Virokesh Kumar Gupta v. Rajasthan State

Supreme Court of India · 07 Nov 2020
L. Nageswara Rao; Hemant Gupta; Ajay Rastogi
Civil Appeal Nos. 3649–3650 of 2020 @ SLP (C) Nos. 20512-20513 of 2019
2020 INSC 681
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the validity of the revised selection list prepared by the Rajasthan Public Service Commission based on the second answer key, limiting judicial interference in academic evaluation and dismissing the petitioners' appeals.

Full Text
Translation output
भारत क
े सर्वो च्च न्यायालय में
सिसविर्वोल अपीलीय क्षेत्राधि कार
सिसविर्वोल अपील संख्या 3649–3650/2020
(एसएलपी (सी) संख्या 20512-20513/2019 से उत्पन्न)
विर्वोक
े श क
ु मार गुप्ता और एन.आर. .... अपीलकता5
बनाम
राजस्थान राज्य और अन्य …. प्रधितर्वोादी
साथ
सिसविर्वोल अपील संख्या 3652-3657/2020
(एसएलपी (सी) संख्या 29990-29995/2019 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 3651/2020
(एसएलपी (सी) संख्या 21935/2019 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 3658-3659/2020
(एसएलपी (सी) संख्या 10035-10036/2020 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 3660/2020
(एसएलपी (सी) संख्या 9819/2020 से उत्पन्न)
विनर्ण5य
एल. नागेश्वर रार्वो, जे.
JUDGMENT

1. अनुमधित दी गई। 2020 INSC 681

2. अपीलकता5 श्री विर्वोक े श क ु मार गुप्ता और श्री महेश क ु मार मीर्णा ने सामासिजक विर्वोज्ञान में र्वोरिरष्ठ शिशक्षक (ग्रेड II) क े पद पर उनक े चयन न होने से व्यशिथत होकर राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर खंडपीठ में SBCWP संख्या 10992/2019 दायर की है। विदनांक 10.07.2019 क े एक आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने विर्वोज्ञापन विदनांक 13.07.2016 क े अनुसार र्वोरिरष्ठ शिशक्षक (सामासिजक विर्वोज्ञान) क े पद पर विनयुवि[यों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। उ[ आदेश को क ु छ चयविनत उम्मीदर्वोारों ने चुनौती दी थी। विदनांक 24.07.2019 क े एक आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 10.07.2019 क े अंतरिरम आदेश को रद्द कर विदया। ऐसा करते हुए, श्री विर्वोक े श क ु मार गुप्ता और श्री महेश क ु मार मीर्णा द्वारा दायर रिरट याधिचका का श्री मुक े श क ु मार शमा5 और अन्य द्वारा दायर संबंधि त रिरट याधिचका क े साथ विनस्तारर्ण विकया गया। अपीलकता5ओं ने अपील में खंडपीठ क े विदनांक 24.07.2019 क े उ[ विनर्ण5य को चुनौती दी।

2. सुविर्वो ा क े लिलए, हम एसएलपी (सी) संख्या 20512-20513/2019 से उत्पन्न होने र्वोाली अपीलों क े तथ्यों का उल्लेख करते हैं। सामासिजक विर्वोज्ञान, संस्क ृ त, हिंहदी, अंग्रेजी और गशिर्णत में 9,551 र्वोरिरष्ठ शिशक्षकों (ग्रेड II) क े चयन क े लिलए राजस्थान लोक सेर्वोा आयोग (संक्षेप में "आरपीएससी") द्वारा विदनांक 13.07.2016 को एक विर्वोज्ञापन जारी विकया गया था। सामान्य ज्ञान और सामासिजक विर्वोज्ञान की क्रमशः विदनांक 01.05.2017 और 02.07.2017 को लिललिखत परीक्षा आयोसिजत की गई थी। आरपीएससी ने विदनांक 06.02.2018 को पहली उत्तर क ुं जी जारी की और परिरर्णाम घोविoत विकया। याधिचकाकता5ओं क े नामों का उल्लेख चयविनत उम्मीदर्वोारों की सूची में विकया गया था लेविकन उनक े चयन क े बाद याधिचकाकता5ओं द्वारा दालिखल विकए गए विर्वोस्तृत प्रपत्रों में क ु छ दोoों क े कारर्ण उन्हें विनयु[ नहीं विकया जा सका। विदनांक 25.04.2018 को, राजस्थान क े उच्च न्यायालय, खंडपीठ जयपुर क े एकल न्याया ीश ने एक विर्वोशेoज्ञ सविमधित द्वारा पुनर्विर्वोचार क े लिलए पहली उत्तर क ुं जी में 3 प्रश्नों को प्रेविoत विकया। इसक े तुरंत बाद, राजस्थान क े उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश, जो पुर खंडपीठ ने विदनांक 05.05.2018 को एक विर्वोशेoज्ञ सविमधित द्वारा पुनर्विर्वोचार क े लिलए अन्य 8 प्रश्न भेजे। RPSC द्वारा गविठत एक विर्वोशेoज्ञ सविमधित ने सामासिजक विर्वोज्ञान में 2 प्रश्नों और सामान्य ज्ञान में 1 प्रश्न क े मुख्य उत्तरों को संशोधि त विकया। एक संशोधि त उत्तर क ुं जी (सिजसे दूसरी उत्तर क ुं जी क े रूप में संदर्भिभत विकया जाएगा) को उसक े अनुसार जारी विकया गया था और मेरिरट सूची को भी विदनांक 17.09.2018 को संशोधि त विकया गया था। संशोधि त मेरिरट लिलस्ट में याधिचकाकता5ओं क े नाम शाविमल नहीं थे।

3. राजस्थान उच्च न्यायालय, जो पुर खंडपीठ क े विर्वोद्वान एकल न्याया ीश का विदनांक 05.05.2018 का विनर्ण5य, सिजसक े द्वारा 8 प्रश्नों को पुनर्विर्वोचार क े लिलए विर्वोशेoज्ञ सविमधित को भेजा गया था, उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ क े समक्ष अपील का विर्वोoय था। इसमें अपीलकता5ओं की शिशकायत यह थी विक उन्होंने 33 प्रश्नों की सत्यता को चुनौती दी थी, सिजन्हें एक विर्वोशेoज्ञ सविमधित को संदर्भिभत करने की आर्वोश्यकता थी। उच्च न्यायालय ने स्र्वोयं विर्वोर्वोाविदत प्रश्नों की सत्यता की जांच की और इस विनष्कo[5] पर पहुंचा विक 5 प्रश्नों क े उत्तर गलत थे। यह सूधिचत विकए जाने क े बाद विक परिरर्णाम घोविoत कर विदए गए हैं और चयन प्रविक्रया पूरी हो गई है, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने विनर्ण5य विदनांक 12.03.2019 द्वारा डी.बी. विर्वोशेo अपील रिरट संख्या 922/2018 में चयन सूची क े संशो न का विनदzश विदया और संशो न का लाभ क े र्वोल न्यायालय क े समक्ष अपीलकता5ओं को विदया। 2020 की एसएलपी (सी) संख्या 10035-36 से उत्पन्न होने र्वोाली अपील को विदनांक 12.03.2019 क े विनर्ण5य की शुद्धता पर सर्वोाल उठाते हुए दायर विकया गया है।

4. विदनांक 13.03.2019 को उच्च न्यायालय की राजस्थान जयपुर खंडपीठ क े विर्वोद्वान एकल न्याया ीश द्वारा एक विनदzश जारी विकया गया विक अपात्र उम्मीदर्वोारों क े नाम चयन सूची से हटा विदए जाएं और एक संशोधि त चयन सूची जारी की जाए। तीसरी उत्तर क ुं जी आरपीएससी द्वारा विदनांक 08.04.2019 को प्रकाशिशत की गई थी, लेविकन उ[ संशो न का लाभ क े र्वोल अपीलकता5ओं को डीबी में विदया गया था। 2018 की विर्वोशेo अपील रिरट संख्या 922/2918 में राजस्थान उच्च न्यायालय क े विर्वोद्वान एकल न्याया ीश द्वारा विदनांक 13.03.2019 को जयपुर खंडपीठ द्वारा जारी विनदzश को लागू विकया गया था और अपात्र उम्मीदर्वोारों को छोड़कर चयन सूची को विदनांक 21.05.2019 को संशोधि त विकया गया था। दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर तैयार की गई उ[ संशोधि त चयन सूची में 124 अभ्यर्भिथयों क े नाम शाविमल विकए गए थे। RPSC द्वारा विदनांक 22.05.2019 को वि~र से दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर एक प्रतीक्षा सूची तैयार की गई।

5. रिरट याधिचका में अपीलकता5ओं की शिशकायत दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर विदनांक 21.05.2019 की संशोधि त चयन सूची तैयार करने की थी। अपीलकता5ओं द्वारा दायर रिरट याधिचका में विर्वोद्वान एकल न्याया ीश द्वारा विदनांक 10.07.2019 को पारिरत अंतरिरम आदेश क े लिखला~ दायर अपील में, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले पर विर्वोस्तार से विर्वोचार विकया और अपीलकता5ओं द्वारा दायर रिरट याधिचका का विनस्तारर्ण विकया। रिरट याधिचका में अपीलकता5ओं क े पक्ष में अंतरिरम आदेश को रद्द कर विदया गया था।

6. र्वोरिरष्ठ अध्यापकों क े पदों पर चयन हेतु विदनांक 13.07.2016 को जारी अधि सूचना से उत्पन्न मुकदमेबाजी की संपूर्ण[5] शृंखला को ध्यान में रखते हुए, खंडपीठ की सुविर्वोचारिरत राय थी विक उच्च न्यायालय की विर्वोशिभन्न पीठों द्वारा विदए गए अलग- अलग विनदzशों क े कारर्ण भ्रम की स्थिस्थधित हो गई थी। खंडपीठ ने पाया विक डी.बी. विर्वोशेo अपील रिरट संख्या 922/2018 विदनांक 12.03.2019 में खंडपीठ क े विनर्ण5य को विर्वोद्वान एकल न्याया ीश क े ध्यान में नहीं लाया गया जब उन्होंने विदनांक 13.03.2019 को चयन सूची को संशोधि त करने का विनदzश जारी विकया। यह माना गया था विक अपीलकता5 विकसी भी राहत क े हकदार नहीं थे क्योंविक खंडपीठ ने अपने ~ ै सले विदनांक 12.03.2019 में दज[5] विकए गए विनष्कo„ क े आ ार पर चयन सूची को संशोधि त करने क े लिलए विदए गए विनदzश को क े र्वोल अपीलकता5ओं पर लागू विकया था न विक अन्य उम्मीदर्वोारों को। दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर जारी की गई चयन सूची को धिडर्वोीजन बेंच द्वारा अनुमोविदत विकया गया था और आरपीएससी को विदनांक 16.04.2019 को प्रकाशिशत सूची क े आ ार पर चयन और विनयुवि[ जारी करने का विनदzश विदया गया था। विदनांक 22.05.2019 को तैयार की गई प्रतीक्षा सूची को भी खंडपीठ ने सही ठहराया।

7. जैसा विक उपरो[ सभी अपीलों में विर्वोचाराथ[5] उत्पन्न होने र्वोाले हिंबदु समान हैं, अन्य अपीलों क े तथ्यों का उल्लेख करना आर्वोश्यक नहीं है। मामले में विर्वोचार करने क े लिलए मुख्य हिंबदु यह है विक क्या 2018 की डी.बी. विर्वोशेo अपील रिरट संख्या 922 में उच्च न्यायालय की खंडपीठ क े विनर्ण5य विदनांक 12.03.2019 को क े र्वोल अपीलकता5ओं तक ही सीविमत विकया जा सकता है। अपीलकता5ओं की शिशकायत यह है विक चयन सूची को तीसरी उत्तर क ुं जी लागू करक े संशोधि त विकया जाना चाविहए था जो विक 12.03.2019 क े ~ ै सले क े आ ार पर तैयार विकया गया था।

8. श्री अलिखलेश क ु मार पांडे, श्री राक े श करेला और श्री रर्णबीर यादर्वो, अपीलकता5ओं क े विर्वोद्वान अधि र्वो[ा ने प्रस्तुत विकया विक धिडर्वोीजन बेंच क े लिलए कोई कारर्ण नहीं था विक उसने अपने विनर्ण5य विदनांक 12.03.2019 क े संचालन को क े र्वोल अपीलकता5ओं तक सीविमत कर विदया। श्री पांडे ने प्रस्तुत विकया विक अपीलकता5ओं को विदनांक 21.05.2019 को तैयार की गई 124 उम्मीदर्वोारों की सूची में शाविमल विकया गया होता, यविद तीसरी उत्तर क ुं जी सभी उम्मीदर्वोारों क े संबं में प्रभार्वोी होती, क े र्वोल उ[ अपील में अपीलकता5ओं तक ही सीविमत नहीं होती। उन्होंने प्रस्तुत विकया विक प्रतीक्षा सूची भी दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर तैयार की गई थी न विक तीसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर। अपीलकता5ओं की ओर से उपस्थिस्थत विर्वोद्वान अधि र्वो[ा ने सुझार्वो विदया विक अभी भी पद की रिरवि[यां हैं, सिजन्हें अपीलकता5ओं की विनयुवि[ से भरा जा सकता है।

9. डॉ. मनीo सिंसघर्वोी, राजस्थान राज्य की ओर से उपस्थिस्थत विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ अधि र्वो[ा ने प्रस्तुत विकया विक राज्य द्वारा की गई प्रत्येक चयन प्रविक्रया मुकदमेबाजी का विर्वोoय है और अदालतों में लंबे समय से मामलों क े लंविबत होने क े कारर्ण, सार्वो5जविनक पदों पर विनयुवि[यों में देरी क े कारर्ण राज्य मुस्थिश्कल स्थिस्थधित में है। विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ अधि र्वो[ा द्वारा विकए गए प्रस्तुतीकरर्ण का जोर यह है विक विदनांक 07.09.2019 को दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर तैयार की गई चयन सूची अंधितम होनी चाविहए और ऐसे व्यवि[ जो जल्द से जल्द अदालत से संपक 5 नहीं कर पाए, र्वोे राहत क े हकदार नहीं हैं। डॉ. सिंसघर्वोी ने प्रस्तुत विकया विक खंडपीठ क े विदनांक 12.03.2019 क े विनर्ण5य का लाभ खंडपीठ क े विनदzश क े अनुसार क े र्वोल 21 अपीलकता5ओं को विदया गया था। इस स्तर पर अपीलकता5ओं को दी गई कोई भी राहत भ्रम पैदा करेगी और विदनांक 13.07.2016 को जारी विकए गए विर्वोज्ञापन क े अनुसार पहले से ही की गई विनयुवि[यों को अस्थिस्थर कर देगी। आरपीएससी की ओर से पेश हुए विर्वोद्वान अधि र्वो[ा श्री अविमत लुभया ने कहा विक उच्च न्यायालय द्वारा जारी विनदzशों क े आ ार पर मेरिरट सूची तैयार की गई थी और इस स्तर पर विकसी भी हस्तक्षेप की आर्वोश्यकता नहीं है। 124 योग्य उम्मीदर्वोारों को बाहर करने क े बाद, दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर एक संशोधि त चयन सूची तैयार की गई और 51 व्यवि[यों को पहले ही विनयु[ विकया जा चुका है। इस न्यायालय द्वारा विदनांक 06.09.2019 को पारिरत अंतरिरम आदेश क े मद्देनजर शेo विनयुवि[यां नहीं की जा सकीं। लोक सेर्वोा आयोग क े विनदzशों क े अनुसार, रिर[ पदों की संख्या दशा5ते हुए आरपीएससी की ओर से उपस्थिस्थत विर्वोद्वान अधि र्वो[ा द्वारा एक नोट दायर विकया गया था। उन्होंने आगे कहा विक खंडपीठ क े विदनांक 12.03.2019 क े विनर्ण5य को क े र्वोल उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलकता5ओं क े संबं में लागू विकया गया था। प्रधितर्वोादी प्रधितर्वोाविदयों की ओर से उपस्थिस्थत विर्वोद्वान अधि र्वो[ा श्री शारिरक अहमद और श्री शादान ~रासत ने तक 5 विदया विक इस न्यायालय को खंडपीठ क े विनर्ण5य में हस्तक्षेप नहीं करना चाविहए क्योंविक उन अपीलकता5ओं को कोई राहत नहीं दी जा सकती है जो रोक लगाने र्वोाले हैं। उन्होंने प्रस्तुत विकया विक हाईकोट[5] ने धिडर्वोीजन बेंच क े विदनांक 12.03.2019 क े ~ ै सले को बरकरार रखा था, सिजसक े द्वारा राहत क े र्वोल अपीलकता5ओं तक ही सीविमत थी।

10. इस न्यायालय क े विर्वोचार क े लिलए जो मुद्दा उठता है र्वोह यह है विक क्या संशोधि त चयन सूची विदनांक 21.05.2019 को दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर तैयार विकया जाना चाविहए था। अपीलकता5ओं का तक 5 है विक प्रतीक्षा सूची भी तीसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर तैयार की जानी चाविहए न विक दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर। उच्च न्यायालय द्वारा जारी विनदzशों क े अनुसार गविठत विर्वोशेoज्ञ सविमधित द्वारा की गई सिस~ारिरशों क े आ ार पर आरपीएससी द्वारा दूसरी उत्तर क ुं जी जारी की गई थी। संशोधि त चयन सूची से संतुष्ट नहीं होने पर, सिजसमें क े र्वोल क ु छ उम्मीदर्वोार शाविमल थे, क ु छ अस~ल उम्मीदर्वोारों ने खंडपीठ क े समक्ष अपील दायर की, सिजसका विनस्तारर्ण विदनांक 12.03.2019 को विकया गया। जब खंडपीठ को सूधिचत विकया गया विक चयनों को दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर अंधितम रूप विदया गया है, तो उसने विदनांक 17.09.2018 को तैयार चयन सूची में हस्तक्षेप करने से इनकार कर विदया। हालाँविक, खंडपीठ ने अपीलकता5ओं द्वारा बताए गए प्रश्नों और उत्तर क ुं सिजयों की सत्यता की जांच की और इस विनष्कo[5] पर पहुंची विक 5 प्रश्नों की उत्तर क ुं जी गलत थी। उ[ विनष्कo„ क े आ ार पर, खंडपीठ ने आरपीएससी को संशोधि त चयन सूची तैयार करने और इसे क े र्वोल अपीलकता5ओं पर लागू करने का विनदzश विदया।

11. हालांविक विनयमों की अनुमधित होने पर पुनमू5ल्यांकन को विनदzशिशत विकया जा सकता है, इस न्यायालय ने अदालतों द्वारा प्रश्नों क े पुनमू5ल्यांकन और जांच की प्रथा को खारिरज कर विदया है, सिजसमें अकादविमक मामलों में विर्वोशेoज्ञता की कमी है। उच्च न्यायालय क े लिलए प्रश्नपत्रों और उत्तर पुस्थिस्तकाओं की स्र्वोयं जांच करने की अनुमधित नहीं है, खासकर जब आयोग ने उम्मीदर्वोारों की पारस्परिरक योग्यता का आकलन विकया हो (विहमाचल प्रदेश लोक सेर्वोा आयोग बनाम मुक े श ठाक ु र और अन्य)। न्यायालयों को सम्मान विदखाना होगा। और विर्वोशेoज्ञ सविमधित की सिस~ारिरशों पर विर्वोचार करना सिजनक े पास मूल्यांकन करने और सिस~ारिरशें करने की विर्वोशेoज्ञता है [देखें बसर्वोैयाह (डॉ.) बनाम डॉ. एच.एल. रमेश और अन्य।)। उत्तर पुस्थिस्तकाओं क े पुनमू5ल्यांकन क े संबं में न्याधियक समीक्षा क े दायरे की जांच करते हुए, इस अदालत ने रर्ण विर्वोजय सिंसह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य क े मामले में कहा विक अदालत को विकसी उम्मीदर्वोार की उत्तर पुस्थिस्तकाओं का पुनमू5ल्यांकन या जांच नहीं करनी चाविहए क्योंविक उसक े पास मामलों में कोई विर्वोशेoज्ञता नहीं है और अकादविमक मामलों को शिशक्षाविर्वोदों क े लिलए छोड़ देना सबसे अच्छा है। उ[ विनर्ण5य में इस न्यायालय ने आगे विनम्नानुसार व्यर्वोस्था की: "31। अपनी ओर से हम यह जोड़ सकते हैं विक उत्तर पुस्थिस्तका क े पुनमू5ल्यांकन को विनदzशिशत करने या न करने क े मामले में सहानुभूधित या करुर्णा कोई भूविमका नहीं विनभाती है। यविद परीक्षा प्राधि करर्ण द्वारा कोई त्रुविट की जाती है, तो उम्मीदर्वोारों का पूरा विनकाय भुगतता है। संपूर्ण[5] परीक्षा प्रविक्रया क े र्वोल इसलिलए पटरी से उतरने लायक नहीं है क्योंविक क ु छ उम्मीदर्वोार विनराश या असंतुष्ट हैं या उन्हें लगता है विक गलत प्रश्न या गलत उत्तर से उनक े साथ क ु छ अन्याय हुआ है। सभी उम्मीदर्वोार समान रूप से पीविड़त होते हैं, हालांविक क ु छ अधि क पीविड़त हो सकते हैं लेविकन इसमें मदद नहीं की जा सकती क्योंविक गशिर्णतीय सटीकता हमेशा संभर्वो नहीं होती है। इस न्यायालय ने गधितरो से बाहर विनकलने का एक रास्ता विदखाया है - संविदग् या आपलित्तजनक प्रश्न को बाहर कर दें।

32. यह दुभा5ग्यपूर्ण[5] है विक इस न्यायालय क े कई विनर्ण5यों क े बार्वोजूद, सिजनमें से क ु छ की ऊपर चचा5 की जा चुकी है, परीक्षाओं क े परिरर्णाम में न्यायालयों का हस्तक्षेप है। यह परीक्षा अधि कारिरयों को एक अस्र्वोीकाय[5] स्थिस्थधित में रखता है जहां र्वोे जांच क े दायरे में हैं न विक उम्मीदर्वोारों क े लिलए। इसक े अधितरिर[, बड़े पैमाने पर और कभी-कभी लंबे समय तक चलने र्वोाला परीक्षा अभ्यास अविनधि’तता की हर्वोा क े साथ समाप्त होता है। हालांविक इसमें कोई संदेह नहीं है विक उम्मीदर्वोार परीक्षा की तैयारी में जबरदस्त प्रयास करते हैं, यह नहीं भूलना चाविहए विक परीक्षा अधि कारिरयों ने भी परीक्षा को स~लतापूर्वो5क आयोसिजत करने क े लिलए उतना ही प्रयास विकया है। काय[5] की विर्वोशालता बाद क े चरर्ण में क ु छ चूक प्रकट हो सकती है, लेविकन अदालत को परीक्षा में स~लतापूर्वो5क भाग लेने र्वोाले उम्मीदर्वोारों और परीक्षा अधि कारिरयों द्वारा विकए गए प्रयासों में हस्तक्षेप करने से पहले परीक्षा अधि कारिरयों द्वारा की गई आंतरिरक जांच और संतुलन पर विर्वोचार करना चाविहए। र्वोत5मान अपील ऐसे हस्तक्षेप क े परिरर्णाम का एक उत्क ृ ष्ट उदाहरर्ण है जहां आठ साल बीत जाने क े बाद भी परीक्षाओं क े परिरर्णाम को अंधितम रूप नहीं विदया जा सकता है। परीक्षा अधि कारिरयों क े अलार्वोा उम्मीदर्वोार भी परीक्षा क े परिरर्णाम की विनधि’तता या अन्यथा क े बारे में आ’य5चविकत रह जाते हैं - चाहे र्वोे पास हुए हों या नहीं; क्या उनका परिरर्णाम न्यायालय द्वारा स्र्वोीक ृ त या अस्र्वोीक ृ त विकया जाएगा; उन्हें विकसी कॉलेज या विर्वोश्वविर्वोद्यालय में प्रर्वोेश विमलेगा या नहीं; और उनकी भत• होगी या नहीं। यह असंतोoजनक स्थिस्थधित विकसी क े लाभ क े लिलए काम नहीं करती है और अविनधि’तता की ऐसी स्थिस्थधित क े परिरर्णामस्र्वोरूप भ्रम की स्थिस्थधित बदतर हो जाती है। इन सबका समग्र और बड़ा प्रभार्वो यह है विक जनविहत प्रभाविर्वोत होता है।

12. इस न्यायालय द्वारा विन ा5रिरत उपरो[ कानून क े मद्देनजर, खंडपीठ प्रश्नों की शुद्धता की जांच करने क े लिलए खुली नहीं थी और अपीलकता5ओं ने अपने ~ ै सले विदनांक 12.03.2019 में विर्वोशेoज्ञ सविमधित क े ~ ै सले से अलग विनष्कo[5] पर पहुंचने क े लिलए उत्तर क ुं जी को रिरचल और अन्य बनाम राजस्थान लोक सेर्वोा आयोग और अन्य पर रखा था। उ[ विनर्ण5य में, इस न्यायालय ने एक विर्वोशेoज्ञ सविमधित की राय प्राप्त करने क े बाद ही चयन प्रविक्रया में हस्तक्षेप विकया, लेविकन स्र्वोयं प्रश्नों और उत्तरों की शुद्धता में प्रर्वोेश नहीं विकया। इसलिलए, उ[ विनर्ण5य इस मामले में विर्वोर्वोाद क े न्यायविनर्ण5यन क े लिलए प्रासंविगक नहीं है।

13. उपरो[ विनर्ण5यों क े अर्वोलोकन से यह स्पष्ट हो जाता है विक न्यायालयों को शैक्षशिर्णक मामलों में विर्वोशेoज्ञ राय में दखल देने में बहुत ीमी गधित से काम करना चाविहए। विकसी भी स्थिस्थधित में, सही उत्तरों पर पहुंचने क े लिलए स्र्वोयं न्यायालयों द्वारा प्रश्नों का मूल्यांकन करने की अनुमधित नहीं है। सार्वो5जविनक पदों पर विनयुवि[यों को अंधितम रूप देने में देरी मुख्य रूप से अदालतों में लंबे समय से लंविबत चयनों को चुनौती देने र्वोाले मामलों क े लंविबत रहने क े कारर्ण हुई है। विनयुवि[यों में देरी का व्यापक प्रभार्वो अस्थायी आ ार पर विनयु[ लोगों की विनरंतरता और विनयविमतीकरर्ण क े उनक े दार्वोों में है। सार्वो5जविनक पदों पर विर्वोलंविबत विनयुवि[यों क े परिरर्णामस्र्वोरूप अन्य परिरर्णाम पया5प्त कर्विमयों की कमी क े कारर्ण प्रशासन को होने र्वोाली गंभीर क्षधित है।

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14. उत्तरदाताओं द्वारा विकया गया यह विनर्वोेदन विक अपीलकता5 विकसी भी राहत क े हकदार नहीं हैं क्योंविक न्यायालय का दरर्वोाजा खटखटाने में अत्यधि क देरी हो रही है, पूर्वो5र्वोत• पैराग्रा~ों में विनष्कo„ क े मद्देनजर अधि विनर्ण5य देने की आर्वोश्यकता नहीं है। आरपीएससी द्वारा दायर विकए गए बयान से यह स्पष्ट है विक रिरवि[यां मौजूद हैं सिजनका उपयोग अपीलकता5ओं की विनयुवि[ क े लिलए विकया जा सकता है। उम्मीदर्वोारों की योग्यता क े अनुसार प्रतीक्षा सूची से मौजूदा रिरवि[यों को भरने क े लिलए आरपीएससी और राज्य सरकार को खुला छोड़ने क े अलार्वोा हम कोई विनदzश देने क े इच्छ ु क नहीं हैं। इस न्यायालय द्वारा पारिरत अंतरिरम आदेश क े मद्देनजर रोकी गई चयन प्रविक्रया आज से 8 सप्ताह की अर्वोधि क े भीतर पूरी की जानी चाविहए। खंडपीठ ने अपने विनर्ण5य विदनांक 12.03.2019 द्वारा 05 प्रश्नों की सत्यता पर विनष्कo[5] दज[5] करने में विर्वोशेoज्ञों की राय को गलत मानते हुए त्रुविट की है। हम ~ ै सले को रद्द नहीं कर रहे हैं क्योंविक हमें सूधिचत विकया गया है विक 21 अपीलकता5ओं में से 05 को पहले ही विनयु[ विकया जा चुका है और हम उनकी विनयुवि[यों को रद्द करने क े इच्छ ु क नहीं हैं।

15. हम दूसरी उत्तर क ुं जी क े आ ार पर तैयार चयन सूची विदनांक 21.05.2019 और प्रतीक्षा सूची विदनांक 22.05.2019 को बरकरार रखते हैं।

16. उपरो[ कारर्णों से अपील खारिरज की जाती है।..................................जे. [एल। नागेश्वर रार्वो] [हेमंत गुप्ता] [अजय रस्तोगी] नयी विदल्ली, विदसम्बर 07, 2020. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.