Allahabad Bank v. Krishna Pal Singh

Supreme Court of India · 20 Sep 2021 · 2021 INSC 510
R. Subhash Reddy; Sanjeev Khanna
Civil Appeal No _____ /2021
2021 INSC 510
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that where dismissal lacks conclusive proof of misconduct and reinstatement is impractical due to superannuation, compensation is an appropriate remedy, modifying the High Court's order for reinstatement.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - _____ /2021
(विवशेष अनुमति याति(का (सी) सं. 19648/ 2019 से उत्पन्न)
इलाहाबाद बैंक और अन्य ...... अपीलार्थी9 (गण)
बनाम

ृ ष्ण पाल सिंसह ..... प्रत्यर्थी9
विनण?य
न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी,
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई।

2. यह अपील अपीलक ा?-बैंक द्वारा प्रस् ु की जा ी है, जो सर्विवस सिंसगल नम्बर -692/1998 में पारिर इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ बें( क े 25.04.2019 क े आदेश से व्यथिर्थी है। पूव क्त आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने क ें द्र सरकार क े औद्योविगक न्यायाति करण-सह-श्रम न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 07.10.1997 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2021 INSC 510 को रद्द कर विदया है, जहां क यह प्रति वादी को विपछले बयान क े सार्थी बहाल करने से इनकार करने और विनद\श जारी करने से संबंति है, सभी परिरणामी लाभों क े सार्थी प्रत्यर्थी9 को बहाल करने क े लिलए अपीलक ा? को आदेश जारी विकया जा ा है।

3. उक्त प्रति वादी को 23.09.1985 को अपीलक ा?-इलाहाबाद बैंक में लिलविपक- सह-कोषाध्यक्ष क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा और उनकी सेवा की पुविc 24.03.1986 को की गई र्थीी। वष? 1989 क े दौरान, वह औरंगाबाद शाखा, सिजला लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश में ैना र्थीे। 08.02.1989 को, बैंक में आग दुर्घ?टना हुई और अज्ञा व्यविक्तयों द्वारा बैंक अथिभलेखों को जलाने की र्घटना क े संबं में एक प्रार्थीविमकी दज? की गई। प्रत्यर्थी9 की विमलीभग पर संदेह कर े हुए, उसे 13.02.1989 क े आदेश क े ह विनलंविब कर विदया गया र्थीा और उसक े लिखलाफ अनुशासनात्मक काय?वाही शुरू की गई र्थीी। अं ः, जां( पूरी होने पर, प्रत्यर्थी9 को 22.08.1991 क े आदेश क े ह सेवा से बखा?स् कर विदया गया। उनक े द्वारा प्रस् ु की गई विवभागीय अपील को अपीलीय प्राति कारी ने 27.02.1992 को खारिरज कर विदया और आगे, दया याति(का को भी आदेश विदनांक 27.05.1992 क े ह खारिरज कर विदया गया।

4. प्रति वादी ने औद्योविगक विववाद को उठाया और उसी को औद्योविगक विववाद संख्या 98/1994 में क ें द्र सरकार क े औद्योविगक न्यायाति करण -सह-श्रम न्यायालय, कानपुर को भेजा गया। न्यायाति करण-सह-श्रम न्यायालय ने 07.10.1997 क े आदेश जारी कर विदया गया और कहा है विक प्रत्यर्थी9 क े लिखलाफ कथिर्थी कदा(ार साविब नहीं हुआ है, लेविकन इस आ ार पर विक विवश्वास क े अभाव में प्रबं न द्वारा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk एक मामला बनाया गया है और बहाली क े आदेश क े बदले रु 30,000/- क े मुआवजा क े भुग ान का आदेश विदया है। प्रत्यर्थी9-कम?(ारी, औद्योविगक न्यायाति करण-सह-श्रम न्यायालय क े आदेश से व्यथिर्थी होकर वापस मजदूरी क े सार्थी बहाली की मांग कर े हुए, सर्विवस सेवा नम्बर 692/1998 में रिरट याति(का क े माध्यम से मामले को उच्च न्यायालय में ले गया। उच्च न्यायालय ने 25.04.2019 को आक्षेविप आदेश से, सभी परिरणामी लाभों क े सार्थी प्रत्यर्थी9 को बहाल करने का आदेश विदया है। इस अपील में उक्त आदेश को (ुनौ ी का विवषय बनाया गया है। नोविटस जारी कर े हुए, 23.08.2019 क े आदेश को रद्द कर े हुए, इस न्यायालय ने उच्च न्यायालय द्वारा आदेश विदए गए बैक मजदूरी क े सार्थी बहाली क े विनद\श क े लिखलाफ अं रिरम राह दी।

5. अपीलक ा?-बैंक क े लिलए विवद्व अति वक्ता श्री राजेश क ु मार गौ म और प्रत्यर्थी9 क े लिलए उपस्थिस्र्थी विवद्व अति वक्ता श्री राक े श नेजा को हमने सुना।

6. संबंति बैंक क े अथिभलेख को जलाने से संबंति र्घटना में प्रत्यर्थी9 की भागीदारी का आरोप लगाया गया र्थीा सिजसक े ह बैंक द्वारा बखा?स् गी का आदेश पारिर विकया गया र्थीा। श्री बालक राम पूव क्त र्घटना में मुख्य अथिभयुक्त र्थीे, और प्रत्यर्थी9 श्री बालक राम क े विमत्र होने क े आ ार पर संदेह विकया गया र्थीा विक गवाहों में से एक श्री राम सिंसह, MW-1, ने अनुशासनात्मक जां( की काय?वाही में यह दशा?या है विक श्री बालक राम और अन्य र्घटना की ारीख पर एक सार्थी इकट्ठे हुए र्थीे। औद्योविगक न्यायाति करण ने पाया है विक हालांविक यह एक मजबू संदेह र्थीा, लेविकन सेवा से बखा?स् करने क े लिलए उनक े लिखलाफ कदा(ार को साविब करने क े लिलए पया?प्त साक्ष्य नहीं र्थीे। औद्योविगक न्यायाति करण ने पाया है विक बैंक ने प्रत्यर्थी9 पर विवश्वास vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk खो विदया है और बहाली क े बदले में 30,000/- रुपये क े मौविद्रक मुआवजे क े भुग ान का आदेश विदया है। जब उक्त आदेश को उच्च न्यायालय क े समक्ष (ुनौ ी दी गई र्थीी, ो यह पाया गया है विक संदेह, हालांविक, गंभीर हो सक ा है, विकसी भी परिरस्थिस्र्थीति में कानूनी प्रमाण का विवकल्प नहीं हो सक ा है। आगे एक विनष्कष? दज? विकया जा ा है विक अपीलक ा?ओं ने औद्योविगक न्यायाति करण द्वारा पारिर आदेश को (ुनौ ी नहीं दी है, आैर उसक े द्वारा सभी परिरणामी लाभों क े सार्थी बहाली का विनद\श देकर रिरट याति(का को अनुमति दी है।

7. इस मामले में, यह ध्यान विदया जाना (ाविहए विक प्रति वादी को 23.09.1985 को क्लक ? -कम-क ै थिशयर क े रूप में बैंक में विनयुक्त विकया गया र्थीा और उसे 13.02.1989 को विनलंविब कर विदया गया र्थीा और 22.08.1991 क े आदेश की सेवा से बखा?स् कर विदया गया र्थीा। विनलंबन अवति सविह, वह बखा?स् गी से पहले लगभग छह साल क बैंक सेवा में रहे। इसक े बाद, वह विवभागीय अपीलीय प्राति करण क े समक्ष असफल रहे और औद्योविगक न्यायाति करण ने बहाली क े बदले 30,000/- रुपये क े एकमुश् मौविद्रक मुआवजे का भुग ान करने का आदेश विदया।

8. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा बहाली क े लिलए जारी विकए गए विनद\शों को इस न्यायालय ने 23.08.2019 को रोक विदया र्थीा। इन काय?वाविहयों क े लंविब रहने क े दौरान, प्रति वादी-कम?(ारी ने सेवाविनवृलित्त की आयु प्राप्त कर ली र्थीी। हालांविक संदेह मजबू र्थीा लेविकन कम?(ारी को बखा?स् करने क े लिलए अथिभलेख पर कोई स्वीकाय? सबू नहीं र्थीा। हालांविक, जैसा विक कम?(ारी ने क े वल लगभग छह साल की अवति क े लिलए काम विकया है और वह पहले ही सेवाविनवृलित्त की आयु प्राप्त कर (ुका है, यह उच्च न्यायालय द्वारा दी गई राह क े संशो न क े लिलए एक उपयुक्त मामला है। पूण? विपछले vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk वे न क े सार्थी बहाली हर मामले में स्व(ालिल नहीं है, जहां समाविप्त/बखा?स् गी कानून क े ह विन ा?रिर प्रविyया क े अनुसार नहीं पाई जा ी है। यह देख े हुए विक प्रति वादी क े वल लगभग छह वषz क े लिलए बैंक की प्रभावी सेवा में र्थीा और वह 1991 से सेवा से बाहर है, और इस बी(, प्रति वादी ने सेवाविनवृलित्त की आयु प्राप्त कर ली र्थीी, हम इसे उति( समझ े हैं विक एकमुश् मौविद्रक मुआवजा देकर न्याय का लक्ष्य पूरा विकया जाएगा। हम दनुसार आज से आठ सप्ताह की अवति क े भी र प्रति वादी को 15 लाख रुपये क े एकमुश् मुआवजे का प्रत्यक्ष भुग ान कर े हैं। पूव क्त अवति क े भी र समान भुग ान करने में विवफल रहने पर, प्रति वादी भुग ान क 6% वार्विषक ब्याज क े लिलए हकदार है।

9. यह सिसविवल अपील आंथिशक रूप से अनुम है।25. 04. 2019 क े उच्च न्यायालय क े आदेश को ऊपर ब ाई गई सीमा क संशोति विकया गया है।...................................... (न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी)................................. ( न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ) नई विदल्ली 20 सिस ंबर, 2021 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk