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भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 5110 वर्ष 2021
सुघार सिंसह ... अपीलार्थी&(गण)
बनाम
हरिर सिंसह (मृ ) एलआर क
े माध्यम से और अन्य ... प्रति वादीगण
विन.ण.य
माननीय न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT
1. उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा अपील-2 संख्या 836 वर्ष 2010 में पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश विदनांविक 09.09.2010 से दुःखी और असं ुष्ट मूल वादी ने व मान अपील दायर विकया है सिFसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने सिसविवल प्रविGया संविह ा, 1908 (संक्षेप में "सी.पी.सी.") की ारा 100 क े ह उक्त अपील-2 को अनुज्ञा कर विदया है और प्रर्थीम अपील न्यायालय द्वारा पुष्ट करार क े विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए विनणय और तिPGी को रद्द कर अपास् कर विदया है।
2. संक्षेप में मामले क े थ्य इस प्रकार हैंः
2. 1 यह विक, राम सिंसह ने मूल वादी सुघर सिंसह क े पक्ष में वाद की भूविम को क ु ल रु. 56,000/- में विवGय हे ु विवGय क े करार का विनष्पाविद विकया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2021 INSC 672 विनष्पादक द्वारा करार क े समय प्रति फल क े एक भाग क े रूप में रू. 25,000/- प्राप्त विकया गया। विदनांक 10.10.1976 उक्त विवGय क े करार का विनष्पादन विकया गया र्थीा। इस स् र पर यह उल्लेख विकया Fाना आवश्यक है विक सुसंग समय पर विवGय क े करार का पंFीकरण कराना Fरूरी नहीं र्थीा। विवGय क े करार क े मु ाविब विबGी विवलेख का विनष्पादन 2 वर्ष क े भी र विनष्पाविद विकया Fाना र्थीा। 2 वर्ष की समय अवति को विवG े ा की पहल पर प्रपत्र विदनांविक 30. 09. 1978 और विदनांविक 29.09.1981 द्वारा विवस् ारिर विकया गया र्थीा। इसक े उपरान्, रू.15,000/- की अति रिरक्त राशिश का भुग ान विकया गया। विवG े ा विबGी विवलेख क े विनष्पादन क े समय बकाया रकम रु. 16,000/- स्वीकार करने को सहम हुआ Fो अनुलग्नक पी-3 है। विवGय क े प्रति फल क े रूप में भाग ः रु. 40,000/- प्राप्त करने और विवGय क े करार क े विनष्पादन क े बावFूद, मूल विवG े ा ने विदनांक 23.06.1984 को वाद भूविम की विवGय विवलेख को प्रति वादी सं. 2 से 5 क े पक्ष में विनष्पाविद विकया। यह विक, इसक े उपरान् सुघीर सिंसह- G े ा ने विवद्वान सिसविवल FF, मर्थीुरा सिसटी, मर्थीुरा (संक्षेप में 'विवद्वान विवचारण न्यायालय') क े समक्ष विवG े ा राम सिंसह और अन्य क े विवरूद्ध सिसविवल वाद सं. 254 वर्ष 1984 दायर विकया।सिFन व्यविक्तयों क े पक्ष में बाद में विदनाक 23.06.1984 को विवGय विवलेख विनष्पाविद विकया गया र्थीा, उन्हें प्रति वादी सं. 2 से 5 क े रूप में भी अशिभयोसिF विकया गया र्थीा। वादपत्र में यह कहा गया विक यह विवशिशष्ट मामला र्थीा विक प्रति वादी सं. 2 - 5 प्रति वादी सं. 1 क े सगे भ ीFे हैं और प्रति वादी सं. 2 - 5 और उनक े विप ा प्रति वादी सं. 1 अपने विनयंत्रण कर लिलये र्थीे और उस बचाव पक्ष सं. 2 - 5 और उनक े विप ा को विवGय विवलेख क े रूप में एक नकली दस् ावेF विमला है सिFसको विदनांक 23.06.1984 को प्रति वादी सं.[1] द्वारा उनक े पक्ष में प्रति फलरविह विनष्पादन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया गया यद्यविप वादी क े पक्ष में विनष्पाविद विवGय क े करार क े बारे में उनको पूण Fानकारी र्थीी।
2. 2 यह विक, प्रति वादी सं. 1 द्वारा Fवाबदावा प्रस् ु कर इस वाद प्रति वाद विकया सिFसमें विदनांक 10.10.1976 को विवGय क े करार क े शीघ्र विनष्पादन और विदनांक 30.09.1978 और विदनांक 29.09.1981 क े कशिर्थी समय विवस् ार से संबंति प्रस् ु दोनों दस् ावेFों से इंकार कर विदया। उन्होंने करार क े समय रु. 25,000/- की राशिश प्राप्त करने और उसक े बाद विबGी क े भाग क े रूप में कशिर्थी दो समय विवस् ार पर Gमशः रु. 8000/- और रु. 7000/- प्राप्त करने से भी इनकार विकया।
2. 3 यह विक, प्रति वादी सं. 2-5 ने अपना-अपना Fवाबदावा प्रस् ु कर कर्थीन विकया विक उन्होंने विदनांक 23.06.1984 पंFीक ृ विवGय विवलेख क े द्वारा सप्रति फल पूव क्त भूविम क े सद्भावनापूवक Gय विकया है और उन्हें विदनांक 10.10.1976 को हुए करार क े बारे में कोई Fानकारी नहीं र्थीी।
2. 4 विवद्वान विवचारण न्यायालय ने विनम्नलिललिख विववाद्यकों को विवरतिच विकया-(1) क्या प्रति वादी सं. 1 ने विदनांक 10.10.1976 को 25,000/- रुपये की अविoम राशिश प्राप्त कर रु. 56,000/- में विववाविद भूविम (कागF सं. 7-ए) क े विवGय का करार का विनष्पाविद विकया र्थीा? (2) क्या उक्त विवGय क े करार क े ह प्रति वादी सं. 1 को विदनांक 30.09.1978 (कागF सं. 8-ए/1) को रु. 8000/- और विदनांक 29.09.1981 को रु. 7000/- का भुग ान विकया गया है? Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (3) क्या वादी विवGय क े करार की श q क े अनुसार विवGय विवलेख विनष्पाविद करने क े लिलए सदैव ैयार और ईप्सिsस रहा है और क्या अभी भी ैयार और ईप्सिsस है। यविद हां, ो इसका प्रभाव क्या है? (4) क्या प्रति वादी सं. 2 - 5 पूव क्त करार की सूचना क े विबना प्रति फल देकर सद्भावनापूवक विववाविद भूविम का Gय विकया है? (5) वादी विकस प्रकार का अनु ोर्ष पाने का अति कारी है?"
2. 5 वादी की ओर से 6 सातिक्षयों की परीक्षा की गई। वादी ने दस् ावेFी साक्ष्य को भी प्रस् ु विकया। बचाव पक्ष की ओर से 3 गवाहों की Fांच की गई और दस् ावेFी साक्ष्य भी अशिभलेख पर लाए गए।
2. 6 विवद्वान विवचारण न्यायालय ने साक्ष्य का मूल्यांकन कर को वादी क े पक्ष में और प्रति वाविदयों क े विवरूद्ध विववाद्य सं. 1 और 2 विवरतिच विकया। विवद्वान विवचारण न्यायालय ने विनष्कर्ष विनकाला विक प्रति वादी सं. 1 ने विदनाक 10.10.1976 को अपनी संपलिw कोरु. 6,000/- और रु. 25,000/- अविoम भुग ान कर रू. 56000/- में बेचने क े लिलए वादी क े पक्ष में विवGय क े करार का विनष्पाविद विकया र्थीा। दस् ावेFों क े अनुसार इसकी वै ा को दो बार विदनांक 30.09.1978 रु. 8000/- प्राप्त कर और विदनांक 29.09.1981 को रु. 7000/- प्राप्त कर बढ़ाया गया।
2. 7 विवद्वान विवचारण न्यायालय ने साक्ष्यों की मूल्यांकन कर वादी क े पक्ष में और प्रति वाविदयों क े विवरूद्ध विववाद्य सं. 4 ारिर विकया। विवद्वान विवचारण न्यायालय ने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA साक्ष्यों का मूल्यांकन विवशेर्ष रूप से ारिर विकया विक प्रति वादी सं. 2 - 5 को वादी क े करार क े बारे में प ा र्थीा Fब उनक े पक्ष में विबGी विवलेख क े विनष्पादन विकया गया । विवद्वान विवचारण न्यायालय ने प्रति वादी सं. 1 को विदया विबGी क े भुग ान पर भी संदेह F ाया।
2. 8 विवद्वान विवचारण न्यायालय ने साक्ष्य का मूल्यांकन कर विववाद्य-3 को वादी क े पक्ष में और प्रति वाविदयों क े विवरूद्ध विवरतिच विकया और यह विनष्कर्ष विनकाला विक वादी हमेशा करार क े विनयमों और श q क े अनुसार विवGय विवलेख क े लिलए ैयार और ईप्सिsस र्थीा और वादी ने यह भी साविब विकया विक वादी ने करार की श q क े अनुसार काय विकया है। फलस्वरूप, वादी क े पक्ष में और प्रति वाविदयों क े विवरूद्ध सभी विववाद्यकों को विवरतिच करने क े उपरान् विवद्वान विवचारण न्यायालय ने विदनांक 07.02.1987 को विनणय पारिर कर वाद पर आज्ञविप्त Fारी विकया और प्रति वादी-1 को विनदyश Fारी विकया विक आयकर विवभाग से आयकर प्रमाण पत्र और रु. 6,000/- (शोध्य विबGी प्रति फल) प्राप्त हो े ही वह दो महीने क े भी र विबGी विवलेख का विनष्पाविद करे। विवद्वान विवचारण न्यायालय ने आदेश पारिर कर कहा विक प्रति वादी सं. 2 - 5 प्रति वादी सं. 1 क े सार्थी विबGी विवलेख क े एक पक्षकार हैं।
2. 9 यह विक, Fैसा विक प्रति वाविदयों ने न ो अपील दायर विकया और न ही विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और तिPGी क े अनुसार काय विकया इसलिलए वादी ने विदनांक 07.02.1987 को विनणय और तिPGी विदनांविक 29.08.1987 क े े लिलए विनष्पादन वाद सं. 11 वर्ष 1987 दायर कर विदया। विवद्वान विनष्पादन न्यायालय क े विनदyशानुसार विदनांक 20.09.1987 को वादी ने शेर्ष राशिश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रु. 6,000/- का भुग ान कर विदया। विदनांक 20.09.1989 को मूल प्रति वादी सं. 1-राम सिंसह की मृत्यु हो गयी। यह विक, विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा विनणय क े पारिर करने की ारीख से लगभग 9 साल क े बाद मूल प्रति वादी सं. 2 - 5 ने विवद्वान प्रर्थीम अपील न्यायालय क े समक्ष अपील दायर विकया। विवद्वान प्रर्थीम अपील न्यायालय ने विदनांक 24. 08. 1998 क े विनणय और आदेश द्वारा उक्त अपील को खारिरF कर विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और तिPGी की पुविष्ट की।
2. 10 विवद्वान प्रर्थीम अपील न्यायालय द्वारा आदेश एवं विनणय सिFसमें अपील को खारिरF कर विदया गया है और विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पारिर विनणय एवं तिPGी को पुष्ट कर विदया गया है, इस बा से दुखी और असं ुष्ट मूल प्रति वादी सं. 2 - 5 ने उच्च न्यायालय क े समक्ष विद्व ीय अपील सं. 1388 वर्ष 1998 दायर विकया। उच्च न्यायालय ने अव ारिर करने क े लिलए दो विबन्दु य विकए -(1) विवविनर्दिदष्ट अनु ोर्ष अति विनयम, 1963 की ारा 16 (सी) क े प्राव ानों का इस आशय से पालन न करना (संक्षेप में "अति विनयम") विक वादी यह साविब करने में विवफल रहा है विक वह करार क े अपने भाग का पालन करने क े लिलए हमेशा ैयार और ईप्सिsस र्थीा; और (2) उ.प्र. अति विनयम संख्या 57 वर्ष 1976 क े दृविष्टग विदनांक 10.10.1976 को बेचने क े लिलए अपंFीक ृ समझौ े क े अनुसार विबGी विवलेख क े लिलए समय क े दो विवस् ार क े गैर-पंFीकरण क े प्रभाव क े संबं में और विवति सम्म इस मामले को हल करना। उच्च न्यायालय ने विदनांक 26. 10. 2007 को विनणय और आदेश पारिर कर प्रर्थीम अपील न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और आदेश को अपास् कर विदया और इस विवGय विवलेख क े विनष्पादन हे ु वादी की त्पर ा एवं ईsसा क े संबं में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विववाद्य-3 पर नये सिसरे से विनणय करने और संपलिw अति विनयम अति विनयम 1976 (अति विनयम संख्यांक 57) की ारा ारा 54 में विकये गये संशो न क े दृविष्टग विवGय विवलेख को विनष्पाविद करने क े लिलए समय विवस् ारिर कर दो प्रपत्रों क े अपंFीकरण क े प्रभाव क े संबं में अति रिरक्त विववाद्यकों विवरतिच करने क े लिलए और इसको विवति सम्म हल करने हे ु इन मामले को प्रर्थीम अपील न्यायालय क े पास भेF विदया गया। उच्च न्यायालय ने विदनांक 12. 11. 2008 को स्पष्टीकरण आदेश पारिर कर विवशेर्ष रूप से अवलोकन कर स्पष्ट विकया विक इस मामले को विववाद्य-3 और क े वल उपरोक्त अति रिरक्त विववाद्यों पर नये सिसरे से विनणय लेने क े लिलए अपील न्यायालय क े पास प्रति प्रेविर्ष कर विदया गया है और इस मामले में प्रर्थीम अपील े विनष्कर्षq में न ो छेड़छाड़ विकया Fाएगा और न ही उसे अपास् विकया Fाएगा।
2. 11 यह विक दोपरान् मामले क े प्रेविर्ष होने पर विवद्वान प्रर्थीम अपील न्यायालय ने उच्च न्यायालय द्वारा विनदyशानुसार विववाद्य सं. 3 पर पुनर्दिवचार कर वादी क और प्रति वाविदयों क े विवरुद्ध विनणय पारिर विकया और प्रर्थीम अपील न्यायालय ने विवशेर्ष रूप से यह म व्यक्त कर ारिर विकया विक अति विनयम की ारा 16 (ग) क े अ ीन वाद में यर्थीाअपेतिक्ष कर्थीन विकया Fाना Fरूरी र्थीा। अति रिरक्त विववाद्य पर विवद्वान प्रर्थीम अपील न्यायालय ने कहा विकया विक पंFीकरण क े सुसंग प्राव ानों पर विवचार विकया Fाना Fरूरी नहीं र्थीा। फलस्वरूप, विवद्वान प्रर्थीम अपील अदाल ने विववाद्य सं. 3 और 6 को वादी क े पक्ष में और प्रति वाविदयों क े विवरूद्ध अशिभविनण& कर अपील को खारिरF कर विदया और पुनः विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और तिPGी की पुविष्ट कर विदया गया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. 12 विवद्वान प्रर्थीम अपील न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और आदेश और विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पारिर विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए पारिर विनणय और तिPGी Fो विक विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पुष्ट है, से व्यशिर्थी और असं ुष्ट मूल प्रति वादी सं. 2 से 5 ने उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनणय और आदेश क े माध्यम से उच्च े समक्ष अपील विकया है सिFसे उच्च न्यायालय ने अनुज्ञा कर विदया है और उच्च न्यायालय ने दोनों विनचली अदाल ों द्वारा अशिभलिललिख समव & विनष्कर्षq को रद्द कर एवं अपास् कर विदया है और विनणय और तिPGी को क े वल इस आ ार पर उलट विदया है विक अति विनयम की ारा 16 (ग) क े अ ीन यर्थीापेतिक्ष वाद में कोई विवविनर्दिदष्ट प्रकर्थीन नहीं विकया हैं और त्पर ा और ईsसा दोनों क े संबं में वाद में कोई विवविनर्दिदष्ट प्रकर्थीन नहीं विकया गया हैं।
2. 13 उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश से व्यशिर्थी और असं ुष्ट होकर मूल वादी ने व मान अपील दायर विकया है।
3. अपीलक ा की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री कनल बालासुब्रमण्यम-मूल वादी ने कर्थीन विकया है विक मामले क े थ्यों और परिरप्सिस्र्थीति यों में उच्च न्यायालय ने सिस.प्र.सं. की ारा 100 क े ह विद्व ीय अपील को अनुज्ञा कर गंभीर त्रुविट कारिर विकया है और Fहां क त्पर ा और ईsसा और अति विनयम की ारा 16 (सी) का अपालन का प्रश्न है उच्च न्यायालय ने दोनों विनचली अदाल ों द्वारा अशिभलिललिख समव & विनष्कर्षq को अपास् कर त्रुविट कारिर विकया है।
3. 1 मूल वादी की ओर से पेश विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने कर्थीन विकया है विक विक भले ही उच्च न्यायालय ने यह क देकर विनष्कर्ष विनकाला गया है विक अति विनयम की ारा 16 (ग) की श q क े अपालन की दशा में इस वाद को असफल हो Fाना Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA चाविहए, विवति सम्म नहीं है। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक त्पर ा और ईsसा क े विन ारण करने क े लिलए इस न्यायालय द्वारा ारिर सुस्र्थीाविप विवति क े अनुसार वाद को समo ा से पढ़ा Fाना चाविहए ' त्पर ा और ईsसा' का सार और त्व उसक े मूल भाव में होना चाविहए न विक उसक े शब्द और रचना में।
3. 2 आगे यह कर्थीन विकया गया है विक व मान मामले में वादी ने विवशेर्ष रूप से वादी क े पैराoाफ 1 से 4 में और पैरा 11 में विनवेदन विकया विक वह विवGय विवलेख का विनष्पादन कराने और उसको पंFीकरण कराने और करार क े अपने विहस्से का पालन करने क े लिलए हमेशा ैयार और ईप्सिsस र्थीा, लेविकन प्रति वादी-1 ने ऐसा करने से इनकार कर विदया और इसलिलए, उसे मुकदमा दायर करना पड़ा।यह कर्थीन विकया गया है विक चूँविक उच्च न्यायालय द्वारा रिरकॉP विकया गया विनष्कर्ष अशिभलेख से मेल नही खा ा है और इसलिलए, विवक ृ है।
3. 3 इसक े अति रिरक्त अपीलक ा की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने यह कर्थीन विकया गया है विक उच्च न्यायालय ने इस थ्य की ठीक से मूल्यांकन नहीं विकया है विक वास् व में विवGय का प्रति फल रु. 56,000/- में से रु. 40,000/- का भुग ान पहले ही कर विदया गया र्थीा और क े वल रु. 16,000/- का भुग ान विकया Fाना शेर्ष र्थीा, सिFसका भुग ान विबGी विवलेख क े समय विकया Fाना र्थीा, सिFसको विवG े ा ने प्रपत्र अनुलग्न-3 में स्वीकार विकया। यह कर्थीन विकया गया है विक यह नहीं कहा Fा सक ा है विक वादी करार क े लिलए ैयार और ईप्सिsस नहीं र्थीा।
3. 4 इसक े अति रिरक्त यह कहा गया है विक यह भी मान लिलया Fाए विक प्रस् ु अशिभवचन विन ारिर प्रपत्र क े अनुसार नहीं हैं इसलिलए यह सैयद दस् गीर बनाम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA टीआर गोपालक ृ ष्ण सेट्टी (1999) 6 एस.सी.सी. 337 क े मामले में इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति क े दृविष्टग इसको पोर्षणीय नहीं बना ा है।
3. 5 इसक े अति रिरक्त यह कर्थीन विकया गया है विक इस रह की त्पर ा का प्रश्न कई बार उठाया गया है और वादपत्र में में आवश्यक अशिभवचन कर प्रदर्शिश विकया गया। यह कर्थीन विकया गया है विक उच्च न्यायालय द्वारा यह पाया गया है विक वादी ने क े वल अपनी त्पर ा क े बारे में कहा है और अपने दातियत्व को विनभाने की अपनी इच्छा को व्यक्त नहीं विकया है और यह प्रपत्र पी - 3 की सामoी की अवहेलना कर ा है सिFसमें विवG े ा विबGी विवलेख विनष्पाविद करने क े समय रुपये 16,000/- प्राप्त करने पर राFी हुआ र्थीा और वादपत्र में भी विवविनर्दिदष्ट रूप से यह कहा गया र्थीा विक वादी उप-पंFीयक कायालय गया र्थीा और विवलेख विनष्पाविद करने क े लिलए विवG े ा से कहा र्थीा लेविकन उसने इनकार कर विदया।
3. 6 इसक े अति रिरक्त यह कर्थीन विकया गया है विक उच्च न्यायालय ने इस अति विनयम की ारा 20 क े लिलए परं ुक की प्रयोज्य ा पर वादी पर मुकदमा न चलाने में भी गल ी कारिर विकया है। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक उच्च न्यायालय ने यह अवलोकन करने में गल ी कारिर विकया है विक विवविनर्दिदष्ट अनु ोर्ष प्रदान करना आज्ञापक नहीं है बप्सिल्क विववेकाति कार पर है। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक उच्च न्यायालय ने Fो क विदया है विक यद्यविप विवGय का करार साविब हो गया है और प्रति फल का बड़ा भाग का भुग ान कर विदया गया है और त्पर ा और ईsसा भी साविब कर विदया गया है विफर भी यह कहना विक विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए आज्ञविप्त Fारी करना विवकाति कार पर आ ारिर है विवति में पोर्षणीय नहीं है। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक यविद ऐसी व्याख्या स्वीकार की Fा ी है, ो उस प्सिस्र्थीति में, विकसी भी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मामले में, विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए तिPGी पारिर नहीं की Fाएगी।यह कर्थीन विकया Fा ा है विक अनु ोर्ष का प्रदान न विकया Fाने क े विववेकाति कार का प्रयोग पक्षकारों क े आचरण क े विवरूद्ध नहीं विकया Fा सक ा है। यह कर्थीन विकया Fा ा है विकविववेकाति कार का प्रयोग हर बार यर्थीोतिच और कसंग रूप से प्रयोग विकया Fाना है।
3. 7 इसक े अति रक्त यह कहा गया है विक अन्यर्थीा प्रति वादी सं.-1 द्वारा विनष्पाविद विवGय क े करार का ज्ञान होने क े बावFूद प्रति वादी विवशेर्ष रूप से प्रति वादी सं. 2 से 5 क क े आचरण को देख े हुए विवGय विवलेख को उनक े पक्ष में विनष्पाविद करने क े लिलए वादी का पक्ष और प्रति वादी संख्या 2 से 5 क प्रति फल का विकया गया भुग ान भी संविदग् है और साविब नहीं हो ा है, विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए तिPGी प्राप्त करने में अति विनयम की ारा 20 वादी क े रास् े में नहीं आएगी। यह कहा Fा ा है विक इन मामले क े थ्यों और परिरप्सिस्र्थीति यों में, अति विनयम की ारा 20 लागू नहीं होगी और/या विबल्क ु ल भी आकर्दिर्ष नहीं होगी।
3. 8 आगे यह कहा गया है विक इस प्रकार त्पर ा और ईsसा पर दोनों विनचली अदाल ों द्वारा अशिभलिललिख थ्य क े समव & विनष्कर्ष मौFूद र्थीे Fो साक्ष्य क े मूल्यांकन पर आ ारिर र्थीा। उच्च न्यायालय को सिस.प्र.सं. की ारा 100 क े ह प्रदw शविक्तयों का प्रयोग कर समव & विनष्कर्षq को अपास् नहीं करना चाविहए। 3.[9] आगे यह कर्थीन विकया गया है विक अति विनयम की ारा 20 की प्रयोज्य ा पर विवद्वान विवचारण न्यायालय या प्रर्थीम अपील न्यायालय द्वारा कोई विववाद्य भी विवरतिच नहीं विकया गया र्थीा और उच्च न्यायालय ने सिस.प्र.सं. की ारा 100 क े ह उस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवर्षय पर पहली बार विद्व ीय अपील में विवचारिर कर विनस् ारण विकया है सिFस पर पूणरूपेण अनुमति नहीं है और यह सिस.प्र.सं. की ारा 100 क े ह प्रदw शविक्तयों क े प्रयोग क े क्षेत्र और दायरे से परे है। उपरोक्त कर्थीन कर एवं उपरोक्त विनणयों पर अवलम्ब लेकर यह विनवेदन विकया Fा ा है विक व मान अपील को अनुज्ञा कर विदया Fाए।
4. प्रति वादी सं. 2 से 5 की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री प्रमोद स्वरूप द्वारा व मान अपील पर कड़ा विवरो F ाया गया है।
4. 1 यह कर्थीन विकया Fा ा है विक उच्च न्यायालय ने वाद को ठीक ही अपास् कर विदया है और वादी क े पक्ष में विवविनर्दिदष्ट पालन का अनु ोर्ष प्रदान करने से इस आ ार पर इनकार कर विदया है विक वादपत्र में अति विनयम की ारा 16 (सी) क े ह यर्थीाअपेतिक्ष कर्थीन नहीं विकया गया र्थीा।
4. 2 यह कहा गया है विक उच्च न्यायालय ने त्पर ा और ईsसा क े बीच समुतिच अं र ब ाया है। यह कहा गया है विक उच्च न्यायालय द्वारा त्पर ा और ईsसा पर युविक्तसंग कारण ब ाय गया हैं। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक अति विनयम की ारा 16 (सी) का अपालन वादी क े मामले क े लिलए घा क है और इसलिलए, वादी विवविनर्दिदष्ट पालन हे ु तिPGी का विववेकाति कार पर आ ारिर अनु ोर्ष पाने का हकदार नहीं है।
4. 3 इसक े अति रिरक्त यह कहा गया है विक अन्यर्थीा भी उच्च न्यायालय यह विनष्कर्ष विनकालने में विबल्क ु ल न्यायसंग है विक अति विनयम की ारा 20 क े दृविष्टग, विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए तिPGी विववेकाति कार पर आ ारिर है। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इसलिलए उच्च न्यायालय ने आदेश पारिर विकया विक विदनांक 23.06.1984 से अं रिर ी को Fो भुग ान उन्होंने कर विदया र्थीा, वादी को 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याF क े सार्थी 40,000/- की राशिश वापस करे। यह कर्थीन विकया Fा ा है विक इस प्रकार प्रत्यर्थी&गण- प्रति वादी सं. 2 से 5 ने विदनांक 11.10.2010 को रु 1,24,135/- बैंक में Fमा कर विदया र्थीा, र्थीाविप वादी ने उच्च न्यायालय क े विनदyशानुसार संगशिण उस न को लेने से इनकार कर विदय र्थीा।
4. 4 इसक े अति रिरक्त प्रति वादी सं. 2 से 5 की ओर से पेश विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने श्री स्वरूप द्वारा कर्थीन विकया गया है विवGय क े करार को विदनांक 10.10.1976 को वापस विनष्पाविद विकया गया र्थीा और अब क 45 से अति क साल बी चुक े हैं और प्रति वादी सं. 2 से 5 कई वर्षq से कब्Fे में हैं, इसलिलए, यविद विवद्वान विवचारण न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और तिPGी को बहाल विकया Fा ा है, ब प्रति वादी सं. 2 से 5 को वाद भूविम को खाली करना होगा और इससे प्रति वादी सं. 2 से 5 को अनुतिच कविठनाइयों का सामना करना पड़ेगा और इसलिलए, अति विनयम की ारा 20 क े दृविष्टग, मा. न्यायालय से यह विनवेदन विकया Fा ा है विक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश में हस् क्षेप न विकया Fाए सिFसमें उच्च न्यायालय द्वारा साप्सिम्यक अनु ोर्ष प्रदान विकया गया है। उक्त कर्थीन कर यह विनवेदन विकया Fा ा है विक व मान व मान अपील को खारिरF कर विदया Fाए।
5. मुकदमें क े पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता को विवस् ारपूवक सुना गया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
5. 1 सवप्रर्थीम यह उल्लेख विकया Fाना आवश्यक है विक अपीलक ा - मूल वादी ने विदनांक 10.10.1976 को विवGय क े करार क े विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए वाद दायर विकया र्थीा। प्रर्थीम अपील न्यायालय सविह विवद्वान विवचारण न्यायालय ने वादी क े पक्ष में आज्ञविप्त पारिर विकया। विवद्वान विवचारण न्यायालय र्थीा प्रर्थीम अपील न्यायालय ने वादी क े पक्ष में सभी विववाद्यको वादी क े पक्ष में अव ारिर विकया सिFसमें यह विववाद्य सप्सिम्मलिल है विक वादी करार क े अपने विहस्से क े पालन क े लिलए सदैव ैयार और ईप्सिsस र्थीा। हालांविक, उच्च न्यायालय ने सिस.प्र.सं. की ारा 100 क े ह प्रदw शविक्तयों का प्रयोग कर विनचली दोनों अदाल ों द्वारा अशिभलिललिख की गई समव & विनष्कर्षq को मुख्य रूप से / पूरी रह से इस आ ार पर उलट विदया है विक वादपत्र में अति विनयम की ारा 16(सी) क े ह यर्थीाअपेतिक्ष कोई विवशिशष्ट कर्थीन नहीं विकया गया हैं। उच्च न्यायालय ने भी अपील की अनुमति दी है और परिरणामस्वरूप विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए वाद को इस आ ार पर खारिरF कर विदया है विक विवविनर्दिदष्ट पालन क े लिलए अनु ोर्ष प्रदान करना अति विनयम की ारा 20 क े ह न्यायालय क े विववेका ीन है और भले ही विवGय का करार का विनष्पादन साविब हो गया है और वादी को विवGय क े करार क े ह करार क े दातियत्व क े अपने विहस्से को पूरा करने क े लिलए सदैव ैयार और ईप्सिsस पाया गया र्थीा, विवविनर्दिदष्ट पालन की तिPGी स्वचालिल नहीं है और इस रह की तिPGी का प्रदान विकया Fाना न्याय, साम्या और सद्वविववेक क े सिसद्धां ों पर विनभर है।
6. अब, Fहां क अति विनयम की ारा 16(सी) क े प्राव ानों का पालन न करने पर उच्च न्यायालय की विटsपणी का प्रश्न है, वादपत्र क े अशिभवचनों पढ़ने क े उपरान् यह नहीं कहा Fा सक ा है विक अति विनयम की ारा 16 (सी) क े अनुसार अशिभकर्थीन/ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अशिभवचन में विकसी प्रकार की कमी है। त्पर ा और ईsसा पर आवश्यक कर्थीन और अशिभवचन विनम्नानुसार पढ़े Fा े हैं: “2. यह विक Fब दो वर्ष पूरे होने वाले र्थीे, ब प्रति वादी ने वादी से विदनांक 31.10.1981 क ारीख बढ़ाने का अनुरो विकया और शेर्ष राशिश में से 8000/- रुपये स्वीकार भी लिलया। प्रति वादी सं. 1 वादी का ससुर है और इस वFह से वादी उससे सभी प्रकार क े समझौ ा करने क े लिलए ैयार र्थीा। वादी ने विदनांक 30.09.1978 को प्रति वादी-1 को 8000/- रुपये विदए और वादी और प्रति वादी-1 क े बीच विनष्पादन क े लिलए समय को विदनांक 31.10.1981 क बढ़ा विदया गया। प्रति वादी-1 ने करार की ारीख को विवति सम्म लिलखवाकर इस पर अपने अँगूठे का विनशान लगाया और इसे वादी को दे विदया।
3. यह विक प्रति वादी-1 विदनांक 31.10.1981 क भी अपनी Fमीन को बैंक ऋण से मुक्त नहीं कर सका क्योंविक उसका भाई रणFी सिंसह भी उस ऋण में शाविमल र्थीा और वह पूरी रह से अपना विहस्सा नहीं देना चाह ा र्थीा और इस कारण से, प्रति वादी-1 ने विनष्पादन क े लिलए समयावति को और बढ़ाने का अनुरो विकया ाविक बैंक ऋण को मंFूरी विमल सक े और भूविम सभी देनदारिरयों से मुक्त हो Fाए और इसक सम्पलिw को वादी क े नाम पर विनष्पाविद और पंFीक ृ विकया Fा सक े । यह विक प्रति वादी-1 और वादी की पत्नी क े बीच बहु अति क sयार और स्नेह र्थीा, Fो प्रति वादी-1 की पुत्री है, वादी प्रति वादी-1 हर रह से समझौ ा करने को ैयार हो गया और इस कारण से, वादी ने प्रति वादी नंबर 1 की प्रार्थीना को स्वीकार कर लिलया और विदनांक 31.10.1984 क विनष्पादन और पंFीकरण की ारीख बढ़ा विदया और प्रति वादी को शेर्ष नराशिश में से 7000/- रुपये भी दे विदया। इस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रीक े से, भूविम क े करार की क ु ल नराशिश रु. 56,000/- में से, रु. 40,000/- पहले से ही प्रति वादी-1 क पहुंच गया र्थीा और वादी द्वारा भुग ान विकए Fाने क े लिलए क े वल रु. 16,000/- शेर्ष र्थीा। प्रति वादी-1 ने इसको वादी को विदनांक 29.09.1981 को लिललिख रूप में दे विदया।
4. यह विक वादी विबGी विवलेख विनष्पाविद और पंFीक ृ कराने और करार विनयमों और श q क े अपने करार क े लिलए सदैव ैयार और ईप्सिsस रहा है और आF भी है और यह बा प्रति वादी-1 क े पूण ज्ञान में है।
8. यह विक वादी को उपरोक्त करार क े संबं में अति वक्ता श्री महेश चंद्र च ुवyदी द्वारा पंFीक ृ Pाक क े माध्यम से भी नोविटस भेFवाया गया और उसे चे ावनी विदया गया विक वह वादी क े अलावा विकसी अन्य व्यविक्त क े नाम पर विनष्पादन और पंFीकरण नहीं कराएगा। Fल्दबाFी में, नोविटस में क ु छ गलति याँ हुई ंहो गयी र्थीीं।
11. यह विक प्रति वादी-1 को उप-पंFीयन कायालय, चट्टा आकर उपरोक्त करार क े संबं में, वादी क े नाम पर विववाविद भूविम को विनष्पाविद कराकर और पंFीकरण कराने और उसका कब्Fा देने कहा गया र्थीा और प्रति वादी 2-5 को यह भी कहा गया विक क्योंविक उन्हें अपने पक्ष में गल विवGय विवलेख का पंFीकरण कराया इसलिलए उन्हें वादी क े पक्ष में विनष्पादन और पंFीकरण में प्रति वादी-1 क े सार्थी भी शाविमल करवाना चाविहए। लेविकन प्रति वादी-1 ने कहा विक क्योंविक प्रति वादी 2-5 और उनक े विप ा उसे मना कर रहे हैं और वह उनक े इच्छा क े विवरूद्ध नहीं Fा सक े हैं, वह विनष्पादन और पंFीकरण नहीं कर सक े हैं और प्रति वादी 2-5 भी ऐसा करने से इनकार कर े हैं अर्थीवा विनष्पादन और पंFीकरण कराने क े लिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रति वादी-1 क े सार्थी शाविमल हो Fा े हैं और इस कारण से, वादी को व मान वाद को संप्सिस्र्थी करने क े लिलए मFबूर हो Fा ा है। "
6. 1 वादी ने अपने बयान में कहा है विक यह विवशिशष्ट मामला र्थीा विक उसने शुरू में विवGय क े ौर पर रु. 25,000/- का भुग ान विकया गया र्थीा और विवGय विवलेख को दो साल की अवति क े भी र विनष्पाविद विकया Fाना र्थीा। यह विक इसक े उपरान् राम सिंसह, Fो विक वादी का ससुर है, क े विनवेदन करने पर उस अवति को बढ़ा विदया गया। समयावति को विदनांक 31.10.1984 क बढ़ा विदया गया और विफर वादी ने राम सिंसह को रुपये 7000/- का अति रिरक्त भुग ान विकया, सिFसक े लिलए दस् ावेF भी विनष्पाविद विकया गया र्थीा। इस प्रकार, समय-समय पर, क ु ल विवGय प्रति फल की क ु ल नराशिश रू. 56,000/- में से क ु ल रु. 40,000/- का भुग ान विकया गया। अंति म विनष्पाविद दस् ावेF क े अनुसार, सिFसे विनचली सभी अदाल ों द्वारा भी साविब विकया गया है, विवGय विवलेख क े समय शेर्ष नराशिश रु. 16,000/- का भुग ान विकया Fाना र्थीा। बयान में विवशेर्ष रूप से यह कहा गया विक वह विवGय क े करार की श q में अपने दातियत्व क े ह अपने विहस्से का पालन करने क े लिलए ैयार और ईप्सिsस र्थीा और यह थ्य राम सिंसह को प ा र्थीा। उपरोक्त थ्यों और परिरप्सिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए, उच्च न्यायालय ने वादी क े विवरूद्ध त्पर ा और ईsसा क े संबं में इस विववाद्य को पूरी रह से इस आ ार पर विवरतिच करने में गंभीर त्रुविट कारिर विकया है विक अति विनयम की ारा 16 (सी) क े ह अपेतिक्ष वादपत्र में कोई विवशिशष्ट कर्थीन/अशिभवचन नहीं विकया गया है। इस थ्य को ध्यान में रख े हुए विक शुरू में विवGय क े करार क े े समय रु. 25,000/- का भुग ान विकया गया र्थीा और आगे की दो Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकस् ों में रु. 15,000/- का भुग ान उस समय विकया गया र्थीा Fब समयावति क े विवस् ार क े लिलए उwरव & दो दस् ावेFों को विनष्पाविद विकया गया र्थीा और यहां क विक समयावति को प्रति वादी-1 की पहल पर बढ़ाया गया र्थीा और विवGय विवलेख क े े समय शेर्ष नराशिश रु. 6,000/- का भुग ान विकया Fाना र्थीा, यह कहा Fा सक ा है विक वादी विवGय क े करार क े ह करार क े अपने भाग का पालन करने क े लिलए हमेशा ैयार और ईप्सिsस र्थीा। इस स् र पर, करार की आवश्यक श q को पूरा करने की त्पर ा और ईsसा पर विवविनर्दिदष्ट अनु ोर्ष अति विनयम की ारा 16 (सी) क े ह आवश्यक दलीलों पर सैयद दस् गीर (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय क े विनणय को संदर्शिभ करने की आवश्यक ा है। इस मामले में मा. न्यायालय क े समक्ष यह प्रश्न उठाया गया विक विवविनर्दिदष्ट अनु ोर्ष अति विनयम की ारा 16 (सी) की आवश्यक त्वों और इसक े स्पष्टीकरण की व्याख्या क े लिलए " त्पर ा और ईsसा" की यातिचका को क ै से समझा Fाए। अनुच्छेद 9 में इसे विनम्नानुसार ारिर विकया गया हैः