Messrs New Victoria Vimals v. Shrikant Iyer

Delhi High Court · 27 Dec 2021
Sanjay Vikshan Kaul; M. M. Sundresh
Civil Appeal No. 5685 of 2021
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that once a voluntary retirement application under MVRS is accepted by the employer, it becomes irrevocable and terminates employment from the cutoff date, dismissing the employee's attempt to withdraw the application post-acceptance.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील सं. 5685/2021
मैसस& न्यू विवक्टोरिरया विमल्स और अन्य। ...… अपीलक ा&गण
बनाम
श्रीकां आय& ..... प्रत्यर्थी8
विनण&य
न्यायमूर्ति संजय विकशन कौल
JUDGMENT

1. नेशनल टेक्सटाइल कॉप रेशन लिलविमटेड (संक्षेप में 'एनटीसी'), क ं पनी अति विनयम, 1956 क े ह गविH और पंजीक ृ एक साव&जविनक क्षेत्र का उपक्रम है। हमारे समक्ष अपीलक ा& संख्या 2 नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (उत्तर प्रदेश) लिलविमटेड, कानपुर है, जो अपीलक ा& संख्या 3 की सहायक क ं पनी है, जिजसने उत्तर प्रदेश राज्य में कई औद्योविगक प्रति ष्ठान स्र्थीाविप विकए हैं। अपीलक ा& संख्या 1, मैसस& न्यू विवक्टोरिरया विमल्स, कानपुर अपीलक ा& संख्या 2 द्वारा स्र्थीाविप ऐसा ही एक अति ष्ठान है। प्रत्यर्थी8 1991 से अपीलक ा& संख्या 1 में पय&वेक्षक (रखरखाव) क े रूप में काय&र र्थीा, जिजसे अपीलक ा& संख्या 2 द्वारा स्र्थीाविप एक अन्य औद्योविगक इकाई, मैसस& एर्थीरटन विमल्स से स्र्थीानां रण पर विनयुक्त विकया गया र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. कपड़ा उद्योग सदी क े विब े-विब े कविHन समय से गुजरा और दनुसार विवभिभन्न कपड़ा विमलों क े विनरं र अस्तिस् त्व की व्यवहाय& ा की जांच करने क े प्रयास विकए गए। इन विमलों क े अस्तिस् त्व पर प्रश्नतिचह्न का उन लोगों पर प्रभाव पड़ा जो इन विमलों में काय&र र्थीे। इन कम&चारिरयों क े विह ों की रक्षा क े लिलए, अपीलक ा& संख्या 1 क े कम&चारी व श्रविमकों और अपीलक ा& संख्या 2 द्वारा संचालिल क ु छ अन्य विमलों क े कम&चारिरयों और श्रविमकों की स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त की सुविव ा क े लिलए अपीलक ा& संख्या 3 द्वारा एक संशोति स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना (संक्षेप में 'एमवीआरएस/योजना') का प्रस् ाव विकया गया र्थीा। यह ध्यान रखना महत्वपूण& है विक यह एमवीआरएस अति शेष श्रमशविक्त को क & संग बनाने और अपीलक ा& संख्या 2 क े नुकसान को कम करने क े उद्देश्य से औद्योविगक और विवत्तीय पुनर्निनमा&ण बोड& (संक्षेप में 'बीआईएफआर') द्वारा की गई जिसफारिरशों क े अनुसार प्रस् ाविव विकया गया र्थीा। बीआईएफआर परिरदृश्य में आया र्थीा क्योंविक अपीलक ा& संख्या 2 की उत्पादन गति विवति यों को रोक विदया गया र्थीा और इसे रूग्ण औद्योविगक क ं पनी (विवशेष प्राव ान) अति विनयम, 1985 क े ह एक रूग्ण उपक्रम घोविष विकया गया र्थीा। अपीलक ा& संख्या 2 की विवत्तीय स्तिस्र्थीति इ नी खराब र्थीी विक बीआईएफआर ने अपीलक ा& संख्या 1 सविह अपीलक ा& संख्या 2 की ग्यारह विमलों में से नौ को बंद करने की जिसफारिरश की। यह जिसफारिरश कर े समय, कम&चारिरयों क े विह ों को सुरतिक्ष करने क े लिलए बीआईएफआर ने एक श & लगाई विक विमलों को क े वल भी बंद विकया जाएगा जब उसमें काम करने वाले सभी कम&चारिरयों को स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना का लाभ विदया जाए।इस प्रकार, एमवीआरएस को पहले संशोति स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना क े अति क्रमण में प्रख्याविप विकया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. प्रबं न ने एमवीआरएस क े खंड 1.[6] क े संदभ& में कोई कारण ब ाए विबना एमवीआरएस आवेदन को अस्वीकार करने का अति कार सुरतिक्ष रखा। एमवीआरएस का खंड 1.[6] इस प्रकार हैः "1.[6] प्रबं न विबना कोई कारण ब ाए एमवीआरएस आवेदन को अस्वीकार करने का अति कार सुरतिक्ष रख ा है, आगे 1.6.[1] और 1.6.[2] क े संबं में एमवीआरएस क े लिलए आवेदनों को विनदेशक मंडल क े समक्ष विवचार क े लिलए रखा जा सक ा है। 1.6.[1] जहां अनुशासनात्मक काय&वाही या ो लंविब है या बड़ा जुमा&ना लगाने क े लिलए संबंति कम&चारी क े लिखलाफ विवचार में है। 1.6.[2] जहां विकसी दांतिडक न्यायालय में अभिभयोजन परिरकस्तिल्प है या विकसी न्यायालय में पहले ही आरंभ विकया जा चुका है और 1.6.[3] ऐसे कम&चारी जो सामान्य रीति में क ं पनी की सेवाओं से इस् ीफा दे दे े हैं, एमवीआरएस में हकदार नहीं हैं।"

4. इसक े अलावा एमवीआरएस क े खंड 4.0 में एमवीआरएस क े ह लाभों क े लिलए प्राव ान विकया गया है, जो इस प्रकार है: "4.0 योजना क े अ ीन अन्य विनलंबन लाभ 4.[1] कम&चारी भविवष्य विनति अति विनयम और उसक े अ ीन बनाए गए विनयमों क े अनुसार देय भविवष्य विनति खा ों में शेष राभिश। 4.[2] संबंति विमलों/काया&लय क े विनयमों क े अनुसार संतिच अर्जिज अवकाश/ विवशेषाति कार/अवकाश क े बराबर नकद। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 4.[3] उपदान संदाय अति विनयम या उपदान योजना क े अनुसार उपदान, यविद कोई हो।"

5. एमवीआरएस क े लिलए प्रविक्रया खंड 5.0 में विन ा&रिर की गई र्थीी। इसक े क ु छ प्रासंविगक उप-खंड प्रस् ु करना पया&प्त है, जिजन्हें विनम्नानुसार संदर्भिभ विकया गया हैः "5.0 प्रविक्रया 5.[1] कोई पात्र कम&चारी योजना क े अ ीन स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े लिलए विवविह प्रपत्र में एन. टी. सी. में ारिर पद और सेवा से त्यागपत्र देकर सक्षम प्राति कारी को आवेदन प्रस् ु कर सक े गा। योजना क े ह विकसी कम&चारी की स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े परिरणामस्वरूप रिरक्त होने वाला पद सभी मामलों में इस योजना क े ह कम&चारिरयों को सेवाविनवृलित्त क े लाभों को विव रिर करने से पहले एक सार्थी इस् ीफ े और इस आशय क े जारी विकए गए आदेश को स्वीकार कर े हुए एक सार्थी समाप्त हो जाएगा और कोई भी व्यविक्त (स्र्थीायी/स्र्थीानापन्न/अस्र्थीायी आविद) उसक े स्र्थीान पर विनयोजिज नहीं विकया जाएगा।".….….….….… …. “5.10 एक बार जब कोई कम&चारी विकसी पीएसयू से स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त का लाभ उHा ा है, ो उसे विकसी अन्य पीएसयू में रोजगार लेने की अनुमति Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नहीं दी जाएगी। यविद वह ऐसा करना चाह ा है, ो उसे संबंति पीएसयू को उसक े द्वारा प्राप्त वीआरएस मुआवजा वापस करना होगा, जहां सरकारी अनुदान से मुआवजे का भुग ान विकया गया र्थीा, ो संबंति पीएसयू सरकार को वापसी राभिश भेज देगा यविद पीएसयू पहले से ही बंद/विवलय हो गयी है, ो वीआरएस मुआवजा सी े सरकार को वापस कर विदया जाएगा।" खण्ड 5.[1] का एक महत्वपूण& पहलू यह र्थीा विक कम&चारी क े स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े सार्थी-सार्थी उनक े इस् ीफ े की स्वीक ृ ति क े परिरणामस्वरूप पद को ही समाप्त कर विदया जाना र्थीा और पद खाली हो गया र्थीा और योजना क े ह यह कम&चारी को सेवाविनवृलित्त लाभों क े संविव रण क े लिलए एक प्रस् ावना र्थीी।यह उद्देश्य सुविनति~ करना प्र ी हो ा है विक योजना का उपयोग विकसी कम&चारी को बाहर विनकालने और उसक े स्र्थीान पर विकसी अन्य व्यविक्त को रखने क े लिलए नहीं विकया गया र्थीा, जो योजना क े उद्देश्य क े विबल्क ु ल विवपरी होगा।

6. प्रत्यर्थी8 ने योजना क े ह अवसर का लाभ लेने की मांग की और 12.07.2002 को एक पत्र लिलखा।इसका प्रासंविगक उद्धरण विनम्नानुसार हैः "यह विक राष्ट्रीय पुनवा&स योजना द्वारा संचालिल सेवा योजना से संशोति स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े ह विमल की सूचना विदनांविक ः 13.06.2002 और 04.07.2002 क े संदभ& में, आवेदक अपना इस् ीफा प्रस् ु करना चाह ा है। इसलिलए आवेदक की सेवा अवति क े सभी लाभों का भुग ान सुविनति~ करक े आवेदक क े इस् ीफ े को स्वीकार करने का अनुरो विकया जा ा है।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह ध्यान देना प्रासंविगक है विक इस् ीफ े को त्काल लागू करने की मांग क े वल इस अनुरो क े सार्थी की गई र्थीी विक सेवा क े सभी लाभों का भुग ान ुरं विकया जाए।

7. एक पहलू जिजसने प्रत्यर्थी8 को क ु छ पीड़ा पहुंचाई, वह यह र्थीा विक स्पष्ट रूप से अपीलक ा& संख्या 1 और प्रत्यर्थी8 क े बीच प्रत्यर्थी8 क े भविवष्य विनति खा े में की जाने वाली जमाराभिश से संबंति पहले से ही विववाद र्थीा। यह इस संबं में विदनांक 29.03.2000 और 23/24.04.2000 को संबोति दो पत्रों से स्पष्ट है, जिजसमें यह भिशकाय र्थीी विक 1991 से भविवष्य विनति राभिश उनक े खा े में जमा नहीं की गई है। 12.07.2002 विदनांविक अपने पत्र को प्रस् ु करने पर भी, ऐसा प्र ी हो ा है विक इस मुद्दे को हल नहीं विकया गया र्थीा, फलस्वरूप उसी विबषय पर प्रत्यर्थी8 ने 03.03.2003 विदनांविक एक पत्र विदया। इस पत्र में, प्रत्यर्थी8 ने अनुरो विकया विक चूंविक समस्या हल नहीं हुई र्थीी, इसलिलए एमवीआरएस क े ह उनक े आवेदन को ब क विनलंविब रखा जाए जब क विक नराभिश उनक े भविवष्य विनति खा े में जमा नहीं हो जा ी और खा े को विनयविम नहीं कर विदया जा ा। इस अनुरो का कारण भी उसक े ुरं बाद उसी पत्र में ब ाया गया र्थीा, अर्थीा& ् "क्योंविक इस् ीफ े की स्वीक ृ ति क े बाद, इस राभिश की प्राविप्त न क े वल कविHन होगी, बस्तिल्क यह असंभव होगी।"

8. विदनांक 28.05.2003 को एमवीआरएस क े ह इस् ीफ े क े पत्रों की स्वीक ृ ति क े बारे में एक सामान्य जानकारी जारी की गई र्थीी जिजसमें प्रत्यर्थी8 का नाम क्रम संख्या 4 पर र्थीा। 01.06.2003 को चार व्यविक्तयों को विमल की सेवाओं से सेवाविनवृत्त होना र्थीा। हालांविक अपीलक ा& सं. 1 द्वारा 02.06.2003 को एक पत्र जारी विकया गया र्थीा, जब कट ऑफ ति भिर्थी पहले ही 01.06.2003 से प्रभावी हो गई Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्थीी; जिजसमें प्रत्यर्थी8 को सूतिच विकया गया विक उक्त ति भिर्थी को रद्द माना जाए और एक नई कट ऑफ ति भिर्थी शीघ्र ही सूतिच की जाएगी। प्रत्यर्थी8 को अपने क &व्यों का विनव&हन करने की सलाह दी गई र्थीी।

9. पूव क्त परिरदृश्य में, प्रत्यर्थी8 ने 01.07.2003 विदनांविक एक पत्र को संबोति कर े हुए अनुरो विकया विक एमवीआरएस क े ह 12.07.2002 क े उनक े पत्र को रद्द माना जाए क्योंविक यह देख े हुए विक उनका इस् ीफा पत्र अभी भी स्वीकार नहीं विकया गया र्थीा, उन्होंने एमवीआरएस क े ह अपना इस् ीफा प्रस् ु करने क े बारे में अपना विवचार बदल विदया र्थीा। हालांविक एमवीआरएस क े ह प्रस् ु इस् ीफा 14.07.2003 विदनांविक पत्र द्वारा यह सूतिच कर े हुए स्वीकार कर लिलया गया र्थीा विक प्रत्यर्थी8 को 16.07.2003 से सेवाविनवृत्त होना र्थीा।

10. इसी पूव क्त पत्र से वाद उत्पन्न हुआ जिजसमें प्रत्यर्थी8 ने भार क े संविव ान क े अनुgछेद 226 क े ह उच्च न्यायालय, इलाहाबाद क े समक्ष दीवानी प्रकीण& रिरट यातिचका सं. 16587/2004 दायर करक े विनम्न प्रार्थी&नाएँ कीः क. 14.07.2003 विदनांविक आक्षेविप आदेश रद्द करना; ख. पय&वेक्षक (रखरखाव) क े पद पर प्रत्यर्थी8 को अपने क &व्यों का पदभार ग्रहण करने की अनुमति देने और उसे उसक े हक की सभी परिरलस्ति‰ यों का भुग ान करने का विनदŠश; ग. उसे 16.07.2003 से उसक े बकाया वे न का भुग ान करने और उसे उसकी सेवाविनवृलित्त की आयु क पद पर काम करने की अनुमति देने का, जब वह अपने सभी सेवाविनवृत्त लाभों का हकदार होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

11. रिरट यातिचका का इस आ ार पर विवरो विकया गया र्थीा विक इस् ीफा पहले से ही स्वीकार हो गया र्थीा और कट ऑफ ारीख को स्र्थीविग करने से स्वीक ृ ति की वै ा विकसी भी रह से खत्म नहीं हो जायेगी। यह ध्यान देना लाभप्रद हो सक ा है विक यातिचका का जवाब दे े समय, अपीलक ा& ने भविवष्य विनति योगदान क े उसक े खा े में जमा न करने की प्रत्यर्थी8 की भिशकाय पर अपनी स्तिस्र्थीति क े बारे में ब ाया।यह कहा गया र्थीा विक संपूण& भविवष्य विनति योगदान क्षेत्रीय भविवष्य विनति आयुक्त काया&लय क े पास जमा विकया गया र्थीा और ऐसा प्र ी हो ा है विक एक ही नाम क े विकसी गल व्यविक्त क े खा े में इसे जमा विकया गया र्थीा। यह क्षेत्रीय भविवष्य विनति आयुक्त काया&लय की एक गल ी र्थीी, जिजसे सही करने की जिसफारिरश की गई र्थीी और इसे सही भी विकया गया र्थीा।वास् व में, जिजस खा े में राभिश जमा की गई र्थीी, वह सही खा ा संख्या र्थीी।

12. विवद्वान एकल न्याया ीश ने 22.08.2005 क े विनण&य क े संदभ& में प्रत्यर्थी8 क े पक्ष में फ ै सला सुनाया। फ ै सले में यह भी कहा गया है विक सेवा में बहाली का सवाल नहीं उH सक ा है क्योंविक अपीलक ा& संख्या 1 की सेवाएँ रिरट यातिचका क े लस्तिम्ब रहने क े दौरान जारी क ें द्र सरकार की विदनांक 09.03.2004 की अति सूचना क े अनुसार समाप्त कर दी गयी र्थीी। हालांविक विवद्वान एकल न्याया ीश ने पाया विक यह 'स्पष्ट नहीं' र्थीा विक विकसी भी समय, प्रत्यर्थी8 ने एमवीआरएस क े की विबना श & पेशकश की र्थीी। बस्तिल्क, उसका इस् ीफा सभी बकाया राभिश क े भुग ान पर सश & र्थीा, जिजसमें भविवष्य विनति बकाया भी शाविमल र्थीा, जिजसे पहले मंजूरी दे दी जानी चाविहए और उसे भुग ान विकया जाना चाविहए। 12.07.2002 विदनांविक पत्र क े अवलोकन पर हम इस स् र पर अभिभलेख क े रूप में यह नोट कर सक े हैं विक हमें ऐसा नहीं लग ा है। पत्र में जो क ु छ भी कहा गया र्थीा, वह प्रत्यर्थी8 क े इस् ीफ े को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसकी सेवा अवति क े सभी लाभों का सुविनति~ भुग ान करक े स्वीकार करने का अनुरो र्थीा। कोई पूव& श & नहीं रखी गई र्थीी और न ही एमवीआरएस क े ह रखा जा सक ा र्थीा क्योंविक खण्ड़ 5.[1] ने पद क े इस् ीफ े और समाविप्त की एक सार्थी स्वीक ृ ति की परिरकल्पना की र्थीी और उसक े बाद भुग ान विकया जा रहा है। मुख्य रूप से, इस् ीफा पत्र एमवीआरएस क े ह प्रस् ु विकया गया र्थीा और इसलिलए यह खंड 5.[1] क े अ ीन र्थीा।

13. दूसरा पहलू जो विवद्वान एकल न्याया ीश ने लिलया र्थीा, वह यह र्थीा विक उसक े इस् ीफ े को अपीलक ा& संख्या 1 द्वारा स्वीकार विकए जाने क े बाद भी प्रत्यर्थी8 14.07.2003 क काम कर ा रहा, इस थ्य क े बावजूद विक उसने 01.07.2003 को उस ारीख से पहले अपना इस् ीफा वापस ले लिलया र्थीा। वास् व में, क & "बेह र आ ार" मानकर विदया गया है, क्योंविक एमवीआरएस क े ह प्रत्यर्थी8 द्वारा विदया गया प्रस् ाव क े वल सश & र्थीा और उस श & को पूरा नहीं विकया गया र्थीा, जो विक क ु छ ऐसा है जिजस पर हम 12.07.2003 विदनांविक पत्र क े सा ारण पHन पर सहम होने में असमर्थी& हैं। 03.03.2003 विदनांविक पत्र का एक संदभ& भी विदया गया र्थीा, जिजसमें 12.07.2002 क े पत्र को विनरस् रखने की मांग की गई र्थीी (ऐसा नहीं है विक इस् ीफा पत्र उस चरण क वापस ले लिलया गया र्थीा)।एक अन्य महत्वपूण& पहलू जिजस पर विवद्वान एकल न्याया ीश ने बल विदया है, वह प्रत्यर्थी8 का काय& जारी रखना है, जिजसक े कारण विनयोक्ता और कम&चारी क े विवति क संबं जारी रहे, भले ही प्रत्यर्थी8 क े इस् ीफ े पत्र की स्वीक ृ ति को अति सूतिच करने वाला परिरपत्र 28.05.2003 को जारी विकया गया र्थीा। 02.07.2003 विदनांविक प~ा ्व 8 पत्र को संज्ञान में लिलया गया जिजसमें विदनांक 28.05.2003 को यह सूतिच विकया गया र्थीा विक पूव&व 8 कट ऑफ ति र्थीी को रद्द कर विदया है और यह भी कहा गया र्थीा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विक एक नयी कट ऑफ ति र्थीी दी जाएगी।उसी समय 14.07.2003 विदनांविक पत्र द्वारा नई कट ऑफ ति र्थीी को सूतिच विकया गया जो 16.07.2003 से प्रभावी होनी र्थीी। उस ारीख से पहले, 01.07.2003 को प्रत्यर्थी8 ने पहले ही अपना इस् ीफा वापस लेने/रद्द करने क े लिलए कहा र्थीा।

14. इससे व्यभिर्थी अपीलक ा&ओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड़पीH क े समक्ष अपील दायर की, जो विवशेष अपील संख्या 188/2005 है।एक पहलू जिजस पर प्रत्यर्थी8 क े अति वक्ता द्वारा बहु जोर विदया जा ा है वह वो रीका र्थीा, जिजस रह से इस अपील पर मुकदमा चलाया गया र्थीा। स्पष्ट ः अपीलक ा&ओं द्वारा लगभग छह वषŽ क अपनी अपील को सूचीबद्ध करने का कोई प्रयास नहीं विकया गया र्थीा, जब क विक मामला अं ः 10.10.2011 को सूचीबद्ध नहीं विकया गया र्थीा- जब अपील स्वीकार की गई र्थीी और नोविटस जारी विकया गया र्थीा। इसक े अलावा, विवद्वान एकल न्याया ीश क े आदेश क े संचालन को रोककर एक अं रिरम आदेश पारिर विकया गया र्थीा। प्रत्यर्थी8 को पूरा पैसा प्राप्त करने क े लिलए स्व ंत्र ा दी गई र्थीी जो उसे उसक े अति कारों पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना अपने इस् ीफ े की स्वीक ृ ति पर प्राप्त करना र्थीा और अपील में अंति म विनण&य क े अ ीन र्थीा। प्रत्यर्थी8 का यह कहना है विक छह साल की इस अवति क े दौरान, प्रत्यर्थी8 ने पैसा नहीं लिलया और पूव क्त अं रिरम आदेश पारिर होने क े बाद ही नराभिश प्राप्त की। यह कहना पया&प्त है विक अपीलक ा& संख्या 1 द्वारा 22.10.2011 को प्रत्यर्थी8 को रु 5,47,267/- का चेक जारी विकया गया र्थीा, जिजसे प्रत्यर्थी8 द्वारा आक्षेविप आदेश विदनांक 10.10.2011 क े संदभ& में विवति व भुना लिलया गया र्थीा। वास् व में अभिभलेख से यह प ा नहीं चल ा है विक विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनण&य को लागू करने क े लिलए इस अवति क े दौरान क्या कदम उHाए गए होंगे। प्रत्यर्थी8 द्वारा स्पष्ट Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रूप से प्रव &न की मांग कर े हुए अवमानना यातिचका संख्या 2967/2006 दायर की गई र्थीी, लेविकन यह भी प्र ी हो ा है विक पैरवी बहु गंभीर ा से नहीं की गयी र्थीी।हम यह भी ध्यान दे े हैं विक एकल न्याया ीश क े आदेश क े विवरुद्ध की गई अपील को मुकदमा न लड़ने पर ीन बार खारिरज विकया गया और बहाल(पुनस्र्थीा&विप ) विकया गया।

15. खण्ड़पीH ने अं ः 12.03.2019 को अपील पर अपना विवचार विदया और विवद्वान एकल न्याया ीश क े आदेश को बरकरार रखा।पूव क्त उद्धृ एमवीआरएस क े खंड 1.[6] का भी संदभ& विदया गया, जिजसमें विबना कोई कारण ब ाए इस् ीफ े क े आवेदन को अस्वीकार करने क े लिलए अपीलक ा& संख्या 1 को अति कार विदया गया र्थीा।इस प्रकार यह राय व्यक्त की गयी र्थीी विक स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े लिलए अनुरो की स्वीक ृ ति, ऐसी सेवाविनवृलित्त से पहले की श & र्थीी।एमवीआरएस क े खण्ड़ 5.[1] क े अनुसार पद को समाप्त करने क े मुद्दे पर, यह राय व्यक्त की गयी र्थीी विक चूंविक अपीलक ा& संख्या 1 ने 01.06.2003 की मूल कट ऑफ ति र्थीी को रद्द कर विदया र्थीा और प्रत्यर्थी8 को एक बार विफर अपने क &व्यों पर पदभार ग्रहण करने क े लिलए कहा र्थीा, पद जारी रहना चाविहए और इस प्रकार, खण्ड़ 5.[1] लागू नहीं हुआ र्थीा।

46,588 characters total

16. खण्ड़पीH क े पूव क्त आदेश को इस न्यायालय क े समक्ष एक विवशेष अनुमति यातिचका दायर करक े चुनौ ी दी गयी है।17.02.2020 विदनांविक आदेश द्वारा, नोविटस जारी विकया गया र्थीा और आक्षेविप आदेश क े संचालन पर रोक लगा दी गई र्थीी। मामले की अस्तिन् म सुनवाई होने क े बाद 07.09.2021 को अनुमति प्रदान की गयी और फ ै सला सुरतिक्ष रखा गया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

17. हमने विदए गए थ्यात्मक परिरदृश्य में और विवरो ी पक्षकारों क े अति वक्ता क े कŽ क े परिरप्रेक्ष्य में योजना क े ह स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े मामले को विनयंवित्र करने वाले जिसद्धां ों का परीक्षण विकया है।

18. संक्षेप में, हमारे समक्ष अपीलक ा&ओं का क & यह र्थीा विक प्रत्यर्थी8 ने 28.05.2003 या 02.06.2003 विदनांविक पत्रों को भी चुनौ ी नहीं दी र्थीी, जिजसने एमवीआरएस क े ह प्रत्यर्थी8 क े इस् ीफ े क े अनुरो को प्रभावी रूप से स्वीकार कर लिलया र्थीा। इसका अर्थी& यह होगा विक अपीलक ा& संख्या 1 द्वारा इस् ीफ े की स्वीक ृ ति पूरी हो गई र्थीी।प्रत्यर्थी8 ने क े वल 14.07.2003 विदनांविक पत्र को चुनौ ी दे े हुए संशोति कट ऑफ ति र्थीी को चुनौ ी दी र्थीी, जिजसमें प्रत्यर्थी8 को 16.07.2003 से काय&मुक्त करने की मांग की गई र्थीी। एक बार इस रह क े इस् ीफ े को स्वीकार कर लिलया गया और यहां क विक चुनौ ी नहीं दी गयी, ो प्रत्यर्थी8 क े इस् ीफ ृ ति क े बाद इस् ीफा देने की अनुमति देने का कोई सवाल ही नहीं हो सक ा है। यह क े वल प्रशासविनक कारणों से कट ऑफ ति भिर्थी का स्र्थीगन र्थीा, जिजसने मात्र प्रत्यर्थी8 को काय&मुक्त करने में देरी की और इस् ीफ ृ ति को स्र्थीविग नहीं विकया।

19. अपीलक ा&ओं क े विवद्वान अति वक्ता ने इस दलील का समर्थी&न करने क े लिलए एयर इंतिडया एक्सप्रेस लिलविमटेड और अन्य बनाम क ै प्टन गुरदश&न कौर सं ू1 में इस न्यायालय क े विनण&य पर अवलम्ब लिलया विक विकसी को उसक े क &व्यों से पदमुक्त करने में देरी उसक े इस् ीफ ृ ति को प्रभाविव नहीं कर ी है। वास् व में, राज क ु मार बनाम भार संघ[2] में इस न्यायालय क े एक पूव& विनण&य, जिजसे एयर

1. (2019) 17 एससीसी 129. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इंतिडया एक्सप्रेस लिलविमटेड और अन्य[3] में संदर्भिभ विकया गया र्थीा, में एक परिरदृश्य शाविमल है जहां राज्य सरकार ने जिसफारिरश की र्थीी विक एक आईएएस अति कारी क े इस् ीफ े को स्वीकार कर लिलया जाए और भार सरकार ने राज्य क े मुख्य सतिचव से अनुरो विकया र्थीा विक वह उस ारीख को सूतिच करे जिजस विदन उन्हें अपने क &व्यों से मुक्त विकया जाएगा ाविक एक औपचारिरक अति सूचना जारी की जा सक े । हालांविक, ारीख को सूतिच करने और एक औपचारिरक अति सूचना जारी करने से पहले, अति कारी ने अपना इस् ीफा पत्र वापस ले लिलया। बाद में जारी विकए गए उनक े इस् ीफ े को स्वीकार करने क े आदेश पर, उसको चुनौ ी दी गई र्थीी और इस न्यायालय द्वारा यह म व्यक्त विकया गया र्थीा विक पक्षकारों क े बीच पत्राचार में कोई संक े नहीं र्थीा विक स्वीक ृ ति को सूतिच विकए जाने क इस् ीफा प्रभावी नहीं होना र्थीा विक स्वीक ृ ति की सूचना विदए जाने क इस् ीफा प्रभावी नहीं होगा। वास् व में, अति कारी ने जल्द स्वीक ृ ति क े लिलए अपना इस् ीफा पत्र भेज विदया र्थीा और इस प्रकार पत्र क े सा ारण पHन पर, विनयुविक्त प्राति कारी द्वारा स्वीकार विकए जाने क े सार्थी ही इस् ीफा प्रभावी हो गया।

20. एक विवपरी स्तिस्र्थीति में, भार संघ बनाम गोपाल चंद्र विमश्रा4 में इस न्यायालय क े विनण&य को संदर्भिभ विकया गया र्थीा, जहां इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एक मौजूदा न्याया ीश द्वारा विदए गए इस् ीफा पत्र को वै रूप से वापस ले लिलया गया पाया गया र्थीा।इस् ीफा पत्र की शुरुआ इस बयान से हुई विक न्याया ीश पद से इस् ीफा दे रहे हैं लेविकन यह एक स्वयं में ही पूण& बयान नहीं र्थीा। यविद ऐसा हो ा, ो इस् ीफा

2. (1968) 3 एससीआर 857.

3. (उपरोक्त)

4. (1978) 2 एससीसी 301 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA त्काल हो ा, जिजसमें पद का त्काल त्याग और न्याया ीश क े रूप में उनक े काय&काल की समाविप्त शाविमल हो ी। वास् व में एक न्याया ीश क े इस् ीफा पत्र को स्वीकार करने की कोई आवश्यक ा नहीं र्थीी, लेविकन ऐसा नहीं र्थीा। पहले वाक्य क े बाद दो और वाक्य र्थीे जिजन्होंने इस् ीफ े को प्रभावी होने क े लिलए बाद की ारीख की सूचना दी और चूंविक उस ारीख से पहले इस् ीफा पत्र वापस ले लिलया गया र्थीा, इसलिलए इसे वै रूप से वापस ले लिलया गया माना गया र्थीा।

21. हम ध्यान दें विक पूव क्त का महत्व यह है विक अं ः, पत्र क े श‰द ास्तित्वक होंगे और व &मान मामले में चूंविक यह योजना क े ह है, इसलिलए यह एमवीआरएस होगा।

22. अपीलक ा&ओं क े विवद्वान अति वक्ता ने विनम्न पहलुओं को संदर्भिभ विकया- (क) प्रत्यर्थी8 की चेक की स्वीक ृ ति (लेविकन वह न्यायालय क े अं रिरम विनदŠशों क े ह र्थीी) (ख) पद की समाविप्त जैसा विक न्यू विवक्टोरिरया विमल्स को 09.03.2004 विदनांविक अति सूचना द्वारा बंद कर विदया गया र्थीा (लेविकन उस स्तिस्र्थीति में यविद प्रत्यर्थी8 सफल हो ा है, ो वह अभी भी सभी परिरणामों क े सार्थी विनयोजन में रहेगा) (ग) 2018 में प्रत्यर्थी8 की सेवाविनवृलित्त (जिजसका अर्थी& क े वल यह होगा विक उसक े लाभ क े वल उस समय क होंगे)। एकमात्र महत्वपूण& अन्य पहलू यह है विक यविद प्रत्यर्थी8 ने एमवीआरएस क े ह स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त का विवकल्प नहीं चुना हो ा, ो उसकी औद्योविगक विववाद अति विनयम, 1947 क े ह छंटनी की जा सक ी र्थीी। अपीलक ा&ओं क े विवद्वान अति वक्ता ने बहस क े दौरान स्पष्ट विकया विक ऐसे व्यविक्तयों को भुग ान की गई नराभिश, एमवीआरएस क े का विवकल्प चुनने वाले Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कम&चारिरयों को भुग ान की गई नराभिश से कम र्थीी।यविद कहा जाये, ो कम&चारिरयों को एमवीआरएस को स्वीकार करने का यही प्रोत्साहन र्थीा।

23. दूसरी ओर, प्रत्यर्थी8 क े विवद्वान अति वक्ता ने यह बा रखने क े लिलए जे.एन. श्रीवास् व बनाम भार संघ व एक अन्य[5] और शंभू मुरारी जिसन्हा बनाम प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट इंतिडया और एक अन्य[6] में इस न्यायालय क े विनण&यों पर अवलम्ब लिलया विक एक कम&चारी को स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े लिलए अपना आवेदन इसकी स्वीक ृ ति क े बाद भी वापस लेने का अति कार है, यविद ऐसी वापसी कम&चारी की वास् विवक सेवाविनवृलित्त की ारीख से पहले की जा ी है। प्रत्यर्थी8 क े विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक अपीलक ा& संख्या 1 और प्रत्यर्थी8 क े बीच विनयोक्ता और कम&चारी का विवति क संबं 16.07.2003 क जारी रहा और इस प्रकार प्रत्यर्थी8 क े पास 01.07.2003 को अपना इस् ीफा वापस लेने क े लिलए लोकस पोविनटेंजिसया(संविवदा या दातियत्व पूण& होने से पहले वापस लेने का अवसर) र्थीा।

24. पूव क्त विनण&यों को बारीकी से पढ़ने पर, उसमें दी गई विटप्पभिणयों क े संदभ& में थ्यात्मक आ ार पर ध्यान देना उतिच होगा। जे.एन. श्रीवास् व[7] में, स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त नोविटस को ीन महीने बाद प्रभावी होना र्थीा। ीन महीने की समाविप्त से पहले प्रस् ाव स्वीकार कर लिलया गया र्थीा लेविकन कम&चारी ने उस ारीख से पहले स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त नोविटस वापस ले लिलया, जिजस विदन सेवाविनवृलित्त को प्रभावी होना र्थीा। शंभू मुरारी जिसन्हा8 में, स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना क े ह कम&चारी

5. (1998) 9 एससीसी 559

6. (2000) 5 एससीसी 621

7. (उपरोक्त)

8. (उपरोक्त) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा प्रस् ु इस् ीफ े को प्रबं न द्वारा स्वीकार विकया गया र्थीा, लेविकन कम&चारी को सेवा से पदमुविक्त नहीं दी गई र्थीी और कट ऑफ ति भिर्थी को स्र्थीविग करक े काय& जारी रखने की अनुमति दी गई र्थीी। कम&चारी ने इस बीच स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त का प्रस् ाव वापस ले लिलया। इस न्यायालय द्वारा इस अव ारणा क े लिलए कई न्यातियक विनण&यों को संदर्भिभ विकया गया र्थीा विक इस् ीफ ृ ति क े बावजूद प्रभावी ति भिर्थी से पहले इस् ीफ े को वापस लिलया जा सक ा है।

25. पावर फाइनेंस कॉप रेशन लिलविमटेड बनाम प्रमोद क ु मार भाविटया9 में स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना क े ह विकए गए एक आवेदन को स्वीकार विकए जाने क े बाद विनगम ने स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना वापस ले ली। इस न्यायालय ने माना विक स्वेgछा से सेवाविनवृत्त होने क े उसक े प्रस् ाव की स्वीक ृ ति उसको देय राभिश क े समायोजन क े अ ीन र्थीी और इसलिलए उसे अंति म रूप नहीं विमला। प्रत्यर्थी8 क े विवद्वान अति वक्ता ने ब ाया विक हालांविक यह क ु छ ऐसा र्थीा जो प्रबं न क े लिलए फायदेमंद र्थीा, उसी जिसद्धां पर, यह समान रूप से एक कम&चारी क े लाभ क े लिलए भी लागू होना चाविहए।

26. प्रत्यर्थी8 क े विवद्वान अति वक्ता ने इस बा पर जोर विदया विक एमवीआरएस जैसी स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त योजना 'प्रस् ाव क े आमंत्रण' की प्रक ृ ति में र्थीी और इस प्रकार, संविवदा विवति क े जिसद्धां ों द्वारा शाजिस होगी। (बैंक ऑफ इंतिडया बनाम ओ.पी. स्वण&कार10; एचईसी स्वैस्तिgछक सेवाविनवृत्त सदस्य कल्याण सविमति और एक

9. (1997) 4 एससीसी 280

10. (2003) 2 एससीसी 721 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अन्य बनाम हेवी इंजीविनयरिंरग कॉप रेशन लिलविमटेड और अन्य11 )। इस प्रकार, 12.07.2002 को योजना क े ह प्रत्यर्थी8 द्वारा प्रस् ु आवेदन एक प्रस् ाव की प्रक ृ ति में र्थीा। प्रत्यर्थी8 ने अपने इस् ीफ े को 03.03.2003 विदनांविक पत्र द्वारा ब क क े लिलए विनलंविब कर विदया, जब क विक अपीलक ा& संख्या 1 ने प्रत्यर्थी8 का भविवष्य विनति बकाया जमा नहीं विकया और इस प्रकार, प्रत्यर्थी8 का प्रस् ाव विनरस् हो गया। उसी जिसद्धां पर यह आग्रह विकया गया र्थीा विक एमवीआरएस क े ह प्रत्यर्थी8 का आवेदन, अपीलक ा& संख्या 1 द्वारा प्रत्यर्थी8 की बकाया राभिश, विवशेष रूप से उसकी भविवष्य विनति की बकाया राभिश को विनपटाने पर पूव& -श & पर आ ारिर र्थीा। अपीलक ा& संख्या 1 ने भविवष्य विनति बकाया से संबंति संलग्न श & का पालन नहीं विकया। प्रत्यर्थी8 क े विवद्वान अति वक्ता ने भार ीय खाद्य विनगम और अन्य बनाम राम क े श यादव और अन्य12 में विदए गए विनण&य पर भी अवलम्ब लिलया है जिजसमें यह म व्यक्त विकया गया र्थीा विक सश & प्रस् ाव क े मामले में, प्रति ग्रही ा प्रस् ाव, जिजसक े परिरणामस्वरूप प्रस् ावक द्वारा काय& विकया जा ा है, क े एक विहस्से को स्वीकार नहीं कर सक ा है और विफर उस श & को अस्वीकार नहीं कर सक ा जिजसक े अ ीन प्रस् ाव विकया जा ा है।

27. एमवीआरएस क े विनयमों और श Ž पर, प्रत्यर्थी8 क े विवद्वान अति वक्ता ने खंड 5.[1] की ओर हमारा ध्यान आकर्निष विकया, जिजसमें आवश्यक र्थीा विक प्रत्यर्थी8 क े इस् ीफ ृ ति पर, वह न क े वल सेवाविनवृत्त होगा, बस्तिल्क सार्थी ही पद को भी समाप्त कर विदया जाएगा।यह क े वल 16.07.2003 को होगा।यविद पद समाप्त हो जा ा है ो प्रत्यर्थी8 को क ै से जारी रखने क े लिलए कहा जा सक ा है?

11. (2006) 3 एससीसी 708

12. (2007) 9 एससीसी 531 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

28. अंति म पहलू, जो हमारे ध्यान में लाया गया र्थीा, वह 07.12.2010 को प्राप्त एक आरटीआई जवाब र्थीा, जिजसमें स्पष्ट विकया गया र्थीा विक ीन कम&चारिरयों ने अपने इस् ीफ े वापस ले लिलए र्थीे। यह एकमात्र मामला नहीं र्थीा, क्योंविक पांच अन्य कम&चारी/अति कारी र्थीे, जिजन्हें अन्य राज्यों में विमलों में स्र्थीानां रिर कर विदया गया र्थीा। ये थ्य क े वल यह विदखाने क े लिलए र्थीे विक अपीलक ा& संख्या 1 क े बंद होने से प्रत्यर्थी8 को विकसी अन्य विमल में विनयोजन क े लाभ से वंतिच नहीं विकया जा सक ा है, हालांविक अब विनयोजन का प्रश्न शेष नहीं है क्योंविक वह 2018 में सेवाविनवृत्त हो गए होगें लेविकन विफर भी विवत्तीय लाभ क े हकदार होगें। इस स् र पर हम यह भी नोट कर सक े हैं विक प्रत्यर्थी8 क े आरटीआई प्रश्न क े जवाब में स्पष्ट विकया गया र्थीा विक अन्य राज्यों में विमलों क े कम&चारिरयों क े समायोजन क े लिलए कोई योजना नहीं र्थीी।

29. हमने पूव क्त प्रति पाविद विवति क स्तिस्र्थीति क े परिरप्रेक्ष्य में व &मान विववाद क े थ्यात्मक संदभŽ का परीक्षण विकया है। वास् व में, यविद कोई दोनों पक्षों से उद्धृ विवभिभन्न विनण&यों को देख ा है, ो वास् व में थ्यात्मक बारीविकयां हैं जिजससे एक परिरणाम या दूसरा परिरणाम विनकला है। थ्यात्मक बारीविकयों की महत्वपूण& रूप से लागू होने वाली योजना क े संदभ& में जांच की जानी चाविहए, क्योंविक व &मान मामला इस् ीफ े का नहीं है, बस्तिल्क एमवीआरएस क े ह उपल‰ एक विवकल्प का उपयोग करने का है।

30. व &मान प्रत्यर्थी8 ने योजना क े ह आवेदन दालिखल विकया। यविद हम 12.07.2002 विदनांविक पत्र को बारीकी से देखें, ो प्रत्यर्थी8 का आशय स्पष्ट र्थीा, अर्थीा& अपना इस् ीफा प्रस् ु करना। यह भविवष्य की ारीख से प्रभावी होना वाला इस् ीफा नहीं है, बस्तिल्क ऐसा है जो योजना क े अनुसार प्रभावी होगा। यह एक सश & इस् ीफा भी नहीं है जैसा विक प्रत्यर्थी8 द्वारा प्रस् ु करने का प्रयास विकया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े वल यह दावा करना विक आवेदक की सेवा अवति से उत्पन्न होने वाले सभी लाभों का भुग ान उसे विकया जाएगा, उनक े इस् ीफ े का एक स्वाभाविवक परिरणाम है। हम मान े हैं विक इस रह क े इस् ीफ े को शायद ही सश & कहा जा सक ा है।

31. पूव क्त स्तिस्र्थीति क े कारण, यविद हम योजना क े ह इस इस् ीफ े को देख े हैं, ो विनस्संदेह एमवीआरएस क े खंड 1.[6] क े संदभ& में, प्रबं न क े पास कोई कारण ब ाए विबना आवेदन को अस्वीकार करने का विवकल्प है। हमारी राय में, पुनः यह इस् ीफ े को सश & नहीं बनाएगा। संविवदात्मक संदभ& में, यह योजना क े ह विनयोक्ता द्वारा विकया गया प्रस् ाव होगा जिजसे अपीलक ा&-प्रबं न द्वारा स्वीकार या अस्वीकार विकया जा सक ा है। एक बार स्वीक ृ ति हो जा ी है, ो संविवदा समाप्त हो जा ी है। इसमें कोई संदेह नहीं है विक इस रह की स्वीक ृ ति योजना क े संदभ& में होनी चाविहए। इस प्रकार, महत्वपूण& सवाल यह है विक क्या प्रत्यर्थी8 की प~ा व 8 संसूचना इस् ीफ े को सश & इस् ीफ े में बदल सक ी हैं और क्या इसकी स्वीक ृ ति होने से पहले वापस ले ली गयी र्थीी।

32. एमवीआरएस, विवशेष रूप से खंड 4.0, योजना क े ह देय विनलंबन लाभों का प्राव ान कर ा है। खंड 4.[1] में भविवष्य विनति खा े में शेष नराभिश का भुग ान कम&चारी भविवष्य विनति अति विनयम क े अनुसार विकया जाना आवश्यक है। इस प्रकार, जिजस व्यविक्त क े इस् ीफ े को स्वीकार विकया गया है, उसे अति कार है विक योजना क े ह विनलंबन लाभों क े रूप में भविवष्य विनति राभिश क े लाभ को प्राप्त करे। यह थ्य विक खा े में नाम क े विववरण क े कारण क ु छ विवसंगति र्थीी जिजसक े लिलए पूव& में क ु छ संप्रेषण विकया गया र्थीा, इसका म लब यह नहीं होगा विक भविवष्य विनति राभिश प्रदान करने में कोई देरी प्रत्यर्थी8 को अपना इस् ीफा वापस लेने का अति कार देगी।यविद कोई अनुतिच देरी हो ी है, ो नराभिश में ‰याज विदया जा सक ा है। मामले क े विदए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गए थ्यों से, ऐसा प्र ी हो ा है विक नराभिश उसी खा ा संख्या में जमा की गयी र्थीी जहां इसे जमा विकया जाना चाविहए र्थीा, लेविकन लाभार्थी8 क े नाम/विववरण में क ु छ समस्या र्थीी जिजससे क ु छ भ्रम/देरी हुई र्थीी। इसमें कोई संदेह नहीं है विक अपीलक ा&-प्रबं न को इस पर बेह र ध्यान देना चाविहए र्थीा, लेविकन ब अपीलक ा& ने ब ाया र्थीा विक समस्या भविवष्य विनति खा े क े संबंति प्राति करण द्वारा प्रबं न क े कारण उत्पन्न हुई र्थीी, न विक अपीलक ा& द्वारा।

33. एक अन्य महत्वपूण& पहलू जिजस पर हमें ध्यान देना चाविहए, वह खंड 5.0 क े अनुसार योजना की श — हैं। खंड 5.[1] में स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त क े अनुरो को स्वीकार विकए जाने क े सार्थी ही पद को एक सार्थी समाप्त करने की अपेक्षा र्थीी।यह योजना क े ह कम&चारी को सेवाविनवृलित्त लाभ देने से पहले विकया जाना र्थीा। एक विवभिशष्ट श & यह र्थीी विक कोई भी व्यविक्त उसक े स्र्थीान पर विनयोजिज नहीं विकया जाएगा। उद्देश्य स्पष्ट र्थीा, विक यह नहीं होना चाविहए विक एक रफ, विकसी कम&चारी को एमवीआरएस का लाभ देकर जनशविक्त कम की जा ी है और दूसरी ओर, विकसी अन्य व्यविक्त को पद पर ैना विकया जा ा है। यह एक अर्थी& में, अपीलक ा& संख्या 1 की असुरतिक्ष विवत्तीय स्तिस्र्थीति क े कारण, इस योजना को प्रति पाविद करने क े उद्देश्य को ही समाप्त करने वाला होगा।

34. प्रत्यर्थी8 द्वारा संबोति अगला संप्रेषण 03.03.2003 विदनांविक पत्र है।प्रत्यर्थी8 ने अपना इस् ीफा वापस नहीं लिलया, जो वह उस चरण में कर सक ा र्थीा। उसने भविवष्य विनति खा े में सु ार न करने और उसक े पूव&व 8 संप्रेषण क े संबं में कोई काय&वाही न करने का उल्लेख विकया, जो लगभग ीन साल पुराने र्थीे। प्रत्यर्थी8 ने अपीलक ा& संख्या 1 क े अन् ग& संबंति विवभागों को लापरवाही और त्रुविट का दोषी Hहराया है, जिजसे विवविनर्निदष्ट रूप से अपीलक ा& संख्या 1 द्वारा अस्वीकार कर विदया Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गया है। प्रत्यर्थी8 ने कहा विक वे न से विनयविम कटौ ी क े बावजूद भविवष्य विनति खा े में राभिश जमा नहीं करना विकसी गंभीर षड्यंत्र क े कारण है।वास् व में, नराभिश संबंति खा े में जमा की गई र्थीी, लेविकन जैसा विक पूव क्त देखा गया र्थीा, खा े क े लाभार्थी8 क े बारे में क ु छ भ्रम र्थीा, जो स्पष्ट रूप से प्रत्यर्थी8 को होना र्थीा।प्रत्यर्थी8 क े पत्र में कहा गया है विक उसक े भविवष्य विनति खा े में राभिश जमा होने क उसका इस् ीफा "विनलंविब " रखा जाए। इसक े पीछे का क & अगले वाक्य में ब ाया गया है, अर्थीा& ् यविद इस् ीफा स्वीकार कर लिलया जा ा है ो नराभिश की प्राविप्त न क े वल मुस्तिश्कल हो जाएगी, बस्तिल्क यह असंभव हो जायेगी।

35. पूव क्त आरोप स्पष्ट रूप से ह ाशा क े कारण उत्पन्न हो रहे हैं, जिजसे प्रत्यर्थी8 ने भविवष्य विनति खा े में सु ार न करने क े कारण महसूस विकया हो सक ा है क्योंविक इस् ीफ ृ ति और नराभिश का संविव रण एक दूसरे से जुड़े पहलू नहीं हैं, जिसवाय इस हद क विक भविवष्य विनति खा े क े ह नराभिश का भुग ान योजना क े ह प्रत्यर्थी8 को विकया जाना र्थीा। इसमें, कोई बा ा नहीं र्थीी, जिसवाय थ्यात्मक सु ार क े जो अपीलक ा&ओं द्वारा ब ाए गए खा े क े विववरण में आवश्यक र्थीा, जो विक उनकी ओर से विकसी भी गल ी क े कारण भी नहीं र्थीा।

36. पूव क्त स्तिस्र्थीति में ही, विदनांक 28.05.2003 को अपीलक ा& संख्या 1 द्वारा प्रत्यर्थी8 सविह चार व्यविक्तयों क े इस् ीफ े को स्वीकार कर े हुए एक पत्र जारी विकया गया र्थीा। एक बार इस् ीफा पत्र स्वीकार कर लेने क े बाद, प्रकरण समाप्त हो गया र्थीा।प्रत्यर्थी8 को उक्त पत्र क े संदभ& में 01.06.2003 से सेवाओं से सेवाविनवृत्त होना र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

37. हालांविक प्रत्यर्थी8 अपीलक ा& संख्या 1 क े विदनांक 02.06.2003 क े पत्र का लाभ उHाना चाह ा है, जिजसने 01.06.2003 को पहले से य की गई कट ऑफ ारीख को बढ़ा विदया। इस प्रकार, प्रत्यर्थी8 की दलील यह है विक एक बार जिजस ारीख से उसे पदमुक्त की जानी र्थीी, उसे बढ़ा विदया गया ो यह उसक े इस् ीफ े को स्वीकार नहीं करने क े बराबर होगा। यह दलील इस थ्य से समर्भिर्थी है विक चूंविक इस् ीफ ृ ति और पद की समाप्ती एक सार्थी होनी र्थीी, इसलिलए प्रत्यर्थी8 को काय& जारी रखने क े लिलए क ै से कहा जा सक ा है, क्योंविक ऐसा कोई पद नहीं होगा जिजसक े सापेक्ष प्रत्यर्थी8 काम कर सक े । पूव क्त का लाभ उHा े हुए, प्रत्यर्थी8 ने 01.07.2003 को एक पत्र को संबोति कर े हुए दावा विकया विक उस ारीख क उनका इस् ीफा स्वीकार नहीं विकया गया र्थीा और एमवीआरएस क े ह 12.07.2002 विदनांविक उनक े इस् ीफ े क े पत्र को रद्द माना जा सक ा है।

38. अपीलक ा& संख्या 1 ने इस पर काय&वाही करने से इनकार कर विदया क्योंविक उनक े विवचार में इस् ीफा पत्र विदनांक 28.05.2003 को पहले से ही स्वीकार कर लिलया गया र्थीा।प्रत्यर्थी8 16.07.2003 से पदमुक्त हो गया।

39. हमें इसमें कोई संदेह नहीं है विक इस् ीफ ृ ति और पद की समाप्ती एक सार्थी होनी र्थीी क्योंविक यह योजना क े खंड 5.[1] का भाग है, जिजसका उद्देश्य हम पहले ही ऊपर विन ा&रिर कर चुक े हैं। खण्ड 5.[1] अपीलक ा& संख्या 1 को उस पद पर विकसी और को विनयुक्त करने से भी रोक ा है। इस प्रकार, हमारे विवचार में एक बार 28.05.2003 को इस् ीफा पत्र स्वीकार कर लिलया गया, ो पद समाप्त हो गया। हम पहले ही उल्लेख कर चुक े हैं विक 03.03.2003 विदनांविक पत्र को इस् ीफ े की वापसी क े पत्र क े रूप में नहीं माना जा सक ा है। कट ऑफ ति र्थीी का आगे बढ़ना और उन क ु छ विदनों क े लिलए परिरणामस्वरूप भुग ान जो प्रत्यर्थी8 को विकया Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जाना होगा, वास् व में अपीलक ा& संख्या 1 क े लिलए विवत्तीय विक्रयाकलाप का विवषय है, जिजससे प्रत्यर्थी8 का कोई वास् ा नहीं हो सक ा है यविद उसका इस् ीफा स्वीकार विकया जा ा है।इस अव ारण का परीक्षण करने क े लिलए, कह सक े हैं विक अपीलक ा& ने 28.05.2003 क े बाद इस् ीफ ृ ति को रद्द कर विदया र्थीा, ऐसा करना उनक े लिलए स्वीकाय& नहीं होगा क्योंविक उन्होंने पहले ही इस ारीख को प्रत्यर्थी8 क े इस् ीफ े को स्वीकार कर लिलया र्थीा। संविवदात्मक श‰दों में, एमवीआरएस क े ह उपल‰ इस् ीफ े पर प्रत्यर्थी8 क े प्रस् ाव पर अपीलक ा& संख्या 1 की स्वीक ृ ति 28.05.2003 को पूरी हो गयी र्थीी। प्रत्यर्थी8 को क ु छ विदनों क े लिलए कट ऑफ ति र्थीी क े आगे बढ़ने का लाभ उHाने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है, जिजस दौरान प्रत्यर्थी8 को काया&लय में उपस्तिस्र्थी होने क े लिलए कहा गया र्थीा, भले ही कोई स्वीक ृ पद न हो।

40. हमें उस पृष्ठभूविम को ध्यान में रखना होगा जिजसमें योजना को प्रति पाविद विकया गया र्थीा।अन्य विमलों क े बीच अपीलक ा& संख्या 1 को ऐसी विवत्तीय कविHनाइयों का सामना करना पड़ा विक उनकी विवत्तीय व्यवहाय& ा ने उन्हें कारोबार को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी। उस समय विवत्तीय व्यवहाय& ा क े मुद्दे पर विवचार करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी बीआईएफआर र्थीा, जो इस विनष्कष& पर पहुंचा र्थीा विक उत्तर प्रदेश राज्य में ग्यारह में से नौ कपड़ा विमलें व्यवहाय& नहीं र्थीीं और उनका पुनवा&स नहीं विकया जा सक ा र्थीा और इस प्रकार, उनको बंद करने की जिसफारिरश की गई र्थीी। क ें द्र सरकार ने औद्योविगक विववाद अति विनयम, 1947 की ारा 25 (ण) क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए 09.03.2004 को अपीलक ा& संख्या 1 सविह नौ कपड़ा विमलों को बंद करने की अनुमति दी। कम&चारिरयों क े विह ों की रक्षा क े लिलए, बीआईएफआर ने बंद करने की जिसफारिरश कर े हुए श & लगाई, विक उक्त विमलों में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA काम करने वाले सभी कम&चारिरयों को स्वैस्तिgछक सेवाविनवृलित्त का लाभ विदया जाएगा और क े वल भी विमलें बंद हो पाएंगी। अपीलक ा& राज्य और साव&जविनक संस्र्थीाएं हैं, ऐसा प्र ी हो ा है विक बीआईएफआर ने उसमें काम करने वाले कम&चारिरयों क े विह ों की रक्षा क े लिलए अति क ध्यान विदया। इस संदभ& में अपीलार्भिर्थीयों ने हमारे समक्ष एमवीआरएस स्वीकार नहीं करने वाले व्यविक्तयों को होने वाले आर्भिर्थीक परिरणामों को रखा जो वास् व में विववाद से परे है। ऐसे व्यविक्तयों की औद्योविगक विववाद अति विनयम, 1947 क े अनुसार छंटनी की जाएगी और उन्हें विमलने वाला विवत्तीय लाभ एमवीआरएस क े ह विमलने वाले विवत्तीय लाभ से बहु कम होगा। इस प्रकार, एमवीआरएस विनर्निववाद रूप से इसका लाभ लेने वाले कम&चारिरयों क े लिलए फायदेमंद र्थीा।यह स्वाभाविवक होगा, क्योंविक भी विकसी कम&चारी को योजना का लाभ उHाने क े लिलए कोई प्रोत्साहन विमलेगा।

41. हम इस थ्य को भी अनदेखा नहीं कर सक े विक वास् व में अपीलक ा& संख्या 1 को बंद कर विदया र्थीा और इस पर विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा ध्यान विदया गया र्थीा। यह थ्य मात्र विक क ु छ कम&चारी विमल क े बंद होने क े बाद भी काम कर े रहे या यह थ्य विक क ु छ लोगों को अन्य विमलों में विनयोजिज विकया गया हो, प्रत्यर्थी8 की पुनब&हाली क े मामले में मदद नहीं कर सक ा है। महत्वपूण& रूप से, बाद वाले पहलू पर भी अपीलक ा& संख्या 1 ने प्रति वाद विकया है।

42. खंड 5.[1] सविह एमवीआरएस का विवश्लेषण प्रत्यर्थी8 क े इस क & को मान ा है विक अविग्रम में भुग ान करना अपेतिक्ष र्थीा। योजना क े श‰द स्पष्ट हैं विक इस् ीफ े की स्वीक ृ ति क े सार्थी पद की समाविप्त होनी चाविहए और उसक े बाद, भुग ान को विव रिर विकया जाना चाविहए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

43. हमने अपीलक ा&ओं क े इस क & को समझने का प्रयास विकया है विक विदनांक 28.05.2003 और 02.06.2003 क े पत्र को चुनौ ी नहीं दी गयी है, क े वल 16.07.2003 की संशोति कट ऑफ ारीख को चुनौ ी दी गई है।ऐसा प्र ी हो ा है विक जिजस रीक े से प्रत्यर्थी8 ने अपनी भिशकाय को व्यक्त करने का प्रयास विकया, उसमें त्रुविट है, लेविकन व्यापक विवचार को देख े हुए हमें इस पहलू पर गौर करने की आवश्यक ा नहीं है विक क्या यह उसक े दावे क े लिलए घा क है। हमने एमवीआरएस का जो अर्थीा&न्वयन विकया है, वह इसक े खंडों और योजना क े ह पक्षकारों की कार&वाई क े अनुसार है, जिजसक े परिरणामस्वरूप यह विनष्कष& विनकल ा है विक प्रत्यर्थी8 द्वारा 01.06.2003 को इस् ीफा वापस लेने का प्रयास करने से पहले ही यह 28.05.2003 को स्वीकार कर लिलया गया र्थीा। इस प्रकार, अपीलक ा&ओं द्वारा Hीक ही क & विदया गया है विक प्रत्यर्थी8 को क &व्यों से पदमुक्त करने में देरी से उसक े इस् ीफ ृ ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जैसा विक एयर इंतिडया एक्सप्रेस लिलविमटेड व अन्य13 में देखा गया है। एक अलग ही स्तिस्र्थीति उत्पन्न हो ी, यविद इस् ीफा पत्र व &मान नहीं र्थीा और इसक े प्रभावी होने क े लिलए भविवष्य की ारीख य र्थीी और उस ारीख से पहले इस् ीफा पत्र वापस ले लिलया जाए।

44. हमने इस दलील पर प्रत्यर्थी8 द्वारा उद्धृ पूव क्त न्यातियक विनण&यों का उल्लेख विकया है विक प्रत्यर्थी8 क े पास इस् ीफ े क े पत्र को वापस लेने क े लिलए लोकस पोविनटेंभिशया (संविवदा पूण& होने से पहले वापस लेने का अवसर) है क्योंविक पक्षकारों

13. (उपरोक्त) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े बीच विवति क संबं उनक े इस् ीफ े की वास् विवक ारीख क जारी रहे।(जे.एन. श्रीवास् व14 और शंभू मुरारी जिसन्हा15 )।

45. जैसा विक जे.एन. श्रीवास् व16 क े मामले में प्रस् र 3 में पूव क्त देखा गया है, इस् ीफा एक विनर्निदष्ट ति भिर्थी से भविवष्यलक्षी प्रभाव से प्रभावी होना र्थीा और स्वीकार विकए जाने क े बावजूद उस ारीख से पहले वापस ले लिलया गया र्थीा- जो एक अलग थ्यात्मक परिरदृश्य है।हम प्रत्यर्थी8 द्वारा विन ा&रिर विवति क जिसद्धां से भी असहम नहीं हैं विक एमवीआरएस जैसी योजना "प्रस् ाव देने का विनमंत्रण" र्थीी। योजना क े ह 12.07.2002 को प्रत्यर्थी8 द्वारा विदया गया आवेदन एक प्रस् ाव की प्रक ृ ति में र्थीा, लेविकन हम इस दलील को स्वीकार नहीं कर सक े हैं विक 03.03.2003 विदनांविक पत्र द्वारा भविवष्य विनति बकाया जमा की श & पर, उनक े इस् ीफ े का विनलंबन हो सक ा है जो वास् व में पहले से ही जमा कर विदया गया र्थीा (यद्यविप जिजस खा े में जमा होना र्थीा उसक े नाम में कु छ भ्रम र्थीा )। भविवष्य विनति बकाया सविह बकाया राभिश प्रदान करने की स्वीक ृ ति भी सश & नहीं र्थीी, क्योंविक यह एक परिरणाम र्थीा जो इस् ीफ ृ ति पर होगा। इस प्रकार, 28.05.2003 को प्रस् ाव और स्वीक ृ ति क े अनुसरण में, संव्यवहार पूरा हो गया र्थीा। शंभू मुरारी जिसन्हा17 क े मामले क े विवपरी, यह एक सश & प्रस् ाव का मामला नहीं है, जिजसमें भाग ः प्रस् ाव को स्वीकार कर लिलया गया हो, बस्तिल्क उन परिरणामों क े सार्थी योजना

14. (उपरोक्त)

15. (उपरोक्त)

16. (उपरोक्त)

17. (उपरोक्त) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की श Ž पर प्रस् ाव की स्वीक ृ ति है, जो इस् ीफ ृ ति पर प्रत्यर्थी8 को होने वाले विवत्तीय लाभ योजना क े ह परिरकस्तिल्प हैं।

46. पूव क्त का परिरणाम यह है विक हम विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा प्राप्त विनष्कषŽ से सहम होने क े लिलए खुद को मनाने में असमर्थी& हैं जैसा विक विवद्वान खण्ड़पीH द्वारा पुष्ट विकया गया है। हमारा विवचार है विक प्रत्यर्थी8 का इस् ीफा पत्र 28.05.2003 को स्वीक ृ हो गया र्थीा और प्रत्यर्थी8 योजना क े ह लाभ का हकदार है जो प्रत्यर्थी8 को काय&वाही में प्रत्यर्थी8 क े अति कारों और कŽ पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना, पहले ही भुग ान कर विदया गया है।

47. आक्षेविप आदेश अपास् विकया जा ा है। दनुसार अपील को अनुमति प्रदान की जा ी है, पक्षकार अपना खचा& स्वयं वहन करेगें।................................... [न्यायमूर्ति संजय विकशन कौल].................................… [न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश] नई विदल्ली। 27 जिस ंबर 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA