Uttar Pradesh State v. Uttam Singh

Supreme Court of India · 03 Aug 2021
Sanjay Vikash Kaul; Hrishikesh Roy
Civil Appeal No. 4575 of 2021 @ SLP (Crl) No. 20650 of 2019
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The court upheld the entitlement of respondents to compassionate appointment benefits based on continuous departmental service equivalent to regular employment despite lack of formal appointment.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 4575/2021
एसएलपी (सी) सं. 20650/2019 से उत्पन्न
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य अपीलार्थी4 (गण)
बनाम
उत्तम सिंसह प्रत्यर्थी4 (गण)
विनण;य
अनुमति प्रदान की गर्इ;।
JUDGMENT

1. अपीलक ा; ने र्इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े विनण;य को चुनौ ी विदया है सिHसमें उत्तर प्रदेश भ 4 क े ह मृ क आश्रिM अनुक ं पा विनयुविN विनयमावली, 1974 (बाद में र्इसे 'विनयम' कहा Hा ा है) क े ह मामाले में प्रत्यर्थी4 को उसक े विप ा क े मृत्यू क े कारण Hो अपीलार्थी4 क े सार्थी काय;र र्थीा, अनुकम्पा विनयुविN का लाभ विदया गया है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. प्रत्यर्थी4 क े विप ा का पहले ही ट्यूबेल आपरेटर क े पद पर चयन क े पश्चा विनयुNी पाने क े प्रयास क े दौरान अपीलक ा;-विवभाग से एक कानूनी लड़ार्इ; लड़ी र्थीी। उच्च न्यायालय क े आक्षेविप आदेश में कहा गया विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा की चयन प्रविWया अस्पष्ट र्थीी और विनयविम रिरविN क े खिखलाफ र्थीी, सिHसक े ह उन्होंने सिंसचाई विवभाग को सभी अपेतिक्ष दस् ावेH प्रस् ु विकए र्थीे। प्रत्यर्थी4 का मामला यह है विक अपीलक ा;ओं ने र्इस मुद्दे को छह साल से अति क समय क चलाया और वास् विवक विनयुविN 29.01.2003 को हुई। प्रत्यर्थी4 क े विप ा ने विनयविम वे नमान क े बराबर 13 साल की अवति क े खिलए काम करना Hारी रखा और Hब क विक दुभा;ग्य से 09.03.2016 को उनका विन न नहीं हो गया ब क उन्होने अपना पारिरMविमक खिलया।

3. प्रत्यर्थी4 का मामला यह भी है विक अन्य मामलों में, अपीलक ा;ओं ने बलराम और Mीम ी गी ा देवी को विनयुN विकया है, सिHनक े विप ा और पति की Wमशः अंशकाखिलक ट्यूबवेल ऑपरेटस; क े रूप में काय; कर े हुए मुत्यू हुर्इ; और कई अन्य उम्मीदवारों की मृत्यु हो गई, सिHनक े अश्रिभलेख उपलब् नहीं हैं। प्रत्यर्थी4 का क; है विक उसे प्रत्यर्थी4 क े विप ा और अपीलक ा;-विवभाग क े बीच पहले की मुकदमेबाHी क े कारण संभव ः लाभ से वंतिच विकया Hाने वाला एकमात्र व्यविN र्थीा।

4. अपीलक ा;ओं का मामला यह है विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा को विनयविम नहीं विकया गया र्थीा और क े वल 'समान काम क े खिलए समान वे न' क े सिसद्धां पर समान लाभ प्रदान करने से वह विनयविम कम;चारी नहीं बनेगा और र्इस प्रकार प्रत्यर्थी4 अनुक ं पा विनयुविN क े विनयमों क े लाभ का हकदार नहीं है। र्इस संबं में प्रश्नग मामले से ही सबंन्धिन् vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk वाद महाप्रबं क,उत्तरांचल Hल संस्र्थीान बनाम लक्ष्मी देवी आैर अन्य (2009) 7 एससीसी 205 में र्इस न्यायालय क े विनण;य का संदभ; विदया गया है। यह विनयमों क े प्रासंविगक प्रदश; को पुनः प्रस् ु करने क े खिलए उपयोगी होगा Hहां विनयम 2 (ए) (iii) विनम्नानुसार हैः "2. परिरभाषाएँ -.... (क) सरकारी कम;चारी "से उत्तर प्रदेश क े मामलों क े संबं में विनयोसिH एक सरकार कम;चारी अश्रिभप्रे है Hो -

(i) xxxx

(ii) Xxxxx

(iii) हालांविक विनयविम रूप से विनयुविN नहीं की गई र्थीी, लेविकन र्इस रह क े रोHगार में विनयविम रिरविN में ीन साल की विनरं र सेवा में रखा गया र्थीा। स्पष्टीकरण-"विनयविम रूप से विनयुN" से सेवा क े पद पर भ 4 क े खिलए विन ा;रिर प्रविWया क े अनुसार विनयुN विकया Hा ा है, Hैसा भी मामला हो।

5. र्इस प्रकार प्रत्यर्थी4 का क; है विक चूंविक उसक े विप ा 3 साल से अति क समय से विनरं र सेवा में काय;र र्थीे, र्इसखिलए उन्हें सरकारी कम;चारी माना Hाना चाविहए और र्इस प्रकार लाभ प्रत्यर्थी4 को विदया Hाना चाविहए। दूसरी ओर, पूव N विनण;य पर अवलंब ले े हुए Hहां एक ही विनयमों का विवश्लेषण विकया Hा ा है, अपीलक ा;ओं क े खिलए वरिरष्ठ विवद्व अति वNा ने यह माँग कर े हुए दावा विकया विक र्इस न्यायालय ने vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk कहा विक एक व्यविN को विनयविम रूप से विनयुN नहीं विकया है, लेविकन सिHसने अन्यर्थीा 3 साल की विनरं र सेवा में विनयविम रूप से रखा है आैर रिरविN का म लब यह नहीं हो सक ा है विक एक दैविनक पारिरMविमक प्राप्त करने वाले को विनयम का लाभ विमलेगा। हालाँविक, हमने ध्यान विदया विक न्यायालय ने उस मामले क े थ्यों पर विवचार विकया र्थीा सिHसमें कहा गया र्थीा विक लाभ प्रत्यर्थी4 को प्राप्त नहीं होगा। विनयविम रिरविN का अर्थी; एक रिरविN से र्थीा Hो सक्षम प्राति कारी द्वारा स्वीक ृ पदों में हुई र्थीी। मृ क कम;चारी की सेवा को वास् व में विनयविम नहीं विकया गया र्थीा, हालांविक उन्होंने विनयविम ीकरण का दावा विकया है। थ्य यह है विक मृ कम;चारी एक विनयविम वे नमान में वे न आहरिर कर रहा र्थीा, र्इसका म लब यह नहीं र्थीा विक वे एक विनयविम रिरविN क े ह हैं।

6. हम अन्य बा ों क े सार्थी प्रत्यर्थी4 क े विवद्व अति वNा द्वारा अपने सारांश में र्इंविग एक विदलचस्प पहलू पर ध्यान दे सक े हैं (सामान्य या अपीलक ा;ओं ने एक प्रारूप दाखिखल करक े र्इस न्यायालय की सहाय ा करना उतिच नहीं समझा, Hैसा विक अंति म आदेश क े अनुसार विनद|श्रिश विकया र्थीा, काH खिलस्ट मे सूचना क े अलावा!)। प्रत्यर्थी4 ने कहा है विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा क े रोHगार क े 13 वष~ की अवति क े दौरान, उन्हें सिंसचाई विवभाग से पंचाय ी राH विवभाग में 'ग्राम पंचाय विवकास अति कारी' क े रूप में स्र्थीानां रिर विकया गया र्थीा और र्इसक े विवपरी Wम में,यानी, उन्हें अपीलक ा;ओं द्वारा 2 या 3 बार स्र्थीानां रिर विकया गया र्थीा और यहां क विक 15.10.2015,26.11.2015 और 03.12.2015 को राज्य विनवा;चन आयोग द्वारा म दान अति कारी क े रूप में विनयुN विकया गया र्थीा। र्इस प्रकार यह प्रस् ु विकया Hा ा है विक यविद प्रत्यर्थी4 क े विप ा को विनयविम कम;चारी नहीं माना Hा रहा र्थीा, ो र्इस रह क े अं र-विवभागीय स्र्थीानां रण और पुनः स्र्थीानां रण नहीं हो सक े र्थीे। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk र्इ ना ही नहीं, यह क; विदया Hा ा है विक संभव ः ऐसा कोई मामला नहीं होगा Hहां विकसी व्यविN को Hनप्रति विनति त्व अति विनयम, 1951 क े ह ैना विकया गया हो, Hो सरकारी कम;चारी नहीं है। यह र्इस थ्य से अलग है विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा 2 सरकारी ट्यूबवेल क े संचालक र्थीे, सिHन्हें एक विनयविम ट्यूबवेल ऑपरेटर की नौकरी क े बराबर ब ाया गया र्थीा, यानी सुबह 9 बHे से शाम 5 बHे क, Hो विकसानों की मांग क े ह क ु छ समय क 8 घंटे से अति क चला।

7. अपीलक ा;ओं क े विवद्व अति वNा हालांविक यह ब ा े हुए एक स्पष्टीकरण दे े हैं विक र्इन व्यविNयों को मूल रूप से ग्राम पंचाय विवकास अति कारी क े रूप में ैना विकया विवद्व र्थीा आैर र्इन्हें बाद में स्र्थीानां रिर विकया र्थीा और वापस पुनः स्र्थीानां रिर विकया गया र्थीा और उसी क े खिलए चुनौ ी यातिचका को यूपी ग्राम पंचाय अति कारी बनाम दया राम सरोH और अन्य, (2007) 2 एससीसी 138 में विनरस् कर विदया गया र्थीा।

8. यविद हम खण्ड पीठ क े आक्षेविप आदेश की ओर मुड़ े हैं, ो उच्च म न्यायालय ने र्इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूण; पीठ क े विनण;य पर ध्यान विदया Hो उत्तरांचल Hल संस्र्थीान और लक्ष्मी देवी और अन्य, (2009) 7 एससीसी 205 उपरोN 1....... क े मामले में र्इस न्यायालय द्वारा प्रस् ाविव दृविष्टकोण क े अनुरूप है। हालांविक, र्इस क; को नोट विकया Hा ा है विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा को एक अंशकाखिलक ट्यूबवेल ऑपरेटर कहा गया र्थीा, लेविकन उनक े सार्थी हमेशा एक विनयविम कम;चारी क े रूप में व्यवहार विकया गया र्थीा। न्यायालय ने पूव N उसि„खिख विनयम और उसक े द्वारा विदए गए स्पष्टीकरण पर ध्यान विदया, सिHसक े खिलए आवश्यक है विक पद या सेवा में भ 4 क े खिलए विन ा;रिर प्रविWया क े सार्थी एक विनयुविN विकया Hाना चाविहए। प्रत्यर्थी4 क े विप ा क े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk मामले में विनयुविN क े आदेश में 1 पवन क ु मार यादव बनाम उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य (2010) 18 एडीHे 664 6 को सत्यापन क े बाद मानदंडों क े अनुसार उसक े सभी प्रमाण पत्र की Hाँच क े पश्चा र्इसकी श ~ में अस्पष्ट पाया गया। विनयोNा क े रूप में अपीलक ा;ओं द्वारा चयन की एक पूरी प्रविWया आयोसिH की गई र्थीी। पहले उदाहरण में, उन्हें संबंति ट्यूबवेल क े कमांड क्षेत्र का विनवासी नहीं होने क े कारण विनयुविN से र्इनकार कर विदया गया र्थीा, लेविकन यह आ ार उच्च न्यायालय द्वारा 29.01.2003 क े पहले क े आदेश द्वारा न्यातियक दृविष्टकोण से अपरिरहाय; पाया गया र्थीा और फलस्वरूप प्रत्यर्थी4 क े विप ा को विनयुN विकया गया र्थीा। यह मामले क े र्इन विदए गए थ्यों में है विक यह पाया गया है विक लाभ विनयमों क े ह प्रत्यर्थी4 को उपलब् कराया Hाना चाविहए। उच्च न्यायालय द्वारा र्इस विनष्कष; पर पहुंचने क े खिलए थ्यों को पया;प्त पाया है विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा की विनयुविN एक विनयविम रिरविN क े समान र्थीी और र्इसीखिलए उस पृष्ठभूविम में स्र्थीापना से विनयविम वे नमान की अनुमति दी गई र्थीी और वह र्इस प्रकार पूव N विनयमों क े मापदंडों को सं ुष्ट विकया।

9. हम विदए गए थ्यात्मक परिरदृश्य में उच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए दृविष्टकोण क े सार्थी पूण; रूप से सहम हैं। हम कह सक े हैं, ऐसा प्र ी हो ा है विक अपीलक ा;ओं ने उन कारणों क े खिलए, Hो उनक े खिलए सबसे अच्छी रह से ज्ञा हैं, प्रत्यर्थी4 क े विप ा को उनक े बकाया भुग ान से र्इनकार करने का प्रयास विकया, भले ही विनयुविN एक उतिच प्रविWया क े माध्यम से हो। उच्च न्यायालय ने प्रत्यर्थी4 क े विप ा को रोHगार से वंतिच करने क े रीक े क े खिखलाफ विवरो विकया। यही कारण है विक शुरू से ही उन्हें एक विनयविम कम;चारी क े लाभ विदए गए र्थीे, Hबविक उन्हें एक पाट; टार्इम ट्यूबवेल ऑपरेटर क े रूप में नाविम विकया गया र्थीा। उच्च न्यायालय ने पाया है विक ये थ्य ब ा े हैं विक विनयुविN विनयविम रिरविN क े खिखलाफ र्थीी, हालांविक र्इसे र्इस थ्य क े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk अलावा 'पाट; टार्इम' विनयुविN क े रूप में Hारी रखा गया र्थीा विक उनक े काम क े घंटे एक विनयविम कम;चारी क े र्थीे Hो उन्हें समान काम क े खिलए समान वे न दे रहे र्थीे।

10. हमने र्इस थ्य पर भी ध्यान विदया है विक उनक े रोHगार क े 13 लंबे वष~ क े दौरान और र्इससे पहले विक उनक े बकाया प्राप्त करने क े खिलए 6 साल की अवति क े खिलए अपीलक ा;ओं से लड़ाई की गई र्थीी, प्रत्यर्थी4 क े विप ा को भी एक विवभाग से दूसरे विवभाग में स्र्थीानां रिर कर विदया गया र्थीा, आम ौर पर एक पहलू Hो एक ऐसे व्यविN क े सार्थी Hुड़ा होगा सिHसक े पास एक विनयविम रोHगार र्थीा।सबसे महत्वपूण; पहलू यह है विक प्रत्यर्थी4 क े विप ा की एक विनयविम विनयुविN नहीं माना Hा ा र्थीा, विवभाग क े पास चुनाव क;व्यों को विनभाने क े खिलए राज्य चुनाव आयोग को अपनी सेवाओं को स्वयंसेवक बनाने का कोई अवसर नहीं होगा, Hो क े वल एक सरकारी कम;चारी द्वारा विकया Hा सक ा र्थीा, Hैसा विक Hनप्रति विनति त्व अति विनयम, 1950 की ारा 159 क े ह विनर्दिदष्ट है ("क ु छ अति कारिरयों क े कम;चारी चुनाव काय; क े खिलए उपलब् कराए Hाएंगे")।

11. व;मान मामला र्इस प्रकार एक है Hो अपने विदए गए थ्यात्मक परिरदृश्य में अHीब है सिHस पर हमने ऊपर चचा; की है और र्इस प्रकार सभी व्यावहारिरक उद्देश्यों क े खिलए, यह एक विनयविम रिरविN क े खिखलाफ विनयुविN का मामला है। प्रत्यर्थी4 क े विप ा को अपीलक ा;ओं क े पूव N आचरण द्वारा एक विनयविम कम;चारी क े रूप में माना Hा ा र्थीा, भले ही उन्हें अंशकाखिलक ट्यूबवेल ऑपरेटर क े रूप में ब ाया गया र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk

12. हम आगे कहना चाह े हैं विक अपीलक ा;ओं द्वारा विदए गए उदाहरणों में से, कम से कम 2 व्यविN, Hैसा विक पहले उ„ेख विकया गया र्थीा, एक समान परिरदृश्य में काय;र र्थीे, बलराम और Mीम ी गी ा देवी, सिHनक े विप ा और पति की Wमशः अंशकाखिलक ट्यूबवेल ऑपरेटरों क े रूप में मृत्यु हुई ।यह काफी स्पष्ट है विक अपीलक ा; और प्रत्यर्थी4 क े मृ क विप ा क े बीच विपछले मुकदमेबाHी से प्रत्यर्थी4 क े खिखलाफ भेदभाव है। उसी क े खिलए कोई सं ोषHनक स्पष्टीकरण नहीं है और हम अपीलक ा;-विवभाग को र्इस रह से प्रत्यर्थी4 को परेशान करने की अनुमति नहीं दे सक े।

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13. र्इस प्रकार हमारी राय है विक उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा अपनायी प्रविWया कानून क े अनुसार है और आक्षेविप आदेश विकसी भी हस् क्षेप क े खिलए नहीं कह ा है।

14. अपील को पूरे रह से खारिरH कर विदया Hा ा है।

15. आदेश की ारीख से एक महीने क े भी र प्रत्यर्थी4 क े मामले में आवश्यक आदेश Hारी विकए Hाएं। [न्यायमूर्ति, संHय विकशन कौल] [न्यायमूर्ति हृविषक े श रॉय] नई विद„ी 03 अगस्, 2021 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk