Uttar Pradesh State v. Dr. Manoj Kumar Sharma

Supreme Court of India · 09 Jul 2021
Sanjay Kishan Kaul; Hemant Gupta
Civil Appeal No. 2320 of 2021 @ SLP (Civil) No. 7487 of 2020
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that a government servant who fails to join posting without valid reason is not entitled to full arrears, emphasized the necessity of proper posting orders, and cautioned courts against unnecessary summoning of senior officers.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 2320 वर्ष" 2021
(एसएलपी (दीवानी) सं. 7487 वर्ष" 2020 से उत्पन्न)
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ...... अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
डॉ. मनोज क
ु मार शमा" ...... प्रत्यर्थी3 (गण)
निनण"य
न्यायमूर्ति हेमन् गुप्ता
JUDGMENT

1. व "मान अपील में निदनांक 05.03.2020 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ की खण्ड़पीठ द्वारा पारिर एक आदेश को चुनौ ी दी गयी है, जो निदनांक 07.08.2019 को निवद्वान एकल पीठ द्वारा पारिर आदेश की पुनिQ कर ा है। पूव क्त आदेशों द्वारा अपीलक ा"ओं को प्रत्यर्थी3, इसक े बाद रिरट यातिचकाक ा" क े रूप में संदर्भिभ, को बकाया मजदूरी की गणना करने और 50% भुग ान करने क े लिलए र्थीा कानून क े अनुसार सभी परिरणामी लाभ प्रदान करने क े लिलए निनद[शिश निकया गया र्थीा।

2. रिरट यातिचकाक ा" को उत्तर प्रदेश राज्य क े पुनग"ठन से पहले एक तिचनिकत्सा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2021 INSC 327 अति कारी क े रूप में उत्तरांचल राज्य (संक्षेप में 'उत्तरांचल सरकार' अब उत्तराखंड क े रूप में संदर्भिभ ) में ैना निकया गया र्थीा। रिरट यातिचकाक ा" सनिह उत्तर प्रदेश राज्य क े तिचनिकत्सा अति कारिरयों द्वारा निदए गए निवकल्प क े अनुसार रिरट यातिचकाक ा" को उत्तर प्रदेश राज्य में स्र्थीानां रिर कर निदया गया र्थीा। उ.प्र. प्रां ीय तिचनिकत्सा और स्वास्थ्य सेवाओं (पुरुर्ष क ै डर) से संबंति वग"-2 श्रेणी क े 208 तिचनिकत्सा अति कारिरयों और 5 दं डॉक्टरों को 6.3.2002 को उत्तर प्रदेश राज्य में ैना निकया गया र्थीा। रिरट यातिचकाक ा" का नाम तिचनिकत्सा अति कारिरयों की उक्त सूची क े क्रम संख्या 99 पर निदखाई दे ा है। रिरट यातिचकाक ा" को मुख्य तिचनिकत्सा अति कारी क े अ ीन बदायूं में रिरपोट" करना र्थीा।

3. उत्तराखंड राज्य ने तिचनिकत्सा अति कारिरयों को चरणों में पदमुक्त निकया। रिरट यातिचकाक ा" दूसरे चरण में 22 तिचनिकत्सा अति कारिरयों में से र्थीे, जिजन्हें उत्तर प्रदेश सरकार क े निदनांक 06.03.2002 क े पोस्टिंस्टग आदेश क े संदभ" में उत्तराखंड राज्य द्वारा 5.7.2003 को पदमुक्त निकया गया र्थीा। रिरट यातिचकाक ा" का नाम क्रम संख्या 13 पर निदखाई दे ा है, ब वह जिजला अस्प ाल, उत्तरकाशी, उत्तराखंड में सज"न क े रूप में ैना र्थीे।रिरट यातिचकाक ा" को 12.09.2003 को मुख्य तिचनिकत्सा अ ीक्षक, जिजला अस्प ाल, उत्तरकाशी द्वारा पदमुक्त निकया गया।

4. इसक े बाद रिरट यातिचकाक ा" ने पोस्टिंस्टग क े स्र्थीान अर्थीा" ् बदायूं में रिरपोट" करने क े बजाय, निनदेशक तिचनिकत्सा स्वास्थ्य सेवा, लखनऊ को निदनांक 19.09.2003 को अपनी ज्वाइनिंनग रिरपोट" प्रस् ु कर े हुए एक पत्र निदया। उसी निदन एक अन्य पत्र द्वारा, मुजफ्फरनगर, गाजिजयाबाद या निबजनौर जिजले में ैना ी देने का अनुरो निकया गया। भले ही रिरट यातिचकाक ा" बदायूं में ैना र्थीा, लेनिकन उन्होनें वहां काय"भार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ग्रहण नहीं निकया और उस काया"लय में निनदेशक तिचनिकत्सा स्वास्थ्य सेवा को अपनी ज्वाइनिंनग का एक पत्र देकर अच्छी रह से सं ुQ र्थीा।

5. इसक े बाद, रिरट यातिचकाक ा" ने वर्ष" 2006 में एक रिरट यातिचका दायर की, जिजसमें उसने राज्य को यह आदेश देने क े लिलए परमादेश लेख का दावा निकया निक रिरट यातिचकाक ा" को निवशेर्ष क ै डर में उसकी योग्य ा और अनुभव क े अनुसार निकसी भी अस्प ाल में तिचनिकत्सा अति कारी क े रूप में निनयुनिक्त करे। निवद्वान एकल न्याया ीश ने रिरट यातिचका को इस आ ार पर अनुमति दी निक प्रति शपर्थीपत्र में इसका उल्लेख नहीं निकया गया र्थीा निक रिरट यातिचकाक ा" को काया"लय ज्ञापन या पोस्टिंस्टग आदेश निकस रीक े से निदया गया र्थीा। राज्य क े अति वक्ता द्वारा यह क " निक रिरट यातिचकाक ा" ने बदायूं में काय"भार ग्रहण नहीं निकया र्थीा, को रिरट यातिचकाक ा" क े निकसी भी पत्र द्वारा समर्भिर्थी नहीं कहा गया र्थीा।निवद्वान एकल न्याया ीश ने पाया निक रिरट यातिचकाक ा" की ैना ी क े लिलए निदनांक 19.09.2003 क े पत्र क े अनुसरण में कोई निनण"य नहीं लिलया गया है। इस प्रकार न्यायालय ने निनष्कर्ष" निनकाला निक ैना ी आदेश या स्र्थीानां रण आदेश कभी भी निकसी भी समय रिरट यातिचकाक ा" को संसूतिच या निदया नहीं गया र्थीा। इसलिलए, राज्य क े वकील द्वारा संदर्भिभ निनण"य मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में लागू नहीं र्थीे। इसक े अलावा सतिचव, तिचनिकत्सा स्वास्थ्य, उ.प्र. सरकार को अदाल में बुलाया गया, जिजन्होंने रिरट यातिचकाक ा" की ैना ी ना होने को सही ठहराया।न्यायालय ने निनम्नानुसार निनष्कर्ष" निनकालाः "अपने अति कारिरयों क े सार्थी व्यवहार करने में राज्य सरकार का पूव क्त आचरण सुखद स्थिस्र्थीति नहीं है। राज्य सरकार को जिजम्मेदारी क े सार्थी काम करना चानिहए र्थीा और मामले में निनण"य लेने क े लिलए त्वरिर होना चानिहए र्थीा। राज्य सरकार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2006 से रिरट यातिचका दायर निकए जाने क े बाद से इस मामले पर चुप्पी सा े हुए है। इसलिलए, इन परिरस्थिस्र्थीति यों में राज्य सरकार की कार"वाई को उतिच नहीं ठहराया जा सक ा है और न ही राज्य सरकार 6 माच", 2002 को जारी निकए गए ैना ी आदेश का लाभ उठा सक ी है। इसलिलए हमारा निवचार है निक इस रह क े संवेदनहीन रीक े से काय" करने क े लिलए राज्य सरकार पर भारी लाग लगाई जानी चानिहए। हम दनुसार राज्य सरकार पर 50,000/- रुपये की लाग लगा े हैं। राज्य सरकार पंद्रह निदनों क े भी र इस न्यायालय क े समक्ष लाग जमा करेगी, जिजसे इस न्यायालय क े मध्यस्र्थी ा क ें द्र में स्र्थीानां रिर निकया जाएगा। इसक े अलावा, राज्य सरकार को पूव क्त अवति क े भी र यातिचकाक ा" क े संबं में ैना ी आदेश जारी करने क े लिलए परमादेश की प्रक ृ ति में एक लेख जारी निकया जा ा है। व "मान रिरट यातिचका में बकाया मजदूरी (वे न) का प्रश्न खुला छोड़ निदया जा ा है। सतिचव, तिचनिकत्सा स्वास्थ्य को निफर से पेश होने की आवश्यक ा नहीं है।"

6. उच्च न्यायालय क े उक्त आदेश क े अनुपालन में, निदनांक 09.12.2016 को रिरट यातिचकाक ा" को एक नया ैना ी आदेश जारी निकया गया र्थीा, जिजसमें उन्हें मुख्य तिचनिकत्सा अति कारी, मुजफ्फरनगर क े अ ीन ैना निकया गया र्थीा। इसक े बाद, बकाया वे न क े भुग ान क े लिलए निनद[श क े लिलए एक और रिरट यातिचका दायर की गई र्थीी। रिरट यातिचका को चार सप्ताह की अवति क े भी र बकाया वे न क े प्रश्न का फ ै सला करने क े निनद[श क े सार्थी निनपटाया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

7. प्र ान सतिचव ने निनम्नलिललिख आ ारों पर निदनांक 27.2.2009 को बकाया वे न देने को अस्वीकार कर निदयाः "यह उल्लेखनीय है निक डॉ. मनोज क ु मार शमा" सज"न, जिजला अस्प ाल उत्तरकाशी ने उत्तरांचल राज्य से 05.07.2003 को पदमुक्त होने क े बाद निदनांक 18.09.2003 को महानिनदेशक तिचनिकत्सा और स्वास्थ्य सेवा उ.प्र. लखनऊ क े समक्ष काय"भार ग्रहण निकया र्थीा बार-बार अपने गृह जिजला सहारनपुर क े पास ैना ी क े लिलए अनुरो निकया। यनिद ैना ी क े स्र्थीान क े लिलए उनक े अनुरो को स्वीकार नहीं निकया गया र्थीा, ो वह यह नहीं कह सक े र्थीे निक उनक े काय"भार ग्रहण में कोई बा ा उत्पन्न हुई र्थीी और वह ैना ी क े इं जार में रहे। डॉ. मनोज क ु मार शमा" की निदनांक 05.07.2003 से 09.12.2016 क की अवति को अनिनवाय" प्र ीक्षा अवति क े रूप में नहीं माना जा सक ा क्योंनिक उन्हें ैना ी दी गई र्थीी, लेनिकन उन्होंने ैना ी आदेश का पालन नहीं निकया और लगभग 13 वर्षƒ क बेकार बैठने का कोई औतिचत्य नहीं र्थीा और उनक े अभ्यावेदन पर लिलए जाने वाले निनण"य की प्रत्याशा में सरकारी काम नहीं करना और ऐसा रवैया काम करने की उनकी त्पर ा को प्रति निंबनिब नहीं कर ा है।"

8. इस प्रकार उक्त अवति क े लिलए बकाया वे न को इस कारण से अस्वीकार कर निदया गया निक रिरट यातिचकाक ा" ने 05.07.2003 से 09.12.2016 क कोई सरकारी काय" नहीं निकया है और इसे निवत्तीय हस् पुस्थिस् का खण्ड़-2-भाग 2-4 क े मूल निनयम 9(6)(बी) (iii) क े प्राव ानों क े ह अनिनवाय" प्र ीक्षा अवति क े रूप में नहीं माना जा सक ा है और इस प्रकार उसे पूव क्त अवति क े लिलए अति रिरक्त सामान्य अवकाश निदया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

9. रिरट यातिचकाक ा" ने एक अन्य रिरट यातिचका क े माध्यम से उक्त निनण"य को चुनौ ी दी।निवद्वान एकल पीठ क े आदेश से प ा चल ा है निक निदनांक 08.02.2018 को एक काया"लय ज्ञापन जारी निकया गया र्थीा जिजसमें काय"भार ग्रहण न करने क े आ ार पर निवभागीय जांच शुरू करने का प्रस् ाव र्थीा। अवमानना यातिचका दायर की गई र्थीी और ऐसा प्र ी हो ा है निक अवमानना यातिचका क े मद्देनजर, काया"लय ज्ञापन 29.05.2018 को रद्द कर निदया गया र्थीा। निदनांक 7.8.2019 क े आदेश में निवद्वान एकल न्याया ीश ने कहा निक 26.09.2016 की रिरट यातिचका में आदेश को अंति म रूप निदया गया र्थीा, इसलिलए बकाया वे न का लाभ अस्वीकार नहीं निकया जा सक ा र्थीा।न्यायालय ने निनम्नानुसार अव ारिर निकयाः "यह निक एक बार जब 26.09.2016 क े आदेश को अंति म रूप निमल गया र्थीा और इसको कोई चुनौ ी नहीं र्थीी, इस प्रकार उपरोक्त रिरट यातिचका में वाद-निबन्दु और निनष्कर्ष" प्रत्यर्भिर्थीयों क े अति कार -क्षेत्र में नहीं हो सक े हैं निक वे 27.02.2019 क े आक्षेनिप काया"लय ज्ञापन को जारी करक े अप्रत्यक्ष रूप से चुनौ ी दें।यह अब अनिनण[3] निबर्षय नहीं है निक जो प्रत्यक्ष रूप से नहीं निकया जा सक ा है वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं निकया जा सक ा है।व "मान थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, यातिचकाक ा" क े निदनांक 05.07.2003 से 09.12.2016 क े बीच काय"भार ग्रहण नहीं करने क े थ्य क े संबं में वाद-निबन्दु 26.09.2016 को निनण[3] पूव" रिरट यातिचका में मुख्य वाद-निबन्दु र्थीा। इस न्यायालय की खण्ड़- पीठ ने पूव क्त रिरट यातिचका का फ ै सला कर े हुए और अनुमति दे े हुए स्पQ रूप से देखा र्थीा निक राज्य इस थ्य को स्र्थीानिप करने में असमर्थी" र्थीा निक निदनांक 06.03.2002 का कशिर्थी निनयुनिक्त आदेश कभी भी यातिचकाक ा" को निदया गया र्थीा या संसूतिच निकया गया र्थीा।इस न्यायालय ने पहले ही पूव क्त निनण"य क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रासंनिगक निहस्से का पुनः-उद्धरण निकया है और इस प्रकार, यह स्पQ है निक निदनांक 27.02.2019 क े काया"लय ज्ञापन में दर्भिश कारण वही है जो यातिचकाक ा" क े पक्ष में पहले की रिरट यातिचका में य निकया गया र्थीा।"

10. निवद्वान एकल न्याया ीश ने इस थ्य पर भी ध्यान निदया निक रिरट यातिचकाक ा" को इस अवति क े दौरान लाभकारी रूप से निनयोजिज निकया गया र्थीा, लेनिकन निफर भी बकाया वे न का 50% मंजूर निकया गया। न्यायालय ने निनम्नानुसार अव ारिर निकयाः "पूव क्त क े बावजूद, इस न्यायालय को पक्षकारों क े बीच साम्य ा को सं ुलिल करना है और इस थ्य पर निवचार कर े हुए निक यातिचकाक ा" ने प्रत्यर्थी3 की दलील से इनकार नहीं निकया निक वह लाभकारी रूप से निनयोजिज र्थीा, भले ही यह सानिब करने का भार निनयोक्ता पर इस थ्य क े सार्थी जुड़ा हुआ र्थीा निक प्रत्यर्थी3 ने क े वल अपने जवाबी हलफनामे में एक दलील ली है और इसकी दलील को पुQ करने क े लिलए कोई सकारात्मक सबू या दस् ावेज अशिभलेख पर नहीं रखा गया र्थीा। इसलिलए एक समग्र दृनिQकोण ले े हुए, यह न्यायालय की राय है निक यनिद यातिचकाक ा" को निदनांक 05.07.2003 से 28.12.2016 की अवति क े लिलए 50% बकाया वे न, यातिचकाक ा" क े निनरं र सेवा में होने को मान े हुए निदया जा ा है ो न्याय का उद्देश्य पूरा हो जाएगा। जहां क कानून क े ह स्वीकाय" अन्य परिरणामी लाभ का संबं है, आक्षेनिप आदेश में प्रत्यर्थी3 भी स्वीकार कर े हैं निक इसे यातिचकाक ा" को निदया जाना है।" निवद्वान खण्ड़-पीठ द्वारा पुQ निकया गया उक्त आदेश व "मान अपील में चुनौ ी की निवर्षय-वस् ु है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

11. पहले दौर में निवद्वान एकल पीठ ने कहा निक राज्य ने इस बा को प्रस् ु नहीं निकया है निक ैना ी आदेश उसे क ै से और कब संसूतिच निकया गया र्थीा। न्यायालय को इस थ्य क े बारे में प ा र्थीा निक रिरट यातिचकाक ा" को उत्तराखंड सरकार ने 12.09.2003 को पदमुनिक्त दी है और निदनांक 12.09.2003 को संयुक्त निनदेशक श्री क े एम मेहरोत्रा द्वारा एक संचार संबोति निकया गया है और उन्होंने 18.09.2003 को एक निनयुनिक्त रिरपोट" प्रस् ु की र्थीी। उक्त निनयुनिक्त रिरपोट" ैना ी क े स्र्थीान पर नहीं बस्थिल्क निनदेशक, तिचनिकत्सा स्वास्थ्य सेवा क े समक्ष प्रस् ु निकया गया र्थीा। हम पा े हैं निक इस पृष्ठभूनिम में उच्च न्यायालय, जब रिरट यातिचकाक ा" उत्तराखंड से पदमुक्त हो गया र्थीा, इस निनष्कर्ष" पर नहीं आ सक ा र्थीा निक राज्य ने यह नहीं निदखाया है निक रिरट यातिचकाक ा" को स्र्थीानां रण और ैना ी आदेश क ै से निदया गया र्थीा। उच्च न्यायालय ने पंजाब राज्य बनाम खेमी राम[1] में इस न्यायालय क े एक निनण"य की अनदेखी की, जिजसमें यह प्रश्न उत्पन्न हुआ र्थीा निक क्या निनलंबन का आदेश कम"चारी को प्रभानिव होने क े लिलए वास् व में प्राप्त निकया जाना र्थीा। इस न्यायालय ने इस प्रश्न का परीक्षण निकया निक क्या आदेश का संचार करने का म लब संबंति सरकारी कम"चारी द्वारा इसकी वास् निवक रसीद है। न्यायालय ने निनम्नानुसार अव ारिर निकयाः "16....यह देखा जाएगा निक हमारे सामने उद्धृ सभी निनण"यों में आक्षेनिप आदेश क े संचार को आवश्यक माना गया र्थीा न निक संबंति अति कारी द्वारा इसकी वास् निवक प्रानिप्त को और इस रह क े संचार को आवश्यक माना गया र्थीा क्योंनिक आदेश जारी होने और वास् व में संबंति व्यनिक्त को भेजने क, ऐसा आदेश देने वाला प्राति कारी अपने निवचार को बदलने और यनिद वह उतिच समझे ो इसे

1. एआईआर 1970 एससी 214 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संशोति करने की स्थिस्र्थीति में होगा।लेनिकन एक बार ऐसा आदेश भेज निदया जा ा है, ो यह ऐसे प्राति करण क े निनयंत्रण से बाहर हो जा ा है और इसलिलए इसक े मन को बदलने या इसे संशोति करने का कोई मौका नहीं होगा। हमारे निवचार में, एक बार जब कोई आदेश जारी निकया जा ा है और इसे संबंति सरकारी कम"चारी को भेज निदया जा ा है, ो यह माना जाना चानिहए निक उसे सूतिच निकया गया र्थीा, इससे कोई फक " नहीं पड़ ा निक वह कब वास् व में प्राप्त हुआ। हमें खुद को इस दृनिQकोण को स्वीकार करने क े लिलए राजी करना मुस्थिश्कल है निक यह उसक े द्वारा वास् निवक प्रानिप्त की ारीख से ही प्रभावी हो ा है। यनिद यह संप्रेर्षण का सही अर्थी" है, ो एक सरकारी कम"चारी क े लिलए यह संभव होगा निक वह अपनी सेवानिनवृलित्त की ारीख क े बाद क एक रीक े या दूसरे द्वारा इसे प्राप्त करने से बचकर एक आदेश को प्रभावी ढंग से निवफल कर दे, भले ही ऐसा आदेश पारिर निकया गया हो और ऐसी ारीख से पहले उसे भेज निदया गया हो। कोई अति कारी जिजसक े निवरूद्ध कार"वाई करने की मांग की जा ी है, इस प्रकार ऐसे आदेशों की ामील क े लिलए उसक े द्वारा निदए गए प े से दूर चला जा सक ा है या जानबूझकर गल प ा दे सक ा है और इस प्रकार इसकी प्रानिप्त (प्राप्त करने को) को रोक सक ा है या देरी कर सक ा है और उस पर अपनी ामील को निवफल करने में सक्षम हो सक ा है।। "सप्रेर्षण" शब्द का ऐसा अर्थी" ब क नहीं निदया जाना चानिहए जब क निक प्रश्नग प्राव ान स्पQ रूप से प्राव ान नहीं कर ा है।.........”

12. इसलिलए रिरट यातिचकाक ा" संप्रेर्षण न होने क े आ ार पर स्र्थीानां रण क े आदेश की अवहेलना नहीं कर सक ा र्थीा जब 100 से अति क तिचनिकत्सा अति कारिरयों को इसी प्रकार क े सामान्य स्र्थीानां रण आदेश द्वारा स्र्थीानां रिर निकया गया र्थीा। सबसे पहले, उन्हें उत्तराखंड राज्य से पदमुनिक्त निमली और दूसरा, उसने ैना ी क े स्र्थीान Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर रिरपोट" नहीं की, बस्थिल्क निनदेशक तिचनिकत्सा स्वास्थ्य सेवा क े समक्ष एक आवेदन प्रस् ु निकया। पहले दौर में, रिरट यातिचकाक ा" को ैना ी आदेश जारी करने क े निनद[श देने क े बाद भी, बकाया वे न का प्रश्न अनिनण[3] छोड़ निदया गया र्थीा। इसक े बाद, एक अन्य रिरट यातिचका क े अनुसरण में, राज्य क े सक्षम प्राति कारी ने बकाया वे न को नामंजूर कर े हुए एक आदेश पारिर निकया, लेनिकन पूव क्त अवति क े लिलए असा ारण अवकाश प्रदान निकया।

13. रिरट यातिचकाक ा" क े निवद्वान अति वक्ता ने कहा निक रिरट यातिचका में उन्होंने उसे उत्तर प्रदेश राज्य में कहीं भी ैना करने की मांग की है और निदनांक 26.09.2016 क े आदेश में यह निनष्कर्ष" अशिभलिललिख निकया गया है निक निदनांक 06.03.2002 क े ैना ी आदेश को रिरट यातिचकाक ा" पर ामील नहीं निकया गया र्थीा। यह भी ब ाया गया है निक उत्तराखंड सरकार ने तिचनिकत्सा अति कारिरयों को चरणबद्ध रीक े से पदमुक्त निकया है और उन सभी ने निनदेशक तिचनिकत्सा स्वास्थ्य सेवा, उ.प्र. को ज्वाइनिंनग रिरपोट" सौंपी है, न निक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश में उजिल्ललिख ैना ी क े स्र्थीान पर। उत्तर प्रदेश सरकार में सामान्य अभ्यास क े लिलए एक संदभ" निदया जा ा है जैसा निक एक तिचनिकत्सा अति कारी को ैना ी स्र्थील क े ीन निवकल्प प्रस् ु करने क े लिलए कहा जा ा है और यह अभ्यास अभी भी जारी है।

14. हम उठाए गए कƒ में कोई बल नहीं पा े हैं।रिरट यातिचकाक ा" को 2003 में उत्तराखंड सरकार द्वारा पदमुनिक्त दी गई र्थीी, हालांनिक उन्होंने 2006 में रिरट यातिचका दायर की, जिजसका अर्थी" है निक ीन वर्षƒ से, "वह ैना ी आदेशों का इं जार कर रहे र्थीे।" ैना ी आदेशों की प्र ीक्षा की आड़ में, उन्होंने निनजी प्रैस्थिक्टस शुरू की और जानबूझकर रिरट यातिचका पर निनण"य में लगभग 13 वर्षƒ क देरी की। रिरट यातिचका Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निदनांक 22.09.2008 को चूक क े रूप में खारिरज कर दी गई और 11.12.2014 को बहाल कर दी गई। रिरट यातिचकाक ा" क े इस रह क े आचरण से प ा चल ा है निक वह उत्तराखंड सरकार द्वारा पदमुनिक्त निमलने क े बाद तिचनिकत्सा अति कारी क े रूप में निनयुक्त होने का इच्छ ु क नहीं र्थीा। रिरट यातिचकाक ा" यह क " नहीं दे सक ा है निक उसे निदनांक 06.03.2002 का आदेश नहीं निमला र्थीा। निदनांक 05.07.2003 को उत्तराखंड सरकार द्वारा उन्हें पदमुनिक्त देने का आदेश 06.03.2002 को उत्तर प्रदेश सरकार क े आदेश क े अनुपालन में है। यह झूठी अज्ञान ा का मामला है। भले ही यह प्रर्थीा है निक निनदेशक तिचनिकत्सा स्वास्थ्य सेवा क े काया"लय में तिचनिकत्सा अति कारी द्वारा रिरपोट" करना एक आ ार नहीं है जिजसक े आ ार पर अवै ा को जारी रखने की अनुमति दी जा सक ी है। ैना ी का निवकल्प क े वल भी उपलब् होगा जब सामान्य स्र्थीानान् रण हों, न निक ऐसे मामले में जहां तिचनिकत्सा अति कारिरयों को उनका मूल राज्य निदए गए निवकल्प क े मद्देनजर आवंनिट निकया गया हो।

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15. जैसा निक ीसरे दौर में निवद्वान एकल पीठ द्वारा उल्लेख निकया गया र्थीा, निक रिरट यातिचकाक ा" लाभकारी रूप से निनयोजिज र्थीा और यह कल्पना करना असंभव है निक कोई तिचनिकत्सा अति कारी 13 लंबे वर्षƒ क बेकार बैठेगा। इसलिलए पूरी अवति क े लिलए 50% बकाया वे न की मंजूरी निकसी क े अपने स्वयं क े अपक ृ त्य का लाभ देगा जो जानबूझकर 13 लंबे वर्षƒ क े लिलए ड्यूटी से निवर रहे और अब बकाया वे न का भी लाभ लेना चाह े हैं। रिरट यातिचकाक ा" का ऐसा रुख न क े वल अनुतिच है, बस्थिल्क पूरी रह से निंनदनीय है। ड्यूटी से अनुपस्थिस्र्थी रहने क े लिलए रिरट यातिचकाक ा" क े लिखलाफ कार"वाई नहीं करने में राज्य लापरवाह र्थीा। एक बार जब रिरट यातिचकाक ा" ने ैना ी क े स्र्थीान पर काय"भार ग्रहण नहीं निकया, ो राज्य को अनुशासनात्मक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA काय"वाही शुरू करने क े लिलए कदम उठाने चानिहए र्थीे।निफर भी, राज्य ने पहली रिरट यातिचका में निनद[शों क े अनुसार ैना ी आदेश जारी निकया। वर्ष" 2018 में काय"वाही शुरू करने क े राज्य क े प्रयास से न्यायालय क्र ू द्ध हुआ। राज्य सरकार ने अनुशासनात्मक काय"वाही शुरू करने क े लिलए काय"वाही रद्द कर दी।

16. एक और निनराशाजनक स्थिस्र्थीति जो हमारे संज्ञान में आ ी है, वह यह है निक पहले दौर में, सतिचव, तिचनिकत्सा स्वास्थ्य को न्यायालय में व्यनिक्तग रूप से बुलाया गया र्थीा। व "मान काय"वाही में भी, 22.2.2021 को उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ क े आदेश पर रोक लगाने क े बाद, उच्च न्यायालय द्वारा निदनांक 2.3.2021 को सुनवाई की अगली ारीख पर अति कारी की व्यनिक्तग उपस्थिस्र्थीति की मांग करने का आदेश पारिर निकया गया र्थीा। इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, व "मान काय"वाही में इस न्यायालय ने निदनांक 6.4.2021 को निनम्नलिललिख आदेश पारिर निकयाः- "22.02.2021 को, हमने निवशेर्ष अनुमति यातिचका में नोनिटस जारी निकया र्थीा और आक्षेनिप आदेश क े लागू होने पर रोक लगा दी र्थीी। 02.03.2021 को पारिर आदेश क े कारण अवमानना काय"वाही को रोकने क े लिलए व "मान आवेदन दायर निकया गया है। कम से कम कहने क े लिलए, हम निदनांक 02.03.2021 क े आदेश क े परिरशीलन से काफी हैरान हैं। एक बार आदेश क े लागू होने पर रोक लगा दी गई है, ो इसका स्वाभानिवक परिरणाम यह होगा निक अवमानना काय"वाही को रोक निदया जाएगा। ऐसा नहीं है निक इस पहलू को अवमानना यातिचका सं. 139/2020 पर निवचार करने वाले निवद्वान न्याया ीश क े ध्यान में नहीं लाया गया र्थीा क्योंनिक व्यनिक्तग उपस्थिस्र्थीति से छ ू ट क े लिलए एक आवेदन दायर निकया गया र्थीा। हालाँनिक, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व्यनिक्तग उपस्थिस्र्थीति से छ ू ट क े वल 02.03.2021 की ारीख क े लिलए दी गई र्थीी और यह मामला 08.04.2021 को सूचीबद्ध निकया गया र्थीा, एक बार निफर दोनों अति कारिरयों को पहले क े आदेश निदनांक 05.02.2021 क े अनुपालन में अदाल में उपस्थिस्र्थी रहने का निनद[श निदया गया र्थीा। एक बार जिजस आदेश पर अवमानना का आरोप लगाया गया र्थीा, उस पर रोक लगा दी गई र्थीी, ो अति कारिरयों को बुलाने का कोई कारण नहीं होगा क्योंनिक उस आदेश का पालन न करने का कोई सवाल ही नहीं र्थीा जिजस पर रोक लगा दी गई र्थीी। इस न्यायालय ने न्यातियक घोर्षणाओं क े माध्यम से निवशिभन्न अवसरों पर भी अनावश्यक रूप से अति कारिरयों को अदाल में बुलाने की प्रर्थीा को अनुतिच ठहराया है। उस संदभ" में, यह देखा गया है निक न्यायपालिलका में आम आदमी क े भरोसे, आस्र्थीा और निवश्वास को अनावश्यक और अनुतिच प्रदश"न या शनिक्त क े प्रयोग से नQ नहीं निकया जा सक ा है। शनिक्त जिज नी अति क हो, ऐसी शनिक्त का प्रयोग करने की जिजम्मेदारी उ नी ही अति क होनी चानिहए[2] । न्यायालय द्वारा उच्च अति कारिरयों को बार-बार, कारणात्मक और ढुलमुल रीक े से लब करने की सराहना नहीं की जा सक ी है। हम यह जोड़ सक े हैं निक इसका म लब यह नहीं है निक बाध्य स्थिस्र्थीति यों में ऐसा नहीं निकया जा सक ा है लेनिकन उच्च अति कारिरयों को अपमानिन करना इसका उद्देश्य नहीं हो सक ा है3 । व "मान मामले में, हम अवमानना काय"वाही से संबंति हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है निक यनिद आदेश का अनुपालन नहीं निकया जा ा है, ो हाजिजर होने को निनद[शिश निकया जा सक ा है जब क निक छ ू ट नहीं दी जा ी है। हालाँनिक, यनिद आदेश क े लागू होने को रोक निदया जा ा है, ो हम यह समझने में असमर्थी" हैं निक अगली

2. उत्तर प्रदेश और अन्य बनाम जसवीर सिंसह और अन्य- (2011) 4 एससीसी 288

3. आर.एस. सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश मलेरिरया निनरीक्षक संघ और अन्य- (2011) 4 एससीसी 281 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ारीख क े लिलए अति कारिरयों को बुलाकर क्या उद्देश्य पूरा निकया जा रहा र्थीा क्योंनिक न्यायालय द्वारा स्टे निदए जाने क े बाद कोई निवशेर्ष ति शिर्थी निन ा"रिर नहीं की गई र्थीी। हम मान े हैं निक यह अति कारिरयों का अनावश्यक उत्पीड़न है और 02.03.2021 को आदेश पारिर करने का कोई कारण नहीं र्थीा। इसक े परिरणामस्वरूप यातिचकाक ा"ओं को व "मान आवेदन देने क े लिलए मजबूर होना पड़ा। हम उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ पीठ क े समक्ष लंनिब अवमानना यातिचका सं. 139/2020 में अवमानना काय"वाही को रोक े हैं और आगे यह स्पQ कर े हैं निक निकसी भी संबंति अति कारी की उपस्थिस्र्थीति की आवश्यक ा नहीं है।हम यह भी स्पQ कर े हैं निक अवमानना काय"वाही को निफर से शुरू करने क े लिलए, जैसे ही और जब अवसर उत्पन्न हो ा है, ो मामले को निकसी अन्य न्याया ीश की पीठ क े समक्ष रखा जाएगा। इस आदेश की एक प्रति उस निवद्वान न्याया ीश क े समक्ष रखी जानी चानिहए जिजसने इस आदेश को पारिर निकया और सार्थी ही मुख्य न्याया ीश क े समक्ष भी रखी जानी चानिहए।व "मान अपील को निनस् ारिर निकया जा ा है।"

17. कति पय उच्च न्यायालयों में ुरं निबना क ु छ सोचे समझें अति कारिरयों को बुलाने और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव डालने की एक प्रर्थीा निवकजिस हुई है। न्यायपालिलका और काय"पालिलका क े बीच शनिक्तयों क े पृर्थीक्करण की रेखा को, अति कारिरयों को बुलाकर और एक रह से अदाल की सनक और इच्छा क े अनुसार आदेश पारिर करने क े लिलए दबाव बनाकर, पार करने की कोशिशश की जा ी है।

18. काय"पालिलका क े लोक अति कारी भी शासन क े ीसरे अंग क े रूप में अपने क "व्यों का पालन कर रहे हैं। अति कारिरयों द्वारा निकए गए काय" या निनण"य उन्हें लाभ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पहुंचाने क े लिलए नहीं हैं, बस्थिल्क साव"जनिनक न क े संरक्षक क े रूप में और प्रशासन क े निह में, क ु छ निनण"य लिलए जाने क े लिलए बाध्य हैं। उच्च न्यायालय क े पास हमेशा उस निनण"य को अपास् करने का निवकल्प हो ा है जो न्यातियक समीक्षा क े परीक्षण को पूरा नहीं कर ा है, लेनिकन अति कारिरयों को बार-बार बुलाना सराहनीय नहीं है। यह कठोर शब्दों में निंनदनीय है।

19. इस न्यायालय ने तिडवीजनल मैनेजर, अरावली गोल्फ क्लब और अन्य बनाम चंद्रहास और अन्य[4] वाद क े निनण"य में कहा निक न्याया ीशों को अपनी सीमा का प ा होना चानिहए। उनमें शील और नम्र ा होनी चानिहए और सम्राटों की रह व्यवहार नहीं करना चानिहए।निव ातियका, काय"पालिलका और न्यायपालिलका सभी क े अपने-अपने व्यापक काय"क्षेत्र हैं।राज्य क े इन ीन अंगों में से निकसी को भी दूसरे क े क्षेत्र पर अति क्रमण करना उतिच नहीं है, अन्यर्थीा संनिव ान प्रदत्त नाजुक सं ुलन निबगड़ जाएगा और एक प्रति निक्रया होगी।न्यायालय ने इस प्रकार अशिभनिन ा"रिर निकयाः "19. हमारे संनिव ान क े अ ीन निव ातियका, काय"पालिलका और न्यायपालिलका सभी क े अपने व्यापक काय"क्षेत्र हैं। सामान्य ः राज्य क े इन ीन अंगों में से निकसी को भी दूसरे क े क्षेत्र पर अति क्रमण करना उतिच नहीं है, अन्यर्थीा संनिव ान प्रदत्त नाजुक सं ुलन निबगड़ जाएगा और एक प्रति निक्रया होगी।

20. न्याया ीशों को अपनी सीमा का प ा होना चानिहए और सरकार चलाने का प्रयास नहीं करना चानिहए।उनमें शील और नम्र ा होनी चानिहए और सम्राटों की रह व्यवहार नहीं करना चानिहए। संनिव ान क े ह शनिक्तयों का व्यापक पृर्थीक्करण है और राज्य क े प्रत्येक अंग- निव ातियका, काय"पालिलका और न्यायपालिलका को

4. (2008) 1 एससीसी 683 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दूसरे क े प्रति सम्मान रखना चानिहए और एक दूसरे क े क्षेत्र में अति क्रमण नहीं करना चानिहए।

21. पहली बार फ्रांसीसी निवचारक मोंटेस्क्यू द्वारा (अपनी पुस् क द स्थिस्परिरट ऑफ लॉज में) प्रति पानिद शनिक्तयों क े पृर्थीक्करण का जिसद्धां भार में भी व्यापक रूप से इस क्षेत्र को ारण कर ा है।अपनी पुस् क द स्थिस्परिरट ऑफ लॉज क े अध्याय XI में मोंटेस्कयू लिलख े हैंः “जब निव ायी और काय"कारी शनिक्तयां एक ही व्यनिक्त में या मजिजस्ट्रेटों क े एक ही निनकाय में हो ी हैं, ो कोई स्व ंत्र ा नहीं हो सक ी है क्योंनिक आशंकाएं पैदा हो सक ी हैं, कहीं ऐसा न हो निक वो सम्राट या सीनेट अत्याचारी रीक े से उन्हें निनष्पानिद करने क े लिलए अत्याचारी कानून बनाये। निफर, यनिद न्यातियक शनिक्त को निव ायी और काय"पालिलका से अलग नहीं निकया जा ा है, ो कोई स्व ंत्र ा नहीं है। यनिद यह निव ायी क े सार्थी जुड़ जा ा है, ो निवर्षय का जीवन और स्व ंत्र ा मनमाने निनयंत्रण क े अ ीन हो जाएगी; न्याया ीश ब निव ातियका होगा। अगर यह काय"कारी शनिक्त हो जा ा, ो न्याया ीश निंहसा और उत्पीड़न क े सार्थी व्यवहार कर सक ा है। सब क ु छ समाप्त हो जाएगा, यनिद एक ही आदमी या एक ही निनकाय, चाहे वह क ु लीन हो या लोगों का, में ीन शनिक्तयों होगीं अर्थीा" ् कानून बनाने की शनिक्त, साव"जनिनक प्रस् ावों को निनष्पानिद करने की शनिक्त और व्यनिक्तयों क े मामलों पर निवचारण करने की शनिक्त।" (प्रभाव वर्ति ) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हम ऊपर व्यक्त निकए गए दृनिQकोण से पूरी रह सहम हैं। उपयु"क्त उद्धरण में मोंटेस्क्यू की चे ावनी आज भार ीय न्यायपालिलका क े लिलए निवशेर्ष रूप से उपयुक्त और समयबद्ध है, क्योंनिक प्रायः अन्य दो अंगों क े क्षेत्र में "अति चार" और अति क्रमण क े लिलए इसकी ठीक ही आलोचना की जा ी है।"

20. इस प्रकार, हमें लग ा है, यह दोहराने का समय है निक लोक अति कारिरयों को अनावश्यक रूप से अदाल में नहीं बुलाया जाना चानिहए। जब निकसी अति कारी को न्यायालय में बुलाया जा ा है ो न्यायालय की गरिरमा और वैभव बढ़ ा नहीं है। न्यायालय क े सम्मान की आज्ञा दी जानी चानिहए और मांग नहीं की जानी चानिहए और साव"जनिनक अति कारिरयों को बुलाकर इसे बढ़ाया नहीं जाना चानिहए। अन्य आति कारिरक काय" की कीम पर लोक अति कारी की उपस्थिस्र्थीति दज" की जा ी है जिजसको उनकी जरूर हो ी है।कभी-कभी, अति कारिरयों को भी लंबी दूरी य करनी हो ी है। इसलिलए, अति कारी को बुलाना जननिह क े लिखलाफ है क्योंनिक उसे सौंपे गए कई महत्वपूण" कायƒ में देरी हो जा ी है, अति कारी पर अति रिरक्त बोझ पड़ ा है या उसकी राय का इं जार करने वाले निनण"यों में देरी हो ी है। न्यायालय की काय"वाही में भी समय लग ा है, क्योंनिक अब क न्यायालयों में य समय में सुनवाई का कोई ंत्र नहीं है। न्यायालयों क े पास कलम की शनिक्त है जो न्यायालय में निकसी अति कारी की उपस्थिस्र्थीति से अति क प्रभावी है।यनिद कोई निवशेर्ष मुद्दा न्यायालय क े समक्ष निवचार क े लिलए उठ ा है और राज्य का प्रति निनति त्व करने वाले अति वक्ता जवाब देने में सक्षम नहीं हैं, ो आदेश में इस रह क े संदेह को लिलखने और राज्य या उसक े अति कारिरयों को जवाब देने क े लिलए समय देने की सलाह दी जा ी है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

21. रिरट यातिचकाक ा" बदायूं में ैना र्थीा। उन्हें ैना ी क े स्र्थीान पर रिरपोट" करना र्थीा और ैना ी क े स्र्थीान पर रिरपोट" करने क े बाद, उन्हें राज्य की आवश्यक ा क े अनुसार, यनिद अनुमति हो, ो स्र्थीानां रण क े लिलए कहना चानिहए र्थीा। लेनिकन जहाँ उन्हें पहली बार ैना निकया गया र्थीा, उस स्र्थीान पर ज्वाइन निकए निबना वह ैना ी की जगह य नहीं कर सक े र्थीे। इसलिलए, हम पा े हैं निक उच्च न्यायालय क े आदेश निदनांक 05.03.2020 और 07.08.2019 पूरी रह से गैर-न्यायोतिच, अनुतिच, मनमाने और अवै हैं। इसे अपास् निकया जा ा है और अपील को निबना लाग आदेश क े अनुमति दी जा ी है।...…………………………... (न्यायमूर्ति संजय निकशन कौल)..………………………....... (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता) नई निदल्ली; 9 जुलाई 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA