Full Text
े सर्वो च्च न्यायालय में
सिसविर्वोल अपीलीय क्षेत्राधि कार
सिसविर्वोल अपील संख्या 3894/2020
राजस्थान राज्य और अन्य अपीलकता)(ओ)
बनाम
लर्वो क
ु श मीना प्रधितर्वोादी(ओ)
विनर्ण)य
संजय विकशन कौल, जे.
JUDGMENT
1. विर्वोर्वोादास्पद मुद्दा जो विर्वोचार क े लिलए उठता है र्वोह यह है विक क्या संदेह का लाभ,सिजसक े परिरर्णामस्र्वोरूप भारतीय दंड संविहता [आईपीसी] की ारा 302,323,341/34 क े तहत आरोविपत एक मामले में प्रधितर्वोादी को बरी कर विदया गया है, प्रधितर्वोादी क े लिलए एक कांस्टेबल क े रूप में राजस्थान पुलिलस सेर्वोा में शाविमल होने का अर्वोसर पैदा कर सकता है।
2. प्रधितर्वोादी और तीन अन्य पर भारतीय दंड संविहता क े उपरोक्त प्रार्वो ानों का आरोप लगाया गया था और अधितरिरक्त सत्र न्याया ीश (फास्ट ट्रैक), लक्ष्मर्ण गढ़, सिजला अलर्वोर, राजस्थान क े समक्ष मुकदमा चलाया गया था। घटना विदनांक 6.10.2008 की शाम लगभग 6 बजे की है, जब शिशकायतकता) बाबूलाल क े अनुसार, जगदीश और दयाराम नाम क े व्यविक्त ट्रैक्टर में सर्वोार होकर जंगल पाटन में एक विर्वोर्वोाविदत खेत की जुताई करने आए थे. बाबूलाल की मौसी तोफली ने उन्हें जमीन जोतने से मना विकया और जाविहर तौर पर र्वोे खेत में ही रुक गई ं। तभी ट्रैक्टर चालक जगदीश ने ट्रैक्टर को भगाकर तोफली क े ऊपर चढ़ा विदया। शिशकायतकता) बाबूलाल एक राजू, ओम प्रकाश 2021 INSC 208 और विदनेश क े साथ उसक े पास पहुंचे, लेविकन दयाराम, लर्वो क ु श (प्रधितर्वोादी), बोदान और जगदीश द्वारा उन्हें पीटा गया और चाक ू से र्वोार विकए गए। तोफली को बुग्गी में भरकर अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोवि^त कर विदया। उक्त रिरपोट) क े आ ार पर, पीएस खेड़ली ने आईपीसी की ारा 302,341,323,34 क े तहत प्राथविमकी संख्या 255/2008 दज) विकया और जांच शुरू की। जांच पूरी होने पर, सभी अशिभयुक्तों क े लिखलाफ चाज)शीट नंबर 1/2009 को न्याधियक मसिजस्ट्रेट, कठूमार की अदालत में दायर विकया गया था, जहां से इसे अधितरिरक्त सत्र न्याया ीश, लक्ष्मर्ण गढ़ की अदालत में सुपुद) विकया गया था। आरोप तय विकए गए और सभी आरोविपयों ने आरोपों से इनकार विकया।
3. यह ध्यान रखना प्रासंविगक है विक मुकदमे क े दौरान घायल व्यविक्तयों, बाबूलाल, ओम प्रकाश और राजू उफ ) राजेश ने अदालत की अनुमधित प्राप्त की और आईपीसी की ारा 341,323 क े तहत आरोपी व्यविक्तयों क े पक्ष में समझौता दायर विकया, जो स्र्वोीक ृ त था लेविकन स्र्वोाभाविर्वोक रूप से, आईपीसी की ारा 302/34 क े तहत अपरा ों क े लिलए कोई समझौता नहीं हो सकता था। उन आरोपों में मुकदमा चलता रहा और यह विबल्क ु ल स्पष्ट है विक समझौते क े मद्देनजर, घायलों सविहत अशिभयोजन पक्ष क े सभी गर्वोाह मुकर गए। अशिभयोजन पक्ष क े मामले क े आ ार पर, विर्वोद्वान न्याया ीश ने विनर्ण)य विदनांक 01.05.2009 क े संदभ) में कहा विक "अशिभयोजन अशिभयुक्त व्यविक्तयों क े लिखलाफ उधिचत संदेह से परे मामले को साविबत करने में विर्वोफल रहा है"।
4. राजस्थान पुलिलस अ ीनस्थ सेर्वोा विर्वोविनयम, 1989 क े भाग III में विनविहत प्रार्वो ानों क े तहत 14.07.2013 को कांस्टेबल की भतk क े लिलए एक अधि सूचना जारी की गई थी, सिजसमें कांस्टेबल क े 12178 पदों पर आर्वोेदन करने की प्रविlया विन ा)रिरत की गई थी। विनयुविक्त क े लिलए अयोग्यता क े लिलए प्रदान विकए गए विर्वोज्ञापन क े पैरा (ix)। प्रासंविगक खंड (ix) विनम्नानुसार पढ़ता है- "(ix) सिसविर्वोल अपील संख्या 782/2004 राज्य सरकार और अन्य बनाम मोहम्मद सलीम विदनांक 10.12.2009 में माननीय सर्वो च्च न्यायालय क े विनर्ण)य क े अनुसार,पुलिलस महाविनदेशक, राजस्थान सक ु) लर संख्या 1687 विदनांक 29.4.1995 को र्वोै माना जाता है। उक्त विनर्ण)य क े अनुपालन में, क े र्वोल र्वोही उम्मीदर्वोार राजस्थान पुलिलस की भतk में उपस्थिस्थत होने क े योग्य होंगे, सिजन्हें नैधितक अ मता, हिंहसक गधितविर्वोधि यों क े अपरा क े लिलए दो^ी नहीं ठहराया गया है और अदालत द्वारा सम्मानपूर्वो)क बरी नहीं विकया गया है।"
5. पूर्वो क्त यह विदखाएगा विक अयोग्यता नैधितक अ मता और हिंहसक गधितविर्वोधि यों क े अपरा ों क े लिलए "अदालत द्वारा सम्मानजनक रूप से बरी नहीं"क े रूप में योग्यता को संचालिलत करेगी। प्रधितर्वोादी ने इस भतk में भाग लिलया और ऐसा प्रतीत होता है विक र्वोह भतk प्रविlया में सफल रहा। हालाँविक, पुलिलस अ ीक्षक द्वारा विकए गए चरिरत्र पूर्वो)र्वोृत्त सत्यापन क े आ ार पर उन्हें विदनांक 04.08.2015 का एक पत्र जारी विकया गया था। सिजला अलर्वोर, उप महाविनरीक्षक पुलिलस, सुरक्षा, राजस्थान, जयपुर, जहां उपरोक्त मामले क े पहलू पर गौर विकया गया (यह एक स्र्वोीक ृ त स्थिस्थधित है विक प्रधितर्वोादी ने इस तथ्य का खुलासा विकया था और क ु छ छ ु पाया नहीं था)। उपरोक्त क े मद्देनजर प्रधितर्वोादी को अपात्र पाया गया। ऑपरेविटर्वो भाग विनम्नानुसार है: "आपक े लिखलाफ गंभीर आपराधि क अपरा क े कारर्ण, पुलिलस मुख्यालय क े परिरपत्र संख्या 1687 विदनांक 29.4.1995 क े संदभ) में और साथ ही सिसविर्वोल अपील संख्या 782/04 में माननीय सर्वो च्च न्यायालय क े आदेशों क े अनुपालन में, आपको पात्र नहीं पाए जाने पर विनयुक्त नहीं विकया जा रहा है।"
6. उपरोक्त आदेश को एस.बी. सिसविर्वोल रिरट याधिचका संख्या 2391/2016 में राजस्थान उच्च न्यायालय क े समक्ष चुनौती दी गई थी और विदनांक 11.11.2016 क े विनर्ण)य क े संदभ) में रिरट याधिचका की अनुमधित दी गई थी, प्रधितर्वोादी-पुलिलस अ ीक्षक, उदयपुर को मामले को र्वोापस भेजकर आदेश की प्राविप्त की तारीख से तीन महीने की अर्वोधि क े भीतर कानून क े अनुसार प्रधितर्वोादी की उम्मीदर्वोारी क े संबं में एक नया उधिचत आदेश पारिरत करने क े लिलए और परिरर्णाम का पालन करेंगे।
7. तद्नुसार विदनांक 23.05.2017 को सिजला पुलिलस अ ीक्षक, उदयपुर द्वारा नये आदेश पारिरत विकये गये। यह राय थी विक प्रधितर्वोादी क े लिखलाफ आरोप मामूली प्रक ृ धित क े नहीं थे, बस्थिल्क गंभीर अपरा थे और उम्मीदर्वोार को अदालत ने सम्मानपूर्वो)क बरी नहीं विकया था। प्रश्नगत परिरपत्र क े मद्देनजर एक बार विफर प्रधितर्वोादी को अपात्र ठहराया गया।
8. दूसरे दौर की शुरुआत एस.बी. सिसविर्वोल रिरट याधिचका संख्या 8323/2017 में विदनांक 23.05.2017 क े पूर्वो क्त आदेश की अर्वोहेलना क े साथ हुई। विर्वोद्वान एकल न्याया ीश विदनांक 14.05.2018 क े आदेश क े संदभ) में, यह माना गया विक न्यायालय को यह विर्वोश्वास नहीं था विक प्राधि करर्ण ने न्यायालय द्वारा विदनांक 11.11.2016 क े आदेश द्वारा विदए गए विनद•शों क े अनुसार अपना विदमाग लगाया था। इस संबं में विदनांक 28.03.2017 क े एक परिरपत्र पर भरोसा विकया गया और यह पाया गया विक प्रधितर्वोादी पहली श्रेर्णी में आते हैं।
9. हम देख सकते हैं विक परिरपत्र विनर्विर्वोर्वोाद रूप से भतk प्रविlया क े बाद का है। जैसा भी हो सकता है, परिरपत्र का प्रासंविगक भाग विनम्नानुसार है: "विर्वो^य: आपराधि क मामलों क े तथ्यों को छ ु पाने/आपराधि क मामलों में शाविमल होने क े कारर्ण विनयुविक्त से र्वोंधिचत उम्मीदर्वोारों क े संबं में। XXX XXXXXXX विनम्नलिललिखत श्रेर्णी क े क े र्वोल र्वोही अभ्यथk विनयुविक्त क े पात्र पाये जाते हैं, सिजन्होंने आर्वोेदन पत्र या चरिरत्र सत्यापन प्रपत्र (दोनों या उनमें से विकसी एक) में आपराधि क मामले का उल्लेख विकया हो:-
1. जांच क े बाद आपराधि क मामले का दो^ी नहीं पाया गया, अंधितम/क्लोजर रिरपोट) अनुमोदन क े लिलए प्रस्तुत की गई।
2. न्यायालय द्वारा बरी विकया गया (संदेह का लाभ देकर या साक्ष्य क े अभार्वो में)।
3. समझौते क े आ ार पर बरी/धिडस्चाज)।
4. अपरा ी परिरर्वोीक्षा अधि विनयम की ारा 12 का लाभ, कधितपय ाराओं में दो^ सिसद्ध होने पर (दो^सिसधिद्ध विकसी दण्डमुविक्त पर आ ारिरत नहीं है/राज्य सेर्वोा/भविर्वोष्य क े जीर्वोन पर कोई प्रधितक ू ल प्रभार्वो नहीं है) का लाभ विदया गया है।
5. विकशोर न्याय अधि विनयम की ारा 15 (1) (ए) क े तहत दो^ी ठहराया गया और लाभ विदया गया।
10. प्रधितर्वोादी क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता का यह कहना है विक उक्त परिरपत्र लागू होता है और उक्त परिरपत्र क े संदभ) में ऐसे मामले भी जहां संदेह का लाभ देकर बरी विकया जाता है, उम्मीदर्वोार को अयोग्य नहीं ठहराएगा।
11. उक्त आदेश से व्यशिथत अपीलकता)/राज्य ने खंडपीठ क े समक्ष डी.बी. विर्वोशे^ अपील रिरट संख्या 373/2019 दायर की। धिडर्वोीजन बेंच ने कहा विक चूंविक आरोपी व्यविक्त को अपरा करने से जोड़ने र्वोाला कोई पुख्ता सबूत नहीं विमला, इसलिलए प्रधितर्वोादी एक आपराधि क मामले में शाविमल होने क े बार्वोजूद, एक कांस्टेबल क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए अयोग्य नहीं था। इसने आगे कहा विक चूंविक प्रधितर्वोादी को संदेह का लाभ विदया गया था और उस पहलू पर विर्वोद्वान एकल न्याया ीश विदनांक 11.11.2016 क े पहले क े फ ै सले में विर्वोचार विकया गया था, इसलिलए उक्त पहलू पर गौर नहीं विकया जा सकता है। इसक े साथ, अपील खारिरज कर दी गई।
12. र्वोत)मान अपील में नोविटस जारी होने क े बाद, विदनांक 27.11.2020 को अनुमधित प्रदान की गई थी और विदनांक 03.02.2020 को पारिरत अंतरिरम आदेश में आक्षेविपत आदेश क े विlयान्र्वोयन पर रोक लगा दी गई थी। पक्षकारों क े लिलए विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने हमें पूर्वो क्त तथ्यात्मक मैविट्रक्स क े माध्यम से ले लिलया है जैसा विक हमारे द्वारा पहले ही लिलखा जा चुका है। जो प्रश्न उठता है र्वोह यह है विक क्या पूर्वो क्त तथ्यात्मक मैविट्रक्स में और इस न्यायालय क े विर्वोशिभन्न न्याधियक विनर्ण)यों को ध्यान में रखते हुए, क्या प्रधितर्वोादी विनयुविक्त क े लिलए अपात्र होगा अथा)त क्या अपीलकता) प्राधि कारी द्वारा विदनांक 23.05.2017 को पारिरत बाद क े मौलिखक आदेश में हस्तक्षेप विकया जा सकता है या नहीं।
13. अपीलकता) क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने अर्वोतार सिंसह बनाम भारत संघ और अन्य में मौलिलक विनर्ण)य का उल्लेख विकया है जहां इस न्यायालय की तीन जजों की खंडपीठ ने ऐसे मामलों से उत्पन्न होने र्वोाले पहलुओं पर विर्वोस्तार से विर्वोचार विकया है और विर्वोशिभन्न मापदंडों को विन ा)रिरत विकया है। विनष्क^Œ को पैरा 38 में संक्षेविपत विकया गया है।
14. प्रासंविगक संधिक्षप्त विनष्क^) को विनम्नानुसार पुन: प्रस्तुत करना पया)प्त होगा: "38.xxx xxx xxx 38.3.विनयोक्ता विनर्ण)य लेते समय कम)चारी पर लागू सरकारी आदेशों/विनद•शों/विनयमों को ध्यान में रखेगा। 38.4.3.यविद तकनीकी आ ार पर नैधितक अ मता या जघन्य/गंभीर प्रक ृ धित क े अपरा से जुड़े मामले में दो^मुविक्त पहले ही दज) की जा चुकी है और यह स्र्वोच्छ दो^मुविक्त का मामला नहीं है, या उधिचत संदेह का लाभ विदया गया है, विनयोक्ता पूर्वो)र्वोृत्त क े रूप में उपलब् सभी प्रासंविगक तथ्यों पर विर्वोचार कर सकता है, और कम)चारी की विनरंतरता क े संबं में उधिचत विनर्ण)य ले सकता है।"
15. यह बताया गया है विक इस विनर्ण)य में उत्पन्न होने र्वोाली विर्वोशिभन्न बारीविकयों पर बाद क े विनर्ण)यों में भी विर्वोचार विकया गया है। क ें द्र शासिसत प्रदेश में, चंडीगढ़ प्रशासन और अन्य र्वोी. प्रदीप क ु मार और इस अदालत क े दो न्याया ीशों की खंडपीठ ने "माननीय बरी"अशिभव्यविक्त पर विर्वोचार विकया। यह राय थी विक एक आपराधि क मामले में बरी होना संबंधि त उम्मीदर्वोार की उपयुक्तता क े लिलए विनर्णा)यक नहीं था और यह हमेशा एक दो^मुविक्त या विनर्वो)हन से अनुमान नहीं लगाया जा सकता है विक व्यविक्त गलत तरीक े से शाविमल था या उसका कोई आपराधि क इधितहास नहीं था। इस प्रकार, जब तक विक यह एक सम्मानजनक बरी न हो, उम्मीदर्वोार मामले क े लाभ का दार्वोा नहीं कर सकता। विनस्संदेह, पुलिलस महाविनरीक्षक बनाम समुशिथराम में इस न्यायालय क े पहले क े फ ै सले पर भरोसा करते हुए यह उल्लेख विकया गया था विक हालांविक यह परिरभावि^त करना मुस्थि•कल था विक "सम्मानजनक बरी"अशिभव्यविक्त का क्या अथ) है, एक अशिभयुक्त जो अशिभयोजन साक्ष्य और अशिभयोजन पक्ष क े पूर्ण) विर्वोचार क े बाद बरी हो गया है, अशिभयुक्त क े लिखलाफ लगाए गए आरोपों को साविबत करने में बुरी तरह विर्वोफल रहा है, यह संभर्वोतः कहा जा सकता है विक अशिभयुक्त को सम्मानपूर्वो)क बरी कर विदया गया था। इस संदभ) में, इस न्यायालय द्वारा यह विर्वोशे^ रूप से देखा गया है विक पुलिलस सेर्वोा में प्रर्वोेश क े लिलए एक उम्मीदर्वोार को अच्छे चरिरत्र, सत्यविनष्ठा और स्र्वोच्छ पूर्वो)र्वोृत्त का होना आर्वो•यक है। अंत में, यह माना गया विक एक आपराधि क मामले में दो^मुविक्त स्र्वोत: ही एक उम्मीदर्वोार को पद पर विनयुविक्त क े लिलए अधि क ृ त नहीं करती है, क्योंविक एक आपराधि क पृष्ठभूविम र्वोाला व्यविक्त इस श्रेर्णी में विफट नहीं होगा।
16. एक समान तथ्यात्मक परिरदृ•य में एक विर्वोज्ञापन क े अनुसरर्ण में सूबेदारों, प्लाटून कमांडेंटों और पुलिलस विनरीक्षकों क े पदों पर भतk की हद तक और उम्मीदर्वोारों में से एक को अयोग्य घोवि^त विकए जाने क े परिरर्णामस्र्वोरूप मध्य प्रदेश राज्य और बनाम अशिभजीत सिंसह पंर्वोार अन्य में दो न्याया ीशों की बेंच द्वारा इस न्यायालय का एक विनर्ण)य आया। तथ्यात्मक संदभ) में यह कहना पया)प्त होगा विक र्वो^) 2006 में दज) एक मामला उस तारीख को लंविबत था जब हलफनामा प्रस्तुत विकया गया था और चार विदनों क े भीतर मूल शिशकायतकता) और प्रधितर्वोादी क े बीच समझौता हो गया था। राजीनामे क े लिलए आर्वोेदन विदया था और उसे स्र्वोीकार विकया गया क्योंविक यह आईपीसी की ारा 294, 325/34, 323, 506 भाग II क े तहत अपरा ों से संबंधि त था और पहले क े विनर्ण)यों में प्रधितपाविदत कानूनी सिसद्धांत की चचा) पर, यह राय दी गई विक पुलिलस आयुक्त बनाम मेहर सिंसह क े मामले में पहले क े फ ै सले में यह राय थी विक इस प्रस्तार्वो क े बारे में कोई संदेह नहीं है विक एक उम्मीदर्वोार द्वारा खुलासा विकए जाने क े बाद भी, विनयोक्ता उम्मीदर्वोार क े पूर्वो)र्वोृत्त और उपयुक्तता पर विर्वोचार करने का अधि कार होगा। इस संदभ) में, यह आयोसिजत विकया गया था, विनयोक्ता उस जॉब प्रोफाइल को ध्यान में रखने का हकदार है सिजसक े लिलए चयन विकया गया है, उम्मीदर्वोार क े लिखलाफ लगाए गए आरोप की गंभीरता और क्या प्रश्न में दो^मुविक्त एक सम्मानजनक दो^मुविक्त थी या क े र्वोल संरचना क े परिरर्णामस्र्वोरूप संदेह क े लाभ क े आ ार पर थी। हम यह भी जोड़ सकते हैं विक एक पहलू जो देखा गया था जो र्वोत)मान मामले में स्र्वोीक ृ त है, इसमें ऐसे विकसी भी सुझार्वो की अनुपस्थिस्थधित है विक विनर्ण)य दुभा)र्वोना से प्रेरिरत था या बाद में लागू परिरपत्र क े मुद्दे को छोड़कर अन्य कारर्णों से प्रभाविर्वोत हुआ था।
17. अविनल भारद्वाज बनाम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और अन्य का भी संदभ) विदया गया था, जहां एक बार विफर इस न्यायालय की दो न्याया ीशों की खंडपीठ ने पाया विक उम्मीदर्वोार क े लिखलाफ आईपीसी की ारा 498 ए, 406, 34 क े तहत एक आपराधि क मामला दज) विकया गया था। पत्नी द्वारा दायर एक शिशकायत पर लंविबत विर्वोचार और इस प्रकार, उम्मीदर्वोारी की अस्र्वोीक ृ धित को अस्थिस्थर नहीं कहा जा सकता है। ऐसा कहते हुए, न्यायालय ने यह भी कहा विक यह दलील विक नाम को हटाने से उम्मीदर्वोार क े लिखलाफ कलंक लग जाएगा, विटकाऊ नहीं था क्योंविक उम्मीदर्वोार पहले ही बरी हो चुका था।
18. दूसरी ओर, प्रधितर्वोादी क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने क ु छ अन्य विनर्ण)यों का भी उल्लेख करते हुए तथ्यात्मक मैविट्रक्स पर क ु छ विनर्ण)यों में अंतर करने की मांग की। इस संबं में, उन्होंने पुलिलस महाविनरीक्षक बनाम एस. समुशिथराम (उपरोक्त) क े फ ै सले का उल्लेख विकया, सिजसमें कहा गया था विक पैरा 24 में "सम्माननीय बरी"का क्या अथ) है, यह तक ) देने क े लिलए विक इसे ठीक से परिरभावि^त करना मुस्थि•कल है विक "सम्माननीय दो^मुविक्त"अशिभव्यविक्त का क्या अथ) है। अधि र्वोक्ता ने जोहिंगदर सिंसह बनाम राज्य (चंडीगढ़ और अन्य संघ शासिसत प्रदेश) में एक फ ै सले का संदभ) देने की भी मांग की। इस मामले में उम्मीदर्वोार क े लिखलाफ आईपीसी की ारा 148, 149, 323, 325 और 307 क े तहत आरोप लगाए गए थे, जहां विर्वोचारर्ण न्यायालय ने कहा था विक अशिभयोजन पक्ष उसक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों को साविबत करने में बुरी तरह विर्वोफल रहा है, चूंविक शिशकायतकता) और साथ ही घायल च•मदीद हमलार्वोरों की पहचान करने में विर्वोफल रहे। इसे सम्मानजनक दो^मुविक्त का मामला माना गया और इस प्रकार, उम्मीदर्वोार को राहत दी गई।
19. प्रधितर्वोादी ने मोहम्मद इमरान बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य मामले में इस अदालत क े विदनांक 12.10.2018 क े फ ै सले का भी हर्वोाला विदया, जहां उम्मीदर्वोार पर परीक्षा की मंजूरी से बहुत पहले आईपीसी की ारा 363, 366, 34 क े तहत आरोप लगाए गए थे। उस संदभ) में, यह देखा गया विक चूँविक हमारे देश में रोजगार क े अर्वोसर दुल)भ र्वोस्तु थे, बड़ी संख्या में आकांक्षी आर्वोेदन कर रहे थे, न्याधियक सेर्वोा में विनयुविक्त से इनकार करने क े लिलए नैधितक अ मता का कोई यांवित्रक या अलंकारिरक मंत्र नहीं हो सकता था, लेविकन बहुत क ु छ मामले क े तथ्यों पर विनभ)र करेगा।
20. र्वोत)मान मामले में कशिथत अपरा और भतk प्रविlया क े बीच एक समय व्यतीत होने क े पहलू पर यह तक ) देने क े लिलए जोर विदया गया था विक प्रधितर्वोादी की आयु लगभग 19 र्वो^) थी, जब घटना घटी और अब क ु छ र्वो^Œ क े बाद उसने एक प्रधितयोगी परीक्षा में सफल होकर अपने जीर्वोन को आगे बढ़ाया।
21. प्रधितशपथ पत्र में राजस्थान उच्च न्यायालय क े क ु छ विनर्ण)यों का भी संदभ) विदया गया था, सिजसमें संदेह का लाभ प्राप्त करने क े आ ार पर उम्मीदर्वोारों को राहत दी गई थी।
22. अंत में, इस न्यायालय द्वारा SLP[C]No.15351/2020 विदनांक 21.01.2020 में पारिरत एक आदेश का संदभ) विदया गया था, सिजसमें एक एसएलपी को एक उम्मीदर्वोार की विनयुविक्त क े विनद•श क े लिखलाफ खारिरज कर विदया गया था, जहां आदेश एक आपराधि क मामले में उम्मीदर्वोारों को संदेह का लाभ दे रहा था। हालाँविक, हम ध्यान दें विक सबसे पहले, विक यह एक आदेश है और एक विनर्ण)य नहीं है और दूसरी बात, यह स्पष्ट रूप से कहा गया है विक बखा)स्तगी "मामले क े विदए गए तथ्यों और परिरस्थिस्थधितयों में"थी।
23. पूर्वो क्त कानूनी स्थिस्थधित क े परिरप्रेक्ष्य में र्वोत)मान मामले में विर्वोर्वोाद की जांच करते हुए, यह ध्यान रखना महत्र्वोपूर्ण) है विक इस न्यायालय का दृविष्टकोर्ण आरोविपत अपरा की प्रक ृ धित और उसक े परिरर्णाम पर विनभ)र करता है। बरी होने का मात्र तथ्य पया)प्त नहीं होगा, बस्थिल्क यह इस बात पर विनभ)र करेगा विक क्या यह सबूतों क े पूर्ण) अभार्वो क े आ ार पर एक साफ बरी है या आपराधि क न्यायशास्त्र में मामले को उधिचत संदेह से परे साविबत करने की आर्वो•यकता है, र्वोह पैरामीटर पूरा नहीं विकया गया है, आरोपी को संदेह का लाभ विदया गया है। इसमें कोई संदेह नहीं है विक र्वोत)मान मामले क े तथ्यों में, मृतक मविहला क े ऊपर ट्रैक्टर चलाने र्वोाला व्यविक्त अन्य सह-अशिभयुक्तों में से एक था, लेविकन यहां प्रधितर्वोादी सविहत अन्य को सौंपी गई भूविमका महज एक तमाशबीन या साइट पर मौजूद रहने की नहीं थी। प्रधितर्वोादी सविहत अन्य सभी सह-अशिभयुक्तों क े लिखलाफ चाक ु ओं से हमला करने का आरोप लगाया गया था।
24. हम यह भी नोविटस कर सकते हैं विक यह एक स्पष्ट मामला है जहां विर्वोर्वोाद को विनपटाने का प्रयास विकया गया था, हालांविक जो नौकरी को ध्यान में रखकर नहीं था। विर्वोचारर्ण न्यायालय क े फ़ ै सले क े र्वोर्ण)न से यह स्पष्ट है विक शमनीय अपरा ों को पहले विर्वोचारर्ण क े दौरान शमन विकया गया था, लेविकन चूंविक आईपीसी की ारा 302/34 क े तहत अपरा को शमन नहीं विकया जा सका, इसलिलए विर्वोचारर्ण जारी रखा गया और उस अपरा क े आरोप को खारिरज कर विदया क्योंविक गर्वोाह मुकर गए थे। हमारा विर्वोचार है विक यह शायद ही एक स्र्वोच्छ बरी की श्रेर्णी में आ सकता है और न्याया ीश इस तरह क े बरी होने क े संबं में संदेह क े लाभ की शब्दार्वोली का उपयोग करने में सही थे।
25. उपरोक्त विनकाले गए प्रासंविगक पैरामीटर पर अर्वोतार सिंसह क े मामले (सुप्रा) में विनर्ण)य स्पष्ट रूप से विन ा)रिरत करता है विक अपरा की जघन्य या गंभीर प्रक ृ धित क े संबं में बरी होना उधिचत संदेह क े लाभ पर आ ारिरत है, जो उम्मीदर्वोार को योग्य नहीं बना सकता है।
26. हम प्रधितर्वोादी क े लिलए विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता की प्रस्तुधित को भी नोट कर सकते हैं विक अर्वोतार सिंसह क े मामले (सुप्रा) में पैरा 38.[3] क े अनुसार, विनयोक्ता को विनर्ण)य लेने क े समय कम)चारी पर लागू सरकारी आदेशों/विनद•शों/विनयमों को ध्यान में रखना होगा। उनका कहना है विक विदनांक 28.03.2017 का सक ु) लर लागू होगा या नहीं, यह मुद्दा विर्वोद्वान न्याया ीश क े विदनांक 14.05.2018 क े पहले क े आदेश क े मद्देनजर पूर्ण) है। उसने आगे तक ) विदया है विक, विकसी भी मामले में, परिरपत्र लागू हो गया था और अर्वोतार सिंसह क े मामले (उपरोक्त) पैरा 38.[4] में विनर्ण)य क े अनुसार, यह विनर्ण)य की धितशिथ है जो विक महत्र्वोपूर्ण) है और विदनांक 23.05.2017 क े विनर्ण)य की धितशिथ क े अनुसार उक्त परिरपत्र लागू था।
27. हम यहां ध्यान दे सकते हैं विक विदनांक 28.03.2017 का परिरपत्र विनस्संदेह अपने आर्वोेदन में बहुत व्यापक है। यह संदेह का लाभ देकर न्यायालय द्वारा बरी विकए गए उम्मीदर्वोारों सविहत उम्मीदर्वोारों को लाभ देना चाहता है। हालाँविक, इस तरह क े परिरपत्र को न्याधियक घो^र्णाओं क े संदभ) में पढ़ा जाना चाविहए और जब इस न्यायालय ने बार- बार राय दी है विक संदेह का लाभ देने से उम्मीदर्वोार विनयुविक्त का हकदार नहीं होगा, परिरपत्र क े बार्वोजूद, सक्षम प्राधि कारी विदनांक 23.05.2017 क े विर्वोर्वोाविदत विनर्ण)य को इस न्यायालय द्वारा विन ा)रिरत कानून क े अनुरूप होने पर परिरपत्र क े उल्लंघन क े रूप में दुब)लता से पीविड़त नहीं कहा जा सकता है।
28. इस प्रकार, हमारा विर्वोचार है विक विर्वोर्वोाविदत आदेश कायम नहीं रखा जा सकता है और अपीलकता) विदनांक 23.05.2017 क े आदेश को जारी करने क े अपने अधि कारों क े भीतर हैं।
29. परिरर्णामस्र्वोरुप अपील स्र्वोीकार की जाती है और पक्षकारों को अपनी-अपनी लागत र्वोहन करने क े लिलए स्र्वोतंत्र रखते हुए खंडपीठ क े विदनांक 16.07.2019 और विर्वोद्वान एकल न्याया ीश क े विदनांक 14.05.2018 क े आक्षेविपत विनर्ण)य को अपास्त विकया जाता है । न्याया ीश [संजय विकशन कौल] न्याया ीश [आर. सुभा^ रेड्डी] नई विदल्ली; माच) 24, 2021 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.