Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल/मूल अपीलीय अति कारिर ा
विवशेष अनुमति याति का (सिसविवल) सं. 23223 वष' 2018
में
प्रकीर्ण' आवेदन सं. 2641 वष' 2019
सौरव यादव एवं अन्य .........याति काक ा'(गर्ण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य .........प्रत्यर्थी< (गर्ण)
सह
रिरट याति का (सिस.) सं. 237 वष' 2020 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
विनर्ण'य
न्यायमूर्ति उदय उमेश ललिल
प्रकीर्ण' आवेदन सं. 2641 वष' 2019
JUDGMENT
1. यह प्रकीर्ण' आवेदन सुश्री सोनम ोमर और सुश्री री ा रानी द्वारा विकया गया है, सिHन्होंने उ.प्र. पुलिलस में आरक्षी भर ी क े लिलए आरंभ की गयी यन प्रविKया में भाग लिलया और Kमशः 276.5949 और 233.1908 अंक प्राप्त विकए। उन्होंने Kमशः ओबीसी-मविहला और एससी-मविहला श्रेणिर्णयों में आवेदन विकया र्थीा।
2. उनक े द्वारा यह कहा गया है विक इस न्यायालय क े द्वारा आई.ए. सं. 10394 वष' 2018 (आशीष क ु मार यादव और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य) क े मामले में विदये गये 24.07.2019 विदनांविक विनदUशों क े बावHूद राज्य सरकार द्वारा उनक े दावे को खारिरH कर विदया गया है और उनक े दावे की अवहेलना कर े हुए कम अंक वाले अभ्यर्थिर्थीयों को सामान्य मविहला वग' में ुना गया है।
3. इस प्रकीर्ण' आवेदन क े प्रयोHन क े लिलए प्रासंविगक मूल थ्य, 24.07.2019 विदनांविक उक्त आदेश में यर्थीा वर्थिर्ण, विनम्नव हैं: - "वष' 2013 में, पुलिलस आरतिक्षयों [यू.पी. सिसविवल पुलिलस/प्रां ीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी)/फायरमैन] क े 41,610 पदों को भरने क े लिलए यन प्रविKया शुरू की गई र्थीी। अपेतिक्ष परीक्षा क े बाद विदनांक 16.07.2015 को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरर्णाम घोविष विकया गया, सिHसमें 38315 अभ्यर्थी< सफल हुए। इस प्रकार, उस ति णिर्थी क 3295 रिरविक्तयां ऐसी र्थीीं सिHन्हें भरा नहीं गया र्थीा क्योंविक कोई उपयुक्त उम्मीदवार उपलब् नहीं र्थीा। यह उल्लेख विकया Hाना ाविहए विक यू.पी. पुलिलस में उप-विनरीक्षकों क े यन की प्रविKया सार्थी-सार्थी ल रही र्थीी और उक्त प्रविKया क े संबं में उठाई गई ुनौ ी में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साक े क ु मार एवं अन्य बनाम यू.पी. राज्य एवं अन्य[1] क े मामले में विदये गये 29.05.2015 विदनांविक आदेश द्वारा यह विनदUश विदया विक सिHन उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा क े उत्तर पत्रों को हल कर े समय ब्लेड और व्हाइटनर का प्रयोग विकया र्थीा, उन्हें अयोग्य घोविष कर विदया गया और उनक े नाम यन सू ी से हटा विदए गए। मामले को इस न्यायालय क े समक्ष अपील में ले आया गया और इसक े 19.01.2016 विदनांविक विनर्ण'य (हनुमान दत्त शुक्ल एवं अन्य बनाम यू.पी. राज्य एवं अन्य[2] ) द्वारा, यह फ ै सला सुनाया विक सिHन लोगों ने ब्लेड और व्हाइटनर का इस् ेमाल विकया उन्हें अयोग्य घोविष नहीं करना ाविहए र्थीा। हालांविक, उस समय क,साक े क ु मार क े मामले में विदये गये विनर्ण'य क े ह वरिरष्ठ ा सू ी दोबारा बनने से यन प्रविKया आगे बढ़ ुकी र्थीी। इसलिलए, इस न्यायालय ने ारिर विकया विक सिHन उम्मीदवारों का यन साक े क ु मार क े मामले में विदये गये विनदUशों क े परिरर्णामस्वरूप विकया हुआ र्थीा, उन्हें यन की प्रविKया से बाहर नहीं विकया Hाना ाविहए, लेविकन सिHन उम्मीदवारों ने ब्लेड और व्हाइटनर का इस् ेमाल विकया र्थीा, उन्हें आभासीय यन का लाभ विदया Hाना ाविहए। दूसरे शब्दों में, यन सू ी दोबारा बनाने का आदेश विदया गया र्थीा और यविद ब्लेड और व्हाइटनर का इस् ेमाल करने वाले उम्मीदवारों को अब यन सू ी का विहस्सा पाया Hा ा है, ो उन्हें संबंति पदों पर यन सविह उति लाभ विदया Hाय। यह भी विनदUश विदया गया विक यद्यविप ार्किकक रूप से समान संख्या में अभ्यर्थिर्थीयों को यन की मूल सू ी से विवस्र्थीाविप
1 Writ A. No.67782 of 2014, (2015 SCC OnLine All 1250) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया Hाना ाविहए, लेविकन ूँविक वे व्यविक्त पहले ही प्रणिशक्षर्ण प्राप्त कर ुक े र्थीे और उनमें से क ु छ पदों ैना हो ुक े र्थीे, उन उम्मीदवारों को सेवा से बाहर नहीं विकया Hाना ाविहए। इस न्यायालय ने यह भी विनदUश विदया विक इस प्रविKया में,सामान्य यन से अति क यविन उम्मीदवारों की अति रिरक्त संख्या को अति रिरक्त पदों क े रूप में विगना Hाना ाविहए और यन क े लिलए मूल पदों का विहस्सा नहीं लिलया Hाना ाविहए। ए डी शुक्ल क े मामले में इस प्रकार ैयार विकए गए सिसद्धां को ब पुलिलस आरतिक्षयों क े यन की प्रविKया में अपनाया गया Hो सार्थी -सार्थी ल रही र्थीी और परिरर्णामस्वरूप यन सू ी को विफर से ैयार विकया गया र्थीा। इस प्रकार ब्लेड और व्हाइटनर का इस् ेमाल करने वाले सभी उम्मीदवारों को यन की प्रविKया में माना गया और उनमें से कु छ का यन हो भी गया। यन सू ी को पुन: बनाने में 4429 अभ्यर्थिर्थीयों को हनुमान दत्त शुक्ल क े मामले में घोविष विवति क े ह लाभ विदया गया, अर्थीा' उन 4429 अभ्यर्थिर्थीयों को उन पदों की संख्या से अलग अति रिरक्त विनयुविक्तयों क े रूप में लिलया Hाएगा सिHनक े लिलए यन काय' शुरू विकया गया र्थीा। अपने 16.03.2016 विदनांविक विनर्ण'य [आशीष क ु. पांडे और 24 अन्य बनाम उ.प्र. राज्य और 29 अन्य[3] ] में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ारिर विकया विक क्षैति H आरक्षर्ण ठीक से नहीं विनकाला गया र्थीा और इस रह राज्य को क्षैति H आरक्षर्ण रिरविक्तयों की पुन: गर्णना करने की प्रविKया को नए सिसरे से शुरू करने का विनदUश विदया गया र्थीा। यह मामला उपविनरीक्षकों क े यन की प्रविKया से भी Hुड़ा र्थीा। लगभग उसी समय, आरतिक्षयों क े यन में आशीष क ु. पाण्डेय क े मामले वाले सिसद्धान् को अपना े हुए मनोH क ु मार एवं अन्य[4] क े मामले में उच्च न्यायालय द्वारा एक और विनर्ण'य विदया गया। 3 Writ A. No.37599 of 2015 (2016 SCC OnLine ALL 187) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विदनांक 4.5.2018 को, इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उपेंद्र एवं अन्य बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य[5] क े मामले में एक विनर्ण'य विदया गया र्थीा सिHसमें आरक्षर्ण अति विनयम क े क ु छ प्राव ानों को ुनौ ी दी गई र्थीी। यह कहा गया विक क्षैति H आरक्षर्ण की अव ारर्णा क े अनुसार, रिरविक्तयों को अगले यन क े लिलए आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा, यविद क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए उपयुक्त संख्या में उम्मीदवार उपलब् न विमले। उच्च न्यायालय ने दलील को स्वीकार कर लिलया और विनदUश विदया विक क्षैति H आरक्षर्ण की रिरविक्तयों को अगले यन में आगे नहीं बढ़ाया Hाएगा। इस प्रकार मामला स्पष्ट र्थीा विक यविद क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए रिरविक्तयों को भरने क े लिलए उपयुक्त संख्या में उम्मीदवार उपलब् न हों, ो ऐसी रिरविक्तयों को आगे नहीं बढ़ाया Hाएगा। आदेश से प ा ल ा है विक क्षैति H आरक्षर्ण क े मामले में आगे बढ़ाने क े सिसद्धां को अपना े हुए राज्य द्वारा लगभग 2312 रिरविक्तयों को नहीं भरा गया र्थीा। अ: उपेंद्र क े मामले में उच्च न्यायालय द्वारा Hारी विनदUशों क े परिरर्णामस्वरूप,व 'मान यन प्रविKया से संबंति उम्मीदवारों क े लाभ क े लिलए 2312 रिरविक्तयां सुविनति‹ की Hानी ाविहए। राज्य क े विवद्वान अति वक्ता द्वारा यह स्वीकार विकया गया है विक राज्य ने उन 2312 रिरविक्तयों क े संबं में कोई यन प्रविKया आरंभ नही की.…..…..….…..…..… यह भी स्वीकार विकया गया है विक इन 2312 रिरविक्तयों क े अलावा, मूल यन में अभी भी 982 रिरविक्तयां भरी Hानी हैं।"
5 Writ C. No.3417 of 2016; 2018 (7) ADJ 37 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इस परिरस्थिस्र्थीति में इस न्यायालय ने राज्य को 2312+982 रिरविक्तयों क े संबं में यन प्रविKया विवति क े अनुरूप पूरा करने का विनदUश विदया। यह भी विनदUश विदया गया र्थीा विक इन रिरविक्तयों को भरने क े दौरान आरक्षर्ण क े सिसद्धां का पालन विकया Hाएगा और राज्य यन प्रविKया क े दौरान बनाए गये आवश्यक न्यून म अह'कारी अंकों का पालन करेगा और सभी अह' अभ्यर्थिर्थीयों पर मेरिरट क े अनुसार विव ार करेगा। यह भी घोविष विकया गया:- "यह स्पष्ट विकया Hा ा है विक यन प्रविKया से विकसी अभ्यर्थी< को क े वल इसलिलए न विनकाला Hाय क्योंविक उसने ब्लेड या व्हाइटनर का इस् ेमाल विकया र्थीा। यविद उसकी योग्य ा की स्थिस्र्थीति अन्यर्थीा मांग कर ी है और उसे यविन होने का अति कार दे ी है, ो उसक े विवरुद्ध क े वल ब्लेड और व्हाइटनर क े प्रयोग क े लिलए कोई पूवा'ग्रह नहीं बर ा Hाएगा।"
4. इसक े ुरं बाद, यह आशंका व्यक्त की गई विक क्या पूव क्त विनदUश क े वल पुरुष अभ्यर्थिर्थीयों पर ही लागू होंगे। अ: 17.09.2019 विदनांविक आदेश विनम्नव अणिभलिललिख विकया गया:- "राज्य क े विवद्वान एएHी श्री. विवनोद विदवाकर ने कर्थीन विकया है विक इस न्यायालय द्वारा 24.07.2019 को Hारी विनदUश को ध्यान में रख े हुए, विकसी भी उम्मीदवार को यन प्रविKया से क े वल इसलिलए बाहर नहीं विकया Hाएगा क्योंविक उसने ब्लेड / व्हाइटनर का इस् ेमाल विकया र्थीा और यविद योग्य ा स्थिस्र्थीति उसे ुने Hाने क े योग्य बना ी है ो, उसक े विवरुद्ध क े वल ब्लेड / व्हाइटनर का उपयोग करने क े लिलए कोई पूवा'ग्रह नहीं बर ा Hाएगा। कर्थीन को अणिभलिललिख विकया Hा ा है।"
5. 24.07.2019 विदनांविक आदेश क े अनुपालन में राज्य की ओर 13.11.2019 विदनांविक एक हलफनामा दायर विकया गया र्थीा सिHसमें अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी कहा गया र्थीा: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "3.3- खुले वग' में 5 डीएफएफ पुरुष, 1 डीएफएफ मविहला और 187 मविहला (सामान्य) का यन हुआ है। इस प्रविKया से क्षैति H आरक्षर्ण पूरा हो Hा ा है। 4- विवणिभन्न श्रेणिर्णयों क े लिलए कट ऑफ अंक विनम्नानुसार हैं- ओसी ओबीसी एससी एसटी पुरुष कट ऑफ 313.616 307.233 283.4033 247.2333 मविहला (सामान्य श्रेर्णी) कट ऑफ – 274.8928. 313.616 से अति क अंक प्राप्त करने वाले सभी ओबीसी, एससी और एसटी अभ्यर्थिर्थीयों को भी खुले/अनारतिक्ष वग' में ुना गया है।
6. राज्य द्वारा सामान्य श्रेर्णी की मविहला अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए पदों क े सापेक्ष ओबीसी मविहला और अनुसूति Hाति मविहला अभ्यर्थिर्थीयों क े दावों पर विव ार न विकये Hाने से व्यणिर्थी होकर, यह प्रकीर्ण' आवेदन विकया गया है सिHसमें अन्य बा ों क े सार्थी कहा गया है विक:
mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. सविवनय विनवेदन है विक मविहला ओबीसी श्रेर्णी क े 21 याति काक ा'ओं/आवेदकों ने राज्य क े 13.11.2011 विदनांविक अनुपालन शपर्थी पत्र क े अनुसार यविन घोविष मविहला (सामान्य श्रेर्णी) उम्मीदवारों क े लिलए कट ऑफ अंक से अति क अंक प्राप्त विकए हैं।" इसलिलए, आवेदक प्रार्थी'ना कर े हैं: - “(ए) इस आवेदन को स्वीकार करें और प्रति वादी राज्य को उन आवेदकों / याति काक ा'ओं [मविहला ओबीसी / एससी उम्मीदवार] का यन करने का विनदUश दें सिHन्होंने 2013 आरक्षी भ < प्रविKया में भाग लिलया और सामान्य/खुले/अनारतिक्ष वग' हे ु कट ऑफ अंक (274.8928) से अति क अंक हासिसल विकए;”
7. त्प‹ा ् समान स्थिस्र्थीति वाले अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा समान अनु ोष क े लिलए आई.ए. सं. 25611 वष' 2019 दायर की गयी। इस न्यायालय द्वारा पारिर 04.03.2020 विदनांविक आदेश में कहा गया है: - "एमए सं. 2641 वष' 2019 में दो आवेदकों का मामला है, Hबविक आई.ए. सं. 25611/2019 में मामले पर अन्य 20 अभ्यर्थिर्थीयों क े संबं में विव ार विकया गया। आई.ए. संख्या 25611/2019 में 24.03.2020 क वापसी योग्य नोविटस Hारी विकया Hाय। विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री विवभा दत्ता मखीHा ने साफ स्वीकार विकया है विक 32 मविहला अभ्यर्थिर्थीयों में से 11 अभ्यर्थी< मविहला अनुसूति Hाति वग' से संबंति हैं, Hबविक अन्य 21 मविहला अन्य विपछड़ा वग' से संबंति हैं और यह विक मविहला एससी वग' से संबंति कोई मामला नहीं है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Hहां क ओबीसी मविहलाओं का संबं है,विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री विवभा दत्ता मखीHा का कहना है विक इन सभी लड़विकयों ने कट ऑफ 274.89 से अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे, Hो विक मविहला (सामान्य) श्रेर्णी क े लिलए घोविष विकया गया र्थीा। हमारा ध्यान अनुपालन शपर्थी पत्र क े पृष्ठ 110 की ओर आकर्किष विकया गया Hो दशा' ा है विक कु छ मविहला अभ्यर्थी< सिHन्होंने 274- 275 अंक प्राप्त विकए र्थीा, उनका यन विकया गया है। यह विनवेदन है विक ओबीसी श्रेर्णी की आवेदक लड़विकयों ने सामान्य श्रेर्णी की लड़विकयों की ुलना में अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे,सिHनका यन विकया गया र्थीा। राज्य क े विवद्वान अति वक्ता द्वारा प्रस् ु विकया Hाने वाला एक क ' यह र्थीा विक पहले दौर में ओबीसी मविहलाओं श्रेर्णी भर ुकी र्थीी और इस न्यायालय द्वारा हनुमान दत्त शुक्ल और उसी आ ार पर विनर्ण< मामलों क े आ ार पर Hो यन विकया गया र्थीा वह क े वल उन उम्मीदवारों क ही सीविम र्थीा, सिHन्हें ब्लेड/इरेज़र या व्हाइटनर का इस् ेमाल करने क े लिलए अयोग्य घोविष विकया गया र्थीा। ूंविक यन ऐसे उम्मीदवारों क ही सीविम र्थीा, और ओबीसी मविहला की श्रेर्णी पहले ही भर ुकी र्थीी, इसलिलए ओबीसी मविहला उम्मीदवारों में से विकसी भी उम्मीदवार को विनयुक्त नहीं विकया Hा सक ा र्थीा। र्थीाविप थ्य यह है विक सामान्य वग' से आने वाली सिHन मविहलाओं ने 274-275 अंक प्राप्त विकए र्थीे, उन्हें विनति‹ रूप से विनयुक्त विकया गया है, Hबविक आवेदक ओबीसी- लड़विकयों ने उनसे अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे। इस प्रकार, यह प्रर्थीम दृष्टया इस क ' पर खरा नहीं उ र ा विक सामान्य श्रेर्णी में ऐसे उम्मीदवारों को क ै से विनयुक्त विकया Hा सक ा है सिHन्होंने आवेदक लड़विकयों की ुलना में कम अंक प्राप्त विकए र्थीे।
8. त्प‹ा, इस न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 22.07.2020 को पारिर आदेश विनम्नलिललिख प्रभाव का र्थीा:mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "राज्य क े विवद्वान एएHी श्री विवनोद विदवाकर का कर्थीन है विक पुरुष कांस्टेबलों की श्रेर्णी में, ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवार सिHन्होंने खुले/ अनारतिक्ष श्रेर्णी क े कट-ऑफ 313.616 से अति क अंक हासिसल विकया खुले/ अनारतिक्ष श्रेर्णी में भी ुने गये। लेविकन, मविहला उम्मीदवारों क े संबं में वही मानदंड लागू नहीं विकया गया और इस रह क े काय' क े लिलए औति त्य उच्च न्यायालय द्वारा रिरट याति का संख्या 37599 वष' 2015 क े 16.03.2016 विदनांविक आदेश और रिरट याति का संख्या 18442 वष' 2018 क े 20.02. 2019 विदनांविक आदेश को बनाया गया।"
9. राज्य सरकार ने अपने हलफनामों में Hो रुख अपनाया वह इस प्रकार र्थीा:- I] 29.11.2019 विदनांविक शपर्थी पत्र “ए. वष' 2013 में पुलिलस कांस्टेबल (यूपी सिसविवल पुलिलस/पीएसी/फायरमैन) क े 41610 पदों को भरने क े लिलए यन प्रविKया प्रारंभ की गई र्थीी। विववरर्ण इस प्रकार हैं:- ालिलका-1 Kम सं. वग' सिसविवल पुलिलस पीएसी फायरमैन क ु ल 1 खुला 17750 2016 1038 2080[4] 2 ओबीसी 9585 1089 561 11235 3 एससी 7455 847 436 8738 4 एसटी 710 81 42 833 क ु ल 35500 4033 2077 41610 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बी-क्षैति H आरक्षर्ण स्थिस्र्थीति विनम्नव है:- ालिलका-2 उध्वा' र आरक्षर्ण क ु ल रिरविक्तयाँ क्षैति H आरक्षर्ण रिरविक्तयाँ भू पूव' सैविनक 05 % डीएफएफ 02 % होमगाड' (क े वल सिसविवल पुलिलस & पीएसी) 05 % मविहलाएं (क े वल सिसविवल पुलिलस क े लिलए) 20% खुला 2080[4] 1040 416 988 3550 ओबीसी 11235 562 225 534 1917 एससी 8738 437 175 415 1491 एसटी 833 42 17 40 142 क ु ल 41610 2081 833 1977 7100 परिरर्णाम 16-07-2015 को अपेतिक्ष परीक्षा और अन्य प्रविKयाओं को पूरा करने क े बाद घोविष विकए गए र्थीे। 38315 उम्मीदवारों को सफल घोविष विकया गया और 3295 पद संबंति श्रेणिर्णयों में उपयुक्त अभ्यर्थिर्थीयों की अनुपलब् ा क े कारर्ण खाली रह गये। ……… सी. माननीय उच्च न्यायालय क े 24-07-2019 विदनांविक आदेश क े अनुपालन में राज्य की आरक्षर्ण नीति को ध्यान में रखकर मेरिरट क े आ ार पर 3295 पदों क े सापेक्ष यन विकया गया है। परिरर्णाम 11.11.2019 को घोविष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया गया है। यहां यह उल्लेख करना प्रासंविगक है विक सिसविवल पुलिलस ( ालिलका-2) क े 35500 पदों क े सापेक्ष 7100 पद मविहला उम्मीदवारों क े लिलए आरतिक्ष र्थीे, सिHसमें 3550 पद सामान्य मविहला उम्मीदवारों क े लिलए विन ा'रिर विकए गए र्थीे। इस स् र पर ओबीसी और एससी मविहला उम्मीदवारों को पहले से ही उनकी आवश्यक संख्या क े अति शेष में लिलया Hा ुका र्थीा, संबंति श्रेणिर्णयों में मविहला उम्मीदवारों की संख्या 3550 क े सापेक्ष क े वल 3062 र्थीी, (संदभ' ालिलका -2)। इसलिलए, 3550 खुले वग' मविहला अभ्यर्थिर्थीयों क े सापेक्ष उनक े आरक्षर्ण कोटा को भरने क े लिलए 188 सामान्य मविहला उम्मीदवारों खुले वग' में यविन विकया गया।
II. 21.07.2020 विदनांविक शपर्थी “13. यह विफर से दोहराया Hा ा है विक सिसविवल पुलिलस में कु ल रिरविक्तयों में से 3550 सामान्य श्रेर्णी की मविहलाओं क े लिलए, 1970 ओबीसी क े लिलए, 1491 को एससी क े लिलए और 142 को एसटी मविहला अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए आरतिक्ष विकया गया र्थीा। यह विफर से दोहराया Hा ा है विक ूंविक ओबीसी और एससी मविहला अभ्यर्थिर्थीयों का रिरविक्तयों क े सापेक्ष पहले ही यन विकया Hा ुका र्थीा, इसलिलए प‹ा व < यन में उनकी योग्य ा पर विव ार नहीं विकया गया है।"
10. ूंविक राज्य द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश द्वारा रिरट आवेदन संख्या 37599 वष' 2015 में पारिर 16.03.2016 विदनांविक आदेश का अवलंब लिलया गया है, क ु छ प्रासंविगक विटप्पणिर्णयों को विनम्नव उद्धृ विकया Hा रहा है:- "इसलिलए, यह अविनवाय' र्थीा विक समायोHन क े प‹ा यविद ओबीसी वग' से संबंति विवशेष वग' क े उम्मीदवार खुले वग' में समायोसिH विकये गये अपने समकक्ष की ुलना में अति क अंक प्राप्त विकए, ो उन्हें खुले वग' में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्र्थीानां रिर नहीं विकया Hा सक ा है। स्र्थीानां रर्ण ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े समान होगा Hो अनुमन्य नहीं है और क्षैति H आरक्षर्ण की अव ारर्णा से अलग है। उध्वा' र आरक्षर्ण क े ऊपर क्षैति H आरक्षर्ण, इसलिलए 'योग्य ा' की कोई अव ारर्णा नहीं है। ……… प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता6 यह आग्रह करेंगे विक (i) संबंति श्रेर्णी में समायोसिH विकए Hाने वाले मविहला उम्मीदवारों की संख्या का विन ा'रर्ण कर े समय योग्य ा क े आ ार पर यविन मविहलाओं को बाहर रखा Hाना ाविहए, (ii) खुला वग' योग्य ा क े आ ार पर 'खुला' होने क े कारर्ण, इसलिलए विवशेष आरक्षर्ण कोटे क े ह उम्मीदवारों को उनकी सामासिHक श्रेर्णी क े बावHूद अन्य बा ों क े सार्थी मेरिरट क े आ ार पर समायोसिH विकया Hाना ाविहए, (iii) मविहलाएं एक वग' हैं, इसलिलए, उनकी सामासिHक श्रेर्णी क े आ ार पर भेदभाव नहीं हो सक ा,(iv) ) सिHन सिसद्धां ों का विनवेदन विकया गया है, यविद उनका पालन नहीं विकया Hा ा है, ो यह "उच्च Hाति " क े पक्ष में आरक्षर्ण क े बराबर होगा Hो विक संविव ान का उद्देश्य या लक्ष्य नहीं है। मेरी राय में, क ' न क े वल गल है, बस्थि¨क दुभा'वनापूर्ण' और प्रेरिर है Hैसा विक याति काक ा'ओं द्वारा कहने का प्रयास विकया Hा रहा है। क्षैति H आरक्षर्ण क े सिसद्धां क े संबं में विदये Hा रहे क ', यविद स्वीकार विकए Hा े हैं, ो वे अविनवाय' रूप से अति विनयम, 1993 क े प्राव ानों, पूव' में संदर्थिभ सरकारी आदेशों और सव च्च न्यायालय क े आति कारिरक प्रकर्थीन क े विवरुद्ध होंगे। मुझे यह कहने में कोई सिझझक नहीं है विक राज्य और बोड' दोनों, अपने-अपने कारर्णों से, और अपने अति वक्ता समूह क े सार्थी महाति वक्ता ने अपनी सरकार क े आदेशों और अति विनयम 1993 क े प्राव ानों क े लिखलाफ रुख अपनाया है। इस प्रश्न पर विक महाति वक्ता न क े वल सरकारी आदेशों क े लिखलाफ, बस्थि¨क उन सिसद्धां ों क े लिखलाफ भी क ' दे रहे र्थीे, सिHनका बोड' द्वारा क्षैति H आरक्षर्ण क े
6 State of U.P. and its functionaries mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संबं में विपछले यनों में लगा ार पालन विकया Hा रहा र्थीा; श्री सिंसह का क ' र्थीा विक बोड' द्वारा अपनाया गया सिसद्धां 'न्यायसंग ' है, इसलिलए राज्य बोड' द्वारा अपनाई गई काय'प्रर्णाली का समर्थी'न कर ा है। हालाँविक, इस क ' का समर्थी'न विकसी प्राति कारी द्वारा नहीं विकया गया र्थीा, बस्थि¨क ऊपर उसिल्ललिख प्राति कारिरयों पर, दोनों प्रति वादी पक्षों ने अपने क³ क े समर्थी'न में भरोसा विकया र्थीा। ………... इसक े परिरर्णामस्वरूप ैयार विकए गए प्रश्नों क े उत्तर इस प्रकार हैं: (i) क्षैति H आरक्षर्ण (मविहला, पूव' सैविनक और स्व ंत्र ा सेनानी क े आणिश्र ) का दावा करने वाले अभ्यर्थिर्थीयों को खुली श्रेर्णी में समायोसिH नहीं विकया Hा सक ा है, बस्थि¨क उन्हें उनकी संबंति सामासिHक श्रेर्णी क े सापेक्ष समायोसिH करना होगा। यानी ओबीसी, एससी और एसटी…….” (प्रभाव वर्ति )
11. एकल न्याया ीश क े पूव क्त विनर्ण'य की विनम्नलिललिख विटप्पणिर्णयों क े सार्थी उच्च न्यायालय क े दो सदस्यीय खंडपीठ[7] द्वारा द्वारा अपील में अणिभपुविष्ट की गई र्थीी:-
31. क्षैति H आरक्षर्ण क े सिसद्धां को लागू कर े समय, श्रेर्णी की भूविमका उस समय की है Hब क्षैति H आरक्षर्ण को लागू विकया Hाना हो ा है, उस समय प्रश्नग अभ्यर्थीी³ को योग्य ा क े आ ार पर उनकी संबंति श्रेर्णी में समायोसिH विकया Hा ा है और पुरुष अभ्यर्थी<, Hो योग्य ा क े अनुसार सू ी में नी े हैं, को मविहला अभ्यर्थी< को स्र्थीान देना होगा। वह अभ्यर्थी<, सिHसने ओबीसी/एससी/एसटी श्रेर्णी क े ह क्षैति H आरक्षर्ण क े प्रयोHनों क े लिलए आवेदन विकया है, को अपनी श्रेर्णी बदलने की अनुमति नहीं दी Hा सक ी है, Hबविक ऊध्वा' र आरक्षर्ण में एक बार Hब आप 7 State of UP & Ors. vs. Ashish Kumar Pandey & Ors.: 2016 SCC OnLine All 2611 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यविन हो Hा े हैं, ो योग्य ा क े आ ार पर, ऐसा परिरव 'न कानून क े सं ालन द्वारा स्वीकाय' है और इसक े मद्देनHर, यविद थ्यात्मक स्थिस्र्थीति ऐसी हो, विक सभी अभ्यर्थीी³ द्वारा विवशेष आरक्षर्ण क े संदभ' में अपनी श्रेर्णी विनर्किदष्ट कर विदये Hाने क े बाद, उन्हें उनकी संबंति श्रेणिर्णयों में समायोसिH करना होगा और आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< यह दावा करक े खुली श्रेर्णी क े सापेक्ष विनयुविक्त क े लिलए नहीं कह सक े हैं विक उनक े पास उच्च योग्य ा है, क े वल ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े मामले में, योग्य ा की एक भूविमका हो ी है सिHसमें सू ी को अंति म रूप विदया Hा ा है, लेविकन क्षैति H आरक्षर्ण प्रदान कर े समय समायोHन विकया Hा ा है, विवणिभन्न समायोHन की आवश्यक ा हो ी है Hो शीष' अदाल द्वारा अनुमोविद विकये गये फामु'ले क े अनुसार विकया Hाएगा Hो विक उति आरक्षर्ण क े मामले में शीष' न्यायालय द्वारा अनुमोविद विकया गया है। शीष' अदाल इस थ्य क े प्रति स े र्थीी, विक इस रह क े प्राव ान का दुरुपयोग विकया Hा सक ा है और दनुसार, उदाहरर्ण देकर स्थिस्र्थीति को स्पष्ट करने की मांग की गई र्थीी और विफर यह उपबं कर े हुए विक यविद क्षैति H आरक्षर्ण सं ुष्ट नहीं है, ो विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थी< की अपेतिक्ष संख्या होनी उनक े संबंति सामासिHक आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों क े सापेक्ष लिलया /समायोसिH विकया Hाना ाविहए। उ.प्र. अति विनयम संख्या 4 वष' 1993 की ारा 3 की उप- ारा (3) दनुसार लागू विकए Hाने क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण का प्राव ान कर ी है, इस विन ा'रिर रीक े से क्षैति H आरक्षर्ण की प्रयोज्य ा सेवा में उनक े प्रति विनति त्व क े सार्थी विवशेष आरक्षर्ण कोटे क े अभ्यर्थी< की योग्य ा को बनाए रख ा है, इसक े मद्देनHर, विवद्वान एकल न्याया ीश उस समय विब¨क ु ल सही है Hब वह राज्य सरकार की आलो ना एक ऐसी प्रविKया का पालन करने क े लिलए कर े हैं Hो कानून में विन ा'रिर नहीं र्थीी और इस प्रकार 50% क े आरक्षर्ण की सीमा पार हो गयी। इसक े मद्देनHर, विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर आदेश मामले क े इस पहलू पर हस् क्षेप क े लायक नहीं है mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (प्रभाव वर्ति )
12. प्रमोद क ु मार सिंसह एवं अन्य बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य[8] में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारिर 20.02.2019 विदनांविक आदेश में की गयी विटप्पणिर्णयों का राज्य सरकार द्वारा भी अवलंब लिलया गया है। उसी मामले में पुलिलस आरक्षी क े यन में स्व ंत्र ा सेनाविनयों क े आणिश्र ों,पूव' सैविनकों और मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण भी विवषय र्थीा। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य की ओर से प्रस् ु नोट पर विव ार विकया, Hो विवणिभन्न श्रेणिर्णयों क े लिलए सीटों को विन ा'रिर करने और भरने क े लिलए उठाए गए कदमों को दशा' ी र्थीी, Hो विनम्नव र्थीी- " यन प्रविKया को पूरा करने क े लिलए बनायी गयी प्रविKया का उल्लेख विनम्नलिललिख शब्दों में की Hा ी है: “सू ी-1 से रर्ण 3.1- योग्य ा क े Kम में (क ु ल अंक) सामान्य श्रेर्णी में 1915[8] अभ्यर्थीी³ का यन करें। इस सू ी में विकसी भी राज्य या विकसी भी आरतिक्ष श्रेर्णी (ओबीसी/एससी/एसटी) क े अभ्यर्थी< भी शाविमल हो सक े हैं। इस सू ी को सू ी 1-ए कहा Hाएगा। रर्ण 3.[2] अब सू ी-1 रर्ण 3.[1] से ब े ओबीसी श्रेर्णी क े 10345 अभ्यर्थीी³ का यन करें। इसमें क े वल यूपी क े अति वास वाले ओबीसी अभ्यर्थी< शाविमल होंगे। इस सू ी को सू ी-1-बी कहा Hाएगा। रर्ण 3.[3] अब सू ी-1 रर्ण 3.[1] से ब े अभ्यर्थीी³ से एससी श्रेर्णी क े 8046 अभ्यर्थीी³ का यन करें। इसमें क े वल यूपी क े अति वास वाले अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थी< शाविमल होंगे। इस सू ी को सू ी 1-सी कहा Hाएगा। 8 Writ A. No.18442 of 2018 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रर्ण 3.[4] अब सू ी-1 रर्ण 3.[1] से ब े अभ्यर्थीी³ से एसटी श्रेर्णी क े 766 अभ्यर्थीी³ का यन करें। इसमें यूपी क े अति वास वाले क े वल एसटी अभ्यर्थी< शाविमल होंगे। इस सू ी को सू ी 1-डी कहा Hाएगा। रर्ण 3.[5] यविद सू ी-1-सी में अभ्यर्थीी³ की संख्या अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थीी³ क े लिलए अपेतिक्ष संख्या 8046 से कम है, ो कमी, यविद उपलब् हो, रर्ण 3.[4] क े बाद शेष ब े एसटी अभ्यर्थीी³ से पूरी की Hाएगी। यविद एससी का आवश्यक कोटा अ ूरा रह ा है, ो कमी क े पदों की संख्या को अलग से विदखाया Hाना ाविहए। इसी प्रकार यविद अनुसूति HनHाति क े अभ्यर्थीी³ की संख्या कम हो ो रर्ण 3.[3] क े बाद शेष अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थीी³ से भरी Hाएगी। यविद एसटी की आवश्यक ा अभी भी अ ूरी रह ी है, ो कमी क े पदों की संख्या को अलग से विदखाया Hाना ाविहए। रर्ण 3.[6] इस प्रकार अभ्यर्थीी³ की ार सूति यां इस प्रकार ैयार की Hाएंगी: सू ी 1-ए (ओसी) सू ी 1-बी (ओबीसी) सू ी 1-सी (एससी) सू ी 1-डी (एसटी) 1915[8] में विकसी राज्य क े सामान्य, ओबीसी एसटी शाविमल होंगे 10345 (क े वल उ.प्र. क े विनवासी ओबीसी) 8046 (क े वल एससी उ.प्र. क े विनवासी) 766 (क े वल एसटी उ.प्र. क े विनवासी) रर्ण 4 लिलस्ट 1 से ब े अभ्यर्थिर्थीयों की अलग सू ी ैयार करें Hो सू ी 1-A, 1-B,1-C और 1-D में शाविमल न हों। इसे सू ी-1 कहा Hाएगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रर्ण 4.[1] अब सू ी-1-ए से सामान्य श्रेर्णी (यूपी का अति वास) से संबंति डीएफएफ अभ्यर्थीी³ की संख्या की विगन ी करें। अभ्यर्थी< ओबीसी/एससी/एसटी श्रेर्णी क े नहीं होने ाविहए। यविद अभ्यर्थीी³ की संख्या 383 या अति क है, ो क ु छ भी करने की आवश्यक ा नहीं है, अन्यर्थीा डीएफएफ से संबंति सामान्य श्रेर्णी से कम पड़ रहे अभ्यर्थीी³ का यन सू ी-2 (क े वल ओबीसी, एससी और एसटी वग' से गैर संबंति अभ्यर्थी<) से करें और सामान्य श्रेर्णी डीएफएफ, पूव' सैविनकों, मविहला और होमगाड' अभ्यर्थीी³ (कोई भी अभ्यर्थी< Hो क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए पात्र है) को छोड़कर सू ी-1-ए से समान संख्या में अभ्यर्थीी³ को हटाने क े बाद उन्हें समायोसिH /सस्थिम्मलिल करें। उच्च न्यायालय ने ब विनम्नानुसार विनदUणिश विकया- “इसलिलए इन रिरट याति काओं को राज्य क े प्रत्युत्तरदा ाओं को इस विनदUश क े सार्थी आगे बढ़ने और सति व क े व्यविक्तग हलफनामे क े सार्थी दालिखल नोट में दी गयी प्रविKया क े सख् अनुपालन में यन प्रविKया पूरी करने का विनदUश विदया Hा ा है। इस आदेश को पारिर कर े समय इस न्यायालय ने याति काक ा'ओं की व्यविक्तग णिशकाय ों या आपलित्तयों पर विव ार नहीं विकया है और क े वल यर्थीा उपरोक्त उद्धृ प्रमुख कर्थीनों पर विव ार विकया है।इसक े मद्देनHर, याति काक ा'ओं द्वारा विकये गए सभी व्यविक्तग दावों को अंति म परिरर्णाम की घोषर्णा क े बाद विकया Hा सक ा है और उस संबं में मेरिरट क े आ ार पर सभी क³ का विवक¨प होगा।”
13. आवेदकों की ओर से उपस्थिस्र्थी वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री विवभा दत्ता माखीHा और श्री गोपाल शंकरनारायर्णन ने कहा विक राज्य द्वारा लिलया गया स्टैंड इस न्यायालय द्वारा विन ा'रिर सिसद्धां ों क े पूरी रह से विवपरी है और उच्च न्यायालय क े आदेश में विनकाले गये विनष्कष' सिHन का अवलंब लिलया गया है,भी गल र्थीे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. राज्य की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अपर महाति वक्ता श्री विवनोद विदवाकर, ने कहा विक 16.03.2016 विदनांविक आदेश को इस न्यायालय द्वारा आलोक क ु मार सिंसह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य[9] क े मामलें में अपने विनर्ण'य में मान्य ा दी गई र्थीी और राज्य उच्च न्यायालय की यर्थीोक्त विटप्पणिर्णयों द्वारा बाध्य होने क े कारर्ण 'सामान्य मविहला श्रेर्णी' क े पदों क े सापेक्ष 'ओबीसी मविहला श्रेर्णी' अभ्यर्थीी³ क े दावे पर विव ार नहीं विकया
15. इस स् र पर, राज्य सरकार द्वारा अपने लिललिख कर्थीन में अपनाई गयी स्थिस्र्थीति को भी संदर्थिभ विकया Hाना ाविहए-
16. इस प्रकार, रिरकॉड' में स्वीक ृ या माने गये थ्य विनम्नानुसार हैं:- (क) इस न्यायालय द्वारा अपने आदेश विदनांविक 24.07.2019 में Hारी विनदUशों क े अनुपालन में, योग्य ा क े अनुसार 329510 पदों का यन और सरकार की आरक्षर्ण नीति क े अनुरूप राज्य सरकार द्वारा विकया गया र्थीा।
10 Though the Order dated 24.07.2019 mentioned the figure to be 3294 (2312+982), according to the State, the actual figure is 3295. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ख) 11.11.2019 को घोविष परिरर्णामों क े अनुसार 188 पद 'सामान्य मविहला श्रेर्णी' में भरे गए र्थीे। ग) उक्त 188 पदों को भरने क े दौरान, 'ओबीसी मविहला अभ्यर्थीी³' क े दावे पर विव ार नहीं विकया गया/ Hोड़ा नहीं गया। घ) 'सामान्य मविहला' की श्रेर्णी में विनयुक्त अंति म अभ्यर्थी< को 274.8298 अंक विमले र्थीे। ङ) आवेदक सं. 1 सुश्री सोनम ोमर ने 276.5949 अंक प्राप्त विकया र्थीा यानी 274.8298 पाने वाले अभ्यर्थी< से अति क लेविकन उनक े दावे पर विव ार नहीं विकया गया। ) ऐसे 21 आवेदक Hो 'ओबीसी मविहला' की श्रेर्णी से आ े हैं, इस न्यायालय क े समक्ष हैं सिHन्होंने 274.8928 अंक से अति क अंक प्राप्त विकया। इन स्वीक ृ थ्यों की पृष्ठभूविम में, 'ओबीसी मविहला श्रेर्णी' का 'सामान्य मविहला श्रेर्णी' क े संबं में दावों पर विव ार करने से इनकार करने का राज्य सरकार का काय' व 'मान मामले में विव ारा ीन है। यह उल्लेख विकया Hाना ाविहए विक विकसी भी 'एससी मविहला श्रेर्णी' क े अभ्यर्थी< ने सिHनका यन नहीं विकया गया र्थीा, 274.8928 से अति क अंक हासिसल विकए र्थीे इसलिलए, आवेदक सं. 2 और अन्य समान रूप से स्थिस्र्थी 'एससी मविहला श्रेर्णी' अभ्यर्थीी³ का दावा एक ही पायदान पर नहीं है।
17. आरंभ में, इस पर विव ार करने की आवश्यक ा है विक क्या आलोक क ु मार सिंसह क े विनर्ण'य में 16.03.2016 विदनांविक आदेश को मान्य ा दी र्थीी, Hैसा ऊपर कहा गया है। इस न्यायालय क े विनर्ण'य में विटप्पर्णी र्थीी:mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “9. यहां यह उल्लेख विकया Hा सक ा है विक इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश क े 16-3-2016 को विदये गये विनर्ण'य क े संदभ' में, सिHसकी खंड पीठ द्वारा 29-7-2016 को विदये गये विनर्ण'य एवं आदेश में पुविष्ट की गई र्थीी, परिरर्णाम को अंति म रूप दे े समय अपनाया Hाने वाला क्षैति H आरक्षर्ण, एक और संशोति अंति म परिरर्णाम 29-11-2016 को प्रकाणिश विकया गया र्थीा। ूंविक इस आ ार पर कोई णिशकाय नहीं की गयी है, इसलिलए हमने इस रह की ुनौ ी और इस रह क े विनदUशों क े परिरर्णामस्वरूप परिरर्णामों क े संबं में विववरर्ण में Hाने से परहेH विकया है।” घटनाओं का वर्ण'न क े वल 16.03.2016 विदनांविक आदेश क े प्रभाव पर ध्यान देने क े लिलए और अपील में इसकी अणिभपुविष्ट क े लिलए र्थीा, सिHसक े परिरर्णामस्वरूप संशोति अंति म सू ी 29.11.2016 को प्रकाणिश की गई र्थीी। Hैसा विक विटप्पणिर्णयों से संक े विमल ा है, इस न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय में दी गयी ुनौ ी क े विववरर्ण पर विव ार नहीं विकया गया क्योंविक इस रह क े विव ार क े लिलए कोई अवसर उत्पन्न नहीं हुआ र्थीा। इसलिलए, हम इस कर्थीन को खारिरH कर े हैं विक 16.03.2016 विदनांविक आदेश इस न्यायालय द्वारा अनुमोविद है।
18. राज्य सरकार की ओर से विकये गये काय³ की वै ा और शुद्ध ा पर विव ार कर े हुए पहले कदम क े रूप में, हम इस न्यायालय क े क ु छ ऐसे विनर्ण'यों पर ध्यान दे सक े हैं सिHनमें क्षैति H आरक्षर्ण क े मुद्दे पर विव ार विकया गया र्थीा: ए) इंद्रा साहनी एवं अन्य बनाम भार संघ एवं अन्य11 क े मामले में स्वंय एवं ीन न्याया ीशों की ओर से बोल े हुए न्यायमूर्ति Hीवन रेड्डी ने विनम्नानुसार विटप्पर्णी की:-
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “812. हमारा यह म भी है विक 50% का यह विनयम क े वल अनुच्छेद 16 (4) क े अ ीन बनाए गए विपछड़े वग³ क े पक्ष में आरक्षर्ण पर लागू हो ा है। इस बिंबदु पर र्थीोड़ा स्पष्टीकरर्ण विदया Hाना ाविहए: सभी आरक्षर्ण एक ही प्रक ृ ति क े नहीं हो े। दो प्रकार क े आरक्षर्ण हो े हैं, Hो सुविव ा क े लिलए, 'ऊध्वा' र आरक्षर्ण' और 'क्षैति H आरक्षर्ण' कहे Hा सक े हैं। अनुसूति Hाति यों, अनुसूति HनHाति यों और अन्य विपछड़े वग³ [अनुच्छेद 16 (4) क े अ ीन] क े पक्ष में आरक्षर्ण को ऊध्वा' र आरक्षर्ण कहा Hा सक ा है Hबविक शारीरिरक रूप से विवकलांग [अनुच्छेद 16 क े खंड (1) क े ह ] क े पक्ष में आरक्षर्ण को क्षैति H आरक्षर्ण कहा Hा सक ा है। ऊध्वा' र आरक्षर्ण में क्षैति H आरक्षर्ण इंटरलॉबिंकग आरक्षर्ण कहा Hा ा है। उदाहरर्ण क े लिलए, मान लीसिHए विक रिरविक्तयों का 3% शारीरिरक रूप से विवकलांग व्यविक्तयों क े पक्ष में आरतिक्ष है; यह अनुच्छेद 16 क े खंड (1) से संबंति आरक्षर्ण होगा। इस श्रेर्णी क े सापेक्ष ुने गए व्यविक्तयों को उपयुक्त श्रेर्णी में रखा Hाएगा; यविद वह एससी श्रेर्णी से संबंति है ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उस श्रेर्णी में रखा Hाएगा; इसी रह, यविद वह खुली प्रति योविग ा (ओसी) श्रेर्णी से संबंति है, ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उस श्रेर्णी में रखा Hाएगा। इन क्षैति H आरक्षर्णों क े लिलए उपबं करने क े प‹ा ् भी, विपछड़े वग' क े नागरिरकों क े पक्ष में आरक्षर्ण का प्रति श बना रह ा है-और वही रहना ाविहए। इसी रह कई राज्यों में इन आरक्षर्णों को विनकाला Hा ा है और इस प्रविKया को Hारी न रखने का कोई कारर्ण नहीं है।” बी) स्वाति गुप्ता (सुश्री) बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य12, क े मामले में शासनादेश विदनांविक 17.05.1994 क े पैरा 2 क े प्रभाव पर इस न्यायालय क े दो न्याया ीशों की पीठ ने विव ार विकया र्थीा और यह कहा गया र्थीा:-
3. इसी रह, सामान्य श्रेर्णी क े लिलए 35% सीटों आरतिक्ष करने वाले सक ु' लर में अन्य दोषों को हटा विदया गया है। ऊध्वा' र आरक्षर्ण अब सामान्य श्रेर्णी क े
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लिलए 50% और अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और विपछड़े वग³ क े लिलए 50% है। पहले क े सक ु' लर में उसिल्ललिख विवणिभन्न श्रेणिर्णयों क े लिलए 15% आरक्षर्ण, सिHसने ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े कारर्ण सामान्य श्रेर्णी को घटाकर 35% कर विदया, अब संशोति परिरपत्र में इसे सभी सीटों पर विवस् ारिर विकया गया है।आरक्षर्ण सामान्य श्रेर्णी में नहीं है।संशोति परिरपत्र सीपीएमटी की सभी सीटों को दो श्रेणिर्णयों में विवभासिH कर ा है -एक, सामान्य और अन्य आरतिक्ष । दोनों को 50 प्रति श आवंविट विकया गया है। परिरपत्र क े पैरा 2 में ब ाया गया है विक Hो अभ्यर्थी< योग्य ा क े आ ार पर ुने Hा े हैं और पैरा 1 में उसिल्ललिख श्रेर्णी क े हैं सामान्य या आरतिक्ष श्रेर्णी में समायोसिH विकए Hाएंगे इस आ ार पर विक वे विकस श्रेर्णी से संबंति हैं। इस रह का आरक्षर्ण इस न्यायालय द्वारा इंद्रा साहनी क े मामले में Hो कहा गया है उसक े विवपरी नहीं है। ऐसे व्यविक्तयों क े लिलए आरक्षर्ण विकया Hाना ाविहए र्थीा या नहीं, इसे ुनौ ी नहीं दी गई र्थीी, इसलिलए, इस न्यायालय को इसकी Hां करने की आवश्यक ा नहीं है।” सी) अविनल क ु मार गुप्ता एवं अन्य बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य13 क े मामले में, इस न्यायालय क े दो न्याया ीशों की एक पीठ ने समग्र आरक्षर्ण की अव ारर्णा को क ं पाट'मेंटल आरक्षर्ण क े सापेक्ष समझाया और ऊध्वा' र और क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए सीटें भरने क े दौरान उठाए Hाने वाले कदमों को विनरूविप विकया- “15. 17-12-1994 की संशोति अति सू ना और लखनऊ विवश्वविवद्यालय द्वारा Hारी पूव क्त त्रुविटशो न पर साव ानीपूव'क विव ार करने पर, हमारा विव ार है विक उसमें विनयोसिH अस्पष्ट भाषा क े मद्देनHर, इस प्रश्न का एक विनति‹ उत्तर देना संभव नहीं है विक क्या क्षैति H आरक्षर्ण समग्र आरक्षर्ण है या क ं पाट'मेंटल आरक्षर्ण है। इन दो पदों की व्याख्या कर सक े हैं। Hहां क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए आरतिक्ष सीटें आनुपाति क रूप से ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण में विवभासिH हैं और अं र -हस् ां रर्णीय नहीं हैं, यह क ं पाट'मेंटल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आरक्षर्ण का मामला होगा। हम Hो कह े हैं, उसे उदाहरर्ण से स्पष्ट कर सक े हैं: इस मामले को लें; क ु ल 746 सीटों में से, 112 सीटें (पंद्रह प्रति श का प्रति विनति त्व) विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ द्वारा भरी Hानी ाविहए; सार्थी ही, अन्य विपछड़ा वग' क े पक्ष में सामासिHक आरक्षर्ण 27% है सिHसका अर्थी' है ओबीसी क े लिलए 201 सीटें; यविद 112 विवशेष आरक्षर्ण सीटों को भी ओबीसी श्रेर्णी क े बी आनुपाति क रूप से विवभासिH विकया Hा ा है, ो 30 सीटें ओबीसी श्रेर्णी में आवंविट की Hाएंगी; दूसरे शब्दों में, ीस विवशेष श्रेर्णी क े छात्रों को ओबीसी श्रेर्णी में समायोसिH विकया Hा सक ा है; लेविकन ओबीसी से संबंति क े वल दस विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थी< उपलब् हैं, ो ये दस अभ्यर्थी<, विनति‹ रूप से ओबीसी कोटा क े बी आवंविट विकए Hाएंगे, लेविकन शेष बीस सीटें ओसी श्रेर्णी में स्र्थीानां रिर नहीं की Hा सक ी हैं (वे क े वल ओबीसी अभ्यर्थीी³ क े लिलए उपलब् होंगी) या उस प्रयोHन क े लिलए, विकसी अन्य श्रेर्णी में; यह ऐसा होगा विक ाहे विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ की अपेतिक्ष संख्या (373 में से 56) ओसी श्रेर्णी में उपलब् हों या नहीं; विवशेष आरक्षर्ण ऊध्वा' र आरक्षर्ण वग³ (ओसी, ओबीसी, एससी और एसटी) में स्थिस्र्थीर वग' होगा। इसक े विवपरी, समग्र आरक्षर्ण में क्या हो ा है विक विवशेष आरक्षर्ण छात्रों को उनक े संबंति सामासिHक आरक्षर्ण श्रेर्णी में आवंविट कर े समय, विवशेष आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों क े पक्ष में समग्र आरक्षर्ण को अभी भी विकया Hाना हो ा है ।इसका म लब यह है विक उपरोक्त ति त्रर्ण में, बीस शेष सीटों को ओसी श्रेर्णी में स्र्थीानां रिर विकया Hाएगा, सिHसका अर्थी' है विक ओसी श्रेर्णी में विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ की संख्या 56 + 20 = 76 होगी।इसक े अलावा, यविद एससी और एसटी से संबंति कोई विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थी< उपलब् नहीं है, ो एससी और एसटी में विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ क े लिलए सीटों की आनुपाति क संख्या भी ओसी श्रेर्णी में स्र्थीानां रिर हो Hा ी है। परिरर्णाम यह होगा विक 112 विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ का कोटा पूरा करने क े लिलए ओसी श्रेर्णी में 102 विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ को समायोसिH करना पड़ेगा. इसका उ¨टा भी हो सक ा है, Hो आरतिक्ष श्रेणिर्णयों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में अभ्यर्थीी³ क े सार्थी पक्षपा होगा। यह विनति‹ रूप से, स्पष्ट है विक ओसी, ओबीसी, एससी और एसटी कोटा नहीं बदला Hाएगा।
16. अब 17-12-1994 की संशोति अति सू ना पर आ े हैं इसमें कहा गया है विक 'क्षैति H आरक्षर्ण सभी मेतिडकल कॉलेH क े सभी पाठ्यKमों की कु ल सीटों पर विदया Hाना ाविहए... ”। पक्षकारों द्वारा इन शब्दों की व्याख्या दो अलग-अलग रीकों से की Hा रही है; एक कह ा है विक यह समग्र आरक्षर्ण है Hबविक दूसरा कह ा है विक यह क ं पाट'मेंटल है। पैरा 2 में कहा गया है विक उपरोक्त विवशेष श्रेणिर्णयों क े ह ुने गए अभ्यर्थीी³ को अनुसूति Hाति /अनुसूति HनHाति /अन्य विपछड़ा वग'/सामान्य श्रेणिर्णयों क े ह रखा Hाएगा। उदाहरर्ण क े लिलए, यविद आरक्षर्ण क े आ ार पर ुने गए स्व ंत्र ा सेनानी श्रेर्णी का अभ्यर्थी< अनुसूति Hाति का है, ो उसे अनुसूति Hाति क े लिलए आरतिक्ष सीट क े सापेक्ष समायोसिH विकया Hाएगा। याति काक ा'ओं का क ' यह है विक इससे क ं पाट'मेंटल आरक्षर्ण की पुविष्ट हो ी है। हो सक ा है या नहीं हो सक ा। ऐसा प्र ी हो ा है विक उक्त अति सू ना Hारी कर े समय, सरकार समग्र क्षैति H आरक्षर्ण और क ं पाट'मेंटल क्षैति H आरक्षर्ण क े बी अं र क े प्रति स े नहीं र्थीी। विफलहाल, इसकी अणिभक¨पना में उस स्थिस्र्थीति की क¨पना नहीं की गयी होगी Hो अब उत्पन्न हुई है। यह शायद कारर्ण है विक इस पहलू को स्पष्ट शब्दों में नहीं ब ाया गया है।
17. यह बेह र हो ा-और उत्तरदा ा अपने भविवष्य क े माग'दश'न क े लिलए इस पर ध्यान दें -विक क्षैति H आरक्षर्ण प्रदान कर े समय, उन्हें यह विनर्किदष्ट करना ाविहए विक क्या क्षैति H आरक्षर्ण क ं पाट'मेंटल है या समग्र है। थ्य की बा क े रूप में, यह मानना पूरी रह से सही नहीं हो सक ा है विक उत्तर प्रदेश सरकार को 'समग्र क्षैति H आरक्षर्ण' और 'क ं पाट'मेंटल क्षैति H आरक्षर्ण' क े बी इस अं र क े बारे में प ा नहीं र्थीा, क्योंविक स्वाति गुप्ता क े मामले में विदये गये विनर्ण'य से यह प्र ी हो ा है विक 17-5-1994 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा Hारी पहली अति सू ना में मविहलाओं क े लिलए ीस प्रति श आरक्षर्ण को एक-दूसरे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आरक्षर्ण में विवभासिH विकया गया र्थीा। उदाहरर्ण क े लिलए, विपछड़े वग³ क े लिखलाफ यह कहा गया र्थीा विक उनक े पक्ष में आरक्षर्ण का प्रति श बाईस प्रति श र्थीा, लेविकन सार्थी ही यह भी कहा गया विक उन सीटों का ीस प्रति श मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष र्थीा। प्रत्येक ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े सापेक्ष, एक समान प्राव ान विकया गया र्थीा, सिHसका अर्थी' र्थीा विक मविहलाओं क े पक्ष में उक्त क्षैति H आरक्षर्ण एक 'क ं पाट'मेंटल क्षैति H आरक्षर्ण' र्थीा। हमारा विव ार है विक विकसी भी Hविटल ा और अमू ' समस्याओं से ब ने क े लिलए, यह बेह र होगा विक भविवष्य में क्षैति H आरक्षर्ण को ऊपर ब ाए गए अर्थी' में क ं पाट'मेंटल विकया Hाए। दूसरे शब्दों में, आवेदन आमंवित्र करने वाली अति सू ना में न क े वल क्षैति H आरक्षर्ण (ओं) का प्रति श होना ाविहए, बस्थि¨क सामासिHक आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों में से प्रत्येक में उनक े लिलए आरतिक्ष सीटों की संख्या को भी विनर्किदष्ट करना ाविहए। यविद ऐसा नहीं विकया Hा ा है ो हमेशा एक या दूसरे ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेर्णी की संभावना रहेगी Hो इस मामले में हुई है। Hैसा विक यहां ब ाया गया है, विवशेष आरक्षर्ण श्रेर्णी क े लिलए 112 सीटों में से 110 सीटें अक े ले ओसी श्रेर्णी से ली गई हैं-और कोई भी ओबीसी से या एससी या एसटी से नहीं। यह विकसी वष' उ¨टा भी हो सक ा है।
18. अब, सीटों को भरने क े लिलए संशोति अति सू ना द्वारा विन ा'रिर प्रविKया की शुद्ध ा पर बा कर े हुए, पंद्रह प्रति श विवशेष आरक्षर्ण सीटों को पहले भरने का विनदUश देना और विफर ओसी (मेरिरट) कोटा लेना (इसक े बाद ओबीसी, एससी और एसटी कोटा भरना) गल र्थीा। उति और सही काय' पहले योग्य ा क े आ ार पर ओसी कोटा (50%) को भरना है; विफर प्रत्येक सामासिHक आरक्षर्ण कोटा को भरें, अर्थीा', एससी, एसटी और बीसी; ीसरा कदम यह प ा लगाना होगा विक उपरोक्त आ ार पर विवशेष आरक्षर्ण से संबंति विक ने अभ्यर्थीी³ का यन विकया गया है। यविद क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए विनय कोटा पहले से ही सं ुष्ट है-यविद यह समग्र क्षैति H आरक्षर्ण है - ो कोई और सवाल नहीं उठ ा। लेविकन अगर यह इ ना सं ुष्ट नहीं है, ो विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थीी³ की अपेतिक्ष संख्या को अभ्यर्थीी³ की संबंति संख्या को हटाकर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उनक े संबंति सामासिHक आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों क े सापेक्ष लिलया और समायोसिH विकया Hाना ाविहए। (यविद, हालांविक, यह क ं पाट'मेंटल क्षैति H आरक्षर्ण का मामला है, ो Hैसा विक ऊपर कहा गया है, सत्यापन और समायोHन की प्रविKया को ऊध्वा' र आरक्षर्ण में से प्रत्येक पर अलग से लागू विकया Hाना ाविहए। ऐसे मामले में, विवशेष श्रेणिर्णयों क े पक्ष में पंद्रह प्रति श का आरक्षर्ण, क ु ल विमलाकर, सं ुष्ट हो सक ा है या सं ुष्ट नहीं हो सक ा है। ) क्योंविक संशोति अति सू ना में सीटों को भरने की अलग विवति प्रदान की गयी इसने आंणिशक रूप से इसे और खराब कर विदया है Hहां पूरे विवशेष आरक्षर्ण कोटा को लगभग विवशेष रूप से ओसी कोटा क े सापेक्ष समायोसिH विकया गया है। ” (प्रभाव वर्ति ) डी) राHेश क ु मार डारिरया आविद बनाम राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग एवं अन्य14 क े मामले में इस न्यायालय क े ीन न्याया ीशों की एक पीठ ने ऊध्वा' र और क्षैति H आरक्षर्ण क े बी अं र पर विनम्नानुसार विव ार विकया-
8. हम इस मामले क े थ्यों पर विव ार करने से पहले दो संबंति पहलुओं का भी उल्लेख कर सक े हैं। पहला क्षैति H आरक्षर्ण क े विववरर्ण क े बारे में है। उदाहरर्ण क े लिलए, यविद 200 रिरविक्तयां हैं और 15% एससी क े लिलए ऊध्वा' र आरक्षर्ण है और 30% मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण है, ो एससी क े लिलए आरतिक्ष पदों की संख्या का उति विववरर्ण होना ाविहए: एससी क े लिलए:30 पद, सिHनमें से 9 पद मविहलाओं क े लिलए हैं। ” हम पा े हैं विक कई बार यह गल रीक े से वर्थिर्ण हो ा है: एससी क े लिलए: 21 पुरुषों क े लिलए पद और मविहलाओं क े लिलए 9 पद सभी 30 पदों में हैं। Hाविहर है,' पुरुष 'या' पुरुषों 'की कोई आरक्षर्ण श्रेर्णी नहीं हो सक ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
9. दूसरा ऊध्वा' र आरक्षर्ण और क्षैति H आरक्षर्ण की प्रक ृ ति क े बी अं र से संबंति है। अनुच्छेद 16 (4) क े अ ीन अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' क े पक्ष में सामासिHक आरक्षर्ण 'ऊध्वा' र आरक्षर्ण' हैं। अनुच्छेद 16 (1) या 15 (3) क े ह शारीरिरक रूप से विवकलांग, मविहलाओं आविद क े पक्ष में विवशेष आरक्षर्ण '' क्षैति H आरक्षर्ण '' हो ा है। Hहां अनुच्छेद 16 (4) क े ह एक विपछड़े वग' क े पक्ष में एक ऊध्वा' र आरक्षर्ण विकया Hा ा है, ऐसे विपछड़े वग' क े अभ्यर्थी< गैर-आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक े हैं और यविद उन्हें अपनी योग्य ा क े आ ार पर गैर - आरतिक्ष पदों पर विनयुक्त विकया Hा ा है, ो उनकी संख्या को संबंति विपछड़ा वग' क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hाएगा। इसलिलए, यविद अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थीी³ की संख्या, Hो अपनी योग्य ा क े आ ार पर, खुली प्रति योविग ा वाली रिरविक्तयों क े लिलए यविन हो Hा े हैं, अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थीी³ क े लिलए आरतिक्ष पदों क े प्रति श क े बराबर या ाहे अति क हों, यह नहीं कहा Hा सक ा है विक अनुसूति Hाति क े लिलए आरक्षर्ण कोटा भर गया है। संपूर्ण' आरक्षर्ण कोटा बरकरार रहेगा और खुली प्रति योविग ा श्रेर्णी क े ह यविन लोगों क े अलावा उपलब् रहेगा। (इंद्रा साहनी, आर.क े. सभरवाल बनाम पंHाब राज्य15, भार संघ बनाम वीरपाल सिंसह ौहान16 और रिर ेश आर. शाह बनाम डॉ. वाई.एल. यामुले17 )। लेविकन ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण पर लागू पूव क्त सिसद्धां क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण पर लागू नहीं होगा। Hहां अनुसूति Hाति क े लिलए सामासिHक आरक्षर्ण क े भी र मविहलाओं क े लिलए विवशेष आरक्षर्ण प्रदान विकया Hा ा है, वहां योग्य ा क े Kम में अनुसूति Hाति क े लिलए कोटा भरने क े लिलए उति प्रविKया पहले है और विफर उनमें से अभ्यर्थीी³ की संख्या का प ा लगाना हो ा Hो विवशेष आरक्षर्ण समूह से संबंति हों। यविद ऐसी सू ी में मविहलाओं की संख्या विवशेष आरक्षर्ण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कोटा की संख्या क े बराबर या उससे अति क है, ो विवशेष आरक्षर्ण कोटा क े लिलए आगे यन की आवश्यक ा नहीं है।क े वल अगर कोई कमी है, ो अनुसूति Hाति की मविहलाओं की अपेतिक्ष संख्या को अनुसूति Hाति से संबंति सू ी क े नी े से उ नी संख्या क े अभ्यर्थीी³ को हटाकर लेना होगा। इस सीमा क, क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण से णिभन्न हो ा है। इस प्रकार ऊध्वा' र आरक्षर्ण कोटा क े भी र योग्य ा पर यविन मविहलाओं को मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण क े सापेक्ष माना Hाएगा। आइए हम एक उदाहरर्ण द्वारा स्पष्ट कर े हैं: यविद 19 पद अनुसूति Hाति क े लिलए आरतिक्ष हैं (सिHनमें से मविहलाओं क े लिलए कोटा ार है), ो 19 अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थीी³ को सफल योग्य अभ्यर्थीी³ में से योग्य ा क े अनुसार पहले सू ीबद्ध विकया Hाना ाविहए। यविद 19 अभ्यर्थीी³ की ऐसी सू ी में ार एससी मविहला अभ्यर्थी< हैं, ो और एससी मविहला अभ्यर्थी< को शाविमल कर आगे सविह सू ी में छेड़छाड़ करने की आवश्यक ा नहीं है। दूसरी ओर, यविद 19 एससी अभ्यर्थीी³ की सू ी में क े वल दो मविहला अभ्यर्थी< हैं, ो योग्य ा क े अनुसार अगले दो एससी मविहला अभ्यर्थीी³ को सू ी में शाविमल करना होगा और ऐसी सू ी क े नी े से अभ्यर्थीी³ की इसी संख्या को हटाना होगा, ाविक यह सुविनति‹ विकया Hा सक े विक अंति म 19 यविन एससी अभ्यर्थीी³ में ार मविहला एससी अभ्यर्थी< हों।(लेविकन यविद 19 अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थीी³ की सू ी में ार से अति क मविहला अभ्यर्थी< हैं, Hो अपनी योग्य ा क े आ ार पर ुने गए हैं, ो वे सभी सू ी में रहेंगे और इस आ ार पर अति रिरक्त मविहला अभ्यर्थीी³ को हटाने का कोई सवाल ही नहीं है विक 'अनुसूति Hाति की मविहलाओं' का यन ार क े विन ा'रिर आं रिरक कोटा से अति क हो गया है।)
10. इस मामले में, सामान्य श्रेर्णी (खुली प्रति योविग ा) क े ह ुने Hाने वाले अभ्यर्थीी³ की संख्या 59 र्थीी, सिHसमें से 11 मविहलाओं क े लिलए विन ा'रिर विकए गए र्थीे। Hब 261 सफल अभ्यर्थीी³ में से पहले 59 को योग्य ा क े अनुसार लिलया गया और सू ीबद्ध विकया गया, ो इसमें 11 मविहला अभ्यर्थी< र्थीी, Hो 'सामान्य श्रेर्णी की मविहलाओं' क े लिलए कोटा क े बराबर र्थीे। इस प्रकार mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मविहलाओं क े लिलए विवशेष आरक्षर्ण क े ह मविहला अभ्यर्थीी³ क े विकसी और यन की आवश्यक ा नहीं र्थीी। लेविकन आरपीएससी ने Hो विकया वह यह विक योग्य ा क े Kम में क े वल पहले 48 अभ्यर्थीी³ को ले लिलया (सिHसमें 11 मविहलाएं र्थीीं) और उसक े बाद, मविहला अभ्यर्थीी³ से सामान्य श्रेर्णी क े ह अगले 11 पदों को भर विदया। न ीH न, हम पा े हैं विक सभी 59 सामान्य श्रेर्णी क े अभ्यर्थीी³ में से 22 मविहलाएं ुन ली गयी सिHनमें ग्यारह मविहलाएं अपनी मेरिरट क े आ ार पर ुनी गयी र्थीी। ( यन सू ी में अभ्यर्थी< Kमांक 2, 3, 4, 5, 9, 19, 21, 25, 31, 35 और 41) और अन्य ग्यारह ( यन सू ी में अभ्यर्थी< Kमांक 54, 61,62,63,66,74,75,77,78, और 80) Hो “सामान्य श्रेर्णी मविहला” कोटा आरक्षर्ण क े ह शाविमल र्थीीं। यह स्पष्ट रूप से अननुमन्य है। आरपीएससी द्वारा विकया गया यन मविहलाओं क े लिलए 20% आरक्षर्ण को क्षैति H आरक्षर्ण क े भी र उध्वा' र आरक्षर्ण मानने क े बHाय ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े समान मानने क े बराबर र्थीा।
11. इसी रह, हम पा े हैं विक ओबीसी क े लिलए 24 पदों क े संबं में, 19 अभ्यर्थीी³ का यन ओबीसी अभ्यर्थीी³ में से योग्य ा क े अनुसार आरपीएससी द्वारा विकया गया र्थीा, सिHसमें ीन मविहला अभ्यर्थी< शाविमल र्थीीं। इसक े बाद, पां और मविहलाओं को “ओबीसी मविहला” श्रेर्णी क े ह ुना गया बHाय क े वल दो और को Hोड़ने क े, Hो कमी र्थीी। इस प्रकार यन सू ी में पाए गए 24 ओबीसी अभ्यर्थीी³ में से सभी 8 मविहला अभ्यर्थीी³ र्थीी। सही रास् ा योग्य ा क े अनुसार 24 ओबीसी अभ्यर्थीी³ को सू ीबद्ध करना र्थीा और विफर उनमें से मविहला अभ्यर्थीी³ की संख्या का प ा लगाना र्थीा, और क े वल मविहलाओं क े लिलए पां क े कोटे में होने वाली कमी को भरना र्थीा।” (प्रभाव वर्ति ) ई) क े. क ृ ष्र्ण मूर्ति (डॉ.) एवं अन्य बनाम भार संघ एवं अन्य18 क े मामले में, इस न्यायालय की संविव ान पीठ ने कहा विक सामान्य श्रेर्णी से संबंति मविहलाओं क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लिलए विन ा'रिर सीटों का विहसाब नहीं विकया Hा ा, अगर विकसी को यह प ा लगाना है विक क्या 50% की ऊपरी सीमा का उल्लंघन विकया गया है। उविक्त विनम्नानुसार र्थीी:- “44. सिHस विव ान को ुनौ ी दी गयी है, यह क ' विदया गया र्थीा विक उनमें से अति कांश क े ह 50% सीलिंलग को पार नहीं विकया Hाएगा क्योंविक यह क े वल ऊध्वा' र आरक्षर्ण (यानी अनुसूति Hाति /अनुसूति HनHाति /ओबीसी क े पक्ष में सांप्रदातियक आ ार पर) ही इसे इस उद्देश्य क े लिलए ध्यान में रखा गया है। हालांविक विनवा'ति स्र्थीानीय विनकायों में मविहलाओं क े पक्ष में 33% आरक्षर्ण है, लेविकन यह एक क्षैति H आरक्षर्ण की प्रक ृ ति में है Hो एससी/एसटी/ओबीसी क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े सार्थी विमला है। ऐसे परिरदृश्य में, सामान्य श्रेर्णी से संबंति मविहलाओं क े कब्Hे वाली सीटों की गर्णना यह प ा लगाने क े उद्देश्य से नहीं की Hा सक ी है विक क्या 50% ऊपरी सीमा का उल्लंघन विकया गया है। ………………………..
64. स्र्थीानीय स्वशासन में विपछड़े वग³ क े पक्ष में आरक्षर्ण की मात्रा क े रूप में स्पष्ट संवै ाविनक माग'दश'न क े अभाव में, मोटा विनयम आनुपाति क आरक्षर्ण का है। हालांविक, हमें इस थ्य पर Hोर देना ाविहए विक एससी/एसटी/ओबीसी क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े संबं में 50% (मात्रात्मक सीमा) की ऊपरी सीमा का उल्लंघन नहीं विकया Hाना ाविहए। इस ऊपरी सीमा को भंग करने क े सवाल पर, याति काक ा'ओं द्वारा दी गई दलीलें र्थीोड़ी गल र्थीीं क्योंविक उन्होंने एससी/एसटी/ओबीसी क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े सार्थी -सार्थी मविहलाओं क े पक्ष में क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए यह दावा विकया र्थीा विक 50% सीमा का क ु छ राज्यों में उल्लंघन विकया गया र्थीा। यह स्पष्ट रूप से स्थिस्र्थीति की गल फहमी र्थीी क्योंविक मविहलाओं क े पक्ष में क्षैति H आरक्षर्ण अनुसूति Hाति /अनुसूति HनHाति /ओबीसी क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े सार्थी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अं रविनविह करने क े लिलए है, क्योंविक बाद की श्रेणिर्णयों क े लिलए आरतिक्ष सीटों में से एक ति हाई को उसी से संबंति मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष विकया Hाना है। इसका म लब यह है विक सामान्य श्रेर्णी की मविहलाओं क े लिलए विन ा'रिर सीटों को नहीं विगना Hा ा, अगर विकसी को यह प ा लगाना है विक 50% की ऊपरी सीमा का उल्लंघन विकया गया है या नहीं। ” (एफ) लोक सेवा आयोग, उत्तरां ल इत्याविद बनाम मम ा विबष्ट एवं अन्य 19 क े मामले में, उच्च न्यायालय का यह म विक कोई नी ू Hोशी, अपनी योग्य ा क े आ ार पर, सामान्य श्रेर्णी में शाविमल विकये Hाने की हकदार र्थीी और इस रह उसे 'उत्तरां ल मविहला' श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष सीटों क े सापेक्ष नहीं लिलया गया; को ुनौ ी दी गयी। इस न्यायालय क े दो न्याया ीशों की पीठ ने विनम्नलिललिख विटप्पणिर्णयों क े सार्थी उच्च न्यायालय क े म को अपास् कर विदया:- “3. 42 पदों में से 26 सामान्य श्रेर्णी द्वारा और 16 आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा भरे गए र्थीे। कु छ मविहला अभ्यर्थिर्थीयों का यन सामान्य श्रेर्णी में विकया गया र्थीा, Hबविक अन्य को उत्तरां ल क े विनवासी क्षैति H आरक्षर्ण का लाभ विदया गया र्थीा। उत्तरदा ा 1, उत्तरां ल उच्च न्यायालय में याति का संख्या 780 वष' 2003 (एम/बी) दायर विकया, सिHसमें मुख्य रूप से इस आ ार पर यन सू ी विदनांविक 31-7-2003 को रद्द करने की मांग की गयी विक उत्तरां ल से संबंति मविहला अभ्यर्थिर्थीयों ने स्वयं को सामान्य श्रेर्णी में यविन होने क े लिलए पात्र बनाने क े लिलए अंक प्राप्त विकए र्थीे। और यविद ऐसा हो ा ो, उत्तरदा ा 1 को आरतिक्ष श्रेर्णी में उत्तरां ल की मविहला होने क े ना े ुना Hा सक ा र्थीा। याति का में यह भी विनवेदन विकया गया र्थीा विक कु छ मविहला अभ्यर्थिर्थीयों को सिHन्होंने न क े वल क्षैति H आरक्षर्ण क े लाभ का दावा विकया है, बस्थि¨क उक्त लाभ क े आ ार पर यविन हैं, ने आवेदन पत्र भरने क े समय अति वास का अपना संबंति प्रमार्ण पत्र प्रस् ु नहीं विकया, लेविकन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उन्होंने बाद क े रर्ण में उक्त प्रमार्ण पत्र प्रस् ु विकया और इसे स्वीकार कर लिलया गया।
4. उच्च न्यायालय ने यन क े रिरकॉड' की Hां करने क े बाद उत्तरदा ा 1 क े क ' को स्वीकार कर लिलया और इस विनष्कष' पर पहुं ा विक अंति म यविन मविहला अभ्यर्थी< सिHसे उत्तरां ल मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण का लाभ विदया गया र्थीा, ने सामान्य श्रेर्णी में अंति म यविन अभ्यर्थी< से अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे। इस प्रकार, उक्त अभ्यर्थी< को सामान्य श्रेर्णी की रिरविक्त क े सापेक्ष विनयुक्त विकया Hाना ाविहए और उत्तरदा ा1 को उत्तरां ल मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण का लाभ दे े हुए विनयुविक्त की पेशकश की Hानी ाविहए। इसलिलए, ये अपीलें की गयीं। ….. ………………...
13. वास् व में, उच्च न्यायालय ने रिरट याति का को क े वल इस आ ार पर अनुमति दी विक क्षैति H आरक्षर्ण को आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों (सामासिHक) क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े रूप में भी लागू विकया Hाना ाविहए, इसने विनम्नानुसार ारिर विकया:- “उपरोक्त क े मद्देनHर, नी ू Hोशी (एसएल नंबर 9, रोल नंबर 12320) को गल रीक े से उत्तरां ल मविहला सामान्य श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष पां सीटों क े सापेक्ष उत्तरदा ा 3/आयोग द्वारा रखा गया है क्योंविक उसने सामान्य अभ्यर्थी< क े रूप में अपनी योग्य ा क े आ ार पर प्रति स्प ा' की है और पां वें अभ्यर्थी< क े रूप में याति काक ा' को उत्तरां ल मविहला सामान्य श्रेर्णी की सीटों क े अन् ग' रखा Hाना ाविहए। स्वीक ृ रूप से, उक्त नी ू Hोशी को प्रति वादी नहीं बनाया गया है।बार में यह कहा गया है विक प्रति वादी बनाने क े लिलए आवेदन विकया गया र्थीा लेविकन रिरकॉड' पर यह दशा'ने क े लिलए कु छ नहीं है विक उक्त आवेदन को कभी अनुमति दी गई र्थीी। इस न्यायालय क े समक्ष कु छ सफल अभ्यर्थीी³ को प्रति वादी बनाने का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रयास विकया गया, लेविकन वे आवेदन इस न्यायालय द्वारा खारिरH कर विदए गए र्थीे।
14. क्षैति H आरक्षर्ण की प्रयोज्य ा पर उच्च न्यायालय द्वारा अपनाया गया दृविष्टकोर्ण इस न्यायालय द्वारा राHेश कु मार डारिरया बनाम राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग क े मामले में प्रति पाविद विवति क े विवपरी है। सिHसमें एक ऐसे ही मुद्दे पर विव ार कर े समय इस न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया:- (एससीसी पृष्ट 790-91, पैरा 9) “9. दूसरा ऊध्वा' र आरक्षर्ण और क्षैति H आरक्षर्ण की प्रक ृ ति क े बी क े अं र से संबंति है। अनुच्छेद 16 (4) क े ह अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' क े पक्ष में सामासिHक आरक्षर्ण 'ऊध्वा' र आरक्षर्ण' हैं। शारीरिरक रूप से विवकलांगों, मविहलाओं आविद क े पक्ष में विवशेष आरक्षर्ण अनुच्छेद 16 (1) या 15 (3) क े अ ीन 'क्षैति H आरक्षर्ण' हैं। Hहां अनुच्छेद 16 (4) क े ह विपछड़े वग' क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण विकया Hा ा है, ऐसे विपछड़े वग' क े अभ्यर्थी<, गैर-आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक े हैं और यविद उन्हें अपनी योग्य ा क े आ ार पर गैर-आरतिक्ष पदों पर विनयुक्त विकया Hा ा है, ो उनकी संख्या को संबंति विपछड़ा वग' क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hाएगा। इसलिलए, यविद अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थी<, Hो अपनी योग्य ा क े आ ार पर, खुली प्रति योविग ा रिरविक्तयों क े लिलए यविन हो Hा े हैं, और उनकी संख्य अनुसूति Hाति क े लिलए आरतिक्ष पदों क े प्रति श से अति क या बराबर है, ो यह नहीं कहा Hा सक ा है विक अनुसूति Hाति क े लिलए आरक्षर्ण कोटा भरा गया है। संपूर्ण' आरक्षर्ण कोटा खुली प्रति योविग ा श्रेर्णी क े ह यविन लोगों क े अलावा बरकरार और उपलब् होगा। (देलिखए इन्द्र साहनी, आर. क े. सभरवाल बनाम पंHाब राज्य, भार संघ बनाम वीरपाल सिंसह ौहान और रिर ेश आर. साह बनाम डॉ. वाई. एल. यामुले)। बिंक ु ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण पर लागू पूव क्त सिसद्धां क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण पर लागू नहीं होगा। मविहलाओं क े लिलए विवशेष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आरक्षर्ण अनुसूति Hाति क े लिलए सामासिHक आरक्षर्ण क े भी र प्रदान विकया Hा ा है, उति प्रविKया पहले योग्य ा क े Kम में अनुसूति Hाति क े लिलए कोटा भरने क े लिलए है और विफर उनमें से अभ्यर्थिर्थीयों की संख्या का प ा लगाना है Hो 'अनुसूति Hाति मविहलाओं' क े विवशेष आरक्षर्ण समूह से संबंति हैं। यविद ऐसी सू ी में मविहलाओं की संख्या विवशेष आरक्षर्ण कोटा की संख्या क े बराबर या उससे अति क है, ो विवशेष आरक्षर्ण कोटा क े लिलए आगे यन की आवश्यक ा नहीं है। क े वल अगर कोई कमी है, ो अनुसूति Hाति की मविहलाओं की अपेतिक्ष संख्या को अनुसूति Hाति से संबंति सू ी क े नी े से संबंति अभ्यर्थिर्थीयों की संख्या को हटाकर लेना होगा। इस हद क, क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण से णिभन्न है। इस प्रकार मविहलाएं ऊध्वा' र आरक्षर्ण कोटा क े भी र योग्य ा पर यविन मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण क े सापेक्ष मानी Hाएगीं Hाएगा। ” (प्रभाव वर्ति )
15. उपरोक्त क े मद्देनHर, यह स्पष्ट है विक उच्च न्यायालय का विनर्ण'य और आदेश राHेश क ु मार डारिरया क े मामले में इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति क े अनुरूप नहीं है। आक्षेविप विनर्ण'य और आदेश अपास् विकये Hाने योग्य है और सभी परिरर्णामी आदेश अप्राप्य और असंग हो Hा े हैं। इस प्रकार, अपील सफल हो ी है और इसे अनुमति दी Hा ी है। रिरट याति का संख्या 780 वष' 2003 (एम/बी) में पारिर 26-10-2005 विदनांविक उच्च न्यायालय का विनर्ण'य और आदेश ए द्द्वारा अपास् विकया Hा ा है। कोई लाग नहीं। ”
19. राHेश क ु मार डारिरया आविद बनाम राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग एवं अन्य क े मामले में विदये गये विनर्ण'य क े पैरा 9 में एक सुस्र्थीाविप सिसद्धां का उल्लेख विकया गया है विक विकसी भी ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों से संबंति अभ्यर्थी<, अपनी योग्य ा क े आ ार पर, ओपन या Hनरल श्रेर्णी में यविन होने का हकदार है और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ऐसी स्थिस्र्थीति में उसका यन इस रह क े ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hाना ाविहए। हम स्पष्ट ा क े लिलए रिर ेश आर शाह बनाम डॉ. वाईएल यामुल एवं अन्य से विनम्नलिललिख अंश को पुन: पेश कर सक े हैं सिHसमें इंद्र साहनी बनाम भार संघ और आर.क े. सभरवाल बनाम पंHाब राज्य क े मामलों में वृहद पीठ क े विनर्ण'य को उद्धृ विकया- “13. इस बा पर कोई विववाद नहीं हो सक ा है विक यविद कोई अभ्यर्थी< अपनी योग्य ा क े आ ार पर भ < होने का हकदार है, ो ऐसे प्रवेश को अनुसूति Hाति या अनुसूति HनHाति या विकसी अन्य आरतिक्ष वग' क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hाना ाविहए क्योंविक यह अनुच्छेद 16 (4) में विनविह संवै ाविनक आदेश क े लिखलाफ होगा।
14. इंद्रा साहनी बनाम भार संघ आम ौर पर मंडल मामले क े विवख्या, क े मामले में, इस न्यायालय ने इस प्रकार ारिर विकया:(एससीसी)पृ. 735, पैरा
811) “इस संबं में यह याद रखना ठीक है विक अनुच्छेद 16 (4) क े ह आरक्षर्ण सांप्रदातियक आरक्षर्ण की रह काम नहीं कर ा है। यह हो सक ा है विक अनुसूति Hाति से संबंति कोई व्यविक्त अपनी योग्य ा क े आ ार पर खुली प्रति योविग ा क े क्षेत्र में ुना Hा ा है; उन्हें अनुसूति Hाति क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hाएगा; उन्हें खुली प्रति योविग ा क े अभ्यर्थिर्थीयों क े रूप में माना Hाएगा। '
15. आर.क े. सभरवाल बनाम पंHाब राज्य क े मामले में इस न्यायालय की संविव ान पीठ ने विनयुविक्त और पदोन्नति और रोस्टर क े सवाल पर विव ार विकया और इस प्रकार ारिर विकया:(एससीसी)पृ. 750, पैरा 4) “Hब विकसी विवशेष संवग' क े संबं में आरक्षर्ण का प्रति श य विकया Hा ा है और रोस्टर आरतिक्ष बिंबदुओं को इंविग कर ा है, ो माना Hाना ाविहए विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आरतिक्ष बिंबदुओं पर विदखाए गए पदों को आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े सदस्यों से भरा Hाना है और सामान्य वग' से संबंति अभ्यर्थिर्थीयों का आरतिक्ष पदों क े सापेक्ष विव ार नहीं विकया Hा सक ा। दूसरी ओर आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< अनारतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक े हैं और उक्त पदों पर उनकी विनयुविक्त की स्थिस्र्थीति में उनकी संख्या को आरक्षर्ण क े प्रति श को पूरा करने क े लिलए Hोड़ा नहीं Hा सक ा है। भार क े संविव ान का अनुच्छेद 16 (4) राज्य सरकार को नागरिरकों क े विकसी विपछड़े वग' क े पक्ष में, सिHनका राज्य की राय में राज्य क े अ ीन सेवाओं में पया'प्त रूप से प्रति विनति त्व नहीं है, विनयुविक्तयों या पदों क े आरक्षर्ण क े लिलए कोई प्राव ान करने की अनुमति दे ा है। इसलिलए, राज्य सरकार का ऐसा विनष्कष' हो ा है विक विपछड़ा वग' /वग' सिHसक े लिलए आरक्षर्ण विकया गया है, का राज्य सेवाओं में पया'प्त रूप से प्रति विनति त्व नहीं है। ऐसा कर े समय राज्य सरकार विकसी विवशेष विपछड़ा वग' की कु ल आबादी और राज्य सेवाओं में इसक े प्रति विनति त्व को ले सक ी है। Hब राज्य सरकार आवश्यक काय' क े बाद आरक्षर्ण कर ी है और उक्त विपछड़ा वग' क े लिलए आरतिक्ष पदों क े प्रति श की सीमा प्रदान कर ी है, ो प्रति श का सख् ी से पालन विकया Hाना ाविहए।विन ा'रिर प्रति श को क े वल इसलिलए परिरवर्ति नहीं विकया Hा सक ा है विक विपछड़े वग' क े कु छ सदस्यों को पहले ही सामान्य सीटों क े सापेक्ष विनयुक्त/पदोन्न विकया Hा ुका है। Hैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है वह रोस्टर बिंबदु Hो विपछड़ा वग' क े लिलए आरतिक्ष है, उक्त वग' क े सदस्य की विनयुविक्त/पदोन्नति क े माध्यम से भरा Hाना ाविहए। विपछड़े वग' क े लिलए आरतिक्ष रोस्टर में एक स्लॉट क े सापेक्ष कोई सामान्य श्रेर्णी का अभ्यर्थी< विनयुक्त नहीं विकया Hा सक ा है। थ्य यह है विक राज्य सेवाओं में सामान्य सीटों क े सापेक्ष विपछड़ा वग' क े सदस्यों की काफी संख्या को विनयुक्त/पदोन्न विकया गया है, राज्य सरकार क े लिलए उक्त वग' क े लिलए आरक्षर्ण Hारी रखने क े प्रश्न की समीक्षा करने क े लिलए यह एक प्रासंविगक कारक हो सक ा है, लेविकन Hब क विनदUश/विपछड़े वग³ क े लिलए क ु छ प्रति श आरक्षर्ण प्रदान करने वाले विनयम सं ालिल हैं, उस का पालन करना होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सामान्य श्रेर्णी क े पदों क े सापेक्ष विपछड़ा वग' से संबंति विकसी भी संख्या में विनयुविक्त/पदोन्नति क े बावHूद विदए गए प्रति श को इसक े अलावा प्रदान विकया Hाना है। '
16. भार संघ बनाम वीरपाल सिंसह ौहान (एससीसी पृ.705) क े मामले में यह माना गया है विक अनुसूति Hाति और अनुसूति HनHाति क े लिलए आरतिक्ष पदों की संख्या का विन ा'रर्ण कर े समय, आरतिक्ष वग' से संबंति ऐसे अभ्यर्थी< Hो योग्य ा क े विनयम पर यविन /पदोन्न हुए हैं (न विक आरक्षर्ण क े विनयम क े आ ार पर नहीं) को आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< क े रूप में नहीं विगना Hाएगा।
20. हालांविक यहां विदए गए विनर्ण'यों में, विकसी में भी यह विव ार करने का अवसर नहीं आया विक क्या पूव'व < पैराग्राफ में विनर्किदष्ट विनर्ण'यों में उद्भासिस सिसद्धां क्षैति H आरक्षर्ण क े मामलों पर भी लागू हो ा है। हम इस स् र पर, उच्च न्यायालयों द्वारा विदये गये क ु छ विनर्ण'यों पर विव ार कर सक े हैं, सिHनमें इस प्रश्न पर विव ार विकया गया:- ए) मेघा शेट्टी बनाम राHस्र्थीान राज्य20 क े मामले में, राHस्र्थीान उच्च न्यायालय द्वारा न विनम्नलिललिख विटप्पर्णी की गयी: - 21.... सामान्य/खुली श्रेर्णी में मविहलाओं क े पक्ष में क्षैति H आरक्षर्ण लागू कर े समय, अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' सविह सभी श्रेणिर्णयों क े संबंति अभ्यर्थी< सामान्य श्रेर्णी (मविहला) क े लिलए आरतिक्ष उक्त पदों क े सापेक्ष विव ार विकये Hाने क े हकदार हो े हैं।
23. व 'मान मामले में, विवज्ञापन (संलग्नक-3) को देखने से स्पष्ट है विक 13 पद ओबीसी श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष र्थीे।परिरर्णाम-पत्र (संलग्नक-4) से यह देखा Hा सक ा है विक 42 अनारतिक्ष सीटों में से 4 मविहला अभ्यर्थिर्थीयों को Hगह विमली और इसलिलए, उन्हें मविहला क े लिलए प्रदान विकए गए क्षैति H आरक्षर्ण क े सापेक्ष विगना गया और उसक े बाद, उनकी योग्य ा क े Kम में 9 और मविहला 20 2013 (4) RLW 3227 (Raj.) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभ्यर्थिर्थीयों को ुना गया, सिHसमें सामान्य और सार्थी ही ओबीसी श्रेर्णी से संबंति अभ्यर्थी< शाविमल र्थीीं। यह भी देखा गया है विक मुख्य सू ी में, ओबीसी (मविहला) से संबंति 3 मविहला अभ्यर्थिर्थीयों को उनकी योग्य ा क े आ ार पर Hगह विमली और सामान्य (मविहला) श्रेर्णी क े सापेक्ष 9 अभ्यर्थिर्थीयों को लेने क े बाद सिHसमें ओबीसी (मविहला) भी शाविमल र्थीी, आगे आरक्षर्ण प्रदान नहीं विकया गया है वह भी इस थ्य क े बावHूद विक 5 पद ओबीसी (मविहला) क े लिलए आरतिक्ष र्थीे, Hो स्पष्ट रूप से दशा' ा है विक क्षैति H आरक्षर्ण को सही ढंग से लागू विकया गया र्थीा। 24 भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 15 (3) क े ह विवशेष आरक्षर्ण क े मामले में ओबीसी (मविहला) से Hनरल (मविहला) में स्र्थीानां रिर होने की अननुमन्य ा क े बारे में अपीलक ा' द्वारा विदया गया क ' भी स्पष्ट रूप से व 'मान मामले में प्रयोज्य नहीं है, क्योंविक ओबीसी (मविहला) श्रेर्णी से संबंति अभ्यर्थी< क े द्वारा सामान्य (मविहला) श्रेर्णी से संबंति अभ्यर्थी< की ुलना में अति क अंक प्राप्त कर लेने पर और सामान्य (मविहला) क े लिलए यविन सू ी में Hगह पा लेने पर, इसे माइग्रेशन (स्र्थीानां रर्ण) भी नहीं कहा Hा सक ा है और इसलिलए, इस संबं में विदये गये क ' में कोई सार नहीं है...” ए-1) नीलम शमा' बनाम राHस्र्थीान राज्य एवं अन्य21 क े मामले में उक्त विनर्ण'य का अनुसरर्ण विकया गया:- “6. इस उच्च न्यायालय की Hो पुर खंडपीठ ने श्रीम ी मेघा शेट्टी बनाम राHस्र्थीान राज्य 2014 वॉ¨यूम (1) WLC (राHस्र्थीान) 761 क े मामले में व 'मान अपीलों में उठाए विब¨कु ल इन्हीं विवषयों पर विव ार विकया। सुप्रीम कोट' क े उपयु'क्त विनर्ण'यों का अवलंब लेे े हुए तिडवीHन बें ने माना विक ओबीसी श्रेर्णी से संबंति मविहला अभ्यर्थी< द्वारासामान्य श्रेर्णी की मविहला अभ्यर्थी< की ुलना में अति क अंक हासिसल करने की स्थिस्र्थीति में उसे सामान्य श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों की यन सू ी में स्र्थीान विमल Hा ा है, इसे स्र्थीानां रर्ण क े रूप में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नहीं माना Hा सक ा है और तिडवीHन बें का यह विनर्ण'य हमारे लिलए बाध्यकारी है सिHसक े सार्थी हम भी पूरी रह से सहम हैं। यह भी ध्यान विदया Hाना ाविहए विक इसमें से कोई भी रिरट याति काक ा'/उत्तरदा ा Hो सामान्य श्रेर्णी की मविहला हैं, ने खुली श्रेर्णी में यविन ओबीसी श्रेर्णी की मविहला अभ्यर्थी< की ुलना में अति क अंक हासिसल नहीं विकए हैं। राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग द्वारा ैयार मविहला अभ्यर्थिर्थीयों की यन सू ी सव च्च न्यायालय द्वारा ब ाए गए कानून क े अनुरूप है...” उससे उद्भू विवशेष अनुमति याति का सं. 4312 वष' 2016 इस न्यायालय द्वारा 13.05.2016 को विनम्नलिललिख विटप्पणिर्णयों क े सार्थी खारिरH कर दी गई र्थीी:- “आति कारिरक अनुवाद दालिखल करने से छ ू ट क े लिलए आवेदन की अनुमति है। हम आक्षेविप आदेश में कोई दुब'ल ा नहीं पा े हैं। विवशेष अनुमति याति का खारिरH की Hा ी है। ” ख) आशा रामनार्थी घोलप बनाम अध्यक्ष, सिHला यन सविमति /कलक्टर22, क े मामले में बम्बई उच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर विनम्नानुसार विव ार विकया:-
30. हम ऊपर विदए गए क ' को दोषपूर्ण' पा े हैं। एक बार Hब यह माना Hा ा है विक सामान्य श्रेर्णी या खुली श्रेर्णी सभी श्रेणिर्णयों से संबंति सभी अभ्यर्थिर्थीयों को उनकी Hाति, वग' या समुदाय या HनHाति क े बावHूद अपने दायरे में ले ी है, ो यह अप्रासंविगक है विक क्या प्रदान विकया गया आरक्षर्ण ऊध्वा' र या क्षैति H है।`ओपन श्रेर्णी' शब्दों की दो व्याख्या नहीं हो सक ी है; ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े लिलए एक और क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए दूसरी। विन ा'रिर आरक्षर्ण क्षैति H या ऊध्वा' र हो सक ा है यविद यह खुली श्रेर्णी से संबंति है, ो विपछड़े वग' से संबंति अभ्यर्थी< को बाकी अभ्यर्थिर्थीयों क े सार्थी उनकी योग्य ा क े आ ार पर उक्त पदों क े लिलए प्रति स्प ा' करने से रोका नहीं Hा सक ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA... …………………………... 32..... इस प्रकार यह स्पष्ट है विक Hब खुली श्रेर्णी से संबंति मविहला अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा ीन पदों को भरने क े लिलए अति सूति विकया गया र्थीा, ो याति काक ा' क े पास उक्त पद क े लिलए प्रति स्प ा' करने का विवक¨प र्थीा, भले ही वह आरतिक्ष वग' की हो और Hब उसने मविहला अभ्यर्थिर्थीयों क े बी मे ावी स्थिस्र्थीति हासिसल की और दूसरा उच्च म अंक हासिसल विकया र्थीा, उसक े यन को उत्तरदा ाओं द्वारा इस आ ार पर अस्वीकार नहीं विकया Hा सक ा र्थीा विक वह अनुसूति Hाति से है और खुली श्रेर्णी में नहीं आ ी है...।” B-1) क ं न विवश्वनार्थी Hग ाप बनाम महाराष्ट्र प्रशासविनक न्यायाति करर्ण, नागपुर एवं अन्य23,क े मामले में उच्च न्यायालय ने ारिर विकया - “हमारा विव ार है विक यविद विवद्वान न्यायाति करर्ण का दृविष्टकोर्ण स्वीकार कर लिलया Hा ा है, ो इसका परिरर्णाम ऐसी स्थिस्र्थीति में होगा, Hो इंद्र साहनी क े मामले में शीष' अदाल की संविव ान पीठ द्वारा विन ा'रिर कानून क े मद्देनHर स्वीकाय' नहीं होगा। क े वल इसलिलए विक मविहला श्रेर्णी में सभी मे ावी अभ्यर्थी< ओबीसी, एससी और एसटी Hैसी आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े र्थीे, हमारे विव ार में उन्हें उनकी मे ावी स्थिस्र्थीति का लाभ देने से इनकार करने का आ ार नहीं हो सक ा है। हम पा े हैं विक यविद विवद्वान न्यायाति करर्ण द्वारा स्वीकार विकए गए दृविष्टकोर्ण को स्वीकार कर लिलया Hा ा है, ो यह सव च्च न्यायालय की संविव ान पीठ द्वारा इंद्रा साहनी क े मामले में विदये गये विनर्ण'य में ब ाए गए संवै ाविनक आदेश को परासिH करेगा। ऐसी स्थिस्र्थीति होगी विक आरतिक्ष श्रेर्णी से संबंति एक पुरुष अभ्यर्थी< एक खुली श्रेर्णी क े पद क े सापेक्ष ुने Hाने का हकदार होगा यविद वह अपनी योग्य ा क े आ ार पर हकदार है। हालांविक, एक आरतिक्ष श्रेर्णी से संबंति मविहला अभ्यर्थी<, भले ही वह खुली श्रेर्णी की मविहलाओं से संबंति अभ्यर्थी< की ुलना में बहु अति क मे ावी हो, उक्त पद क े सापेक्ष ुने Hाने का हकदार नहीं होगी।प्रभावी स्थिस्र्थीति क े परिरर्णामस्वरूप 23 (2016) 1 Mah. L.J. 934 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पुरुष आरतिक्ष अभ्यर्थिर्थीयों क े सापेक्ष मविहला आरतिक्ष अभ्यर्थिर्थीयों क े सार्थी भेदभावपूर्ण' व्यवहार करने की अनुमति देने का बराबर होगी। हम पा े हैं विक इंद्रा साहनी क े मामले में शीष' अदाल की संविव ान पीठ द्वारा व्याख्या की गई संवै ाविनक योHना क े ह ऐसी स्थिस्र्थीति स्वीकाय' नहीं है।” B-2) ेHस्थिस्वनी रघुनार्थी गलंडे बनाम अध्यक्ष, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग, मुंबई एवं अन्य24 क े मामले में उच्च न्यायालय ने थ्यों को विनम्नानुसार विन ा'रिर विकया- राHेश क ु मार डारिरया बनाम राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग एवं अन्य क े मामले में माननीय सव च्च न्यायालय क े फ ै सले का अवलंब ले े हुए विवद्वान न्यायाति करर्ण ने ारिर विकया विक आवेदक क े संबं में प्रति वादी नंबर 1- MPSC की कार'वाई, Hो NT (C.) श्रेर्णी से संबंति है, आवेदक को 'ओपन मविहला श्रेर्णी' कोटा से आवेदन करने की अनुमति न देना गल नहीं है और इस लिलए विवद्वान न्यायाति करर्ण ने मूल आवेदन को खारिरH कर विदया र्थीा। उक्त आदेश से दुखी होकर, व 'मान याति का दायर की गयी। ” आशा रामनार्थी घोलप और क ं न विवश्वनार्थी Hग प क े मामलों में लिलए गए दृविष्टकोर्ण क े अनुसरर्ण में, उच्च न्यायालय ने याति का को अनुमति दी और न्यायाति करर्ण क े आदेश को अपास् कर विदया। बी-3) ारुणिशला बनाम महाराष्ट्र राज्य25 क े मामले में, राज्य क े महाति वक्ता क े क³ को विनम्नानुसार दH' विकया गया - “13. विवद्वान महाति वक्ता ने यह भी कहा विक कानून में कोई अलग श्रेर्णी नहीं है, सिHसे 'खुली श्रेर्णी' क े रूप में मान्य ा दी गई है। सबसे पहले, णिशक्षा क े मामले में, विकसी क े रंग यानी श्रेर्णी क े बावHूद, सभी सीटें और रोHगार क े मामले में, सभी पदों, Hैसा भी मामला हो, को एक सार्थी लिलया Hाना है। उसी 24 (2019) 4 Mah L.J. 527 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA से आरतिक्ष पदों/सीटों को बाहर विनकाला Hाना है और ब Hा ा है उसे आम ौर पर 'खुली श्रेर्णी' या 'खुली प्रति योविग ा श्रेर्णी' सीटों क े रूप में Hाना Hा ा है।
14. उनक े अनुसार, एक आरतिक्ष श्रेर्णी का अभ्यर्थी<, भले ही वह इस रह क े आरक्षर्ण ऊध्वा' र या क्षैति H का दावा कर ा/ कर ी हो, और हमेशा अपनी योग्य ा क े आ ार पर खुली श्रेर्णी से सीट का दावा करने का हकदार हो ा है। यह विवशेष रूप से इसलिलए है, क्योंविक खुली श्रेर्णी या कोटा, क े वल और क े वल योग्य ा क े आ ार पर आवंविट विकए Hाने क े लिलए है और इसलिलए, इस रह क े आवंटन में, Hाति, पंर्थी या लिंलग या विकसी अभ्यर्थी< से संबंति कोई अन्य मानदंड मायने नहीं रख ा।
15. विवद्वान महाति वक्ता ने आगे कहा विक यविद आरतिक्ष श्रेर्णी से संबंति कोई अभ्यर्थी< अपनी योग्य ा क े आ ार पर कोई सीट हासिसल करने में सफल रह ा है ो, इससे उस श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष सीट कम नहीं होगी। ऐसे मामले में, इस रह का आवंटन, विकसी भी रह से, उस श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष सीटों या पदों, Hैसा विक मामला हो, कम नहीं कर ा है सिHससे ऐसा अभ्यर्थी< संबंति है।
18. उन्होंने यह भी कहा विक हालांविक, 'क ं पाट'मेंटलाइज़्ड' क्षैति H आरक्षर्ण क े मामले में, खुली श्रेर्णी या कोटा क े लिलए आवंविट सीटों का दावा हर विकसी क े द्वारा विकया Hा सक ा है, Hो मूल रूप से खुली श्रेर्णी से सीट या पद,Hैसा विक मामला हो, का दावा करने का हकदार है, सिHसमें स्पष्ट रूप से और विनति‹ रूप से, खुली श्रेर्णी की मेरिरट सू ी से प्रत्येक अभ्यर्थी< अर्थीा' सभी आरतिक्ष वग' ऊध्वा' र या क्षैति H से संबंति अभ्यर्थी< भी, शाविमल होंगे।” राज्य की ओर से विदये गये क³ को स्वीकार कर े हुए उच्च न्यायालय ने ारिर विकया:mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “33. Hहां क क्षैति H आरक्षर्ण का संबं है, एक अलग प्रविKया विन ा'रिर की गई है, Hो उपरोक्त उसिल्ललिख पैराग्राफ में दH' है। क े वल कमी की स्थिस्र्थीति में ही, मेरिरट सू ी क े परिरशीलन क े बाद, क्षैति H आरक्षर्ण श्रेर्णी में इस रह की कमी को संबंति आरतिक्ष श्रेणिर्णयों से अभ्यर्थिर्थीयों की अपेतिक्ष संख्या को हटाकर और उन्हें एक ही श्रेर्णी से प्रति स्र्थीाविप करक े पूरा विकया Hाएगा। इस प्रकार, ऊध्वा' र आरक्षर्ण कोटा क े भी र योग्य ा क े आ ार पर यविन क्षैति H आरक्षर्ण श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< को क्षैति H आरक्षर्ण श्रेर्णी क े सापेक्ष विगना Hाएगा।..…........…...........…............
41. यहां क विक क ं पाट'मेंटल क्षैति H आरक्षर्ण क े मामले में, सिHन सीटों को खुली श्रेर्णी या कोटा क े लिलए आवंविट विकया Hा ा है, उन पर दावा विकसी भी द्वारा यानी सभी अभ्यर्थी< Hो विकसी भी आरतिक्ष श्रेर्णी - क्षैति H या ऊध्वा' र, से संबंति हों, विकया Hा सक ा है, Hो योग्य ा क े आ ार पर सीट या पद का दावा करने क े हकदार हैं। हालाँविक, एकमात्र अपवाद विकया Hा सक ा है, Hैसा विक माननीय सव च्च न्यायालय क े विनर्ण'य में विन ा'रिर विकया गया है विक यविद लागू विनयम या विवज्ञापन विवशेष रूप से इसक े विवपरी उपबं कर ा है, ो ऐसे स्र्थीानां रर्ण को आरतिक्ष श्रेर्णी से खुली श्रेर्णी में खुली श्रेर्णी क े लिलए प्रदान विकए गए क ं पाट'मेंटल आरक्षर्ण का दावा करने क े लिलए अनुमति नहीं दी Hाएगी। आरतिक्ष वग' क े वे अभ्यर्थी<, Hो यन की प्रविKया क े दौरान पहले ही लाभ प्राप्त कर ुक े हैं, Hैसे विक फीस में रिरयाय, आयु में छ ू ट, योग्य ा मानदंड में छ ू ट, सीट या पद का दावा करने क े लिलए आरतिक्ष वग' से स्र्थीानां रर्ण क े लाभों का दावा करने क े लिलए पात्र नहीं होंगे।” बी-4) शां ाबाई लक्ष्मर्ण डोफोडे बनाम महाराष्ट्र राज्य26, क े मामले में उच्च न्यायालय ने ारिर विकया:- 26 (2020) SCC OnLine Bom 1659 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “...... हालांविक, विवणिभन्न न्यातियक विनर्ण'यों में शीष' अदाल द्वारा विन ा'रिर कानून क े मद्देनHर सिHनकी उपरोक्त मामलों में ा' की गई है, यह स्पष्ट है विक याति काक ा' द्वारा NT (D) श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष पद पर यविन होने का ुनाव करने क े बावHूद, याति काक ा' अभी भी वै रूप से खुली श्रेर्णी क े ह उपलब् पद क े लिलए अपने दावे को दांव पर लगा सक ा है और न क े वल यह, वह ऐसा खुली श्रेर्णी में मविहलाओं क े लिलए क्षैति H रूप से आरतिक्ष पद क े लिलए भी कर सक ी है। व 'मान मामले में, इस थ्य क े बारे में कोई विववाद नहीं है विक ीन सू ीबद्ध मविहला अभ्यर्थिर्थीयों में से,याति काक ा' ने शीष' अंक हासिसल करने वाली श्रीम ी विप्रया नरेश गस्थिज्भये क े बाद दूसरा सव च्च अंक प्राप्त विकया र्थीा। Hबविक एससी अभ्यर्थी<, श्रीम ी विप्रया नरेश गस्थिज्भये को उनकी योग्य ा क े आ ार पर खुली (मविहला) श्रेर्णी क े लिलए आरतिक्ष दो पदों में से एक क े लिलए ुना गया र्थीा, याति काक ा' हालांविक विवति की विन ा'रिर स्थिस्र्थीति क े मद्देनHर पात्र, को पद नहीं विमला। श्रीम ी विप्रया नरेश गस्थिज्भये का यन करने और याति काक ा' को खारिरH करने क े लिलए विदया गया आ ार यह र्थीा विक हालांविक श्रीम ी विप्रया नरेश गस्थिज्भये एससी श्रेर्णी की र्थीीं, उन्होंने खुली श्रेर्णी का विवक¨प ुना र्थीा Hबविक याति काक ा' ने नहीं विकया र्थीा। यह आ ार कानून में नहीं ल सक ा Hैसा विक हमने पहले क े विनर्ण'यों में देखा है। ” C) उत्तराखंड अ ीनस्र्थी सेवा यन आयोग एवं अन्य बनाम रंHी ा रार्णा एवं अन्य27 क े मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सु ीर क ु मार बनाम उत्तराखंड राज्य28 क े मामले में विदये गये फ ै सले का अवलंब लिलया और ारिर विकया: -
11. प्रत्येक श्रेर्णी क े ह प्रदान विकये Hाने वाले क्षैति H आरक्षर्ण का प्रभाव यह हो ा है विक क े वल मविहलाएं ही, Hो अन्य विपछड़ा वग' से संबंति हैं और अन्य विपछड़ा वग' (मविहलाओं) क े लिलए आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक ी हैं, न विक अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अनारतिक्ष श्रेर्णी
28 Writ Petition (S/B) No.392 of 2017 dated 11.12.2018 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की मविहलाएं। इसी रह, क े वल अनुसूति Hाति और अनुसूति HनHाति की मविहलाएं ही Hो अनुसूति Hाति (मविहलाओं) और अनुसूति HनHाति (मविहलाओं) क े पक्ष में क्षैति H रूप से आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक ी हैं। एक मविहला, Hो आरतिक्ष श्रेर्णी (ओबीसी, एससी और एसटी) से संबंति नहीं है, अन्य विपछड़ा वग' (मविहला), अनुसूति Hाति (मविहला) और अनुसूति HनHाति (मविहला) क े पक्ष में आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' करने की हकदार नहीं है।
12. हालाँविक, इसका उ¨टा स नहीं है। सभी मविहलाएं, ाहे वे आरतिक्ष श्रेर्णी की हों अर्थीवा न हों, सामान्य श्रेर्णी क े ह मविहलाओं क े पक्ष में विन ा'रिर पदों क े लिलए प्रति स्प ा' करने की हकदार हैं। सामान्य श्रेर्णी में पदों क े लिलए कोई आरक्षर्ण नहीं है, और सामान्य श्रेर्णी में मविहलाओं क े पक्ष में क्षैति H आरक्षर्ण सभी मविहलाओं में से भरने क े लिलए उपलब् है, ाहे उनकी Hाति ग स्थिस्र्थीति Hो भी हो। सामान्य श्रेर्णी (मविहला) क े पक्ष में आरतिक्ष पद उत्तराखंड राज्य की सभी मविहलाओं क े लिलए उपलब् हैं और इसमें अन्य विपछड़ा वग', अनुसूति Hाति और अनुसूति HनHाति से संबंति और गैर संबंविद मविहलाएं शाविमल होंगी। अन्यर्थीा, सामासिHक और शैक्षणिर्णक रूप से विपछड़े वग³ से असंबद्ध लोगों क े पक्ष में आरक्षर्ण की शुरुआ होगी, और यह सांप्रदातियक आरक्षर्ण का एक प्रच्छन्न प्रयास होगा सिHस पर सुप्रीम कोट' ने द स्टेट ऑफ मद्रास बनाम श्रीम ी ंपकम दोरईराHन एवं अन्य: एआईआर 1951 एससी 226 क े मामले में नाराHगी व्यक्त की र्थीी। यह प्रश्न अब सबकु छ नहीं है और वास् व में, सु ीर क ु मार बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य (रिरट याति का (एस/बी) संख्या 392 वष' 2017 में आदेश विदनांविक 11.12.2018) में इस न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा उत्तर विदया गया है, सिHसकी उच्च म न्यायालय ने विवशेष अनुमति याति का (सी) संख्या 7801 वष' 2019 में अपने 15.04.2019 विदनांविक आदेश में पुविष्ट की र्थीी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA डी) मन्नाबेन अशोकभाई देसाई बनाम शी ल अमृ लाल विनसार29,क े मामले में गुHरा उच्च न्यायालय ने राHस्र्थीान, बॉम्बे और उत्तराखंड क े उच्च न्यायालयों द्वारा विनर्ण< क ु छ विबन्दुओं सविह अन्य पर विव ार विकया और ारिर विकया:- “45. उपयु'क्त मामला विवति को व 'मान मामले में प्राप्त थ्यात्मक स्थिस्र्थीति क े आ ार पर विनम्नलिललिख दृष्टां क े माध्यम से बेह र समझाया Hा सक ा है।
46. पुलिलस इंस्पेक्टर (शस्त्ररविह ) क े 115 पद हैं, सिHनमें से 55 पद एससी, एसटी और एसईबीसी क े लिलए आरतिक्ष हैं और शेष 60 पद खुले/सामान्य श्रेर्णी क े लिलए हैं। उक्त पदों में से, प्रत्येक श्रेर्णी क े ह मविहलाओं क े लिलए 33% आरतिक्ष हैं, सिHसका अर्थी' है, खुली श्रेर्णी में 60 पदों में से 20 पद मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष हैं। इस प्रकार, पहला कदम योग्य ा क े आ ार पर पूरी सू ी ैयार करना और उसी में से खुली श्रेर्णी में, पहले 60 अभ्यर्थीी³ का यन करना, ाहे उनकी Hाति और लिंलग क ु छ भी हो। दूसरा कदम ब मू¨यांकन का होगा विक क्या 20 मविहलाएं, उनकी Hाति क े बावHूद, उन 60 अभ्यर्थिर्थीयों क े भी र हैं, ाविक क्षैति H आरक्षर्ण की आवश्यक ा को पूरा विकया Hा सक े । यविद 20 मविहलाएं पहले से ही हैं, ो उस श्रेर्णी में विकसी और मविहला का यन करने की आवश्यक ा नहीं है, लेविकन यविद नहीं, ो ीसरे रर्ण में, शेष संख्या में मविहलाओं को पूव क्त सू ी से योग्य ा क े आ ार पर, Hाति क े बावHूद पहले 60 अभ्यर्थिर्थीयों की सू ी क े नी े से पुरुष अभ्यर्थीी³ की उ नी संख्या को हटा े हुए यविन विकया Hाना ाविहए। इसक े बाद, एसईबीसी, एससी और एसटी श्रेणिर्णयों से संबंति पदों क े संबं में क्षैति H आरक्षर्ण क े बाद ऊध्वा' र आरक्षर्ण को लागू करने क े लिलए समान अभ्यास की आवश्यक ा हो ी है।.… …. …………………... 29 R/LPA No.1910 of 2019 in R/Special Civ) il Application No.18968 of 2018 etc. decided on 05.08.2020 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
49. यह ध्यान रखना उति है विक विनयम 2 (डी) ौर्थीी श्रेर्णी क े पदों का विनमा'र्ण कर ा है, Hो विक अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और सामासिHक और शैतिक्षक रूप से विपछड़े वग³ क े पक्ष में आरतिक्ष पद नहीं हैं। दूसरे शब्दों में, यह ौर्थीी श्रेर्णी क ु छ भी नहीं है, बस्थि¨क पदों की एक खुली श्रेर्णी है, Hो उपरोक्त उसिल्ललिख वग³ अर्थीा' खुली श्रेर्णी में मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष पद एससी, एसटी और एसईबीसी में मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष पदों को छोड़कर उक्त विनयमों क े विनयम 2 (ए), 2 (बी) और 2 (सी) में यर्थीा संदर्थिभ होंगे। इस प्रकार, सभी मे ावी अभ्यर्थी<, ाहे वे आरतिक्ष वग' या अनारतिक्ष श्रेर्णी से संबंति हों, उनकी Hाति, समुदाय या HनHाति क े बावHूद, Hहां ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े सार्थी-सार्थी उसी क े भी र क्षैति H आरक्षर्ण को लागू कर े समय क े वल योग्य ा को ध्यान में रखा Hाएगा। यह ध्यान विदया Hा सक ा है विक गुHरा सिसविवल सेवा (मविहलाओं क े लिलए पदों का आरक्षर्ण) (संशो न) विनयम, 2014 क े आ ार पर, मविहलाओं क े पक्ष में आरक्षर्ण की आवश्यक ा 30% से बढ़ाकर 33% कर दी गई।
50. पूव क्त ा' क े मद्देनHर, हमें इस विनष्कष' पर पहुं ने में कोई संको नहीं है विक Hीएडी का 01.08.2018 विदनांविक सरकारी प्रस् ाव रद्द करने और अपास् करने क े योग्य है, और ए द्द्वारा इसे रद्द और अपास् विकया Hा ा है। उच्च न्यायालय ने ब ारिर विकया:-
56. राज्य सरकार क े भविवष्य क े माग'दश'न क े लिलए, हम अति क स्पष्ट रीक े से मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण को लागू करने की उति और सही विवति की व्याख्या करना ाह े हैं। “मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण को लागू करने की उति और सही विवति भ < क े लिलए उपलब् पदों की संख्या।...... 100 सामासिHक आरक्षर्ण कोटा (49%) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA खुली प्रति योविग ा (ओसी)...... 51 अनुसूति Hाति (एससी)...... 12 अनुसूति HनHाति (एसटी).... 17 सामासिHक और शैतिक्षक रूप से विपछड़े वग' (एसईबीसी)........20 मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण (उपरोक्त श्रेणिर्णयों में से प्रत्येक में 33%) ओ. सी........17 एससी... 04 एसटी... 06 एसईबीसी... 07 रर्ण 1: योग्य ा क े Kम में यविन होने क े लिलए योग्य कम से कम 100 अभ्यर्थिर्थीयों की सू ी ैयार करें (आम ौर पर 100 से अति क अभ्यर्थिर्थीयों की सू ी ैयार की Hा ी है, ाविक Hब क ु छ अभ्यर्थी< पेशकश क े बाद शाविमल न हों ो विनयुविक्त की कोई कमी न हो)। इस सू ी में उपरोक्त सभी श्रेणिर्णयों से संबंति अभ्यर्थी< शाविमल होंगे। रर्ण 2: पूव क्त रर्ण 1 सू ी से, योग्य ा क े आ ार पर ओसी कोटा (51) को भरने क े लिलए पहले 51 अभ्यर्थिर्थीयों की एक सू ी ैयार करें। 51 अभ्यर्थिर्थीयों की इस सू ी में अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और एसईबीसी से संबंति अभ्यर्थी< शाविमल हो सक े हैं। रर्ण 3: ओसी कोटा में क्षैति H आरक्षर्ण की Hाँ करें। ओसी श्रेर्णी की रर्ण 2 सू ी में यविद 17 मविहलाएं (श्रेर्णी मायने नहीं रख ी) हैं ो 33 प्रति श मविहलाओं का कोटा पूरा हो Hा ा है,और क ु छ नहीं विकया Hाना है। यविद मविहलाओं की कमी है (ओसी श्रेर्णी की रर्ण 2 सू ी में क े वल 10 मविहलाएं उपलब् हैं), ो 7 और मविहलाओं को Hोड़ना होगा। यह करने का रीका है, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पहले, रर्ण 2 सू ी क े अंति म 7 पुरुष अभ्यर्थिर्थीयों को हटा दें। इसक े बाद, आइटम नंबर 51 क े बाद रर्ण 1 सू ी पर Hाएं, और पहली 7 मविहलाओं (श्रेर्णी मायने नहीं रख ी) को ुनें। Hैसे ही स्टेप 1 सू ी से 7 मविहलाएं पाई Hा ी हैं, उन्हें लाया Hाना है और 7 मविहलाओं की कमी को पूरा करने क े लिलए स्टेप 2 सू ी में Hोड़ा Hाना ाविहए। अब, ओसी मविहलाओं क े लिलए 33% कोटा पूरा हो गया है। ओसी श्रेर्णी की सू ी को लॉक कर देना ाविहए। रर्ण 2 सू ी अंति म हो Hा ी है। रर्ण 4: एससी पर आएं। स्टेप 1 सू ी से, आइटम नंबर 51 क े बाद, 12 एससी अभ्यर्थिर्थीयों (पुरुष या मविहला) की एक सू ी ैयार करें। इन 12 में उन सभी पुरुष अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थी< भी शाविमल होंगे Hो मविहलाओं की कमी क े लिलए स्टेप 2 सू ी से हटा विदए गए र्थीे। रर्ण 5: एससी की रर्ण 4 सू ी में क्षैति H आरक्षर्ण की Hाँ करें। यविद 4 एससी मविहलाएं हैं, ो 33% का कोटा पूरा हो गया। और क ु छ नहीं विकया Hाना है। यविद अनुसूति Hाति की मविहलाओं की कमी है (क े वल 2 मविहलाएं उपलब् हैं), ो 2 और मविहलाओं को Hोड़ना होगा। इसे करने का रीका है, पहले, स्टेप 4 सू ी क े अंति म 2 पुरुष अनुसूति Hाति क े अभ्यर्थिर्थीयों को हटाना और विफर आइटम नंबर 51 क े बाद स्टेप 1 सू ी पर Hाना और पहली 2 अनुसूति Hाति की मविहलाओं को ुनना। Hैसे ही स्टेप 1 सू ी में ऐसी 2 अनुसूति Hाति मविहलाओं को पाया Hा ा है, उन्हें लाया Hाना है और अनुसूति Hाति की स्टेप 4 सू ी में Hोड़ा Hाना ाविहए ाविक अनुसूति Hाति की मविहलाओं की कमी को पूरा विकया Hा सक े । अब, एससी मविहलाओं क े लिलए 33% कोटा पूरा हो गया है। एससी की सू ी को लॉक कर देना ाविहए। रर्ण 4 सू ी अंति म हो Hा ी है। यविद स्टेप 1 सू ी में अंति म संख्या क 2 एससी मविहलाओं को नहीं पाया Hा सक ा है, ो इन 2 रिरविक्तयों को एससी पुरुषों द्वारा भरा Hाना ाविहए। यविद मामले में, एससी पुरुष भी नहीं विमल े ो, ो एससी क े सामासिHक आरक्षर्ण कोटा को अगली भ < क े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आगे बढ़ाया Hाना ाविहए Hब क विक कोई विनयम न हो Hो एससी कोटा को ओसी में परिरवर्ति करने की अनुमति दे ा हो। रर्ण 6: एसटी की सू ी ैयार करने क े लिलए स्टेप 4 और 5 को दोहराएं। रर्ण 7: एसईबीसी की सू ी ैयार करने क े लिलए स्टेप 4 और 5 दोहराएं। ”
57. राज्य सरकार क े सार्थी-सार्थी Hीपीएससी आने वाले समय क े लिलए, यह ध्यान में रखेगा विक क्षैति H आरक्षर्ण का प्रभाव, प्रत्येक श्रेर्णी क े ह प्रदान विकया Hा रहा है, यह विक क े वल अन्य विपछड़ा वग' की मविहलाएं ही अन्य विपछड़ा वग' (मविहलाओं) क े लिलए आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक ी हैं, न विक अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अनारतिक्ष श्रेर्णी की मविहलाएं। इसी रह, क े वल अनुसूति Hाति और अनुसूति HनHाति की मविहलाएं ही अनुसूति Hाति (मविहलाओं) और अनुसूति HनHाति (मविहलाओं) क े पक्ष में क्षैति H रूप से आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' कर सक ी हैं। एक मविहला, Hो आरतिक्ष श्रेर्णी (ओबीसी, एससी और एसटी) से संबंति नहीं है, अन्य विपछड़ा वग' (मविहला), अनुसूति Hाति (मविहला) और अनुसूति HनHाति (मविहला) क े पक्ष में आरतिक्ष पदों क े लिलए प्रति स्प ा' करने की हकदार नहीं है।
58. हालाँविक, इसका उ¨टा स नहीं है। सभी मविहलाएं, ाहे वे आरतिक्ष श्रेर्णी की हों या न हों, सामान्य श्रेर्णी क े ह मविहलाओं क े पक्ष में विन ा'रिर पदों क े लिलए प्रति स्प ा' करने की हकदार हैं। सामान्य श्रेर्णी में पदों क े लिलए कोई आरक्षर्ण नहीं है, और सामान्य श्रेर्णी में मविहलाओं क े पक्ष में क्षैति H आरक्षर्ण सभी मविहलाओं में से भरने क े लिलए उपलब् है, ाहे उनकी Hाति की स्थिस्र्थीति क ु छ भी हो। सामान्य श्रेर्णी (मविहला) क े पक्ष में आरतिक्ष पद गुHरा राज्य की सभी मविहलाओं क े लिलए उपलब् हैं, और इसमें ओबीसी, एससी और एसटी Hैसी आरतिक्ष श्रेणिर्णयों से संबंति और गैर संबंति मविहलाएं शाविमल होंगी। अन्यर्थीा ारर्ण करने से उन लोगों क े पक्ष में आरक्षर्ण की शुरुआ होगी Hो सामासिHक और शैक्षणिर्णक रूप से विपछड़े वग³ से संबंति mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नहीं हैं सिHस पर सव च्च न्यायालय ने मद्रास राज्य बनाम म्पाकम दोराईराHन एवं अन्य एआईआर 1951 एससी 226 क े मामले में नाराHगी व्यक्त की र्थीी।”
21. राHस्र्थीान, बॉम्बे, उत्तराखंड और गुHरा क े उच्च न्यायालयों द्वारा लिलया गया दृविष्टकोर्ण इस प्रकार इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े विव ार से विवपरी है। पैराग्राफ 9 से 11 में विनर्किदष्ट आदेशों क े अलावा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूर्ण' पीठ ने अHय क ु मार बनाम यूपी राज्य एवं अन्य30 क े मामले में विनम्नानुसार ारिर विकया: “उपरोक्त क े लिलए, हमारे विदमाग में, मविहलाओं की मेरिरट की क्षैति H आरक्षर्ण क े काया'न्वयन में कोई भूविमका नहीं है क्योंविक सामासिHक रूप से आरतिक्ष अभ्यर्थी< (एससी, एसटी, और ओबीसी) विवशेष श्रेर्णी (मविहलाओं) क े आरक्षर्ण का लाभ पाने क े लिलए खुला श्रेर्णी में समायोHन का दावा नहीं कर सक ी है। ” मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए विव ार को अपनाया है। मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम उदय सिससोद एवं अन्य31,क े मामले में उच्च न्यायालय ने लोक सेवा आयोग उत्तरां ल बनाम मम ा विबष्ट क े विनर्ण'य को उद्धृ विकया और ारिर विकया: -
18. उपरोक्त विनर्ण'य में उच्च न्यायालय ने माना र्थीा विक ूंविक क्षैति H आरक्षर्ण का लाभ प्राप्त करने वाले अंति म यविन अभ्यर्थी< ने अंति म यविन सामान्य श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< की ुलना में अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे, इसलिलए, उन्हें सामान्य श्रेर्णी में रिरविक्त क े सापेक्ष विनयुक्त विकया Hाना ाविहए र्थीा। माननीय सव च्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय क े इस दृविष्टकोर्ण को राHेश कु मार डारिरया क े मामले में प्रति पाविद विवति क े विवपरी पाया। वही स्थिस्र्थीति व 'मान मामले में है सिHसमें क्षैति H क ं पाट'मेंटल आरक्षर्ण का लाभ प्राप्त करने वाले ओबीसी पुलिलस 30 (2019) 5 ALJ 466 31 (2019) SCC OnLine MP 5750 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कम< इस आ ार पर विनयुविक्त का दावा कर रहे हैं विक उन्होंने अंति म यविन सामान्य श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< से अति क अंक प्राप्त विकए हैं, लेविकन उपरोक्त विनर्ण'य क े मद्देनHर इसे स्वीकार नहीं विकया Hा सक ा है।
19. शारीरिरक रूप से विवकलांग व्यविक्तयों [क्षैति H (सामासिHक) आरक्षर्ण] की विनयुविक्त से संबंति मुद्दा उच्च अंकों क े आ ार पर ओपन Hनरल श्रेर्णी की सीट क े सापेक्ष WA नंबर 414/2017 में ग्वालिलयर में इस न्यायालय की तिडवीHन बें क े समक्ष आया र्थीा और तिडवीHन बें ने इसे अननुमन्य माना विक योग्य ा क े आ ार पर एक श्रेर्णी से दूसरे श्रेर्णी में स्र्थीानां रर्ण की अव ारर्णा ऊध्वा' र आरक्षर्ण में ठीक हो सक ी है, लेविकन क्षैति H आरक्षर्ण में यह लागू नहीं है। इस संबं में तिडवीHन बें ने विनम्नानुसार आयोसिH विकया है: - “9. सवाल यह है विक क्या एक अभ्यर्थी< Hो सामान्य श्रेर्णी /अनारतिक्ष श्रेर्णी क े रूप में नहीं बस्थि¨क अनुसूति Hाति /अनुसूति HनHाति /अन्य विपछड़ा वग' से संबंति आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< क े रूप में प्रति योगी परीक्षा में भाग लेने का विवक¨प ुन ा है, इस प्रकार उस श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों क े बी प्रति स्प ा' कर ा है, यविद सामान्य श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा प्राप्त अंक से अति क अंक प्राप्त कर ा है, ो सामान्य श्रेर्णी में आने की अनुमति दी Hा सक ी है। दूसरे शब्दों में, क्या आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< क े रूप में एक प्रति योगी परीक्षा में भाग लेने का विवक¨प ुनने वाले अभ्यर्थी< को सामान्य श्रेर्णी में स्र्थीानां रर्ण करने की अनुमति दी Hा सक ी है?
10. इंद्रा साहनी बनाम भार संघ, 1992 सप्लीमेंटरी (3) एससीसी 217 (पैराग्राफ 812), यह अव ारिर विकया- “812. xxxxxxxxxxxxxx
11. इस प्रकार, Hब कोई आरक्षर्ण क्षैति H हो ा है, ो विकसी भी श्रेर्णी में आरक्षर्ण क े आ ार पर यविन अभ्यर्थी< को उक्त श्रेर्णी में य विकया Hाना ाविहए और उसे अन्य श्रेर्णी में स्र्थीानां रिर करने की अनुमति नहीं दी Hा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सक ी है। योग्य ा क े आ ार पर एक श्रेर्णी से दूसरे श्रेर्णी में स्र्थीानां रर्ण की अव ारर्णा ऊध्वा' र आरक्षर्ण में अच्छी हो सक ी है, लेविकन क्षैति H आरक्षर्ण में यह लागू नहीं हो ी।
12. राHेश क ु मार डारिरया बनाम राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग, (2007) 8 एससीसी 785: AIR 2007 SC 3127, क े मामले में यह ारिर विकया गया- “7-8Xxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
13. आक्षेविप विनर्ण'य का उपरोक्त विवश्लेषर्ण क े आ ार पर परीक्षर्ण करने पर यह नहीं कहा Hा सक ा विक इसमें विकसी हस् क्षेप की आवशयक ा है।हालाँविक, इस मामले क े थ्यों क े आलोक में हमारा विव ार है विक स्र्थीानां रर्ण क े कारर्ण आयोग की ओर से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, याति काक ा'ओं (उत्तरदा ाओं सं. 1,[2] और 3) याति काक ा'ओं में से प्रत्येक क े पक्ष में देय द्वारा रुपये 25,000/- क े संबं में कोई क ' कारर्ण नहीं विदया गया। इसलिलए अति रोविप लाग को अपास् विकया Hा ा है। ”
20. व 'मान मामले में तिडवीHन बें क े पूव क्त विनर्ण'य पर ध्यान नहीं विदया गया Hब विव ारा ीन विनर्ण'य द्वारा रिरट अपील को विनर्ण< विकया गया र्थीा और एक अलग दृविष्टकोर्ण अपनाया गया Hो विव ारा ीन विनर्ण'य को विवति रविह बना दे ा है।
21. व 'मान मामले में विवद्वान एकल न्याया ीश ने सिH ेंद्र कु मार सिंसह बनाम यूपी राज्य32 और दीपा ई. वी. बनाम भार संघ33 क े मामले में विदये गये विनर्ण'य का अवलंब लिलया है। लेविकन ये विनर्ण'य ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े मामले में अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति, अन्य विपछड़ा वग' क े अभ्यर्थिर्थीयों क े स्र्थीानां रर्ण से संबंति हैं। ये ऐसे मामले नहीं हैं Hहां क्षैति H आरक्षर्ण अभ्यर्थी< mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को अपने अंकों क े आ ार पर खुली श्रेर्णी की सीट क े सापेक्ष विनयुविक्त लेने की अनुमति दी गई है। ”
22. विकसी भी ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों से संबंति अभ्यर्थी< 'ओपन या Hनरल श्रेर्णी' में ुने Hाने क े हकदार हैं, यह सिसद्धां अच्छी रह से य है। यह भी अच्छी रह से स्वीकार विकया Hा ा है विक यविद आरतिक्ष श्रेणिर्णयों से संबंति ऐसे अभ्यर्थी< अपनी योग्य ा क े आ ार पर ुने Hाने क े हकदार हैं, ो उनक े यन को ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hा सक ा है सिHससे वे संबंति हैं। इंद्रा साहनी और आर.क े. सभरवाल क े मामलों में इस न्यायालय क े विनर्ण'यों क े उद्धरर्ण क े अलावा इस न्यायालय क े संविव ान पीठ द्वारा श्री वी. वी. विगरिर बनाम दीपला सूरी डोरा एवं अन्य34, क े मामलों में न्यायालय की विटप्पर्णी, हालांविक ुनाव कानून क े संदभ' में, काफी उल्लेखनीय हैं। “21.... हमारी राय में, सही स्थिस्र्थीति यह है विक अनुसूति Hाति या HनHाति का सदस्य सामान्य सीट पर ुनाव का अपना अति कार क े वल इसलिलए नहीं खो दे ा क्योंविक वह उस उद्देश्य क े लिलए विवविह घोषर्णा करक े आरतिक्ष सीट की अति रिरक्त रिरयाय का लाभ उठा ा है। आरतिक्ष सीट क े लिलए पात्र ा का दावा सामान्य सीट क े लिलए दावे को रद्द नहीं कर ा है; यह एक अति रिरक्त दावा है; और दोनों दावों को इस आ ार पर य विकया Hाना है विक दोहरे सदस्य विनवा' न क्षेत्र से एक ुनाव है। 22 इस संबं में, हम क ु छ शैक्षणिर्णक संस्र्थीानों और विवश्वविवद्यालयों में विकए गए प्राव ानों क े अनुरूप सादृश्य क े माध्यम से उल्लेख कर सक े हैं, सिHसक े ह सभी अभ्यर्थिर्थीयों क े बी सामान्य प्रति स्प ा' पर पुरस्कार और छात्रवृलित्त क े अलावा, क ु छ पुरस्कार और छात्रवृलित्त विपछड़े समुदायों से संबंति अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए आरतिक्ष हैं। ऐसे मामलों में, हालांविक विपछड़े अभ्यर्थी< आरतिक्ष पुरस्कारों और छात्रवृलित्त क े लिलए प्रयास कर सक े हैं, लेविकन उन्हें बाकी 34 (1960) 1 SCR 426 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभ्यर्थिर्थीयों क े सार्थी प्रति स्प ा' द्वारा सामान्य पुरस्कारों और छात्रवृलित्त का दावा करने पर रोक नहीं है।”
23. राHस्र्थीान, बॉम्बे, उत्तराखंड और गुHरा क े उच्च न्यायालयों ने क्षैति H आरक्षर्ण पर विव ार कर े समय एक ही सिसद्धां अपनाया है, Hबविक इलाहाबाद और मध्य प्रदेश क े उच्च न्यायालय ने इसक े विवपरी विव ार विकया है। सुविव ा क े लिलए इन दो विव ारों को Kमशः 'प्रर्थीम दृविष्टकोर्ण' और 'दूसरा दृविष्टकोर्ण' कहा Hा ा है। इलाहाबाद और मध्य प्रदेश क े उच्च न्यायालयों क े सार्थी ुलना क े लिलए दूसरा दृविष्टकोर्ण अविनवाय' रूप से इस आ ार पर आ ारिर है विक अविनल क ु मार गुप्ता और अन्य में विनर्ण'य क े पैरा 18 में विवस् ृ रूप से पहले दो रर्णों क े बाद और ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े लिलए उपबं विकया गया है, क्षैति H आरक्षर्ण को लागू करने क े लिलए अभ्यर्थिर्थीयों को समायोसिH करने क े रर्ण में, आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े अभ्यर्थिर्थीयों को क े वल ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े ह उनकी संबंति श्रेणिर्णयां क े सापेक्ष समायोसिH विकया Hा सक ा है 'ओपन या Hनरल श्रेर्णी' क े सापेक्ष नहीं।”
24. इस प्रकार, दूसरे दृविष्टकोर्ण क े अनुसार, दो रर्णों में विवणिभन्न सिसद्धां ों को अपनाया Hाना ाविहए; उस में:- (I) आरंणिभक रर्ण में, Hब '' खुली या सामान्य श्रेर्णी '' सीटें भरी Hानी हैं, मेरिरट क े आ ार पर सभी आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों क े दावे पर विव ार विकया Hाना ाविहए और यविद ऐसी आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े कोई अभ्यर्थी< अपनी योग्य ा क े आ ार पर, खुली या सामान्य श्रेर्णी की सीटों क े लिलए ुने Hाने क े हकदार हैं, ो आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थी< की ऐसी विनयुविक्त विकसी भी रह से ऊध्वा' र आरक्षर्ण में ऐसी श्रेणिर्णयों क े लिलए आरतिक्ष कोटा को प्रभाविव नहीं करना ाविहए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (II) र्थीाविप, Hब क्षैति H आरक्षर्ण क े प्रKम पर समायोHन की बा आ ी है, ाहे ऐसे आरतिक्ष प्रवग' क े अभ्यर्थी<, योग्य ा क े आ ार पर, खुले या सामान्य स्र्थीानों क े सापेक्ष विव ार विकये Hाने और समायोसिH विकए Hाने क े हकदार हों, उस स् र पर विकसी आरतिक्ष वग' क े अभ्यर्थी< को क े वल और क े वल भी समायोसिH विकया Hा सक ा है Hब आरक्षर्ण क े अपने स्वयं क े ऊध्वा' र स् ंभ में उनक े समायोHन की गुंHाइश हो। इस रह का काय' विनम्नलिललिख आ ार पर होगा:- (क) ओपन Hनरल श्रेर्णी की सीटों क े प्रारंणिभक आवंटन क े पूरा होने क े बाद, आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों का अपनी योग्य ा क े आ ार पर ओपन Hनरल श्रेर्णी की सीटों में प्रवेश का दावा या अति कार समाप्त हो Hा ा है और उन्हें क े वल ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े अपने संबंति कॉलम क े सापेक्ष रखा Hा सक ा है। (ख) यविद ओपन Hनरल श्रेर्णी में क्षैति H आरक्षर्ण क े कारर्ण परिरर्णामी समायोHन हो ा है, ो क े वल उन अभ्यर्थिर्थीयों पर विव ार विकया Hाएगा Hो उन श्रेणिर्णयों में से विकसी में नहीं हैं सिHनक े लिलए ऊध्वा' र आरक्षर्ण प्रदान विकया गया है। (ग) दूसरे शब्दों में, क्षैति H आरक्षर्ण क े प्रKम पर, खुले सामान्य प्रवग' का अर्थी' उस प्रवग' क े रूप में लगाया Hाना ाविहए Hो उन प्रवग³ से, सिHनक े लिलए ऊध्वा' र आरक्षर्ण प्रदान विकया गया है, आने वाले अभ्यर्थिर्थीयों से णिभन्न है।
25. दूसरे दृविष्टकोर्ण से ऐसी स्थिस्र्थीति पैदा हो सक ी है, Hहां ओपन या Hनरल श्रेर्णी की सीटों में क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए समायोHन कर े समय, कम मे ावी अभ्यर्थीी³ को समायोसिH विकया Hा सक ा है, Hैसा विक व 'मान मामले में हुआ है। Hाविहर है, ओपन Hनरल मविहला श्रेर्णी में अंति म यविन अभ्यर्थी< क्षैति H आरक्षर्ण का समायोHन कर े समय आवेदकों की ुलना में कम अंक प्राप्त विकए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्थीे। आवेदकों क े दावे की इस आ ार पर अवहेलना की गई र्थीी विक वे क े वल दावा कर सक े हैं और क े वल भी Hब ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े अपने संबंति कॉलम में उनक े लिलए रिरविक्त या मौका र्थीा।
26. दोनों दृविष्टकोर्णों की ुलना की Hा सक ी है और इस मामले में शाविमल मुद्दों पर विनम्नलिललिख मान्य ाओं क े सार्थी एक का¨पविनक ति त्रर्ण क े आलोक में विव ार विकया Hा सक ा है:- (i) क ु ल उपलब् सीटें 100 हैं, सिHनमें 50 सीटें खुली/सामान्य श्रेर्णी क े लिलए हैं। अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' क े लिलए आरक्षर्ण Kमशः 20%, 10% और 20% है और इन आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े सभी अभ्यर्थी< अन्यर्थीा ओपन Hनरल श्रेर्णी क े सापेक्ष माने Hा सक े हैं। (ii) मविहलाओं क े लिलए उपलब् सीटों का प्रति श क ं पाट'मेंटल क्षैति H आरक्षर्ण क े ह 30% है। (iii) सभी योग्य उम्मीदवारों में से,Hब पहले 50 मे ावी उम्मीदवारों को ‘ओपन/सामान्य श्रेर्णी’ सीटें भरने क े लिलए ुना Hा ा है:- (क) 'ओपन/Hनरल श्रेर्णी' में पहले 50 उम्मीदवारों में क े वल 11 मविहलाएं हैं, Hो हैं; और (ख) 'ओपन/सामान्य श्रेर्णी' में अंति म पां व्यविक्त अर्थीा' ् सीरिरयल नं. 46,47,48,49 और 50 क े अभ्यर्थी< हैं - Kमांक 46- ओपन श्रेर्णी-पुरूष Kमांक 47- ओपन श्रेर्णी-पुरूष Kमांक 48-अनुसूति Hाति -पुरूष Kमांक 49-अनुसूति Hाति -पुरूष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Kमांक 50-अनुसूति Hाति -मविहला (ग) प्र ीक्षा सू ी में प्रर्थीम ार मविहला अभ्यर्थी<, Hो विकसी आरतिक्ष प्रवग' से संबंति नहीं हैं, समग्र योग्य ा स्थिस्र्थीति में Kम सं. 52,64,87 और 88 पर हैं। (घ) अविनल क ु मार गुप्ता एवं अन्य क े विनर्ण'य में पैरा 18 में ब ाए गये क े अनुसार अनुसूति Hाति वग' क े लिलए सीटों को भरने क े रर्ण में 20 अभ्यर्थीी³ में से 7 मविहलाएं हैं सिHनमें अस्थिन् म 2 अभ्यर्थीी³ की मविहलाएं हैं सिHनकी मेरिरट सू ी में समग्र रैंबिंकग Kम संख्या 80 और 86 है। (ङ) इसी प्रकार अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़े वग³ की सीटें भरी Hा ी हैं। ( ) अन्य विपछड़ा वग' में यविन 20 अभ्यर्थिर्थीयों में से 09 मविहलाएं हैं। इस दृष्टां की मूल विवशेष ाओं को विनम्नलिललिख सारर्णीबद्ध प्रारूप में रखा Hा सक ा है। क ु ल सीटें 100 श्रेर्णी ओपन/ सामान्य अनुसूति Hाति अनुसूति HनHाति अन्य विपछड़ा वग' उपलब् सीटें 50 20 10 20 मविहलाओं क े लिलए न्यून म सीटें 15 6 3 6 क्षैति H आरक्षर्ण क े पहले मविहलाओं द्वारा ली गयी सीटें 11 7 3 9 कमी, यविद कोई 4 Nil Nil Nil
27. ओपन Hनरल श्रेर्णी में पहले 50 सीटें आवंविट करने और आरक्षर्ण क े अन्य ऊध्वा' र कॉलम को भरने क े बाद, अगला कदम मविहलाओं क े लिलए क्षैति H mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आरक्षर्ण लागू करना है। यविद मविहलाओं क े लिलए आरक्षर्ण समग्र क्षैति H आरक्षर्ण हो, ो 30 मविहलाएं (11 + 07 + 03 + 09) हैं और आगे क ु छ भी करने की आवश्यक ा नहीं है। र्थीाविप, यविद मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण को 'क ं पाट'मेंटलाइज़्ड' क े रूप में लिलया Hाना है, Hैसा विक हम व 'मान मामले में ाह े हैं ो, उपयुक्त रर्णों में विनम्नलिललिख शाविमल होना ाविहए: - (क) ूंविक मविहलाओं क े लिलए ओपन/Hनरल श्रेर्णी में कमी ार सीटों की है, इसलिलए अंति म ार पुरुष अभ्यर्थी< अर्थीा' ् सीरिरयल नंबर 46,47,48 और 49 में शुरू में ओपन/Hनरल श्रेर्णी में आवंविट विकए गए, उन्हें विवस्र्थीाविप करना होगा। सीरिरयल नंबर 50 में अभ्यर्थी<, एक मविहला होने क े ना े, विवस्र्थीाविप नहीं की Hा सक ी। (ख) ऐसे विवस्र्थीापन क े प‹ा ् सीरिरयल नं. 46 और 47 क े पुरुष अभ्यर्थी< मुक्त/सामान्य श्रेर्णी से हैं, पूरी रह से गर्णना से बाहर हो Hाएंगे क्योंविक वे विकसी आरतिक्ष वग' में नहीं Hा सक े। (ग) Kम सं. 48 और 49 क े अभ्यर्थिर्थीयों क े मूल रूप से अनुसूति Hाति यों क े लिलए आरक्षर्ण क े ऊध्वा' र स् ंभ में रखे गए अभ्यर्थिर्थीयों की ुलना में अति क मे ावी होने क े कारर्ण आरक्षर्ण क े उनक े ऊध्वा' र स् ंभ में रखा Hाना ाविहए। इससे दो अभ्यर्थिर्थीयों का परिरर्णामी विवस्र्थीापन आरक्षर्ण क े उस क्षैति H कॉलम में होगा। 20 वां अभ्यर्थी<, सिHनकी समग्र योग्य ा की स्थिस्र्थीति सीरिरयल नंबर 86 पर है, हालांविक एक मविहला है, लेविकन अनुसूति Hाति की मविहलाओं क े लिलए कोटा से बाहर होने क े कारर्ण और 19 वें अभ्यर्थी< क े ुरं ऊपर एक पुरुष अभ्यर्थी< होने क े कारर्ण, इस प्रकार विवस्र्थीाविप हो Hाएगी। 27.[1] यविद हम दूसरे दृविष्टकोर्ण से ल े हैं, ो सीरिरयल नं. 52,64,87 और 88 क े मविहला अभ्यर्थीी³ को ओपन Hनरल श्रेर्णी की सीटों क े सापेक्ष समायोसिH विकया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Hाना ाविहए, Hबविक सीरिरयल नंबर 86 का अभ्यर्थी<, हालांविक सीरिरयल नं. 87 और 88 से अति क मे ावी है, को कोई सीट नहीं विमलेगी। दूसरी ओर, यविद हम पहले दृविष्टकोर्ण से ल े हैं, ो आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों क े दावे पर विव ार विकया Hाना ाविहए, यविद वे अति क मे ावी हैं, ो उस स्थिस्र्थीति में सीरिरयल नंबर 86 क े अभ्यर्थी< को समायोसिH करने की आवश्यक ा होगी। न ीH न, सीरिरयल नंबर 88 क े अभ्यर्थी< को हटाना होगा। इस रह क े विवणिभन्न Kम और संयोHन हो सक े हैं और विकसी विदए गए मामले में, आरक्षर्ण क े अपने संबंति ऊध्वा' र कॉलम क े लिलए प्र ीक्षा सू ी में आरतिक्ष वग' की संबंति मविहला अभ्यर्थी<, ओपन/सामान्य श्रेर्णी क े लिलए प्र ीक्षा सू ी में मविहला अभ्यर्थीी³ की ुलना में अति क मे ावी हो सक ी है।व 'मान दृष्टां उस स्थिस्र्थीति को उHागर करने क े लिलए विदया गया है Hो संभव: दूसरे दृविष्टकोर्ण क े विहसाब से लने पर सामने आ सक ा है।
28. दूसरा दृविष्टकोर्ण, क्षैति H आरक्षर्ण क े रर्ण में एक अलग सिसद्धां पर आ ारिर होने क े कारर्ण, ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े लिलए सुस्र्थीाविप सिसद्धान् क े विवपरी, ऐसी स्थिस्र्थीति यों का कारर्ण बन सक ा है सिHसमें एक कम मे ावी अभ्यर्थी<, Hो आरतिक्ष श्रेणिर्णयों में से विकसी से संबंति नहीं है, आरतिक्ष श्रेर्णी से आने वाले एक अति क मे ावी अभ्यर्थी< क े बHाय यन पा सक ा है। दूसरे दृविष्टकोर्ण क े अनुसार, इस असंगति को इस न्यायालय अविनल क ु मार गुप्ता एवं अन्य और राHेश क ु मार डारिरया क े विनर्ण'यों में की गयी उविक्तयों क े कारर्ण स्वीकार विकया Hाना ाविहए। इन दो विनर्ण'यों क े विनम्नलिललिख वाक्यों का अवलंब दूसरे दृविष्टकोर्ण क े समर्थी'न में लिलया गया है:mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “लेविकन यविद यह सं ुष्ट नहीं है, ो विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थिर्थीयों की अपेतिक्ष संख्या को उनक े संबंति सामासिHक आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों क े सापेक्ष संबंति अभ्यर्थिर्थीयों की उ नी संख्या को हटा कर समायोसिH विकया Hाना ाविहए। '[अविनल क ु मार गुप्ता,पैराग्राफ 18 से] “लेविकन ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण पर लागू पूव क्त सिसद्धां क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण पर लागू नहीं होगा [राHेश क ु मार [डारिरया, पैरा 9 से]
29. इन वाक्यों को एक आदेश माना Hा ा है विक क्षैति H आरक्षर्ण क े रर्ण में अभ्यर्थिर्थीयों को ऐसी श्रेणिर्णयों से संबंति अभ्यर्थिर्थीयों की उ नी संख्या को हटाकर उनकी संबंति श्रेणिर्णयों क े सापेक्ष समायोसिH विकया Hाना ाविहए और यह विक ऊध्वा' र (सामासिHक आरक्षर्ण) क े लिलए लागू सिसद्धां क्षैति H (विवशेष आरक्षर्ण) आरक्षर्ण क े संबं में लागू नहीं होगा। हमारे विव ार में, इन वाक्यों को दूसरे दृविष्टकोर्ण का समर्थी'न करने वाली घोषर्णा क े रूप में नहीं लिलया Hा सक ा है और विनति‹ रूप से संदभ' से बाहर उद्धृ विकया Hा रहा है। अविनल क ु मार गुप्ता एवं अन्य क े मामले में पैरा 18 की विटप्पणिर्णयों में एक ऐसी स्थिस्र्थीति पर विव ार विकया गया, Hहां क्षैति H आरक्षर्ण क े हकदार “विवशेष आरक्षर्ण अभ्यर्थिर्थीयों” को “सामासिHक आरक्षर्ण” क े लिलए एक ऊध्वा' र स् ंभ में समायोसिH विकया Hाना हो, ो ऐसे “सामासिHक आरक्षर्ण श्रेर्णी” क े अभ्यर्थिर्थीयों की उ नी संख्या को हटा विदया Hाना ाविहए। इसने यह नहीं ब ाया विक 'विवशेष या क्षैति H आरक्षर्ण' क े रर्ण में 'सामासिHक आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों' से संबंति अभ्यर्थी< को ओपन/Hनरल श्रेर्णी का नहीं माना Hा सक ा है। यह स है विक यविद क्षैति H आरक्षर्ण रर्ण में चिं ा क े वल संबंति ऊध्वा' र आरक्षर्ण या सामासिHक आरक्षर्ण श्रेर्णी क े समायोHन क े संबं में है, ो अक े ले उस श्रेर्णी से संबंति अभ्यर्थिर्थीयों पर विव ार विकया Hाना ाविहए। उदाहरर्ण क े लिलए, यविद अनुसूति Hाति, अनुसूति mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA HनHाति या अन्य विपछड़ा वग' की विकसी भी श्रेर्णी क े संबं में क्षैति H आरक्षर्ण लागू विकया Hाना है, ो क े वल उन अभ्यर्थिर्थीयों पर क्षैति H आरक्षर्ण क े स् र पर विव ार विकया Hा सक ा है सिHन्होंने उस विववरर्ण का उत्तर विदया है। अक े ले विव ार विकया Hा सक ा है। लेविकन यह कहना पूरी रह से अलग बा है विक यविद क्षैति H आरक्षर्ण क े रर्ण में, खुली/सामान्य सीटों क े सापेक्ष समायोHन पर विव ार विकया Hाना है, ो आरतिक्ष श्रेणिर्णयों में से विकसी से भी आने वाले अति क मे ावी अभ्यर्थिर्थीयों विकनारे कर विदया Hाना ाविहए। दूसरे दृविष्टकोर्ण क े समर्थी'न में अवलंब ली गयी विटप्पर्णी का यह आशय कभी नहीं र्थीा। इसी रह, राHेश क ु मार डारिरया क े मामले में की गयी विटप्पर्णी ऊध्वा' र और क्षैति H आरक्षर्ण क े बी एक विवणिशष्ट विवशेष ा पर Hोर देने क े संदभ' र्थीी; इस अर्थी' में विक:- (क) ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े रर्ण में, संबंति आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े लिलए विन ा'रिर सीटों को भरने क े दौरान ओपन/Hनरल श्रेर्णी में यविन आरतिक्ष श्रेर्णी क े अभ्यर्थिर्थीयों की गर्णना नहीं की Hानी है। (ख) बिंक ु संबंति यविन अभ्यर्थिर्थीयों की विगन ी नहीं करने का वही सिसद्धां क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए लागू नहीं हो ा है। क्षैति H आरक्षर्ण क े रर्ण में सिसद्धां (ए) को अपना े हुए,राHेश क ु मार डारिरया क े मामले में उत्तरदा ाओं ने विवशेष या क्षैति H आरक्षर्ण क े विहस्से क े रूप मविहलाओं क े लिलए 11 सीटें सामान्य मविहला श्रेर्णी में अलग से आवंविट विकया र्थीा, हालांविक 11 अन्य मविहलाएं मविहला अभ्यर्थिर्थीयों की सामान्य श्रेर्णी कोटा में अपनी योग्य ा क े अनुसार यविन हुई र्थीी। मविहलाओं क े लिलए 11 सीटों का कोटा पहले से ही सं ुष्ट है, इस अदाल ने इस सिसद्धां को नकार विदया विक मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण कर े समय उनकी संख्या की अवहेलना की Hाए। यह उस संदभ' में र्थीा विक विनर्ण'य क े पैरा 9 में इस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय द्वारा ऊध्वा' र और क्षैति H आरक्षर्ण क े बी अं र को स्पष्ट विकया गया र्थीा। उसी पैराग्राफ में बाद का वाक्य 'इस प्रकार ऊध्वा' र आरक्षर्ण कोटा क े भी र योग्य ा पर यविन मविहलाओं को मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण क े सापेक्ष विगना Hाएगा।' इस विबन्दु पर विब¨क ु ल स्पष्ट है।
30. इस न्यायालय द्वारा लोक सेवा आयोग, उत्तरां ल बनाम मम ा विबष्ट क े मामले में विदया गया विनर्ण'य भी पूरी रह से गल समझा गया। उस मामले में विकसी नी ू Hोशी ने अपनी योग्य ा क े आ ार पर सामान्य श्रेर्णी में एक सीट हासिसल की र्थीी और उन्होंने 'उत्तरां ल मविहला' क े लिलए विन ा'रिर क्षैति H आरक्षर्ण की श्रेर्णी का भी Hवाब विदया र्थीा। मूल रिरट याति काक ा' मम ा विबष्ट की ओर से प्रयास यह कहना र्थीा विक नी ू Hोशी को सामान्य श्रेर्णी में अपनी योग्य ा क े आ ार पर विनयुक्त विकये Hाने क े कारर्ण, 'उत्तरां ल मविहला' श्रेर्णी क े लिलए बनाई गई सीट को अन्य अभ्यर्थिर्थीयों से भरा Hाना ाविहए। संक्षेप में, Hो कहा गया, वह राHेश क ु मार डारिरया क े मामले में उत्तरदा ाओं द्वारा लिलया गया ही नHरिरया र्थीा, सिHसे उस मामले में स्पष्ट रूप से खारिरH कर विदया गया र्थीा। इसी कारर्ण से लोक सेवा आयोग, उत्तरां ल बनाम मम ा विबष्ट क े मामले में विदये गये विनर्ण'य का पैरा 15 में स्पष्ट विनष्कष' र्थीा विक मम ा विबष्ट क े दावे को स्वीकार करने का उच्च न्यायालय द्वारा विदया गया विनर्ण'य राHेश क ु मार डारिरया क े मामले में विन ा'रिर विवति क े अनुरूप नहीं र्थीा और अपील को अनुमति दी गयी र्थीी। इस प्रकार यह विनर्ण'य दूसरे दृविष्टकोर्ण का कोई समर्थी'न या सहाय ा नहीं कर ा।
31. दूसरा दृविष्टकोर्ण इस प्रकार न ो इस न्यायालय द्वारा विकसी आति कारिरक न्यातियक घोषर्णा पर आ ारिर है और न ही यह ऐसी स्थिस्र्थीति को Hन्म दे ा है Hहां योग्य ा को प्रार्थीविमक ा दी Hा ी हो। विकसी भी अनुमेय आरक्षर्ण क े अ ीन अर्थीा' सामासिHक (ऊध्वा' र) या विवशेष (क्षैति H), साव'Hविनक रोHगार क े अवसरों में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभ्यर्थिर्थीयों का यन विवशुद्ध रूप से योग्य ा क े आ ार पर होना ाविहए। कोई भी यन सिHसक े परिरर्णामस्वरूप अभ्यर्थिर्थीयों को अन्य उपलब् अभ्यर्थिर्थीयों की ुलना में कम योग्य ा पर भी ओपन/Hनरल श्रेर्णी क े सापेक्ष ुना Hा ा है, विनति‹ रूप से समान ा क े सिसद्धां ों क े विवरो में होगा। आरतिक्ष श्रेणिर्णयों क े लिलए सीटों या कोटा क े सापेक्ष विव ार विकए Hाने वाले अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए विवशेष विव रर्ण हो सक ा है और सिसद्धां रूप में यह संभव है विक ओपन/Hनरल श्रेर्णी से आने वाले अति क मे ावी अभ्यर्थी< का यन न हो पाये। लेविकन इसका उ¨टा कभी भी स नहीं हो सक ा और उस बुविनयादी सिसद्धां क े विवपरी होगा Hो इस न्यायालय द्वारा स्वीकार विकए गए हैं। व्याख्या का कोई भी दृविष्टकोर्ण या प्रविKया Hो पहले स्पष्ट की गई असंगति को Hन्म दे, को अस्वीकार कर विदया Hाना ाविहए।
32. दूसरा दृविष्टकोर्ण इस प्रकार न क े वल क ' हीन परिरर्णामों की ओर ले Hाएगा, Hहां अति क मे ावी अभ्यर्थी< संभव ः ऊपर ब ाए अनुसार दर विकनार हो सक े हैं, बस्थि¨क इस अव ारर्णा को Hन्म देगा विक ओपन /Hनरल सीटें ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेणिर्णयों से आने वाले अभ्यर्थिर्थीयों क े अलावा अन्य अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए आरतिक्ष हैं। इस रह का दृविष्टकोर्ण इस न्यायालय क े विनर्ण'यों की लंबी श्रृंखला क े पूरी रह से विवरो में होगा।
33. इसलिलए, हम दूसरे दृविष्टकोर्ण को मंHूरी नहीं दे े हैं और इसे खारिरH कर े हैं। राHस्र्थीान, बॉम्बे, उत्तराखंड और गुHरा क े उच्च न्यायालयों का दृविष्टकोर्ण सही और क ' संग है।
34. यहां यह कहा Hाना ाविहए विक उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश (पैरा 9 में उद्धृ ) क े समक्ष विदनांक 16.03.2016 क े आदेश में दH' उत्तर प्रदेश क े महाति वक्ता द्वारा विकये गये कर्थीन विब¨क ु ल सही र्थीे। उच्च न्यायालय की एकल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्याया ीश और तिडवीHन बें ने राज्य की ओर लिलये गये दृविष्टकोर्ण को खारिरH कर गल ी की। ऐसा प्र ी हो ा है विक इस रह की अस्वीक ृ ति क े बाद, भ < पूरा करने क े लिलए विन ा'रिर प्रविKया यर्थीा विदनांक 22.02.2019 क े आदेश में उच्च न्यायालय की तिडवीHन बें द्वारा पारिर आदेश में संदभ'ति (पैराग्राफ 11 में उद्धृ ) ने रर्ण 4.[1] में कहा र्थीा विक अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' श्रेर्णी से गैर संबंति अभ्यर्थिर्थीयों पर ही सामान्य श्रेर्णी क े सापेक्ष विव ार विकया Hाएगा।उक्त प्रविKया और विवशेष रूप से रर्ण 4.[1] गल र्थीा, लेविकन शायद उच्च न्यायालय द्वारा Hारी घोषर्णा द्वारा विनदUणिश विकया गया र्थीा। दूसरी ओर, ारुणिशला बनाम महाराष्ट्र राज्य क े मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा दH' और महाराष्ट्र क े महाति वक्ता द्वारा लिलया गया स्टैंड सही र्थीा।
35. हमें इस स् र पर यह भी स्पष्ट करना ाविहए विक इसमें विववाद नहीं है विक आवेदक सं. 1 और इसी रह स्थिस्र्थी अन्य अभ्यर्थी< अन्यर्थीा 'ओपन/Hनरल श्रेर्णी' में विनयुक्त होने क े हकदार और पात्र हैं और उन्होंने ऐसा कोई विवशेष लाभ नहीं उठाया है Hो उन्हें 'ओपन/Hनरल श्रेर्णी' सीट क े सापेक्ष विव ार विकये Hाने से अयोग्य बना ा हो। व 'मान मामले में पूरी ा' और विवश्लेषर्ण, इसलिलए, उक्त नHरिरए से है।
36. अं में, हमें यह कहना ाविहए विक मन्नाबेन अशोकभाई देसाई क े मामले में अपने फ ै सले क े पैरा 56 में गुHरा उच्च न्यायालय द्वारा इंविग कदम ऊध्वा' र और क्षैति H दोनों आरक्षर्ण को लागू करने क े लिलए सही और उपयुक्त प्रविKया अणिभकस्थि¨प कर े हैं। हमारे द्वारा विदया गया दृष्टां क े वल एक संभाविव आयाम से संबंति है। ऐसी कई संभावनाएं हो सक ी हैं। यहां क विक व 'मान ति त्रर्ण द्वारा, अनुसूति HनHाति यों क े लिलए ऊध्वा' र कॉलम में आवंविट पहली मविहला अभ्यर्थी< ने सीरिरयल नंबर 64 क े अभ्यर्थी< की ुलना में उच्च रैंक प्राप्त विकया हो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सक ा है। उस स्थिस्र्थीति में उक्त अभ्यर्थी< को अनुसूति HनHाति की श्रेर्णी से ओपन/Hनरल श्रेर्णी में स्र्थीानां रिर विकया Hाना ाविहए, सिHसक े परिरर्णामस्वरूप अनुसूति HनHाति क े ऊध्वा' र कॉलम में रिरविक्त हो Hाएगी। ब ऐसी रिरविक्त को अनुसूति HनHाति -मविहला प्र ीक्षा सू ी में अभ्यर्थी< क े लाभ क े लिलए प्रेरिर करना ाविहए। गुHरा उच्च न्यायालय द्वारा इंविग कदम ऐसी हर संभावना का ध्यान रखेंगे। यह स है विक एक प्रविKया कवायद आवश्यक रूप से संबंति अति कारिरयों पर छोड़ दी Hानी ाविहए, लेविकन हम यह कह सक े हैं विक उक्त विनर्ण'य में विन ा'रिर प्रविKया विनति‹ रूप से सभी दावों को सं ुष्ट करेगा और पूव'व < पैराग्राफ में हमारे द्वारा स्पष्ट की गयी विकसी भी असंगति को Hन्म नहीं देगा।
37. इस विनष्कष' पर पहुं ने क े बाद विक अपीलक ा' नंबर 1 और इसी रह स्थिस्र्थी अभ्यर्थिर्थीयों ने 'ओपन/Hनरल श्रेर्णी' में ुने गए अंति म अभ्यर्थी< की ुलना में अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे, हमें प्राप्त विनष्कष³ क े आलोक में ार्किकक परिरर्णाम उक्त यन को रद्द करना और अति कारिरयों को नए सिसरे से पूरी प्रविKया पूर्ण' करने का विनदUश देना होगा। हालांविक, उन थ्यों को देख े हुए विक उन यविन अभ्यर्थिर्थीयों ने वास् व में प्रणिशक्षर्ण प्राप्त विकया है और व 'मान में रोHगार में हैं और पया'प्त संख्या में रिरविक्तयां उपलब् हैं, हम विनम्नानुसार राह और विनदUश प्रदान कर े हैं:- क) 'ओबीसी मविहला श्रेर्णी' से आने वाले सभी अभ्यर्थी< सिHन्होंने 274.8928 से अति क अंक प्राप्त विकए र्थीे अर्थीा' ् सामान्य श्रेर्णी-मविहला में विनयुक्त अंति म अभ्यर्थी< द्वारा प्राप्त अंक क े बराबर, उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिलस में कांस्टेबल क े रूप में रोHगार प्रदान विकया Hाना ाविहए। (ख) उस संबं में अभ्यर्थिर्थीयों को समुति पत्र ार सप्ताह क े भी र भेHे Hाएंगे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ग) यविद संबंति अभ्यर्थी< अपने विवक¨प का प्रयोग कर े हैं और रोHगार क े प्रस् ाव को स्वीकार कर े हैं, ो संबंति अभ्यर्थीी³ द्वारा दो सप्ताह क े भी र संसू ना भेHी Hाएगी। घ) ऐसी स्वीक ृ ति विमलने पर कोडल और अन्य औप ारिरक ाएं ीन सप्ताह क े भी र पूरी की Hाएंगी। ङ) इसक े बाद विनयुविक्त पत्र एक सप्ताह क े भी र Hारी विकए Hाएंगे और संबंति अभ्यर्थिर्थीयों को उति पोस्टिंस्टग दी Hाएगी। ) वरिरष्ठ ा, वे न विन ा'रर्ण और अन्य मुद्दों सविह सभी उद्देश्यों क े लिलए, ऐसे अभ्यर्थिर्थी क े रोHगार की गर्णना उस ारीख से की Hाएगी Hब विनयुविक्त आदेश Hारी विकए गये हैं। छ) 274.8928 अंक कट ऑफ वाली सामान्य श्रेर्णी मविहला अभ्यर्थिर्थीयों का विनयोHन, राज्य सरकार क े शपर्थीपत्र क े पैराग्राफ 5 और 8 में यर्थीा उसिल्ललिख, इस विनर्ण'य क े कारर्ण विकसी भी रह से प्रभाविव नहीं होगा।
38. ूंविक यह स्वीकार विकया गया है विक 'एससी मविहला श्रेर्णी' से आने वाले अभ्यर्थिर्थीयों में से विकसी ने भी 274.8298 से अति क अंक प्राप्त नहीं विकए र्थीे, इसलिलए आवेदक सं. 2 और सभी समान स्थिस्र्थी अभ्यर्थिर्थीयों क े दावों को खारिरH विकया Hा ा है।
39. प्रकीर्ण' आवेदन संख्या 2641 वष' 2019 और आई.ए. सं. 25611 वष' 2019 को पूव क्त सीमा क अनुमति दी Hा ी है। रिरट याति का (सिसविवल) सं. 237 वष' 2020
40. अनुच्छेद 32 क े ह यह रिरट याति का 14 मविहला अभ्यर्थीी³ द्वारा एक ही यन से संबंति है Hो मुख्य ः विनम्न अनु ोष पाने क े लिलए दायर की गयी है:mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “ए. उत्तरदा ाओं को 375 अपूर्ण' रिरविक्तयों क े सापेक्ष याति काक ा'ओं को समायोसिH / यन करने क े लिलए परमादेश प्रक ृ ति की रिरट, आदेश या विनदUश विनदUश Hारी करें।”
41. इनमें से विकसी भी याति काक ा' ने 274.8298 से अति क अंक हासिसल नहीं विकए र्थीे और इस रह, उनक े मामले को आवेदक नंबर 1 -सुश्री सोनम ोमर और अन्य समान रूप से स्थिस्र्थी अभ्यर्थिर्थीयों सिHनकी ा' की गयी है,क े बराबर नहीं माना Hा सक ा है।
42. यविद रिरक्त पद हैं, ो विवशुद्ध रूप से संबंति वै ाविनक प्राव ानों क े संदभ' में काय' करना अति कारिरयों पर है। न ो परमादेश Hारी करने क े लिलए कोई क ' विदया गया है,न ही, संबंति अति कारिरयों को अ ूरी रिरविक्तयों क े सापेक्ष याति काक ा'ओं को समायोसिH करने का विनदUश देना, हमें समी ीन प्र ी हो ा है।
43. इसलिलए, यह रिरट याति का मेरिरट रविह है और इसे खारिरH विकया Hा ा है।..................... [न्यायमूर्ति उदय उमेश ललिल ]..................... [न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भाट]..................... [न्यायमूर्ति हृविषक े ष रॉय] नई विदल्ली; विदसम्बर 18, 2020. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रति वेद्य भार का उच्च म न्यायालय सिसविवल अपील अति कारिर ा प्रकीर्ण' आवेदन संख्या 2641 वष' 2019 में विवशेष अनुमति याति का (सिसविवल) नंबर 23223 वष' 2018 सौरव यादव एवं अन्य......याति काक ा' (गर्ण) बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य...... प्रत्यर्थी< (गर्ण) सार्थी में रिरट याति का (सिसविवल) 237 वष' 2020 विन र्ण' य माननीय न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट
1. मैं न्यायमूर्ति ललिल क े विनर्ण'य और विनष्कष' क े सार्थी सहम हूं, और उन्हें पूरी रह से समर्थी'न कर ा हूं। मेरा यह भी म है विक राHस्र्थीान उच्च न्यायालय (मेघा शेट्टी बनाम राHस्र्थीान राज्य[1], नीलम शमा' बनाम राHस्र्थीान राज्य[2] ), गुHरा उच्च
1. 2013 (4) आर.एल.डब्¨यू mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय ( मन्नाबेन अशोकभाई देसाई बनाम शी ल अमृ लाल विनसार[3] ), बॉम्बे उच्च न्यायालय (आशा रामनार्थी घोलप बनाम अध्यक्ष, सिHला यन आयोग/कलेक्टर[4], क ं न विवश्वनार्थी Hग ाप और अन्य बनाम महाराष्ट्र प्रशासविनक न्यायाति करर्ण और अन्य[5], ेHस्थिस्वनी रघुनार्थी गोलंडे बनाम अध्यक्ष, महाराष्ट लोक सेवा आयोग मुंबई और अन्य[6], ारुशीला बनाम महाराष्ट्र राज्य[7], शांति लक्ष्मर्ण दोपोड बनाम महाराष्ट्र राज्य[8] ) और उत्तराखंड उच्च न्यायालय (उत्तराखंड अ ीनस्र्थी सेवा यन आयोग बनाम रंHी ा रार्णा9 ) न्यायमूर्ति क े मामले में पारिर विनय'र्ण को प्रर्थीम दृविष्टकोर्ण कहा गया Hो सत्य है और उसे पृष्ठांविक विकया Hाना ाविहेए और Hो दृविष्टकोर्ण को इलाहाबाद और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अHय क ु मार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य10 और मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम उदय सिससोदे एवं अन्य11 प्रति पाविद विकया गया उसे न्यायमूर्ति क े विद्व ीय दृविष्टकोर्ण कहा गया Hो मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण की प्रक ृ ति क े बारे में ब ा ा है और इन पदों को भरने की Hो रकीब ब ायी गयी वह इस न्यायालय द्वारा विदये
2. 2015 एस.सी.सी. (ऑनलाइन) राHस्र्थीान 139
3. विदनांक 5.8.2020 को आर/स्पेशल सिसविवल में आर/एलपीए सं. 1910.18968/2018 पारिर विनर्ण'य
4. 2016 एस.सी.सी. (ऑनलाइन) बाम्बे 1623
5. 2016 महाराष्ट्र एल.Hे. 934
6. 2019 महाराष्ट्र ए.जे. 527
7. 2019 एस.सी.सी.ऑनलाइन बाम्बे 1519
8. 2019 एस.सी.सी.ऑनलाइन बाम्बे 1639
9. 2019 एस.सी.सी.ऑनलाइन उत्तराखण्ड़ 481
10. (2019) 5 ए.एल.जे. 466
11. (2019) एस.सी.सी.ऑनलाइन एम.पी. 5750 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गये पूव' विनर्ण'यों से संग नहीं है। हालाँविक, मैं अपनी रफ से क ु छ कारर्ण देना ाहूंगा और यह विकसी भी रह से न्यायमूर्ति ललिल द्वारा व्यक्त विकए गए विव ारों क े विवपरी नहीं हैं।
2. यह विनर्ण'य अनुKम में ीसरा है, और कांस्टेबल (सिसविवल) और प्रां ीय सशस्त्र कांस्टेबल (पीएसी) क े पद क े लिलए भ < से संबंति है। पहला विनर्ण'य विदनांक 19.01.201612 को विदया गया र्थीा। यह विनर्ण'य उन उम्मीदवारों क े परिरर्णाम और उनक े विनष्काषन से संबंति र्थीा सिHन्होंने परीक्षा क े समय व्हाइटनर एवं ब्लेड का उपयोग विकया र्थीा। इस न्यायालय ने उस विनर्ण'य में कहा र्थीा विक ऐसे आवेदकों की उम्मीदवारी को खारिरH नहीं विकया Hा सक ा र्थीा। इस न्यायालय द्वारा पारिर विद्व ीय विनर्ण'य विदनांविक 27.11.201813 इस प्रकार है: "इसलिलए, वष' 2011 से संबंति यन में यविन उम्मीदवारों की क ु ल संख्या विकसी भी दशा में 4010 + 1022 से कम नहीं होनी ाविहए। उन उम्मीदवारों की प्रास्थिस्र्थीति और पह ान सिHनसे 1022 क े समूह का गठन हो ा है, बहु स्पष्ट है। इस संदभ' में यह उल्लेख विकया Hाना ाविहए विक अति सूति रिरविक्तयां क े वल अनुमाविन हैं और यविद मHबूरी में इनकी संख्या बढ़ायी Hा ी है ो इसमें क ु छ भी गल नहीं है।
29. अब हम इस मुद्दे पर आ े हैं विक दो बार गर्णना की गयी रिरक्त पदों क े संबं में क्या दृविष्टकोर्ण होना ाविहए। सारर्णीबद्ध ाट' से विवविद हो ा है विक स्व ंत्र ा सेनाविनयों इत्याविद क े आणिश्र ों की श्रेणिर्णयों में उम्मीदवारों की अनुपलब् ा क े परिरर्णामस्वरूप 226 पद खाली रह गये और 607 पद अभ्यर्थिर्थीयों को ट्रेबिंनग छोड़ देने मेतिडकल परीक्षर्ण/ रिरत्र सत्यापन को न पास कर पाने क े ल े रिरक्त है। सैद्धास्थिन् क रूप से,
12. हनुमान दत्त शुक्ला बनाम उत्तर प्रदेश राज्य 2018 (16) एस.सी.सी. 447
13. सिससि ल अपील सं. 11370/2018 (आलोक कुमार सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क कुमार सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्यु मार सिसंह ए ं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 226 न भरे गये पदों को आगे क े यन क े लिलए आगे बढ़ाया Hाना ाविहए क्योंविक उन पदों को स्व ंत्र ा सेनाविनयों क े आणिश्र ों क े लिलए विन ा'रिर विकया गया र्थीा।"
3. मुकदमेबाHी क े व 'मान दौर में उत्पन्न विववाद मविहला उम्मीदवारों ('क्षैति H कोटा') क े लिलए आरतिक्ष कोटा भरने की सही विवति है। यह आवेदकों की णिशकाय है, Hो ज्यादा र मविहलाएं हैं, Hो अन्य विपछड़ा वग' श्रेणिर्णयों से संबंति हैं, विक राज्य ने आरक्षर्ण क े विनयम को सही ढंग से लागू नहीं विकया है, और ऐसे ओबीसी मविहला उम्मीदवारों को 'प्रवास' का लाभ देने से इनकार विकया है, अर्थीा' सामान्य श्रेर्णी की रिरविक्तयों में समायोHन।
4. उ.प्र. लोक सेवा (शारीरिरक रूप से विवकलांग, स्व ंत्र ा सेनाविनयों और पूव' सैविनकों क े आणिश्र ों क े लिलए आरक्षर्ण ) अति विनयम, 1993 (इसक े बाद '1993 अति विनयम') विवकलांग व्यविक्तयों, पूव' सैविनकों और स्व ंत्र ा सेनाविनयों क े आणिश्र ों को आरक्षर्ण प्रदान कर ा है। उ.प्र. लोक सेवा (अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' क े लिलए आरक्षर्ण) अति विनयम, 1994 सामासिHक श्रेणिर्णयों (एससी/एसटी/ओबीसी) क े लिलए आरक्षर्ण प्रदान करने वाले उ.प्र. राज्य द्वारा अति विनयविम व्यापक कानून है। यह अति विनयम, 1993 (विवकलांग व्यविक्तयों, पूव' सैविनकों और स्व ंत्र ा सेनाविनयों क े आणिश्र ों क े लिलए [इसक े बाद डीएफएफ]) क े प्राव ान स्पष्ट रूप से ारा 3 (3) द्वारा ब ाए गए हैं विकः “(3). उप ारा (1) क े अ ीन आरतिक्ष रिरविक्तयों क े सापेक्ष यविन व्यविक्तयों को उन समुति प्रवग³ में रखा Hाएगा सिHस वग' से संबंति हैं। उदाहरर्ण, यविद कोई यविन व्यविक्त अनुसूति Hाति वग' से संबंति है, ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उसी कोटा में रखा Hाएगा; यविद वह अनुसूति HनHाति वग' से संबंति है, ो उसे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आवश्यक समायोHन करक े उस कोटा में रखा Hाएगा; यविद वह अन्य विपछड़ा वग' क े नागरिरकों, श्रेर्णी से संबंति है, ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उस कोटा में रखा Hाएगा। इसी रह। यविद वह सामान्य श्रेर्णी से संबंति है, ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उस श्रेर्णी में रखा Hाएगा।" इस प्रकार यह स्पष्ट है विक 1993 अति विनयम क े ह आरक्षर्ण प्रक ृ ति में 'क्षैति H' र्थीी।
5. व 'मान मामले में मविहलाओं सार्थी ही सार्थी स्व ंत्र ा सेनाविनयों (डीएफएफ) और पूव' सैविनकों क े आणिश्र ों को विमला कोटा 'क्षैति H' क े रूप में वग<क ृ विकया गया है, Hबविक सामासिHक समूहों (एससी, एसटी, ओबीसी) क े लिलए कोटा को 'ऊध्वा' र' क े रूप में वग<क ृ विकया गया है। इस विवभेदक शब्दावली क े संयोHन को इस थ्य से रेखांविक विकया Hा ा है विक उत्तराद्ध' को अनुच्छेद 16 (4) में स्पष्ट रूप से अनुमोविद विकया गया है, Hबविक पूव' को अनुज्ञेय वग<करर्ण की प्रविKया (अनुच्छेद 14,16 (1) क े माध्यम से विवकसिस विकया गया है, यद्यविप ऐसे क्षैति H आरक्षर्ण अनुच्छेद 15 (3)14 में अति रिरक्त रूप से अवस्थिस्र्थी विकए गए हैं।
6. उ.प्र. राज्य में, कोई कानून या विनयम नहीं है (संविव ान क े अनुच्छेद 309 क े परन् ुक क े अ ीन विवरति ) Hो मविहलाओं क े लिलए आरक्षर्ण को अविनवाय' कर ा है। हालाँविक, विदनांक 26.2.1999 को सभी पदों पर लागू एक सरकारी आदेश Hारी विकया गया र्थीा। उत्तर प्रदेश सरकार (उ.प्र.) द्वारा Hारी सरकारी आदेश
14. देखेंः आंध्र प्रदेश सरकार बनाम पी. बी. विवHय क ु मार 1995 (4)एस. सी. सी. 520 (इस न्यायालय ने यह अणिभविन ा'रिर विकया विक “राज्य क े अ ीन विनयोHन या पदों क े संबं में मविहलाओं क े लिलए विवशेष उपबं करना अनुच्छेद 15 (3) का अणिभन्न भाग है। अनुच्छेद 15 (3) क े ह प्रदत्त शविक्त अनुच्छेद 16 क े ह विकसी भी रीति से कमHोर नहीं विकया Hा सक ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (Hी.ओ.) विदनांविक 26.02.1999 Hो मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण का उपबं कर ा है विनम्नलिललिख है। सं.-14/1/9/क-2/4 कार्किमक अनुभाग-2 लखनऊ, विदनांक 26 फरवरी 1999 प्रेषक, श्री सु ीर क ु मार सति व, उत्तर प्रदेश सरकार। सेवा में, 1 - समस् प्र ान सति व/सति व, उत्तर प्रदेश सरकार। 2- समस् विवभाग क े प्रमुख/काया'लय प्रमुख, उत्तर प्रदेश। 3- समस् संभागीय/सिHला मसिHस्ट्रेट, उत्तर प्रदेश। विवषय: राज्य क े ह साव'Hविनक सेवाओं और पदों पर सी ी भ < की प्रविKया पर मविहलाओं क े लिलए आरक्षर्ण 15 सुनैना वित्रपाठी बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य, (2012)3 एडीHे 463 से लिलया गया। महोदय, मुझे यह सूति करने क े लिलए विनदUणिश विकया गया है विक सरकार ने विनम्नलिललिख श ³ क े अ ीन राज्य की साव'Hविनक सेवाओं और पदों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर सी ी भ < की प्रविKया पर मविहलाओं क े लिलए 20 प्रति श आरक्षर्ण प्रदान करने का विनर्ण'य लिलया है:
1. राज्य क े ह साव'Hविनक सेवाओं और पदों पर सी ी भ < की प्रविKया क े लिलए आरक्षर्ण लागू होगा, पदोन्नति पद नहीं।
2. आरक्षर्ण क्षैति H प्रक ृ ति का होगा कहने का अर्थी' यह है विक वह श्रेर्णी सिHसक े लिलए साव'Hविनक सेवाओं में मविहलाओं क े लिलए पदों क े लिलए पूव क्त आरक्षर्ण नीति क े ह विकन्हीं मविहलाओं का यन विकया गया है ब राज्य सरकार क े ह सी ी भ < क े लिलए पदों पर क े वल उसी श्रेर्णी में उसका समायोसिH विकया Hाएगा;
3. यविद विकसी मविहला का यन विकसी भी राज्य लोक सेवा और पद में योग्य ा क े आ ार पर विकया Hा ा है, ब उसका यन उस श्रेर्णी में मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष रिरविक्त क े सापेक्ष होगा।
4. यविद साव'Hविनक सेवाओं में मविहलाओं क े लिलए आरतिक्ष पद क े लिलए एक उपयुक्त मविहला उम्मीदवार उपलब् नहीं है और राज्य सरकार क े ह सी ी भ < क े लिलए पदों पर है, ो ऐसा पद एक उपयुक्त पुरुष उम्मीदवार क े बी से भरा Hाएगा और ऐसा पद नहीं होगा भविवष्य क े लिलए आगे बढ़ाया;
5. राज्य क े ह सेवाओं पर पदों पर सी ी भ < क े लिलए मविहलाओं क े लिलए आवश्यक योग्य ा, संबंति भ < विनयमों में उसिल्ललिख पूव' - मौHूदा अपेक्षाओं क े अनुसार Hारी रहेगी और इस विनयम क े कारर्ण स्थिस्र्थीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
6. साव'Hविनक सेवाओं और पद से अणिभप्रे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आरक्षर्ण अति विनयम में अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अन्य विपछड़ा वग' क े लिलए परिरभाविष साव'Hविनक सेवाओं और पदों से हैं। क ृ पया सरकार क े उपरोक्त आदेशों का अनुपालन सुविनति‹ करने क े लिलए कदम उठाएं। आपसे यह भी अनुरो विकया Hा ा है विक सरकार क े अ ीनस्र्थी सभी अति कारिरयों को इस आदेश से अवग कराया Hाए। भवदीय सु ीर क ु मार सति व
7. Hैसा विक उपरोक्त सरकारी आदेश क े सरसरी ौर से पढ़ने से स्पष्ट है, मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण क े संबं में एकमात्र श ' यह है विक यविद मविहला उम्मीदवार का यन विकया Hा ा है, ो उसे उपयुक्त सामासिHक श्रेर्णी क े सापेक्ष समायोसिH विकया Hाएगा सिHस श्रेर्णी (एससी/एसटी/ओबीसी/ओसी) से वह आ ी है।। र्थीाविप, ऐसा कोई विनयम या विनदेश नहीं है Hो सामान्य प्रवग' या “ सामान्य श्रेर्णी” में मविहलाओं की सामासिHक रूप से आरतिक्ष प्रवग' क े समायोHन को प्रति विषद्ध कर ा है। इसका प्रर्थीम संक े इंविदरा साहनी क े मामले में प्राप्त हुआ Hहां पर माननीय न्यायमूर्ति बी.पी. Hीवन रेड्डी ने विनम्नानुसार अव ारिर विकया: "ऊध्वा' र आरक्षर्ण क्षैति H आरक्षर्ण से परे ला Hा ा है सिHसे इंटरलॉबिंकग आरक्षर्ण कहा Hा ा है। अति क सटीक होने क े लिलए, मान लीसिHए विक रिरविक्तयों का 3% शारीरिरक रूप से विवकलांग व्यविक्तयों क े पक्ष में आरतिक्ष है; यह अनुच्छेद 16 (1) क े खंड (1) से संबंति आरक्षर्ण होगा। इस कोटा क े सापेक्ष ुने गए व्यविक्तयों को उपयुक्त श्रेर्णी में रखा Hाएगा; यविद वह एससी श्रेर्णी से संबंति है, ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उस कोटा में रखा Hाएगा; इसी रह, यविद वह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सामान्य श्रेर्णी (ओ.सी.) श्रेर्णी से संबंति है, ो उसे आवश्यक समायोHन करक े उस श्रेर्णी में रखा Hाएगा। इन क्षैति H आरक्षर्णों को प्रदान करने क े बाद भी, विपछड़े वग' क े नागरिरकों क े पक्ष में आरक्षर्ण का प्रति श बना हुआ है-और उसको बना रहना ाविहए। इस प्रकार कई राज्यों में इन आरक्षर्णों को विदया Hा ा है और इस प्रविKया को Hारी नहीं रखने का कोई कारर्ण नहीं है।"
8. अविनल क ु मार गुप्ता बनाम उ.प्र. राज्य, स्वाति गुप्ता बनाम उ.प्र. राज्य और सिH ेंद्र क ु मार सिंसह बनाम उ.प्र. राज्य और राHेश क ु मार दरिरया बनाम राHस्र्थीान लोक सेवा आयोग क े मामले में इस विनयम की पुविष्ट कर इसे लागू विकया गया। क्षैति H आरक्षर्ण श्रेर्णी और ऊध्वा' र, सामासिHक श्रेणिर्णयों को भरने क े रीति को राHेश क ु मार दरिरया (उपरोक्त) में विनम्नलिललिख शब्दों में सविवस् ार उल्लेख विकया गया: अनुच्छेद 16 (4) क े ह अनुसूति Hाति, अनुसूति HनHाति और अन्य विपछड़ा वग' को विदया गया सामासिHक आरक्षर्ण एक 'ऊध्वा' र आरक्षर्ण' हैं। अनुच्छेद 16 (1) या 15 (3) क े ह शारीरिरक रूप से विवकलांग, मविहलाओं आविद क े पक्ष में विदया गया विवशेष आरक्षर्ण 'क्षैति H आरक्षर्ण' हैं। Hहां अनुच्छेद ऐसे विपछड़े वग' से संबंति अभ्यर्थी<, अनारतिक्ष पदों पर प्रति स्प ा' कर सक े हैं और यविद उन्हें अपनी योग्य ा क े आ ार पर अनारतिक्ष पदों पर विनयुक्त विकया Hा ा है, ो उनकी संख्या संबंति विपछड़े वग' क े लिलए आरतिक्ष कोटा क े सापेक्ष नहीं विगना Hाएगा। इसलिलए, यविद अनुसूति Hाति क े कई उम्मीदवारों अपनी योग्य ा क े बल पर सामान्य श्रेर्णी की रिरविक्तयों में यविन हो Hा े हैं, सामान्य श्रेर्णी की रिरविक्तयों से समान संख्या में हो Hा े है अर्थीवा अनुसूति Hाति क े उम्मीदवारों क े लिलए आरतिक्ष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पदों क े प्रति श से अति क हो Hा े हैं ब यह नहीं कहा Hा सक ा है विक अनुसूति Hाति क े लिलए आरतिक्षर्ण कोटा भरा Hा ुका है। संपूर्ण' आरतिक्ष कोटा सामान्य श्रेर्णी क े ह यविन लोगों क े अलावा अक्षुर्ण और उपलब् होगा। [देखेंः इंविदरा साहनी, आर. क े. सभरवाल बनाम पंHाब राज्य, भार संघ बनाम वीरपाल सिंसह ौहान और रिर ेश आर. शाह बनाम डॉ. वाई. एल. यमुले ] बिंक ु ऊध्वा' र(सामासिHक) आरक्षर्ण पर लागू पूव क्त सिसद्धां क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण पर लागू नहीं होगा। Hहां अनुसूति Hाति यों क े लिलए सामासिHक आरक्षर्ण क े भी र मविहलाओं क े लिलए एक विवशेष आरक्षर्ण प्रदान विकया Hा ा है वहां पर उति प्रविKया यह विक सबसे पहसे मेरिरट क े आ ार पर अनुसूति Hाति यों क े कोटे को भरा Hाए और विफर उनमें से उन उम्मीदवारों की संख्या का प ा लगाया Hाए है Hो विवशेष आरक्षर्ण समूह 'अनुसूति Hाति -मविहला' से संबंति हैं। यविद ऐसी सू ी में मविहलाओं की संख्या विवशेष आरक्षर्ण कोटा की संख्या क े बराबर या उससे अति क है, ो विवशेष आरक्षर्ण कोटा क े लिलए आगे यन की आवश्यक ा नहीं है। क े वल यविद कोई कमी है, ो अनुसूति Hाति की मविहलाओं की अपेतिक्ष संख्या को अनुसूति Hाति से संबंति सू ी क े नी े से संबंति उम्मीदवारों की संख्या को हटाकर लेना होगा। क्षैति H (विवशेष) आरक्षर्ण ऊध्वा' र (सामासिHक) आरक्षर्ण से इस सीमा क णिभन्न है। इस प्रकार ऊध्वा' र आरक्षर्ण कोटा क े भी र मेरिरट पर यविन मविहलाओं को मविहलाओं क े लिलए क्षैति H आरक्षर्ण क े सापेक्ष विगना Hाएगा।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 16 (4) क े ह विपछड़े वग' क े पक्ष में ऊध्वा' र आरक्षर्ण विकया Hा ा है 16 इंविदरा साहनी बनाम भार संघ 1992 सप्लीमेंट (3) एससीसी 766, @पैरा 812 (एससीसी रिरपोट')] 17 1995 (5) एससीसी 173 181995 (2) एससी 560 19 2010 (3) एससी 119 20 2007 (8) एससी 785 7
9. ऊध्वा' र आरक्षर्ण की विवशेष ाएं इस प्रकार हैं: (i) उन्हें सामान्य श्रेर्णी या उन विनर्किदष्ट उम्मीदवारों से णिभन्न उम्मीदवारों की श्रेणिर्णयों द्वारा नहीं भरा Hा सक ा है और उन्हें क े वल संबंति सामासिHक श्रेर्णी (एससी/एसटी/ओबीसी) क े उम्मीदवारों द्वारा भरना होगा; (ii) मे ा प्रदश'न क े आ ार पर आरतिक्ष (विवविनर्किदष्ट श्रेर्णी ) से अनारतिक्ष (खुली श्रेर्णी) स्लॉट क गति शील ा (प्रवासन) संभव है; (iii) आरतिक्ष श्रेर्णी से खुली श्रेर्णी में प्रवासन की दशा में,आरतिक्ष श्रेर्णी की रिरविक्त को उसी विनर्किदष्ट श्रेर्णी में से विकसी अन्य कम रैंक वाले व्यविक्त द्वारा भरा Hाना ाविहए, (iv) ) यविद रिरविक्तयों को उम्मीदवारों की कमी क े कारर्ण विवविनर्किदष्ट प्रवग³ द्वारा नहीं भरा Hा सक ा है ो रिरविक्तयों को आगे बढ़ाया Hाना ाविहए या विनयमानुसार समुति रूप से भरा Hाना ाविहए।
10. दूसरी ओर, क्षैति H आरक्षर्ण, अपनी प्रक ृ ति क े ह अखण्ड़नीय नहीं है अर्थीवा बदला नहीं गया। वे अपने अति व्यापन पर आ ारिर हैं और 'इंटरलॉबिंकग' आरक्षर्ण हैं। परिरर्णामस्वरूप, न्यायमूर्ति ललिल क े द्वारा पारिर विनर्ण'य क े पैराग्राफ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 11 में स्पष्ट ा क े सार्थी विन ा'रिर विवणिभन्न रर्णों का अनुप्रयोग कर उनकी गर्णना समव < रूप से और अदृश्य 'ऊध्वा' र' (या 'सामासिHक') आरक्षर्ण कोटा क े सार्थी की Hानी ाविहए। उन्हें आगे नहीं बढ़ाया Hा सक ा है। क्षैति H आरक्षर्ण कोटा भरने में लागू पहला विनयम उन समायोHन में से एक है, अर्थीा' यह Hां करना विक क्या मेरिरट क े आ ार पर क्षैति H श्रेणिर्णयों में से विकसी को भी सामान्य श्रेर्णी में मेरिरट सू ी में समायोसिH विकया Hा सक ा है, और विफर, उस कोटे में Hो विवशेष रूप से विनर्किदष्ट/सामासिHक आरक्षर्ण क े भी र ऐसी क्षैति H श्रेर्णी क े लिलए है।
11. सामान्य श्रेर्णी ‘ कोटा’ नहीं है बस्थि¨क यह सभी मविहलाओं और पुरुषों क े लिलए समान है। इसी प्रकार, Hैसा विक राHेश क ु मार दरिरया क े प्रकरर्ण में अणिभविन ा'रिर विकया गया विक पुरुषों क े लिलए कोई कोटा नहीं है। यविद हम दूसरे दृविष्टकोर्ण को स्वीकार करें [Hैसा विक इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अHय क ु मार बनाम उ.प्र. राज्य और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और अन्य बनाम उदय सिससोद और अन्य क े मामले में अणिभविनर्ण< विकया गया है सिHसका संदभ' माननीय न्यायमूर्ति ललिल द्वारा पारिर विनर्ण'य क े प्रस् र 20 में विदया गया है] ब परिरर्णाम मविहला उम्मीद्वारों की संख्या को सीविम कर देगा इससे कोई फक ' नहीं पड़ेगा विक उन उम्मीद्वारों ने अपने सामासिHक श्रेर्णी में विक ना अच्छा प्रदश'न विकया है और इसलिलए यह क ' और मेरिरट क े प्रति विवनाशकारी सिसद्ध होगा। इसलिलए दूसरा दृविष्टकोर्ण, अप्रत्यक्ष रूप से समर्थी'न कर ा है- लेविकन यह दृविष्टकोर्ण विनति‹ रूप से समग्र संख्यात्मक कोटा क े लिलए यविन सू ी में मविहलाओं की संख्या को सीविम करने में परिरर्ण हो Hा ा है Hो विनयम द्वारा सुविनति‹ हो Hा ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
12. मेरी राय में, विद्व ीय दृविष्टकोर्ण पूरी रह से ध्वस् हो Hा ा है, Hब मविहला उम्मीदवारों क े विन ा'रिर प्रति श 20% से अति क (यानी 40% या 50%) उच्च मे ावी श्रेर्णी में आ े हैं। अHय क ु मार 25 और उदय सिससोड़ में लिलया गया उक्त विद्व ीय दृविष्टकोर्ण मेरिरट को ुनौ ी दे ा है। इस न्यायालय द्वारा भार संघ बनाम रमेश राम और अन्य प्रकरर्णों में अणिभविनर्ण< गति शील ा या प्रवास का सिसद्धां की प्रयोज्य ा ब भेदभावपूर्ण' हो ा, Hब यह विवशेष श्रेर्णी क े पुरुषों की गति शील ा क े लिलए लागू होगा, लेविकन ऐसी विवशेष श्रेर्णी की मविहलाओं को लागू नहीं होगा ऐसी विवशेष श्रेणिर्णयों (इस मामले क े थ्यों से स्पष्ट रूप से स्पष्ट है ) सिHन मविहला अभ्यर्थिर्थीयों ने अनारतिक्ष /सामान्य श्रेर्णी में अपने समकक्षों क े बराबर या उससे अति क स्कोर विकया है।
13. अविनल क ु मार गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, स्वाति गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, और सिH ेंद्र क ु मार सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क े मामले में पारिर वे विनर्ण'य र्थीे Hो उत्तर प्रदेश क े भ < मामलों उत्पन्न हुए र्थीे। वास् व में सिH ेंद्र क ु मार सिंसह क े मामले में न्यायालय न क े वल मविहलाओं क े पक्ष में क्षैति H आरक्षर्ण की वै ा संबं ी प्रश्न पर बस्थि¨क विदनांविक 26.2.1999 क े सरकारी आदेश पर भी विव ार भी विव ार विकया। उस श्रृंखला में नवीन म विनर्ण'य अनूप सिंसह बनाम उ.प्र. राज्य में इस न्यायालय द्वारा पारिर ऐसा विनर्ण'य है Hहां पर न्यायालय क े समक्ष उठाये गये कई क³ में से एक क ' यह र्थीा विक न्यायालय को उस प्रश्न पर विव ार करना र्थीा Hो इस मामले में विव ार हे ु उत्पन्न विकसी एक विकसी एक से समान हों, Hैसे, क्या सामासिHक श्रेर्णी क े क्षैति H अभ्यर्थिर्थीयों क े पदों को क्षैति H श्रेर्णी की रिरविक्तयों से भर सक े हैं। अदाल ने थ्यों को अणिभलिललिख विकया और पक्षकारों द्वारा प्रस् ु क को विनम्नलिललिख रीति से उल्लेख विकया (प्रस् र 62): mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
62. विनHी प्रत्यर्थिर्थीयों ने Hो क ' विदया वह यह है विक वै ाविनक अपेक्षा क े अनुसार, क्षैति H आरतिक्ष रिरविक्तयां नहीं भर पायी र्थीीं और क्षैति H श्रेर्णी की Hो रिरविक्तयां नहीं भर पायीं र्थीी उन रिरविक्तयों को ऊध्वा' र आरक्षर्ण उम्मीदवारों /अन्य श्रेर्णी क े उम्मीदवारों द्वारा भरा गया र्थीा, Hो वै ाविनक प्राव ानों का उल्लंघन में है और यन प्रविKया को दूविष कर ा है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री क ृ ष्र्ण क ु मार विमश्रा ने विवद्व अति वक्ता ने क्षैति H श्रेर्णी क े आरतिक्ष रिरविक्तयों की संख्या और उपयुक्त पाए गए उम्मीदवारों की संख्या क े संबं में विववरर्ण प्रस् ु कर उनको संबंति श्रेणिर्णयों में रख विदया। उक्त विववरर्ण विनम्नानुसार हैं: श्रेर्णी रिरविक्तयों की संख्या यविन उम्मीदवारों की संख्या मविहलाएं 1325 156 स्व ंत्र ा सेनानी आणिश्र 132 45 भू पूव' सैविनक 330 -- आंणिशक रूप से अं े व्यविक्त 84 84 आंणिशक रूप से बहरे व्यविक्त 84 57 एक हार्थी से लूला 42 42 एक पैर से लंगड़ा 42 42
26. (उपरोक्त) सं. 11 27. (2009) 6 एससीसी 619, पां न्याया ीशों की संविव ान पीठ ने, सिHसने इंविदरा साहनी में विनर्ण'य पर विव ार कर विनम्नानुसार mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ारिर विकया र्थीा 811. इस संबं में यह याद रखना अच्छा है विक अनुच्छेद 16 (4) क े ह आरक्षर्ण सांप्रदातियक आरक्षर्ण की रह काम नहीं कर ा है। यह हो सक ा है विक अनुसूति Hाति क े क ु छ अभ्यर्थी< मेरिरट क े आ ार पर सामान्य श्रेर्णी में यविन हो सक े हैं; उन्हें एस.सी. क े लिलए आरतिक्ष श्रेर्णी सापेक्ष नहीं विगना Hा सक ा है; उनको सामान्य श्रेर्णी का अभ्यर्थी< माना Hाएगा। 28. (उपरोक्त) सं.17 29. (उपरोक्त) सं.18 30. (उपरोक्त) सं. 19 31. (उपरोक्त) सं. 19 32. 2020 (2) एससीसी 173 उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से कहा गया विक क्षैति H आरक्षर्ण क े संबं में राज्य सरकार की नीति यों में से एक यह है विक, यविद क्षैति H आरक्षर्ण क े ऐसे पदों क े लिलए आरतिक्ष रिरविक्तयों को भरने क े लिलए उपयुक्त उम्मीदवार उपलब् नहीं हैं और वही नहीं हैं आगे बढ़ना; वे अन्य उपयुक्त उम्मीदवारों द्वारा अपनी योग्य ा क े अनुसार ऊध्वा' र आरतिक्ष श्रेणिर्णयों से संबंति उम्मीदवारों में से भरे Hा े हैं। यह कह गया विक न भरी गयी क्षैति H आरक्षर्ण रिरविक्तयों को सरकार की नीति क े अनुसार इस प्रकार संबंति ऊध्वा' र श्रेणिर्णयों क े उपयुक्त उम्मीदवारों द्वारा मेरिरट क े आ ार पर भरा गया। क्षैति H आरक्षर्ण क े लिलए आरतिक्ष रिरविक्तयों को संबंति ऊध्वा' र आरक्षर्ण क े अन्य उम्मीदवारों से भरने पर उच्च न्यायालय द्वारा दोष विनकालना सही नहीं र्थीा। ” इसक े बाद न्यायालय ने विनम्नलिललिख शब्दों में अपने विनष्कष' को अणिभलिललिख विकया: “84.6. संबंति ऊध्वा' र आरक्षर्ण से उम्मीदवारों द्वारा अपूर्ण' क्षैति H आरक्षर्ण को भरना सरकार की नीति क े संग है और इसमें दोष नहीं विनकाला Hा सक ा है।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. इन स्पष्ट विनर्ण'यों क े दृविष्टग, प्रति वादी राज्य क े लिलए यह दावा करने क े लिलए उस विदन बहु देर हो ुका है विक मविहला उम्मीदवार Hो सामासिHक श्रेर्णी क े आरक्षर्ण क े लाभ की अति कारी हैं, भी सामान्य श्रेर्णी की रिरविक्तयों को नहीं भर सक ी हैं। उक्त दृश्य को गल रीक े से उHागर विकया गया है, क्योंविक इससे ऐसी मविहला उम्मीदवार सिHनकी मेरिरट कम है सामान्य श्रेर्णी में यविन हो Hाएगीं और सिHनकी यविन उम्मीदवारों से अति क मेरिरट है वे सामासिHक/ऊध्वा' र आरक्षर्ण श्रेर्णी में यविन होने से छ ू ट Hाएंगी।
15. मैं यह कहकर अपनी बा समाप्त करू ं गा विक ऊध्वा' र और क्षैति H दोनों आरक्षर्ण साव'Hविनक सेवाओं में प्रति विनति त्व सुविनति‹ करने की विवति है। इन्हें कठोर “ स्लॉट” क े रूप में नहीं देखा Hाना ाविहए Hहां एक उम्मीदवार की मेरिरट, Hो अन्यर्थीा उसे सामान्य श्रेर्णी में प्रदर्थिश होने का अति कार दे ी है, को प्रति बंति विकया Hा ा है,Hैसा परिरर्णाम होगा, यविद राज्य का क ' स्वीकार विकया Hा ा है। ऐसा करने से यह सांप्रदातियक आरक्षर्ण में दब्दील हो Hाएगा Hहां प्रत्येक सामासिHक श्रेर्णी अपने आरक्षर्ण की सीमा क े भी र सीविम है Hो इस प्रकार मेरिरट को नकार ी है। सामान्य श्रेर्णी सभी क े लिलए है और इसमें प्रदर्थिश उम्मीदवार क े लिलए एकमात्र श ' मेरिरट है, इस बा से कोई फक ' नहीं पड़ ा विक उसक े /उसकी लिलए विकस रह का आरक्षर्ण उपलब् है।
16. मैं इस बा से सहम हूं विक इस अदाल क े समक्ष लंविब सभी आवेदनों और रिरट याति का सं. 237/2020 को माननीय न्यायमूर्ति ललिल द्वारा पारिर विनर्ण'य क े ऑपरेविटव विनदUशों क े संदभ' में विनपटाया Hाना है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA............................................ माननीय न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट नई विदल्ली, 18 विदसम्बर, 2020 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA