State Bank of India v. Ajay Kumar Srivastava

Supreme Court of India · 05 Jan 2021 · 2021 INSC 7
L. Nageswara Rao; Hemant Gupta; Ajay Rastogi
Civil Appeal No. ......... of 2021 (Special Leave Petition (Crl) No. 32067-32068 of 2018)
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the dismissal of a bank employee for financial misconduct due to procedural lapses violating natural justice, emphasizing limited judicial review in disciplinary cases.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या ......... वर्ष" 2021
(विवशेर्ष अनुमति याति)का (सी) संख्या(ओं) 32067-32068 वर्ष" 2018 से
उत्पन्न)
उप महाप्रबं क (अपीलीय प्राति करण) और अन्य ...... अपीलार्थी9 (गण)
बनाम
अजय क
ु मार श्रीवास् व ..... प्रत्यर्थी9 (गण)
विन ण" य
न्यायमूर्ति रस् ोगी
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई।

2. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारिर 13 सिस ंबर, 2018 क े विनण"य और आदेश से असं ुष्ट, अपीलक ा" बैंक की ओर से व "मान अपील दायर की गई है।

3. मामले क े संतिक्षप्त थ्य जो इस उद्देश्य क े लिलए प्रासंविगक हैं, यह है विक अपीलक ा" भार ीय स्टेट बैंक अति विनयम, 1955 क े ह विनगविम और गविठ एक वै ाविनक विनकाय है।प्रत्यर्थी9 विदनांक 07 विदसंबर,1981 को मम्फोड"गंज शाखा इलाहाबाद में क ै शिशयर/क्लक " क े रूप में विनयुक्त हुआ।ड्यूटी कर े हुए, उसक े द्वारा उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 2021 INSC 7 एक कदा)ार विकया गया र्थीा सिजसक े लिलए उसे 14 अगस्, 1995 विदनांविक क े आदेश द्वारा पहली बार विनलंविब विकया गया र्थीा और बाद में उस पर विदनांक 11 अप्रैल, 1996 को आरोप पत्र ामील विकया गया सिजसमें बैंक क े एक कम")ारी क े रूप में अपने क "व्यों क े विनव"हन में विकए गए न क े दुरुपयोग क े सा आरोपों का विववरण विदया गया र्थीा।

4. यह नोट करना प्रासंविगक हो सक ा है विक ैना ी स्र्थील की शाखा में उसक े विवशिभन्न खा ों में फज[9] j े तिडट दज" करक े बैंक क े पैसे क े दुर्विवविनयोग क े लिलए, आईपीसी की ारा 420,467,468,471 सपविठ आईपीसी की ारा 120B और भ्रष्टा)ार विनवारण अति विनयम, 1988 की ारा 13 (2) सपविठ ारा 13 (1)(d) ) क े ह आपराति क मामला भी संस्थिस्र्थी विकया गया र्थीा।

5. 11 अप्रैल,1996 की आरोपपत्र दालिखल होने क े बाद, प्रत्यर्थी9 अपरा ी ने सभी आरोपों से इनकार कर े हुए विदनांक 08 मई, 1996 को अपना जवाब प्रस् ु विकया। इसक े बाद जां) अति कारी को राष्ट्रीयक ृ बैंक क े कम")ारिरयों क े लिलए लागू विद्वपक्षीय विनस् ारण क े संदभ" में जां) करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी द्वारा विनयुक्त विकया गया र्थीा। प्रत्यर्थी9 ने अनुशासनात्मक जां) में भाग लिलया र्थीा और जां) अति कारी ने राष्ट्रीयक ृ बैंक क े कम")ारिरयों क े लिलए लागू विद्वपक्षीय विनस् ारण क े ह विन ा"रिर प्रविjया क े अनुसार जां) करने क े बाद विदनांक 22 मई, 1999 को उसकी जां) रिरपोट" अनुशासविनक प्राति कारी को प्रस् ु की, सिजसमें आरोप संख्या 1 साविब नहीं हुआ, सार्थी ही उसक े लिखलाफ आरोप संख्या 2 से 7 क साविब हुआ।विदनांक 22 मई,1999 की अपनी रिरपोट" में जां) अति कारी द्वारा यह नोविटस विकया गया है विक प्रत्यर्थी9 अपरा ी ने पूछ ाछ क े दौरान कहा विक वह न ो अशिभयोजन दस् ावेजों क े बारे में कु छ कहना )ाह ा है और न ही वह अशिभयोजन अति कारी से कोई प्रश्न पूछना )ाह ा है और अपने उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" खा े में फज[9] j े तिडट क े संबं में ब)ाव में अपने बयान को प्रमाशिण करने क े लिलए कोई दस् ावेजी सबू पेश नहीं विकया जो उसक े लिखलाफ बैंक क े न क े हेराफ े री का आरोप र्थीा और थ्य यह है विक प्रत्यर्थी9 क े लिखलाफ लगाए गए सभी आरोपों को बैंक द्वारा विवति व लेखा परीतिक्ष दस् ावेजी साक्ष्य क े सार्थी प्रस् ु विकया गया र्थीा।

6. उन दस् ावेजों क े सार्थी आरोपों का सार सिजन पर जां) अति कारी ने अवलम्ब लिलया और प्रत्यर्थी9 क े लिखलाफ विवस् ार से क " देने क े बाद आरोप को सिसद्ध करने क े लिलए अव ारिर विकया गया जो इस प्रकार हैं: आरोप संख्या 1: विदनांक 16.02.1994 को श्री आई. एस. वमा" (खा ा ारक) क े ब) बैंक खा ा संख्या 12215 में 1,09,600/- रुपये विनकाला गया और खा ा ारक की सहमति क े विबना 89,600/- रुपये की आंशिशक राशिश उनक े )ालू खा ा संख्या 51 में जमा विकया गया। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स-1 श्री आईएस वमा" क े ब) बैंक खा ा संख्या 12215 से संबंति 1,09,600.00 रुपये क े लिलए 16.02.1994 विदनांविक का डेविबट वाउ)र। पीईएक्स-2 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" श्री श्रीवास् व (EPA) ) क े )ालू खा ा संख्या 15 से संबंति 89,600/- रूपये क े लिलए 16.02.1994 विदनांविक का )ालू खा ा j े तिडट वाउ)र। पीईएक्स 3 )ालू खा ा संख्या पी51 का लेजर शीट।यह आरोप सिसद्ध नहीं हुआ है। आरोप संख्या 2: विदनांक 25.03.1994 को श्री श्रीवास् व ने बैंक को ोखा देने की दृविष्ट से शाखा में क ु छ स्टाफ सदस्यों को सासिजश में शाविमल विकया और दनुसार 4,87,300 रुपये क े लिलए अनुसू)ी संख्या 4 क े माध्यम से सामान्य खा ा समाशो न शाखा में फज[9] डेविबट विकया गया र्थीा और यह राशिश पहले श्री क े.सी. विमगलानी क े पक्ष में ब) बैंक खा ा संख्या 7547 में भेजी गई र्थीी। इस राशिश को बाद में विदनांक 25.03.1994 और विदनांक 04.04.1994 को विकश् ों में वापस ले लिलया गया र्थीा और उपरोक्त ति शिर्थीयों पर उनक े )ालू खा ा संख्या पी15 में 89,150/- रूपये और 10,000/- रुपये j े तिडट क े माध्यम से गबन विकया गया र्थीा। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स-4: 4,87,300/- रुपये क े लिलए 25.03.1994 विदनांविक का शाखा समाशो न सामान्य खा ा अनुसू)ी संख्या 4 पीईएक्स-5: श्री मिंमगलानी क े 25.03.1994 विदनांविक का ब) बैंक खा ा संख्या 7547 से संबंति 4,87,300/- रूपये का ब) बैंक j े तिडट वाउ)र। पीईएक्स 6: उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" श्री मिंमगलानी क े 25.03.1994 विदनांविक का ब) बैंक खा ा संख्या 7547 से संबंति 2,36,550/- रूपये का डेविबट वाउ)र। पीईएक्स-7: श्री अजय क ु मार श्रीवास् व क े 25.03.1994 विदनांविक का )ालू खा ा संख्या 51 से संबंति 89,150/- रुपये का )ालू खा ा j े तिडट वाउ)र। पीईएक्स-8: श्री क े. सी. विमगलानी का 04.04.1994 विदनांविक का ब) बैंक खा ा संख्या 7547 से संबंति 2,40,750/- रुपये का डेविबट वाउ)र। पीईएक्स 9: श्री अजय क ु मार श्रीवास् व का 04.04.1994 विदनांविक का )ालू खा ा संख्या 51 से संबंति 10600/- रूपये का )ालू खा ा j े तिडट वाउ)र, वास् व में वाउ)र 10000/- रूपये का है। पीईएक्स-10 विदनांक 04.04.1994 का )ालू खा ा दैविनक पुस्थिस् का। पीईएक्स-11: श्री अजय क ु मार श्रीवास् व क े )ालू खा ा संख्या पी15 की लेजर शीट। आरोप सिसद्ध हो ा है। आरोप संख्या 3: विदनांक 22.09.1994 को श्री श्रीवास् व ने बैंक को ोखा देने की दृविष्ट से शाखा में क ु छ स्टाफ सदस्यों क े सार्थी सासिजश र)ी और शाखा क े ब) बैंक खा े में 5,00,000/- रूपये का फज[9] डेविबट विकया और उपरोक्त में से उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 2,00,000/- रूपये उसक े द्वारा अपने )ालू खा ा संख्या P51 में j े तिडट विकया गया र्थीा। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स 12-विदनांक 22.09.1994 का ब) बैंक दैविनक पुस्थिस् का पीईएक्स 13- विदनांक 22.09.1994 का )ालू खा ा दैविनक पुस्थिस् का पीईएक्स 14 - श्री अजय क ु मार श्रीवास् व से संबंति )ालू खा ा संख्या 51 की लेजर शीट। आरोप सिसद्ध हो ा है। आरोप संख्या 4: विदनांक 30.12.1994 को श्री श्रीवास् व ने बैंक को ोखा देने की दृविष्ट से शाखा में क ु छ स्टाफ सदस्यों क े सार्थी सासिजश र)ी और दनुसार शाखा क े )ालू खा े में 5,30,000/- रूपये का एक फज[9] डेविबट विकया और उपरोक्त राशिश में से 2,50,000/- रूपये और 25,000/- रूपये की राशिश को उसक े द्वारा )ालू खा ा संख्या पी51 और ब) बैंक खा ा संख्या 11068 श्रीम ी रस्थिश्म श्रीवास् व (उनकी पत्नी) क े पक्ष में जमा करने क े माध्यम से दुरूपयोग विकया गया र्थीा। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स 15 - )ालू खा ा खा ा लेजर संख्या 2 से संबंति 5,30,000/- रूपये क े लिलए 30.12.1994 विदनांविक का डेविबट वाउ)र। पीईएक्स 16 - विदनांक 30.12.1994 का )ालू खा ा दैविनक पुस्थिस् का उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पीईएक्स 17- श्रीम ी रस्थिश्म श्रीवास् व क े ब) बैंक खा ा संख्या 11068 से संबंति 25,000/- रूपये का विदनांक 30.12.1994 का ब) बैंक j े तिडट वाउ)र। पीईएक्स 18 - श्रीम ी रस्थिश्म श्रीवास् व क े बैंक खा ा संख्या 11068 से संबंति लेजर शीट (पृष्ठ संख्या 70/16) आरोप सिसद्ध हो ा है। आरोप संख्या 5: विदनांक 30.05.1995 को श्री श्रीवास् व ने ोखा ड़ी से श्रीम ी रस्थिश्म श्रीवास् व (पत्नी) क े ब) खा ा संख्या 11068 में 2,30,000/- रुपये का फज[9] डेविबट विकया सिजसमें कोई j े तिडट शेर्ष उपलब् नहीं र्थीा और बैंक को ोखा देने की दृविष्ट से उपरोक्त राशिश को उसक े )ालू खा ा संख्या P51 में जमा विकया गया र्थीा। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स 18-ब) बैंक खा ा संख्या 11068 का लेजर शीट पीईएक्स 19 - श्रीम ी रस्थिश्म श्रीवास् व क े बैंक खा ा संख्या 11068 से संबंति 2,30,000/- रुपये क े विदनांक 30.05.1995 का डेविबट वाउ)र पीईएक्स 20 - श्रीम ी श्रीवास् व की )ालू खा ा संख्या 51 से संबंति 2,30,000/- रूपये का विदनांक 30.05.1995 का )ालू खा ा j े तिडट वाउ)र। पीईएक्स 21- विदनांक 30.05.1995 का ब) बैंक दैविनक पुस्थिस् काआरोप सिसद्ध हो ा है। आरोप संख्या 6: उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विदनांक 31.05.1995 को श्री श्रीवास् व ने ोखा ड़ी से श्रीम ी रस्थिश्म श्रीवास् व (पत्नी) क े ब) खा ा संख्या 11068 में 3,60,000/- रुपये का फज[9] डेविबट विकया सिजसमें कोई j े तिडट शेर्ष उपलब् नहीं र्थीा और बैंक को ोखा देने की दृविष्ट से अपने )ालू खा ा संख्या P51 में 3,00,000/- रुपये की आंशिशक राशिश जमा करवाई। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स 22-श्री अजय क ु मार श्रीवास् व क े )ालू खा ा संख्या 51 से संबंति 3,00,000/- रुपये क े 31.05.1995 विदनांविक का j े तिडट वाउ)र पीईएक्स 23 - बैंक खा ा संख्या 11068 से संबंति लेजर शीटपीईएक्स 24-)ालू खा ा संख्या 51 से संबंति लेजर शीट।पीईएक्स 25-ब) बैंक दैविनक पुस्थिस् का विदनांक 31.05.1995 पीईएक्स 26-)ालू खा ा दैविनक पुस्थिस् का विदनांक 31.05.1995 आरोप सिसद्ध हो ा है। आरोप संख्या 7:

20. विदनांक 10.1993 को श्री श्रीवास् व ने बैंक की अनुमति क े विबना शाखा में खा ा ारक श्री क े सी विमगलानी ब) खा ा संख्या 7547 से 35,000/- रुपये उ ार लिलए। उपरोक्त आरोप को साविब करने क े लिलए, प्रस् ु क ा" अति कारी ने विनम्नलिललिख दस् ावेज प्रस् ु विकए: पीईएक्स 25A) - 35,000/- रूपये क े लिलए विदनांक 29.10.1993 सीए). संख्या 775157 की फोटोकॉपी पीईएक्स 26A) - विदनांक 29.10.1993 को 35,000/- रुपये से संबंति ब) बैंक खा ा संख्या 7547 का j े तिडट वाउ)र। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पीईएक्स 27 - श्री क े. सी. विमगलानी क े ब) बैंक खा ा संख्या 7547 से संबंति 35,000/- रुपये क े विदनांक 20.10.1993 का डेविबट वाउ)र पीईएक्स 28 – श्री अजय क ु मार श्रीवास् व क े )ालू खा ा संख्या 51 से संबंति 20.10.1993 विदनांविक का 35,000 रुपये का j े तिडट वाउ)र। आरोप सिसद्ध हो ा है।

7. जां) की विवस् ृ रिरपोट" की प्रति उपलब् होने क े बाद, अनुशासनात्मक प्राति कारी ने जां) की रिरपोट" पर विफर से विव)ार करने की कोशिशश की और जां) अति कारी द्वारा साविब विकए गए आरोप संख्या 27 क े संदभ" में थ्य क े विनष्कर्ष" क े सार्थी सहमति व्यक्त कर े हुए जां) अति कारी द्वारा आरोप संख्या 1 क े रूप में दज" विकए गए विनष्कर्ष" से असहम र्थीे और अपनी असहमति क े कारणों को ब ा े हुए आरोप संख्या 1 को साविब करने क े लिलए और अशिभलेख क े आ ार पर प्रर्थीम दृष्टया राय क े सार्थी असहमति क े अपने विनष्कर्ष" (आरोप संख्या 1) क े सार्थी 29 जून,1999 विदनांविक की जां) रिरपोट" की प्रति प्रस् ु की र्थीा प्रति वादी अपरा ी से पूछ ाछ क े लिलए उसका लिललिख स्पष्टीकरण मांगा।

8. विदनांक 29 जून, 1999 को अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा असहमति क े नोट पर आपलि‡ ज ा े हुए सं)ार क े संदभ" में प्रत्यर्थी9 द्वारा प्रत्यु‡र विदया गया र्थीा सिजसे अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा आरोप संख्या 1 क े रूप में अशिभलिललिख विकया गया र्थीा, सार्थी ही, अन्य आरोप संख्या 2 से 7 क े संदभ" में, सिजन्हें सिसद्ध विकया गया र्थीा और अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा प्रर्थीम दृष्टया स्वीकार विकया गया र्थीा, जां) अति कारी द्वारा जां) क े दौरान या खंडन में ब)ाव क े दौरान विकसी भी पूवा"ग्रह क े कारण कोई विवशेर्ष आपलि‡ नहीं उठाई गई र्थीी, जां) अति कारी या प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का उल्लंघन द्वारा विव)ार नहीं विकया गया र्थीा, विकसी भी दस् ावेजी/मौलिखक साक्ष्य का समर्थी"न विकए विबना सामान्य प्रक ृ ति की अस्पष्ट उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आपलि‡यां की और प्रत्यर्थी9 अपरा ी की एक आपलि‡ यह र्थीी विक जब एक आपराति क मामला संस्थिस्र्थी विकया गया र्थीा और सीबीआई द्वारा विव)ारण/जां) लंविब र्थीी ो अनुशासनात्मक जां) करने की कोई आवश्यक ा नहीं र्थीी। एक लंविब आपराति क मामले में उनक े लिखलाफ स्र्थीाविप जां)/विव)ारण क े परिरणाम की प्र ीक्षा विकए विबना विवभागीय जां) क े विनष्कर्ष" ने उनक े लिलए बहु पूवा"ग्रह पैदा विकया है।

9. कारण ब ाओ नोविटस क े जवाब में प्रत्यर्थी9 अपरा ी द्वारा कोई विवशेर्ष आपलि‡ नहीं उठाए जाने क े बावजूद, विफर भी अनुशासनात्मक प्राति कारी ने जां) रिरपोट" सविह जां) क े रिरकॉड" पर दोबारा गौर विकया, प्रति वादी द्वारा विदए गए स्पष्टीकरण ने अपनी रिरपोट" में जां) अति कारी द्वारा विनष्कर्ष" की पुविष्ट कर े हुए, उसकी प्रर्थीम दृष्टया राय की पुविष्ट की, सिजसे उसने 29 जून, 1999 को अपने सं)ार में व्यक्त विकया है। और शास्त्री पुरस्कार क े प्रस् र 9 521(5)(ए) सपविठ देसाई पुरस्कार क े प्रस् र 18, 28 क े अनुसार, जैसा विक भार ीय स्टेट बैंक और अलिखल भार ीय स्टेट बैंक ऑफ इंतिडया स्टाफ फ े डरेशन क े बी) विदनांक 14 फरवरी,1995 क े 12 वें विद्वपक्षीय समझौ े द्वारा संशोति विकया गया है, ने विदनांक 24 जुलाई,1999 क े अपने आदेश द्वारा सेवा से बखा"स् गी क े दंड की पुविष्ट की।

10. प्रति वादी ने अपनी सेवा से बखा"स् गी क े विवरुद्ध विवभागीय अपील दायर की। प्रत्यर्थी9 द्वारा दायर की गई अपील का क े वल एक अवलोकन यह दशा" ा है विक क े वल कारण ब ाओ नोविटस क े जवाब में उठाई गई सामान्य आपलि‡ का प्रति मिंबब यह र्थीा, सिजसमें अपील में कोई विवशेर्ष उल्लेख नहीं र्थीा विक अनुशासनात्मक जां) करने या प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े उल्लंघन क े मामले में जां) अति कारी द्वारा की जा रही प्रविjयात्मक त्रुविट क्या र्थीी या जां) क े दौरान विकसी प्रकार क े पूवा"ग्रह का कारण बन ा है या कार"वाई पूवा"ग्रह या दुभा"वनापूण" है जो क ु छ उल्टे कारणों से उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" शुरू की गई है, यविद कोई हो, और सामान्य आपलि‡यों क े अलावा उनक े लिखलाफ साविब विकए गए आरोप संख्या 2-7 क े संदभ" में कोई विवशेर्ष आपलि‡ नहीं उठाई गई जो विबना विकसी आ ार क े अस्पष्ट हैं।

11. अपीलीय प्राति कारी द्वारा विवभागीय अपील की जां) की गई और जां) क े अशिभलेख को ध्यान में रख े हुए, जैसा विक अपीलीय प्राति कारी क े आदेश क े प्रस् र 2 से परिरलतिक्ष हो ा है विक अपीलीय प्राति कारी ने नोविटस विकया विक प्रत्यर्थी9 द्वारा की गई कशिर्थी आपलि‡यां इ नी अस्पष्ट हैं विक कोई सहायक आ ार नहीं है और जां) क े अशिभलेख का अध्ययन करने क े बाद और प्रत्यर्थी9 द्वारा अपनी अपील में लगाए गए आरोपों की प्रक ृ ति को ध्यान में रख े हुए, अपीलीय प्राति कारी ने अपने आदेश में कारण ब ाए जो प्रस् र 3(i) ) से (vi) i) i) ) में दशा"या गया है और अं में विबना विकसी गुणावगुण और उसक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों क े अनुरूप दंड, बखा"स् गी की सजा की पुविष्ट कर ा है जो प्रत्यर्थी9 अपरा ी क े कर्थीन पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट याति)का में )ुनौ ी का विवर्षय र्थीा।

12. यद्यविप उच्च न्यायालय क े विवद्व एकल न्याया ीश ने विनण"य पारिर विकया है, लेविकन आरोप संख्या 1 पर ध्यान क ें विŽ विकया गया र्थीा, सिजसे जां) अति कारी ने अपनी रिरपोट" में सिसद्ध नहीं विकया र्थीा, लेविकन अनुशासनात्मक प्राति कारी ने असहमति का अपना नोट दज" विकया, जो उच्च न्यायालय क े विवद्व एकल न्याया ीश क े अनुसार पूवा"ग्रह का कारण बना है और इसक े अलावा, अनुशासनात्मक/ अपीलीय प्राति कारी ने कारण रविह आदेश पारिर विकया है जो प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े उल्लंघन में है और विवद्व एकल न्याया ीश द्वारा विदये गए विव)ार की पुविष्ट उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने आक्षेविप विनण"य विदनांक 13 सिस ंबर, 2018 द्वारा की र्थीी, जो हमारे सामने )ुनौ ी का विवर्षय है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

13. बहस क े दौरान, यह हमारे संज्ञान में लाया गया र्थीा विक प्रत्यर्थी9 क े लिखलाफ आईपीसी की ारा 420, 467, 468, 471 सपविठ आईपीसी की ारा 12 बी और भ्रष्टा)ार विनवारण अति विनयम, 1988 की ारा 13(2) सपविठ ारा 13(1) (डी) क े ह अपरा क े लिलए संस्थिस्र्थी आपराति क मामले में, प्रत्यर्थी9 कम")ारी को विवशेर्ष न्याया ीश, सीबीआई न्यायालय संख्या 1, लखनऊ क े विवद्वान न्यायालय द्वारा विदनांक 31 मई,2019 क े विनण"य द्वारा दोर्षसिसद्ध कर े हुए दोर्षी ठहराया सार्थी ही दस वर्ष" क े कठोर कारावास र्थीा जुमा"ने क े सार्थी ीन माह क े कारावास की सजा सुनाई।

14. अपीलार्थी9 क े विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक जां) क े दौरान प्रति वादी अपरा ी को सुनवाई का उति) अवसर प्रदान विकया गया और प्रति वादी का यह मामला कभी नहीं र्थीा विक या ो अनुशासनात्मक विनयमों क े ह विन ा"रिर प्रविjया का पालन नहीं विकया गया है या जां) उस प्राति कारी द्वारा की गई र्थीी जो कानून क े ह सक्षम नहीं र्थीा या विनष्कर्ष" जो जां) अति कारी द्वारा अपने रिरपोट" में प्राप्त विकया गया है और अनुशासविनक प्राति कारी द्वारा पुविष्ट की गई है, अशिभलेख पर मौजूद साक्ष्य द्वारा समर्थिर्थी नहीं हैं या प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का उल्लंघन र्थीा। इसक े अभाव में, प्रत्यर्थी9 द्वारा यह दलील दी गई विक अनुशासनात्मक प्राति कारी ने विबना सो)े-समझे एक कारण रविह आदेश पारिर विकया है, इसमें गुणावगुण का अभाव है और अशिभलिललिख विकये गए थ्यों से इसकी पुविष्ट नहीं हो ी है।

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15. इसक े विवपरी, जां) अति कारी ने अपने विवस् ृ रिरपोट" में आरोविप कम")ारी क े लिखलाफ आरोप सं. 27 को सिसद्ध करने में ठोस कारण दज" विकए।अनुशासविनक प्राति कारी ने अपनी प्रर्थीम दृष्टया राय व्यक्त कर े हुए और जां) रिरपोट" की प्रति क े सार्थी अनुशासनात्मक प्राति कारी को ामील विकए जाने और प्रत्यर्थी9 को सुनवाई उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" का उति) अवसर प्रदान करने और उसक े लिललिख प्रत्यु‡र को ध्यान में रख े हुए, उठाये गए कशिर्थी आपलि‡यों का विनस् ारण विकया है, रिरकॉड" पर दस् ावेजों द्वारा समर्थिर्थी कारणों को ब ा े हुए सेवा से बखा"स् गी क े दंड को बरकरार रखने में व्यक्त अपने अस्र्थीायी दृविष्टकोण की पुविष्ट की है।दी गई परिरस्थिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा एलपीए में पुविष्ट विकए गए विवद्वान एकल न्याया ीश का आदेश कानून में मान्य नहीं है।

16. विवद्वान अति वक्ता आगे कह े हैं विक जहां क आरोप सं. 1 का संबं है, यह स) है विक जां) अति कारी को आरोप संख्या 1 सिसद्ध नहीं हुआ है लेविकन अनुशासविनक प्राति कारी ने प्रर्थीम दृष्टया राय व्यक्त कर े हुए असहमति क े कारणों को दज" विकया है, जां) रिरपोट" क े सार्थी आरोप संख्या 1 में दज" असहमति नोट की एक प्रति दोर्षी कम")ारी को ामील की गई, अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा दज" असहमति क े नोट क े लिललिख उ‡र में अपरा ी प्रति वादी द्वारा कोई औति)त्य नहीं विदया गया र्थीा। इस प्रकार, उन्हें एक उति) अवसर प्रदान विकया गया और उड़ीसा राज्य और अन्य बनाम विवद्याभूर्षण महापात्र[1] में इस न्यायालय की संविव ान पीठ क े विनण"य का अवलम्ब लिलया, सिजस पर इस न्यायालय द्वारा पी.डी. अग्रवाल बनाम भार ीय स्टेट बैंक और अन्य[2] में इस न्यायालय द्वारा आगे विव)ार विकया गया र्थीा, विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक बखा"स् गी का आदेश आरोप संख्या 27 क े विनष्कर्ष" पर आ ारिर है, जो जां) अति कारी द्वारा साविब कर विदया गया र्थीा और अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी द्वारा पुविष्ट की गई र्थीी, प्रति वादी अपरा ी को बखा"स् गी क े दंड को बरकरार रखने में गंभीर अपरा का दोर्षी ठहराया गया र्थीा और उच्च न्यायालय द्वारा प्रति वादी अपरा ी पर लगाए गए दंड क े आदेश में हस् क्षेप उति) नहीं र्थीा और इस न्यायालय क े हस् क्षेप की आवश्यक ा है। 1 A) IR 1963 SC 779 2 2006(8) SCC 776 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

17. इसक े विवपरी, प्रत्यर्थी9 क े विवद्वान अति वक्ता ने आक्षेविप विनण"य का समर्थी"न कर े हुए कहा विक अनुशासनात्मक प्राति कारी ने जां) अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट" में दज" विकए गए विनष्कर्ष— को दोहराया और स्व ंत्र रूप से जां) क े रिरकॉड" की जां) करने में विवफल रहे और प्रति वादी द्वारा उठाई गई लिललिख आपलि‡यों को सरसरी ौर पर खारिरज कर विदया विबना और विबना सो)े-समझे कारण रविह आदेश पारिर करक े सेवा से बखा"स् करने क े लिलए उस पर जुमा"ना लगाया गया है, सिजसे उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेविप विनण"य में उति) ढंग से हस् क्षेप विकया गया है।

18. विवद्व अति वक्ता ने आगे कहा विक जब जां) अति कारी को आरोप संख्या 1 सिसद्ध नहीं हुआ और अनुशासनात्मक प्राति कारी जां) अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट" में अशिभलिललिख विकए गए विनष्कर्ष— से असहम र्थीे और असहमति का नोट पहले स्र्थीान पर रखना )ाविहए र्थीा, उसक े स्पष्टीकरण क े लिलए र्थीा और उसक े बाद ही उसक े लिलए कानून क े अनुसार विनण"य लेने में स्व ंत्र रूप से अशिभलेख की जां) करने क े लिलए र्थीा और आरोप संख्या 1 क े संदभ" में प्रति वादी को दोर्षी ठहराने क े लिलए अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा अपनाई गई प्रविjया न क े वल एक प्रविjयात्मक त्रुविट है बस्थिल्क प्रत्यर्थी9 क े लिलए एक बड़ा पूवा"ग्रह है और इस रह क े दोर्ष को विनण"य क े बाद की सुनवाई से ठीक नहीं की जा सक ी, सिजसे उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेविप विनण"य में सही ठहराया गया है और इस न्यायालय द्वारा हस् क्षेप की आवश्यक ा नहीं है।

19. हमने पक्षकारों क े लिलए विवद्वान अति वक्ता को सुना है और उनकी सहाय ा से अशिभलेख पर उपलब् सामग्री का परिरशीलन विकया है।

20. प्रारम्भ में, यह नोट विकया जा सक ा है विक जां) अति कारी ने अपनी जां) रिरपोट" में देखा है विक प्रत्यर्थी9 अपरा ी ने न ो कोई दस् ावेज और न ही उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आत्मरक्षा में कोई गवाह प्रस् ु विकया है।सार्थी ही, उन्होंने कभी भी उनसे अपने पसंद क े प्रति विनति द्वारा उनकी प्रति रक्षा करने की अनुमति देने का अनुरो नहीं विकया।उसने पूछ ाछ क े दौरान आगे कहा विक वह न ो अशिभयोजन दस् ावेजों क े बारे में क ु छ कहना )ाह े र्थीे और न ही वह प्रस् ु क ा" अति कारी से कोई प्रश्न पूछना )ाह े र्थीे।जां) अति कारी द्वारा प्रस् ु दस् ावेज, प्रस् ु क ा" अति कारी का संतिक्षप्त विववरण, ब)ाव पक्ष और प्रत्यर्थी9 कम")ारी द्वारा विकए गए क— सविह जां) क े अशिभलेख को ध्यान में रख े हुए, जां) अति कारी ने आरोप संख्या 1 से 7 क प्रत्येक की जां) की और विवस् ृ विवश्लेर्षण क े बाद, प्रत्येक आरोप क े संदभ" में अपना विनष्कर्ष" अलग से दज" विकया और पाया विक आरोप संख्या 1 सिसद्ध नहीं हुआ, सार्थी ही आरोप संख्या 27 को अशिभलेख पर रखे गए दस् ावेजी साक्ष्य क े आ ार पर साविब विकया गया।

21. जां) अति कारी द्वारा जां) रिरपोट" प्रस् ु विकए जाने क े बाद अनुशासनात्मक प्राति कारी ने आरोपपत्र, आरोपपत्र का प्रत्यु‡र, जां) काय"वाही, जां) अति कारी क े विनष्कर्ष" विदनांक 22 मई,1999 को प्रस् ु ीकरण अति कारी क े संतिक्षप्त विववरण सविह जां) क े अशिभलेख को विफर से देखने क े लिलए प्रयास विकया, ब)ाव पक्ष (प्रति वादी अपरा ी) का संतिक्षप्त विववरण और विफर 28 दस् ावेजों को नोविटस करने, जो प्रस् ु ीकरण अति कारी द्वारा पीईएक्स 1 से पीईएक्स 28 दर्थिश विकए गए र्थीे, और प्रत्यर्थी9 कम")ारी द्वारा विकए गए लिललिख प्रस् ु ीकरण को ध्यान में रख े हुए, जां) अति कारी द्वारा आरोप संख्या 1 को सिसद्ध विकये जाने क े संदभ" में असहमति क े नोट सविह अपनी रिरपोट" में दज" विकए गए थ्य क े विनष्कर्ष" को बरकरार रखने क े लिलए आवेदन क े बाद उस विनष्कर्ष" को अशिभलिललिख विकया गया। विदनांक 24 जुलाई,1999 क े अपने दंडादेश की पुविष्ट करने में विनर्विदष्ट विवस् ृ कारण विनम्नानुसार हैं: उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" "आदेश स्टाफ: अवाड" श्री अजय क ु मार श्रीवास् व, क्लक " अनुशासनात्मक कार"वाई मेरे सामने क ै शिशयर सह लिलविपक, विनलंबन क े ह, व "मान में दरिरयागंज शाखा में पदस्र्थीाविप, श्री ए. क े. श्रीवास् व को अनुशासविनक प्राति कारी क े अस्र्थीायी आदेश विदनांक 29.6.1999 क े संबं में विदनांक 15 जुलाई, 1999 को प्रस् ुति करण / कारण ब ाओ नोविटस को रखा गया है, सिजसमें ममफोड"गंज शाखा में विकए गए ोखा ड़ी लेनदेन से संबंति उनक े घोर कदा)ार क े लिलए उन्हें विबना विकसी नोविटस क े बखा"स् करने का विनण"य लिलया गया र्थीा, सिजसक े कारण बैंक को साव"जविनक छविव क े नुकसान क े अलावा काफी नुकसान हुआ है।यह भी विनण"य लिलया गया विक श्री श्रीवास् व की विनलंबन की अवति को उसी रह से माना जाएगा और पूव" से भुग ान विकए गए विनवा"ह भ‡े को छोड़कर कोई वे न और भ‡ा उसे देय नहीं होगा।उपरोक्त आदेश उसक े लिखलाफ आरोप पत्र विदनांक 11.4.1996 में विनविह आरोपों पर पारिर विकया गया र्थीा और उसे अपनी प्राविप्त क े 7 विदनों क े भी र उपरोक्त सजा क े लिखलाफ, यविद कोई हो, ो, उसक े अनुरो पर 15 विदनों क े लिलए विवस् ारिर करने का अवसर विदया गया र्थीा, सिजसे विवफल कर े हुए यह माना जाएगा विक उसक े पास इस संबं में प्रस् ु करने क े लिलए क ु छ भी नहीं है और अंति म आदेश विकसी भी संदभ" क े विबना अंति म आदेश पारिर विकया जाएगा।

2. श्री ए.क े. श्रीवास् व ने कहा विक जां) अति कारी क े विनष्कर्ष— क े आ ार पर उनकी विटप्पणी को विबना बखा"स् गी क े अस्र्थीायी आदेश विदनांक 29.6.1999 को पारिर करना अवै है।उनकी दृविष्ट में जां) अति कारी की रिरपोट" उनक े विनवेदन, यविद कोई हो, की मांग क े लिलए उन्हें अग्रेविर्ष की गई होगी, जो विक नहीं की गई है।प्रस् ाविव सजा को अंति म रूप देने से पहले आरोविप कम")ारिरयों को जां) रिरपोट" अग्रेविर्ष करने क े लिलए बैंक में ऐसी कोई प्रविjया उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विन ा"रिर नहीं की गई है।इस संबं में प्रविjया का पालन जां) रिरपोट" क े सार्थी विकया गया है और संबंति दस् ावेज उसे अस्र्थीायी आदेश क े सार्थी भेज विदए गए हैं ाविक वह अपना ब)ाव प्रस् ु कर सक े विक बैंक में व्यवस्र्थीा और प्रविjया क े अनुसार उस पर प्रस् ाविव सजा क्यों नहीं लगाई जाए।

3. उनका आरोप है विक अशिभयोजन क े दस् ावेज उन्हें पहले नहीं विदए गए र्थीे, सिजसने उसे खुद को दोर्षी साविब होने से उति) अवसर छोड़ विदया जो थ्यों पर आ ारिर नहीं है क्योंविक जां) की काय"वाही क े दौरान सभी दस् ावेज उसे परिरशीलन/विटप्पशिणयों क े लिलए उपलब् कराए गए र्थीे।जां) काय"वाही की प्रति यां उसी विदन की काय"वाही क े समापन पर उन्हें दी गई र्थीीं और आरोप में कोई थ्य नहीं है।जां) काय"वाही क े पृष्ठ 16 और 17 क े अवलोकन पर यह स्पष्ट है विक जां) अति कारी ने श्री श्रीवास् व से पूछा र्थीा विक क्या वह अशिभयोजन दस् ावेजों क े बारे में कु छ कहना )ाह े हैं, सिजसका उन्होंने नकारात्मक उ‡र विदया र्थीा, उन्होंने यह भी कहा र्थीा विक वह अशिभयोजन पक्ष का संतिक्षप्त विववरण प्राप्त करने क े लिलए एक सप्ताह क े भी र अपना ब)ाव पक्ष प्रस् ु करेगा। इसी प्रकार श्री श्रीवास् व द्वारा अपने पत्र विदनांक 10.11.1998 में उठाये गये विबन्दुओं पर जां) अति कारी पहले ही स्पष्ट कर )ुक े हैं जो स्वयं स्पष्ट एवं सं ोर्षजनक पाये गये हैं।

4. श्री श्रीवास् व द्वारा अपनी प्रस् ुति विदनांक 15.7.1999 में अनुशासविनक प्राति कारी को 'कारण ब ाओ नोविटस' क े रूप में भेजे गए अन्य मिंबदुओं को बारीकी से जां) क े बाद अप्रासंविगक पाया गया। जां) विदनांक 2.11.1997 को शुरू हुई और श्री श्रीवास् व ने विदनांक 12.5.1998 को उसकी समाविप्त क जां) की काय"वाही क े दौरान न ो कोई दस् ावेज मांगे जो विकसी गवाह/ब)ाव साक्ष्य को पेश करने क े लिलए इच्छ ु क नहीं र्थीा।हालांविक, जब उन्होंने कहा विक अशिभयोजन पक्ष ने जां) की काय"वाही क े अनुसार पया"प्त सबू पेश विकए हैं जो बैंक को ोखा देने की सासिजश में अपनी भागीदारी साविब करेंगे, उन्होंने अपने लिखलाफ फ ै सले में देरी करने क े लिलए बैंक पर बेबुविनयाद आरोप लगाना शुरू कर विदया। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

5. मैंने जां) रिरपोट", उनक े पत्र विदनांक 10.11.1998 और 15.12.1998 सविह सभी प्रासंविगक दस् ावेजों को विफर से देखा है और जां) को विफर से खोलने क े लिलए कोई सार नहीं विमला क्योंविक श्री श्रीवास् व को पहले से ही अपना ब)ाव करने का पया"प्त अवसर विदया गया र्थीा।प्रस् ाविव सजा उनक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों क े अनुरूप है और जैसा विक अस्र्थीायी आदेश में विवस् ार से ))ा" की गई है।इसलिलए, मैं श्री अजय क ु मार श्रीवास् व को विबना विकसी सू)ना क े बखा"स् करने क े अपने अस्र्थीायी आदेश विदनांक 29.6.1999 की पुविष्ट कर ा हूं, जो शास्त्री पुरस्कार क े प्रस् र 521(5)(ए) सपविठ देसाई पुरस्कार क े प्रस् र 18,28 क े अनुसार भार ीय स्टेट बैंक और अलिखल भार ीय स्टेट बैंक ऑफ इंतिडया स्टाफ फ े डरेशन क े बी) विकया गया 12 वें विद्वपक्षीय समझौ ा 14.2.1995 विदनांविक क े द्वारा संशोति विकया गया है।मैं यह भी आदेश दे ा हूं विक श्री श्रीवास् व द्वारा व्य ी की गई अवति को विनलंविब क े रूप में इस रह माना जाए र्थीा पहले से भुग ान विकए गए विनवा"ह भ‡े को छोड़कर उन्हें कोई वे न एवं भ‡ा देय नहीं होगा। मैं दनुसार आदेश दे ा हूं। Sd) /- सहायक महाप्रबं क (IV)) अनुशासनात्मक प्राति कारी, विदनांक: 24 जुलाई, 1999

22. प्रत्यर्थी9 कम")ारी द्वारा की गई विवभागीय अपील पर अपील प्राति कारी द्वारा पुनरीक्षण विकया गया और आपलि‡यों को ध्यान में रख े हुए, सभी अपीलीय प्राति कारी द्वारा विदनांक 15 नवंबर, 1999 क े अपने आदेश में अलग-अलग विनस् ारिर विकया गया, सिजसका प्रासंविगक भाग विनम्नलिललिख है: उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “3. अपीलार्थी9 द्वारा उक्त विबन्दुओं की जाँ) करने क े jम में मैंने आरोप पत्र, आरोविप कम")ारी द्वारा प्रस् ु आरोप पत्र का उ‡र, जां) काय"वाही, जां) अति कारी क े विनष्कर्ष", अं रिरम आदेश विदनांक 29 जून, 1999, अंति म आदेश विदनांक 24 जुलाई, 1999, उनकी सेवा पत्रक और मामले क े अन्य प्रासंविगक अशिभलेखों का अवलोकन विकया है। मेरे विव)ार विनम्नानुसार हैं: (i) ) श्री श्रीवास् व द्वारा उपरोक्तानुसार उठाए गए लगभग सभी मिंबदुओं का जां) अति कारी क े उ‡र और अंति म आदेश विदनांक 24 जुलाई, 1999 में उपयुक्त उ‡र विदया गया है। विदया गया स्पष्टीकरण काफी उति) है और मैं उसी से सं ुष्ट हूं।उसे अपना ब)ाव करने का पूरा मौका विदया गया और दुबारा नये सिसरे से जां) करने का कोई आ ार नहीं र्थीा।जैसा विक उन्होंने आरोप लगाया र्थीा, आरोपपत्र में विनविह आरोप अस्पष्ट नहीं र्थीे और एक को छोड़कर सभी आरोप जां) में साविब हुए हैं।

(i) i) ) श्री श्रीवास् व का यह क

" है विक जां) अति कारी अनुशासविनक प्राति कारी क े पद से ऊपर होना )ाविहए, सिजस अति कारी ने आरोप पत्र जारी विकया है, वह सही नहीं है। अनुशासविनक प्राति कारी उस जां) अति कारी क े पद से ऊपर होना )ाविहए सिजसे उसक े द्वारा उसकी ओर से थ्य क े विनष्कर्ष" क े लिलए विनयुक्त विकया गया है। i) i) i) ) यविद पुलिलस/जां) एजेंसी उति) समय क े भी र अपनी रिरपोट" प्रस् ु नहीं कर ी है और उच्च म न्यायालय ने इस संबं में कई फ ै सले विदए हैं ो विवभागीय जाँ) शुरू करने पर कोई रोक नहीं है। i) v) अनुशासनात्मक प्राति कारी लंविब विनलंबन मामलों की समीक्षा कर ा है और समीक्षा क े बाद विकसी भी विनलंविब उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" कम")ारी की बहाली का आदेश दे सक ा है।दो कम")ारिरयों को बहाल कर विदया गया र्थीा क्योंविक उनक े लिखलाफ आरोप अति क गंभीर नहीं र्थीे। v) दोहरे मापदंड और भेदभावपूण" व्यवहार क े आरोप सही नहीं हैं क्योंविक सभी दोर्षी कम")ारिरयों / अति कारिरयों क े लिखलाफ अनुशासनात्मक काय"वाही शुरू की गई है और जां) अति कारी की रिरपोट" क े आ ार पर दंड अति रोविप विकया गया है और कम")ारिरयों क े दुभा"वनापूण" /सद्भावनापूण" आ)रण पर विव)ार विकया गया है।कु छ कम")ारिरयों क े लिखलाफ पूरक आरोपपत्र पहले ही ामील विकए जा )ुक े हैं, सिजनक े लिखलाफ पहले क े आरोपपत्रों क े आ ार पर जुमा"ना लगाया गया है। vi) ) विकसी भी आरोपपवित्र कम")ारी को विनलंबन अवति का भुग ान उनक े सेवा विनयमों क े अनुसार नहीं विकया गया है और न ही विकसी क े सार्थी भेदभाव विकया गया है। vi) i) ) अपीलक ा" ने पहले ही स्वीकार कर लिलया है विक वह अपने अति क आहरिर )ालू खा े को विनयविम करने क े लिलए विबना विकसी वास् विवक नकद/हस् ां रण लेनदेन क े वाउ)र लेने क े लिलए ैयार र्थीा और ोखा ड़ी से आहरिर राशिश को आंशिशक रूप से जमा करने से वह ोखा ड़ी वाले लेनदेन क े अपरा से मुक्त नहीं हो सक ा है और विकसी ने भी उसे बखा"स् गी से कम दंड देने का वादा नहीं विकया र्थीा। vi) i) i) ) उसक े पत्रों/ अभ्यावेदनों का उ‡र न देना पारिरवारिरक जां) में विवलंब और परिरणामी दण्ड से अशिभप्रे है, और इसे नैसर्विगक न्याय का उल्लंघन नहीं माना जा सक ा।जां) विदनांक 30.11.1997 को प्रारम्भ हुई और उसने अपने उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" मामले का ब)ाव विकया, जबविक अन्य आरोविप कम")ारिरयों ने ब)ाव प्रति विनति का विवकल्प )ुना।ऐसा प्र ी हो ा है विक उसक े लिखलाफ गंभीर आरोपों क े मद्देनजर उसे अपने मामले का ब)ाव करने क े लिलए कोई प्रति विनति नहीं विमल सका। उसने न ो कोई दस् ावेज मांगा और न ही विदनांक 12.5.1998 को इसकी समाविप्त क जां) काय"वाही क े दौरान कोई गवाह/ब)ाव साक्ष्य पेश करने की इच्छा व्यक्त की। जब उसे लगा विक अशिभयोजन ने जां) काय"वाही क े अनुसार पया"प्त सबू पेश विकए हैं जो बैंक को ोखा देने की सासिजश में उनकी संलिलप्त ा साविब करेंगे, ो उसने अपने लिखलाफ विनण"य में विवलंब क े लिलए बैंक क े लिखलाफ विनरा ार आरोप लगाना शुरू कर विदया।

4. इस प्रकार, श्री श्रीवास् व द्वारा उनकी अपील में उठाए गए मिंबदुओं में कोई गुणावगुण नहीं है।अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा विदया गया दण्ड का आदेश उसक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों क े अनुरूप है और अपीलक ा" का क " अन्यर्थीा साविब होने वाले आरोपों क े मद्देनजर सही नहीं है जैसा विक पूव"व 9 प्रस् र में ))ा" की गई है।इस मामले पर पूरी रह से विव)ार करने क े बाद, मेरा विव)ार है विक अनुशासनात्मक प्राति कारी विबना सू)ना क े बखा"स् गी की सजा देने में पूरी रह से न्यायसंग है और श्री श्रीवास् व द्वारा सेवा की अवति को विनलस्थिम्ब मानकर उन्हें पूव" से भुग ान विकए गए विनवा"ह भ‡े क े अलावा वे न और भ‡ों का कोई भुग ान नहीं विकया गया।इसलिलए, मैं अनुशासनात्मक प्राति करण क े आदेश को बरकरार रख ा हूं। दनुसार मैं आदेश दे ा हूं। ”

23. भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 32 या अनुच्छेद 136 क े ह संवै ाविनक न्यायालयों द्वारा विनव"हन विवभागीय /अपील प्राति कारिरयों द्वारा प्रयोग की जाने वाली अनुशासनात्मक जां) क े मामलों में न्यातियक समीक्षा की उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" शविक्त कानून की त्रुविटयों या प्रविjयात्मक त्रुविटयों को सु ारने की सीमाओं से तिघरा हुआ है सिजससे अन्याय या प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का उल्लंघन प्रकट हो ा है और यह एक अपीलीय प्राति कारी क े रूप में गुण-दोर्ष क े आ ार पर मामले क े विनण"य क े समान नहीं है, सिजसकी पहले इस न्यायालय द्वारा विमलनाडु राज्य बनाम टी.वी. वेणुगोपालन[3] और बाद में विमलनाडु सरकार और एक अन्य बनाम ए राजपांतिडयन[4] और इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की बें) द्वारा बी.सी. ) ुव¤दी बनाम भार संघ और अन्य[5] में जां) की जा )ुकी है जो इस प्रकार अव ारिर विकया गया है- “13. अनुशासनात्मक प्राति कारी थ्यों का एकमात्र विनण"यक ा" है। जहां अपील प्रस् ु की जा ी है ो अपीलीय प्राति कारी क े पास साक्ष्य या दंड की प्रक ृ ति का पुनमू"ल्यांकन करने की व्यापक शविक्त हो ी है। एक अनुशासनात्मक जां) में, विवति क साक्ष्य का महत्वपूण" साक्ष्य और उस साक्ष्य पर विनष्कर्ष" प्रासंविगक नहीं हैं। साक्ष्य की पया"प्त ा या साक्ष्य की विवश्वसनीय ा को न्यायालय/विट्रब्यूनल क े समक्ष प्रस् ु करने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है। भार संघ बनाम ए).सी. गोयल [(1964) 4 एससीआर 718] इस न्यायालय ने प्रस् र 728 में यह अव ारिर विकया विक यविद अनुशासविनक प्राति कारी द्वारा प्राप्त विकए गए साक्ष्य पर विव)ार करने पर विनष्कर्ष" दोर्षपूण" है या 3 1994(6) SCC 302 4 1995(1) SCC 216 5 1995(6) SCC 749 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अशिभलेख की दृविष्ट से त्रुविटपूण" है या विबल्कु ल भी साक्ष्य क े आ ार पर नहीं है ो रिरट का उत्प्रेरण लेख जारी विकया जा सक ा है।”

24. इस न्यायालय क े बाद क े विनण"य विहमा)ल प्रदेश राज्य विवद्यु बोड" लिलविमटेड बनाम महेश दविहया6 और हाल ही में इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ द्वारा प्रवीण क ु मार बनाम भार संघ और अन्य[7] में लगा ार इसका पालन विकया गया है।

25. इस प्रकार यह य विकया गया है विक संवै ाविनक न्यायालयों की न्यातियक समीक्षा की शविक्त, विनण"य लेने की प्रविjया का मूल्यांकन है, न विक विनण"य क े गुण। यह उप)ार में विनष्पक्ष ा सुविनति¨ करना है और विनष्कर्ष" की विनष्पक्ष ा सुविनति¨ करना नहीं है।यविद यह विकसी भी रह से विबना विकसी सबू क े प्राक ृ ति क न्याय क े विनयमों क े सार्थी असंग या जां) क े रीक े को विन ा"रिर करने वाले वै ाविनक विनयमों क े उल्लंघन में या जहां अनुशासविनक प्राति कारी द्वारा विनष्कर्ष" पर पहुं)ा गया हो ो न्यायालय/विट्रब्यूनल अपरा ी क े लिखलाफ आयोसिज काय"वाही में हस् क्षेप कर सक ा है।यविद विकसी व्यविक्त क े विनष्कर्ष" क न पहुं) पाने की स्थिस्र्थीति में या जहां अनुशासविनक प्राति कारी द्वारा प्राप्त साक्ष्य पर विव)ार करने पर विनष्कर्ष" दोर्षपूण" है या अशिभलेख की दृविष्ट से त्रुविटपूण" है या विबल्कु ल भी सबू क े आ ार पर नहीं है, ो रिरट का उत्प्रेरण लेख जारी विकया जा सक ा है।संक्षेप में, न्यातियक समीक्षा का दायरा थ्य की बा क े रूप में प्राति करण क े विनण"य की विवश्वसनीय ा की जां) क नहीं बढ़ाया जा सक ा है।

26. जब लोक सेवक क े लिखलाफ कशिर्थी कदा)ार क े लिलए अनुशासनात्मक जां) की जा ी है, ो न्यायालय को जां) और विन ा"रण करना है:(i) ) क्या जां) सक्षम 6 2017(1) SCC 768 7 2020(9) SCC 471 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्राति कारी द्वारा की गई र्थीी; (i) i) ) क्या प्राक ृ ति क न्याय क े विनयमों का अनुपालन विकया जा ा है; (i) i) i) ) क्या विनष्कर्ष" क ु छ साक्ष्य पर आ ारिर हैं और प्राति करण क े पास थ्य या विनष्कर्ष" की खोज क पहुं)ने की शविक्त और अति कार क्षेत्र है।

27. यह सुविव)ारिर है विक जहां जां) अति कारी अनुशासनात्मक प्राति कारी नहीं है, जां) की रिरपोट" प्राप्त होने पर, अनुशासविनक प्राति कारी पूव" द्वारा दज" विकए गए विनष्कर्ष— से सहम हो भी सक ा है और नहीं भी, असहमति क े मामले में, अनुशासविनक प्राति कारी को असहमति क े कारणों को दज" करना होगा और अपरा ी को सुनवाई का अवसर देने क े बाद अपने स्वयं क े विनष्कर्ष— को दज" कर सक ा है यविद अशिभलेख पर उपलब् साक्ष्य ऐसे प्रयोग क े लिलए या विफर मामले को आगे की जां) क े लिलए पया"प्त हैं ो जां) अति कारी को भेजने क े लिलए पया"प्त हैं।

28. यह सत्य है विक साक्ष्य क े महत्वपूण" विनयम विवभागीय जां) काय"वाही पर लागू नहीं हो े हैं।कानून की एकमात्र आवश्यक ा यह है विक अपरा ी क े लिखलाफ आरोप को ऐसे साक्ष्य द्वारा स्र्थीाविप विकया जाना )ाविहए सिजस पर कार"वाई की जा रही हो जो उति) और विनष्पक्ष ा क े सार्थी काय" करने वाला एक उति) व्यविक्त दोर्षी कम")ारी क े लिखलाफ आरोप की गंभीर ा को बरकरार रख े हुए विनष्कर्ष" पर पहुं) सक ा है।यह स) है विक क े वल अनुमान से विवभागीय जां) की काय"वाही में अपरा का विनष्कर्ष" नहीं विनकाला जा सक ा।

29. संवै ाविनक न्यायालय संविव ान क े अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 136 क े ह न्यातियक समीक्षा क े अपने अति कार क्षेत्र का प्रयोग कर े हुए संवै ाविनक न्यायालय, विवभागीय जां) काय"वाही में थ्य क े विनष्कर्ष— क े सार्थी हस् क्षेप नहीं करेगा, सिसवाय इसक े विक विकसी विनष्कर्ष" का समर्थी"न करने क े लिलए या जहां एक विनष्कर्ष" ऐसी है विक कोई भी व्यविक्त यर्थीोति) और विनष्पक्ष ा क े सार्थी काय" नहीं कर उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" सक ा है और इसलिलए जब क विवभागीय प्राति करण द्वारा प्राप्त विनष्कर्ष" का समर्थी"न करने क े लिलए क ु छ सबू हैं, उसी को बनाए रखना होगा।

30. मामले में, संबंति अवति क े दौरान जहां वह (ममफोड"गंज शाखा) विनयुक्त र्थीा, उसक े विवशिभन्न खा ों में फज[9] j े तिडट करक े साव"जविनक न क े दुरुपयोग क े लिलए प्रत्यर्थी9 अपरा ी पर आरोप पत्र ामील विकया गया र्थीा।कु ल विमलाकर, उसक े लिखलाफ गंभीर कदा)ार क े 7 आरोप लगाए गए र्थीे, जो उसने अपने आति कारिरक क "व्य क े विनव"हन में विकए र्थीे और प्रत्यर्थी9 को सुनवाई का अवसर देने क े बाद और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े उति) अनुपालन क े बाद, जां) अति कारी ने अपनी रिरपोट" में प्रत्यर्थी9 अपरा ी द्वारा उठाई गई प्रारंशिभक आपलि‡यों से विनपटने क े दौरान विवशेर्ष रूप से संक े विदया विक जां) रिरपोट" क े विववरण में PEX[1] से PEX28 क े रूप में ति)वि¬ प्रजेन्टिंन्टग अति कारी द्वारा प्रस् ु दस् ावेजों क े सार्थी 22 पृष्ठ प्रत्यर्थी9 अपरा ी क े लिखलाफ लगाए गए आरोपों को स्र्थीाविप करने क े लिलए शाविमल र्थीे सिजसने अपने ब)ाव में न ो कोई दस् ावेज पेश विकया और न ही गवाह। आगे यह भी संक े विदया गया विक प्रत्यर्थी9 ने पूछ ाछ क े दौरान कहा विक वह न ो अशिभयोजन दस् ावेज क े बारे में क ु छ कहना )ाह ा है और न ही वह प्रस् ो ा अति कारी से कोई प्रश्न पूछना )ाह ा है और कभी भी अपनी पसंद क े प्रति विनति क े ब)ाव क े लिलए अनुमति लेने का अनुरो नहीं विकया।

31. विवभागीय जां) क े समापन पर सुनवाई का अवसर देने क े बाद, प्रस् ो ा अति कारी द्वारा प्रस् ु लिललिख नोट क े सार्थी और प्रत्यर्थी9 अपरा ी द्वारा, जां) अति कारी ने जां) क े रिरकॉड" को jमबद्ध विकया और प्रत्येक आरोप क े संदभ" में प्रस् ो ा अति कारी द्वारा पेश विकए गए दस् ावेजी साक्ष्य क े आ ार पर आरोप संख्या 1 में एक विनष्कर्ष" दज" नहीं विकया गया और आरोप संख्या 27 प्रत्यर्थी9 अपरा ी क े लिखलाफ साविब हुआ। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

32. इसे बाद में अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा और )ाज" नंबर 1 क े संदभ" में असहमति क े नोट क े अलावा विफर से देखा गया, अनुशासनात्मक प्राति कारी ने जां) अति कारी द्वारा आरोप संख्या 2 से 7 क े लिलए अपनी रिरपोट" में दज" थ्य क े विनष्कर्ष" को स्वीकार कर लिलया और इसकी प्रर्थीम दृष्टया राय क े सार्थी प्रत्यर्थी9 से अपना स्पष्टीकरण प्रस् ु करने का आह्वान विकया और प्रत्यर्थी9 द्वारा अपने लिललिख उ‡र में उठाई गई आपलि‡यों पर सुनवाई का अवसर प्रदान करने और उन पर कार"वाई करने क े बाद, जां) अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट" में दज" विकए गए विनष्कर्ष" को बरकरार रख े हुए अपने संतिक्षप्त कारण व्यक्त विकए और 24 जुलाई, 1999 क े आदेश द्वारा सेवा से बखा"स् गी का दंड देने की अपनी राय की पुविष्ट की और अपीलीय प्राति कारी ने भी बाद में दायर की जा रही अपील पर विफर से विव)ार विकया और कारण ब ाने क े बाद प्रत्यर्थी9 अपरा ी पर लगाए गए दंड क े आदेश को कायम रखने में थ्य की विनष्कर्ष" की पुविष्ट की।

33. सिजस क " ने उच्च न्यायालय को आक्षेविप विनण"य में यकीन विदलाया वह मूल रूप से दो कारणों से है।पहला, आरोप संख्या 1 क े संदभ" में अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा असहमति दज" विकए जाने से पहले प्रत्यर्थी9 को सुनवाई का उति) अवसर प्रदान नहीं विकया गया र्थीा और इससे उस पर प्रति क ू ल प्रभाव पड़ा है। दूसरा, अनुशासनात्मक प्राति कारी/अपीलीय प्राति कारी ने स्व ंत्र रूप से अनुशासनात्मक जां) क े रिरकॉड" की जां) नहीं की है और विबना सो)े समझे कारण न दे े हुए आदेश पारिर विकया है और प्रत्यर्थी9 अपरा ी पर लगाए गए दंड को अपास् करने क े आक्षेविप विनण"य में उच्च न्यायालय पर लागू हुआ।

34. आरोप संख्या 1 क े संबं में प्रति वादी अपरा ी पर असहमति क े नोट पर ामील न विकए जाने क े संबं में जो कहा गया गया र्थीा उसका संबं है विक यह न्यायालय यह मानने क े लिलए सार पा ा है विक यविद जां) अति कारी द्वारा दज" विकए उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" गए विनष्कर्ष— से सहम नहीं र्थीा ो जां) की रिरपोट" प्राप्त करने पर अनुशासनात्मक प्राति कारी असहमति क े कारणों को दज" करने क े लिलए बाध्य र्थीा और अपरा ी से उसक े अपरा क े विनष्कर्ष" को दज" करने से पहले उसक े स्पष्टीकरण क े लिलए बुलाया जाए और विनर्विववाद रूप से विवति द्वारा विन ा"रिर प्रविjया का पालन नहीं विकया गया र्थीा और इससे प्रत्यर्थी9 को पूवा"ग्रह हुआ है और वास् व में यह प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का उल्लंघन र्थीा।हमारा सुविव)ारिर म है विक जहां क आरोप संख्या 1 क े संदभ" में अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा दज" विकए गए अपरा क े विनष्कर्ष" का संबं है, सिजसे दोर्षी ठहराना न्यायोति) नहीं कहा जा सक ा।

35. लेविकन यह हमें इस कारण से और अति क विहरास में नहीं ले सक ा है विक आरोप संख्या 1 सिजसक े संदभ" में जां) अति कारी द्वारा दज" विकए गये विनष्कर्ष" को अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा उलट विदया गया है, प्रति वादी क े लिखलाफ लगाए गए अन्य आरोपों ()ाज" संख्या 27) से अलग है जो जां) अति कारी द्वारा सिसद्ध पाए गए र्थीे और अनुशासनात्मक/अपील प्राति कारी द्वारा थ्य क े विनष्कर्ष", जो विक प्रत्यर्थी9 अपरा ी द्वारा विवशिभन्न )रणों में प्रस् ु अपने संतिक्षप्त लेख में आपलि‡यों को पूरा करने क े बाद विकया गया र्थीा, की पुविष्ट की गई र्थीी।

36. यविद बखा"स् गी का आदेश अक े ले आरोप संख्या 1 क े विनष्कर्ष— पर आ ारिर र्थीा ो न्यायालय क े लिलए बखा"स् गी क े आदेश को अवै घोविर्ष करना संभव हो ा लेविकन जां) अति कारी द्वारा आरोप संख्या 27 क े संदभ" में अपनी रिरपोट" में अपरा दज" विकए जाने क े विनष्कर्ष" पर और अनुशासनात्मक /अपील प्राति कारी द्वारा की गई पुविष्ट हस् क्षेप क े लिलए उ‡रदायी नहीं र्थीी, और हमारे विव)ार में उन विनष्कर्ष— ने गंभीर अपरा को स्र्थीाविप विकया, जो प्रत्यर्थी9 कम")ारी पर बखा"स् गी क े दंड क े आदेश में हस् क्षेप कर े हुए उच्च न्यायालय द्वारा की गई एक स्पष्ट त्रुविट र्थीी। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

37. यह उड़ीसा राज्य और अन्य बनाम विवद्याभूर्षण महापात्र (उपरोक्त) में इस न्यायालय की संविव ान पीठ क े फ ै सले द्वारा समर्थिर्थी है सिजसमें इसे विनम्नानुसार अव ारिर विकया गया है:- “9. उच्च न्यायालय ने अव ारिर विकया है विक आरोप (1) क े शीर्ष— (सी) और (डी) और आरोप (2) पर विनष्कर्ष— का समर्थी"न करने क े लिलए सबू र्थीे। आरोप 1 (बी) क े संबं में प्रत्यर्थी9 को विट्रब्यूनल द्वारा रिरहा कर विदया गया र्थीा और यह राज्यपाल द्वारा विव)ार विकए जाने क े योग्य नहीं र्थीा। उच्च न्यायालय क े म ानुसार आरोप 1 (ए) और 1 (ई) क े संबं में “प्राक ृ ति क न्याय क े विनयम ारिर नहीं विकये गए र्थीे”।विट्रब्यूनल की सिसफारिरश विनस्संदेह आरोप 1 (ए), 1 (ई), 1 (सी), 1 (डी) और )ाज" (2) पर अपने विनष्कर्ष— पर स्र्थीाविप की गई र्थीी।उच्च न्यायालय की राय र्थीी विक आरोप (1) क े ह दो शीर्ष— पर विनष्कर्ष— को कायम नहीं रखा जा सक ा है, क्योंविक विनष्कर्ष— पर पहुं)ने में विट्रब्यूनल ने प्राक ृ ति क न्याय क े विनयमों का उल्लंघन विकया र्थीा।इसलिलए उच्च न्यायालय ने विनद¤श विदया विक उड़ीसा राज्य की सरकार को यह य करना )ाविहए विक क्या "उन आरोपों क े आ ार पर, बखा"स् गी की सजा को बनाए रखा जाना )ाविहए या विफर कम सजा पया"प्त होगी"।हमारे लिलए यह विव)ार करना आवश्यक नहीं है विक क्या उच्च न्यायालय का यह मानना सही र्थीा विक आरोप 1(ए) और 1(ई) पर विट्रब्यूनल क े विनष्कर्ष" इसक े द्वारा विन ा"रिर कारणों से विवक ृ र्थीे, क्योंविक हमारे फ ै सले में सरकार को सजा क े सवाल पर पुनर्विव)ार करने का विनद¤श देने वाले उच्च न्यायालय क े आदेश को कायम नहीं रखा जा सक ा सिजन कारणों से हम व "मान में विन ा"रिर करेंगे।यविद बखा"स् गी का आदेश अक े ले आरोप 1(ए) और 1(ई) क े विनष्कर्ष— पर आ ारिर र्थीा ो बखा"स् गी क े आदेश को अवै घोविर्ष करने का अति कार न्यायालय क े पास होगा लेविकन जब पहले आरोप और दूसरे आरोप क े पां) शीर्ष— में से दो से उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" संबंति विट्रब्यूनल क े विनष्कर्ष" उच्च न्यायालय द्वारा हस् क्षेप करने क े लिलए उ‡रदायी नहीं पाए गए और उन विनष्कर्ष— ने स्र्थीाविप विकया विक प्रत्यर्थी9 गंभीर अपरा का प्रर्थीम दृष्टया दोर्षी र्थीा, इसलिलए हमारे विव)ार में उच्च न्यायालय को उड़ीसा क े गवन"र को बखा"स् गी क े आदेश पर पुनर्विव)ार करने का विनद¤श देने का कोई अति कार नहीं र्थीा......।"

38. यह इस न्यायालय द्वारा विबन्नी लिलविमटेड बनाम वक " मेन 8 में विनम्नानुसार माना गया र्थीा: ".......यह कहा गया र्थीा विक न्यायालय को यह नहीं मानना )ाविहए र्थीा विक महा प्रबन् क ने क े वल दूसरे आरोप क े आ ार पर बखा"स् गी की सजा दी होगी और इसक े परिरणामस्वरूप यविद यह माना जा ा है विक दो आरोपों में से एक क े आ ार पर सिजस पर यह लगाया गया र्थीा वह अनुरक्षणीय नहीं र्थीी ो सजा बरकरार नहीं रहनी )ाविहए।यह उड़ीसा राज्य बनाम विवद्याभूर्षण महापात्र [एआईआर 1963 एससी 779] में विनण"य क े बाद इसे खारिरज कर विदया गया र्थीा, जहां यह कहा गया र्थीा विक यविद अनुच्छेद 311 क े ह जां) क े आदेश का समर्थी"न विकसी भी विनष्कर्ष" पर विकया जा सक ा है, ो यह दुरा)रण है सिजसक े लिलए कानूनी रूप से सजा दी जा सक ी है, यह विव)ार न्यायालय क े लिलए नहीं है विक क्या उस आ ार को ही प्रश्नग दण्ड अति रोविप करने क े अति कार क े सार्थी मूल्यांकन विकया गया होगा। हमारे विव)ार में इस मामले क े थ्यों क े लिलए यह सिसद्धां लागू नहीं हो सक ा है।यद्यविप जां) अति कारी ने वास् व में पाया विक प्रत्यर्थी9 ने वेयरहाउस मास्टर क े प्रति अभŽ व्यवहार विकया र्थीा, वह इस विनष्कर्ष" पर नहीं पहुं)ा विक एक अवसर पर ऐसी अनुशासनहीन ा बखा"स् गी का आदेश देने क े लिलए पया"प्त र्थीा...”

39. विफर भी, सवरन सिंसह और एक अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य[9] में, इस न्यायालय ने यह ारिर विकया: 8 1972(3) SCC 806 9 A) IR 1976 SC 232 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

19. इसे देख े हुए, आयुक्त क े आदेश में क ु छ अप्रासंविगक मामलों की कमी या संदभ" ने मामले क े विनण"य को या ो अपीलीय या पुनरीक्षण स् र पर गुणदोर्ष क े आ ार पर प्रभाविव नहीं विकया र्थीा।प्रस् ाव क े लिलए अति कार है विक जहां एक घरेलू न्यायाति करण का आदेश कई आ ारों कु छ प्रासंविगक और मौजूदा, और अन्य अप्रासंविगक और अस्थिस् त्वहीन का संदभ" दे ा है, आदेश कायम रहेगा यविद न्यायालय सं ुष्ट है विक प्राति कारी ने प्रासंविगक और मौजूदा आ ारों क े आ ार पर आदेश पारिर विकया होगा, और अप्रासंविगक या गैर-मौजूद आ ारों का बविहष्कार अंति म विनण"य को प्रभाविव नहीं कर सक ा र्थीा [देखें उड़ीसा राज्य बनाम विवद्याभूर्षण महापात्र [एआईआर 1963 एससी 779]।

40. संविव ान पीठ ने स्पष्ट रूप से यह विन ा"रिर विकया है विक आरोप साविब होने क े बाद भी, दंड लगाने का औति)त्य साविब हो सक ा है, न्यायालय न्यातियक समीक्षा की अपनी शविक्त का प्रयोग नहीं कर सक ा है।

41. जहां क उच्च न्यायालय में यह क " विदया गया है विक हमारे विव)ार में, अनुशासनात्मक/अपील प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश एक नॉन-स्पीमिंकग आदेश र्थीा जो विव)ार क े अप्रयोग क े सार्थी पारिर विकया गया र्थीा जो अशिभलेख पर उपलब् सामग्री द्वारा थ्यात्मक रूप से समर्थिर्थी नहीं है।

42. इस मामले में, हालांविक अनुशासनात्मक /अपील प्राति कारी को आदेश विदनांक 24 जुलाई, 1999 को पारिर कर े समय विनण"य पारिर नहीं करना )ाविहए र्थीा, अनुशासनात्मक प्राति कारी ने जां) क े रिरकॉड" पर ध्यान विदया र्थीा, 22 मई, 1999 की स्वविनविह जां) रिरपोट" और उनकी प्रर्थीम दृष्टया 29 जून, 1999 की राय सविह, जो प्रत्यर्थी9 कम")ारी को उपलब् कराया गया र्थीा और दोर्षी द्वारा उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उठाई गई लिललिख आपलि‡यों को सुनने और पूरा करने का उति) अवसर देने क े बाद आदेश विदनांक 24 जुलाई, 1999 क े द्वारा बखा"स् गी क े अपरा और दंड क े विनष्कर्ष" को बरकरार रखने क े लिलए अपने संतिक्षप्त कारण व्यक्त विकये।इसक े अलावा, प्रत्यर्थी9 अपरा ी द्वारा की गई अपील की जां) अपीलीय प्राति कारी द्वारा की गई क्योंविक यह प्रस् र 3(i) ) से (vi) i) i) ) क े ह प ा )ल ा है विक जां) अति कारी ने अपनी रिरपोट" में प्रत्यर्थी9 कम")ारी को सेवा से बखा"स् करने क े आदेश विदनांक 15 नवंबर 1999 द्वारा खारिरज विकए गए अपरा क े विनष्कर्ष" को बरकरार रखा है। विवस् ृ ))ा" क े बाद, हम अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी द्वारा पारिर आदेशों को अपास् कर े हुए अपने न्यातियक विनण"य क े ह उच्च न्यायालय द्वारा दज" विकये गए विनष्कर्ष" को स्वीकार करने में असमर्थी" हैं, जो अपास् होने योग्य है।

43. इससे पहले विक हम विनष्कर्ष" विनकालें, हमें इस बा पर जोर देने की आवश्यक ा है विक बैंमिंकग व्यवसाय में पूण" समप"ण, सत्यविनष्ठा और ईमानदारी प्रत्येक बैंक कम")ारी क े लिलए एक अविनवाय" श " है।इसक े लिलए कम")ारी को अच्छे आ)रण और अनुशासन बनाए रखने की आवश्यक ा हो ी है और वह जमाक ा"ओं और ग्राहकों क े पैसे से संबंति हो ा है और यविद इस पर ध्यान नहीं विदया जा ा है ो जन ा/जमाक ा"ओं का विवश्वास प्रभाविव होगा।इसी अति रिरक्त कारण से, हमारी राय है विक उच्च न्यायालय ने प्रति वादी की बखा"स् गी क े आदेश 24 जुलाई, 1999 विदनांविक को अपास् करने में एक स्पष्ट त्रुविट की है, सिजसकी पुविष्ट विवभागीय अपील में विदनांक 15 नवंबर, 1999 क े आदेश द्वारा की गई है।

44. परिरणामस्वरूप, अपील सफल होने क े लायक है और दनुसार अनुमति दी जा ी है और उच्च न्यायालय क े विदनांक 13 सिस ंबर, 2018 क े विनण"य को ए द्द्वारा अपास् विकया जा ा है। कोई लाग नहीं। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

45. लंविब आवेदन (ओं), यविद कोई हो, का विनस् ारण विकया जा ा है।..............................................… (न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव)..............................................… (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता)..............................................… (न्यायमूर्ति अजय रस् ोगी) नई विदल्ली 05 जनवरी, 2021 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विjयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"