Dr. Sushil Kumar Tripathi v. Jagadguru Ram Bhadracharya Trivkalang Vishwavidyalaya and Another

Supreme Court of India · 29 Oct 2021 · 2021 INSC 692
Nanjay Y. Chandrachud; Trivkram Narthi; B. V. Nagaratna
Civil Appeal No. 6255 of 2021 @ SLP (Civil) No. 17893 of 2008
2021 INSC 692
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that termination of a contractual university professor upon expiry of a UGC scheme was illegal and directed reinstatement with pension benefits, emphasizing adherence to UGC regulations and expert committee recommendations.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 6255/2021
(एसएलपी(दीवानी) सं. 17893/2008 से उद्भू )
डॉ. सुशील क
ु मार त्रित्रपाठी ...अपीलार्थी6 (गण)
बनाम
जगद्गुरू राम भद्राचाय> त्रिवकलांग त्रिवश्वत्रिवद्यालय और एक अन्य ...प्रत्यर्थी6 (गण)
त्रिनण>य
न्यायमूर्ति नागरत्न
यह अपील अपीलक ा> द्वारा दीवानी प्रकीण> रिरट यातिचका संख्या
20470/2007 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ द्वारा पारिर 8 फरवरी
2008 क
े त्रिनण>य से व्यथिर्थी होकर दायर की गई है, जिजसक
े ह पूव क्त रिरट यातिचका
खारिरज कर दी गई र्थीी। mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2021 INSC 692
JUDGMENT

2. संक्षेप में, मामले क े थ्य यह हैं त्रिक प्रत्यर्थी6 -त्रिवश्वत्रिवद्यालय जो वर्ष> 2001 में स्र्थीात्रिप त्रिकया गया र्थीा, को त्रिवश्वत्रिवद्यालय अनुदान आयोग अति त्रिनयम, 1956 (संक्षेप में 'यूजीसी अति त्रिनयम') की ारा 12(ख) क े ह क ें द्र सरकार से सहाय ा प्राप्त करने क े लिलए पात्र त्रिवश्वत्रिवद्यालयों की सूची में शात्रिमल त्रिकया गया र्थीा।

3. प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने वर्ष> 2002 में सामाजिजक त्रिवज्ञान संकाय सत्रिह त्रिवथिभन्न संकाय क े लिलए कानून बनाए, जिजनमें से राजनीति त्रिवज्ञान एक त्रिवभाग है।

4. अप्रैल 2004 में, त्रिवश्वत्रिवद्यालय अनुदान आयोग (सुत्रिव ा क े लिलए 'यूजीसी') ने अपनी दसवीं योजना क े ह राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में एक व्याख्या ा क े लिलए त्रिवत्तीय सहाय ा क े संबं में अनुदान सत्रिह प्रति वादी-त्रिवश्वत्रिवद्यालय को अनुदान जारी त्रिकया। 3 जुलाई 2004 को, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में रिरत्रिक्त को भरने क े लिलए त्रिवज्ञापन त्रिदया। अपीलक ा> ने इसमें आवेदन त्रिकया और सहायक प्रोफ े सर क े पद पर चयत्रिन त्रिकया गया और रु. 8,000-13,500 ग्रेड क े वे नमान में त्रिदसंबर 2004 त्रिदनांत्रिक त्रिनयुत्रिक्त पत्र जारी त्रिकया गया र्थीा।

5. अपीलक ा> क े अनुसार, उसे हर महीने अपने वे न से त्रिवश्वत्रिवद्यालय को दान क े रूप में 5,000 रुपये का भुग ान करने क े लिलए मजबूर त्रिकया गया, जिजस पर उसने आपलित्त ज ाई र्थीी, लेत्रिकन त्रिफर भी त्रिवश्वत्रिवद्यालय को नराथिश का भुग ान जारी रहा। इसक े बाद, अपीलक ा> ने त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति को उसे यूजीसी अनुदान क े ह स्वीकाय> पीएच.डी. प्रोत्साहन राथिश देने क े लिलए लिलखा। 19 जुलाई, 2006 को, त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिनबं क ने जवाब त्रिदया त्रिक चूंत्रिक उनका पद क े वल दसवीं योजना क े लिलए र्थीा, जो 31 माच> 2007 को समाप्त होने वाला र्थीा, इसलिलए उनकी सेवाएं उक्त ति थिर्थी यानी 31 माच> 2007 को स्व ः ही समाप्त हो जाएगीं। अपीलक ा> को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA े त्रिनबं क से 1 माच>, 2007 को एक और संचार प्राप्त हुआ, जिजसमें कहा गया र्थीा त्रिक 31 माच> 2007 से त्रिवश्वत्रिवद्यालय को उनकी सेवाओं की आवश्यक ा नहीं र्थीी, क्योंत्रिक उनका पद समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा।

6. अपीलक ा> ने पद क े उन्मूलन और उसक े परिरणामस्वरूप हटाने से व्यर्थिर्थी होकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष एक दीवानी प्रकीण> यातिचका सं. 20470/2007 दायर की। अपीलक ा> क े अनुसार, एक ओर, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने कहा र्थीा त्रिक उनक े पद को समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा, जबत्रिक दूसरी ओर, ग्यारहवीं योजना क े अन् ग> भी दसवीं योजना क े ह सभी पदों क े लिलए अनुदान जारी रखने क े लिलए प्रत्यर्थी6 संख्या 2-यूजीसी से अनुरो त्रिकया र्थीा जिजसमें दशा>या गया र्थीा त्रिक अपीलक ा> 6 अप्रैल 2007 को राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में काम कर रहा र्थीा।

7. अपीलक ा> क े अनुसार, उच्च न्यायालय ने 2 नवंबर 2007 को उसकी रिरट यातिचका को सूचीबद्ध त्रिकया र्थीा और त्रिनदnश त्रिदया र्थीा त्रिक 5 नवंबर 2007 को लिललिख कर्थीन क > दालिखल त्रिकए जाएँ। 8 फरवरी 2008 त्रिदनांत्रिक आक्षेत्रिप आदेश द्वारा उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने अथिभत्रिन ा>रिर त्रिकया त्रिक पद को समाप्त करने क े प्रत्यर्थी6- े आदेशों में न ो कोई अवै ा र्थीी और न ही कोई त्रुत्रिट र्थीी और इसलिलए अपीलक ा> की सेवाओं को ठीक ही समाप्त त्रिकया र्थीा और रिरट यातिचका खारिरज कर दी गयी। व्यथिर्थी होने क े कारण, अपीलक ा> द्वारा त्रिवशेर्ष अनुमति यातिचका दायर की गई र्थीी जिजसे 7 अक्टूबर 2021 क े आदेश द्वारा अनुमति दी गयी।

8. हमने अपीलक ा> क े त्रिवद्वान अति वक्ता श्री अत्रिम आनंद ति वारी, प्रत्यर्थी6 संख्या 1-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री जिज ेन्द्र मोहन शमा> और प्रत्यर्थी6 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संख्या 2-यूजीसी क े त्रिवद्वान अति वक्ता श्री रत्रिवन्द्र अग्रवाल को सुना और लिललिख कr क े सार्थी अथिभलेख पर उपलब् साक्ष्य का परिरशीलन त्रिकया है।

9. अपीलक ा> की ओर से पेश त्रिवद्वान अति वक्ता श्री ति वारी ने क > त्रिदया त्रिक प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में सहायक प्रोफ े सर क े रूप में अपीलक ा> का पद गल रीक े से समाप्त त्रिकया गया है। इस क > क े समर्थी>न में, 5 फरवरी 2019 त्रिदनांत्रिक त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति की रिरपोट> की जिसफारिरश पर अवलम्ब लिलया गया, जिजसे यूजीसी ने स्वीकार कर लिलया है और प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा उक्त जिसफारिरश पर कोई आपलित्त नहीं ज ाई गई है। उक्त क > को त्रिवस् ृ कर े हुए, यह प्रस् ु त्रिकया गया र्थीा त्रिक अपीलक ा> को 3 जुलाई 2004 त्रिदनांत्रिक एक त्रिवज्ञापन क े अनुसरण में सहायक प्रोफ े सर क े रूप में त्रिनयुक्त त्रिकया गया र्थीा और हालांत्रिक यह दसवीं पंचवर्ष6य योजना क े ह र्थीा और इसे यूजीसी द्वारा समर्थिर्थी त्रिकया गया र्थीा, अपीलक ा> की सेवाएं वास् व में ग्यारहवीं पंचवर्ष6य योजना क े ह भी जारी रहीं। हालाँत्रिक अपीलक ा> की सेवाओं को 31 माच> 2007 को दसवीं पंचवर्ष6य योजना की समात्रिप्त पर, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय में सहायक प्रोफ े सर क े रूप में अपीलक ा> की सेवा को खत्म करने क े आशय से इस आ ार पर गल रीक े से समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा त्रिक उसे दसवीं पंचवर्ष6य योजना क े दौरान त्रिनयुक्त त्रिकया गया र्थीा। लेत्रिकन थ्य यह है त्रिक प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने यूजीसी को संसूतिच त्रिकया र्थीा त्रिक ग्यारहवीं योजना क े ह भी राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में एक पद की आवश्यक ा र्थीी। यह वही पद र्थीा जो अपीलक ा> द्वारा यहां ारिर त्रिकया गया र्थीा। इसलिलए, दसवीं योजना की समात्रिप्त पर अपीलक ा> को हटाया जाना अवै र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

10. अपीलक ा> क े त्रिवद्वान अति वक्ता ने हमारा ध्यान इस थ्य की ओर आकर्षिर्ष त्रिकया त्रिक यूजीसी द्वारा गत्रिठ त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति ने शुरू में एक प्रति क ू ल जिसफारिरश प्रस् ु की र्थीी, लेत्रिकन बाद में जब यूजीसी द्वारा एक अन्य त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति का गठन त्रिकया गया र्थीा, ो अपीलक ा> को प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े सहायक प्रोफ े सर क े रूप में बहाल करने की जिसफारिरश क े सार्थी एक त्रिवस् ृ रिरपोट> प्रस् ु की गई र्थीी। त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति द्वारा त्रिदए गए कारणों से इसका समर्थी>न त्रिकया गया है। यह कहा गया त्रिक त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति ने स्पष्ट रूप से कहा र्थीा त्रिक राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में सहायक प्रोफ े सर क े रूप में अपीलक ा> की सेवा को समाप्त त्रिकया जाना "त्रिवक ृ और गल " र्थीा। इस परिरस्थिस्र्थीति यों में, उक्त जिसफारिरश को स्वीकार त्रिकया जा सक ा है और अपीलक ा> को सेवा में बहाल त्रिकया जा सक ा है। यह क > त्रिदया गया र्थीा त्रिक प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने अपीलक ा> की सेवाओं को समाप्त कर त्रिदया र्थीा क्योंत्रिक उसने पहले त्रिवश्वत्रिवद्यालय को डोनेशन क े रूप में प्रति माह रु. 5000 क े भुग ान क े लिखलाफ त्रिवरो त्रिकया र्थीा क्योंत्रिक उक्त राथिश को त्रिबना त्रिकसी औतिचत्य क े उनक े वे न से काट लिलया गया र्थीा।इसलिलए यह कहा गया र्थीा त्रिक यूजीसी की दूसरी त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति द्वारा की गई जिसफारिरश क े आ ार पर अपीलक ा> को राह दी जा सक ी है क्योंत्रिक प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने इस पर आपलित्त नहीं ज ाई र्थीी।

11. यूजीसी क े त्रिवद्वान अति वक्ता श्री अग्रवाल जिजसे इस अपील में प्रत्यर्थी6 संख्या 2 क े रूप में जोड़ा गया र्थीा, ने यह भी कहा त्रिक 19 अक्टूबर 2012 त्रिदनांत्रिक अपीलक ा> क े प्रत्यावेदन पर यूजीसी क े अध्यक्ष द्वारा त्रिवचार त्रिकया गया र्थीा, जैसा त्रिक पूव>व 6 त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति की रिरपोट> में त्रुत्रिटयों को दर्थिश त्रिकया गया र्थीा और अपीलक ा> की थिशकाय ों पर पुनर्षिवचार करने क े लिलए दूसरी त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गत्रिठ त्रिकया गया र्थीा। दूसरी त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति ने अपीलक ा> द्वारा प्रस् ु दस् ावेजों जिजसमें सूचना क े अति कार अति त्रिनयम (आरटीआई अति त्रिनयम) क े ह प्राप्त दस् ावेज भी र्थीे, पर त्रिवचार त्रिकया और त्रिनम्नानुसार कहाः "यातिचकाक ा> द्वारा त्रिदए गए आरटीआई आवेदन क े जवाब में, त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने स्वीकार त्रिकया र्थीा त्रिक दसवीं योजना क े ह त्रिनयुक्त सभी थिशक्षकों को उनकी त्रिनयुत्रिक्त की ारीख से त्रिनयत्रिम कर त्रिदया गया र्थीा और इस आशय का एक आदेश त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा 27.03.2010 को जारी त्रिकया गया र्थीा। त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा यूजीसी को लिलखे गए 28.07.2018 त्रिदनांत्रिक पत्र क े अनुसार, यह कहा गया र्थीा त्रिक दसवीं योजना क े ह त्रिनयुक्त सभी थिशक्षकों को 5 साल क े लिलए एक अनुबं पर त्रिनयुक्त त्रिकया गया र्थीा, लेत्रिकन त्रिदनांक 27.03.2020 क े आदेश क े अनुसरण में, दसवीं योजना क े ह त्रिनयुक्त थिशक्षकों को उनकी त्रिनयुत्रिक्त की ारीख से त्रिनयत्रिम माना गया। राजनीति त्रिवज्ञान और दश>न त्रिवभाग की समात्रिप्त क े बाद भी, त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने 06.04.2007 त्रिदनांत्रिक पत्र द्वारा यूजीसी से बारहवीं योजना क े ह नराथिश मांगी र्थीी। अपने प्रस् ाव में त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने राजनीति क त्रिवज्ञान त्रिवभाग में एक पद की अति रिरक्त आवश्यक ा त्रिदखाई र्थीी और उक्त त्रिवभाग में मौजूदा काय>र की संख्या 2 त्रिदखायी गयी र्थीी। यातिचकाक ा> को क ु लपति द्वारा लिलखे गए 13.11.2008 त्रिदनांत्रिक पत्र में यह स्वीकार त्रिकया गया र्थीा यह त्रिदखाने क े लिलए कु छ नहीं र्थीा त्रिक यातिचकाक ा> की त्रिनयुत्रिक्त संत्रिवदात्मक र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA े क ु लपति ने 05.12.2008 त्रिदनांत्रिक अपने पत्र में स्वीकार त्रिकया र्थीा त्रिक उस स्थिस्र्थीति में जहाँ कोई छात्र नामांत्रिक नहीं है, ो भी त्रिवभाग को अन्य त्रिवभागों में थिशक्षकों क े त्रिवलय /समायोजन का प्राव ान करक े समाप्त त्रिकया जा सक ा है। 10 वीं योजना क े ह त्रिनयुक्त अन्य सभी व्यत्रिक्तयों को त्रिनयत्रिम त्रिकया गया र्थीा जिसवाय यातिचकाक ा> को त्रिनयत्रिम नहीं त्रिकया गया र्थीा।" प्रत्यर्थी6-यूजीसी क े त्रिवद्वान अति वक्ता द्वारा आगे यह कहा गया र्थीा त्रिक दूसरी त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति ने जिसफारिरश की र्थीी त्रिक अपीलक ा> की सेवाओं को समाप्त करना "त्रिवक ृ और गल " र्थीा और इसलिलए उन्हें राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग क े सहायक प्रोफ े सर क े रूप में बहाल त्रिकया जाना र्थीा और यत्रिद उक्त त्रिवभाग को समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा, ो त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिकसी अन्य त्रिवभाग या संकाय में समायोजिज त्रिकया जाना र्थीा।

12. इसक े त्रिवपरी, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री शमा> ने आक्षेत्रिप त्रिनण>य में उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ क े क > को दोहराया और कहा त्रिक अपीलक ा> की त्रिनयुत्रिक्त दसवीं पंचवर्ष6य योजना क े ह स्वीक ृ यूजीसी की एक योजना क े ह र्थीी और उक्त त्रिनयुत्रिक्त 31 माच> 2007 को उक्त योजना की समात्रिप्त पर समाप्त होनी र्थीी। इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा अपीलक ा> की सेवाओं को सही रूप से समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा क्योंत्रिक अपीलक ा> द्वारा ारिर पद समाप्त हो गया र्थीा और अपीलक ा> की सेवाओं की अब त्रिवश्वत्रिवद्यालय को आवश्यक ा नहीं र्थीी। यह क > त्रिदया गया र्थीा त्रिक अपीलक ा> की त्रिनयुत्रिक्त स्र्थीायी आ ार पर नहीं र्थीी, लेत्रिकन जिजस पद को अपीलक ा> द्वारा ारिर त्रिकया गया र्थीा, वह दसवीं योजना क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ह र्थीा और यह अपीलक ा> को जारी 4 त्रिदसंबर 2004 त्रिदनांत्रिक त्रिनयुत्रिक्त पत्र में स्पष्ट रूप से उजि~लिख त्रिकया गया र्थीा त्रिक पद पर उनकी त्रिनयुत्रिक्त दसवीं योजना क े ह र्थीी और उनक े प्रदश>न व पद की उपलब् ा क े आ ार पर जारी रहने की संभावना र्थीी। चूंत्रिक 31 माच> 2007 को दसवीं योजना समाप्त हो गई र्थीी, अपीलक ा> द्वारा ारिर पद समाप्त हो गया र्थीा और इसलिलए अपीलक ा> की सेवाओं को सही रीक े से समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा क्योंत्रिक उनकी त्रिनयुत्रिक्त एक काय>काल आ ारिर त्रिनयुत्रिक्त र्थीी और पद को समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा। यह कहा गया र्थीा त्रिक उपरोक्त थ्यों क े मद्देनजर, उच्च न्यायालय ने सही त्रिनष्कर्ष> त्रिनकाला र्थीा त्रिक त्रिनयुत्रिक्त की प्रक ृ ति और उसक े त्रिनयमों व श r को ध्यान रख े हुए अपीलक ा> की सेवाओं को 31 माच> 2007 को सही रीक े से समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा।प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने कहा त्रिक इस अपील में कोई बल नहीं है और इसे खारिरज त्रिकया जा सक ा है।

13. इस अपील में जो सवाल उठ ा है, वह यह है त्रिक क्या अपीलक ा> की सेवाओं की समात्रिप्त त्रिवति क र्थीी और कानून क े अनुसार र्थीी या नहीं।

14. यह उ~ेखनीय है त्रिक यूजीसी द्वारा यहाँ पर प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय सत्रिह सभी राज्यों/क ें द्र शाजिस प्रदेशों क े त्रिवश्वत्रिवद्यालयों को 29 मई 2004 त्रिदनांत्रिक संसूचना क े अनुसार, त्रिवश्वत्रिवद्यालयों क े सामने आने वाली त्रिवत्तीय कत्रिठनाइयों क े कारण, यूजीसी ने छात्रों क े त्रिह ों की रक्षा क े लिलए दसवीं योजना अवति क े दौरान अनुमोत्रिद सभी पदों को भरने क े लिलए त्रिवश्वत्रिवद्यालयों को त्रिनम्नलिललिख ीन त्रिवकल्पों की पेशकश करने का त्रिनण>य लिलया र्थीाः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "(क) दसवीं योजना अवति क े बाद इन पदों क े दातियत्व को संभालने क े लिलए राज्य सरकार से आश्वासन प्राप्त त्रिकया जा सक ा है। या (ख) त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा दसवीं योजना क े पश्चा ् इन पदों का भार वहन करने क े लिलए काय>कारी परिरर्षद क े संकल्प क े माध्यम से आश्वासन त्रिदया जा सक ा है। या (ग) त्रिनयुत्रिक्त संत्रिवदात्मक आ ार पर की जाएगी।" त्रिवश्वत्रिवद्यालय यूजीसी त्रिवत्रिनयमों क े ह त्रिन ा>रिर पदों की योग्य ा आत्रिद क े बारे में श r को पूरा करक े सभी पदों को भरने क े लिलए उपरोक्त ीन त्रिवकल्पों में से त्रिकसी एक का त्रिवकल्प चुन सक ा है।

15. द्नुसार 3 जुलाई 2004 को प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में रिरत्रिक्त को भरने क े लिलए त्रिवज्ञापन त्रिदया।त्रिवज्ञापन क े अनुसरण में, अपीलक ा> ने रिरक्त पद क े लिलए आवेदन त्रिकया और उसे राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग, सामाजिजक त्रिवज्ञान संकाय में सहायक प्रोफ े सर क े रूप में त्रिनयुक्त त्रिकया गया। 4 त्रिदसंबर 2004 त्रिदनांत्रिक त्रिनयुत्रिक्त पत्र की खंड संख्या 7, त्रिनम्नानुसार है.......... "पद पर उनकी त्रिनयुत्रिक्त दसवीं योजना क े लिलए है, लेत्रिकन उम्मीदवार क े प्रदश>न और पद की उपलब् ा क े आ ार पर जारी रहने की संभावना है।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

16. अपीलार्थी6 का वे नमान 8,000-13,500 रुपये र्थीा और सकल वे न 13,095 रुपये र्थीा। अपीलक ा> क े अनुसार, डोनेशन क े रूप में वे न से प्रति माह रु. 5000 की कटौ ी की जा रही र्थीी जो त्रिक उनक े सकल वे न का 38.18% र्थीा, जिजस पर अपीलक ा> द्वारा आपलित्त ज ाई गई र्थीी। इसक े अलावा, अपीलक ा> ने 19 जुलाई 2006 को अपने पत्र द्वारा, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति को संबोति कर े हुए, पीएचडी प्रोत्साहन राथिश और वार्षिर्षक वे न वृतिद्ध क े लाभ क े लिलए और महंगाई भत्ते आत्रिद का भुग ान करने की मांग की। पूव क्त पत्र की कोई जबाव नहीं त्रिमला, लेत्रिकन 1 माच> 2007 को, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिनबं क ने अपीलक ा> को सूतिच त्रिकया त्रिक उन्हें दसवीं पंचवर्ष6य योजना क े ह सहायक प्रोफ े सर क े रूप में सामाजिजक त्रिवज्ञान संकाय, राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में त्रिनयुक्त त्रिकया गया र्थीा जो 31 माच> 2007 को समाप्त होने वाला र्थीा और इसलिलए, उनकी त्रिनयुत्रिक्त उक्त ति थिर्थी को स्व ः समाप्त होने वाली र्थीी और उनकी सेवाओं की आवश्यक ा पूरी रह से े त्रिनण>य पर त्रिनभ>र करेगी। उपरोक्त क े क्रम में, 31 माच>, 2007 को, त्रिनबं क ने अपीलक ा> को सूतिच त्रिकया त्रिक त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े 28 माच> 2007 क े त्रिनण>य क े अनुसार, अपीलक ा> द्वारा ारिर त्रिकए गए पद को समाप्त कर त्रिदया गया र्थीा और इसलिलए त्रिवश्वत्रिवद्यालय को उनकी सेवाओं की आवश्यक नहीं है।

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17. अपीलक ा> ने त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा लिलखे गए यूजीसी, अध्यक्ष को संबोति 6 अप्रैल 2007 त्रिदनांत्रिक संसूचना को प्रस् ु त्रिकया है जिजसमें दसवीं योजना क े दौरान यूजीसी क े उदार योगदान और ग्यारहवीं योजना क े प्रस् ाव में प्रत्येक संकाय में काय>क्षम ा क े त्रिववरण सत्रिह यूजीसी द्वारा त्रिकए जाने वाले योगदान को ब ाया गया है। अपीलक ा> क े अनुसार, दसवीं योजना क े अं में, राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा समाप्त नहीं त्रिकया गया र्थीा और न ही यह कहा जा सक ा है त्रिक उक्त त्रिवभाग में त्रिकसी भी व्याख्या ा आत्रिद की आवश्यक ा नहीं र्थीी।

18. इसक े अलावा, 4 त्रिदसंबर 2004 क े त्रिनयुत्रिक्त पत्र को पढ़ने पर, यह स्पष्ट है त्रिक अपीलक ा> की त्रिनयुत्रिक्त संत्रिवदात्मक आ ार पर नहीं र्थीी, बस्थिल्क इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया र्थीा त्रिक त्रिनयुत्रिक्त दसवीं योजना क े ह र्थीी और अभ्यर्थी6 क े प्रदश>न और पद की उपलब् ा क े आ ार पर इसे जारी रखने की संभावना र्थीी।

19. वास् व में, यूजीसी को 6 मई 2010 क े आदेश द्वारा इस अपील में प्रत्यर्थी6 संख्या 2 क े रूप में जोड़ा गया र्थीा और उसे उच्च न्यायालय क े त्रिकसी त्रिनष्कर्ष> से प्रभात्रिव हुए त्रिबना अपीलक ा> क े प्रत्यावेदन पर त्रिवचार करने क े लिलए त्रिनदnथिश त्रिकया गया र्थीा।

20. यूजीसी क े अनुसार, शुरू में अपीलक ा> का प्रत्यावेदन एक त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति क े समक्ष रखा गया र्थीा, जिजसने अपीलक ा> की थिशकाय ों की जांच की और यूजीसी को अपनी रिरपोट> प्रस् ु की। यूजीसी ने त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति द्वारा प्रस् ु रिरपोट> क े आलोक में अपीलक ा> क े प्रत्यावेदन की जांच की और 23 त्रिदसंबर 2011 क े आदेश द्वारा प्रत्यावेदन को अस्वीकार कर त्रिदया र्थीा।अपीलक ा> ने त्रिफर से 19 अक्टूबर 2012 को यूजीसी क े अध्यक्ष को एक प्रत्यावेदन त्रिदया जिजसमें त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति की रिरपोट> में त्रुत्रिटयों को दशा>या गया और उनक े मामले की त्रिफर से जांच क े लिलए अनुरो त्रिकया। अपीलक ा> ने यूजीसी और त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति क े त्रिवचार क े लिलए सूचना क े अति कार अति त्रिनयम क े ह क ु छ दस् ावेज भी प्राप्त त्रिकए र्थीे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

21. यूजीसी ने इस न्यायालय क े त्रिनदnश पर अपीलक ा> की थिशकाय ों की नए जिसरे से जाँच करने क े लिलए एक अन्य त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति का गठन त्रिकया और 29 जनवरी 2019 को आयोजिज त्रिवचार-त्रिवमश> क े बाद और अपीलक ा> द्वारा रखी गई सामग्री को ध्यान में रख े हुए त्रिनम्नानुसार त्रिवचार त्रिकया और जिसफारिरश की हैः "(I) त्रिदनांक 04.12.2004 क े त्रिनयुत्रिक्त पत्र की श r क े संबं में, यह देखा गया है त्रिक त्रिनयुत्रिक्त पत्र इस मुद्दे पर पूरी रह से मौन र्थीा त्रिक त्रिनयुत्रिक्त स्र्थीायी र्थीी या संत्रिवदात्मक। इसमें क े वल यह उ~ेख त्रिकया गया र्थीा त्रिक पद पर उनकी त्रिनयुत्रिक्त दसवीं योजना क े लिलए र्थीी, लेत्रिकन उम्मीदवार क े प्रदश>न और पद की उपलब् ा क े आ ार पर जारी रहने की संभावना र्थीी। जेआरएचयू त्रिवत्रिनयम, 2002 क े खंड 10.21 क े अनुसार, सभी थिशक्षकों की त्रिनयुत्रिक्त 12 महीने की अवति क े लिलए परिरवीक्षा पर की जानी र्थीी और त्रिकसी भी रह से इसे 24 महीने से आगे नहीं बढ़ाया जा सक ा र्थीा।खण्ड

10.22 क े अनुसार, परिरवीक्षा अवति क े अं में, ईसी द्वारा उनकी त्रिनयुत्रिक्त पर पद ारी को स्र्थीायी त्रिकया जाना र्थीा। इसको भी त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा डॉ. त्रित्रपाठी को आरटीआई क े ह त्रिदए गए 14.08.2013 त्रिदनांत्रिक उनक े जबाब में स्वीकार त्रिकया गया र्थीा।उक्त जबाव (1/बी पर जबाव) में यह भी उ~ेख त्रिकया गया र्थीा त्रिक परिरवीक्षा पूरी होने पर, सभी त्रिनयुत्रिक्त को स्र्थीायी माना जाएगा। इसक े अलावा, उक्त जबाव में यह भी कहा गया र्थीा त्रिक दसवीं योजना क े ह त्रिनयुक्त थिशक्षकों को उनकी त्रिनयुत्रिक्त की ारीख से स्र्थीायी त्रिकया गया र्थीा और उक्त आदेश 27.03.2010 को जारी त्रिकया गया र्थीा (आरटीआई उत्तर क े उत्तर 3 में)। आरटीआई क े ह उसी जवाब में, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह कहा गया है त्रिक त्रिनयुक्त थिशक्षकों को परिरवीक्षा पूरी होने की ारीख से वार्षिर्षक वे न वृतिद्ध भी दी गई र्थीी। यहां यह ब ाया जाना चात्रिहए त्रिक डॉ. त्रित्रपाठी को भी वार्षिर्षक वे न वृतिद्ध दी गई र्थीी। आवेदक- डॉ. त्रित्रपाठी द्वारा आरटीआई क े ह प्राप्त त्रिकए गए इन थ्यों को यूजीसी सत्रिमति क े समक्ष नहीं रखा गया र्थीा, जिजसने 2011 में डॉ. त्रित्रपाठी क े प्रत्यावेदन पर त्रिवचार त्रिकया र्थीा और त्रिनस् ारिर त्रिकया र्थीा। अनुलग्नक-III पर रखा गया (II) यहां त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा यूजीसी को लिलखे गए त्रिदनांक 28.07.2018 क े पत्र का भी संदभ> त्रिदया जा सक ा है, जिजसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है त्रिक दसवीं योजना क े ह त्रिनयुक्त सभी थिशक्षकों को 31.03.2007 को उनकी अवति क े अं में 5 साल क े लिलए संत्रिवदा पर त्रिनयुक्त त्रिकया गया र्थीा, लेत्रिकन 27.03.2010 क े आदेश क े अनुसरण में और इसी क े अनुपालन में, दसवीं योजना क े ह त्रिनयुक्त थिशक्षकों को उनकी त्रिनयुत्रिक्त की ारीख से स्र्थीायी माना गया र्थीा। अनुलग्नक-IV पर रखा गया यह थ्य भी यूजीसी सत्रिमति क े समक्ष नहीं रखा गया र्थीा, जिजसने 2011 में डॉ. त्रित्रपाठी क े प्रत्यावेदन पर त्रिवचार त्रिकया र्थीा और इसका त्रिनस् ारण त्रिकया र्थीा जैसा त्रिक यह जानकारी त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा यूजीसी क े एक पत्र क े 28.07.2018 त्रिदनांत्रिक जबाव में दी गई र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (III) त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा अपने 25.04.2008 त्रिदनांत्रिक पत्र द्वारा लिलए गए इस रूख क े संबं में त्रिक दसवीं योजना में की गई त्रिनयुत्रिक्त संत्रिवदात्मक आ ार पर र्थीी, यह एक बाद का त्रिवचार (सोचने-समझने क े बाद का) प्र ी हो ा है क्योंत्रिक यह त्रिवश्वत्रिवद्यालय की दो संसूचनाओं से त्रिनकल कर आ ा है। पहला, 28.03.2007 त्रिदनांत्रिक ईसी की बैठक जिजसमें यह त्रिनण>य लिलया गया त्रिक अन्य सभी त्रिवभाग जारी रहेंगें जिसवाय राजनीति त्रिवज्ञान और दश>न त्रिवभागों क े, जिजन्हें बंद करने का त्रिनण>य लिलया गया र्थीा। लेत्रिकन अजीब ढंग से, त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने इसक े बाद 06.04.2007 त्रिदनांत्रिक अपने पत्र में ुरं लिलखा और यूजीसी, अध्यक्ष को संबोति कर े हुए, यूजीसी ने ग्यारहवीं योजना क े लिलए अपने प्रस् ाव में राजनीति त्रिवज्ञान (1) क े पद की अति रिरक्त आवश्यक ा क े बारे में उ~ेख त्रिकया है और कॉलम में "31.03.2007 को नामांकन की संख्या" क ु ल 60 त्रिदखायी गयी है। राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में काय>र संख्या को भी "2" क े रूप में त्रिदखाया गया है। क्रमशः अनुलग्नक-V और VI पर रखा गया (IV) यह उ~ेख करना भी उतिच है त्रिक त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिदनांक 06.04.2007 क े पत्र क े आ ार पर, यूजीसी ने अपने 16.07.2007 त्रिदनांत्रिक पत्र द्वारा सामान्य त्रिवकास सहाय ा की पहली त्रिकस् जारी की, जिजसमें त्रिवशेर्ष रूप से उ~ेख त्रिकया गया त्रिक 'आयोग ने त्रिवश्वत्रिवद्यालयों को पुस् कों, पत्रित्रकाओं और उपकरणों की खरीद और दसवीं योजना क े पदों Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े लिलए इस अनुदान का उपयोग करने की अनुमति देने का त्रिनण>य लिलया है।' अनुलग्नक-VIII पर रखा गया (v) यह भी देखना उतिच है त्रिक जेआरएचयू क े क ु लपति ने डॉ. त्रित्रपाठी को संबोति अपने पत्र त्रिदनांक 13.11.2008 में स्पष्ट रूप से कहा र्थीा त्रिक "डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी की त्रिनयुत्रिक्त कोई श > नहीं त्रिदखा ी है त्रिक उन्हें संत्रिवदा क े आ ार पर त्रिनयुक्त त्रिकया गया है और वास् व में त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति ने उप त्रिनदेशक, दूरस्र्थी थिशक्षा परिरर्षद, मैदान गढ़ी, नई त्रिद~ी को लिलखे गए 22.01.2006 त्रिदनांत्रिक पत्र में उन्हें स्र्थीायी कम>चारी क े रूप में त्रिदखाया है। मुझे यहां उ~ेख करना चात्रिहए त्रिक 10 वीं योजना क े ह यूजीसी द्वारा स्वीक ृ और त्रिवत्तीय रूप से समर्थिर्थी पद योजना क े अं में स्व-समाप्त नहीं त्रिकया जा सक ा है। हालांत्रिक त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े पास त्रिकसी भी त्रिवभाग को समाप्त करने की शत्रिक्त है, लेत्रिकन आश्वासन देने क े बाद यूजीसी द्वारा 10 वीं योजना क े ह स्वीक ृ पद को नहीं।" सत्रिमति क ु लपति, जेआरएचयू द्वारा डॉ. त्रित्रपाठी को लिलखे गए त्रिदनांक 05.12.2008 क े पत्र को भी संदर्थिभ कर ी है, जिजसमें त्रिनम्नानुसार यह कहा गया हैः "यह स्पष्ट त्रिकया जा ा है त्रिक छात्रों क े नामांत्रिक होने की स्थिस्र्थीति में त्रिकसी भी त्रिवभाग को समाप्त नहीं त्रिकया जा सक ा है।यहां क त्रिक ऐसे मामलों में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जहाँ कोई छात्र नहीं है, क े वल त्रिवभाग को त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े अन्य त्रिवभाग/संकाय में कम>चारी और थिशक्षकों क े समायोजन का प्राव ान करक े समाप्त त्रिकया जा सक ा है।" त्रिदनांक 13.11.2008 और 05.12.2008 क े पत्रों की प्रति अनुलग्नक - VIII पर रखी गई है। (VI) यह प्रदर्थिश कर ा है त्रिक त्रिवश्वत्रिवद्यालय, उन कारणों से जिजसे वे ठीक से जान े हैं, क े वल डॉ. त्रित्रपाठी को जारी रखने में रुतिच नहीं रख े र्थीे, जबत्रिक दसवीं योजना क े ह अन्य सभी त्रिनयुक्त व्यत्रिक्तयों को स्र्थीायी त्रिकया गया र्थीा और अन्य सभी लाभों को बढ़ाया गया र्थीा।" "इस मामले क े उपयु>क्त थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए और यूजीसी का 23/12/2011 त्रिदनांत्रिक पहले का आदेश जिजसकी संख्या एफ 85-1/2013 (एसयू-II) है, क े अति क्रमण में, इस सत्रिमति का त्रिवचार है त्रिक डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी क े सर, राजनीति त्रिवज्ञान क े पद/सेवाओं को समाप्त करना त्रिवक ृ और गल र्थीा और इस प्रकार, यह सत्रिमति जिसफारिरश कर ी है त्रिक जेआरएचयू में राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग क े सर क े रूप में डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी की सेवाओं को जारी रखा जा सक ा है जैसा त्रिक दसवीं योजना क े समान रूप से त्रिनयुक्त थिशक्षकों क े मामलों में त्रिकया गया र्थीा। यत्रिद त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को समाप्त कर त्रिदया गया है, ो त्रिवश्वत्रिवद्यालय े अन्य त्रिवभाग/संकाय में डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी को समायोजिज कर सक ा है।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 5 फरवरी 2019 की त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति क े काय>वृत्त की एक प्रति यूजीसी द्वारा अनुलग्नक आर-1 क े रूप में संलग्न की गई है।

22. पूव क्त जिसफारिरश को उद्धृ करने पर, यूजीसी ने 28 फरवरी 2019 क े अपने आदेश द्वारा प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े त्रिनबं क क े सार्थी-सार्थी अपीलक ा> को संबोति कर े हुए त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति की जिसफारिरश क े बारे में सूतिच त्रिकया और त्रिनम्नानुसार त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा उक्त आदेश की प्रात्रिप्त की ारीख से एक महीने क े भी र इसक े लिलए आपलित्तयां, यत्रिद कोई हो, आमंत्रित्र कींः "इस मामले क े उपयु>क्त थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों क े मद्देनजर और यूजीसी का 23/12/2011 त्रिदनांत्रिक पहले का आदेश जिजसकी संख्या एफ 85- 1/2013 (एसयू-II) है, क े अति क्रमण में, इस सत्रिमति का त्रिवचार है त्रिक डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी क े सर, राजनीति त्रिवज्ञान क े पद/ सेवाओं को समाप्त करना त्रिवक ृ और गल र्थीा और इस प्रकार, यह सत्रिमति जिसफारिरश कर ी है त्रिक जेआरएचयू में राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग क े सहायक प्रोफ े सर क े रूप में डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी की सेवाओं को जारी रखा जा सक ा है जैसा त्रिक दसवीं योजना क े समान रूप से त्रिनयुक्त थिशक्षकों क े मामलों में त्रिकया गया र्थीा।यत्रिद त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को समाप्त कर त्रिदया गया है, ो त्रिवश्वत्रिवद्यालय त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े अन्य त्रिवभाग/संकाय में डॉ. सुशील क ु मार त्रित्रपाठी को समायोजिज कर सक ा है।" यह त्रिदखाने क े लिलए अथिभलेख पर कोई साक्ष्य नहीं रखा गया है त्रिक प्रत्यर्थी6- त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा यूजीसी क े पूव क्त आदेश पर कोई आपलित्त ज ाई गई है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

23. यह स्पष्ट है त्रिक 8 फरवरी 2019 को यूजीसी क े आदेश द्वारा गत्रिठ त्रिवशेर्षज्ञ सत्रिमति की पूव क्त जिसफारिरश, अपीलक ा> क े प्रत्यावेदन को खारिरज कर े हुए यूजीसी द्वारा त्रिदनांक 23 त्रिदसंबर 2011 को पारिर पहले क े आदेश क े त्रिवपरी है।.

24. वास् व में, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति द्वारा अपीलक ा> को भेजे गए 13 नवंबर 2008 त्रिदनांत्रिक संसूचना क े परिरशीलन पर, यह स्पष्ट रूप से दर्थिश त्रिकया गया र्थीा त्रिक अपीलक ा> की त्रिनयुत्रिक्त संत्रिवदात्मक आ ार पर नहीं र्थीी और वास् व में, अपीलक ा> को 22 जनवरी 2006 त्रिदनांत्रिक पत्र में स्र्थीायी कम>चारी क े रूप में त्रिदखाया गया र्थीा, जो त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति द्वारा उप त्रिनदेशक, दूरस्र्थी थिशक्षा परिरर्षद को लिलखा गया र्थीा। इसने आगे कहा त्रिक अपीलक ा> द्वारा ारिर पद को दसवीं योजना क े ह यूजीसी द्वारा अनुमोत्रिद और त्रिवत्तीय रूप से समर्थिर्थी त्रिकया गया र्थीा और योजना क े अं में इसे स्व ः समाप्त नहीं त्रिकया जाएगा।

25. इसक े अलावा, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े पास त्रिकसी भी त्रिवभाग को समाप्त करने की शत्रिक्त र्थीी, लेत्रिकन यूजीसी द्वारा दसवीं योजना क े ह स्वीक ृ पद को नहीं। 5 त्रिदसंबर 2008 त्रिदनांत्रिक प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति क े एक अन्य पत्र में अपीलक ा> को संबोति कर े हुए यह भी कहा गया त्रिक यत्रिद त्रिकसी त्रिवभाग में छात्र नामांत्रिक हैं, ो त्रिवभाग को समाप्त नहीं त्रिकया जा सक ा है। क े वल ब जब कोई छात्र नहीं हैं, ो त्रिवभाग को त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े अन्य त्रिवभागों या संकाय में त्रिवभाग क े कम>चारिरयों और थिशक्षकों क े त्रिवलय या समायोजन का प्राव ान करक े समाप्त त्रिकया जा सक ा है।

26. अथिभलेख पर मौजूद सामग्री पर त्रिवचार करने पर, त्रिनम्नलिललिख त्रिनष्कर्ष> त्रिनकलेंगेः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA. (क) अपीलार्थी6 की त्रिनयुत्रिक्त प्रक ृ ति में संत्रिवदात्मक नहीं र्थीी और उसे वार्षिर्षक वे न वृतिद्ध का भी भुग ान त्रिकया जा रहा र्थीा। लेत्रिकन, चूंत्रिक उन्होंने हर महीने अपने वे न से 5000 रुपये की कटौ ी का त्रिवरो त्रिकया, इसलिलए वे न वृतिद्ध रोक दी गई और बाद में, उनकी सेवाओं को भी समाप्त कर त्रिदया गया। (ख) इसक े अलावा, जब ग्यारहवीं योजना क े लिलए अनुदान की मंजूरी क े लिलए प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क ु लपति द्वारा यूजीसी को एक संसूचना संबोति की गयी र्थीी, ो अपीलक ा> क े पद की समात्रिप्त क े बारे में कोई उ~ेख नहीं र्थीा। (ग) त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को जारी रखने क े लिलए छात्रों की संख्या भी पया>प्त र्थीी। (घ) यूजीसी क े पास दसवीं पंचवर्ष6य योजना क े पूरा होने क े बाद भी पद क े लिलए अनुदान क े रूप में भुग ान करने क े लिलए न र्थीा जहाँ क त्रिनयत्रिम त्रिनयुत्रिक्तयों का संबं है, अपीलक ा> एक ऐसा त्रिनयत्रिम त्रिनयुक्त थिशक्षक र्थीा जिजसे त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े क़ानून क े ह त्रिन ा>रिर अपेतिक्ष प्रत्रिक्रया का पालन करने क े बाद त्रिनयुक्त त्रिकया गया र्थीा। (ड़) त्रिवश्वत्रिवद्यालय ने एक ओर यूजीसी को यह दर्थिश त्रिकया त्रिक सहायक प्रोफ े सर का पद समाप्त कर त्रिदया गया है, जबत्रिक दूसरी ओर, यह भी कहा त्रिक छात्रों की पया>प्त संख्या होने क े कारण राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को जारी रखा जा रहा र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (च) यूजीसी ने 16 जुलाई 2007 को अपनी संसूचना द्वारा, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय को दसवीं योजना को ग्यारहवीं योजना क े रूप में जारी रखने का त्रिनदnश त्रिदया र्थीा। अपीलार्थी6 द्वारा ारिर पद ग्यारहवीं योजना क े ह भी जारी रहेगा। (छ) इसमें अपीलक ा> द्वारा ारिर त्रिकए गए पद की कोई समात्रिप्त नहीं र्थीी और न ही प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को समाप्त त्रिकया गया र्थीा। (ज) यह उपरोक्त परिरस्थिस्र्थीति यों में है त्रिक यूजीसी ने इस न्यायालय द्वारा जारी त्रिनदnश क े अनुसार अपीलार्थी6 क े प्रत्यावेदन पर पुनर्षिवचार कर े हुए जिसफारिरश की र्थीी त्रिक अपीलक ा> की सेवाओं की समात्रिप्त गल र्थीी और इसलिलए उसकी सेवाओं को जारी रखा जाना चात्रिहए जैसा त्रिक दसवीं योजना क े उसी क े समान त्रिनयुक्त व्यत्रिक्तयों क े मामले में त्रिकया गया है। यूजीसी ने यह भी जिसफारिरश की त्रिक यत्रिद त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग को समाप्त कर त्रिदया गया है, ो अपीलक ा> को े सामाजिजक त्रिवज्ञान संकाय में समायोजिज त्रिकया जाए। (झ) यूजीसी की पूव क्त जिसफारिरश और प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय क े आदेश पर कोई आपलित्त नहीं की गई है।

27. उपरोक्त परिरचचा> क े मद्देनजर, हम पा े हैं त्रिक अपीलक ा> की सेवाओं की समात्रिप्त अवै र्थीी और त्रिवति क े अनुसार नहीं र्थीी।परिरणामस्वरूप, हम उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश को अपास् कर े हैं और अपील को अनुमति दे े हैं। इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, प्रत्यर्थी6-त्रिवश्वत्रिवद्यालय को त्रिनदnश त्रिदया जा ा है त्रिक वह अपीलक ा> को राजनीति त्रिवज्ञान त्रिवभाग में सहायक प्रोफ े सर क े रूप में बहाल करे और उसे क े वल पेंशन व सेवात्रिनवृत्त लाभों क े उद्देश्य से सेवाओं क े जारी रहने का लाभ प्रदान करे, यत्रिद कोई Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हो। हालांत्रिक अपीलक ा> 31 माच> 2007 से बहाली की ारीख क की अवति क े लिलए कोई वे न प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा, क्योंत्रिक उसने "काम नहीं, ो वे न नहीं" क े जिसद्धां पर उक्त अवति में काय> नहीं त्रिकया है। हालाँत्रिक अपीलक ा> वे न और अन्य लाभों क े प्र ीकात्मक त्रिन ा>रण का हकदार है, यत्रिद अपीलक ा> क े समान अन्य व्यत्रिक्तयों को त्रिवश्वत्रिवद्यालय द्वारा इस रह क े लाभ त्रिदए गए हैं।

28. लंत्रिब वादकालीन आवेदन, यत्रिद कोई हों, त्रिनस् ारिर की जा ी है।..................................................... [न्यायमूर्ति डॉ नंजय वाई चंद्रचूड़] …………...............................… [न्यायमूर्ति त्रिवक्रम नार्थी] ………………………….......... [न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न] नई त्रिद~ी; 29 अक्टूबर 2021. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA