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भारत का सर्वोच्च्च न्यायालय
दांडिक अपीलीय क्षेत्राधिकार
दाण्डिक अपीलीय संख्या 297/2021
(विशेष अवकाश याचिका (दांडिक)संख्या 5042/2018 से उत्पन्न)
हरि शंकर अग्रवाल अपीलार्थी(गण)
बनाम
राजस्थान राज्य और एक अन्य प्रतिवादी (गण)
आदेश
JUDGMENT
1. अनुमति दी गई।
2. अपीलकर्ता क े विद्वान अधिवक्ता और राजस्थान राज्य की ओर से विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मनीष सिंघवी को सुना। यह अपील राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 17.04.2018 को पारित फ ै सले और आदेश क े खिलाफ दायर की गई है, जिसक े द्वारा अपीलकर्ता द्वारा दायर आपराधिक विविध (याचिका) संख्या 1664/2018 को खारिज कर दिया गया था।
3. इस अपील को विनिश्चित करने क े लिए आवश्यक संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैंः- ओसवाल ट्रेडर्स शॉप पर दिनांक 02.03.2002 को किए गए निरीक्षण क े आधार पर अपराध अंतर्गत खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की धारा7/16 क े तहत चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग, (राजस्थान) द्वारा एक परिवाद दर्ज किया गया था। इस परिवाद में यह दावा किया गया था कि वाणिज्यिक कर विभाग, जयपुर से प्राप्त सूचना क े आधार पर फर्म का नामित व्यक्ति हरि शंकर अग्रवाल पुत्र श्री वासुदेव प्रसाद अग्रवाल है, इसलिए उसे पक्षकार बनाया गया है । अनुछेद 11 में आगे कहा गया है कि स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी, मथुरा से प्राप्त जानकारी क े अनुसार मेसर्स भोला बाबा मिल्क फ ू ड उद्योग क े निदेशक देवेंद्र सिंह भदौरिया हैं, जिसे भी पक्षकार क े रूप में शामिल किया गया। राजस्थान क े झालवाड़ क े न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में अपराध का संज्ञान लिया और दिनांक 04.08.2003 क े आदेश द्वारा समन जारी किया। दिनांक 04.08.2003 क े आदेश क े खिलाफ, अपीलकर्ता-हरि शंकर अग्रवाल ने आपराधिक मामला संख्या 17/2017 दायर किया, जिसमें निचली अदालत क े दिनांक 04.08.2003 क े आदेश को चुनौती दी गई थी।
4. अपीलकर्ता का वाद यह है कि वह इस फर्म में नामित नहीं था और देवेंद्र सिंह भदौरिया नाम क े व्यक्ति को नामित घोषित किया गया था। उसक े नामांकन क े बारे में जानकारी पहले से ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मथुरा को प्रस्तुत की गई थी, जो दिनांक 21. 10. 1995 को उन्हें प्राप्त हो चुकी थी और अपीलकर्ता क े विरुद्ध कोई आरोप नहीं होने क े कारण, अपीलकर्ता क े विरुद्ध अपराध का कोई संज्ञान नहीं लिया जा सकता था। विशेष न्यायाधीश ने दिनांक 16.02.2018 को इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसक े खिलाफ उच्च न्यायालय में आपराधिक विविध याचिका दायर की गई थी, जिसे उच्च न्यायालय क े आक्षेपित फ ै सले द्वारा खारिज कर दिया गया है। अपीलकर्ता क े विद्वत वकील ने संलग्नक पी-2 पर भरोसा करते करते हुए, जो कि प्रपत्र VIII में एक जानकारी है, जिसे दिनांक 21.02.1995 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रस्तुत किया गया, निवेदन करते हैं की देवेंद्र सिंह भदौरिया को नामित करने वाले प्रपत्र को पत्र दिनांकित 21.02.1995 द्वारा भेजा गया था, जिसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिनांक 21.02.1995 को विधिवत प्राप्त किया गया था इसलिए, अपीलकर्ता क े खिलाफ उसको नामांकित किए जाने का आरोप लगाने वाली शिकायत का संज्ञान नहीं लिया जाना चाहिए था। यह कथन किया जाता है कि दिनांक 21.10.1995 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा विधिवत प्राप्त पत्र दिनांकित 21.02.1995 की एक प्रति नीचे की अदालतों क े समक्ष प्रस्तुत की गई है और कथित दस्तावेज़ से स्पष्ट रूप से यह साबित है कि नामांकित व्यक्ति देवेंद्र सिंह भदौरिया थे और देवेंद्र सिंह भदौरिया क े खिलाफ ही संज्ञान लिया जा सकता था और इसलिए निचले न्यायालयों ने अपीलकर्ता क े दावे को खारिज करने में गलती की है।
5. राज्य की ओर से विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मनीष सिंघवी निवेदन करते हैं कि दस्तावेज (अनुलग्नक पी-2) दिनांकित 21.02.1995, जिसकी तामील किए जाने की दिनांक 21.10.1995 है, क े दावे पर निचले न्यायालयों द्वारा विश्वास नहीं किया गया है। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) झालावाड़, राजस्थान द्वारा दिनांक 16.02.2018 को पारित आदेश में इस दस्तावेज को स्वीकार न करने क े लिए कारण दिए गए हैं,इसलिए, अपीलकर्ता क े दावे को उचित रूप से खारिज कर दिया गया है।
6. हमने पक्षकारों क े विद्वान अधिवक्ता की दलीलों पर विचार किया है और रिकॉर्ड का अवलोकन किया है। इससे पहले कि हम आगे बढ़ें और पक्षकारों क े संबंधित तर्कों की जांच करें, हमें परिवाद क े अनुछेद 10 और 11 को पुन: प्रस्तुत करने की आवश्यकता है जो निम्नलिखित हैं: "10 यह कि मैसर्स फलोदी ट्रेडिंग क ं पनी द्वारा भोले बाबा मिल्क फ ू ड इंडस्ट्री, 181,सिंधी कॉलोनी से खरीदा गया क ृ ष्णा ब्रांड घी, जिसकी बिल संख्या 3074 दिनांकित 05/03/2002 है, को प्रस्तुत किया गया था, जिससे यह स्पष्ट है कि मैसर्स फलोदी ट्रेडिंग क ं पनी ने उक्त फर्म से घी की खरीद की है। वाणिज्यिक कर विभाग, जयपुर से प्राप्त सूचना क े अनुसार उक्त फर्म क े नामांकित व्यक्ति श्री हरि शंकर अग्रवाल पुत्र वासुदेव अग्रवाल हैं, इसलिए उन्हें भी पक्षकार बनाया गया है।
11. यह कि डिब्बों पर भोले बाबा मिल्क फ ू ड इंडस्ट्री, आगरा क े रूप में लेबल किया गया था और उक्त फर्म को तब भी कई पत्र दिए गए थे, जिसमें फर्म क े बारे में कोई भी जानकारी अस्वीकार नहीं की गई थी। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी, मथुरा से प्राप्त जानकारी क े अनुसार भोले बाबा मिल्क फ ू ड इंडस्ट्री क े निदेशक देवेंद्र सिंह भदौरिया पुत्र राम सेवक सिंह भदौरिया निवासी हनुमान नगर, फतेहाबाद, जिला आगरा को पक्षकार बनाया गया है।" 7.खाद्य अपमिश्रण अधिनियम, 1954, की धारा 17 क े अनुसार, क ं पनी द्वारा स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को खंड 17 (2) क े तहत नोटिस ऐसे रूप में और ऐसे तरीक े से दिया गया है, जैसा कि निर्धारित किया गया है,कि उसने निदेशक की लिखित सहमति से ऐसे निदेशक या प्रबंधक को नामित किया है जो जिम्मेदार व्यक्ति है। जब हम परिवाद क े अनुछेद 10 पर गौर करते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाणिज्यिक कर विभाग, जयपुर से प्राप्त जानकारी क े अनुसार नामित व्यक्ति हरि शंकर अग्रवाल हैं, जबकि परिवाद क े अनुछेद 11 में, यह उल्लेख किया गया है कि स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी, मथुरा से प्राप्त जानकारी क े अनुसार, निदेशक देवेंद्र सिंह भदौरिया हैं। धारा 17 क े तहत नामांकन स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी को देना होता है, शिकायत क े अनुसार ही स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी क े आधार पर वह देवेंद्र सिंह भदौरिया हैं। शिकायत में उपरोक्त बयान स्वयं अपीलकर्ता क े मामले को साबित करता है कि देवेंद्र सिंह भदौरिया क े नामांकन की जानकारी पत्र दिनांकित 21.02.1995 द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जो दिनांक 21.10.1995 को प्राप्त हुई थी।
8. अब, डॉ. मनीष सिंघवी, राज्य की ओर से विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता,द्वारा प्रस्तुत कारणों पर आते हुए, कि दस्तावेज दिनांक 21.02.1995 का है, जबकि मैसर्स भोले बाबा मिल्क फ ू ड उद्योग को दिनांक 06.03.1995 को निगमित किया गया था और इसका प्रस्ताव दायर किया गया था। इसलिए, जिस तारीख को नामांकित किया गया था, उसक े बारे में सबूत का भार अपीलकर्ता पर है। विशेष न्यायाधीश की उपरोक्त टिप्पणी किसी भी तरह से नामांकन पत्र क े प्रस्तुतीकरण को नकारती नहीं है, जो मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मथुरा को दिनांक 21.10.1995 को प्राप्त हुआ था। क ं पनी क े निगमन क े बाद और दिनांक 06.03.1995 को संदर्भित प्रस्ताव क े बाद ही सूचना प्राप्त हुई थी। विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मनीष सिंघवी यह भी निवेदन करते हैं कि नामांकन प्रपत्र क ं पनी क े लेटर हेड में जारी किया गया था, जिस पर नहीं भेजा जाना चाहिए था।
9. हमने पेपर बुक क े पृष्ठ 18 पर नामांकन प्रपत्र का अवलोकन किया है, जिसमें फॉर्म VIII (नियम 12-बी) का स्पष्ट उल्लेख है।
10. प्रतिवादी क े विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता का यह निवेदन कि नामांकन प्रपत्र लेटर हेड पर नहीं भेजे जा सकने की बात ग्राह्य नहीं है। जब नामांकन फॉर्म 8 में था और विधिवत भेजा और प्राप्त किया गया था, तो इसे इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि इसे क ं पनी क े लेटर हेड पर भेजा गया था। जैसा कि ऊपर कहा गया है, परिवाद क े प्रकथन स्पष्ट रूप से इंगित करते हैं कि स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण क े पास यह देवेंद्र सिंह भदौरिया का नाम ही था। इसलिए वही क ं पनी क े मामलों क े लिए जिम्मेदार था और हरि शंकर अग्रवाल क े संदर्भ की कोई प्रासंगिकता नहीं थी, जिनक े नाम को वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा सूचित किया गया था।
11. पूर्वगामी कारणों को ध्यान में रखते हुए, हमारा विचार है कि उच्च न्यायालय क े साथ-साथ विद्वत विशेष न्यायाधीश ने अपीलकर्ता क े मामले को अस्वीकार करने में गलती की। यह भी ध्यान देने योग्य है कि परिवाद में वर्तमान अपीलकर्ता क े खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं है, इसक े अलावा कि उसे एक नामांकित व्यक्ति क े रूप में अभियोजित किया जा रहा था। इस प्रकार, हमारा विचार है कि खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की धारा 7/16 क े तहत अपराध क े लिए अपीलकर्ता क े खिलाफ कोई संज्ञान नहीं लिया जा सकता था और निचले न्यायालयों ने संज्ञान लेने में गलती की थी।
12. परिणामस्वरूप, अपील स्वीकार की जाती हैऔर संज्ञान लेने वाले आदेश क े साथ-साथ नीचे क े न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों को रद्द कर दिया जाता है। ………………. न्यायाधीश (अशोक भूषण) (एस अब्दुल नजीर) (हेमंत गुप्ता) नई दिल्ली। 10 मार्च, 2021 यह अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल 'सुवास'क े जरिए अनुवादक की सहायता से किया गया है। अस्वीकरण: यह निर्णय वादी क े प्रतिबंधित उपयोग क े लिए उसकी भाषा में समझाने क े लिए स्थानीय भाषा में अनुवादित किया गया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सभी व्यावहारिक और आधिकारिक उद्देश्यों क े लिए, निर्णय का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिक होगा और निष्पादन और कार्यान्वयन क े उद्देश्य से अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।