Naresh Kumar v. Kalawati & Ors.

Supreme Court of India · 25 Mar 2021 · 2021 INSC 211
Naveen Sinha; Krishna Murari
Criminal Appeal No 35 of 2013
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the acquittal of accused in a dowry death case, holding that the dying declarations were not sufficiently reliable to convict beyond reasonable doubt.

Full Text
Translation output
अप्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायालय
फौजदारी अपीलीय अतिकाररिा
फौजदारी अपील संख्या - 35/2013
नरेश क
ु मार .....अपीलार्थी(गण)
बनाम
कलाविी एवं अन्य .....प्रत्यर्थी(गण)
तनणणय
न्यायमूर्ति नवीन र्िन्हा
JUDGMENT

1. अपीलार्थी यातन मृिका क े भाई ने भारिीय दंड संतििा की िारा 498A और 302/34 क े ििि प्रत्यर्थी संख्या 1 और 2, मृिका की जेठानी और पति की उच्च न्यायलय द्वारा अतभपुष्ट दोषमुक्ति को चुनौिी देिे हुए अपील की िै।

2. 17.09.1991 को लगभग शाम 4:30 बजे मृिका 95 प्रतिशि जल गई और अगले तदन उसने अस्पिाल में दम िोड़ तदया। चश्मदीद का कोई बयान निीं िै। अतभयोजन का मुक़दमा पररक्तथर्थतिजन्य साक्ष्य पर आिाररि िै तजसमें मृिका का मृत्युकातलक कर्थन शातमल िै। 2021 INSC 211

3. प्रत्यर्थीगण को दोषमुि कर तदया गया क्ोंतक मृत्युकातलक कर्थन को तवति अनुसार सातबि निीं तकया गया र्था और न िी उससे तवश्वास जग पाया। यि पति और जेठानी क े दोषारोपण क े बीच झूलिा रिा और डॉक्टर का कोई भी प्रमाण पत्र मौजूद निीं र्था तक मृत्युकातलक बयान देिे समय मृिका की मनोदशा ठीक र्थी|

4. अपीलार्थी क े तवद्वान अतिवक्िा श्री राजेन्द्र तसंघवी ने तनवेदन तकया तक मृिका की शादी क े सत्रि माि क े भीिर ससुराल में जलने से उसकी नृशंस मौि िो गई। पी.डब्ल्यू. 13, पुतलस तनयंत्रण कक्ष में उप तनरीक्षक, ने गवािी दी र्थी तक अस्पिाल में िैनाि तसपािी, पी.डब्ल्यू. 20 ने बिाया तक मृिका ने किा र्था तक उसे उसक े पति प्रत्यर्थी संख्या 2 ने आग लगा दी र्थी। डॉ. अनंि तसन्हा द्वारा शाम 6:00 बजे दजण की गई मृिका की एमएलसी में यि पृष्ांकन र्था तक वि िोश में र्थी। मृिका ने डॉक्टर को बिाया र्था तक चाय बनािे समय उसक े (पति क े ) बड़े भाई की पत्नी ने उस पर तमट्टी का िेल डालकर आग लगा दी र्थी। इसक े िुरंि बाद उसने पी.डब्ल्यू. 25, सिायक उपतनरीक्षक, को उि डॉ. अनंि तसन्हा की उपक्तथर्थति में एक और बयान तदया िर्था तजन्होंने इस बयान पर िस्ताक्षर भी तकया र्था तक उनकी जेठानी ने उनक े ऊपर तमट्टी का िेल डालकर आग लगा दी र्थी। इसतलए मृिका न क े वल पूरी िरि से िोश में र्थी, बक्ति उसकी मनोदशा भी ठीक र्थी। उसक े दातिने पैर क े अंगूठे का तनशान उसक े बयान पर तलया गया क्ोंतक उसकी उंगतलयां जल गई र्थीं। मृिका की बयान देने िेिु उपयुििा क े संबंि में तचतकत्सक द्वारा मृत्युकातलक कर्थन में तकसी पृष्ांकन की अनुपक्तथर्थति मात्र से इसका साक्ष्य संबंिी मित्त्व समाप्त निीं िो सकिा। बयान देने क े तलए तफटनेस जूतनयर रेतजडेंट डॉक्टर द्वारा प्रमातणि की गई र्थी। उस समय मृिका का कोई पररजन मौजूद निीं र्था। डॉ. अनंि तसन्हा की गवािी लेने में अतभयोजन की तवफलिा मात्र मृत्युकालीन कर्थन पर अतवश्वास करने और प्रत्यतर्थणयों को बरी करने क े तलए घािक निीं िो सकिी। डॉ. अनंि तसन्हा क े िस्ताक्षर को अस्पिाल क े ररकॉडण क्लक ण, पी.डब्ल्यू 19 ने सातबि तकया िै। अपीलकिाण ने डॉक्टर को सम्मन कराने क े तलए सभी प्रयास तकए र्थे। पी.डब्ल्यू संख्या 3, 4, 5 अर्थाणि मााँ, बिन और अपीलार्थी ने बिाया तक मृिका ने उन्हें अस्पिाल में बिाया तक उसे उसकी जेठानी ने उसे आग लगा दी र्थी। प्रत्यर्थी संख्या 1 और 2 क े अवैि संबंि र्थे और वे मृिका को एक बािा मानिे र्थे क्ोंतक वि इसका तवरोि कर रिी र्थी। प्रत्यर्थीगण को गलि िरीक े से संदेि का लाभ तदया गया िै तक मृिका ने आत्मित्या की र्थी। प्रत्यर्थीगण को िारा 498ए क े ििि आरोप से भी गलि िरीक े से बरी कर तदया गया िै। मृत्युकातलक कर्थन क े समर्थणन में राजस्थान राज्य बनाम पाथूि (2007) 12 एससीसी 754, िुकाांर्त मोहराना बनाम उडीिा राज्य (2009) 9 एससीसी 163 और हीरालाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2009) 12 एससीसी 671 पर भरोसा तकया गया िै।

5. प्रत्यर्थी संख्या 1 और 2 की ओर से उपक्तथर्थि तवद्वान वररष् अतिविा श्री रमेश गुप्ता ने प्रस्तुि तकया तक एमएलसी क े अनुसार मृिका को क े वल िोश में बिाया गया र्था। इस बाि का कोई सबूि निीं िै तक मृत्युकातलक बयान देने क े तलए उसकी मनोदशा पूरी िरि ठीक र्थी। उि डॉ. अनंि तसन्हा द्वारा इस बाि का कोई समर्थणन निीं तकया गया िै तक बयान देने क े तलए मृिका की मनोदशा ठीक र्थी और वि उसे दजण तकये जाने क े दौरान उपक्तथर्थि र्थे। मृिका ने शुरू में क े वल अपने पति का नाम िी बिाया तजसने उसे आग लगा दी। जेठानी या दिेज की तकसी मांग का कोई तिक्र निीं र्था। इसक े बाद उसने किा तक उसे उसक े पति द्वारा अस्पिाल लाया गया र्था और उसकी जेठानी ने उसे आग लगा दी र्थी। प्रारंभ में मृिका ने एमएलसी क े समय डॉक्टर को प्रत्यर्थी संख्या 1 का नाम निीं बिाया, बक्ति क े वल इिना किा तक उसे उसकी जेठानी ने आग लगा दी र्थी। पति अपने िीन भाइयों और उनकी पतत्नयों क े सार्थ रििा र्था। इसक े बाद उसने पी. डब्ल्यू 25 को तदए अपने बयान में प्रत्यर्थी संख्या 1 का नाम तलया। प्रत्यर्थीगण ने बचाव तकया र्था तक मृिका को उनक े बीच अवैि संबंि का संदेि र्था और वि गभण िारण करने में असमर्थणिा से भी तनराश र्थी और इसतलए उसने खुद को आग लगाकर आत्मित्या कर ली। दो न्यायालयों द्वारा अपनाया गया दृतष्टकोण उतचि रूप से संभातवि दृतष्टकोण िोने क े कारण इस न्यायालय क े िस्तक्षेप की आवश्यकिा निीं िै। राज्य-प्रत्यर्थी संख्या 3 की ओर से कोई उपक्तथर्थि निीं हुआ िै।

6. िमने पक्षकारों क े तनवेदन पर तवचार तकया िै और अतभलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों का भी अवलोकन तकया िै। िालांतक संतविान क े अनुच्छे द 136 क े ििि इस न्यायालय का तववेकािीन क्षेत्रातिकार बहुि व्यापक िै, परन्तु अपने तनष्कषण पर पहुाँचने क े तलए दो अदालिों द्वारा साक्ष्य क े पुनमूणल्ांकन से प्राप्त िथ्ों क े समविी तनष्कषों में िस्तक्षेप निीं करना परंपरा और तववेक का तनयम रिा िै, जब िक तक साक्ष्य का पूणण रूप से गलि मूल्ांकन निीं तकया गया िो, या तनष्कषों पर पहुंचने में घोर तवक ृ ति िो, जो घोर अन्याय का कारण बने। यतद दो न्यायालयों द्वारा अपनाया गया दृतष्टकोण उतचि रूप से संभव दृतष्टकोण िो, िो यि न्यायालय दोषमुक्ति क े समविी आदेश में िस्तक्षेप करने क े तलए अतनच्छु क िोगा। गोवा राज्य बनाम िांजय ठकरान और अन्य, (2007) 3 एससीसी 755 में इस प्रकार तटपण्णी की गई:- "16. पूवोि तनणणयों से यि स्पष्ट िै तक दोषमुक्ति क े आदेश क े तवरुद्ध अपीलीय शक्तियों का प्रयोग करिे हुए अपीलीय न्यायालय सामान्यिः दोषमुक्ति क े आदेश में िस्तक्षेप निीं करेगा जब िक तक तनचली अदालि का दृतष्टकोण क ु छ स्पष्ट अवैििा से दू तषि न िो और तकसी भी समझदार व्यक्ति द्वारा उस तनष्कषण पर पहुंचा न जा सक े और, इसतलए, वि तनणणय तवक ृ ि िोगा। क े वल इसतलए तक दो दृतष्टकोण संभव िैं, अपीलीय न्यायलय उस दृतष्टकोण को निीं अपनाएगा जो तनचली अदालि द्वारा तदए गए फ ै सले को उलट दे। िालााँतक, अपीलीय न्यायलय क े पास सबूिों की समीक्षा करने की शक्ति िै यतद उसका तवचार िै तक तनचली अदालि द्वारा अपनाया गया दृतष्टकोण तवक ृ ि िै और अदालि ने स्पष्ट कानूनी ग़लिी की िै और अतभलेख पर मौजूद मित्वपूणण साक्ष्य की अनदेखी की िै। यि पिा लगाना अपीलीय न्यायलय का किणव्य िोिा िै तक क्ा कोई अतभयुि उस अपराि से जुड़ा िै तजसका उस पर आरोप लगाया गया िै िातक ऐसी पररक्तथर्थतियों में अतभलेख पर मौजूद सामग्री क े आिार पर न्यायसंगि तनणणय पर पहुंचा जा सक े ।"

7. अब िम विणमान मामले क े िथ्ों पर कानून की उि व्याख्या की पृष्भूतम में तवचार करेंगे, िातक यि परखा जा सक े तक आक्षेतपि आदेश िमारे द्वारा िस्तक्षेप की मांग करिे िैं या निीं। मृिका का तववाि प्रत्यर्थी संख्या 2 से लगभग डेढ़ साल पिले हुआ र्था। उसे प्रत्यर्थीगण क े बीच अवैि संबंि का संदेि र्था। शादी क े डेढ़ साल बाद भी मृिका गभणिारण निीं कर पा रिी र्थी। संभातवि बचाव तकया गया िै तक उसने ििाशा में आत्मित्या कर ली।

8. मृिका 17.09.1991 को करीब शाम साढ़े चार बजे चाय बनािे समय घर में 95 प्रतिशि झुलस गई र्थी। शाम छि बजे उसे सफदरजंग अस्पिाल लाया गया। किा जािा िै तक उसने शुरू में अस्पिाल में पुतलस को बिाया र्था तक उसे उसक े पति ने आग लगा दी र्थी। उि डॉ. अनंि तसन्हा ने शाम करीब छि बजे मृिका से पूछ िाछ क े बाद उसकी एमएलसी िैयार की| किा जािा िै तक उसने उसे बिाया र्था तक चाय बनािे समय उसक े पति क े बड़े भाई की पत्नी ने उसे आग लगा दी र्थी। एमएलसी क े अनुसार वि पूरी िरि सचेि र्थी। यि क े वल उस डॉक्टर द्वारा िस्ताक्षररि िै तजसकी गवािी निीं हुई िै। किा जािा िै तक मृिका ने तफर P.W 25 क े समक्ष मृत्युकातलक बयान तदया र्था तक प्रत्यर्थी संख्या 1 ने चाय बनािे समय उस पर तमट्टी का िेल डालकर आग लगा दी र्थी और उसका पति उसे अस्पिाल ले आया र्था। इस पर उसक े दातिने पैर क े अंगूठे का तनशान िै क्ोंतक उसक े िार्थ जल गए र्थे। बयान पर डॉ. अनंि तसन्हा क े िस्ताक्षर िैं। उनक े िस्ताक्षर को P.W 19 ने सातबि तकया िै। लेतकन इसे दजण तकये जाने क े दौरान उसकी उपक्तथर्थति और बयान देने क े तलए मृिका की सिी मनोदशा क े संबंि में डॉक्टर का कोई पृष्ांकन निीं िै। पी.डब्ल्यू. संख्या 3 और 4 ने किा िै तक मृिका ने उन्हें बिाया तक उसे प्रत्यर्थी संख्या 1 द्वारा आग लगाई गई र्थी। पी.डब्ल्यू. 5 ने किा िै तक दोनों प्रत्यतर्थणयों ने उसकी बिन की ित्या की िै। तफर वि कििा िै तक मृिका ने उसे बिाया र्था तक उसे प्रत्यर्थी संख्या 1 द्वारा आग लगा दी गई र्थी।

9. भारिीय साक्ष्य अतितनयम, 1872 की िारा 32 क े ििि साक्ष्य क े रूप में मृत्युकातलक कर्थन स्वीकायण िोिा िै। यतद स्वेच्छा से तदया गया िो और तवश्वास जगािा िो िो यि अक े ले िी दोषतसक्तद्ध का आिार भी बन सकिा िै। यतद इसकी सत्यिा पर संदेि पैदा करने वाले तवरोिाभास, तभन्निाएं िैं जो इसकी सत्यिा और तवश्वसनीयिा को प्रभातवि करिे िैं या यतद मृत्युकातलक कर्थन संदेिास्पद िै, या अतभयुि न क े वल मृत्युकातलक कर्थन क े संबंि में, बक्ति मृत्यु क े स्वरूप और िरीक े क े संबंि में भी संदेि उत्पन्न करने में सक्षम िै, िो संदेि का लाभ आरोपी को देना िोगा। इसतलए तकसी मामले क े िथ्ों पर बहुि क ु छ तनभणर करेगा। मृत्युकातलक कर्थन को स्वीकार या अस्वीकार करने क े तलए कोई अटल मानक या पैमाना निीं िो सकिा।

10. पी. डब्ल्यू 13 को तदया गया मृिका का पिला बयान सुनी-सुनाई बाि पर आिाररि िै जैसा तक पी. डब्ल्यू 20 ने गवािी दी तक उसे प्रत्यर्थी संख्या 2 ने आग लगाई र्थी। इस बयान में प्रत्यर्थी संख्या 1 का कोई तिक्र निीं िै और न िी उसने दिेि की मांग क े बारे में क ु छ किा िै। मृिका क े अगले बयान में अक े ले प्रत्यर्थी संख्या 1 को दोष देने क े तलए प्रत्यर्थी संख्या 1 का नाम निीं िै। इस पर तकसी क े िस्ताक्षर निीं िैं और बयान दजण करने वाले डॉक्टर की गवािी भी निीं हुई िै। क े वल इसतलए तक उसक े िस्ताक्षर की P.W 19 द्वारा पिचान की गई िै, इसकी तवषय वस्तु की शुद्धिा को थर्थातपि निीं कर सकिा। मृिक का अगला बयान पी.डब्ल्यू 25 द्वारा दजण तकया गया िै, तजसमें प्रत्यर्थी संख्या 2 क े क्तखलाफ तबना तकसी आरोप क े अक े ले प्रत्यर्थी संख्या 1 पर आरोप लगाया गया िै और इसक े तवपरीि कििी िै तक उसे प्रत्यर्थी संख्या 2 द्वारा अस्पिाल लाया गया र्था। इससे तफर से तकसी दिेज की मांग का पिा निीं चलिा।

11. पी.डब्ल्यू 25 तजसने मृत्युकातलक बयान दजण तकया िै, उसने यि निीं बिाया तक बयान देने क े तलए मृिका की मनोदशा ठीक र्थी। उनका किना िै तक डॉक्टर ने मृिका की मनोदशा की तफटनेस को प्रमातणि तकया र्था, जबतक मृत्युकातलक बयान में ऐसा कोई बयान मौजूद निीं िै। तजरि में वि स्वीकार करिा िै तक मृिका की तफटनेस को एक रेतजडेंट जूतनयर डॉक्टर द्वारा अलग से प्रमातणि तकया गया र्था, लेतकन तजनक े िस्ताक्षर और पृष्ांकन मृत्युकातलक कर्थन में उपलब्ध निीं िै। इस समय पी.डब्ल्यू 19 क े बयान पर ध्यान देना आवश्यक िै जो स्वीकार करिा िै तक डॉ अनंि तसन्हा ने उनकी उपक्तथर्थति में िस्ताक्षर निीं तकए िैं और कई बार डॉक्टर ररकॉडण रूम में आकर अपने िस्ताक्षर करिे िैं।

12. पापराम्बका रोिम्मा और अन्य बनाम आांध्र प्रदेश राज्य, (1999) 7 SCC 695 में एक बयान देने क े तलए चेिना और सिी मनोदशा क े बीच अंिर करिे हुए, यि तटपण्णी की गई: "9. यि सच िै तक तचतकत्सा अतिकारी डॉ क े तवष्णु तप्रया देवी (पी.डब्ल्यू. 10) ने मृत्युकातलक कर्थन क े अंि में प्रमातणि तकया र्था तक "बयान दजण करिे समय रोगी सचेि िै"। यि ररकॉडण पर आया िै तक घायल श्रीमिी वेंकट रमना का तजस्म गंभीर रूप से जला हुआ र्था। पोस्टमॉटणम करने वाले डॉ. पी. कोटेश्वर राव (पी.डब्ल्यू. 9) ने किा तक घायल 90% जल गया र्था। इस मामले में जैसा तक पिले किा जा चुका िै, अतभयोजन का मामला क े वल मृत्युकातलक बयान पर तटका र्था। इसतलए, अतभयोजन पक्ष क े तलए मृत्युकातलक बयान को वास्ततवक, सत्य और सभी संदेिों से मुि सातबि करना आवश्यक र्था और यि िब दजण तकया गया र्था जब घायल की मनोदशा ठीक र्थी। िमारी राय में, डॉ. श्रीमिी क े. तवष्णुतप्रया देवी (पीडब्ल्यू 10) द्वारा अंि में मृत्युकातलक बयान क े सार्थ संलग्न प्रमाण-पत्र आवश्यकिा का अनुपालन निीं करिा र्था क्ोंतक वि यि प्रमातणि करने में तवफल रिी तक मृत्युकातलक बयान दजण करिे समय घायल की मानतसक क्तथर्थति ठीक र्थी। उि तवशेषज्ञ का प्रमाण पत्र अंि में क े वल यि कििा िै तक "बयान दजण करिे समय रोगी सचेि िै"। इन मित्वपूणण चूक को ध्यान में रखिे हुए, मृत्युकातलक कर्थन (Ex.P-14) को सत्य और वास्ततवक रूप में स्वीकार करना सिी निीं िोगा और जैसा तक िब तकया गया र्था जब घायल की मानतसक क्तथर्थति ठीक र्थी। आयुतवणज्ञान में दो स्तर अर्थाणि् सचेिन और ठीक मनोदशा अलग-अलग िैं और पयाणयवाची निीं िैं। कोई सचेि िो सकिा िै लेतकन जरूरी निीं तक उसकी मानतसक क्तथर्थति भी ठीक िो। तनचली अदालिों ने इस अंिर को निरअंदाि कर तदया।"

13. विणमान मामले क े िथ्ों और पररक्तथर्थतियों में, मृिका क े बयानों में उिार- चढ़ाव को देखिे हुए, डॉक्टर की उपक्तथर्थति सतिि मृत्युकातलक बयान देने क े तलए मृिका की सिी मनोदशा क े बारे में कोई सबूि निीं िै। मृत्युकातलक बयान की सत्यिा संदेिास्पद िै। प्रत्यर्थीगण की दोषमुक्ति को पलट कर उनको दोषतसद्ध करने क े तलए आत्मित्या क े संभातवि बचाव को आसानी से अस्वीकार कर देना ठीक निीं िोगा।

14. पाथुि (उपरोि) अपने िथ्ों क े संबंि में स्पष्ट िै। मृत्युकातलक कर्थन पर सिी मानतसक क्तथर्थति का प्रमाण-पत्र न िोने क े बावजूद, तचतकत्सक का गवाि क े रूप में परीक्षण तकया गया और सिी मानतसक क्तथर्थति सातबि की गई।

15. िुकाांर्त (उपरोि) अपने स्वयं क े िथ्ों क े आिार पर तफर से स्पष्ट िै: "25. इसक े अलावा, िालांतक मृत्युकातलक कर्थन पर कोई तवतशष्ट पृष्ांकन निीं तकया गया िै, लेतकन Ext. 9/1 क े रूप में समसामतयक साक्ष्य िै जो यि स्पष्ट करिा िै तक मृत्युकातलक कर्थन दजण करने वाले डॉक्टर ने दजण तकया र्था तक रोगी समय और थर्थान क े तलए सचेि र्था और मृत्युकातलक कर्थन दजण तकये जाने क े समय मानतसक रूप से ठीक र्था। xxxxxxxx

13,373 characters total

35. तजस डॉक्टर ने मृत्युकातलक बयान दजण तकया र्था, उसका गवाि क े रूप में परीक्षण तकया गया र्था और उसने अपने बयान में स्पष्ट रूप से किा र्था तक मृिक पूवोि बयान देिे समय सचेि र्था और ऐसा बयान देने क े तलए उसकी मानतसक क्तथर्थति ठीक र्थी। इसतलए उपरोि क्तथर्थति यि स्पष्ट करिी िै तक पूवोि मृत्युकातलक कर्थन पर भरोसा तकया जा सकिा िै क्ोंतक उसे ईमानदारी से दजण तकया गया और उि कर्थन ने घटना क े िरीक े का स्पष्ट तववरण तदया।"

16. हीरालाल (उपरोि) में, दो मृत्युकातलक बयानों में तवसंगतियों को देखिे हुए, यि माना गया तक दोषतसक्तद्ध मृत्युकातलक कर्थन पर आिाररि निीं िो सकिी।

17. अि: अपील खाररज की जािी िै। ……………………………न्या. (नवीन र्िन्हा) ……………………………न्या. (क ृ ष्णा मुरारी) नई र्दल्ली, मार्ि 25, 2021 अस्वीकरण: देशी भाषा में तनणणय का अनुवाद मुकद्द ् मेबाि क े सीतमि प्रयोग िेिु तकया गया िै िातक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक े एवं यि तकसी अन्य प्रयोजन िेिु प्रयोग निीं तकया जाएगा | समस्त कायाणलयी एवं व्याविाररक प्रयोजनों िेिु तनणणय का अंग्रेिी स्वरूप िी अतभप्रमातणि माना जाएगा और कायाणन्वयन िर्था लागू तकए जाने िेिु उसे िी वरीयिा दी जाएगी |