Supertech Limited v. Emerald Court Residential Welfare Association

Supreme Court of India · 31 Aug 2021
Dr. Nanjay Y. Chandrachud; A. R. Shah
Civil Appeal Nos. 5041-5050 of 2021 @ SLP (C) Nos. 11959, 14314, 12470, 14262, 21035, 31117, 12427, 12947, 12948 of 2014 and 12191 of 2021
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the demolition order against towers T-16 and T-17 in Noida, holding that the construction complied with applicable building regulations and statutory provisions, and affirmed the locus standi of Resident Welfare Associations to enforce such regulations.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं 5041 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) सं. 11959 वर्ष 2014 से उद्भू )
सुपरटेक लिलवि,टेड ….अपीलक ा
बना, ए,राल्ड कोट विनवासी-स्वा,ी कल्याण संघ एवं अन्य .... उत्तरदा ा
सह
सिसविवल अपील सं 5042 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) संख्या 14314 वर्ष 2014 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5043 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) संख्या 12470 वर्ष 2014 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5044 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) संख्या 14262 वर्ष 2014 से उद्भू ) mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
सह
सिसविवल अपील सं 5045 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) संख्या 21035 वर्ष 2014 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5046 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) संख्या 31117 वर्ष 2014 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5047 वर्ष 2021
(एसएलपी (सी) संख्या 12427 वर्ष 2015 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5048 वर्ष 2021
( एसएलपी (सी) संख्या 12947 वर्ष 2015 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5049 वर्ष 2021
( एसएलपी (सी) संख्या 12948 वर्ष 2015 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं 5050 वर्ष 2021
एसएलपी (सी) संख्या 12191 वर्ष 2021 से उद्भू mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
(डायरी संख्या 28571 वर्ष 2018 )
सह
अव,ानना याति?का (सी) संख्या 380 वर्ष 2021
अन् र्ग
विवशेर्ष अनु,ति याति?का (सी) संख्या 14314 वर्ष 2014
सह
अव,ानना याति?का (सी) संख्या 381 वर्ष 2021
अन् र्ग
विवशेर्ष अनु,ति याति?का (सी) संख्या 14314 वर्ष 2014
सह
अव,ानना याति?का (सी) संख्या 382 वर्ष 2021
अन् र्ग
विवशेर्ष अनु,ति याति?का (सी) संख्या 14314 वर्ष 2014
सह
अव,ानना याति?का (सी) संख्या 383 वर्ष 2021
अन् र्ग
विवशेर्ष अनु,ति याति?का (सी) संख्या 14314 वर्ष 2014
एवं सह mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
अव,ानना याति?का (सी) संख्या 384 वर्ष 2021
अन् र्ग
विवशेर्ष अनु,ति याति?का (सी) संख्या 14314 वर्ष 2014
विनणय
न्याय,ूर्ति डॉ. नंजय वाई. ?ंद्र?ूड़
सू?ी
एक थ्यात्,क और प्रविKयात्,क इति हास
क. 1 अपीलें
क. 2 ए,राल्ड कोट परिरयोजना ए
क. 3 पहली संशोति योजना
क. 4 दूसरी संशोति योजना
क. 5 ीसरी संशोति योजना
क. 6 संशोति योजनाओं क
े लिOलाफ शिशकाय ें
क. 7 इलाहाबाद उच्च न्यायालय क
े स,क्ष कायवाविहयां
क. 8 इस न्यायालय क
े स,क्ष कायवाविहयां
O-अति वक्ता क
े क
र्ग. आरंशिभक विटप्पशिणयां mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
घ-भवन विन,ाण विवविनय,ों क
े ह दूरी की आवश्यक ा का उल्लंघन
घ. 1 एनबीआर 2006 और 2010 का उल्लंघन
घ 1.1 “विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों” की व्याख्या
घ 1. 2 “इ,ार ों क
े अंति , छोर” की व्याख्या
घ. 2 एनबीसी 2005 का उल्लंघन
घ. 3 अवि` सुरक्षा ,ानदंडों का उल्लंघन
ङ-आरडब्ल्यूए की सह,ति
ङ. 1 उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, की प्रयोज्य ा
ङ. 2 उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 की प्रयोज्य ा
ङ. 3 आरडब्ल्यूए की सह,ति की आवश्यक ा
? वि,लीभर्ग और अवै विन,ाण
छ सारांश
ज अं व d आवेदन
JUDGMENT

1. अनु,ति प्रदान की र्गई। क. थ्यात्,क और प्रविKयात्,क इति हास क. 1 - अपीलें mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. ये अपीलें एक रिरट याति?का1,ें इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विदये र्गये 11 अप्रैल, 2014 विदनांविक विनणय से उद्भू हैं जो प्रथ, प्रति वादी,ए,राल्ड कोट ग्रुप हाउसिंसर्ग सोसाइटी2 क े आवासीय कल्याण संघ[3] द्वारा संस्थिस्थ की र्गयी थी।

3. अपने विनणय द्वारा उच्च न्यायालय ने विनदmश विदयाः (i) प्लॉट नंबर 4, सेक्टर 93 ए, नोएडा,ें ए,राल्ड कोट,ें स्थिस्थ टावर -164 और 175 का ीसरे प्रति वादी न्यू ओOला औद्योविर्गक विवकास प्राति करण[6] द्वारा ध्वस् ीकरण, सिजसका विन,ाण अपीलक ा, सुपरटेक लिलवि,टेड[7] द्वारा विकया र्गया था। (ii) ध्वस् ीकरण और हटाने की लार्ग अपीलक ा द्वारा वहन की जाएर्गी, सिजस,ें विवफल रहने पर नोएडा इसे भूवि, राजस्व बकाया क े रूप,ें वसूल करेर्गा (iii) उत्तर प्रदेश औद्योविर्गक क्षेत्र विवकास अति विनय,,1976[8] की ारा 12 द्वारा यथा स,ाविवष्ट उत्तर प्रदेश शहरी विवकास अति विनय,, 1973[9] की ारा 49 क े ह अशिभयोजन क े लिलए,ंजूरी, अपीलक ा क े अति कारिरयों और नोएडा क े अति कारिरयों क े द्वारा यूपीआईएडी अति विनय, 1976 और उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट 1 Writ Petition (Civil) No 65085 of 2012 2 “RWA” 3 “Emerald Court” 4 “T-16”/“Ceyane” 5 “T-17”/“Apex” 6 “NOIDA” 7 Supertech” 8 “UPIAD Act 1976” 9 “UPUD Act 1973” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (विन,ाण, स्वावि,त्व एवं रOरOाव का संव न) अति विनय, 201010 क े संभाविव उल्लंघन क े लिलए दी जाएर्गी; और (iv) अपीलक ा द्वारा टी-16 और टी-17,ें अपाट,ेंट बुक करने वाले Oरीदारों द्वारा विनवेश की र्गई राशिश का प्रति दाय, 14 प्रति श वार्षिर्षक ब्याज क े साथ वापसी।

4. व,ान अपीलों,ें इन विनदेशों की युविक्तयुक्त ा को इस न्यायालय क े स,क्ष ?ुनौ ी दी र्गई है। क. 2 – ए,राल्ड कोट परिरयोजना

5. 23 नवंबर 2004 को, नोएडा ने अपीलक ा को 48,263 वर्ग,ीटर भूवि, का एक भूOंड आवंविट विकया। यह ज,ीन ए,राल्ड कोट क े ना, से एक ग्रुप हाउसिंसर्ग सोसायटी क े विवकास क े लिलए आवंविट की र्गई थी।

6. पट्टे का पहला विवलेO अपीलक ा और नोएडा क े बी? 16,ा? 2005 को विनष्पाविद विकया र्गया था। कब्जा प्र,ाण पत्र 17,ा? 2005 को जारी विकया र्गया था।

7. 20 जून 2005 को, नोएडा ने ?ौदह टावरों और नौ,ंसिजलों (जी + 9) वाले ए,राल्ड कोट क े विन,ाण क े लिलए भवन योजना को,ंजूरी दी।यह,ंजूरी न्यू ओOला औद्योविर्गक विवकास क्षेत्र भवन विन,ाण विवविनय, एवं विनदmश 198611 क े ह दी र्गई थी। इन ?ौदह टावरों का विन,ाण शुरू हुआ। क. 3 पहली संशोति योजना 10“UP Apartments Act 2010” 11 “NBR 1986” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

8. 21 जून 2006 को, नोएडा द्वारा अपीलक ा क े पक्ष,ें उसी भूOण्ड प्लॉट नंबर 4,ें 6556.51 वर्ग,ीटर क े अति रिरक्त भूवि, क्षेत्र क े लिलए एक पूरक पट्टा विवलेO विनष्पाविद विकया र्गया था। प्रथ, पट्टा विवलेO क े ह आवंविट,ौजूदा होल्डिंल्डर्ग को वि,लाकर, अपीलक ा क े पास आवंविट क ु ल पट्टा क्षेत्र बढ़कर 54,819.51 वर्ग,ीटर हो र्गया। पूरक पट्टा विवलेO,ें कहा र्गया है विक: (I) ध्वस् परिरसर अपीलाथd को पहले से लीज पर विदए र्गए नोएडा क े सेक्टर 93 ए क े प्लॉट नंबर 4 का विहस्सा,ाना जाएर्गा; (II),ूल पट्टा विवलेO और आवंटन की सभी अन्य श ‘ अपरिरवर्ति रहेंर्गी और नए ध्वस् परिरसरों पर लार्गू होंर्गी और अपीलाथd पर बाध्यकारी होर्गीं; (III) लीज की अवति 16,ा?, 2005 से शुरू होर्गी;और (IV) नोएडा क े सेक्टर 93 ए,ें प्लॉट नंबर 4 का क ु ल क्षेत्रफल 54,819.51 वर्ग,ीटर है। अति रिरक्त भूवि, क े संबं,ें अपीलक ा को कब्जा प्र,ाण पत्र 23 जून 2006 को जारी विकया र्गया।

9. 5 विदसंबर 2006 को, न्यू ओOला औद्योविर्गक विवकास क्षेत्र भवन विवविनय, एवं विनदmश 200612 को अति सूति? विकया र्गया था। एनबीआर 2006 क े ह, 2006 क े बाद नए आवंविटयों क े लिलए ल क्षेत्र-अनुपा 13 को 1.[5] से बढ़ाकर 2 कर विदया र्गया। विवविनय,न 33.2.3(i),ें विनम्नलिललिO प्राव ान विकया र्गया हैः “33. 'फ्लोर एरिरया रेशिशयो' ज,ीनी कवरेज और ऊ ं ?ाई सी,ाएं। 12 “NBR 2006” 13 “FAR” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA […] 33.2.[3] आवश्यक ा क े आ ार पर,ुख्य कायकारी अति कारी द्वारा य की र्गई कोई अन्य उपयोविर्ग ा।

10. 29 विदसंबर 2006 को, नोएडा ने एनबीआर 2006 क े ह ए,राल्ड कोट क े लिलए पहली संशोति योजना को,ंजूरी दी, सिजसक े द्वारा,ूल ?ौदह टावरों,ें पहले से स्वीक ृ जी + 9,ंसिजलों क े अलावा दो अति रिरक्त,ंसिजल परिरकस्थिल्प थे सिजससे उन सभी,ें भू ल और ग्यारह,ंसिजल (जी + 11),ें हो र्गयी। इसक े अलावा, अति रिरक्त भवनों को भी,ंजूरी दी र्गई, ना, ः(i) टावर-15 (भू ल और 11,ंसिजलों से वि,लकर) (जी + 11) (ii) टी-16 (भू ल क े 1 विंवर्ग और ग्यारह,ंसिजलों सविह ) और भू ल क े 3 विंवर्ग और ?ार,ंसिजलों (जी + 4) (iii) एक शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (भू ल और पहली,ंसिजल) (जी + 1)। न ीज न, पहली संशोति योजना क े ह, नोएडा ने क ु ल सोलह टावरों (जी + 11) (सिजस,ें प्रत्येक की ऊ ं ?ाई 37,ीटर होर्गी) और एक शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (जी + 1) की अनु,ति दी। यह ध्यान रOना,हत्वपूण है विक अपीलक ा उस क्षेत्र क े कारण यह अति रिरक्त विन,ाण करने,ें सक्ष, हुआ जो उसे पूरक पट्टा विवलेO क े ह उपलब् कराया र्गया था, और इसक े अलावा, जब अपीलक ा ने Oरीदारों को फ्ल ै ट आवंविट विकए, उस स,य अति रिरक्त पट्टा भूवि, पर क े वल एक छोटी इ,ार की ही अनु,ति दी र्गयी थी। इस बा पर प्रकाश डालना भी आवश्यक है विक पहली संशोति योजना,ें टावर-114 क े सा,ने एक हरिर क्षेत्र की परिरकल्पना की र्गई थी। Oरीदारों क े अनुसार, जब फ्ल ै ट बे?े र्गए थे, ो 14 “T-1”/ “Aster 2” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपीलक ा क े ब्रोशर,ें 29 विदसंबर, 2006 को पहली संशोति योजना क े अनुसार जानकारी प्रदान की र्गयी थी, सिजस,ें टी-1 क े सा,ने क े क्षेत्र को एक हरिर क्षेत्र क े रूप,ें विदOाया र्गया था।

11. 10 अप्रैल 2008 को, पहले आठ टावरों (जी + 11) क े संबं,ें एक पूण ा प्र,ाण पत्र प्रदान विकया र्गया था। इसक े बाद, विवशिभन्न फ्ल ै टों क े,ालिलकों को अपीलक ा द्वारा कब्जा प्रदान विकया र्गया।,हत्वपूण बा यह है विक पूण ा,ानति?त्र,ें भी टी-1 क े सा,ने एक हरिर क्षेत्र दशाया र्गया था, जहां व,ान,ें टी-16 और टी-17 का विन,ाण विकया जा रहा है। क. 4 दूसरी संशोति योजना

12. 28 फरवरी, 2009 को उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा एक अति सू?ना जारी की र्गई थी, सिजस,ें नए आवंविटयों क े लिलए एफएआर को 2 (एनबीआर 2006 द्वारा यथा उपबंति ) से बढ़ाकर 2.75 कर विदया र्गया था। इसक े अलावा, अति सू?ना,ें Oरीदे जाने योग्य एफएआर का भी प्राव ान विकया र्गया है, सिजसक े अनुसार पुराने आवंटी (जैसे विक अपीलक ा) अपने,ौजूदा एफएआर 1.[5] क े आ ार क े अति क, 33 प्रति श क एफएआर Oरीद सक े थे।

13. 3 जुलाई, 2009 को नोएडा ने विनणय लिलया विक 28 फरवरी, 2009 की अति सू?ना क े ह पुराने आवंविटयों क े लिलए,ौजूदा आ ार एफएआर क े 33 प्रति श एफएआर की Oरीद को अन्य आवंविटयों क े बराबर लाया जाना ?ाविहए। इसक े परिरणा,स्वरूप पुराने आवंविटयों क े लिलए Oरीद योग्य एफएआर को बढ़ाकर

2.75 प्रति श कर विदया जाएर्गा। हालांविक इस संबं,ें उत्तर प्रदेश सरकार की अति सू?ना का इं जार विकया जा रहा था। अपीलक ा का कहना है विक, विकसी भी,ा,ले,ें, नोएडा क े विनणय क े आ ार पर, उसने टी-16 और टी-17 क े विन,ाण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की योजना इस रह से बनाई सिजससे अति रिरक्त एफएआर को पूरा विकया जा सक े जो बाद की ारीO,ें Oरीद क े लिलए उपलब् हो सक े ।

14. 19 नवंबर 2009 को, 28 फरवरी 2009 की अति सू?ना का अवलंब ले े हुए, अपीलक ा ने आठ करोड़ रुपये की लार्ग से अपने,ौजूदा आ ार 1.[5] एफएआर का ैं ीस प्रति श Oरीदा, सिजससे इसका उपलब् एफएआर बढ़कर 1.995 हो र्गया। 15 हालांविक, रिरकॉड से यह प्र ी हो ा है विक अपीलक ा ने नोएडा द्वारा इस,ंजूरी से पहले ही विववाविद टावरों-एपेक्स और सिसयान-का विन,ाण शुरू कर विदया था। 16 जुलाई 2009 को, अपीलक ा ने फ्ल ै ट,ालिलकों को सूति? विकया विकः “1. ह,ने लर्गभर्ग 48000 वर्ग,ीटर और 6500 वर्ग,ीटर क े दो अलर्ग-अलर्ग प्लॉट Oरीदे हैं और उन्हें K,शः,ा? 2005 और,ई 2006,ें अलर्ग-अलर्ग पंजीक ृ कराया है।

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2. विन,ाण विकए जा रहे नए टावरों,ें प्रवेश, विनकास, स्थिस्वविं,र्ग पूल, क्लब और बुविनयादी ढां?ा विबल्क ु ल अलर्ग होर्गा। ह, दो संर?नाओं यानी,ौजूदा 15 टावरों और एपेक्स सिसयान को अलर्ग करने क े लिलए बाउंड्री वॉल का विन,ाण भी करेंर्गे।”

16. अपीलक ा की उपरोक्त संसू?ना इंविर्ग कर ी है विकः

(i) T-16 और T-17 का विन,ाण पहले ही 16 जुलाई 2009 को प्रारंभ हो ?ुका था; (ii) अपीलक ा क े अनुसार, इन नए टावरों,ें अलर्ग -अलर्ग प्रवेश-विनकास, सुविव ाएं और बुविनयादी ढां?ा होर्गा और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iii) नए टावरों को,ौजूदा पंद्रह टावरों से एक ?ारदीवारी क े विन,ाण द्वारा अलर्ग विकया जाएर्गा। अपीलक ा ने फ्ल ै ट,ालिलकों को यह दशाया विक,ौजूदा टी -16 (जी + 11) और शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (जी +1) को बदलने क े लिलए एक संशोति भवन योजना को,ंजूरी दी र्गई थी, सिजस,ें जुड़वां टावरों टी-16 और टी-17, प्रत्येक जी + 24,ंसिजलें और 73,ीटर की ऊ ं ?ाई वाली होर्गी।

17. 11 सिस ंबर 2009 को, र्गौ, बुद्ध नर्गर क े,ुख्य अवि`श,न अति कारी15, ?ौथे प्रति वादी, ने टी-16 और टी-17 क े लिलए अनंति, अनापलित्त प्र,ाण पत्र16 की,ंजूरी क े लिलए प्रभारी (भवन प्रकोष्ठ), नोएडा, सेक्टर 6 को एक रिरपोट जारी की। अनंति, फायर एनओसी राष्ट्रीय भवन संविह ा, 2005 17 की श § क े अनुपालन क े अ ीन बनाया र्गया था।

18. 16 सिस म्बर, 2009 को अन्य छह टावरों (जी + 11) क े संबं,ें एक पूण ा प्र,ाण पत्र प्रदान विकया र्गया। इस प्र,ाण पत्र क े साथ पूण ा,ानति?त्र,ें विफर से टी-1 क े सा,ने का हरा क्षेत्र विदOाया र्गया, जहां व,ान,ें टी-16 और टी-17 का विन,ाण विकया जा रहा है।

19. 26 नवंबर 2009 को, नोएडा ने एनबीआर 2006 क े ह ए,राल्ड कोट क े लिलए दूसरी संशोति योजना को,ंजूरी दी। इस योजना,ें, पहले क े टी-16 (जी + 11) को टी-16 (जी + 24) क े साथ प्रति स्थाविप विकया र्गया था सिजस,ें भू ल और ?ौबीस,ंसिजलें शावि,ल थी। इसी रह, शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (जी + 1) को टी-17 क े साथ प्रति स्थाविप विकया र्गया सिजस,ें भूवि, ल और ?ौबीस,ंसिजल (जी + 24) शावि,ल थे। टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई 73,ीटर 15“CFO” 16 “NOC” 17 “NBC 2005” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रस् ाविव थी। योजना क े अनुसार, टी-17 को टी-1 से 9,ीटर की दूरी पर होना था और वहाँ ऊपरी स् र पर एक स्पेस फ्र े, क े,ाध्य, से उनको जोड़ने का एक प्राव ान था। इस योजना को नोएडा द्वारा इस आ ार पर,ंजूरी दी र्गई थी विक अपीलक ा ने एफएआर का ैं ीस प्रति श (27,135.657 वर्ग,ीटर) Oरीदा है, इसक े अलावा 1.[5] एफएआर (82,229.265 वर्ग,ीटर ), क ु ल वि,लाकर 1.995 एफएआर (1,09,364.922 वर्ग,ीटर )। दूसरी संशोति योजना,ें अन्य श § क े साथ स्पष्ट रूप से विनम्नलिललिO प्राव ान विकया र्गया था: “2.भवन योजना की इस,ंजूरी क े कारण, विकसी भी सरकारी प्राति करण (नर्गरपालिलका, नोएडा) जैसे विकसी अन्य व्यविक्त का अति कार और स्वावि,त्व प्रभाविव नहीं होर्गा। […]

8. स्वीक ृ भवन योजना का एक सेट विन,ाण स्थल पर रOा जाएर्गा ाविक विकसी भी स,य स्थल पर इसकी जां? की जा सक े और नोएडा भवन विवविनय,न क े विनय,ों क े अनुसार स्वीक ृ भवन योजना विदशाविनदmश क े अनुसार विन,ाण काय विकया जाएर्गा। आबंविट व्यविक्त बेस,ेंट का काय पूरा होने पर भवन Oंड विवभार्ग, नोएडा द्वारा बेस,ेंट क े विनरीक्षण कर लिलए जाने क े बाद ही ग्राउंड फ्लोर का विन,ाण काय प्रारंभ करेर्गा।अन्यथा स्वीक ृ नक्शा रद्द,ाना जाएर्गा। (जोर विदया र्गया) क. 5 ीसरी संशोति योजना

20. 20 फरवरी, 2010 को उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा एक अति सू?ना जारी की र्गई थी, सिजससे पुराने आवंविटयों को 2.75 प्रति श क क े एफएआर की Oरीद करने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA,ें सक्ष, बनाया र्गया और इसक े परिरणा,स्वरूप,ौजूदा आ ार एफएआर क े 33 प्रति श क े अति क, Oरीद योग्य एफएआर की सी,ा को हटा विदया र्गया। अति सू?ना,ें यह बा परिरकस्थिल्प थी विक “Oरीदे जाने योग्य एफएआर की अनु,ति प्रयोज्य एफएआर की अति क, सी,ा क होर्गी। अति सू?ना,ें एनबीआर 2006,ें भी संशो न विकया र्गया है, सिजस,ें स्पष्ट रूप से उपबं था विकः “Oरीद योग्य एफएआर एक सक्ष, प्राव ान है।अति कार क े रूप,ें विकसी भी आवंटी को इसकी अनु,ति नहीं दी जाएर्गी।”

21. 19,ा?, 2010 को उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 लार्गू हुआ। इस अति विनय, की ारा 4 (4) और ारा 5,ें स्वीक ृ योजनाओं,ें विकसी भी परिरव न से पहले फ्ल ै ट क े,ालिलकों की सह,ति का प्राव ान है और यह भी परिरकल्पना की र्गई है विक उनकी सह,ति क े विबना फ्ल ै ट क े,ालिलकों क े अविवभासिज साझा विह का प्रति श नहीं बदला जा सक ा है।

22. 30 नवम्बर, 2010 को न्यू ओOला औद्योविर्गक विवकास क्षेत्र भवन विवविनय, लार्गू हुआ। विवविनय, 24.2.1. (6),ें विनम्नलिललिO श ‘ हैंः “(6).दो विनकटव d भवन ब्लॉकों क े बी? की दूरी दो विनकटव d भवन ब्लॉकों क े बी? की दूरी ब्लॉक की ऊ ं ?ाई क े आ ार क, से क, 6,ीटर से 16,ीटर क होनी ?ाविहए। राष्ट्रीय भवन विन,ाण संविह ा, 2005 क े अनुसार 18,ीटर क की ऊ ं ?ाई क े भवन क े लिलए प्रत्येक 3,ीटर की वृतिद्ध पर अति रिरक्त अं राल,ें 1,ीटर की वृतिद्ध की 18“NBR 2010” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जाएर्गी। यविद Oंडों क े अंति, छोर एक दूसरे क े आ,ने-सा,ने होंर्गे ो अं राल 16,ीटर क े बजाय अति क, 9,ीटर होर्गा। इसक े अलावा, आवंटी दो ब्लॉकों क े बी? 16,ीटर से अति क स्थान दे सक ा है या प्रस् ाविव कर सक ा है।”

23. 18 अर्गस् 2011 को, सीएफओ ने 121.5,ीटर की ऊ ं ?ाई क े लिलए टी-16 और टी-17 क े संबं,ें एक अस्थायी अनापलित्त प्र,ाण पत्र प्रदान विकया। प्रस् ाविव भू ल और अड़ ीस,ंसिजलों (जी + 38) क े साथ। यह पाया र्गया विक भवनों का विन,ाण हो जाने और उति? अवि` सुरक्षा उपकरण स्थाविप हो जाने क े बाद, उनका इस बा क े लिलए,ूल्यांकन विकया जाएर्गा विक क्या स्थायी एनओसी दी जानी ?ाविहए या नहीं।

24. 25 अक्टूबर 2011 को, 20 फरवरी 2010 विदनांविक अति सू?ना क े,द्देनजर, अपीलक ा ने 15 करोड़ रुपये की लार्ग से एक अति रिरक्त एफएआर Oरीदा, ाविक उपलब् एफएआर को 1.995 से बढ़ाकर 2.75 (1,50,753.652 वर्ग,ीटर) विकया जा सक े । उसी विदन, नोएडा ने एफएआर की Oरीद क े संबं,ें अपीलक ा को एक पत्र जारी विकया, सिजस,ें यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े प्राव ानों क े अनुपालन सविह कई श § को अति रोविप विकया र्गया था।

25. 2,ा? 2012 को, ए,राल्ड कोट क े लिलए नोएडा द्वारा ीसरी संशोति योजना,ंजूरी दी र्गयी। इस,ंजूरी क े,ाध्य, से, टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई को 24,ंसिजलों से बढ़ाकर 40,ंसिजलों (जी + 40) क बढ़ाने की अनु,ति दी र्गई थी, सिजसक े परिरणा,स्वरूप इ,ार की ऊ ं ?ाई 121,ीटर हो र्गई। इसक े अलावा, टी-16 और टी-17,ें अन्य बा ों क े साथ साथ साथ-साथ दो बेस,ेंट और टावरों क े नी?े पार्किंकर्ग क े लिलए Oुली जर्गह भी होर्गी। ीसरी संशोति योजना mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA,ें उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े अनुपालन की आवश्यक ा क े साथ-साथ इसी रह की श ‘ भी शावि,ल थीं, जो दूसरी संशोति योजना,ें,ौजूद थीं। क. 6 संशोति योजनाओं क े लिOलाफ शिशकाय ें

26. 9,ा? 2012 को, अपीलक ा ने पहले प्रति वादी को यह संसू?ना दी विक टी-16 और टी-17 क े फ्ल ै ट Oरीदारों क े पास, जो विन,ाणा ीन थे,,ें प्रवेश- विनकास, सुविव ाएं और बुविनयादी ढां?ा विबल्क ु ल अलर्ग होर्गा।

27. 29,ा? 2012 को, सीएफओ क े कायालय ने, पहले प्रति वादी की शिशकाय क े आ ार पर, अवि` सुरक्षा श § क े अनुपालन,ें क ु छ कवि,यों और उल्लंघनों क े संबं,ें अपीलक ा को एक नोविटस जारी विकया।

28. 24 अप्रैल 2012 को, पहले प्रति वादी द्वारा की र्गई एक अन्य शिशकाय क े आ ार पर, सीएफओ ने टी-1 और टी-17 क े बी? न्यून, दूरी क े उल्लंघन क े संबं,ें नोएडा को एक संसू?ना भेजी। पत्र,ें अन्य बा ों क े साथ साथ साथ - साथ कहा र्गया हैः “जब उपरोक्त क े संबं,ें रिरकॉड का अवलोकन विकया र्गया, ो यह पाया र्गया विकः […]

2. भवन विन,ाण विवविनय,, 2006 क े Oंड 33.2.[3] क े अनुसार दो भवन Oंडों क े बी? न्यून, दूरी इ,ार की ऊ ं ?ाई की आ ी होनी ?ाविहए और नोएडा विवविनय,, 2010 क े अनुसार ऐसे भवनों क े बी? 16,ीटर की दूरी होनी ?ाविहए, सिजनकी ऊ ं ?ाई 50,ीटर से अति क हो। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. भार ीय राष्ट्रीय भवन संविह ा-2005 क े अनुसार दो इ,ार ों क े बी? 16,ीटर की दूरी होनी ?ाविहए। इसलिलए आपसे अनुरो है विक उपरोक्त क े आलोक,ें क ृ पया सूति? करें विक विवशेर्ष श्रेणी,ें संबंति भवन को छ ू ट प्रदान करने क े बाद भवन विन,ाण क े लिलए लाइसेंस प्रदान विकया र्गया था या संबंति द्वारा विन,ाण,ानकों क े विवपरी विकया जा रहा है।”

29. 3,ई 2012 और 22,ई 2012 को, पहले अपीलक ा ने सेक्टर 93 ए क े प्लॉट नंबर 4 क े संबं,ें स्वीक ृ योजनाओं को प्राप्त करने क े लिलए नोएडा क े यहाँ साथ एक आरटीआई आवेदन दायर विकया। यद्यविप विक स्वीक ृ योजना की श § क े अनुसार अपीलाथd द्वारा अपनी साइट पर स्वीक ृ नक्से को दर्शिश करना अपेतिक्ष था, विफर भी नोएडा ने अपीलक ा को यह सत्याविप करने क े लिलए लिलOा विक क्या स्वीक ृ योजनाएं और,ानति?त्र पहले प्रति वादी को उपलब् कराए जा सक े हैं। इसक े प्रत्युत्तर,ें अपीलक ा ने पहले प्रति वादी को स्वीक ृ योजनाओं और,ानति?त्रों को जारी करने क े लिलए अपनी सह,ति देने से इनकार कर विदया। इसलिलए, नोएडा ने पहले प्रति वादी को स्वीक ृ योजनाएं प्रदान करने से इनकार कर विदया।

30. 19 जून 2012 को, नोएडा द्वारा अपीलक ा को एक कारण ब ाओ नोविटस जारी विकया र्गया सिजस,ें कहा र्गया थाः(i) विन,ाण ीसरी संशोति योजना क े अनुसार नहीं था क्योंविक अन्य बा ों क े साथ साथ टी -1 और टी-16/17 को एक स्पेस फ्र े, द्वारा जोड़ा नहीं विकया र्गया था। अपीलक ा ने 26 जून 2012 को कारण ब ाओ नोविटस का जवाब दे े हुए कहा विक टी-16 और टी-17 अभी भी विन,ाणा ीन हैं और विन,ाण क े स,य स्पेस फ्र े, का विन,ाण विकया जाएर्गा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

31. 26 जून 2012 को, नोएडा ने टावर-15 (जी + 11) क े संबं,ें अपीलक ा को पूण ा प्र,ाण पत्र जारी विकया।

32. 28 जून 2012 को, पहले प्रति वादी ने अपीलक ा द्वारा,ालिलकों क े प्रति विकए र्गए उल्लंघनों और र्गल प्रस् ुति यों की शिशकाय कर े हुए नोएडा को एक संसू?ना दी और दो नए टावरों, टी-16 और टी-17 की ले-आउट योजना को रद्द करने की,ांर्ग की। पहले प्रति वादी ने सू?ना की,ांर्ग कर े हुए 9 और 29 अर्गस्, 2012, विदनांविक पत्रों क े साथ अपने पहले संसू?ना की जानकारी ली, और सूति? विकया विक अपीलक ा द्वारा,ानदंडों का उल्लंघन कर े हुए विन,ाण विकया जा रहा था। क. 7 इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े स,क्ष कायवाविहयां

33. 10 विदसंबर 2012 को, पहले प्रति वादी ने अन्य बा ों क े साथ-साथ विनम्नलिललिO अनु ोर्ष क े लिलए उच्च न्यायालय क े स,क्ष संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह एक रिरट याति?का दायर कीः “i. प्लॉट नंबर 4, सेक्टर 93-ए,ें टॉवर अपेक्स और सेयान ना,क नए टावरों क े विन,ाण क े लिलए प्रति वादी 2 द्वारा अनु,ोविद संशोति योजना को रद्द कर े हुए एक रिरट, आदेश या विनदmश जारी करें और उपयुक्त टावरों को ध्वस् विकये जाने क े लिलए विनदmश जारी करें, क्योंविक अनु,ोदन और विन,ाण उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े प्राव ानों का पूण उल्लंघन है। ii. सभी विनवासिसयों की सह,ति प्राप्त विकए विबना प्रति वाद 5 द्वारा विवकसिस की जा रही स,ूह आवास सोसाइटी क े संबं,ें विकसी भी आर्गे की भवन योजनाओं,ें संशो न को,ंजूरी न देने क े लिलए प्रति वादी 2 को विनदmश दे े हुए एक रिरट, आदेश या विनदmश जारी करें। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA iii. अं रिरक्ष फ्र े, क े,ाध्य, से टॉवर टी-1 और टी अपेक्स/सिसयेन्स को जोड़ने क े लिलए प्रति वादी 5 को दी र्गई अनु,ति को रद्द कर े हुए एक रिरट, आदेश या विनदmश जारी करें। iv. यह सुविनति² करने क े लिलए विक अवि` सुरक्षा उपकरण और बुविनयादी ढां?ा एक विनर्षिदष्ट अवति क े भी र प्रति वादी 5 क े O? पर स्थाविप विकया जाए, प्रति वादी 2 और 3 को विनदmशिश आदेश क े लिलए एक रिरट, आदेश या विनदmश जारी करें। v. 19.06.2012 और 17.07.2012 क े नोविटस क े अनुसार बेस,ेंट और झटक े वाले क्षेत्र,ें विकए र्गए अवै विन,ाण को विर्गराने क े लिलए प्रति वादी 2 को विनदmश देने क े लिलए एक रिरट, आदेश या विनदmश जारी करें। vi. एनबीसी 2005 क े प्राव ानों क े अनुसार सुपरटेक ए,राल्ड कोट कॉम्प्लेक्स, प्लॉट 4, Oंड 93-ए नोएडा क े सभी कानूनी आवंविटयों/विनवासिसयों को कार पार्किंकर्ग स्थान (दोनों ज,ीन क े ऊपर और बेस,ेंट,ें) प्रदान करने क े लिलए प्रति वादी नं. 2 और 5 को विनदmश जारी करें।”

34. पहले प्रति वादी ने क े वल अनु ोर्ष i और iii पर जोर विदया, सिजस,ें टी-16 और टी-17 क े विन,ाण को,ंजूरी देने वाली संशोति योजना को रद्द करने और उन्हें ध्वस् करने का विनदmश देने की,ांर्ग की र्गई थी। पहले प्रति वादी ने स्पेस फ्र े, क े,ाध्य, से टी-1 और टी-16/टी-17 को जोड़ने क े लिलए दी र्गई अनु,ति को भी रद्द करने की,ांर्ग की। रिरट याति?का क े विवलंबन क े दौरान उच्च न्यायालय क े एक विवशिशष्ट आदेश क े अनुसरण,ें, आरडब्ल्यूए को स्थल पर विन,ाण क े संबं,ें संबंति जानकारी और दस् ावेजों क े साथ स्वीक ृ नक्शे प्रदान विकए र्गए थे। बाद,ें दोनों पक्षों क े बी? अशिभव?नों का आदान-प्रदान विकया र्गया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

35. अपीलक ा ने 27 जनवरी 2013 को एक प्रति शपथ पत्र दायर विकया सिजस,ें यह कहा र्गया विक: (i) प्रथ, प्रति वादी को उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 क े ह अपीलक ा द्वारा,ान्य ा नहीं दी र्गई है। (ii) पहले प्रति वादी को पहले नोएडा क े,ुख्य कायकारी अति कारी से संपक करना ?ाविहए था, जो यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह सक्ष, प्राति कारी है, और विफर रिरट क्षेत्राति कार क े ह उच्च न्यायालय जाने से पहले राज्य सरकार क े पास जाना ?ाविहए था। (iii) टी-16 और टी-17 क े विन,ाण को 26 नवंबर 2009 को,ंजूरी दी र्गई थी, लेविकन रिरट याति?का विदसंबर 2012,ें ीन साल बाद दायर की र्गई थी, जब इ,ार विन,ाण क े अविग्र, ?रण,ें थी। इसलिलए, रिरट याति?का विवलंब से बाति है; और (iv) टी-16 और टी-17 को एनबीआर 2006 क े ह 2009,ें,ंजूरी दी र्गई थी। 2,ा? 2012 को दी र्गई अंति,,ंजूरी ने अपीलक ा द्वारा अति रिरक्त एफएआर Oरीदने क े बाद टावरों की ऊ ं ?ाई को ?ौबीस,ंसिजलों से बढ़ाकर ?ालीस,ंसिजलों क बढ़ा विदया र्गया था। एनबीआर 2006 क े ह दो भवन ब्लाकों क े बी? न्यून, दूरी संबं ी कोई प्राव ान नहीं था। ?ूंविक एनबीआर 2006,ें एनबीसी 2005 को शावि,ल नहीं विकया र्गया था, इसलिलए 55,ीटर से अति क ऊ ं ?ी इ,ार ों क े दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? 16,ीटर की अविनवाय श का पालन करने की जरूर नहीं थी। दो भवन ब्लॉकों क े बी? दूरी की आवश्यक ा क े वल एनबीआर 2010 द्वारा अविनवाय की र्गई थी, जो लार्गू नहीं है क्योंविक टी- 16 और टी-17 क े लिलए प्रारंशिभक,ंजूरी एनबीआर 2006 क े ह दी र्गई थी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

36. नोएडा ने 7 फरवरी, 2013 विदनांविक अपने प्रति शपथ पत्र,ें कहा विक: (i) इसने एनबीआर 2010 का अनुपालन कर े हुए अपीलक ा को प्लॉट आवंविट विकया। यह,ंजूरी विवशिशष्ट श क े साथ दी र्गई थी विक उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 का अनुपालन विकया जाना ?ाविहए; (ii) प्लॉट नंबर 4 को दो परिरयोजनाओं,ें विवभासिज नहीं विकया र्गया है। यह एकीक ृ है और एक ही परिरयोजना से संबंति है (iii) टी-1 को टी-16/टी-17 से जोड़ने वाले स्पेस फ्र े, क े विन,ाण की अनु,ति आईआईटी रुड़की द्वारा तिडजाइन को,ंजूरी विदए जाने क े बाद ही दी र्गई थी।

37. उच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल 2014 को रिरट याति?का की अनु,ति दी और टी-16 और टी-17 को विर्गराने का विनदmश विदया, सिजस,ें विवध्वंस का O? अपीलक ा द्वारा वहन विकया जाएर्गा। न्यायालय ने सक्ष, प्राति कारी को यह भी विनदmश विदया विक वह ीन,हीने की अवति क े भी र उत्तर प्रदेश शहरी विवकास अति विनय, 1973 क े ह नोएडा क े अति कारिरयों क े लिOलाफ,ुकद,ा ?लाने क े लिलए,ंजूरी प्रदान करे। उच्च न्यायालय ने अपीलक ा को टी-16 और टी-17,ें अपाट,ेंट बुक कराने वाले फ्ल ै ट Oरीदारों को प्रति फल वापस करने का भी विनदmश विदया। रिरट याति?का को,ंजूर कर े हुए उच्च न्यायालय ने विनम्नलिललिO विटप्पणी कीः (i) प्रथ, प्रति वादी को संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े अ ीन कायवाविहयां संस्थिस्थ करने का अति कार था। Oरीदारों को फ्ल ै ट सिस ंबर 2009 क सौंपे र्गए थे। आरडब्ल्यूए का र्गठन विकया र्गया और उसी वर्ष इसे सोसायटी रसिजस्ट्रार क े पास पंजीक ृ कराया र्गया था। उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA,ॉडल उपविनय,ों को सरकार द्वारा 16 नवम्बर, 2011 को अति सूति? विकया र्गया था। थाविप, उप रसिजस्ट्रार फ,, सोसायटी और ति?ट,,ेरठ, उत्तर प्रदेश ने 14 विदसम्बर, 2012 को एक पत्र जारी कर े हुए कहा विक रसिजस्ट्रार से प्राप्त अनुदेशों क े लंविब होने क े कारण,ॉडल उपविनय,ों और पंजीकरण क े संबं,ें कोई विनणय नहीं लिलया जा सका। रसिजस्ट्रार ने 5 विदसंबर 2013 क े एक परिरपत्र द्वारा उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह पहले प्रति वादी क े पंजीकरण क े लिलए विनदmश जारी विकए। 20 अक्टूबर 2013 को, पहले प्रति वादी ने अपने प्रस् ाव द्वारा,ॉडल उप-विनय, अपनाया और अपने ?ुनाव आयोसिज विकए। इसक े अलावा, विकसी भी स्थिस्थति,ें, अपीलक ा ने अपनी स्थापना क े बाद से पहले प्रति वादी को,ान्य ा दी थी और उसक े साथ लर्गा ार पत्रा?ार विकया था। अपीलक ा ने फ्ल ै ट Oरीदारों का प्रति विनति त्व करने की अपनी क्ष, ा पर कभी आपलित्त नहीं ज ाई थी। प्रासंविर्गक भवन विनय,ों का उल्लंघन कर े हुए नोएडा द्वारा दी र्गया,ंजूरी प्रत्येक अपाट,ेंट क े,ालिलक क े अति कारों को प्रभाविव कर ी है, सिजसका प्रति विनति त्व पहले प्रति वादी क े,ाध्य, से विकया र्गया है। इसलिलए, पहला प्रति वादी एक 'व्यशिथ व्यविक्त' है और वह रिरट कायवाही शुरू करने का हकदार था। (ii) अनुच्छेद 226 क े ह पहला प्रति वादी प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह सीएफओ, नोएडा या यूपीआईएडी अति विनय, 1976 की ारा 27 क े ह राज्य से संपक करने क े उपलब् उप?ार से वर्जिज नहीं था। हालांविक पहले प्रति वादी ने नोएडा क े स,क्ष अपनी शिशकाय दज कराई, कोई नोविटस जारी नहीं विकया र्गया और कोई अनुव d कारवाई नहीं की र्गई। क े वल यविद नोएडा ने एक आदेश जारी विकया हो ा, ो पहला प्रति वादी यूपीआईएडी अति विनय, 1976 की ारा 27 क े ह राज्य सरकार से संपक कर सक ा था। इस प्रकार, पहले mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रति वादी क े पास रिरट कायवाही शुरू करने क े अलावा कोई अन्य वैकस्थिल्पक उप?ार उपलब् नहीं था। (iii) अपीलक ा को उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 क े ह भवन क े विन,ाण क े संबं,ें सक्ष, प्राति कारी क े कायालय,ें एक उद्घोर्षणा प्रस् ु करनी ?ाविहए। उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट (विन,ाण, स्वावि,त्व और रOरOाव का संव न) विवविनय, 2011 क े विनय, 4,ें कहा र्गया है विक जब सक्ष, प्राति कारी उद्घोर्षणा,ें संशो न क े लिलए आवेदन प्राप्त कर ा है, ो वह भवन,ालिलकों क े संघ को एक लिललिO नोविटस जारी करेर्गा और एसोसिसएशन को सुनवाई का अवसर विदए जाने क े बाद ही सक्ष, प्राति कारी द्वारा आदेश पारिर विकया जाएर्गा।?ूंविक एसोसिसएशन को इस रह का कोई नोविटस नहीं विदया र्गया था, इसलिलए यह एक 'व्यशिथ व्यविक्त' है और इसलिलए इसे रिरट कायवाही शुरू करने का अति कार है। (iv),ूल भवन योजना को ब,ंजूरी दी र्गई थी जब एनबीआर 2006 लार्गू था। हालांविक, अति रिरक्त एफएआर की Oरीद क े लिलए 2011,ें,ंजूरी दी र्गई थी। यह विवति का एक स्थाविप सिसद्धां है विक,ंजूरी की ारीO को लार्गू विनय, और विवविनय, पक्षकारों क े अति कारों का विन ारण करेंर्गे। 2,ा? 2012 को दी र्गई,ंजूरी,ें उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े लार्गू होने की श लर्गाई र्गई थी। इसलिलए एनबीआर 2010 (और एनबीसी 2005, ?ूंविक एनबीआर 2010 इसे लार्गू कर ा है) और यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 दोनों ही लार्गू होंर्गे। (v) अपीलक ा का यह क विक परिरयोजना दो ?रणों,ें थी, रिरकॉड से साविब नहीं हो ा है क्योंविक नोएडा ने अति रिरक्त एफएआर की Oरीद की अनु,ति दी है और परिरयोजना को एकल परिरयोजना,ान े हुए बाद,ें,ंजूरी दी है। प्रस् ु की र्गई और,ंजूर की र्गई योजनाएं एक ही परिरयोजना क े लिलए थीं, और अपीलक ा द्वारा अदाल को र्गु,राह करने का प्रयास विकया र्गया है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (vi) एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6),ें कहा र्गया है विक 18,ीटर की ऊ ं ?ाई क की इ,ार ों क े लिलए दो विनकटव d विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? का अं र 6,ीटर होर्गा और 18,ीटर से ऊपर अं र को प्रत्येक 3,ीटर क े पर 1,ीटर बढ़ाया जाएर्गा जो अति क, 16,ीटर से अति क नहीं होर्गा। एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.1,ें कहा र्गया है विक 55,ीटर से अति क इ,ार ों क े लिलए 16,ीटर Oाली स्थान बर्गल और पीछे छोड़ा जाना ?ाविहए। ?ूंविक टी-17 की ऊ ं ?ाई 121,ीटर है, इसलिलए विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क े बी? की दूरी क, से क, 16,ीटर होनी ?ाविहए। लेविकन, यह दूरी क े वल 9,ीटर है और यह 7,ीटर क, है। (vii) अपीलक ा ने, नोएडा क े साथ वि,लीभर्ग करक े, विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों और Oाली स्थान क े बी? दूरी बनाए रOने की अविनवाय आवश्यक ा का उल्लंघन कर े हुए लेआउट नक्शे क े लिलए,ंजूरी प्राप्त की। (viii) उत्तर प्रदेश अवि` विनवारण और अवि` सुरक्षा अति विनय, 200519 क े प्राव ानों का अनुपालन विकया जाना आवश्यक था, सिजसक े अनुसार विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक और Oाली स्थान क े बी? 7.5,ीटर की न्यून, दूरी दी जानी ?ाविहए सिजसका 2012 की ीसरी संशोति योजना,ें उल्लंघन विकया र्गया है (ix) अपीलक ा की यह दलील विक एनबीआर 2010,ें 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' अशिभव्यविक्त को परिरभाविर्ष नहीं विकए जाने से, प्लॉट नंबर 4 पर भवनों का पूरा सेट एनबीआर 2006 और एनबीआर 2010 क े विवपरी है। स्वीक ृ योजनाओं से प ा ?ल ा है विक अपीलक ा को अलर्ग ब्लाक्स वाले ले -आउट की,ंजूरी वि,ली थी। ब्लॉकों का ना, बाद,ें प्रत्येक Kवि,क योजना,ें बदल विदया र्गया और अं,ें इ,ार ों को टी -1 से टी-17 क े रूप,ें नंबर विदया र्गया। स्वीक ृ 19 “Fire Safety Act” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA योजनाएं स्पष्ट रूप से दशा ी हैं विक टी -1 और टी-16/17 अलर्ग-अलर्ग विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक हैं; और (x) नोएडा द्वारा,ंजूर की र्गई योजना विनम्नलिललिO क े विवपरी थीः (क) भवन विवविनय,न (O) विबल्डिंल्डर्ग ब्लाक्स क े बी? अविनवाय दूरी (र्ग) आवाजाही क े लिलए आवश्यक स्थान, सिजसक े परिरणा,स्वरूप अपाट,ेंट,ालिलकों क े अति कार और उनक े अपाट,ेंट ब्लॉकों की सुरक्षा र्गंभीर रूप से प्रभाविव हुई। क.[8] इस न्यायालय क े स,क्ष कायवाविहयां

38. अपीलक ा ने उच्च न्यायालय क े विनणय पर आक्षेप कर े हुए 28 अप्रैल, 2014 को संविव ान क े अनुच्छेद 136 क े अ ीन एक विवशेर्ष अनु,ति याति?का दायर की। 5,ई 2014 को, इस न्यायालय ने टी-16 और टी-17 क े संबं,ें यथास्थिस्थति बनाए रOने का विनदmश विदया, सिजस,ें यह विनदmश विदया र्गया विक न ो विबल्डर और न ही Oरीदार संपलित्त को अलर्ग-थलर्ग करेर्गा और न ही ीसरे पक्ष क े अति कारों का विन,ाण करेर्गा। 19 जुलाई, 2016 और 27 जुलाई, 2016 को सुनवाई क े दौरान अपीलक ा और नोएडा ने यह क विदया विक न्यायालय इस,ुद्दे पर एक विवशेर्षज्ञ एजेंसी की राय ले सक ा है और इस उद्देश्य क े लिलए विकसी विवशेर्षज्ञ की सेवाएं ले सक ा है। अति रिरक्त सॉलिलसिसटर जनरल की दलील पर नेशनल विबल्डिंल्डग्स क ं स्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिलवि,टेड20 को विववाद क े संबं,ें विवशिभन्न थ्यों की जां? करने क े लिलए विनयुक्त विकया र्गया था, विवशेर्ष रूप से उन थ्यों की जां? करने विक क्या टावर (टी-1 और टी-17) क े एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं। एनबीसीसी ने 13 अक्टूबर, 2016 को अपनी रिरपोट,ें यह विनष्कर्ष विनकाला था विक यह दो टावर नहीं हैं और यह एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.1.[6] क े अनुरूप है। एनबीसीसी द्वारा दी र्गई रिरपोट क े अलावा, 20 “NBCC” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पहले प्रति वादी ने 'डेड एंड' क े विववाविद,ुद्दे पर रिरपोट करने क े लिलए आईआईटी विदल्ली और आईआईटी रुड़की को विनयुक्त विकया था। उनकी रिरपोट§ को रिरकॉड पर रOा र्गया है।

39. विदनांक 6 सिस ंबर 2016 और 11 जनवरी 2017 क े अपने अं रिर, आदेशों द्वारा, इस न्यायालय ने विनदmश विदया विक आवेदकों क े एक स,ूह को विनवेश की वापसी क े लिलए प्रति,ाह दस प्रति श विदया जाए21 । 22 सिस ंबर 2017 को, इस न्यायालय ने श्री र्गौरव अग्रवाल, न्यायालय वि,त्र को विनदmश विदया विक वे रिरफ ं ड से संबंति,ुद्दों पर अपीलक ा और फ्ल ै ट Oरीदारों क े साथ स,न्वय करने क े लिलए एक पोटल लिंलक बनाएं। इसक े अलावा, इस न्यायालय ने विनदmश विदया विक,ूल राशिश ?ौदह प्रति श क े ब्याज क े साथ उन फ्ल ै ट Oरीदारों को प्रदान की जाएर्गी सिजन्होंने व,ान विवशेर्ष अनु,ति याति?का,ें इस न्यायालय क े फ ै सले का इं जार नहीं करने का विवकल्प ?ुना है।

40. 30 जुलाई 2018 क े एक आदेश द्वारा, न्यायालय वि,त्र की सहाय ा से इस न्यायालय ने घर Oरीदारों को उनक े द्वारा ?ुने र्गए रिरफ ं ड विवकल्प क े आ ार पर विनम्नलिललिO स,ूहों,ें वर्गdक ृ विकयाः (i),ूल राशिश का प्रति वर्ष बारह प्रति श सा ारण ब्याज (एक सौ एक घर Oरीदार) क े साथ वापसी। (ii) घर Oरीदार जो अभी भी ?ौदह प्रति श (?ौबीस घर Oरीदार) की दर से ब्याज प्राप्त करने पर जोर दे े हैं-क्योंविक घर Oरीदारों की एक बड़ी संख्या जो बारह प्रति श ब्याज दर स्वीकार करने पर सह, हो र्गयी है, इन ?ौबीस Oरीददारों को भी बारह प्रति श की दर से ब्याज स्वीकार करने का विनदmश विदया र्गया है। 21 “ROI” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iii) छ ू ट योजना क े,ाध्य, से घर Oरीदारों को-ऐसे,ा,लों,ें, ईए,आई का भुर्ग ान अपीलक ा द्वारा ब क विकया जाएर्गा जब क विक कब्जा नहीं दे विदया जा ा। (iv) विववाविद,ा,ले- श्री संजीव अग्रवाल और सुश्री रस्थिश्, अरोड़ा ने ?ेक द्वारा K,शः 38,51,009 रुपये और 17,43,162 रुपये का भुर्ग ान विकया है। उक्त राशिश को प्रति वर्ष बारह प्रति श की दर से सा ारण ब्याज क े साथ वापस विकया जाएर्गा। O-अति वक्ता क े क

41. अपीलक ा की ओर से उपस्थिस्थ वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता श्री विवकास सिंसह, ने विनम्नलिललिO क प्रस् ु विकए:- (i) टी-16 और टी-17 की,ंजूरी और विन,ाण एनबीआर 2010 क े ह दूरी क े विनय, का उल्लंघन नहीं हैः क. एनबीआर 2010 टी-16 और टी-17 पर लार्गू नहीं हो ा है, क्योंविक उन्हें पहली बार एनबीआर 2006 क े ह जारी दूसरी संशोति योजना,ें,ंजूरी दी र्गई थी। एनबीआर 2006 क े ह, विनय, 33.2.[3] (i),ें दूरी का प्राव ान अविनवाय नहीं था और सीईओ क े पास यह विवकल्प था विक वे योजना की अविनवाय ाओं क े आ ार पर दूरी की आवश्यक ा को विन ारिर करें। विकसी भी स्थिस्थति,ें, यह विवविनय,न दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? की दूरी पर लार्गू हो ा है और टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी को विनयंवित्र नहीं कर ा है, जो एक ही ब्लॉक का एक विहस्सा है। इसक े अलावा, यविद इस प्राव ान को अविनवाय रूप से लार्गू विकया जा ा है, ो यह पहली संशोति योजना को भी प्रभाविव करेर्गा, सिजस,ें पंद्रह अन्य टावरों की ऊ ं ?ाइयां 37.5,ीटर है। जबविक विनकटव d mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ब्लॉकों क े साथ दूरी उनकी उं?ाई से आ े से क, थी, यानी 18.75,ीटर से क,।

O. यविद एनबीआर 2010 लार्गू हो ो भी, टी-16 और टी-17 एक ही विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक का विहस्सा हैं, सिजस,ें टी-1, टॉवर-2, टॉवर-3 और टी-17 शावि,ल हैं, जो एक स्पेस फ्र े, द्वारा टी-1 से जुड़ा हुआ है। इसलिलए, एनबीआर 2010 का विवविनय, 24.1.[2] (6), जो विनकटव d विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों (भवन स,ूह/भवनों क े स,ूह) क े बी? दूरी बनाए रOने का प्राव ान कर ा है, टी-17 और टी-1 क े बी? की दूरी क े संबं,ें लार्गू नहीं हो ा है। र्ग. विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक की अव ारणा को नोएडा द्वारा उच्च न्यायालय,ें विदए र्गए एक नोट,ें स्पष्ट विकया र्गया है। एफएआर का उपयोर्ग कर े स,य, एक विनति² प्रति श को Oुले/हरिर क्षेत्र क े रूप,ें बनाए रOने की आवश्यक ा है। इ,ार ों को क ु ल परिरयोजना क्षेत्र,ें फ ै लाने क े बजाय, स,ूह आवास परिरयोजनाएं आसपास क े टावरों या यहां क विक टावरों क े एक ब्लॉक की परिरकल्पना कर सक ी हैं ाविक परिरयोजना,ें ?ारों ओर फ ै ले हुए छोटे स्थानों क े बजाय एक बड़ी Oुली हरिर जर्गह सुविनति² की जा सक े । घ. वैकस्थिल्पक रूप से, भले ही वे एक ही विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक का विहस्सा न हों, टी- 17 एक 'टावर जैसी संर?ना' होने क े कारण, विवविनय, 24.2.[1] (6) क े ह एनबीसी 2005 का पैरा 8.2.[2] लार्गू हो ा है। पैरा 8.2.3.[2] क े अनुसार, 37.5,ीटर से क, ऊ ं ?ाई क े भवनों क े लिलए न्यून, दूरी 9,ीटर है। जबविक अति क ऊ ं ?ाई वाली इ,ार ों क े लिलए यह 12,ीटर है। इसक े अलावा, पैरा 8.2.3.[2] (डी) क े अनुसार, ज,ीनी स् र पर इस दूरी की क,ी को ऊपरी स् र पर पूरा विकया जा सक ा है। अ ः, "टॉवर जैसी संर?नाओं" क े बी? 16,ीटर की न्यून, दूरी बनाए रOना एक अलंघनीय श नहीं है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ङ) व,ान,ा,ले,ें टी-1 और टी-17 क े बी? की न्यून, दूरी 9.88,ीटर (ज,ीनी स् र पर) से 25.75,ीटर (ऊपरी स् र पर) क है, क्योंविक टी-1 की क ु ल ऊ ं ?ाई 27.61,ीटर है।जबविक टी-17 का 84.5,ीटर है। इस प्रकार यह एनबीसी 2005 क े अनुरूप है; और (?) भार सरकार क े शहरी विवकास,ंत्रालय द्वारा जारी,ॉडल उपविनय, 2016,ें 40,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई होने क े बावजूद इ,ार क े ?ारों ओर 9,ीटर की दूरी विन ारिर की र्गई है। (ii) टी-16 और टी-17 क े विन,ाण की,ंजूरी उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 का उल्लंघन नहीं हैः क. टी-16 और टी-17 को 26 नवंबर 2009 को,ंजूरी दी र्गई थी, और इसलिलए पूव सह,ति की आवश्यक ा नहीं थी, क्योंविक अति विनय, ब लार्गू नहीं था।
O. टी-1 से टी-15 क े फ्ल ै ट,ालिलक, सिजनक े पास पहले से ही अपने फ्ल ै टों का कब्जा था, वे उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 की ारा 4 (4) क े प्राव ान क े ह Oरीदार नहीं,ाने जाएंर्गे और टी -16 और टी-17,ें अति रिरक्त,ंसिजलों क े विन,ाण क े लिलए उनकी सह,ति की आवश्यक ा नहीं थी। र्ग. सभी फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति अव्यावहारिरक होर्गी और अति क, आरडब्ल्यूए की सह,ति पयाप्त होर्गी। 2,ा? 2012 को, जब ीसरी संशोति योजना को,ंजूरी दी र्गई थी, आरडब्ल्यूए का, नहीं कर रहा था और 20 अक्टूबर 2013 को आरडब्ल्यूए ने यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह,ॉडल बाय-लॉज को अपनाया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA घ. टी-16 और टी-17 क े विन,ाण द्वारा टी-1 से टी-15 क े फ्ल ै ट,ालिलकों की सा,ान्य क्षेत्र सुविव ाओं का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, क्योंविक उनकी योजना अलर्ग-अलर्ग प्रविवविष्टयों और विनकास सुविव ाओं क े साथ बुविनयादी ढां?े क े साथ बनाई र्गई है। ङ. टी-1 से टी-15 क े अति कांश फ्ल ै ट,ालिलक टी-16 और टी-17 क े विन,ाण की,ंजूरी से पूरी रह अवर्ग थे। क्योंविक (i) वर्ष 2006 क 245 फ्ल ै ट बुक विकये र्गये थे। (ii) 2006 से 2009,ें दूसरी संशोति योजना आने क 141 फ्ल ै ट बुक विकये र्गये थे। (iii) दूसरी संशोति योजना से 2012,ें ीसरी संशोति योजना क 114 फ्ल ै ट बुक विकये र्गये थे और (iv) 2012,ें ीसरी संशोति योजना से 2 अर्गस् 2021 क 159 फ्ल ै ट बुक विकये र्गये थे। (iii) अवि` सुरक्षा,ानदंडों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ हैः क. 26 नवम्बर, 2009 को,ंजूरी से पहले 11 सिस म्बर, 2009 को एक अनंति, अवि` सुरक्षा एनओसी प्राप्त की र्गई थी। इसक े बाद अवि`श,न विवभार्ग ने विदनांक 2,ा? 2012 की,ंजूरी से पहले 18 अर्गस् 2012 को टी-16 और टी-17 क े लिलए एक और अस्थायी अनापलित्त प्र,ाण पत्र प्रदान विकया।
O. एनबीआर 1986 और एनबीआर 2006 क े ह इ,ार ों को एनबीसी 2005 क े भार्ग-4,ें विन ारिर अवि` सुरक्षा,ानदंडों का अनुपालन करना आवश्यक था। एनबीसी 2005 क े पैरा 4.[6] (बी),ें यह प्राव ान विकया र्गया है विक ऊ ं ?ी इ,ार ों क े लिलए 6,ीटर ?ौड़ाई क सभी रफ अवि`कर्षि,यों क े लिलए Oुले स्थान होंर्गे। व,ान,ा,ले,ें, 9,ीटर का एक स्पष्ट स्थान टी-1 और टी-17 क े बी? है जो अवि`कर्षि,यों क े सुर्ग, आवार्ग,न को सुविनति² कर ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iv)उत्तर प्रदेश फ्ल ै ट स्वावि,त्व अति विनय, 197522 प्रयोज्य नहीं है: क. ारा 2 क े ह, अति विनय, क े वल उन संपलित्तयों पर लार्गू हो ा है, सिजनक े,ालिलक उद्घोर्षणा द्वारा अति विनय, क े प्राव ानों को स्वीकार कर े हैं। इस प्रकार, यह अति विनय, स्व ः सभी संपलित्तयों पर लार्गू नहीं हो ा है और विकसी भी फ्ल ै ट,ालिलक ने व,ान,ें इस रह की कोई उद्घोर्षणा नहीं की है।
O. 26,ा? 2005 विदनांविक पट्टा विवलेO का Oंड II (ए?) रOरOाव से संबंति है, और इसका यह अथ नहीं लर्गाया जा सक ा है विक उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, लार्गू हो ा है। र्ग. यविद पहले प्रति वादी क े क को स्वीकार कर लिलया जा ा है, ो टी-1 से टी-15,ें पहली संशोति योजना द्वारा विकए र्गए परिरव न, सिजस,ें सभी टावरों की ऊ ं ?ाई को नौ से ग्यारह,ंसिजलों क बढ़ाना शावि,ल है, भी अवै होर्गा। (v) टी-16 और टी-17 की,ंजूरी,ें कोई हरिर क्षेत्र उल्लंघन नहीं हुआ हैः क. नए प्रस् ाविव टी-16 (जी + 11) और शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (जी + 1) क े लिलए पहली संशोति योजना,ें एक वित्रकोणीय हरिर स्थान की योजना बनाई र्गई थी। यह क्षेत्र एनबीआर 2006 क े ह भूOंडों पर बनाए रOने क े लिलए आवश्यक अविनवाय हरिर क्षेत्र (सॉफ्ट लैंडस्क े प) क े अलावा था।
O. क ें द्रीय हरिर क्षेत्र को 2005 की,ूल योजना,ें,ंजूरी दी र्गई थी। एनबीआर 2006 क े विवविनय, 38 क े ह आवश्यक हरिर क्षेत्र Oुले क्षेत्र का 25 प्रति श था, जो 11,538,02 वर्ग,ीटर होर्गा। जबविक अपीलक ा ने क ें द्रीय पाक क े रूप,ें 12,064.91 वर्ग,ीटर का हरिर क्षेत्र विदया था। 22 उ. प्र. 1975 अति विनय, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्ग. टी-1 को उसक े सा,ने एक हरिर स्थान क े वादे पर नहीं बे?ा र्गया था और विकसी भी Oरीदार से वरीय ा स्थान शुल्क नहीं लिलया र्गया था। घ. पहली संशोति योजना की,ंजूरी क े बाद और दूसरी संशोति योजना से पहले क ु ल 44,ें से टी-1,ें क े वल 11 फ्ल ै टों की बुविंकर्ग की र्गई थी। इन ग्यारह फ्ल ै टों,ें से क े वल सा फ्ल ै टों का सा,ना टी-17 की ओर था। यहां क विक इन सा ों,ें भी टी-17 क े सा,ने कोई लिOड़की/बालकनी नहीं थी, लेविकन क े वल बाथरू, की छोटी लिOड़विकयां थीं। (vi) टी-16 और टी-17 की,ंजूरी टावरों क े संर?नात्,क तिडजाइन क े संबं,ें एक वै प्र,ाण पत्र पर आ ारिर है (vii) अपीलक ा ने नोएडा को देय संपूण पट्टे का विकराया क े वल टी-1 से टी- 15 क े फ्ल ै ट,ालिलकों से नहीं लिलया है। इसने क े वल 7.[5] करोड़ रुपये एकत्र विकए हैं, जबविक इसने स्वयं लर्गभर्ग 14 करोड़ रुपये का भुर्ग ान विकया है। (viii) टी-16 और टी-17 को विर्गराने क े आदेश को साम्य ा क े आ ार पर अपास् विकए जाने योग्य है: क. विन,ाण अति कारिरयों की,ंजूरी से विकया र्गया था।
O. 600 व्यविक्तयों ने इन टावरों,ें फ्ल ै ट Oरीदे थे। र्ग. विन,ाण काय विदसंबर, 2009,ें शुरू हुआ और Oरीदारों क े पक्ष,ें ीसरे पक्ष क े अति कारों को विनति² विकया र्गया। घ. याति?का उच्च न्यायालय क े स,क्ष विदसंबर 2012,ें दालिOल की र्गई थी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ङ. टी-17,ें 28 और टी-16,ें 26,ंसिजलों का विन,ाण 20 विदसंबर 2013 को विकया र्गया था, जब उच्च न्यायालय क े स,क्ष बहस पूरी हो र्गई थी और जब क फ ै सला सुनाया र्गया, ब क 32,ंसिजलों का विन,ाण हो ?ुका था। इसलिलए, विवध्वंस का आदेश कठोर और अनुति? होर्गा।

42. श्री विवकास सिंसह की दलीलों क े अनुपूरक क े रूप,ें, नोएडा की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अति वक्ता श्री रविवन्द्र क ु,ार ने विनम्नलिललिO दलीलें प्रस् ु की: (i) एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.2,ें 24,ीटर से 37.5,ी. की ऊ ं ?ाई वाले भवनों क े लिलए प्राव ान है विक ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 9,ीटर से क, नहीं होर्गा। ?ूंविक,ौजूदा टॉवर एस्टर-2 (टी-1) की ऊ ं ?ाई 37.5,ीटर से क, है, इसलिलए इस टॉवर और टी-17 क े बी? आवश्यक न्यून, स्थान क े वल 9,ीटर है। इसक े अलावा, ऊपरी स् र पर सेट-बैक क े,ाध्य, से Oुले स्थान की क,ी को पूरा विकया जा सक ा है। हालांविक, ?ूंविक टी-1 की ऊ ं ?ाई बढ़ाने का प्रस् ाव नहीं है और टॉवर ीनों रफ से Oुला है, इसलिलए इस श को पूरा करने की आवश्यक ा नहीं है। (ii) विवशिभन्न नोएडा भवन विवविनय,ों का उल्लंघन नहीं विकया र्गया है क्योंविक वे दो टावरों क े बी? न्यून, दूरी विन ारिर नहीं कर े हैं। यह क े वल एनबीसी 2005 क े संदभ,ें 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' क े बी? की दूरी को संदर्शिभ कर ा है। (iii) यविद विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े विकनारे एक दूसरे क े आ,ने -सा,ने हैं, ो एनबीआर 2010 क े अनुसार दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? अति क, 9,ीटर का स्थान होर्गा। इसी रह क े प्राव ान शहरी विवकास,ंत्रालय द्वारा बनाए र्गए विदल्ली भवन उप-विनय,ों, भुवनेश्वर विवकास प्राति करण विबल्डिंल्डर्ग उपविनय, और,ॉडल विबल्डिंल्डर्ग उपविनय,,ें भी पाए जा े हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iv) अवि` सुरक्षा अति विनय, का भी पालन विकया र्गया है, क्योंविक इसक े लिलए दो टावरों क े बी? फायर टेंडरों की आवाजाही क े लिलए जर्गह प्रदान करने क े लिलएन्यून, 6,ीटर की दूरी की आवश्यक ा हो ी है। (v) इ,ार ों क े विन,ाण पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक नहीं लर्गाई र्गई थी, सिजसने अब ीसरे पक्षों क े अति कारों को O रे,ें डाल विदया है, जो अब विवध्वंस क े आदेश से व्यशिथ होंर्गे। (vi) 26 नवम्बर, 2009 को दूसरी संशोति योजना की स्वीक ृ ति क े स,य उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 अति विनयवि, नहीं विकया र्गया था। ीसरी संशोति योजना को,ंजूरी देने क े संबं,ें, योजनाओं या संशो नों को,ंजूरी देने की शविक्त नोएडा,ें विनविह है और यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 द्वारा इस,ें कटौ ी नहीं की र्गई है। (vii) उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010,ें योजनाओं की,ंजूरी से पहले आरडब्ल्यूए से कोई सह,ति या अनापलित्त प्र,ाण पत्र लेने का प्राव ान नहीं है। इसक े बावजूद, अपीलक ा पर उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े प्राव ानों का पालन करने की बाध्य ा रOी र्गई, जब 2,ा? 2012 को ीसरी संशोति योजना को,ंजूरी दी र्गई। (viii) ीसरी संशोति योजना को,ंजूरी दे े स,य, टी-16 और टी-17 क े ग्राउंड कवरेज क्षेत्र,ें कोई बदलाव नहीं विकया र्गया था और क े वल उनकी प्रस् ाविव ऊ ं ?ाइयों को बढ़ाया र्गया था। (ix) यह विनष्कर्ष विनकालने क े लिलए कोई थ्यात्,क आ ार नहीं है विक अपीलक ा और नोएडा क े बी? कोई वि,लीभर्ग थी. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

43. आरडब्ल्यूए की ओर से उपस्थिस्थ वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जयं भूर्षण ने आग्रह विकया विक आरडब्ल्यूए क े सदस्यों ने एक लेआउट विदOाए जाने क े बाद अपने फ्ल ै ट Oरीदे, सिजस,ें टी-1 क े सा,ने एक बर्गी?ा सविह सीवि, संख्या,ें फ्ल ै ट और उद्यान शावि,ल थे। अति कांश आवंटी सेवाविनवृत्त व्यविक्त हैं जो अपीलक ा द्वारा विकए र्गए एक रफा परिरव नों क े परिरणा,स्वरूप पीविड़ हुए हैं, सिजसक े परिरणा,स्वरूप फ्ल ै टों की संख्या 689 से बढ़कर 1573 हो र्गई है। टी-1 क े सा,ने क े उद्यान क्षेत्र को पूरी रह से हटा विदया र्गया है और 11,ंसिजला इ,ार ों क े परिरसर क े बजाय, दो लंबी और ऊ ं ?ी संर?नाओं को,ौजूदा आवंविटयों की सह,ति क े विबना,ंजूरी दी र्गई है, सिजससे उनकी सुरक्षा O रे,ें पड़ र्गई है। श्री भूर्षण ने कहा विकः (i) 2009 और 2012 की,ंजूरी दो इ,ार ों क े बी? बनाए रOने क े लिलए आवश्यक न्यून, दूरी,ानदंडों का उल्लंघन है। एनबीआर 2006 क े विनय, 32.3.[1] (i) क े ह, अपेतिक्ष दूरी सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की आ ी ऊ ं ?ाई क े बराबर हो ी है। 2009 की दूसरी संशोति योजना क े ह सबसे ऊ ं ?ी इ,ार टी-17 की उँ?ाई 73,ीटर है। इसलिलए न्यून, दूरी 36.5,ीटर होनी ?ाविहए। यह टी-1 और टी-17 क े बी? आवश्यक था। यहां क विक,ौजूदा टी-1 भी 37,ीटर का है। इसलिलए टी-1 से छोटी इ,ार भी टी-1 से क, से क, 18.5,ीटर की दूरी पर ही बन सक ी है। (ii) एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6) क े ह विकनारों पर टी-1 और टी-17 क े बी? 9,ीटर की दूरी क े विवपरी न्यून, 16,ीटर की दूरी की अपेक्षा है। (iii) एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.[1] क े ह इ,ार ों क े बी? की दूरी 16,ीटर होनी ?ाविहए। इसक े अलावा इ,ार की लंबाई का 10 प्रति श,ाइनस 4 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA,ीटर। प्रस् ाविव टॉवर की लंबाई 84.5,ीटर है और इसलिलए आवश्यक दूरी (16 + (84.[5] का 10 प्रति श ) -4) जो 20.45,ीटर क े बराबर है। (iv) एनबीसी 2005 क े अनुपालन की आवश्यक ा एनबीआर 2010 और सीएफओ द्वारा 2009,ें जारी अनापलित्त प्र,ाण पत्र द्वारा विन ारिर की र्गई है।इस संबं,ें, 24 अप्रैल 2012 को, सीएफओ ने नोएडा से पूछा विक एनबीआर 2006 और 2010 और एनबीसी 2005,ें विन ारिर दूरी क े,ानदंडों का उल्लंघन कर े हुए नए भवनों को,ंजूरी क ै से दी र्गई, सिजसका जवाब नोएडा द्वारा नहीं विदया र्गया। (v) एनबीसीसी, सिजसे अपीलक ा क े अनुरो पर इस न्यायालय द्वारा विनयुक्त विकया र्गया था, ने अपनी रिरपोट,ें कहा है विक दूरी की आवश्यक ा का उल्लंघन विकया र्गया है। (vi) अपीलक ा क े इस क क े जवाब,ें विक टी -1, टी-16 और टी-17 क े बी? न्यून, दूरी की आवश्यक ा नहीं है क्योंविक वे एक भवन ब्लॉक का विहस्सा हैं, यह कहा र्गया विक: क. एनबीसी 2005 इ,ार ों क े बी? की दूरी को संदर्शिभ कर ा है न विक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क े बी? की दूरी को।

O. हालांविक एनबीआर 2006 और 2010,ें ‘विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक’ शब्द का इस् े,ाल विकया र्गया है, लेविकन दोनों,ें से विकसी भी विनय,,ें इसे परिरभाविर्ष नहीं विकया र्गया है। विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? दूरी का औति?त्य अवि` सुरक्षा विनकासी, प्रकाश और वेंविटलेशन सुविनति² करना है। इ,ार ों क े स,ूहों को एक भवन Oंड क े रूप,ें नावि, करना विबल्डर पर नहीं छोड़ा जा सक ा है क्योंविक इससे न्यून, दूरी बनाए रOने का उद्देश्य क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA साथ र्गंभीर स,झौ ा विकया जाएर्गा। पद को एनबीसी 2005 से अपना स्वरूप लेना ?ाविहए और प्रत्येक इ,ार को एक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक होना ?ाविहए। और र्ग. विदल्ली और रुड़की क े आईआईटी द्वारा प्रस् ु की र्गई रिरपोट§,ें भवनों क े बी? दूरी की कायात्,क आवश्यक ाओं को विनर्षिदष्ट विकया र्गया है, सिजन,ें शावि,ल हैंः i. इ,ार ों क े बी? सं?रण से ब?ने क े लिलए अवि` पृथक्करण ii. आर्ग लर्गने क े दौरान सुरतिक्ष ब?ाव और विनकास iii.वेंविटलेशन और iv. विदन का उजाला टी-1 और टी-17 क े बी? न्यून, दूरी की क,ी क े कारण इन आवश्यक ाओं क े साथ र्गंभीर स,झौ ा विकया र्गया है। घ. एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6),ें एनबीसी 2005 को दूरी की आवश्यक ा क े स्रो क े रूप,ें संदर्शिभ विकया र्गया है। एनबीआर 2010 और 2006,ें 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक' वाक्यांश की व्याख्या एनबीसी 2005 क े अनुरूप होनी ?ाविहए। ङ 2006 की पहली संशोति योजना से प ा ?ल ा है विक प्रत्येक इ,ार को एक अलर्ग ब्लॉक क े रूप,ें रOने का इरादा था ?. अपीलक ा का प्रारंशिभक क यह था विक टी-1 और टी-17 अलर्ग- अलर्ग भूOंडों पर हैं और एक ही ब्लॉक क े रूप,ें कभी नहीं रOे जाने थे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बाद,ें, अपीलक ा ने दावा विकया विक उनका विन,ाण अलर्ग-अलर्ग ?रणों,ें विकया र्गया था और उन्हें अलर्ग-अलर्ग सुविव ाएं देनी थीं। बाद,ें, इसने एक झूठे और अस्वीक ृ नक्शे को पेश विकया सिजस,ें टी-1, टी-2, टी- 3, टी-16 और टी-17 को एक ब्लॉक क े रूप,ें विदOाया र्गया है। छ. इस न्यायालय क े स,क्ष 4 अर्गस्, 2021 को प्रस् ु अपीलक ा क े शपथ पत्र,ें कहा र्गया है विक टी-16 और टी-17,ें प्रवेश और विनकास सविह अलर्ग-अलर्ग सुविव ाएं होंर्गी। ज. 2006 की पहली संशोति योजना,ें स्वीक ृ टी-1, टी-16 और शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स को दूर कर विदया र्गया था और वे सभी अलर्ग-अलर्ग ब्लॉक थे। झ. टी-1 का विन,ाण अप्रैल 2008,ें पूरा हुआ था और आवंविटयों को कब्जा विदया र्गया था। 2008,ें टी-17 का विन,ाण कानूनी रूप से संभव नहीं था क्योंविक इसे पहली बार नवंबर 2009,ें ही,ंजूरी दी र्गई थी। ञ. टी-1 और टी-17 क े बी? की सड़क स,ाज क े लिलए,ुख्य सड़क है और बेस,ेंट और पार्किंकर्ग की ओर जा ी है ट. टी-1 क े हOाने,ें एक स् र है जबविक टी-17,ें दो स् र हैं। ठ. टी-1 का आ ार क े वल ग्यारह,ंसिजलों का भार वहन करने क े लिलए बनाया र्गया है। अपीलक ा ने दावा विकया है विक हालांविक टी-17 की नींव 2009,ें रOी र्गई थी, जब क े वल ?ौबीस,ंसिजलों को,ंजूरी दी र्गई थी, इस पर ?ालीस,ंसिजलों का भार वहन क े लिलए बनाया र्गया था सिजसकी,ंजूरी 2012,ें दी र्गई थी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ड. अं रिरक्ष फ्र े, क े साथ दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों का संबं इसे एक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक नहीं बनाएर्गा। ढ. अपीलक ा स्वयं विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क से सह, नहीं था और 'डेड एंड' पक्ष का,ुद्दा उठाया, सिजसक े कारण इस न्यायालय द्वारा थ्यों की पुविष्ट करने क े लिलए एनबीसीसी की विनयुविक्त की र्गई। एनबीसीसी की एक नकारात्,क रिरपोट क े बाद, अपीलक ा ने एक बार विफर विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क पर जोर विदया है विक डेवलपर क े विववेक पर ब्लॉकों को परिरभाविर्ष विकया जा सक ा है। (vii) अपीलक ा क े इस कथन क े उत्तर,ें विक इ,ार ें एनबीसी 2005 क े ह 'टावर जैसी संर?नाएं' हैं और इस प्रकार, अविनवाय न्यून, दूरी को पूरा कर ी हैं, यह कहा र्गया विकः क. एनबीआर 2006,2010 और एनबीसी 2005 की आवश्यक ाएं स्व ंत्र हैं और इसलिलए एनबीसी 2005 क े ह टावर जैसी संर?ना का ब?ाव एनबीआर क े उल्लंघन क े,ा,लों को सु ार नहीं सक ी है।
O. टी-17 क े पास कोई सेट-बैक नहीं है और इसकी पूरी ?ौड़ाई स,ान है। र्ग. टॉवर जैसी संर?नाओं क े लिलए भी ज,ीनी स् र पर क, से क, 12,ीटर दूरी की आवश्यक ा हो ी है और घ. एनबीसी 2005 क े ह टॉवर जैसी संर?नाओं क े विवर्षय,ें 16,ीटर क े अविनवाय Oुले स्थान की क,ी को ऊपरी स् रों पर सेट-बैक द्वारा ठीक विकया जा सक ा है। हालांविक, ज,ीनी स् र पर 12,ीटर की दूरी अविनवाय है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (viii) टी-1,ें फ्ल ै टों का कब्जा 2008,ें Oरीदारों को विदया र्गया था। 2009 और 2012 की दूसरी और ीसरी संशोति योजनाओं ने K,शः टी-1 और टी-17 को जोड़ने क े लिलए एक स्पेस फ्र े, का प्रस् ाव विदया, जब विनवासिसयों ने टी-1,ें रहना शुरू कर विदया था। यह र्गैरकानूनी है और सुरक्षा क े लिलए O रा है। (ix) पट्टे क े ह, सा,ान्य क्षेत्रों,ें अविवभासिज विह संबंति आवंविटयों को हस् ां रिर कर विदया र्गया।,ौजूदा फ्ल ै टों क े,ालिलकों ने पूरी लीज राशिश और उससे अति क का भुर्ग ान कर विदया था। जबविक अपीलक ा ने एक,ुश् पट्टे क े रूप,ें 13 करोड़ रुपये का भुर्ग ान विकया,,ौजूदा फ्ल ै टों (टी-16 और टी-17 को छोड़कर) क े Oरीदारों से 16 करोड़ रुपये से अति क का विकराया लिलया र्गया। (x) स्वीक ृ योजना,ें परिरव न से पहले उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति आवश्यक थी: क. उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 की ारा 4 (4) और ारा 5 (3) क े ह स्वीक ृ योजना/ अविवभासिज विह,ें बदलाव से पहले सभी आवंविटयों की सह,ति आवश्यक है। हरिर क्षेत्र को हटाने से उभय क्षेत्र,ें क,ी आई और फ्ल ै टों की संख्या 689 से बढ़कर 1573 हो र्गई।
O. उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 इसक े बावजूद प्रयोज्य है विक सोसाइटी का र्गठन विकया र्गया है या नहीं। अति कार अपाट,ेंट क े,ालिलकों क े पास हैं न विक एसोसिसएशन क े पास। र्ग. उद्यान क े साथ-साथ भूवि, को उन उभय क्षेत्रों की परिरभार्षा,ें शावि,ल विकया र्गया है सिजन पर सभी विनवासिसयों क े अति कार हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (xi) उत्तर प्रदेश 1975 क े अति विनय, क े ह स्वीक ृ योजना,ें परिरव न करने से पहले फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति प्राप्त की जानी ?ाविहए। क. ारा 5 (2) और 5 (3) क े ह अविवभासिज विह को सभी फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति क े विबना नहीं बदला जा सक ा है
O. पट्टा विवलेO का Oंड II (ज) उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, की प्रयोज्य ा को परिरकस्थिल्प कर ा है। यह क े वल रOरOाव क ही सीवि, नहीं है। नोएडा, अपीलक ा और आवंविटयों क े बी? वित्रपक्षीय उप-पट्टा भी उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, की प्रयोज्य ा को अविनवाय कर ा है और र्ग. अपीलक ा यह सुविनति² करने क े लिलए उत्तरदायी था विक उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, क े ह उद्घोर्षणा की र्गई थी। यह उद्घोर्षणा पत्र प्रस् ु करने,ें विवफल रहने,ें अपनी र्गल ी का लाभ नहीं उठा सक ा है (xii) अपीलक ा और नोएडा ने भवन विवविनय,ों को बाईपास करने क े लिलए सांठर्गांठ की हैः क. दूरी क े,ानदंडों का उल्लंघन करने वाली संशोति योजनाओं क े बावजूद, नोएडा ने उक्त संशो नों को,ंजूरी दी। आरडब्ल्यूए की ओर से बार-बार याद विदलाए जाने क े बावजूद योजनाएं रद्द नहीं की र्गई ं ।
O. दूरी क े,ानदंडों क े उल्लंघन को उजार्गर करने वाले 24 अप्रैल 2012 क े सीएफओ क े पत्र क े बावजूद नोएडा ने कोई कारवाई नहीं की। र्ग. अपीलक ा पहले से ही इस बा से अवर्ग था विक उसकी योजना भविवष्य,ें,ंजूर की जाएर्गी, और इसलिलए टी-16 और टी-17 क े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ?ालीस,ंसिजला भवनों को स,थन देने क े लिलए 2009,ें एक,जबू नींव का विन,ाण विकया, सिजसे 2012,ें,ंजूरी वि,ली। घ. अनु,ोदन की श § क े ह, स्वीक ृ योजना को प्रदशन क े लिलए स्थल पर रOा जाना था। इसक े बावजूद, योजना प्रदर्शिश करने,ें अपीलक ा की विवफल ा थी। जब आरडब्ल्यूए द्वारा नोएडा को योजनाओं की एक प्रति प्रदान करने का अनुरो विकया र्गया, ो नोएडा ने अपीलक ा से पूछा विक क्या वह योजनाओं की आपूर्ति कर सक ा है।अपीलक ा द्वारा इनकार करने पर, नोएडा ने योजनाओं को प्रदान करने से इनकार कर विदया और ङ. फ्ल ै ट,ालिलकों की शिशकाय क े आ ार पर अपीलक ा को न्यून, दूरी की आवश्यक ा क े उल्लंघन क े लिलए एक कारण ब ाओ नोविटस जारी करने क े बाद नोएडा द्वारा कोई कारवाई नहीं की र्गई थी। (xiii) 2009 की दूसरी संशोति योजना क े विकसी भी विहस्से को ब?ाया नहीं जा सक ा है क्योंविक यह एनबीआर 2006,ें विनविह दूरी क े,ानदंडों का उल्लंघन है और यह उत्तर प्रदेश 1975 क े अति विनय, क े भी विवपरी है। (xiv) अपीलक ा उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 और रिरयल एस्टेट विवविनय,न और विवकास अति विनय, 2016 क े ह,ौजूदा फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति क े विबना आर्गे कोई विन,ाण नहीं कर सक ा है। (xv) नई इ,ार ों (टी-16 और टी-17),ें फ्ल ै ट Oरीदारों क े पक्ष,ें कोई इस्थिक्वटी नहीं है, सिजन्होंने अपने फ्ल ै टों को बनाए रOने का फ ै सला विकया है, विवशेर्ष रूप से जब इस न्यायालय ने कई आदेशों क े,ाध्य, से Oरीदारों को रिरफ ं ड पाने का अवसर प्रदान विकया था। (xvi) टी-16 और टी-17 को सुरतिक्ष रूप से ध्वस् विकया जा सक ा है और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (xvii) उच्च न्यायालय और इस न्यायालय क े स,क्ष अपने अशिभव?नों क े दौरान अपीलक ा द्वारा झूठे और भ्रा,क बयान विदए र्गए हैं। र्ग. आरंशिभक विटप्पशिणयाँ 44 आरंभ,ें, यह नोट विकया जाना ?ाविहए विकः (i) वह क्षेत्र जो,ूल रूप से अपीलक ा को पट्टे पर विदया र्गया था, 48,263 वर्ग विकलो,ीटर,ें फ ै ला हुआ था।,ीटर.अर्गेंस्ट पूरक पट्टे क े परिरणा,स्वरूप क्षेत्र बढ़कर 54,816 वर्ग विकलो,ीटर हो र्गया।,ीटर. उठाए र्गए,ुद्दों पर स्पष्ट ा लाने क े लिलए,,ंजूरी की ारीO और विन,ाण का विववरण नी?े आदेश विकया र्गया हैः शीर्षक,ंजूरी की ति शिथ इ,ार ें विववरण,ूल योजना 20 जून 2005 टॉवस 1-14 जी + 9,ंसिजल पहली संशोति योजना 29 विदसम्बर टॉवस 1-15 जी + 11,ंसिजलों की प्रत्येक टावर की ऊ ं ?ाई 37,ीटर है। टॉवस 1-16 T-16,ें 37,ीटर की ऊ ं ?ाई क े साथ 1 (G+11,ंसिजल) और 3 (G+4,ंसिजल) वाले पंOों का एक स,ूह शावि,ल होना था। शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स जी + 1,ंसिजल दूसरी संशोति योजना 26 नवम्बर, टावस 1-15 जी + 11,ंसिजलों की प्रत्येक टावर की ऊ ं ?ाई 37,ीटर है। टॉवस 16-17 जी + 24,ंसिजलों, प्रत्येक टॉवर की ऊ ं ?ाई बढ़कर 73,ीटर हो र्गई। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ीसरी संशोति योजना 2,ा? 2012 टावस 1-15 जी + 11,ंसिजलों की प्रत्येक टावर की ऊ ं ?ाई 37,ीटर है। टॉवस 16-17 जी + 40,ंसिजलों की प्रत्येक टावर की ऊ ं ?ाई बढ़ाकर 121,ीटर कर दी र्गई है। विन,ाण क े लिलए योजना,ूल रूप से 20 जून 2005 को,ंजूर की र्गई थी। इसक े बाद 29 विदसंबर 2006,26 नवंबर 2009 और 2,ा? 2012 को ीन संशो नों को,ंजूरी दी र्गई।

45. संशोति योजनाओं की,ंजूरी और टी-16 और टी-17 क े विन,ाण को विनम्नलिललिO क े उल्लंघन क े आ ार पर ?ुनौ ी दी र्गई हैः (i) एनबीआर 2006 * पहले जी + 1 शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स को टी-16 क े रूप,ें अंविक विकया र्गया है, जबविक,ूल टी-16 को टी-17 क े रूप,ें अंविक विकया र्गया है। इसक े अलावा, टी-1 और टी-17 को ऊपरी स् र पर एक अं रिरक्ष फ्र े, द्वारा जोड़ा जाना था। * ीसरी संशोति योजना विदनांविक 2,ा? 2012 क े अनुसार, टी-16 और टी-17 क े लिलए प्रस् ाविव ल जी + 40 थे। थाविप, ह, देO े हैं विक वरिरष्ठ अति वक्ता श्री विवकास सिंसह द्वारा प्रस् ु स्वीक ृ योजनाओं क े ब्यौरे,ें टी-17 क े लिलए परिरकस्थिल्प,ंसिजलों की संख्या जी + 39 और टी-16 क े लिलए जी + 40 थी। इसक े अलावा 18 अर्गस्, 2011 की अनंति, फायर एनओसी क े अनुसार टी-16 और टी-17 क े लिलए प्रस् ाविव विन,ाण जी + 38,ंसिजलों क े लिलए था। (ii)एनबीआर 2010 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iii)एनबीसी 2005 (iv)उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, (v) उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 (vi)अवि` सुरक्षा,ानदंड अपीलक ा उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, की प्रयोज्य ा पर विववाद कर ा है। इस पर विनणय क े दौरान विव?ार विकया जाएर्गा।

46. उच्च न्यायालय क े स,क्ष,ांर्गे र्गए अनु ोर्ष क े संबं,ें आ ार को स्पष्ट करना आवश्यक हो जा ा है। उच्च न्यायालय क े स,क्ष याति?का,ें,ांर्गा र्गया अनु ोर्ष विनम्नलिललिO क े लिलए थीः (i) टी-16 (सिसयान) और टी-17 (एपेक्स) क े विन,ाण क े लिलए संशोति योजना को रद्द करना और योजना क े अनुसार विनर्षि, संर?नाओं को ध्वस् करना (ii) नोएडा को विनदmश देना विक वह सभी विनवासिसयों की सह,ति प्राप्त विकए विबना ए,राल्ड कोट क े संबं,ें आर्गे विकसी भी भवन योजना को,ंजूरी न दे (iii) टी-1 को टी-16/टी-17 क े साथ जोड़ने की अनु,ति को रद्द करना (iv) अवि` सुरक्षा उपकरण और बुविनयादी ढां?े की स्थापना का विनदmश देना (v) बेस,ेंट और सेट बैक एरिरया,ें अवै विन,ाण को विर्गराने का विनदmश देना और (vi) नोएडा और अपीलक ा को एनबीसी 2005 क े अनुसार कार पार्किंकर्ग स्थान प्रदान करने का विनदmश देना। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उपयुक्त अनु ोर्ष,ें से, उच्च न्यायालय ने अशिभलिललिO विकया विक क े वल (i) और (iii) प्राथनाओं पर बल विदया र्गया था।

47. उपरोक्त वणन से स्थाविप हो ा है विक संशोति योजनाओं को ?ुनौ ी दी र्गयी थी सिजसक े द्वारा टी-17 (एपेक्स) और टी-16 (सिसयान) क े विन,ाण और ऊ ं ?ाई,ें वृतिद्ध की परिरकल्पना की र्गई थी। जैसा विक उपरोक्त ालिलका संक े दे ी है, 29 विदसंबर 2006 की पहली संशोति योजना,ें, टी-16,ें आंशिशक रूप से जी + 11 शावि,ल था, शेर्ष जी + 4 था। एक शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स की परिरकल्पना की र्गई थी सिजस,ें जी + 1 फ्लोर होंर्गे। टी-1 क े सा,ने 29 विदसंबर 2006 की पहली संशोति योजना,ें एक वित्रकोणीय हरिर क्षेत्र का संक े विदया र्गया है। 26 नवम्बर, 2009 की दूसरी संशोति योजना,ें टी-17 (एपेक्स) और टी-16 (सिसयान) प्रत्येक को 24,ंसिजलों और 73,ीटर की ऊ ं ?ाई क े साथ परिरकस्थिल्प विकया र्गया था। 2,ा?, 2012 की ीसरी संशोति योजना,ें टी-16 और टी-17 क े फश§ की संख्या ?ौबीस से बढ़ाकर ?ालीस,ंसिजल (टी-16 क े लिलए) और उन ीस,ंसिजल (टी-17 क े लिलए) कर दी र्गई और प्रत्येक टावर की ऊ ं ?ाई 73,ीटर से से 121,ी. बढ़ा दी र्गई। इस पृष्ठभूवि,,ें अनु ोर्ष की,ांर्ग की र्गई थी। (i) दो नए टावरों टी-17 (एपेक्स) और टी-16 (सिसयान) क े विन,ाण की संशोति योजना को रद्द करने क े लिलए प्राथना की र्गई थी। यह 26 नवम्बर, 2009 की दूसरी संशोति योजना और 2,ा?, 2012 की ीसरी संशोति योजना क े लिलए स्पष्ट रूप से एक ?ुनौ ी है।

48. अपीलक ा और नोएडा द्वारा उच्च न्यायालय क े स,क्ष पहले प्रति वादी को रोकने का एक प्रयास विकया र्गया था। स्वीक ृ योजनाओं,ें इस श को शावि,ल विकया र्गया है विक प्रत्येक योजना की एक प्रति स्थल पर उपलब् कराई जाएर्गी। इसक े बावजूद, जब पहले प्रति वादी ने स्वीक ृ योजनाओं और अन्य जानकारी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की प्रति यां,ांर्गी, ो नोएडा ने अपीलक ा को पत्र लिलOकर प्रति वादी को योजना प्रदान करने क े लिलए उनकी सह,ति,ांर्गी। जब अपीलक ा ने इंकार कर विदया ो नोएडा द्वारा आरडब्ल्यूए को इनकार करने का अनुसरण विकया र्गया। उच्च न्यायालय क े अं रिर, विनदmशों क े अनुसरण,ें ही स्वीक ृ योजनाएं और दस् ावेज पहले प्रति वादी को प्रदान विकए र्गए थे। दूसरी और ीसरी संशोति योजनाओं की वै ा को ?ुनौ ी देने वाला अनु ोर्ष,ांर्गा र्गया है, सिजसक े ह दो टावरों टी- 17 (एपेक्स) और टी-16 (सिसयान) का विन,ाण विकया जा रहा था। घ-भवन विन,ाण विवविनय,ों क े ह दूरी की आवश्यक ा का उल्लंघन

49. पहला,ुद्दा यह है विक क्या नोएडा द्वारा टी-16 और टी-17 क े विन,ाण क े लिलए,ंजूरी लार्गू भवन विवविनय,ों क े ह दूरी की आवश्यक ा का उल्लंघन है। 20 जून, 2005 विदनांविक,ूल,ंजूरी

50. जब योजना को,ूल रूप से 20 जून 2005 को,ंजूरी दी र्गई थी, ब एनबीआर 2006 को लार्गू विकया जाना शेर्ष था। 20 जून 2005 की,ंजूरी एनबीआर 1986 क े शासन क े ह थी। एनबीआर 1986 ने सा,ने से 15,ीटर लंबे सेटबैक सभी रफ से 9,ीटर की परिरकल्पना की थी। ?ूंविक,ूल योजना,ें टी-16 और टी-17 क े विन,ाण की परिरकल्पना नहीं की र्गई थी, इसलिलए संबंति भवन विनय,ों क े उल्लंघन क े लिलए उक्त योजना को ?ुनौ ी नहीं दी र्गई है। 29 विदसंबर, 2006 विदनांविक पहली संशोति,ंजूरी

51. एनबीआर 2006, 16 विदसंबर, 2006 को लार्गू हुआ। इस परिरयोजना क े लिलए स्वीक ृ योजना को पहली बार 29 विदसंबर, 2006 को संशोति विकया र्गया था और इसका क ु ल क्षेत्रफल 54,819 वर्ग,ीटर है जो पट्टा विवलेO और पूरक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पट्टा विवलेO क े ह अपीलक ा को पट्टे पर विदया र्गया। पहली संशोति योजना,ें दो अति रिरक्त टावरों (टी-15 और टी-16) और एक शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (जी + 1,ंसिजल) क े विन,ाण क े लिलए प्राव ान विकया र्गया था। सभी 16 टावर जी + 11,ंसिजल और 37,ीटर ऊ ं ?ाई वाले होने थे।

52. पहली संशोति योजना एनबीआर 2006 द्वारा शासिस थी। विनय, 33,ें स्वीकाय एफएआर, ज,ीनी कवरेज और भवनों की ऊ ं ?ाई का प्राव ान है। विवविनय, 33.[2] स,ूह आवास क े बारे,ें था। इसक े साथ संल` ालिलका इस प्रकार हैः

33. 2 स,ूह आवास ग्रुप हाउसिंसर्ग अति क, ग्राउंड कवरेज एफएआर उं?ाई 1 कवरेज 30 200 कोई सी,ा नहीं 2 घनत्व योजना,ें यथाउसिल्ललिO Oंड विवविनय, 32 सैट-बैक से संबंति है, सिजसे प्लॉट सी,ाओं क े स,ानां र रेOा क े रूप,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है, सिजसक े बाद प्लॉट सी,ाओं की ओर क ु छ भी विन,ाण नहीं विकया जा सक ा है। विवविनय, 32.3,ें कहा र्गया है विक जहां एक भूOंड का आकार 40,000 वर्ग,ीटर से अति क है, वहां भूवि, का आकार 35,000 वर्ग,ीटर से अति क है। वहां सा,ने का सेटबैक 25,ीटर का होर्गा, जबविक पीछे और ?ारों ओर 9,ीटर का सेटबैक होर्गा। व,ान,ा,ले,ें विववाद mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े लिलए विवविनय,न 33.2.[3] प्रासंविर्गक होर्गा और यह विनम्नलिललिO रूप,ें जहां क प्रासंविर्गक हैः “दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? की दूरी सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई क े आ े से क, नहीं होनी ?ाविहए।” (प्रभाव वर्ति ) 26 नवंबर, 2009 विदनांविक दूसरी संशोति,ंजूरी 53.,ूल योजना,ें दूसरा संशो न एनबीआर 2006 क े ह 26 नवंबर, 2009 को,ंजूर विकया र्गया था। दूसरी संशोति योजना,ें टी-16 (जी + 11 फ्लोर और जी + 4 फ्लोर) और एक शॉविंपर्ग कॉम्प्लेक्स (जी + 1 फ्लोर) क े विन,ाण क े बजाय, दो टॉवर, टी-16 और टी-17 का विन,ाण विकया जाना था, सिजन,ें से प्रत्येक,ें जी + 24 फ्लोर और 73,ीटर उँ?ा विन,ाण विकया जाना था। संशो न क े अनुसार, ज,ीनी स् र पर टी-17 और टी-1 क े बी? 9,ीटर दूरी बनाए रOी जानी थी, और टी-1 और टी-17 को ऊपरी स् र पर एक अं रिरक्ष फ्र े, क े,ाध्य, से जोड़ा जाना था। दूसरी संशोति योजना,ें 15,ीटर का फ्र ं ट सेट बैक और 9,ीटर का रिरयर और साइड सेट बैक विदया र्गया है। प्रत्येक को,ंजूरी दी र्गई है। 54.,ुद्दा यह है विक क्या 73,ीटर की उं?ाई वाली टी-16 और टी-17 का विन,ाण जो टी-1 से 9,ीटर की दूरी पर हों त्स,य प्रयोज्य विवविनय,न अथा एनबीआर 2006 क े अनुपालन,ें है। ह, अर्गले Oंड,ें इसका उल्लेO करेंर्गे। 2,ा?, 2012 विदनांविक ीसरी संशोति,ंजूरी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

55. योजना,ें ीसरा संशो न 2,ा? 2012 को,ंजूर विकया र्गया था, सिजसक े द्वारा टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई 73,ीटर से बढ़ा दी र्गई थी।टी-16 और टी-17,ें फश§ की संख्या ?ौबीस से बढ़ाकर ?ालीस कर दी र्गई थी।

56. ीसरी संशोति योजना की,ंजूरी क े स,य, एनबीआर 2010 लार्गू हो र्गया था। एनबीआर 2010 क े विनय, 1.[6] और 1.[7] इस प्रकार हैंः “1.[6] वह भूOंड सिजस पर नक्शा पहले ही,ंजूर विकया जा ?ुका है और विन,ाण काय शुरू हो ?ुका है या पूरा हो ?ुका है, आवंटी को उसी भवन योजना को संशोति करने या भवन क े उस विहस्से क े लिलए प्र?लिल विनय,ों क े अनुसार नई योजना प्रस् ु करने की अनु,ति दी जा सक ी है, जहां विन,ाण नहीं हुआ है या भवन,ें कोई नया परिरव न आवश्यक है। 1.[7] विवविनय,ों,ें यथा इंविर्ग एफएआर, ग्राउंड कवरेज, सेटबैक्स और घनत्व उन प्लॉटों क े संबं,ें लार्गू नहीं होंर्गे जो नीला,ी या विनविवदा क े आ ार पर आवंविट विकए र्गए थे और इनक े प्रव न से पहले क े स,ूह आवास थे। हालांविक, ऐसे भूOंडों,ें नई इ,ार ों,ें एफएआर और ग्राउंड कवरेज की र्गणना इन विनय,ों क े अनुसार की जाएर्गी। Kय योग्य एफ.ए.आर. और ज,ीनी कवरेज प्रयोज्य ा क े अनुसार अनु,न्य हो सक ी है।” (प्रभाव वर्ति )

57. विवविनय, 24.[2] क े ह, स,ूह आवास क े लिलए विनम्नलिललिO श § का प्राव ान विकया र्गया हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (II) अति क, अनु,न्य - (i) ग्राउंड कवरेज 40000 वर्ग,ीटर क 35 प्रति श और 40, 000 वर्ग,ीटर से अति क पर 40% । (ii) ल क्षेत्र अनुपा 2.75 (iii) ऊ ं ?ाई कोई सी,ा नहीं है। 30,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई वाले भवनों क े लिलए, हवाई अड्डा प्राति करण से,ंजूरी लेनी होर्गी। (iv) घनत्व (परिरवार आकार) जैसा विक सेक्टर लेआउट,ें उल्लेO विकया र्गया हो या विकसी विवशेर्ष योजना क े लिलए प्राति कारी द्वारा य विकया र्गया हो। एनबीआर 2010 की सारणी संख्या 2,ें विवविनय,न 24 क े संबं,ें सेटबैक आवश्यक ा विवविह की र्गयी है। 40,000 वर्ग,ीटर से अति क क े सभी भूOंडों क े लिलए सा,ने की रफ 16,ीटर का सेट-बैक और पीछे की रफ और दोनों रफ 12,ीटर का हो ा है।

58. विवविनय, 24.2.1(1) (vi),ें 6,ीटर की दूरी का प्राव ान है। इसे अवि`श,न कर्षि,यों क े लिलए Oुला छोड़ा जाना है। उक्त विवविनय, नी?े उद्धृ विकया र्गया हैः “अवि`श,न कर्षि,यों क े लिलए न्यून, 6,ीटर Oुला र्गलिलयारा छोड़ने क े बाद विनम्नलिललिO विवशेर्ष ाओं की अनु,ति दी जाएर्गी। (क) विवद्यु प्राति करण क े,ानदंडों क े अनुसार,ीटर रू,। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (O) आवश्यक सुरक्षा आवश्यक ाओं को ध्यान,ें रO े हुए विबना विकसी स्थायी बाड़े क े Oुले ट्रांसफा,र। (र्ग) सारणी 3,ें उसिल्ललिO अन्य विवशेर्ष ाएं। (घ) रॉकरी, क ु आं और क ु एं की संर?नाएं, वाटर पूल, स्थिस्वविं,र्ग पूल (यविद अनावृ है), पेड़ क े आसपास Oुला हुआ प्लेटफा,, टैंक, फव्वारा, बें?, ?बू रा, Oुले शीर्ष क े साथ और नालिलयों पर बर्गल की दीवारों, क ं पाउंड-वॉल, र्गेट, स्लाइड-ल्डिंस्वर्ग, पुलिलयों से तिघरा हुआ। (ङ),ुख्य कायकारी अति कारी द्वारा,ा,ले क े आ ार पर विकसी भी विवशेर्ष ा, प्राथवि,क रूप से सजावटी, जो वाशिणस्थिज्यक उपयोर्ग क े स्थान को न घेर ा हो, अनु,ति दी जा सक ी है। (?) ऑपरेशन ईएनजी जनरेटर सेट, विफल्ट्रेशन प्लांट, विवद्यु विव रण उपकरण, फीडर विपलर, टेलीफोन विव रण उपकरण को Oुले ौर पर अनु,ति दी जा सक ी है क्योंविक अवि`श,न कर्षि,यों क े लिलए Oाली जर्गह छोड़ने क े बाद सेवा यूविटलिलटी प्रदान की जा ी है। दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? की दूरी क े संबं,ें, विवविनय, 24.2.1.6,ें विनम्नलिललिO प्राव ान विकया र्गया हैः “दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? की दूरी दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? की दूरी क, से क, 6,ीटर से 16,ी. होर्गी जो ब्लॉकों की ऊ ं ?ाई पर विनभर होर्गी। 18,ीटर क की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ऊ ं ?ाई क े विन,ाण क े लिलए 6,ीटर की दूरी होर्गी और उसक े बाद राष्ट्रीय भवन संविह ा-2005 क े अनुसार अति क, 16,ीटर की दूरी क े अध्य ीन भवन की ऊ ं ?ाई,ें 3,ीटर की प्रत्येक वृतिद्ध क े लिलए 1,ीटर की दूरी बढ़ाई जाएर्गी। यविद Oंडों क े अंति, छोर एक दूसरे क े आ,ने- सा,ने हैं, ो अं र अति क, 16,ी. क े बजाय 9,ीटर होर्गा। इसक े अलावा, आवंटी दो ब्लॉकों क े बी? 16,ीटर से अति क का प्राव ान या प्रस् ाव कर सक ा है।”

59. उपरोक्त विवविनय, इंविर्ग कर ा है विकः (i) दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? की दूरी क, से क, 6,ीटर होनी ?ाविहए। जो ब्लॉक की ऊ ं ?ाई क े आ ार पर 16,ीटर क जा रहा है। (ii) 18,ीटर क की इ,ार की ऊ ं ?ाई क े लिलए, अं र 6,ीटर होर्गा, सिजस,ें प्रत्येक 3,ीटर की वृतिद्ध क े लिलए भवन की ऊ ं ?ाई क 1,ीटर की वृतिद्ध की जाएर्गी। (एनबीसी 2005 क े ह अति क, 16,ीटर की दूरी क े अध्य ीन) (iii) यविद Oंडों क े अंति, छोर एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने होंर्गे ो अं र 16,ीटर क े बजाय अति क, 9,ीटर का होर्गा। (iv) थाविप, आवंटी दो ब्लॉकों क े बी? 16,ीटर से अति क की दूरी का प्रस् ाव कर सक ा है।

60. एनबीआर 2010 का विवविनय,न 24.2.1.[6] न्यून, दूरी की आवश्यक ा क े लिलए एनबीसी 2005 का उल्लेO कर ा है। एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.1,ें विनम्नलिललिO श ‘ शावि,ल हैंः “8.2.3.1...10,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई की इ,ार ों क े लिलए, Oुले स्थान (साइड और रिरयर) ालिलका 2,ें विदए र्गए अनुसार होंर्गे।इ,ार ों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की ऊ ं ?ाई बढ़ाने क े लिलए सा,ने क े Oुले स्थानों को 9.4.[1] (ए) द्वारा विनयंवित्र विकया जाएर्गा। ालिलका 2 विवशिभन्न इ,ार ों क े लिलए साइड और रिरयर ओपन स्पेस (Oंड 8.2.3.1) K, सं. इ,ार ों की ऊ ं ?ाई इ,ार क े ?ारों ओर साइड और रिरयर ओपन स्पेस को छोड़ा जाएर्गा (1) ए, (2) ए, (3) i) 10 3 ii) 15 5 iii) 18 6 iv) 21 7 v) 24 8 vi) 27 9 vii) 30 10 viii) 35 11 ix) 40 12 x) 45 13 xi) 50 14 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA xii) 55 और उससे अति क 16 नोट्स

1. 24,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई की इ,ार ों क े लिलए 6,ीटर की न्यून, Oुली जर्गह होर्गी। 2 जहां क,रे बाहरी Oुले स्थान से प्रकाश और वेंविटलेशन प्राप्त नहीं कर े हैं, वहां कॉल 3,ें विदए र्गए ऐसे बाहरी Oुले स्थान की ?ौड़ाई को न्यून, 3,ीटर और अति क, 8,ीटर क े अध्य ीन 1,ीटर क, विकया जा सक ा है। आर्गे क े अनु,ानों की अनु,ति नहीं दी जाएर्गी। 3 यविद इ,ार की लंबाई या र्गहराई 40,ीटर से अति क है, ो कॉल, (3) की लंबाई,ें लंबाई या र्गहराई से 4,ीटर की घटाकर 10 प्रति श जोड़ें।” (जोर विदया र्गया) पैरा 8.2.3.2,ें विनम्नलिललिO प्राव ान विकया र्गया हैः “ 8.2.3.[2] टॉवर जैसी संर?नाओं क े लिलए 8. 2. 3.[1] क े विवकल्प क े ौर पर, Oुले स्थान इस प्रकार होंर्गेः (क) 24,ीटर की ऊ ं ?ाई क, एक सेट-बैक क े साथ, ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 6,ीटर से क, नहीं होर्गा। (O) एक सेट बैक क े साथ 24,ीटर और 37.5,ीटर क े बी? की ऊ ं ?ाई क े लिलए, ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 9,ीटर से क, नहीं होर्गा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (र्ग) दो सेट-बैक क े साथ 37.5,ीटर से अति क की ऊ ं ?ाई क े लिलए, ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 12,ीटर से क, नहीं होर्गा। (घ) Oुले स्थानों की क,ी को ऊपरी स् र पर सेटबैक्स क े,ाध्य, से 8.2.3.[1] को पूरा विकया जाएर्गाः इन स् रों पर अलर्ग -अलर्ग क,रों/फ्ल ै टों से इन सेटबैक्स क पहुं? नहीं होर्गी।” (जोर विदया र्गया) एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.[1] से प ा ?ल ा है विक जहां इ,ार की ऊ ं ?ाई 55,ीटर है। भवन क े ?ारों ओर ब?ी Oुली जर्गह 16,ीटर होनी ?ाविहए। नोट 3 इंविर्ग कर ा है विक यविद इ,ार की लंबाई या र्गहराई 40,ीटर से अति क है, ो आवशयक दूरी,ें कॉल, 3,ें विनर्षिदष्ट ऊ ं ?ाई क े अलावा, लंबाई का दस प्रति श,ें इ,ार की र्गहराई से 4,ीटर क, जोड़ा जाना है। इस प्रकार, 55,ीटर की ऊ ं ?ाई (जैसा विक व,ान,ा,ले,ें है) क े,ा,ले,ें है, इसक े अलावा 8.45,ीटर की अति रिरक्त दूरी (84.5,ीटर का 10 प्रति श ) को 16,ीटर,ें जोड़ा जा ा है और 4,ीटर की कटौ ी की जानी है सिजससे आवश्यक दूरी 20.45 वि,ल ी है। थाविप, टावर जैसी संर?नाओं क े लिलए एक विवकल्प पैरा 8.2.3.[2] द्वारा उपलब् कराया र्गया है। 5,ीटर से अति क की ऊ ं ?ाई क े लिलए, ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 12,ीटर से क, नहीं होर्गा। इसक े अलावा, पैरा 8.3.2.[1] क े ह आवश्यक Oुले स्थान की क,ी को ऊपरी स् रों पर सेट -बैक क े,ाध्य, से पूरा विकया जा सक ा है, बश m विक इन स् रों पर व्यविक्तर्ग क,रों/फ्ल ै टों से सेट-बैक क पहुं? न हो। घ. 1 एनबीआर 2006 और 2010 डी का उल्लंघन घ 1.[1] विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों की व्याख्या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

62. पहला पहलू सिजस पर विव?ार करने की आवश्यक ा है, वह यह है विक क्या टी-17 और टी-1 दो विनकटव d भवन ब्लॉक हैं या अपीलक ा द्वारा दावा विकए र्गए एक ही भवन ब्लॉक का विहस्सा हैं। एनबीआर 2006 क े विनय, 33.2.3,ें कहा र्गया है विक दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? की दूरी सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई क े आ े से क, नहीं होनी ?ाविहए।

63. नोएडा प्राति करण की ओर से उपस्थिस्थ विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता श्री विवकास सिंसह और श्री रविवन्द्र क ु,ार का क यह है विक एनबीआर 2006 का विवविनय, 33.2.3, जो 26 नवम्बर, 2009 को दूसरी संशोति योजना क े अनु,ोदन क े स,य प्रभावी था (टी-16 और टी-17 क े विन,ाण पर विव?ार कर े हुए), दो विनकटव d भवन Oंडों क े बी? दूरी विन ारिर कर ा है। श्री विवकास सिंसह ने कहा विक यह पूरी रह से डेवलपर क े विववेकाति कार पर विनभर कर ा है विक क्या एक या अति क भवनों को विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क े रूप,ें,ाना जाना ?ाविहए, क्योंविक एनबीआर 2006,ें विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक की कोई परिरभार्षा नहीं है। यह आग्रह विकया र्गया है विक अपीलक ा यह दावा करने का हकदार है विक स्वीक ृ योजना,ें भवन ब्लॉक शावि,ल हैं, और यह विक टी-16 और 17 टी-1, टी-2 और टी-3 क े साथ एक भवन ब्लॉक का विहस्सा हैं। इस प्रकार, यह कहा र्गया है विक ये सभी टावर (टी-1, टी-2, टी-3, टी-16 और टी-17) एक एकल भवन Oंड का र्गठन कर े हैं। इस क को पुष्ट करने क े लिलए, टी-1 और टी-17 को जोड़ने वाले स्पेस फ्र े, का उल्लेO विकया र्गया है। यह आग्रह विकया र्गया है विक विवविनय, 33.2.[3] द्वारा प्रदान की र्गई न्यून, दूरी को बनाए रOने की कोई आवश्यक ा नहीं है, जो क े वल दो विनकटव d भवनOंडों क े बी? की दूरी क े संबं,ें लार्गू हो ा है। ?ूंविक टी-1 को एक अं रिरक्ष फ्र े, द्वारा टी-17 से जोड़ा जाना था, इसलिलए दो नए टावरों (टी-17 और टी-16) को एक ही भवन ब्लॉक का एक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विहस्सा बनाया जाएर्गा, सिजससे उनक े बी? न्यून, दूरी बनाए रOने की आवश्यक ा स,ाप्त हो जाएर्गी। इस क का स,थन करने क े लिलए विवविनय, 33.2.[3] क े,ूल विंहदी संस्करण को संदर्शिभ करने की,ाँर्ग की र्गयी सिजस,ें " दो भवन स,ूहों क े बी? की दूरी" पद का प्रयोर्ग विकया र्गया है। इस संदभ,ें यह कहा र्गया है विक एनबीआर 2010 क े लार्गू होने क े बाद टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई ?ौबीस से बढ़ाकर ?ालीस,ंसिजल कर दी र्गई है।एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.1. (6),ें भी दो विनकटव d भवन Oंडों का प्रयोर्ग विकया र्गया है। इस प्रकार, एनबीआर 2006 और 2010 दोनों क े आ ार पर, यह आग्रह विकया र्गया है विक अपीलक ा टी-16 और टी-17 को एक क्लस्टर क े विहस्से क े रूप,ें,ानने का हकदार था सिजस,ें टी-1 शावि,ल होर्गा। इसलिलए, क यह है विक ?ूंविक ये सभी एक ही भवन ब्लॉक का र्गठन कर े हैं, इसलिलए न्यून, दूरी की आवश्यक ा को बनाए रOने की आवश्यक ा नहीं है।

64. अपीलक ा की ओर से विदये र्गये क§ को नोएडा की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अति वक्ता श्री रविवन्दर क ु,ार की दलीलों से स,थन वि,ल ा है। नोएडा की ओर से विदए र्गये क§ का सार है: (i) एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6) क े अंग्रेजी संस्करण क े अलावा, सिजस,ें 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' अशिभव्यविक्त का उपयोर्ग विकया र्गया है, विंहदी संस्करण,ें 'भवन स,ूह' शब्द का उपयोर्ग विकया र्गया है, जो इ,ार ों क े स,ूह की अव ारणा पर जोर दे ा है। (ii) जब विवविनय,ों,ें "भवन स,ूह" की बा की जा ी है, ो यह टावरों क े बी? की दूरी नहीं है, बस्थिल्क ब्लॉक क े बी? की दूरी है जो ब ाई र्गयी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iii) टी-1, टी-16 और टी-17 एक स,ूह या ब्लॉक का विहस्सा हैं और इसलिलए एक ब्लॉक क े विहस्से क े रूप,ें बनने वाली इ,ार ों क े बी? दूरी बनाए रOने की कोई आवश्यक ा नहीं है (iv) टी-1 और टी-7 क े बी? न्यून, दूरी की अनुपस्थिस्थति का कोई परिरणा, नहीं होर्गा (v) न्यून, दूरी की आवश्यक ा क े कशिथ भंर्ग क े अलावा, विनम्नलिललिO,ानदंडों क े संदभ,ें सभी,ानकों को पूरा विकया र्गया है: क. ग्राउंड कवरेज एंर्गेल,ेंट

O. एफ. ए. आर. र्ग. Oुला क्षेत्र और घ. हरिर क्षेत्र और (vi) विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े,ुद्दे क े संबं,ें नोएडा द्वारा उच्च न्यायालय क े स,क्ष एक व्याख्यात्,क नोट प्रस् ु विकया र्गया था और नी?े उद्धृ विकया र्गया हैः “विकसी स,ूह आवास परिरयोजना,ें विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकः,ुख्य विबन्दु:

1. नोएडा भवन विवविनय,, 2010: भवन स,ुह, सिजसका अंग्रेजी,ें अनुवाद विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क े रूप,ें विकया जा ा है, विकसी भी क्षेत्र/प्लॉट,ें इ,ार ों का एक संयोजन या स,ूह है।

2. उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट (विन,ाण, स्वावि,त्व, रOरOाव का संव न) अति विनय,, 2010 की ारा 3 (जी) भवन को परिरभाविर्ष कर ी है।अति विनय, क े अनुसार 'भवन' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA का अथ विकसी भूवि, पर विनर्षि, भवन से है, सिजस,ें ?ार या अति क अपाट,ेंट हैं, या ब्लॉक क े रूप,ें नावि, विकसी क्षेत्र,ें दो या अति क भवन हैं, सिजन,ें से प्रत्येक,ें दो या अति क अपाट,ेंट हैं और ऐसी सभी इ,ार ों,ें ?ार या अति क अपाट,ेंट हैं बश m विक स्व ंत्र प्रवेश और विनकास क े साथ एक पंविक्त,ें विनर्षि, घर, ?ाहे वह अन्य स्व ंत्र घरों से सटा हुआ हो या नहीं, एक भवन का र्गठन नहीं करेर्गा। इसलिलए, यह स्पष्ट है विक ब्लॉक को विकसी भी क्षेत्र,ें दो या अति क भवनों क े रूप,ें नावि, विकया र्गया है और भवन को विकसी भी भूवि, पर ?ार या अति क अपाट,ेंट क े रूप,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है।

3. जोविंनर्ग ग्लोसरी आफ न्यूयाक सिसटी प्लाविंनर्ग क े अनुसार "ब्लॉक" को सड़कों, सावजविनक पाक§, रेल,ार्ग क े अति कारों, पीरहेड लाइनों या हवाई अड्डे की सी,ाओं क े संयोजन से ?ारों ओर से तिघरा हुआ भूवि, क े एक क्षेत्र क े रूप,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है। भवन को एक ऐसी संर?ना क े रूप,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है सिजस,ें एक या एक से अति क,ंसिजलें और एक छ हो, जो स्थायी रूप से भूवि, से जुड़ी हो और Oुले क्षेत्रों या जोविंनर्ग लॉट की लॉट लाइनों से तिघरी हो।

4. विकसी ब्लॉक की इ,ार ें आपस,ें जुड़ी नहीं भी हो सक ी हैं, आंशिशक रूप से जुड़ी हो सक ी हैं या पूरी रह जुड़ी हो सक ी हैं, जैसा विक उपरोक्त प्राव ानों से स्पष्ट है।

5. भूवि, का इष्ट, उपयोर्ग करने क े लिलए विवशिभन्न प्रयोजनों क े लिलए ऊ ं ?ी इ,ार ों का विन,ाण करना भार क े सभी,हानर्गरों और दुविनया भर,ें एक सा,ान्य प्रथा है। विकसी भी विदए र्गए क्षेत्र,ें, अति क Oुली और हरिर जर्गह क े वल ऊ ं ?ी इ,ार ों क े प्राव ान क े साथ प्रदान की जा सक ी है जो क, भूवि, कवरेज और अति क Oुली जर्गह क े साथ उच्च घनत्व को स,ायोसिज करने,ें सक्ष, है। बड़े आकार की परिरयोजनाओं,ें आ, ौर पर कई इ,ार ें हो ी हैं, सिजन्हें सा,ान्य स्थान, सा,ान्य सुविव ाओं, प्राक ृ ति क प्रकाश, वेंविटलेशन, Oुली जर्गह और विकसी भी आपा स्थिस्थति,ें जल्द mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनकासी क े लिलए अति क, संभाविव विनकास,ार्ग§ की आवश्यक ा को ध्यान,ें रO े हुए योजनाबद्ध, व्यवस्थिस्थ और तिडजाइन विकया जा ा है। इन सभी बा ों को ध्यान,ें रO े हुए आ, ौर पर विवशिभन्न विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों या इ,ार ों क े स,ूहों की आपस,ें सुर्गम्य ा, सुविव ाओं और सेवाओं को तिडजाइन विकया जा ा है, जो परिरयोजना क्षेत्र क े भी र अलर्गाव,ें स्थिस्थ सभी इ,ार ों की एक प्रणाली की ुलना,ें बेह र रहने का वा ावरण प्रदान कर े हैं। भार और दुविनया क े सभी,हानर्गरों,ें भूवि, का इष्ट, उपयोर्ग करने क े लिलए विवशिभन्न उद्देश्यों क े लिलए ऊ ं ?ी इ,ार ों का विन,ाण करना आ, बा है। विकसी भी क्षेत्र,ें अति क Oुली और हरिर जर्गह क े वल ऊ ं ?ी इ,ार क े प्राव ान क े भी र प्रदान की जा सक ी है जो अपेक्षाक ृ क, ज,ीनी कवरेज और अति क Oुले स्थान क े भी र उच्च घनत्व को स,ायोसिज करना संभव बना ी है। बड़े आकार की परिरयोजनाओं,ें आ, ौर पर कई भवन हो े हैं जो सा,ान्य स्थान, सा,ान्य सुविव ाओं, प्राक ृ ति क प्रकाश, वेंविटलेशन, Oुली जर्गह और विकसी भी आपा स्थिस्थति,ें जल्द विनकासी क े लिलए अति क, संभाविव विनकास,ार्ग§ की आवश्यक ा को ध्यान,ें रO े हुए योजनाबद्ध, व्यवस्थिस्थ और तिडजाइन विकए जा े हैं। इन सभी बा ों को ध्यान,ें रO े हुए आ, ौर पर विवशिभन्न विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों या आपस,ें जुड़ी सुविव ाओं वाले विबल्डिंल्डर्ग क्लस्टर का विनणय लिलया जा ा है, जो परिरयोजना क्षेत्र क े भी र अलर्गाव,ें स्थिस्थ सभी विबल्डिंल्डर्ग की एक प्रणाली की ुलना,ें बेह र रहने का वा ावरण प्रदान कर े हैं।

6. अलर्ग-थलर्ग पड़े भवनों,ें सुरक्षा, प्राव ान और सा,ान्य सेवाओं से संबंति स,स्याओं क े रOरOाव की अति क स,स्या हो ी है। विकसी ऐसे भवन,ें आर्ग लर्गने की स्थिस्थति,ें, जहां से बाहर विनकलने का कोई अति रिरक्त रास् ा नहीं है,,ानव जीवन को O रा होने की संभावना अति क हो ी है। आ, ौर पर विकसी परिरयोजना,ें भवनों क े एक स,ूह का विन,ाण कॉ,न बेस,ेंट यानी सभी भवनों क े लिलए एक बेस,ेंट क े प्राव ान क े साथ विकया जा ा है। यह बेह र पहुं?, आवाजाही और सा,ान्य सुविव ाओं क े प्राव ान क े लिलए विकया जा ा है। भार और विवदेशों,ें ऊ ं ?ी इ,ार ों को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अं रिरक्ष फ्र े, पुलों क े,ाध्य, से जोड़ना एक बहु ही सा,ान्य प्रथा है, जो आपा काल की स्थिस्थति,ें जल्द विनकासी क े लिलए अति रिरक्त विनकास,ार्ग प्रदान कर ी है। नई विदल्ली क े कनॉट प्लेस,ें र्गोपाल टॉवर,ें आर्ग लर्गने की घटना क े बाद यह ?लन बढ़ र्गया है और कई लोर्गों की जान ब?ाने क े लिलए ऊ ं ?ाई पर स्थिस्थ टॉवर को पास क े टॉवर से जोड़ने क े लिलए अस्थायी स्पेस फ्र े, बनाया र्गया था।

8. एनबीसी ऑफ इंतिडया 2005: इ,ार की विवशिभन्न ऊ ं ?ाई क े लिलए साइड और रिरयर ओपन स्पेस एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.[1] क े अनुसार विनयंवित्र है, सिजस,ें कहा र्गया है विक इ,ार की ऊ ं ?ाई क े लिलए ऊ ं ?ाई साइड और रिरयर ओपन स्पेस 35,ीटर 11,ीटर 40,ीटर 12,ीटर 55,ीटर और उससे अति क 16,ीटर लेविकन पैरा 8.2.[3] क े अनुसार, पैरा 8.2.3.[1] क े विवकल्प क े ौर पर टॉवर जैसी संर?नाएं विनम्नानुसार हैंः 24,ीटर से लेकर 37.50,ीटर क की ऊ ं ?ाई क े लिलए एक सेट बैक क े साथ Oुला स्थान ज,ीनी स् र पर यह 9,ीटर से क, नहीं होर्गा।

9. यह कहा र्गया है विक नोएडा भवन विवविनय,न का इरादा भवन ब्लॉकों की ऊ ं ?ाई क े आ ार पर 6,ीटर से 16,ीटर क े बी? दो विनकटव d भवन ब्लॉकों क े बी? की दूरी प्रदान करना है। इस,ें दो इ,ार ों क े बी? दूरी की कोई विवशिशष्ट आवश्यक ा नहीं है। एक ब्लॉक क े दो हाई राइज विबल्डिंल्डर्ग क े बी? आवश्यक न्यून, दूरी की अव ारणा आवश्यक रूप से वही नहीं हो सक ी है जो दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? आवश्यक है। उदाहरण क े लिलए एक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक,ें पूरे ब्लॉक क्षेत्र क े लिलए ीन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA या ?ार,ंसिजलें हो सक ी हैं और अलर्ग-अलर्ग ऊ ं ?ाई क े क ु छ टॉवर और एक ही ब्लॉक,ें अलर्ग-अलर्ग स्थानों पर तिडजाइन की र्गई अलर्ग-अलर्ग ऊपरी,ंसिजल हो सक ी हैं।

10. दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? न्यून, दूरी की अव ारणा का उद्देश्य,ुक्त फायर टेंडर,ूव,ेंट (विनय,ों क े अनुसार न्यून, 6,ीटर का सेटबैक), एयर वेंविटलेशन, सूय की रोशनी आविद है। न्यून, दूरी की आवश्यक ा विकसी भी रह से भवन की संर?नात्,क सुरक्षा से नहीं जुड़ी है।

11. यहां यह ब ाया र्गया है विक विन,ाणा ीन नई इ,ार का क्षेत्रफल लर्गभर्ग 230 वर्ग,ीटर है। पूरे भवन क े आसपास पयाप्त Oुला क्षेत्र यानी 16,ीटर से अति क है, सिसवाय एक स्थान क े जहां इ,ार को आपा कालीन विनकासी क े उद्देश्य से एक अति रिरक्त विनकास,ार्ग प्रदान करने क े लिलए एक प्रस् ाविव कनेल्डिंक्टर्ग विब्रज क े रास् े से आसपास की इ,ार क े ब्लॉक का एक विहस्सा बनाया र्गया है। यहां भी पुरानी इ,ार और नई इ,ार क े बी? न्यून, अं र 6.80,ीटर लंबाई क े लिलए 9,ीटर है, जो अवि` सुरक्षा प्राव ानों की आवश्यक ाओं को पूरा कर ा है। यह अवि` सुरक्षा और वायु परिरसं?रण क े संबं,ें विकसी प्राव ान का उल्लंघन नहीं कर ा है।”

65. अविनवाय रूप से, अपीलक ा और नोएडा दोनों की ओर से यह दलील दी र्गई है विक न्यून, दूरी बनाए रOने की आवश्यक ा क े वल विनकटव d भवन ब्लॉकों पर लार्गू हो ी है, जो आसपास की इ,ार ों क े बराबर नहीं है। इसे अलर्ग रीक े से कहें ो यह क इस आ ार पर विदया जा ा है विक जहां इ,ार ों का एक स,ूह है, वहां न्यून, दूरी की आवश्यक ा को क्लस्टर का विहस्सा बनने वाली इ,ार ों क े बी? नहीं देOा जा सक ा, बस्थिल्क क े वल दो विनकटव d विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों/क्लस्टरों क े बी? देOा जा सक ा है। क की इस पंविक्त,ें प्रत्येक भवन Oंड,ें भवनों का संग्रह हो सक ा है और यह क विदया जा ा है विक न ो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एनबीआर 2006 और न ही एनबीआर 2010 क्लस्टर,ें भवनों क े बी? न्यून, दूरी को आवश्यक बना ा है।

66. 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक' पद को न ो एनबीआर 2006,ें और न ही एनबीआर 2010,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है। पद की सा,ग्री को विदया र्गया अथ उक्त विवविनय,ों क े उद्देश्य और लक्ष्य को आर्गे बढ़ाना ?ाविहए। न्यून, दूरी विन ारिर करने का उद्देश्य विनयोसिज विवकास,ें जनविह का विवर्षय है। विकसी आवासीय परिरयोजना,ें विनर्षि, क्षेत्रों,ें रहने वाले लोर्ग वेंविटलेशन, प्रकाश और हवा था अवि` सुरक्षा,ानदंडों क े पालन क े हकदार हैं। न्यून, दूरी विन ारिर करने क े उद्देश्य,ें कई चिं? ाएं शावि,ल हैं। इन,ें विनवासिसयों की र्गोपनीय ा की रक्षा करना और बुविनयादी नार्गरिरक सुविव ाओं का आनंद लेना शावि,ल है, सिजस,ें अच्छी रह से हवादार क्षेत्रों क पहुं? शावि,ल है, जहां हवा और प्रकाश को नजदीकी विन,ाण की उपस्थिस्थति से अवरुद्ध नहीं विकया जा ा है। इन सुविव ाओं क पहुं? आवश्यक ा क े बजाय विवलासिस ा बन रही है। न्यून, दूरी क े नुस्Oे का अवि` सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ ा है। आर्ग लर्गने की स्थिस्थति,ें, इस बा का O रा हो ा है विक आर्ग ेजी से एक ढां?े से दूसरे ढां?े,ें फ ै ल जाएर्गी। इसक े अति रिरक्त, नजदीकी ढां?ों से अवि` श,न,शीनरी क े लिलए र्गंभीर बा ाएं पैदा हो ी हैं, सिजन्हें नर्गर विनकाय द्वारा ैना विकया जाना हो ा है।

67. यविद विकसी डेवलपर पर 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक' पद की सा,ग्री को परिरभाविर्ष करने क े बेलर्गा, विववेकाति कार को छोड़ विदया जा ा है, ो यह न्यून, दूरी विन ारिर करने क े उद्देश्य को विवफल कर देर्गा और फ्ल ै ट Oरीदारों क े स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की र्गुणवत्ता को डेवलपरों की दया पर छोड़ देर्गा ।इस न्यायालय क े स,क्ष यह दलील दी र्गई है विक भूOंड,ें स्थिस्थ सत्रह टावरों,ें से ?ार टावरों को एक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक का विहस्सा बनाया र्गया है और इन्हें न्यून, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दूरी बनाए रOने की आवश्यक ा नहीं है। उच्च न्यायालय क े स,क्ष, अपीलक ा ने यह क देने का प्रयास विकया विक नोएडा क े सेक्टर 93 ए क े प्लॉट नंबर 4 पर स्थिस्थ सभी इ,ार ें (जो सभी सत्रह टावर हैं) एक ‘विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक’ की होंर्गी। उच्च न्यायालय और इस न्यायालय क े स,क्ष विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों पर अपीलक ा क े क की असंर्ग ा इस,ें स्पष्ट दोर्ष को इंविर्ग कर ी है-विक डेवलपर द्वारा विक नी विबल्डिंल्डर्ग का पदना, एक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक का र्गठन कर ा है, यह भवन विवविनय,ों द्वारा विन ारिर आवश्यक ाओं को क,जोर करेर्गा। पहले सिसद्धां क े रूप,ें, ह, अपीलक ा द्वारा प्रस् ाविव विन,ाण को अपनाने क े इच्छ ु क नहीं हैं। यह शहरी क्षेत्रों क े विनवासिसयों को प्रकाश, वायु और वायु सं?ार की उन सुविव ाओं से वंति? करेर्गा जो जीवन की बुविनयादी र्गुणवत्ता को बनाए रOने क े लिलए आवश्यक हैं। इससे अवि` सुरक्षा पर भी र्गंभीर प्रभाव पड़ेर्गा।डेवलपर को स्व ंत्र टावरों को विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े रूप,ें एक रफा रूप से नावि, करक े भवन विवविनय,ों,ें विन ारिर न्यून, दूरी बनाए रOने की आवश्यक ा को ोड़ने की अनु,ति नहीं दी जा सक ी है, जैसा विक अपीलक ा ने इस न्यायालय क े स,क्ष सुझाव विदया है। एक स्पेस फ्र े, स्थाविप करने या एक उभय प्रवेश या विनकास की सुविव ा प्रदान करने से दो अलर्ग-अलर्ग इ,ार ें एक स,ेविक ब्लॉक क े रूप,ें नहीं होंर्गी।

68. एनबीआर 2006 क े विवविनय, 33.2.[3] विनकटव d 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' क े बी? की दूरी का उल्लेO कर े हैं जो सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई क े आ े से क, नहीं होर्गी। इस विनय,न का उद्देश्य इसे क े वल विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? लार्गू करना नहीं है, जैसा विक एक ब्लॉक क े भी र इ,ार ों से अलर्ग है। विवविनय, 33.2.[3] क े Oंड (1),ें उसी वाक्य,ें 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' और 'सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई' पद का उपयोर्ग विकया र्गया है। इन अशिभव्यविक्तयों को ऐसा अथ विदया जाना ?ाविहए जो सा,ान्य बुतिद्ध क े अनुरूप हो और उक्त विवविनय, क े उद्देश्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और प्रयोजन को आर्गे बढ़ा ा हो। इस अशिभव्यविक्त का सी ा अथ यह है विक जब दो विनकटव d ब्लॉक हों, ो सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई यह विन ारिर करेर्गी विक विक नी दूरी का पालन विकया जाना ?ाविहए, सिजस,ें दूरी सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई क े आ े से क, नहीं होर्गी। न ीज न, जब दो या अति क इ,ार ें विनकट ा,ें,ौजूद हो ी हैं, ो वे विवविनय, 33.2.[3] क े Oंड (1) क े अथ,ें एक इ,ार ब्लॉक वि,लकर बन ी हैं। ऐसी स्थिस्थति,ें ब्लॉक,ें शावि,ल प्रत्येक इ,ार क े बी? की दूरी सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई क े आ े से क, नहीं होनी ?ाविहए। सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई का उल्लेO स्पष्ट रूप से इसलिलए विकया र्गया है क्योंविक इस रह की इ,ार विनकट, विन,ाण क े स,ूह,ें क, ऊ ं ?ाई की इ,ार ों पर छाया करेर्गी। इसलिलए, विवविनय,न,ें सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की आ ी ऊ ं ?ाई क े संदभ,ें आवश्यक न्यून, दूरी को परिरभाविर्ष विकया र्गया है। कोई अन्य विन,ाण विवविनय, 33.2.[3] क े उद्देश्य को विवफल कर देर्गा और इसे स्वीकार नहीं विकया जा सक ा है।

69. व,ान,ा,ले क े थ्यों क े लिलए एनबीआर 2006 को लार्गू कर े हुए, टी- 16 और टी-17 क े विन,ाण की परिरकल्पना दूसरी संशोति योजना विदनांविक 26 नवंबर 2009,ें की र्गई थी। उक्त टावरों की ऊ ं ?ाई 73,ीटर होनी थी, जबविक अन्य टावरों की ऊ ं ?ाई,टी-1 सविह, 37,ीटर होना था।इस प्रकार, एनबीआर 2006 क े विवविनय, 33.2.[3] क े अनुसार, टी-17 और टी-1 क े बी? की न्यून, दूरी सबसे ऊ ं ?ी इ,ार की ऊ ं ?ाई का आ ा होना ?ाविहए, जो टी-17 की ऊ ं ?ाई का आ ा है जो 36.5,ीटर है। यह रिरकॉड से स्पष्ट है विक टी -1 और टी-17 क े बी? की दूरी,ात्र 9,ीटर है। इस प्रकार, स्पष्ट रूप से दूसरी संशोति योजना एनबीआर 2006 का उल्लंघन करने वाली थी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

70. अब ह, एनबीआर 2010 पर आएंर्गे। विवविनय,न 24.2.1(6),ें दो विनकटव d ब्लॉकों क े बी? क, से क, 6,ीटर की दूरी बनाए रOने की आवश्यक ा विन ारिर की र्गई है। ब्लॉकों की ऊ ं ?ाई क े आ ार पर 16,ीटर क का विवस् ार हो सक ा है। इस विवविनय,न क े पहले वाक्य की सा,ग्री को इसक े बाद की बा ों द्वारा और अति क विवस् ारिर विकया जा ा है। विवविनय,न क े अर्गले भार्ग,ें यह विन ारिर विकया र्गया है विक 18,ीटर क की ऊ ं ?ाई वाले भवन क े लिलए अं र 6,ीटर का होर्गा। इसक े सरल शब्दों,ें 'अं राल' का अथ है एक विन ारिर दूरी का पालन करना। जहां भवन की ऊ ं ?ाई 18,ीटर क है, वहां स्थान 6,ीटर का होर्गा। इसक े बाद 18,ीटर से अति क की ऊ ं ?ाई क े लिलए ीन,ीटर की अति रिरक्त ऊ ं ?ाई क े लिलए न्यून, दूरी एक,ीटर बढ़ानी होर्गी। जो राष्ट्रीय भवन विन,ाण संविह ा-2005 क े अनुसार अति क, 16,ीटर की दूरी क े अ ीन है।

71. नोएडा की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान अति वक्ता श्री रविवन्द्र कु,ार ने विवशेर्ष रूप से एनबीआर 2010 क े विंहदी संस्करण पर यह क देने क े लिलए जोर विदया है विक इस,ें 'भवन स,ूह’ शब्द का प्रयोर्ग विकया र्गया है सिजसका अथ है विक इसे भवन शब्द से अलर्ग अथ विदया र्गया है। विवविनय, 24.2.[1] (6) का विहन्दी पाठ (विहन्दी,ें विवविनय, 24.2.[1] (V) विनम्नलिललिO हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जैसा विक स्पष्ट है, एनबीआर 2010 क े विंहदी संस्करण,ें ीन अलर्ग-अलर्ग शब्दों का उपयोर्ग विकया र्गया है- “भवन Oंडों”, “भवन स,ूह” और “भवन”। जैसा विक श्री रविवन्द्र क ु,ार ने सुझाव विदया है, विवशुद्ध रूप से,ूल पाठ की व्याख्या करने से ह,ें इन,ें से प्रत्येक शब्द को ीन अलर्ग -अलर्ग अथ देना होर्गा। इस क को आर्गे बढ़ाने का, लब यह होर्गा विक पहला वाक्य, सिजस,ें कहा र्गया है विक दो विनकटव d विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े लिलए न्यून, 6,ीटर की दूरी की आवश्यक ा है जो अति क, 16,ीटर की दूरी क, ब्लॉक की ऊ ं ?ाई पर विनभर करेर्गा। दूसरा वाक्य, जो अंग्रेजी,ें सरल रूप से इस प्रकार है, “18,ीटर क की इ,ार की ऊ ं ?ाई क े लिलए, अं र 6,ीटर होर्गा...” यह स्पष्ट नहीं कर ा है विक 'अं र' शब्द का क्या, लब है-क्या इसका, लब इ,ार ों क े बी? क े ब्लॉक क े बी? का अं र है, या बर्गल क े 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक' क े बी? का अं र है। श्री रविवन्द्र क ु,ार सुझाव दे े हैं विक इसका ात्पय बाद वाला है। हालांविक, विवशुद्ध रूप से,ूल पाठ क े दृविष्टकोण से विवविनय,ों क े विंहदी संस्करण को देOने पर ऐसा प्र ी हो ा है विक यह ब ा ा है विक 18,ीटर की ऊ ं ?ाई वाली इ,ार ों क े बी? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA का अं र 6,ीटर रOा जाएर्गा। अथा 18.00,ीटर उँ?े भवनों क े बी? की दूरी 6.00,ीटर रOी जाएर्गी। यहां इस् े,ाल विकया र्गया शब्द “भवनों” है न विक “भवन Oंडों” या “भवन स,ूह”। इस प्रकार, संदभरविह विवविनय,न क े उद्देश्य को भूलकर, एनबीआर 2010 क े पाठ पर अति क जोर देना, एक बे ुकी व्याख्या का कारण बनेर्गा। जहां विवविनय, 24.2.1.[6] का आरंशिभक भार्ग भवन Oंडों क े बी? दूरी का प्राव ान कर ा है, जबविक दूसरे भार्ग,ें 18,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई की इ,ार ों क े बी? की दूरी विन ारिर की र्गई है। दनुसार, ह, श्री रविवन्द्र क ु,ार क े इस क को अस्वीकार कर े हैं विक विवविनय, 24.2.1.6,ें क े वल 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' क े बी? की दूरी का प्राव ान है न विक ब्लॉक्स क े भी र इ,ार ों क े बी? की दूरी का।

72. एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.1.6,ें उपबं विकया र्गया है विक एनबीसी 2005 क े अनुसार 18,ीटर से अति क उँ?ाई की इ,ार ों क े बी? अति क, दूरी 16,ीटर होर्गी। 2,ा? 2012 की ीसरी संशोति योजना,ें टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई बढ़ाकर 121,ीटर कर दी र्गई थी। विनय, 24.2.1.[6] क े अनुसार, 121,ीटर की ऊ ं ?ाई वाले भवन से अन्य इ,ार क े बी? का अं र 16,ीटर की होर्गा। (एनबीसी 2005 क े अनुसार अति क, सी,ा)। इस प्रकार, टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी 9,ीटर क े विवपरी 16,ीटर होनी ?ाविहए। न ीज न, ह, पा े हैं विक विदनांक 2,ा? 2012 की ीसरी संशोति योजना एनबीआर 2010 का उल्लंघन थी।

73. टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई जी + 24 से जी + 40 (या 39, जैसा भी,ा,ला हो) की अनु,ति देने से पहले नोएडा, इस बा पर ध्यान देने क े लिलए बाध्य था विक क्या विवविनय,न 24.2.1.[6] क े प्राव ानों का अनुपालन विकया र्गया था। ीसरी संशोति योजना, सिजसे 2,ा?, 2012 को,ंजूर विकया र्गया था,,ें mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्पष्ट रूप से एनबीआर 2010 क े संदभ,ें Oुली जर्गह की स्पष्ट क,ी का उल्लेO विकया र्गया है, सिजसक े परिरणा,स्वरूप टावरों की ऊ ं ?ाई को ?ौबीस,ंसिजलों से बढ़ाकर ?ालीस,ंसिजलों क बढ़ाने क े प्रस् ाव को अस्वीकार कर विदया र्गया होर्गा। विफर भी नोएडा ने कानून क े प्राव ानों की स्पष्ट अवहेलना,ें अपीलक ा को अपना स,थन देने का विवकल्प ?ुना है।

74. टी-1, टी-16 और टी-17 क े साथ वि,लकर एक क्लस्टर बन ा है या नहीं, इस,ुद्दे को श्री विवकास सिंसह की परिरकल्पना का परीक्षण करने क े लिलए दूसरे परिरप्रेक्ष्य से देOा जा सक ा है। 20 जून, 2005 की,ूल स्वीक ृ योजना,ें यह प्राव ान था विकः भूOंड का क ु ल क्षेत्र 48263.00 वर्ग,ी अनु,न्य कवरेज 16892.05 वर्ग,ी स्वीक ृ कवरेज 6773.25 वर्ग,ी अनु,न्य एफएआर 72394.50 वर्ग,ी स्वीक ृृृृ एफएआर 64810.04 वर्ग,ी भवन की स्वीक ृ उँ?ाई 30.00,ी सेटबैक भवन की सेटबैक अनु,न्य स्वीक ृ सा,ने 9.66,ी. 15.00,ी. पीछे 9.66,ी. 09.70,ी. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बर्गल 9.66,ी. 09.70,ी. बर्गल 9.66,ी. 09.70,ी. 75.,ूल स्वीक ृ योजना,ें 48,263 वर्ग,ीटर क े क ु ल भूOंड क्षेत्र को कवर विकया र्गया था। इसक े बाद 6556.61 वर्ग,ीटर का अति रिरक्त क्षेत्र 21 जून, 2006 विदनांविक एक अनुपूरक पट्टा विवलेO द्वारा अपीलक ा को पट्टे पर विदया र्गया था, ाविक प्लॉट का क ु ल क्षेत्र बढ़कर 54,819.51 वर्ग,ीटर हो जाए।इसक े परिरणा,स्वरूप, पहली संशोति योजना को 29 विदसंबर 2006 को,ंजूरी दी र्गई थी, जहां स्वीक ृ क्षेत्र को 64,810.04 वर्ग,ीटर से 81,943.216 वर्ग,ीटर बढ़ाया र्गया। र्गणना इस प्रकार हैः “स्वीक ृ क्षेत्र भूOंड का क ु ल क्षेत्रफल: 54819 वर्ग,ीटर फश,ौजूदा परिरव न क ु ल वि,लाकर भू ल 6773.25 वर्ग,ीटर 1025.313 वर्ग,ीटर,ाउंट 7798.563 वर्ग,ीटर पहली,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर 1010.673 वर्ग,ीटर,ाउंट 7682.843 वर्ग,ीटर दूसरी,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर 1010.673 वर्ग,ीटर,ाउंट 7682.843 वर्ग,ीटर ीसरी,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर 1010.673 वर्ग,ीटर,ाउंट 7682.843 वर्ग,ीटर ?ौथी,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर 778.737 वर्ग,ीटर,ाउंट 7450.907 वर्ग,ीटर पां?वीं,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर -177.574 वर्ग,ीटर 6494.596 वर्ग,ीटर छठी,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर -177.574 वर्ग,ीटर 6494.596 वर्ग,ीटर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सा वीं,ंसिजल 6672.17 वर्ग,ीटर -177.574 वर्ग,ीटर 6494.596 वर्ग,ीटर आठवीं,ंसिजल 6522.89 वर्ग,ीटर -28.294 वर्ग,ीटर 6494.596 वर्ग,ीटर नौवीं,ंसिजल 4808.71 वर्ग,ीटर 1685.886 वर्ग,ीटर 6494.596 वर्ग,ीटर दसवीं,ंसिजल 6312.410 वर्ग,ीटर 6312.410 वर्ग,ीटर ग्यारहवीं,ंसिजल 4448.677 वर्ग,ीटर 4448.677 वर्ग,ीटर व्यवसातियक 411. 15 वर्ग,ीटर 411. 15 वर्ग,ीटर क ु ल वि,लाकर 64810.04 17133.176 81943.216 बेस,ेंटः 32352.71 + 8189.67 = 40542.38 क ु ल वि,लाकर 97162.75 25528.41 122485.[6]

76. विदनांक 29 विदसंबर, 2006 की पहली संशोति योजना 6556.61 वर्ग,ीटर से संबंति है। यह इंविर्ग कर ा है विक भूOंड क े दतिक्षण -पति², कोने,ें एक अति रिरक्त विन,ाण विकया जाएर्गा, सिजस,ें एक टॉवर और एक शॉविंपर्ग सुविव ा होर्गी और सी े टी-1 क े सा,ने एक हरा क्षेत्र होर्गा, सिजसे स्वीक ृ योजना,ें दशाया र्गया है।

77. 26 नवंबर 2009 को, अनु,ेय 1.[5] एफएआर क े ैं ीस प्रति श क े Kय योग्य एफएआर क े अति ग्रहण क े परिरणा,स्वरूप दूसरी संशोति,ंजूरी दी र्गई थी। क्षेत्रफल की र्गणना विनम्नलिललिO है: - प्लाट का क्षेत्र: 54819.510 वर्ग,ीटर अनु,न्य एफएआर 1.50%: 82229.265 वर्ग,ीटर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Oरीद योग्य एफएआर 33%: 27135.657 वर्ग,ीटर क ु ल एफएआर 82229.265 + 27135.657 = 109364.922 वर्ग,ीटर पहले जारी उपयोर्ग का क्षेत्र: 78019.956 वर्ग,ीटर पहले जारी ऊपरी बेस,ेंट का क्षेत्रः 40542.380 वर्ग,ीटर (ध्वस् ऊपरी बेस,ेंट क े साथ 3397.0990) फश अनु, क्षेत्र (वर्ग,ीटर,ें) प्रस् ाविव क्षेत्र (वर्ग,ीटर,ें) भू ल 1918[6].82 1751.32 पहली,ंसिजल बाकी एफएआर 228.23 दूसरी,ंसिजल 2249.22 ीसरी,ंसिजल 2249.22 ?ौथी,ंसिजल 2249.22 पां?वीं,ंसिजल... 2249.22 छठी,ंसिजल... 2249.22 सा वीं,ंसिजल... 2249.22 आठवीं,ंसिजल 2249.22 नौवीं,ंसिजल... 2249.22 दसवीं,ंसिजल 1358.786 ग्यारहवीं,ंसिजल... 1186.914 बारहवीं,ंसिजल... 740.162 ेरहवीं,ंसिजल... 740.162 ?ौदहवीं,ंसिजल... 740.162 पंद्रहवीं,ंसिजल... 740.162 सोलहवीं,ंसिजल... 447.955 सत्रहवीं,ंसिजल... 447.955 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 18 वीं,ंसिजल... 447.955 उन्नीसवीं,ंसिजल... 447.955 बीसवीं,ंसिजल... 447.955 इक्कीसवीं,ंसिजल... 383.168 22 वीं,ंसिजल... 383.168 23 वीं,ंसिजल... 383.168 ?ौबीसवीं,ंसिजल... 383.168 क ु ल अब क...... 31312.081 ऊपरी हOाना... 3397.09 विन?ला बेस,ेंट 40542.38 3397.09 क ु ल क्षेत्र 43939.47 सेट बैक अनुज्ञेय स्वीक ृ सा,ने 15.00,ी. 15.00,ी. पीछे 9.00,ी. 9.00,ी. बर्गल 9.00,ी. 9.00,ी. बर्गल 9.00,ी. 9.00,ी.

78. जैसा विक दूसरी संशोति योजना से प ा ?ल ा है,,ौजूदा टावरों,ें अब 11,ंसिजलों क े बजाय 24,ंसिजलों की परिरकल्पना की र्गई है। 2,ा?, 2012 की ीसरी संशोति योजना,ें 2.75 प्रति श स्वीक ृ एफएआर क े साथ Oरीदारी योग्य एफएआर क े परिरणा,स्वरूप विनर्षि, क्षेत्र,ें वृतिद्ध की परिरकल्पना की र्गई थी। टी-16 और टी-17,ें लों की संख्या बढ़ाकर ?ालीस कर दी र्गई, प्रासंविर्गक र्गणना इस प्रकार है: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भूOंड का क ु ल क्षेत्रफल: 54819.510 वर्ग,ीटर अनु,न्य कवरेज 35%: 1918[6].828 वर्ग,ीटर स्वीक ृ कवरेज 14.03%: 6773.25 वर्ग विक,ी. 1.[5] प्रति श की दर से स्वीकाय एफएआर: आवंटन क े स,य 82229.265 वर्ग,ीटर 25.10.10 को Oरीदे जाने योग्य एफएआर स्वीक ृ एफएआर @2.75 क े साथ 150753.652 वर्ग,ीटर विवशिभन्न,ंसिजलों क े प्रस् ाविव क्षेत्र का फ्लोरवार विववरण इस प्रकार है- ल अनु,न्य एरिरया (वर्ग,ीटर,ें) 16.10.09 को विनर्षि, क्षेत्र (टॉवर 1 से 14) उपयोविर्ग ा प्र,ाण पत्र पर जारी विकया र्गया वर्ग,ीटर विपछले स्वीक ृ क्षेत्र टॉवर 15,16 और 17 विदनांक 26.11.09 प्रस् ाविव एफएआर टॉवर 15,16 और 17 (वर्ग,ीटर,ें) संशोति क्षेत्र टॉवर 15,16 और 17 (वर्ग,ीटर) (3 + 4) क ु ल क्षेत्र (वर्ग,ीटर) (2 + 5) 1 2 3 4 5 अं रिरक्ष फ्र े, --- - --- - --- - 24..00 24.00 24.00 पोतिडय, (टी- 1 से टी-14) --- - 288. 983 --- - --- - --- - --- - भू ल 1918[6].825 6823.429 1751.32 1125.302 2876. 622 9700.051 प्रथ,,ंसिजल विवश्रा, एफएआर 6722.349 2288.23 075 2366.305 9088.654 विद्व ीय,ंसिजल --- - 6722.349 2249.22 555 2307.775 9030.124 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ृ ीय,ंसिजल --- - 6722.349 2249.22 555 2307.775 9030.124 ? ुथ,ंसिजल --- - 6722.349 2249.22 38. 4 2287.62 9009.969 5 वीं,ंसिजल --- - 6722.349 2249.22 38. 4 2287.62 9009.969 6 वीं,ंसिजल 6722.349 2249.22 - 12.397 2236.823 8959.172 7 वीं,ंसिजल 6722.349 2249.22 - 12.397 2236.823 8959.172 8 वीं,ंसिजल 6722.349 2249.22 - 12.397 2236.823 8959.172 9 वीं,ंसिजल 6722.349 2249.22 - 12.397 2236.823 8959.172 10 वीं,ंसिजल 6423. 737 1358.786 878.037 2236.823 8660.56 11 वीं,ंसिजल 3982.669 1186.94 910. 301 2097. 215 6079.884 12 वीं,ंसिजल 740.162 851.205 1591.367 1591.367 13 वीं,ंसिजल 740.162 851.205 1591.367 1591.367 14 वीं,ंसिजल 740.162 851.205 1591.367 1591.367 15 वीं,ंसिजल 740.162 851.205 1591.367 1591.367 16 वीं,ंसिजल 447.995 1162.568 1610. 523 1610. 523 18 वीं,ंसिजल 447.995 1162.568 1610. 523 1610. 523 19 वीं,ंसिजल 447.995 1162.568 1610. 523 1610. 523 20 वीं,ंसिजल 447.995 1165.568 1610. 523 1610. 523 21 वीं,ंसिजल 383.168 1610. 523 1610. 523 1610. 523 22 वीं,ंसिजल 383.168 1610. 523 1610. 523 1610. 523 23 वीं,ंसिजल 383.168 1610. 523 1610. 523 1610. 523 24 वीं,ंसिजल 383.168 1610. 523 1610. 523 25 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 26 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 27 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 28 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 29 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 30 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 31 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 32 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 33 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 34 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 35 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 36 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 37 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 38 वीं,ंसिजल 1610. 523 1610. 523 1610. 523 39 वीं,ंसिजल 859.055 859.055 859.055 40 वीं,ंसिजल 439.106 439.106 439.106 क ु ल एफएआर 150753.652 78019.956 31312.105 41132.[6] 72444.705 150464.664 बेस,ेंट अपर बेस,ेंट लोअर बेस,ेंट टोटल एरिरया सेट बैक छोड़ने क े बाद, बाकी का क्षेत्र (पार्किंकर्ग, सेवाओं क े लिलए) 40542.38 40542.38

39. 09 3397.09

1511. 144

41.68 1552.824 524 3438.77 45942.294 सेवाएं 15% सेवाएं शून्य शून्य 6396.896 6396.896 क ु ल क्षेत्र (बेस,ेंट और 118562.33 34709.195 49082.32 83791.515 202353.85 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सेवाओं सविह ) प्रस् ाविव भूवि, कवरेज क्षेत्र = 10648.503 वर्ग,ीटर (19.425 %) संशोति एफएआर (विनर्षि, + संशोति ) = 150464.664 वर्ग,ीटर”

79. 24 अप्रैल 2012 को, सीएफओ ने विबल्डिंल्डर्ग सेल, नोएडा क े प्रभारी का ध्यान न्यून, दूरी क े उल्लंघन की ओर आकर्षिर्ष विकया, सिजसे अपीलक ा द्वारा विकए जा रहे विन,ाण,ें बनाए रOने की आवश्यक ा थी।पत्र का विवर्षय इस प्रकार हैः “,ेसस सुपरटेक लिलवि,टेड द्वारा नोएडा क े सेक्टर-93 ए,ें प्लॉट नं. 4,ें स्थिस्थ विन,ाणा ीन (टॉवर नं. 17) और पुरानी विनर्षि, इ,ार ों क े बी? की दूरी क े संबं,ें” पत्र (जो भार्ग क. 5 क े पैरा 28 क े ऊपर उद्धृ विकया र्गया है) का इन कायवाविहयों पर,हत्वपूण प्रभाव है। सीएफओ ने उन दूरी आवश्यक ाओं का स्पष्ट उल्लेO विकया सिजनका एनबीआर 2006, एनबीआर 2010 और एनबीसी 2005 क े संदभ,ें पालन विकया जाना था। सीएफओ ने नोएडा से पूछा विक क्या एक विवशेर्ष श्रेणी,ें विबल्डर को छ ू ट देने क े बाद विन,ाण क े लिलए लाइसेंस विदया र्गया था या क्या विन,ाण,ानकों क े विवपरी विकया जा रहा था। इस पत्र का नोएडा से कोई जवाब नहीं वि,ला।

80. जब नए अति ग्रही पट्टे वाले क्षेत्र,ें दो टावरों का विन,ाण जुलाई 2009,ें शुरू हुआ, ो अपीलक ा की ओर से (इसक े विनदेशक द्वारा) ए,राल्ड कोट स,ूह सह-स,न्वयक को एक पत्र भेजा र्गया था (पत्र भार्ग ए 4 क े पैरा 15,ें उद्धृ विकया र्गया है)। स्पष्ट है विक विनवासी नए टावरों क े विन,ाण क े बारे,ें चिं?ति थे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कशिथ पत्र स्पष्ट रूप से दशा ा है विक 2009,ें, अपीलक ा का विव?ार था विक नए टावरों का विन,ाण विकया जा रहा था सिजस,ें अलर्ग -अलर्ग प्रविवविष्टयां और विनकास, सुविव ाएं और बुविनयादी ढां?ा होर्गा और यह विक डेवलपर,ौजूदा 15 टावरों को एपेक्स और सिसयान से अलर्ग कर े हुए एक सी,ा दीवार का विन,ाण करेर्गा। इस अभ्यावेदन को 9,ा? 2012 को अपीलक ा द्वारा आरडब्ल्यूए क े अध्यक्ष को लिलOे र्गए एक पत्र,ें दोहराया र्गया था।

81. उपरोक्त पत्र क े पहले पैराग्राफ से प ा ?ल ा है विक अपीलक ा ने लर्गभर्ग 48,650 वर्ग,ीटर क े दो अलर्ग-अलर्ग प्लॉट प्राप्त विकए थे। उन्होंने,ा? 2005 और,ई 2006,ें अलर्ग -अलर्ग पंजीकरण कराया था।विनवासिसयों का यह अभ्यावेदन विक ये अलर्ग-अलर्ग प्लॉट थे, जो डेवलपर को पट्टे पर विदए र्गए थे, स्पष्ट रूप से पूरक लीज डीड क े प्राव ानों क े विवपरी था, सिजस,ें विन ारिर विकया र्गया था विक नया लीज पर विदया र्गया एरिरया 6556.61 वर्ग,ीटर का है जो,ूल भूOंड का एक विहस्सा होर्गा सिजसे अपीलक ा को आवंविट विकया र्गया था। पूरक पट्टा विवलेO,ें विनम्नलिललिO अनुबं शावि,ल हैंः “[...] यह विक पट्टादा ा पट्टेदार को 6556.61 वर्ग,ीटर अति रिरक्त स्थान 14,48,98,871/- (?ौदह करोड़ अड़ ालीस लाO अट्ठानवे हजार आठ सौ एकहत्तर रू.) क े प्रति फल क े सापेक्ष पट्टे पर देने क े लिलए सह, हो र्गया है। जो पहले ही पट्टेदार द्वारा पट्टादा ा को विदया जा ?ुका है और वार्षिर्षक पट्टा विकराया 1,59,38,876 का 1 प्रति श बढ़े हुए स्थान क े लिलए पट्टेदार द्वारा पट्टादा ा को एक,ुश् पट्टा विकराया ( 11 वर्ष क े पट्टा विकराया क े बराबर) क े रूप,ें विदया जा ?ुका है। यह विक पट्टे पर विदया र्गया परिरसर प्लॉट नंबर 04, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सेक्टर 93-ए, नोएडा का विहस्सा,ाना जाएर्गा जो पहले से ही पट्टेदार को पट्टे पर विदया र्गया है। यह विक,ूल पट्टा विवलेO और आवंटन की अन्य सभी श ‘ अपरिरवर्ति रहेंर्गी और स,ान रूप से इस सम्पलित्त परिरसर क े लिलए लार्गू होर्गी और पट्टेदार पर बाध्यकारी होर्गी। यह विक 90 वर्ष क े पट्टे की अवति 16.03.2005 से शुरू होर्गी। यह विक पट्टे पर विदया र्गया परिरसर,ूल आवंविट प्लॉट नंबर 04 सेक्टर नोएडा का विहस्सा होर्गा। संर?ना,ें आवश्यक परिरव न या परिरव न पट्टा देने वाले क े भवन उपविनय, और हस् ां रण पट्टा विवलेO की श § क े अ ीन हो सक े हैं। यह विक प्लॉट संख्या 94, सेक्टर 93-ए, नोएडा का क ु ल क्षेत्रफल 54819.51 वर्ग,ीटर है। यह विक प्लॉट संख्या 04, सेक्टर 93-ए का क ु ल प्रीवि,य, 1,06,66,12,000 रुपये (एक सौ छह करोड़ शिछयासठ लाO बारह हजार ीन सौ रुपये) क े बजाय 1,21,15,11,171 रुपये (एक सौ इक्कीस करोड़ पंद्रह लाO ग्यारह हजार एक सौ इकहत्तर रुपये) है। पट्टेदार पट्टादा ा क े भवन उपविनय,ों क े अनुसार इस परिरसर,ें भवन का विन,ाण करेर्गा।” पूरक पट्टा विवलेO की स्पष्ट श § क े बावजूद, सिजसक े ह इसक े अन् र्ग आवंविट अति रिरक्त भूवि,,ूल भूOंड का एक विहस्सा है,,ौजूदा टावरों क े फ्ल ै ट Oरीदारों को संबोति संसू?ना,ें यह कहा र्गया है विक नए टावरों को पहले विवकसिस विकए र्गए पंद्रह टावरों से पूरी रह से अलर्ग कर विदया र्गया था। इस पत्र mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को नजरअंदाज नहीं विकया जा सक ा है क्योंविक अपीलक ा द्वारा दालिOल जवाबी शपथ पत्र क े पैराग्राफ 32,ें उच्च न्यायालय क े स,क्ष इसी रह की स्थिस्थति की पुविष्ट की र्गई थी, जो इस प्रकार हैः “32. पैरा 12 की विवर्षयवस् ु जो अब क अशिभलेO क े विवर्षय से संबंति है, उसका कोई उत्तर देने की आवश्यक ा नहीं है और अन्य विवर्षयवस् ु र्गल है और इससे इंकार विकया र्गया है। प्रति वादी नं. 5 द्वारा विदनांक 16.

07. 2009 और 9. 03. 2012 को विदए र्गए पत्र,ें वही स्थिस्थति है, जो व,ान प्रति -शपथ पत्र,ें है, विक एपेक्स और सिसयान परिरयोजना का दूसरा ?रण है। इसी रह, पुलिलस अति कारिरयों क े स,क्ष प्रति वादी नं. 5 द्वारा दालिOल 31.01.2012 और 13.02.2012 विदनांविक पत्र पर प्रति वादी सं. 5 क े स,थन,ें अवलंब लिलया जा सक ा है।“

82. उपरोक्त Oुलासों से जो एक,ात्र कसंर्ग परिरकल्पना सा,ने आ ी है वह यह है विक टावस 1,16 और 17 एक ब्लॉक क े भी र स्थिस्थ इ,ार ों क े स,ूह का विहस्सा हैं, इस प्रकार उनक े बी? न्यून, दूरी बनाए रOने की आवश्यक ा को स,ाप्त करने वाला क एक बाद का विव?ार है। यह उस कशिथ स्थिस्थति क े विवपरी है सिजसे अपीलक ा ने उच्च न्यायालय क े स,क्ष अपने शपथ पत्र,ें अपनाया है। इस न्यायालय क े स,क्ष रिरकॉड यह भी इंविर्ग कर ा है विक अपीलक ा ने यह विनवेदन करने,ें सच्चाई को ोड़ा,रोड़ा है विक परिरयोजना,ें टावरों का एक स,ूह एक ब्लॉक का र्गठन कर ा है जो अपीलक ा को न्यून, दूरी की आवश्यक ा को Oत्, करने की अनु,ति दे ा है।

83. अति रिरक्त दस् ावेज प्रस् ु करने क े लिलए आइ.ए. संख्या 54807 वर्ष 2021 क े रिरकॉड से उपरोक्त विनष्कर्ष स्पष्ट रूप से सा,ने है। अनुल`क ए -1, ए-2, ए-3 और ए-4 इस प्रकार हैंः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) 29 विदसंबर 2006 की पहली संशोति योजना की एक सत्य प्रति सिजस,ें नोएडा प्राति करण द्वारा स्वीक ृ विवशिभन्न ब्लॉकों को दशाया र्गया है (ii) एक फ्ल ै ट Oरीदार क े पक्ष,ें अपीलक ा द्वारा 17,ा? 2007 को जारी विकए र्गए आवंटन पत्र की एक सत्य प्रति (iii) टी-1 से 8 क े संबं,ें 10 अप्रैल, 2008 क े पूण ा,ानति?त्र की एक सत्य प्रति और (iv) टी-9 से 14 क े संबं,ें 16 सिस म्बर, 2009 क े पूण ा,ानति?त्र की एक सत्य प्रति ।

84. उपरोक्त संल`क ए-1, जो 2006 की पहली संशोति योजना का विहस्सा है, स्पष्ट रूप से इंविर्ग कर ा है विक प्रत्येक ब्लॉक,ें दो इ,ार ों का एक क्लस्टर शावि,ल है। अनुबं ए-2, जो संल`क है, यह स्पष्ट कर ा है विक ब्लॉक का, लब एस्टर-2 से बना टावर था। संल`क ए-3, 2008 का पूण ा ति?त्र दशा ा है विक प्रत्येक टॉवर,ें ?ार विंवर्ग हैं। दूसरे शब्दों,ें, टॉवर अपने आप,ें ?ार विंवर्ग वाला एक ब्लॉक है और टॉवरों को संख्या क े संदभ,ें स्पष्ट रूप से विनर्षिदष्ट विकया र्गया है। उच्च न्यायालय क े स,क्ष कायवाही क े दौरान, अपीलक ा ने 2009 की दूसरी संशोति योजना क े लिलए एक दस् ावेज दालिOल विकया, सिजस,ें कई ब्लॉकों का ति?त्रण विकया र्गया था। जो योजना उच्च न्यायालय क े स,क्ष दालिOल की र्गयी थी उस,ें नोएडा क े सक्ष, प्राति कारी क े हस् ाक्षर नहीं है। उच्च न्यायालय क े स,क्ष अपीलक ा द्वारा दालिOल प्रति शपथ पत्र,ें यह कहा र्गया था- “3. यह विक नोएडा विबल्डिंल्डर्ग बाय-लॉ विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स की बा कर ा है। यहां क विक उक्त उप -विनय,ों,ें क े वल दो विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉकों क े बी? अविनवाय दूरी का उपबं विकया र्गया है। यह कहा र्गया है विक एक भवन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ब्लॉक से भवनों का स,ूह, बश m विक ये भवन एक दूसरे से जुड़े हों और एक भवन ब्लॉक का विन,ाण करें।इसक े अलावा एक भवन Oंड क े भी र इ,ार ों की संख्या विवशिभन्न कारकों पर विनभर कर ी है जैसे विक परिरयोजना का विवर्षय, इसकी वास् ुकला की विवशेर्ष ाएं, भूOंड क े आया, आविद।

4. ए,राल्ड कोट (प्रथ, ?रण),ें पां? भवन Oंड हैं सिजन,ें से प्रत्येक,ें ीन भवन हैं। अति रिरक्त भूवि, क े अति ग्रहण क े बाद 6556 वर्ग,ीटर भूवि, का अति ग्रहण विकया र्गया। नोएडा द्वारा विदनांक 26.11.2009 की,ंजूरी योजना क े अनुसार टॉवर एपेक्स और एस्टर-2 क े बी? स्पेस फ्र े, क े प्राव ान क े साथ एपेक्स और एस्टर-1 को,ौजूदा विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क े भी र जोड़ा र्गया था, सिजस,ें एस्टर -2, एस्पायर-1 और एस्टर-1 शावि,ल थे। आईआईटी-रुड़की द्वारा संर?नात्,क सुरक्षा प्र,ाण पत्र जारी करने क े बाद ही नोएडा द्वारा विदनांक 26.11.2009 को,ंजूरी दी र्गई थी। भवन ब्लॉक दशाने वाली स्वीक ृ योजना की प्रति संल`क-1 क े रूप,ें संल` है।” (प्रभाव वर्ति )

85. आरडब्ल्यूए की ओर से उपयुक्त शपथ पत्र,ें दालिOल प्रत्युत्तर,ें, उपयुक्त योजना की सा,ग्री को र्गंभीर रूप से विववाविद विकया र्गया था और इसका प्रकथन विकया र्गया थाः “5. यह विक पूरक काउंटर शपथ पत्र पैराग्राफ 4 की सा,ग्री र्गल है क्योंविक एस्टर टाइप-ए पहले से ही 6556 वर्ग,ीटर की अति रिरक्त भूवि, पर परिरकस्थिल्प था। क ु छ विवशेर्ष हरिर क्षेत्रों क े साथ प्लाट क े क ु ल क्षेत्र 54800 वर्ग,ी. पर, जैसा विक नोएडा द्वारा विदसंबर 2006,ें अनु,ोविद योजना (डब्ल्यूपी क े अनुल`क 2),ें स्पष्ट है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रति वादी ने एससीए-1 क े रूप,ें ति?विÎ एक दस् ावेज प्रस् ु विकया है सिजसे स्वीक ृ भवन योजना कहा र्गया है। यह पूरी रह से प्रति वादी 5 द्वारा प्रस् ु एक नया दस् ावेज है और याति?काक ा क े लिलए एक ?ौंकाने वाला और आ²यजनक है क्योंविक अ ी,ें इसका कभी Oुलासा या विवज्ञापन नहीं विकया र्गया है। अ ी,ें साझा विकए र्गए और प्रस् ु विकए र्गए दस् ावेजों की ुलना,ें दस् ावेजों,ें स्पष्ट विव?लन है। पहली बार प्रति वादी 5 ने एक योजना प्रस् ु की है सिजस,ें ब्लॉक्स का संदभ शावि,ल है। अ ी,ें इस रह क े दस् ावेज कभी साझा नहीं विकए र्गए थे।इसक े अलावा अब प्रत्येक टॉवर को क े वल एक टॉवर नंबर विदया र्गया है और शीर्षक दस् ावेजों और लोकविप्रय उपयोर्ग,ें उपयोर्ग विकए जाने प्रति वादी ना,करण को हटा विदया र्गया है जैसे एस्पायर/एस्टर/एम्परर आविद।इसक े अलावा, इसका कहीं भी नोएडा (प्रत्यथd नं. 2) द्वारा ब्लॉक 1 से 5 क े रूप,ें स्वीक ृ ति स,थन नहीं है। यह विबल्क ु ल स्पष्ट है विक प्रति वादी 5 झूठे प्रति विनति त्व और दस् ावेजों का उपयोर्ग कर रहा है और क,जोर आ ारों भ्र, पैदा करने की कोशिशश कर रहा है। वे इस न्यायालय का स,य और प्राप्त करने की कोशिशश कर रहे हैं और इनका उपयोर्ग देरी करने की रणनीति क े रूप,ें कर रहे हैं, जो याति?का क े विह क े लिOलाफ है। देरी की रणनीति क े साथ प्रति वादी 5 विदन - रा, विवशेर्ष रूप से याति?यों द्वारा रिरट याति?का दायर करने क े बाद, एपेक्स और साइने टावरों क े अनति क ृ विन,ाण क े साथ ेजी से आर्गे बढ़ रहा है, क्योंविक अभी क कोई विनर्षे ाज्ञा जारी नहीं की र्गई है। प्रति वादी 5 विनवेशकों और विवत्तीय संस्थानों/बैंकों की जनविह याति?का का उपयोर्ग अवै और अनति क ृ विन,ाण को शिछपाने क े लिलए कर रहा है और आर्गे भी करेर्गा जैसा विक पूरक काउंटर एविफडेविवट क े पैरा 19 से स्पष्ट है।” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (प्रभाव वर्ति )

86. यह ध्यान देने योग्य बा है विक 2009 की दूसरी संशोति योजना, सिजसे अशिभलेO पर रOा र्गया है,,ें Oंडों का अस्थिस् त्व नहीं दशाया र्गया है और नोएडा द्वारा इसका विवति व स,थन विकया र्गया है। इसलिलए, ह,ें यह विनष्कर्ष विनकालने,ें कोई संदेह नहीं है विक इन कायवाविहयों क े दौरान जो क विवकसिस करने की,ांर्ग की र्गई थी विक योजना,ें अलर्ग-अलर्ग ब्लॉक थे, वह एक बाद की बा थी। यह उस कशिथ स्थिस्थति क े विवपरी है जो अपीलक ा द्वारा उच्च न्यायालय क े स,क्ष शपथ पत्र पर अपनाई र्गई है। यह स्वीक ृ योजनाओं क े विवपरी है। इससे भी बद र यह है विक उच्च न्यायालय क े स,क्ष संविदग्,ूल की एक कशिथ योजना को 2009 की दूसरी संशोति योजना क े रूप,ें पारिर करने का प्रयास विकया र्गया। 87 उच्च न्यायालय क े स,क्ष अपने शपथ पत्र,ें, अपीलक ा ने कहा विकः “9. यहां यह उल्लेO करना उति? है विक एपेक्स और सिसयान क े ना, से परिरयोजना क े दूसरे ?रण,ें स्वीविं,र्ग पूल, व्याया,शाला, अलर्ग पावर बैकअप, अलर्ग एल. टी. पैनल और अलर्ग प्रवेश और विनकास द्वार जैसी अलर्ग-अलर्ग सुविव ाओं का प्राव ान करने की योजना बनाई र्गई है। इसलिलए ए,राल्ड कोट (फ े ज-1) की याति?काक ा सोसायटी क े सदस्यों क े पास एपेक्स एंड सिसयान (फ े ज-2) क े टावरों से संबंति विकसी भी,ुद्दे को ?ुनौ ी देने का कोई अति कार नहीं है। (प्रभाव वर्ति )

88. उपरोक्त प्रकथन इस न्यायालय क े स,क्ष प्रस् ु विकए जाने वाले इस कथन का Oंडन करेंर्गे विक एपेक्स और सिसयान एक ब्लॉक क े भी र स्थिस्थ भवनों क े एक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स,ूह का विहस्सा हैं। उच्च न्यायालय ने प्रति वेदन को ना,ंजूर कर े हुए यह, व्यक्त विकयाः “प्रति वादी क ं पनी क े विवद्व अति वक्ता ने अं ः यह क देने का प्रयास विकया विक इन उपविनय, क े ह ‘‘विन,ाण Oंडों’’ को परिरभाविर्ष नहीं विकया र्गया है और विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता क े अनुसार ‘‘विन,ाण Oंडों’’ का अथ सेक्टर 93 ए नोएडा क े भूOंड संख्या 4 पर पूरी इ,ार से होर्गा। भवन Oंडों का अथ हो ा है, भूOंड/स्थल पर भवन का स,ूह होना। स्वीक ृ नक्शे से स्पष्ट रूप से प ा ?ल ा है विक प्रति वादी क ं पनी ने अलर्ग-अलर्ग ब्लॉकों से वि,लकर ले-आउट को,ंजूरी दी है। प्रत्येक Kवि,क योजना,ें प्रति वादी क ं पनी द्वारा ब्लॉकों का ना, बाद,ें बदल विदया र्गया और अं,ें भवनों को टॉवर (1-17) क े रूप,ें संख्यांविक विकया र्गया।,ंजूर विकए र्गए,ानति?त्रों से स्पष्ट रूप से प ा ?ल ा है विक विववाविद एस्टर II (टॉवर 1) और एपेक्स और सिसयान (टॉवर 16 और 17) अलर्ग-अलर्ग विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक हैं। यह क विबना विकसी आ ार क े प्रस् ु विकया र्गया है।अशिभव?न क े विबना क को आर्गे नहीं बढ़ाया जा सक ा है।”

89. भवन विवविनय,ों,ें 'विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक्स' की व्याख्या क े आ ार पर, जैसा विक ऊपर ??ा की र्गई है, और थ्य एवं अपीलक ा क े क,ें असंर्ग ा क े आ ार पर, ह, उच्च न्यायालय क े उपरोक्त विनष्कर्ष की पुविष्ट कर े हैं। घ.1. 2 इ,ार ों क े अंति, छोर की व्याख्या

90. नोएडा क े अति वक्ता श्री रविवन्द्र क ु,ार द्वारा एक वैकस्थिल्पक क विदया र्गया है विक एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.1.6,ें 16,ीटर की न्यून, दूरी की आवश्यक ा क े अपवाद का प्राव ान है यविद भवन Oंडों क े अंति, छोर एक दूसरे क े आ,ने-सा,ने हों। इस,ें यह विन ारिर विकया र्गया है विक यविद Oंडों,ें एक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दूसरे क े आ,ने-सा,ने डेडएंड साइड्स हैं, ो अं र 16,ीटर क े बजाय क, से क, 9,ीटर होना ?ाविहए। श्री रविवन्द्र क ु,ार ने कहा विक टी-1 और टी-17 एक- दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं और इस प्रकार 16,ीटर की दूरी की आवश्यक ा का प्राव ान प्रयोज्य नहीं है। कायवाही क े दौरान अपीलक ा की दलीलों,ें 'डेड एंड' क का अं हो र्गया है। अपीलक ा क े विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता श्री विवकास सिंसह ने विवशेर्ष रूप से स्पष्ट विकया है विक वह दलीलों पर जोर नहीं दे रहे हैं। ह, इस पर विव?ार करेंर्गे क्योंविक नोएडा क े वकील ने इस न्यायालय क े स,क्ष इसे उठाया है।

91. एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.6,ें कहा र्गया है विक यविद ब्लॉकों का अंति, छोर एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने है ो अं र 16,ीटर क े बजाय अति क, 9,ीटर का होर्गा। डेड-एंड साइड्स का सवाल क े वल ब्लॉकों क े बी? उठ ा है, इस,ा,ले,ें आवश्यक न्यून, दूरी 9,ीटर है।

92. इस न्यायालय ने 27 जुलाई, 2016 को एनबीसीसी को यह सुविनति² करने का आदेश विदया था विक क्या टी-1 और टी-17 क े अंति, छोर एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं, ाविक यह य विकया जा सक े विक क्या टावरों को एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6),ें अपवाद क े भी र लाया जा सक ा है। संदभ की श ‘ इस प्रकार थींः “यह प ा लर्गाने क े लिलए विक क्या दो टॉवरों-टॉवर-1 (एस्टर-2) और टॉवर-17 नोएडा भवन विवविनय, 2010 क े 24.2.[1] (6) क े उद्देश्य क े लिलए एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं।” एनबीसीसी को 'एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने छोर वाले' वाक्यांश क े अथ का विन ारण करने का का, सौंपा र्गया था, और क्या टी-1 और टी-17 को अपवाद क े भी र लाया जा सक ा है। न्यायालय ने विवशेर्ष रूप से यह भी विनदmश विदया विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एनबीसीसी को सौंपे र्गए,ुद्दे से आर्गे नहीं जाना ?ाविहए।93. अपीलक ा ने 'इ,ार का अंति, छोर' वाक्यांश क े अथ पर एनबीसीसी क े स,क्ष अपनी दलीलें दालिOल विकया। यह विनवेदन विकया र्गया विक: (i),ॉडल उपविनय, 2004,,ॉडल उपविनय, 2016 और विदल्ली विवकास प्राति करण भवन उपविनय, 2016,ें 16,ीटर की दूरी क े विनय,,ें ढील देकर 9,ीटर की दूरी का विनय, विदया र्गया है। उस स्थिस्थ,ें जब ‘सा,ने रहने योग्य क,रे नहीं हैं’?ाहे ऊ ं ?ाई क ु छ भी हो। ऐसा ही एक प्राव ान एनबीआर 2010,ें भी शावि,ल विकया र्गया है। हालांविक, "सा,ने रहने योग्य क,रे न हों" वाक्यांश क े बजाय,"डेड एंड" वाक्यांश का उपयोर्ग विकया र्गया है। इसलिलए, वाक्यांश "डेड एंड" को उप-विनय,ों से स,झना ?ाविहए और इसका अथ 'रहने योग्य क,रों' की अनुपस्थिस्थति क े रूप,ें विकया जाना ?ाविहए। (ii) एनबीआर 2006 क े Oंड 3.46,ें ‘रहने योग्य क,रे’ की परिरभार्षा इस प्रकार की र्गई है, “एक ऐसा क,रा जो अध्ययन, रहने, सोने, Oाने, रसोई क े लिलए एक या एक से अति क व्यविक्तयों क े कब्जे,ें हो या उनक े रहने क े लिलए तिडजाइन विकया र्गया हो, यविद इसका उपयोर्ग एक लिलविंवर्ग रू, क े रूप,ें विकया जा ा है, लेविकन इस,ें बाथरू,, वाटर क्लोसेट, क ं पाट,ेंट लॉन्ड्री, सर्किंवर्ग और स्टोरेज पैंट्री, र्गलिलयारे, हOाने, अटारी और स्थान शावि,ल नहीं हैं, सिजनका उपयोर्ग अक्सर या विवस् ारिर अवति क े दौरान नहीं विकया जा ा है।”

94. 'इ,ार क े अंति, छोर' शब्द को एनबीआर 2006, एनबीआर 2010 और एनबीसी 2005,ें परिरभाविर्ष नहीं विकया र्गया है। एनबीआर 2010 क े विवविनय, 3,ें कहा र्गया है विक सिजन शब्दों को विवविनय,ों,ें परिरभाविर्ष नहीं विकया र्गया है, उनका वही अथ होर्गा जो यूपीआईएडी 1976,ें है। यविद यूपीआईएडी 1976,ें शब्द का कोई अथ नहीं विदया र्गया है, ो,ास्टर प्लान/विवकास योजना, विवकास mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA योजना, राष्ट्रीय भवन संविह ा, भार ीय,ानक संस्थान संविह ा,ें विदए र्गए शब्द क े अथ का उल्लेO विकया जाएर्गा। हालांविक, उपरोक्त,ें से कोई भी अति कारी 'इ,ार क े अंति, छोर' वाक्यांश को परिरभाविर्ष नहीं कर ा है। हालांविक, एनबीसी 2005,ें सड़क, र्गलिलयारे, जलापूर्ति आविद की अंति, स्थिस्थति क े संदभ,ें इस वाक्यांश का उपयोर्ग विकया र्गया है, लेविकन 'इ,ार क े अंति, छोर' क े संबं,ें कोई संदभ नहीं विदया र्गया है।

95. इसलिलए, एनबीसीसी ने भार ीय,ानक ब्यूरो23 और नोएडा को K,शः 3 सिस ंबर 2016 और 30 अर्गस् 2016 को पत्र लिलOकर 'इ,ार क े अंति, छोर' वाक्यांश क े अथ पर स्पष्टीकरण की,ांर्ग की। बीआईएस ने विदनांक 9 सिस ंबर 2016 क े एक पत्र क े,ाध्य, से कहा विक यह वाक्यांश क े वल एनबीआर 2010,ें उपयोर्ग विकया र्गया था, न विक एनबीसी 2005,ें जो बीआईएस द्वारा लाया र्गया था, और इसलिलए, इस वाक्यांश की व्याख्या प्रदान करने क े लिलए यह सबसे उपयुक्त नहीं था। नोएडा ने 30 अर्गस्, 2016 को एक पत्र क े,ाध्य, से कहा था विक यह विकसी इ,ार क े उस विहस्से/विहस्से को संदर्शिभ कर ा है जहां कोई प्रवेश/प्रवेश या विनकास नहीं है, इ,ार का अंति, छोर/विहस्सा बन जा ा है, हालांविक इस,ें वेंविटलेशन क े लिलए दरवाजे हो सक े हैं।

96. एनबीसीसी ने 13 अक्टूबर 2016 को अपनी रिरपोट प्रस् ु की। रिरपोट,ें टी-1 और टी-17 की संर?ना, 'इ,ार का अंति, छोर' पर ??ा की र्गई है, और यह विनष्कर्ष विनकाला र्गया है विक टी-1 और टी-17 एक-दूसरे क े आ,ने- सा,ने हैं और इ,ार ों क े अंति, छोर नहीं हैं। एनबीसीसी ने स्थल सत्यापन क े बाद टी-1 और टी-17 की संर?ना पर विनम्नलिललिO विटप्पशिणयां की: 23 BIS mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) टी-17 क े भू ल को वाशिणस्थिज्यक दुकानों क े लिलए आवंविट विकया र्गया है। टी-17,ें शेर्ष,ंसिजलों पर सभी रफ लिOड़विकयों /बालकनी/वेंविटलेटर क े साथ आवासीय फ्ल ै ट होंर्गे। फायर एस्थिक्जट क े लिलए एक ओपविंनर्ग को छोड़कर, टी-1 का सा,ना करने वाले साइड,ें ग्राउंड फ्लोर पर कोई ओपविंनर्ग नहीं होर्गी। हालांविक, अन्य सभी फ्लोर (यानी, ग्राउंड फ्लोर को छोड़कर) को टी-1 वाले विहस्से,ें Oोला जाएर्गा। (ii) टी-17,ें प्रवेश उस रफ है जो टी-1 का सा,ना कर रहे पक्ष क े लंबव है। (iii) टी-1 क े आवासीय फ्ल ै टों,ें प्रवेश टी-17 की रफ से है। (iv) टी-1 क े पास ऑफसेट हैं। इसलिलए, टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी 9.3,ीटर से 25,ीटर क है। (v) टी-1 और टी-17,ें बाल्कनी क े साथ रहने योग्य क,रे एक दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं और (vi) विकसी भी टॉवर विंवर्ग की ऊ ं ?ाई अलर्ग-अलर्ग नहीं है।

97. ?ूंविक 'इ,ार क े अंति, छोर' क े अथ पर कोई स्पष्ट ा नहीं है, इसलिलए एनबीसीसी ने एनबीसी 2005,ें सड़कों, जल आपूर्ति नेटवक आविद क े संदभ,ें प्रयुक्त 'अंति, छोर' वाक्यांश का उपयोर्ग विकया, जहां,ार्ग सीवि, है। रिरपोट,ें कहा र्गया है विक र्गलिलयारे या,ार्ग,ें एक डेड एंड,ौजूद है जहां से बाहर विनकलने क े लिलए क े वल एक विदशा है। एक संदभ क े रूप,ें इस अथ का उपयोर्ग कर े हुए, एनबीसीसी ने 'इ,ार क े डेड एंड साइड' क े वाक्यांश की व्याख्या की, ाविक यह,ाना जा सक े विक टी-1 और टी-17,ें एक-दूसरे का सा,ना करने वाले डेड एंड साइड नहीं हैं। इसक े अलावा, एनबीसीसी ने यह भी पाया विक टी-1 और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA टी-17 क े बी? की दूरी एनबीसी 2005,ें विनर्षिदष्ट दूरी क े विनय, का पालन नहीं कर ी हैः “6. एनबीआर 2010 क े विनय, 24.2.[1] (6) क े अनुसार अंति, छोर का, लब होर्गा विक भवन क े रहने योग्य क,रे जहाँ एक दूसरे का सा,ना न करें और दो विनकटव d भवन ब्लाक क े बी? की दूरी 9,ीटर होर्गी या अन्यथा यह एनबीसी 2005 क े अनुसार 16,ीटर होर्गा। व,ान,ा,ले,ें दोनों इ,ार ों यानी टी-1 और टी-17,ें एक-दूसरे क े सा,ने रहने योग्य क,रे (बालकनी क े साथ) हैं, इसलिलए ये अंति, छोर नहीं हैं।”

7. क्या टी-1 का सा,ना कर रहा टी-17 का विहस्सा इसका अंति, छोर हैः (क) टी-17,ें टी-1 का सा,ना करने वाले पक्ष क े लंबव रफ प्रवेश और विनकास,ार्ग हैं। इसलिलए, टी-1 का सा,ना करने वाला टॉवर टी-17 का छोर सा,ने का पक्ष नहीं है, और इसलिलए, टी-1 और टी-17 क े बी? 'विबल्डिंल्डर्ग सेपरेशन' को एनबीसी 2005,ें उन Oंड/Oंडों द्वारा विनदmशिश विकया जाना ?ाविहए जो विकसी इ,ार क े विकनारों क े लिलए Oुले स्थानों का,ार्गदशन कर े हैं। (O) भू ल पर, टी-17 टॉवर,ें वाशिणस्थिज्यक स्थान/दुकानें हैं सिजस,ें एक सा,ान्य विदन क े दौरान अति कांश स,य लोर्गों की भीड़ रह ी है। (र्ग) ऊपरी,ंसिजलों पर रहने योग्य क,रों क े ?ारों ओर बालकनी और टेरेस है। अनु,ानः उपरोक्त (i), (ii) और (iii) से, टी-17 क े सिजस रफ टी-1 का सा,ना पड़ ा है, स्वाभाविवक रूप से वर्ष क े प्रत्येक विदन और रा, ज,ीन और ऊपरी,ंसिजलों (रहने योग्य क,रों की बालकनी और छ ) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दोनों,ें अक्सर,ानवीय उपस्थिस्थति और उपयोर्ग होर्गा। इसलिलए यह विनष्कर्ष विनकालना सुरतिक्ष होर्गा विक यह टी-17 का अंति, छोर नहीं है।

8. क्या टी-1 का पक्ष, सिजसका सा,ना टी-17 है, इसका अंति, छोर है: टी-17 की रफ टी-1 क े ीन Oंड हैं और इसक े,ध्य Oंड को टॉवर टी-17 से दूर ऑफसेट विकया र्गया है, जबविक छोर पर दो Oंड एक ही रेOा,ें हैं। थाविप,यह Oंड टॉवर क े लिलए,ुख्य प्रवेश/ विनकास द्वार है। टॉवर टी-17 क े सा,ने का शेर्ष विहस्सा भी विनस्थिष्Kय नहीं है क्योंविक इस,ें रहने योग्य क,रों और/या शौ?ालयों से जुड़ी बालकनी और छ है। अनु,ानःटॉवर टी-1,ें प्रवेश टॉवर-17 की रफ से हो ा है सिजसका सा,ना करना पड़ ा है। टॉवर-17 क े सा,ने वाले टॉवर-1 क े इस विहस्से को टॉवर-1 क े अंति, छोर क े रूप,ें नहीं,ाना जा सक ा है।” (प्रभाव वर्ति )

98. अपीलक ा ने एनबीसीसी की रिरपोट पर अपनी आपलित्तयां दालिOल की,सिजस,ें विनम्नलिललिO क विदया र्गयाः (i) इस न्यायालय द्वारा जां? का दायरा इस,ुद्दे क सीवि, कर विदया र्गया था विक क्या टी-1 और टी-17 एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6) क े प्रयोजन क े लिलए एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं। हालांविक, एनबीसीसी ने जां? का दायरा बढ़ा विदया है और यह विन ारिर विकया है विक क्या,ंजूरी एनबीसी 2005 क े विनय, क े अनुरूप है; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ii) टी-17 क े भू ल,ें प्रवेश दोनों रफ उपलब् है। वाशिणस्थिज्यक दुकानों क े लिलए, प्रवेश टी-1 की रफ वाली रफ क े लंबव है, और अन्य सुविव ाओं क े लिलए यह टी-16 की रफ और Oुली जर्गह की रफ Oुल ी है; (iii) टी-1 और टी-17 क े बी? क े,ार्ग का उपयोर्ग क े वल टी-1 से टी-15,ें घरों क े लिलए आवंविट पार्किंकर्ग स्थान,ें प्रवेश करने क े लिलए विकया जा ा है। टी- 17 की पार्किंकर्ग,ें प्रवेश करने क े लिलए, एक और,ार्ग का उपयोर्ग विकया जा ा है; (iv) टी-17 क े सा,ने टी-1,ें अपाट,ेंट क े पां? बाहरी विकनारों,ें से ?ार डेड एंड (दो प्लंविंबर्ग शाफ्ट, टॉयलेट डेड वॉल, बेडरू, डेड वॉल) हैं। टी-1 का क े वल पां?वां बाहरी विहस्सा, जो लिलविंवर्ग रू, से जुड़ा हुआ एक बालकनी है, टी- 17 की ओर है; (v) यद्यविप टी-1,ें प्रवेश टी-17 क े सा,ने है लेविकन प्रवेश टी-17 से 20,ीटर दूर है; (vi) एनबीसीसी टी-1 और टी-17 क े संबं,ें विवशिभन्न स्थिस्थति यों पर विव?ार करने,ें विवफल रही है। टी-1 और टी-17 क े विकनारों की सोलह लाइन पोजीशन हैं जो एक दूसरे का सा,ना कर रहे हैं और वे,ुख्य रूप से अंति, छोर हैं। सोलह लाइन स्थिस्थति यों,ें से: क. ग्यारह पंविक्त की स्थिस्थति यों,ें बंद दीवारें एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हो ी हैं;

O. दो पंविक्त की स्थिस्थति यों,ें टी-1 की बंद दीवारें टी-17 क े आ,ने-सा,ने हैं। हालांविक दोनों क े बी? 16,ीटर की दूरी है; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्ग. दो पंविक्त की स्थिस्थति यों,ें टी-1 की सा,ान्य लिलफ्ट लॉबी की रेलिंलर्ग है जो टी-17 की बेडरू, लिOड़की क े सा,ने है। हालांविक इनक े बी?,ें 3,ीटर का Oुला स्थान है; और घ. एक लाइन स्थिस्थति जहां टी-1 की बंद दीवार टी-17,ें बालकनी की रेलिंलर्ग क े सा,ने है, वहां 9.30,ीटर Oाली स्थान है। इस लाइन स्पेस,ें दोनों इ,ार ों की दीवारों क े बी? 10.80,ीटर की Oुली जर्गह है। 99 पहले प्रति वादी ने इस पर विवशेर्षज्ञ की राय भी,ांर्गी विक क्या टी-1 और टी- 17 क े अंति, छोर आईआईटी विदल्ली से एक दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं।रिरपोट 6 सिस ंबर, 2016 को इस न्यायालय को प्रस् ु की र्गई थी और यह विनष्कर्ष विनकाला र्गया था विक टी-1 और टी-17 क े जो विहस्से एक-दूसरे का सा,ना कर े हैं, उन्हें इ,ार क े अंति, छोर क े रूप,ें नहीं,ाना जा सक ा है। यह देOा र्गया विक जब बालकनी और लिOड़विकयां (या कोई अन्य विनकास) प्रदान विकया जा ा है, ो विन ारिर न्यून, दूरी का पालन नहीं करने पर कायात्,क प्रभावशील ा प्रभाविव होर्गी। आर्गे विवस् ार से ब ा े हुए, यह कहा र्गया विक न्यून, दूरी को क, विकया जा सक ा है जब इ,ार क े संबंति पक्ष पर कोई विनकास नहीं होर्गा क्योंविक ब एक कायात्,क स,झौ े की कोई संभावना नहीं होर्गी। रिरपोट,ें विदए र्गए कारणों का सारांश इस प्रकार हैः (i) 'डेड एंड' का शब्दकोश,ें अथ है 'नो एस्थिक्जट' यानी कोई विनकास या विबना दरवाजे क े । इसलिलए, बालकनी की लिOड़विकयों क े रूप,ें विकसी भी Oुलने की उपस्थिस्थति इ,ार क े विकनारे को डेड एंड नहीं बना ी है; (ii) दो इ,ार ों क े बी? न्यून, दूरी की आवश्यक ा को विन ारिर करने का उद्देश्य आर्ग क े सं?रण को रोकना आपदाओं क े दौरान सुरतिक्ष विनकास, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यून, वेंविटलेशन और प्राक ृ ति क विदन की रोशनी प्राप्त करना है। यविद विकसी अन्य भवन का सा,ना करने वाली इ,ार ों क े बी? न्यून, दूरी की आवश्यक ा का अनुपालन नहीं विकया जा ा है, ो विनम्नलिललिO कारणों से विनर्ग, (लिOड़की या बालकनी क े,ाध्य, से) का काय प्रभाविव होर्गा: क. आर्ग क े प्रसार से ब?ने क े लिलएः एनबीसी 2005 क े अनुसार अवि` पृथक्करण को इ,ार की बाहरी दीवार से दूसरी इ,ार की बाहरी दीवार की दूरी क े रूप,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है। लिOड़विकयों क े,ाध्य, से बर्गल की इ,ार,ें आर्ग फ ै लने की संभावना बढ़ जा ी है। हालांविक, अर्गर दीवारों,ें कोई ओपविंनर्ग नहीं है, ो इ,ार ों क े बी? की दूरी क, हो सक ी है क्योंविक आर्ग लर्गने की संभावना क, हो ी है;
O. सुरतिक्ष विनकास एवं ब?ाव: जैसे-जैसे इ,ार की ऊ ं ?ाई बढ़ ी जा ी है, आपा स्थिस्थति यों,ें विनवासिसयों को ब?ाने,ें कविठनाई हो ी है।ऐसे,ा,लों,ें, Oुली बालकनी का उपयोर्ग ब?ाव काय§ की सुविव ा क े लिलए विकया जा सक ा है बश m विक सड़क की ?ौड़ाई पयाप्त हो। जैसे-जैसे इ,ार की ऊ ं ?ाई बढ़ ी है, सीढ़ी क े अति क, सुरतिक्ष झुकाव क े लिलए, सड़क को व्यापक होना ?ाविहए; र्ग. न्यून, वेंविटलेशनः ठंड व र्ग, हवा क े आदान-प्रदान एवं इ,ार को ठंडा करने क े लिलए और स्वच्छ वेंविटलेशन (यानी, सीओ 2, शरीर की र्गं आविद को हटाने) क े लिलए न्यून, प्राक ृ ति क वेंविटलेशन की आवश्यक ा हो ी है।), घ. प्राक ृ ति क विदन की रोशनी: जब दो इ,ार ों क े बी? की दूरी अति क हो ी है, ो इ,ार को सी े सूरज की रोशनी प्राप्त हो ी है mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iii) टी-1 का,ुख्य प्रवेश/विनकास टी-17 क े सा,ने है। यह एक,ात्र प्रविवविष्ट है जो सड़क से र्गुजर ी है और आवश्यक ा पड़ने पर सभी संभव रूप से ब?ाव काय§ क े लिलए उपयोर्ग की जाएर्गी। टी-1 और टी-17,ें रहने योग्य क,रों की बालकनी भी एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं। इसलिलए, संबंति भवन पक्षों (टी-17 का सा,ना करने वाले टी-1 और इसक े विवपरी ) को डेड एंड नहीं,ाना जा सक ा है क्योंविक विकनारे विनकल े हैं। इसक े अलावा, न्यून, दूरी की आवश्यक ा,ें क,ी से इस रह की विनकासी प्रदान करने क े उद्देश्य से र्गंभीर स,झौ ा होर्गा।

100. प्रथ, प्रति वादी ने 6 अक्त ू बर, 2016 क े एक पत्र द्वारा इस बारे,ें भी आईआईटी रुड़की से विवशेर्षज्ञ की राय,ांर्गी विक क्या टी-1 और टी-17 एक- दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं। अक्त ू बर, 2016,ें इस न्यायालय को एक रिरपोट प्रस् ु की र्गई थी सिजस,ें कहा र्गया था विक टी-1 और टी-17 क े एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने क े भवनों को विनम्नलिललिO कारणों से 'डेड एंड' नहीं कहा जा सक ा हैः (i) आवश्यक दूरी बनाने का वैज्ञाविनक आ ार यह है विक यह अवि`श,न सुरक्षा बढ़ाएर्गी और पयाप्त विदन का प्रकाश व हवा प्रदान करेर्गी। (ii) द,रिरय, वेबस्टर तिडक्शनरी 'डेड एंड' को एक ऐसी सड़क क े रूप,ें परिरभाविर्ष कर ी है जो विकसी दूसरी सड़क से जुड़ने क े बजाय इस प्रकार स,ाप्त हो जा ी है विक इस,ें आने -जाने का क े वल एक ही रास् ा हो। 'डेड वॉल' को विबना दरवाजे, लिOड़विकयों क े दीवार क े रूप,ें परिरभाविर्ष विकया र्गया है। इसलिलए, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्पष्ट रूप से, दरवाजे और बालकनी और लिOड़विकयों की उपस्थिस्थति का, लब होर्गा विक 'साइड' एक डेड एंड साइड नहीं है। (iii) जब विकसी अन्य भवन का सा,ना करने वाली इ,ार क े विकनारे विनकले हुए हो े हैं ो विवविनय,ों क े ह विनर्षिदष्ट न्यून, दूरी का पालन विकया जाना ?ाविहए। अन्यथा, विनकास का कायात्,क प्रदशन (यानी, बालकनी, लिOड़की आविद) से स,झौ ा करना होर्गा और (iv) टी-1 का,ुख्य प्रवेश द्वार, दरवाजे, लिOड़विकयां और बालकनी टी-17 क े सा,ने है। ?ूंविक टी-17 क े सा,ने वाला टी-1 का विकनारा विनकला हुआ है। इसलिलए यह 'डेड एंड साइड' नहीं है।

101. अपीलक ा ने एक वास् ुशिशल्प और तिडजाइन फ,, तिडजाइन फोर, इंटरनेशनल24 से संपक विकया और व,ान,ा,ले,ें उनकी सहाय ा का अनुरो विकया। डीएफआई ने अपनी रिरपोट क े,ाध्य, से अंति, छोर,ुद्दे क े बारे,ें एनबीसीसी की रिरपोट पर विनम्नलिललिO विटप्पशिणयां की: (i) टी-1 और टी-17 तिडजाइन,ें अलर्ग-अलर्ग हैं। टी-1 की ुलना,ें टी- 17 की लंबाई लर्गभर्ग ीन र्गुना है। इसक े अलावा, टी-1 को ओवरलैप करने वाला टी-17 का विहस्सा पूरी लंबाई क े साथ स्थिस्थर नहीं है। टी-1 और टी-17 का प्रवेश एक-दूसरे क े लंबव है। इसलिलए यह आवश्यक है विक एक दूसरे क े अशिभ,ुO पश्व§ का परीक्षण विवस् ार से विकया जाए। (ii) टी-1 और टी-17 का प्रवेश एक दूसरे क े लम्बव है। (iii) टी-1 और टी-17 क े पश्व§ को विनम्नलिललिO ीन श्रेशिणयों,ें वर्गdक ृ विकया जा सक ा हैः (क) डेड एंड फ े सिंसर्ग डेड एंड (अथा, दीवार क े सा,ने एक 24 “DFI” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दीवार) (O) डेड एंड फ े सिंसर्ग अ नॉन डेड एंड (अथा, विंवडो क े सा,ने एक दीवार) और (र्ग) नॉन-डेड एंड फ े सिंसर्ग नॉन डेड एंड (अथा, विंवडो क े सा,ने एक लिOड़की) (iv) एनबीआर 2010 क े विनय, 24.2.[1] (6) क े ह स्थिस्थति स्पष्ट है विक (ए) क े ह आने वाले भवनों क े बी? की दूरी 9,ीटर होनी ?ाविहए। और (र्ग) क े अं र्ग आने वाले,ा,लों क े लिलए दूरी 16,ीटर होनी ?ाविहए।हालांविक, (बी) क े ह आने वाले,ा,लों क े लिलए, यह स्पष्ट नहीं है विक इ,ार क े बी? विक नी दूरी बनाए रOी जानी ?ाविहए (v) टी-1 और टी-17 क े बी? 13 विवशिशष्ट लाइन पोजीशन हैं। ेरह लाइन पोजीशन,ें से, छह लाइन पोजीशन,ें टी-1 का डेड एंड साइड टी-17 (टाइप (ए) क े डेड एंड साइड का सा,ना कर ा है, ?ार लाइन पोजीशन,ें टी1/टी-17 का डेड एंड साइड दूसरे (टाइप बी) क े नॉन-डेड एंड साइड का सा,ना कर ा है। ीन लाइन पोजीशन,ें, टी-1 और टी-17 का नॉन-डेड एंड साइड एक दूसरे (टाइप सी) का सा,ना कर ा है। (vi) टाइप (ए) क े अं र्ग आने वाली लाइन पोजीशन क े लिलए दूरी 9.88,ीटर से 15.11,ी. है जो 9,ीटर की दूरी आवश्यक ा का पालन कर ी है, टाइप (O) क े अं र्ग आने वाली लाइन पोजीशन क े लिलए आवश्यक दूरी 10.8,ीटर से 15.3,ीटर है। टाइप (र्ग) क े अं र्ग आने वाली लाइन पोजीशन क े लिलए दूरी 14.62,ीटर से 15.5,ी. है जो अपेतिक्ष 16,ीटर की ुलना,ें ' थोड़ा क,' है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (vii) ?ूंविक टी-1 और टी-17 क े पक्षों क े बी? की दूरी एक-दूसरे से काफी अलर्ग है और एक स,ान नहीं है, इसलिलए इस न्यायालय को ऐसी स्थिस्थति को ध्यान,ें रO े हुए,ुद्दे का र्गहन विवश्लेर्षण करना होर्गा। और (viii) टाइप (र्ग) और टाइप (O) (यविद यह न्यायालय दूरी को क, घोविर्ष कर ा है) क े,ा,ले,ें,ा,ूली क,ी को भवन,ें ढां?ार्ग परिरव न करक े दूर विकया जा सक ा है।

102. एनबीआर 2010,ें 'ब्लॉक क े अंति, छोर' इस वाक्यांश की कोई परिरभार्षा नहीं दी र्गई है। एनबीआर 2006, एनबीसी 2005 और यूपीआईएडी अति विनय, 1976 भी इस वाक्यांश को परिरभाविर्ष नहीं कर े हैं। न्यायालय को अशिभव्यविक्त की व्याख्या कर े स,य 'ब्लॉक क े अंति, छोर' वाक्यांश को प्रासंविर्गक अथ देना होर्गा। उपयुक्त रिरपोट‘ इस वाक्यांश क े दो अलर्ग -अलर्ग अथ अपना ी हैं। एनबीसीसी की रिरपोट और एनबीसीसी क े स,क्ष अपनी आपलित्तयों,ें अपीलक ा ने कहा विक इ,ार क े अंति, छोर का, लब होर्गा जहां एक इ,ार क े 'रहने योग्य क,रे' एक दूसरे क े आ,ने-सा,ने नहीं होंर्गे। हालांविक यह विनर्षिदष्ट नहीं विकया र्गया है विक क े वल 'लिOड़विकयों/बालकनी' वाले रहने योग्य क,रों को 'डेड एंड' नहीं,ाना जाएर्गा, यह स्पष्ट है विक क यह है विक क े वल भी यह,ाना जाना ?ाविहए जब बाहर विनकलने वाला आवास योग्य क,रा बर्गल की इ,ार क े विकनारे का सा,ना कर ा है, इसे 'डेड एंड साइड' नहीं,ाना जाना ?ाविहए। विनष्कर्ष यह है विक यविद स्टोर रू, या बाथरू, या लिOड़की/विनकास क े साथ र्गलिलयारा बर्गल की इ,ार क े विकनारे की ओर है, ो इसे भी एक डेड एंड,ाना जाना ?ाविहए। जबविक, आईआईटी विदल्ली और आईआईटी रुड़की की रिरपोट,ें 'रहने योग्य क,रों' क े विकसी भी संदभ क े विबना विकसी इ,ार क े डेड एंड को विनर्ग, (यानी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लिOड़विकयां, बालकनी या शिछद्र) क े साथ एक साइड क े रूप,ें परिरभाविर्ष करक े एक अन्य दृविष्टकोण अपनाया र्गया है।

103. इस वाक्यांश क े विनव?न पर दो अन्य क भी उठाए र्गए हैं। यह क विदया र्गया है विक यह वाक्यांश इस हद क अस्पष्ट है विक यह इस बारे,ें स्पष्ट ा प्रदान नहीं कर ा है विक क्या बर्गल की इ,ार की डेड दीवार का सा,ना करने वाली इ,ार का एक विनकास अपवाद क े भी र आएर्गा। यह भी क विदया र्गया है विक ?ूंविक टी-1 और टी-17 की ऊ ं ?ाई स,ान नहीं है, इसलिलए विनकटव d इ,ार ों,ें दो एग्रेस क े वल क ु छ लाइन पदों,ें एक दूसरे क े सा,ने हैं, और इनक े बी? न्यून, दूरी की आवश्यक ा आस-पास की इ,ार ों की प्रत्येक पंविक्त की स्थिस्थति क े साथ अलर्ग-अलर्ग होना ?ाविहए, यह इस बा पर विनभर कर ा है विक क्या वे विवशिशष्ट पंविक्त की स्थिस्थति डेड एंड हैं।

104. इसलिलए ह,ारे सा,ने इ,ार ों क े अंति, छोर की व्याख्या कर े स,य ीन प्रश्न हैंः (i) क्या भवन क े विकसी भार्ग,ें विनर्ग, क े साथ क े वल रहने योग्य क,रे ही “भवनों क े अंति, छोर " वाक्यांश की परिरति से बाहर रOे जाने ?ाविहए। (ii) क्या इ,ार ों क े दोनों रफ अंति, छोर होना ?ाविहए, या क्या यह पयाप्त है यविद इ,ार का एक छोर अंति, छोर है, और (iii) क्या इ,ार क े अंति, छोर और दो विनकटव d इ,ार ों क े बी? की दूरी क े विन ारण क े लिलए सी ी रेOा स्थिस्थति का उपयोर्ग विकया जाना ?ाविहए।105. ह, इस दलील को स्वीकार करने,ें अस,थ हैं विक इ,ार ों क े डेड एंड क े दायरे से बाहर क े वल बाहर विनकलने वाले (अथा लिOड़विकयों या बालकनी वाले) रहने योग्य क,रे ही आएंर्गे। सा,ान्य बोल?ाल की भार्षा,ें 'डेड एंड' का अथ हो ा है, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कोई विनकास या पहुं? की अनुपस्थिस्थति । एनबीआर 2010,ें 'डेड एंड' वाक्यांश क े संदभ,ें रहने योग्य और र्गैर-रहने योग्य क,रों क े बी? वर्गdक ृ करने का कोई संक े नहीं विदया र्गया है।यह क विक रहने योग्य और र्गैर -रहने योग्य क,रों क े बी? वर्गdकरण दूरी की आवश्यक ा क े विवशिशष्ट संदभ क े साथ,ॉडल बाय-लॉज,ें विकया र्गया है और इसलिलए, इसे 'इ,ार क े अंति, छोर' वाक्यांश की व्याख्या क े लिलए प्रयुक्त विकया जाना ?ाविहए, असं ोर्षजनक है। यह सांविवति क विनव?न का एक विन ारिर सिसद्धां है विक शब्दों को उनका सरल और सा ारण अथ विदया जाना ?ाविहए जब क विक इस रह का विनव?न अस्पष्ट ा या बे ुकी ओर न ले जाए या जब अति विनय, का उद्देश्य अन्यथा इंविर्ग न करे। 'रहने योग्य क,रे' वाक्यांश का उपयोर्ग करने वाले अन्य उपविनय,ों क े बावजूद एनबीआर 2010,ें 'इ,ार क े डेड एंड' वाक्यांश से यह स्पष्ट हो ा है विक इसका आशय अपवाद क े दायरे को सीवि, करना था। 'डेड एंड' शब्द क े सा,ान्य अथ क े संदभ,ें इस वाक्यांश की व्याख्या करने से कोई अस्पष्ट ा नहीं हो ी है बस्थिल्क यह प्राव ान क े पीछे क े उद्देश्य और उद्देश्य क े अनुसरण,ें है। जैसा विक आईआईटी विदल्ली और आईआईटी रुड़की द्वारा प्रस् ु की र्गई रिरपोट§,ें कहा र्गया है, इ,ार क े सा,ने वाले विहस्से क े बाहर विनकलने की स्थिस्थति,ें आसपास की इ,ार ों क े बी? एक उच्च न्यून, दूरी विन ारिर करने का उद्देश्य यह है विक विनकास (या ो एक लिOड़की या बालकनी) की कायात्,क उपयोविर्ग ा क, न हो। लिOड़विकयां/बालकनी, ?ाहे वे रहने योग्य या र्गैर-रहने योग्य क,रे से जुड़ी हों, काय कर ी हैं, जो पास की इ,ार क े पास होने पर बहु क, हो जा ी हैं और इस प्रकार हवा क े प्रवाह को बाति कर ी हैं और आर्ग की स्थिस्थति,ें सं?रण की संभावना बढ़ा ी हैं।इसक े अलावा, फ्ल ै ट,ें रहने वाले लोर्गों की विनज ा क े साथ र्गंभीर स,झौ ा हो ा है। लिOड़विकयों क े साथ र्गैर-रहने योग्य क,रों को शावि,ल करने क े लिलए 'इ,ार क े डेड एंड' वाक्यांश क े अथ का विवस् ार विवविनय,न को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विफर से लिलOने क े बराबर होर्गा, जब एनबीआर 2006 या एनबीआर 2010 से इस रह क े विकसी भी संक े का अथ नहीं लर्गाया जा सक ा है।

106. यह क विक डेड एंड अपवाद लार्गू होर्गा, भले ही दो विनकटव d इ,ार ों क े एक रफ डेड एंड हो, र्गल है। एनबीआर 2010 विवविनय, 24.2.[1] (6),ें कहा र्गया है विक यविद Oंडों क े विकनारे एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने हैं, ो अं र 16,ीटर क े बजाय अति क, 9,ीटर होर्गा।शब्द 'ब्लॉक' और ‘साइड्स’ का एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6),ें बहुव?न रूप,ें उल्लेO विकया र्गया है। विवविनय,,ें यह नहीं कहा र्गया है विक क्या यह ब्लॉक का अंति, छोर है। जब वाक्यांश या शब्द अस्पष्ट ा से,ुक्त हों और जब उति? रूप से अथ विकए जाने पर इस वाक्यांश का क े वल एक ही अथ हो विक, ो इसका शास्थिब्दक अथ लर्गाना होर्गा, और अदाल ों को उदार व्याख्या का सहारा नहीं लेना ?ाविहए जो योजना विवविनय,न क े प्राव ान क े इरादे और उद्देश्य को विवफल करेर्गी।

107. डीएफआई द्वारा प्रस् ु रिरपोट टी-1 और टी-17 की शिभन्न ऊ ं ?ाइयों का उल्लेO कर ी है। क यह है विक ?ूंविक टी -1 और टी-17 की संर?ना अलर्ग- अलर्ग है, और ?ूंविक टॉवर एक-दूसरे क े साथ क्षैति ज रूप से छोटे टॉवर (टी- 1) की ऊ ं ?ाई की सी,ा क ही ओवरलैप कर े हैं, टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी को सी ी रेOा की स्थिस्थति,ें,ापा जाना ?ाविहए। इन सी ी लाइन स्थिस्थति यों को विफर ीन श्रेशिणयों,ें वर्गdक ृ विकया जा ा है (श्रेणी (ए)-डेड एंड फ े सिंसर्ग डेड एंड. श्रेणी (बी)-डेड एंड फ े सिंसर्ग नॉन डेड एंड. श्रेणी (सी)-नॉन- डेड एंड फ े सिंसर्ग नॉन डेड एंड। इन,ें से प्रत्येक प्रकार क े संबं,ें टी -1 और टी-17 क े बी? की दूरी को यह क देने क े लिलए,ापा र्गया है विक श्रेणी (ए),ें आने वाली लाइनों क े लिलए, यह पयाप्त है विक यविद श्रेणी (बी) क े ह आने वाली लाइनों क े लिलए 9,ीटर की दूरी है, ो आवश्यक दूरी और श्रेणी (सी),ें आने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वाली लाइनों क े लिलए न्यून, 16,ीटर की दूरी पर कोई स्पष्ट ा नहीं है। यह क दो आ ारों पर आ ारिर हैः एनबीआर 2010 क े विनय, 24.2.[1] (6) क े ह विन ारिर न्यून, दूरी की आवश्यक ा दो भवनों क े बी? की दूरी नहीं है, बस्थिल्क दो विनकटव d भवनों क े बी? की विवशिभन्न सी ी रेOा क े बी? की दूरी है। 16,ीटर की दूरी क े विनय, को स,ान रूप से लार्गू विकया जाने क े लिलए सम्पूण विनकटव d ब्लाक का एक दूसरे से अशिभ,ुO नॉन डेड एंड साइड वाला होना आवश्यक है।

108. एनबीआर 2010 क े विवविनय, 24.2.[1] (6),ें प्रयुक्त वाक्यांश 'ब्लॉक' है न विक 'फ्ल ै ट'/'यूविनट'। इस प्रकार, विव?ार की इकाई ब्लॉक,ें व्यविक्तर्ग 'इकाइयां' नहीं हैं, बस्थिल्क पूरे ब्लॉक,ें हैं। ब्लॉक का साइड डेड एंड वाला पक्ष नहीं होर्गा यविद क ु छ भी अंडाकार हों। यविद सी ी रेOा स्थिस्थति क े क को स्वीकार कर लिलया जा ा है, ो न्यून, दूरी की आवश्यक ा प्रदान करने क े पीछे का इरादा अनुत्पादक हो जाएर्गा। आईआईटी विदल्ली और आईआईटी रुड़की की रिरपोट,ें न्यून, दूरी की आवश्यक ा को लार्गू करने का उद्देश्य वेंविटलेशन, प्रत्यक्ष सूय की रोशनी, ब?ाव क े सा न और आर्ग क े प्रसार को रोकना है। यविद ब्लॉक,ें विवशेर्ष 'फ्ल ै टों'/'इकाइयों',ें विन,ाण योजना क े अनुसार वेंट है, ो न्यून, दूरी का पालन करना होर्गा, न क े वल सी ी लाइन क े संबं,ें बस्थिल्क 'पूरे ब्लॉक' क े संबं,ें।

109. भार ीय प्रौद्योविर्गकी संस्थान, विदल्ली और भार ीय प्रौद्योविर्गकी संस्थान, रुड़की की रिरपोट§,ें ऊ ं ?ी इ,ार ों,ें रहने वाले लोर्गों को विनकालने,ें होने वाली कविठनाई को स्पष्ट रूप से दशाया र्गया है।रिरपोट,ें कहा र्गया है विक ऊ ं ?ी इ,ार ों क े लिलए आसपास की इ,ार ों क े बी? की दूरी अति क होनी ?ाविहए क्योंविक सीढ़ी क े अति क, सुरतिक्ष झुकाव क े लिलए सड़क को व्यापक होना ?ाविहए। रिरपोट§,ें इ,ार ों क े बी? दूरी क, होने की स्थिस्थति,ें वेंविटलेशन, सूरज की रोशनी और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्गोपनीय ा,ें क,ी का भी उल्लेO विकया र्गया है। इसलिलए, इस बा पर ध्यान विदए विबना विक ब्लॉक की सभी या क ु छ इकाइयों,ें बर्गल की इ,ार क े सा,ने एक विनकास है, न्यून, दूरी 16,ीटर है। इसका अनुपालन करना होर्गा, अन्यथा वेंट प्रदान करने क े उद्देश्य,ें बा ा आएर्गी।

110. उपयुक्त ??ा को ध्यान,ें रO े हुए, 'ब्लॉक क े डेड एंड' वाक्यांश की व्याख्या क े लिलए,ार्गदशक सिसद्धां इस प्रकार हैंः (I) ‘ब्लॉक का डेड एंड’ वाक्यांश का अथ होर्गा विक विकसी भी इ,ार,ें कु छ विनकला हुआ नहीं है। (ii) बाथरू, या स्टोर रू, जैसे र्गैर-रहने योग्य क,रे,ें प्रवेश को नॉन डेड एंड,ाना जाएर्गा (iii) 'डेड एंड' अपवाद को लार्गू करने क े लिलए, यह आवश्यक है विक दोनों इ,ार ों क े दोनों रफ एक-दूसरे क े सा,ने कोई विनकास नहीं होना ?ाविहए (iv) यह आवश्यक नहीं है विक दूसरी इ,ार क े सा,ने वाली इ,ार की सभी इकाइयों,ें एक विनकास होना ?ाविहए। यविद क ु छ इकाइयों,ें विनर्ग, हो ा है ो ब्लॉक क े उस पक्ष को विनस्थिष्Kय पक्ष नहीं,ाना जाएर्गा। (v) दो विनकटव d ब्लॉकों क े बी? आवश्यक न्यून, दूरी को इकाइयों की सी ी लाइन स्थिस्थति क े,ाध्य, से नहीं, बस्थिल्क ज,ीन क े साथ,ापा जाना ?ाविहए।

111. 'इ,ार का डेड एंड साइड' अशिभव्यविक्त की व्याख्या पर ऊपर विदए र्गए सिसद्धां ों क े लार्गू होने पर, टी-1 और टी-17 क े एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने आने वाले पक्षों को विनम्नलिललिO कारणों से अंति, छोर नहीं,ाना जा ा हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) ग्राउंड फ्लोर को छोड़कर सभी,ंसिजलों पर टी-17 की लिOड़विकयों/र्गलिलयारों,ें टी-1 क े सा,ने की रफ एक दरवाजा है। हालांविक यह अपीलक ा द्वारा ?ुनौ ी दी र्गई है, यह स्वीकार विकया र्गया है विक टी-1,ें टी-17 का सा,ना करने वाली क, से क, क ु छ लिOड़विकयां/बालकनी हैं और इसक े विवपरी भी हैं (ii) टी-1 और टी-17 की प्रविवविष्टयां एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने नहीं हैं, बस्थिल्क एक-दूसरे क े लंबव हैं। हालांविक, टी-1,ें प्रवेश टी-17 की रफ से है (iii) टी-1 क े पां? बाहरी पक्षों,ें से ?ार, जो टी-17 का सा,ना कर े हैं, अंति, पक्ष हैं। हालांविक, पां?वां विहस्सा टी-17 का सा,ना करने वाले क,रे की बालकनी है। इ,ार ों क े विंबदुओं क े बी? की दूरी को ?ुविंनदा रीक े से,ापा नहीं जा सक ा है, ाविक वह दूरी क े विनय, क े अनुपालन पर क दे सक े और (iv) हालांविक टी-17 का सा,ना करने वाले टी-1 का प्रवेश 20,ीटर दूर है। दूरी क े विनय, का पालन नहीं विकया जा ा है क्योंविक अंति, छोर से एक ?यनात्,क,ाप नहीं विकया जा सक ा है। दूरी को ज,ीन क े साथ,ापा जाना ?ाविहए। इस प्रकार, ह, पा े हैं विक संशोति योजनाएं एनबीआर 2010 का उल्लंघन कर रही हैं और अंति, छोर वाले ब्लॉकों क े लिलए विवविनय, 24.2.1.6,ें विदए र्गए अपवाद क े अं र्ग नहीं आ ी हैं। घ. 2 एनबीसी 2005 का उल्लंघन

112. अब ह, इस प्रश्न पर विव?ार करेंर्गे विक क्या ीसरी संशोति योजना एनबीसी 2005 का उल्लंघन कर ी है। जैसा विक ह,ने ऊपर देOा है, एनबीसी 2005 को एनबीआर 2010 क े विनय, 24.2.1.6,ें संदर्शिभ विकया र्गया है। एनबीसी 2005,ें Oुले स्थानों क े रOरOाव क े संबं,ें दो भार्ग हैं -पैरा 8.2.3.[1] और पैरा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 8.2.3.2। पैरा 8.2.3.1,ें 10,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई वाली इ,ार ों क े लिलए Oुली जर्गह का प्राव ान है, जो ालिलका 2,ें विनर्षिदष्ट है। ालिलका 2 से प ा ?ल ा है विक बर्गल और पीछे क े Oुले स्थान इ,ार की ऊ ं ?ाई क े अनुरूप हैं और 3,ीटर से शुरू होकर उसी क े अनुसार बढ़ े हैं। इस भवन की ऊ ं ?ाई 10,ीटर होर्गी और 16,ीटर क होर्गी, जहां इ,ार की ऊ ं ?ाई 55,ीटर या उससे अति क है।इसक े अलावा, नोट 3,ें स्पष्ट विकया र्गया है विक यविद इ,ार की लंबाई और र्गहराई 40,ीटर से अति क है, ो विन ारिर न्यून, दूरी को इ,ार की लंबाई और र्गहराई,ाइनस 4,ीटर क े दस प्रति श क बढ़ाया जाना ?ाविहए। इस प्रकार, इ,ार क े ?ारों ओर ब?ी हुई Oुली जर्गह की र्गणना इस प्रकार होर्गीः भवन की ऊ ं ?ाई ीसरा संशो न दूसरा संशो न काल, 3,ें विवविह सारणी 22 की न्यून, दूरी (55,ीटर से अति क दूरी वाले भवनों क े लिलए 84.5,ीटर25 73,ीटर नोट 3 क े अनुसार दूरी 16,ीटर 16,ीटर काल, 3,ें दूरी + इ,ार की दूरी या र्गहराई का 10% -4.0,ीटर 16+10% (84.5)- 4=20.45,ीटर 16+10% (73)- 4=19.3,ीटर इस प्रकार एनबीसी 2005 क े अनुसार टी-1 और टी-17 क े बी? का अं र 20.45,ीटर होना ?ाविहए। जाविहर है विक दूसरी और ीसरी संशोति योजनाएं एनबीसी 2005 क े अनुसार नहीं थीं। इस विनष्कर्ष को एनबीसीसी की रिरपोट से,जबू ी वि,ली है, जो पैरा 5,ें इस विनष्कर्ष पर पहुं? ी है विक टी -17 क े 25 एनबीसीसी में यथा उल्लिखित यथा उल्लिखित उल्लि ल्लि त T-17 की वा उल्लिखित स्त ल्लिवक ंबा उल्लिखित ई परिकल्पित पल्लि कल्लि पत 121 मी क े सापेक्ष सा उल्लिखित पे सापेक्ष क्ष 84.[5] मी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आसपास न्यून, Oुली जर्गह 20.45,ीटर होनी ?ाविहए। इस प्रकार, टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.[1] का अनुपालन नहीं कर ी है।

113. टावर जैसी संर?नाओं क े लिलए पैरा 8.2.3.[1] का एक विवकल्प पैरा 8.2.3.2,ें उपलब् कराया र्गया है। पैरा 8.2.3.2,ें 24,ीटर क की ऊ ं ?ाई वाले ढां?े क े लिलए प्राव ान है। एक सेट बैक क े साथ, ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 6,ीटर से क, नहीं होना ?ाविहए। यविद इसकी ऊ ं ?ाई एक सेट बैक पर 24,ीटर और 37.5,ीटर क े बी? है, ो ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 9,ीटर से क, नहीं होना ?ाविहए और दो सेटबैक्स वाले 37.5,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई क े लिलए ज,ीनी स् र पर Oुला स्थान 12,ीटर से क, नहीं होना ?ाविहए। इसक े अति रिरक्त, पैरा 8.2.3.[1] क े (डी) क े ह, टॉवर जैसी संर?नाओं क े Oुले स्थानों की क,ी (पैरा 8.2.3.1,ें 10,ीटर से अति क ऊ ं ?ाई क े सभी भवनों की ुलना,ें) को ऊपरी स् रों पर सेट-बैक प्रदान करक े पूरा विकया जा सक ा है, जब क विक इन स् रों पर व्यविक्तर्ग क,रों या फ्ल ै टों से सेट-बैक क पहुं? न हो।

114. पैरा 8.2.3.[2] का पठन इंविर्ग कर ा है विक यह अपवाद क े वल भी लार्गू हो ा है जब Oुले स्थानों की क,ी को ऊपरी स् र पर सेट बैक द्वारा पूरा विकया जा सक ा है। एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.[2] विकसी भी,ा,ले,ें,स्व ः क े वल इस कारण से लार्गू नहीं हो ा विक विववाविद संर?ना क े अंदर ऊपरी स् र पर सेटबैक्स नहीं है यहां क विक पैरा 8.2.3.2,ें यह प्राव ान है विक दो सेटबैक वाली 37.5,ीटर से अति क ऊ ं ?ी टावर जैसी संर?नाओं क े लिलए Oुली जर्गह 12,ीटर से क, नहीं होनी ?ाविहए। इस प्रकार, अपवाद अपीलक ा और नोएडा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिजसने टी-1 और टी-17 क े बी? 9,ीटर की दूरी की परिरकल्पना करने वाली ीसरी संशोति योजना जारी की है, क े लिलए सहायक नहीं है। घ. 3 अवि` सुरक्षा,ानदंडों का उल्लंघन

115. अपीलक ा ने टी-16 और टी-17 क े विन,ाण क े लिलए फायर एनओसी का अनुरो विकया। 11 सिस म्बर, 2009 को सीएफओ को एक रिरपोट प्रस् ु की र्गई सिजस,ें कहा र्गया विक यह सड़क आपा कालीन स्थिस्थति,ें घटनास्थल पर पहुं?ने क े लिलए अवि`श,न विवभार्ग क े वाहनों क े लिलए पयाप्त ?ौड़ी है। थाविप, रिरपोट क े Oंड 10,ें कहा र्गया है विक एनबीसी 2005 क े भार्ग 3 और भार्ग 4 का अनुपालन भवन क े विन,ाण क े दौरान करना होर्गा और अनुपालन न होने की स्थिस्थति,ें अनापलित्त प्र,ाण पत्र रद्द कर विदया जाएर्गा। एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.1,ें इ,ार ों क े विकनारे और पीछे क े Oुले स्थानों क े लिलए न्यून, 16,ीटर का प्राव ान है जो 55,ीटर या अति क ऊ ं ?ी हैं।

116. 18 अर्गस् 2011 को, सीएफओ ने टी-16 और टी-17 क े विन,ाण क े लिलए एक अस्थायी फायर एनओसी जारी की। इस पत्र,ें यह भी कहा र्गया है विक आवेदक को एनबीसी 2005 क े अनुरूप अवि` सुरक्षा की व्यवस्था करनी होर्गी। 29,ा? 2012 को, सीएफओ ने अपीलक ा को अवि` सुरक्षा प्राव ानों,ें विवशिभन्न कवि,यों को उजार्गर कर े हुए एक नोविटस जारी विकया। 24 अप्रैल 2012 को, सीएफओ ने नोएडा को लिलOा विक टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी क े वल 9,ीटर है जो एनबीआर 2006, एनबीआर 2010 और एनबीसी 2005 का उल्लंघन कर ा है और पूछा विक क्या नोएडा ने अपीलक ा को दूरी क े विनय,,ें कोई छ ू ट प्रदान की थी। सीएफओ ने 17 जुलाई 2012 को अपीलक ा को एक कारण ब ाओ नोविटस जारी कर े हुए विनदmश विदया विक टी-16 और टी-17, जो विन,ाणा ीन हैं, उन्हें भौति क रूप से 'पुराने टावरों' से अलर्ग विकया जाए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

117. पहले प्रति वादी द्वारा सीएफओ को परिरसर (टी 1 से टी 15 क े लिलए) क े लिलए अनापलित्त प्र,ाण पत्र प्रदान करने क े लिलए विन ारिर श § का अनुपालन न करने पर एक शिशकाय की र्गई थी। शिशकाय पर र्गौर करने क े लिलए एक सवि,ति का र्गठन विकया र्गया और सवि,ति ने विनम्नलिललिO विटप्पशिणयां की: (i) दूसरी सीढ़ी क े विन,ाण क े लिलए कारण ब ाओ नोविटस जारी विकया र्गया था। सीविढ़यां अभी क नहीं बनाई र्गयी थी। (ii) लोर्ग बेस,ेंट,ें विनर्षि, क्वाटरों,ें रह रहे हैं जो एनबीसी 2005 क े प्राव ानों क े अनुसार नहीं है। (iii) सेट बैक का उपयोर्ग पार्किंकर्ग क े रूप,ें विकया जा ा है, इसलिलए क ु छ स्थानों पर प्रभावी सेट बैक,ें 2,ीटर की क,ी है। इस प्रकार यह अपेतिक्ष 9,ीटर से क, है। (iv) टॉवर क े पीछे की ओर 6,ीटर का सेट बैक उपलब् नहीं है।

118. सवि,ति द्वारा विदए र्गए इन सुझावों का छह,हीने क े भी र अनुपालन विकया जाना अपेतिक्ष था। ?ूंविक उनका अनुपालन नहीं विकया र्गया, इसलिलए कवि,यों का स,ा ान न करने क े लिलए 30,ई, 2014 को कारण ब ाओ नोविटस जारी विकया र्गया।

119. एनबीआर 2006 क े विवविनय, 76,ें कहा र्गया है विक भवन की योजना राष्ट्रीय भवन संविह ा 1970 क े भार्ग 4 क े अनुसार बनाई जानी ?ाविहए। एनबीसी 2005 क े पैरा 4.6,ें कहा र्गया है विक विकसी ऊ ं ?ी इ,ार क े सभी विकनारों पर Oुला स्थान 6,ीटर का होना ?ाविहए। हालांविक एनबीसी 2005 क े पैरा 8.2.3.1,ें 55,ीटर से अति क ऊ ं ?ी इ,ार ों क े लिलए साइड और रिरयर स्पेस न्यून, 16,ीटर की दूरी विन ारिर की र्गई है। इसलिलए, एनबीसी 2005 को पढ़ने पर, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इ,ार क े ?ारों ओर और पीछे की जर्गह 16,ीटर होनी ?ाविहए। टी-1 और टी-17 क े बी? की दूरी क े वल 9,ीटर है, जो आवश्यक 16,ीटर से क, है।

120. सीएफओ द्वारा दी र्गई अस्थायी अनापलित्त प्र,ाणपत्र,ें स्पष्ट रूप से कहा र्गया है विक एनबीसी 2005 का अनुपालन विकया जाना ?ाविहए।हालांविक, जैसा विक ऊपर विदOाया र्गया है, एनबीसी 2005 क े प्राव ानों का अनुपालन नहीं विकया र्गया है। इसलिलए, यह देO े हुए विक एनबीसी 2005 क े ह पूव ्क्त दूरी की आवश्यक ा का अनुपालन नहीं विकया र्गया है, सीएफओ द्वारा दी र्गई एनओसी रिरपोट विदनांविक 11 सिस म्बर, 2009 और पत्र विदनांविक 18 अर्गस्, 2011 क े संदभ,ें यह स्व ः विनरस् हो जाएर्गी। ङ-आरडब्ल्यूए की सह,ति

121. ऊपर अशिभविन ारिर करने क े बाद विक टी-16 और टी-17 क े विन,ाण क े लिलए,ंजूरी नोएडा द्वारा भवन विवविनय,ों द्वारा प्रदान की र्गई न्यून, दूरी की आवश्यक ा क े उल्लंघन,ें दी र्गई थी, ह, अर्गले विवर्षय पर विव?ार करेंर्गे। आरडब्ल्यूए द्वारा यह क विदया र्गया है विक,ूल पंद्रह टावरों,ें फ्ल ै ट Oरीदारों की सह,ति क े विबना,ंजूरी को संशोति नहीं विकया जा सक ा था। इस,ुद्दे का विवश्लेर्षण कर े स,य, पहले अपीलक ा की प्रारंशिभक आपलित्त पर विव?ार करना,हत्वपूण है विक उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, व,ान,ा,ले,ें लार्गू नहीं है। प्रारंशिभक आपलित्त पर विव?ार करने क े प²ा, ह, विवश्लेर्षण करेंर्गे विक क्या सह,ति वास् व,ें उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, और उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह आवश्यक थी। ङ 1 उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, की प्रयोज्य ा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

122. उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, को अपने लंबे शीर्षक,ें" "?ार या अति क फ्ल ै टों वाले भवनों,ें व्यविक्तर्ग फ्ल ै टों क े स्वावि,त्व और उपयोर्ग से संबंति,ा,लों क े लिलए एक अति विनय, क े रूप,ें वर्शिण विकया र्गया है।अति विनय, की Oंड 2,ें कहा र्गया है विक अति विनय, क े वल उन,ालिलकों पर लार्गू होर्गा जो उद्घोर्षणा विनष्पाविद करक े अति विनय, क े प्राव ानों का पालन कर े हैं। Oंड 2 इस प्रकार है: "2. अति विनय, की प्रयोज्य ा-यह अति विनय, क े वल उस संपलित्त पर लार्गू हो ा है, सिजसक े एक,ात्र स्वा,ी या सभी स्वा,ी Oंड 10,ें विनर्षिदष्ट विववरणों का उल्लेO कर े हुए उद्घोर्षणा को विवति व विनष्पाविद और पंजीक ृ करक े इस अति विनय, क े प्राव ानों क े लिलए इसे प्रस् ु कर े हैंः बश m विक कोई भी संपलित्त इस अति विनय, क े प्राव ानों क े लिलए प्रस् ु नहीं की जाएर्गी, जब क विक इसका वास् व,ें उपयोर्ग नहीं विकया जा ा है या आवासीय उद्देश्यों क े लिलए उपयोर्ग करने का प्रस् ाव नहीं विकया जा ा हैः बश m यह और विक सिजस भूवि, पर भवन अवस्थिस्थ है, उसका एक,ात्र स्वा,ी या सभी,ालिलक इस श क े साथ ऐसी भूवि, को इस अति विनय, क े प्राव ानों क े लिलए प्रस् ु कर सक े हैं विक वे इस रह की भूवि, का पट्टा फ्ल ै टों क े,ालिलकों को प्रदान करेंर्गे, पट्टे क े विनय, और श ‘ उद्घोर्षणा,ें या ो उद्घोर्षणा को विनष्पाविद विकए जाने वाले पट्टे क े लिलO की एक प्रति संल` करक े या अन्यथा प्रकट की जाएंर्गी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

123. Oंड 3 (घ)26,ें सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाओं की परिरभार्षा अं र्षिवष्ट है। Oंड 427 क े अनुसार फ्ल ै ट हस् ां रणीय और पै ृक संपलित्त होर्गी।प्रत्येक फ्ल ै ट का,ालिलक उद्घोर्षणा क े अनुसार अपने फ्ल ै ट का विवशेर्ष स्वावि,त्व और कब्जा पाने का हकदार है। इसक े अलावा, सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अपने अविवभासिज विह क े साथ एक फ्ल ै ट विवरास और हस् ां रणीय अ?ल संपलित्त होर्गी। इसक े अलावा, सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अपने अविवभासिज विह क े साथ एक फ्ल ै ट को विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विवभासिज या उप-विवभासिज नहीं विकया जाएर्गा। 26(घ) "सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाएं",ें शावि,ल हैं- (1) वह भूवि, सिजस पर भवन अवस्थिस्थ है और भूवि, और भवन से संबंति सभी सुविव ाएँ, अति कार और अनुबन् (2) इ,ार की नींव, स् ंभ, र्गडर, बी,, स,थन,,ुख्य दीवार, छ ें, हॉल, र्गलिलयारे, लॉबी, सीविढ़यां, आर्ग से ब?ाव और प्रवेश द्वार और विनकास। (3) बेस,ेंट, हOाने, याड, र्गाडन, पार्किंकर्ग क्षेत्र और भंडारण स्थान (4) संपलित्त क े प्रबं न क े लिलए विनयोसिज व्यविक्तयों क े ठहरने क े लिलए परिरसर (5) विबजली, प्रकाश, र्गैस, र्ग, और ठंडा पानी, हीविंटर्ग, रेविफ्रजरेशन, एयर क ं डीशविंनर्ग और सीवरेज जैसी सा,ान्य सेवाओं की स्थापना (6) लिलफ्ट, टैंक, पंप,,ोटर, एक्सप्रेस, पाइप और नलिलकाएं था सा,ान्य उपयोर्ग क े लिलए विवद्य,ान सभी उपकरण और संस्थापन (7) ऐसी अन्य सा,ान्य सुविव ाएं, सिजनक े लिलए घोर्षणा पत्र,ें विवशेर्ष रूप से प्राव ान विकया र्गया है (8) संपलित्त क े अन्य सभी भार्ग, जो इसक े अस्थिस् त्व, रOरOाव और सुरक्षा क े लिलए आवश्यक या सुविव ाजनक हैं या सा,ान्य उपयोर्ग,ें हैं, 274.. फ्ल ै ट हस् ां रणीय और विवरास योग्य संपलित्त होर्गी।– (1) फ्ल ै ट का प्रत्येक,ालिलक उद्घोर्षणा क े अनुसार अपने फ्ल ै ट का अनन्य स्वावि,त्व और कब्जा पाने का हकदार होर्गा। (2) Oंड 2 क े दूसरे परं ुक क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अपने अविवभासिज विह क े साथ एक फ्ल ै ट त्स,य प्रवृत्त विकसी विवति क े अथ,ें विवरास और अं रणीय स्थावर संपलित्त का र्गठन करेर्गाः बश m विक विकसी भी उद्देश्य क े लिलए विकसी भी फ्ल ै ट और ऐसे फ्ल ै ट से संबंति स,ान क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह की प्रति श ा को विवभासिज या उप-विवभासिज नहीं विकया जाएर्गा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

124. Oंड 5 विनम्नलिललिO शब्दों,ें स,ान क्षेत्रों और सुविव ाओं क े लिलए उपबं कर ी हैः "सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाएं।- (1) एक फ्ल ै ट का प्रत्येक,ालिलक उद्घोर्षणा,ें व्यक्त प्रति श,ें स,ान क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह का हकदार होर्गा। (2) घोर्षणा,ें अशिभव्यक्त सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें एक फ्ल ै ट क े प्रत्येक,ालिलक क े अविवभासिज विह क े प्रति श को इस अति विनय, द्वारा यथा अपेतिक्ष विवति व विनष्पाविद और पंजीक ृ संशोति घोर्षणा,ें अशिभव्यक्त सभी फ्ल ै टों क े,ालिलकों की सह,ति क े विबना नहीं बदला जाएर्गा। (3) सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह की प्रति श ा को उस फ्ल ै ट से अलर्ग नहीं विकया जाएर्गा सिजससे यह संबंति है और फ्ल ै ट क े साथ सूति? या भारग्रस् स,झा जाएर्गा, भले ही ऐसा विह,ाध्य, या अन्य लिलO,ें स्पष्ट रूप से उसिल्ललिO न हो। (4) स,ान क्षेत्र और सुविव ाएं अविवभक्त बनी रहेंर्गी और फ्ल ै ट क े विकसी स्वा,ी या अन्य व्यविक्त क े कहने पर उसक े विकसी विहस्से क े विवभाजन क े लिलए कोई वाद ब क नहीं ?लाया जाएर्गा जब क विक संपलित्त को इस अति विनय, क े उपबं ों से वापस न ले लिलया र्गया हो। (5) फ्ल ै ट का प्रत्येक,ालिलक सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं का उपयोर्ग उस उद्देश्य क े लिलए कर सक ा है सिजसक े लिलए वे अन्य फ्ल ै टों क े,ालिलकों क े कानूनी अति कारों,ें बा ा डाले विबना या अति K,ण विकए विबना हैं। (6) सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं क े रOरOाव,,रम्, और प्रति स्थापन से संबंति काय और उन,ें कोई परिरव न या सु ार करना इस अति विनय, और उपविवति यों क े उपबं ों क े अनुसार विकया जाएर्गा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (7) फ्ल ै ट,ालिलकों क े संघ को एसोसिसएशन की ओर से प्रबं क या प्रबं कों क े बोड द्वारा, सिजस,ें प्रबं क या प्रबं कों का बोड जैसा आवश्यक स,झे, जैसा भी,ा,ला हो, उति? स,य क े दौरान, विकसी भी सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाओं क े रOरOाव,,रम्, और प्रति स्थापन क े लिलए या सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं या अन्य फ्ल ै टों को विकसी भी नुकसान को रोकने क े लिलए,रम्, आपा कालीन रOरOाव क े लिलए प्रत्येक फ्ल ै ट क आवश्यक पहुं? का अपरिरव नीय अति कार होर्गा। (प्रभाव वर्ति ) Oंड 5 क े उप-Oंड (2) क े ह साझा क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें एक फ्ल ै ट क े प्रत्येक,ालिलक क े अविवभासिज विह क े प्रति श को संशोति घोर्षणा क े,ाध्य, से व्यक्त सभी,ालिलकों की सह,ति क े विबना नहीं बदला जाएर्गा, सिजसे अति विनय, क े ह विनष्पाविद और पंजीक ृ विकया जाएर्गा। ारा 1028 ऐसी उद्घोर्षणा का सन्दभ प्रदान कर ी है। इसक े अलावा, ारा 1129,ें प्राव ान विकया र्गया है विक 28" 10. घोर्षणा की विवर्षयवस् ु-(1) Oंड 2,ें विनर्षिदष्ट घोर्षणा को ऐसे प्ररूप,ें और ऐसे रीक े से प्रस् ु विकया जाएर्गा, जो विन ारिर विकया जाए और इस,ें विनम्नलिललिO विववरण शावि,ल होंर्गेः - (क) संपलित्त का विववरण, अथा ् उस भूवि, का विववरण सिजस पर भवन स्थिस्थ है या होना है, ?ाहे वह भूवि, फ्रीहोल्ड है या लीजहोल्ड है और ?ाहे भूवि, का कोई पट्टा Oंड 2 क े दूसरे परं ुक क े अनुसार विदया जाना है, और भवन या प्रस् ाविव भवन का विववरण सिजस,ें,ंसिजलों और हOानों की संख्या और फ्ल ै टों की संख्या ब ाई र्गई है। (O) संपलित्त,ें,ालिलक या,ालिलकों क े विह की प्रक ृ ति (र्ग) संपलित्त को प्रभाविव करने वाली,ौजूदा देनदारी, यविद कोई हो (घ) प्रत्येक फ्ल ै ट का विववरण सिजस,ें इसका स्थान, अनु,ाविन क्षेत्र, क,रों की संख्या, त्काल साझा क्षेत्र जहां इसकी पहुं? है और इसकी उति? पह?ान क े लिलए आवश्यक कोई अन्य डेटा शावि,ल है। (ङ) सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं का विववरण (?) सीवि, सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं का विववरण, यविद कोई हो, यह ब ा े हुए विक फ्ल ै टों का उपयोर्ग आरतिक्ष है (छ) संपलित्त का और प्रत्येक फ्ल ै ट का,ूल्य, और, दान सविह सभी प्रयोजनों क े लिलए प्रत्येक फ्ल ै ट और उसक े स्वा,ी से संबंति सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह का प्रति श.

29. “11 अति विनय, क े प्राव ानों का हटना -(1) फ्ल ै ट क े सभी,ालिलक इस आशय क े विनष्पाविद लिलO द्वारा इस अति विनय, क े प्राव ानों से विकसी संपलित्त को वापस ले सक े हैं। (2) इस अति विनय, क े उपबं ों से संपलित्त वापस लिलए जाने पर, यह फ्ल ै ट क े,ालिलकों द्वारा सा,ान्य रूप से स्वावि,त्व,ें स,झा जाएर्गा और संपलित्त,ें प्रत्येक ऐसे,ालिलक का विहस्सा सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें ऐसे,ालिलक क े पूव स्वावि,त्व mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सभी फ्ल ै ट,ालिलक अति विनय, क े प्राव ानों से इस आशय क े विनष्पाविंद एक उपकरण द्वारा सपलित्त को वापस ले सक े हैं, सिजसक े बाद इसे फ्ल ै टों क े,ालिलकों द्वारा साझा स्वावि,त्व,ाना जाएर्गा, सिजस,ें प्रत्येक का विहस्सा अविवभासिज विह का प्रति श होर्गा।

125. अपीलक ा की ओर से विदया र्गया क यह है विक Oंड 2 क े उपबं ों को ध्यान,ें रO े हुए उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, व,ान,ा,ले,ें कोई लार्गू नहीं है। जैसा विक ह,ने देOा है, Oंड 2,ें यह विनर्षिदष्ट विकया र्गया है विक अति विनय, क े वल ऐसी संपलित्त पर लार्गू हो ा है, सिजसक े एक,ात्र स्वा,ी या सभी,ालिलक, Oंड 10,ें विनविह विववरणों को दशा े हुए विवति व विनष्पादन और पंजीकरण करक े इसे अति विनय, क े प्राव ानों क े लिलए प्रस् ु कर े हैं।

126. विनस्संदेह, इस,ा,ले,ें Oंड 2 क े संदभ,ें कोई घोर्षणा नहीं की र्गई थी। हालांविक,,हत्वपूण रूप से, नोएडा द्वारा अपीलक ा क े पक्ष,ें 16,ा? 2005 को विनष्पाविद पट्टा विवलेO,ें विनम्नलिललिO श §,ें Oंड II (h),ें एक अनुबं शावि,ल हैः “II) और पट्टेदार ऐसी उद्घोर्षणा कर ा है और पट्टेदार क े साथ की र्गई संति यों का विववरण नी?े विदया र्गया हैः […] वाले अविवभासिज विह का प्रति श होर्गा। (3) विकसी भी फ्ल ै ट को प्रभाविव करने वाले विकसी भी विवल्लंर्ग, को संपलित्त,ें फ्ल ै ट क े,ालिलक क े अविवभासिज विह की प्रति श ा क े लिलए,ौजूदा प्राथवि,क ा क े अनुसार हस् ां रिर विकया र्गया,ाना जाएर्गा, जैसा विक इस,ें प्रदान विकया र्गया है। (4) उप ारा (1),ें उपबंति वापसी विकसी भी रह से इस अति विनय, क े प्राव ानों क े लिलए संपलित्त क े बाद क े पुनः स,पण पर रोक नहीं लर्गाएर्गी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ज) पट्टेदार/उप-पट्टेदार ऐसी व्यवस्था करेर्गा जो भवन और सा,ान्य सेवाओं क े रOरOाव क े लिलए आवश्यक है और यविद भवन का उति? रOरOाव नहीं विकया जा ा है ो,ुख्य कायकारी अति कारी, नोएडा या उनक े द्वारा अति क ृ विकसी अति कारी को प्राति करण क े,ाध्य, से रOरOाव कराने और पट्टेदार/उप-पट्टेदार से इस प्रकार O? की र्गई राशिश की वसूली करने का अति कार होर्गा। पट्टेदार/उप-पट्टेदार व्यविक्तर्ग रूप से और अलर्ग-अलर्ग रOरOाव की राशिश भुर्ग ान क े लिलए उत्तरदायी होंर्गे। उत्तर प्रदेश फ्ल ै ट स्वावि,त्व अति विनय,, 1975 का विनय,/विवविनय,न पट्टेदार/उप-पट्टेदार पर लार्गू होर्गा। (प्रभाव वर्ति )

127. नोएडा की ओर से उपस्थिस्थ विवद्व अति वक्ता श्री रविवन्द्र क ु,ार ने यह प्रति वेदन विदया विक Oंड 2 (ज) क े अंति, वाक्य को संपूण Oंड क े साथ पढ़ा जाना ?ाविहए, जो भवन और सा,ान्य सेवाओं क े रOरOाव से संबंति है। Oंड II (ए?),ें कहा र्गया है विक यविद भवन या सा,ान्य सेवाओं का उति? रOरOाव नहीं विकया जा ा है, ो नोएडा रOरOाव सुविनति² करने और पट्टेदार/उप- पट्टेदार से राशिश की वसूली करने का हकदार होर्गा।

128. थाविप, Oंड II (ज) की प्रयोज्य ा को इस आ ार पर नकारा नहीं जा सक ा है, विवशेर्ष रूप से क्योंविक पट्टेदार/उप-पट्टेदार पर उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, क े लार्गू होने को अति रोविप करने वाले दंडादेश का कु छ अथ और अं वस् ु अवश्य होनी ?ाविहए। इस संदभ,ें, आरडब्ल्यूए की ओर से उपस्थिस्थ वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जयं भूर्षण ने अपनी प्रस् ुति यों क े दौरान नोएडा द्वारा वित्रपक्षीय आ ार पर विनष्पाविद पंजीक ृ उप-पट्टे की एक प्रति रिरकॉड पर रOी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है, सिजस,ें अपीलक ा को पट्टेदार और फ्ल ै ट Oरीदार को उप-पट्टेदार क े रूप,ें रOा र्गया है। उप-पट्टे क े इस विवलेO क े क ु छ,हत्वपूण प्राव ान इस प्रकार हैंः

(i) Oंड 16,ें विव?ार विकया र्गया है विक भू ल पर रहने वाला व्यविक्त बैठक क्षेत्र का उपयोर्ग करने का हकदार होर्गा, लेविकन उपयोर्गक ा का अति कार उत्तर प्रदेश स्वावि,त्व फ्ल ै ट अति विनय, 1975 क े प्राव ानों क े अ ीन होर्गा

(ii) Oंड 17 उसी अति विनय, क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, ऊपर की,ंसिजल पर विनवास करने वाले व्यविक्त क े अति कार को,ान्य ा दे ा है और

(iii) Oंड 27,ें यह परिरकल्पना की र्गई है विक नोएडा द्वारा अपीलक ा क े पक्ष,ें 16,ा?, 2005 को विनष्पाविद पट्टे क े सभी Oंड उप-पट्टे विवलेO पर भी लार्गू होंर्गे.

129. इस प्राव ान की पृष्ठभूवि,,ें, विवशेर्ष रूप से, 16,ा? 2005 को नोएडा द्वारा अपीलक ा क े पक्ष,ें विनष्पाविद पट्टा विवलेO क े Oंड II (ए?), अपीलक ा उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, क े प्राव ानों का अनुपालन करने क े लिलए बाध्य था। इस न्यायालय क े स,क्ष यह कहकर विक वह Oंड 2 क े ह एक घोर्षणा क े अभाव,ें अपने स,झौ े या अति विनय, की श § से बाध्य नहीं है, अपीलक ा स्पष्ट रूप से अपनी र्गल ी का लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है। ङ. 2 उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 की प्रयोज्य ा

130. वर्ष 2010,ें, राज्य विव ान,ंडल ने उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 अति विनयवि, विकया। लंबे शीर्षक,ें इस विव ायन का वणन इस प्रकार विकया र्गया हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “अपाट,ेंट से संबंति सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह क े भवन,ें एक व्यविक्तर्ग अपाट,ेंट क े स्वावि,त्व का प्राव ान करने और इस रह क े अपाट,ेंट और विह को विवरास,ें प्राप्त करने योग्य और हस् ां रणीय बनाने क े लिलए और उससे संबंति,ा,लों या अनुर्षंविर्गक विवर्षयों क े लिलए अति विनय,।”

131. अति विनय, का Oंड 2 विनम्नलिललिO शब्दों,ें हैः "2. प्रयोज्य ा-इस अति विनय, क े प्राव ान उन सभी भवनों पर लार्गू होंर्गे, सिजन,ें विकसी विनर्षि, या अपाट,ेंट,ें परिरवर्ति भवन,ें ?ार या अति क अपाट,ेंट हैं और अपाट,ेंट से जुड़ी भूवि,, जहां फ्रीहोल्ड है या शॉविंपर्ग,ॉल और,ल्टीप्लेक्स को छोड़कर पट्टे पर है।" इस प्रकार, उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 1975 की Oंड 2 क े विवपरी, उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 क े संबंति प्राव ान,ें कहा र्गया है विक यह अति विनय, विकसी भी इ,ार,ें ?ार या अति क अपाट,ेंट वाले सभी भवनों और अपाट,ेंट से जुड़ी भूवि, पर लार्गू होर्गा ?ाहे वह फ्रीहोल्ड, रOा र्गया या पट्टे पर लिलया हो। इसक े अलावा, उत्तर प्रदेश 1975 की Oंड 2 क े विवपरी, सिजसक े ह अति विनय, को क े वल भी लार्गू विकया जाना था जब Oंड 10 क े संदभ,ें एक उद्घोर्षणा प्रस् ु की र्गई थी, इस अति विनय, को लार्गू करने क े लिलए विकसी उद्घोर्षणा की आवश्यक ा नहीं है।

132. 'अपाट,ेंट,ालिलक' पद को अति विनय, की Oंड 3 (घ) द्वारा विनम्नानुसार परिरभाविर्ष विकया र्गया हैः "(घ) "अपाट,ेंट,ालिलक" "से र्गैर विबक े अपाट,ेंट क े,ा,ले,ें अपाट,ेंट क े,ालिलक या प्र,ोटर या उसक े नावि, व्यविक्त और अपाट,ेंट क े विवलेO,ें विनर्षिदष्ट प्रति श,ें ऐसे अपाट,ेंट से संबंति सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA,ें अविवभासिज विह और भूवि, का पट्टेदार शावि,ल है सिजस पर अपाट,ेंट का विन,ाण विकया र्गया है, जहां ऐसी भूवि, का पट्टा ीस वर्ष या उससे अति क की अवति क े लिलए है।"

133. अति विनय, की ारा 3 (i),ें सा,ान्य क्षेत्रों और Oंड 3 (s),ें सीवि, सा,ान्य क्षेत्रों की परिरभार्षा शावि,ल हैः (i) '' सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाओं '' से अशिभप्रे है - (i) वह भूवि, सिजस पर भवन अवस्थिस्थ है और भूवि, और भवन से संबंति सभी सुविव ाएँ, अति कार और अनुबन् (ii) इ,ार की नींव, स् ंभ, र्गडर, बी,, स,थन,,ुख्य दीवारें, छ ें, हॉल, र्गलिलयारे, लॉबी, सीविढ़यां, आर्ग से ब?ाव और प्रवेश द्वार और विनकास। (iii) हOानों, याड§, पाक§, बर्गी?ों, सा,ुदातियक क ें द्रों और आ, उपयोर्ग क े पार्किंकर्ग क्षेत्र। (iv) संपलित्त क े प्रबं न क े लिलए विनयोसिज व्यविक्तयों या ?ौकीदारों क े ठहरने क े लिलए परिरसर (v) क ें द्रीय सेवाओं जैसे विबजली, प्रकाश, र्गैस, र्ग, और ठंडा पानी, हीविंटर्ग, रेविफ्रजरेशन, एयर क ं डीशविंनर्ग और सीवरेज की स्थापना (vi) लिलफ्ट, टैंक, पंप,,ोटर, पंOे, क े बल पाइप लाइन (टीवी, र्गैस, विबजली आविद) वर्षा जल सं?यन प्रणाली, क ं प्रेसर, नलिलकाएं और सा,ान्य उपयोर्ग क े लिलए विवद्य,ान सभी उपकरण और संस्थापन (vii) ऐसी अन्य सा,ुदातियक और वाशिणस्थिज्यक सुविव ाएं, जो उप-विनय,ों,ें विवविनर्षिदष्ट की जाएं और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (viii) संपलित्त क े अन्य सभी विहस्से जो इसक े अस्थिस् त्व, रOरOाव और सुरक्षा क े लिलए आवश्यक या सुविव ाजनक हैं या सा,ान्य उपयोर्ग,ें हैं […] (एस) “सीवि, सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाओं” से वे सा,ान्य क्षेत्र और सुविव ाएं अशिभप्रे हैं जो विकसी अपाट,ेंट क े उपयोर्ग क े लिलए आरतिक्ष विकसी अपाट,ेंट क े आवंटन, विबKी या अन्य हस् ां रण से पहले प्र,ोटर द्वारा लिललिO रूप,ें विनर्षिदष्ट विकए जा े हैं।”

134. सा,ान्य देय ाएं जो विकसी अपाट,ेंट को बे?ने क े इरादे से प्रव कों पर डाली र्गई हैं, वे Oंड 4 (1),ें दी र्गई हैं, जो इस प्रकार हैः "4. प्र,ोटर की सा,ान्य देनदारिरयां-(1) कोई प्र,ोटर जो विकसी अपाट,ेंट को बे?ने का इरादा रO ा है, ो इच्छ ु क K े ा और सक्ष, प्राति कारी को विनम्नलिललिO का लिललिO रूप,ें पूण और सही प्रकटन करेर्गाः (क) भूवि, और भवन सिजस,ें अपाट,ेंट बनाए र्गए हैं या बनाए जाने का प्रस् ाव विकया र्गया है, क े अति कार और उसका स्वत्व, (O) ऐसी भूवि, या भवन,ें या उस पर विकसी व्यविक्त क े विकसी अति कार, हक, विह या दावे पर सभी प्रकार का विवल्लंर्ग,, यविद कोई हो, (र्ग) स्थानीय प्राति कारी द्वारा अनु,ोविद या अनु,ोदन क े लिलए प्रस् ु की र्गई संपूण इ,ार की योजना और विवविनदmश, सिजसका ऐसा अपाट,ेंट एक विहस्सा है, (घ) अनु,ोविद ले-आउट योजना या भवन विन,ाण योजना क े अनुसार सभी सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं का विववरण, (घ) विनर्षि, क्षेत्र और विकसी अपाट,ेंट का सा,ान्य क्षेत्र, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ङ) विफक्स्?र, विफविंटग्स और सुविव ाओं की प्रक ृ ति, जो दी र्गई हैं या प्रदान विकए जाने क े लिलए प्रस् ाविव हैं (?) संघ क े पास उपलब् कराई जाने वाली विबजली, सीवेज, जल विनकासी और जल आपूर्ति प्रणाली आविद की बाहरी और आं रिरक सेवाओं की योजना, सभी संर?नात्,क, वास् ुशिशल्प रेOाति?त्रों, ले-आउट योजनाओं, अवि`श,न विवभार्ग से अनापलित्त प्र,ाण पत्रों क े विववरण क े साथ, भवन क े विन,ाण,ें उपयोर्ग विकए र्गए या प्रस् ाविव सा,ग्री क े काय§ क े तिडजाइन और विवविनदmशों और,ानकों का विववरण (छ) भूवि, का विकराया, नर्गरपालिलका या अन्य स्थानीय कर, जल और विवद्यु प्रभार, राजस्व विन ारण, रO-रOाव और अन्य प्रभार, ऐसी भूवि,, भवन और अपाट,ेंट क े संबं,ें विकसी बं क या अन्य भार, यविद कोई हो, पर ब्याज सविह सभी व्यय (ज) ऐसी अन्य जानकारी और दस् ावेज, जो विवविह विकए जाएं.” Oंड 4 की उप-Oंड (4),ें विनम्नलिललिO श ‘ हैंः "(4) इस Oंड,ें विनर्षिदष्ट योजनाओं, विवविनदmशों और अन्य विववरणों क े बाद, जैसा विक विन ारिर,ंजूरी प्राति कारी द्वारा स्वीक ृ विकया र्गया है, इच्छ ु क K े ा को प्रकट विकया जा ा है और विबKी का एक लिललिO स,झौ ा विकया जा ा है और संबंति पंजीकरण प्राति कारिरयों क े कायालय क े साथ पंजीक ृ विकया जा ा है। प्र,ोटर ऐसे छोटे-छोटे बदलाव या बदलाव कर सक ा है, जो,ालिलक या,ालिलकों द्वारा अपेतिक्ष हों, या ऐसे छोटे बदलाव या बदलाव कर सक ा है, जो वास् ुकला और संर?नात्,क कारणों क े कारण आवश्यक हों, सिजनकी विवति व सिसफारिरश और सत्यापन अति क ृ वास् ुकार या इंजीविनयर द्वारा उति? घोर्षणा और,ालिलक को सूति? करने क े बाद विकया जाए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बश m विक प्र,ोटर इच्छ ु क Oरीदार, परिरयोजना वास् ुकार, परिरयोजना इंजीविनयर की पूव सह,ति क े विबना और विन ारिर,ंजूरी प्राति कारी से आवश्यक अनु,ति प्राप्त विकए विबना योजनाओं, विवविनदmशों और अन्य विववरणों,ें कोई परिरव न नहीं करेर्गा और विकसी भी स्थिस्थति,ें वह ऐसा परिरव न नहीं करेर्गा जो भवन उप-विनय,ों,ें अनुज्ञेय नहीं है।” Oंड 4 की उप-Oंड (1) क े Oंड (सी) क े ह, एक प्र,ोटर जो एक अपाट,ेंट बे?ना ?ाह ा है, उसे एक इच्छ ु क Oरीदार और सक्ष, प्राति कारी को उस भवन की योजना और विवविनदmशों क े क े बारे,ें पूरा Oुलासा करना होर्गा, सिजसे,ंजूरी क े लिलए स्थानीय प्राति कारी को प्रस् ु विकया र्गया हो, सिजसका अपाट,ेंट एक विहस्सा है। इसी रह, Oंड (डी) क े ह, अनु,ोविद ले-आउट योजना या भवन योजना क े अनुसार साझा क्षेत्रों और सुविव ाओं क े संबं,ें एक प्रकटीकरण करना होर्गा। एक बार इस रह का Oुलासा होने क े बाद उप- ारा (4),ें कहा र्गया है विक विबKी क े लिलए लिललिO स,झौ े क े विनष्पादन क े बाद प्रव क अति क ृ वास् ुकारों या इंजीविनयरों द्वारा विवति व अति क ृ और सत्याविप स्थापत्य और संर?नात्,क कारणों से आवश्यक या आवश्यक छोटे-छोटे बदलाव कर सक ा है। उप- ारा (4) द्वारा अनुध्या इन,ा,ूली परिरव न या परिरव नों क े अलावा, परं ुक,ें यह श है विक प्रव क इच्छ ु क K े ा की पूव सह,ति क े विबना योजनाओं, विवविनदmशों और अन्य विववरणों,ें कोई परिरव न नहीं करेर्गा। श्री विवकास सिंसह का यह कहना विक यह प्राव ान एपेक्स और सिसयान क े इच्छ ु क Oरीदारों पर लार्गू होर्गा, न विक उन व्यविक्तयों पर सिजन्होंने,ौजूदा पंद्रह टावरों,ें अपाट,ेंट Oरीदे थे, स्वीकार नहीं विकया जा सक ा।उपयुक्त परं ुक स्पष्ट रूप से उन व्यविक्तयों की रक्षा करने क े लिलए है, सिजनक े लिलए योजनाएं और विवविनदmश उस स,य प्रकट विकए र्गए थे, जब वे 'इच्छ ु क K े ा' थे। इसक े अलावा, इसक े विवपरी कोई विन,ाण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति विनय, क े आशय और उद्देश्य क े साथ-साथ इसक े स्पष्ट प्राव ानों क े लिOलाफ होर्गा। 135 अति विनय, की Oंड 5 विनम्नलिललिO शब्दों,ें अपाट,ेंट,ालिलकों क े अति कारों का प्राव ान कर ी है, जहां क यह प्रासंविर्गक हैः "5. अपाट,ेंट,ालिलकों क े अति कार-(1) प्रत्येक व्यविक्त सिजसको यविद कोई अपाट,ेंट बे?ा जा ा है या प्र,ोटर द्वारा अन्यथा हस् ां रिर विकया जा ा है, ो उसक े पास अति विनय, क े प्राव ानों क े अ ीन, इस प्रकार बे?े र्गए या हस् ां रिर विकए र्गए अपाट,ेंट का अनन्य स्वावि,त्व और कब्जा होर्गा। (2) प्रत्येक व्यविक्त जो विकसी अपाट,ेंट क े अनन्य स्वावि,त्व और कब्जे का हकदार बन जा ा है, वह अपाट,ेंट क े विवलेO,ें विवविनर्षिदष्ट सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह क े ऐसे प्रति श का हकदार होर्गा और ऐसा प्रति श इ,ार क े सभी अपाट,ेंट क े क ु ल क्षेत्र क े संबं,ें अपाट,ेंट क े क्षेत्र को आ ार क े रूप,ें ले े हुए संर्गशिण विकया जाएर्गा। (3) (क) सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें प्रत्येक अपाट,ेंट,ालिलक क े अविवभासिज विह का प्रति श स्थायी ?रिरत्र का होर्गा और सभी अपाट,ेंट,ालिलकों की लिललिO सह,ति और सक्ष, प्राति कारी क े अनु,ोदन क े विबना इस,ें परिरव न नहीं विकया जाएर्गा। (O) सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें अविवभासिज विह की प्रति श ा को उस अपाट,ेंट से अलर्ग नहीं विकया जाएर्गा सिजससे वह संबंति है और अपाट,ेंट से सूति? या भारग्रस् स,झा जाएर्गा, भले ही ऐसा विह सा न या अन्य लिलO,ें स्पष्ट रूप से उसिल्ललिO न हो।”

136. इस स् र पर यह स्पष्ट करना,हत्वपूण है विक उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 विपछली ारीO से दूसरी संशोति योजना पर लार्गू नहीं होर्गा, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिजसे 26 नवंबर, 2009 को,ंजूरी दी र्गई थी। थाविप, यह कानून 19,ा?, 2010 को उत्तर प्रदेश राजपत्र,ें प्रकाशिश होने क े बाद 2,ा?, 2012 को स्वीक ृ ीसरी संशोति योजना क े लिलए प्रभावी होर्गा, जैसा विक नी?े विवश्लेर्षण विकया र्गया है। ङ 3 आरडब्ल्यूए की सह,ति की आवश्यक ा

137. 2,ा? 2012 को,ंजूर की र्गई ीसरी संशोति योजना क े संदभ,ें, टी-16 और टी-17 की ऊ ं ?ाई को ?ौबीस से बढ़ाकर ?ालीस (या उन ालीस, जैसा भी,ा,ला हो) ल करने की,ांर्ग की र्गई थी। इसक े परिरणा,स्वरूप, फ्ल ै ट Oरीददारों की क ु ल संख्या 650 से बढ़कर 1500 हो जाएर्गी। इसका स्पष्ट विनविह ाथ यह होर्गा विक सा,ान्य क्षेत्रों,ें,ौजूदा Oरीदारों क े अविवभासिज विह ों,ें क,ी आएर्गी। वास् व,ें, पहले प्रति वादी की ओर से यह भी कहा र्गया है विक नोएडा को भुर्ग ान विकया र्गया अति रिरक्त पट्टा विकराया भी,ौजूदा फ्ल ै ट Oरीदारों से 190 रुपये प्रति वर्ग,ी की दर से वसूल करने की,ांर्ग की र्गई थी। इस आशय का एक बयान पहले प्रति वादी की ओर से उच्च न्यायालय क े स,क्ष दायर एक शपथ पत्र,ें भी विनविह था।अपीलक ा द्वारा अति रिरक्त एफएआर की Oरीद का उपयोर्ग,ौजूदा Oरीदारों क े अति कारों को क ु ?लने क े लिलए नहीं विकया जा सक ा है।

138. फ्ल ै ट इस आश्वासन पर बे?े र्गए थे विक टी-1 से लर्गा एक बर्गी?ा क्षेत्र होर्गा। टी-1 से सटे बर्गी?े को 29 विदसंबर 2006 की पहली संशोति योजना,ें स्पष्ट रूप से दशाया र्गया है। 26 नवंबर, 2009 को जब दूसरी संशोति योजना को,ंजूरी दी र्गई थी, ब इस उद्यान क्षेत्र पर अति K,ण विकया र्गया था। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

139. हालांविक, अपीलक ा क े अनुसार, टी-16 और टी-17 ए,राल्ड कोट क े ?रण-2 का विहस्सा हैं, सिजसने ?रण-1 क े सा,ान्य क्षेत्रों क े विकसी भी विहस्से पर अति K,ण नहीं विकया था, सिजसक े ह अन्य सभी टावर विर्गर र्गए थे। इस संदभ,ें, अपीलक ा क े विनदेशक द्वारा, नोएडा क े सकल अति कारी, शहर 3 वीं, र्गौ, बुद्ध नर्गर को संबोति 13 फरवरी, 2012, विदनांविक एक पत्र को नोट करना आवश्यक होर्गा, सिजस,ें यह कहा र्गया हैः “क ृ पया अपने विदनांक 10.02.2012 क े पत्र को देOें, जो ह,ें 11.02.2012 को प्राप्त हुआ था, सिजसक े संबं,ें,ैसस सुपरटेक लिलवि,टेड की ओर से लिललिO बयान विनम्नानुसार प्रस् ु विकया र्गया हैः

1. यह, [ए] पेक्स और [सिसयान] बहु,ंसिजला आवासीय टॉवर का विन,ाण लर्गभर्ग 6500 वर्ग,ीटर क े भूOंड पर विकया जा रहा है। जो,ैसस सुपरटेक लिलवि,टेड द्वारा नोएडा विवकास प्राति करण से वर्ष 2006,ें Oरीदा र्गया था सिजसक े संबं,ें र्गौ,बुद्ध नर्गर क े उप रसिजस्ट्रार कायालय,ें इसकी पूरक लीज डीड को पंजीक ृ विकया था।

2. शुरुआ से ही अलर्ग परिरसर अथा ् एपेक्स और [सिसयान] क े विन,ाण क े लिलए योजना थी और दोनों टावरों,ें स्थिस्वविं,र्ग पूल, कार, क्लब, पार्किंकर्ग और सिज, आविद क े लिलए अलर्ग-अलर्ग प्राव ान विकए र्गए हैं। […] क ं पनी ने बेस,ेंट क े विवस् ार क े लिलए दीवार Oड़ी की है और ऊपर की दीवार क ं पनी द्वारा अपनी ज,ीन पर Oड़ी की र्गई थी और यह बेस,ेंट क्षेत्र पुराने टॉवर क े विकसी भी विनवासी को नहीं बे?ा र्गया था, सिजस पर क ं पनी का पूण स्वावि,त्व है। इस दीवार क े विन,ाण,ें विकसी भी विनवासी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े विह ों पर कोई प्रति क ू ल प्रभाव नहीं पड़ ा है, बस्थिल्क इसक े द्वारा पुराने टॉवर क े विनवासिसयों को आवंविट बेस,ेंट क्षेत्र से हटा विदया र्गया है।क ं पनी को अपनी ज,ीन पर विन,ाण करने का पूरा अति कार है।

5. क ं पनी द्वारा पहले विकया र्गया या विकया जा रहा विन,ाण पूरी रह से कानूनी है और विनय,ों और क ं पनी क े अनुसार विकसी क े विह को प्रभाविव नहीं विकया र्गया है और क ं पनी द्वारा विकसी क े साथ कोई ोOा ड़ी नहीं की र्गई है। इसलिलए, ऐसा प्र ी हो ा है विक शिशकाय क ा ने दुभावना से प्रेरिर होकर यह झूठी शिशकाय प्रस् ु की है और वह क ं पनी को देय राशिश का भुर्ग ान नहीं करक े अनुति? लाभ क,ाना ?ाह ा है।इसलिलए, यह अनुरो विकया जा ा है विक शिशकाय क ा द्वारा प्रस् ु की र्गई शिशकाय को Oारिरज विकया जाए। इसक े अलावा, यह भी अनुरो विकया जा ा है विक विकसी भी पत्रा?ार या पूछ ाछ,ें विकसी भी व्यविक्तर्ग ना, का उपयोर्ग न विकया जाए, बस्थिल्क इसक े विनदेशक क े,ाध्य, से क ं पनी क े ना, का उपयोर्ग विकया जाए।” (प्रभाव वर्ति ) उपयुक्त पत्र,ें इस,ा,ले को सा,ने रOा र्गया है विक टी -16 और टी-17 का विन,ाण उस क्षेत्र,ें एक अलर्ग परिरयोजना क े रूप,ें विकया र्गया है जो पूरक पट्टा विवलेO क े ह प्राप्त विकया र्गया था, और इस,ें सभी सुविव ाओं और बुविनयादी ढां?े क े लिलए अलर्ग प्राव ान हैं। वास् व,ें, यह इंविर्ग कर ा है विक पुराने Oरीदारों की सुविव ाओं को ब्रोशर,ें विदOाया र्गया था, लेविकन उस प्रस् ुति को 'र्गल ी' क े रूप,ें 'स्पष्ट' विकया र्गया था, सिजसे संशोति विकया र्गया था। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

140. इस प्रकार, पूरक पट्टा विवलेO का उल्लेO करना,हत्वपूण हो जा ा है, जो 21 जून 2006 को अपीलक ा क े पक्ष,ें विदया र्गया था। पूरक लीज डीड से यह स्पष्ट हो जा ा है विक डी,ाइज्ड परिरसर 6556.51 वर्ग,ीटर,ें फ ै ला हुआ है। यह,ूल रूप से आवंविट भूOंड का विहस्सा होर्गा। उच्च न्यायालय क े स,क्ष अपने शपथ पत्र क े दौरान, अपीलक ा ने प्रति वाद विकया विकः “7. याति?काक ा सोसाइटी क े पदाति कारिरयों/सदस्यों का अति कार है विक वे क े वल ए,राल्ड कोट (?रण-1) क े सा,ान्य क्षेत्रों,ें अपने फ्ल ै ट और अविवभासिज विह,ें अति कार रO े हैं। अर्गर कोई अपने फ्ल ै ट या कॉ,न एरिरया,ें अति K,ण करने की कोशिशश कर रहा है, ो उसे ?ुनौ ी देने का अति कार है। हालांविक, यहां ऐसा नहीं है। यह कहा र्गया है विक दो टावरों वाले एपेक्स एंड सिसयान (?रण-2) ने ए,राल्ड कोट (?रण-1) क े साझा क्षेत्र का अति K,ण नहीं विकया है। इसलिलए याति?काक ा सोसायटी क े पास एपेक्स एंड सिसयान (?रण-II) से संबंति,ुद्दों को ?ुनौ ी देने का अति कार नहीं है।” दूसरे शब्दों,ें, सिजस,ा,ले को स्थाविप करने की,ांर्ग की र्गई थी, वह यह था विक फ्ल ै ट Oरीदारों का ए,राल्ड कोट क े ?रण-1 क े सा,ान्य क्षेत्रों,ें एक अविवभासिज विह था, लेविकन ?ूंविक टी-16 और टी-17 ?रण-2 का विहस्सा थे, इसलिलए यह टी-1 से टी-15 क े,ूल फ्ल ै ट Oरीदारों क े अति कारों को प्रभाविव नहीं कर ा था। यह विववाद स्पष्ट रूप से पूरक पट्टा विवलेO को शासिस करने वाली स्पष्ट श § क े विवपरी है, जो इंविर्ग कर ा है विक क्षेत्र परिरसर,ूल भूOंड का विहस्सा होर्गा। इसक े अलावा, अपीलक ा द्वारा पूरे प्लॉट क े एफएआर का उपयोर्ग करने क े बाद, सिजस,ें वह क्षेत्र भी शावि,ल है जो,ूल पट्टे और पूरक पट्टे का विवर्षय है, उसे इसक े विवपरी दावा करने की अनु,ति नहीं दी जा सक ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

141. इसलिलए, यह पयाप्त रूप से स्पष्ट है विक दूसरी संशोति योजना और ीसरी संशोति योजना क े अनुसार टी-16 और टी-17 क े विन,ाण ने सा,ान्य क्षेत्रों और सुविव ाओं,ें प्रत्येक व्यविक्तर्ग फ्ल ै ट,ालिलक द्वारा ारिर अविवभासिज विह क े,ूल्य को क, कर विदया, सिजससे उत्तर प्रदेश 1975 अति विनय, की Oंड 5 और उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 की Oंड 5 का उल्लंघन हो ा है, क्योंविक फ्ल ै ट,ालिलक की सह,ति नहीं,ांर्गी र्गई थी। इसक े अलावा, ीसरी संशोति योजना टी-1 क े सा,ने बर्गी?े क े क्षेत्र पर अति K,ण कर ी है, सिजससे उस स,य फ्ल ै ट,ालिलकों को विदए र्गए आश्वासन से उनकी सह,ति क े विबना ब?ा जा सक ा है जब उन्होंने टी-1,ें फ्ल ै ट Oरीदे थे। इसलिलए यह उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े Oंड 4 (1) सपविठ Oंड 4 (4) क े प्राव ान का उल्लंघन है।

142. अं,ें, अपीलक ा ने यह क देने की भी कोशिशश की है विकः (i)प्रत्येक व्यविक्तर्ग फ्ल ै ट,ालिलक से सह,ति नहीं ली जा सक ी क्योंविक सह,ति आरडब्ल्यूए से ली जानी थी। (ii)आरडब्ल्यूए 20 अक्टूबर 2013 को अस्थिस् त्व,ें आया, जब इसने यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह,ॉडल बाय-लॉज को अपनाया (iii) विक यह ीसरी संशोति योजना को,ंजूरी वि,लने क े बाद था और (iv) इसलिलए, सह,ति लेने क े लिलए कोई एसोसिसएशन नहीं था। उच्च न्यायालय ने आक्षेविप विनणय,ें इस क पर विव?ार कर े हुए कहाः “ प्रत्यथd/क ं पनी क े कथनों क े अनुसार, अपाट,ेंट,ालिलकों को सिस म्बर, 2009 क फ्ल ै ट सौंप विदए र्गए थे।,ालिलकों ने ुरं रेसिजडेंट वेलफ े यर एसोसिसएशन (आरडब्ल्यूए) का र्गठन विकया और उसी वर्ष इसे रसिजस्ट्रार सोसायटी,ें पंजीक ृ कराया।,ॉडल उप-कानूनों को अपनाने का सवाल ही नहीं उठ ा था, क्योंविक यह 2011 क लार्गू नहीं था। उप mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रसिजस्ट्रार फ,, सोसायटी और ति?ट्स,,ेरठ ने विदनांक 14.12.2012 क े पत्र क े,ाध्य, से अति सूति? विकया विक रसिजस्ट्रार फ, सोसायटी और ति?ट्स उत्तर प्रदेश से प्राप्त विनदmशों क े लंविब होने क े कारण,ॉडल उप- विनय,ों और उनक े पंजीकरण क े संबं,ें कोई विनणय नहीं लिलया जा सक ा है। रसिजस्ट्रार फ,, सोसायटी और ति?ट्स उत्तर प्रदेश ने विदनांक 5.2.2013 क े परिरपत्र क े,ाध्य, से सभी उप रसिजस्ट्रारों /सिजला रसिजस्ट्रारों को अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 क े ह पंजीकरण क े लिलए विनदmश जारी विकए और विनदmश विदया विक,ौजूदा आरडब्ल्यूए क े उप- विनय,ों,ें दनुसार संशो न विकया जा ।याति?काक ा /सोसायटी ने विदनांक 20.10.2013 क े प्रस् ाव द्वारा,ॉडल उपविवति यों को अपनाया और ?ुनाव कराए था उसक े बाद उप रसिजस्ट्रार को सूति? विकया। प्रत्यथd/क ं पनी ने शुरुआ से ही याति?यों की सोसायटी को अपाट,ेंट,ालिलकों क े आरडब्ल्यूए क े रूप,ें,ान्य ा दी है और लर्गा ार याति?काक ा सोसायटी क े साथ आरडब्ल्यूए क े रूप,ें पत्रा?ार विकया है। शिशकाय ों क े स,ा ान क े लिलए याति?काक ा सोसाइटी को संबोति 9.10.2012, 27.9.2012, 4.9.2012 और जनवरी, 2013 विदनांविक पत्र रिरकॉड पर है।” अ ः यह स्पष्ट है विकः(i) आरडब्ल्यूए 2009,ें अस्थिस् त्व,ें आया था, जब अपाट,ेंट,ालिलकों का पहला स,ूह स्थानां रिर हुआ था (ii) अपीलक ा आरडब्ल्यूए क े साथ ब से संवाद कर रहा था, (iii) आरडब्ल्यूए ने उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय,, 2010 क े ह,ॉडल उपविवति यों को उसी स,य अपनाया, जैसे ही संभव हुआ। अपीलक ा द्वारा,ौलिOक प्रस् ुति यों क े दौरान इन प्रकथनों को इस न्यायालय क े स,क्ष ?ुनौ ी नहीं दी र्गई है, और इसलिलए, इसे अपने स्वयं क े आ?रण से बाध्य,ाना जाएर्गा। विकसी भी,ा,ले,ें, उत्तर प्रदेश 1975 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति विनय, और उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े ह अति कार व्यविक्तर्ग फ्ल ै ट,ालिलकों को प्रदान विकए र्गए हैं, न विक आरडब्ल्यूए जैसे सा,ूविहक विनकायों को। थाविप, वास् व,ें, जब ऐसे आरडब्ल्यूए,ौजूद हैं, डेवलपर सभी फ्ल ै ट,ालिलकों से संपक करने क े बजाय उनका उपयोर्ग आ, सह,ति प्राप्त करने क े लिलए कर सक े हैं। ?. वि,लीभर्ग और अवै विन,ाण

143. इस,ा,ले का रिरकॉड ऐसे उदाहरणों से भरा हुआ है जो अपीलक ा और उसक े प्रबं न क े साथ नोएडा क े अति कारिरयों क े बी? वि,लीभर्ग को उजार्गर कर े हैं। इस,ा,ले ने कानून क े प्राव ानों क े डेवलपर द्वारा उल्लंघन,ें योजना प्राति करण की घृशिण वि,लीभर्ग का Oुलासा विकया है।नोएडा की संलिलप्त ा, अन्य बा ों क े साथ-साथ, विनम्नलिललिO उदाहरणों से सा,ने आई हैः (i) एनबीआर 2006 की श § का स्पष्ट उल्लंघन कर े हुए 26 नवंबर, 2009 को दूसरी संशोति योजना को,ंजूरी (ii) सभी स्वीक ृ योजनाओं,ें लर्गा ार एक स्पष्ट अनुबं क े बावजूद विक योजना को अपीलाथd क े विन,ाण स्थल पर प्रदर्शिश करना होर्गा, नोएडा द्वारा प्रथ, प्रति वादी को भवन योजनाओं का Oुलासा करने से इनकार करना। (iii) नोएडा द्वारा स्वीक ृ योजनाओं क आरडब्ल्यूए की पहुं? क े अनुरो को अपीलक ा को संदर्शिभ करना और उसक े इनकार करने पर, आरडब्ल्यूए क े स,क्ष उनका Oुलासा करने,ें लर्गा ार असफल ा। (iv) यहां क विक जब सीएफओ ने ए,राल्ड कोट,ें न्यून, दूरी की आवश्यक ाओं क े उल्लंघन क े संबं,ें नोएडा को लिलOा, ो उसने कोई प्रति विKया नहीं विदOाई और उनकी ओर से कोई जां? नहीं की र्गई mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (v) 26 सिस ंबर 2009 की दूसरी संशोति योजना क े अनुसरण,ें, अपीलक ा ने ?ालीस और उन ालीस,ंसिजलों वाली दो इ,ार ों को सहारा देने क े लिलए एक नींव का विन,ाण विकया होर्गा जबविक ?ौबीस से ?ालीस या उन ालीस,ंसिजलों क विवस् ार क े लिलए,ंजूरी क े वल 2,ा? 2012 को ीसरी संशोति योजना क े,ाध्य, से प्राप्त हुई थी। (vi) टी-16 और टी-17 का विन,ाण अपीलक ा द्वारा 26 नवंबर 2009 को दूसरी संशोति योजना क े लिलए,ंजूरी वि,लने से पां?,हीने पहले जुलाई 2009,ें शुरू विकया र्गया था, सिजसक े बावजूद नोएडा ने कोई कारवाई नहीं की।

144. उच्च न्यायालय ने नोएडा क े अति कारिरयों और अपीलक ा क े बी? वि,लीभर्ग पर विव?ार विकया है। यह थ्यों से स्पष्ट है क्योंविक वे इस न्यायालय क े स,क्ष भी सा,ने आए हैं। इन परिरस्थिस्थति यों,ें उच्च न्यायालय सही विनष्कर्ष पर पहुं?ा है विक डेवलपर और योजना प्राति करण क े बी? वि,लीभर्ग थी।

145. विदनांक 2,ा? 2012 की ीसरी संशोति योजना की श 15,ें यह कहा र्गया है विकः “उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट (विन,ाण, स्वावि,त्व और रOरOाव का संव न) अति विनय,, 2010 क े प्राव ानों का अनुपालन और इसक े ह जारी विनदmशों का पालन सुविनति² विकया जाए। इस पत्र क े साथ स्वीक ृ स्थल योजना/,ानति?त्र संल` है।यूविटलिलटी सर्षिटविफक े ट क े लिलए आवेदन नक्शा/साइट प्लान की वै ा क े भी र विन,ाण काय पूरा होने क े बाद विकया जाएर्गा और अनु,ति और प्र,ाणन क े विबना भवन का उपयोर्ग नहीं विकया जाएर्गा।” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इस श क े बावजूद नोएडा ने उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 का अनुपालन सुविनति² करने क े लिलए कोई प्रयास नहीं विकया, सिजसक े परिरणा,स्वरूप फ्ल ै ट Oरीदारों क े अति कारों का Oुलेआ, उल्लंघन विकया र्गया है। यह नोएडा और अपीलक ा क े बी? वि,लीभर्ग क े अलावा विकसी विनष्कर्ष की ओर संक े नहीं कर सक ा है, ाविक फ्ल ै ट Oरीदारों क े अति कारों की की, पर,ौविद्रक लाभ क े लिलए लार्गू कानून और विवविनय, क े प्राव ानों का पालन करने से ब?ा जा सक े ।

146. शहरी क्षेत्रों,ें, विवशेर्ष रूप से,हानर्गरीय शहरों,ें अनति क ृ विन,ाणों,ें ेजी से वृतिद्ध हुई है जहां भूवि, की बढ़ ी की, ें क े कारण संविदग् लेनदेने पर इस न्यायालय क े कई विनणयों,ें ध्यान विदया र्गया है। यह स्थिस्थति अक्सर डेवलपस और योजना प्राति करणों क े बी? वि,लीभर्ग क े कारण बहु अति क सा,ने आई है।

147. प्रारंभ से पूण ा क, डेवलपरों द्वारा विन,ाण की प्रविKया कानून क े ढां?े क े भी र विवविनयवि, की जा ी है। विवविनया,क ढां?े,ें विन,ाण क े सभी ?रणों को शावि,ल विकया र्गया है, सिजस,ें भूवि, का आवंटन, विन,ाण क े लिलए योजना की,ंजूरी, विन,ाणा ीन संर?नाओं की संर?नात्,क अOंड ा का विवविनय,न, विवशिभन्न विवभार्गों (आर्ग, बर्गी?ा, सीवेज आविद) से,ंजूरी प्राप्त करना और अति ग्रहण और पूण ा प्र,ाण पत्र जारी करना शावि,ल है।हालांविक, विवशेर्ष रूप से,हानर्गरों,ें लोर्गों क े विनरं र प्रवाह को स,ायोसिज करने क े लिलए आवास स्टॉक की उपलब् ा आवश्यक है, लेविकन इसे दो,हत्वपूण बा ों-पयावरण की सुरक्षा और इन विन,ाणों,ें रहने वाले लोर्गों की भलाई और सुरक्षा -क े साथ सं ुलिल विकया जाना ?ाविहए। इस पूरी प्रविKया क े विनय,न का उद्देश्य यह सुविनति² करना है विक उन विन,ाणों को,ंजूरी न दी जाए सिजनका पयावरण पर र्गंभीर नकारात्,क प्रभाव पड़ेर्गा।इसलिलए, जब डेवलपरों द्वारा इन विवविनय,ों का Oुलेआ, उल्लंघन विकया जा ा है, ो अक्सर विनया,क प्राति करणों की वि,लीभर्ग से ही, यह शहरी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनयोजन क े,ूल पर ह,ला कर ा है, सिजससे सी े ौर पर पयावरण को नुकसान हो ा है और सुरक्षा,ानकों को क,जोर विकया जा ा है। इसलिलए, कानून क े शासन का अनुपालन सुविनति² करने क े लिलए अवै विन,ाण से सख् ी से विनपटा जाना ?ाविहए।

148. विपछले ?ार दशकों क े इस न्यायालय क े विनणयों,ें भवन योजनाओं को,ंजूरी दे े स,य और उन,ानदंडों क े अनुरूप भवन विन,ाण विवविनय,ों और उप- विनय,ों को लार्गू कर े स,य योजना विनकायों क े क व्य पर जोर विदया र्गया है सिजनक े द्वारा वे शासिस हो े हैं। भवन विन,ाण विवविनय,ों का अनुपालन सुविनति² करने क े अपने दातियत्व का आयोजना प्राति कारी द्वारा उल्लंघन उन विनवासिसयों क े अनुरो पर कारवाई योग्य है सिजनक े अति कारों का उल्ल्ंघन हो ा है। अनुपालन को लार्गू करने,ें योजना प्राति कारी की विवफल ा से उनक े जीवन की र्गुणवत्ता सी े ौर पर प्रभाविव हो ी है।दुभाग्य से फ्ल ै ट Oरीदारों क े विवविव और अनदेOे स,ूह को विबल्डरों और योजनाकारों क े बी? अपविवत्र र्गठजोड़ का Oावि,याजा भुर्ग ना पड़ ा है।उनक े जीवन की र्गुणवत्ता सबसे अति क प्रभाविव हो ी है। विफर भी, डेवलपस की आर्शिथक शविक्त और योजना विनकायों द्वारा सं?ालिल कानूनी प्राति कार की शविक्त का सा,ना कर े हुए, अपनी आवाज उठाने वाले क ु छ लोर्गों को परिरणा,ों की क, विनति² ा क े साथ अति कारों क े लिलए लंबी और,हंर्गी लड़ाई लड़नी होर्गी। जैसा विक इस,ा,ले से प ा ?ल ा है, उन्हें सू?ना क पहुं? से वंति? विकया जा ा है और वे र्गल सू?ना क े शिशकार हो े हैं। इसलिलए उनकी जायज चिं? ाओं की रक्षा क े लिलए कानून को आर्गे आना ?ाविहए।

149. क े. रा,दास शेनॉय बना,,ुख्य अति कारी, नर्गर पालिलका परिरर्षद30 क े,ा,ले,ें दो न्याया ीशों की पीठ की ओर से बोल े हुए,ुख्य न्याया ीश ए. एन. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रे ने कहा विक नर्गरपालिलका सावजविनक लाभ क े लिलए का, कर ी है और जब वह अति विनय, द्वारा प्रदत्त शविक्तयों से अति क काय कर ी है ो वह उन शविक्तयों का दुरुपयोर्ग नहीं कर ी जो उसे प्रदान की र्गयी है बस्थिल्क वह उन शविक्तयों को हड़पना रही है जो इसक े पास नहीं हैं। इस न्यायालय ने यह भी अशिभविन ारिर विकयाः “27... अपनी भूवि, पर विन,ाण करने का अति कार उस भूवि, क े स्वावि,त्व का प्रासंविर्गक अति कार है। नर्गरपालिलका क े भी र उस अति कार क े प्रयोर्ग को नर्गरपालिलका सवि,ति की सी,ाओं क े भी र रहने वाले स,ुदाय क े विह,ें विवविनयवि, विकया र्गया है।यविद विकसी प्राति करण क े बहाने, जो कानून नर्गरपालिलका को दे ा है, वह अपने अति कार क्षेत्र से बाहर जा ा है और दूसरों क े अति कारों का उल्लंघन कर ा है, ो यह अन्य सभी व्यविक्तयों की रह न्यायालयों क े अति कार क्षेत्र क े लिलए उत्तरदायी हो जा ा है। यविद उप-कानून का उल्लंघन कर े हुए विन,ाण की,ंजूरी दी जा ी है, ो अदाल ों क े अति कार क्षेत्र को इस आ ार पर लार्गू विकया जाएर्गा विक उस प्राति करण द्वारा बनाए र्गए उप-विनय,ों का उल्लंघन करने वाली भवन योजनाओं क े विकसी प्राति करण द्वारा अनु,ोदन अवै और विनष्प्रभावी है।(याबीकॉ, बना, विंकर्ग [(1899) 1 क्यूबी 444] देOें)।” इस न्यायालय ने कहा विक एक अविनयवि, विन,ाण आवासीय क्षेत्र,ें रहने वाले व्यविक्तयों द्वारा संपलित्त क े उपभोर्ग क े अति कार को वस् ु ः प्रभाविव कर ा है, और इसलिलए, यह सुविनति² करना नर्गरपालिलका प्राति करण का क व्य है विक क्षेत्र अनति क ृ विन,ाण से प्रति क ू ल रूप से प्रभाविव न हो।

150. इन सिसद्धां ों की दो न्याया ीशों की न्यायपीठ द्वारा डॉ. जी. एन. Oजुरिरया बना, विदल्ली विवकास प्राति करण31 वाले,ा,ले,ें पुनः पुविष्ट की र्गई, जहां इस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय ने यह अशिभविन ारिर विकया विक विदल्ली विवकास प्राति करण क े लिलए नसरी स्क ू ल क े लिलए पाक बनाने क े लिलए एक स्थान बनाना संभव नहीं है। न्याय,ूर्ति बी. एल. हंसारिरया ने न्यायालय की ओर से कहा थाः “10. विवदाई से पहले, ह,ें एक अवलोकन करना है वह भावना यह है विक जहां अदाल ों क े आदेश क े बल पर अनति क ृ विन,ाणों को ध्वस् विकया जा ा है, वहां अवै ा का पूरी रह ध्यान नहीं रOा जा ा है जहां क सांविवति क विनकाय क े अति कारिरयों का सवाल है, सिजन्होंने अनति क ृ विन,ाण करने या अवै आबंटन करने की अनु,ति दी थी। लेविकन दो कारणों से ऐसा नहीं होना ?ाविहए था। पहला, यह अति कारी का अवै काय/आदेश है जो संबंति नार्गरिरक क े र्गैरकानूनी काय क े,ूल,ें विनविह है, सिजसक े कारण अवै लाभ क े प्राप्तक ा से अति क अति कारी को दोर्षी ठहराया जा सक ा है। इसलिलए, ह,ारे अनुसार, यह आवश्यक है विक अनति क ृ विन,ाण को विर्गराने की आवश्यक ा वाली शरार को दूर कर े हुए, अप?ारी अति कारी को भी कानून क े अनुसार दंतिड विकया जाए। हालांविक ऐसा शायद ही कभी हो ा है। दूसरा, अन्याय को पूरी रह से दूर करने क े लिलए, सिजस अति कारी ने अपनी शविक्त का दुरुपयोर्ग विकया है, उसे भी उति? सजा वि,लनी ?ाविहए। अन्यथा, क्या हो ा है विक अति कारी, वैसा अवसर पाकर वह काय विकया (सिसक), जो दूसरों को भी ऐसा करने क े लिलए लुभा ा है। यह वास् व,ें अपक ृ त्य को बढ़ावा दे ा है, जबविक लक्ष्य इसक े विवपरी होना ?ाविहए।”

151. फ्र ें ड्स कॉलोनी डेवलप,ेंट क,ेटी बना, उड़ीसा राज्य32 क े,ा,ले,ें इस न्यायालय ने एक ऐसे,ा,ले पर विव?ार विकया सिजस,ें विबल्डर ने स्वीक ृ योजना क े ह स्वीकाय विन,ाण से अति क विन,ाण विकया था और इ,ार पर एक अति रिरक्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA,ंसिजल का विन,ाण विकया था, जो अनति क ृ था।,ुख्य न्याया ीश आर. सी. लाहोटी ने दो न्याया ीशों की पीठ की ओर से अपने विव?ार व्यक्त कर े हुए कहाः

“24. संर?नात्,क और लॉट क्षेत्र विवविनय, नर्गरपालिलका अति कारिरयों को ऊं?ाई, ,ंसिजलों और अन्य संर?नाओं की संख्या को विवविनयवि, करने और प्रति बंति करने के लिलए अति कृ कर े हैं सिजस,ें भूOंड का प्रति श सिजस पर कब्जा विकया जा सक ा है-याड, कोट और Oुले स्थानों के आकार-जनसंख्या का घनत्व और इ,ार ों और संर?नाओं का स्थान और उपयोर्ग शावि,ल हैं। ये सभी ह,ारे विव?ार ,ें हैं और सावजविनक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सा,ान्य कल्याण के व्यापक उद्देश्य को प्राप्त कर े हैं। इसी रह सा,ने के झटके के प्राव ान , औस संरO े ण और संर?नात्,क परिरव न भी हैं। जोविंनर्ग और विवविनय,न कानूनों का कोई भी उल्लंघन जोलिO, के अलावा सावजविनक कल्याण और सुविव ा को भी नुकसान पहु? ं ा ा है, और भवन ,ें रहने वाले लोर्गों को होने वाली असुविव ा और कविठनाई को बढ़ा ा है।”

यह देO े हुए विक भवन और नर्गरपालिलका विवविनय,ों को लार्गू कर े स,य भूवि,,ालिलकों का विनजी विह सावजविनक विह क े अ ीन है, न्यायालय ने भवन विवविनय,ों क े उल्लंघन की प्रवृलित्त क े लिOलाफ ?े ावनी जारी कीः “25....एक पेशेवर विबल्डर से अपेक्षा की जा ी है विक वह कानूनों को बेह र रीक े से स,झे और ऐसे विबल्डरों द्वारा विव?लन को सुरतिक्ष रूप से लाभ अर्जिज करने क े इरादे से जानबूझकर विकया र्गया,ाना जा सक ा है और इसलिलए उससे सख् ी से विनपटा जाना ?ाविहए ाविक भविवष्य क े लिलए एक विनवारक क े रूप,ें काय विकया जा सक े । यह सवविवविद है विक भवन विन,ा ा र्गुप्त लेन-देन कर े हैं। ?ाहे जो भी हो, राज्य सरकारों को ऐसे विबल्डरों पर भारी जु,ाना लर्गाने क े बारे,ें सो?ना ?ाविहए और इसक े लिलए एक कल्याण कोर्ष विवकसिस करना ?ाविहए, सिजसका उपयोर्ग ऐसे विनद र्ष या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA असाव ान Oरीदारों को,ुआवजा देने और उनक े पुनवास क े लिलए विकया जा सक ा है, जो अवै विन,ाण को विर्गराने क े कारण विवस्थाविप हो र्गए हैं।”

152. विप्रयंका एस्टेट्स इंटरनेशनल (पी) लिलवि,टेड बना, अस, राज्य33 क े,ा,ले,ें दो न्याया ीशों की पीठ की ओर से,न्याय,ूर्ति दीपक व,ा ने कहाः “55. यह आ, जानकारी का विवर्षय है विक स्वीक ृ योजनाओं से परे अवै और अनति क ृ विन,ाण बढ़ रहे हैं, जो बड़े शहरों,ें भूवि, की क,ी क े कारण हो सक े हैं। इस रह की र्गति विवति यों से कड़ाई से विनपटने की आवश्यक ा है अन्यथा विबल्डर/कॉलोनाईजर स्वीक ृ और अनु,ोविद योजनाओं से परे विन,ाण या विन,ाण जारी रOेंर्गे और विफर भी ब? जाएंर्गे। अं ः फ्ल ै ट,ालिलक ही इस रह की र्गति विवति यों का शिशकार हो े हैं क्योंविक आ, आद,ी की अंति, इच्छा हो ी है विक उसका अपना घर हो। इस रह क े र्गैरकानूनी विन,ाण विनति² रूप से जनविह क े लिOलाफ हैं और बहु,ंसिजला इ,ार ों,ें रहने वाले लोर्गों की सुरक्षा क े लिलए O रनाक हैं। कु छ हद क दोनों पक्षों को इसक े लिलए स,ान रूप से सिजम्,ेदार कहा जा सक ा है। विफर विबल्डर की ुलना,ें अति क नुकसान उन फ्ल ै ट,ालिलकों को होर्गा सिजनक े फ्ल ै ट विर्गराए जाने हैं।” न्यायालय ने इस बा पर Oेद व्यक्त विकया विक इस विवर्षय पर पहले क े विनणयों क े परिरणा,स्वरूप डेवलपरों द्वारा भवन विन,ाण विनय,ों क े अनुपालन,ें वृतिद्ध नहीं की र्गई थी। इसक े अलावा, अदाल ने कहा विक अर्गर अनति क ृ विन,ाण को Oड़े होने की अनु,ति दी जा ी है या अदाल द्वारा,ंजूरी की,ुहर दी जा ी है, ो इससे व्यापक रूप से जन ा प्रभाविव होर्गी। अदाल ने यह भी कहा विक विकसी डेवलपर द्वारा बनाए र्गए अनति क ृ विन,ाण से प्रभाविव नार्गरिरकों को क्षति पूर्ति देने क े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अदाल ों क े अति कार क्षेत्र और शविक्त का उपयोर्ग आ, नार्गरिरकों को,ुआवजा देने क े लिलए विकया जा सक ा है।

153. ईशा एक ा अपाट,ेंट कॉप हाउसिंसर्ग सोसाइटी लिल. बना,,ुम्बई,ुविनसिसपल कॉप रेशन34 न्याय,ूर्ति जी. एस. सिंसघवी ने दो न्याया ीशों की पीठ क े लिलए लिलO े हुए इस विवर्षय पर पहले क े विनणयों को दोहराया और कहाः “8. सवप्रथ,, ह, कहना ?ाह े हैं विक स्वीक ृ योजना क े अविनयंवित्र उल्लंघन,ें विनर्षि,,ंसिजलों क े विनयवि, ीकरण क े लिलए प्राथना को अस्वीकार करक े, उप,ुख्य अशिभयं ा और अपीलीय प्राति कारी ने देश की वाशिणस्थिज्यक राज ानी क े विनयोसिज विवकास को सुविनति² करने क े लिलए अपने दृढ़ संकल्प को प्रदर्शिश विकया है और उनक े द्वारा पारिर आदेशों ने कानून का पालन करने वाले नार्गरिरकों को उम्,ीद दी है विक प्रशासन क े पदानुK,,ें कोई भी व्यविक्त बेई,ान डेवलपरों /विबल्डरों को कानून को अपने हाथों,ें लेने और इससे ब?ने नहीं देर्गा।” न्यायालय ने आर्गे कहा विक एक अनति क ृ विन,ाण विनयोसिज विवकास की अव ारणा को नष्ट कर दे ा है और सावजविनक प्राति करणों द्वारा उपलब् करायी र्गयी बुविनयादी सुविव ाओं पर असहनीय बोझ डाल ा है। अदाल ने कहा विक सावजविनक प्राति करण क े लिलए यह अविनवाय है विक वह न क े वल ऐसे विन,ाणों को ध्वस् करे बस्थिल्क इस,ें शावि,ल दोविर्षयों पर जु,ाना भी लर्गाए। इस न्यायालय का यह विवलाप, योजना विनकायों क े साथ वि,लीभर्ग से काय करने वाले डेवलपस द्वारा भवन विवविनय,ों क े घोर उल्लंघन पर, सा,ने लाया र्गया था जब न्यायालय ने अपने फ ै सले की प्रस् ावना,ें विनम्नलिललिO विटप्पशिणयों का उल्लेO विकया थाः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “1. विपछले पां? दशकों,ें सिजन क्षेत्रों क े विनयोसिज विवकास क े लिलए उनक े विवशिभन्न नर्गरपालिलका प्राव ानों क े कानूनों,ें विनविह इस रह क े कानून लार्गू हुए हैं,उनका सभी बड़े या छोटे शहरों,ें उल्लंघन विकया र्गया है और सिजन्हें,ास्टर प्लान आविद का कायान्वयन सुविनति² करने का काय सौंपा र्गया, वे अपने क व्यों का पालन करने,ें बुरी रह से विवफल रहे हैं। यह अत्यं Oेदजनक है विक इस थ्य क े बावजूद विक इस न्यायालय ने क्षेत्र की पारिरस्थिस्थति की और पयावरण को संरतिक्ष करने और नार्गरिरकों क े अति कारों की रक्षा करने की अविनवाय ाओं को ध्यान,ें रO े हुए, अवै विन,ाण को,न,ाने ढंर्ग से विनयवि, करने क े लिOलाफ संबंति अति कारिरयों को बार-बार आर्गाह विकया है।” अं,ें, अदाल ने यह भी कहा विक स्वीक ृ योजना का उल्लंघन कर े हुए विकए र्गए विन,ाण को विनयवि, करने क े लिलए नर्गर विनर्ग, को विनदmश देने का कोई पक्ष नहीं बनाया र्गया है और ऐसा करने क े लिOलाफ आर्गाह विकया र्गया है। इस संदभ,ें, उसने यह अशिभविन ारिर विकयाः “56. ह, दोहराना ?ाह े हैं विक नर्गरपालिलका कानूनों और इसी रह क े अन्य कानूनों को लार्गू करने वाला कोई भी प्राति करण स्वीक ृ योजना क े उल्लंघन को प्रोत्साविह नहीं कर सक ा है। अदाल ों से यह भी उम्,ीद की जा ी है विक वे अवै और अनति क ृ विन,ाण को विनयवि, करने क े लिलए न्यायसंर्ग अति कार क्षेत्र का उपयोर्ग करने से ब?ें अन्यथा यह योजना कानूनों का उल्लंघन करने वालों को प्रोत्साविह करेर्गा और शहरी और ग्रा,ीण क्षेत्रों क े विनयोसिज विवकास क े विव?ार और अव ारणा को नष्ट कर देर्गा।” mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

154. इन चिं? ाओं को न्यायालय ने क े रल राज्य टीय क्षेत्र प्रबं न प्राति करण बना, क े रल राज्य35, क े रल राज्य टीय क्षेत्र प्रबं न प्राति करण बना,,राडू नर्गरपालिलका,,राडू36 और विबK, ?टजd बना, भार संघ37 क े,ा,लों,ें हाल,ें विदए र्गये फ ै सलों,ें दोहराया है।

155. व,ान,ा,ले,ें, एक बार जब इस न्यायालय ने यह विन ारिर कर लिलया है विक एपेक्स और सिसयान (टी-16 और टी-17) क े लिलए स्वीक ृ योजना ने एनबीआर 2006, एनबीआर 2010, एनबीसी 2005, यूपी 1975 अति विनय, और यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 का उल्लंघन विकया है, ो यह उसका क व्य बन जा ा है विक वह नोएडा क े साथ साठर्गांठ,ें अपीलक ा द्वारा विकए र्गए उल्लंघनों का जायजा ले।अपीलक ा ने र्गल क देकर न्यायालय को भ्रवि, करने का काय विकया है। जबविक नोएडा क े अति कारिरयों ने अपने क व्य क े विनवहन,ें र्गल काय नहीं विकया। अपीलक ा एक,नर्गढ़ं स्वीक ृ योजना ैयार करने की हद क झुक र्गया है। इसलिलए, ह, विवध्वंस क े आदेश और यूपीयूडी अति विनय, की Oंड 49 क े ह अशिभयोजन को,ंजूरी देने सविह उच्च न्यायालय क े विनदmशों की पुविष्ट कर े है, जैसा विक अपीलक ा क े अति कारिरयों और नोएडा क े अति कारिरयों क े लिOलाफ यूपीआईएडी अति विनय, 1976 और यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 क े उल्लंघन क े लिलए यूपीआईएडी अति विनय, 1976 की Oंड 12 द्वारा शावि,ल विकया र्गया है। ?. विनष्कर्ष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

156. ह,ारे विनष्कर्ष§ को संक्षेप,ें प्रस् ु करने क े लिलए, इस विनणय,ें संदर्शिभ और विवश्लेर्षण की र्गई दस् ावेजी सा,ग्री इंविर्ग कर ी है विकः (i),ूल पट्टा करार और पूरक पट्टा विवलेO क े ह अपीलक ा को आवंविट भूवि, एक भूOंड का र्गठन कर ी है; (ii) पूरक पट्टा विवलेO क े,ाध्य, से आवंविट भूवि,,ूल प्लॉट संख्या 4 का विहस्सा है और,ूल पट्टा विवलेO क े स,ान विनय,ों और श § द्वारा शासिस होर्गी; (iii) टी-16 और टी-17 क े विन,ाण क े लिलए 26 नवंबर 2009 और 2,ा? 2012 को नोएडा द्वारा दी र्गई,ंजूरी एनबीआर 2006, एनबीआर 2010 और एनबीसी 2005 क े ह न्यून, दूरी की आवश्यक ा का उल्लंघन है; (iv) टी-1 क े साथ टी-16 और टी-17 को एक ही ब्लॉक,ें इ,ार ों का एक स,ूह बनाकर न्यून, दूरी की आवश्यक ा का उल्लंघन करने का प्रयास विकया र्गया था। इस बा को टी-1 और टी-17 क े बी? एक स्पेस फ्र े, प्रदान करक े,जबू करने की,ांर्ग की र्गई थी। यह,ा,ला विक टी-1, टी-16 और टी-17 एक ब्लॉक का विहस्सा हैं, फ्ल ै ट Oरीदारों क े स,क्ष अपने अभ्यावेदनों और उच्च न्यायालय क े स,क्ष जवाबी शपथ पत्र,ें अपीलक ा की कशिथ स्थिस्थति क े सी े विवपरी है। यह सुझाव विक टी-1, टी-16 और टी-17 एक ब्लॉक का विहस्सा हैं, एक प²ा व d विव?ार है और रिरकॉड क े विवपरी है; (v) यह,हसूस करने क े बाद विक विबल्डिंल्डर्ग ब्लॉक क नहीं ?लेर्गा, एक और झूठे,ा,ले को इस क क े साथ स्थाविप करने की कोशिशश की र्गई विक टी -1 और टी-17 डेड एंंड साइड हैं, सिजससे आवश्यक न्यून, दूरी क े अनुपालन की आवश्यक ा नहीं है। एनबीसीसी द्वारा दी र्गयी व्यापक रिरपोट इस बा को र्गल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA साविब कर ी है। टी-1 और टी-17 क े एक-दूसरे क े आ,ने-सा,ने वाले छोर डेड एंड साइड नहीं है क्योंविक दोनो रफ इ,ार क े सा,ने शिछद्र/एग्रेस हैं; (vi) भवन विवविनय,ों का पालन विकए विबना टी-16 और टी-17 का विन,ाण करक े अवि` सुरक्षा,ानदंडों का भी उल्लंघन विकया र्गया है; (vii) 29 विदसंबर 2006 की पहली संशोति योजना,ें टी-1 से सटे एक उद्यान क्षेत्र क े लिलए एक स्पष्ट प्राव ान था। 26 नवम्बर, 2009 की दूसरी संशोति योजना,ें एपेक्स और सिसयान (टी-16 और टी-16) क े विन,ाण क े लिलए उद्यान क्षेत्र क े प्राव ान को स,ाप्त कर विदया र्गया था। टी-1 क े सा,ने क े सा,ान्य उद्यान क्षेत्र को टी-16 और टी-17 क े विन,ाण द्वारा स,ाप्त कर विदया र्गया था। यह उत्तर प्रदेश अपाट,ेंट अति विनय, 2010 का उल्लंघन है क्योंविक फ्ल ै ट,ालिलकों से वादा की र्गई योजना को संशोति करने से पहले फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति नहीं ली र्गई थी; और (viii) टी-16 और टी-17 अलर्ग-अलर्ग सुविव ाओं और बुविनयादी ढां?े वाले अलर्ग और विवशिशष्ट ?रण (?रण-2) का विहस्सा नहीं हैं। पूरक पट्टा विवलेO,ें कहा र्गया है विक वे,ूल परिरयोजना का विहस्सा हैं।इसलिलए,,ूल पंद्रह टावरों क े व्यविक्तर्ग फ्ल ै ट,ालिलकों की सह,ति, व्यविक्तर्ग रूप से या आरडब्ल्यूए क े,ाध्य, से, यूपी अपाट,ेंट अति विनय, 2010 और यूपी 1975 अति विनय, क े ह टी-16 और टी-17 क े विन,ाण से पहले एक आवश्यक आवश्यक ा थी, क्योंविक उन्होंने नए फ्ल ै टों को जोड़कर और 650 से 1500 क की संख्या बढ़ाकर कॉ,न एरिरया,ें व्यविक्तर्ग फ्ल ै ट,ालिलकों क े अविवभासिज विह ों को आवश्यक रूप से क, कर विदया था; और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ix) टी-16 और टी-17 का अवै विन,ाण नोएडा क े अति कारिरयों और अपीलक ा और इसक े प्रबं न क े बी? वि,लीभर्ग क े काय§ क े,ाध्य, से प्राप्त विकया र्गया है।

157. ऊपर इंविर्ग विकए र्गये कारणों से ह, इस विनष्कर्ष पर पहुँ?े हैं विक: (i) एपेक्स और सिसयान (टी-16 और टी-17) को ध्वस् करने क े उच्च न्यायालय क े आदेश,ें हस् क्षेप की आवश्यक ा नहीं है और उच्च न्यायालय द्वारा ध्वस् ीकरण क े लिलए जारी विनदmश की पुविष्ट की जा ी है; (ii) ध्वस् ीकरण का का, इस फ ै सले की ारीO से ीन,हीने की अवति क े भी र विकया जाएर्गा; (iii) ध्वस् ीकरण का काय अपीलाथd की लार्ग पर नोएडा क े अति कारिरयों की विनर्गरानी,ें विकया जाएर्गा। यह सुविनति² करने क े लिलए विक ध्वस् ीकरण का काय,ौजूदा अपीलक ा को प्रभाविव विकए विबना सुरतिक्ष रीक े से विकया जाए, नोएडा अपने स्वयं क े विवशेर्षज्ञों और क ें द्रीय भवन अनुसं ान संस्थान, रुड़की 38 क े विवशेर्षज्ञों से परा,श लेकर करेर्गा; (iv) ध्वस् ीकरण का काय सीबीआरआई की विनर्गरानी,ें विकया जाएर्गा। यविद सीबीआरआई ऐसा करने,ें अस,थ ा व्यक्त कर ा है, ो नोएडा प्राति करण द्वारा एक अन्य विवशेर्षज्ञ एजेंसी नावि, की जाएर्गी; (v) विवध्वंस की लार्ग और विवशेर्षज्ञों को देय शुल्क सविह सभी आनुर्षंविर्गक O? अपीलाथd द्वारा वहन विकए जाएंर्गे; (vi) अपीलक ा एपेक्स और सिसयान (टी-16 और टी-17),ें सभी,ौजूदा फ्ल ै ट Oरीदारों को दो,हीने की अवति क े भी र आवंविट फ्ल ै टों क े लिलए विनवेश की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्गई सभी रक,ों पर बारह प्रति श वार्षिर्षक की दर से ब्याज क े साथ संबंति ज,ा की ारीO से इस फ ै सले क े भार्ग ए? क े संदभ,ें रिरफ ं ड की ारीO क की अवति क े लिलए रिरफ ं ड करेर्गा, उन लोर्गों को छोड़कर सिजन्हें पहले से ही रिरफ ं ड विकया जा ?ुका है; और (vii) अपीलक ा आरडब्ल्यूए को इस विनणय की प्राविप्त से एक,हीने,ें भुर्ग ान विकए जाने वाले 2 करोड़ रुपये का भुर्ग ान करेर्गा। ज. अन् रव d आवेदन

158. श्री विवकास सिंसह, विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने सुनवाई क े दौरान विनम्नलिललिO स्थिस्थति इंविर्ग करने क े लिलए एक अति रिरक्त शपथ पत्र विदया हैः (i) आरडब्ल्यूए का यह क विक अपीलक ा ने 190 रुपये प्रति वर्ग फ ु ट की दर से एक,ुश् पट्टा विकराया एकत्र विकया है। टी-1 से टी-15 क े सभी फ्ल ै ट,ालिलकों से 16.75 करोड़ रुपये एकत्र विकए र्गए थे, लेविकन नोएडा को क े वल 13.32 करोड़ रुपये का भुर्ग ान विकया जाना र्गल है; (ii) अपीलक ा ने टी-1 से टी-15 क े सभी आवंविटयों से नोएडा को देय पट्टे का विकराया नहीं लिलया। क ु छ आवंविटयों से 7.54 करोड़ रू. प्राप्त हुए थे; (iii) नोएडा को भुर्ग ान विकया र्गया पट्टा विकराया 14.49 करोड़ रुपये की राशिश,ें था; (iv) टी-1 से टी-14,ें क ु ल 659 इकाइयां बुक की र्गई ं; और (v) इन इकाइयों,ें से 245 फ्ल ै टों की बुविंकर्ग 28 विदसंबर, 2006 क की र्गई थी और 29 विदसंबर, 2006 से 25 नवंबर, 2009 क े बी? 141 फ्ल ै टों की बुविंकर्ग की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्गई थी। 26 नवंबर, 2009 से 1,ा?, 2012 क े बी? 114 फ्ल ै ट बुक विकए र्गये जबविक 2,ा?, 2012 क े बाद 159 इकाइयों क े लिलए बुक की र्गई। इस आ ार पर, यह कहा र्गया है विक 518 इकाइयों की बुविंकर्ग या ो 28 विदसंबर 2006 से पहले (पहली संशोति योजना से पहले) या 26 नवंबर 2009 क े बाद (दूसरी संशोति योजना क े बाद) की र्गई थी।अपीलक ा द्वारा दशाए र्गए आंकड़े दशा े हैं विक 29 विदसंबर, 2006, पर पहली संशोति योजना और 25 नवंबर, 2009, पर दूसरी संशोति योजना क े बी? 141 फ्ल ै ट Oरीदारों ने फ्ल ै ट बुक विकए थे। उन्होंने स्वीक ृ योजनाओं,ें विनविह स्पष्ट आश्वासन क े आ ार पर ऐसा विकया।

159. इन कायवाविहयों विव?ारा ीन रहने क े दौरान, इस न्यायालय द्वारा 6 सिस ंबर 2016 और 22 सिस ंबर 2017 को दो अं रिर, आदेश पारिर विकए र्गए थे। 6 सिस ंबर 2016 क े आदेश द्वारा, इस न्यायालय ने अपीलक ा को उन फ्ल ै ट Oरीदारों को दस प्रति श का रिरटन देने का विनदmश विदया जो परिरयोजना,ें बने हुए हैं। 22 सिस ंबर, 2017 क े आदेश द्वारा उन लोर्गों को एक विनकासी विवकल्प विदया र्गया था, सिजन्होंने 12 प्रति श वार्षिर्षक की दर से ब्याज क े साथ विनवेश की र्गई राशिश लेने क े लिलए रिरफ ं ड की,ांर्ग की थी।

160. एपेक्स और सिसयान (टी-16 और 17),ें फ्ल ै टों क े संबं,ें श्री रविवन्द्र क ु,ार, विवद्वान अति वक्ता द्वारा इस न्यायालय को इंविर्ग स्थिस्थति विनम्नानुसार हैः (i) फ्ल ै टों की संख्याः 915 (ii) दुकानों की संख्याः 21 (iii) बुविंकर्ग की संख्याः 633 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iv) ऐसे व्यविक्त सिजन्होंने डेवलपर की अन्य परिरयोजनाओं,ें पुनः विनवेश विकया हैः

(v) Oरीददार सिजन्हें रिरफ ं ड प्रदान विकया र्गया हैः 248 (vi) शेर्ष K े ाः 252

161. उपरोक्त स्थिस्थति इंविर्ग कर ी है विक इस न्यायालय क े आदेश क े अनुसार प्रदान विकए र्गए ऑप्ट-आउट क े बाद 248 Oरीदारों ने रिरफ ं ड का विवकल्प ?ुना है, जबविक टी-16 और टी-17,ें 252 Oरीदार परिरयोजना क े लिलए प्रति बद्ध रहे।

162. विवद्वान न्यायवि,त्र श्री र्गौरव अग्रवाल, ने न्यायालय को व्यापक सहाय ा प्रदान की है। अपनी दलीलों को वस् ुविनष्ठ और विनष्पक्ष रीक े से प्रस् ु करने क े अलावा,न्यायवि,त्र ने अति वक्ता और न्यायालय की सुविव ा क े लिलए अशिभव?नों, दस् ावेजों और वै ाविनक प्राव ानों का पालन विकया है। ह, न्यायालय वि,त्र द्वारा दी र्गई सहाय ा क े लिलए अपनी सराहना दज कर े हैं। न्यायवि,त्र ने घर Oरीददारों द्वारा विवशिभन्न श्रेशिणयों,ें दायर विकए र्गए आवेदनों क े वर्गdकरण क े लिलए नोट भी बनाया है और कायवाही क े आ ार पर उन्हें विदए जाने वाले अनु ोर्ष की श्रेणी बनायी है। ये श्रेशिणयां हैंः श्रेणी I

163. Oरीदार सिजन्होंने आरओआई भुर्ग ान प्राप्त विकया हैः (i) 6 सिस ंबर 2016 और 11 जनवरी 2017 क े अपने आदेशों द्वारा, इस न्यायालय ने विनदmश विदया विक उन,कान Oरीदारों को, सिजन्होंने परिरयोजना क े साथ बने रहने का विवकल्प ?ुना है और रिरफ ं ड नहीं लेने का विवकल्प ?ुना है उन्हें दस प्रति श वार्षिर्षक की दर से आरओआई विदया जाना ?ाविहए और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA () ेरह व्यविक्तयों ने यह दावा कर े हुए इस न्यायालय क े स,क्ष आवेदन विदया विक अपीलक ा ने उन्हें आरओआई भुर्ग ान नहीं विकया। अपीलक ा ने उस भुर्ग ान की सू?ना दी है जो जुलाई 2021 क देय हैं। हालांविक, घर Oरीदार अति क रक, का दावा कर े हैं, रक,ों क े संबं,ें, न्यायालय वि,त्र ने अपीलक ा द्वारा विदए र्गए आंकड़ों पर कारवाई की है, जो विनम्नलिललिO रूप,ें सारणीबद्ध हैंः

K. सं. ना, आइए नं. सुपरटेक से प्राप्त ई,ेल क े अनुसार 1 जुलाई, 2021 क देय ब्याज एओआर का ना, 1 आर ी पुरी 55556/2021 रु. 16, 78, 720 विनशे राजन सोनकर 2 विदव्य पुरी 80599/2021 रु. 16, 78, 548 दैव 3 जति न वदd 55562/2021 रु. 11, 65, 686 दैव 4 अवि, Oन्ना 56228/2021 रु. 11, 65, 686 दैव 5 नरेंद्र ठाक ु र 55550/2021 रु. 10, 41, 578 दैव 6,ंजू कोहली 142969/2014 रु. 6, 78, 524 दैव 7 नम्र ा ुली 142975/2018 रु. 8, 26, 616 दैव 8,हेश जौरा 80916/2019 रु. 1, 11, 160 दैव 9 कविव ा जौरा 80875/2019 रु. 2, 01, 299 दैव 10 हे,ेंद्र वाष्णmय 80879/2019 रु. 1, 33, 980 दैव 11 शशिश वाष्णmय 80881/2019 रु. 1, 31, 988 दैव 12 बंदाना क े तिडया 80918/2019 रु. 1, 31, 700 दैव 13 सपना अहलूवालिलया 43555/2021 रु. 19, 87, 020 दैव mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

164. न्यायालय वि,त्र का क यह है विक यविद भवनों को Oड़ा रहना हो ा, ो घर Oरीदारों को उपयुक्त आरओआई का भुर्ग ान विकया जा सक ा है। दूसरी ओर इ,ार ों को ध्वस् विकया जाना है Oरीददारों को ब्याज सविह रिरफ ं ड विदया जाना ?ाविहए। और वह राशिश ब्याज,ें जुड़ जाएर्गी। ?ूंविक यह न्यायालय इस विनष्कर्ष पर पहुं?ा है विक भवनों को ध्वस् विकया जाना है, इसलिलए ब्याज सविह रिरफ ं ड क े संबं,ें सा,ान्य विनदmश उपयुक्त घर Oरीदारों क े दावों,ें शावि,ल करेंर्गे। श्रेणी 2

165. वे घर Oरीदार सिजनको,ूल न का भुर्ग ान कर विदया र्गया है लेविकन ब्याज का भुर्ग ान नहीं विकया र्गया हैः (i) 30 जुलाई, 2018 क े आदेश द्वारा, इस न्यायालय ने विनदmश विदया विक वे,कान Oरीदार सिजन्होंने पोटल पर पंजीकरण कराया था और ज,ा की ारीO से लेकर पूण और अंति, भुर्ग ान क े लिलए भुर्ग ान की ारीO क प्रति वर्ष बारह प्रति श सा ारण ब्याज लेने क े इच्छ ु क थे, उन्हें इस आशय का शपथपत्र दालिOल आदेश पर उपरोक्त दर पर ब्याज क े साथ,ूल राशिश वापस कर दी जाएर्गी। (ii) रसिजस्ट्री ने 13,कान Oरीदारों को,ूल राशिश वापस कर दी है, लेविकन ?ूंविक उनक े हलफना,े स,य क े भी र न्यायालय वि,त्र को नहीं वि,ले, इसलिलए ब्याज का भुर्ग ान विकया जाना बाकी है। इसका विववरण न्यायालय वि,त्र द्वारा विनम्नानुसार सारणीबद्ध विकया र्गया हैः

K. सं. ना, देय ब्याज आइए नं. एओआर का ना, 1 अनुज र्गोयल रु. 31, 40, 704 69916-69917 वर्ष अशिभजी सिसन्हा 2 सुवि, र्गोयल रु. 28, 97, 199 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 3 विप्रया र्गोयल रु. 28, 97, 199 4,ुक्ता जैन रु. 30, 10, 253 5 सुभार्ष ?ंद जैन रु. 29, 05, 957 6 अशिभर्षेकजैन रु. 30, 42, 129 7 अशिभर्षेकजैन रु. 30,22,785 8 हरविंबदर सिंसह रु. 32,84,789 9 विवनी कपूर रु. 28, 90, 491 10 विवशाल,ाहेश्वरी रु. 22, 45, 399 24823/2020 विनशे राजन सोनकर 11 शिशपली,ाहेश्वरी रु. 15, 30, 585 24834/2020 दैव 12 पून, ल ा क ु शवाहा रु. 29, 22, 513 120666/2019 120669/2019 श्वे ा रानी 13 परवि, ा रे रु. 40, 65, 228 व्यविक्तर्ग रूप से

166. न्यायालय वि,त्र ने क विदया है विक अशिभव?नों की विनयति क े बावजूद, अपीलक ा को ऊपर संर्गशिण ब्याज को वापस करने क े लिलए विनदmशिश विकया जाना ?ाविहए क्योंविक उपरोक्त घर Oरीदार परिरयोजना से बाहर हो र्गए हैं। ह, इस क को स्वीकार कर े हैं और अपीलक ा को दो,हीने क े भी र उपरोक्त सारणी क े अनुसार ेरह घर Oरीदारों को ब्याज भुर्ग ान वापस करने क े लिलए विनदmश दे े हैं। श्रेणी 3

167. 'आर्शिथक सहाय ा योजना' क े ह घर Oरीदारः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) आर्शिथक सहाय ा योजना क े ह,कान Oरीदने वाले क े ना, पर हो, लोन लिलया जा ा है, लेविकन कब्जा वि,लने क अपीलक ा को ईए,आई का भुर्ग ान करना हो ा है। क ु छ,कान Oरीदार आर्शिथक सहाय ा योजना द्वारा शासिस हो े हैं। अपीलक ा द्वारा ईए,आई क े भुर्ग ान,ें ?ूक की र्गई है। (ii) 30 जुलाई 2018 विदनांविक आदेश द्वारा इस न्यायालय ने अपीलाथd को ईए,आई भुर्ग ान जारी रOने का विनदmश विदया। 16,कान Oरीदारों ने बकाया ईए,आई क े भुर्ग ान क े आदेश क े लिलए इस न्यायालय,ें अपील विकया। (iii) न्यायालय वि,त्र ने घर Oरीदारों को देय ब्याज को सारणीबद्ध विकया है (जैसा विक उनक े द्वारा और अपीलक ा द्वारा अलर्ग-अलर्ग संर्गशिण विकया है):

K. सं. ना,,कान Oरीदार द्वारा इंविर्ग ब्याज सुपरटेक द्वारा इंविर्ग ब्याज आईए सं. एओआर का ना, 1 परविंवदर सिंसह रू. 11,71,110 रू. 8,81,847 24825, 24839, 24848, 24972, 24973, 24974, 24978, 24984, Oे ान एं. क ं. 2 अवि,,ंर्गला रू. 12,09,052 रू. 12,09,052 3 विवनोद क ु,ार रू. 11,73,902 रू. 8,43,073 4 शैलेश क ु,ार सिंसह रू. 11,69,640 रू. 8,51,310 5 देव व,ा रू. 11,73,919 रू. 8,58,311 ६. ६ नवीन क ु,ार रू. 16,08,467 रू. 11,07,792 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 24985, 24989, 249992,24 996 24997, 29374 & 29386/202 7 वैभव वि,श्रा रू. 11,66,778 रू. 8,37,666 8,ंदार हस्थिस् कर रू. 11,66,826 रू. 8,53,381 9 आशीर्ष श,ा रू. 11,73,092 रू. 8,25,030 10 ऋविर्षक े श- तिक्षति जा बावा रू. 11,73,919 रू. 8,39,984 11 बब्नी सिंसह रू. 11,74,308 रू. 8,40,383 12 रोवि, अग्रवाल रू. 11,66,182 रू. 8,59,768 13 भूपेंद्र-पूरन दास प्रुथी रू. 11,51,855 रू. 9,43,782 14 विनलय आष्,ी रू. 11,67,529 रू. 8,29,579 15,नोज क ु,ार प,नेजा (*) रू. 8,10,866 Nil 25950/18 क ृ ष्ण,ोहन क े. 16 संदीप जैन (*) रू. 8,10,866 Nil 67854 & 67856/202 अनुज र्गर्ग न्यायालय वि,त्र का कथन है विक उपरोक्त संर्गशिण राशिश का भुर्ग ान विकया जाए।

168. न्यायालय वि,त्र ने कहा विक यविद भवनों को ध्वस् करने का आदेश विदया जा ा है, ो अपीलक ा आवास ऋणों को Oत्, कर सक ा है और घर Oरीदारों द्वारा योर्गदान की र्गई राशिश को ऐसे ब्याज क े साथ वापस कर सक ा है जैसा विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह न्यायालय विन ारिर करे।दूसरी ओर, यविद इ,ार ें बनी रह ी हैं, ो अपीलक ा को बकाया ईए,आई का भुर्ग ान करने और उन्हें कब्जे क भुर्ग ान जारी रOने का विनदmश विदया जा सक ा है। ?ूंविक व,ान फ ै सले,ें इस न्यायालय क े विनदmशों क े ह भवनों को ध्वस् करने का आदेश विदया र्गया है, इसलिलए अपीलक ा हो, लोन को बंद कर देर्गा और दो,हीने क े भी र उपयुक्त घर Oरीदारों,ें से प्रत्येक द्वारा योर्गदान की र्गई राशिश को बारह प्रति श वार्षिर्षक की दर से वापस करेर्गा. श्रेणी 4

169. ऐसे दो आईए हैं सिजन,ें घर Oरीदारों का अपीलाथd क े साथ घर Oरीदारों को देय राशिशयों क े संबं,ें विववाद हैः (i) आइए नंबर 56187/2021,ें, श्री डीपी वित्रपाठी को एपेक्स,ें फ्ल ै ट नंबर 1105 आवंविट विकया र्गया था। फ्ल ै ट क े लिलए क ु ल 31,70,410 रुपये का भुर्ग ान विकया र्गया था। इस राशिश,ें से 14,25,000 रुपये ऋण द्वारा विवत्त पोविर्ष विकए र्गए थे। अपीलक ा ने इस न्यायालय क े एक आदेश क े अनुसार ऋण का भुर्ग ान विकया।हालांविक, आवेदक ने फ्ल ै ट क े लिलए अपने कोर्ष से 17,45,410 रुपये की शेर्ष राशिश और 6,58,700 रुपये ऋण पुनभुर्ग ान क े रूप,ें, अपीलक ा द्वारा इसका अंति, रूप से विनपटान विकए जाने से पहले भुर्ग ान विकया है। 27,हीनों क े लिलए 5,20,315 रुपये का आरओआई भुर्ग ान अपीलक ा से प्राप्त हुआ है। इस प्रकार, आवेदक का पक्ष यह है विक आवेदक द्वारा 18,83,795 रुपये की राशिश विनवेश की र्गई है, सिजसे वापस करने का आदेश विदया जा सक ा है। इसक े विवपरी, अपीलक ा ने कहा है विक इस विववाद को ऋण वसूली न्यायाति करण द्वारा सुलझा लिलया र्गया है और क ु छ भी देय नहीं है; और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ii) आइए नंबर 67028/2017,ें, श्री राज विकशोर ने फ्ल ै ट नंबर 3507 Oरीदा था, सिजसक े संबं,ें राशिश ब्याज क े साथ वापस कर दी र्गई है। अंति, भुर्ग ान क े लिलए 67,319 रुपये का ?ेक सं. 213233 ?ूक क े कारण भुनाया नहीं जा सका। न्यायालय वि,त्र ने सुझाव विदया है विक अपीलक ा को इस भुर्ग ान से संबंति एक नया ?ेक जारी करने का विनदmश विदया जा सक ा है।

170. आइए नंबर 56187/2021 क े संबं,ें, क्योंविक इस आइए,ें भुर्ग ान से संबंति अं र्षिनविह विववाद लंविब है, इसे अलर्ग विकया र्गया है और अलर्ग से सुनवाई की जाएर्गी। आइए सं. 67028/2017,,ें अपीलक ा को एक,हीने क े भी र आवेदक को 67,319 रुपये की राशिश क े लिलए एक नया ?ेक प्रदान करने का विनदmश विदया जा ा है। श्रेणी 5

171. घर Oरीदने वालों का आवेदन सिजसे विनष्फल बना विदया र्गया है।न्यायालय वि,त्र,ें उन आवेदनों को सारणीबद्ध विकया र्गया है, सिजन्हें विनष्फल घोविर्ष विकया र्गया है, सिजस,ें इसक े कारणों को इंविर्ग विकया र्गया हैंः घर Oरीदारों क े आवेदन जो विनष्फल हो र्गए हैं K. सं. घर Oरीदने वालों का ना, आइए नं. आईए सं. एओआर का ना, कारण 1 लिलयो VIII विफल्, प्राइवेट लिलवि,टेड 18211/2018 18217/2018 नी ीश,ैसी ब्याज सविह रिरफ ं ड प्राप्त। 2 राज विकशोर 67028/2017,विह,ा र्गुप्ता ब्याज सविह रिरफ ं ड प्राप्त। 3 संजीव कटारिरया 24785/2017 राजीव सिंसह ब्याज सविह रिरफ ं ड प्राप्त। 4 विर्गरीश अरुण सिंसर्गपो े 175122 & 175124 of यूएनयूसी लीर्गल आवेदकों ने पोटल,ें mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2018 एलएलपी आवेदन नहीं विकया है। 5 दपण भार्गव 137549/2018 र्गोपाल झा आवेदक ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 6 1) अरविंवद कौर सोढी 2) अ,रजी सिंसह राणा और जसजी कौर 18064- 18066/2020 र्गोपाल झा आवेदकों ने पोटल,ें आवेदन नहीं विकया है। 7 पून, क ु लबीर क ृ ष्णन 6919/2018 अपणा भट्ट यह इस परिरयोजना से संबंति नहीं है, लेविकन यह र्गुड़र्गांव की परिरयोजना से संबंति है। 8 संजय बहल 24785/17 राजीव सिंसह पहले ही 12 प्रति श की दर से रिरफ ं ड भुर्ग ान विकया र्गया। 9 वि,नी कोहली और अन्य 68049/17 पीक े जैन ब्याज क े साथ रिरफ ं ड पहले ही भुर्ग ान विकया र्गया। 10 विवभव विंबदल 96289/17 विंपकी बेहरा ब्याज क े साथ रिरफ ं ड पहले ही भुर्ग ान विकया र्गया। 11 सैयद असद अह,द 11/15 in SLP 14314/14 शां नु क ृ ष्ण आवेदक ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 12 विववेक श,ा और अन्य 12/2015 in SLP 14314/14 राजीव सिंसह आवेदक ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 13 उर्षा रानी और अन्य 14/16 in SLP 14314/14 राजीव सिंसह इस आवेदन,ें कई आवेदक हैं। उन,ें से क ु छ को ब्याज सविह रिरफ ं ड वि,ला। अन्य ने आवेदन नहीं विकया। 14 विवशाल राज सिंसह IA 15/2016 in SLP 14314/14 राजीव सिंसह आवेदक ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 15 ईश्वर क ु,ार सिंसह IA 16/2016 अवि, आनंद ति वारी ब्याज क े साथ रिरफ ं ड पहले ही भुर्ग ान विकया र्गया। 16 संजीव कटारिरया IA 17/2016 in राजीव सिंसह ब्याज क े साथ रिरफ ं ड पहले mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA SLP 14314/14 ही भुर्ग ान विकया र्गया। 17 सुश्री राज विकशोर एवं अन्य IA 18/2016 in SLP 14314/14,विह,ा र्गुप्ता एक आवेदक ने पहले ही ब्याज क े साथ रिरफ ं ड का भुर्ग ान कर विदया है और दूसरे ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 18 वि,नी कोहली और अन्य IA 21/17 in SLP 14314/14 पीक े जैन क ु छ आवेदकों ने पहले ही ब्याज क े साथ रिरफ ं ड का भुर्ग ान कर विदया है और अन्य ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 19 रस्थिश्, अरोड़ा 121826,1218 ए,. सी. ढींर्गरा ब्याज क े साथ रिरफ ं ड पहले ही भुर्ग ान विकया र्गया। 20 सिज ेंद्र क ु,ार सभरवाल एवं अन्य IA 121085/17 राजीव सिंसह क ु छ आवेदकों ने पहले ही ब्याज क े साथ रिरफ ं ड का भुर्ग ान कर विदया है और अन्य ने पोटल पर आवेदन नहीं विकया है। 21 पून, क ु लबीर क ृ ष्णन 14898/18 अपणा भट्ट यह व,ान परिरयोजना से संबंति नहीं है। 22 उर्षा रानी एवं अन्य 35845/21 अवसिज,शिण वित्रपाठी अति कांश आवेदकों को 12 प्रति श क े साथ रिरफ ं ड वि,ल र्गया है। अब वे 14 प्रति श ब्याज ?ाह े हैं। 23,नप्री कौर IA 20/18 & 95793/16 in SLP 14314/14 अऩुप, लाल दास रिरफ ं ड पहले ही ब्याज क े साथ भुर्ग ान विकया जा ?ुका है। 24 संजीव अग्रवाल IA 121841/17 & 121842/17 ए,सी ढींर्गरा ब्याज क े साथ रिरफ ं ड पहले ही भुर्ग ान विकया र्गया ।

172. उपयुक्त आवेदनों का विनस् ारण विनष्फल क े रूप,ें विकया जा ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

173. उपयुक्त क े अन् र्ग अपीलों का विनस् ारण विकया जाएर्गा।अव,ानना याति?काओं का विनस् ारण दनुसार विकया जा ा है।

174. लंविब आवेदन, यविद कोई हो, विनस् ारिर विकए जा े हैं। …………………………………. (न्याय,ूर्ति डॉ. नंजय वाई. ?न्द्र?ूड़) ……………………………... (न्याय,ूर्ति ए,. आर. शाह) नई विदल्ली 31 अर्गस्, 2021 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA