Full Text
े सर्वो च्च न्यायालय में
सिसविर्वोल अपीलीय अधि कारिरता
सिसविर्वोल अपील संख्या 5650/2010
दौलतसिंसह (मृतक) जरीये विर्वोधि क प्रधितवि*धि ...अपीलकता, ब*ाम
राजस्था* राज्य और अन्य ...प्रधितर्वोादी
वि*र्ण,य
ए*. र्वोी. रमर्ण, जे.
JUDGMENT
1. र्वोत,मा* अपील, डी. बी. सिसविर्वोल विर्वोशेष अपील संख्या 264/1999 (रिरट) में राजस्था* उच्च न्यायालय द्वारा पारिरत विद*ांक 25.04.2008 क े आक्षेविपत वि*र्ण,य से उत्पन्न होती है, सिजसमें उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ *े प्रधितर्वोादी द्वारा दी गई अपील को स्र्वोीकार विकया और एकल न्याया ीश क े विद*ांक 02.04.1997 क े आदेश को वि*रस्त करते हुए राजस्र्वो बोड, द्वारा विद*ांक 02.07.1990 को पारिरत आदेश को बरकरार रखा।
2. अपील क े तथ्य इस प्रकार हैंः दौलत सिंसह (चूंविक मृतक और अब उ*क े का*ू*ी प्रधितवि*धि यों क े माध्यम से प्रधितवि*धि त्र्वो विकया गया है और जो बाद में सुविर्वो ा क े लिलए अपीलकता, क े रूप में संदर्भिभत विकए जाएंगे) 254.[2] बीघा जमी* क े मालिलक थे। 19 विदसम्बर, 1963 को उन्हों*े अप*े पुत्र *रपत सिंसह को 127.[1] बीघा भूविम उपहार में दी। कथिथत हस्तांतरर्ण क े बाद, अपीलकता, क े पास 17.25 मा*क एकड़ भूविम रह गई, जो सीलिंलग अधि वि*यम क े तहत वि* ा,रिरत सीमा से कम थी ।
3. हालांविक, अधि कतम सीमा का*ू* क े तहत एक काय,र्वोाही शुरू की गई थी, सिजसे 15 अप्रैल, 1972 को उप-उपमंडल अधि कारी, पाली, राजस्था* की अदालत 2020 INSC 684 द्वारा समाप्त कर दी गई थी। काय,र्वोाही को वि*स्तारिरत करते हुए, न्यायालय *े कहा विक राजस्था* काश्तकारी अधि वि*यम, 1955 (इसमें इसक े बाद 1955 का काश्तकारी अधि वि*यम) की ारा 30 डीडी का संशो * 31.12.1969 से प्रभार्वोी था, और चूंविक उपहार विर्वोलेख को पूर्वो क्त संशो * से पहले वि*ष्पाविदत विकया गया था, इसलिलए पूर्वो क्त हस्तांतरर्ण र्वोै था।
4. तथाविप, विद*ांक 15.03.1982 क े *ोविटस द्वारा, राजस्र्वो अधि कतम सीमा विर्वोभाग *े अपीलकता, क े मामले को विdर से खोला। राजस्र्वो सीमा विर्वोभाग *े उपरोक्त *ोविटस जारी करते हुए कहा विक पाली क े उप-विर्वोभागीय अधि कारी की अदालत द्वारा 15 अप्रैल, 1972 को पारिरत पहले का आदेश इस बात की जांच विकए विब*ा विदया गया था विक क्या भूविम हस्तांतरर्ण 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 क े प्रार्वो ा*ों क े अ*ुसार मान्य है। इ* प्रार्वो ा*ों का उल्लंघ* हो*े क े कारर्ण इन्हें विdर से खोल*े की आर्वोश्यकता है।
5. अपर सिजला कलक्टर, पाली क े न्यायालय *े आदेश विद*ांक 28.10.1988 द्वारा घोविषत विकया विक अपीलकता, क े पुत्र क े पक्ष में की गई भूविम का *ामांतरर्ण अर्वोै था क्योंविक उपहार की स्र्वोीक ृ धित *हीं थी। उसमें यह घोविषत विकया गया विक अपीलकता, क े पास अधि कतम सीमा से अधि क 11 मा*क एकड़ अधितरिरक्त भूविम थी। कलेक्टर *े, इसलिलए, अपीलकता, को उपयु,क्त 11 मा*क एकड़ अधितरिरक्त भूविम का खाली कब्जा तहसीलदार, पाली को सौंप*े का वि*दjश विदया।
6. उपयु,क्त आदेश से व्यथिथत, अपीलकता, *े राजस्र्वो बोड, क े समक्ष एक अपील दायर की। विद*ांक 02.07.1990 क े आदेश क े माध्यम से, राजस्र्वो बोड, *े पहले क े आदेश को विद*ांक 28.10.1988 को संशोधि त विकया, और पु*ग,र्ण*ा पर यह अथिभवि* ा,रिरत विकया विक अपीलकता, क े पास अधि कतम सीमा से अधि क 4.[5] मा*क एकड़ भूविम है।
7. व्यथिथत, अपीलकता, *े उच्च न्यायालय क े समक्ष भारत क े संविर्वो ा*, 1950 क े अ*ुच्छेद 227 क े तहत एक रिरट याधिचका दायर की। विद*ांक 02.04.1997 क े आदेश क े माध्यम से, उच्च न्यायालय क े विर्वोद्वत एकल न्याया ीश *े अपीलकता, द्वारा प्रस्तुत रिरट याधिचका की अ*ुमधित दी। न्यायालय *े अथिभवि* ा,रिरत विकया विक मामला राजस्था* क ृ विष जोतों पर अधि कतम सीमा अधि रोपर्ण अधि वि*यम, 1973 (इसमें इसक े पश्चात् “1973 का अधि कतम सीमा अधि रोपर्ण अधि वि*यम”) की ारा 6 क े काय,क्षेत्र से बाहर था, क्योंविक भूविम विद*ांक 26.09.1970 से पहले उपहार क े रूप में हस्तांतरिरत की गई थी। यह आगे अथिभवि* ा,रिरत विकया गया विक एक पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख क े आ ार पर अपीलकता, द्वारा अप*े पुत्र क े पक्ष में भूविम का पूर्वो क्त हस्तांतरर्ण, सद्भार्वोपूर्ण, हो*े क े कारर्ण, का*ू* की *जर में र्वोै था। विर्वोद्वा* एकल न्याया ीश *े इसलिलए कहा विक अपीलकता, क े पास कोई अधि शेष भूविम उपलब् *हीं है सिजसे र्वोापस लिलया जा सकता है।
8. इसक े बाद, प्रधितर्वोादी *े उपयु,क्त आदेश क े लिखलाd खण्ड पीठ क े समक्ष एक अपील दायर की, सिजस*े यह अथिभवि* ा,रिरत करते हुए अपील की अ*ुमधित दी विक उपहार विर्वोलेख अर्वोै था, क्योंविक अपीलकता, का पुत्र इसक े बारे में अ*थिभज्ञ था। खण्ड पीठ *े विद*ांक 25.04.2008 क े आक्षेविपत वि*र्ण,य क े माध्यम से वि*र्ण,य विदया विक विर्वोद्वत एकल न्याया ीश *े 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 सी और 30 डी क े प्रार्वो ा*ों की अज्ञा*ता में वि*र्ण,य विदया। इसलिलए, उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ *े एकल न्याया ीश पीठ द्वारा पारिरत आदेश को वि*रस्त कर विदया और राजस्र्वो पीठ द्वारा पारिरत आदेश को बरकरार रखा।
9. व्यथिथत, अपीलकता, *े इस न्यायालय क े समक्ष विर्वोशेष अ*ुमधित याधिचका क े माध्यम से र्वोत,मा* अपील प्रस्तुत की है।
10. अपीलकता, की ओर से र्वोकील *े तक, विदया विक भूविम का हस्तांतरर्ण बहुत पहले 1963 में विकया गया था। खण्ड पीठ *े संपलिu हस्तांतरर्ण अधि वि*यम, 1882 की ारा 122 की आर्वोश्यकताओं क े अ*ुसार, अपीलकता, क े बेटे *रपत सिंसह क े पक्ष में 17.25 एकड़ भूविम क े हस्तांतरर्ण को मान्यता *हीं देकर स्पष्ट रूप से गलती की, जो उपहार विर्वोलेख क े वि*ष्पाद* क े समय एक र्वोयस्क था। यह एक अंतर्नि*विहत स्र्वोीक ृ धित थी क्योंविक यह विपता और पुत्र क े बीच स्था*ांतरर्ण का मामला है। इस मामले क े तथ्यों क े आ ार पर यह साविबत हो जाता है विक बेटा अप*े परिरर्वोार क े साथ अलग रह रहा था। इसक े अलार्वोा, इस तरह क े हस्तांतरर्ण से विकरायेदारी अधि वि*यम 1955 की ारा 30 सी और ारा 30 डी क े प्रार्वो ा*ों का उल्लंघ* *हीं होता है। अंत में, र्वोकील *े यह भी दलील दी विक सीलिंलग मामले को विdर से खोल*े क े लिलए विदया गया *ोविटस सीमा की अर्वोधि से परे था ।
11. दूसरी ओर, प्रधितर्वोादी की ओर से र्वोकील *े तक, विदया विक खण्ड पीठ *े राजस्र्वो बोड, द्वारा पारिरत आदेश को सही ठहराया, जो तथ्यों क े विर्वोस्तृत मूल्यांक* और 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 सी और 30 डी पर उधिचत वि*भ,रता क े बाद पारिरत विकया गया था। प्रधितर्वोादी *े प्रस्तुत विकया विक तथ्यों क े वि*ष्कषy क े साथ एक रिरट काय,र्वोाही में हस्तक्षेप *हीं विकया जा सकता है। प्रधितर्वोादी *े यह भी कहा विक, सीमा क े मुद्दे पर अपीलकता, द्वारा *ीचे क े न्यायालयों में कभी भी तक, *हीं विदया गया था। चाहे जो भी हो, *ोविटस परिरसीमा अर्वोधि क े भीतर जारी विकया गया था।
12. विर्वोद्वा* अधि र्वोक्ता को सु**े क े बाद, हमारे विर्वोचार क े लिलए ती* महत्र्वोपूर्ण, मुद्दे उठते हैंः (i) क्या मामले को विdर से खोल*ा समय सीमा से परे था? (ii) क्या अपीलकता, द्वारा वि*ष्पाविदत पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख का*ू* की *जर में र्वोै है? (iii) क्या विर्वोद्वत एकल न्याया ीश का वि*र्ण,य 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 सी और 30 डी क े उपबं ों की अ*थिभज्ञता में है? मुद्दा संख्या 1
13. उच्चतमसीमा अधि वि*यम, 1973 की ारा 15 राज्य सरकार को मामलों को विdर से खोल*े की शविक्त प्रदा* करती है, यविद र्वोह संतुष्ट है विक विपछला आदेश अधि वि*यम क े प्रार्वो ा*ों क े उल्लंघ* में था और राज्य क े विहतों क े लिलए प्रधितक ू ल है। मामलों को विdर से खोल*े क े उपयु,क्त वि*दjश से पहले संबंधि त व्यविक्त को कारर्ण बताओ *ोविटस जारी विकया जा*ा चाविहए। हालांविक, प्रार्वो ा* में कहा गया है विक अंधितम आदेश की तारीख से पांच साल की समाविप्त क े बाद या 30 जू* 1979 की समाविप्त क े बाद, जो भी बाद में हो, कोई *ोविटस जारी *हीं विकया जा सकता है।
14. अतः, उपबं यह अधि देश देता है विक अंधितम आदेश की तारीख से पांच र्वोष, की समाविप्त क े पश्चात् या 30 जू*, 1979 की समाविप्त क े पश्चात्, इ*में से जो भी बाद में हो, ऐसे मामलों को पु*ः खोल*े क े लिलए कोई सूच*ा जारी *हीं की जा सकती। इसलिलए, परिरसीमा क े मुद्दे क े वि* ा,रर्ण क े लिलए प्रासंविगक धितथिथयां उस आदेश की तारीख है सिजससे विdर से खोल*े की मांग की गई है और 1973 क े सीलिंलग अधि वि*यम की ारा 15 क े तहत कारर्ण बताओ *ोविटस जारी कर*े की तारीख है।
15. सु*र्वोाई क े दौरा* और पीठ द्वारा उठाए गए एक प्रश्न पर, प्रधितर्वोादी *े उप सरकारी सधिचर्वो, राजस्र्वो (विबलिंलग), राजस्था* द्वारा विद*ांक 20.11.1976 को जारी विकए गए *ोविटस की dोटो प्रधित हमारे ध्या* में लाई है।
16. यह ध्या* विदया जा*ा चाविहए विक, पूर्वो क्त सूच*ा विद*ांक 20.11.1976 को अपीलकता, को भेजी गई थी, जो विक पहले क े विद*ांक 15.04.1972 क े आदेश क े पांच र्वोषy क े भीतर है। इसक े अलार्वोा, *ोविटस *े 1973 क े सीलिंलग अधि वि*यम की ारा 15 क े तहत प्रदा* की गई आर्वोश्यकताओं को भी पूरा विकया, और इसलिलए यह का*ू* की *जर में र्वोै था। इस प्रकार, इस मामले को 1973 क े सीलिंलग अधि वि*यम की ारा 15 क े तहत वि* ा,रिरत समय सीमा क े भीतर विdर से खोला गया था। इसलिलए, मुद्दा संख्या 1 का उuर प्रधितर्वोादी-राज्य क े पक्ष में विदया गया है। मुद्दा संख्या 2
17. उच्च न्यायालय *े आक्षेविपत आदेश पारिरत करते समय विद*ांक 19.12.1963 क े पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख को इस आ ार पर अविर्वोधि मान्य अथिभवि* ा,रिरत विकया विक यह संपलिu अंतरर्ण अधि वि*यम, 1882 की ारा 122 क े अ ी* उपबंधि त अपेक्षाओं को पूरा *हीं करता है। खंडपीठ *े राजस्र्वो बोड, की विटप्पथिर्णयों को सही ठहराते हुए आगे कहा विक उपहार विर्वोलेख क े अर्वोलोक* से यह *हीं पता चलता है विक उपहार ले*े र्वोाले *े उपहार स्र्वोीकार विकया है, बल्किल्क ऐसा लगता है विक उपहार ले*े र्वोाले को उपहार क े बारे में पता भी *हीं था।
18. संपलिu अंतरर्ण अधि वि*यम, 1882 की ारा 122 में यह उपबं है विकः
122. "उपहार"परिरभाविषत विकया गया है-""उपहार"क ु छ मौजूदा चल या अचल संपलिu का स्र्वोेच्छा से और विब*ा विकसी प्रधितdल क े, एक व्यविक्त द्वारा, सिजसे दाता कहा जाता है, दूसरे को, सिजसे प्राप्तकता, कहा जाता है, और सिजसे प्राप्तकता, द्वारा या उसकी ओर से स्र्वोीकार विकया जाता है, का हस्तांतरर्ण है। स्र्वोीक ृ धित जब दी जाए - ऐसी स्र्वोीकाय,ता दाता क े जीर्वो*काल क े दौरा* और जब तक र्वोह दे*े में सक्षम है तब तक की जा*ी चाविहए। यविद प्राप्तकता, की स्र्वोीक ृ धित से पहले मृत्यु हो जाती है, तो उपहार शून्य है।
19. संपलिu अंतरर्ण अधि वि*यम, 1882 की खंड 123 में यह उपबं है विकः
123. स्था*ांतरर्ण क ै से प्रभार्वोी हुआ- अचल संपलिu का उपहार दे*े क े उद्देश्य से हस्तांतरर्ण दा*कता, द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरिरत और कम से कम दो गर्वोाहों द्वारा सत्याविपत एक पंजीक ृ त लिलखत द्वारा विकया जा*ा चाविहए। चल संपलिu का उपहार दे*े क े उद्देश्य से, हस्तांतरर्ण या तो पूर्वो क्त रूप से हस्ताक्षरिरत पंजीक ृ त लिलखत द्वारा या सुपुद,गी द्वारा विकया जा सकता है। ऐसी सुपुद,गी उसी प्रकार से की जा सकती है सिजस प्रकार से बेचे गए माल की सुपुद,गी की जा सकती है।
20. संपलिu अंतरर्ण अधि वि*यम, 1882 की ारा 122 में यह उपबं है विक कोई उपहार विर्वोधि मान्य हो*े क े लिलए उसकी प्रक ृ धित वि*ःशुल्क हो*ी चाविहए और उसे स्र्वोेच्छा से विदया जा*ा चाविहए। उक्त दा* दे*े का अथ, है दा*दाता द्वारा संपलिu में स्र्वोाविमत्र्वो का पूरी तरह से वि*पटा*। दा*ग्रविहता द्वारा उपहार की स्र्वोीक ृ धित दाता क े जीर्वो*काल में विकसी भी समय की जा सकती है।
21. ारा 123 में यह प्रार्वो ा* है विक अचल संपलिu क े उपहार को र्वोै ब*ा*े क े लिलए हस्तांतरर्ण को दा*कता, क े हस्ताक्षर र्वोाले एक पंजीक ृ त लिलखत क े माध्यम से विकया जा*ा चाविहए और कम से कम दो गर्वोाहों द्वारा सत्याविपत विकया जा*ा चाविहए।
22. *रमदाबे* मग*लाल ठक्कर ब*ाम प्रांजीर्वोदास मग*लाल ठक्कर, (1997) 2 एस. सी. सी. 255 क े मामले में इस न्यायालय की ती* न्याया ीशों की पीठ *े यह अथिभवि* ा,रिरत विकया थाः
6. प्राप्तकता, द्वारा या उसकी ओर से स्र्वोीक े जीर्वो*काल क े दौरा* की जा*ी चाविहए और जब तक र्वोह दे*े में सक्षम है तब तक दी जा*ी चाविहए।
7. इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है विक एक पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख का वि*ष्पाद*, उपहार की स्र्वोीक ृ धित और संपलिu की सुपुद,गी, सभी विमलकर उपहार को पूर्ण, ब*ाते हैं। इसक े बाद, दाता को उसक े अधि कार से र्वोंधिचत कर विदया जाता है और दा*ग्रविहता संपलिu का पूर्ण, स्र्वोामी ब* जाता है। (जोर विदया गया)
23. उच्च न्यायालय की खंडपीठ *े आक्षेविपत वि*र्ण,य में राजस्र्वो बोड, क े वि*ष्कषy को बरकरार रखा सिजसमें यह मा*ा गया विक प्राप्तकता, द्वारा कोई र्वोै स्र्वोीक ृ धित *हीं थी। अपर सिजला कलक्टर *े कहा विक उपहार विर्वोलेख में स्र्वोीक ृ धित का कोई आभास *हीं था। अपील पर, राजस्र्वो बोड, *े कहा विक, "यह अप्रासंविगक है विक उपहार क े बाद भूविम दा* पा*े र्वोाले क े कब्जे में रही या उस*े इसे अप*े *ाम पर बदलर्वोा लिलया।” उच्च न्यायालय की खंडपीठ *े उपरोक्त अर्वोलोक* पर भरोसा करते हुए कहा विक कोई र्वोै स्र्वोीक ृ धित *हीं थी क्योंविक ऐसा लगता है विक प्राप्तकता, उपहार विर्वोलेख क े बारे में ही अ*जा* था।
24. शुरुआत में, यह ध्या* विदया जा*ा चाविहए विक संपलिu हस्तांतरर्ण अधि वि*यम, 1882 की ारा 122 * तो स्र्वोीक ृ धित को परिरभाविषत करती है, और * ही यह उपहार स्र्वोीकार कर*े क े लिलए विकसी विर्वोशेष तरीक े को वि* ा,रिरत करती है।
25. शब्द स्र्वोीक ृ धित को इस रूप में परिरभाविषत विकया गया है "एक उपहार की स्र्वोीक ृ धित क े रूप में, इसे ब*ाए रख*े क े इरादे से विकसी अन्य द्वारा दी गई र्वोस्तु की प्राविप्त है।"(देखें राम*ाथ पी. अय्यरः द लॉ लेल्किक्सक*, दूसरा संस्करर्ण, पृष्ठ 19)।
26. उक्त तथ्य का पता आस-पास की परिरल्किस्थधितयों से लगाया जा सकता है जैसे विक संपलिu को प्राप्तकता, द्वारा अप*े कब्जे में ले*ा या खुद उपहार विर्वोलेख क े कब्जे में हो*ा। यहां क े र्वोल एक शत, वि* ा,रिरत की गई है विक उपहार की स्र्वोीक े े भीतर ही प्रभार्वोी हो जा*ी चाविहए।
27. इसलिलए, स्र्वोेच्छा से प्राप्त कर*े का काय, हो*े क े *ाते, स्र्वोीक ृ धित का अ*ुमा* प्राप्तकता, क े वि*विहत आचरर्ण से लगाया जा सकता है। पूर्वो क्त ल्किस्थधित को इस न्यायालय द्वारा अशोक ब*ाम लक्ष्मीक ु ट्टी, (2007) 13 एससीसी 210 क े मामले में दोहराया गया है।
14. उपहार में विकसी भी प्रधितdल या क्षधितपूर्तित क े भुगता* की परिरकल्प*ा *हीं की गई है। हालांविक, यह विकसी भी संदेह या विर्वोर्वोाद से परे है विक एक र्वोै उपहार की स्र्वोीक ृ धित क े लिलए उसकी स्र्वोीक ृ धित आर्वोश्यक है। तथाविप, हमें ध्या* दे*ा चाविहए विक संपलिu अंतरर्ण अधि वि*यम में स्र्वोीक ृ धित का कोई विर्वोथिशष्ट तरीका विर्वोविहत *हीं विकया गया है।ले*-दे* से संबंधि त परिरल्किस्थधितयां ही प्रश्न का वि* ा,रर्ण कर*े क े लिलए प्रासंविगक हो सकती हैं।उपहार की स्र्वोीक ृ धित को साविबत कर*े क े लिलए विर्वोथिभन्न तरीक े हो सकते हैं।दस्तार्वोेज़ विकसी प्राप्तकता, को सौंपा जा सकता है, जो विकसी दी गई ल्किस्थधित में र्वोै स्र्वोीक ृ धित भी हो सकता है। तथ्य यह है विक आधि पत्य प्राप्त कर*े र्वोाले को विदया गया था, स्र्वोीक ृ धित की एक ारर्णा भी पैदा करता है।
28. र्वोत,मा* मामले में, उपहार विर्वोलेख में *ीचे र्वोर्भिर्णत क ु छ विर्वोर्वोरर्ण शाविमल हैंः उक्त भूविम में से समस्त खसरा का आ ा भाग अथा,त् 50 प्रधितशत मैं अप*ा छोटा पुत्र हो*े क े *ाते अप*ी प्रसन्नता से आपको उपहार में दे रहा हूँ। मेरे बड़े बेटे श्री बाबू सिंसह को इस उपहार पर कोई आपलिu *हीं है...... आज से आप भेंट की गई आ ी जमी* क े मालिलक हैं और आगे चलकर आपका कब्जा होगा। आज से खेती क े लिलए उपरोक्त भूविम पर आपका पूरा अधि कार है।अब आप उपहार में दी गई भूविम को अप*े *ाम से उत्परिरर्वोर्तितत करर्वोा लें...... ये भूविम पहले * तो र्वोसीयत क े तहत बेची गई हैं और * ही उपहार क े तहत। इसक े अलार्वोा मैं यह भी घोषर्णा करता हूं विक उपरोक्त भूविम विकसी भी ऋर्ण दाधियत्र्वो से मुक्त है...... उक्त उपहार का पंजीकरर्ण मेरे द्वारा विब*ा विकसी अ*ुधिचत दबार्वो और दबार्वो क े सहमधित से मेरे स्र्वोस्थ शारीरिरक और मा*सिसक स्र्वोास्थ्य में विकया गया है। मैं*े अप*ी इच्छा और शुभकाम*ाएं क े साथ उपरोक्त भूविम भेंट की है। ये र्वोर्ण,* स्पष्ट रूप से इंविगत करते हैं विक उपहार विर्वोलेख क े तुरंत बाद दाता स्र्वोाविमत्र्वो और कब्जे को छोड़*े का इरादा रखता है।
29. स्र्वोीक ृ धित विदखा*े क े लिलए, अपीलकता, क े र्वोकील *े हमारा ध्या* उत्परिरर्वोत,* रिरकॉड, की ओर आकर्निषत विकया। ग्राम सेदरिरया, सिजला पाली क े राजस्र्वो अथिभलेख में *ामांतरर्ण प्रविर्वोविष्ट विद*ांक 28.10.1968 स्पष्ट रूप से दशा,ती है विक अपीलाथ• की भूविम का आ ा भाग अपीलाथ• द्वारा अप*े पुत्र को उपहार क े रूप में विद*ांक 19.12.1963 क े पंजीक ृ त लिलखत क े माध्यम से विदया गया था।
30. इसक े अलार्वोा, अधितरिरक्त सिजला मसिजस्ट्रेट क े न्यायालय क े समक्ष अपीलकता,- दाता द्वारा विदया गया 31.08.1984 का बया* इंविगत करता है विक उपहार विर्वोलेख क े वि*ष्पाद* क े समय प्राप्तकता, पहले से ही एक र्वोयस्क था।उन्हों*े आगे कहा विक उपहार विर्वोलेख क े बाद दा*प्राप्तकता, *े उसी पर खेती शुरू कर दी।
31. अपीलाथ•-दाता क े उक्त कथ* का पूर्ण,तः समथ,* दा*ग्राही द्वारा विद*ांक 15.12.1988 को अपर सिजलाधि कारी क े न्यायालय क े समक्ष विदये गये कथ* से होता है। इसमें दा* ले*े र्वोाले *े स्पष्ट रूप से कहा विक चूंविक र्वोह अप*ी सौतेली मां क े साथ *हीं रहता था, इसलिलए र्वोह अलग रह*े लगा और उपहार विर्वोलेख क े आ ार पर जमी* उसे हस्तांतरिरत कर दी गई और र्वोह इसकी खेती कर रहा था।
32. इसलिलए, उपयु,क्त परिरल्किस्थधितयां स्पष्ट रूप से इंविगत करती हैं विक दाता क े े दौरा* उपहार प्राप्त कर*े र्वोाले द्वारा उपहार की स्र्वोीक ृ धित थी। * क े र्वोल उपहार विर्वोलेख में कब्जे क े हस्तांतरर्ण क े बारे में विर्वोर्वोरर्ण शाविमल थे, बल्किल्क उत्परिरर्वोत,* रिरकॉड, और दाता और प्राप्तकता, दो*ों क े बया*ों से संक े त विमलता है विक आचरर्ण द्वारा उपहार की स्र्वोीक ृ धित हुई है।
33. प्रधितर्वोादी इस तथ्य का खंड* कर*े क े लिलए कोई सबूत रिरकॉड, पर ला*े में विर्वोdल रहे विक प्राप्तकता, संपलिu का उपभोग कर रहा था। उसी क े आलोक में, विर्वोद्वा* एकल न्याया ीश खंडपीठ *े एक प्रशंस*ीय दृविष्टकोर्ण लिलया विक, यह एक विपता और एक पुत्र क े बीच स्था*ांतरर्ण था और उपहार की एक र्वोै स्र्वोीक ृ धित तब थी जब दा* प्राप्तकता, पुत्र अलग रह*े लगे। अंत में, यह ध्या* विदया जा*ा चाविहए विक विर्वोलेख पंजीक ृ त हो*े क े बाद से ऊपर विदए गए अ*ुसार दा* ग्राही द्वारा स्र्वोीक ृ धित क े बिंबदु क े अलार्वोा, दाता क े हस्ताक्षर हैं और दो गर्वोाहों द्वारा प्रमाथिर्णत विकया गया है, संपलिu क े हस्तांतरर्ण की ारा 123 क े तहत आर्वोश्यकताएं अधि वि*यम, 1882 को संतुष्ट विकया गया है। उपरोक्त विटप्पथिर्णयों क े अ*ुरूप, मुद्दा *ं. 2 का उuर अपीलकता, क े पक्ष में विदया गया है। मुद्दा संख्या 3
34. विर्वोद्वत एकल न्याया ीश क े वि*र्ण,य को रद्द करते हुए विर्वोद्वत खण्ड पीठ *े कहा विक विर्वोद्वत एकल न्याया ीश *े 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 सी और 30 डी क े प्रार्वो ा*ों की अ*थिभज्ञता में आदेश पारिरत विकया। हालांविक, अपीलकता, की ओर से र्वोकील *े तक, विदया है विक अपीलकता, द्वारा अप*े बेटे को विकया गया भूविम का हस्तांतरर्ण काश्तकारी अधि वि*यम 1955 की ारा 30 सी और खंड 30 डी की शतy का उल्लंघ* *हीं करता है, जैसा विक अध्याय III-बी में वि*विहत है (सिजसे राजस्था* क ृ विष जोत सीमा अधि रोपर्ण अधि वि*यम, 1973 द्वारा वि*रस्त विकया गया है) क्योंविक इस तरह का हस्तांतरर्ण 1955 क े काश्तकारी अधि वि*यम की ारा 30 डीडी की कसौटी को पूरा करता है।
35. विकराएदारी अधि वि*यम, 1955 क े अध्याय III बी में ारा 30 बी से 30 जे में अधि कतम सीमा से अधि क भूविम रख*े पर प्रधितबं ों का उल्लेख है। ारा 30 ग अधि कतम सीमा क्षेत्र की सीमा को इंविगत करती है। इस खंड में प्रार्वो ा* विकया गया है विक पांच या उससे कम सदस्यों र्वोाले परिरर्वोार क े लिलए अधि कतम सीमा क्षेत्र तीस मा*क एकड़ होगी।यविद एक परिरर्वोार पांच सदस्यों से अधि क है, तो प्रत्येक अधितरिरक्त सदस्य क े लिलए पांच एकड़ का अधि कतम क्षेत्र बढ़ाया जाएगा, हालांविक, ऐसा क्षेत्र साठ मा*क एकड़ से अधि क *हीं हो सकता है।
36. ारा 30 डी में प्रार्वो ा* है विक उप- ारा (1) क े तहत वि*र्निदष्ट विकए गए स्था*ांतरर्णों को छोड़कर सभी हस्तांतरर्णों को सीलिंलग क्षेत्र क े संबं में जोत क े वि* ा,रर्ण क े लिलए मान्यता *हीं दी जा*ी चाविहए। इसक े बाद 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम में संशो * क े बाद ारा 30 डीडी में ारा 30 डी क े तहत सामान्य र्वोज,* क े लिलए और अपर्वोादों का प्रार्वो ा* है।
37. हमारे लिलए प्रासंविगक ारा 30 डी और 30 डीडी पर एक *जर डाल*ा उधिचत है। ये ाराएं इस प्रकार हैंः 30 डी. ारा 30 सी क े अ ी* अधि कतम सीमा क्षेत्र वि*यत कर*े क े लिलए कधितपय अंतरर्णों को मान्यता *हीं दी जाएगी- (1) ारा 30 ग क े अ ी* विकसी व्यविक्त क े संबं में अधि कतम सीमा क्षेत्र का अर्वो ारर्ण कर*े क े प्रयोज* क े लिलए, उसक े द्वारा 25-2-1958 को या उसक े पश्चात् विकया गया कोई स्र्वोैल्किच्छक अंतरर्ण, अन्यथा, – (i)विर्वोभाज* क े माध्यम से, या (ii)ऐसे व्यविक्त क े पक्ष में जो उक्त तारीख से पूर्वो, भूविमही* व्यविक्त था और अंतरर्ण की तारीख तक ऐसा ब*ा रहा, उसकी पूरी या उसक े विहस्से की होल्डिंल्डग को इस अध्याय क े प्रार्वो ा*ों को विर्वोdल कर*े क े लिलए गर्ण*ा विकए गए स्था*ांतरर्ण क े रूप में मा*ा जाएगा और इसे मान्यता *हीं दी जाएगी और इसे ध्या* में *हीं रखा जाएगा; और यह साविबत कर*े का भार विक क्या ऐसा कोई स्था*ांतरर्ण खंड (i) या खंड (ii) क े अंतग,त आता है, हस्तांतरर्णकता, पर होगा: बशतj विक यविद विकसी भी तरह क े हस्तांतरर्ण क े रूप में खंड (ii) में र्वोर्भिर्णत है, तो हस्तांतरिरती क े लिलए लागू सीलिंलग क्षेत्र से अधि क भूविम उसे स्था*ांतरिरत कर दी गई है, इस तरह क े हस्तांतरर्ण को इस तरह क े अधितरिरक्त की सीमा तक मान्यता *हीं दी जाएगी या इसक े लिलए विर्वोचार *हीं विकया जाएगा। परंतु यह और विक खंड (ii) में उसिल्ललिखत ऐसा कोई अंतरर्ण इस प्रकार भी ध्या* में *हीं रखा जाएगा या मान्यता प्राप्त *हीं होगी यविद र्वोह 9-12- 1959 क े पश्चात् विकया गया है। 30 डीडी. क ु छ स्था*ांतरर्णों को मान्यता दी जाएगी।- - ारा 30 डी में इसक े विर्वोपरीत विकसी बात क े होते हुए भी, ारा 30 सी क े तहत विकसी व्यविक्त क े संबं में अधि कतम सीमा क्षेत्र का वि* ा,रर्ण कर*े क े उद्देश्य से। (i) विकसी व्यविक्त द्वारा राजस्था* में अधि र्वोसिसत विकसी क ृ षक क े पक्ष में या उसक े पुत्र या भाई क े पक्ष में, जो क ृ विष व्यर्वोसाय कर*ा चाहता है और व्यविक्तगत रूप से खेती कर*े में सक्षम है और सिजस*े उक्त तारीख को या उससे पहले र्वोयस्कता की आयु प्राप्त कर ली है, 31 विदसम्बर, 1969 तक विकया गया प्रत्येक भूविम अंतरर्ण. और (ii) जू*, 1970 क े पहले विद* से पहले एक व्यविक्त द्वारा विकए गए हर हस्तांतरर्ण, उप-खंड (ए), (बी), (डी) और (ई) में वि*र्निदष्ट प्रक ृ धित क े उपर्वो*ों या खेतों में समाविर्वोष्ट भूविम ारा 30 जे की ारा (1) जैसा विक यह राजस्था* विकरायेदारी (विद्वतीय संशो *) अधि वि*यम, 1970 क े प्रारंभ से पहले था और मई, 1959 क े पहले विद* से पहले अप*े बेटे या भाई क े पक्ष में अर्जिजत विकया गया था, जो खंड (i) में उसिल्ललिखत शतy को पूरा करता है और जो पूर्वो क्त धितथिथयों क े पहले विद* या उससे पहले र्वोयस्क हो जाता है, उसे भी मान्यता दी जाएगी। स्पष्टीकरर्ण 1- इस ारा में ''क ृ षक ''पद से ऐसा व्यविक्त अथिभप्रेत है जो अप*ी आजीविर्वोका पूरी तरह से या मुख्य रूप से क ृ विष से कमाता है और अप*े श्रम से या अप*े परिरर्वोार क े विकसी सदस्य क े श्रम से या पूर्वो क्त श्रम क े साथ-साथ *कद रूप में या र्वोस्तु रूप में संदेय मजदूरी पर विकराए पर लिलए गए श्रम या सेर्वोक की सहायता से खेती करता है और इसक े अंतग,त एक क ृ विष श्रविमक और एक ग्रामीर्ण कारीगर भी होगा।
II. इस ारा में ''राजस्था* में अधि र्वोास ''पद से ऐसा व्यविक्त अथिभप्रेत है जो इस अधि वि*यम क े प्रारंभ से पहले से राजस्था* में स्थायी रूप से वि*र्वोास करता है।
38. जैसा विक पहले चचा, की गई है, विकराएदारी अधि वि*यम, 1955 की ारा 30 सी में पांच या उससे कम सदस्यों र्वोाले परिरर्वोार क े लिलए 30 मा*क एकड़ की अधि कतम सीमा का प्रार्वो ा* है।अपीलकता, का परिरर्वोार पांच से कम सदस्यों का था और मूल रूप से लगभग 34.[4] मा*क एकड़ जमी* का मालिलक था। इसक े बाद, पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख विद*ांक 19.12.1963 क े आ ार पर, अपीलकता, *े लगभग 17.25 मा*क एकड़ अप*े बेटे को हस्तांतरिरत कर विदया था।
39. ारा 30 डी में यह प्रार्वो ा* है विक उप-खंड 1 (i) और 1 (ii) में दी गई राथिश क े अलार्वोा 25 dरर्वोरी, 1958 को या उसक े बाद विकए गए विकसी भी हस्तांतरर्ण को सीलिंलग अधि वि*यम क े उद्देश्य को विर्वोdल कर*े क े लिलए दज, विकया गया मा*ा जाएगा। ऐसे ले*-दे* को अमान्य घोविषत कर विदया गया। उपयु,क्त दो अपर्वोाद हैं- विर्वोभाज* द्वारा हस्तांतरर्ण और एक भूविमही* व्यविक्त को हस्तांतरर्ण।
40. तथाविप, ारा 30 डीडी, ारा 30 डी क े लिलए अधितरिरक्त अपर्वोाद उपलब् कराती है क्योंविक यह ारा 30 डी क े तहत वि* ा,रिरत धितथिथ क े बाद क ु छ हस्तांतरर्ण को मान्यता देती है। ारा 30 डीडी क ृ विष कर*े में सक्षम और क ृ विष को एक पेशे क े रूप में अप*ा*े का इरादा रख*े र्वोाले क ृ विषविर्वोद्, उसक े बेटे या भाई क े पक्ष में विकए गए 30 मा*क एकड़ तक क े क्षेत्र क े हस्तांतरर्ण को मान्यता देती है।हालाँविक, इस तरह का स्था*ांतरर्ण विद*ांक 31.12.1969 से पहले विकया जा*ा चाविहए और स्था*ांतरिरती को उपरोक्त धितथिथ पर या उससे पहले र्वोयस्कता की आयु प्राप्त कर*ी चाविहए।
41. र्वोत,मा* मामले में, प्रधितर्वोादी *े प्रस्तुत विकया है विक अंतरर्ण ारा 30 डी क े तहत र्वोर्जिजत है, इसलिलए राज्य को ारा 30 सी क े अ*ुसार 4.[5] एकड़ क े अधितरिरक्त क्षेत्र पर विdर से शुरू कर*े का अधि कार है। इसक े विर्वोपरीत, अपीलकता, *े तक, विदया है विक अंतरर्ण ारा 30 डीडी क े तहत संरधिक्षत था।
42. हमारा ध्या* विdर से पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख विद*ांक 19.12.1963 की ओर विदलाया जाता है। उपहार विर्वोलेख में अप*े आप में ये र्वोर्ण,* होते हैं विक ‘...उपयु,क्त भूविम जो मेरी खातेदारी (स्र्वोाविमत्र्वो) की है और सिजस पर मैं खेती कर रहा हूं और मेरे कब्जे में है। उक्त भूविम में से समस्त खसरा का आ ा भाग अथा,त् 50 प्रधितशत मैं अप*ा छोटा पुत्र हो*े क े कारर्ण अप*ी प्रसन्नता से आपको उपहार में दे रहा हूँ। आज से आप भेंट की गई आ ी भूविम क े स्र्वोामी हैं और इसक े बाद तुम्हारा अधि कार होगा। आज से खेती क े लिलए उपरोक्त भूविम पर आपका पूरा अधि कार है। अब आप उपहार में दी गई जमी* को अप*े *ाम *ामांतरर्ण करा लें।
43. इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक विर्वो ाधियका *े भूविम की दो अलग-अलग श्रेथिर्णयां ब*ाई हैं, एक जो शाविमल कर*े योग्य है और दूसरी जो सीमा का*ू*ों क े दायरे से बाहर है। एक बार इस तरह का र्वोग•करर्ण कर*े क े बाद, इसक े अधि कारों क े लिलए कोई चु*ौती *हीं हो*े क े कारर्ण, प्रत्येक प्राधि कारी का यह परम कत,व्य है विक र्वोह इसे अक्षरशः और भार्वो*ा दो*ों रूप में पूर्ण, रूप से लागू करे। हालांविक, यह संभर्वो है विक एक स्र्वोैल्किच्छक स्था*ांतरर्ण हो सकता है जो ारा 30 डी और ारा 30 डीडी दो*ों की योग्यता को पूरा करेगा, हालांविक, यह ध्या* रख*ा महत्र्वोपूर्ण, है विक ारा 30 डीडी ारा 30 डी पर अधि भार्वोी प्रभार्वो क े साथ एक गैर-बा ा खंड क े साथ खुलती है, सिजसक े परिरर्णामस्र्वोरूप, इसक े दायरे में शाविमल विकसी भी भूविम को 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 डी की कठोरता से संरधिक्षत विकया जाएगा।। इसलिलए, यविद अपीलकता, यह स्थाविपत कर*े क े अप*े प्रयास में सdल होता है विक हस्तांतरर्ण 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की खंड 30 डीडी क े तहत कर्वोर विकया गया था, तो इस तथ्य क े बार्वोजूद विक यह 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की खंड 30 डी क े तहत वि* ा,रिरत सीमा सीमा क े भीतर आता है, ऐसी हस्तांतरिरत भूविम को जब्त की गर्ण*ा से छ ू ट दी जा*ी चाविहए।
44. साक्ष्य का एक अन्य महत्र्वोपूर्ण, विहस्सा विद*ांक 31.08.1984 का हस्तांतरर्णकता,-अपीलकता, का बया* है, सिजसमें उस*े कहा है विक हस्तांतरी-पुत्र अलग रह रहा था और पूर्वो क्त उपहार संपलिu की खेती कर रहा था। यह भी उल्लेख विकया गया है विक स्था*ांतरिरती क े पास एक बैल और जुताई और क ृ विष क े लिलए उपकरर्ण हैं। पूर्वो क्त तथ्यों को स्था*ांतरिरती द्वारा भी दोहराया गया है, साथ ही उसक े विद*ांक 15.12.1988 क े बया* द्वारा, सिजसमें उस*े स्पष्ट रूप से कहा है विक, उपहार में दी गई संपलिu पर उसका स्र्वोतंत्र कब्जा है और उक्त भूविम पर खेती करता रहा हैं।
45. उपरोक्त साक्ष्य स्पष्ट रूप से इंविगत करते हैं विक क ु छ पारिरर्वोारिरक मुद्दों क े कारर्ण, अपीलकता, और उसका पुत्र अलग-अलग रह रहे थे। ऐसे पृथक्करर्ण क े दौरा*, जब अंतरिरती पुत्र की आयु पहले ही र्वोयस्क हो चुकी थी, तो भूविम क े अपीलकता,-स्र्वोामी *े, जो स्र्वोयं एक क ृ षक था, पूर्वो क्त भूविम को अप*े पुत्र क े पक्ष में अंतरिरत कर विदया ताविक र्वोह उसकी खेती कर*े में समथ, हो सक े । अंतरर्णकता, और अंतरिरती क े बया* स्पष्ट रूप से इंविगत करते हैं विक अंतरिरती क े पास उपकरर्ण और कौशल थे और र्वोह खुद को एक क ृ विष विर्वोशेषज्ञ क े रूप में ब*ाए हुए था।
46. अंत में, यह अर्वोश्य ही ध्या* में रखा जा*ा चाविहए विक पूर्वो क्त अंतरर्ण खंड 30 डीडी अथा,त् विद*ांक 31.12.1969 क े अ ी* वि*यत तारीख से पूर्वो, वि*ष्पाविदत विकया गया था। इसलिलए, विद*ांक 19.12.1963 का पंजीक ृ त उपहार विर्वोलेख एक सद्भार्वोपूर्ण, हस्तांतरर्ण था, जो ारा 30 डीडी क े दायरे में आता था, सिजसका उद्देश्य क ृ षकों क े अधि कारों की रक्षा कर*ा था। मुद्दा संख्या 3, अपीलकता, क े पक्ष में जर्वोाब विदया जाता है, क्योंविक हस्तांतरर्ण अर्वोै *हीं है क्योंविक यह 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम की ारा 30 डीडी क े प्रार्वो ा* क े अ*ुसार संरधिक्षत है।
47. उपयु,क्त वि*ष्कषy को ध्या* में रखते हुए, उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा विदया गया वि*र्ण,य रद्द विकया जा सकता है। भूविम का हस्तांतरर्ण काश्तकारी अधि वि*यम, 1955 की ारा 30 डीडी क े तहत र्वोै हो*े क े कारर्ण, अपीलकता, का अधि कतम सीमा क्षेत्र ारा 30 सी. क े तहत प्रदा* की गई अधि कतम सीमा क े भीतर आता है।
48. इसमें कोई दो राय *हीं है विक 1973 क े सीलिंलग एक्ट की ारा 6 भी राज्य क े मामले को आगे *हीं बढ़ाती है। पहला, 1973 क े सीलिंलग अधि वि*यम की ारा 40 क े माध्यम से 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम, 1955 क े अध्याय III-B का वि*रस* कर*ा पूर्वो,व्यापी *हीं है। इसलिलए, र्वोत,मा* मामले में अधि कतम सीमा अधि वि*यम 1973 क े प्रार्वो ा* लागू *हीं होते हैं क्योंविक मामला विdर से खोला गया था और 1955 क े विकरायेदारी अधि वि*यम क े प्रार्वो ा*ों क े तहत वि*र्ण,य लिलया गया था। दूसरा, 1973 क े उच्चतम सीमा अधि वि*यम की ारा 6 में यह घोषर्णा की गई है विक 26- 09-1970 को या उसक े बाद और 01-01-1973 से पहले विकए गए भूविम क े प्रत्येक हस्तांतरर्ण को 1973 क े उच्चतम सीमा अधि वि*यम क े प्रार्वो ा*ों को विर्वोdल कर*े र्वोाला मा*ा जाएगा। र्वोत,मा* मामले में, उपहार विर्वोलेख विद*ांक 19 12-1963 को वि*ष्पाविदत विकया गया था, जो विद*ांक 26-09-1970 से बहुत पहले है। इसलिलए भी, 1973 क े सीलिंलग अधि वि*यम की ारा 6 अपीलकता,-दाता द्वारा ग्रहीता पुत्र क े पक्ष में भूविम क े हस्तांतरर्ण को प्रभाविर्वोत *हीं करती है। तीसरा, यह *हीं पाया गया है विक र्वोत,मा* मामले में उपहार विर्वोलेख विकसी बाहरी विर्वोचार पर लागू विकया गया था.इसलिलए, यह एक सद्भार्वोपूर्ण, हस्तांतरर्ण है सिजसे उच्चतम सीमा अधि वि*यम, 1973 की खंड 6 की कठोरता से छ ू ट प्राप्त है।
49. उपरोक्त शतy में अपील स्र्वोीकार की जाती है। लंविबत आर्वोेद*, यविद कोई हो, का वि*स्तारर्ण विकया जाता है। जे. (ए*. र्वोी. रमर्ण) जे. (अब्दुल *जीर) जे. (सूय,कांत) *ई विदल्ली, 8 विदसंबर, 2020 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purpose, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.