Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 6945 वर्ष 2021
उ.प्र. राज्य ... अपीलार्थी((गण)
बनाम
चुन्नी लाल एवं अन्य ... प्रत्यर्थी((गण)
विनणय
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT
1. रिरट यातिचका सं. 1181 वर्ष 1996 (एस/बी) में इलाहाबाद उच्च न्यायालय(लखनऊ बेंच) द्वारा पारिर 16.07.2014 विदनांविक आक्षेविप विनणय और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, उ.प्र. राज्य ने व मान अपील की है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2021 INSC 776
2. उ.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा तिNप्टी कलेक्टर क े 35 पदों क े लिलए चयन प्रविTया शुरू की गई र्थीी। वर्ष 1985 में एक संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा आयोसिX की गई र्थीी। वर्ष 1987 में, लोक सेवा आयोग ने तिNप्टी कलेक्टर क े पद पर चयविन अभ्यर्थिर्थीयों की विनयुविक्त क े लिलए अनुरो भेXा। दो अभ्यर्थिर्थीयों श्री राम सुभाग सिंसह (सामान्य श्रेणी क े उम्मीदवार) और श्री रमेश क ु मार यादव (ओबीसी श्रेणी क े उम्मीदवार) ने पद ग्रहण नहीं विकया। इसलिलए, तिNप्टी कलेक्टरों क े दो पद खाली रहे। लोक सेवा आयोग ने तिNप्टी कलेक्टर क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए दो अन्य अभ्यर्थिर्थीयों अर्थीा ् श्री विदलिbवXय सिंसह और चुन्नी लाल (मूल रिरट यातिचकाक ा) क े नाम भेXे। आयोग द्वारा पूव क्त अनुमोदन क े आ ार पर, राज्य सरकार ने उपरोक्त दो व्यविक्तयों की तिचविकत्सा Xांच क े लिलए 24.04.1989 को महाविनदेशक, तिचविकत्सा और स्वास्थ्य सेवा, लखनऊ को पत्र Xारी विकया। इस बीच, विनXी प्रति वादी अXय शंकर पांNे ने रिरट यातिचका संख्या 22966 वर्ष 1988 दायर करक े उच्च न्यायालय का दरवाXा खटखटाया। उच्च न्यायालय की तिNवीXन बेंच ने 09.05.1989 विदनांविक विनणय और आदेश द्वारा उक्त रिरट यातिचका को अनुमति दी और लोक सेवा आयोग को विनदfश विदया विक वह विनXी प्रति वादी अXय शंकर पांNे क े नाम की सिसफारिरश करे।
2. 1 आयोग ने 09.05.1989 विदनांविक विनणय और आदेश क े अनुपालन में, 24.06.1989 विदनांविक पत्र द्वारा मूल रिरट यातिचकाक ा-चुन्नी लाल क े पक्ष में की गई सिसफारिरश को वापस ले लिलया। यह विक 09.05.1989 विदनांविक विनणय और आदेश क े लिखलाफ, राज्य ने अपील क े लिलए विवशेर्ष अनुमति यातिचका दायर करक े इस न्यायालय का दरवाXा खटखटाया, सिXसे इस न्यायालय द्वारा विनस् ारिर कर विदया गया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. 2 त्पश्चा व मान मामले क े प्रत्यर्थी( सं. 1-चुन्नी लाल ने अXय शंकर पांNे को सेवा में Xारी रखने क े लिखलाफ उच्च न्यायालय क े समक्ष एक रिरट यातिचका दायर की। उन्होंने एक अभ्यावेदन भी विदया। 08.11.1996 विदनांविक आदेश द्वारा उच्च न्यायालय की खंNपीठ ने राज्य/लोक सेवा आयोग को अभ्यावेदन को विनस् ारिर करने का विनदfश विदया। राज्य द्वारा उक्त प्रति विनति त्व पर विवचार विकया गया और राज्य ने 13.12.1996 विदनांविक आदेश द्वारा उसे खारिरX कर विदया। मूल रिरट यातिचकाक ा-चुन्नी लाल ने रिरट यातिचका में संशो न विकया और 13.12.1996 विदनांविक उस आदेश को चुनौ ी दी सिXसक े द्वारा उनक े अभ्यावेदन को खारिरX कर विदया गया र्थीा। आक्षेविप विनणय और आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने व मान मामले क े प्रत्यर्थी( सं. 1 क े अभ्यावेदन को खारिरX करने वाले 13.12.1996 विदनांविक आदेश को रद्द और अपास् कर विदया है और राज्य को व मान मामले क े प्रत्यर्थी( सं. 1 मूल रिरट यातिचकाक ा क े मामले पर मूल रिरट यातिचकाक ा क े पक्ष में लोक सेवा आयोग द्वारा की गयी सिसफारिरश क े मद्देनXर विफर से विवचार करने का विनदfश विदया है। हालाँविक,उच्च न्यायालय ने स्पष्ट विकया विक व मान मामले क े प्रति वादी नंबर -2 विनयुविक्त-अXय शंकर पांNे की विनयुविक्त से छेड़छाड़ नहीं विकया Xाएगा।
2. 3 उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए राज्य ने व मान अपील की है।
3. यह विक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 30.10.2014 विदनांविक आक्षेविप विनणय एवं आदेश पर रोक लगा दी गयी है, सिXसे आX क Xारी रखा गया है। इसका अर्थी यह है विक, व मान मामले क े प्रत्यर्थी( सं.[1] -मूल रिरट यातिचकाक ा को उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश क े अनुसार तिNप्टी कलेक्टर क े पद पर विनयुक्त नहीं विकया गया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. हालांविक ामील होने क े बावXूद प्रत्यर्थी( सं. 1 -मूल रिरट यातिचकाक ा की ओर से कोई प्रस् ु नहीं हुआ।
5. आX Xब व मान अपील को आगे की सुनवाई क े लिलए रखा गया है, ो राज्य की ओर से पेश विवद्व अति वक्ता क े सार्थी-सार्थी प्रति वादी नंबर 2 - अXय शंकर पांNे की ओर से पेश विवद्व अति वक्ता ने बार में कहा है विक व मान कायवाही क े विवलम्बन क े दौरान, व मान मामले का प्रत्यर्थी( सं. 1-मूल रिरट यातिचकाक ा सेवाविनवृलिq की आयु प्राप्त करने पर 31.08.2019 को उप परिरवहन आयुक्त क े पद से सेवाविनवृq हो चुका है। इसलिलए यह कहा गया है विक अब उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और आदेश लागू विकये Xाने योbय नहीं है क्योंविक अब प्रत्यर्थी( सं. 1 को तिNप्टी कलेक्टर क े पद पर विनयुक्त करने का कोई म लब नहीं है। अन्यर्थीा मेरिरट क े आ ार पर भी हमारा यह मानना है विक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विनणय और आदेश अपोर्षणीय है। उच्च न्यायालय को तिNप्टी कलेक्टर क े एकल पद पर दो व्यविक्तयों को विनयुक्त करने क े लिलए राज्य को विनदfश देने वाला एक आदेश पारिर नहीं करना चाविहए र्थीा, विवशेर्ष रूप से, Xब, तिNप्टी कलेक्टर क े पद पर, प्रति वादी नंबर 2-अXय शंकर पांNे को विनयुक्त विकया गया र्थीा/ उच्च न्यायालय द्वारा रिरट यातिचका सं. 22966 वर्ष 1988 में पारिर 09.05.1989 विदनांविक आदेश क े अनुसार विनयुक्त विकया Xाना र्थीा।
6. इस स् र पर, इस पर ध्यान विदया Xाना चाविहए विक अभ्यावेदन को खारिरX कर े समय, यह स्पष्ट कहा गया र्थीा विक मूल रिरट यातिचकाक ा को तिNप्टी कलेक्टर क े पद पर विनयुक्त नहीं विकया Xा सक ा है, सिXस पर वह विनयुविक्त का दावा कर रहा है क्योंविक अXय शंकर पांNे को उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश क े अनुसार विनयुक्त विकया गया है और कोई भी पद खाली नहीं है और यहां क विक कोई अनुपूरक पद Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सृसिX नहीं विकया Xा सक ा। उपरोक्त क े बावXूद, उच्च न्यायालय ने राज्य को प्रत्यर्थी( सं. 1-मूल रिरट यातिचकाक ा को लोक सेवा आयोग द्वारा की गयी बाद की सिसफारिरश क े आ ार पर ही विनयुक्त करने का विनदfश विदया है। यहां क विक उच्च न्यायालय का यह कर्थीन विक मूल रिरट यातिचकाक ा को अXय शंकर पांNे की विनयुविक्त से छेड़छाड़ विकये विबना विनयुक्त विकया Xाय, भी पोर्षणीय नहीं हो सक ी। ऐसा इसलिलए है क्योंविक दो व्यविक्तयों को एक ही पद पर विनयुक्त करने क े लिलए विनदfथिश नहीं विकया Xा सक ा है। इसलिलए, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश रद्द और अपास् विकये Xाने योbय है।
7. हमने राज्य और प्रति वादी नंबर 2 -अXय शंकर पांNे की ओर से विदये गये कर्थीन को भी देखा विक व मान कायवाही क े विवलंबन क े दौरान प्रत्यर्थी( सं. 1 सेवाविनवृलिq की आयु प्राप्त करने पर 31.08.2019 को उप परिरवहन आयुक्त क े पद से सेवाविनवृq हो चुका है और इसलिलए उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश लागू विकये Xाने योbय नहीं है।
8. उपरोक्त क े दृविष्टग और उपरोक्त कारणों से, व मान अपील सफल हो ी है।रिरट यातिचका संख्या 1181 (एस/बी) वर्ष 1996 में उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 16.07.2014 विदनांविक आक्षेविप विनणय और आदेश रद्द और अपास् विकया Xा ा है। हालांविक, लाग क े संबं में कोई आदेश नहीं होगा।.......................... (न्यायमूर्ति एम.आर.शाह).......................... Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न) नई विदल्ली 23 नवंबर, 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA