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भारत का सर्वोच्च न्यायालय
आपराधिक अपीलीय अधिकारिकता
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(8676 /2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
राजस्थान राज्य ... अपीलकर्ता
बनाम
बबलू उर्फ ओम प्रकाश ...प्रतिवादी
क
े साथ
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(8677-8682 /2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
(सुनील बनाम कप्तान और अन्य)
क
े साथ
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(9003 /2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
क
े साथ
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(9004 /2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
(राजस्थान राज्य बनाम रंजीत)
क
े साथ
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(9124/2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
(राजस्थान राज्य बनाम रामू उर्फ राम सिंह)
क
े साथ
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(2021 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) संख्या.............)
(32279 /2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
(राजस्थान राज्य बनाम राधे श्याम उर्फ गोलू और अन्य)
आपराधिक अपीलीय संख्या .........../2021
(2021 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) संख्या........... से उत्पन्न) (31873
/2019 विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न)
(राजस्थान राज्य बनाम राजेन्द्र)
निर्णय
उदय उमेश ललित, न्यायाधीश
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. ये अपीलें निम्नलिखित द्वारा प्रस्तुत की जाती हैंः i) राजस्थान राज्य (8676/2019 की विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक), 9003/2019, 9004/2019, 9124/2019, 32279 /2019 और 31873 /2019 से उत्पन्न अपील); और ii) सुनील पुत्र. गोविन्दराम, मूल मुखबिर (8677-8682/2019 की विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) से उत्पन्न अपीलें):- उच्च न्यायालय द्वारा अपने फ ै सले और अंतिम आदेश दिनांक 04.12.2018 को डी.बी. आपराधिक अपील संख्या 179/2018, 832/2017, 946 / 2017, 993/2017, 1123/2017, 1191/2017, 1475/2017 एवं 26 /2018 में 11 आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती देते हुए, जिनक े नाम राधेश्याम उर्फ गोलू (ए 1), रामू उर्फ राम सिंह (ए 4), बबलू उर्फ ओम प्रकाश (ए 5), जीतू उर्फ जीतमल (ए 6), घनश्याम उर्फ पिंटू (ए 7), राजेंद्र (ए 8), राम गोपाल (ए 9), सत्तू उर्फ सत्यनारायण (ए 10), कप्तान (ए 11), भूरिया उर्फ धारा सिंह (ए 12) और रंजीत (ए 13) है, यह अपीलें प्रस्तुत की गई है ।
3. भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 450 या 450/149, 452 और 452/149, 302 और 302 क े साथ पठित धारा 149, 307 या 307 क े अधीन दंडनीय अपराधों क े संबंध में विचारण न्यायालय विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, कोटा, राजस्थान क े सेशन क े स नंबर 80/2013 में 13 व्यक्तियों, अर्थात् उपरोक्त 11 बरी किए गए अभियुक्तों और 2 सजायाफ्ता अभियुक्तों [राजेंद्र उर्फ तांती (ए 2) और जनक सिंह (ए 3)] क े संबंध में मुकदमा चलाया गया था।
4. राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा अपील आदेश में उल्लेखितानुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर. संख्या 75/2012) का सार इस प्रकार है कि सुनील पुत्र गोविंदराम क े कहने पर क ै थुन पुलिस थाने में दिनांक 08.03.2012 को दर्ज भा.दं.सं. की धारा 147, 148, 149, 452, 323 और 307 क े अधीन दंडनीय अपराधों क े संबंध में शिकायतकर्ता सुनील द्वारा 8 मार्च, 2012 को दी गई लिखित रिपोर्ट पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह कहा गया कि उनक े अलावा धनपाल, मदनपाल, नारायण, तुलसी, कालू मीणा और रूप सिंह पहलवान होली क े त्यौहार पर उनक े आवास पर बैठे थे। उस समय, आरोपी राजेंद्र, जनक, रामसिंह, विजेंद्र, पिंटू, गोलू, मुकात, तांती उर्फ राजेंद्र, रामगोपाल, अतर, दिनेश, भूरिया उर्फ धरासिंह गणेशपुरा क े निवासी और उम्मेदगंज और काशीराम क े सुखपाल 10-12 व्यक्तियों क े साथ हथियार लेकर आए थे। वे शिकायतकर्ता क े घर में घुस गए और धनपाल पर हमला कर दिया। अभियुक्त राजेंद्र और प्रीतम ने तलवार से हमला किया, जबकि जनक को गंडासी सौंपा गया और धनपाल को चोट पहुंचाई। अन्य आरोपियों रामगोपाल, तांती, सत्यनारायण, बबलू, गोलू, पिंटू, दिनेश और सुखपाल ने भी धनपाल को घायल कर दिया। आरोपी मुक ु ट, भूरिया उर्फ धरासिंह, अतर, हंसराज, विजेंद्र, बबलू और सत्यनारायण ने शिकायतकर्ता क े सिर पर चोट पहुंचाई।
5. धनपाल को प्रारंभिक चिकित्सा उपचार पीडब्लू 19 डॉ. क ृ ष्ण हरि शर्मा द्वारा दिया गया था। हालांकि, ईलाज क े दौरान धनपाल की मौत हो गई, जिसक े बाद भा.दं.सं. की खंड 302 क े तहत अपराध जोड़ा गया। सूचना देने वाले पीडब्ल्यू1 सुनील की पीडब्ल्यू17 डॉ. पी. पी. बंसल द्वारा चिकित्सकीय जांच की गई और उसका ईलाज किया गया।
6. धनपाल क े शव का पोस्टमॉर्टम पीडब्ल्यू30 डॉ. राक े श शर्मा द्वारा 09 मार्च, 2012 को किया गया था, जिन्होंने मृतक क े शरीर पर पोस्टमॉर्टम से पहले निम्नलिखित चोटें पाई ं ः चोट संख्या 1: सिर क े बाई ंओर 9 सेमी लंबा सिला हुआ घाव मौजूद है। चोट संख्या 2: 03 सिले हुए घाव का आकार क्रमशः 7 सेमी, 6 सेमी और 4 सेमी लंबा सिर क े पिछले हिस्से पर मौजूद है। चोट संख्या 3: सिर क े दाहिनी ओर मौजूद सिलाई किए हुए घाव का आकार 1 सेमी लंबा है। चोट संख्या 4: गर्दन क े दाहिनी ओर मौजूद 1 सेंटीमीटर लंबा पतला घर्षण चिह्न। चोट संख्या 5: दाहिने क ं धे पर मौजूद खरोंच 1 x 1 सेंटीमीटर चोट संख्या 6: दाहिनी कोहनी पर मौजूद 2 x 1 सेंटीमीटर आकार का खरोंच। चोट संख्या 7: रीढ़ की हड्डी पर मौजूद 1 x 3 सेंटीमीटर क े आकार का खरोंच। चोट संख्या 8: बायीं कोहनी पर मौजूद 1 x 1/2 सेंटीमीटर आकार का खरोंच। चोट संख्या 9: बायीं बांह पर मौजूद 1 X[1] सेंटीमीटर आकार का खरोंच। चोट संख्या 10: दोनों घुटनों पर मौजूद 1 x 1 सेंटीमीटर आकार का खरोंच। चोट संख्या 11: दाहिने पैर में मौजूद 1 x 1/2 सेंटीमीटर आकार का खरोंच। चोट संख्या 12: बाएं पैर में मौजूद 1 x 1 सेंटीमीटर आकार का खरोंच। चोट संख्या 13: स्क ै ल्प हेमेटोमा सिर क े दोनों तरफ पाया गया और सिर क े पिछले हिस्से में हेमेटोमा पाया गया। चोट संख्या 14: बाएं पार्श्व की हड्डी टूटी हुई पाई गई। चोट संख्या 15: सबड्यूरल हेमेटोमा मस्तिष्क क े बाएं पार्श्विक भाग में पाया गया। चोट संख्या 16: मस्तिष्क का पदार्थ लाल हो गया और सूज गया था। चिकित्सा मत क े अनुसार, धनपाल की मृत्यु, मृत्यु क े ठीक पहले लगी चोटों क े कारण कोमा क े कारण हुई थी।
7. जांच क े दौरान, क ु छ अभियुक्तों क े प्रकटीकरण बयानों क े अनुसार निम्नलिखित बरामदगी की गई:- पीडबल्यू गवाह का नाम बरामदगी किस अभियुक्त की सूचना पर पीडबल्यू 7 देवक ृ शन गुर्जर लोहे का पाइप ए 1 छड़ी ए 7 लोहे की छड़ ए 6 पीडबल्यू 8 जगदीश गुर्जर लोहे का पाइप ए 1 छड़ी पीडबल्यू 9 पवन लोहे का पाइप और मोटर साइकल ए 2 गँड़ासी और मोटर साइकल ए 3 पीडबल्यू 10 राधेश्याम लोहे का पाइप व मोटर साइकल ए 2 गँड़ासी और मोटर साइकल ए 3 पीडबल्यू 11 रफीक लोहे का पाइप ए 10 पीडबल्यू 12 नरेश लोहे का पाइप ए 10 पीडबल्यू 14 सुरेश लोहे की छड़ ए 6 पीडबल्यू 15 देवीलाल लोहे की छड़ ए 4 लोहे की छड़ ए 12 पीडबल्यू 16 दीवानसिंह लोहे की छड़ ए 4 लोहे की छड़ ए 12 पीडबल्यू 20 हीरालाल लोहे की छड़ ए 5 पीडबल्यू 21 हरीसिंह लोहे की छड़ ए 5 पीडबल्यू 22 भरत लोहे की छड़ ए 5 पीडबल्यू 23 धर्मसिंह लोहे का पाइप ए 5
8. मामले का अन्वेषण पूरा करने और सेशन न्यायालय को सुपुर्द करने क े पश्चात्, भा.दं.सं. की धारा 147, 148, 149, 450 (वैकल्पिक रूप से 450/149), 452 (वैकल्पिक रूप से 452/149), खंड 302 (वैकल्पिक रूप से खंड 302/149) और 307 (वैकल्पिक रूप से 307/149) क े अधीन दंडनीय अपराधों क े संबंध में 13 अभियुक्त व्यक्तियों क े विरुद्ध आरोप विरचित किए गए थे।
9. अभियोजन पक्ष ने अपने मामले क े समर्थन में 40 गवाहों से परीक्षण किया और 77 दस्तावेज पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने अपने मामले क े समर्थन में एक गवाह को परीक्षित कराया और 9 दस्तावेज पेश किए।
10. पीडब्ल्यू-1 मृतक क े भाई सुनील पुत्र गोविंद राम ने घटना क े बारे में निम्नलिखित रूप में कहाः "घटना दिनांक 08.03.2012 समय दोपहर 1:30-2:00 बजे की है जब धुलंडी का त्योहार था और मैं और मेरे भाई धनपाल, मदन पाल, जय नारायण, तुलसी राम, कालू मीणा, रूप सिंह पहलवान घर में बैठकर आपस में बातें कर रहे थे कि तभी गणेशपुरा व प्रह्लादपुरा से लोग आ गए, जिसमें राजेंद्र, जनक, रामू उर्फ राम सिंह, विजेंद्र, राजेंद्र का पुत्र प्रीतम, चचेरा भाई जीतू, गोलू, मुक ु ट, राजेंद्र उर्फ तांती, राम गोपाल, सत्यनारायण, भूरिया उर्फ धारा सिंह, अतर, दिनेश, सुखपाल, रणजीत, कप्तान सहित 10-12 अन्य लोग षडय़ंत्रपूर्वक हथियारों से लैस होकर घर में घुसे और जान से मारने की नीयत से तलवार व गंडासे से मेरे भाई धनपाल क े सिर पर वार कर दिया। राजेंद्र ने तलवार से हमला किया और जनक ने गंडासा से हमला किया, प्रीतम ने गंडासा से हमला किया और राम गोपाल, तांती उर्फ़ राजेंद्र, सत्य नारायण, बबलू, जीतू, गोलू, रंजीत, दिनेश, सुखपाल ने भी छड़ और पाइप से धनपाल पर हमला किया। इसक े बाद वे मेरे भाई को वहां से गुरुद्वारा ले गए और वहां भी कथित लोगों ने मेरे भाई पर हमला किया। जब मैं हस्तक्षेप करने क े लिए वहां गया तो मुक ु ट, भूरिया, अतर, हंसराज, जितेंद्र, कप्तान ने मुझ पर भी लाठी और पाइप से और बबलू और सत्य नारायण ने मुझ पर तलवार से हमला किया। जिसक े बाद झगड़े की आवाज सुनकर मेरे भाई और वहां मौजूद अन्य लोगों ने हमें बचा लिया। कथित व्यक्ति हमला करने क े बाद गणेशपुरा की ओर भाग गए।" आरोपी की ओर से पेश हुए छह अलग-अलग वकीलों ने गवाह से जिरह की। उनक े द्वारा झेली गई चोटों और उन्हें दी गई चिकित्सा देखभाल क े बारे में पूछे जाने पर, पीडब्ल्यू-1 ने कहाः "यह घटना दिन में डेढ़-ढाई बजे की थी। यह कहना गलत है कि हम वहां से सीधे सुधा अस्पताल गए होंगे। स्वयं कहा कि पहले हम एमबीएस गए थे, उसक े बाद हम सुधा अस्पताल गए थे। उन्होंने बताया कि वहां से उन्हें सुधा अस्पताल रेफर कर दिया गया। मेरे सिर पर तीन घाव थे, इसलिए मुझे रेफर किया गया। मेरे हाथ-पैर में चोट थी, मेरी पीठ पर भी चोट थी। मेरा इलाज एमबीएस अस्पताल में दो घंटे तक चला, उसक े बाद मुझे सुधा अस्पताल रेफर कर दिया गया। मेरे सिर पर तीनों चोटें तलवार की थीं। मेरे सिर पर चोट तब लगी जब मैं अपने भाई को बचाने आया था। मैं घर क े अंदर था। यह सही है कि मैं अपने भाई को अंदर से बचाने क े लिए बाहर आया था। यह सही है कि मुझे घर क े अंदर कोई चोट नहीं आई है। जिस जगह पर पिटाई हुई थी, वो जगह करीब 40 फीट खुली जगह है। स्वयं ने कहा कि पिटाई चौक में हुई थी। यह सही है कि धुलन्डी उत्सव क े दिन मैं अपने कमरे क े अंदर बैठा था, मेरा भाई चौक में था। मेरे घर क े पास ही दूसरी तरफ पन्ना लाल घांसी का घर है। मेरे घर में 3 कमरे, रसोई, शौचालय, बाथरूम, 80 फीट गार्डन और 12 फीट चौड़ी गैलरी है। यह सही है कि हमारे घर क े सामने रास्ता है, जिसमें तिराहा है, और पास में प्रभु दयाल का घर है। तीनों चोटें मेरे घर में एक ही जगह लगी थीं। तलवार से मेरे सिर पर सत्य नारायण और बबलू ने चोट मारी थी।"
11. इस दौरान घायल पीडब्लू1-सुनील क ु मार क े अलावा, मदनपाल (पीडब्लू2), नारायण उर्फ जयनारायण (पीडब्लू6) प्रकाश उर्फ कालू (पीडब्लू24), रूप सिंह (पीडब्लू25) और तुलसी राम (पीडब्लू27) से घटना क े चश्मदीद गवाह क े रूप में पूछताछ की गई। इन चश्मदीद गवाहों क े साक्ष्य क ु छ मामूली परिवर्तनों को छोड़कर पूरी तरह से पीडब्ल्यू1 सुनील क े साक्ष्य क े अनुरूप थे। ए. पीडब्ल्यू2 मदनपाल ने कहाः- "जब वे आए तो उन्होंने सुनील क े घर गाली-गलौज की तो धर्मपाल ने कहा कि मैं उन्हें समझाकर आता हूं, तुम अंदर बैठो। जैसे ही धर्मपाल बाहर गया तो इन लोगों ने धर्मपाल को पीटना शुरू कर दिया और वहां से धर्मपाल को घसीट कर गुरुद्वारा ले गए, जो कि सामने ही है। जनक, तांती, रंजीत, राजेंद्र, प्रीतम, गोविंद, पिंटू, बबलू, जीतू, राम सिंह, धारा सिंह जो उन लोगों क े साथ थे, धर्मपाल को पीटने लगे। जनक ने धर्मपाल क े सिर पर गंडासी से चोट मारी। तांती ने धर्मपाल क े सिर पर लोहे की छड़ से प्रहार किया, फिर राजेन्द्र और प्रीतम ने धर्मपाल क े सिर पर तलवारों से प्रहार किया और गोलू ने धनपाल क े सिर पर भी प्रहार किया, शेष अभियुक्तों क े पास लोहे की छड़ और लकड़ी थी जिससे उन्होंने धनपाल क े साथ मारपीट की और इन्हीं लोगों ने सुनील क े साथ भी मारपीट की। दोनों क े सिर से काफी खून बह रहा था। यह सोचकर कि धर्मपाल की मृत्यु हो गई है, आरोपी लोग अपनी मोटर साइकिल पर भाग गए।फिर हम सुनील और धनपाल को सुनील की गाड़ी में बैठाकर क ै थुन अस्पताल ले गए, जहां धर्मपाल क े डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया और उसे क ै थुन अस्पताल में भर्ती नहीं किया। उसक े बाद हम धर्मपाल को सीधे एम. बी. एस. एच. कोटा ले गए। इसक े बाद इलाज नहीं मिलने पर हम धर्मपाल को सुधा अस्पताल ले गए, जहां धर्मपाल को भर्ती कराया गया और इलाज कराया गया।इसक े बाद 9/3/12 को सुबह 5 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।" बी. पी.डब्ल्यू.6- नारायण उर्फ जय नारायण ने कथन किया:- “8/03/2012 को राजेंद्र सिंह, जनक, तांती उर्फ राजेंद्र सिंह, राधे श्याम, घनश्याम, गोपाल, सत्तू, धरासिंह, जीतू एक ही परिवार क े 20-25 लोग, ये सभी लोग मोतीपुरा क े चरण चौकी में आए थे, जहां मेरे भाई सुनील का घर है। 8/03/2012 को राजेंद्र सिंह, जनक, तांती उर्फ राजेंद्र सिंह, राधेश्याम, घनश्याम, गोपाल, सत्तू, धारासिंह, जीतू एक ही परिवार क े 20-25 व्यक्ति, ये सभी व्यक्ति चरन चौकी, मोतीपुरा आए थे, जहां पर मेरे भाई सुनील का घर है और गालियां देने लगे, घर में घुसकर मारपीट करने लगे और मेरे भाई धर्मपाल को घसीटते हुए बाहर ले गए। सभी ने धर्मपाल और सुनील को पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने तेजी से हमला किया और सुनील और धर्मपाल को मरने क े लिए छोड़ दिया।'' सी. पी.डब्ल्यू. 24-प्रकाश उपनाम कालू द्वारा दिया गया संस्करण थाः "ये सभी लोग, जिनमें से राजेंद्र सिंह, जिनकी पहचान अदालत में गवाह द्वारा की गई थी, जनक, राजेंद्र, तांती, कप्तान, कल्लू उर्फ सत्य नारायण, जेतू और कई अन्य व्यक्ति वहां थे, जिन्हें मैं चेहरे से जानता हूं, उनका नाम नहीं जानता, सुनील क े घर में घुस गए और सुनील भाई साहब क े साथ मारपीट की और उन्हें गुरुद्वारा की ओर ले गए। इस बीच मैं, सुनील, मदनपाल, तुलसी, रूप सिंह पहलवान हम सब बाहर निकले। जब सुनील हस्तक्षेप करने क े लिए गया तो उन्होंने सुनील, राजेंद्र को तलवार से पीटा, जनक को गंडासी, राजेंद्र उर्फ तांती को लोहे क े पाइप से पीटा और अन्य सभी लोगों ने उनक े साथ तेजी से पिटाई की। जो लोग मान रहे थे कि धनपाल भाई साहब मर गए हैं, वो लोग मोटर साइकिल लेकर भाग गए, फिर धनपाल भाई साहब और सुनील को लेकर हम क ै थुन अस्पताल गए। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने क े कारण हम उन्हें एमबीएस अस्पताल, कोटा ले गए, जहां इलाज में देरी क े कारण हम उन्हें निजी अस्पताल सुधा अस्पताल ले गए। जहां रात में धनपाल भाई साहब की मृत्यु हुई। सुनील का इलाज चल रहा था। सुनील क े सिर और धनपाल क े सिर और शरीर पर कई घाव थे।" डी. पी.डबल्यू 25-रूप सिंह ने बयान दिये:- "जैसे ही धनपाल गेट क े पास पहुंचा तो ये सभी लोग उसे घर से बाहर ले गए और सड़क तक पीटा। उनक े पास पाइप, तलवार, गंडासी थे, जिससे उन्होंने धनपाल पर हमला किया था। तलवार राजेंद्र क े हाथ में थी, गंडासी जनक क े हाथ में थी और पाइप तंति उर्फ राजेंद्र क े पास थी, हम सभी ने मिलकर धनपाल की रक्षा की थी। धनपाल और सुनील को मरा हुआ समझकर ये लोग भाग गए। हम धनपाल और सुनील को घायल हालत में क ै थुन अस्पताल ले गए थे, नारायण, तुलसी, कालू उन्हें अस्पताल ले गए थे।'' ई. पी. डब्ल्यू. 27-तुलसीराम ने अपनी परीक्षण में कहाः- "मैं, नारायण, सुनील, मदनपाल, रूपसिंह, प्रकाश उर्फ कालू सुनील क े घर पर बैठे थे और पकौड़ी खा रहे थे, और एक- दूसरे पर गुलाल लगा रहे थे। लगभग डेढ़ बजे प्रह्लादपुरा और गणेहपुरा क े निवासी राजेंद्र, राजेंद्र, तंति, जनक, राम गोपाल, सत्तू, राम सिंह उर्फ रामू, धारा सिंह उर्फ भूरिया, सत्य नारायण उर्फ सत्तू, रंजीत, गोलू उर्फ राधे श्याम, पिंटू उर्फ घनश्याम, बबलू, जीतमल उर्फ जीतू, ये सभी लोग सुनील क े घर आए। वे सभी हथियारों से लैस थे। जनक क े पास गंडासी थी, राजेंद्र क े पास लोहे की पाइप थी, राजेंद्र क े पास तलवार थी, रामगोपाल क े पास लोहे की छड़ थी, गोलू क े पास लोहे की पाइप थी, पिंटो क े पास लकड़ी थी और अन्य क े पास भी लकड़ी थी और लोहे की पाइप भी थी। उन्होंने सुनील क े घर क े बाहर से गाली देनी शुरू कर दी और कहा कि आज बाहर आओ हम खून की होली खेलेंगे।धनपाल ने हमसे कहा कि आप रुकिए, मैं उन्हें संतुष्ट करू ं गा। उसी समय ये लोग घर क े अंदर आए और उन सभी ने धनपाल को पीटना शुरू कर दिया।जनक ने धनपाल क े सिर पर गंडासी से वार किया। राजेंद्र ने धनपाल क े सिर पर तलवार से हमला किया था, तांती ने लोहे क े पाइप से हमला किया था, राम गोपाल ने धनपाल क े सिर पर भी लोहे क े पाइप से हमला किया था और वे गुरुद्वारा क े पास धनपाल को घसीट ले गए थे। जब सुनील ने हस्तक्षेप किया तो इन लोगों ने भी उन पर हमला करना शुरू कर दिया। धनपाल को मरा हुआ समझकर ये लोग वहां से चले गए तो हम धनपाल और सुनील को अस्पताल ले गए। एमबीएस से हम इन लोगों को सुधा अस्पताल ले गए। वहां उपचार क े दौरान धनपाल की मृत्यु हो गई।"
12. प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा अभिसाक्ष्य क े रूप में प्रत्येक अभियुक्त की संलिप्तता और प्रत्येक अभियुक्त को दी गई भूमिका को निम्नानुसार सारणीबद्ध किया जा सकता हैः आरोपी नाम भूमिका निर्धारित गवाह ए 1 राधेश्याम उर्फ घर में घुस गया। पीडब्ल्यू1 गाली-गलौज की गई। धनपाल क े सिर पर पीडब्ल्यू2 गोलू चोट मारी, धनपाल को घर से 100 कदम की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा तक घसीटा गया और पीडब्ल्यू1 को गुरुद्वारे तक ले गया। घर में आए, बुरी तरह से गालियां दीं, धनपाल क े सिर पर वार किया, धनपाल को घर से गुरुद्वारा तक घसीटा, जो 100 कदम दूर था, पीडब्लू 1 को मारा। पीडब्ल्यू6 लोहे की पाइप क े साथ घर में प्रवेश किया, पीडब्लू 1 और धनपाल क े सिर पर हमला किया। पीडब्ल्यू27 ए 2 राजेंद्र उर्फ तांती घर में लोहे की पाइप लेकर घुसे, धनपाल पर हमला किया, हाथों, पैरों, घुटनों और धनपाल क े शरीर पर लाठी से वार किया, धनपाल को घर से गुरुद्वारा ले गए, जो 100 कदम दूर था, घर क े अंदर और साथ ही घर क े बाहर पीडब्ल्यू1 पर हमला किया। पीडब्ल्यू1 गाली-गलौज की गई। धनपाल क े सिर पर चोट मारी, धनपाल को घर से 100 कदम की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा तक घसीटा गया और पीडब्ल्यू1 को गुरुद्वारे तक ले पीडब्ल्यू2 गया। घर में आए, बुरी तरह से गालियां दीं, धनपाल क े सिर पर आयरन रॉड से मारा, पीडब्लू-1 को मारा, धनपाल को घर से गुरुद्वारा तक घसीटा, पीडब्लू-6 की ओर भागा। पीडब्ल्यू6 पीडब्ल्यू1 क े घर में घुस गया और धनपाल को मुक्क े और पैर से पीटा और उसे गुरुद्वारा ले गया, पीडब्ल्यू1 को लोहे क े पाइप से मारा, लोहे क े पाइप से धर्मपाल को मारा। पीडब्ल्यू24 धनपाल को गालियां दीं, दरवाजे पर आकर घर क े अंदर धनपाल पर हमला किया, धनपाल को मारा पीडब्ल्यू25 लोहे की पाइप क े साथ, धनपाल क े सिर पर मारा। लोहे की पाइप से लैस होकर घर में घुसे और धनपाल क े सिर पर मारा, पीडब्ल्यू1 और धनपाल क े सिर पर मारा। पीडब्ल्यू ए 3 जनक सिंह घर में घुसकर धनपाल पर गंडासा से हमला किया और धनपाल को घर से गुरुद्वारा तक घसीट कर ले गए, जो 100 पीडब्ल्यू1 कदम दूर था। गाली-गलौज की गई। धनपाल क े सिर पर चोट लगी, धनपाल को घर से 100 कदम की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा तक घसीटा गया और पीडब्ल्यू1 को गुरुद्वारे तक ले गया। पीडब्ल्यू2 घर में आए, बुरी तरह से गालियां दीं, धनपाल क े सिर पर गंडासी से वार किया, पीडब्लू-1 को मारा, धनपाल को घर से गुरुद्वारा तक खींच लिया, उसे मारने क े लिए पीडब्लू-6 की ओर भागा। पीडब्ल्यू6 पीडब्ल्यू1 क े घर में घुस गया और धनपाल को मुक्क े और पैर से पीटा और उसे गुरुद्वारा ले गया, पीडब्ल्यू1 को गँड़ासी से मारा, धर्मपाल को लोहे की पाइप से मारा। पीडब्ल्यू धनपाल को गाली दी, दरवाजे से दरवाजे तक आए और घर क े अंदर धनपाल को मारा, धनपाल को गंडासी से मारा, धनपाल क े सिर पर मारा। पीडब्ल्यू गंडासी लेकर घर में घुसे और धनपाल क े सिर पर मारा, पीडब्लू-1 और धनपाल क े सिर पर मारा। पीडब्ल्यू ए 4 रामू उर्फ राम सिंह घर में घुस गया और धनपाल को घर से गुरुद्वारे तक घसीट कर ले गया, जो 100 सीढ़ियां दूर था। पीडब्ल्यू1 लोहे क े पाइप/लकड़ी की छड़ी क े साथ घर में प्रवेश किया, पीडब्लू 1 और धनपाल क े सिर पर मारा पीडब्ल्यू ए 5 बाबुल उर्फ ओम प्रकाश धनपाल पर हमला किया गया, जब उसने हस्तक्षेप किया तो पीडब्ल्यू1 पर हमला किया, धनपाल को घर से गुरुद्वारा तक घसीटा गया, जो 100 कदम दूर है, जिससे पीडब्ल्यू1 क े सिर पर आगे की तरफ चोट लगी पीडब्ल्यू1 लोहे की पाइप/लकड़ी की छड़ी क े साथ घर में प्रवेश किया, पीडब्लू 1 और धनपाल क े सिर पर मारा। पीडब्ल्यू ए 6 जीतू उर्फ जीतमल घर में घुस कर धनपाल पर हमला किया गया और धनपाल को घर से गुरुद्वारे तक घसीट कर ले गया, जो 100 कदम दूर था पीडब्ल्यू1 घर में आया, गालियां दीं, पीडब्ल्यू1 को पीडब्ल्यू6 मारा पीडब्ल्यू1 क े घर में घुस गया और धनपाल को मुक्कोऔर पैर से पीटा और उसे गुरुद्वारा ले गया, धनपाल और पीडब्ल्यू1 पर हमला किया पीडब्ल्यू लोहे क े पाइप/लकड़ी की छड़ी क े साथ घर में प्रवेश किया, पीडब्लू 1 और धनपाल क े सिर पर मारा पीडब्ल्यू ए 7 घनश्याम उर्फ पिंटू घर में घुस गया और धनपाल को घर से गुरुद्वारे तक घसीट कर ले गया, जो 100 कदम दूर था पीडब्ल्यू1 गाली-गलौज की गई। धनपाल क े सिर पर चोट लगी, धनपाल को घर से 100 कदम की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा तक घसीटा गया और पीडब्ल्यू1 को गुरुद्वारे तक ले गया। पीडब्ल्यू2 घर में आया, गालियां दीं, धनपाल को पीटा, पीडब्लू-1 को मारा पीडब्ल्यू6 लकड़ी की छड़ी लेकर घर में घुसे और पीडब्लू-1 और धनपाल क े सिर पर वार किया पीडब्ल्यू ए 8 राजेन्द्र घर में घुसे, धनपाल क े सिर पर तलवार से हमला किया गया, धनपाल क े सिर क े पीछे की तरफ तलवार से चोट आई, धनपाल को घर से गुरुद्वारा ले गए जो 100 कदम दूर था पीडब्ल्यू1 धनपाल क े सिर पर एक प्रहार किया पीडब्ल्यू2 गाली गलोच किया, धनपाल क े सिर पर तलवार से हमला, पीडब्लू-1 को मारा पीडब्ल्यू6 पीडब्ल्यू1 क े घर में घुस गया और धनपाल को मुक्को और पैर से पीटा और गुरुद्वारा ले गया, तलवार से पीडब्ल्यू1 मारा, तलवार से मारा, धर्मपाल को मारा पीडब्ल्यू धनपाल को गाली दी, दरवाजे तक आए और घर क े अंदर धनपाल को मारा, धनपाल को तलवार से मारा, धनपाल क े सिर पर मारा पीडब्ल्यू तलवार से लैस होकर घर में घुसे और धनपाल क े सिर पर वार किया, तलवार से पीडब्ल्यू1 और धनपाल क े सिर पर वार किया पीडब्ल्यू ए 9 राम गोपाल घर में घुस कर धनपाल पर हमला किया गया और धनपाल को घर से गुरुद्वारे तक पीडब्ल्यू1 घसीट कर ले गया, जो 100 कदम दूर था घर में आया, गालियां दीं, पीडब्ल्यू1 को मारा पीडब्ल्यू6 लोहे की रॉड से लैस होकर घर में घुसे और धनपाल क े सिर पर प्रहार किया, पीडब्लू-1 और धनपाल क े सिर पर प्रहार किया पीडब्ल्यू ए 10 सत्तू उर्फ सत्यनारायण घर में घुसे, धनपाल पर हमला किया, पीडब्ल्यू1 पर हमला किया, जब उसने हस्तक्षेप किया, धनपाल को घर से गुरुद्वारे तक घसीटा, जो 100 कदम दूर था, पीडब्ल्यू1 क े सिर पर चोट कारित की । पीडब्ल्यू1 घर में आया, गालियां दीं, पीडब्ल्यू1 को मारा पीडब्ल्यू6 पीडब्ल्यू1 क े घर में घुस गया और धनपाल पर हमला किया और उसे गुरुद्वारा ले गया, पीडब्ल्यू1 और धनपाल पर हमला किया पीडब्ल्यू लोहे क े पाइप/लकड़ी की छड़ी क े साथ घर में प्रवेश किया, पीडब्लू 1 और धनपाल क े सिर पर मारा पीडब्ल्यू ए 11 कप्तान घर में घुस गया और पीडब्लू-1 पर हमला पीडब्ल्यू1 कर दिया, जब उसने हस्तक्षेप किया, तो धनपाल को घर से गुरुद्वारा तक घसीटा, जो 100 कदम दूर था पीडब्ल्यू1 क े घर में घुस गया और धनपाल को मुक्को और पैर से पीटा और उसे गुरुद्वारा ले गया, पीडब्ल्यू1 और धनपाल पर हमला किया पीडब्ल्यू ए 12 भुरिया उर्फ धारा सिंह घर में घुस गया और जब उसने हस्तक्षेप किया तो पीडब्ल्यू1 पर हमला कर दिया पीडब्ल्यू1 घर में आया, गालियां दीं, पीडब्ल्यू1 को मारा पीडब्ल्यू6 लोहे क े पाइप/लकड़ी की छड़ी क े साथ घर में प्रवेश किया, पीडब्लू 1 और धनपाल क े सिर पर मारा पीडब्ल्यू ए 13 रंजीत घर में घुस कर धनपाल पर हमला किया पीडब्ल्यू1 गाली-गलौज की गई। धनपाल क े सिर पर चोट मारी, धनपाल को घर से 100 कदम की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा तक घसीटा गया और पीडब्ल्यू1 को गुरुद्वारे तक ले गया। पीडब्ल्यू2 गाली गलौच की, धनपाल को पीटा, पीडब्ल्यू6 पीडब्लू1 को मारा, धनपाल को घर से गुरुद्वारे तक खींचा, उसे मारने क े लिए पीडब्लू6 की ओर भागा लोहे क े पाइप/लकड़ी की छड़ी क े साथ घर में घुसे, धनपाल को पकड़ लिया, पीडब्लू-1 और धनपाल क े सिर पर मारा पीडब्ल्यू
13. रिकॉर्ड पर चिकित्सा साक्ष्य i) पीडब्लू17 - डॉ. पी.पी. बंसल जिसने पीडब्लू1 सुनील का इलाज किया था, ii) पीडब्लू19- डॉ. क ृ ष्ण हरि शर्मा जिन्होंने शुरू में धनपाल का इलाज किया था और iii) पीडब्लू30-डॉ. राक े श शर्मा ने मृतक धनपाल क े शव का पोस्टमार्टम किया था। पीडब्लू36- डॉ. विवेक गोयल की भी आरोपी संख्या 1, 2 और 7 को लगी चोटों क े संबंध में जांच की गई।
14. विचारण न्यायालय ने अपने निर्णय और आदेश दिनांक 19.04.2017 द्वारा सभी 13 अभियुक्तों क े खिलाफ निम्नानुसार सजा का आदेश पारित किया:- - "इसलिए उपरोक्त विश्लेषण और उद्धरणों को ध्यान में रखते हुए अभियोजन पक्ष आरोपी व्यक्तियों राधे श्याम उर्फ गोलू, राजेंद्र उर्फ तंती, जनक सिंह, रामू उर्फ राम सिंह, बबलू, जीतू उर्फ जीतमल, घन श्याम उर्फ पिंटू, राजेंद्र, राम गोपाल, सत्तू उर्फ सत्य नारायण, कप्तान, भूरिया उर्फ धारा सिंह और रंजीत क े खिलाफ भा.दं.सं. की खंड 147, 148, 149, 450 या 450/149, 302 या 302/149 क े तहत अपराध साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है। तदनुसार, पूर्वोक्त अपराध करने क े आरोपों क े लिए पूर्वोक्त अभियुक्त व्यक्तियों को दोषी ठहराना उचित प्रतीत होता है और भारतीय दंड संहिता की धारा 452 या 452/149 क े तहत अपराधों क े आरोपों से पूर्वोक्त अभियुक्त व्यक्तियों को दोषमुक्त करना भी उचित प्रतीत होता है। उसी दिन दिए गए दंडादेश क े आदेश द्वारा, निचली अदालत ने सभी 13 अभियुक्त व्यक्तियों को निम्नलिखित रूप में दंडित कियाः- "(1) पूर्वोक्त अभियुक्त व्यक्तियों को भा.दं.सं. की धारा 147 क े अधीन आरोप क े लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है और उन्हें 2 वर्ष क े कठोर कारावास से दंडित किया जाता है। (2) पूर्वोक्त अभियुक्त व्यक्तियों को भा.दं.सं. की धारा 148 क े अधीन आरोप क े लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है और उन्हें दो वर्ष क े कठोर कारावास से दंडित किया जाता है और प्रत्येक अभियुक्त को 5000/- रुपए क े जुर्माने से दंडित किया जाता है और जुर्माना जमा करने में असफल रहने पर प्रत्येक अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ता है। (3) पूर्वोक्त अभियुक्त व्यक्तियों को भा.दं.सं. की धारा 450 या 450/149 क े अधीन आरोप क े लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है और 7 वर्ष क े कठोर कारावास से दंडित किया जाता है और प्रत्येक अभियुक्त को 10000/- रुपए क े जुर्माने से दंडित किया जाता है और जुर्माने को जमा करने में असफल रहने पर प्रत्येक अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ता है। (4) उपर्युक्त अभियुक्त व्यक्तियों को भा.दं.सं. की धारा 302 क े अधीन आरोप क े लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है और आजीवन कारावास से दंडित किया जाता है और प्रत्येक अभियुक्त को 30000/- रुपए क े जुर्माने से दंडित किया जाता है और जुर्माना जमा करने में असफल रहने पर प्रत्येक अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ता है। (5) पूर्वोक्त अभियुक्त व्यक्तियों को भा.दं.सं. की धारा 307 क े अधीन आरोप क े लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है और 7 वर्ष क े कठोर कारावास से दंडित किया जाता है और प्रत्येक अभियुक्त को 10000/- रुपए क े जुर्माने से दंडित किया जाता है और जुर्माना जमा करने में असफल रहने पर प्रत्येक अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ता है। अभियुक्तों की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। पुलिस हिरासत/न्यायिक हिरासत में आरोपी व्यक्तियों द्वारा पहले से ही गुजरी हिरासत की अवधि को अंतिम सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। आरोपी व्यक्तियों की सजा का वारंट तदनुसार तैयार किया जाए।" 14.[1] पीडब्लू 1-सुनील क ु मार, पीडब्लू 2-मदनपाल, पीडब्लू 6-नारायण उर्फ जयनारायण, पीडब्लू 24-प्रकाश उर्फ कालू, पीडब्लू 25-रूप सिंह और पीडब्लू 27-तुलसीराम क े चश्मदीद गवाहों क े बयान क े माध्यम से अभियोजन पक्ष क े नेतृत्व में सबूत को विचारण न्यायालय ने भरोसेमंद पाया। पीडब्लू 6-नारायण उर्फ जयनारायण क े संबंध में आरोपी की ओर से पेश किए गए निवेदन पर विचारण न्यायालय द्वारा निम्नानुसार विचार किया गयाः- - "कथित गवाह क े अनुक्रम में वकील द्वारा तर्क क े दौरान यह प्रतिवाद किया गया था कि कथित गवाह अपराध स्थल का गवाह नहीं है और उसे बनाया गया है और उसकी उपस्थिति की पुष्टि पीडब्ल्यू-24 प्रकाश उर्फ कालू द्वारा नहीं की गई है और वह घटना क े बाद अपराध स्थल पर पहुंचा और कथित संबंध पीडब्ल्यू-29 छगन सिंह, जांच अधिकारी ने यह भी खुलासा किया है कि अपनी जांच क े दौरान उन्होंने उक्त गवाह को चश्मदीद क े रूप में नहीं पाया। उक्त अनुक्रम में, जांच अधिकारी और काउंसेलों द्वारा दिए गए तथ्य और तर्क समुचित नहीं पाए जाते हैं। उक्त तथ्य क े संबंध में अन्य गवाहों द्वारा दी गई गवाही का अध्ययन करने पर, जिसमें पीडब्लू-1 सुनील क े परीक्षा-प्रमुख ने स्वयं अपने घर क े अंदर जय नारायण की उपस्थिति का खुलासा किया है। रिपोर्ट पी-1 में भी उसने घटना क े समय अपने घर क े अंदर जय नारायण की उपस्थिति का खुलासा किया है और अदालत क े समक्ष उसक े बयान क े दौरान भी उक्त तथ्य की पुष्टि की गई है और जिसका किसी भी तरह से खंडन नहीं किया गया है। इसी तरह से जय नारायण की जिरह क े दौरान उसकी उपस्थिति की पुष्टि की गई है और उसे उठाने क े बाद अस्पताल लाया गया था।"
15. सभी 13 दोषी अभियुक्तों ने, व्यथित होने क े कारण, उच्च न्यायालय में पूर्वोक्त डी. बी. दाण्डिक अपीलीय संख्या 179/2018, 832/2017, 946/2017, 993/2017, 1123/2017, 1191/2017, 1475/2017 और 26/2018 दायर की। उच्च न्यायालय ने राजेंद्र उर्फ तांती (ए 2) और जनक सिंह (ए 3) क े खिलाफ दर्ज दोषसिद्धि और सजा की पुष्टि की, लेकिन अन्य सभी 11 अभियुक्तों को उनक े खिलाफ लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। उच्च न्यायालय द्वारा यह मत व्यक्त किया गयाः- "अपीलार्थियों क े विद्वान अधिवक्ता का तर्क अन्य अभियुक्तों क े अधिक निहितार्थ और झूठे निहितार्थ क े बारे में है, जिन्हें प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा भी घायल और मृतक को कोई विशिष्ट चोट नहीं दी गई है। यह सच है कि जब प्राथमिकी दर्ज की गई थी, तो 10-12 अन्य लोगों क े अलावा 19 आरोपियों क े नाम दिए गए थे। पुलिस ने उन्नीस में से सात अभियुक्तों क े खिलाफ आरोप-पत्र दायर नहीं किया, हालांकि रंजीत क े खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया गया, जिसका नाम प्राथमिकी में नहीं था। यह मामले की जांच करने क े बाद है। उपर्युक्त क े बल पर, हमें अभियोजन द्वारा दिए गए साक्ष्यों पर गौर करने क े बजाय, अति-निहितार्थ क े एक मामले का पता लगाने की आवश्यकता है।......... हम पाते हैं कि अभियोजन पक्ष ने स्वतंत्र गवाह पीडब्लू/25 रूप सिंह को भी पेश किया, जिन्होंने अभियोजन पक्ष क े मामले का समर्थन किया है और, तदनुसार, पीडब्लू/1 सुनील क ु मार क े बयान की पुष्टि की है। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, अभियोजन पक्ष जनक सिंह, प्रीतम और राजेंद्र उर्फ तांती की घटना में भागीदारी साबित करने और मृतक क े सिर को चोट पहुंचाने क े लिए सबूत पेश कर सकता है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने प्रीतम क े खिलाफ आरोप पत्र दायर नहीं किया और यहां तक कि सीआरपीसी की धारा 319 क े तहत कोई आवेदन भी विचारण क े दौरान नहीं दिया। इस प्रकार प्रीतम क े खिलाफ मृतक क े सिर में चोट लगने क े विशिष्ट आरोप क े बावजूद, उस पर मुकदमा नहीं चलाया गया है। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, दो अभियुक्त हैं, जिनक े खिलाफ मृतक धनपाल को सिर पर चोट पहुंचाने का विशिष्ट आरोप है, अर्थात् जनक सिंह और राजेंद्र उर्फ तांती। हम पाते हैं कि चश्मदीद गवाहों और घायल गवाहों ने न तो घायल को और न ही मृतक को हथियार और चोट देने क े साथ विशिष्ट शब्दों में अन्य आरोपी का नाम लिया है। उन्हें भा.दं.सं. की धारा 149 की मदद से दोषी ठहराया गया है। अपीलकर्ता क े विद्वान अधिवक्ता क े तर्क की सराहना करने क े लिए, हमने यह पता लगाने क े लिए मामले पर विचार किया है कि क्या भा.दं.सं. की धारा 149 की सहायता से दोषसिद्धि का मामला बनाया गया है। अभियोजन पक्ष क े अनुसार, अपीलकर्ताओं का उद्देश्य घटना को अंजाम देना था और इसलिए, वे सामान्य उद्देश्य क े साथ आए थे। इस प्रकार न क े वल अवैध रूप से एकत्र होने का मामला साबित हुआ, बल्कि समान उद्देश्य क े साथ उनकी भागीदारी भी साबित हुई, जो चार दिन पहले हुई घटना क े संदर्भ में हुई, जब शिकायतकर्ता पक्ष ने अभियुक्त पक्ष पर हमला किया था। यह सिर्फ हिसाब तय करने क े लिए है कि आरोपी आया और 8.3.2012 को घटना को अंजाम दिया। हम पाते हैं कि वर्तमान मामले में घटना की तारीख से चार दिन पहले, शिकायतकर्ता ने आरोपी पक्ष पर हमला किया था। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, आरोपी क े पास घटना को अंजाम देने का एक उद्देश्य था। एक बार उद्देश्य हो जाने पर, घटना को कारित करने क े लिए सामान्य उद्देश्य का भी अनुमान लगाया जा सकता है, हालांकि, दोषसिद्धि अनुमानों पर आधारित नहीं हो सकती है, लेकिन तथ्यों को साक्ष्य द्वारा साबित किया जा सकता है।................ घायल और मृतक को धारदार हथियार से चोट नहीं लगी थी, लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि क्या गंडासी इतनी तेज थी कि वह इस तरह की चोट का कारण बन सकती थी। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, हम मृतक की चोट की प्रक ृ ति क े संदर्भ में अपीलकर्ता जनक सिंह क े विद्वान अधिवक्ता क े तर्क को प्रतिग्रहण करने क े लिए तैयार नहीं हैं, जब घायल क े साथ-साथ चश्मदीद गवाहों द्वारा उसे सिर की चोट पहुंचाने क े लिए विशिष्ट आरोप लगाए गए हैं। जहां तक राजेन्द्र उर्फ ताँती का संबंध है, उसक े पास से एक भोथरी वस्तु बरामद की गई है। उसक े खिलाफ मृतक क े सिर पर चोट पहुंचाने का भी विशेष आरोप लगाया गया है। उसक े प्रकटीकरण पर हथियार की बरामदगी प्रत्यक्षदर्शियों क े बयान से पुष्टि होती है, इस प्रकार, हम उसक े खिलाफ भी मामला पाते हैं। जहां तक राजेन्द्र पुत्र काशी/धर्म सिंह का संबंध है, प्रारंभ में उनक े विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया था। उन्होंने अन्यथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 क े तहत अपने बयान में 'एलिबी' का बचाव किया है। यह बताते हुए कि इस मामले में घटना की तारीख से चार दिन पहले, उसे सिर पर चोट लगी थी, इस प्रकार वह अपने निवास पर था।उन्होंने इस घटना में अपनी भागीदारी से इनकार किया है, बल्कि इसमें अपनी उपस्थिति से इनकार किया है। कथित आरोपी राजेंद्र पुत्र काशी/धर्म सिंह क े बयान की पुष्टि पीडब्लू/37 रामेंद्र सिंह द्वारा की गई है। कहा जाता है कि होली क े त्यौहार पर वे राजेन्द्र पुत्र काशी/धरम सिंह क े घर गए थे। उसक े सिर पर चोट लगी हुई थी जिस पर पट्टी बंधी हुई थी। कथित गवाह ने राजेन्द्र पुत्र काशी/धर्म सिंह क े बयान का समर्थन किया है। यह भी एक तथ्य है कि उसक े पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है और शुरू में, जब प्राथमिकी दर्ज की गई थी, तो सिर पर चोट क े लिए क े वल एक राजेंद्र का नाम दिया गया था। बाद में गवाह द्वारा इसका नाम राजेंद्र सिंह उर्फ तांती रखा गया। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, हम राजेन्द्र पुत्र काशी/धर्म सिंह क े पक्ष में एक मामला पाते हैं। यह न क े वल उनकी बहाने की दलील को स्वीकार कर रहा है, बल्कि इसकी पुष्टि करने क े लिए सबूतों पर भी विचार कर रहा है। जहां तक अन्य अभियुक्तों का संबंध है, चूंकि हमने भा.दं.सं. की धारा 149 की सहायता से दोषसिद्धि क े लिए अभियोजन पक्ष क े मामले को स्वीकार नहीं किया है और चूंकि हथियार सौंपने क े साथ चोट पहुंचाने का विशिष्ट आरोप नहीं लगाया गया है, हम उनक े पक्ष में भी एक मामला पाते हैं। हम पहले ही दोनों समूहों क े बीच पूर्व शत्रुता क े बारे में निष्कर्ष दर्ज कर चुक े हैं और, कभी-कभी, इसक े परिणामस्वरूप अत्यधिक प्रभाव पड़ता है, जो इस तथ्य से भी स्थापित होता है कि जांच क े बाद, सभी अभियुक्तों क े खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं की गई थी। इस प्रकार, उनक े प्रकटीकरण पर हथियारों की क े वल बरामदगी उनको चोट पहुंचाए बिना अभियुक्त को नहीं जोड़ सकती है।"
16. इस अपील में हमने राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता डॉ. मनीष सिंघवी, शिकायतकर्ता की विद्वान अधिवक्ता सुश्री अर्चना पाठक दवे और अभियुक्त-प्रत्यर्थियों क े विद्वान अधिवक्ता श्री आदित्य क ु मार चौधरी, श्री राजेश सिंह चौहान और श्री रणधीर क ु मार ओझा को सुना। अपीलार्थियों की ओर से यह प्रस्तुत किया गया कि चश्मदीद गवाह का विवरण काफी स्पष्ट था और विशेष रूप से सभी अभियुक्तों द्वारा किए गए प्रत्यक्ष कार्यों की ओर ध्यान दिलाया गया था और यह कि उच्च न्यायालय द्वारा 11 अभियुक्त- प्रत्यर्थियों को बरी करना सही नहीं था। यह प्रस्तुत किया गया कि उक्त 11 अभियुक्त-प्रत्यर्थियों क े विरुद्ध दोषसिद्धि और दंडादेश क े आदेश को अपास्त करने में उच्च न्यायालय द्वारा कोई ठोस कारण नहीं दिया गया था और इसलिए यह न्यायालय उच्च न्यायालय द्वारा अभिलिखित दोषमुक्ति क े आदेश को अपास्त करने में न्यायोचित होगा। दूसरी ओर, अभियुक्त-प्रतिवादी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं ने प्रस्तुत किया कि, जैसा कि उच्च न्यायालय द्वारा पाया गया है, प्रश्नगत घटना से चार दिन पहले एक घटना हुई थी, जिसमें क ु छ अभियुक्त व्यक्तियों को चोटें आई थीं. इस प्रकार, दो समूहों क े बीच परस्पर प्रतिद्वंद्विता भी हो सकती है और उच्च न्यायालय द्वारा उचित रूप से यह पाया गया कि अभिरक्षा को अतिव्यापी बनाने का उद्देश्य है और इस प्रकार उच्च न्यायालय द्वारा दोषमुक्ति को अभिलिखित करना न्यायोचित था।
17. अभियोजन पक्ष क े गवाहों की उपस्थिति क े संबंध में, जिनकी घटना क े चश्मदीद गवाह क े रूप में जांच की गई थी, उन्हें बदनाम करने क े लिए रिकॉर्ड पर क ु छ भी नहीं लाया गया था, सिवाय इस बात क े कि पीडब्लू 6-नारायण उर्फ जयनारायण की उपस्थिति को पीडब्लू 24-प्रकाश उर्फ कालू द्वारा बोला या विज्ञापित नहीं किया गया था। यह तथ्य है कि इन गवाहों में से एक को इसी संव्यवहार में चोट लगी थी और उनमें से बाकी घटना क े तुरंत बाद मृतक और घायलों को चिकित्सा क ें द्र ले गए थे, इन चश्मदीदों क े माध्यम से सामने आए अभियोजन पक्ष क े मामले को विश्वसनीयता प्रदान करता है। इन गवाहों की विश्वसनीयता को कम करने क े लिए उनकी जिरह में क ु छ भी रिकॉर्ड में नहीं लाया गया है। फिर भी, हम पीडबल्यू6 नारायण उर्फ जयनारायण की गवाही से बच सकते हैं क्योंकि उनकी उपस्थिति पीडबल्यू24 प्रकाश उर्फ कालू द्वारा विज्ञापित नहीं की गई थी। यह हमारे पास 5 गवाहों को छोड़ देता है जिन्होंने आरोपी-प्रतिवादियों की उपस्थिति और भागीदारी की गवाही दी थी।
18. मसलती बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1964) 8 एस. सी. आर. 133; एआइआर 1965 एस. सी. 202 में इस न्यायालय की चार न्यायाधीशों की पीठ से यह विचार करने क े लिए कहा गया था कि क्या क े वल उन अभियुक्तों को दोषी ठहराने में उच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण पर विचार किया गया जिनक े संबंध में कम से कम चार गवाहों ने सुसंगत विवरण दिया था। उस मामले में गैरकानूनी जमावड़े द्वारा किए गए हमले में पांच लोगों की जान चली गई थी और गवाह लक्ष्मी प्रसाद क े अलावा, किसी भी गवाह ने अभियुक्तों को किसी भी प्रत्यक्ष कार्य क े लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया था, लेकिन क े वल अभियुक्तों क े नामों का उल्लेख किया था जो कि उपस्थित थे। जैसा कि ऊपर कहा गया है, मानदंड अपनाते हुए, उच्च न्यायालय ने 35 अभियुक्तों में से 10 अभियुक्तों को विचारण न्यायालय द्वारा आईपीसी की धारा 302 सहपठित 149 क े तहत दोषी ठहराए जाने की पुष्टि की, जिसे उच्च न्यायालय क े निर्णय को इस न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
19. तब से इस न्यायालय द्वारा मसलती क े विनिश्चय का लगातार अनुसरण किया गया है और महाराष्ट्र राज्य बनाम रामलाल देवप्पा राठौड़ और अन्य (2015) 15 एस. सी. सी. 77 में निम्नलिखित रूप में समझाया गया थाः "21. यह हमें इस प्रश्न पर लाता है कि क्या वर्तमान जैसे हमले में, मसलती में इस न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांत कहां तक लागू होता है? मसलती में एक लक्ष्मी प्रसाद अपने हथियारबंद साथियों क े साथ गयादीन नाम क े व्यक्ति क े घर गया था। लक्ष्मी प्रसाद क े उकसाने पर, हमलावरों ने गयादीन क े घर क े दरवाजे तोड़ दिए, गयादीन सहित चार लोगों की हत्या कर दी और उनक े शवों को घर से बाहर खींच लिया, जिसक े बाद एक और व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इन पांच शवों को बाद में खेत में ले जाया गया और आग लगा दी गई। दोषी ठहराए गए पैंतीस अभियुक्तों में से दस अभियुक्तों को मृत्युदंड दिया गया था। उच्च न्यायालय ने उनक े मृत्युदंड की पुष्टि की और शेष अभियुक्तों में से सात को संदेह का लाभ दिया गया। जहां तक धारा 149 की सहायता से दोषी ठहराए गए अभियुक्तों का संबंध है, उच्च न्यायालय ने एक परीक्षण अपनाया और अभिनिर्धारित किया कि जब तक कम से कम चार गवाहों ने किसी भी अपीलकर्ता क े खिलाफ एक सुसंगत विवरण नहीं दिया है, तब तक उनक े खिलाफ मामला साबित नहीं किया जा सकता है। इस निर्णय से पता चलता है कि लक्ष्मी प्रसाद को छोड़कर हमलावरों में से किसी को भी कोई विशेष हिस्सा नहीं सौंपा गया था। अन्य अभियुक्तों क े संबंध में साक्ष्य यह था कि वे गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा थे जो इस न्यायालय की निम्नलिखित टिप्पणियों से स्पष्ट है:(मसलती मामला, ए. आई. आर. पृष्ठ 207, पैरा 7) "7. इसने एक अन्य विशेषता पर भी विचार किया जिसमें सभी गवाहों क े साक्ष्य की विशेषता थी और वह यह थी कि उन्होंने घटना का अपना विवरण काफी हद तक समान शब्दों में दिया और लक्ष्मी प्रसाद, अभियुक्त 1 को छोड़कर किसी भी हमलावर को प्रत्यक्ष कार्यों क े संबंध में विशेष भाग नहीं दिए।" इस न्यायालय की टिप्पणियों से यह भी पता चलता है कि यद्यपि एक गवाह की गवाही किसी अभियुक्त व्यक्ति को दोषी ठहराने क े लिए पर्याप्त होगी, एक ऐसे मामले में जिसमें बड़ी संख्या में अभियुक्त शामिल हैं, जहां साक्षी इस तथ्य पर साक्ष्य देते हैं कि क ु छ व्यक्ति विधिविरुद्ध जमाव क े सदस्य थे जिन्होंने प्रश्नगत अपराध किए थे, उच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकार अपनाई गई परीक्षा को सुरक्षित पाया गया था। यह पाया गया कि यद्यपि विधिविरुद्ध जमाव का प्रत्येक सदस्य किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध क े लिए उत्तरदायी होगा जो किसी प्रत्यक्ष कार्य या विशिष्ट अभिकथन की अनुपस्थिति में विधिविरुद्ध जमाव क े सामान्य उद्देश्य को ग्रहण करता है, फिर भी ऐसा परीक्षण अपनाना संभव था।...............
24. विधिविरुद्ध जमाव क े उन सदस्यों का दायित्व, जिन्होंने वास्तव में अपराध किया है, अभिलेख पर साक्ष्य की प्रक ृ ति और स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। तथापि, कठिनाई उन लोगों क े दायित्व और अपराध की सीमा पर विचार करते समय उत्पन्न हो सकती है जिन्होंने वास्तव में अपराध नहीं किया हो, लेकिन उस सभा क े सदस्य थे। जो बात उन्हें बांधती है और उन्हें परोक्ष रूप से उत्तरदायी बनाती है वह सामान्य उद्देश्य है जिसक े लिए अभियोजन में अपराध गैर-कानूनी सभा क े अन्य सदस्यों द्वारा किया गया था। उपस्थित तथ्यों और परिस्थितियों से सामान्य उद्देश्य क े अस्तित्व का पता लगाया जा सकता है। उदाहरण क े लिए, यदि पांच से अधिक व्यक्ति पीड़ित क े घर में घुसते हैं, जहां उनमें से क े वल क ु छ ही सशस्त्र हैं, जबकि अन्य नहीं हैं और सशस्त्र व्यक्ति हमला करते हैं, तो यहां तक कि निहत्थे व्यक्ति भी उन सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा किए गए क ृ त्यों क े लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार होते हैं। ऐसी स्थिति में समान उद्देश्य क े अस्तित्व का पता लगाना कठिन नहीं हो सकता है क्योंकि सभी व्यक्ति पीड़ित क े घर में घुस गए थे और यह निश्चितता क े साथ मूल्यांकन किया जा सकता था कि सभी समान उद्देश्य द्वारा निर्देशित थे और उनमें से प्रत्येक को उत्तरदायी बनाया गया था। इस प्रकार जब सभा का गठन करने वाले व्यक्तियों को उसी हित में दिखाया जाता है जिसक े अनुसरण में उनमें से क ु छ सशस्त्र हो जाते हैं, जबकि अन्य इतने सशस्त्र नहीं हो सकते हैं, तो ऐसे निहत्थे व्यक्ति सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्यों क े लिए उत्तरदायी होते हैं। लेकिन एक ऐसी स्थिति में जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ द्वारा हमला किया जाता है, यह पता लगाना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है कि जिन्होंने कोई प्रत्यक्ष कार्य नहीं किया था, क्या वे आम उद्देश्य से निर्देशित थे। इस बात पर संदेह पैदा करने की गुंजाइश हो सकती है कि क्या जिन लोगों पर कोई विशिष्ट प्रत्यक्ष कार्य करने का आरोप नहीं है, वे निर्दोष तमाशबीन थे या वास्तव में गैरकानूनी जमावड़े क े सदस्य थे। यही कारण है कि मसलती में यह न्यायालय सतर्क और संज्ञेय था कि प्रत्यक्ष अधिनियम क े संबंध में लक्ष्मी प्रसाद को छोड़कर किसी भी हमलावर को कोई विशेष भाग नहीं सौंपा गया था. यह इस पृष्ठभूमि में है और विचार करने क े क्रम में है कि क्या सभा में क ु छ ऐसे व्यक्ति शामिल थे जो क े वल निष्क्रिय गवाह थे और सभा क े सामान्य उद्देश्य को ध्यान में रखे बिना निष्क्रिय जिज्ञासा क े रूप में सभा में शामिल हुए थे। (ए.आई.आर. पृष्ठ 211, पैरा17)" इस न्यायालय ने मसलती 5 में एस. सी. आर. पृष्ठ 148-49 पर यह मत व्यक्त किया कि विधिविरुद्ध जमाव क े सदस्य क े रूप में उसकी भागीदारी की पुष्टि आदेश क े लिए एक से अधिक गवाहों द्वारा बात की जानी चाहिए। मसलती में इस तरह का परीक्षण क े वल उन अभियुक्तों क े दायित्व का निर्धारण करने क े लिए किया गया था जिनक े खिलाफ कोई प्रत्यक्ष कार्य करने का कोई स्पष्ट आरोप नहीं था, लेकिन उनक े खिलाफ जो आरोप लगाया गया था वह अवैध सभा क े सदस्यों क े रूप में उनकी उपस्थिति क े बारे में था। इस प्रकार अपनाए गए परीक्षण को उन मामलों में लागू नहीं किया गया, जहां विशिष्ट आरोपों और प्रत्यक्ष कार्यों को अपराध माना जाता है या क ु छ नामित हमलावरों को दोषी ठहराया जाता है। यदि इस तरह क े परीक्षण को तब भी अपनाया जाता है, जहां विशिष्ट आरोपों और खुले क ृ त्यों को क ु छ नामित हमलावरों क े लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो यह सीधे तौर पर जाने-माने कहावत क े विपरीत होगा कि "साक्ष्य को तौला जाना चाहिए न की गिना जाना चाहिए" जैसा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 134 में वैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त है।
20. इस न्यायालय क े निर्णयों में दिए गए सिद्धांतों की पृष्ठभूमि में, यहां तक कि एकल गवाह का संस्करण भी, यदि उसकी गवाही को न्यायालय द्वारा विश्वसनीय पाया जाता है, दोषसिद्धि क े आदेश का आधार हो सकता है। वर्तमान मामले में, स्वयं मृतक क े भाई पीडब्लू 1-सुनील क ु मार का साक्ष्य सामान्य रूप से पर्याप्त होगा। कथित गवाह को इसी संव्यवहार में चोटें आई थीं और उसकी उपस्थिति पर संदेह भी नहीं किया जा सकता था। इसक े अतिरिक्त, चार गवाह थे- पीडब्ल्यू2 मदनपाल, पीडब्ल्यू24 प्रकाश उर्फ़ कालू, पीडब्ल्यू25 रूपसिंह और पीडब्ल्यू27 तुलसीराम। इसमें ऊपर सारणीबद्ध चार्ट प्रत्येक अभियुक्त की भूमिका को दर्शाता है।
21. अभिलेख पर ऐसे स्पष्ट, सुसंगत और ठोस साक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय द्वारा इस आधार पर कार्यवाही करना न्यायोचित नहीं था कि प्रत्यक्षदर्शियों ने विशिष्ट शब्दों में अन्य अभियुक्त का नाम नहीं लिया था या कोई संदेह नहीं किया था और फिर दोषमुक्ति क े आदेश को अभिलिखित किया था। उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण पूरी तरह से कानून क े स्थापित सिद्धांतों क े खिलाफ था और उच्च न्यायालय द्वारा कोई वैध कारण नहीं दिया गया था कि जहां तक बरी आरोपी की भूमिका का संबंध है, सभी चश्मदीदों क े साक्ष्य पर भरोसा क्यों नहीं किया जा सकता। हम उच्च न्यायालय द्वारा दर्ज किए गए दोषमुक्ति क े आदेश को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण पाते हैं और इसका निष्कर्ष पूरी तरह से रिकॉर्ड क े खिलाफ है। इसलिए, दोषमुक्ति जाने क े खिलाफ इन अपीलों में, हम खुद को उच्च न्यायालय द्वारा पारित दोषमुक्ति जाने क े आदेश द्वारा जाने क े लिए सहमत नहीं पाते हैं क्योंकि हमारे सुविचारित विचार में यह स्पष्ट रूप से गलत और विक ृ त था।
22. रिकॉर्ड पर सामग्री की संपूर्णता को ध्यान में रखते हुए, जो उभर कर आता है वह पीडब्लू 1 और 27 क े माध्यम से रिकॉर्ड पर सुसंगत और ठोस प्रत्यक्षदर्शी है, जिसे पीडब्लू 2, 24 और 25 द्वारा अच्छी तरह से समर्थित किया गया था। हम दोहराव की कीमत पर यहां कह सकते हैं कि हमने यहां ऊपर बताए गए कारणों से पीडब्लू 6-नारायण उर्फ़ जयनारायण क े साक्ष्य को ध्यान में नहीं रखा है।
23. जैसा कि विचाराधीन घटना से ठीक चार दिन पहले एक घटना हुई थी, पूरा आश्वासन देने क े लिए और विवेक क े मामले में, एक मानदंड अपनाया जा सकता है, जहां, यदि कोई चश्मदीद गवाह (पीडब्लू6 क े अलावा) हो पीडब्लूएस 1 और 27 से और इसक े अलावा किसी भी अभियुक्त को प्रत्यक्ष कार्य करने क े लिए विज्ञापित और जिम्मेदार ठहराया गया था, ऐसे अभियुक्त की भूमिका को किसी भी संदेह से परे स्थापित किया जा सकता है। हमें यह जोड़ने क े लिए जल्दबाजी करनी चाहिए कि मसलती का सिद्धांत आकर्षित होगा, जहां उपस्थिति क े आरोपण क े अलावा, किसी भी प्रत्यक्ष कार्य क े माध्यम से अधिक क ु छ भी जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था। तथापि, वर्तमान मामले क े तथ्यों में; और अति-निहितार्थ की किसी भी संभावना को खारिज करने क े लिए हमने इस मानदंड को अपनाया है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि हम दोषमुक्ति क े खिलाफ अपील में मामले पर विचार कर रहे हैं। इस प्रकार, अभियुक्त ए 1, ए 6, ए 7, ए 8, ए 10 और ए 13 वे हैं जिन्हें न क े वल पीडब्लू 1 और 27 द्वारा बल्कि कम से कम एक और गवाह द्वारा क ु छ प्रत्यक्ष कार्यों क े लिए जिम्मेदार ठहराया गया था, जबकि, उनमें से शेष की भूमिका पीडब्लू 6 क े अलावा किसी अन्य गवाह क े बिना क े वल पीडब्लू 1 और 27 द्वारा की गई थी, उनक े द्वारा निभाई गई भूमिका क े बारे में बयान देते हुए।
24. इन परिस्थितियों में, हम मूल अभियुक्त ए 1, ए 6, ए 7, ए 8, ए 10 और ए 13 क े विरुद्ध इन अपीलों को मंजूर करते हैं जबकि शेष अभियुक्त-प्रत्यर्थियों को संदेह का लाभ दिया जाता है और उच्च न्यायालय द्वारा अभिलिखित उनक े दोषमुक्ति की पुष्टि की जाती है। विचारण न्यायालय द्वारा मूल अभियुक्तगण ए 1, ए 6, ए 7, ए 8, ए 10 और ए 13 क े खिलाफ दर्ज दोषसिद्धि और सजा का आदेश इस प्रकार बहाल किया जाता है। इन अभियुक्तों को आज से चार सप्ताह क े भीतर आत्मसमर्पण करना होगा और ऐसा न करने पर उन्हें हिरासत में लेकर उनक े खिलाफ दर्ज की गई सजा पूरी की जाएगी। इस फ ै सले और आदेश की प्रतियां अनुपालन क े लिए संबंधित पुलिस स्टेशन और क्षेत्राधिकार वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजी जावें।
25. उपरोक्त वर्णित सीमा तक ये अपीलें आंशिक रूप से स्वीकार की जाती हैं। न्यायाधीश (उदय उमेश ललित) न्यायाधीश (अजय रस्तोगी) नई दिल्ली, 24 नवंबर, 2021 यह अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल 'सुवास' क े जरिए अनुवादक की सहायता से किया गया है। अस्वीकरण: यह निर्णय पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीमित उपयोग क े लिए स्थानीय भाषा में अनुवादित किया गया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सभी व्यावहारिक और आधिकारिक उद्देश्यों क े लिए, निर्णय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक होगा और निष्पादन और कार्यान्वयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।