिलए रिरट र्जाारी नहीं कर सक ा है, इसलिलए नहीं विक प्राक ृ ति क न्याय का पालन करना आवश्यक नहीं है, बस्थिल्क इसलिलए विक न्यायालय ऐसे रिरट र्जाारी नहीं कर े हैं र्जाो 'विनरर्थीक' हैं - देखें एस.एल. कपूर बनाम र्जागमोहन और अन्य (1980) 4 एस.सी.सी. 379 पैरा 24। पी. डी. अग्रवाल बनाम भार ीय स्टेट बैंक और अन्य (2006) 8 एस. सी. सी. 776 वाले मामले में न्यायालय ने यह म व्यक्त विकया विक विवति इस कर्थीन में "व्यापक परिरव न" आया है, र्जाो इस प्रकार हैः

39. इस न्यायालय का विवविन—य एस. एल. कपूर बनाम र्जागमोहन [(1980) 4 एस. सी. सी. 379], र्जाहां पर श्री राव ने यह प्रति वाद करने क े लिलए दृढ़ विवश्वास व्यक्त विकया विक प्राक े सिसद्धां का पालन न करने से स्वयं प्रति क ू ल प्रभाव पड़ ा है या इसे "क्योंविक इससे प्रति क ू ल प्रभाव पड़ ा है" नहीं पढ़ा र्जााना 'ाविहए, प्रस् ु मामले में लागू हुआ नहीं कहा र्जाा सक ा है। प्राक े सिसद्धां, र्जाैसा विक ऊपर उ‰ेख विकया गया है, व्यापक परिरव न से गुर्जारा है। स्टेट बैंक ऑफ पविटयाला बनाम एस.क े. शमा [(1996) 3 एस.सी.सी. 364] और रार्जाेंद्र सिंसह बनाम मप्र राज्य [(1996) 5 एस.सी.सी. 460] में इस न्यायालय क े विनर्णयों क े दृविष्टग विवति का सिसद्धां यह है विक क ु छ वास् विवक पूवाग्रह थिशकाय क ा को कारिर हुआ होगा। न्यायालय अपने इस अव ारर्णा से हट 'ुका है विक र्थीोड़े से उ‰ंघन से आदेश में शून्य ा आ र्जााएगी। सुने र्जााने का अति कार का सिसद्धां /सिसद्धां, उन मामलों क े बी' एक स्पष्ट अं र का प्रति पादन विकया गया है र्जाहां पर कोई सुनवाई नहीं हुई र्थीी और उन मामलों में र्जाहां सिसद्धां का क े वल कनीकी उ‰ंघन र्थीा।न्यायालय प्रत्येक मामले और परिरस्थिस्र्थीति यों क े आ ार पर न्यायालय प्राक े सिसद्धां ों को लागू कर ा है। यह मामले क े प्रासंविगक थ्यों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और परिरस्थिस्र्थीति यों का संदभ क े विबना विनवा में लागू नहीं हो ा है। यह कोई अविनयंवित्र घोड़ा नहीं है। इसे बां कर नहीं रखा र्जाा सक ा।"

29. समान रूप से, प्राक े ही उ‰ंघन से परे र्जाो पूवाग्रह कारिर हुआ है ऐसे मामले में मौर्जाूद नहीं कहा र्जाा सक ा है सिर्जासमें थ्य स्वीकार विकये गये हों। इस प्रकार, क े.एल. वित्रपाठी बनाम भार ीय स्टेट बैंक और अन्य (1984) 1 एस.सी.सी. 43 क े मामले में, न्यायालय ारिर विकयाः"

29. हमारी राय है विक श्री गग सही हैं विक प्राक े विनयम र्जाैसा विक हमने ए द्पूव विन ारिर विकया है, वह दोर्षी अति कारी को आरोपों क े संबं में सबू देने या अपने विवरूद्ध लगाये गये आरोपों से इनकार करने का अवसर प्रदान कर े हैं। दूसरे, उन्होंने प्रस् ु विकया विक भले ही विनयमों में कोई वै ाविनक बल नहीं र्थीा और भले ही पाट[4] ने अनुबं से खुद को बाध्य विकया हो, र्जाैसा विक उन्होंने कम'ारी विनयम को स्वीकार विकया र्थीा, एक वै ाविनक विनगम क े सार्थी कोई अनुबं नहीं हो सक ा है र्जाो प्राक ृ ति क सिसद्धां ों का उ‰ंघन है विकसी कम'ारी की सेवा समाप्त करने से संबंति घरेलू र्जाां' क े मामलों में न्याय। हम इस संबं में श्री गग क े मूल प्रस् ुति करर्ण सहम हैं, लेविकन हम पा े हैं विक सिर्जान प्रासंविगक विनयमों को हमने ए द्पूव विन ारिर विकया है, उनका अनुपालन विकया गया है, भले ही उन विनयमों को पढ़ा र्जााए विक प्राक ृ ति क न्याय की आवश्यक ाओं को उक्त विनयमों में विनविह विकया गया र्थीा या यहां क विक यविद प्राक े ऐसे बुविनयादी सिसद्धां ों को विनविह विकया गया र्थीा, ो इस मामले में पारिर आदेश क े संबं में प्राक े सिसद्धां ों का कोई उ‰ंघन नहीं हुआ है। विकसी आदेश क े संबं में सिर्जासमें भार ीय स्टेट बैंक की रह सांविवति क विनगमों क े विकसी अति कारी अर्थीवा कम'ारी क े विवरूद्ध प्रति क ू ल अर्थीवा दण्ड़ात्मक परिरर्णाम विनविह है ब प्राक े सिसद्धान् ों क े अनुरूप परिरस्थिस्र्थीति यों की अपेक्षाओं से संग उन आरोपों की र्जाां' की र्जाानी 'ाविहए र्जाहां क वह विकसी विवशेर्ष परिरस्थिस्र्थीति क लागू हो े र्थीे। इसलिलए 'ाहे प्राक े विकसी विवशेर्ष सिसद्धां का उ‰ंघन विकया गया है या नहीं, आरोपों की प्रक ृ ति, ऐसी र्जाां' को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA शासिस करने वाली वै ाविनक या प्रासंविगक विनयमों की पृष्ठभूविम में की गई र्जाां' की प्रक ृ ति का आँकलन विकया र्जााना 'ाविहए । यहां प्राक ृ ति क न्याय का उ‰ंघन सिर्जास पर आपलित्त उठायी गयी वह यह र्थीी विक उन्हें उन थ्यों का खण्ड़न करने का अवसर नहीं विदया गया सिर्जान्हें उनकी अनुपस्थिस्र्थीति में एकत्र विकया गया र्थीा। र्जाैसा विक र्जाे. आर. लुकास द्वारा ऑन र्जास्थिस्टस में विकया गया है, प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां मूल रूप से, यविद हम ऐसा कहें, ो वास् विवक वाक्यांश "ऑडी अल्टेरम पाटम" से विनकल ा है, सिर्जासे पहली बार सेंट ऑगस्टीन (डी डुबस एविनमबस, XIV, 22 र्जाे.पी.विमगने, पी.एल. 42,110) द्वारा विवरति' विकया गया र्थीा। xxx xxx xxx

32. यह मूल अव ारर्णा प्रशासविनक, न्यातियक या अ -न्यातियक कारवाई में साम्यपूर्ण है। कारवाई में साम्या की अव ारर्णा पाक्षकारों क े बी' विवशेर्ष विववाद पर, यविद कोई हो, विनभर करना 'ाविहए। यविद उस व्यविक्त की विवश्वसनीय ा संदेहास्पद है सिर्जासने गवाही दी है या कु छ र्जाानकारी दी है, या यविद उस व्यविक्त का कर्थीानक या बयान विववादास्पद है, ो प्रति परीक्षा का अति कार अविनवाय रूप से कारवाई में विनष्पक्ष होना 'ाविहए लेविकन र्जाहां थ्यों क े बारे में कोई विववाद नहीं है, लेविकन उन परिरस्थिस्र्थीति यों क े क ु छ उदाहरर्ण हैं र्जाहां पर विनष्पक्ष कारवाई को उति' ठहराने क े लिलए प्रति परीक्षा की आवश्यक ा नहीं है। र्जाब थ्यों संबं ी प्रश्न पर कोई विववाद नहीं र्थीा, ो विकसी आदेश से पीविड़ पक्षकार को कोई वास् विवक पूवाग्रह कारिर नहीं हुआ है, प्रति परीक्षा का विकसी भी औप'ारिरक अवसर का न विदया र्जााना अपने आप में न्यायालय द्वारा पारिर विनर्णय को अवै या दूविर्ष करार नहीं दे ा है। यह बहु ा ब हो ा है र्जाब पक्षकार सिर्जासक े विवरूद्ध कोई आदेश पारिर विकया गया है वह उन थ्यों पर विववाद नहीं कर ा है और संस्करर्ण की सत्य ा या बयान की विवश्वसनीय ा का परीक्षर्ण करने की मांग नहीं कर ा है।

33. र्जाो पक्षकार अपनी अनुपस्थिस्र्थीति में एकत्र रिरकॉड या गवाही से प्राप्त साक्ष्यों की सत्य ा पर प्रति वाद नहीं करना 'ाह ा है, वह विकसी भी बाद की मांग में सफल होने की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उम्मीद नहीं कर सक ा है विक सिर्जारह का कोई अवसर मुख्य ः ब नहीं विदया गया र्थीा र्जाब इसकी मांग नहीं विकया गया र्थीा और बयानों की सत्य ा पर कोई विववाद नहीं र्थीा। र्जाहां थ्यों क े बारे में कोई विववाद नहीं है, या विववाविद थ्यों पर कोई बल नहीं डाला र्जाा ा है, लेविकन उन क ृ त्यों का स्पष्टीकरर्ण मात्र, ऐसे मामलों में सिर्जारह न विकया र्जााने से कोई पूवाग्रह कारिर नहीं हो ा है।' (प्रभाव वर्ति )

30. इसी रह, उ.प्र. राज्य बनाम नीरर्जा अवस्र्थीी और अन्य (2006) 1 एस.सी.सी. 667 क े मामले में, इस न्यायालय ने कहा विक यह विनर्षिववाद है विक र्जाहां विवति में काटछांट वै होगा वहां प्राक े सिसद्धां ों को आकर्षिर्ष नहीं विकया र्जााएगा, र्जाब क विक उससे क ु छ दोर्ष न हो सिर्जासने पूवाग्रह कारिर होगाः

47. यविद कम'ारी उ.प्र. औद्योविगक विववाद अति विनयम क े ह कामगार हैं ो वे इसक े अति विनयम क े ह संरतिक्ष हैं। उ. प्र. औद्योविगक विववाद विनयमों क े विनयम 42 और 43 में यह प्राव ान है विक उ.प्र औद्योविगक विववाद अति विनयम की ारा 6-एन क े प्राव ानों क े संदभ में विकसी भी छंटनी को प्रभावी बनाने से पूव संबंति कम'ारी एक महीने क े नोविटस या उसक े बदले में एक माह का वे न और क्षति पूर्ति क े ौर पर प्रत्येक वर्ष की समाविप्त पर पन्द्रह विदनों की मर्जादूरी क े क े हकदार होंगे। यविद औद्योविगक विववाद अति विनयम क े ह इस रह की छंटनी विकया र्जाा ा है ो प्राक े सिसद्धां ों क े अनुपालन का प्रश्न ही नहीं उठेगा। प्राक ृ ति क न्याय का सिसद्धां भी आकर्षिर्ष होगा र्जाब कु छ व्यविक्तयों की दण्ड़स्वरूप उनकी सेवा समाप्त कर विदया र्जााए ए द्द्वारा कलंक र्जाुड़ा हो ा है।

48. विववेका नंद सेठी बनाम अध्यक्ष, र्जाम्मू-कश्मीर बैंक लिलविमटेड़ [(2005) 5 एस.सी.सी. 337] (एस.सी.सी. पृष्ठ 345, पैरा 22) मामले में विनम्नानुसार अथिभविनर्ण[4] विकया गयाः

22. स्पष्ट है प्राक ृ ति क न्याय का सिसद्धां कोई बेलगाम घोड़ा नहीं है। र्जाब थ्यों को स्वीकार विकया र्जाा ा है, ो एक र्जाां' मर्जाह एक औप'ारिरक ा होगी। विवबं का सिसद्धान् भी लागू होगा। [देखेंः गुरर्जाीवन गरेवाल (डा.) बनाम डॉ. सुविमत्रा दाश (2004) 5 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एस.सी.सी. 263] प्राक े सिसद्धां ों का थ्यों और परिरस्थिस्र्थीयों क े अनुक ू ल होना 'ाविहए। इस सिसद्धान् सी े नहीं लगाया र्जाा सक ा है। इसे मामले क े प्रासंविगक थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों संदभ क े विबना हवा में लागू नहीं विकया र्जाा सक ा है।"

49. इसलिलए, उच्च न्यायालय को यह कहना होगा विक उसने यह कहकर विवति में गल ी पारिर विकया विक प्राक े सिसद्दान् का अनुपालन अपेतिक्ष र्थीा।'

31. प्रबं विनदेशक, ई.सी.आई.एल. और अन्य बनाम बी. कर्णक ु मार और अन्य (1993) 4 एस.सी.सी. 727 क े मामले में पां' न्याया ीशों की खंडपीठ ने अनुच्छेद 311 (2) क े ह प्रस् ु रिरपोट की संवै ाविनक आवश्यक ा पर ''ा करने क े उपरान् विनम्नानुसार ारिर विकयाः

30. इस प्रकार सिर्जान आकस्थिस्मक प्रश्नों को उठाया गया है उसका उत्तर इस प्रकार विदया र्जाा सक ा हैः xxx xxx xxx अगले प्रश्न सिर्जासक उत्तर विदया र्जााना है वह यह विक दंड क े आदेश पर क्या प्रभाव पड़ ा है र्जाब र्जाां' अति कारी की रिरपोट कम'ारी को नहीं प्रदान विकया र्जाा ा है और ऐसे मामलों में उसे क्या राह दी र्जाानी 'ाविहए। इस प्रश्न का उत्तर दी गई सर्जाा क े सापेक्ष होना 'ाविहए। र्जाब कम'ारी को बखास् कर विदया र्जाा ा है या सेवा से हटा विदया र्जाा ा है और कम'ारी को र्जाां' रिरपोट न विदये र्जााने क े कारर्ण र्जाां' खत्म कर विदया र्जाा ा है, ो क ु छ मामलों में र्जाां' रिरपोट न करने से उसे गंभीर रूप से पूवाग्रह हो सक ा है र्जाबविक अन्य मामलों में अस्थिन् म रूप से उसको दी गयी सर्जाा पर इससे कोई फक नहीं पड़ सक ा है। अ ः सभी मामलों में पूव वे न क े सार्थी कम'ारी की बहाली का आदेश देना न्याय प्रर्णाली को मशीनीक ृ करना है। युविक्तयुक्त अवसर सिसद्धां और प्राक े सिसद्धां ों को विवति क े शासन को बनाए रखने और विकसी व्यविक्त को उसक े न्यायपूर्ण अति कारों की पुविष्ट करने में मदद करने क े लिलए विवकसिस विकया गया है। इन सिसद्दान् को सभी अवसरों न ो मंत्रों की रह आह्वान कर सक े हैं न ही कमकाण्ड़ की रह प्रयोग कर सक े हैं। 'ाहे कम'ारी को रिरपोट न विदये र्जााने का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कारर्ण वास् व में उसक े सार्थी पूवाग्रह कारिर पक्षपा हुआ है अर्थीवा नहीं, इसको प्रत्येक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों पर विव'ार विकया र्जााना 'ाविहए। इसलिलए, रिरपोट प्रस् ु करने क े बाद भी, कोई अलग परिरर्णाम नहीं विनकलेगा, यविद कम'ारी को काय पर बहाल करने और सभी अनुर्षांविगक लाभ विदलाने को अनुज्ञा विकया र्जाा ा है ो न्याय विवक ृ हो र्जााएगा। इससे बेईमान और दोर्षी पुरस्क ृ हो र्जााएगा और इस प्रकार न्याय की अव ारर्णा को अ ार्षिकक और उत्तेर्जाक सीमाओं क 'ली र्जााएगी। इससे 'प्राक ृ ति क न्याय क े अप्राक ृ ति क विवस् ार' हो र्जााएगा र्जाो अपने आप में न्याय विवरो ी है।

31. अ ः, उन सभी मामलों में र्जाहां र्जाां' अति कारी की रिरपोट अनुशासनात्मक कायवाही में दोर्षी कम'ारी को नहीं दी र्जाा ी है और यविद ऐसी र्जाां' रिरपोट उस कम'ारी को अदाल /विट्रब्यूनल में आने से नहीं प्राप्त हुई है ो न्यायालय और न्यायाति करर्ण रिरपोट की प्रति पीविड़ कम'ारी को विदलवाया र्जााएगा और कम'ारी को यह ब ाने का अवसर प्रदान करेगा विक क ै से र्जाां' रिरपोट न विदये र्जााने से उसक े सार्थी पूवाग्रह कारिर हुआ। यविद पक्षकारों को सुनने क े उपरान्, न्यायालय/विट्रब्यूनल इस विनष्कर्ष पर पहुं' ा है विक रिरपोट नहीं विदये र्जााने से अस्थिन् म विनष्कर्ष और और सर्जाा में कोई अन् र नहीं पड़ ा है, ो न्यायालय/विट्रब्यूनल को दण्ड़ादेश में हस् क्षेप नहीं करना 'ाविहए। न्यायालय/विट्रब्यूनल को यांवित्रक रूप से इस आ ार पर दण्ड़ादेश को अपास् नहीं करना 'ाविहए विक र्जाां' रिरपोट नहीं विदया गया र्थीा र्जाैसा विक दुभाग्यवश व मान में विकया र्जाा रहा है। अदाल ों को शॉट कट से ब'ना 'ाविहए। 'ूंविक यह वही न्यायालय/विट्रब्यूनल हैं र्जाो उन प्रश्न पर अपने न्यातियक विववेक को लागू कर और दण्ड़ादेश को अपास् करने या न करने क े कारर्ण ब ाये, (और कोई आं रिरक अपीलीय या पुनरीक्षर्ण प्राति कारी नहीं), ऐसी स्थिस्र्थीति में यह नहीं कहा र्जाा सक ा है विक प्राक े सिसद्धां का उ‰ंघन हुआ और सुनवाई का अवसर नहीं विदया गया है। यह क े वल भी हो ा है र्जाब न्यायालय/अति करर्ण यह पा ा है विक रिरपोट प्रस् ु करने से उस मामले क े विनष्कर्ष में अं र आ र्जाा ा विक उस दंण्ड़ादेश को न्यायालय को अपास् कर देना 'ाविहए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

32. बी. करुर्णाकर (सुप्रा) का अनुसरर्ण इस न्यायालय द्वारा हरिरयार्णा विवत्तीय विनगम और अन्य बनाम 21. बी. करुर्णाकर [(1993) 4 एस.सी.सी. 727] में विन ारिर अनुपा से यह पूर्णरूपेर्ण स्पष्ट है विक प्राक े सिसद्धां र्जाां' अति कारी से अपेक्षा कर ा है विक वह र्जाां' रिरपोट की एक प्रति दोर्षी व्यविक्त को उपलब् कराये यविद र्जाां' अति कारी अनुशासनात्मक प्राति करर्ण से थिभन्न है। र्जाां' अति कारी की रिरपोट क े र्जाां' रिरपोट न विदया र्जााना स्पष्ट कर ा है विक प्राक ृ ति क न्याय का उ‰ंघन हुआ है। लेविकन यह भी उ ना ही स्पष्ट है विक र्जाां' अति कारी की एक रिरपोट की आपूर्ति करने में विवफल ा क े कारर्ण कायवाही को शून्य और शून्य घोविर्ष विकया र्जााएगा और सर्जाा का आदेश गैर स्र्थीा और अप्रभावी होगा। दोर्षी कम'ारी न्यायालय से प्रार्थीना कर साविब करे विक ऐसी रिरपोट क े नहीं विदये र्जााने से पूवाग्रह कारिर हुआ र्थीा और न्याय विवफल हो गया र्थीा। यविद वह उस विंबदु पर अदाल को सं ुष्ट करने में असमर्थी है, ो दण्डादेश स्व ः अपास् हो र्जााएगा।"

33. यहां यह उ‰ेख करना आवश्यक है विक न्यायालय या विट्रब्यूनल विन ारिर करे विक पूवाग्रह कारिर हुआ है अर्थीवा नहीं, न विक एकपक्षीय थ्यों का मूल्यांकन कर कोई प्राति कारी। इसकी अच्छे से व्याख्या प—ा व 4 विनर्णय मपाल सत्यपाल लिलविमटेड बनाम उपायुक्त क ें द्रीय उत्पाद शुल्क, गौहाटी और अन्य (2015) 8 एस.सी.सी. 519 क े मामले में विकया गया है, सिर्जासमें इस न्यायालय ने कई विनर्णय विन ारिर करने क े उपरान् विनम्नलिललिख विनष्कर्ष विनकालाः

38. लेविकन यह मामले का अं नहीं है। र्जाबविक सुने र्जााने क े सिसद्धान् क े ह विवति ऊपर उसि‰लिख रीक े से विवकास विकया है उसी समय न्यायालय ने भी बार-बार विटप्पर्णी विकया है विक प्राक े सिसद्धां बहु ल'ीले सिसद्धां हैं। इसको सी े ौर पर लागू नहीं विकया र्जाा सक ा है। यह सब उस पर विनभर कर ा है सिर्जास प्रकार से काय विकया गया है और सिर्जास सीमा क विकसी व्यविक्त क े प्रभाविव होने की संभावना है। इस कारर्ण से क ु छ परिरस्थिस्र्थीति यों में उक्त सिसद्धान् ों क े लिलए कति पय अपवादों को लागू विकया गया है। र्जाैसे अदाल ों ने माना है विक विकसी व्यविक्त को प्रति विनति त्व करने की अनुमति देना पयाप्त होगा और सभी मामलों में मौलिखक सुनवाई आवश्यक नहीं हो सक ी है, र्थीाविप mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क ु छ मामलों में, मामले की प्रक ृ ति क े आ ार पर, न क े वल पूर्ण रूप से मौलिखक सुनवाई लेविकन गवाहों की सिर्जारह को भी प्राक े सिसद्धां ों का एक आवश्यक अंग माना र्जाा ा है। इसी रह, अनुशासनात्मक कारवाई क े ह माध्यम से बड़ी सर्जाा से संबंति सेवा मामलों में, यह अपेक्षा और भी सख् है और पूर्ण सुनवाई का अति कार वै ाविनक विनयमों क े ह भी उपबंति विकया गया है। दूसरी ओर, उन मामलों में र्जाहां आरोप स्वीक ृ हैं, भले ही ऐसी कोई औप'ारिरक र्जाां' नहीं की गयी है विफर भी इस प्रकार स्वीकृ ति क े आ ार पर सर्जाा को बरकरार रखा गया है। यह इस कारर्ण से है, क ु छ परिरस्थिस्र्थीति यों में, विक बाद की विनर्णायक सुनवाई पर भी अनुमति प्रदान की र्जाा ी है। इसक े अति रिरक्त, अदाल ों ने माना है विक क ु छ परिरस्थिस्र्थीति यों में प्राक े सिसद्धां ों को समय, स्र्थीान, आशंविक ख रे आविद र्जाैसे विवविव कारकों क े कारर्ण भी अपवर्जिर्जा विकया र्जाा सक ा है।

39. व मान मामले में इन पहलुओं से हमारा कोई सरोकार नहीं है क्योंविक यह विवर्षय कारवाई करने से पूव नोविटस विदये र्जााने से संबंति है। इस बा पर र्जाोर दे े हुए विक प्राक े सिसद्धां ों को सी े ौर पर लागू नहीं विकया र्जाा सक ा है, उपरोक्त उदाहरर्ण विदए गए हैं। हमने प्राक े सिसद्धां ों का पालन करने क े न्यायशास्त्रीय आ ार पर प्रकाश डाला है र्जाो प्रविक्रयात्मक विनष्पक्ष ा क े सिसद्धां, सामान्य सामासिर्जाक लक्ष्यों की ओर ले र्जााने वाले परिरर्णाम की सटीक ा इत्याविद पर आ ारिर हैं, विफर भी, ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यां हो सक ी हैं सिर्जानमें विकसी कारर्ण से -शायद क्योंविक उस व्यविक्त क े विवरूद्ध वह साक्ष्य पूरी रह से मर्जाबूर करने वाला माना र्जाा ा है - ऐसा माना र्जाा ा है विक विनष्पक्ष सुनवाई से 'कोई फक नहीं पड़ेगा'- सिर्जासका अर्थी है विक ऐसी सुनवाई उस विनर्णय में न्यायालय ने र्जाो अंति म विनष्कर्ष विनकाला है उसमें फ े रबदल नहीं करेगी -विफर ऐसी सुनवाई को करने की कोई विवति क बाध्य ा नहीं है। म‰ो' बनाम एबरडीन कॉपन [(1971) 1 डब्ल्यू.एल.आर. 1578] क े मामले में लॉड विवल्बरफोस ने ऐसे दृविष्टकोर्ण का समर्थीन कर कहा र्जाो विनम्नव हैः (डब्ल्यू.एल.आर. पृष्ठ संख्या 1595)"... प्रविक्रया का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उ‰ंघन न्यायालयों में विकसी उप'ार क े ौर उठाया नहीं र्जाा सक ा है, र्जाब क विक इसक े पीछे कोई ऐसा त्व न र्जाो विवफल हो 'ुका है। अदाल व्यर्थी काम नहीं कर ी है।" इन विटप्पथिर्णयों का अवलम्ब लेकर ¬ैंडन एलर्जाे ने सिसनमंड बनाम वि¬विटश एयरपोट अर्थीॉरिरटी [(1980) 1 डब्ल्यू.एल.आर. 582] क े मामले में कहा विकः (डब्ल्यू.एल.आर. पृष्ठ 593)" ऐसी स्थिस्र्थीति यों में, विनष्पक्ष प्रविक्रयाएं कोई उद्देश्य पूरा नहीं कर ी हैं क्योंविक उस व्यविक्त क े सार्थी इस रह क े उप'ार क े विबना 'सही' परिरर्णाम प्राप्त विकया र्जाा सक ा है।

40. इस संबं में, हमें अन्य अपवाद पर ध्यान देने की आवश्यक ा है सिर्जासे न्यायालयों द्वारा पूव क्त सिसद्धां पर उत्कीर्ण विकया गया है। यविद न्यायालय द्वारा भी यह पाया र्जाा ा है विक प्राक े सिसद्धां ों का उ‰ंघन विकया गया है, न्यायालयों ने माना है विक यह आवश्यक नहीं है विक कारवाई को समाप्त कर विदया र्जााए और इस मामले को उन प्राति कारिरयों क े पास वापस भेर्जाा र्जााए र्जाो उन मामलों में प्रविक्रयात्मक अपेक्षाओं का अनुपालन करने क े उपरान् नये सिसरे से विनर्णय लें र्जाहां पर उस व्यविक्त क े विवरूद्ध पूवाग्रह कारिर हुआ है सिर्जासे सुनवाई का अवसर नहीं प्रदान विकया गया है। इसलिलए, प्राक ृ ति क न्याय क े अनुसार प्रत्येक उ‰ंघन से यह विनष्कर्ष नहीं विनकल सक ा है विक र्जाो आदेश पारिर विकया गया है वह हमेश शून्य हो ा है। आदेश की वै ा 'पूवाग्रह' क े आ ार पर य करना होगा। अंति म परीक्षर्ण हमेशा वही रह ी है र्जाैसे पूवाग्रह का परीक्षर्ण या विनष्पक्ष सुनवाई का परीक्षर्ण। xxx xxx xxx

42. र्जाहां क सही वहां क ठीक है। हालाँविक, श्री सोराबर्जाी ने सिर्जास महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया वह यह है विक क्या यह विनर्णय करने वाले प्राति कारी पर है विक वह प्राकृ ति क न्याय क े सिसद्धान् ों को इस आ ार पर छोड़ दे विक सुनवाई का अवसर देने से विनर्णय में कोई खास अन् र नहीं पड़ेगा? इसे अन्यर्थीा लेने क े लिलए, क्या प्रशासविनक प्राति करी स्वयं यह य करक े नोविटस विदये र्जााने की आवश्यक ा को छोड़ सक ा है विक उस व्यविक्त को कोई पूवाग्रह कारिर नहीं होगा सिर्जासक े विवरूद्ध कारवाई शुरू विकया गया है? उत्तर नकारात्मक होगा। प्राति कारी को इस आ ार पर प्राक े सिसद्धां ों क े अनुपालन की अवज्ञा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने की अनुमति नहीं है विक यविद सुनवाई का अवसर प्रदान विकया गया हो ा ो कोई उपयोगी परिरर्णाम नहीं विनकल ा। सुनवाई का अवसर उस उद्देश्य की पूर्ति करेगा या नहीं इस बा को बड़े स् र पर विव'ारिर विकया र्जााना 'ाविहए और इसका अनुमान प्राति कारी द्वारा नहीं लगाया र्जाा सक ा है। यह अंग्रेर्जाी न्यायालय द्वारा वर्ष 1943 में र्जानरल मेतिडकल काउंसिसल बनाम स्पेकमैन, 1943 ए.सी. 627 में अथिभविनर्ण[4] विकया गया। इस न्यायालय ने बोड ऑफ हाई स्क ू ल एंड इंटरमीतिडएट एर्जाुक े शन बनाम ति'त्रा श्रीवास् व 1970 (1) एस.सी.सी. 121 क े मामले में भी यही बा दोहरायी र्जाैसा विनम्नलिललिख शब्दों से स्पष्ट हैः (एस.सी.सी. पृष्ठ 123, पैरा 7)

7. अपीलक ा क े विवद्वान अति वक्ता श्री सीबी अग्रवाल का क है विक थ्यों पर विववाद नहीं हैं और यह स्पष्ट है विक यविद बोड ने याति'काक ा पर कारर्ण ब ाओ नोविटस विदया हो ा ो कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं विनकल ा। उनका कहना है विक इन परिरस्थिस्र्थीति यों क े दृविष्टग बोड क े लिलए कारर्ण ब ाओ नोविटस र्जाारी करना आवश्यक नहीं र्थीा। हम इस क को स्वीकार करने में असमर्थी हैं। क्या र्जाुमाना लगाने से पहले कारर्ण ब ाओ नोविटस र्जाारी करने क े लिलए विकसी मामले विवशेर्ष में कोई क व्य उत्पन्न हो ा है, यह प्राति करर्ण की सं ुविष्ट पर विनभर नहीं कर ा है विक दंतिड विकए र्जााने वाले व्यविक्त को कोई ब'ाव का अवसर नहीं विमला है, लेविकन उस पर र्जाो आदेश पारिर विकया र्जााना र्जााना प्रस् ाविव है।'

43. पूव क्त प्रति पाविद विवति क े दृविष्टग, श्री सोराबर्जाी ने र्जाो क विदया है वह भी सही हो विक प्राति कारी इस अनुमान पर प्राक े सिसद्धां ों की आवश्यक ा इस आ ार पर नहीं त्याग सक ा है विक अपीलार्थी4 क े सार्थी कोई पूवाग्रह कारिर होने वाला नहीं है क्योंविक आर.सी. ंबाक ू [(2005) 7 एससीसी 725] क े मामले में पारिर विनर्णय ने अपीलक ा क े लिलए सारे रास् े बंद कर विदये हैं।

44. सार्थी ही, इस बा से भी इनकार नहीं विकया र्जाा सक ा है विक र्जाहां क न्यायालयों का प्रश्न है, वे इस बा पर विव'ार करने क े लिलए सशक्त हैं विक मामले को वापस लौटाने से क्या कोई उद्देश्य सिसद्ध होगा, यह ध्यान में रख े हुए विक क्या सिर्जास व्यविक्त क े विवरूद्ध mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कायवाही विकया गया है उसको पूवाग्रह कारिर हुआ है। इसे ई.सी.आई.एल. में ही विनम्नलिललिख शब्दों में स्पष्ट विकया गया र्थीाः (एस.सी.सी. पृष्ठ 758, पैरा 31)

31. अ ः, उन सभी मामलों में र्जाहां र्जाां' अति कारी की रिरपोट अनुशासनात्मक कायवाही में दोर्षी कम'ारी को प्रदान नहीं की र्जाा ी है वहां अदाल ों और न्यायाति करर्णों को रिरपोट की प्रति दुःखी कम'ारी को विदलवाना 'ाविहए यविद न्यायालय/विट्रब्यूनल आने से पूव उस कम'ारी ने इस र्जाां' रिरपोट को नहीं प्राप्त है और उस कम'ारी को यह विदखाने का अवसर नहीं विमला है र्जाां' रिरपोट नहीं विदये र्जााने से उसको पूवाग्रह कारिर हुआ। यविद पक्षों को सुनने क े बाद, अदाल /न्यायाति करर्ण इस विनष्कर्ष पर पहुं' ा है विक रिरपोट नहीं विदये र्जााने क े कारर्ण अस्थिन् म विनष्कर्ष और र्जाो दण्ड़ विदया गया उस पर कोई अन् र नहीं आएगा ो अदाल /विट्रब्यूनल को दण्ड़ादेश में हस् क्षेप नहीं करना 'ाविहए। अदाल /विट्रब्यूनल को यांवित्रक रूप से इस आ ार पर दण्ड़ादेश को अपास् नहीं करना 'ाविहए विक रिरपोट प्रस् ु नहीं विकया गया र्थीा र्जाैसा विक व मान में अफसोसर्जानक रूप से विकया र्जाा रहा है। अदाल ों को शॉट कट से ब'ना 'ाविहए। 'ूंविक यह वही अदाल ें/विट्रब्यूनल हैं र्जाो उन प्रश्न पर अपने न्यातियक विववेक को लागू करेंगे और दण्ड़ादेश को अलग करने या न करने क े अपने कारर्ण देंगे, (और कोई आं रिरक अपीलीय या पुनरीक्षर्ण प्राति कारी नहीं), ो न ो प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां कोई उ‰ंघन होगा और न ही युविक्तयुक्त अवसर का प्रत्याख्यान। यह क े वल भी है र्जाब अदाल /विट्रब्यूनल को पा ा है विक रिरपोट प्रस् ु करने से मामले में परिरर्णाम में अं र हो र्जााएगा ब न्यायालय को दण्ड़ादेश को अपास् कर देना 'ाविहए।"

45. पूव क्त सिसद्धां ों को ध्यान में रख े हुए, र्जाब हमें प ा 'ले विक प्राक े सिसद्धां ों का उ‰ंघन हुआ है, ो हमें एक और प्रश्न पर विव'ार करना होगा विक क्या अपीलक ा को कारर्ण ब ाओ नोविटस र्जाारी करने क े उपरान् मामले उस प्राति कारी क े पास नये सिसरे से वसूली योग्य राथिश की मांग करने में विकसी उद्देश्य की पूर्ति होगी। व मान मामले क े थ्यों में, हम पा े हैं विक आर.सी. ंबाक ू [(2005) 7 एस.सी.सी. 725] में इस न्यायालय द्वारा विन ारिर विवति क े संबं में ऐसी कायवाही का कोई म लब नहीं है।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

34. स्टेट बैंक ऑफ पविटयाला और अन्य बनाम एस.क े. शमा (1996) 3 एस.सी.सी. 364 में, इस न्यायालय की एक खंडपीठ ने 'पयाप्त अवसर' और 'विबल्क ु ल भी अवसर नहीं' क े बी' अं र विकया, और कहा विक 'पूवाग्रह' का अपवाद विवशेर्ष रूप से आगे क े मामलों में लागू हो ा है। यह विनर्णय कानून क े प्रविक्रयात्मक और मौलिलक प्राव ानों की भी बा कर ा है र्जाो प्राक े सिसद्धां ों को मू रूप दे े हैं, र्जाब प्रक ृ ति क न्याय का उ‰ंघन विकया र्जाा ा है, ो इस उ‰ंघन से वादकारी को र्जाो पूवाग्रह कारिर हुआ उससे उसको विनम्नव राह प्रदान विकया र्जााना 'ाविहएः

32. अब, पूवव 4 पैरा में र्जाो हमने उदाहरर्ण विदया है उस पर आ े हैं, ो क्या दण्ड़ादेश और उप-खंड (iii) क े पूव क्त उ‰ंघन क े आ ार पर पूरी र्जाां' को अपास् करना न्याय विह में होगा या विनर्षे होगा? हमारी राय में यह न्याय देने से इंकार करना होगा। न्याय का अर्थी है दोनों पक्षों क े बी' न्याय करना। न्याय विह में समान रूप से अपेक्षा हो ी है विक दोविर्षयों को दंतिड विकया र्जााना 'ाविहए और कनीकी और अविनयविम ाएं र्जाो न्याय की विवफल ा का कारर्ण नहीं बन ी है उनको न्याय को विवफल करने क े लिलए अनुमति नहीं प्रदान विकया र्जाा ा है। प्राक े सिसद्धां न्याय अर्थी न्याय क े उद्देश्यों की प्राविप्त है। उन्हें बहु विवपरी उद्देश्य प्राप्त करने क े लिलए विवक ृ नहीं विकया र्जाा सक ा है। यह एक प्रति -उत्पादक काय होगा।

33. हम उपरोक्त ''ा से उत्पन्न सिसद्धां ों को संक्षेप में प्रस् ु कर सक े हैं। (यह सिसद्दान् विकसी भी रह से पूर्ण नहीं है और इसमें कम'ारी क े विवरूद्ध विनयोक्ता द्वारा अनुशासनात्मक र्जाां' कर र्जाो दण्ड़ादेश विदया गया है यह उसक े दृविष्टग विवकसिस हुआ है): (1) विनयमों/विवविनयमों/वै ाविनक प्राव ानों का उ‰ंघन कर अनुशासनात्मक/विवभागीय र्जाां' क े परिरर्णामस्वरूप विकसी कम'ारी पर दंड अति रोविप कर र्जाो आदेश पारिर विकया वह स्व ः नहीं समाप्त हो र्जााएगा। न्यायालय या विट्रब्यूनल को यह र्जाां' करनी 'ाविहए विक (क) सिर्जास प्राव ान उ‰ंघन विकया गया है क्या उसकी प्रक ृ ति मौलिलक है या (ख) क्या इसकी प्रक ृ ति प्रविक्रयात्मक है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (2) मौलिलक उपबं का यर्थीापूव क्त क े सार्थी अनुपालन करना होगा और मौलिलक अनुपालन का सिसद्धां या पूवाग्रह का परीक्षर्ण ऐसे मामलों में लागू नहीं होगा। 39 (3) प्रविक्रयात्मक प्राव ान क े उ‰ंघन की दशा में विनम्नलिललिख स्थिस्र्थीति हैः प्रविक्रयात्मक प्राव ान आम ौर पर दोर्षी अति कारी/कम'ारी को युविक्तयुक्त और पयाप्त अवसर प्रदान करने क े लिलए हो े हैं। वे आम ौर पर उनक े विह में समझी र्जाा ी है। विकन्ही और प्रत्येक प्रविक्रयात्मक प्राव ान का उ‰ंघन स्व ः र्जाां' या पारिर आदेश को दूविर्ष नहीं कर ा है। "सू'ना का न विदया र्जााना", "अवसर का न प्रदान विकया र्जााना" और "सुनवाई का अवसर न विदया र्जााना" प्रवग^ क े अ ीन आने वाले मामलों क े सिसवाय, प्रविक्रयात्मक उपबं क े अति क्रमर्ण की थिशकाय को पू्वाग्रह क े दृविष्टकोर्ण से र्जाां' विकया र्जााना 'ाविहए, अर्थीा ्, क्या इस प्रकार का उ‰ंघन दोर्षी अति कारी/कम'ारी को उति' और प्रभावी रूप से अपना ब'ाव करने में पूवाग्रह कारिर हुआ है। यविद यह पाया र्जाा ा है विक उसे इ ना पूवाग्रविह कारिर हुआ है, ो पूवाग्रह को उप'ारिर करने क े लिलए समुति' आदेश पारिर विकया र्जााना 'ाविहए सिर्जासमें र्जाां' और/या दण्ड़ादेश को अपास् विकया र्जााना सस्थिम्मलिल है। यविद इससे कोई पूवाग्रह कारिर नहीं हुआ है ो स्पष्ट है विकसी भी हस् क्षेप की मांग नहीं विकया र्जाा सक ा है। इस संबं में, यह ध्यान विदया र्जााना 'ाविहेए विक क ु छ प्रविक्रयात्मक प्राव ान हो सक े हैं सिर्जानकी प्रक ृ ति मौलिलक है और सिर्जानका उ‰ंघन स्वयं पूवाग्रह का प्रमार्ण है। न्यायालय ऐसे मामलों में पूवाग्रह का साक्ष्य प्रस् ु करने पर र्जाोर नहीं दे सक ा है। र्जाैसा विक उस विनर्णय में ब ाया गया है, ऐसे मामले पर विव'ार करें र्जाहां प्राव ान स्पष्ट रूप से उपबं कर ा है विक विनयोक्ता/सरकार का साक्ष्य लेने क े उपरान् कम'ारी को अपना साक्ष्य रखकर ब'ाव का अवसर प्रदान विकया र्जााएगा, और इस मामले में दोर्षी कम'ारी द्वारा मांग विकये र्जााने पर भी र्जाां' अति कारी वह अवसर नहीं दे ा है। पूवाग्रह स्वयं में स्पष्ट है। इस मामले में र्जाो पूवाग्रह कारिर हुआ उसक े साक्ष्य मांग करने की आवश्यक ा नहीं है। पुनः यह परीक्षर्ण एक प्रकार का पूवाग्रह है र्जाैसे क्या उस व्यविक्त को सभी 'ीर्जाों पर विव'ार कर विनष्पक्ष सुनवाई का अवसर विमला है। अब,यविद कोई इ ना झुका है ो इसी दृविष्टकोर्ण को विनद–शकीय और अविनवाय प्राव ानों क े दृविष्टकोर्ण से भी देखा र्जाा सक ा है। इसक े ह सिर्जास सिसद्धां की ''ा विकया गया है (4) इसी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दृविष्टकोर्ण को लेने का अन्य रीका विदया गया है अलग या अलग सिसद्धां नहीं है। (4) (क) प्रविक्रयात्मक प्राव ान क े इस मामले में, र्जाो आज्ञापक स्वरूप का नहीं है, इस सिसद्धान् क े भंग को उस विबन्दु से र्जाां' विकया र्जााना 'ाविहए र्जाहां से इसका अनुपालन आवश्यक है। वही होगा र्जाो हो सक ा है, विकसी प्राव ान क े उ‰ंघन में र्जाो आदेश पारिर विकया गया क े वल वहां अपास् विकया र्जाा सक ा है र्जाहां इस प्रकार भंग से दोर्षी कम'ारी को पूवाग्रह कारिर हुआ है। (ख) प्रविक्रयात्मक उपबं क े अति क्रमर्ण क े मामले में, र्जाो आज्ञापक स्वरूप का है, यह प ा लगाया र्जााना 'ाविहए विक क्या उपबं उस व्यविक्त क े विह में परिरकस्थिल्प विकया गया है र्जाो लोकविह में कायवाही कर ा है। यविद यह पहले वाला हो, ो यह देखा र्जााना 'ाविहए विक क्या दोर्षी अति कारी ने अथिभव्यक्त रूप से या अपने आ'रर्ण द्वारा उक्त अपेक्षा को छोड़ विदया है। यविद पाया र्जाा ा है विक उसने इसे छोड़ विदया है, ो दण्ड़ादेश को उक्त उ‰ंघन क े आ ार पर अपास् नहीं विकया र्जाा सक ा है। दूसरी ओर, यविद यह पाया र्जाा ा है विक दोर्षी अति कारी/कम'ारी ने इसे छोड़ा नहीं है या यह विक वह प्राव ान उसक े द्वारा छोड़ा नहीं र्जाा सक ा र्थीा, ो बी. करुर्णाकर [(1993) 4 एस.सी.सी. 727 में संविव ान पीठ द्वारा अपनाए गए दृविष्टकोर्ण को ध्यान में रखकर न्यायालय या विट्रब्यूनल को उति' विनद–श देना 'ाविहए (सिर्जासमें दण्ड़ादेश का अपास् विकया र्जााना शाविमल है)। अंति म र्जाां' हमेशा समान हो ा है, अर्थीा, पूवाग्रह अर्थीवा विनष्पक्ष सुनवाई का परीक्षर्ण, र्जाैसा विक इसे कहा र्जाा सक ा है। (5) र्जाहां र्जाां' विकसी विनयम/विवविनयम/वै ाविनक प्राव ानों द्वारा शासिस नहीं है और एकमात्र दातियत्व प्राक े सिसद्धां ों का पालन करना है - या, उस मामले क े लिलए, र्जाहां भी ऐसे सिसद्धां ों को आदेश/कारवाई क े स्वभाव और प्रभाव द्वारा विनविह विकया र्जाा ा है-न्यायालय या न्यायाति करर्ण को प्राक े क ु ल उ‰ंघन (सुनवाई क े अति कार का विनयम) और उक्त विनयम क े एक पक्ष क े उ‰ंघन क े बी' अं र करना 'ाविहए, र्जाैसा विक विनर्णय क े मुख्य भाग में ब ाया गया है। दूसरे शब्दों में, "कोई अवसर नहीं" और पयाप्त अवसर नहीं, अर्थीा "सू'ना नहीं"/"सुनवाई नहीं" और "विनष्पक्ष सुनवाई नहीं" क े बी' अं र विकया र्जााना 'ाविहए। (क) पहले वाले मामले में र्जाो आदेश mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पारिर विकया वह विनस्संदेह अमान्य होगा (कोई इसे 'शून्य' या अशक्त ा कह सक ा है यविद कोई 'ुन ा है)। ऐसे मामलों में, आम ौर पर, प्राति कारी को विवति क े अनुसार कायवाही करने क े लिलए स्व ंत्र ा होगी, अर्थीा, उक्त विनयम क े अनुसार (सुनवाई का अति कार)। (बी) लेविकन बाद क े मामले में, उ‰ंघन क े प्रभाव (सुनवाई क े अति कार क े विनयम क े एक पक्ष का) को कारिर पूवाग्रह क े शुरुआ ी विबन्दु से र्जाां' करना होगा; दूसरे शब्दों में, न्यायालय या विट्रब्यूनल को र्जाो देखना है वह यह है विक क्या परिरस्थिस्र्थीति यों की समग्र ा में, दोर्षी अति कारी/कम'ारी ने विनष्पक्ष सुनवाई का अवसर विमला है अर्थीवा नहीं और र्जाो आदेश पारिर विकये र्जााएंगे वह उक्त प्रश्न क े उत्तर पर विनभर करेंगे। [यह स्पष्ट विकया र्जाा ा है विक यह सिसद्धां (सं. 5) पक्षपा क े विवरुद्ध विनयम क े मामले में लागू नहीं हो ा है, वह परीक्षर्ण सिर्जासकी ओर अन्यत्र अव ारिर विकया गया है।] (6) सुनवाई क े अति कार (प्राक ृ ति क न्याय का प्रार्थीविमक सिसद्धां ) क े विनयम को लागू कर े समय न्यायालय/न्यायाति करर्ण/प्राति करर्ण को उक्त विनयम क े अं र्षिनविह अंति म और अति भावी उद्देश्य को हमेशा ध्यान में रखना 'ाविहए र्जाैसे न्यायालय विनष्पक्ष सुनवाई सुविनति— करे और यह सुविनति— करे विक न्याय विवफल नहीं हुआ है। यह वह उद्देश्य है र्जाो उनक े सामने आने वाली विवथिभन्न स्थिस्र्थीति यों में उस विनयम को लागू करने में उनका मागदशन करना 'ाविहए। (7) ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यां हो सक ी हैं र्जाहां राज्य या र्जान ा क े विह सुने र्जााने क े अति कार क े विनयम को सीविम कर सक े हैं। ऐसी परिरस्थिस्र्थीति यों में, न्यायालय को प्राक ृ ति क न्याय की अपेक्षा क े सार्थी सावर्जाविनक/राज्य विह को सं ुलिल करना होगा और एक समुति' विनर्णय करना होगा।"

35. एम.सी. मेह ा बनाम भार संघ और अन्य (1999) 6 एस.सी.सी. 237 क े मामले में, र्जागमोहन (उपरोक्त) क े मामले में विन ारिर "स्वीक ृ और विनर्षिववाद थ्य" अथिभव्यविक्त, इस पर विदल'स्प अन् र विक क्या पूवाग्रह क े "मामूली साक्ष्" या "वास् विवक संभावना" को विदखाना आवश्यक है, या यह थ्य विक यह एक "खुला और बंद मामला" है, सभी पर विवस् ार से ''ा की गई र्थीी र्जाो विनम्नानुसार हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

16. न्यायालयों को प्राक े विनयमों क े उ‰ंघन और राह देने से इनकार करने क े न्यायालय क े विववेक क े बी' कभी-कभी दुविव ा का सामना नहीं करना पड़ ा है, भले ही प्राक े विनयमों का उ‰ंघन विकया गया हो, इस आ ार पर विक प्रभाविव पक्ष को कोई वास् विवक पूवाग्रह कारिर नहीं हुआ है। xxx xxx xxx

22. इस विववाद क े अंति म पक्षों पर र्जााने से पूव, हम यह ब ाना 'ाहेंगे विक प्राक क े उ‰ंघन से संबंति मामले वहां भी हो े हैं र्जाहां सभी थ्यों को स्वीकार नहीं विकया र्जाा ा है या सभी पर विववाद नहीं हो ा हैं। उन मामलों क े संदभ में अनेक विव'ारर्णीय विवति क मामले और साविहत्य है र्जाो इस बा से संबंति हैं विक क्या उप'ार प्रदान करने से इनकार विकया र्जाा सक ा है, भले ही न्यायालय यह सो' ी हो विक आवेदक का मामला 'वास् विवक विवर्षय' में से नहीं आ ा है या उसकी सफल होने कोई पयाप्त संभावना नहीं है या विवपरी परिरर्णाम नहीं विनक े लगा, भले ही प्राक े सिसद्धान् का पालन विकया र्जााए। देखेंः मालो' बनाम एबरडीन कॉपन [(1971) 1 डब्ल्यू.एल.आर. 1578] ( लॉड रीड और लॉड विवल्बरफोस क े अनुसार), लिग्लन बनाम कील विवश्वविवद्यालय [(1971) 1 डब्ल्यू.एल.आर. 487], सिसनमोंड बनाम वि¬विटश एयरपोट अर्थीॉरिरटी [(1980) 1 डब्ल्यू.एल.आर. 582] और अन्य मामले र्जाहां ऐसा दृविष्टकोर्ण प्रति पाविद विकया गया है। इस म का नवीन म परिरव न आर. बनाम ईलिंलग मसिर्जास्ट्रेट न्यायालय, भू पूव पी. फन्नारान [(1996) 8 एडमन एल. आर. 351,358] ( ए.डी.एम. एन. एल. आर.(पृष्ठ 358 ) (देखेंः डी स्थिस्मर्थी, अनुपूरक पृष्ठ 89) (1998) र्जाहां स्ट्रॉटन, एल. र्जाे. ने अथिभविन ारिर विकया विक "संदेह से परे होना स्पष्ट" होना 'ाविहए विक परिरर्णाम थिभन्न हो ा लॉड वूल्फ इन लॉयड बनाम मैकमोहन [(1987) 2 डब्ल्यू. एल. आर. 821,862] (पृष्ठ 862 पर डब्ल्यू. एल. आर.) ने भी प्राक े भंग क े कति पय मामलों में विववेकाति कार क े प्रयोग से इनकार नहीं विकया है। र्थीाविप, मैककार्थी4 बनाम ग्रांट [1959 एन र्जाेड एल आर 1014] मामले में न्यूर्जाीलैण्ड का न्यायालय आ े विनष्क ्र र्ष पर पहुं' र्जाा ा है र्जाब वह कह ा है विक (पक्षपा क े मामले में) आवेदक क े लिलए यह दर्भिश करना mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पयाप्त है विक पक्षपा की "वास् विवक संभावना है-विनति— ा नहीं" दूसरी रफ, गानर एडविमविनस्ट्रेविटव लॉ (8 वीं संस्करर्ण, 1996, पृष्ठ 271-72) का कहना है विक परिरर्णाम अलग हो ा इसका र्थीोड़ा सा सबू पयाप्त है। क क े दूसरे पक्ष में, हमारे पास रिरर्जा बनाम बाल्डविवन [1964 एसी 40], मेगरी, र्जाे. इन र्जाॉन बनाम रीस [(1969) 2 डब्ल्यूएलआर 1294] क े अलावा यह कह े हुए विक हमेशा "खुले और बंद मामले" हो े हैं और पूवाग्रह क े सबू का कोई पूर्ण विनयम विन ारिर नहीं विकया र्जाा सक ा है। गुर्ण अदाल क े लिलए नहीं बस्थिल्क विव'ार करने क े लिलए प्राति करर्ण क े लिलए हैं। एक्नर, र्जाे. ने कहा है विक "बेकार औप'ारिरक ा सिसद्धां " एक ख रनाक है और हालांविक, असुविव ार्जानक, प्राक का पालन विकया र्जााना 'ाविहए। उनक े आति पत्य ने देखा विक "सुविव ा और न्याय अक्सर बोलने की श ^ पर नहीं हो े हैं"। हाल ही में लॉड विंबगहाम ने छह कारर्ण ब ाकर आर. वी. टेम्स वैली पुलिलस फोस–र्जा क े 'ीफ कांस्टेबल, एक्स पी कॉटन [1990 आई.आर.एल.आर. 344] क े मामले में "अनुपयुक्त औप'ारिरक ा" सिसद्धां की आलो'ना विकया है। (उनक े द्वारा विवरति' लेख "क्या सावर्जाविनक विवति उप'ार विववेका ीन होना 'ाविहए" 1991 पी. एल. पी. 64 को भी देखेंः) "अनुपयुक्त और'ारिरक ा का सिसद्धान् " विवस् ृ और प्रभावी आलो'ना काफी पहले कनाडा क े प्रो. डी. ए'. क्लाक द्वारा "ने'ुरल र्जास्थिस्टस सबस्टैंस एण्ड़ शैड़ो" प्रति पाविद विकया गया है सिर्जासमें उन्होंने कहा विक मलो' (देलिखए 1975 पी. एल., पृष्ठ 27-63) यह प्रति वाद कर े हुए विक म‰ो' [(1971) 1 डब्ल्यू. एल. आर. 1578] और लिग्लन [(1971) 1 डब्ल्यू. एल. आर. 487] का गल विवविन—य विकया गया र्थीा। फौल्क्स (प्रशासविनक विवति, 8 वां संस्करर्ण, 1996, पृष्ठ 323), क्र े ग (प्रशासविनक विवति, ीसरा संस्करर्ण पृष्ठ 596) और अन्य ब ा े है विक नीति -विनर्णय करने वाले प्राति कारी क े विवविन—य पर न्यायालय को पूवाग्रह नहीं करना 'ाविहए, डी स्थिस्मर्थी (5 वां संस्करर्ण, 1994, प्रस् र 10.031 से 10.036) में कह े हैं विक हलांविक अब भी न्यायालय विकसी एक दृविष्टकोर्ण पर क ें विद्र नहीं है भले ही न्यायालय क े पास विववेकाति कार की शविक्त हमेशा रही है। वेड (प्रशासविनक विवति, 5 वां संस्करर्ण, 1994, पृष्ठ 526-30) कह े है विक विनरर्थीक रिरट र्जाारी नहीं की र्जाा सक ी है, विनर्णय की प्रक ृ ति क े अनुसार अं र विकया र्जााना है। इस प्रकार, स्वीक ृ या विनर्षिववाद थ्यों से संबंति मामलों क े अलावा अन्य मामलों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े संबं में, इस म में काफी अं र है विक क्या आवेदक को यह साविब करने क े लिलए मर्जाबूर विकया र्जाा सक ा है विक परिरर्णाम उसक े पक्ष में आ र्जााए या उसे उस मामले क े सार त्व को साविब करना होगा या यविद वह सफल ा की 'वास् विवक संभावना' साविब कर सक ा है या यविद यविद सफल होना दुष्कर हो ा ो भी वह उप'ार प्राप्त करने का हकदार है। र्थीाविप, हम यह उ‰ेख कर सक े हैं विक ऐसे मामलों में भी, र्जाहां सभी थ्य स्वीकार नहीं विकए र्जाा े हैं या विववाद से परे हैं, ो वहां पयाप्त संग ा हो ा है विक न्यायालय अपने "विववेकाति कार" का प्रयोग कर प्राक ृ ति क न्याय का पालन नहीं विकए र्जााने पर भी, परमादेश, प्रति र्षे लेख, उत्प्रेक्षर्ण या व्यादेश र्जाारी करने से मना कर सक ा है भले प्राक े सिसद्धान् कापालन नहीं विकया गया है। हम यह भी कह सक े हैं विक स्टेट बैंक ऑफ पविटयाला बनाम एसक े शमा [(1996) 3 एस.सी.सी. 364], रार्जाेंद्र सिंसह बनाम म.प्र. राज्य [(1996) 5 एस.सी.सी. 460] ऐसे अन्य मामले भी हैं र्जाहां है वै ाविनक प्राव ानों क े संबं में सू'ना अपेतिक्ष है ो उन मामलों क े बी' अं र विकया र्जााना है र्जाहां प्राव ान व्यविक्तग लाभ क े लिलए है और र्जाहां प्राव ान सावर्जाविनक विह की रक्षा क े लिलए है। पूव मामले में, इसे माफ विकया र्जाा सक ा है र्जाबविक उत्तराद्ध क े मामले में, इसे माफ नहीं विकया र्जाा सक ा है.

23. हम "अनुपयुक्त औप'ारिरक ा" क े सिसद्धां की शुद्ध ा या अन्यर्थीा पर कोई राय व्यक्त नहीं करना 'ाह े हैं और मामले को विनर्णय क े लिलए विकसी उपयुक्त मामले पर छोड़ दे े हैं, क्योंविक, हमारे समक्ष र्जाो मामला है, "स्वीक ृ र विनर्षिववाद" थ्य यह विदखा े हैं विक रिरट पर अनुमति प्रदान करना व्यर्थी होगा र्जाैसा विक न्यायमूर्ति ति'न्नाप्पा रेड्डी ने विकया है।

36. अलीगढ़ मुस्थिस्लम विवश्वविंवद्यालय और अन्य बनाम मसूर अली खान (2000) 7 एस.सी.सी. 529 क े मामले में, पूव क्त प्राति कारिरयों पर अवलम्ब लिलया गया, और र्जाो उत्तर विदया गया वह यह र्थीा विक कोई पूर्ण विनयम नहीं है, और प्रत्येक मामले क े थ्यों क े आ ार पर पूवाग्रह दर्भिश विकया र्जााना 'ाविहए र्जाो इस प्रकार हैः"

24. यह सिसद्धां विन ारिर विकया गया है विक प्राक े उ‰ंघन क े अलावा, पूवाग्रह को भी साविब विकया र्जााना 'ाविहए। क े एल वित्रपाठी बनाम भार ीय स्टेट बैंक [(1984) 1 एस.सी.सी. 43] क े मामले में न्यायमूर्ति सब्यसा'ी मुखर्जा4 (र्जाैसा विक वह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ब र्थीे) ने यह सिसद्धां भी प्रति पाविद विकया विक प्राक ृ ति क न्याय का उ‰ंघन मात्र हीं नहीं बस्थिल्क वास् विवक पूवाग्रह (सू'ना न विदये र्जााने क े अति रिरक्त) नोविटस) को साविब करना र्थीा। वेड्स एडविमविनस्ट्रेविटव लॉ (5 वें संस्करर्ण, पृष्ठ 472-75) को उद्धृ कर े हुए देखा गया र्जाो इस प्रकार हैः (एस.सी.सी. पृष्ठ 58, प्रस् र 31)"[I] यह संभव नहीं है विक कठोर विनयम प्रति पाविद विकये र्जााएं कब प्राक े सिसद्धां विकस क्षेत्र क विकस विकस सीमा क लागू विकये र्जाा े हैं। थिशकाय क ा को अवश्य ही क ु छ पूवाग्रह कारिर हुआ होगा, प्राक े कनीकी उ‰ंघन क े अलावा कोई ऐसी 'ीर्जा मौर्जाूद नहीं है। प्राक े सिसद्धान् की अपेक्षाएं उस मामले की थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों पर विनभर होनी 'ाविहए र्जाैसे र्जाां' की प्रक ृ ति, वे विनयम सिर्जानक े ह विट्रब्यूनल कायवाही कर रही है, वे विवर्षयवस् ु सिर्जासका विनपटारा विकया र्जााना है इत्याविद। इस न्यायालय ने ब से लगा ार कई मामलों में पूवाग्रह क े इस सिसद्धां को लागू विकया है। उपरोक्त विनर्णय और कई अन्य विनर्णयों को स्टेट बैंक ऑफ पविटयाला बनाम एसक े शमा [(1996) 3 एस.सी.सी. 364] में विवस् ृ रूप से संदर्भिभ विकया गया है सिर्जासमें समान दृविष्टकोर्ण लिलया गया है। उस मामले में, 'पूवाग्रह' क े सिसद्धां का सविवस् ार व्याख्या विकया गया है। इस सिसद्धां को रार्जाेंद्र सिंसह बनाम म.प्र. राज्य [(1996) 5 एस.सी.सी. 460] 45 25 में पुनः दोहराया गया है। यह ध्यान विदया र्जााना 'ाविहए विक "अनुपयुक्त औप'ारिरक ा" सिसद्धां एक अपवाद है। ऊपर विनर्षिदष्ट "स्वीक ृ या विनर्षिववाद थ्यों सिर्जानसे क े वल एकमात्र विनष्कर्ष विनकल ा है" मामलों से इ र उन अन्य मामलों में उस सिसद्धां क े लागू होने पर काफी बहस हुई है। इस सिसद्धां में प्रति पाविद विवविव म ऊपर उसि‰लिख एम.सी. मेह ा में न्यायालय द्वारा विवस् ृ रूप से विव'ारिर विकया गया माना है। इस न्यायालय ने विवथिभन्न मामलों में न्यायमूर्ति लॉड रीड, लॉड विवल्बरफोस, लॉड वूल्फ, लॉड विंबगहाम, मेगरी, और स्ट्रॉटन, एल.र्जाे. इत्याविद द्वारा इंग्लैंड में विवथिभन्न विनर्णयों में व्यक्त विकए गए विव'ारों का सव–क्षर्ण विकया और प्रमुख लेखकों प्रोफ े सर गानर, क्र े ग, डी स्थिस्मर्थी, वेड, डीए' क्लाक इत्याविद द्वारा व्यक्त विकए गए विव'ारों का भी सव–क्षर्ण विकया। उनमें से क ु छ ने कहा है विक प्राक े सिसद्दान् ों का उ‰ंघन में पारिर विकये गये आदेशों को रद्द कर विदया र्जााना 'ाविहए अन्यर्थीा अदाल इस मुद्दे पर पक्षपा करेगी। क ु छ अन्य लोगों ने कहा है विक ऐसा कोई पूर्ण विनयम नहीं है और पूवाग्रह को प्रकट विकया र्जााना 'ाविहए। विफर भी, क ु छ अन्य लोगों ने मीतिडया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनयमों क े माध्यम से लागू विकया है। हम इस मामले में इन मुद्दों की गहराई पर र्जााना आवश्यक नहीं समझ े हैं। अंति म विवश्लेर्षर्ण में, यह विकसी विवशेर्ष मामले क े उन थ्यों पर विनभर हो सक ा है। "

37. भार संघ और अन्य बनाम आलोक क ु मार (2010) 5 एस.सी.सी. 349 में, इस न्यायालय ने अति - कनीकी दृविष्टकोर्ण न लेकर विनर्ण[4] विकया विक पूवाग्रह वादी की आशंका मात्र नहीं होना 'ाविहए, बस्थिल्क इससे पूवाग्रह कारिर होने का विनति— अनुमाान विनकलना 'ाविहए र्जाो प्राक े प्रति र्षे से अनुगमन क 'ल ा है, र्जाो विनम्नानुसार हैः

83. इससे पूव क ु छ मामलों में इस न्यायालय ने यह विव'ार व्यक्त विकया विक प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का उ‰ंघन अपने आप में एक पूवाग्रह र्थीा और विकसी अन्य 'वास् विवक' पूवाग्रह को साविब करने की आवश्यक ा नहीं है। वै ाविनक विनयमों क े संबं में प्रमुख दृविष्टकोर्ण यह र्थीा विक अविनवाय वै ाविनक विनयमों का उ‰ंघन पूवाग्रह माना र्जााएगा, लेविकन र्जाहां विनयम विनदेशात्मक मात्र है, वास् विवक पूवाग्रह क े त्व का विनवेदन कर और प्रकट विकये र्जााने की आवश्यक ा है। इन विनयमों में कठोर ा विवति क े विवकास क े सार्थी काफी हद क थिशथिर्थील हो गयी है। वास् विवक पूवाग्रह क े इस दृष्टां को एक आवश्यक विवशेर्ष ा क े रूप में स्वीकार विकया गया है र्जाहां विनदेशात्मक विनयमों का उ‰ंघन या प्राकृ ति क न्याय का उ‰ंघन हुआ है क्योंविक सामान्य बोल'ाल में समझा र्जाा ा है। र्जाैसे विकसी विवभागीय र्जाां' में र्जाहां विवभाग बड़ी संख्या में दस् ावेर्जाों पर अवलस्थिम्ब है, सिर्जानमें से अति कांश दस् ावेर्जा दोर्षी अति कारी को प्रदान कर उसे अपना ब'ाव करने का अवसर विदया र्जाा ा है, सिसवाय इसक े विक औप'ारिरक दस् ावेर्जाों की क ु छ प्रति यां दोर्षी अति कारी को प्रस् ु नहीं की गई र्थीीं। उस घटना में यह दर्भिश करने की भार कम'ारी पर है विक इन औप'ारिरक दस् ावेर्जाों को प्रस् ु न करने क े परिरर्णामस्वरूप वास् व में पूवाग्रह कारिर हुआ है और इसक े परिरर्णामस्वरूप उसे नुकसान उठाना पड़ा है। xxx xxx xxx mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

87. ई.सी.आई.एल. बनाम बी करुर्णाकर [(1993) 4 एस.सी.सी. 727] क े मामले में इस न्यायालय ने मौर्जाूदा विवति पर ध्यान आकर्षिर्ष कर कहा विक युविक्तयुक्त अवसर का सिसद्धां और प्राक े सिसद्धां को विवति क े शासन को बनाए रखने और व्यविक्त को उसक े उति' अति कारों को सही ठहराने में सहाय ा करने क े लिलए विवकसिस विकया गया है। इनको विवथिभन्न अवसरों पर न पढ़े र्जााने वाले मंत्र है और न ही विकये र्जााने वाले कमकाण्ड़ हैं। वास् व में रिरपोट क े न देने से कम'ारी को पूवाग्रह कारिर हुआ है अर्थीवा नहीं इसकों प्रत्येक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों पर विव'ारिर विकया र्जााना 'ाविहए। न्यायालय ने उस स्थिस्र्थीति को भी स्पष्ट विकया है सिर्जास स्थिस्र्थीति पर इन कारर्णों से विवभागीय कायवाही को उलट विदया र्जााना 'ाविहए।

88. हरिरयार्णा फाइनेंथिशयल कॉप रेशन बनाम क ै लाश 'ंद्र आहूर्जाा [(2008) 9 एस.सी.सी. 31] क े मामले में पारिर इस न्यायालय क े विनर्णय का उ‰ेख करना उपयोगी होगा, र्जाहां न्यायालय ने ारिर विकयाः (एस.सी.सी. प्रस् र 21)

21. बी. करुर्णाकर में विन ारिर अनुपा से पूर्णरूपेर्ण स्पष्ट है विक प्राक े सिसद्धां क े ह र्जाां' अति कारी की रिरपोट की एक प्रति दोर्षी अति कारी को विदया र्जााना अपेतिक्ष है, यविद ऐसा र्जाां' अति कारी अनुशासनात्मक प्राति करर्ण से थिभन्न है। यह भी स्पष्ट है विक र्जाां' अति कारी की रिरपोट का न विदया र्जााना प्राक े सिसद्धान् का उ‰ंघन है। लेविकन समान रूप से स्पष्ट कर ा है विक र्जाां' अति कारी की रिरपोट को दोर्षी कम'ारी को न विदया र्जााना स्वयमेव उस कायवाही को शून्य और विनष्प्रभावी घोविर्ष कर देगा और दण्ड़ादेश नॉन एस्ट और अप्रभावी होगा। दोर्षी कम'ारी विनवेदन कर सविब करे विक इस रह की रिरपोट क े नहीं विदये र्जााने से पूवाग्रह कारिर हुआ र्थीा पैदा हो गया र्थीा और परिरर्णामस्वरूप न्याय विवफल हो गया र्थीा। यविद वह उस विंबदु पर न्यायालय को सं ुष्ट करने में असमर्थी है, ो दण्ड़ादेश स्व ः अपास् नहीं विकया र्जाा सक ा है।"

89. सेवा में भेदभाव को विनयंवित्र करने वाले सुस्र्थीाविप प्रति मानों को पूवाग्रह क े त्व क े सार्थी इन मामलों क विवस् ृ विकया र्जाा सक ा है। थ्य ः पूवाग्रह मात्र आशंका या युविक्तयुक्त संदेह पर भी आ ारिर नहीं होना 'ाविहए। यह महत्वपूर्ण है विक पूवाग्रह का त्व mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA थ्य क े रूप में मौर्जाूद होना 'ाविहए या ऐसे व्यति क्रम से उत्पन्न होने वाले पूवाग्रह कारिर होने की विनति— संभावना होना 'ाविहए। पूवाग्रह कारिर होने की आशंका आ ार पर इनमें से कोई भी विवभागीय र्जाां' को अपास् करने की अनुमति नहीं होगी।"

38. न्यायालय ने व्यापक दृविष्टकोर्ण लेकर विनरर्थीक आदेश पारिर नहीं विकया क्योंविक यह मामला स्वीक ृ थ्यों पर आ ारिर है, र्जाो विवबं, अति ग्रहर्ण, गैर-'ुनौ ी या गैर- इनकार क े कारर्ण स्वीक ृ है, इस न्यायालय द्वारा पारिर विनर्णय इस मामले क े थ्यों पर स्र्थीाविप सुने र्जााने क े उ‰ंघन क े सभी उदाहरर्ण हैं, विकन् ु उस व्यविक्त को कोई पूवाग्रह कारिर नहीं हुआ है सिर्जासने प्राक े उ‰ंगन का आरोप लगाया है क्योंविक वह ऐसा मामला र्थीा र्जाो स्वीक ृ थ्यों पर आ ारिर र्थीाः (i) पंर्जााब एंड सिंस बैंक और अन्य बनाम सकत्तर सिंसह (2001) 1 एस.सी.सी. 214 (देखेंः प्रस् र 1,[4] और 5 ); (ii) कनाटक एस.आर.टी.सी. और अन्य बनाम एस.र्जाी. कोट्टूरप्पा और अन्य (2005) 3 एस.सी.सी. 409 (देखेंः प्रस् र 24); 48 (iii) विववेका नंद सेठी बनाम अध्यक्ष, र्जाम्मू और कश्मीर बैंक लिलविमटेड और अन्य (2005) 5 एस.सी.सी. 337 (देखेंः प्रस् र 21,22 और 26 ); (iv) मोहम्मद सर ार्जा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2006) 2 एस.सी.सी. 315 (देखें: प्रस् र 18 ); (v) पंर्जााब नेशनल बैंक और अन्य बनाम मनर्जाी सिंसह और अन्य (2006) 8 एस.सी.सी. 647 (देखेंः प्रस् र 17 और 19); (vi) अशोक क ु मार सोनकर बनाम भार संघ और अन्य (2007) 4 एस.सी.सी. 54 (देखेंः प्रस् र 26-32); mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (vii) मथिर्णपुर राज्य और अन्य बनाम वाई. टोकन सिंसह और अन्य (2007) 5 एस.सी.सी. 65 (देखेंः प्रस् र 21 और 22); (viii) सति'व, ए.पी. समार्जा कल्यार्ण आवासीय शैक्षथिर्णक संस्र्थीान बनाम विंपडीगा श्री र और अन्य (2007) 13 एस.सी.सी. 352 (देखेंः प्रस् र 7); (ix) पीठानी सूयनारायर्ण और अन्य बनाम रेपका वेंकट रमर्ण विकशोर और अन्य (2009) 11 एस.सी.सी. 308 (देखेंः प्रस् र 18 ); (x) नगरपालिलका सविमति, होथिशयापुर बनाम पंर्जााब राज्य विवद्यु बोड और अन्य (2010) 13 एस.सी.सी. 216 (देखेंः 31 -36, 44 और 45); (xi) भार संघ और अन्य बनाम रघुवर पाल सिंसह (2018) 15 एस.सी.सी. 463 (देखेंः प्रस् र 20)

39. इस प्रकार पूव क्त विनर्णयों का विवश्लेर्षर्ण विनम्नलिललिख को प्रकट कर ा हैः (1) प्राक ृ ति क न्याय न्यायपालिलका क े हार्थीों में एक ल'ीला उपकरर्ण है र्जाो अन्याय को दूर करने क े लिलए युविक्तयुक्त मामलों क पहुं' सक ा है। सुने र्जााने क े विनयम का उ‰ंघन से स्व ः यह विनष्कर्ष नहीं विनकल ा विक द्द्वारा पूवाग्रह कारिर हुआ है। र्जाहां विवति क े प्रविक्रयात्मक और/या मौलिलक प्राव ान प्राक े सिसद्धां ों को समाविवष्ट कर े हैं वहां उनक े उ‰ंघन से पारिर विकये गये आदेश अपने आप अमान्य नहीं हो र्जाा े हैं। यहां पुनः, वादी को पूवाग्रह कारिर होना 'ाविहए सिसवाय उन मामलों क े र्जाो विवति क े आज्ञापक प्राव ान हैं सिर्जानकी कल्पना व्यविक्तग विह में ही नहीं बस्थिल्क लोकविह में भी विकया गया है । mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (3) प्राक े उ‰ंघन की थिशकाय करने वाले व्यविक्त को कोई पूवाग्रह नहीं हो ा है, र्जाहां ऐसा व्यविक्त अपने अर्थीवा इसक े विवरूद्ध मामले का प्रति वाद नहीं कर ा है। ऐसा विवबं, अति ग्रहर्ण, अति त्यर्जान और 'ुनौ ी न देना या थ्यों की स्वीक ृ ति अर्थीवा अस्वीक ृ ति क े माध्यम से उन मामलों में हो सक ा है र्जाहां न्यायालय थ्यों क े आ ार पर पा ा है विक उस व्यविक्त को कोई वास् विवक पूवाग्रह कारिर हुआ नहीं कहा र्जाा सक ा है सिर्जास व्यविक्त ने प्राक े भंग की थिशकाय विकया है। (4) ऐसे मामलों में र्जाहां थ्यों को स्वीक ृ या विनर्षिववाद कहा र्जाा सक ा है, और क े वल एकमात्र विनष्कर्ष संभव है, ब न्यायालय अपास् और प्रति प्रेर्षर्ण का विनरर्थीक आदेश पारिर नहीं कर ा है, र्जाब वास् व में, कोई पूवाग्रह कारिर नहीं हो ा है। यह विनष्कर्ष न्यायालय द्वारा विकसी मामले का थ्यों क े मूल्यांकन कर विनकाला र्जााना 'ाविहए, न विक उस प्राति कारी द्वारा र्जाो विकसी व्यविक्त क े प्रति प्राक ृ ति क न्याय का उ‰ंघन कर ा है। (5) "पू्वाग्रह" क े अपवाद को मात्र आशंका या विकसी वादी क े युविक्तयुक्त संदेह से अति क होना 'ाविहए। इसे मामले क े थ्य पर या प्राक े अपालन कारिर पूवाग्रह की संभावना पर आ ारिर होना 'ाविहए।

40. इन परीक्षर्णों क े मानदण्डो़ से न्याय करने पर यह स्पष्ट है विक र्जाहां क उसक े पक्ष में विनविवदा क े रद्द करने का संबं है ो सुने र्जााने क े अति कार का पूरी रह से उ‰ंघन कर प्रत्यर्थी4-1 पूरी रह से अं ेरे में रखा गया है । र्जाैसा विक श्री राक े श विद्ववेदी द्वारा सही ढंग से क विदया गया है, वास् व में उनक े मुववि¤ल क े लिलए पूवाग्रह पैदा हो गया है, न क े वल इस थ्य से विक अनुबं की अवति का एक वर्ष दूर ले र्जााया गया है, बस्थिल्क यह भी विक, यविद उच्च न्यायालय क े फ ै सले को लागू विकया र्जााना है आर्जा एक रफ, उनक े मुववि¤ल को ीन साल की अवति क े लिलए विनगम क े विकसी भी विनविवदा क े लिलए बोली लगाने से रोक विदया र्जााएगा। इस बा पर कोई संदेह नहीं है विक प्रर्थीम दृष्टया विनविवदा विदनांक 01.06.2018 क े अनुसरर्ण में सिर्जान दरों पर संविवदा विकया गया हैं, वह दर उस से अति क र्थीा र्जाो उस तिडवीर्जान में उसी काय क े लिलए पूव विनविवदा विवज्ञापन विदनांविक 01.04.2018 ह र्जाारी विकया गया है। । श्री विद्ववेदी का कर्थीन है विक पड़ोसी क्षेत्रों में विनविवदा दरें भी अति क र्थीीं, और इन विनविवदाओं को रद्द करने क े लिलए अभी क क ु छ भी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नहीं विकया गया है और इससे होने वाली विवत्तीय हाविन में वर्जान है। विनगम खुद को हुए बड़े विवत्तीय नुकसान क े लिलए उन व्यविक्तयों क े विवरूद्ध र्जाां' कर उप'ारात्मक कायवाही करे र्जाो इसक े सिर्जाम्मेदार हैं। 41. इसलिलए, हम इस आ ार पर उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनर्णय को बरकरार रख े हैं विक व मान मामले में थ्यों क े आ ार पर प्राक ृ ति क न्याय का स'मु' उ‰ंघन विकया गया है, यह स्वीक ृ थ्यों का ऐसा मामला नहीं है सिर्जाससे विनरर्थीक रिरट याति'का प्रदान कर दी र्जााए, और यह पक्षपा वास् व में प्रत्यर्थी4-1 को पूवाग्रह कारिर हुआ है। उक्त विनष्कर्ष क े दृविष्टग पक्षकारों ने सिर्जान अन्य क^ को उटाया है उसकी र्जाां' करने की कोई आवश्यक ा नहीं है।

42. हम श्री विद्ववेदी की कर्थीनों को दोहरा े हैं क्योंविक उनका मुववि¤ल अन्य उत्तरव 4 विनविवदा क े ह विनगम क े लिलए काम कर रहा है, वह विनविवदा रद्द होने की बाद अवति में होने वाले क्षति पूर्ति का दावा नहीं करने र्जाा रहा है। यह उसी क े र्जाैसा मामला है इसलिलए उनक े मुववि¤ल द्वारा र्जामा बयाना राथिश और सुरक्षा र्जामा को आर्जा से आठ सप्ताह की अवति क े भी र विनगम द्वारा वापस करने का आदेश विदया र्जाा ा है। श्री विद्ववेदी का मुववि¤ल विनगम से उसको भुग ान नहीं विकये गये विकसी भी राथिश की मांग कर सक ा है सिर्जासक े लिलए उसने वास् व में काय विकया है और उसकी इस मांग पर विनगम सुनवाई करने क े उपरान् कारर्ण सविह या ो स्वीकार करेगा या खारिरर्जा कर देगा।

43. विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) 5136 वर्ष 2020 और विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) 7351 वर्ष 2020 से उद्भू अपीलों को इस प्रकार आंथिशक रूप से अनुमति प्रदान विकया र्जाा ा है, और इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विदनांविक 11.12.2019 को क े वल हमारे द्वारा इंविग सीमा क अपास् विकया र्जाा ा है।

44. र्जाहां क विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) 7364 वर्ष 2020 से उद्भू अपील का प्रश्न है, ो उसमें थ्य हमारे सामने अन्य दो र्जाुड़े हुए अपीलों से क े वल इस सीमा क अलग हैं विक प्रत्यर्थी4-1 उसमें, मेसस रम रार्जा सिंसह, ेंदू (सोनभद्र) क्षेत्र क े लिलए सफल बोलीदा ा र्थीे, सिर्जासकी विनविवदा विनगम क े आदेश विदनांविक 26.07.2019 द्वारा खारिरर्जा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर विदया गया र्थीा। उच्च न्यायालय इलाहाबाद (लखनऊ बें') क े इस अपील विदनांविक 07.01.2020 में पारिर विनर्णय मेसस रम रार्जा सिंसह की रद्द करने क े आदेश को 'ुनौ ी देने वाली रिरट याति'का को यह कहकर अनुज्ञा कर विदया विक इसको उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पारिर विनर्णय विदनांविक 11.12.2019 द्वारा शासिस होना र्थीा। परिरर्णामस्वरूप दोनों खारिरर्जा अपीलों में हमारा विनर्णय, और प्रदत्त सभी आनुर्षांविग उप'ार, इन सभी 'ारों अपीलों में भी लागू होगें।

45. इन विटप्पथिर्णयों क े सार्थी इन अपीलों का विनपटारा विकया र्जाा ा है।...........................… न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन...........................… न्यायमूर्ति नवीन सिसन्हा................................. न्यायमूर्ति क े.एम. र्जाोसेफ नई विद‰ी; 16 अक्टूबर 2020 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA