Uttar Pradesh State v. Premala

Supreme Court of India · 05 Oct 2021
M. R. Shah; A. S. Bopanna
Civil Appeal No. 620 of 2018
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that compassionate appointment must be to a suitable post based on eligibility and qualifications, and refusal to accept the offered lower post disentitles the applicant from claiming a higher post.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 6003 वर्ष" 2021
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य।.. .. अपीलार्थी- (गण)
बनाम
प्रेमल ा .. प्रत्यर्थी- (गण)
निनण"य
न्यायमूर्ति एम आर शाह
JUDGMENT

1. निवशेर्ष अपील ति:फ े क्टि=>व (एसए:ी) सं. 620 वर्ष" 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 14.09.2018 क े आक्षेनिप निनण"य और आदेश से असं ुष्ट व व्यथिर्थी होकर उत्तर प्रदेश राज्य ने व "मान अपील दायर की है, जिNसक े ह उच्च न्यायालय की खण्ड़ पीठ ने उक्त अपील की अनुमति दी है और निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर 31.07.2018 क े निनण"य और आदेश को रद्द कर निदया है और परिरणामस्वरूप अपीलक ा"ओं-मूल प्रत्यर्थिर्थीओं को निनद[श निदया है mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निक वे ग्रे: III सेवा में अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त क े लिलए प्रत्यर्थी-- यहाँ पर मूल अपीलक ा" की अभ्यर्थिर्थी ा पर निवचार करें।

2. संक्षेप में व "मान अपील करने क े लिलए थ्य निनम्नानुसार हैंः- 2.[1] यह निक मृ क कम"चारी अपनी मृत्यु क े समय उत्तर प्रदेश पुलिलस रेति:यो निवभाग (वग" IV) ) में संदेशवाहक क े रूप में सेवार र्थीा, निदनांक 07.11.2014 को उसकी मृत्यु हो गई। मृ क-सरकारी कम"चारी की निव वा होने क े ना े इस वाद की प्रत्यर्थी- ने अनुक ं पा क े आ ार पर पुलिलस रेति:यो निवभाग में सहायक ऑपरे>र क े पद पर निनयुनिक्त क े लिलए निदनांक 05.12.2014 को एक आवेदन प्रस् ु निकया, जिNसे इस आ ार पर खारिरN कर निदया गया निक वह उक्त पद क े लिलए अपेतिक्ष पात्र ा मानदं: को पूरा नहीं कर रही है। इसक े बाद प्रत्यर्थी- ने अनुक ं पा क े आ ार पर काय"शाला कम- क े लिलए उत्तर प्रदेश पुलिलस रेति:यो मुख्यालय, लखनऊ क े समक्ष एक और आवेदन प्रस् ु निकया। हालाँनिक, चूंनिक वह काय"शाला कम"चारी क े चयन क े लिलए 28.01.2018 को आयोजिN शारीरिरक दक्ष ा परीक्षा को उत्तीण" करने में निवफल रही, इसलिलए अनुक ं पा क े आ ार पर काय"शाला कम"चारी क े रूप में निनयुनिक्त क े लिलए उसका आवेदन खारिरN कर निदया गया। काय"शाला कम"चारी क े पद पर शारीरिरक पात्र ा परीक्षा में असफल होने क े कारण, पुलिलस रेति:यो मुख्यालय, उ.प्र., लखनऊ क े 23.02.2018 क े पत्र द्वारा प्रत्यर्थी- को रेति:यो निवभाग में काय"शाला कम- क े नीचे की रैंक का पद यानी संदेशवाहक क े पद की पेशकश की गई र्थीी। उक्त पद को स्वीकार करने क े बNाय प्रत्यर्थी- ने उच्च न्यायालय क े समक्ष रिर> यातिचका दायर की, जिNसमें अनुक ं पा क े आ ार पर मृ क आथिm निनयमावली 1974 क े प्राव ानों क े ह पुलिलस रेति:यो निवभाग में कम"शाला कम"चारी क े पद पर निनयुनिक्त का दावा निकया गया और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अपीलक ा"ओं को उसे कम"शाला कम"चारी क े पद पर या समान क ै:र में उसक े लिलए उपयुक्त पद पर निनयुक्त करने का निनद[श देने क े लिलए प्रार्थी"ना की गयी है। 2.[2] निदनांक 31.07.2018 क े निनण"य और आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय क े निवद्वान एकल न्याया ीश ने उक्त रिर> यातिचका को इस आ ार पर खारिरN कर निदया निक चूंनिक मृ कम"चारी च ुर्थी" mेणी कम"चारी र्थीा और उसे च ुर्थी" mेणी क े पद पर निनयुनिक्त की भी पेशकश की गई है, इसलिलए वह कम"शाला कम- क े पद पर या वग" III क े निकसी अन्य उपयुक्त पद पर अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त का दावा नहीं कर सक ी है। 2.[3] निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर निनण"य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, प्रत्यर्थी- ने उच्च न्यायालय की खण्:पीठ क े समक्ष अपील दायर की र्थीा आक्षेनिप निनण"य व आदेश द्वारा उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर आदेश को अपास् कर निदया है और अपील की अनुमति दी है और ग्रे: III सेवा में अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त क े लिलए वाद की प्रत्यर्थी- की उम्मीदवारी पर निवचार करने क े लिलए अपीलक ा"ओं को निनद[श निदया है और यनिद वह अन्यर्थीा निकसी अयोग्य ा से ग्रस् न हो, ो उसे प्रदान निकया Nाए। उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने आक्षेनिप निनण"य और आदेश द्वारा संप्रेतिक्ष निकया है निक निनयमावली 1974 क े निनयम 5 क े परिरशीलन से यह स्पष्ट हो ा है निक निनयम 5 क े ह निनयुनिक्त एक "उपयुक्त पद" पर दी Nानी आवश्यक है और शब्द 'उपयुक्त' निनयम 5 में उस व्यनिक्त की उपयुक्त ा से संबंति है Nो निनयुनिक्त की इच्छा रख ा है और इसका मृ क सरकारी कम"चारी द्वारा ारिर पद से कोई लेना-देना नहीं है। खण्ड़पीठ ने यह भी देखा निक प्रार्थी- की उपयुक्त ा को ऐसे व्यनिक्त द्वारा ारिर शैक्षथिणक योग्य ा और अन्य पात्र ाओं क े आ ार पर आकलिल निकया Nाना अपेतिक्ष है। खण्ड़पीठ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ने उल्लेख निकया निक प्रस् ु मामले में, प्रत्यर्थी- कला में स्ना क की ति:ग्री क े सार्थी-सार्थी थिशक्षा में स्ना क ति:ग्री की योग्य ा रख ा है और इसलिलए ग्रे: III में निकसी पद पर निनयुनिक्त क े लिलए योग्य है।

3. उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ द्वारा पारिर निनण"य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ने व "मान अपील को दायर निकया है।

4. अपीलार्थिर्थीयों की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता सुmी रुतिचरा गोयल ने Nोरदार रीक े से प्रस् ु निकया है निक मामले क े थ्यों और परिरक्टिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने निनयमावली 1974 क े निनयम 5 की गल व्याख्या कर े हुए कहा है निक प्रत्यर्थी- शैतिक्षक योग्य ा पर निवचार कर े हुए 'उपयुक्त पद' पर अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त का हकदार होगा और इस थ्य क े बावNूद निक मृ कम"चारी च ुर्थी" mेणी क े पद पर काम कर रहा र्थीा। यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने इस थ्य को ठीक से नहीं समझा है निक अपीलक ा" ने अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त की मांग की है जिNसकी निनयनिम पद/निनयनिम भ - क े सार्थी समान ा नहीं की Nा सक ी है। 4.[1] यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक 'उपयुक्त पद' को अनुक ं पा क े आ ार पर े उद्देश्य और प्रयोNन से Nोड़ा Nाना आवश्यक है। 4.[2] यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त प्रदान करने का उद्देश्य और प्रयोNन एकमात्र रो>ी कमाने वाले की अचानक मृत्यु क े कारण पैदा हुई कनिठनाइयों को पूरा करना है और इसकी निनयनिम भ -/निनयुनिक्त क े सार्थी बराबरी नहीं की Nा सक ी है।यह आगे प्रस् ु निकया गया है निक मृ कम"चारी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds द्वारा ारिर पद पर निवचार करने क े लिलए 'उपयुक्त पद' पर निवचार निकया Nाना है और यह उच्च पद नहीं हो सक ा है। 4.[3] यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक निनयमावली 1974 क े निनयम 5 में उजिल्ललिख 'उपयुक्त पद' को मृ कम"चारी द्वारा ारिर पद क े सापेक्ष आथिm की शैतिक्षक योग्य ा को देख े हुए निवचार निकया Nाना चानिहए। 4.[4] यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक व "मान मामले में पहले प्रत्यर्थी- ने उप निनरीक्षक क े पद क े लिलए आवेदन निकया र्थीा जिNसक े लिलए प्रत्यर्थी- आई>ीआई की अपेतिक्ष योग्य ा नहीं रख ी र्थीी। यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक बाद में भी Nब उसने कम"शाला कम- क े पद पर अनुक ं पा क े लिलए आवेदन निकया ो वह शारीरिरक परीक्षा को उत्तीण" नहीं कर पायी, जिNसे उत्तर प्रदेश रेति:यो अ ीनस्र्थी सेवा निद्व ीय संशो न निनयमावली, 2005 क े अनुसार उत्तीण" निकया Nाना आवश्यक र्थीा। यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक इसलिलए प्रत्यर्थी- को अगले निनचले पद यानी संदेशवाहक क े पद की पेशकश की गई र्थीी, जिNसे प्रत्यर्थी- ने स्वीकार करने से इनकार कर निदया। 4.[5] यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक 24.11.2015 क े परिरपत्र क े अनुसार भी, मृ क क े आथिm को निकसी भी पद पर निनयुनिक्त क े लिलए क े वल एक अवसर निदया Nाना आवश्यक र्थीा। यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक व "मान मामले में, प्रत्यर्थी- दो बार अवसर का लाभ उठाने में निवफल रहा। 4.[6] यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने यह अथिभनिन ा"रिर करने में गल ी की है निक निनयमावली 1974 क े अ ीन "उपयुक्त पद" से अभ्यर्थिर्थीयों की अह" ा क े लिलए उपयुक्त कोई पद अथिभप्रे होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 4.[7] उपरोक्त दलीलें दे े हुए, व "मान अपील को अनुमति देने की प्रार्थी"ना की Nा ी है।

5. प्रत्यर्थी- की ओर से पेश निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता mी शशांक सिंसह द्वारा व "मान अपील का पुरNोर निवरो निकया Nा ा है। यह प्रस् ु निकया Nा ा है निक मामले क े थ्यों और परिरक्टिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने निनयमावली 1974 क े निनयम 5 की सही व्याख्या की है, इसका म लब उम्मीदवार की योग्य ा क े लिलए उपयुक्त निकसी भी पद से होगा। 5.[1] यह कहा गया है निक व "मान मामले में उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने प्रत्यर्थी- को कम"शाला कम- क े रूप में निनयुक्त करने का निनद[श नहीं निदया है, बक्टि}क मामले में प्रत्यर्थी- की योग्य ा को देख े हुए ग्रे: III क े निकसी अन्य उपयुक्त पद पर निवचार करने का निनद[श निदया है। 5.[2] यह बलपूव"क कहा गया है निक Nैसा निक:ीNीपी, उत्तर प्रदेश द्वारा Nारी परिरपत्र निदनांक 24.11.2015 में मृ क क े आथिm को निकसी भी पद पर अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त का क े वल एक अवसर प्रदान निकया गया है और यनिद ऐसा आथिm अवसर का लाभ उठाने में निवफल रह ा है, ो ऐसे व्यनिक्त को ीन महीने की अवति क े भी र निकसी अन्य निनचली रैंक पर निनयुनिक्त की पेशकश की Nाएगी, यह प्रस् ु मामले क े थ्यों पर अनुप्रयोज्य नहीं है =योंनिक प्रत्यर्थी- ने उक्त परिरपत्र से पहले ही आवेदन कर निदया। यह कहा गया है निक इसलिलए उक्त परिरपत्र में एक अवसर प्रदान करने क े संबं में श ~ वाद क े प्रत्यर्थी- क े लिलए लागू नहीं होंगी। 5.[3] आगे यह कहा गया है निक निनयमावली 1974 क े उपबं ों क े अ ीन "उपयुक्त ा" का अव ारण कर े समय, अपेतिक्ष अह" ा को निन ा"रिर करने वाले Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उक्त निनयमावली क े निनयम 5 को निनयमावली 1974 क े निनयम 8 क े सार्थी सामंNस्यपूण" रूप से पढ़ा Nाना चानिहए निक अभ्यर्थी- को काय" और दक्ष ा क े न्यून म मानकों को बनाए रखने में समर्थी" होना चानिहए। 5.[4] यह कहा गया है निक अनुक ं पा निनयुनिक्तयों क े मामलों में एक उच्च कनीकी दृनिष्टकोण नहीं अपनाया Nाना चानिहए। यह कहा गया है निक Nहाँ क अनुक ं पा निनयुनिक्तयों का संबं है ऐसी निनयुनिक्तयों को सामान्य भ - प्रनि•या की आवश्यक ाओं से छ ू > दी गई है। 5.[5] आगे यह कहा गया है निक मृ क द्वारा ारिर पद से उच्च पद पर आथिm की े लिलए कोई रोक नहीं है। यह कहा गया है निक निनयमावली 1974 क े निनयम 5 में यह प्राव ान है निक अपीलक ा" को सामान्य भ - निनयमों में छ ू > देने क े लिलए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग क े दायरे में आने वाले पद को छोड़कर निकसी पद पर सरकारी सेवा में उपयुक्त रोNगार निदया Nा सक ा है। 5.[6] यह कहा गया है निक प्रत्यर्थी- को भी इस आ ार पर कम"शाला कम- क े रूप में निनयुनिक्त से वंतिच नहीं निकया Nाना चानिहए निक प्रत्यर्थी- शारीरिरक परीक्षा पास करने में निवफल रहा। यह कहा गया है निक निकसी पद की उपयुक्त ा शैतिक्षक योग्य ा और/या अन्य मानदं:ों क े आ ार पर निन ा"रिर की Nा सक ी है। यह कहा गया है निक यह सच है निक एक बार अनुक ं पा निनयुनिक्त क े कारण निकसी पद को स्वीकार निकए Nाने क े बाद कानून क े प्राव ानों क े अनुसार, उच्च पद क े लिलए आगे या बाद में आवेदन करने क े निकसी अति कार का दावा नहीं निकया Nा सक ा है। यह कहा गया है निक हालांनिक व "मान मामले में थ्य निवथिशष्ट हैं। कम"शाला कम- क े निवशेर्ष पद क े लिलए आवश्यक शैक्षथिणक योग्य ा क े अलावा, एक शारीरिरक परीक्षण भी पास निकया Nाना चानिहए। यह कहा गया है निक शारीरिरक परीक्षण पास करने में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रत्यर्थी- की निवफल ा उसे इस निवशेर्ष पद क े लिलए अयोग्य बना ी है। हालांनिक, संदेशवाहक क े पद की पेशकश करना उसकी शैतिक्षक योग्य ा क े लिलए असंग है। इसलिलए प्रत्यर्थी- का ग्रे: III क े अन् ग" निकसी वैकक्टि}पक या उपयुक्त पद क े लिलए निवचार निकया Nा सक ा है, जिNसमें शारीरिरक परीक्षण की ऐसी निवथिशष्ट भ - प्रयोज्य न हो, =योंनिक निनचले स् र का पद उसकी शैतिक्षक योग्य ा को निनरर्थी"क बना देगा। 5.[7] उपरोक्त दलीलों से और mीम ी फ ू लव ी बनाम भार संघ और 10 अन्य 1991 सप्लीमें> (2) एससीसी 689 क े मामले में इस न्यायालय क े निनण"य पर अवलम्ब ले े हुए, व "मान अपील को खारिरN करने का अनुरो निकया गया है।

6. संबंति पक्षों क े निवद्वान अति वक्ता को निवस् ार से सुना।

7. प्रत्यर्थी- का पति पुलिलस रेति:यो निवभाग में संदेशवाहक (वग" IV) /ग्रे: IV) पद) क े रूप में सेवार र्थीा। 07.11.2014 को उसका निन न हो गया। प्रत्यर्थी-- मृ क सरकारी कम"चारी की निव वा ने सहायक ऑपरे>र क े लिलए 05.02.2014 को एक आवेदन प्रस् ु निकया, जिNस पर निवचार नहीं निकया गया =योंनिक वह सहायक ऑपरे>र क े पद क े लिलए आवश्यक पात्र ा मानदं: को पूरा नहीं कर रही र्थीी। उसक े बाद उसने 19.02.2015 को कम"शाला कम- क े पद पर अनुक ं पा क े लिलए एक आवेदन निकया Nो एक ग्रे: III पद है। उसे उक्त पद पर निनयुनिक्त का अवसर निदया गया र्थीा, हालांनिक वह उक्त पद क े लिलए आयोजिN शारीरिरक पात्र ा परीक्षा उत्तीण" नहीं कर सकी और इस रह शारीरिरक पात्र ा परीक्षा में उसकी निवफल ा क े परिरणामस्वरूप, उसे अनुक ं पा क े आ ार पर कम"शाला कम- क े पद पर निनयुनिक्त नहीं दी Nा सकी। निफर भी निदनांक 23.02.2018 क े आदेश से, प्रत्यर्थी- को रेति:यो निवभाग में कम"शाला कम- क े रैंक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds से नीचे का पद यानी संदेशवाहक क े पद की पेशकश की गई, जिNसे उसने अस्वीकार कर निदया और प्रत्यर्थी- ने Nोर देकर कहा निक उसे कम"शाला कम- क े पद पर अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुक्त निकया Nाना चानिहए या उसकी शैतिक्षक योग्य ा को देख े हुए ग्रे: III क े समकक्ष पद पर निनयुक्त निकया Nाना चानिहए। निवद्वान एकल न्याया ीश ने रिर> यातिचका को खारिरN कर निदया। हालाँनिक, आक्षेनिप निनण"य और आदेश द्वारा खण्ड़पीठ ने प्रति वादी क े मामले को अनुक ं पा क े आ ार पर कम"शाला कम- क े पद पर या उसकी योग्य ा को देख े हुए ग्रे: III में निकसी भी समकक्ष पद पर निनयुनिक्त क े लिलए निवचार करने का निनद[श निदया है और निनयम 5 की व्याख्या की निक मृ क आथिm निनयमावली 1974 क े ह 'उपयुक्त पद' उम्मीदवार की योग्य ा क े अनुसार उपयुक्त कोई पद होगा। पूव क्त इस अदाल क े समक्ष अपील का निवर्षय है।

8. व "मान अपील में शानिमल मुद्दे पर निवचार कर े समय, मृ कम"चारी की मृत्यु पर अनुक ं पा क े आ ार पर इस अदाल द्वारा निन ा"रिर कानून को संदर्थिभ और निवचार करने की आवश्यक ा है। हाल क े फ ै सले में, जिसनिवल अपील संख्या 5122/2021 कोर्षागार निनदेशक, कना">क और एक अन्य बनाम वी. सोमmी क े मामले में, इस न्यायालय ने अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त प्रदान करने को शाजिस करने वाले जिसद्धां पर निवचार निकया र्थीा। एनसी सं ोर्ष बनाम कना">क राज्य और अन्य (2020) 7 एससीसी 617 में इस अदाल क े फ ै सले का उल्लेख करक े, इस अदाल ने अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त प्रदान करने को शाजिस करने वाले जिसद्धां को संक्षेप में प्रस् ु निकया हैः (i) यह निक अनुक ं पा निनयुनिक्त सामान्य निनयम का अपवाद है; Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (ii) यह निक निकसी आकांक्षी को अनुक ं पा निनयुनिक्त का अति कार नहीं है; (iii) राज्य की सेवा में निकसी लोक पद पर निनयुनिक्त भार क े संनिव ान क े अनुच्छेद 14 और 16 क े अनुसार जिसद्धां क े आ ार पर की Nानी चानिहए; (iv) अनुक ं पा क े वल राज्य की नीति द्वारा निन ा"रिर मानदं:ों और /या नीति क े अनुसार पात्र ा मानदं:ों की सं ुनिष्ट पर की Nा सक ी है; (v) आवेदन पर निवचार की ारीख को प्रचलिल मानदं: अनुक ं पा े दावे पर निवचार करने का आ ार होना चानिहए।

9. अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त पर निवथिभन्न निनण"यों में इस अदाल द्वारा निन ा"रिर कानून क े अनुसार, सभी सरकारी रिरनिक्तयों क े लिलए संनिव ान क े अनुच्छेद 14 और 16 क े ह अनिनवाय" रूप से सभी उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान निकया Nाना चानिहए। हालांनिक, एक मृ कम"चारी क े आथिm को दी Nाने वाली अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त उक्त मानदं:ों का अपवाद है। अनुक ं पा का आ ार एक रिरयाय है न निक अति कार। 9.[1] निहमाचल प्रदेश राज्य और एक अन्य बनाम शथिश क ु मार (2019) 3 एससीसी 653 क े मामले में इस अदाल ने अनुक ं पा क े उद्देश्य और प्रयोNन पर निवचार निकया र्थीा और गोविंवद प्रकाश वमा" बनाम एलआईसी (2005) 10 एससीसी 289 क े मामले में इस अदाल क े सुनिवचारिर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds निनण"य में प्रस् र 21 और 26 में यह निनम्नानुसार संप्रेतिक्ष और अथिभनिन ा"रिर निकया गया हैः "21. गोविंवद प्रकाश वमा" [गोविंवद प्रकाश वमा" बनाम एलआईसी, (2005) 10 एससीसी 289] क े निनण"य को बाद में कई निनण"यों में माना गया है। लेनिकन, इससे पहले निक हम उन निनण"यों को उल्लेख करें, यह ध्यान रखना आवश्यक है निक इस न्यायालय द्वारा उमेश क ु मार नागपाल बनाम हरिरयाणा राज्य [उमेश क ु मार नागपाल बनाम हरिरयाणा राज्य, (1994) 4 एससीसी 138:1994 एससीसी (एल एं: एस) 930] में अनुक ं पा निनयुनिक्त की प्रक ृ ति पर निवचार निकया गया र्थीा। उमेश क ु मार नागपाल [उमेश क हरिरयाणा राज्य, (1994) 4 एससीसी 138: 1994 एससीसी (एल एं: एस) 930] में जिNन जिसद्धां ों को निन ा"रिर निकया गया है, उनका बाद में इस न्यायालय द्वारा लगा ार निवति क निनण"यों में पालन निकया गया है। ये जिसद्धां निनम्नलिललिख उद्धृरण में समझाये गये हैंः (उमेश क ु मार नागपाल वाद [उमेश क हरिरयाणा राज्य, (1994) 4 एससीसी 138: 1994 एससीसी (एल एं: एस) 930], एससीसी पृष्ठ 13940, प्रस् र 2) "2.... निनयमानुसार, लोक सेवाओं में निनयुनिक्तयाँ पूण" या आवेदनों क े खुले आमंत्रण एवं योग्य ा क े आ ार पर की Nानी चानिहए। निनयुनिक्त का कोई अन्य रीका या कोई अन्य निवचारण अनुमन्य नहीं है। न ो सरकारें और न ही लोक प्राति करण निकसी अन्य प्रनि•या का पालन करने या पद क े लिलए निनयमों द्वारा निन ा"रिर योग्य ा को थिशथिर्थील करने क े लिलए स्व ंत्र हैं। हालाँनिक, इस सामान्य निनयम का, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जिNसका हर मामले में कड़ाई से पालन निकया Nाना है, न्याय निह में और क ु छ आकक्टिस्मक ाओं को पूरा करने क े लिलए क ु छ अपवाद हैं। ऐसा ही एक अपवाद निकसी मृ क कम"चारी क े आथिm ों क े पक्ष में है Nो अपने परिरवार को अभाव और निबना निकसी आNीनिवका क े छोड़ Nा े हैं। ऐसे मामलों में, पूण" मानवीय निवचार से इस थ्य को ध्यान में रख े हुए निक Nब क आNीनिवका का क ु छ स्रो प्रदान नहीं निकया Nा ा है, ब क परिरवार का गुNारा नहीं हो पाएगा, निनयमावली में मृ क क े आथिm ों में से एक को लाभकारी रोNगार प्रदान करने का प्राव ान निकया गया है, Nो इस रह क े रोNगार क े लिलए पात्र हो सक े हैं। इस प्रकार अनुक ं पा रोNगार देने का समग्र उद्देश्य परिरवार को अचानक संक> से उबारने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य ऐसे परिरवार क े निकसी सदस्य को पद देना नहीं है और मृ क द्वारा ारिर पद क े लिलए पद देना ो निब}कु ल नहीं है। सेवाकाल में निकसी कम"चारी की मृत्यु मात्र से उसका परिरवार आNीनिवका क े ऐसे स्त्रो का अति कारी नहीं हो Nा ा। संबंति सरकार या साव"Nनिनक प्राति करण को मृ क क े परिरवार की निवत्तीय क्टिस्र्थीति की Nांच करनी हो ी है और यह क े वल भी हो ा है Nब वह सं ुष्ट हो ा है, लेनिकन रोNगार क े उपबं क े लिलए, परिरवार उस संक> से उबर नहीं पाएगा इसलिलए परिरवार क े पात्र सदस्य को नौकरी दी Nानी है। मैनुअल और नॉन मैनुअल mेथिणयों में वग" III और IV) क े पद सबसे छो>े पद हैं और इसलिलए अनुक ं पा क े आ ार पर क े वल उसकी ही पेशकश की Nा सक ी है, इसका उद्देश्य परिरवार को निवत्तीय संक> और आपा काल से उबारने में मदद Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds करना है। निनयम का अपवाद बनाकर ऐसे सबसे निनचले पदों पर रोNगार का प्राव ान उतिच और वै है =योंनिक यह भेदभावपूण" नहीं है। ऐसे पदों पर मृ कम"चारी क े ऐसे आथिm को निदए Nाने वाले अनुक ू ल उपचार (प्रबं ) का उस उद्देश्य क े सार्थी क " संग संबं हो ा है जिNसे प्राप्त करने की कोथिशश की Nा ी है अर्थीा" ् निवत्तीय संक> क े लिखलाफ राह । इस उद्देश्य क े लिलए साव"Nनिनक अति कारिरयों द्वारा कोई अन्य पद देने की अपेक्षा या आवश्यक ा नहीं है।इस संबं में यह याद रखना चानिहए निक मृ क क े निनराथिm परिरवार क े सापेक्ष लाखों अन्य परिरवार हैं Nो यनिद ज्यादा निनराथिm नहीं है, ो भी समान रूप से हैं। मृ कम"चारी क े परिरवार क े पक्ष में बनाए गए निनयम का अपवाद उसक े द्वारा प्रदान की गई सेवाओं और वै अपेक्षाओं र्थीा पूव"व - रोNगार द्वारा उत्पन्न परिरवार की क्टिस्र्थीति और मामलों में परिरव "न पर निवचार करना है Nो अचानक समाप्त हो गए हैं।" “26. मुम ाज़ यूनुस मुलानी बनाम महाराष्ट्र राज्य [मुम ाज़ यूनुस मुलानी बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2008) 11 एससीसी 384: (2008) 2 एससीसी (एल एं: एस) 1077] में दो न्याया ीशों की खं:पीठ क े फ ै सले में यह जिसद्धां अपनाया गया है निक अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त भ - का स्रो नहीं है, बक्टि}क मृ क क े परिरवार को अचानक निवत्तीय संक> से उबारने में सक्षम बनाने का एक सा न है। योNना में निननिह प्राव ानों क े आ ार पर परिरवार की निवत्तीय क्टिस्र्थीति का मू}यांकन करने की आवश्यक ा होगी। गोविंवद प्रकाश वमा" [गोविंवद प्रकाश वमा" बनाम एलआईसी, (2005) 10 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds एससीसी 289: 2005 एससीसी (एल एं: एस) 590] क े वाद क े निनण"य पर निवति व निवचार निकया गया है, लेनिकन न्यायालय ने कहा निक ऐसा प्र ी नहीं हो ा है निक इस मामले में इस न्यायालय की पूव" बाध्यकारी निमसालों पर ध्यान निदया गया है।"

10. इस प्रकार, पूव क्त निनण"यों में इस न्यायालय द्वारा निन ा"रिर कानून क े अनुसार, अनुक ं पा निनयुनिक्त लोक सेवाओं में निनयुनिक्त क े सामान्य निनयम का एक अपवाद है और सेवाकाल में मरने वाले मृ क क े आथिm ों क े पक्ष में है और Nो अपने परिरवार को अभाव में व निबना निकसी आNीनिवका क े सा न क े छोड़ रहा है और ऐसे मामलों में, पूण" मानवीय निवचार से इस थ्य को ध्यान में रख े हुए निक Nब क आNीनिवका का क ु छ स्रो प्रदान नहीं निकया Nा ा है, ब क परिरवार अपना गुNारा करने में सक्षम नहीं होगा, मृ क क े आथिm ों में से एक को लाभकारी रोNगार प्रदान करने क े लिलए निनयमावली में एक प्राव ान निकया गया है, Nो इस रह क े रोNगार क े लिलए पात्र हों। इस प्रकार अनुक ं पा रोNगार देने का पूरा उद्देश्य परिरवार को अचानक संक> से उबारने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य ऐसे परिरवार क े निकसी सदस्य को पद देना नहीं है और मृ क द्वारा ारिर पद क े लिलए पद देना ो निब}क ु ल नहीं है। 10.[1] पूव क्त निवनिनश्चयों में इस न्यायालय द्वारा निन ा"रिर निवति को लागू कर े और ऊपर की गई नि>प्पथिणयों पर निवचार कर े हुए और वह उद्देश्य व प्रयोNन जिNसक े लिलए अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त दी Nा ी है, प्रत्यर्थी- की ओर से निदए गए क˜ और निनयमावली 1974 क े निनयम 5 पर उच्च न्यायालय की खं:पीठ द्वारा निकए गए निनव"चन पर निवचार निकया Nाना अपेतिक्ष है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 10.[2] व "मान मामले में उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने निनयमावली 1974 क े निनयम 5 की व्याख्या की है और यह माना है निक निनयमावली 1974 क े निनयम 5 क े ह 'उपयुक्त पद' का अर्थी" मृ क कम"चारी द्वारा ारिर पद क े निनरपेक्ष उम्मीदवार की योग्य ा क े लिलए उपयुक्त कोई भी पद होगा। उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ द्वारा पूव क्त निनव"चन अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त देने क े उद्देश्य और प्रयोNन क े ठीक निवपरी है। मृ कम"चारी द्वारा ारिर क्टिस्र्थीति /पद पर निवचार कर े हुए 'उपयुक्त पद' पर निवचार निकया Nाना चानिहए और मृ कम"चारी द्वारा ारिर पद पर निवचार कर े हुए शैतिक्षक योग्य ा/पात्र ा मानदं: पर निवचार निकया Nाना आवश्यक है और मृ कम"चारी द्वारा ारिर पद क े सापेक्ष पद की उपयुक्त ा पर निवचार निकया Nाना आवश्यक है, अन्यर्थीा अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त और निनयनिम निनयुनिक्त क े बीच कोई अं र नहीं होगा।निकसी निदए गए मामले में ऐसा हो सक ा है निक मृ क कम"चारी क े आथिm जिNसने अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त क े लिलए आवेदन निकया है, उसक े पास वग" II या वग" I क े पद की शैतिक्षक योग्य ा हो और मृ कम"चारी वग"/ग्रे: IV) और/या आवेनिद पद से निनचले पद पर काम कर रहा र्थीा, उस क्टिस्र्थीति में आथिm /आवेदक इस आ ार पर अति कारस्वरूप मृ कम"चारी द्वारा ारिर पद से उच्च पद पर अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त की मांग नहीं कर सक ा है, निक वह इस रह क े उच्च पद क े पात्र ा मानदं:ों को पूरा कर रहा है। पूव क्त अनुक ं पा क े उद्देश्य और प्रयोNन क े निवपरी होगा, Nो Nैसा निक ऊपर देखा गया है परिरवार को कमाने वाले व्यनिक्त की मृत्यु पर अचानक संक> से उबारने में सक्षम बनाना है। Nैसा निक ऊपर देखा गया है, अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त पूण" मानवीय निवचार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds से प्रदान की Nा ी है, इस थ्य को ध्यान में रख े हुए निक आNीनिवका का क ु छ स्रो प्रदान निकया Nा ा है ो परिरवार अपना गुNारा करने में सक्षम होगा। 10.[3] व "मान मामले में Nैसा निक ऊपर देखा गया है, शुरू में प्रत्यर्थी- ने पुलिलस रेति:यो निवभाग में सहायक ऑपरे>र क ं पा क े लिलए आवेदन निकया र्थीा।निवभाग द्वारा इसे स्वीकार नहीं निकया गया र्थीा और इस आ ार पर सही रूप से स्वीकार नहीं निकया गया र्थीा निक वह सहायक ऑपरे>र क े पद क े लिलए अपेतिक्ष पात्र ा मानदं: को पूरा नहीं कर रही र्थीी। इसक े बाद प्रत्यर्थी- ने निफर से कम"शाला कम- क ं पा क े लिलए आवेदन निकया। प्रत्यर्थी- क े मामले पर निवचार निकया गया र्थीा, हालांनिक वह शारीरिरक परीक्षण परीक्षा में निवफल रही, Nो प्रासंनिगक भ - निनयमावली 2005 क े अनुसार आवश्यक र्थीा। इसलिलए, उसक े बाद उसे संदेशवाहक क े रूप में अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त की पेशकश की गई Nो मृ क कम"चारी द्वारा ारिर पद क े बराबर र्थीी। इसलिलए अपीलक ा"गण द्वारा संदेशवाहक क े पद पर प्रत्यर्थी- को निनयुनिक्त की पेशकश करना न्यायोतिच र्थीा।हालांनिक, प्रत्यर्थी- ने ऐसे पद पर निनयुनिक्त से इनकार कर निदया।

11. उपरोक्त क े मद्देनNर और ऊपर उजिल्ललिख कारणों से, उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने निनयमावली 1974 क े निनयम 5 की गल व्याख्या की और गल अर्थी" लगाया है और यह देख े हुए व मान े हुए निक मृ क आथिm निनयमावली 1974 क े ह 'उपयुक्त पद' का अर्थी" अभ्यर्थी- की योग्य ा क े लिलए उपयुक्त कोई पद होगा और अनुक ं पा क े आ ार पर निनयुनिक्त आथिm की शैतिक्षक योग्य ा को ध्यान में रख े हुए की Nानी है। Nैसा निक ऊपर देखा गया है निक इस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds रह का निनव"चन अनुक ं पा क े उद्देश्य व प्रयोNन को निवफल कर देगा।

12. उपरोक्त कारणों क े मद्देनNर, व "मान अपील सफल हो ी है। निवशेर्ष अपील ति:फ े क्टि=>व (एसए:ी) संख्या 620/2018 में उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ द्वारा पारिर आक्षेनिप निनण"य और आदेश निदनांनिक 14.09.2018 को ए द्द्वारा रद्द और अपास् निकया Nा ा है। परिरणामस्वरूप प्रत्यर्थी- द्वारा निवद्वान एकल न्याया ीश क े समक्ष दायर रिर> यातिचका संख्या 16009/2018 खारिरN हो Nा ी है और निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा रिर> को खारिरN कर े हुए पारिर निकया गया आदेश निदनांनिक 31.07.2018 पुनःस्र्थीानिप (बहाल) हो Nा ा है। लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं।...............................… (न्यायमूर्ति एम.आर. शाह)..............................… (न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना) नई निदल्ली, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 05 अ=>ूबर 2021. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds