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भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 865/2021
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य .... अपीलार्थी-
बनाम
प्रिंप्रसिसपल अभय नंदन इंटर कॉलेज और अन्य ....प्रत्यर्थी-
क
े सार्थी
सिसविवल अपील संख्या 2816/2021
सिसविवल अपील संख्या 2817/2021
सिसविवल अपील संख्या 2753/2021
सिसविवल अपील संख्या 866/2021
सिसविवल अपील संख्या 2754/2021
सिसविवल अपील संख्या 2819/2021
सिसविवल अपील संख्या 2820/2021
सिसविवल अपील संख्या 2818/2021
सिसविवल अपील संख्या 2815/2021 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
विन र्ण; य
न्यायमूर्ति एम. एम. सुन्द्रेश
JUDGMENT
1. पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता को सुना।
2. हमने दायर कये गए दस् ावेजों का भी परिरशीलन विकया है और दायर लिललिL कM क े सार्थी पक्षकारों क े शपर्थीपत्रों पर विवचार विकया है।
3. उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तिPवीजन बेंच क े विदनांक 19.11.2018 क े को चुनौ ी दे े हुए अपील दायर दी गई है, सिजसमें अव ारिर विकया गया है विक विवविनयमन 101 द इंटरमीतिPएट शिशक्षा अति विनयम, 1921 (ए स्मिस्मनपश्चा 'अति विनयम' क े रूप में संदर्भिभ ) क े ह संशो न असंवै ाविनक है। संयोगवश पूव क्त विनर्ण;य पर ध्यान देकर क ु छ अन्य अपीलों का विनपटारा विकया गया।ऐसे व्यविक्तयों द्वारा हस् क्षेप/प्रत्यारोविप करने क े लिलए भी आवेदन दायर विकए गए हैं सिजन्हें इन संस्र्थीानों द्वारा च ुर्थी; श्रेर्णी कम;चारी क े रूप में भी विनयुक्त विकया जा ा है।इस प्रकार, इन सभी अपीलों को एक सामान्य आदेश द्वारा विनस् ारिर विकया जा ा है। अति विनयम: -
4. इंटरमीतिPएट शिशक्षा अति विनयम, 1921 काफी पुराना है सिजसका अस्मिस् त्व स्व ंत्र ा से पहले का है और आज क विवद्यमान है।अति विनयमन का उद्देश्य माध्यविमक शिशक्षा को विवविनयविम और पय;वेक्षर्ण करना है।अति विनयम की ारा 9 की उप- ारा 4 राज्य सरकार की शविक्तयों की बा कर ी है और राज्य सरकार को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उतिच आदेश पारिर करने या अति विनयम क े प्राव ानों क े अनुरूप पया;प्त कार;वाई करने की सुविव ा दे ी है और राज्य सरकार विकसी भी मामले क े संबं में संशो न या बचाव या कोई विवविनयमन कर सक ी है: “ ारा 9-राज्य सरकार की शविक्त..... (4) राज्य सरकार की राय में जब भी त्काल कार;वाई करना आवश्यक या समीचीन हो ो वह पूव क्त प्राव ानों क े ह बोP; को कोई संदभ; विदए विबना, ऐसा आदेश पारिर कर सक ी है या इस अति विनयम क े अनुरूप ऐसी अन्य कार;वाई कर सक ी है, जैसा वह आवश्यक समझे, और विवशेष रूप से, ऐसे आदेश द्वारा विकसी भी मामले क े संबं में संशोति या रद्द या कोई विवविनयम बना सक ा है और दनुसार बोP; को ुरं सूतिच करेगा।”
5. अति विनयम की ारा 16 जी संस्र्थीानों, शिशक्षकों और अन्य कम;चारिरयों क े प्रमुL की सेवा की श M से संबंति है।उप - ारा (2) विवविनयमन की शुरूआ की सुविव ा प्रदान कर ी है सिजसे विवशिभन्न गति विवति यों जैसे परिरवीक्षा, वे नमान, सेवा हस् ां रर्ण, छ ु ट्टी का अनुदान आविद क बढ़ाया जा सक ा है। यह ब ाने की आवश्यक ा नहीं है विक यह प्राव ान ऐसे संस्र्थीानों में विनयोसिज व्यविक्त की सेवा की श M की बा कर ा है: “ ारा 16 जी-संस्र्थीानों क े प्रमुL, शिशक्षकों और अन्य कम;चारिरयों की सेवा की श q: (1) विकसी मान्य ा प्राप्त संस्र्थीान में काय;र प्रत्येक व्यविक्त सेवा की ऐसी श M द्वारा शासिस होगा जैसा विक विवविनयमों द्वारा विन ा;रिर विकया जा सक ा है और प्रबं न और ऐसे कम;चारी क े बीच कोई भी समझौ ा जहां क वह इस अति विनयम क े प्राव ानों या विवविनयमों क े सार्थी असंग है, शून्य होगा। (2) उप- ारा (1) द्वारा प्रदत्त शविक्तयों की व्यापक ा क े पक्षपा क े विबना, विवविनयम विदया जा सक ा है- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (क) परिरवीक्षा की अवति, पुविrकरर्ण की श q और पदोन्नति और दंP क े लिलए प्रविsया और श q 2 [(नैति क अ म ा से जुड़े अपरा क े लिलए विनलंबन लंविब या जांच क े विवचार में या विकसी आपराति क मामले में जांच, जांच या मुकदमे क े लंविब रहने क े दौरान)] और सूचना क े सार्थी सेवा क े विनलंबन और समाविप्त की अवति क े लिलए परिरलस्मिw यां; (L) वे नमान और वे न का भुग ान; (c) एक मान्य ा प्राप्त संस्र्थीान से दूसरे में सेवा का स्र्थीानां रर्ण; (d) छ ु ट्टी और भविवष्य विनति और अन्य लाभ प्रदान करना; र्थीा (e) काय; और सेवा क े रिरकॉP; का रLरLाव।
6. हालाँविक व;मान मामले क े लिलए विवशिभन्न विवषयों से संबंति अति विनयम क े ह विवविनयम बनाए गए हैं, उक्त विवविनयमों का क े वल अध्याय III प्रासंविगक है, जो "सेवा की श M" से संबंति है। विवविनयमन 101:-
7. विवविनयमन 101 को विदनांक 28.08.1992 को परिरषद 9/592 क े माध्यम से Pाला गया र्थीा और सरकारी अति सूचना संख्या 400/15-7-2 (1)-90 विदनांक 30.07.1992 क े माध्यम से विनम्नलिललिL रीक े से अति सूतिच विकया गया र्थीा: “विनरीक्षक की पूव; स्वीक ृ ति क े अलावा विनयुविक्त प्राति कारी विकसी मान्य ा प्राप्त सहाय ा प्राप्त संस्र्थीान क े गैर-शिशक्षर्ण पद की कोई रिरविक्त नहीं भरेगा।”
8. इसे अति सूचना संख्या 300/XV-7-2 (1)/90 विदनांक 02.02.1995 क े माध्यम से विनम्नानुसार प्रति स्र्थीाविप विकया गया र्थीा: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds “विनयुविक्त प्राति कारी, विनरीक्षक क े पूवा;नुमोदन क े विबना विकसी मान्य ा प्राप्त सहाय ा प्राप्त संस्र्थीान क े गैर-शैक्षशिर्णक पद क े विकसी भी रिरक्त पद को नहीं भरेगा: परन् ु जमादार क े पद पर रिरविक्त को भरने की अनुमति विनरीक्षक द्वारा दी जा सक े गी।"
9. विदनांक 23.01.2008 को कम;चारिरयों क े व्यय को विवविनयविम करने और कम करने की दृविr से उत्तर प्रदेश राज्य (प्रर्थीम अपीलक ा;) द्वारा 'च ुर्थी;' श्रेर्णी में कोई नया पद सृसिज न करने का नीति ग विनर्ण;य लिलया गया र्थीा और जहाँ भी आवश्यक हो, "आउटसोर्सिंसग" क े माध्यम से काय; विकया जा सक ा है।इसक े बाद, छठे क ें द्रीय वे न आयोग द्वारा माच;, 2008 में इस आशय की सिसफारिरश की गई र्थीी विक विकसी नई भ - की मांग करने क े बजाय च ुर्थी; श्रेर्णी क े कम;चारिरयों की 'आउटसोर्सिंसग' होना क े वल उतिच होगा।
10. विवविनयम 101 एक बार विफर अति सूचना संख्या 9/898 विदनांक 31.12.2009 क े माध्यम से एक संशो न क े माध्यम से लागू हुआ, जो इस प्रकार है: “विनयुविक्त प्राति कारी मान्य ा प्राप्त सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों क े गैर -शिशक्षर्ण कम;चारिरयों की विकसी भी रिरविक्त को विनरीक्षक क े अनुमोदन क े विबना नहीं भरेगा, इस प्रति बं क े अ ीन विक सिजला विवद्यालय विनरीक्षक शिशक्षा विनदेशक (माध्यविमक शिशक्षा) को रिरविक्तयों की कु ल संख्या और रिरविक्तयों को भरने क े लिलए औतिचत्य प्रस् ु करने वाले छात्रों की संख्या विदLा े हुए उपलw कराएगा।शिशक्षा विनदेशक (माध्यविमक शिशक्षा) से आदेश प्राप्त होने पर सिजला विवद्यालय विनरीक्षक उक्त रिरविक्तयों को भरने क े लिलए विनयुविक्त प्राति कारी को अनुमति देगा; और ऐसी अनुमति दे े समय वह सरकार द्वारा विनर्दिदr आरक्षर्ण विनयमों और पदों क े औतिचत्य में विन ा;रिर मानदंPों का पालन करना सुविनतिश्च करेगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवविनयमन में पूव क्त संशो न त्काल प्रभाव से लागू होगा।”
11. छठे क ें द्रीय वे न आयोग द्वारा की गई सिसफारिरशों को ध्यान में रL े हुए सरकारी आदेश विदनांक 08.09.2010 और 06.01.2011 को पारिर विकया गया सिजससे यह सभी सरकारी विवभागों और सहाय ा प्राप्त स्क ू लों पर लागू हो गया, इस प्रकार च ुर्थी; श्रेर्णी क े कम;चारिरयों की नई भ - क े लिलए नहीं जाने का विनर्ण;य लिलया गया और आगे विनदˆश विदया गया विक रिरक्त विकए जाने वाले पद से संबंति कोई भी व्यवस्र्थीा क े वल 'आउटसोर्सिंसग' क े माध्यम से की जा सक ी है।सभी विह ारकों को लिलए गए विनर्ण;य क े बारे में सूतिच करने क े लिलए उपयुक्त संचार भेजा गया र्थीा।
12. उक्त विनर्ण;य क े बाद, विवविनयमन 101 को एक बार विफर सरकारी आदेश विदनांक 04.09.2013 द्वारा संशोति विकया गया र्थीा, सिजसे दनुसार विदनांक 24.04.2014 को अति सूतिच विकया गया र्थीा।उक्त संशो न का प्रभाव च ुर्थी; श्रेर्णी क े कम;चारिरयों क े पद को बनाना है, सिजन्हें अब क 'आउटसोर्सिंसग' क े माध्यम से संस्र्थीानों द्वारा भरा जाना र्थीा।इसलिलए, दनुसार स्र्थीायी पदों को समाप्त कर विदया गया र्थीा सिजससे, 'आउटसोर्सिंसग' क े माध्यम से विनयुविक्त की विवति को प्रति स्र्थीाविप विकया गया र्थीा। रोजगार क े दौरान उन कम;चारिरयों क े आशिश्र ों की मृत्यु क े लिलए क े वल एक अपवाद बनाया गया है। संशोति विवविनयमन: “101. विनयुविक्त प्राति कारी विनरीक्षक क े पूव; अनुमोदन क े अलावा विकसी भी मान्य ा प्राप्त या सहाय ा प्राप्त संस्र्थीान में गैर-शिशक्षर्ण स्टाफ (लिलविपक संवग;) क े विकसी भी रिरक्त पद को नहीं भरेगा; इस प्रति बं क े सार्थी विक सिजला विवद्यालय विनरीक्षक रिरविक्तयों की कु ल संख्या शिशक्षा विनदेशक (माध्यविमक शिशक्षा) को उपलw कराएगा और संस्र्थीान में छात्रों की संख्या को प्रदर्भिश कर े हुए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds पदों को भरने का औतिचत्य भी ब ाएगा।शिशक्षा विनदेशक (माध्यविमक शिशक्षा) से आदेश प्राप्त होने पर सिजला विवद्यालय विनरीक्षक उक्त रिरविक्तयों (च ुर्थी; श्रेर्णी क े पदों की रिरविक्तयों को छोड़कर ) को भरने क े लिलए विनयुविक्त प्राति कारी को अनुमति देगा और अनुमति दे े समय यह सुविनतिश्च करेगा पदों क े औतिचत्य में सरकार द्वारा विनर्दिदr आरक्षर्ण विनयमों क े सार्थी -सार्थी विन ा;रिर मानदंPों का अनुपालन। च ुर्थी; श्रेर्णी रिरविक्तयों क े संबं में, क े वल आउटसोर्सिंसग क े माध्यम से व्यवस्र्थीा की जाएगी; लेविकन संबंति विनयम, 1981, समय-समय पर संशोति विकए गए, गैर-सरकारी सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों क े शिशक्षर्ण या गैर -शिशक्षर्ण कम;चारिरयों क े आशिश्र ों की भ - क े लिलए, जो विक च ुर्थी; श्रेर्णी क े रिरक्त पदों पर की जाने वाली विनयुविक्तयों क े संबं में लागू होंगे।” सा वां क ें द्रीय वे न आयोग: -
13. सा वें क ें द्रीय वे न आयोग की रिरपोट; द्वारा छठे क ें द्रीय वे न आयोग में की गई सिसफारिरशों को इसक े काया;न्वयन में 'साव ानी' शwद क े सार्थी दोहराया गया। दनुसार, विवत्तीय बा ाओं और दक्ष ा को ध्यान में रL े हुए, 'आउटसोर्सिंसग' की आवश्यक ा को एक बार विफर दोहराया गया: रिरपोट; क े प्रस् र 3.72 और 3.83 “3.72 सामान्य आर्भिर्थीक विनयम अर्थी;व्यवस्र्थीा और दक्ष ा क े विह में सेवाओं की आउटसोर्सिंसग का उपबं कर े हैं।ठेक े दारों की पहचान और विनविवदा प्रविsया पर विनयमों में व्यापक माग;दश;न प्रदान विकया जा ा है। ीन प्रकार की संविवदा विनयुविक्तयां हो ी हैं: i. एक विनयविम प्रक ृ ति क े काय; आम ौर पर हाउसकीप्रिंपग, रLरLाव, संबंति गति विवति याँ, Pाटा इंट्री, P्राइप्रिंवग, और इसी रह से संबंति हो े हैं, सिजन्हें एजेंसिसयों को सौंप विदया जा ा है।ये Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds एजेंसिसयां इन कायM को करने क े लिलए उतिच व्यविक्तयों की विनयुविक्त कर ी हैं..
3.83 इसकी विनम्नलिललिL विनष्कष; और सिसफारिरशें हैं: …..vii. आयोग का विवचार है विक सिजन नौकरिरयों को अनुबंति विकया जा सक ा है और विकया जाना चाविहए, उन पर सरकार का स्पr माग;दश;न उतिच होगा।ऐसा कर े समय गोपनीय ा और जवाबदेही को ध्यान में रLा जा सक ा है।इसक े अलावा, विनरं र ा लाने क े लिलए और संविवदात्मक जनशविक्त क े शोषर्ण क े संबं में चिंच ाओं को दूर करने क े लिलए, सरकार द्वारा समान विदशाविनदˆश/मॉPल अनुबं समझौ े ैयार विकए जा सक े हैं।…..”
14. उपरोक्त थ्यों से यह स्पr है विक विदनांक 08.09.2010 को "आउटसोर्सिंसग" क े माध्यम से सेवा क े उपयोग क े सार्थी प्रविsया को बदलकर, च ुर्थी; श्रेर्णी े पद पर भ - को समाप्त करने का विनर्ण;य लिलया गया र्थीा। दनुसार यह वे न आयोग की सिसफारिरशों, सिजसमें पहला मुद्दा विवत्तीय कविठनाई र्थीी, को ध्यान में रL े इसमें दक्ष ा प्राप्त कर े हुए बनाया गया र्थीा।औपचारिरक ाओं को पूरा करने क े लिलए बाद क े अति विनयम क े माध्यम से विवविनयम को प्रचुर मात्रा में साव ानी क े रूप में लाया गया र्थीा।विकसी भी नई भ - को रोकने क े विनर्ण;य क े बारे में संस्र्थीानों को नोविटस विदया जा रहा र्थीा।हालाँविक, संस्र्थीानों समान रूप से या ो अदाल क े आदेश द्वारा या उससे बाहर विनयुविक्तयाँ की गई हैं।यह एक मामले, जो विक सिसविवल अपील संख्या 2753/ 2021 की विवषय वस् ु है, को छोड़कर विबना संशोति विवविनयमन 101 क े आदेश क े अनुसार पूव; अनुमति प्राप्त विकए विबना भी विकया गया र्थीा।सिसविवल अपील संख्या 2754/2021 में उच्च न्यायालय से पूव; अनुमति देने का विनदˆश प्राप्त विकया गया र्थीा। उच्च न्यायालय क े समक्ष: - Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
15. पूव क्त पृष्ठभूविम क े सार्थी इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिचकाएं दायर की गई हैं।इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तिPवीजन बेंच क े मुख्य विनर्ण;य 19.11.2018 विदनांविक में दायर रिरट यातिचकाओं को अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी सार्थी यह कह े हुए अनुमति दी विक यह भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।संयोग से, उत्तर प्रदेश हाई स्क ू ल और इंटरमीतिPएट कॉलेज (शिशक्षकों और अन्य कम;चारिरयों क े वे न का भुग ान) अति विनयम, 1971 (ए स्मिस्मनपश्चा 'यू.पी. अति विनयम, 1971' में संदर्भिभ ) क े प्राव ानों पर भी अवलम्ब लिलया गया है जो वे न भुग ान क े रीक े सविह वे न क े बारे में कहा जा ा है। तिPवीजन बेंच की राय र्थीी विक विवविनयमन 101 असंवै ाविनक है, अति विनयम की ारा 16 जी और यूपी अति विनयम, 1971 क े प्राव ानों को विनरस् विकया जा रहा है, और यह देLने क े लिलए गया विक 'आउटसोर्सिंसग' को वग; 'IV' काय; करने क े लिलए कम;चारिरयों को उपलw कराने की अव ारर्णा क े रूप में असंवै ाविनक, मनमाना और अवै है। आक्षेविप विवविनयमन को अति विनयम की ारा 9 (4) की व्याख्या का कोई आ ार नहीं विदया जा सक ा सिजससे यह पोषर्णीय हो सक े ।उक्त विनर्ण;य को आक्षेविप एवं अपास् करने की मांग कर े हुए अन्य वादों में विकस अनुपा का पालन विकया गया, ये अपीलें हमारे समक्ष हैं।
16. पृष्ठभूविम क े थ्यों को ब ाने क े बाद, हम अति वक्ता क े संबंति कM को अशिभलेL में रLेंगे। अपीलार्थी- क े कर्थीन:-
17. अपीलक ा;ओं क े लिलए उपस्मिस्र्थी विवद्वान अपर सॉलिलसिसटर जनरल सुश्री ऐश्वया; भाटी ने रिरट यातिचकाक ा;ओं क े अति कार पर प्रार्थीविमक आपलित्त ज ाई विक वे आक्षेविप विवविनयमन को चुनौ ी दें।विवद्वान. एएसजी क े अनुसार, यह नीति ग विनर्ण;य होने क े कारर्ण विवत्त और प्रशासन क े क्षेत्र में विवशेषज्ञों की राय क े आ ार पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रासंविगक क पर विवचार करने और छठे क ें द्रीय वे न आयोग और सा वें क ें द्रीय वे न आयोग द्वारा की गई सिसफारिरशों सविह विह ारकों क े सार्थी व्यापक परामश; क े बाद साव ानीपूव;क पेश विकया गया है, यह भार क े अनुच्छेद 226 क े ह उच्च न्यायालय क े अति कार क्षेत्र को लागू करक े चुनौ ी देना उत्तरदायी नहीं है।सहाय ा प्राप्त करने वाली संस्र्थीाएं संलग्न श M से बाध्य हैं, क्योंविक न ो सहाय ा प्राप्त करने का कोई मौलिलक अति कार है और न ही कोई विनविह है। इस थ्य पर विवचार कर े हुए विक उक्त नीति राज्य क े सभी विवभागों में समान रूप से लागू है और मौजूदा कम;चारिरयों क े अति कारों को विकसी भी रह से प्रभाविव नहीं कर ी है, प्रति वाविदयों क े लिलए अपीलार्भिर्थीयों क े नीति ग विनर्ण;य पर सवाल उठाने का अति कार नहीं है।
18. विवद्वान एएसजी ने आगे कहा है विक अन्य प्रत्यर्थी-गर्णों को कानून क े विवपरी चुना गया है, वे साम्य ा की माँग नहीं कर सक े।अपीलार्थी-गर्णों द्वारा इसक े विवपरी स्पr विनदˆशों क े बावजूद उन्हें भ - करने में अति उत्साही प्रबं न द्वारा ही यह स्मिस्र्थीति बनाई गई है।अन्यर्थीा, कोई भी विनयुविक्त न्यायालय क े आदेशों क े अ ीन है।
19. तिPवीजन बेंच ने विवशिभन्न प्रासंविगक कारकों क े आ ार पर नीति ग विनर्ण;य पर विवचार करने क े दौरान अपीलार्थी-गर्णों क े संज्ञान में होने की एक विवशेषज्ञ की भूविमका विनभाई है।अति विनयम की ारा 9(4) राज्य सरकार को अति विनयम क े ह बोP; क े संदभ; क े विबना विनयमन को दनुसार बदलने, संशोति करने और रद्द करने क े लिलए पया;प्त शविक्त प्रदान कर ी है। यह कहा गया है विक संशो न क े वल अपीलार्भिर्थीयों द्वारा विकए गए विनर्ण;य का परिरर्णाम है।
20. तिPवीजन बेंच क े आदेश का पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में 'आउटसोर्सिंसग' की अपनी व्याख्या क े मद्देनजर पूरी भ - प्रविsया पर दूरगामी विवत्तीय और आर्भिर्थीक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रभाव पड़ेगा।संविव ान क े अनुच्छेद 162 में आक्षेविप संशो न का कोई औतिचत्य नहीं है।यह पदों को समाप्त करने का मामला है और इस रह, अति विनयम की ारा 9(4) का व्यापक महत्व की होने क े कारर्ण कानून की नजर में आक्षेविप विवविनयमन पोषर्णीय है।
21. उपरोक्त कM को दृढ़ करने क े लिलए विनम्नलिललिL विनर्ण;यों पर अवलम्ब लिलया गया है: i. फ े Pरेशन ऑफ रेलवे ऑविफसस; एसोसिसएशन और अन्य बनाम भार संघ (2003) 4 एससीसी 289; ii. विफल्म फ े स्मिस्टवल विनदेशालय और अन्य बनाम गौरव अतिश्वन जैन और अन्य (2007) 4 एससीसी 737; iii. पंजाब राज्य और अन्य बनाम राम लुभाया बग्गा और अन्य (1998) 4 एससीसी 737;iv. वासवी इंजीविनयरिंरग कॉलेज पेरेंट्स एसोसिसएशन बनाम ेलंगाना राज्य और ओआरएस (2019) 7 एससीसी 172. v. रामजी विद्ववेदी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1983) 3 एससीसी 52;vi. भार संघ बनाम पुष्पा रानी (2008) 9 एससीसी 242; vii. एसक े मोहम्मद रफीक बनाम मैनेजमेंट कविमटी कोंटाई रहमाविनया हाई मद्रास और अन्य (2020) 6 एससीसी 689; viii. विमलनाPु एPुक े शन तिPपाट;मेंट विमविनस्टेरिरयल एंP जनरल सबॉर्तिPनेट सर्दिवस एसोसिसएशन और अन्य बनाम विमलनाPु राज्य और अन्य (1980) 3 एससीसी
97. प्रत्यर्भिर्थीयों की ओर से कर्थीन: - Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
22. प्रत्यर्भिर्थीयों की ओर से कर्थीनों में प्रबं न और उनक े द्वारा चुने गए अभ्यर्भिर्थीयों को शाविमल विकया जाएगा। इसक े बावजूद ये उम्मीदवार आक्षेविप विवविनयम 101 क े आदेश 08.09.2010 और 06.01.2011 विदनांविक क े बाद स्पr रूप से प्रबं न द्वारा अपनाई गई भ - प्रविsया क े माध्यम से सामने आए।
23. अति विनयम क े ह बनाए गए विवविनयम 101, जैसे यह बना हुआ है, क े वल "आउटसोर्सिंसग" क े माध्यम से च ुर्थी; श्रेर्णी क े स्वीक ृ पद को भरने में भार क े अनुच्छेद 14 का स्पr उल्लंघन है।तिPवीजन बेंच क े समक्ष, अपीलक ा; "च ुर्थी;" श्रेर्णी क े पद और काया;न्वयन की विवति को भरने में "आउटसोर्सिंसग" की नीति क े काया;न्वयन क े पीछे क; को प्रमाशिर्ण करने क े लिलए प्रासंविगक सामग्री रLने में सक्षम नहीं र्थीे।
24. अति विनयम की ारा 16 जी क े ह संशोति विवविनयमन 101 की शुरुआ क े लिलए कोई शविक्त या अति कार नहीं है। अति विनयम की ारा 9 क े ह राज्य सरकार को उपलw शविक्त को लागू विवविनयमन बनाने क े लिलए विवस् ारिर नहीं विकया जा सक ा है।
25. अति विनयम की ारा 16 जी को आक्षेविप विवविनयमन द्वारा विनविह रूप से Lारिरज करने की मांग की जा ी है।चूंविक भ - और सेवा की श q एक जैसी नहीं हैं इसलिलए राज्य सरकार को दी गई शविक्त को भ - की श M को बदलने क े लिलए नहीं बढ़ाया जा सक ा है।आगे यह क; विदया गया है विक अति विनयम की ारा 9(4) क े ह शविक्त का प्रयोग, विवशेष रूप से विवविनयमों में संशो न कर े समय अन्य प्राव ानों क े अनुरूप होना चाविहए, जैसे आक्षेविप अ ीनस्र्थी कानून को समाप्त विकया जाना है।पूव क्त क क े समर्थी;न में विनम्नलिललिL विनर्ण;यों पर अवलम्ब लिलया गया है- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (i) क े शव चंद्र जोशी बनाम भार संघ 1992 सप्लीमेंट्री (1) एससीसी 272; (ii) सैयद Lालिलद रिरज़वी बनाम भार संघ 1993 सप्लीमेंट्री (3) एससीसी 575; (iii) क े रेला संस्र्थीान चेर्थीु र्थीोसिझलाली यूविनयन बनाम क े रल राज्य (2006) 4 एससीसी 327; और (iv) वासु देव सिंसह बनाम भार संघ (2006) 12 एससीसी 753।
26. गैर-अल्पसंख्यक संस्र्थीानों क े लिLलाफ एक रफ संस्र्थीानों को जैसे विक अल्पसंख्यक संस्र्थीानों क े बीच एक अन् र बनाया जाना चाविहए, अन्यर्थीा मुख्य विवविनयमन भार क े अनुच्छेद 30 (1) क े ह (i) अहमदाबाद सेंट जेविवयस; कॉलेज सोसाइटी और अन्य बनाम गुजरा राज्य और अन्य (1974) 1 एससीसी 717; (ii) सेंट स्टीफ ं स कॉलेज बनाम विदल्ली विवश्वविवद्यालय (1992) 1 एससीसी 558; (iii) टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य (2002) 8 एससीसी 481; (iv) सतिचव मलंकारा सीरिरयन क ै र्थीोलिलक कॉलेज बनाम टी. जोस और अन्य (2007) 1 एससीसी 386; और (v) चPाना दास बनाम पतिश्चम बंगाल राज्य (2020) 13 एससीसी 411 क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्ण;यों क े आलोक में अल्पसंख्यक संस्र्थीानों को विदए गए मौलिलक अति कारों का उल्लंघन कर ा है।
27. भ - विकए गए प्रत्यर्थी-गर्णों का विवश्वास र्थीा विक वे कानून क े अनुसार विनयोसिज र्थीे, और वे पीविड़ नहीं हो सक े हैं, विवशेष रूप से इस थ्य क े आलोक में विक उनमें से क ु छ को पूव; अनुमोदन क े अनुसरर्ण में भ - विकया गया है, सिजससे वे योग्य पाए गए हैं।असहाय गरीब व्यविक्तयों पर विवचार करने क े दौरान अनुतिच कविठनाई का सिसद्धां लागू विकया जाना है।यविद लागू विकए गए संशो न को पोषर्णीय रLने की अनुमति दी जा ी है ो यह अनुच्छेद 162 का उल्लंघन होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
1228. जैसा विक इस न्यायालय द्वारा क े टरिंरग क्लीनर ऑफ साउर्थीन; रेलवे बनाम यूविनयन ऑफ इंतिPया और अन्य (1987) 1 एससीसी 700 में अव ारिर विकया गया र्थीा, भ - क े एक रीक े क े रूप में "आउटसोर्सिंसग" अपने आप में अवै और असंवै ाविनक है क्योंविक यह ठेका श्रविमकों को वापस लाने का प्रयास कर ा है। चचा; और विनष्कष;: - सहाय ा का अति कार: -
29. हम पहले सहाय ा क े लिलए संस्र्थीानों क े अति कार को उठाएंगे।सहाय ा प्रदान करने का विनर्ण;य नीति क े अनुसार हो ा है।ऐसा कर े समय, सरकार न क े वल संस्र्थीानों क े विह से चिंचति है, बस्मिल्क इस रह क े अभ्यास को करने की क्षम ा है।ऐसे कई कारक हैं सिजन पर सरकार से ऐसा विनर्ण;य लेने से पहले विवचार करने की अपेक्षा की जा ी है।विवत्तीय बा ाएं और कविमयां ऐसे कारक हैं सिजन्हें सहाय ा क े लिलए कोई भी विनर्ण;य लेने में प्रासंविगक माना जा ा है, सिजसमें सहाय ा प्रदान करने का विनर्ण;य और सहाय ा क े विव रर्ण क े रीक े दोनों शाविमल हैं।
30. एक बार जब हम मान े हैं विक सहाय ा पाने का अति कार एक मौलिलक अति कार नहीं है, ो इसे लागू करने में विकए गए विनर्ण;य की चुनौ ी क े वल प्रति बंति आ ारों पर होगी।इसलिलए, ऐसे मामले में भी जहां सहाय ा वापस लेने क े लिलए नीति ग विनर्ण;य लिलया जा ा है, एक संस्र्थीान इसे अति कार क े रूप में सवाल नहीं कर सक ा है।हो सक ा है, जब एक संस्र्थीान को दूसरी संस्र्थीा क े लिLलाफ अनुदान विदया जा ा है जो समान रूप से रLी गई हो ो इस रह की चुनौ ी अभी भी एक संस्र्थीान क े लिलए उपलw होगी।इसलिलए, सहाय ा क े अनुदान क े सार्थी श q आ ी हैं।यविद कोई संस्र्थीा ऐसी सहाय ा से जुड़ी श M को स्वीकार और उनका पालन नहीं करना चाह ी है, ो वह अनुदान को अस्वीकार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds करने और अपने रीक े से विवचार कर सक ी है।इसक े विवपरी, एक संस्र्थीान को यह कहने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है विक सहाय ा का अनुदान अपनी श M पर होना चाविहए।
31. हम एक ऐसे मामले पर विवचार कर रहे हैं जहां सहाय ा को पूरी रह से अस्वीकार नहीं विकया गया है, लेविकन अलग-अलग रूप में देने की मांग की गई है। इस रह क े विनर्ण;य का कारर्ण दक्ष ा और विवत्तीय दोनों है।जब इस रह का विनर्ण;य नीति क े रूप में विकया जा ा है और न क े वल शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों पर लागू हो ा है बस्मिल्क पूरे राज्य में हर विवभाग में लागू हो ा है ो कोई इस पर सवाल नहीं उठा सक ा और वह भी ब जब उसक े चेहरे पर कोई स्पr मनमानी नहीं विदL रही हो। अल्पसंख्यक और गैर-अल्पसंख्यक:-
32. जब सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों की बा आ ी है, ो अल्पसंख्यक और गैर- अल्पसंख्यक क े बीच कोई अं र नहीं हो सक ा है। भार क े संविव ान का अनुच्छेद 30 अपने स्वयं क े प्रति बं ों क े उतिच होने क े अ ीन है। एक सुरक्षा को एक गैर-अल्पसंख्यक संस्र्थीा क े अति कार से बेह र अति कार में विवस् ारिर नहीं विकया जा सक ा है। इस मुद्दे पर कानून काफी सुलझा हुआ है और इसलिलए इसे विकसी विवस् ार की आवश्यक ा नहीं है।
33. इस प्रकार, उपरोक्त मुद्दे पर हमें इस सिसद्धां को दोहराने में कोई संकोच नहीं है विक सहाय ा प्राप्त संस्र्थीाएं लगाए गए श M से बाध्य है और इसलिलए इनका पालन अपेतिक्ष है।एक बार जब हम ऐसा कर े हैं ो विवशिभन्न आ ारों पर की गई चुनौ ी आ ार पर आ ी है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
34. अल्पसंख्यक और गैर अल्पसंख्यक संस्र्थीान क े बीच विवभेद अब अस्मिस् त्व में नहीं है। एसक े मोहम्मद रफीक (उपरोक्त) मामले में इस न्यायालय ने विनम्नलिललिL प्रस् र क े माध्यम से विवचार विकया है: “41. इस न्यायालय क े विनर्ण;यों की पृष्ठभूविम में यहाँ उल्लेL विकया गया है विक हमें अब इस बा पर विवचार करना चाविहए विक क्या आयोग अति विनयम, 2008 क े प्रासंविगक प्राव ान अल्पसंख्यक संस्र्थीान क े अति कारों पर स्र्थीानां रिर हो े हैं या उक्त प्राव ानों को 'अति कार क े सार को नुकसान पहुंचाए विबना संस्र्थीान की उत्क ृ r ा सुविनतिश्च करने क े रूप में मान्य' कहा जा सक ा है। [गां ी फ ै ज-ए-आम-कॉलेज बनाम आगरा विवश्वविवद्यालय, (1975) 2 एससीसी 283: 1 एससीईसी 277] में एक अल्पसंख्यक संस्र्थीान में न्यायमूर्ति क ृ ष्र्णा अय्यर द्वारा दी गई अशिभव्यविक्त।क े रल शिशक्षा विव ेयक 1957 से, पुनः [क े रल शिशक्षा विव ेयक 1957, पुनः 1959 एससीआर 995: एआईआर 1958 एससी 956] मामले में इस न्यायालय का ध्यान आकर्दिष करने वाला मुद्दा अल्पसंख्यक शैक्षशिर्णक संस्र्थीान क े अति कारों क े कM और विवविनयमों की प्रयोज्य ा की सीमा और उसका दायरा और सिजसे अनुमेय विवविनयम कहा जा सक ा है।यविद प्रर्थीम LंP में याविन टी.एम.ए. मामले में विनर्ण;य क पाई फाउंPेशन [टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1] पर विवचार विकया गया है...
42. टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन [टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1] मामले की ओर मुड़ े हैं और उन सिसद्धां ों पर विवचार करें जो इसने विन ा;रिर विकए र्थीे और क्या इस न्यायालय क े विनर्ण;यों में पहले क े LंP में विन ा;रिर सिसद्धां ों की पुनरावृलित्त हुई र्थीी या क्या प्रभाव में कोई बदलाव र्थीा: 42.[1] प्रस् र 50 में पांच घटनाओं में 'स्र्थीापना और प्रशासन का अति कार' सस्मिम्मलिल विकया गया र्थीा और उनमें से ीन क े लिलए यह कहा गया र्थीा: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (क) विवद्यार्भिर्थीयों को दालिLला देने का अति कार; (L) शिशक्षर्ण और गैर-शिशक्षर्ण कम;चारी विनयुक्त करने का अति कार; और (ग) कम;चारिरयों क े विवरुद्ध अनुशासविनक कार;वाई करने का अति कार। प्रमुL विनर्ण;य में चचा; विवशिभन्न शीष;कों क े अं ग; र्थीी और शीष;क "5. सहाय ा प्राप्त विनजी अल्पसंख्यक संस्र्थीाओं क े प्रशासन क े अति कारों को विकस हद क विवविनयविम विकया जा सक ा है?” महत्वपूर्ण; में से एक र्थीा।
42.2. न्यायालय क े पूव; क े विनर्ण;यों पर विवचार विकया गया और इस न्यायालय क े विनर्ण;य पर विवचार कर े हुए सिसद्धराजभाई सभाई मामले में [सिसद्धराजभाई सभाई बनाम गुजरा राज्य, (1963) 3 एससीआर 837: एआईआर 1963 एससी 540] यह ारिर विकया गया र्थीा: (टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन क े स 15 [टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1], एससीसी पृष्ठ 563, पैरा 107) 107.... यविद ऐसा है, ो यह सराहना करना मुस्मिश्कल है विक सरकार को उन विनयमों को ैयार करने से क ै से रोका जा सक ा है जो राr्रीय विह में हैं, जैसा विक यहां ऊपर उद्धृ माग; में इंविग विकया गया प्र ी हो ा है।राr्रीय विह में बनाए गए विकसी भी विवविनयमन को आवश्यक रूप से सभी शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों पर लागू होना चाविहए, चाहे वह बहुसंख्य या अल्पसंख्य द्वारा संचालिल हों।ऐसी परिरसीमा आवश्यक रूप से अनुच्छेद 30 में पढ़ी जानी चाविहए।अनुच्छेद 30 (1) क े अ ीन अति कार को राr्रीय विह को उल्लंघन करने या सरकार को उस संबं में विनयम बनाने से रोकने क े लिलए नहीं हो सक ा है।बेशक, यह सच है विक सरकारी विनयम संस्र्थीा क े अल्पसंख्यक चरिरत्र को नr नहीं कर सक े या क े वल भ्रम की स्र्थीापना और प्रशासन का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अति कार नहीं बना सक े हैं; लेविकन अनुच्छेद 30 क े ह अति कार इ ना विनरपेक्ष नहीं है विक वह कानून से ऊपर हो।"
42.3. इस प्रकार, सिसद्धराजभाई सभाई [सिसद्धराजभाई सभाई बनाम गुजरा राज्य, (1963) 3 एससीआर 837: एआईआर 1963 एससी 540] में विन ा;रिर सिसद्धां विक अनुच्छेद 30 (1) क े ह अति कार को र्थीाकशिर्थी विनयामक उपायों द्वारा कम नहीं विकया जा सक ा है। अल्पसंख्यक शिशक्षर्ण संस्र्थीान क े विह में नहीं, लेविकन जन ा या राr्र क े रूप में टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन [टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1] में स्वीकार नहीं विकया गया र्थीा।प्रभाव स्पr र्थीा विक राr्रीय विह में बनाए गए विकसी भी विनयम को अविनवाय; रूप से सभी शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों पर लागू होना चाविहए, चाहे बहुसंख्य या अल्पसंख्य द्वारा संचालिल हो और मामले को विकसी भी संदेह से परे रLा जाए।हालाँविक एक चे ावनी दी गई र्थीी और यह कहा गया र्थीा विक सरकारी विनयम संस्र्थीा क े अल्पसंख्यक चरिरत्र को नr नहीं कर सक े। 42.4.आगे क े विनर्ण;य में देLा गया विक विक सही दृविrकोर्ण होगा -- यह अहमदाबाद सेंट जेविवयस; कॉलेज [अहमदाबाद सेंट जेविवयस; कॉलेज सोसायटी बनाम गुजरा राज्य, (1974) 1 एससीसी 717: 1 एससीईसी 125]: (टीएमए पाई फाउंPेशन मामला [टीएमए पाई फाउंPेशन] v. कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1], एससीसी पी. 570, पैरा
122) मामले में न्यायमूर्ति Lन्ना द्वारा क्या विन ा;रिर विकया गया र्थीा।
122. दो उद्देश्यों क े बीच एक सं ुलन रLना होगा - संस्र्थीान की उत्क ृ r ा क े मानक को सुविनतिश्च करना और अल्पसंख्यकों क े अपने शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों की स्र्थीापना और प्रशासन क े अति कार को संरतिक्ष करना। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds दो उद्देश्यों को अपनाने और समेटने वाले विवविनयमों को उतिच माना जा सक ा है।हमारे विवचार में यह समस्या क े लिलए सही दृविrकोर्ण है।”
42.5. ब बहुसंख्य विनर्ण;य ने मामले को संक्षेप में प्रस् ु विकया और कहा: (टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन मामला [टीएमए पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481:2 एससीईसी 1], एससीसी पी 578, पैरा 135 और 137)
135. यह समझना मुस्मिश्कल है विक संविव ान विनमा; ाओं ने ार्दिमक या भाषाई अल्पसंख्यकों को ऐसा पूर्ण; अति कार विदया होगा, जो उन्हें इस रह से शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों की स्र्थीापना और प्रशासन करने में सक्षम बनाएगा विक वे संविव ान क े अन्य विहस्सों क े सार्थी संघष; में हों। xxx xxx xxx 137...... इसलिलए अनुच्छेद 30 (1) क े अ ीन अति कार विवति क े अन्य उपबं ों से विनरपेक्ष या अति क अशिभविन ा;रिर नहीं विकया गया है और हम उसी को दोहरा े हैं।इसी सादृश्य क े अनुसार, ऐसा कोई कारर्ण नहीं है विक आम ौर पर छात्रों और शिशक्षकों क े कल्यार्ण से संबंति विनयमों या श M को उतिच शैक्षशिर्णक माहौल प्रदान करने क े लिलए लागू नहीं विकया जाना चाविहए, क्योंविक ऐसे प्राव ान विकसी भी रह से अनुच्छेद 30(1) क े ह प्रशासन या प्रबं न क े अति कार में हस् क्षेप नहीं कर े हैं। आगे इसे विन ा;रिर विकया गया र्थीा: (एससीसी पी 579, पैरा 138) 138....दूसरे शwदों में, अनुच्छेद 30(1) का सार बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक संस्र्थीानों क े बीच समान व्यवहार सुविनतिश्च करना है।विनयमों और विवविनयमों सविह देश क े कानून बहुसंख्यक संस्र्थीानों क े सार्थी -सार्थी अल्पसंख्यक संस्र्थीानों पर भी समान रूप से लागू होने चाविहए।"
43. टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन [टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1], इस न्यायालय क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विनर्ण;य में इस न्यायालय क े ग्यारह न्याया ीशों द्वारा प्रदान की गई, इस प्रकार मामले को विकसी भी संदेह से परे रLा और स्पr विकया विक अनुच्छेद 30 (1) क े ह अति कार पूर्ण; या कानून से ऊपर नहीं है और छात्रों और शिशक्षकों क े कल्यार्ण से संबंति श q उतिच शैक्षशिर्णक वा ावरर्ण प्रदान करने क े लिलए लागू होनी चाविहए, इसलिलए जब क विक श M ने प्रशासन या प्रबं न क े अति कार में हस् क्षेप न करे। अहमदाबाद सेंट जेविवयस; कॉलेज [अहमदाबाद सेंट जेविवयस; कॉलेज सोसाइटी बनाम गुजरा राज्य, (1974) 1 एससीसी 717: 1 एससीईसी 125] मामले में न्यायमूर्ति Lन्ना द्वारा विन ा;रिर परीक्षर्ण सही दृविrकोर्ण क े रूप में स्वीकार विकया गया र्थीा विक एक सं ुलन दो उद्देश्यों क े बीच रLा जाना चाविहए - पहला संस्र्थीा की उत्क ृ r ा क े मानक को सुविनतिश्च करने क े लिलए और दूसरा अल्पसंख्यकों क े अपने शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों की स्र्थीापना और प्रशासन क े अति कार को संरतिक्ष करने क े लिलए।अनुच्छेद 30 (1) का सार भी कहा गया र्थीा - "बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक संस्र्थीानों क े बीच समान व्यवहार सुविनतिश्च करने क े लिलए" और यह विक विनयम और कानून बहुसंख्यक संस्र्थीानों क े सार्थी-सार्थी अल्पसंख्यक संस्र्थीानों पर भी समान रूप से लागू होंगे। xxx xxx xxx
59. हमारे विवचार में टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन [टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481: 2 एससीईसी 1] मामले में विनर्ण;य में विन ा;रिर सिसद्धां ों क े अनुसार चल रहा है, इसलिलए संबंति प्राव ानों को अल्पसंख्यक संस्र्थीानों क े अति कारों का उल्लंघन नहीं कहा जा सक ा है।आयोग अति विनयम, 2008 क े ह गविठ आयोग द्वारा शिशक्षकों का चयन और उनका नामांकन राr्रीय विह क े सार्थी -सार्थी अल्पसंख्यक शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों क े विह ों को भी सं ुr करेगा और उक्त प्राव ान अल्पसंख्यक शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों क े अति कारों का उल्लंघन नहीं हैं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
35. हम टी.एम.ए. पाई फाउंPेशन बनाम कना;टक राज्य, (2002) 8 एससीसी 481 में मुख्य विनर्ण;य क े दो अति रिरक्त प्रस् रों को भी इंविग करना चाहेंगे जो भार क े अनुच्छेद 30 क े ह अल्पसंख्यक संस्र्थीानों को दी गई सुरक्षा क े आलोक में राज्य द्वारा लगाई जा सकने वाली सहाय ा और श M क े लिलए हमारे सामने इस मुद्दे को शां करेगा: “143. इसका म लब यह है विक अनुच्छेद 30(1) क े ह अति कार का ात्पय; है विक राज्य द्वारा अल्पसंख्यक संस्र्थीान को विदया जाने वाला कोई भी अनुदान उसक े सार्थी ऐसी श q नहीं लगा सक ा है, जो विकसी भी रह से उस संस्र्थीा को स्र्थीाविप करने और संचालिल करने क े लिलए अल्पसंख्यक संस्र्थीान क े अति कारों को कमजोर या कम करेगा।अनुदान प्राप्त करने वाले शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों पर सामान्य रूप से सिजन श M को लागू करने की अनुमति दी जा सक ी है, उन्हें अनुदान क े उतिच उपयोग और अनुदान क े उद्देश्यों की पूर्ति से संबंति होना चाविहए। इस प्रकार की गई कोई भी म;विनरपेक्ष श q, जैसे विक न क े उपयोग क े संबं में एक उतिच लेLा परीक्षा और सिजस रीक े से न का उपयोग विकया जाना है, वह लागू होगा और शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों की अल्पसंख्यक स्मिस्र्थीति को कमजोर नहीं करेगा।ऐसी श q मान्य होंगी यविद वे अनुदान प्राप्त करने वाले अन्य शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों पर भी लगाई जा ी हैं।
144. यह क; नहीं विदया जा सक ा है विक अल्पसंख्यक संस्र्थीान को सहाय ा दे े समय कोई श; नहीं लगाई जा सक ी है।चाहे वह बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक द्वारा संचालिल संस्र्थीा हो, विकसी शैक्षशिर्णक संस्र्थीान द्वारा सहाय ा अनुदान क े उतिच उपयोग क े लिलए प्रासंविगक सभी श q लगाई जा सक ी हैं।अनुच्छेद 30 (2) में कहा गया है विक इस आ ार पर विक कोई संस्र्थीा अल्पसंख्यक क े प्रबं न क े अ ीन है, चाहे वह म; या भाषा पर आ ारिर हो, उस शैक्षशिर्णक संस्र्थीान को सहाय ा प्रदान करने क े सार्थी भेदभाव नहीं विकया जा सक ा है, यविद अन्य शैक्षशिर्णक संस्र्थीान सहाय ा प्राप्त करने क े हकदार हैं।शैक्षशिर्णक संस्र्थीानों को अनुदान या अनुदान न देने की श q Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds समान रूप से लागू होनी चाविहए, चाहे वह बहुसंख्यक संस्र्थीा हो या अल्पसंख्यक संचालिल संस्र्थीा...।" नीति ग विनर्ण;य:-
36. हमारे सामने चुनौ ी विवविनयम 101 में संशो न है।यह विवविनयमन एक अ ीनस्र्थी कानून क े रूप में है।एक अ ीनस्र्थी विव ान नीति ग विनर्ण;य क े रूप में भी हो सक ा है।हम पहले ही नोट कर चुक े हैं विक वष; 2010 में ही एक नीति ग विनर्ण;य लागू हो गया है।
37. एक नीति ग विनर्ण;य को जनविह में माना जा ा है, और एक बार विकया गया ऐसा विनर्ण;य चुनौ ी देने योग्य नहीं है, जब क विक प्रकट या अत्यति क मनमानी न हो, एक संवै ाविनक अदाल से अपने हार्थी दूर रLने की उम्मीद की जा ी है।
38. एक विवविनयमन क े लिलए एक चुनौ ी एक अलग स् र पर Lड़ी हो ी है सिजसे एक अति विनयम क े लिलए बनाया जा सक ा है।हालाँविक, जब विवविनयम और क ु छ नहीं बस्मिल्क पहले विकए गए सरकार क े विनर्ण;य को मजबू करने वाली नीति की पुनरावृलित्त है, ो एक अति विनयम की वै ा क े परीक्षर्ण क े लिलए आवश्यक मापदंPों का न्यायालय द्वारा पालन विकए जाने की अपेक्षा की जा ी है।
39. एक काय;कारी शविक्त एक विव ायी शविक्त का अवशेष है, इसलिलए उक्त शविक्त का प्रयोग, यानी आक्षेविप विवविनयमन में संशो न, क े वल अनुमान क े आ ार पर चुनौ ी नहीं दी जा सक ी है।एक बार नीति ग विनर्ण;य क े माध्यम से एक विनयम पेश विकए जाने क े बाद, प्रकट, अत्यति क और अत्यति क मनमानी क े अस्मिस् त्व पर एक प्रदश;न की आवश्यक ा हो ी है। अन्य क;:- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
40. अति विनयम की ारा 9 (4) विनतिश्च रूप से एक व्यापक आया की है। अति विनयम को प्रभावी करने क े लिलए राज्य सरकार को दी गई शविक्त अविनयंवित्र है। यह बहु ही विवविनयमन है, सिजसक े आ ार पर प्रबं न द्वारा भ - की गई है। व्यवस्र्थीा क े संदभ; में आक्षेविप विवविनयमन को समझना होगा।अत्यति क साव ानी बर ने क े कारर्ण ही यह संशो न लागू हुआ है।अति विनयम की ारा 9 (4) क े ह शविक्त क े अस्मिस् त्व को रामजी विद्ववेदी (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा विवचार विकया गया है: “12. ारा 9 की उप- ारा (4) जो इससे पहले विनकाली गई है, बोP; को कोई विनदˆश विदए विबना राज्य सरकार को आदेश देने या अति विनयम क े प्राव ानों क े अनुरूप ऐसी अन्य कार;वाई करने की शविक्त प्रदान कर ी है जो वह आवश्यक समझे और विवशेष रूप से, इस रह क े आदेश द्वारा विकसी भी मामले क े संबं में संशोति या रद्द कर सक ा है या कोई विनयम बना सक ा है।इस प्रकार यह विनर्दिववाद रूप से प ा होगा विक राज्य सरकार की पूव; मंजूरी आवश्यक है और ारा 9 की उप- ारा (4) क े ह राज्य सरकार को विकसी भी विवविनयमन को बनाने, संशोति या रद्द करने की शविक्त प्राप्त है।इस शविक्त से राज्य सरकार ने 7 जुलाई 1981 को एक आदेश जारी कर सभी गैर-सरकारी सहाय ा प्राप्त स्क ू लों में सभी नए चयन और प्र ानाचायM की विनयुविक्त आविद को रोक विदया। श्रीनार्थी इंटरमीतिPएट कॉलेज एक गैर-सरकारी सहाय ा प्राप्त स्क ू ल है।रेतिPयोग्राम द्वारा विदए गए आदेश का प्रभाव प्रबं न सविमति को विनयुविक्त और वापस लेने और प्रिंप्रसिसपल और शिशक्षकों की विनयुविक्त की शविक्त को Lत्म करने क े लिलए विवविनयमन प्रदान करने की शविक्त को रद्द करना होगा।आदेश जारी करना विववाविद नहीं है।उच्च न्यायालय में क; यह र्थीा विक राज्य सरकार क े पास ऐसी कोई शविक्त नहीं र्थीी और भले ही उप - ारा (4) को ऐसी शविक्त प्रदान करने क े लिलए समझा जा ा है, इसे उप-वगM (1), (2), (3) ारा 9 की उप- ारा (4) से पहले राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त शविक्त क े सार्थी उसक े सम ुल्य ा में पढ़ा जाना चाविहए।इसलिलए उच्च न्यायालय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds को राज्य सरकार की काय;कारी शविक्त क े दायरे और महत्वाकांक्षा की जांच करनी र्थीी, सिजसक े काय; में उच्च न्यायालय क े अनुसार, रेतिPयोग्राम में विनविह आदेश जारी विकया गया र्थीा।हमें उस समय क जाने की आवश्यक ा नहीं है क्योंविक हमारी राय में उप- ारा (4) विवशेष रूप से राज्य सरकार पर विकसी भी विवविनयमन को बनाने, संशोति करने या रद्द करने क े लिलए बोP; का कोई संदभ; विदए विबना शविक्त प्रदान कर ी है, सार्थी ही अति विनयम क े अनुरूप ऐसा अन्य आदेश भी बना ी है। व्यापक आयाम की यह शविक्त सभी विनयुविक्तयों को विफलहाल क े लिलए रोकने की शविक्त को समझेगी।और प्र ी हो ा है विक सरकार का प्रयोग विकया गया र्थीा क्योंविक सरकार प्राचायM सविह शिशक्षकों की विनयुविक्त करने क े लिलए गैर -सरकारी-सहाय ा प्राप्त स्क ू लों क े विनजी प्रबं न की शविक्त को छीनने पर विवचार कर रही र्थीी।विनजी प्रबं न द्वारा सरकारी कार;वाई को पहले से रोकना से बचने क े लिलए, विनयुविक्त करने की शविक्त को क ु छ समय क े लिलए रोक विदया गया र्थीा।जैसा विक पहले ब ाया गया है, विवविनयमन विनयुविक्त करने क े लिलए प्रबं न सविमति पर शविक्त प्रदान कर ा है। राज्य सरकार की पूव; मंजूरी क े सार्थी बोP; द्वारा उस विवविनयमन को लागू विकया गया र्थीा।यह कहा जा सक ा है विक राज्य सरकार ने विनयुविक्त की शविक्त प्रदान करने वाले विवविनयमन को रद्द कर विदया है या विकसी भी कीम पर विनयुविक्त करने क े लिलए प्रबं न सविमति को प्रदत्त शविक्त को रोक विदया है।यह आदेश जारी विकए जाने क े समय प्रभावी हो गया।इस आदेश का प्रभाव यह है विक चयन सविमति को अपीलक ा; का चयन करने का कोई अति कार नहीं र्थीा और न ही प्रबं न सविमति क े पास विनयुविक्त करने की कोई शविक्त र्थीी।
14. ारा 9 की उप- ारा (4) ने राज्य सरकार को विवविनयमन बनाने, संशोति करने या रद्द करने या अति विनयम क े अनुरूप कोई अन्य आदेश बनाने क े लिलए शविक्त प्रदान की, श्री सांघी का दूसरा क; समान रूप से विवफल होने क े लिलए बाध्य है।"
41. अति विनयम की ारा 9(4) को ारा 16 जी क े सार्थी पढ़ा जाना है, क्योंविक अति विनयम क े सभी उद्देश्यों को ध्यान में रL े हुए प्राव ानों को पढ़ा जाना Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds चाविहए।इस संबं में, हमें यह इंविग करने की आवश्यक ा है विक आक्षेविप विवविनयमन में संशो न से पहले यविद भ - की प्रर्थीा इसक े ह शविक्त का प ा लगाकर की गई र्थीी, ो प्रति वाविदयों क े लिलए इसक े विवपरी विवरो करने का अति कार नहीं है।
42. संशो न से पहले विवविनयमन 101, पूव; अनुमोदन प्राप्त करने का कठोर अनुपालन कर ा है।हम पा े हैं विक सिसविवल अपील संख्या 2753/2021 को छोड़कर ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है।जाविहर है, यह क े वल प्रत्यर्थी-गर्णों/प्रबं न का वास् विवक इरादा प्रदर्भिश कर ा है जो विकसी और चीज क े अलावा अपनी भ - करना है।
43. तिPवीजन बेंच ने दृविrकोर्ण पर विवचार कर े हुए ऐसे क्षेत्र में प्रवेश विकया है सिजसे करने की आवश्यक ा नहीं र्थीी।हालांविक, 'आउटसोर्सिंसग' शwद की व्याख्या करने में बहु श्रम विकया गया र्थीा इस रह क े प्रयोग से बचा जाना चाविहए क्योंविक यह न्यातियक समीक्षा क े दायरे से बाहर है।हमने पहले ही इस थ्य पर ध्यान विदया है विक नीति क े विवषय क े रूप में 'आउटसोर्सिंसग' को पूरे राज्य में पेश विकया जा रहा है। यह कहना एक बा है विक इसे सा वें क ें द्रीय वे न आयोग द्वारा अनुशंसिस साव ानी क े सार्थी लागू विकया जाना है, और दूसरी बा यह है विक इसे असंवै ाविनक रूप से समाप्त करना है।"आउटसोर्सिंसग" वास् व में कानून में विनविषद्ध नहीं है।हालांविक यह स्पr है विक "आउटसोर्सिंसग" क े माध्यम से एक भ - की अपनी कविमयां हो सक ी हैं और चूक हो सक ी है, "आउटसोर्सिंसग" क े विनर्ण;य को क े वल अनुमान और ारर्णा क े आ ार पर संविव ान क े अति कारा ी क े रूप में घोविष नहीं विकया जा सक ा है। जाविहर है, हम योजना की प्रक ृ ति और इससे जुड़े सुरक्षा उपायों को नहीं जान े हैं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
44. दतिक्षर्ण रेलवे (उपरोक्त) क े क े टरिंरग क्लीनर मामले में इस न्यायालय क े विनर्ण;य पर अवलम्ब लिलया गया है, सिजसमें यातिचकाक ा; विवशिभन्न रेलवे स्टेशनों पर सफाई क े लिलए "Lानपान सफाई कम;चारी" विनयुक्त विकए गए र्थीे, और उन्हें न्यून म मजदूरी भी नहीं दी गई र्थीी।उनकी शिशकाय यह र्थीी विक उन्हें मजदूरी क े रूप में एक छोटी राशिश का भुग ान कर े समय सेवा की कोई सुरक्षा नहीं र्थीी।पूव क्त विनर्ण;य में व;मान विवविनयमन क े लिलए कोई आवेदन नहीं है, सिजसे दक्ष ा क े अलावा आर्भिर्थीक मानदंPों क े आ ार पर पेश विकया गया है।
45. हम वास् व में इस योजना पर विवचार नहीं कर रहे हैं और इसलिलए सेवा की श M पर अं ेरे में हैं।व;मान मामले में चुनौ ी कम;चारी, सिजसे 'आउटसोर्सिंसग' क े माध्यम से भ - विकया गया है, क े द्वारा नहीं है, और इसलिलए हम उक्त विनर्ण;य को मान े हैं सिजस पर प्रत्यर्थी-गर्णों द्वारा बहु अति क अवलम्ब लेने की मांग की गई है, कोई मदद नहीं होगी।कोई क े वल यह नहीं मान सक ा जैसा विक प्रति वाविदयों द्वारा क; विदया जाना र्थीा विक भ - की एक विवति क े रूप में "आउटसोर्सिंसग" अविनवाय; रूप से अनुबं श्रम को अपनाना होगा और यह विक अनुतिच व्यापार व्यवहार का एक त्व मौजूद है।
46. अनुच्छेद 14 सकारात्मक प्रक ृ ति में है।वग-करर्ण करने में विवति विनमा; ा को पया;प्त लाभ प्रदान विकया जाना है।भार क े संविव ान का अनुच्छेद 14 भेदभाव को प्रति बंति नहीं कर ा है, जो आवश्यक है वह एक शत्रु ापूर्ण; क े लिLलाफ वै भेदभाव है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds हम मनीष क ु मार बनाम भार संघ, (2021) 5 एससीसी 1 में विनम्नलिललिL प्रस् र को उद्धृ करने क े अलावा कानून क े उपरोक्त सिसद्धां को विद्वगुशिर्ण नहीं करना चाह े हैं: “249. हम संघ क े रुL में काफी योग्य ा देL े हैं। यह ऐसा मामला नहीं है, जहां कोई बो गम्य अं र नहीं है।जांच क े ह कानून एक आर्भिर्थीक उपाय है। जैसा विक इस न्यायालय द्वारा विन ा;रिर विकया गया है, अनुच्छेद 14 की चुनौ ी पर विवचार करने में न्यायालय एक सिसद्धां वादी दृविrकोर्ण नहीं अपनाएगा। लोगों क े प्रति विनति यों से लोक ांवित्रक सिसद्धां ों पर काम करने की अपेक्षा की जा ी है। ारर्णा यह है विक वे हर उस थ्य से अवग हैं, जो कानून की संवै ाविनक ा को बनाए रLने क े लिलए जाएगा। एक कानून शून्य में काम नहीं कर सक ा है।कठोर शwद में, जब कानून को व्यावहारिरक रूप में लागू विकया जा ा है, ो इससे आने वाली कविठनाइयों पर लागू करने वालों द्वारा सव त्तम रूप से ध्यान विदया जा ा है। अनुभव क े माध्यम से प्रकट की गई जविटल समस्याओं क े समा ान क े लिलए, जब यह कानून लागू विकया जा ा है ो वास् व में प्रयोग क े एक अच्छे सौदे की आवश्यक ा होगी।यह विकसी समस्या पर विवचार करने क े लिलए अति क बुतिद्धमत्ता या बेह र रीक े से विवचार करने क े लिलए अदाल क े काय; का विहस्सा नहीं है।"
47. पूरे मुद्दे को अलग-अलग परिरप्रेक्ष्य से भी देLना होगा।विकए गए नीति ग विनर्ण;य से, अपीलक ा;ओं ने 'आउटसोर्सिंसग' क े लिलए प्रदान करक े अप्रत्यक्ष रीक े से पद को समाप्त कर विदया है। अब, अदाल पूव क्त पदों का सृजन या रLरLाव नहीं कर सक ी है।यह ब ाने क े लिलए अशिभलेL पर कु छ भी नहीं है विक विकया गया विनर्ण;य बाहरी है क्योंविक यह स्पr रूप से न क े वल सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों बस्मिल्क सभी सरकारी विवभागों पर भी लागू हो ा है।
48. इस आशय क े क; विदए जा े हैं विक आक्षेविप विवविनयमन से गरीबों और जरूर मंदों क े विह प्रभाविव हो े हैं। हमें नहीं प ा विक गरीबों और जरूर मंदों का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विह क ै से आक्षेविप विवविनयमन से प्रभाविव हो ा है।जाविहर है, 2010 और 2011 में लिलए गए विनर्ण;य को कोई चुनौ ी नहीं दी गई है, सिजसे सरकार में च ुर्थी; श्रेर्णी पदों क े लिलए सभी भर्ति यों पर लागू विकया जाना र्थीा, न विक क े वल संस्र्थीानों और उनक े द्वारा भ - विकए गए व्यविक्तयों क े लिलए। पूरी मुकदमेबाजी क े वल संस्र्थीानों द्वारा की गई है।
49. जब भी न्यायालय क े समक्ष कोई मामला उठाया जा ा है ो चुनौ ी दे े समय संबंति पक्ष क े विह क े सार्थी शिशकाय को भी ध्यान में रLा जा ा है। उपरोक्त सिसद्धां को ध्यान में रLा जाना अपेतिक्ष है।इसक े अलावा, भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 को असा ारर्ण और विववेका ीन प्रक ृ ति में लागू कर े हुए।उपरोक्त सिसद्धां से न्यायालय को विकसी पक्ष द्वारा राह की मांग करने क े वास् विवक कारर्ण को समझने में मदद विमलेगी।उक्त सिसद्धां को ध्यान में रL े हुए हम क े वल यह कह सक े हैं विक प्रति वादी/यातिचकाक ा;, भ - क े योग्य संस्र्थीान होने क े ना े अपनी पकड़ नहीं छोड़ना चाह े हैं।
50. तिPवीजन बेंच ने वे न भुग ान अति विनयम, 1971 की ारा 9 को भी ध्यान में रLा है।हम क े वल यह कह सक े हैं विक उपरोक्त अति विनयम का आक्षेविप विवविनयम से कोई लेना-देना नहीं है।"आउटसोर्सिंसग" क े माध्यम से पेश विकए गए कम;चारिरयों का एक नया समूह बनाने का विवचार र्थीा।जैसा विक कहा गया है, आक्षेविप विवविनयम क े वल दोहराव है, क्योंविक नीति क े माध्यम से सरकारी आदेश विदनांक 08.09.2010 और 06.01.2011, उपरोक्त दृविrकोर्ण का ख्याल रL ा है।
51. उच्च न्यायालय ने उनक े अति वक्ता द्वारा प्रति विनति त्व विकए गए अपीलक ा;ओं पर गल आ ार पर दोषारोपर्ण विकया है।जब विकसी विवविनयमन, विनयम या अति विनयम को चुनौ ी दी जा ी है ो यह चुनौ ी देने वाले व्यविक्तयों क े लिलए है विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds वे न्यायालय को सं ुr करें विक उन्हें कानून की नजर में कायम नहीं रLा जा सक ा है।इस रह की चुनौ ी को कानून क े दायरे में माना जाना चाविहए। यह थ्य विक राज्य की ओर से पेश अति वक्ता चुनौ ी दी गई नीति पर न्यायालय को सं ुr करने में सक्षम नहीं है, थ्य ः यह घोषर्णा नहीं करेगा विक यह असंवै ाविनक है। ऐसा कहने क े बाद, हम मान े हैं विक उच्च न्यायालय में इस रह की कवायद की भी आवश्यक ा नहीं है।
52. हमारे द्वारा पहले से ही ध्यान विदया गया थ्य यह है विक 1921 का अति विनयम पूव;-स्व ंत्र ा मूल का है। अति विनयम क े ह प्रदत्त शविक्तयों क े अनुरूप विनयमों को पेश विकया गया है। व्याख्या क े सिसद्धां क े रूप में "हमेशा बोलने" की अव ारर्णा को पुराने अति विनयम की उतिच समझ क े लिलए लागू विकया जाना है। आलिLरकार, इस रह क े क़ानून का अपना इस्मिच्छ उद्देश्य हो ा है सिजसमें विनतिश्च रूप से सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों क े कायM को विवविनयविम करना शाविमल हो ा है, सिजसे अ ी, व;मान और भविवष्य की स्मिस्र्थीति यों पर विवचार करने क े लिलए व्याख्या करने की आवश्यक ा हो ी है। इसलिलए एक व्याख्या जो उतिच, रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण; है वह उद्देश्य की पूर्ति करेगी।हम रनी शुगस; एंP क े विमकल्स लिलविमटेP बनाम यूविनयन ऑफ इंतिPया, (2019)5 एससीसी 480 क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्ण;य का संदभ; दे े हैं।
53. प्रत्यर्भिर्थीयों क े लिलए उपस्मिस्र्थी अति वक्ता ने इस न्यायालय क े क ु छ विनर्ण;यों पर अवलम्ब लिलया। उक्त विनर्ण;यों से गुजरने और हमारी चचा; क े आलोक में, हमें उनसे बहने वाली कोई मदद नहीं विमल ी है, उनक े द्वारा उठाए गए सं ोष को मजबू करना।इस न्यायालय द्वारा विदए गए फ ै सले पर मटंकारा सीरिरयन क ै र्थीोलिलक कॉलेज बनाम टी. जोस, (2007) 1 एससीसी 386 पर अवलम्ब लिलया गया है। उक्त विनर्ण;य को पढ़ने क े बाद, हम यह नहीं पा े हैं विक मामले में इसका कोई आवेदन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्राप्त हुआ है। उक्त विनर्ण;य छोटे संस्र्थीानों क े अपनी पसंद क े प्र ानाचाय; को चुनने क े अति कार से संबंति है।हम पहले ही मान चुक े हैं विक हम सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों क े मामले पर विवचार कर रहे हैं और इसलिलए उन्हें अल्पसंख्यक और गैर-अल्पसंख्यक संस्र्थीानों क े रूप में अलग करक े विकसी उप -वग-करर्ण की आवश्यक ा नहीं है।सभी सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों क े लिLलाफ आक्षेविप विवविनयमन को लागू करने की मांग की जा ी है।यह भी ध्यान विदया जाना चाविहए विक इस विनर्ण;य को एस.क े. मोहम्मद रफीक (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय ने ध्यान में रLा र्थीा। राह ः -
54. हमारे विनष्कष; से पहले हमारे पास एक और मुद्दा है।यह है विक क्या संस्र्थीानों को सिजम्मेदार ठहराया जाना चाविहए, उन लोगों क े विह क े संबं में सिजन्हें भ - विकया गया र्थीा, हालांविक वे लागू विवविनयम क े विवपरी र्थीे या नहीं।ये व्यविक्त विनद ष नागरिरक हैं जो प्रबं न द्वारा शुरू की गई कानूनी लड़ाई में उभरा है और फ्र ं टलाइन सैविनकों क े रूप में लड़ने क े लिलए बनाया गया है।यह प्रबं न है सिजसने इन व्यविक्तयों को पद ारर्ण करने क े लिलए उपयुक्त पाया।इसलिलए, इस अदाल को न्याय क े सिसद्धां को लागू करना होगा और समस्या-समा ान का दृविrकोर्ण अपनाना होगा। व्यविक्तयों को विनयुक्त करने और उन्हें उपयुक्त पाया, जबविक ऐसी स्मिस्र्थीति पैदा कर े समय, सिजससे बचा जा सक ा र्थीा, प्रबं न को अपनी सिजम्मेदारी लेनी होगी।यविद शिशक्षा प्रदान करना साव;जविनक विह में देLा जा ा है, ो ऐसे संस्र्थीानों क े अपने े लिलए भी क;व्य हैं।विनतिश्च रूप से, अपीलक ा;ओं को सहाय ा क े माध्यम से उनक े वे न क े लिलए योगदान देकर उन्हें जारी रLने क े लिलए नहीं बनाया जा सक ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
55. हम यह भी नोट कर सक े हैं विक तिPवीजन बेंच ने भी यह ध्यान विदया है विक आक्षेविप विवविनयमन क े वल सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों पर ही लागू विकया जा सक ा है।इस विनष्कष; को हमारे सामने गंभीर ा से चुनौ ी नहीं दी गई है।हम विवति विवरूद्ध साम्य ा की विवति क स्मिस्र्थीति से अवग हैं।हालांविक दोनों एक ही ारा में बह सक ी हैं, उनक े त्व अति कांश ः नहीं विमल े।
56. यह पाया गया है विक अपीलक ा; संबंति सरकारी आदेश क े बाद आक्षेविप विवविनयम पारिर करने में न्यायोतिच हैं, हम उन पर कोई और दातियत्व नहीं देना चाह े हैं।इसक े विवपरी, हमें लग ा है विक संस्र्थीानों को न्यातियक साहस क े लिलए सिजम्मेदार ठहराया जाना चाविहए।
57. हालाँविक, हम यह भी देLना चाहेंगे विक अपीलक ा;ओं को सा वें क ें द्रीय वे न आयोग क े अनुच्छेद 3.72 और 3.83 पर गंभीर ा से विवचार करना होगा।हम उम्मीद कर े हैं विक अपीलक ा; यह देLने क े लिलए एक यर्थीोतिच ंत्र ैयार करेंगे विक "आउटसोर्सिंसग" की प्रविsया द्वारा विनयोसिज व्यविक्तयों का विकसी भी रह से शोषर्ण नहीं विकया जा ा है।
58. दनुसार, हमें विदनांक 19.11.2018 की तिPवीजन बेंच क े फ ै सले को अपास् करने में कोई कविठनाई नहीं है और परिरर्णामी आदेश लागू विकए गए विवविनयमन को बरकरार रL े हुए पारिर विकए गए हैं।अपील को विनम्नलिललिL विनदˆशों क े सार्थी अनुमति दी जा ी है: (i) दीवानी अपील संख्या 2753/2021 में प्रत्यर्थी-गर्ण/रिरट यातिचकाक ा;ओं को पूव; अनुमोदन विदए जाने क े बाद, च ुर्थी; श्रेर्णी क े रूप में पया;प्त अनुमोदन प्रदान करक े पुविr करने का विनदˆश विदया गया है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (ii) प्रत्यर्थी-/रिरट यातिचकाक ा; और इसी प्रकार क े पदस्र्थीाविप व्यविक्तयों, सिजन्हें प्रत्यर्थी- सविह संस्र्थीानों द्वारा भ - विकया जा ा है, उनको समान वे नमान क े सार्थी जारी रLा जाएगा और यविद वे विदनांक 08.09.2010 से पहले भ - विकए गए हों, सिजसक े लिलए संपूर्ण; संविव रर्ण अक े ले संस्र्थीानों को करना होगा।। (iii) अपीलक ा; यह देLने का आवश्यक काय; करेंगे विक सा वें क ें द्रीय वे न आयोग में की गई सिसफारिरशों को ध्यान में रL े हुए विनयोसिज लोगों की सेवा की श M क े विवशिशr संदभ; में "आउटसोर्सिंसग" क े उतिच काया;न्वयन क े लिलए एक ंत्र उपलw है।
59. दनुसार पक्षकार बनने क े आवेदन को अनुमति दी जा ी है।
60. लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा।.................................................… (न्यायमूर्ति संजय विकशन कौल).................................................… (न्यायमूर्ति एम. एम. सुन्द्रेश) नई विदल्ली 27 सिस ंबर, 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds