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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील सं. 6092 वर्ष# 2021
(एसएलपी (दीवानी) सं. 5931/2015 से उद्भु )
स्टैंडड# चाट3ड# बैंक ...... अपीलार्थी6 (गण)
बनाम
आर.सी. श्रीवास् व ...... प्रत्यर्थी6 (गण)
निनण#य
न्यायमूर्ति रस् ोगी
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गयी।
2. व #मान अपील 14 सिस ंबर, 2006 को अति करण द्वारा निदए गए पूण# वे न क े सार्थी बहाली को बरकरार रख े हुए इलाहाबाद, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 21 नवंबर, 2014 क े निनण#य और आदेश क े खिखलाफ दायर की गयी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2021 INSC 574
3. संक्षेप में थ्य जो इस उद्देश्य क े खिलए प्रासंनिगक हैं निक प्रत्यर्थी6 /कम#कार अपीलक ा#-बैंक 1 का एक कम#चारी र्थीा और कथिर्थी अपरा क े खिलए जो उसने 12 जनवरी, 1988 को अपने क #व्यों क े निनव#हन में निकया र्थीा, एक आरोप पत्र 27 जनवरी, 1988 को प्रत्यर्थी6-कम#कार क े निवरूद्ध लाया गया र्थीा, सिजसमें उस पर अपीलक ा#-बैंक क े परिरसर क े भी र नशा करने और वरिरष्ठ अति कारिरयों क े सार्थी झड़प और मारपीट करने क े खिलए और प्रबं न पर गाली गलौज का भी आरोप लगाया गया र्थीा। 27 जनवरी, 1988 क े आरोप पत्र का प्रासंनिगक भाग निनम्नानुसार हैः- "आप जान े हैं निक मुकदमा संख्या 5887/83 में न्यायालय में सुनवाई निदनांक 13.1.88 क े खिलए निनय र्थीी सिजसमें आप भी एक पक्ष हैं। निदनांक 12.1.88 को काया#लय क े समय में, बैंक क े कम#चारी श्री बच्चू लाल निमश्रा और श्री पी.क े. सेठ, कल अदाल में एक मुकदमा है, इसखिलए मुझे देर से अंनिक न करें क्योंनिक मैं अपने घर से सी े अदाल जाऊ ं गा। श्री सेठ ने आपसे और श्री निमश्रा से कहा निक आपको पहले बैंक आना चानिहए, उपस्थिस्र्थीति रसिजस्टर पर हस् ाक्षर करना चानिहए और उसक े बाद ही आपको अदाल में जाना चानिहए। शाम को निफर से लगभग
5.30 बजे आपने श्री बीएल निमश्रा क े सार्थी श्री सेठ से संपक # निकया और उनसे कहा निक श्री बीएल निमश्रा को 13.1.88 को देरी क े खिलए अंनिक न करें और वह पहले बैंक में रिरपोट# न करक े सी े अपने घर से अदाल जाएंगे।श्री सेठ ने आपको और श्री निमश्रा को पहले बैंक आने, उपस्थिस्र्थीति रसिजस्टर पर हस् ाक्षर करने और निफर अदाल में जाने क े खिलए कहा। आपने और श्री निमश्रा ने श्री सेठ से श्री सिसक्का, सहायक प्रबं क (संचालन) से बा करने क े खिलए कहा, सिजन्होंने बदले में श्री सेठ को उपस्थिस्र्थीति रसिजस्टर में अदाल का मामला खिलखने की सलाह दी, सिजस थ्य से आपको व श्री निमश्रा को भी ब ा निदया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसी निदन यानी 12.1.88 को, श्री सेठ श्री अरुण शमा# क े सार्थी लगभग 9.00 बजे काया#लय में र्थीे और जब आप श्री बीएल निमश्रा, श्री र्थीान सिंसह और एक बाहरी व्यनिl क े सार्थी नशे की हाल में बैंक हॉल में दाखिखल हुए ो शाखा को बंद करने जा रहे र्थीे और उपस्थिस्र्थीति रसिजस्टर में देर से अंकन क े संबं में चचा# शुरू कर दी। श्री ए शमा# ने आपको और अन्य लोगों को यह ब ा े हुए शां करने कोथिशश की निक इस रह की अपेक्षाएँ काया#लय क े सामान्य मानदंड हैं और अति कारी वरिरष्ठ अति कारिरयों क े निनद3श पर काय# कर रहे हैं और ऐसी अपेक्षाएँ क े वल काया#लय निनयमों क े अनुसार हैं।यह ब ाया जा ा है निक श्री निमश्रा और श्री र्थीान सिंसह दोनों ने प्रबं न/अति कारिरयों क े सार्थी दुव्य#वहार निकया जैसा निक आप श्री र्थीान सिंसह को मूकदश#क बनकर देख रहे र्थीेः"एक एक की देख लेगें, माँ चोद दूँगा, एक एक की ाँग ोड़ देगें।" श्री निमश्रा ने इस प्रकार दुव्य#वहार निकयाः 'माँ चोद दूँगा। एक एक की माँ चोद दूँगा।' बैंक क े अति कारिरयों श्री अरुण शमा# और श्री सेठ क े समझाने -बुझाने से, आप अन्य लोगों क े सार्थी बैंक हॉल से बाहर गए और बैंक क े परिरसर में खड़े हो गए, श्री शमा# ने परिरसर को बंद कर निदया। निफर से श्री निमश्रा और श्री र्थीान सिंसह दोनों ने श्री सेठ और प्रबं न को गाली देना शुरू कर निदया, इन लोगों की माँ चोद देगें। सालों की टाँग ोड़ देगें।इस बीच, श्री शमा# बैंक की चाबी जमा करने क े खिलए बैंक परिरसर में श्री सिसक्का क े निनवास पर गए। जैसे ही श्री शमा# बाहर गए, आपने बाहरी व्यनिl क े सार्थी श्री सेठ की गद#न से टाई खींचकर उनक े सार्थी हार्थीापाई की और र्थीप्पड़ मारे सिजससे उनका चश्मा टूट गया और उनकी बायीं आंख पर भी चोट क े निनशान आ गए। आपकी ओर से उपरोl काय# यनिद सानिब हो जा ा है ो 19.10.66 निदनांनिक निद्वपक्षीय समझौ ा (बाइपाटा#इट सेटलमेंट) क े अनुच्छेद 19.[5] क े ह निनम्नखिलखिख घोर कदाचार का गठन करेगा, जो निनम्नानुसार हैः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 19.[5] (ग): बैंक क े परिरसर में नशे की हाल या दंगा या अव्यवस्थिस्र्थी या अभद्र व्यवहार और (घ) बैंक क े निह क े प्रति क ू ल कोई काय# करना और ए द्द्वारा आप पर कदाचार क े उपरोl घोर क ृ त्यों का आरोप लगाया जा ा है।"
4. कथिर्थी घोर कदाचार क े खिलए जो उसने अपने क #व्यों क े निनव#हन में निकया र्थीा, एक निवभागीय जांच की गई और जांच क े दौरान, ीन गवाहों क े साक्ष्य अर्थीा# ् श्री पीक े सेठ (एमडब्लू 1), श्री बीएम सिसक्का (एमडब्लू 2) और श्री अरुण शमा# (एमडब्लू 3), जो अति कारी हैं और सिजनक े सार्थी कथिर्थी घटना हुई र्थीी, प्रबं न द्वारा प्रस् ु निकए गए और बचाव में, प्रति वादी-कम#कार साक्ष्य कटघरे में उपस्थिस्र्थी नहीं हुए र्थीे, लेनिकन दो कम#चारी अर्थीा# ् श्री श्याम बहादुर (डीडब्लू 1)-चौकीदार और बैंक क े एक पूव# कम#चारी श्री पन्ना लाल (डीडब्लू 2) को पेश निकया गया र्थीा।
5. जांच अति कारी ने निद्वपक्षीय समझौ ा क े संदभ# में जांच करने क े बाद और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े सम्यक ् अनुपालन क े बाद, दोर्षी-प्रत्यर्थी6 क े निवरूद्ध आरोपों को सानिब माना और अनुशासनात्मक प्राति करण ने सम्यक अनुपालन क े बाद जांच अति कारी द्वारा दज# निनष्कर्ष# की पुनि~ की और उसे 22 अगस्, 1991 क े एक आदेश द्वारा सेवा से बखा#स् गी क े दंड से दंतिड निकया।
6. अति करण क े न्याय-निनण#यन क े खिलए 30 जून, 1992 की इसकी अति सूचना द्वारा उपयुl सरकार द्वारा निकया गया संदभ# निनम्नानुसार हैः "क्या श्री आरसी श्रीवास् व को निदनांक 22 अगस् 1991 क े प्रभाव से सेवा से बखा#स् करने में एएनजेड ग्रिं€डलेज बैंक पीएलसी, कानपुर क े प्रबं न की कार#वाई उतिच है?यनिद नहीं, ो कम#कार निकस राह का हकदार है?" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
7. अति करण ने जांच क े अथिभलेख की जांच करने क े बाद पहली बार में घरेलू जांच को निनष्पक्ष और उतिच माना और उसक े बाद, जांच क े अथिभलेख पर पुनर्विवचार निकया और प्रबं न गवाहों अर्थीा# ्, श्री पीक े सेठ (एमडब्लू 1), श्री बी. एम. सिसक्का (एमडब्लू 2) और श्री अरुण शमा# (एमडब्लू 3) और बचाव पक्ष क े गवाह, चौकीदार (डीडब्ल्यू 1) और बैंक क े पूव# कम#चारी (डीडब्ल्यू 2) क े बयान का संज्ञान खिलया और एक निनष्कर्ष# दज# निकया निक अपीलक ा# -बैंक का प्रबं न प्रत्यर्थी6-कम#कार क े खिखलाफ लगाए गए आरोपों को स्र्थीानिप करने में बुरी रह से निवफल रहा है और आरोपों को सानिब नहीं माना और परिरणामस्वरूप, सेवा से बखा#स् गी क े आदेश को अपास् निकया और अपने निनण#य निदनांनिक 14 सिस ंबर 2006 द्वारा अपीलक ा# को प्रत्यर्थी6-कम#कार की सेवा, सार्थी ही पूण# बकाया वे न, वरिरष्ठ ा और पद से जुड़े सभी परिरणामी लाभ को बहाल करने का निनद3श निदया।
8. 14 सिस ंबर, 2006 निदनांनिक इस निनण#य को अपीलक ा# ने संनिव ान क े अनुच्छेद 226 और 227 क े ह एक रिरट यातिचका में चुनौ ी दी और उच्च न्यायालय ने 21 नवंबर, 2014 क े अपने निनण#य और आदेश द्वारा रिरट यातिचका को खारिरज कर निदया।
9. अपीलार्थी6 क े निवद्वान अति वlा का कहना है निक आं रिरक जांच को निनष्पक्ष और उतिच माना जाने क े बाद, अति करण क े पास आं रिरक जांच में दज# निनष्कर्ष… में हस् क्षेप करने की सीनिम गुंजाइश है और जब क निक निनष्कर्ष# प्रति क ू ल नहीं है और निकसी साक्ष्य द्वारा समर्थिर्थी नहीं है, ो अति करण औद्योनिगक निववाद अति निनयम, 1947 (इसक े बाद "अति निनयम 1947" क े रूप में संदर्थिभ ) की ारा 11 क क े दायरे में हस् क्षेप नहीं कर सक ा र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
10. हालांनिक, व #मान मामले में अति करण ने खुद को अपील क े न्यायालय में परिरवर्ति कर खिलया है और न क े वल पूरी रह से सबू ों पर पुनर्विवचार निकया है, बस्थिल्क इस ारणा पर आगे बढ़ा है निक प्रबं न को उतिच संदेह से परे आरोपों को सानिब करना है और ीन अति कारिरयों क े ास्थित्वक साक्ष्य क े बावजूद, सिजनका नशे की हाल में प्रत्यर्थी6-कम#कार द्वारा दुव्य#वहार निकया गया र्थीा, इसको इस आ ार पर पूरी रह से खारिरज कर निदया गया है निक चौकीदार (डीडब्ल्यू 1) और बैंक क े एक पूव# कम#चारी (डीडब्ल्यू 2) ने अपने बयान में कहा है निक ऐसी घटना नहीं हुई है और इसे सही ठहराने क े खिलए, एक दस् ावेज अर्थीा# ् प्रश्नग समय का उपस्थिस्र्थीति रसिजस्टर को अथिभलेख पर रखा गया र्थीा और आगे इस थ्य क े सार्थी सामना करने क े खिलए निक आं रिरक जांच में अपरा ी प्रस् ु नहीं हुआ र्थीा और अति करण द्वारा यह दज# निकया गया है निक ऐसी कोई घटना नहीं हुई है, यह क ु छ ऐसा है जो आकस्थिस्मक रूप से आया है और निबना निकसी थ्यात्मक आ ार क े, जाँच क े दौरान दज# निकया गया दोनिर्ष ा क े निनष्कर्ष# में अति करण द्वारा निकया गया हस् क्षेप न क े वल निवकार€स् है बस्थिल्क निवति में अपोर्षणीय है।
11. आं रिरक जांच क े मामले में न्यातियक समीक्षा की गुंजाइश यह जांचने क े खिलए है निक क्या आं रिरक जांच करने में प्रनि‰या का उल्लंघन निकया गया है या प्राकृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का अनुपालन निकया गया है, या आं रिरक जांच क े दौरान दज# दोर्षसिसद्धी क े निनष्कर्ष# में कोई निवक ृ ति कारिर की गयी है। अति करण द्वारा अपने आक्षेनिप निनण#य में जो मूल त्रुनिट की गई र्थीी, उसको उच्च न्यायालय द्वारा भी नहीं देखा गया है और आं रिरक जाँच में दोर्षसिसद्धी ारिर कर े हुए इस न्यायालय द्वारा प्रति पानिद संभावनाओं की प्रबल ा क े सिसद्धां क े आ ार पर आं रिरक जाँच में दज# निनष्कर्ष… पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ध्यान निदए निबना रिरट यातिचका को निनरस् कर निदया गया और अति निनयम 1947 की ारा 11 क में परिरभानिर्ष अपने अति कार क्षेत्र का अति ‰मण निकया है। इसक े निवपरी, सिजन अति कारिरयों क े सार्थी घोर कदाचार की कथिर्थी घटना हुई है, उन्हें यह ब ाया गया है निक वास् व में उनका आरोप बेबुनिनयाद, निनरा ार है और घटना हुई ही नही है जो कल्पना से परे है। इसक े अलावा, अपरा ी-प्रत्यर्थी6 को सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े बाद जब जांच क े दौरान यह स्र्थीानिप निकया गया र्थीा, निक जांच अति कारी ने आरोपों को सानिब माना और प्रत्यर्थी6 को बखा#स् गी का दण्ड़ देकर अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा पुनि~ की गई।
12. इस न्यायालय को सूतिच निकया गया है निक प्रत्यर्थी6-कम#कार ने 31 जनवरी, 2012 को सेवानिनवृखि• की आयु प्राप्त कर ली र्थीी और मुकदमेबाजी की अवति क े दौरान, उसे अति निनयम 1947 की ारा 17 ख क े संदभ# में उसक े अंति म वे न का भुग ान कर निदया गया है।
13. इसक े निवपरी, अति करण द्वारा दज# निकए गए निनष्कर्ष… और उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेनिप निनण#य की पुनि~ का समर्थी#न कर े हुए प्रत्यर्थी6 क े निवद्वान अति वlा ने कहा निक अथिभलेख पर कोई साक्ष्य नहीं र्थीा जैसा निक सव#प्रर्थीम अति करण द्वारा इस निनष्कर्ष# पर पहुँचने क े खिलए समझा गया निक ऐसी कथिर्थी घटना सिजसक े संदभ# में आं रिरक जांच की गई र्थीी, कभी नहीं हुई र्थीी और उसक े खिखलाफ कार#वाई की गई र्थीी क्योंनिक वह संघ का एक सनि‰य सदस्य र्थीा और यह अपीलक ा# द्वारा बैंक में उसकी ट्रेड यूनिनयन गति निवति यों को रोकने क े खिलए प्रत्यर्थी6 को निनकालने क े खिलए अपनाया गया घुमावदार रास् ा र्थीा और उपलब् एकमात्र सहारा ऐसे बेबुनिनयाद आरोपों को लगाना र्थीा जो निनति• रूप से अति करण द्वारा न्यातियक समीक्षा निकए जाने पर सही सानिब Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नहीं हो ा है और अति करण द्वारा ठीक ही हस् क्षेप निकया गया और उच्च न्यायालय द्वारा पुनि~ की गई है।
14. हमने पक्षकारों क े क… पर निवचार निकया है और उनकी सहाय ा से अथिभलेख पर उपलब् साम€ी की जांच की है।
15. इस न्यायालय ने 27 फरवरी, 2015 को नोनिटस जारी कर े हुए स्प~ रूप से इस कारण से निपछले वे न क े भुग ान पर रोक लगा दी र्थीी निक उस समय क प्रत्यर्थी6-कम#चारी 31 जनवरी, 2012 को सेवानिनवृखि• की आयु प्राप्त कर चुका र्थीा।
16. प्रत्यर्थी6 का मामला यह नहीं है निक 19 अक्टूबर, 1966 को निद्वपक्षीय समझौ े क े अनुसार आं रिरक जांच नहीं की गई है, जो एक कम#कार द्वारा निकए गए कदाचार और कथिर्थी कदाचार क े संदभ# में आं रिरक जांच करने क े खिलए लागू र्थीा, सिजसक े खिलए प्रत्यर्थी6-कम#कार को आरोनिप निकया गया र्थीा, इसे निद्वपक्षीय समझौ ा क े खंड 19.5(ग) और (घ) क े ह कदाचार में से एक क े रूप में परिरभानिर्ष निकया गया है। 19 अक्टूबर, 1966 क े निद्वपक्षीय समझौ ा क े प्रस् र 19.[5] क े ह घोर कदाचार का गठन करने वाले काय# निनम्नानुसार हैंः "19.[5] (ग): बैंक क े परिरसर में नशे की हाल या दंगा या अव्यवस्थिस्र्थी या अभद्र व्यवहार और (घ) बैंक क े निह क े प्रति क ू ल कोई काय# करना और ए द्द्वारा आप पर उपरोl घोर कदाचार क े क ृ त्यों का आरोप लगाया जा ा है।"
17. 27 जनवरी 1988 को आरोप-पत्र पेश होने क े बाद, सिजसका एक निवस् ृ संदभ# जांच क े दौरान निदया गया है, बैंक क े अति कारिरयों अर्थीा# ् श्री पीक े सेठ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (एमडब्लू 1), श्री बी. एम. सिसक्का (एमडब्लू 2) और श्री अरुण शमा# (एमडब्लू 3) सिजनक े सार्थी कथिर्थी कदाचार प्रत्यर्थी6-कम#कार द्वारा निकया गया र्थीा, वे आरोप-पत्र में प्रत्यर्थी6-कम#कार क े खिखलाफ लगाए गए आरोप क े समर्थी#न में प्रबं न की ओर से गवाह क े रूप में उपस्थिस्र्थी हुए र्थीे और सुज्ञा कारण से प्रत्यर्थी6 ने जांच क े दौरान बचाव में अपना स्वयं का बयान दज# नहीं कराया र्थीा, बस्थिल्क (डीडब्ल्यू 1) चौकीदार और (डीडब्ल्यू 2) बैंक क े एक पूव# कम#चारी को प्रस् ु निकया सिजन्होनें प्रबं न क े गवाहों क े बयान, सिजनक े सार्थी कथिर्थी घटना हुई र्थीी, का निवरो निकया, प्रत्यक्ष सबू क े आ ार पर, स्प~ रूप से प्रत्यर्थी6-कम#कार क े खिखलाफ लगाए गए इस रह क े कदाचार क े आरोप का समर्थी#न करने क े खिलए कोई दस् ावेजी साक्ष्य नहीं हो सक ा है, जांच अति कारी ने सुनवाई का अवसर देने और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े उतिच अनुपालन क े बाद आरोप को सानिब मानकर निनष्कर्ष# दज# निकया और अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा पुनि~ की गयी और इसक े परिरणामस्वरूप, उसे 22 अगस् 1991 क े प्रभाव से सेवा से बखा#स् गी क े दंड से दंतिड निकया गया। आं रिरक जांच क े अथिभलेख का निफर से मूल्यांकन करने क े बाद अति करण ने इसे निनष्पक्ष और उतिच माना, आं रिरक जांच में इस हद क हस् क्षेप करने की बहु सीनिम गुंजाइश है निक थ्य क े निनष्कर्ष# में कोई स्प~ निवक ृ ति है जो जाँच क े दौरान दज# निकए गए साक्ष्य क े आ ार पर जाँच अति कारी द्वारा अपनी जाँच रिरपोट# में अथिभखिलखिख निकया गया है और यह निक निद्वपक्षीय समझौ े का अनुपालन जो जांच करने की प्रनि‰या का प्राव ान कर ा है, का उल्लंघन निकया गया है या आरोप की प्रक ृ ति क े अनुरूप कम#कार क े निवरूद्ध आरोनिप दंड उसक े खिखलाफ सानिब हो जा ा है और यनिद यह पूरी रह से आ ारहीन है, ो अति करण अति निनयम 1947 की ारा 11 क क े ह अपनी वै ानिनक शनिl का प्रयोग करक े हस् क्षेप करने मे हमेशा न्यायसंग होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
18. व #मान मामले में, अथिभलेख का परिरशीलन करने क े बाद हम पा े हैं निक अति करण ने खुद को अपीलीय प्राति कारी क े रूप में अपील क े न्यायालय में बदल खिलया है और आं रिरक जाँच क े ‰म में पाए गए निनष्कर्ष… की जाँच कर े हुए अपने क्षेत्राति कार का अति ‰मण निकया है और आरोप को युनिlयुl संदेह से परे सानिब निकए जाने क े व्यापक सिसद्धां पर प्रेक्षण निकया है जो निक आपराति क न्याय प्रणाली में की एक कसौटी है और इस थ्य को पूण# भुला निदया है निक आं रिरक जांच का परीक्षण संभावनाओं की प्रबल ा की कसौटी पर निकया जाना चानिहए और यनिद अथिभलेख पर कोई साक्ष्य है जो उस आरोप का समर्थी#न कर सक ा है जो अपरा ी क े खिखलाफ लगाया गया है, जब क निक यह स्व ः अपोर्षणीय या निवक ृ न हो, आम ौर पर अति करण द्वारा हस् क्षेप नहीं निकया जाना चानिहए और ब ो निबल्कु ल भी नहीं, जब आं रिरक जांच को निनष्पक्ष और उतिच माना गया हो और हमारे दृनि~कोंण में, अति करण ने जांच क े दौरान दज# निकए गए निनष्कर्ष# क े सार्थी हस् क्षेप कर े हुए पूरी रह से अनदेखी की है और अपने अति कार क्षेत्र को पार निकया है, सिजसक े अनुसरण में प्रत्यर्थी6 को सेवा से बखा#स् कर निदया गया र्थीा और उच्च न्यायालय ने भी आक्षेनिप निनण#य पारिर कर े समय एक स्प~ त्रुनिट की है।
19. श्रम न्यायालय का निनण#य क े वल परिरकल्पना पर आ ारिर नहीं होना चानिहए।यह मनमाने व असमर्थिर्थी कर्थीन पर प्रबं न क े निनण#य को पलट नहीं सक ा है।अति निनयम 1947 की ारा 11 क क े ह इसका अति कार क्षेत्र हालांनिक व्यापक है लेनिकन इसका निववेकपूण# रीक े से प्रयोग निकया जाना चानिहए।यह प्रचखिल व सामान्य है निक न्यातियक निववेक का प्रयोग स्वेच्छाचारी या मनमौजी ढंग से नहीं निकया जा सक ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह सबू ों की जांच या निवश्लेर्षण कर सक ा है लेनिकन महत्वपूण# यह है निक ऐसा क ै से हो ा है।
20. हमारा निवचार है निक अति करण द्वारा पारिर और उच्च न्यायालय द्वारा पु~ आक्षेनिप निनण#य निवति में पोर्षणीय नहीं है।
21. इस न्यायालय क े समक्ष सुनवाई की अंति म ति थिर्थी पर, हमने अपीलक ा# से प्रत्यर्थी6-कम#कार को निकए गए भुग ान को हमारे परिरशीलन क े खिलए प्रस् ु करने का आह्वान निकया है।
22. इसक े अनुपालन में, हमारे समक्ष लेखा-निववरण को परिरशीलन क े खिलए रखा गया है, यह दशा# ा है निक 46,89,421.16 रू. की नराथिश सार्थी ही अति निनयम 1947 की ारा 17 ख क े ह 10,27,096.56 रू. की नराथिश, क ु ल 57,16,517.72 की नराथिश का भुग ान प्रत्यर्थी6-कम#कार को अं रिरम अवति में निकया गया है।
23. प्रत्यर्थी6 क े निवद्वान अति वlा ने अपनी दलील में इस न्यायालय को यह समझाने की कोथिशश की है निक अपीलक ा# द्वारा एक गरीब कामगार को निनशाना बनाया गया है और अपने पूरे जीवन में, वह मुकदमेबाजी में रहा है और उसे जो भुग ान निकया गया है, वह उसका वै बकाया है और यनिद हस् क्षेप निकया जा ा है, ो उसक े प्रति क ू ल हो सक ा है।
24. निदए गए थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, इस मामले क े निवशेर्ष थ्यों को देख े हुए, जहां प्रत्यर्थी6-कम#कार को 5,7,16,517.72 रू. नराथिश का भुग ान निकया गया र्थीा और 31 जनवरी, 2012 को सेवानिनवृखि• की आयु प्राप्त कर ली र्थीी, इस न्यायालय द्वारा 27 फरवरी, 2015 क े आदेश द्वारा बकाया वे न क े संदभ# में स्टे निदया गया र्थीा, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जबनिक आं रिरक जांच में प्राति करण द्वारा पारिर 22 अगस्, 1991 की सेवा से बखा#स् गी क े दंड क े आदेश को बरकरार रख े हुए, हम यह उतिच समझ े हैं निक अं रिरम अवति में कम#कार को निकए गए भुग ान क े संदभ# में कोई वसूली नहीं की जाएगी, सिजसका संदभ# हमारे द्वारा निदया गया है।
25. अपील सफल हो ी है और दनुसार अनुमति दी जा ी है और अति करण द्वारा पारिर 14 सिस ंबर, 2006 क े निनण#य की पुनि~ कर े हुए 21 नवंबर, 2014 क े उच्च न्यायालय क े निनण#य को इस स्प~ीकरण क े सार्थी अपास् निकया जा ा है निक अं रिरम अवति में प्रत्यर्थी6-कम#कार को निकए गए भुग ान क े संदभ# में कोई वसूली नहीं होगी।
26. लंनिब आवेदन, यनिद कोई हों, को भी निनस् ारिर समझा जाएगा। ……...........................… (न्यायमूर्ति अजय रस् ोगी) …….............................. (न्यायमूर्ति अभय एस. ओका) नई निदल्ली 29 सिस ंबर, 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA