Full Text
भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सि विवल अपील ं. 6107/2021
(विवशेष अनुमति याति(का सि विवल ं. 22574/2015 े उत्पन्न)
जलकल विवभाग नगर विनगम एवं अन्य ............ अपीलार्थी2
बनाम
प्रदशिशया औद्योविगक और विनवेश विनगम और अन्य ... प्रत्यर्थी2 (गण)
और ार्थी में
सि विवल अपील ं. 6108/2021
(विवशेष अनुमति याति(का सि विवल ं. 22577/2015 े उत्पन्न)
विन ण; य
मा० न्यायमूर्ति डॉ नंजय वाई (ंद्र(ूड़
विवश्लेषण की ुविव ा क
े लिलए इ विनण;य को विनम्नलिललिI वगJ में विवभासिज विकया
गया हैः
(A) थ्यात्मक पृष्ठभूविम………………………………...3
(B) मुद्दे……………………………………………....5
(C) परस्पर विवरो ी विनवेदन…………………………………….6
(D) विवश्लेषण………………………………………....11
उद्घोषणा
“क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क
े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क
े लिलए है और विक ी अन्य
उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क
े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी
ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क
े उद्देश्यों क
े लिलए मान्य होगा।"
D. 1 वै ाविनक प्राव ान..……………………………….11
D. 2 यूपी जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम की ारा 52 क
े ह छ
ू ट की
प्रक
ृ ति ....…………………………………………….20
D. 3 प्रविवविl 49 ू(ी II: भूविम और भवनों पर कर...……...28
D. 4 कर और शुल्क...………………………………..38
D. 5 'रेलवे' विनण;य..…………………………………..44
E. विनष्कष;...………………………………………….47
A थ्यात्मक पृष्ठभूविम
JUDGMENT
1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लIनऊ Iंडपीठ ने विदनांक 17 मा(; 2014 को विनण;य पारिर कर प्रर्थीम प्रत्यर्थी2 द्वारा भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह दायर रिरट याति(का को अनुज्ञा कर े हुए अपीलक ा;ओं को उत्तर प्रदेश जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम, 1975[1] क े प्राव ानों क े ह अति रोविप और एकवित्र जल एवं ीवेज करों को वाप करने का विनदzश जारी विकया। इ विनष्कष; पर पहुं(ने में विक उद्ग्रहण विवति म्म नहीं र्थीा, उच्च न्यायालय ने भार ंघ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य[2] में पारिर इ न्यायालय का अवलम्ब लिलया र्थीा।
2. प्रर्थीम प्रत्यर्थी2 ने वष; 1986 में उ.प्र. राजकीय विनमा;ण विनगम लिलविमटेड क े त्वा ान में विवभूति Iंड, गोम ी नगर, लIनऊ में एक इमार क े विनमा;ण शुरू विकया। भवन का विनमा;ण वष}; 1991 में पूरा हुआ और इ का कब्जा विदनांक 31 1 यू.पी. जल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम एवं सीवेज अधिनियम सीवेज अर्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम यम 2 (2007) 11 एस.सी.सी. 324 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" मई 1991 को ौंप विदया गया। इ क े उपरान् इमार का नाम 'पीआई ीयूपी भवन' प़ड़ा। 5 जनवरी 1995 को अपीलक ा;ओं द्वारा विबल नंबर 12/26 क े माध्यम े अक्टूबर 1986 े मा(; 1995 क की अवति क े लिलए जल कर की रु. 46,63,312.50/- की मांग उठाई गई र्थीी। 25 जनवरी 1995 क े अपने पत्र द्वारा, प्रर्थीम प्रत्यर्थी2 ने ीवर और पानी क े स्टैंडपोस्ट और अन्य पानी की पाइपलाइनों अवस्थिस्र्थीति पर स्पlीकरण मांगा; पीआई ीयूपी भवन े दूरी और ु ंग अति ू(ना की छायाप्रति अर्थीवा उ.प्र. जल आपूर्ति और ीवर अति विनयम की ारा 55 (बी) (i) ) क े ह 'वित्रज्या' विन ा;रिर करने वाला आदेश।
3. 28 जनवरी 1995 को विबल को ंशोति विकया गया र्थीा सिज क े द्वारा ारा 52(1) क े प्राव ानों क े अनु ार 16,45,875.00/- की राशिश क े लिलए जल कर की मांग उठाई गई र्थीी। प्रति वादी ने विदनांक 31 जनवरी 1995 को एक पत्र लिलIकर एक बार वि‰र क ु छ स्पlीकरण की मांग विकया। अपीलक ा; ने प्रश्नों को स्पl कर अपनी मांग को दोहराया। प्रर्थीम प्रत्यर्थी2 ने मा(; 1995 को विवरो क े ह रु. 3,46,500.00/- की नराशिश और 29 अप्रैल 1995 को रू. 9,41,942.77/- नराशिश जमा की। प्रर्थीम प्रति वादी ने विदनांक 7 सि ंबर 1995 को भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह एक रिरट याति(का दायर विकया सिज में उ ने उ परिर र में जल और ीवर कर क े आरोपण को (ुनौ ी दे े हुए कहा है विक भवन क े विनमा;ण क े दौरान प्रर्थीम प्रति वादी ने अपीलार्थिर्थीयों द्वारा विबछायी गयी पाइप लाइन े कोई पानी प्राप्त नहीं विकया और न ही उ ने कभी कोई नये कनेक् न क े लिलए आवेदन विकया। उ.प्र. जल आपूर्ति और ीवर अति विनयम की ारा 52 (ए), 55 (बी) (i) ) और 56 (बी) की वै ा को इ आ ार पर (ुनौ ी विदया गया विक ये ंविव ान क े अनुच्छेद 265 क े प्राव ानों क े अति कारा ी हैं। अपीलार्थिर्थीयों ने इ याति(का को (ुनौ ी देकर प्रति -शपर्थीपत्र दायर विकया। उच्च न्यायालय की Iण्ड़पीठ ने विदनांक 7 मा(; 2014 को एक विनण;य उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पारिर कर इ रिरट याति(का को अनुज्ञा कर विदया और अति रोविप और एकवित्र जल और ीवर कर को वाप करने का अपीलार्थिर्थीयों को विनदzश विदया। इ विनण;य क े विवरूद्ध दायर पुनरीक्षा याति(का को भी उच्च न्यायालय ने विदनांक 9 अगस् 2014 को आदेश पारिर कर Iारिरज कर विदया। विवशेष अनुमति याति(का को स्वीकार कर लिलया और नोविट जारी कर विदनांक 7 अगस् 2015 को इ न्यायालय ने उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनण;य क े विgयान्वयन पर रोक लगा विदया। (B) मुद्दे
4. इन काय;वाविहयों में मुख्य रूप े दो मुद्दे उत्पन्न हो े हैंः- (i) ) क्या उ.प्र. जल आपूर्ति और ीवर अति विनयम क े प्राव ानों क े ंदभ; में जल कर और ीवर कर की मांग पोषणीय है; और
(i) i) ) क्या राज्य विव ानमंडल क े पा ारा 52 (1) (A) क े प्राव ानों क े ह कर अति रोविप करने क े लिलए विव ायी रूप े क्षम है।
5. प्रारम्भ में हमें इ बा उल्लेI करना (ाविहए विक उच्च न्यायालय ने भार ंघ बनाम उ.प्र. राज्य (उपरोक्त) में दो न्याया ीश की पीठ द्वारा पारिर इ न्यायालय क े विनण;य क े आ ार पर विवशुद्ध रूप े नवाप ी क े प्रार्थी;ना पर अनुमति प्रदान विकया है।उच्च न्यायालय क े विनण;य को एक आकस्थिस्मक रीक े े ैयार विकया गया है जो थ्य े स्पl है विकः (i) ) ऊपर उसिल्ललिI इ न्यायालय क े विनण;य क े एक भाग े उद्धरण ले े हुए, उच्च न्यायालय ने न ो मामले का उद्धरण और न ही उ क े नाम का उल्लेI विकया है; उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
(i) i) ) उच्च न्यायालय ने विनण;य े उद्धरण उद्धृ करने क े उपरान् प्रर्थीम प्रति वादी क े कर्थीनों को अशिभलिललिI कर कहा विक उपरोक्त मामले में प्रति पाविद विवति प्रर्थीम प्रति वादी " क भी विवस् ारिर है" और वि‰र विनम्नलिललिI श J में याति(का पर अनुमति प्रदान करने क े लिलए आगे बढ़ाः " दनु ार, हम रिरट याति(का विनस् ारिर कर जल ंस्र्थीान, लIनऊ को विनदzश दे े हैं विक वह नराशिश को वाप करे सिज का भुग ान याति(काक ा; को विकया गया है, यविद याति(काक ा; क े विवरूद्ध कोई कानूनी अवरो अर्थीवा कोई बकाया नहीं है। दनु ार, रिरट याति(का को विनस् ारिर विकया जा ा है। "
6. इ मामले की मेरिरट पर कोई ((ा; नहीं विकया गया है। इ पर कोई ((ा; नहीं है सिज क े आ ार पर उच्च न्यायालय ने प्रर्थीम प्रति वादी क े क; को स्वीकार विकया। यह विक पूव; उसिल्ललिI इ न्यायालय द्वारा विनण;य व;मान मामले क े थ्यों पर लागू र्थीा। इ न्यायालय क े मक्ष काय;वाही छह ाल े अति क मय े लंविब है और उच्च न्यायालय को मामले क े प्रति प्रेषण े अन्य (g की काय;वाविहयां प्रारम्भ हो जाएगी और आगे अपील होने की ंभावना बन जाएगी। इ क े अलावा, भार क े ंघ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (उपरोक्त) क े मामले में पारिर विनण;य इ न्यायालय क े दो न्याया ीश वाली पीठ का है और हम उ विनण;य की व्याख्या करेंगे सिज में लापरवाही और विवति क े विवपरी विक ी बा क े होने क े विनष्कष; शाविमल हैं। इ पृष्ठभूविम में, इ मय, हमने काय;वाही को प्रति प्रेविष करने की प्रविgया का पालन करने े परहेज विकया है क्योंविक श्री प्रदीप कां, वरिरष्ठ वकील और ुश्री मा वी दीवान, अपर ॉलिलसि टर जनरल, जो प्रर्थीम प्रति वादी की ओर े पेश हुए - उच्च न्यायालय क े मक्ष मूल याति(काक ा; द्वारा अपीलक ा;ओं की ओर े पूरी रह े मेरिरट क े आ ार पर अपील विकया गया है। इ न्यायालय क े मक्ष विवति क े विनव;(न और ंवै ाविनक (ुनौ ी पर भी उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" कर्थीन करने का आग्रह विकया गया है और हमें व;मान विनण;य पारिर कर े मय दोनों पहलुओं पर विव(ार करना होगा। (C) परस्पर विवरो ी विनवेदन ंवै ाविनक विनव;(न
7. अपीलक ा;ओं की ओर े पेश वरिरष्ठ वकील श्री प्रदीप कां ने प्रश्नग विवति उ.प्र. जल आपूर्ति और ीवर अति विनयम क े विनमा;ण क े ंबं में विनम्नलिललिI विनवेदन विकया हैंः (i) ) यूपी जल आपूर्ति और ीवर अति विनयम में ऐ े प्राव ान हैं सिजन्हें मोटे ौर पर (ार भागों में वग2क ृ विकया जा क ा हैः (क) जल ंस्र्थीान की स्र्थीापना और अध्याय-II और III में इ क े कायJ और शविक्तयों क े प्राव ान; (I) अध्याय-IV ंपलित्तयों का विनविह होना, परिर ंपलित्तयां, देनदारिरयों और दातियत्वों का विनविह ार्थी; और कम;(ारिरयों का स्र्थीानां रण। (ग) अध्याय-VI कर, ‰ी और प्रभार। (घ) अध्याय-VII एवं VII जल आपूर्ति और ीवर ंबं ी ेवाएं; और (ड) अध्याय IX एवं XI शास्थिस् और प्रविgया, बाह्य विनयंत्रण और प्रकीण; उपबं ।
(i) i) ) विव ान की योजना ारा 52 (1) क े अ ीन जल कर और ीवर कर क े उद्ग्रहण, आरोपण, ंग्रहण और व ूली का उपबं कर ी है।
(i) i) i) ) भार ंघ बनाम उ.प्र. राज्य (उपरोक्त) क े मामले में इ न्यायालय द्वारा विनण;य ारा 52 क े विनव;(न प्राति क ृ नहीं है क्योंविक उ मामले में रेलवे पर एक उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ेवा शुल्क लगाया गया र्थीा। रेलवे द्वारा आरोविप शुल्क को इ आ ार पर (ुनौ ी दी गई र्थीी विक जल ंस्र्थीान ंविव ान क े अनुच्छेद 285 क े प्राव ानों का उल्लंघन कर े हुए कर आरोविप विकया रहा र्थीा सिज े यह कहकर Iारिरज कर विदया विक इ की प्रक ृ ति शुल्क की है न विक कर की; और
(i) v) व;मान मामले में, करारोपण जल कर और ीवर कर े ंबंति है जो ारा 52 (1) (क) क े ह आ ा है। ंवै ाविनक (ुनौ ी
8. प्रर्थीम प्रति वादी की ओर े पेश अपर ॉलिलसि टर जनरल ुश्री मा वी दीवान ने उ.प्र. जल आपूर्ति और ीवर अति विनयम की ारा 52 (1) (a), ), ारा 55 (d) (a) ) (a), ) और ारा 56 (b) ) क े प्राव ानों को ंवै ाविनक (ुनौ ी देने का आग्रह विकया है। ुश्री दीवान ने शुरु में यह कह े हुए क; विदया विकया विक ीवरेज शुल्क की वै ा को (ुनौ ी नहीं विदया गया है, सिज का भुग ान करने क े लिलए प्रति वादी ैयार और ईस्थि• है। जल कर क े उद्ग्रहण को दी गई (ुनौ ी पर विनम्नलिललिI क; देकर आपलित्त की गई हैः (i) ) ारा 52 (1) (क) क े अ ीन जल कर का उद्ग्रहण ंविव ान की ा वीं अनु ू(ी की ू(ी 2 की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र 'भूविम और भवनों' पर कर नहीं है
(i) i) ) ारा 52 (1) (क) क े ह लगाया गया (ाज; एक प्रकार का शुल्क है न विक कर, सिज े ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अं ग; स्थिम्मलिल नहीं विकया जाएगा;
(i) i) i) ) यद्यविप ारा 52 (1) (क) "जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर रों पर" कर क े आरोपण का उपबं कर ी है, सिज का उद्देश्य क्षेत्रीय ीमा और अति कारिर ा की पह(ान करना मात्र है। यविद कानून और उ क े प्राव ानों क े लंबे उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" शीष;क को मग्र रूप े माना जा ा है, ो यह स्पl होगा विक कर ू(ी II की प्रविवविl 49 क े भी र 'भूविम और भवनों' पर एक नहीं है;
(i) v) विक ी कर आरोपण की प्रक ृ ति को विवति क े प्रार्थीविमक उद्देश्य और विव ायन क े आवश्यक गुण े विनकालना होगा; (v) विवति क े विनम्नलिललिI प्राव ान यह स्पl है विक ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र भूविम और भवनों पर लगाया जाने वाला शुल्क कर की श्रेणी में नहीं आ ा हैः (a), ) ारा 56 में इ पर अं र कर ा है विक क्या कोई परिर र जल आपूर्ति े जुड़ा है या नहीं; (b) ) विवति द्वारा मालिलक और कब्जा ारी क े बी( अं र विकया गया है जो ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह भूविम और भवनों पर आरोविप कर क े प्रति विवति(त्र होगा; (c) ारा 25 (2) (vi) ) जल ंस्र्थीान को जल आपूर्ति और ीवर ेवाओं क े लिलए टैरिर‰ लगाने अर्थीवा उ को ंशोति करने और इन ेवाओं क े लिलए भी करों और शुल्कों को एकत्र करने की शविक्त प्रदान कर ा है जै ा विवविह विकया जाए; (d) (a) ) ारा 44 जल ंस्र्थीान को विवभाग क े ं(ालन, रIरIाव और ऋण ेवा की लाग को पूरा करने में क्षम बनाने क े लिलए करों और शुल्कों की दरों को य करने और उ को मायोसिज करने का अति कार प्रदान कर ी है और जहां ंस्र्थीान की अ(ल ंपलित्तयों पर आर्थिर्थीक रिरटन; प्राप्त करना व्यावहारिरक हो; उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (e) जल कर का ंग्रहण एक पृर्थीक विनति में जमा विकया जा ा है और ारा 101 (2) में यह उपबं विकया गया है विक इ न का उपयोग क े वल यर्थीास्थिस्र्थीति जल आपूर्ति या ीवर ेवाओं या दोनों क े लिलए विकया जाएगा। (vi) ) उपरोक्त आ ारों पर यह आग्रह विकया गया है विक यविद विवति की मग्र व्याख्या की जाए ो यह स्पl हो जाएगा विकः (a), ) यद्यविप जल कर क े रूप में लगाया गया है वि‰र भी ारा 52 (1) (क) क े ह इ का आरोपण की प्रक ृ ति शुल्क की न विक कर की; और (b) ) परिरणामस्वरूप, यह आरोपण प्रविवविl 49 ू(ी II क े अ ीन कायम नहीं रह क ा है। (vi) i) ) ू(ी II की प्रविवविl 17 में "जल और जल आपूर्ति " का प्राव ान विकया गया है।
(vi) i) i) ) क ु ल विमलाकर ारा 52 (1) (क) क े ह आरोविप कर भले ही जल कर क े रूप में वर्थिण है, वि‰र भी यह एक प्रकार का शुल्क है न विक कर, और भले ही विव ातियका ने 'जल कर' क े नाम का प्रयोग विकया विकया है वि‰र भी इ का प्रभाव जल अर्थीवा जल आपूर्ति पर शुल्क की व ूली की काय;वाही है।
9. उपरोक्त क¡ का विवरो कर इ कानून की ंवै ाविनक वै ा को (ुनौ ी दे े हुए वरिरष्ठ अति वक्ता श्री प्रदीप कां ने विनवेदन विकया है विकः (i) ) भार ंघ बनाम उ.प्र. राज्य (उपरोक्त) क े मामले में इ न्यायालय की दो न्याया ीशों वाली Iंडपीठ ने ारा 52 क े प्राव ानों गल व्याख्या कर कहा है विक विक यह शुल्क की प्रक ृ ति का है न विक कर की प्रक ृ ति का;
(i) i) ) उ मामले में जल ंस्र्थीान द्वारा रेलवे पर अति रोविप कर जल और ीवर क े उपयोग क े हे ु एक ेवा शुल्क र्थीा; यह कर की प्रक ृ ति में नहीं र्थीा, सिज क े उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" परिरणामस्वरूप इ न्यायालय ने यह विनष्कष; विनकाला विक भार ंघ की ंपलित्त पर करारोपण पर अनुच्छेद 285 में वर्थिण प्रति रक्षा को आकर्षिष नहीं विकया गया;
(i) i) i) ) परिरणामस्वरूप, न्यायालय का इ आशय का विनष्कष; विक ारा 52 क े ह आरोपण शुल्क की प्रक ृ ति में है, अ क; ा क े कारण है, क्योंविक इ न्यायालय ने यह अशिभविन ा;रिर विकया विक उद्ग्रहण ेवा प्रभार की प्रक ृ ति में र्थीा और यह मामला अव ारण क े लिलए उत्पन्न नहीं हुआ;
(i) v) ारा 52 (1) (क) क े अ ीन कर का आरोपण जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर र पर है। अशिभव्यविक्त 'परिर र' का अर्थी; भूविम और भवन को परिरभाविष करने क े लिलए विकया गया है। इ लिलए, हालांविक जल कर क े रूप में अति रोविप विकया गया है, ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र भूविम और भवनों पर कर लगाने का प्राव ान कर ी है। (v) ू(ी II की प्रविवविl 17 अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी पानी और पानी की आपूर्ति े ंबंति है, जबविक ू(ी II की प्रविवविl 49 भूविम और भवनों पर करों े ंबंति है।ठीक- ठीक अर्थी; लगाने पर यह स्पl है विक यह आरोपण जल पर लगाया गया कर नहीं बस्थिल्क भूविम और भवनों पर लगाया गया कर है।कर का माप विन ा;रणीय मूल्य है।कर विन ा;रणीय मूल्य क े प्रति श दर क े रूप में लगाया जा ा है। कर का भार स्वामी और अति भोगी पर हो ा है; (vi) ) कर का आरोपण कर क े माप, दर और भार े अलग विकया जाना (ाविहए।
10. श्री प्रदीप कां ने अपनी बयानों क े दौरान, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की Iंडपीठ द्वारा रज़ा बुलंद शुगर क ं पनी लिलविमटेड बनाम म्युविनसि पल बोड;, रामपुर[3] पारिर विनण;य और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा विनज़ाम शुगर ‰ ै क्ट्री लिलविमटेड 3 ए.आई.आर. 1962 ऑल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम 83 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" बनाम सि टी म्युविनसि पैलिलटी, बो न[4] क े मामले में पारिर विनण;य का अवलम्ब लिलया है। (D) विवश्लेषण
11. जै ा विक हमने परस्पर विवरो ी विनवेदनों का आँकलन विकया हैं, इ लिलए अति विनयमन क े प्राव ानों का विवश्लेषण करना शुरू में ही आवश्यक हो जा ा है।
12. उत्तर प्रदेश जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम जल आपूर्ति और ीवरेज ेवाओं क े विवका और विवविनयमन और इ े जुड़े मामलों क े लिलए विनगम, अति कारिरयों और ंगठनों की स्र्थीापना क े लिलए अति विनयम का उपबं कर ा है। अध्याय I में परिरभाषाओं विह प्रारंशिभक प्राव ान हैं। इ मामले क े प्रयोजनों क े लिलए परिरभाषाओं में महत्वपूण; अशिभव्यविक्त 'परिर र' है सिज े ारा 2 (18) में परिरभाविष विकया गया है सिज का अर्थी; है 'कोई भूविम या भवन'।अध्याय II उ.प्र. जल विनगम की स्र्थीापना, काय; का ं(ालन, कायJ और शविक्तयों का प्राव ान कर ा है। अध्याय III जल ंस्र्थीान की स्र्थीापना, काय; का ं(ालन, कायJ और शविक्तयों का प्राव ान कर ा है। इ प्रकार ारा 18 (1) उपबंति कर ा हैः
18. जल ंस्र्थीानों की स्र्थीापना-(1) यविद राज्य रकार की राय में, स्र्थीानीय परिरस्थिस्र्थीति यों यविद इ प्रकार अपेक्षा की जा ी है और विक ी भी क्षेत्र में जल आपूर्ति और ीवरेज ेवाओं क े ु ार क े लिलए आवश्यक या मी(ीन माना जा ा है, ो यह उ क्षेत्र क े लिलए जल ंस्र्थीान क े रूप में जाना जाने वाला एक विनकाय गविठ कर क ा है। " ारा 24 जल ंस्र्थीान क े कायJ को विनर्षिदl कर ी हैः 4 ए.आई.आर. 1965 ऑल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम 91 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ारा 24 जल ंस्र्थीान क े काय;ः- जल ंस्र्थीान क े काय; विनम्नव हैंः (i) ) जल आपूर्ति की एक क ु शल प्रणाली की योजना बनाना, उ े बढ़ावा देना और विनष्पाविद करना और ं(ालिल करना;
(i) i) ) जहां ंभव हो, योजना बनाना, उन्हें बढ़ावा देना और विनष्पाविद करना और ं(ालिल करना, ीवरेज, ीवेज उप(ार और विनपटान और व्यापार अपशिशl का उप(ार;
(i) i) i) ) अपने भी मामलों का प्रबं न करना ाविक क्षेत्र क े लोगों को अपने अति कार क्षेत्र क े भी र स्वस्र्थी पानी और जहां ंभव हो, क ु शल ीवरेज ेवा प्रदान की जा क े;
(i) v) ऐ े अन्य उपाय करना, जो विक ी आपा स्थिस्र्थीति में जल आपूर्ति ुविनति§ करने क े लिलए आवश्यक हों; (v) ऐ े अन्य काय; जो राज्य रकार द्वारा राजपत्र में अति ू(ना द्वारा उ े ौंपे जाएं।" ारा 25 जल ंस्र्थीान की शविक्तयों का उल्लेI कर ी हैः
25. जल ंस्र्थीान की शविक्तयां - (1) प्रत्येक जल ंस्र्थीान, इ अति विनयम क े प्राव ानों क े अ ीन, क ु छ भी करने की शविक्त रI ा है जो इ अति विनयम क े ह अपने कायJ को करने क े लिलए आवश्यक या मी(ीन हो क ा है। (2) पूव;गामी उपबं की व्यापक ा पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना ऐ ी शविक्तयों में विनम्नलिललिI शविक्त स्थिम्मलिल होगी - (i) ) भी शविक्तयों का प्रयोग करना और उ क्षेत्र क े जल आपूर्ति, ीवरेज और ीवेज विनपटान े ंबंति भी काय; करना जो उ की अति कारिर ा क े भी र है उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
(i) i) ) भूविम और अन्य ंपलित्त का अति ग्रहण, कब्जा और ारण करना और मालिलक या कब्जा ारी को लिललिI में युविक्तयुक्त ू(ना देने क े बाद विक ी भी राजमाग;, ड़क, ड़क या स्र्थीान क े माध्यम े, उ क े पार, ऊपर या नी(े पानी या ीवरेज काय; करना;
(i) i) i) ) विक ी प्राक ृ ति क स्रो े जल प्राप्त करना और अपशिशl पानी का विनपटान करना;
(i) v) जल ंस्र्थीान क े रूप में विक ी भी व्यविक्त या विनकाय क े ार्थी अनुबं या करार करना आवश्यक मझा जा क ा है; (v) प्रति वष; अपना बजट अपनाना; (vi) ) विनगम क े अनुमोदन क े अ ीन रह े हुए जल आपूर्ति और ीवरेज ेवाओं क े लिलए टैरिर‰ लागू करना या ंशोति करना और इन ेवाओं क े लिलए भी करों और शुल्कों को एकत्र करना जो विन ा;रिर विकया जा क ा हैः बश z विक इ रह क े टैरिर‰ को पेश करने या ंशोति करने का कोई विनण;य उ विवशेष प्रस् ाव को छोड़कर नहीं लिलया जाएगा, जो इ रह क े ू(ना देने क े बाद लाया जा क ा है, और जल ंस्र्थीान क े दो- ति हाई दस्यों क े बहुम े पारिर विकया जा क ा है
(vi) i) ) व्यय वहन करने और अपनी स्वयं की विनति का प्रबं न करना;
(vi) i) i) ) विनगम े ऋण, अविग्रम नराशिश, आर्थिर्थीक हाय ा और अनुदान प्राप्त करना।"
13. अध्याय IV ंपलित्तयों, परिर ंपलित्तयों, उत्तरदातियत्वों और बाध्य ाओं क े प्रदान विकये जाने और कम;(ारिरयों क े स्र्थीान् रण े ंबंति है। ारा 33 जल ंस्र्थीान क े गठन पर मौजूदा जल आपूर्ति और ीवरेज ेवाएं प्रदान करने का प्राव ान कर ी है। ारा 34 में परिरकल्पना की गई है विक जल ंस्र्थीान उन मामलों उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क े ंबं में स्र्थीानीय प्राति करण क े दातियत्वों को ग्रहण करेगा सिजन पर यूपी जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम लागू हो ा है। ारा 34 इ प्रकार हैः
34. जल ंस्र्थीान उन मामलों क े ंबं में स्र्थीानीय प्राति कारी की बाध्य ाएं ग्रहण करेगा सिजन पर यह अति विनयम लागू हो ा है - ारा 24 में विनर्षिदl विक ी भी काय; क े ंबं में भी ऋण और दातियत्व, भी मामलों में विकए गए भी ंविवदाएं और उक्त ति शिर्थी े पहले विक ी स्र्थीानीय विनकाय द्वारा या उ क े लिलए विकए जाने वाले कामों को उपग, दज; विकया गया माना जाएगा। जल ंस्र्थीान क े ार्थी या उ क े लिलए, और ारा 33 की उप- ारा (1) क े ह विनविह और हस् ां रण क े लिलए भी मुकदमों या अन्य कानूनी काय;वाही, लेविकन स्र्थीानीय विनकाय द्वारा या उ क े विवरूद्ध स्र्थीाविप या ब(ाव विकया जा क ा है, जल ंस्र्थीान द्वारा या उ क े विवरूद्ध जारी या स्र्थीाविप या ब(ाव विकया जा क ा है।
14. जल ंस्र्थीान क े विवत्त और ंपलित्त पर अति विनयम क े अध्याय V में ((ा; की गई है। ारा 41 में परिरकल्पना की गई है विक प्रत्येक जल ंस्र्थीान की अपनी विनति होगी सिज े एक स्र्थीानीय विनति माना जाएगा सिज में जल ंस्र्थीान द्वारा या उ की ओर े प्राप्त भी न जमा विकया जाएगा। ारा 44 विनम्नलिललिI श J में जल ंस्र्थीान क े विवत्त को विनयंवित्र करने वाले ामान्य सि द्धां ों का उपबं कर ी हैः "44. जल ंस्र्थीान क े विवत्त क े लिलए ामान्य सि द्धां - जल ंस्र्थीान मय- मय पर इ अति विनयम क े ह करों और शुल्कों की दरों को विन ा;रिर और मायोसिज करेगा ाविक इ े जल्द े जल्द अपने ं(ालन, रIरIाव और ऋण ेवा की लाग को पूरा करने में क्षम हो क े और जहां व्यावहारिरक हो, अपनी अ(ल ंपलित्तयों पर आर्थिर्थीक लाभ प्राप्त कर क े ।" उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
15. अति विनयमन क े अध्याय 6 का शीष;क "कर, शुल्क और प्रभार" है। अध्याय VI क े प्राव ानों में करों, शुल्कों और प्रभारों का अलग परिर ीमन विदया गया है। ारा 52 में विनम्नलिललिI श J में कर आरोविप करने का उपबं कर ा हैः
52. कर प्रभाय;ः-(एल) इ अति विनयम क े प्रयोजनों क े लिलए, जल ंस्र्थीान अपने क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर र पर कर लगाएगाः (क) जहां जल ंस्र्थीान, जल कर की जल आपूर्ति ेवाओं द्वारा क्षेत्र को आच्छाविद है वहां जल कर; और (I) जहां वह क्षेत्र जल ंस्र्थीान की ीवरेज ेवाओं द्वारा आच्छाविद है, वहां ीवरेज कर। (2) उप ारा (1) में वर्थिण कर विक ी शहर े शिभन्न स्र्थीानीय क्षेत्र में ऐ ी दर पर लगाया जाएगा जो जल कर की दशा में 6 प्रति श े कम और 14 प्रति श े अति क नहीं होगा और ीवरेज कर की दशा में 2 प्रति श े कम नहीं होगा और राजपत्र में अति ू(ना द्वारा विनगम की सि ‰ारिरश पर विव(ार करने क े प§ा } मय- मय पर रकार द्वारा परिर र क े आँकलिल वार्षिषक मूल्य क े 4 प्रति श े अति क नहीं होगा। (3) उप ारा (1) में वर्थिण कर, विक ी शहर में, ऐ ी दर पर लगाया जाएगा जो जल कर क े मामले में उत्तर प्रदेश नगर विनगम अति विनयम, 1959 क े ह विन ा;रिर उ परिर र क े वार्षिषक मूल्य क े 7.[5] प्रति श े कम और 12.[5] प्रति श े अति क नहीं होगा और ीवरेज कर क े मामले में 2.[5] े कम और 5.0 प्रति श े अति क नहीं होगा, जै ा विक राज्य रकार मय- मय पर, राजपत्र में अति ू(ना द्वारा, विनगम की सि ‰ारिरश पर विव(ार करने क े बाद घोविष कर क ी है। [स्पlीकरण. इ ारा क े प्रयोजनों क े लिलए - (i) ) "शहर" पद का वही अर्थी; होगा जो उ े उत्तर प्रदेश नगर विनगम अति विनयम, 1959 में विदया गया है; और उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
(i) i) ) " ीवरेज कर" पद का वही अर्थी; होगा जो "जल विनका ी कर" उत्तर प्रदेश नगर विनगम अति विनयम, 1959 में ौंपा गया है।].” ारा 53 विनम्नलिललिI श J में वार्षिषक मूल्य क े मूल्यांकन क े लिलए प्राव ानों को लागू कर ी हैः
53. वार्षिषक मूल्य का विन ा;रणः-(I) ारा 52 की [उप- ारा (2)] क े प्रयोजनों क े लिलए, वार्षिषक मूल्य का अर्थी; है- (a), ) रेलवे स्टेशनों, शैक्षशिणक ंस्र्थीानों (उनक े छात्रावा ों और हॉलों विह ) कारIानों (जै ा विक कारIाना अति विनयम, 1948 में परिरभाविष विकया गया है), और वाशिणस्थिज्यक प्रति ष्ठान (जै ा विक उत्तर प्रदेश दूकान और वाशिणज्य अति ष्ठान अति नयम, 1956 में परिरभाविष विकया गया है), परिर र क े बाजार मूल्य का पां( प्रति श । (b) ) विक ी अन्य परिर र क े मामले में, कल वार्षिषक विकराया सिज क े लिलए ऐ े परिर र को वास् व में विकराये पर उठाया गया है या जहां परिर र को विकराये पर नहीं उठाया गया है, कल वार्षिषक विकराया सिज क े लिलए परिर र को यर्थीोति( रूप े विकराये पर विदया जाना आशातिय हैः बश z विक सिज परिर र पर स्वयं स्वामी का कब्जा है उ परिर र में वार्षिषक मूल्य इ ारा क े ह अन्यर्थीा विन ा;रिर वार्षिषक मूल्य े पच्ची प्रति श कम माना जाएगा। (2) ारा 52 की उप ारा (2) क े अ ीन कर क े आरोपण क े प्रयोजनों क े लिलए परिर र क े वार्षिषक मूल्य का विन ा;रण ऐ े प्राति कारी द्वारा विकया जाएगा सिज े राज्य रकार ा ारण या विवशेष आदेश द्वारा विनर्षिदl कर क े गी और ऐ ा प्राति कारी स्वयं जल ंस्र्थीान या कोई अन्य अशिभकरण हो क े गा जै ा आदेश में विवविनर्षिदl विकया जाए। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (3) जहां जल ंस्र्थीान या जल ंस्र्थीान क े विक ी अन्य एजें ी द्वारा या ऐ ी अन्य एजें ी द्वारा मूल्यांकन विकया जा ा है वहां वह विवविह प्रविgया का पालन करेगी। (4) जब क जल ंस्र्थीान या उप- ारा (2) क े ह विनर्षिदl विक ी अन्य एजें ी द्वारा विक ी भी स्र्थीानीय क्षेत्र में परिर र क े वार्षिषक मूल्य का मूल्यांकन नहीं विकया जा ा है, ब क उ स्र्थीानीय क्षेत्र क े भी परिर रों का वार्षिषक मूल्य, जै ा विक हाउ टैक् क े प्रयोजनों क े लिलए ंबंति स्र्थीानीय विनकाय द्वारा मूल्यांकन विकया जा ा है, इ अति विनयम क े प्रयोजनों क े लिलए परिर र का वार्षिषक मूल्य पर भी विव(ार विकया जाएगा। (5) जहां विक ी स्र्थीानीय क्षेत्र में परिर र क े वार्षिषक मूल्य का मूल्यांकन जल ंस्र्थीान या उप- ारा (2) क े ह विनर्षिदl अन्य एजें ी द्वारा विकया जा ा है, ो यह ारा 54 क े ह अपील पर विक ी भी शिभन्न ा क े अ ीन है, इ रह क े स्र्थीानीय विनकाय का गठन करने वाली कानून में विक ी बा क े हो े हुए भी ंबंति स्र्थीानीय विनकाय द्वारा आरोविप गृह कर क े प्रयोजनों क े लिलए परिर र का वार्षिषक मूल्य माना जाएगा। ' परिर र क े वार्षिषक मूल्य क े मूल्यांकन क े उद्देश्य े, जल ंस्र्थीान (परिर र क े वार्षिषक मूल्य का आकलन) विनयमावली 1981 अति विनयम की ारा 96 (2) (C) क े ह गविठ विकया गया र्थीा। ारा 54 में विवविह प्राति कारी को मूल्यांकन क े आदेश क े विवरूद्ध अपील क े प्राव ान कर ा हैं। ारा 55 करों क े आरोपण पर प्रति बं लगा ी है। ारा 55 इ प्रकार हैः
55. कर आरोपण पर विनब] नः- ारा 52 में उसिल्ललिI करों का उद्ग्रहण विनम्नलिललिI विनब] नों क े अ ीन होगा, अर्थीा; } - उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (क) करों को विवशेष रूप े क ृ विष प्रयोजनों क े लिलए उपयोग की जाने वाली विक ी भी भूविम पर ब क नहीं लगाया जाएगा जब क विक जल ंस्र्थीान द्वारा उ भूविम को ऐ े प्रयोजनों क े लिलए जल की आपूर्ति नहीं की जा ी है; (I) जल कर विक ी भी परिर र पर नहीं लगाया जाएगा-(i) ) सिज में े कोई भी विहस् ा विनकट म स्टैंड-पोस्ट या अन्य जल कायJ े विन ा;रिर वित्रज्या क े भी र स्थिस्र्थी नहीं है, सिज पर जल ंस्र्थीान द्वारा जन ा को पानी उपलब् कराया जा ा है; या
(i) i) ) सिज का वार्षिषक मूल्य ीन ौ ाठ रुपये े अति क नहीं है, और सिज े जल ंस्र्थीान द्वारा कोई पानी की आपूर्ति नहीं की जा ी है।.] (ग) ीवरेज कर विक ी भी आ ार पर नहीं लगाया जाएगा-(i) ) सिज में े कोई भी विहस् ा जल ंस्र्थीान क े विनकट म ीवर े ौ मीटर क े दायरे में नहीं है, या
(i) i) ) सिज का वार्षिषक मूल्य एक ौ प(ा रुपये े अति क नहीं है। " ारा 55 (b) ) (i) ) क े अनु ार, जल ंस्र्थीान (जल कर क े आरोपण े ंबंति वित्रज्या) विनयमावली 1993 को 'वित्रज्या' को परिरभाविष करने क े लिलए ैयार विकया गया र्थीा, सिज क े लिलए जल ंस्र्थीान का अति कार विवस् ारिर है। ारा 56 विनम्नलिललिI श J में करों क े भुग ान क े लिलए देय ा का उल्लेI कर ी हैः
56. करों क े भुग ान क े लिलए दातियत्वः- ारा 52 में उसिल्ललिI कर उद्ग्री विकए जाएंगे - (a), ) जल आपूर्ति े जुड़े परिर र क े मामले में या, यर्थीास्थिस्र्थी, जल ंस्र्थीान क े ीवर क े ार्थी, परिर र क े अति भोगी े; (b) ) परिर र दशा में में परिर र क े मालिलक े इ रह े जुड़ा नहीं है।" उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
16. जै ा विक करों क े उद्ग्रहण े शिभन्न है, ारा 59 प्रत्येक कनेक्शन क े ंबं में प्रभारिर न्यून म लाग क े अनु ार उ क े द्वारा आपूर्ति विकए जाने वाले पानी की लाग य करने में जल ंस्र्थीान को क्षम बना ी है। जल ंस्र्थीान जल की लाग उ क े आय न क े मु ाविबक व ूल करने क े स्र्थीान पर उ अवति क े दौरान जल की अपेतिक्ष Iप पर विनर्षिदl अवति क े लिलए एक विनति§ नराशिश स्वीकार करने क े लिलए शक्त है। ारा 59 इ प्रकार हैः
59. पानी की लाग ः-(1) जल ंस्र्थीान, राजपत्र में अति ू(ना द्वारा, अपने द्वारा आपूर्ति की जाने वाली पानी की लाग को इ की मात्रा क े अनु ार य करेगा, और प्रत्येक कनेक्शन क े ंबं में न्यून म लाग भी व ूल करेगा। (2) जल ंस्र्थीान, आय न क े अनु ार पानी की लाग व ूलने क े बदले, उ अवति क े दौरान पानी की अपेतिक्ष Iप क े आ ार पर विनर्षिदl अवति क े लिलए एक विनति§ राशिश स्वीकार कर क ा है। " ारा 60 जल ंस्र्थीान द्वारा अपशिशl जल क े विनपटान की लाग क े विन ा;रण का प्राव ान कर ी है। ारा 61 में पानी क े मीटर क े प्राव ान और उप-कानूनों क े अनु ार मीटर क े विकराए क े लिलए शुल्क की व ूली का प्राव ान है। ारा 62 ऐ ा प्राव ान है जो जल ंस्र्थीान को मीटर की आपूर्ति क े ंबं में या उप-कानूनों में प्रदान विकए गए ीवर कनेक्शन क े लिलए उपभोक्ता े ुरक्षा की मांग करने में क्षम बना ा है। ारा 63 विनम्नलिललिI श J में शुल्क लगाने े ंबंति हैः
63. शुल्कः- जल ंस्र्थीान उप-कानूनों द्वारा प्रदान की जा कने वाली विक ी भी जल आपूर्ति या ीवर या परीक्षण या पय;वेक्षण या विनष्पाविद या पय;वेक्षण की गई विक ी भी अन्य ेवा क े लिलए कनेक्शन, विवयोग, पुनः कनेक्शन क े लिलए ऐ ी शुल्क ले क ा है।' उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ारा 645 में भू-राजस्व क े बकाया क े रूप में करों, शुल्क, ीवरेज की लाग, अपशिशl जल क े विनपटान की लाग, मीटर विकराया, जुमा;ना, क्षति या अति भार को व ूल करने का प्राव ान हैं। अति विनयम का अध्याय VII जल आपूर्ति े ंबंति है, सिज में े ारा 65 घरेलू उद्देश्यों क े लिलए पानी की आपूर्ति को परिरभाविष कर ा है। अध्याय VIII में ीवरेज े ंबंति उपबं विकया गया हैं।
17. उत्तर प्रदेश जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम क े प्राव ानों का अवलोकन यह दशा; ा है विक (i) ) करों (i) i) ) शुल्कों और (i) i) i) ) प्रभारों क े लिलए अध्याय VI में अलग-अलग प्राव ान विदये गये हैं । ारा 52 में करों का उद्ग्रहण, ारा 59 में जल कनेक्शन क े लिलए प्रभारिर विकए जाने वाले जल की लाग का विन ा;रण और ारा 63 में शुल्क प्रभारिर करना उपबंति विकया गया है। ारा 64 में उपबं है विक जल ंस्र्थीान का बकाया कर, शुल्क, पानी की लाग, अपशिशl जल क े विनपटान की लाग, मीटर विकराया, जुमा;ना, क्षति या अति भार क े रूप में हो क ा है। 5 "64. कर और अन्य रकम की व ूलीः-(1) कर, शुल्क, पानी की लाग, अपशिशl जल क े विनपटान की लाग, मीटर-विकराया, जुमा;ना, क्षति या अति भार क े कारण जल ंस्र्थीान क े कारण कोई भी राशिश इ अति विनयम क े ह भू- राजस्व क े बकाया क े रूप में व ूली योग्य होगी। 5 “64. करों सीवेज अधिनियम ं सीवेज अधिनियम और अन्य बकाए की वसूल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ी.- (1) इस अर्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम यम क े ह कर, शुल्क, जल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम की कीम, जल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम स् ारण की कीमत की कीम, म ीटर का र्ति एवं सीवेज अधिनियम कराया, जुम ा ा, क्षर्ति एवं सीवेज अधिनियम, अर्ति एवं सीवेज अधिनियम भार बकाए और भूराजस्व क े रूप म ें वसूल किए वसूल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम कए जाएं सीवेज अधिनियम गे। उप ारा (1) की कोई भी बा जल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम सं सीवेज अधिनियम स्था को उपभोक् ा द्वारा उप ारा म ें वसूल किए र्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम /ष्ट बकाए का भुग ा कर पा े की /शा म ें वसूल किए अप े उपर्ति एवं सीवेज अधिनियम वर्ति एवं सीवेज अधिनियम क े म ु ार्ति एवं सीवेज अधिनियम ब जल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम का क ेक्श काट े की शर्ति एवं सीवेज अधिनियम क् को प्रभार्ति एवं सीवेज अधिनियम व हीं सीवेज अधिनियम करेगी। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (2) उप ारा (1) की कोई बा उ उप ारा में विनर्षिदl विक ी बकाया राशिश क े उपभोक्ता द्वारा ंदाय न विकए जाने की दशा में जल ंस्र्थीापन की उपविवति यों क े अनु ार कटौ ी करने की शविक्त को प्रभाविव नहीं करेगी। विनम्नलिललिI ारा इन बकाया राशिश े ंबंति हैंः (i) ) जल कर और ीवरेज कर ( ारा 52); (1) ‰ी ( ारा 63));
(i) i) i) ) पानी की लाग ( ारा 59);
(i) v) अपशिशl जल क े विनपटारे की लाग ( ारा 60); (v) मीटर विकराया ( ारा 61); (vi) ) ामान्य शास्थिस् ( ारा 84); और (vi) i) ) अति भार या क्षति ( ारा 51); विव ातियका ने इ अति विनयम क े ह अलग े उपबं करक े "कर", "शुल्क", "जल की लाग ", "मीटर का विकराया", "जुमा;ना", "क्षति या अति भार " अशिभव्यविक्तयों क े बी( अं र विकया है। व;मान मामले में, विववाद कर क े भुग ान क े दातियत्व े ंबंति है।
18. यहां पर दो विनवेदन विकया गया हैं सिजन पर हमें विव(ार करना है। प्रर्थीम उ.प्र. जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम की ारा 52 क े ह आरोपण की ंवै ाविनक ा को (ुनौ ी विदया गया है। ुश्री दीवान ने विनवेदन विकया है विक यह आरोपण 'भूविम और भवनों' पर कर का गठन नहीं कर ा है और इ प्रकार, ू(ी II की प्रविवविl 49 क े पविठ ंविव ान क े अनुच्छेद 246 क े ह राज्य विव ातियका क े क्षेत्र े बाहर है। विद्व ीय, यह विक ारा 52 (1) (ए) क े ह यह आरोपण, यद्यविप जल कर क े रूप में लगाया गया है सिज की शुल्क की है। हम इनमें े प्रत्येक कJ पर बारी-बारी े विव(ार करेंगे। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
19. विव ातियका कर आरोविप करने क े लिलए विनम्नलिललिI उपबं कर क े गी (i) ) जब कर आरोविप विकया जाए उ आ ार पर कर का उद्ग्रहण;
(i) i) ) कर का माप;
(i) i) i) ) वह दर सिज पर कर लगाया जाएगा;
(i) v) कर की प्र ंगति यां; और
(v) विन ा;रण, ंग्रहण, व ूली और अन्य आकस्थिस्मक उपबं ।
20. कर क े घटकों क े इ लक्षण को इ न्यायालय क े विनण;यों में बार -बार वर्थिण विकया गया है। इ बिंबदु पर लोक क्लासि क गोबिंवद रन गंगा रन बनाम ी.ए.टी.[6] में दो न्याया ीशों की पीठ का विनण;य र्थीान्यायमूर्ति आर.ए. पाठक ( त्कालीन मुख्य न्याया ीश क े रूप में) अशिभविनण[2] विकयाः
6. कर की अव ारण की कीमता म ें वसूल किए प्रवेश कर े वाल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम े घटक सवर्ति एवं सीवेज अधिनियम वर्ति एवं सीवेज अधिनियम / हैं। पहल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ा अप ी प्रक ृ र्ति एवं सीवेज अधिनियम से ज्ञा आरोपण की कीमत का स्वरूप है जो कर उस आरोपण को जो कर उस आरोपण की कीमत को आकर्ति एवं सीवेज अधिनियम 7 कर े वाल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ी कर योग्य घट ा को र्ति एवं सीवेज अधिनियम ार्ति एवं सीवेज अधिनियम र कर ा है जो कर उस आरोपण को, /ूसरा उस व्यर्ति एवं सीवेज अधिनियम क् का स्पष्ट सं सीवेज अधिनियम क े है जो कर उस आरोपण को र्ति एवं सीवेज अधिनियम जस पर कर ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम गाया गया है जो कर उस आरोपण को और जो कर का भुग ा कर े क े र्ति एवं सीवेज अधिनियम ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ए बाध्य है जो कर उस आरोपण को, ीसरा वह /र है जो कर उस आरोपण को र्ति एवं सीवेज अधिनियम जस पर कर ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम गाया जा ा है जो कर उस आरोपण को, और चौथा वह म ाप या म ूल्य है जो कर उस आरोपण को र्ति एवं सीवेज अधिनियम जस पर कर /ेय ा की गण की कीमत ा क े र्ति एवं सीवेज अधिनियम ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ए /र ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ागू की जाएगी। यर्ति एवं सीवेज अधिनियम / वे घटक स्पष्ट रूप से और र्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम =च रूप से सुर्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम =च कर े योग्य हीं सीवेज अधिनियम हैं, ो यह कह ा म ुर्ति एवं सीवेज अधिनियम =कल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम है जो कर उस आरोपण को र्ति एवं सीवेज अधिनियम क वह आरोपण की कीमत का ू क े अ ुसार अर्ति एवं सीवेज अधिनियम स् त्व म ें वसूल किए है जो कर उस आरोपण को। उस आरोपण की कीमत क े उ घटकों सीवेज अधिनियम म ें वसूल किए से र्ति एवं सीवेज अधिनियम कसी को पर्ति एवं सीवेज अधिनियम रभार्ति एवं सीवेज अधिनियम 7 कर े वाल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ी र्ति एवं सीवेज अधिनियम व ायी योज ा म ें वसूल किए कोई अर्ति एवं सीवेज अधिनियम र्ति एवं सीवेज अधिनियम =च ा या अस्पष्ट ा इसकी वै जो कर उस आरोपण को ा क े र्ति एवं सीवेज अधिनियम ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ए घा क होगी। ' 6 1985 एस.सी.सी. एस.यू.पी.पी. 2006 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (प्रभाव वर्धित व वर्धितर्धि त)
21. इ न्यायालय की ंविव ान पीठ ने आयकर आयुक्त (क ें द्रीय) में-I, नई विदल्ली बनाम वाविटका टाउनशिशप प्राइवेट लिलविमटेड[7] यह कह े हुए कहा विनम्नानु ार ारिर विकया विक कर की दर कर प्रशा न का एक महत्वपूण; घटक हैः
39. 2. वह दर सिज पर कर या उ मामले क े लिलए अति भार लगाया जाना है, कर प्रशा न का एक अविनवाय; घटक है। गोबिंवद रन गंगा रन बनाम ीए टी [1985 •लीमेंट SCC 205:1985 SCC (टैक् ) 447: (1985) 155 ITR 144] में, इ न्यायालय ने कर क े वै(ारिरक अर्थी; की व्याख्या कर े हुए, (ार घटकों को ति(वित्र विकया, जै ा विक उक्त विनण;य क े विनम्नलिललिI प्रस् र े स्पl हैः (SCC पृष्ठ 209-10, पैरा 6) “6. कर की अव ारणा में प्रवेश करने वाले घटक व;विवविद हैं। पहला अपनी प्रक ृ ति े ज्ञा आरोपण का स्वरूप है जो कर आरोपण को आकर्षिष करने वाली कर योग्य घटना को विन ा;रिर कर ा है, दू रा उ व्यविक्त का स्पl ंक े है सिज पर कर लगाया गया है और जो कर का भुग ान करने क े लिलए बाध्य है, ी रा वह दर है सिज पर कर लगाया जा ा है, और (ौर्थीा वह माप या मूल्य है सिज पर कर देय ा की गणना क े लिलए दर को लागू विकया जाएगा।यविद वे घटक स्पl रूप े और विनति§ रूप े अव ारिर नहीं विकये जा क े हैं यह कहना मुस्थिश्कल है विक आरोपण विवति क े बिंबदु पर अस्थिस् त्व में है।आरोपण क े उन घटकों में े विक ी को परिरभाविष करने वाली विव ायी योजना में कोई अविनति§ ा या अस्पl ा इ की वै ा क े लिलए घा क होगी।” उपरोक्त बा े यह स्पl है विक सिज दर पर कर लगाया जाना है वह कर का एक अविनवाय; घटक है और जहां दर विन ा;रिर नहीं है या इ े टीक रूप े लागू नहीं विकया जा क ा है, विक ी व्यविक्त पर कर लगाना मुस्थिश्कल होगा।कर की इ अव ारणा को ी.आई.टी. बनाम बी ी 7 (2015) 1 एस.सी.सी. 1 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" श्रीविनवा ेट्टी [(1981) 2 ए. ी. ी. 460:1981 ए. ी. ी (कर) 119: (1981) 128 आई.टी.आर. 294] में विनम्नलिललिI रीक े े पुनः प्रस् ु विकया गया र्थीाः (ए ी ी पी। 465, पैरा 10) “10. प्रत्येक मामले में प्राव ानों की गणना प्रभार की प्रक ृ ति े ंबं रI ा है।इ प्रकार प्रभार अनुभाग और गणना े ंबंति प्राव ान ार्थी- ार्थी एक एकीक ृ ंविह ा का गठन कर े हैं। जब ऐ ा मामला हो ा है सिज पर गणना क े प्राव ान विबल्कु ल भी लागू नहीं हो क े हैं, ो यह स्पl है विक ऐ ा मामले को कर आरोपण की ारा क े अऩ् ग; लाने का इरादा नहीं र्थीा।"
22. ‰ े डरेशन ऑ‰ होटल एंड रेस्टोरेंट ए ोसि एशन ऑ‰ इंतिडया बनाम भार ंघ[8] क े मामले में, एस् पेंतिड(र टैक् ऐक्ट, 1987 की ंवै ाविनक विवति मान्य ा को (ुनौ ी दी गई सिज ने होटलों क े एक वग; में 'प्रभाय; व्यय' करने वाले व्यविक्तयों पर 'व्यय कर' लगाया र्थीा। उ मामले में, याति(काक ा;ओं ने क; विदया विक अति विनयम ने विवलासि ा पर कर लगाया, जो ू(ी II की प्रविवविl 62 क े भी र आ ा है और ं द की शविक्त े परे है। इ विववाद को Iारिरज कर े हुए न्यायमूर्ति एमएन वेंकट(लिलया ( त्कालीन मुख्य न्याया ीश) की ओर े बोल े हुए ंविव ान पीठ ने कहाः
44. विवद्वान अटॉन[2] जनरल ने क; विदया है विक कर अविनवाय; रूप े व्यय पर आरोविप कर है न विक विवलासि ा या राज्य शविक्त क े भी र आने वाले माल की विबgी पर आरोविप कर है। जै ा विक विवद्वान अटॉन[2] जनरल ने क; विदया, विवशिशl पहलू, अर्थीा; }, ंघ शविक्त क े ार्थी आने वाले लेन-देन क े "व्यय" पहलू पर अन् र विकया जाना (ाविहए और उ पर कर लगाने की विव ायी क्षम ा कायम रहनी (ाविहए। क; (क) हमारी राय में, अ ंग है और दनु ार, विव‰ल हो जा ा है। " उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (प्रभाव वर्ति )
23. पति§म बंगाल राज्य बनाम क े ोराम इंडस्ट्रीज लिलविमटेड[9] क े मामले में इ न्यायालय की ंविव ान पीठ ने कहा विक कर का विन ा;रण कर े मय कर की प्रक ृ ति े भ्रविम नहीं होना (ाविहए। ऐ ा कर े हुए त्कालीन न्यायमूर्ति आर. ी. लहोटी ने रल्ला राम बनाम प्राविवन् ऑ‰ ईस्ट पंजाब10 ैविनक मोट; बनाम राजस्र्थीान राज्य11 डी.जी. घोष एण्ड़ कम्पनी बनाम क े रल राज्य12 एवं हंगीर रामपुर कोल कम्पनी लिलविमटेड बनाम उड़ी ा राज्य13 का उल्लेI कर विनम्नानु ार अवलोकन विकयाः “33. [...] यह लंबे मय े माना जा ा रहा है विक कर का विन ा;रण करने क े रीति को कर की प्रक ृ ति े भ्रविम नहीं होना (ाविहए। कर में दो त्व हो े हैंः-पहला, वह व्यविक्त, वस् ु या गति विवति सिज पर कर लगाया जा ा है, और दू रा, कर की राशिश।यह राशिश को कई रीकों े मापा जा क ा है लेविकन कर की राशिश सिज क े द्वारा मापी जा ी है उ क े विवषय-वस् ु और उ मानक क े बी( अं र को नजरअंदाज नहीं विकया जा क ा है। इन्हें gमशः कर की विवषय-वस् ु और कर क े माप क े रूप में वर्थिण विकया गया है।यह ( है विक कर उद्ग्रहण क े लिलए अपनाए गए मानक े कर की प्रक ृ ति का ंक े विमल क ा है, लेविकन यह आवश्यक रूप े इ े विन ा;रिर नहीं कर ा है। कर क े विन ा;रण में जो प्रविकया अपनायी जा ी है उ े उ कर विवशेष क े आवश्यक गुण का प ा नहीं (ल ा है, र्थीाविप यह उ क े ामान्य गुणों पर प्रकाश डाल क ी है। 9 (2004) 10 एस.सी.सी. 10 ए.आई.आर. 1949 एफ.सी. 81 11 ए.आई.आर. 1961 एस.सी. 1480 12 ए.आई.आर. 1961 एस.सी. 459 13 ए.आई.आर. 1961 एस.सी. 459 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (प्रभाव वर्ति )
24. कर न्यायशास्त्र का मूल सि द्धां यह है विक करारोपण को उ क े मापन क े ार्थी नहीं जोड़ा जा क ा है। ारा 52 क े ंदभ; में, जल ंस्र्थीान द्वारा उद्ग्रही कर "अपने क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर र पर" का आशय उ क्षेत्र े है सिज क्षेत्र क े ह जल ंस्र्थीान अपने अति कार क्षेत्र और शविक्तयों का प्रयोग कर ा है। कर आरोपण परिर र में है। अशिभव्यविक्त "परिर र" को ारा 2 (18) में "विक ी भूविम या भवन" क े रूप में परिरभाविष विकया गया है। इ लिलए, अशिभव्यविक्त 'परिर र' की परिरभाषा क े ार्थी एक ार्थी पढ़े, कर जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी भूविम और भवनों पर पूरी रह े आरोविप है। ारा 52 (1) क े Iंड (ए) क े ह कर का आरोपण कर े मय विव ातियका ने उपबं विकया है विक कर जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी उ परिर र में आरोविप होगा, जो क्षेत्र जल ंस्र्थीान की जल आपूर्ति ेवाओं द्वारा आच्छाविद है। उप ारा (ए) में यह श; कर क े बजाय शुल्क को आरोपण नहीं कर ी है। विव ातियका द्वारा जल कर क े रूप में विवविह कर आरोविप करने का उद्देश्य जल ंस्र्थीान को अपने गति विवति यों को विवत्तपोविष करने में क्षम बनाना है, ाविक जल ंस्र्थीान जल आपूर्ति को कारगर रीक े ं(ालिल और अपनी योजनाओं को विनयोसिज, प्रोत् ाविह और विनष्पाविद कर क े । ारा 24 (1) में उपरोक्त वर्थिण काय; क े अलावा, जल ंस्र्थीान को अपने अति कारिर ा क े ह आने वाले लोगों को विनबा; जल उपलब् कराने क े लिलए अपने कायJ का प्रबं न करना होगा।यह इ ंदभ; में है विक Iंड 25, जल ंस्र्थीान की शविक्तयों को परिरभाविष कर ी है, उप-Iंड (1) में विन ा;रिर कर ी है विक उ.प्र. जल आपूर्ति एवं ीवरेज अति विनयम क े ह जल ंस्र्थीान क े पा अपने कायJ को ं(ालिल करने क े लिलए क ु छ भी करने की शविक्त होगी, जो आवश्यक और जरूरी हो। इन शविक्तयों में अन्य बा ों क े ार्थी - ार्थी उप-Iंड (2) क े Iंड (vi) ) क े ह इन ेवाओं क े लिलए करों एवं शुल्कों का ंग्रह शाविमल उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" है जै ा विक विवविह विकया जाए। इन प्राव ानों े ंक े विमल ा है विक कर आरोपण का उद्देश्य जल ंस्र्थीान को अपनी गति विवति यों को ं(ालिल करने क े लिलए विवत्त क े पया;प्त ा नों को ुरतिक्ष करना है। विकन् ु ारा 52 (1) (ए) क े ंदभ; में राजस्व में वृतिद्ध कर की प्रक ृ ति में है। जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर र में कर आरोविप विकया जा क ा है। कर का माप परिर र का आकलिल वार्षिषक मूल्य हो ा है, वार्षिषक मूल्य का विन ा;रण ारा 53 में दशा;ए गए रीक े े विकया जा ा है। शहर क े अलावा विक ी स्र्थीानीय क्षेत्र क े मामले में कर की दर 6 प्रति श े कम नहीं और 14 प्रति श े अति क नहीं होनी (ाविहए।शहर में जल कर की दर 7.[5] प्रति श े कम और 12.[5] प्रति श े अति क नहीं होनी (ाविहए। ारा 52 (1) (बी) और उप- ारा (2) और (3) में ीवर पर कर लगाने क े ंबं में मान प्राव ान विकया गया है, जो माप और कर की दर का उपबं कर ा है।
25. ारा 55 में में उपवर्थिण ारा 52 कर क े आरोपण पर विनब] न अं र्षिवl हैं। उप ारा (a), ) विनर्षिदl कर ा है विक उ भूविम पर कर नहीं लगाया जाएगा जो विवशेष रूप े क ृ विष उद्देश्यों क े लिलए उपयोग विकया जा ा है जब क विक उ भूविम क े लिलए जल ंस्र्थीान द्वारा पानी की आपूर्ति नहीं की जा ी है। ारा 55 का उप ारा (b) ) जल कर क े आरोपण पर आगे और दो प्रति बं लगा ी हैं बश z यह परिर र पर नहीं आरोविप विकया जाएगाः (I) विनकट म स्टैंड पोस्ट या अन्य जल कायJ क े दायरे में स्थिस्र्थी नहीं है, सिज पर जल ंस्र्थीान द्वारा जन ा को पानी उपलब् कराया जा ा है; या
(i) i) ) सिज का वार्षिषक मूल्य 360 रुपये े अति क नहीं है और सिज े जल ंस्र्थीान द्वारा कोई पानी की आपूर्ति नहीं की जा ी है। ारा 55 द्वारा लगाए गए प्रति बं कर को शुल्क नहीं दे े हैं, और न ही वे पानी क े वास् विवक उपयोग क े लिलए लगाए जा रहे कर का ंक े दे े हैं। ारा 52 (1) (ए) क े ह कर का उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आरोपण कर े मय विव ातियका ने ारा 55 में विनर्षिदl मापदंडों क े ह कर आरोपण को प्रति बंति करना उति( माना है। यह कर आरोपण की मौलिलक प्रक ृ ति को नहीं बदल ा है, सिज को जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर र (भूविम और भवन क े लिलए परिरभाविष ) क े रूप में गविठ विकया गया है।
26. ारा 56, जो कर की प्र ंगति यों क े ंबं में प्राव ान कर ा है, सिज में कहा गया है विक ारा 52 में उपबंति कर को व ूल विकया जा क ा हैः (I) परिर र का जल आपूर्ति े या यर्थीास्थिस्र्थीति जल ंस्र्थीान क े ीवर क े ार्थी जुड़े होने दशा में उ परिर र क े अति भोविगयों े कर की व ूली विकया जा क ा है; और
(i) i) ) परिर र का जल आपूर्ति या जल ंस्र्थीान क े ीवर े नहीं जुड़े होने की दशा में, उ परिर र क े मालिलक े कर की व ूली विकया जा क ा है। ारा 56 इ थ्य े उत्पन्न होने वाली अविनवाय; व ूली की प्रक ृ ति में कर का एक स्पl ंक े क है विक परिर र में जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी भूविम और भवन शाविमल हैं, जब क विक प्रति बं जो ारा 55 में विनविह हैं आकर्षिष नहीं हो े हैं। ारा 52 और ारा 56 यह भी ब ा ा है विक विव ातियका का उद्देश्य उ परिर र क े अति भोगी े जल कर और ीवरेज कर एकत्र करना है, जहां वह परिर र जल आपूर्ति े अर्थीवा जल ंस्र्थीान क े ीवर े जै ी भी स्थिस्र्थीति हो, जुड़ा है और, यविद वह परिर र इ प्रकार नहीं जुड़ा है, ो परिर र क े मालिलक े कर एकत्र विकया जाएगा।इ लिलए, जल कर और ीवरेज कर का भुग ान पर इ बा े कोई ‰क; नहीं पड़ ा है विक वह परिर र ंस्र्थीान की जल आपूर्ति अर्थीवा ीवर े जुड़ा है अर्थीवा नहीं। दोनों आकस्थिस्मक ाओं क े रूप में जल कर या ीवरेज कर क े भुग ान े कोई छ ू ट नहीं है- परिर र जल आपूर्ति े जुड़ा हुआ है (अर्थीवा, जै ा भी मामला हो, जल ंस्र्थीान क े ीवर क े ार्थी जुड़ा है) या जल उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ंस्र्थीान ऐ ा कोई कनेक्शन नहीं लिलया गया है- ारा 56 क े प्राव ानों े आच्छाविद है। जब क जल ंस्र्थीान द्वारा आच्छाविद क्षेत्र में जल आपूर्ति या ीवरेज की ेवाएं प्रदान की जा ी है, ब क अति भोगी या परिर र का मालिलक उन करों का भुग ान करने क े लिलए दायी हो ा है। अति विनयम की ारा 57 क े ह जल कर और ीवरेज कर को व ूलने, विन ा;रिर करने और एकत्र करने क े उद्देश्य े मेविक विकया जा क ा है।
27. अध्याय 6 में कर, प्रभार और ‰ी क े बी( स्पl अन् र विकया गया हैहम पहले ही करों क े आरोपण और उद्ग्रहण को शासि करने वाले अध्याय VI क े प्राव ानों पर ध्यान आकर्षिष कर (ुक े है। ारा 59 जल ंस्र्थीान द्वारा आपूर्ति की जाने वाली पानी की लाग क े विन ा;रण क े ार्थी- ार्थी प्रत्येक कनेक्शन क े ंबं में न्यून म लाग का प्राव ान कर ा है। जल ंस्र्थीान, मात्रा क े अनु ार पानी की कीम (ाज; करने क े बदले, अपेतिक्ष Iप क े आ ार पर एक विनति§ राशिश व ूल क ा है। ीवरेज शुल्क की व ूली क े लिलए एक मान प्राव ान ारा 60 में विनविह है।‰ी की व ूली क े लिलए ारा 63 में एक अलग प्राव ान विनविह है। ारा 63 क े ह शुल्क पानी की आपूर्ति या ीवर क े कनेक्शन, विवयोग या पुनः कनेक्शन क े लिलए, परीक्षण या पय;वेक्षण क े लिलए या विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए या उप-कानूनों में यर्थीा उपबंति रीति े विनष्पाविद या पय;वेतिक्ष काय; क े लिलए व ूल विकया जा क ा है। ारा 63 क े प्राव ान ंक े कर े हैं विक शुल्क की व ूली, मोटे ौर पर एक ेवा क े ंबं में कह रही है जो उपबंति है।
28. विव ातियका ने कर को जो नामकरण विकया है वह आरोपण की प्रक ृ ति अर्थीवा ही और आवश्यक (रिरत्र को विन ा;रिर नहीं कर ा है। विव ातियका एक कर क े लिलए एक आ ार (ुन क ी है। हालांविक आ ार विन ा;रिर नहीं करेगा या उ मामले क े लिलए आरोपण की प्रक ृ ति को स्पl नहीं करेगा। कर आरोपण की प्रक ृ ति उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" को कर की प्रक ृ ति े घटाया जाना (ाविहए, जो प्राव ान कर घटना को विनर्षिदl कर ा है और ारा 52 क े मामले में है, सिज इकाई पर कर आरोविप जानी है। विव ातियका कर आरोपण की प्रक ृ ति क े आ ार पर कर क े लिलए एक लेबल (ुन क ी है। दू री ओर, विव ातियका प्राति करण क े काय; क े ार्थी ंबं रIने वाले एक लेबल का (यन कर क ी है जो व;मान मामले में कर लगा ा है। इ टैक् को जल कर या ीवरेज टैक् क े रूप में आरोविप विकया गया है क्योंविक यह यूपी जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम क े ह गविठ जल ंस्र्थीान द्वारा लगाया गया है। यह कर आरोपण की प्रक ृ ति में परिरव;न नहीं कर ा है, जो वास् व में ा वीं अनु ू(ी की ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र भूविम और भवनों पर कर है।
29. ू(ी II की प्रविवविl 49 में "भूविम और भवनों पर कर" अशिभव्यविक्त का दायरा ंघीय न्यायालय और इ न्यायालय क े मक्ष विव(ार क े लिलए आया है। रल्ला राम ( ुप्रा) में ंघीय न्यायालय ने भार रकार अति विनयम 1935 की ारा 100 क े ह ू(ी II (प्रां ीय विव ायी ू(ी) क े मद 42 की व्याख्या की। ू(ी II क े मद 42 में "भूविम और भवनों, (ूल्हे और लिIड़विकयों पर कर" े ंबंति हैइ मामले में, एक प्रां ीय विव ातियका द्वारा भवनों और भूविम क े वार्षिषक मूल्य क े आ ार पर एक कर लगाया गया र्थीा और न्यायालय क े मक्ष प्रश्न यह र्थीा विक क्या यह वास् व में एक आयकर र्थीा। ंघीय न्यायालय ने इ बा पर जोर विदया विक वार्षिषक मूल्य आवश्यक रूप े वास् विवक आय नहीं है, बस्थिल्क क े वल एक मानक है सिज क े द्वारा आय को मापा जा क ा है। न्यायालय ने अवलोकन विकयाः अब एक बार जब यह मह ू हो जा ा है विक वार्षिषक मूल्य आवश्यक रूप े वास् विवक आय नहीं है, लेविकन क े वल एक मानक है सिज क े द्वारा आय उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" को मापा जा क ा है, ो ह पर विदIाई देने वाली अति कांश कविठनाई को दूर हो जा ी है।हमारी राय में, महत्वपूण; वाल यह है विक क्या क े वल इ लिलए विक आयकर अति विनयम ने आय क े विन ा;रण क े लिलए मानक क े रूप में वार्षिषक मूल्य को अपनाया है, इ का आवश्यक रूप े पालन विकया जाना (ाविहए विक, यविद विक ी अन्य कर क े लिलए उपाय क े रूप में उ ी मानक का उपयोग विकया जा ा है, ो क्या कर आय पर कर बन जा ा है? यविद इ प्रश्न का उत्तर कारात्मक रूप में विदया जाना है, ो क ु छ ऐ े करों को, सिजन्हें ंभव ः आय-कर क े रूप में वर्थिण नहीं विकया जा क ा है, ऐ ा अशिभविन ा;रिर विकया जाना (ाविहए। इ ंबं में एक मामला आयरलैंड रकार अति विनयम, 1920 क े अ ीन एक ंदभ; में पाया जा ा हैः विवत्त अति विनयम (उत्तरी आयरलैंड), 1934 (1986) ए. ी. 852 की ारा 3। [...] यह मामला इ व्यापक विववाद को ध्वस् कर दे ा है विक जहां भी वार्षिषक मूल्य एक कर का आ ार है, वह कर आय पर कर बन जा ा है।यह दशा; ा है विक अन्य कारकों को ध्यान में रIा जाना (ाविहए और यह कर की अविनवाय; प्रक ृ ति है न विक मशीनरी की प्रक ृ ति सिज े देIा जाना (ाविहए। " (प्रभाव वर्ति )
30. वी० पट्टाशिभरामन बनाम शहरी भूविम हायक कर आयुक्त, उत्तर मद्रा (उत्तर-पति§म) अयनावरम14 क े मामले में मद्रा उच्च न्यायालय की पूण; न्यायपीठ क े प§ात्व 2 विवविन§य, मद्रा शहरी भूविम कर अति विनयम, 1966 की विवति मान्य ा, सिज ने भूविम क े बाजार मूल्य क े आ ार पर कर अति रोविप विकया र्थीा, इ आ ार पर (ुनौ ी दी गई विक यह ार ः एक आयकर र्थीा। 14 ए.आई.आर. 1971 म /्रास 61 एफ.बी. उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
31. अजोय क ु मार मुIज[2] बनाम लोकल बोड; ऑ‰ बारपेटा 15 क े मामले में, इ न्यायालय की ंविव ान पीठ ने अ म लोकल ेल्‰ गवन;मेंट एक्ट, 1953 क े ह ृसिज बाजार लगाने क े लिलए उपयोग की जाने वाली भूविम पर स्र्थीानीय बोडJ द्वारा आरोविप वार्षिषक कर की वै ा को बरकरार रIा। न्यायमूर्ति क े एन वां(ू ने ंविव ान पीठ की ओर े बोल े हुए अवलोकन विकयाः “4. यह ुस्र्थीाविप है विक ीन विव ायी ूति(यों में प्रविवविlयों की व्याख्या उनक े व्यापक आयाम में की जानी (ाविहए और इ लिलए यविद कर को यर्थीोति( रूप े भूविम पर कर माना जा क ा है ो यह प्रविवविl 49 क े भी र आएगा।इ क े अलावा, यह मान रूप े ुस्र्थीाविप है विक भूविम पर कर भूविम क े वार्षिषक मूल्य पर आ ारिर हो क ा है और अभी भी भूविम पर कर होगा और यह इ आ ार पर राज्य विव ानमंडल की क्षम ा े परे नहीं होगा विक यह आय पर कर है: इ लिलए यह इ प्रकार है विक ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र उ पर कर लगाने क े लिलए भूविम का उपयोग विकया जा क ा है, भूविम क े वार्षिषक मूल्य क े लिलए जो विनति§ रूप े इ प्रविवविl क े उद्देश्य क े लिलए कर लगाने में ध्यान विदया जा क ा है, आवश्यक रूप े भूविम क े उपयोग पर विनभ;र करेगा। यह इ स्र्थीाविप प्रस् ाव क े आलोक में है विक हमें अति विनयम की ारा 62 की योजना की जां( करनी है, जो कर आरोविप कर ी है, को (ुनौ ी विदया गया है। [...]
6. [...] यह पुनः प्रदर्थिश करेगा विक ारा 52 (2) द्वारा उपबंति कर भूविम क े उपयोग क े लिलए एक कर है और यह बाजार पर कर नहीं है, 15 ए.आई.आर. 1965 एस.सी. 1561 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क्योंविक बाजार े टोल, विकराए और अन्य देय राशिश क े रूप में आय ारा 52 क े ह कर क े लिलए उत्तरदायी नहीं है और कर े अलग है।इ लिलए ारा 62 की योजना े प ा (ल ा है विक जब भी विक ी भूविम का उपयोग विक ी बाजार लगाने उद्देश्य े विकया जा ा है, ो उ भूविम क े मालिलक, अति भोगी या विक ान को उ क े उपयोग क े लिलए एक विनति§ कर का भुग ान करना पड़ ा है। लेविकन बाजार क े भी र होने वाले विक ी भी लेनदेन पर कोई कर नहीं लगाया गया है।इ क े अलावा कर की राशिश उ भूविम क े क्षेत्र पर विनभ;र कर ी है सिज पर बाजार लगाया जा ा है और बाजार का महत्व राज्य रकार द्वारा विन ा;रिर अति क म क े अ ीन हो ा है।इ लिलए हमें अति विनयम की ारा 52 की योजना पर विव(ार करने में कोई ंको( नहीं है विक इ में उपबं विकया गया कर भूविम पर कर है, हालांविक इ की घटना बाजार क े रूप में भूविम क े उपयोग पर विनभ;र कर ी है।इ क े अति रिरक्त, जै ा विक हमने पहले ही ारा 62 (2) में उपदर्थिश विकया है, सिज में "उ पर वार्षिषक कर अति रोविप करना" शब्दों का प्रयोग स्पl रूप े दर्थिश कर ा है विक "उ में" शब्द विक ी ऐ ी भूविम को विनर्षिदl कर ा है सिज क े लिलए बाजार क े रूप में उपयोग क े लिलए अनुज्ञविप्त जारी की जा ी है न विक "बाजार" शब्द को। इ प्रकार भूविम पर होने वाले व;मान मामले में कर स्पl रूप े राज्य विव ातियका की क्षम ा क े भी र होगा।अपीलक ा; का यह क; विक राज्य विव ातियका इ कर को लगाने क े लिलए क्षम नहीं र्थीी क्योंविक बाजारों पर कर लगाने क े लिलए ा वीं अनु ू(ी की ू(ी II में कोई प्राव ान नहीं है इ लिलए विव‰ल होना (ाविहए।” (प्रभाव वर्ति ) उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" इ प्रकार, न्यायालय ने इ सि द्धां की पुविl कर े हुए कहा है विक ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह कर आरोविप करने की दृविl े इ भूविम को विव(ार में लिलया गया है।
32. असि स्टेंट कविमशनर ऑ‰ अरबन लैण्ड़ टैक् बनाम बबिंकघम और कारविनट क ं पनी लिल० इत्याविद16 क े मामले में ंविव ान पीठ ने यह अशिभविन ा;रिर विकया विक ू(ी-2 की प्रविवविl 49 क े अ ीन कर उद्ग्रहण करने क े प्रयोजन क े लिलए राज्य विव ानमंडल कर की घटना का अव ारण करने क े लिलए भूविम और भवनों का वार्षिषक या पूंजी मूल्य अपना क ा है। न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी (I) ने अवलोकन विकयाः “4. इन अपीलों में विव(ाणीय प्रश्न यह है विक क्या मद्रा विव ानमंडल ंविव ान की अनु ू(ी VII की ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह कानून बनाने क े लिलए क्षम र्थीा जो इ प्रकार हैःभूविम और भवनों पर कर। "याति(काक ा;ओं की ओर े यह क; विदया गया र्थीा विक आक्षेविप अति विनयम अनु ू(ी VII, ू(ी I, प्रविवविl 86 क े ह आ ा है, अर्थीा; "व्यविक्तयों और क ं पविनयों की क ृ विष भूविम क े अलावा परिर ंपलित्तयों क े पूंजीग मूल्य पर कर क ं पविनयों की पूंजी पर कर"। [...] हमारी राय में ू(ी I की प्रविवविl 86 और ू(ी II की प्रविवविl 49 क े बी( कोई ंघष; नहीं है। दो प्रविवविlयों क े ह करा ान का आ ार का‰ी अलग है।जै ा विक ू(ी I की प्रविवविl 86 क े ंबं में करा ान का आ ार ंपलित्त का पूंजीग मूल्य है।यह मूल्यांकन ति शिर्थी पर व्यविक्तयों और क ं पविनयों की परिर ंपलित्तयों क े पूंजीग मूल्य पर ी े कर नहीं है।[...] लेविकन ू(ी II की प्रविवविl 49, इकाइयों क े रूप में दोनों पर भूविम और भवनों पर कर आरोविप करने पर विव(ार कर ी है। यह उन भूविम या भवनों 16 1969 2 एस.सी.सी. 55 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" की इकाइयों में ब्याज या स्वाविमत्व क े विवभाजन े ंबंति नहीं है सिजन्हें कर क े अ ीन लाया गया है।भूविम और भवनों पर कर ी े भूविम और भवनों पर लगाया जा ा है, और इ का एक विनति§ ंबं है। परिर ंपलित्तयों क े पूंजीग मूल्य पर कर भूविम और भवनों े कोई विनति§ ंबं नहीं रI ा है जो विन ा;रिर ी की क ु ल ंपलित्त का एक घटक बन क ा है। प्रविवविl 86 क े ह शविक्त क े प्रयोग में कानून द्वारा, ू(ी I कर को परिर ंपलित्तयों क े मूल्य पर लगाया जाना माना जा ा है।प्रविवविl 49, ू(ी 2 क े अ ीन कर लगाने क े प्रयोजन क े लिलए राज्य विव ानमंडल भूविम और भवनों क े वार्षिषक या पूंजी मूल्य क े विन ा;रण क े लिलए कर को अपना क ा है। लेविकन कर देय ा विन ा;रिर करने क े लिलए भूविम और भवनों क े वार्षिषक या पूंजीग मूल्य को अपनाने े दो प्रविवविlयों क े ह कानून क े क्षेत्र अति व्यापी नहीं होंगे। दो कर अपनी मूल अव ारणा में पूरी रह े अलग हैं और अलग-अलग विवषय पर आ े हैं। (प्रभाव वर्ति )
33. एक अन्य मामला सिज में इ न्यायालय की ंविव ान पीठ क े मक्ष ू(ी-2 की प्रविवविl 49 की व्याख्या पर विव(ार विकया गया, वह भार ंघ बनाम ए(० ए ० विढल्लन17 है। उ मामले में, अपील पंजाब और हरिरयाणा उच्च न्यायालय क े एक विनण;य े उत्पन्न हुई सिज में यह अशिभविन ा;रिर विकया गया र्थीा विक विवत्त अति विनयम, 1969 की ारा 24 जहां क न कर अति विनयम, 1957 क े ु ंग उपबं ों में ंशो न का ंबं है, ं द की विव ायी क्षम ा े परे र्थीी। उच्च न्यायालय ने माना विक ंशोति ंपलित्त कर अति विनयम ंविव ान क े अति कार क्षेत्र े बाहर र्थीा क्योंविक इ में शुद्ध न की गणना क े प्रयोजनों क े लिलए क ृ विष भूविम का पूंजीग मूल्य शाविमल र्थीा। उच्च न्यायालय ने (4:1) क े बहुम े यह भी माना र्थीा विक कानून ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ंबं में एक नहीं र्थीा। मुख्य न्याया ीश 17 ए.आई.आर. 1972 एस.सी. 1061 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ए एम ीकरी ने इ न्यायालय की ंविव ान पीठ क े ‰ ै ले क े दौरान ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह एक कर क े आवश्यक त्वों को देI े हुए कहा विक
74. प्रविवविl 49, ू(ी II क े ह कर की आवश्यक ाओं को इ प्रकार ंक्षेप में प्रस् ु विकया जा क ा हैः (1) यह इकाइयों पर लगाया जाने वाला कर होना (ाविहए, अर्थीा; } भूविम और भवन अलग-अलग इकाइयों क े रूप में। (2) कर मग्र ा पर कर नहीं हो क ा है, अर्थीा; यह भी भूविम और भवनों क े मूल्य पर एक मग्र कर नहीं है। (3) कर का ंबं भवन या भूविम में ब्याज क े विवभाजन े नहीं है।दू रे शब्दों में, यह इ े ंबंति नहीं है विक क्या एक व्यविक्त इ का मालिलक है या कब्जा कर ा है या दो या दो े अति क व्यविक्त इ क े मालिलक हैं या कब्जा कर े हैं।" दू रे शब्दों में, यह अशिभविन ा;रिर विकया गया र्थीा विक ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अ ीन कर "व्यविक्तग कर" नहीं है बिंक ु ंपलित्त पर कर है। परिरणामस्वरूप, म्पलित्त कर अति विनयम क े ह आरोविप म्पलित्त कर को ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह कर े अलग माना गया र्थीा।
34. इ न्यायालय क े ीन विवद्वान न्याया ीशों की एक Iंडपीठ ने गुतिड्रक ग्रुप लिलविमटेड बनाम डब्ल्यू०बी० राज्य18 में करा ान कानून (विद्व ीय ंशो न) अति विनयम, 1989 द्वारा ग्रामीण रोजगार पर शिशक्षा उपकर को लगाने की वै ा पर विव(ार विकया। राज्य में उत्पाविद प्रत्येक विकलोग्राम हरी (ाय की पलित्तयों क े लिलए 12 पै े की दर े (ाय की ंपलित्त पर ग्रामीण रोजगार उपकर लगाया गया र्थीा। मुद्दा यह र्थीा विक क्या कर आरोपण ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र 18 1995 सप्ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ीम ें वसूल किए ट्री(1) एस.सी.सी. 707 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" भूविम और भवनों पर आरोविप कर र्थीा। उपरोक्त विनण;यों पर विव(ार करने क े बाद, न्यायमूर्ति बीपी जीवन रेड्डी ने ीन न्याया ीशों की Iंडपीठ क े लिलए बोल े हुए विनम्नलिललिI विनष्कष; पहुं(े: "20. इ प्रकार पूव¡क्त विनण;यों े यह स्पl है विक क े वल इ लिलए विक भूविम या भवन पर कर उ की आय या उपज क े ंदभ; में लगाया जा ा है, यह भूविम या भवन पर कर नहीं रह जा ा है।भूविम/भवन की आय या उपज को क े वल कर क े माप क े रूप में लिलया जा ा है; यह लेवी की प्रक ृ ति या (रिरत्र को नहीं बदल ा है।यह अभी भी भूविम या भवन पर कर बना हुआ है।भूविम और भवनों पर कर लगाने का कोई विन ा;रिर पैटन; नहीं है - वास् व में ऐ ा कोई मानकीकरण नहीं हो क ा है।कोई भी यह नहीं कह क ा है विक विक ी विवशेष प्रविवविl क े ह कर क े वल एक विवशेष रीक े े ही लगाया जाना (ाविहए, सिज े अब क अपनाया जा क ा है। विव ातियका कर आरोपण की ऐ ी विवति को अपनाने क े लिलए स्व ंत्र है, जै ा विक वह (ुन ी है और जब क लेवी का स्वरूप वही रह ा है, यानी विवशेष प्रविवविl क े (ारों कोनों क े भी र, अपनाई गई विवति पर कोई आपलित्त नहीं की जा क ी है।हमारे ामने आने वाले मामलों में, उपकर की गणना उपज क े आ ार पर नहीं की जा ी है-एक (ाय की ंपलित्त में उत्पाविद प्रत्येक विकलोग्राम (ाय की पलित्तयों क े लिलए, एक विवशेष उपकर लगाया जा ा है। लेविकन यह भूविम पर कर लगाने का एक स्वीक ृ रीका है। यह कर भूविम पर लगाया गया है - "(ाय की ंपलित्त" पर लगाया गया है, सिज े एक अलग श्रेणी क े रूप में एक अलग इकाई क े रूप में, (ाय की उपज की मात्रा क े आ ार पर विन ा;रिर उपकर क े लेवी और मूल्यांकन क े उद्देश्य े वग2क ृ विकया गया है। इ कारण े इ े उत्पादन पर कर क े रूप में वर्थिण नहीं विकया जा क ा है। जै ा विक मूविपल एआईआर 1961 ए ी 552 में ब ाया गया है-'' भूविम पर कर का आकलन उ भूविम की वास् विवक या ंभाविव उत्पादक ा पर विकया जा ा है सिज पर कर लगाया जाना है। नायर [(1961) 3 ए ीआर 77:भूविम की गुणवत्ता, उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्रक ृ ति या आय/उपज े अ ंबंति एक मान करारोपण नहीं हो क ा है। इ रह का कोई भी करारोपण मनमाना और भेदभावपूण; माना गया है। "
35. श्री प्रदीप कां ने न्यायालय क े मक्ष विनवेदन कर े हुए रजा बुलंद शुगर क ं पनी लिलविमटेड बनाम नगर विनगम बोड;19, इलाहाबाद उच्च न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विनण;य विनजाम शुगर ‰ ै क्ट्री लिलविमटेड बनाम शहर नगरपालिलका, बो न20 का भी अवलम्ब लिलया है। इन दोनों विनण;यों में, उच्च न्यायालयों क े मक्ष प्रश्न यह र्थीा विक क्या नगरपालिलका द्वारा भूविम और भवनों क े वार्षिषक मूल्य आरोविप जल कर राज्य विव ानमंडल की क्षम ा क े अंदर है। उच्च न्यायालयों ने ार और त्व क े सि द्धां का हवाला दे े हुए कहा विक यद्यविप कर को 'जल कर' क े रूप में नाविम विकया गया र्थीा, यह जल क े उत्पादन पर या आपूर्ति और उपभोग की गई जल की मात्रा पर नहीं लगाया गया र्थीा, बस्थिल्क यह ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह आने वाली भूविम और इमार ों पर लगाया गया कर र्थीा ।
36. उपरोक्त विनण;यों दृविlग इ में कोई ंदेह नहीं है विक ारा 52 क े ह आरोविप कर करारोपण क े उद्देश्य े जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र में स्थिस्र्थी भूविम और भवनों पर कर है। कर उन परिर रों पर लगाया जा ा है जो जल ंस्र्थीान क े प्रादेशिशक क्षेत्र में आ े हैं। पद 'परिर र' को भूविम और भवन क े लिलए परिरभाविष विकया गया है। यह कर भूविम और भवनों पर लगाया गया है। कर का नामकरण इ क े वास् विवक (रिरत्र और ार को इंविग नहीं कर ा है। न ही यह थ्य विक कानून जल ंस्र्थीान को जल पर कर लगाने में क्षम बना ा है। कर (ाज; करने की ारा स्पl शब्दों में ंक े कर ी है विक यह भूविम और भवनों पर कर है। 19 ए.आई.आर. 1962 ऑल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम 83 20 ए.आई.आर. 1965 ए.पी. 91 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विव ातियका ने ारा 55 क े Iंड (क) में अन्य बा ों क े ार्थी ार्थी - ार्थी यह प्राव ान विकया है विक विवशेष रूप े क ृ विष उद्देश्यों क े लिलए उपयोग की जाने वाली भूविम क े लिलए कर ब क नहीं लगाया जाएगा जब क विक जल ंस्र्थीान द्वारा ऐ े उद्देश्यों क े लिलए भूविम को पानी की आपूर्ति नहीं की जा ी है और Iंड (I) में यह कहा गया है विक (I) परिर र विनकट म स्टैंड-पोस्ट या अन्य जल कायJ े विन ा;रिर वित्रज्या क े भी र स्थिस्र्थी होना (ाविहए, सिज पर पानी जन ा को उपलब् कराया जा ा है और
(i) i) ) सिज का वार्षिषक मूल्य 360 रुपये े अति क नहीं है और सिज े जल ंस्र्थीान द्वारा कोई पानी की आपूर्ति नहीं की गई है। ये प्रति बं करारोपण की प्रक ृ ति े अलग नहीं हैं और न ही ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र भूविम और भवन पर कर क े अलावा मालिलक और कब्जेदार पर लगाया गया दातियत्व क ु छ और होगा। जल कर और ीवरेज कर वे कर हैं जो जल ंस्र्थीान क े ं(ालन, रIरIाव और ेवाओं की लाग को पूरा आदेश क े उद्देश्य े अपने विवत्त को बढ़ाने क े लिलए लगाए जा े हैं, ाविक इ की विनति§ परिर ंपलित्तयों पर आर्थिर्थीक रिरटन; प्राप्त विकया जा क े । ंग्रह अं ः जल आपूर्ति और जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र में ीवरेज प्रदान करने क े लिलए है, भले ही यह विवशेष परिर र क े लिलए प्रदान नहीं विकया गया हो।जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र में आने वाले भवन या भूविम क े अति भोगी या स्वामी पर कर लगाया जा ा है (ाहे भूविम या भवन े जलापूर्ति या ीवरेज का कनेक्शन प्राप्त विकया गया हो।अन्य शब्दों में, करों क े लगान का आ ार राज्य रकार द्वारा अति ूति( जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र परिर र क े स्र्थीान पर है।(ूंविक प्रत्यर्थी2 का परिर र अपीलार्थी2 क े प्राति कार क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" है, इ लिलए प्रत्यर्थी2 परिर र क े मालिलक और अति भोगी क े रूप में जल कर क े ार्थी- ार्थी ीवरेज कर का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी है।
37. ुश्री दीवान ने यह भी विनवेदन विकया है विक ारा 52 क े ह करारोपण ू(ी II की प्रविवविl 49 क े बजाय ू(ी II की प्रविवविl 17 क े अनुरूप है। ू(ी II की प्रविवविl 17 में "जल, अर्थीा; } जल आपूर्ति, सिं (ाई और नहरों, जल विनका ी और टबं, जल भंडारण और जल विबजली ू(ी I क े प्रविवविl 56 क े प्राव ानों क े अ ीन है।इ क; को आगे बढ़ा े हुए ुश्री दीवान ने कहा विक यह पानी की आपूर्ति क े लिलए एक शुल्क है, और जब पानी की आपूर्ति नहीं की जा ी है ो कोई शुल्क नहीं लगाया जा क ा है।
38. हम इ विनवेदन में कोई मेरिरट नहीं पा े हैं। का‰ी ाल पहले 1958 में एम. पी. वी. ुंदरराविमयर एंड क ं पनी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य21 क े मामले में इ न्यायालय ने अशिभविन ा;रिर विकया र्थीा विक ंविव ान में विव ान की विवषय-वस् ु और ा वीं अनु ू(ी में ंघ, राज्य और मव 2 ू(ी में उक्त विवषय-वस् ु क े ंबं में कर क े बी( विवभेद विकया गया है। न्यायमूर्ति टी०एल० वेंकटाराम अय्यर ने बहुम (4:1) े बोल े हुए कहा विकः
21 1958 एस.सी.आर. 1422 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" एंट्री 89 अति रेक होगी। प्रविवविl 41 में "विवदेशों क े ार्थी व्यापार और वाशिणज्य ीमा शुल्क ीमाओं पर आया और विनया; " का उल्लेI है। यविद इन अशिभव्यविक्तयों की व्याख्या उ व्यापार और वाशिणज्य क े ंबं में लगाए जाने वाले क;व्यों विह की जानी है, ो प्रविवविl 83 जो 'विनया; क;व्यों विह ीमा शुल्क' है, पूरी रह े विनरर्थी;क हो जाएगी। प्रविवविl 43 और 44 विनगमों क े विनगमन, विवविनयमन और मापन े ंबंति हैं। प्रविवविl 85 विनगम कर क े लिलए अलग े प्राव ान कर ी है। ू(ी II ब ा ी है विक 1 े 44 क की प्रविवविlयाँ उन विवषयों का उल्लेI कर े हुए एक मूह बना ी हैं सिजन पर राज्य कानून बना क े हैं। उ ू(ी में 45 े 63 प्रविवविlयाँ एक और मूह बना ी हैं, और वे करों े ंबंंति हैं। उदाहरण क े लिलए, प्रविवविl 18 "भूविम" है और प्रविवविl 45 "भूविम राजस्व" है। प्रविवविl 23 "Iानों का विवविनयमन" है और प्रविवविl 50 "Iविनज पर कर" है। उपयु;क्त विवश्लेषण-और यह ू(ी में दज; प्रविवविlयों का ंपूण; विवश्लेषण नहीं है - सिज े यह विनष्कष; विनकल ा है विक करा ान को मुख्य विवषय में शाविमल करने का इरादा नहीं है, सिज में इ े विवस् ारिर विनमा;ण पर शाविमल माना जा क ा है, लेविकन विव ायी क्षम ा क े प्रयोजनों क े लिलए एक अलग मामला माना जा ा है। और यह भेद ंविव ान क े अनुच्छेद 248, Iंड (1) और Iंड (2) और प्रविवविl 97 की भाषा में भी प्रकट हो ा है। उपयु;क्त योजना क े आलोक में प्रविवविl 42 का अर्थीा;न्वयन कर े हुए, इ विनष्कष; का विवरो करना कविठन है विक प्रविवविl 42 क े अ ीन अं रराज्यीय व्यापार और वाशिणज्य पर विव ान बनाने की ं द की शविक्त में ऐ े व्यापार और वाशिणज्य क े अनुgम में विवgय पर कर अति रोविप करने की शविक्त स्थिम्मलिल नहीं है। [...]
55. विनष्कष;ः(1) प्रविवविl 54 भार रकार अति विनयम की प्रविवविl 48 का उत्तराति कारी है और इ का अर्थी; अं रा;ज्यीय विबgी पर कर विह लगाना ब क विवति मान्य होगा जब क विक ंविव ान में इ क े विवरुद्ध उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" कोई बा न हो और ऐ ा कोई नहीं है। इ ू(ी में दज; प्रविवविlयों की योजना क े ह करा ान को एक अलग मामला माना जा ा है और अलग े इ का उल्लेI विकया गया है। (3) अनुच्छेद 286 (2) इ आ ार पर आगे बढ़ ा है विक यह राज्य हैं सिजनक े पा अं र-राज्यीय विबgी पर कर लगाने वाली विवति यां को अति विनयविम करने की शविक्त है।इन बा ों े यह विनष्कष; विनकालना उति( है विक ू(ी-2 की प्रविवविl 54 क े ह राज्य अं र-राज्यीय विबgी पर कर लगाने क े लिलए कानून बनाने में क्षम हैं। (प्रभाव वर्ति )
39. ुंदररामअय्यर ( ुप्रा) में प्रति पाविद प्रविवविlयों की योजना क े अर्थीा;न्वयन का अनु रण इ न्यायालय द्वारा गुडरिरक ( ुप्रा), कलकत्ता विनगम बनाम लिलबट[2] सि नेमा22, सिंजदल स्टेनले लिलविमटेड बनाम हरिरयाणा23 राज्य क े मामले में विकया गया है।
40. जै ा विक ऊपर ब ाया गया है, ारा 52 क े ह करारोपण ू(ी II की प्रविवविl 49 े आच्छाविद है क्योंविक इ की प्रक ृ ति एक कर है न विक शुल्क है। इ प्रकार, प्रविवविl 17 की प्रयोज्य ा, जो एक गैर-कर लगाने वाली प्रविवविl है, इ मामले में उत्पन्न नहीं हो ी है।
41. ुश्री दीवान का यह विनवेदन विक ारा 52 (1) (क) में जो कर लगाया गया है, वह वास् व में एक शुल्क की बा कह रहा है, इ क; पर आ ारिर है विक ू(ी II की प्रविवविl 49 क े ह भूविम और भवनों पर एक वास् विवक कर (I) मालिलकों और अति भोविगयों क े बी( अज्ञेयवादी होना (ाविहए 22 ए.आई.आर. 1965 एस.सी. 1107 23 ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 5617 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
(i) i) ) उन लोगों क े बी( कोई अं र नहीं करना (ाविहए जो पानी का उपभोग कर े हैं और उपभोग नहीं कर े हैं और
(i) i) i) ) एक अलग विनति क े लिलए कोई प्राव ान नहीं होना (ाविहए सिज में जल ंस्र्थीान का राजस्व विन ा;रिर विकया गया हो।
42. हमारे ंवै ाविनक न्यायशास्त्र क े विवका में कर और शुल्क क े बी( अं र का‰ी हद क विमट (ुका है। एक मय, अदाल ों क े लिलए यह मान लेना ंभव र्थीा विक कर और शुल्क क े बी( अं र हैःकर एक अविनवाय; व ूली की प्रक ृ ति में है जबविक एक शुल्क प्रदान की गई ेवा क े लिलए है। शुल्क क े मामले में मुआवज़े क े त्व और कर क े मामले में इ की अनुपस्थिस्र्थीति पर आ ारिर यह भेदभाव, ीरे- ीरे, वि‰र भी लगा ार, उ बिंबदु क विमटा विदया गया है जहाँ इ का कोई व्यावहारिरक या ंवै ाविनक महत्व नहीं है। एक बा क े लिलए, (ाज; या शुल्क का भुग ान वास् व में स्वैस्थिच्छक नहीं हो क ा है और शुल्क क े वल उ वग; पर लगाया जा क ा है सिज े ेवा उपलब् कराई जा ी है। अन्यों क े लिलए, ेवा विक ी व्यविक्त को ी े एक ामान्य ेवा े अलग क े रूप में प्रदान नहीं की जा क ी है जो एक मूह या वग; क े दस्यों को प्रदान की जा ी है सिज में वह व्यविक्त एक विहस् ा है। इ क े अलावा, जै े-जै े कानून में प्रगति हुई है, यह माना जाने लगा है विक ेवा प्रदान करने में विकए गए व्यय और राज्य द्वारा व ूल की जाने वाली राशिश क े बी( कोई टीक ंबं होना आवश्यक नहीं है। यह अं र विक कर एक अविनवाय; मांग है, जबविक शुल्क प्रदान की गई ेवाओं क े लिलए एक स्वैस्थिच्छक भुग ान है। जै ा विक कर क े मामले में है, वै ा शुल्क क े मामले में भी मांग की प्रक ृ ति स्वैस्थिच्छक नहीं हो क ी है। इ ी रह, एक कर लगाने वाले प्राव ान क े ंदभ; में विक ी विदए गए मामले में ेवा का त्व पूरी रह े उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अनुपस्थिस्र्थी नहीं हो क ा है। वै(ारिरक स् र पर कर और शुल्क क े बी( अं र का gविमक विवलोपन इ न्यायालय क े कई विनण;यों का विवषय रहा है।
44. न्यायमूर्ति ए. पी. ेन ने दन; ‰ामा;स्यूविटकल् एंड क े विमकल्, वित्र(ूर बनाम क े रल राज्य24 क े मामले में न्यायालय की ओर े बोल े हुए विनम्नानु ार अशिभविन ा;रिर विकया हैः
24. "कर" और "शुल्क" क े बी( का अं र ुस्र्थीाविप है। इ न्यायालय में पहली बार यह प्रश्न आयुक्त, ए(. आर. ई., मद्रा बनाम शिशरूर मठ क े लक्ष्मीन्द्र ीर्थी; स्वामी [ए. आई. आर. 1954 ए. ी. आर. 282:1954 ए. ी. आर. 1005:1954 ए. ी. जे. 335] में विव(ारार्थी; आया।
25. "शुल्क" ऐ ी राशिश है सिज का भुग ान विवशेषाति कार क े लिलए हो ा है, और जो बाध्य ा नहीं है, लेविकन भुग ान स्वैस्थिच्छक हो ा है। शुल्क को करों े अलग विकया गया है क्योंविक कर का मुख्य उद्देश्य रकार क े मर्थी;न क े लिलए या ाव;जविनक उद्देश्य क े लिलए न जुटाना है, जबविक विवशेषाति कार या लाभ प्रदान करने, या प्रदान की गई ेवा या उ े जुड़े हुए I(J को पूरा करने क े लिलए शुल्क लिलया जा क ा है। इ प्रकार, शुल्क क ु छ और नहीं बस्थिल्क प्रदान की गई ेवा पर विदए गए कु छ विवशेष विवशेषाति कार क े लिलए भुग ान है। कर और करा ान, इ लिलए, विवशिभन्न अन्य योगदानों, शुल्कों, या विवशेष उद्देश्यों क े लिलए और रकार की विवशेष शविक्तयों या कायJ क े ह भुग ान विकए गए या लगाए गए बोझ े अलग हैं। अब यह लगा ार मह ू विकया जा रहा है विक क े वल इ लिलए विक प्रदान की गई ेवाओं या विवशेषाति कार या लाइ ें क े अनुदान क े लिलए ंग्रह राज्य की मेविक विनति में विकया जा ा है और ेवा प्रदान करने क े लिलए व्यय क े लिलए अलग े विवविनयोसिज नहीं विकया जा ा है, यह अपने आप में विनणा;यक नहीं है। 24 (1961) 4 एस.सी.सी. 391 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ऐ ा इ लिलए है क्योंविक ंविव ान ने इ शुल्क का एक अविनवाय; त्व होने पर विव(ार नहीं विकया है विक इ े एक अलग विनति में जमा विकया जाना (ाविहए न विक मेविक विनति में। यह भी लगा ार मह ू विकया जा ा है विक स्थिक्वड प्रो क्वो स्थिस्ट्रक्टो ें ो का त्व हमेशा शुल्क का अविनवाय; श; नहीं हो ा है। इ बा पर जोर देना अनावश्यक है विक प्रति दान का त्व जरूरी नहीं विक प्रत्येक कर में अनुपस्थिस्र्थी हो। हम, इ ंबं में, ए(.एम. ीरवई द्वारा रति( कान्स्टीट्यूशनल लॉ ऑ‰ इस्थिण्डया पुस् क में उनक े द्वारा की गई विट•पशिणयों का लाभ विह ंदभ; दे क े हैं: [ए(.एम. ीरवई द्वारा रति( कान्स्टीट्यूशनल लॉ ऑ‰ इस्थिण्डया, विद्व ीय ंस्करण भाग 2, पृष्ठ 1252, प्रस् र 2239] यह कहा गया विक जै ा विक न्यायमूर्ति मुIज[2] ने स्वयं मान्य ा प्रदान विकया है, यह थ्य विक ंग्रह मेविक विनति में विवलय नहीं विकया गया है, विनणा;यक नहीं है, हालांविक यह थ्य अदाल को यह कहने में क्षम कर क ा है विक शुल्क की एक बहु ही महत्वपूण; विवशेष ा मौजूद र्थीी। लेविकन ऐ ा प्र ी नहीं हो ा विक उच्च म न्यायालय का ध्यान अनुच्छेद 266 की ओर आकर्षिष विकया गया है सिज क े लिलए यह आवश्यक है विक भार ंघ और राज्यों क े भी राजस्व उनक े ंबंति मेविक कोष में जाने (ाविहए और अन्य भी ाव;जविनक न ंबंति ंघ और राज्यों ाव;जविनक Iा ों में जाने (ाविहए। यह कहा गया है विक यविद प्रदान की गई ेवाएं (ैरिरटी कविमश्नर जै े एक अलग विनकाय द्वारा नहीं हैं, लेविकन एक रकारी विवभाग द्वारा, आरोपण का (रिरत्र नहीं बदलेगा क्योंविक अनुच्छेद 266 क े ह ेवाओं क े लिलए एकत्र विकए गए न को मेविक विनति में जमा विकया जाना (ाविहए। यह उल्लेI विकया जा क ा है विक स्थिक्वड प्रो क्वो का त्व आवश्यक रूप े हर कर में अनुपस्थिस्र्थी नहीं है। " इन विट•पशिणयों की ओर हमारा ध्यान आकर्षिष विकया गया है। क े वल क ृ ष्ण पुरी बनाम पंजाब राज्य [(1980) 1 ए ी ी 416,425: (1979) 3 ए ीआर 1217,1230]: उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" "प्रति दान क े त्व को शुल्क क े भुग ानक ा; और इ े (ाज; करने वाले प्राति करण क े बी( स्र्थीाविप विकया जाना (ाविहए। ऐ ा हो क ा है विक यह गशिण ीय टीक ा े शुल्क क े बराबर न हो, वि‰र भी, मोटे ौर पर, या मुख्य रूप े, शुल्क एकत्र करने वाले प्राति करण को यह विदIाना होगा विक वे शुल्क क े बदले जो ेवा प्रदान कर रहे हैं, वह भुग ानक ा; क े क ु छ विवशेष लाभ क े लिलए है।" हमारे विदमाग में, ये अवलोकन अभीl नहीं हैं और इ का म लब ाव;भौविमक अनुप्रयोग क े विनयम को विन ा;रिर करना है। न्यायालय बाजार शुल्क की दर पर विव(ार कर रहा र्थीा, और वाल यह र्थीा विक क्या दर में दो रुपये प्रति ौ रुपये े ीन रुपये क की वृतिद्ध का कोई औति(त्य र्थीा। शुल्क की दर में वृतिद्ध को ही ठहराने क े लिलए कोई ामग्री नहीं रIी गई र्थीी और इ लिलए, यह एक कर की प्रक ृ ति का विहस् ा र्थीा। ऐ ा प्र ी है विक अदाल इ ारणा पर आगे बढ़ी विक स्थिक्वड प्रो क्वो का त्व हमेशा एक शुल्क में मौजूद होना (ाविहए। स्थिक्वड प्रो की पारंपरिरक अव ारणा एक परिरव;न े गुजर रही है। " (प्रभाव वर्ति )
45. न्यायमूर्ति ओ. ति(न्न•पा रेड्डी ने विदल्ली नगर विनगम बनाम मोहम्मद या ीन25 क े मामले में इ न्यायालय की दो न्याया ीशों की न्यायपीठ की ओर े बोल े हुए दन; ‰ामा;स्यूविटकल् ( ुप्रा) क े विनण;य का ंदभ; देकर विनम्नानु ार अवलोकन विकयाः “9. हम इन विम ालों े क्या ीI े हैं?हम पाया हैं विक कर और शुल्क क े बी( कोई ामान्य अं र नहीं है, हालांविक मोटे ौर पर करदा ाओं की श्रेशिणयों क े लिलए विक ी विवशेष लाभ क े वादे क े विबना एक ामान्य बोझ क े विहस् े क े रूप में कर एक अविनवाय; व ूली है, जबविक शुल्क प्रदान की गई ेवाओं, लाभ या विवशेषाति कार क े लिलए भुग ान है।मजबूरी कर और 25 (1993) 3 एस.सी.सी. 229 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" एक शुल्क क े बी( अं र की पह(ान नहीं है।यह विक एकत्र विकया गया न एक अलग ‰ ं ड में नहीं जा ा है, लेविकन मेविक ‰ ं ड में जा ा है, यह भी जरूरी नहीं विक कर लगाया जाए।हालांविक शुल्क का प्रदान की गई ेवाओं, लाभ े ंबंति होना (ाविहए इ रह क े ंबं को प्रत्यक्ष होने की आवश्यक ा नहीं है, मात्र कारण ंबं पया;प्त हो क ा है।इ क े अलावा, न ो शुल्क की मात्रा और न ही प्रदान की गई ेवा को एक मान होने की आवश्यक ा है। शुल्क का भुग ान करने वालों क े अलावा अन्य लोगों को भी लाभ हो ा है, यह शुल्क क े (रिरत्र े अलग नहीं हो ा है। वास् व में ाव;जविनक विह में विनयमन क े प्रार्थीविमक उद्देश्य की ुलना में शुल्क क े भुग ानक ा;ओं को विवशेष लाभ या लाभ गौण भी हो क ा है न ही अदाल लाग लेIाकार की भूविमका ग्रहण करने क े लिलए है। एकवित्र शुल्क की राशिश ापेक्ष प्रदत्त ेवाओं की लाग आविद को बहु ाव ानीपूव;क ौलना न ो आवश्यक है और न ही मी(ीन है ाविक दोनों को मान रूप े ं ुलिल विकया जा क े । एक व्यापक ह- ंबं वह ब है जो आवश्यक है। ही मायने में मुआवज़ा विक ी शुल्क का एकमात्र ही ू(कांक नहीं है; न ही यह अविनवाय; रूप े कर में अनुपस्थिस्र्थी रह ा है।"
46. इ न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ ने श्रीविनवा जनरल ट्रेड; और अन्य बनाम आंध्र प्रदेश राज्य26 क े मामले में, विनम्नानु ार अवलोकन विकयाः “32. कर और शुल्क क े बी( कोई ामान्य अं र नहीं है। दोनों लोक अति कारिरयों द्वारा न की अविनवाय; व ूली है। मजबूरी इ थ्य में विनविह है विक भुग ान कानून द्वारा प्रव;नीय विकया जा क ा है बावजूद इ क े विक कोई व्यविक्त अविनच्छ ु क है अर्थीवा हमति का आभाव है। शुल्क की प्रक ृ ति का उद्ग्रहण मात्र इ लिलए माप्त नहीं हो जा ा विक इ में बाध्य ा या प्रपीड़न का त्व मौजूद है, न ही यह विक ी शुल्क का अशिभ ारणा है विक इ का प्राति करण द्वारा ेवा का लाभ प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यविक्त 26 (1983) 4 एस.सी.सी. 353 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" को प्रदान की गई वास् विवक ेवा े ी ा ंबं होना (ाविहए। अब यह लगा ार मह ू विकया जा रहा है विक क े वल इ लिलए विक प्रदत्त ेवाओं या विवशेषाति कार या लाइ ें क े ंग्रह को राज्य क े मेविक कोष में ले जाया जा ा है और ेवा प्रदान करने क े लिलए व्यय क े लिलए अलग े विवविनयोसिज नहीं विकया जा ा है, यह अपने आप में विनणा;यक नहीं है। ंभव ः, शिशरूर मठ क े मामले [(1980) 1 ए ी ी 416: एआईआर 1980 ए ी 1008: (1979) 3 ए ीआर 1217] में न्यायालय का ध्यान ंविव ान क े अनुच्छेद 266 की ओर नहीं आकर्षिष विकया गया र्थीा। ंविव ान कहीं भी इ े शुल्क का एक अविनवाय; त्व नहीं मान ा है विक इ े एक अलग विनति में जमा विकया जाना (ाविहए न विक मेविक विनति में।यह भी लगा ार मह ू विकया जा रहा है विक ख् अर्थी; में मुआवज़ा का त्व हमेशा शुल्क क े लिलए अविनवाय; नहीं हो ा है। इ बा पर जोर देना अनावश्यक है विक हर कर में मुआवज़े का त्व आवश्यक रूप े अनुपस्थिस्र्थी नहीं है: (इ ंदभ; में, सि रसि ल्क लिलविमटेड बनाम टेक् टाइल कमेटी27 में विनण;य भी देIें)
47. प्राति करण की इ ु ंग रेIा क े दृविlग, यह प्रकट हो ा है विक कर और शुल्क क े बी( व्यावहारिरक और ंवै ाविनक अं र को माप्त हो (ुका है। कर क े मामले में, शुल्क में अविनवाय; व ूली भी शाविमल हो क ी है। शुल्क में बाध्य ा का त्व हो क ा है और इ की आय मेविक विनति का विहस् ा बन क ी है। इ ी रह, प्रत्येक कर क े मामले में मुआवज़ा का त्व आवश्यक रूप े अनुपस्थिस्र्थी नहीं है।व;मान मामले में, कर द्वारा लगाया गया है। जल ंस्र्थीान क े क्षेत्र क े भी र स्थिस्र्थी परिर र पर ारा 52 में विव ातियका कर की आय का उद्देश्य जल ंस्र्थीान को अपने अति कार क्षेत्र क े ह क्षेत्र में पानी और ीवरेज ुविव ाओं को उपलब् कराने क े क़ानून क े ह अपने अविनवाय; दातियत्वों 27 (1989) सप्ल आपूर्ति एवं सीवेज अधिनियम ीम ें वसूल किए ट्री (1) एस.सी.सी. 168 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और कायJ को पूरा करने क े लिलए उपलब् राजस्व का गठन करना है। जल ंस्र्थीान क े अति कार क्षेत्र क े भी र परिर र की उपस्थिस्र्थीति क े आ ार पर लेवी लगाई जा ी है। जल कर ब क लगाया जा ा है जब क विक जल ंस्र्थीान ने परिर र क े एक विन ा;रिर वित्रज्या क े भी र एक स्टैंड पोस्ट या जलमाग; प्रदान विकया है सिज क े माध्यम े जल ंस्र्थीान द्वारा जन ा को पानी उपलब् कराया गया है। कर का लगान उ मालिलक या अति भोगी द्वारा पानी की वास् विवक Iप परेेे विनभ;र नहीं कर ा है सिज पर कर लगाया जा ा है। ारा 59 क े ह प्रभार क े विवपरी, जो जल ंस्र्थीान द्वारा अपनी मात्रा क े अनु ार आपूर्ति की जाने वाली पानी की लाग की ओर है या, एक विनति§ राशिश क े बदले में, ारा 52 क े ह कर एक अविनवाय; छ ू ट है। जहां परिर र पानी की आपूर्ति े जुड़ा हुआ है, परिर र क े कब्जे वाले पर कर लगाया जा ा है। दू री ओर, जहां परिर र इ ना जुड़ा नहीं है, यह उ परिर र का मालिलक है जो कर वहन कर ा है। इ लिलए ारा 52 (1) क े ह लेवी एक कर है न विक शुल्क। इ क े अलावा, सिजन कारणों े हमने ऊपर ंक े विदया है, यह ू(ी II की प्रविवविl 49 क े अर्थी; क े भी र भूविम और भवनों पर कर है।
48. व;मान मामले में उच्च न्यायालय ने अपीलक ा;ओं द्वारा एकवित्र करों की वाप ी का आदेश देने ंबं ी अपने विनण;य क े मर्थी;न में भार ंघ बनाम उ.प्र. राज्य ( ुप्रा) में इ न्यायालय की दो न्याया ीशों की पीठ क े विनण;य का अवलम्ब लिलया है उ मामले में, उच्च न्यायालय क े मक्ष भार ंघ द्वारा दायर की गई रिरट याति(का ने जल ंस्र्थीान, इलाहाबाद द्वारा जारी रेलवे ंपलित्तयों पर ेवा शुल्क की व ूली क े लिलए क ु छ आदेशों को (ुनौ ी दी र्थीी। जल ंस्र्थीान ने इलाहाबाद में उत्तर रेलवे क े ंभागीय रेलवे प्रबं क े 3125 " ीटों" क े लिलए उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ीवेज शुल्क क े लिलए एक राशिश की व ूली का विनदzश विदया र्थीा।लेवी को इ आ ार पर (ुनौ ी देने की मांग की गई र्थीी विक रेलवे क ें द्र रकार की ंपलित्त रI ा है सिज क े लिलए ंविव ान क े अनुच्छेद 285 क े ह ेवा शुल्क देय नहीं र्थीा क्योंविक ऐ े शुल्क कर की प्रक ृ ति में र्थीे।जल ंस्र्थीान द्वारा रेलवे •लेट‰ामJ क े ार्थी- ार्थी रेलवे कॉलोविनयों क े रIरIाव क े लिलए पानी की आपूर्ति की गई र्थीी। जल ंस्र्थीान न क े वल रेलवे स्टेशनों पर बस्थिल्क आ -पा क े क्षेत्रों क े ार्थी- ार्थी रेलवे क े माध्यम े भार ंघ द्वारा बनाए गए आवा ीय क्वाट;रों, काया;लयों, बगी(ों और शेडों में ीवरेज प्रणाली को बनाए रIने की आवश्यक ा को पूरा कर रहा र्थीा। हाईकोट; की ख्ड़पीठ ने उद्ग्रहण को (ुनौ ी देने वाली रिरट याति(का को Iारिरज कर विदया। यह ध्यान विदया जाना (ाविहए विक भार ंघ द्वारा यह क; विदया गया र्थीा विक ेवा शुल्क का लगान एक कर की प्रक ृ ति में र्थीा और इ लिलए ंविव ान क े अनुच्छेद 285 क े दायरे में आ ा है। दू री ओर, जल ंस्र्थीान ने क; विदया विक जल और ीवरेज शुल्क एक कर का गठन नहीं कर े र्थीे, लेविकन जल ंस्र्थीान द्वारा प्रदान की गई ेवाओं क े लिलए एक शुल्क र्थीे, सिज क े लिलए अनुच्छेद 285 का कोई आवेदन नहीं र्थीा। उ ंदभ; में, न्यायमूर्ति एक े मार्थीुर ने इ न्यायालय की दो न्याया ीशों की पीठ क े लिलए बोल े हुए कहाः "10. अनुच्छेद 285 क े अवलोकन े यह स्पl है विक भार ंघ की कोई ंपलित्त राज्य द्वारा लगाए गए कर क े अ ीन नहीं होगी, सि वाय इ क े विक ं द अन्यर्थीा प्रदान करे। वाल यह है विक क्या "पानी की आपूर्ति और ीवरेज क े रIरIाव क े लिलए शुल्क जल ंस्र्थीान द्वारा प्रदान की गई ेवाओं क े लिलए कर या शुल्क की प्रक ृ ति में है। एक कर और एक शुल्क क े बी( एक अं र है, और इ लिलए विक ी को लेवी की प्रक ृ ति को देIना होगा विक क्या यह कर की प्रक ृ ति में है या क्या यह राज्य की विक ी भी ा न द्वारा प्रदान की गई ेवाओं क े लिलए शुल्क की प्रक ृ ति में है जल ंस्र्थीान। इ मामले में कोई दो राय नहीं है विक अब क पानी की आपूर्ति उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और ीवरेज क े रIरIाव का ंबं है, जल ंस्र्थीान को इ े बनाए रIना है और यह वे हैं जो ीवरेज क े रIरIाव और पानी की आपूर्ति क े लिलए भी I(J को वहन कर े हैं। इ े अपने स्वयं क े ‰ ं ड बनाने होंगे और इ लिलए, अति विनयम क े ह लेवी अविनवाय; है। पानी की आपूर्ति करने और ीवरेज प्रणाली को बनाए रIने क े लिलए, जल ंस्र्थीान को उ ी क े लिलए I(; उठाना पड़ ा है। यह वास् व में एक ेवा है सिज े जल ंस्र्थीान द्वारा रेलवे को प्रदान विकया जा रहा है, और रेलवे इ क े लिलए शुल्क का भुग ान विकए विबना जल ंस्र्थीान े यह ेवा नहीं ले क ा है। हालांविक अशिभव्यविक्त कर का उपयोग 1975 क े अति विनयम में विकया गया है, लेविकन वास् व में यह जल ंस्र्थीान द्वारा प्रदान की गई ेवाओं क े लिलए शुल्क की प्रक ृ ति में है। अनुच्छेद 285 क े अ ीन जो विव(ार विकया गया है वह ंघ की ंपलित्त पर करा ान है। हमारी राय में जल ंस्र्थीान ंघ की ंपलित्त पर कोई कर नहीं लगा रहा है जो शुल्क लिलया जा रहा है वह रेलवे क े माध्यम े ंघ को प्रदान की जाने वाली ेवाओं क े लिलए एक शुल्क है। इ लिलए, यह जल ंस्र्थीान द्वारा प्रदान की गई ेवा क े लिलए एक ादा और रल शुल्क है, सिज क े लिलए जल ंस्र्थीान को पानी की विनयविम आपूर्ति क े ार्थी - ार्थी रेलवे द्वारा अपने •लेट‰ामJ पर या अपने कम;(ारिरयों े छ ु ट्टी दे दी गई ीवरेज प्रणाली क े लिलए कम;(ारिरयों को बनाए रIना है। क्वाट;र।यह प्रदान की गई ेवा क े लिलए शुल्क की प्रकृ ति में है न विक रेलवे की ंपलित्त पर कोई कर।" उपरोक्त विट•पशिणयों े स्पl है विक उ मामले में अशिभकशिर्थी आरोप पानी की आपूर्ति और ीवरेज क े रIरIाव क े शुल्क क े ंबं में र्थीा। यह जल ंस्र्थीान द्वारा प्रदत्त ेवा क े लिलए ादे और रल प्रभार क े लिलए आयोसिज विकया गया र्थीा। परिरणामस्वरूप, ंविव ान क े अनुच्छेद 285 का इ आ ार पर कोई अनुप्रयोग नहीं र्थीा विक अनुच्छेद 285 द्वारा जो विनविषद्ध है वह भाग डी ंघ की ंपलित्त पर करा ान है। भार, लेविकन यह स्र्थीानीय विनकायों द्वारा प्रदान की गई ेवा या उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" राज्य की एक ा न, जै े पानी की आपूर्ति या ीवरेज क े रIरIाव क े कारण शुल्क का शुल्क नहीं ले ा है। इ न्यायालय ने विनण;य विदया विक शुल्क को शुल्क की प्रक ृ ति में (ाविहए न विक कर की प्रक ृ ति में। उपरोक्त विनष्कष; विनकालने क े बाद, न्यायालय ने विनण;य क े अस्थिन् म पैराग्रा‰ में ारा 52 का का उल्लेI विकया है जो विनम्नानु ार हैः "23. इ मामले में जो शुल्क लिलया जा रहा है वह जल ंस्र्थीान द्वारा प्रदान की गई ेवा क े लिलए है अर्थीा; 1975 क े अति विनयम क े ह राज्य की एक ा न है। अति विनयम की ारा 52 में कहा गया है विक जल ंस्र्थीान जल आपूर्ति क े लिलए कर, शुल्क और प्रभार अति रोविप कर क ा है और जो उसिल्ललिI दरों पर जल कर और ीवरेज कर क े रूप में प्रदान की गई ीवरेज ेवाओं क े लिलए हैं।यद्यविप आरोप को शिशशिर्थील रूप े 'कर' कहा गया र्थीा, लेविकन जै ा विक पहले ही उल्लेI विकया गया है, नामकरण महत्वपूण; नहीं है। वास् व में जो शुल्क लिलया जा रहा है वह पानी की आपूर्ति क े ार्थी- ार्थी ीवरेज प्रणाली क े रIरIाव क े लिलए शुल्क है। इ लिलए, हमारी राय में, ऐ े ेवा शुल्क एक शुल्क हैं और इ े ंविव ान क े अनुच्छेद 285 द्वारा प्रभाविव नहीं कहा जा क ा है। इ ंदभ; में यह स्पl विकया जाना (ाविहए विक अनुच्छेद 285 द्वारा जो छ ू ट दी गई है वह भार ंघ की ंपलित्त पर कर है, लेविकन उन ेवाओं क े लिलए शुल्क नहीं है जो ीवरेज प्रणाली क े रIरIाव क े लिलए जल आपूर्ति की प्रक ृ ति में प्रदान की जा रही हैं। इ लिलए, हमारी राय में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तिडवीजन बें( द्वारा लिलया गया दृविlकोण ही है विक शुल्क एक शुल्क है, पानी की आपूर्ति और ीवरेज प्रणाली क े रIरIाव क े लिलए ेवा शुल्क है, सिज े ंपलित्त पर अति रोविप कर नहीं कहा जा क ा है। इ लिलए यह ंविव ान क े अनुच्छेद 285 क े प्राव ानों का उल्लंघन नहीं कर ा है।" उपरोक्त उद्धरण में, दो न्याया ीशों की Iंडपीठ ने कहा विक " ारा 52 में यह उपबं है विक जल ंस्र्थीान जल आपूर्ति और ीवरेज ेवाओं क े लिलए कर, शुल्क और प्रभार अति रोविप कर क ा है" और यद्यविप शुल्क को कर कहा गया र्थीा, क ु ल विमलाकर यह जल की आपूर्ति क े लिलए एक प्रकार का शुल्क है। उपरोक्त विट•पशिणयों में एक स्पl त्रुविट है। ारा 52 अध्याय 6 में अं र्षिवl है सिज का शीष;क उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" "कर, शुल्क और प्रभार" है। ऊपर उद्धृ अनुच्छेद 23 में विट•पशिणयों े ंक े विमल ा है विक अध्याय VI का शीष;क उ प्राव ान की प्रक ृ ति क े ार्थी स्थिम्मलिल र्थीा जो ारा 52 में विनविह है। ारा 52 करों क े उद्ग्रहण का उपबं कर ी है न विक ‰ी या प्रभारों क े लिलए सिजनक े लिलए अध्याय 6 में ुशिभन्न उपबं हैं न्यायालय की यह म ाशिभव्यविक्तयां विक यद्यविप आरोपों को कर क े रूप में शिशशिर्थील रूप े अशिभकशिर्थी विकया गया है, यह ारवान रूप े शुल्क है और विक ी भी दशा में विवति क े उपबं ों क े ही पठन का प्रति बिंबब नहीं है जै ा विक हमने ारा D.[1] में ऊपर ंक े विदया है, क़ानून में करों और शुल्कों को लगाने और उ की व ूली क े लिलए अलग-अलग प्राव ान विदया गया हैं। ारा 52 क े ह उद्ग्रहण एक प्रकार का कर है और इ े प्रदत्त ेवा क े लिलए शुल्क या प्रभार नहीं माना जा क ा है। उ ीमा क, भार क े ंघ बनाम उ.प्र. राज्य ( ुप्रा) में विनण;य क े पैराग्रा‰ 23 जो विट•पणी की गई है, Iारिरज की जा ी है। E विनष्कष;
49. उपरोक्त कारणों े हमारा यह मानना है विक इलाहाबाद में उच्च न्यायालय क े मक्ष रिरट काय;वाही में सिज बा को (ुनौ ी देकर उठाया गया है उ में कोई मेरिरट नहीं है। हम ारा 52 (1) (a), ), ारा 55 (b) ) (1) और यूपी जल आपूर्ति और ीवरेज अति विनयम की ारा 56 की वै ा क े लिलए ंवै ाविनक (ुनौ ी को अस्वीकार कर े हैं। दनु ार अपील अनुज्ञा होगी और 7 मा(; 2014 की लIनऊ Iंडपीठ में इलाहाबाद में उच्च न्यायालय क े विनण;य अपास् हो जाएगा। परिरणामस्वरूप, प्रर्थीम प्रत्यर्थी2 द्वारा दायर रिरट याति(का Iारिरज हो जाएगी। अपीलक ा; 9 प्रति श प्रति वष; की दर े ब्याज े उ बकाये राशिश को व ूल करने क े हकदार होंगे, सिज को नोविट क े अनु रण में व ूल विकया जाना है। इ मामले की परिरस्थिस्र्थीति यों में, वाद व्यय की बाब कोई आदेश नहीं होगा। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
50. यविद कोई लंविब आवेदन है ो उ का भी विनपटारा विकया जा ा है।...............................................… मा० न्यायमूर्ति डॉ नंजय वाई (ंद्र(ूड़.................................................. मा० न्यायमूर्ति विवgम नार्थी...............................................… मा० न्यायमूर्ति बी०वी० नागरत्न नई विदल्ली; अक्टूबर 22,2021. उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब]ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण;य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाशिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विgयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"