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भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसदिवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसदिवल अपील संख्या 5926/2021
(दिवशेष अनुमति याति*का ( ीवानी) संख्या 6030/2021 से उत्पन्न)
सत्य प्रकाश दि0वे ी …..अपीलार्थी4
बनाम
मुन्ना उर्फ
7 *ंद्रभान या व और अन्य …...प्रत्यर्थी4
दिनर्ण7य
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना
1 अनुमति प्र ान की गई।
JUDGMENT
2. अपीलक ा7 सड़क या ाया ुर्घ7टना में र्घायल हो गया र्थीा।इलाहाबा उच्च न्यायालय 0ारा पारिर आ ेश संख्या 3182/2017 से प्रर्थीम अपील 28.01.2021 दि नांदिक क े आक्षेदिप दिनर्ण7य और आ ेश से व्यथिर्थी होकर उन्होंने यह अपील ायर की है सिOसक े 0ारा उच्च न्यायालय ने उनक े 0ारा ायर उक्त अपील को खारिरO कर दि या और मुआवOे की राथिश को इस आ ार पर 5,42,633/- रुपये से र्घटाकर 3,26,833/- रुपये कर दि या, दिक मोटर ुर्घ7टना ावा दिटVब्यूनल (सुदिव ा क े लिलए, 'दिटVब्यूनल') ने मनमाने ढंग से दिबना दिकसी सबू क े 50% की र से काया7त्मक अक्षम ा का अर्थी7 लगाया र्थीा।उच्च न्यायालय ने 20% काया7त्मक अक्षम ा का आकलन करना उति* समझा क्योंदिक उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" यह कहीं उल्लेख नहीं दिकया गया र्थीा दिक अक्षम ा की प्रकृ ति स्र्थीायी र्थीी और अपरिरव 7नीय र्थीी।
3. इस अपील में Oो लर्घु प्रश्न उठ ा है वह यह है दिक क्या उच्च न्यायालय अपने अपीलीय क्षेत्राति कार क े काय[7] में मुआवOे की वृतिn की मांग करने वाले र्घायल ावे ार 0ारा ायर प्रर्थीम अपील में दिटVब्यूनल 0ारा दि ए गए मुआवOे को कम कर सक ा है।अन्य शब् ों में, क्या उच्च न्यायालय को सिसदिवल प्रदिhया संदिह ा 1908 (संक्षेप में, 'सीपीसी') क े आ ेश XLI दिनयम 33 क े ह अपनी शदिक्त का प्रयोग करने में न्यायोति* ठहराया गया र्थीा।
4. स्पष्ट रूप से कहा गया है दिक थ्य यह है दिक अपीलक ा7 - ावे ार दि नांक 30.10.2002 को शाम क े लगभग 6.30 बOे अपनी मोटरसाइदिकल सिOसका पंOीकरर्ण संख्या UP93H-5532 है, से Oा े हुए गल दि शा से आ रहे टVक सिOसका पंOीकरर्ण संख्या UP32Z-2570 है, से टकराने से ुर्घ7टना हो गई सिOसक े परिरर्णामस्वरूप उसे गंभीर *ोटें आई ं ।हालांदिक अपीलक ा7 - ावे ार ने लगभग 470 दि नों क उप*ार दिकया, लेदिकन वह दिवकलांग हो गया। ुर्घ7टना क े समय वह 32 वष[7] का र्थीा और एक क ैं टीन *ला रहा र्थीा और प्रति माह 10,000/- कमा रहा र्थीा।अपीलक ा7 ने ावा याति*का ायर करने की ारीख से ुर्घ7टना में गंभीर रूप से र्घायल होने क े कारर्ण वास् दिवक भुग ान की ारीख क 17% प्रति वष[7] की र से ब्याO क े सार्थी 17 लाख रुपये क े मुआवOे की मांग कर े हुए ावा याति*का ायर दिकया।
5. यह उल्लेख करना उति* है दिक दिटVब्यूनल ने शुरू में मोटर ुर्घ7टना ावा याति*का संख्या 299/2002 में पारिर अपने दिनर्ण7य 30.10.2006 दि नांदिक क े माध्यम से दिनर्ण7य की ारीख से 7% वार्षिषक ब्याO क े सार्थी 6,03,000/- का मुआवOा दि या र्थीा।उक्त अति दिनर्ण7य से व्यथिर्थी होकर प्रत्यर्थी4-बीमा क ं पनी ने आ ेश संख्या उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 293/2007 से प्रर्थीम अपील ायर करक े उच्च न्यायालय का रवाOा खटखटाया।आ ेश 03.12.2015 दि नांदिक 0ारा उच्च न्यायालय ने दिटVब्यूनल 0ारा O[7] दिकए गए दिनष्कष[7] को छोड़कर दिनर्ण7य 30.10.2006 दि नांदिक को अपास् कर दि या दिक ुर्घ7टना वास् व में हुई र्थीी, उक्त अपील की अनुमति ी गई और उक्त आ ेश में की गई दिटप्पथिर्णयों क े आलोक में मामले को नए सिसरे से दिनर्ण7य क े लिलए दिटVब्यूनल को भेO दि या।
6. प्रति प्रेषर्ण पर दिटVब्यूनल ने याति*का ायर करने की ारीख से वास् दिवक भुग ान की ारीख क 7% प्रति वष[7] की र से ब्याO सदिह 5,42,633/- का मुआवOा ेने का दिनर्ण7य और आ ेश 01.07.2017 दि नांदिक को याति*का का वास् दिवक भुग ान की ति थिर्थी क शरीर क े उस दिवशेष भाग में 50% क स्र्थीायी दिवकलांग ा को स्वीकार करक े और उसकी आय का 54,000/- प्रति वष[7] क े रूप में ध्यान में रख े हुए पारिर दिकया।दिटVब्यूनल ने भदिवष्य क े नुकसान की गर्णना में 15 का गुर्णक भी लागू दिकया और अन्य शीष~ का मुआवOा भी दि या।उक्त पुरस्कार से सं ुष्ट नहीं होने पर, अपीलार्थी4- ावे ार ने आ ेश संख्या 3182/2017 से प्रर्थीम अपील होने की अपील ायर की।
7. आक्षेदिप आ ेश 28.01.2021 दि नांदिक 0ारा उच्च न्यायालय ने दिटVब्यूनल 0ारा मूल्यांकन क े रूप में 50% क े बOाय 20% की र से काया7त्मक दिवकलांग ा का आकलन दिकया, ावे ार की आयु 35 वष[7] से अति क होने का आकलन दिकया और 15 क े गुर्णक को लागू करक े, क ु ल मुआवOे की गर्णना आय क े नुकसान क े ह 1,51,200/- रुपये पर की गई।उच्च न्यायालय ने अन्य म ों क े ह अर्थीा7 53,633/- रूपये ति*दिकत्सा उप*ार क े म में; 25,000/- रूपये मानसिसक और शारीरिरक पीड़ा क े म में; 36,000/- रूपये आय की हादिन क े म में; 18,000/- रूपये पौदिष्टक आहार क े म में; 5,000/- रूपये आने Oाने उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क े ख*7 क े ह मुआवज़ा भी दि या।उच्च न्यायालय ने कहा दिक दिटVब्यूनल ने परिर*ारक शुल्क और भदिवष्य क े उप*ार क े म में कोई मुआवOा नहीं दि या है, इसने उन म ों क े ह hमशः 18,000/- और 20,000/- की राथिश का मुआवOा दि या, भले ही उच्च न्यायालय ने सम्पूर्ण[7] मुआवOे को 5,42,633/- रुपये से र्घटाकर 3,26,833 रुपये कर दि या, सिOसक े परिरर्णामस्वरूप मुआवOे की क ु ल कमी 2,15,800/- रुपये हो गई।यह दिटVब्यूनल 0ारा मूल्यांकन क े अनुसार 50% क े बOाय 20% की र से काया7त्मक दिवकलांग ा क े कारर्ण र्थीा। ावे ार की उम्र का आकलन भी 35 वष[7] से अति क क े रूप में दिकया गया र्थीा और 36 से 40 वष[7] क े बी* में दिकया गया र्थीा।दिटVब्यूनल 0ारा लागू 17 क े बOाय 15 क े गुर्णक को लागू दिकया गया र्थीा।इसलिलए इस अपील को दिवशेष अनुमति है।
8. हमने पक्षकारों क े दिव0ान अति वक्ता को सुना और अथिभलेख का परिरशीलन दिकया।
9. अपीलार्थी4- ावे ार क े दिव0 अति वक्ता श्री दिवदिपन कु मार ने क 7 दि या दिक अपीलक ा7 को दि ए गए मुआवOे की मात्रा को कम करने क े लिलए उच्च न्यायालय सही नहीं र्थीा, उसक े 0ारा ायर अपील में उसे बढ़ाने की मांग की गई र्थीी। अपीलक ा7 की मुख्य थिशकाय यह है दिक अपीलक ा7- ावे ार 0ारा ायर अपील में दिटVब्यूनल 0ारा दि ए गए मुआवOे को कम करने क े लिलए उच्च न्यायालय को सीपीसी क े आ ेश XLI दिनयम 33 क े ह शदिक्त का प्रयोग नहीं करना *ादिहए।यह कहा गया र्थीा दिक एक ओर उच्च न्यायालय ने काया7त्मक दिवकलांग ा क े प्रति श को 50% से र्घटाकर 20% कर दि या, सार्थी ही उच्च न्यायालय ने hमशः 18,000/- और 20,000/- रूपये की राथिश में 'परिर*र शुल्क' और 'भदिवष्य क े ति*दिकत्सा उप*ार शुल्क' क े म ों क े ह मुआवOा दि या।यह कहा गया र्थीा दिक उच्च न्यायालय को सीपीसी क े आ ेश XLI दिनयम 33 क े ह अपनी शदिक्त का उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्रयोग दिवशेष रूप से प्रति वा ी-बीमा क ं पनी 0ारा ायर दिकसी भी अपील या प्रत्याक्षेप क े अभाव में नहीं करना *ादिहए।सीपीसी क े आ ेश XLI दिनयम 33 क े ह शदिक्त को असा ारर्ण मामलों में प्रयोग दिकया Oाना *ादिहए Oब इसक े अप्रयोग से दिवथिभन्न पक्षकारों क े अति कारों क े समायोOन में कदिठनाई होगी।इसलिलए, यदि यह न्यायालय अति क मुआवOा ेने को ैयार नहीं है ो अपीलार्थी4 क े दिव0ान अति वक्ता ने उच्च न्यायालय 0ारा पारिर आक्षेदिप दिनर्ण7य एवं अति दिनर्ण7य को अपास् करने की मांग की।
10. प्रति वा ी-बीमा क ं पनी क े दिव0ान अति वक्ता श्री एस.एल. गुप्ता ने उच्च न्यायालय 0ारा पारिर आक्षेदिप दिनर्ण7य और अति दिनर्ण7य का समर्थी7न दिकया और क 7 दि या दिक इस अपील में कोई गुर्णावगुर्ण नहीं है।
11. हमने थ्यों और कानून क े प्रासंदिगक प्राव ानों क े आलोक में संबंति पक्षकारों की थ्यों पर दिव*ार दिकया है।
12. ंड प्रदिhया संदिह ा क े आ ेश XLI दिनयम 33 इस प्रकार है: "33. अपील न्यायालय की शदिक्त- अपील न्यायालय की यह शदिक्त होगी दिक वह कोई ऐसी तिडhी पारिर करे या कोई ऐसा आ ेश करे Oो पारिर की Oानी *ादिहए र्थीी या Oो दिकया Oाना *ादिहए र्थीा, और ऐसा या अति रिरक्त या अन्य तिडhी या आ ेश पारिर करे, Oो मामले में अपेतिक्ष हो, और उस शदिक्त का प्रयोग न्यायालय 0ारा इस बा क े हो े हुए भी दिकया Oा सक े गा दिक अपील तिडhी क े क े वल भाग क े बारे में है और यह शदिक्त सभी प्रत्यर्थिर्थीयों या पक्षकारों या उनमें से दिकसी क े भी पक्ष में प्रयोग की Oा सक े गी, यद्यदिप ऐसे प्रत्यर्थिर्थीयों या पक्षकारों ने कोई भी अपील या आक्षेप र्फाइल न दिकया हो। परन् ु अपील न्यायालय ारा 35 क क े अ ीन कोई भी आ ेश दिकसी ऐसे आक्षेप क े अनुसरर्ण में नहीं करेगा सिOस पर उस न्यायालय ने सिOसकी तिडhी उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" की अपील की गई है, ऐसा आ ेश नहीं दिकया है या ऐसा आ ेश करने से इन्कार दिकया है।"
13. ण्ड प्रदिhया संदिह ा क े आ ेश XLI दिनयम 33 को पढ़ने पर यह प ा *ल ा है दिक अपीलीय न्यायालय क े पास दिकसी भी तिडhी या आ ेश, और ऐसी अन्य तिडhी या आ ेश पारिर करने क े लिलए Oैसा मामला अपेतिक्ष हो, की शदिक्त है सिOसे पारिर दिकया Oाना *ादिहए र्थीा।इस बा क े बावOू दिक अपील तिडhी क े एक भाग क े दिवरूn है, इस शदिक्त का प्रयोग न्यायालय 0ारा सभी या दिकसी भी प्रत्यर्थी4 क े पक्ष में दिकया Oा सक ा है, यद्यदिप इस रह क े प्रत्यर्थी4 ने कोई अपील या आपलि• O[7] नहीं की हो सक ी है। हालाँदिक, उक्त शदिक्त को साव ानी या स क 7 ा क े सार्थी प्रयोग दिकया Oाना *ादिहए, दिवशेष रूप से अनुपस्थिस्र्थीति में प्रत्यर्थिर्थीयों 0ारा कोई प्रत्याक्षेप या अपील ायर की Oा रही है।इस रह की शदिक्त को असा ारर्ण मामलों में प्रयोग दिकया Oाना *ादिहए Oबदिक इसक े प्रयोग न करने से पक्षकारों क े अति कारों क े समायोOन में कदिठनाइयों को Oन्म ेगा।
14. पूव क्त दिनयम उन तिडhी में हस् क्षेप करने क े लिलए अप्रति बंति अति कार प्र ान नहीं कर ा है सिOन पर क े वल इसलिलए *ुनौ ी नहीं ी Oा ी है क्योंदिक अपीलीय न्यायालय अपील दिकये गए न्यायालय की राय से सहम नहीं हो ा है। कानून क े अनुसार अपील य करना अपीलीय न्यायालय का क 7व्य है।अपीलीय न्यायालय को दिकसी मामले का र्फ ै सला कर े समय साक्ष्य क े लिलए अपने न्यातियक मस्थिष् ष्क को लागू करना *ादिहए और गुर्ण- ोष क े आ ार पर दिकसी दिनर्ण7य में हल्क े ढंग से हस् क्षेप नहीं दिकया Oाना *ादिहए या पूरी रह से कनीकी आ ार पर उलट नहीं दिकया Oाना *ादिहए Oब क दिक इसका परिरर्णाम न्याय की दिवर्फल ा न हो। उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
15. हालांदिक त्कालीन मामले में उच्च न्यायालय ने राO कु मार बनाम अOय क ु मार-(2011) 1 एससीसी 343, में इस न्यायालय क े र्फ ै सले पर अवलम्ब लिलया है, हमारे दिव*ार में यह काया7त्मक अक्षम ा क े प्रति श को 50% से 20% क कम नहीं कर सक ा र्थीा, Oबदिक बीमा क ं पनी 0ारा और ऐसा करने क े लिलए उति* कारर्णों को O[7] करने क े अभाव में ायर अपील या प्रत्याक्षेप 0ारा दिटVब्यूनल क े दि ये गए उक्त दिनष्कष[7] की कोई *ुनौ ी नहीं र्थीी।Oैसा दिक पहले ही कहा गया है, र्घायल अपीलक ा7- ावे ार ने मुआवOे की र में वृतिn की मांग कर े हुए अपील ायर की र्थीी दिक वह अपने शरीर क े दिवशेष भागों में 70% दिवकलांग ा का सामना कर रहा र्थीा लेदिकन दिटVब्यूनल ने इसकी अन ेखी की र्थीी और क े वल 50% की र से दिवकलांग ा का आकलन दिकया र्थीा। गुर्ण- ोष क े आ ार पर उस दिववा पर दिव*ार करने क े बOाय, उच्च न्यायालय ने इसकी उपेक्षा की और इसक े बOाय प्रति वा ी-बीमा क ं पनी क े क~ को महत्व दि या Oो इस आशय का र्थीा दिक 50% की र से काया7त्मक दिवकलांग ा की गर्णना उच्च पक्ष पर र्थीी और इसे कम दिकया Oाना र्थीा और इसलिलए, पक्षकारों को पूर्ण[7] न्याय करने क े लिलए ंड प्रदिhया संदिह ा क े आ ेश XLI दिनयम 33 क े ह शदिक्त का प्रयोग दिकया Oा सक ा र्थीा।हम पा े हैं दिक उच्च न्यायालय इस मामले में अपने दृदिष्टकोर्ण में सही नहीं र्थीा दिक प्रति वा ी - बीमा क ं पनी ने दिटVब्यूनल 0ारा ी गई मुआवOे की राथिश में कमी क े लिलए कोई अपील ायर नहीं की र्थीी और परिरर्णामस्वरूप, र्घायल अपीलक ा7-वा ी 0ारा ायर अपील में, मुआवOे में वृतिn की मांग करने वाले अपीलक ा7 - ावे ार की याति*का की अन ेखी करक े बीमा क ं पनी क े क 7 को अनुमति नहीं ी Oानी *ादिहए र्थीी।उसक े 0ारा ायर अपील में मुआवOे की वृतिn की मांग कर े हुए अपीलक ा7- ावे ार दिटVब्यूनल 0ारा उसे दि ए गए मुआवOे से अति क कम नहीं हो सक ा र्थीा। उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
16. यह नोट दिकया Oा ा है दिक सिOला अस्प ाल हमी पुर में आर्थी पेतिडक सO7न और मेतिडकल बोड[7] क े स स्य डॉ. पुष्कर आनं ने इस बा का दिवरो दिकया र्थीा दिक ुर्घ7टना में उसे लगी *ोटों क े परिरर्णामस्वरूप अपीलक ा7 को अपने ोनों र्घुटनों, पैर की उंगलिलयों और कलाई में आंथिशक कठोर ा का सामना करना पड़ा। वह पैरों को दिहलाने डुलाने में अक्षम र्थीा और इसलिलए, उसे 70% दिवकलांग ा पर आंका गया र्थीा न दिक पूरे शरीर की दिवकलांग ा को। दिटVब्यूनल, हालांदिक, ने कहा दिक दिवकलांग ा क े वल 50% र्थीी क्योंदिक डॉक्टर ने भी स्वीकार दिकया र्थीा दिक अपीलक ा7 का काम इ ना बुरी रह प्रभादिव नहीं होगा सिO ना दिक उसक े 0ारा ावा दिकया गया र्थीा।हालाँदिक, उच्च न्यायालय ने दिवकलांग ा क े प्रति श को यह मान े हुए क े वल 20% क कम कर दि या है दिक दिन*ले अंगों में कम नहीं दिकया गया र्थीा और यह दिक पैरों में Oोड़ों की Oकड़न *ोट या बीमारी Oैसे दिक 'एंदिकलोसिसस' क े कारर्ण हो सक ी है। लेदिकन वास् व में, अपीलक ा7 क े ोनों दिन*ले अंगों और हार्थीों में फ्र ै क्*र र्थीा।
17. हमारा दिव*ार है दिक व 7मान मामले में उच्च न्यायालय को ंड प्रदिhया संदिह ा क े आ ेश XLI दिनयम 33 क े ह अपनी शदिक्त का प्रयोग करना और दिटVब्यूनल 0ारा दि ए गए मुआवOे को 5,42,633/- रुपये से र्घटाकर 3,26,833/- रुपये यानी मुआवOे की राथिश में क ु ल 2,15,800/- रुपये की कमी करना उति* नहीं र्थीा।सार्थी ही, उच्च न्यायालय ने 'अटेंडेंट' और 'भदिवष्य क े इलाO' क े शुल्कों क े म में अति रिरक्त मुआवOे का आ ेश दि या।
18. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए, हम उच्च न्यायालय 0ारा पारिर आक्षेदिप दिनर्ण7य और अति दिनर्ण7य को अपास् करक े दिटVब्यूनल 0ारा इसक े दिनर्ण7य 01.07.2017 दि नांदिक को दि ए गए मुआवOे यानी 5,42,633/- रूपये को बहाल करना न्यायोति* पा े हैं।इसक े परिरर्णामस्वरूप हम प्रति वा ी-बीमा क ं पनी उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" को ावा याति*का ायर करने की ति थिर्थी से ीन माह की अवति क े भी र अपीलक ा7- ावे ार को वास् दिवक भुग ान की ति थिर्थी क 7% प्रति वष[7] की र से ब्याO क े सार्थी उक्त मुआवOे की राथिश का भुग ान करने का दिन —श े े हैं।
19. नुसार आ ेश हुआ।
20. पूव क्त श ~ में अपील को अनुमति प्र ान की Oा ी है।कोई लाग नहीं। 21. लंदिब वा ा7कार आवे न, यदि कोई हो, का दिनस् ारर्ण दिकया Oा ा है। [न्यायमूर्ति डॉ. नंOय वाई *ंद्र*ूड़] [न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना] नई दि ल्ली; 17 सिस म्बर 2021 उद्र्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवादि दिनर्ण7य वा ी क े अपनी भाषा में समझने हे ु दिनबaति प्रयोग क े लिलए है और दिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं दिकया Oा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, दिनर्ण7य का अंग्रेOी संस्करर्ण प्रामाथिर्णक माना Oाएगा र्थीा दिनष्पा न और दिhयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"