Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 49 वर्ष! 2021
(एसएलपी (दीवानी) सं. 298 वर्ष! 2021 से उद्भू )
(डायरी संख्या 4183 वर्ष! 2020)
अध्यक्ष प्रशासविनक सविमति उ.प्र. दुग् संघ और डेयरी संघ क
ें द्रीयक
ृ सेवाएं .... अपीलार्थी0
बनाम
जगपाल सिंसह ..... प्रत्यर्थी0
विनर्ण!य
न्यायमूर्ति हेमन् गुप्ता
JUDGMENT
1. व !मान अपील में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ द्वारा पारिर विदनांक 26.10.2018 क े आदेश को चुनौ ी दी गयी है, सिजसमें विवद्वान एकल पीठ द्वारा पारिर विदनांक 17.5.2019 क े आदेश की पुविF की गयी र्थीी।
2. उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट यातिचका द्वारा विदनांक 26.10.2018 क े दण्ड़ क े आदेश को चुनौ ी दी गयी र्थीी, सिजसक े ह प्रत्यर्थी01 को न्यून म वे नमान में वापस करने का आदेश विदया गया र्थीा और विनलंबन की अवति 1 इसक े पश्चा ् 'कम!चारी' क े रूप में विनर्दिदF mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को कम!चारी द्वारा सेवा में विब ायी गई अवति क े रूप में माना जाना र्थीा। हालांविक, उक्त विनलंबन अवति क े लिलए, कम!चारी को विनवा!ह भत्ता और महंगाई भत्ते को छोड़कर विकसी अन्य वे न या भत्ते का हकदार नहीं पाया गया। राज्य सरकार द्वारा रसिजस्ट्रार क े रूप में नाविम, आयुक्त (डेयरी दू ), लखनऊ की पूव! स्वीक ृ ति क े बाद सजा का आदेश उसी विदन पारिर विकया गया र्थीा।
3. कम!चारी को विदनांक 11.8.1984 को क ें द्रीयक ृ सेवाओं में काय!कारी प्रशिशक्षु क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा। प्रशिशक्षर्ण अवति पूरी होने क े बाद, उसे प्रबं क ग्रेड-III III क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा। कम!चारी पर विदनांक 21.4.2015 को एक आरोप पत्र इस आ ार पर लगाया गया विक टैंकरों में दू क े दो चैम्बरों क े अति रिरक्त, विवभाजन द्वारा 310 लीटर की क्षम ा वाला एक और अति रिरक्त ीसरे शिछपे हुए चैम्बर का विनमा!र्ण विकया गया र्थीा। वाहन का क ु ल वजन बनाए रखने क े लिलए उक्त अति रिरक्त चैम्बर में पानी भरा गया र्थीा। दो चैम्बरों से दू उ ारने क े समय वजन माप क े बाद, अति रिरक्त शिछपे चैंबर से पानी छोड़ा गया। वजन माप में हेरफ े र क े कारर्ण, फ े डरेशन को विवत्तीय नुकसान हुआ। कम!चारी ने उक्त आरोपों को खारिरज कर विदया और इसलिलए एक जांच अति कारी विनयुक्त विकया गया। विदनांक 13.6.2018 की जांच रिरपोट! में, आरोप सं. 1 और 3 कम!चारी क े लिखलाफ आंशिशक रूप से साविब हुए। ब 25.6.2018 को कारर्ण ब ाओ नोविटस क े सार्थी जाँच रिरपोट! कम!चारी को भेजा गया। व्यविक्तग सुनवाई का अवसर भी उसे विदया गया र्थीा। इसक े बाद प्रबं विनदेशक/अध्यक्ष (प्रशासविनक सविमति ) ने 26.10.2018 को एक आदेश पारिर विकया सिजसमें कम!चारी को ीनों आरोपों का दोर्षी ठहराया गया और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, आयुक्त (डेयरी दुग् )/ रसिजस्ट्रार, डेयरी दुग् सहकारी, उ.प्र. से अनुमोदन प्राप्त करने क े बाद, विदनांक 26.10.2018 को सजा का आदेश पारिर विकया। इसी आदेश को कम!चारी ने उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिचका क े माध्यम से चुनौ ी दी र्थीी।
4. रिरट यातिचका को विनर्ण0 कर े हुए विवद्वान एकल पीठ ने कहा विक कम!चारी की सेवाविनवृलित्त से चार विदन पहले, विवति की सम्यक प्रविbया का पालन विकए विबना सजा का आदेश पारिर विकया गया र्थीा। सक्षम प्राति कारी अर्थीा! ् उत्तर प्रदेश सहकारी संस्र्थीाग सेवा बोड! से सेवा विवविनयमों क े विवविनयमन 87 क े ह पूव! अनुमोदन लिलए विबना आक्षेविप आदेश पारिर करना एक अनुतिच और अस्पFीक ृ जल्दबाजी र्थीी। यह आगे कहा गया विक प्रशासविनक सविमति क े अध्यक्ष द्वारा सजा का आदेश पारिर विकया गया है और सजा क े लिलए अनुमोदन भी उसी व्यविक्त द्वारा विदया गया है। इसलिलए, व !मान मामला एक अक्षम प्राति कारी द्वारा विदए गए अनुतिच अनुमोदन का एक उदाहरर्ण र्थीा।
5. अं ः-III न्यायालयीय अपील में, उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने विदनांक 9.5.2014 और 15.10.2014 की जांच रिरपोटe का उल्लेख विकया विक कम!चारी को कोई असहमति नोट नहीं विदया गया है, बल्किल्क उन्हें उन रिरपोटe में छ ू ट दी गई र्थीी। हालाँविक, यह ध्यान विदया जाना चाविहए विक खण्ड़पीठ ने इस थ्य की अनदेखी की विक वे प्रारंशिभक जाँचें र्थीीं। खण्ड़पीठ ने सेवा विवविनयमों क े विवविनयम 87 और 106 पर विवचार कर े हुए विनम्नानुसार अव ारिर विकया: “15. पूव क्त पर उतिच विवचार करने पर, यह स्पF है विक मूल आवश्यक ा यह है विक आदेश 1975 क े विवविनयमों से असंग नहीं होना चाविहए और विदनांक 08.08.2016 का आदेश 1975 क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवविनयमों क े विवविनयमन 87 में विनविह प्राव ानों क े प्रत्यक्ष विवरो में है। प्रत्यर्थी0-III यातिचकाक ा! क ें द्रीयक ृ सेवाओं का सदस्य र्थीा, सिजसे उ.प्र. डेयरी फ े डरेशन एंड विमल्क यूविनयन क ें द्रीक ृ सेवा विनयमावली, 1984 द्वारा प्रख्याविप विकया गया र्थीा, जो पांच साल से अति क की अवति क े बाद अल्किस् त्व में आया र्थीा और इसलिलए, 17.11.1979 विदनांविक अति सूचना क ें द्रीयक ृ सेवाओं क े सदस्यों पर लागू नहीं हो सक ा है और इस प्रकार 08.08.2016 विदनांविक आदेश को पारिर कर े समय दुग् आयुक्त/रसिजस्ट्रार द्वारा दी गई सादृश्य गल है।"
6. इससे पहले विक हम संबंति कe और उच्च न्यायालय क े विनष्कर्षe पर विवचार करें, उठाये गए कe को समझने क े लिलए क ु छ वै ाविनक प्राव ानों को विनम्नव पुन: प्रस् ु विकया गया है: "उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति अति विनयम, 1965[2]
121. सविमति क े विनयोजन की श e को विन ा!रिर करने क े लिलए रसिजस्ट्रार की शविक्त-(1) रसिजस्ट्रार, समय-समय पर, विकसी सहकारी सविमति या सहकारी सविमति यों क े वग! में कम!चारिरयों क े अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण सविह सेवा की परिरलल्किw यों और अन्य श e को विवविनयविम करने क े लिलए विवविनयम बना सक ा है और ऐसी सविमति सिजस पर ऐसी श y लागू हो ी है, उन विवविनयमों और ऐसे अनुपालन को सुविनतिश्च करने क े लिलए रसिजस्ट्रार द्वारा जारी विकए गए विकसी आदेश का अनुपालन करेग। (2) उप- ारा (1) 2 संक्षेप में, 'अति विनयम' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े ह बनाए गए विनयम राजपत्र में प्रकाशिश विकए जाएंगे और इस रह क े प्रकाशन की ारीख से प्रभावी होंगे।
122. सहकारी सविमति यों क े कम!चारिरयों को विनयंवित्र करने का प्राति कार- (1) राज्य सरकार सहकारी सविमति यों या सहकारी सविमति यों क े विकसी वग! क े कम!चारिरयों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासविनक विनयंत्रर्ण क े लिलए ऐसी रीति से, जो विवविह की जाए, विकसी प्राति कारी या प्राति कारिरयों का गठन कर सक े गी और ऐसे कम!चारिरयों क े अनुशासविनक विनयंत्रर्ण सविह भ 0, परिरलल्किw यों, विनबं नों और सेवा की श e क े बारे में विवविनयम बनाने क े लिलए ऐसे प्राति कारी या प्राति कारिरयों की अपेक्षा कर सक े गी और ारा 70 में अं र्दिवF उपबं ों क े अ ीन रह े हुए सहकारी सविमति और सविमति क े विकसी कम!चारी क े बीच विववादों का विनपटारा कर सक े गी। (2) उप- ारा (1) क े ह बनाए गए विनयम राज्य सरकार क े अनुमोदन क े अ ीन होंगे और इस रह की मंजूरी क े बाद, राजपत्र में प्रकाशिश विकया जाएगा, और इस रह क े प्रकाशन की ारीख से प्रभावी होंगे और ारा 121 क े ह बनाए गए विकसी भी विनयम को अति भावी कर देंगे। 122-क. कति पय सेवाओं का क े न्द्रीयकरर्ण- (1) इस अति विनयम में अं र्दिवF विकसी बा क े हो े हुए भी, राज्य सरकार विनयमों द्वारा ऐसी सहकारी सविमति यों या सहकारी सविमति यों क े वग! क े ऐसे कम!चारिरयों की सेवाएं सृसिज करने क े लिलए उपबं कर सक े गी, जो राज्य सरकार ऐसी सहकारी सविमति यों क े लिलए 3 1977 क े उ.प्र. अति विनयम द्वारा प्रति स्र्थीाविप (3-III 10-III 1975 से) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ठीक समझे और ऐसी विकसी सेवा में विनयुक्त व्यविक्तयों की भ 0, विनयुविक्त, हटाने क े रीकों और सेवा की अन्य श e को विवविह कर सक े गी। (2) जब ऐसी कोई सेवा सृसिज की जा ी है, ो ऐसी सेवा में शाविमल पदों पर ऐसी सेवा क े सृजन की ारीख पर मौजूद ऐसी सविमति यों क े सभी कम!चारिरयों को अनंति म रूप से समायोसिज समझा जाएगा यह ऐसी ारीख क े सृजन की ारीख से प्रभावी होगा: बश ~ विक ऐसा कोई भी कम!चारी विन ा!रिर अवति क े भी र विन ा!रिर प्राति कारी को लिललिख रूप में सूचना देकर, इस रह की सेवा का सदस्य नहीं बनने क े अपने विवकल्प को ब ा सक ा है, और उस ल्किस्र्थीति में सविमति में उसकी सेवाएं ऐसी सूचना की ारीख से प्रभावी होंगी र्थीा वह सविमति से मुआवजे का हकदार होगा जो उसे होगी xx xx xx ारा 130. विनयम बनाने की शविक्त— (1) राज्य सरकार इस अति विनयम क े उद्देश्यों को पूरा करने क े लिलए विनयम बना सक ी है। (2) xx xx xx उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति विनयमावली, 1968[4] 4 संक्षेप में, ‘1968 विनयमावली' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. परिरभार्षाएं- इन विनयमों में, जब क विक संदभ! से अन्यर्थीा अपेतिक्ष न हो---- (क) * * * * * * (ख) ''शीर्ष! सविमति '', ''शीर्ष! स् रीय सविमति '' या ''राज्य स् रीय सहकारी सविमति '' से अशिभप्रे है - (1) से (3) (4) प्रादेशिशक सहकारी डेयरी फ े डरेशन लिलविमटेड, लखनऊ; xx xx xx * [389-क. ारा 122 क े अ ीन प्राति कारी या प्राति कारीगर्ण राज्य सरकार द्वारा शासकीय राजपत्र में प्रकाशिश अति सूचना द्वारा गविठ विकए जा सक े हैं]
7. अति विनयम की ारा 122 और विनयमावली 1968 क े विनयम 389-III क क े संदभ! में, क ें द्रीय या प्रार्थीविमक सविमति क े शीर्ष! स् र क े कम!चारिरयों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े प्रयोजनों क े लिलए उत्तर प्रदेश सहकारी संस्र्थीाग सेवा बोड! का गठन कर े हुए विदनांक 4.3.1972 को एक अति सूचना जारी की गई र्थीी। बाद में, उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति यां कम!चारी सेवा विवविनयम, 1975[5] को अति विनयम की ारा 121 क े ह प्रदत्त शविक्तयों क े प्रयोग में विदनांक 6.1.1976 को उ.प्र. राजपत्र, असा ारर्ण में प्रकाशिश विकया गया र्थीा। क ु छ प्रासंविगक प्राव ान इस प्रकार हैं: * अति सूचना सं. 3885-III सी/XII-III CA-III 5 (1)-III 69-III B विदनांक 31 अगस् 1971, द्वारा प्रति स्र्थीाविप, उ. प्र. राजपत्र, असा ारर्ण, विदनांक 31 अगस्, 1971, पृष्ठ 2 में प्रकाशिश ।" 5 संक्षेप में, 'सेवा विवविनयम' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
8. सेवा विवविनयमों का विवविनयमन 84 (खंड ङ) कम!चारी द्वारा मूल रूप में ारिर रैंक या ग्रेड में कमी, (खण्ड़ च) सेवा से हटाने, या (खण्ड़ छ) सेवा से बखा!स् गी जैसे दण्ड़ों क े लिलए प्राव ान कर ी है। सेवा विवविनयमों क े विवविनयमन 87 क े अनुसार, बोड! की पूव! सहमति क े सिसवाय पूव क्त सजा पारिर नहीं की जा सक ी।
9. यह कहा जा सक ा है विक सभी सहकारी दुग् सविमति यों क े संबं में रसिजस्ट्रार की सभी शविक्तयों को राज्य सरकार द्वारा अति विनयम की ारा 3 की उप-III ारा 2 क े ह प्रदत्त शविक्तयों क े प्रयोग में 19 मई 1976 की अति सूचना द्वारा दुग् आयुक्त उत्तर प्रदेश को प्रदान विकया गया र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
10. विनयमावली 1968 क े विनयम 389-III क सपविठ ारा 122 क े ह जारी 17.11.1979 विदनांविक अति सूचना द्वारा उत्तर प्रदेश सहकारी संस्र्थीाग सेवा बोड! क े पास शीर्ष! स् र की दुग् सविमति अर्थीा! ् प्रादेशिशक सहकारी डेयरी फ े डरेशन, क ें द्रीय या प्रार्थीविमक दुग् सविमति यों क े कम!चारिरयों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े संबं में काय! करने का अति कार क्षेत्र नहीं रहा। इसक े बजाय, समय-III समय पर रसिजस्ट्रार द्वारा विनर्दिदF श्रेर्णी I और II कम!चारिरयों की भ 0 क े लिलए एक चयन सविमति का गठन विकया गया र्थीा। इस रह की चयन सविमति राज्य सरकार द्वारा अध्यक्ष क े रूप में नाविम एक अति कारी; राF्रीय दुग् डेयरी विवकास बोड! का एक प्रति विनति, प्राचाय! क ृ विर्ष संस्र्थीान, नैनी, इलाहाबाद और सदस्य क े रूप में राज्य सरकार द्वारा नाविम राज्य में सहकारी दुग् संघ या क ें द्रीय दुग् सविमति क े एक अध्यक्ष; और सदस्य सतिचव क े रूप में प्रबन् विनदेशक, प्रादेशिशक सहकारी डेयरी फ े डरेशन से विमलकर बनी र्थीी।
11. उत्तर प्रदेश सहकारी डेयरी संघ और दुग् संघ क ें द्रीयक ृ सेवा विनयमावली, 1984[6] विदनांक 29.8.1984 को उ.प्र. सरकार क े राजपत्र में प्रकाशिश विकया गया र्थीा। उक्त विनयमावली क े अनुसार, प्रशासविनक सविमति को फ े डरेशन क े एक प्रबं विनदेशक, रसिजस्ट्रार द्वारा नाविम व्यविक्त जो वग! I अति कारी क े पद से नीचे नहीं हो, फ े डरेशन क े प्रबं विनदेशक द्वारा नाविम व्यविक्त और एक सदस्य सतिचव से विमलकर बना होना र्थीा। डेयरी सेवा विनयमावली क े क ु छ प्रासंविगक प्राव ान विनम्नानुसार हैं: 6 संक्षेप में, 'डेयरी सेवा विनयमावली' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “2 (क) “अति विनयम” से उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति अति विनयम, 1965 अशिभप्रे है। (ख) ''प्राति करर्ण '' से इस विनयमावली क े विनयम 4 क े अनुसार गविठ काडर प्राति करर्ण अशिभप्रे है; (ग) '' बोड! '' से प्रादेशिशक सहकारी डेयरी फ े डरेशन लिलविमटेड, लखनऊ की प्रबं न सविमति अशिभप्रे है (और इसक े अं ग! प्रशासक या संघ क े प्रशासकों की सविमति भी है); (घ) '' सविमति '' से इस विनयमावली क े विनयम 5 क े अनुसार गविठ प्रशासविनक सविमति अशिभप्रे है; (ड़) '' फ े डरेशन '' से प्रादेशिशक सहकारी डेयरी फ े डरेशन लिलविमटेड, लखनऊ अशिभप्रे है; (च) से (ठ) * * * * * *
3. सेवा का सृजन- (1) उत्तर प्रदेश सहकारी डेयरी संघ और दुग् संघ क ें द्रीयक ृ सेवा में संघ और यूविनयनों क े सभी प्रबं कीय पद शाविमल होंगे, सिसवाय प्रबं विनदेशक, मुख्य वाशिर्णल्किज्यक प्रबं क और संघ क े मुख्य महाप्रबं क क े पद क े । (2) इस विनयमावली क े प्रव !न की ारीख से फ े डरेशन या संघ द्वारा सेवा क े दायरे में आने वाले विकसी भी पद पर कोई विनयुविक्त नहीं की जाएगी: बश ~ विक सरकार फ े डरेशन या संघ क े विकसी भी प्रबं कीय पद पर सरकार क े विकसी भी अति कारी को प्रति विनयुविक्त पर रख सक ी है: परन् ुक यह और विक विकसी अन्य सहकारी सविमति या विनगम या क ें द्र या राज्य सरकार क े स्वाविमत्व या विनयंत्रर्ण वाले विनकाय या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्र्थीानीय विनति का प्रशासन करने वाले विनकाय विनगम या राF्रीय डेयरी विवकास बोड! क े विनयोजन में पहले से लगे व्यविक्तयों की सेवाओं को भी प्रति विनयुविक्त पर लिलया जा सक ा है।
4. काडर प्राति करर्ण का गठन- काडर प्राति करर्ण का गठन विनम्नानुसार विकया जाएगा: (i) रसिजस्ट्रार... अध्यक्ष (ii) से (viii) * * * * * * (ix) संघ क े प्रबं विनदेशक.... सदस्य-III सतिचव नोट.-III यविद रसिजस्ट्रार और संघ क े प्रबन् क विनदेशक का पद एक ही अति कारी क े पास है, ो अध्यक्ष विकसी भी सदस्य को सदस्य-III सतिचव क े रूप में नाविम कर सक ा है और इस रह क े सदस्य की रिरविक्त को विकसी अन्य अति कारी या संघ से प्रबन् विनदेशक द्वारा नाविम करक े भरी जाएगी।
5. प्रशासविनक सविमति का गठन - प्रशासविनक सविमति का गठन विनम्नानुसार विकया जाएगा: (i) संघ का प्रबं विनदेशक-III अध्यक्ष (ii) रसिजस्ट्रार का नामविनद~शिश ी, जो वग! I अति कारी क े पद से नीचे न हो-III सदस्य (iii) संघ क े प्रबं विनदेशक का नामविनद~शिश ी-III सदस्य-III सतिचव। xx xx xx
9. प्राति करर्ण की शविक्तयां और क !व्य- (1) राज्य सरकार की पूव! स्वीक ृ ति क े सार्थी प्राति करर्ण सदस्यों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण, परिरलल्किw यों, अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण और सेवा की अन्य श e से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संबंति विनयमों को विवविनयमों को बनायेगा, ऐसे विवविनयम राजपत्र में उनक े प्रकाशन की ारीख से लागू होंगे। (2) प्राति करर्ण विनम्न काय! करेगा-III (i) रसिजस्ट्रार क े अनुमोदन से समय-III समय पर विवशिभन्न श्रेर्णी क े पदों क े लिलए वे नमान का अव ारर्ण और संशो न; (ii) विववाद का विनपटारा करना और प्रशिशक्षर्ण की अवति क े लिलए प्रशिशक्षर्ण, यात्रा भत्ता, वे न और अन्य भत्ते की लाग और विनयम 22 क े उप-III विनयम (6) क े ह भ 0 की लाग का आवंटन करना; (iii) सेवा से संबंति मामलों पर सरकार और रसिजस्ट्रार को सलाह देना; (iv) सेवा से संबंति ऐसे नीति ग मामलों का विवविनश्चय, जो सविमति द्वारा उसे विनर्दिदF विकए जाएं; (v) ऐसी अन्य शविक्तयों का प्रयोग करना और इन विनयमों या विवविनयमों क े अ ीन ऐसे अन्य क !व्यों का पालन करना जो उसे सरकार या रसिजस्ट्रार द्वारा समय-III समय पर सौंपे जाएं।
10. सविमति की शविक्तयां और क !व्य- सविमति विनम्न काय! करेगी-III (i) सेवा क े सदस्यों पर समग्र विनयंत्रर्ण और पय!वेक्षर्ण करना; (ii) से (vii) * * * * * * xx xx xx
15. विनयुविक्त प्राति कारी - सेवा क े सदस्यों और प्रबं न प्रशिशक्षुओं और काय!कारिरयों का विनयुविक्त प्राति कारी र्थीा उन पर अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने वाले प्राति करर्ण ऐसे होंगे जो विवविनयमों में विन ा!रिर विकए गए हों: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बश ~ विक ऐसे विवविनयमों को लागू करने क सविमति का अध्यक्ष विनयुविक्त प्राति कारी होगा और उन पर अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने वाला प्राति करर्ण होगा।"
12. बाद में, 9.12.2002 विदनांविक अति सूचना संख्या 2295 द्वारा सेवा विवविनयमों में विवविनयमन 106 अं ःस्र्थीाविप विकया गया। इसक े प्राव ान विनम्नानुसार है: "1. संतिक्षप्त नाम, प्रारंभ और अनुप्रयोग-III (1) इन विवविनयमों को उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति कम!चारी सेवा (दसवां संशो न) विवविनयम, 2002 कहा जा सक ा है। (2) वे उ.प्र. राजपत्र में अपने प्रकाशन की ारीख से प्रभावी होंगे। (3) वे उत्तर प्रदेश में सहकारी सविमति यों क े सभी कम!चारिरयों पर लागू होंगे।
2. नए विवविनयमन का अं ःस्र्थीापन -III उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयम, 1975 में विवविनयम 105 क े पश्चा ् विनम्नलिललिख विवविनयम अं ःस्र्थीाविप विकया जाएगा, अर्थीा! ्: -III “106. राज्य सरकार या रसिजस्ट्रार ऐसे आदेश पारिर कर सक े हैं जो इन विवविनयमों क े सार्थी असंग नहीं हैं जैसा यह या वह परिरलल्किw यों, सेवा क े विनयमों और श e, विनयुविक्त या पुन: विनयुविक्त, समाविप्त, बखा!स् गी या हटाने, प्रति विनयुविक्त या समायोजन क े संबं में उत्पन्न होने वाली विकसी भी कविठनाई को दूर करने क े लिलए आवश्यक और उतिच समझे।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
13. काडर प्राति करर्ण को राज्य सरकार की पूव! स्वीकृ ति क े सार्थी सदस्यों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण, परिरलल्किw यां, अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण और सेवा की अन्य श e से संबंति मामलों में डेयरी सेवा विवविनयमों क े विनयम 9 क े संदभ! में विवविनयमों को बनाने की आवश्यक ा र्थीी, जबविक विनयम 10 क े ह प्रशासविनक सविमति को सेवा क े सदस्यों पर समग्र विनयंत्रर्ण और पय!वेक्षर्ण करना र्थीा। डेयरी सेवा विवविनयमों क े विनयम 15 में विवचार विकया गया र्थीा विक विनयुविक्त प्राति कारी और सेवा क े सदस्यों पर अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने वाला प्राति करर्ण ऐसा होगा जैसा विवविनयमों में विन ा!रिर विकया गया हो। हालाँविक, परन् ुक में विवचार विकया गया र्थीा विक इस रह क े विवविनयमों क े प्रव !न क, प्रशासविनक सविमति का अध्यक्ष विनयुविक्त प्राति कारी होगा और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने वाले प्राति करर्ण क े रूप में भी काय! करेगा।
14. विनयम 10 सपविठ परन् ुक विनयम 15 क े ह प्रदत्त शविक्तयों क े प्रयोग में प्रशासविनक सविमति ने विदनांक 8.8.2016 को एक काया!लय आदेश पारिर विकया विक जुमा!ना लगाने से पहले, डेयरी दुग् आयुक्त/रसिजस्ट्रार की मंजूरी अविनवाय! होगी। उक्त परिरपत्र से सुसंग उद्धरर्ण विनम्नानुसार है: "...इसलिलए क ें द्रीयक ृ सेवा संवग! क े कम!चारिरयों क े मामले में, जब क विक उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयम, 1975 क े प्राव ान लागू नहीं हो े हैं, ब क जुमा!ना लगाने से पहले डेयरी दुग् आयुक्त/रसिजस्ट्रार की मंजूरी अविनवाय! है। इसलिलए, अध्यक्ष, प्रशासविनक सविमति, उत्तर प्रदेश सहकारी डेयरी फ े डरेशन और डेयरी दुग् संघ क ें द्रीयक ृ सेवा संवग!, पीसीडीएफ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मुख्यालय, लखनऊ को ए द्द्वारा विनद~शिश विकया जा ा है विक उपरोक्त संवग! क े सदस्यों क े लिखलाफ जुमा!ना लगाने से पहले डेयरी दुग् आयुक्त/रसिजस्ट्रार की पूव! स्वीक ृ ति उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयम, 1975 क े विवविनयमन 87 क े प्राव ानों क े ह आवश्यक रूप से प्राप्त की जा सक ी है।"
15. यह उक्त परिरपत्र क े संदभ! में है विक रसिजस्ट्रार क े रूप में कायe क े विनव!हन में आयुक्त (डेयरी विमल्क) से अनुमोदन क े बाद कम!चारी क े लिखलाफ सजा का आदेश पारिर विकया गया र्थीा।
16. उच्च न्यायालय ने चंद्र पाल सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य[7] में उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ क े एक विनर्ण!य पर अवलम्ब लिलया सिजसमें यह कहा गया र्थीा विक बोड! की पूव! स्वीक ृ ति प्राप्त नहीं की गई र्थीी जैसा विक सेवा विवविनयमों क े विवविनयमन 87 क े ह अपेतिक्ष है। यह नोट विकया गया र्थीा विक यद्यविप 17.11.1979 विदनांविक अति सूचना क े संदभ! में सेवा विवविनयम लागू नहीं हुए र्थीे, लेविकन सेवा विवविनयमों क े प्राव ानों से पहले विवद्यमान प्राव ान, 20.9.1984 विदनांविक संकल्प क े संदभ! में क ें द्रीयक ृ सेवाओं क े कम!चारिरयों पर लागू होंगे। यह भी अव ारिर विकया गया र्थीा विक विदनांक 17.11.1979 की अति सूचना का उल्लेख 20.9.1984 विदनांविक संकल्प में नहीं विकया गया र्थीा। इस प्रकार, यह विनष्कर्ष! विनकाला गया विक बोड! की मंजूरी क े विबना सजा का आदेश सेवा विवविनयमों क े विवविनयमन 87 क े संदभ! में वै नहीं र्थीा। इसलिलए, सजा क े आदेश को रद्द कर विदया गया र्थीा। चंद्र पाल सिंसह से सुसंग उद्धरर्ण विनम्नानुसार है: 7 रिरट-III ए संख्या 45263 वर्ष! 2011 विदनांक 9.1.2018 को पारिर । mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता क े कe पर विवचार विकया और अशिभलेख का परिरशीलन विकया। जहां क अनुमोदन भाग का संबं है, स्वीकाय! रूप से, सेवा से बखा!स् गी क े आदेश को पारिर करने से पहले बोड! द्वारा कोई अनुमोदन/सहमति प्राप्त नहीं की गई र्थीी। उ.प्र. सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयमन 1975 क े विवविनयमन 87 क े प्राव ान क े मद्देनजर, बखा!स् गी क े आदेश को पारिर करने से पहले बोड! की सहमति आवश्यक है। 17.11.1979 विदनांविक अति सूचना क े अनुसार, प्रादेशिशक सहकारी डेयरी फ े डरेशन लिलविमटेड, सिजसमें प्रार्थीविमक दुग् सहकारी सविमति शाविमल है, को भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े संबं में उ.प्र. सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयमन 1975 क े दायरे से बाहर रखा गया र्थीा और उसी अति सूचना द्वारा, सहकारी डेयरी फ े डरेशन क े वग! 1 और 2 कम!चारिरयों क े लिलए चयन सविमति का गठन विकया गया र्थीा । इसलिलए क ें द्रीयक ृ सेवाओं क े मामले में, विवविनयमन 87 का प्राव ान लागू होना बंद हो गया और विवविनयमन 1975 क े प्राव ान को अपनाने से पहले जो भी प्राव ान लागू र्थीा, वह क ें द्रीयक ृ सेवाओं क े कम!चारिरयों पर लागू होगा। जब बोड! क े विदनांक 20.9.1984 क े संकल्प द्वारा प्राव ान को अपनाया गया र्थीा, ो उसमें 1979 की अति सूचना का उल्लेख नहीं विकया गया र्थीा और प्रादेशिशक सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयम 1979 क े प्राव ानों को अपनाने क े संबं में संकल्प को ब क अपनाया गया जब क विक क ें द्रीयक ृ सेवाओं क े लिलए विवविनयमन बनाया नहीं गया। इसक े बाद, डेयरी आयुक्त/रसिजस्ट्रार द्वारा 13.31.2000 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विदनांविक आदेश द्वारा इसे स्पF विकया गया और मंजूरी दी गई और 20.9.1984 विदनांविक संकल्प को मंजूरी दी गई। अ ः जब क विवविनयम बनाये नहीं जा े ब क उ.प्र. सहकारी सविमति कम!चारी सेवा विवविनयम, 1975 क े उपबं लागू हो े हैं।"
17. हम पा े हैं विक उच्च न्यायालय आक्षेविप विनर्ण!य में और चंद्र पाल सिंसह में थ्यों और कानून की गल ारर्णाओं पर आगे बढ़ा। वास् व में, व !मान अपील में कम!चारी क े लिखलाफ अनुशासनात्मक काय!वाही विदनांक 21.4.2015 को शुरू की गई र्थीी। जांच रिरपोट! विदनांक 13.6.2018 को प्रस् ु की गई सिजसमें आरोप सं. 1 और 3 साविब हुए। इस प्रकार, जांच अति कारी द्वारा दज! विनष्कर्षe से विकसी भी असहमति को अशिभलिललिख करने का कोई सवाल ही नहीं र्थीा। बाद में 25.6.2018 को जांच रिरपोट! की एक प्रति संलग्न कर े हुए कम!चारी को कारर्ण ब ाओ नोविटस विदया गया। कम!चारी को व्यविक्तग सुनवाई का भी अवसर विदया गया। इसक े बाद, आयुक्त (डेयरी दू ) से अनुमोदन प्राप्त करने क े बाद सजा का आदेश पारिर विकया गया।
18. अति विनयम की ारा 122 और विनयमावली 1968 का विनयम 389-III क, राज्य सरकार को सहकारी सविमति यों क े कम!चारिरयों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े लिलए एक प्राति करर्ण का गठन करने का अति कार दे ा है। विदनांक 4.3.1972 की अति सूचना क े आ ार पर, उत्तर प्रदेश सहकारी संस्र्थीाग सेवा बोड! का गठन शीर्ष! स् रीय सविमति यों, क ें द्रीय या प्रार्थीविमक सविमति यों-III आविद क े कम!चारिरयों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े उद्देश्य से विकया गया र्थीा। बाद में, सेवा विवविनयमों क े विवविनयमन 87 ने अविनवाय! विकया विक बोड! क े पूव! सहमति क े विबना सजा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA का कोई आदेश पारिर नहीं विकया जा सक ा है। हालाँविक अति विनयम की ारा 122 और विनयमावली 1968 क े विनयम 389-III क क े ह राज्य सरकार को प्रदत्त शविक्तयों क े संदभ! में, पुनः 17.11.1979 विदनांविक अति सूचना जारी करक े, शीर्ष! स् रीय सविमति अर्थीा! प्रादेशिशक सहकारी डेयरी संघ, क ें द्रीय या प्रार्थीविमक दुग् सविमति यों, सिजनक े संचालन का क्षेत्र एक से अति क सिजलों या राज्य और सहकारी दुग् संघों क फ ै ला हुआ है, सिजनमें कानपुर सहकारी दुग् बोड! भी शाविमल है, को उत्तर प्रदेश सहकारी संस्र्थीाग सेवा बोड! क े विनयंत्रर्ण से बाहर कर विदया गया। श्रेर्णी I और II कम!चारिरयों क े संबं में एक चयन सविमति का गठन विकया गया र्थीा। इसक े बाद, चयन सविमति को डेयरी सहकारी सविमति यों क े कम!चारिरयों की भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े उद्देश्य से ब क क े लिलए सशक्त विकया गया र्थीा, जब क विक डेयरी सेवा विवविनयम 29.8.1984 को राजपत्र क े प्रकाशिश होने क े बाद लागू नहीं हुए र्थीे और सेवा विवविनयम लागू नहीं र्थीे क्योंविक यह राज्य द्वारा जारी 17.11.1979 विदनांविक अति सूचना से लागू होने क े लिलए रोक विदए गए र्थीे। काडर प्राति कारी द्वारा 20.09.1984 विदनांविक संकल्प सिजसमें यह प्राव ान र्थीा विक क ें द्रीयक ृ सेवा क े सदस्यों की सेवा श e को विवविनयम 1975 द्वारा शासिस विकया जाएगा, यह सेवा विवविनयमों क े विवविनयमन 87 की प्रयोज्य ा को पुनज0विव (बहाल) नहीं कर देगा क्योंविक डेयरी सेवा विवविनयम का विनयम 15 विनयुविक्त और अनुशासनात्मक प्राति करर्ण की परिरकल्पना कर ा है।
19. प्रशासविनक सविमति, डेयरी सेवा विवविनयमों क े विनयम 10 (i) क े संदभ! में सेवा क े सदस्यों पर समग्र विनयंत्रर्ण और पय!वेक्षर्ण का प्रयोग कर ी है। डेयरी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सेवा विवविनयमों क े विनयम 5 क े ह गविठ ऐसी प्रशासविनक सविमति विनयुविक्त प्राति कारी है जब क विक उक्त विवविनयमों क े विनयम 15 क े संदभ! में विवविनयम नहीं बनाए जा े हैं। इसलिलए 20.9.1984 विदनांविक संकल्प, विनयुविक्त या अनुशासनात्मक प्राति कारी का विन ा!रर्ण नहीं करेगा, यह सांविवति क विनयम अर्थीा! ् डेयरी सेवा विवविनयम क े अं ग! आ ा है।
20. डेयरी सेवा विनयमों को अति विनयम की ारा 122 क क े ह प्रदत्त अति कारिर ा क े प्रयोग में बनाया गया है। विवविनयम रसिजस्ट्रार या राज्य द्वारा अति विनयम की ारा 121 या 122 क े ह या डेयरी सेवा विवविनयमों क े विनयम 9 क े संदभ! में बनाए जा सक े हैं। इस रह क े विवविनयम उन विवविनयमों पर प्र ान ा रखेगें, सिजन्हें या ो रसिजस्ट्रार द्वारा या प्राति करर्ण द्वारा सिजनकों भ 0, प्रशिशक्षर्ण और अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का काय! सौंपा गया है, बनाया गया है या बनाया जाना अपेतिक्ष है । इसलिलए, विनयम 15 क े परन् ुक क े संदभ! में, प्रशासविनक सविमति का अध्यक्ष विनयुविक्त और अनुशासनात्मक प्राति करर्ण है। इसलिलए सहकारी दुग् सविमति यों क े कम!चारिरयों क े संबं में, विनयुविक्त प्राति कारी और/या अनुशासनात्मक प्राति करर्ण का विन ा!रर्ण करने क े लिलए सेवा विवविनयम अप्रयोज्य होंगे।
21. चंद्र पाल सिंसह में खण्ड़पीठ का ध्यान डेयरी सेवा विवविनयमों क े विनयम 15 की ओर नहीं खींचा गया र्थीा। उक्त विनयम क े परन् ुक ने विनयम 5 क े ह गविठ प्रशासविनक सविमति को उस समय क एक विनयुविक्त प्राति कारी क े रूप में सशक्त विकया और क ें द्रीक ृ सेवाओं क े कम!चारिरयों पर अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने का प्राति कार विदया जब क विक विवविनयम नहीं बनाए जा े। इस प्रकार 20.9.1984 विदनांविक संकल्प अन्य सेवा श e क े संबं में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लागू होगा। हालांविक अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण क े संबं में, डेयरी सेवा विवविनयम लागू होगा।
22. सेवा विवविनयमों का विवविनयमन 106 राज्य सरकार या रसिजस्ट्रार को ऐसे आदेश पारिर करने का अति कार दे ा है जो समाविप्त, बखा!स् गी या हटाने क े संबं में विवविनयमों क े सार्थी असंग नहीं हैं। लगाई गई सजा पदावनति की है न विक समाविप्त, बखा!स् गी या विनष्कासन की है। इसलिलए विवविनयमन 106 लागू नहीं होगा। कोई असंग ा या कविठनाई भी नहीं है सिजससे राज्य सरकार या रसिजस्ट्रार विवविनयमन 106 क े ह प्रदत्त शविक्तयों क े प्रयोग में हटाने क े लिलए सशक्त हो जायें।
23. चंद्र पाल सिंसह में, खण्ड़पीठ का यह विनष्कर्ष! विक 20.9.1984 को पारिर काडर प्राति कारी क े संकल्प में 1979 अति सूचना का उल्लेख नहीं विकया गया है, विनयुविक्त प्राति कारी पर विवचार करने वाले वै ाविनक विनयमों क े मद्देनजर असमर्थी!नीय है। इसलिलए विनयम 15 क े परन् ुक क े संदभ! में प्रशासविनक सविमति क े अध्यक्ष द्वारा पारिर सजा का आदेश सक्षम अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा है।
24. हालांविक प्रशासविनक सविमति ने 8.8.2016 को एक काया!लय आदेश पारिर विकया विक अध्यक्ष जुमा!ना लगाने से पहले डेयरी दुग् आयुक्त/रसिजस्ट्रार की पूव! स्वीक ृ ति मांगेंगे। प्रशासविनक सविमति का ऐसा विनर्ण!य स्व-III विनयामक है और व !मान मामले में प्रशासविनक सविमति द्वारा भी दुग् आयुक्त /रसिजस्ट्रार की पूव! स्वीक ृ ति मांग े हुए लागू की गई है।
25. जैसा विक पहले उल्लेख विकया गया है, विवविनयम 1975 को 1965 अति विनयम की ारा 122 क े ह प्रदत्त शविक्त क े प्रयोग में बनाया गया र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जब क विवविनयम 1975 को बनाया नहीं गया र्थीा, संपूर्ण! वै ाविनक व्यवस्र्थीा, सिजसक े संदभ! में सहकारी सविमति या सहकारी सविमति यों क े वग! में कम!चारिरयों क े अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण सविह सेवा श e को विवविनयविम विकया जा सक ा र्थीा, 1965 अति विनयम की ारा 121 और 122 क े संदभ! में र्थीी। इसलिलए विवविनयम 1975 का विवविनयम 87 इस रह क े सामान्य वै ाविनक व्यवस्र्थीा क े भाग क े रूप में देखा जाना चाविहए।
26. विदनांक 16.04.1976 को, 1965 अति विनयम में ारा 122-III क को अं ःस्र्थीाविप विकया गया र्थीा जो अब सेवाओं क े क ें द्रीयकरर्ण क े लिलए प्रदान विकया गया र्थीा। यह ारा एक सव परी खंड से शुरू हो ी है और इस प्रकार, इसका आशय 1965 अति विनयम की ारा 121 और 122 द्वारा परिरकल्किल्प सामान्य व्यवस्र्थीा पर एक अति भावी प्रभाव देने की है। 1965 अति विनयम की ारा 122-III क सरकार को विनयमों द्वारा, ऐसी सहकारी सविमति या सहकारी सविमति यों क े वग! क े कम!चारिरयों की एक या एक से अति क सेवाओं क े सृजन क े लिलए ऐसे प्राव ान करने का अति कार दे ी है जैसा सरकार उतिच समझे और सार्थी ही ऐसी सेवा क े लिलए विनयुक्त व्यविक्तयों की विनयुविक्त और विनष्कासन सविह सेवा की अन्य श e को विवविह करने का अति कार दे ी है।
27. यह 1965 अति विनयम की ारा 122-III क क े ह प्रदत्त शविक्त क े प्रयोग में र्थीा विक 1984 विनयमावली बनायी गयी र्थीी। विनयमावली 1984 क े विनयम 15 में कहा गया है विक विनयुविक्त प्राति कारी और सेवा क े सदस्यों पर अनुशासनात्मक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने वाले प्राति कारी ऐसे होंगे जो विवविनयमों में अति कशिर्थी विकए जाएं और जब क ऐसे विवविनयम प्रवृत्त नहीं हो जा े, ब mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क 'सविमति का अध्यक्ष विनयुविक्त प्राति कारी होगा और उन पर अनुशासविनक विनयंत्रर्ण का प्रयोग करने वाला प्राति कारी होगा'।
28. इस प्रकार 1965 अति विनयम की ारा 122-III क में संदर्भिभ विवशिशF वै ाविनक व्यवस्र्थीा क े संदभ! में, विनयम 15, 1965 अति विनयम की ारा 121 और 122 क े ह सामान्य विव रर्ण क े संबं में विवविनयमन बनाने की शविक्त क े प्रयोग में बनाए गए विवविनयमन 87, क े बजाय शासिस करने वाला सिसद्धां होगा। विनयम 15 यह परिरकल्पना नहीं कर ा है विक सविमति क े अध्यक्ष को विकसी भी प्राति कारी की कोई पूव! सहमति होना आवश्यक है।
29. इसलिलए विवविनयमन 1984 क े विनयमों क े स्पF आशय और जनादेश क े प्रति स्र्थीापन में विनयम 87 क े सिसद्धां ों पर अवलम्ब लेना या अर्थी! लगाना गल होगा।
30. 20.09.1984 विदनांविक संकल्प या उस मामले क े लिलए 08.08.2016 विदनांविक आदेश जो विवशुद्ध रूप से विवभागीय काय!कारी विनद~श हैं, वै ाविनक विनयम 15 को विवस्र्थीाविप नहीं कर सक े हैं र्थीा इसमें परिरकल्किल्प प्रविbया और एक आवश्यक ा को लगाना, विनयम 15 क े विवपरी होगा।
31. विवद्वान एकल पीठ ने पाया विक प्रशासविनक सविमति क े अध्यक्ष और दुग् आयुक्त एक ही हैं और समान व्यविक्त हैं, जो पारिर सजा क े आदेश को दूविर्ष कर ा है। हमें उक्त विनष्कर्ष! में कोई बल नहीं विमल ा है। सर विवलिलयम वेड ने अपनी प्रशासविनक विवति में कहा: "लेविकन ऐसे कई मामले हैं जहां कोई प्रति स्र्थीापन संभव नहीं है, क्योंविक विकसी और को काय! करने का अति कार नहीं है। प्राक ृ ति क न्याय को ब आवश्यक ा क े लिलए माग! प्रशस् करना mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA होगा; जब इसक े लिलए अन्यर्थीा विनर्ण!य लेने का कोई सा न नहीं है और न्याय या प्रशासन का ंत्र चरमरा जाएगा। आगे यह कहा गया: “प्रशासविनक मामलों में ऐसी आवश्यक ा उत्पन्न हो सक ी है। जहां क़ानून विकसी विवशेर्ष मंत्री या अति कारी को काय! करने का अति कार दे ा है, ो आम ौर पर वह अक े ला और एकमात्र व्यविक्त होगा जो ऐसा कर सक ा है। ब सिजम्मेदारी से बचने का कोई रीका नहीं है, भले ही वह व्यविक्तग रूप से रुतिच रख ा हो। वास् व में दातियत्व का हस् ां रर्ण शविक्त-III बाह्य ा का एक मान्य ा प्राप्त प्रकार है। एक मामले में यह असफल रूप से क ! विदया गया र्थीा विक हवाई अड्डे क े लिलए भूविम क े लिलए अविनवाय! खरीद आदेश की पुविF करने क े लिलए सक्षम एकमात्र मंत्री ने पूवा!ग्रह विदखा े हुए खुद को अयोग्य घोविर्ष कर विदया र्थीा और स्र्थीानीय प्राति करर्ण क े वल संसद क े स्र्थीानीय अति विनयम को लागू कर सक ा र्थीा।"
32. दुग् आयुक्त को अति विनयम द्वारा राज्य सरकार को प्रदत्त शविक्तयों क े प्रयोग में रसिजस्ट्रार क े रूप में विनयुक्त विकया गया है। रसिजस्ट्रार से अनुमोदन, डेयरी सेवा विवविनयमों क े संदभ! में गविठ प्रशासविनक सविमति क े संकल्प क े संदभ! में है। अति विनयम क े ह शविक्तयों क े प्रयोग पदनाम द्वारा प्रदान विकया जा ा है। सजा की पूव! स्वीक ृ ति रसिजस्ट्रार द्वारा है। यविद, संयोग से, रसिजस्ट्रार का पद ारर्ण करने वाला व्यविक्त प्रशासविनक सविमति का अध्यक्ष भी है, ो इसे अवै नहीं कहा जा सक ा क्योंविक वह अति विनयम या विवविनयमों क े संदभ! में रसिजस्ट्रार क े सार्थी-III सार्थी प्रशासविनक सविमति क े अध्यक्ष की शविक्तयों का प्रयोग कर रहा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
33. डेयरी सेवा विवविनयमों क े विनयम 15 क े परन् ुक क े संदभ! में अध्यक्ष अनुशासनात्मक प्राति कारी है। हालांविक, प्रशासविनक सविमति ने संकल्प पारिर विकया है विक डेयरी दुग् आयुक्त/रसिजस्ट्रार की मंजूरी अविनवाय! होगी, लेविकन इस रह क े संकल्प को विनयम 15 क े परं ुक क े संदभ! में पढ़ा जाना चाविहए जो प्रशासविनक सविमति क े अध्यक्ष को एक अनुशासनात्मक प्राति कारी होने का अति कार क्षेत्र प्रदान कर ा है। चूंविक प्रशासविनक सविमति का अध्यक्ष रसिजस्ट्रार हो ा है, इसलिलए सजा देने क े विनर्ण!य को पूव! अनुमोदन की आवश्यक ा नहीं हो सक ी है। हालाँविक, यविद रसिजस्ट्रार क े काया!लय से पूव! अनुमोदन मांगा गया है, ो यह काय!वाही को दूविर्ष नहीं करेगा।
34. इस प्रकार देखा गया, व !मान मामले में सविमति क े अध्यक्ष द्वारा प्रयोग की जाने वाली शविक्त विवविनयमन 87 क े अ ीन नहीं हो सक ी है। इसलिलए, व !मान मामले में सविमति क े अध्यक्ष द्वारा शविक्त क े प्रयोग में कु छ भी गल नहीं है।
35. इस प्रकार, हमें प्रशासविनक सविमति द्वारा पारिर सजा क े आदेश में कोई त्रुविट नहीं विमल ी है। हम पा े हैं विक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश विवति और थ्यों की सही समझ पर आ ारिर नहीं हैं। फलस्वरूप आदेशों को अपास् विकया जा ा है और रिरट यातिचका को खारिरज विकया जा ा है। अपील को अनुमति प्रदान की जा ी है। ………………………….....… (न्यायमूर्ति उदय उमेश ललिल ) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA....……………………….…. (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता)....…………………………. (न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट) नई विदल्ली; 23 माच! 2021 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA