Uttar Pradesh Van Viniyamak Lucknow v. Vijay Kumar Yadav

Supreme Court of India · 23 Nov 2021
M. R. Shah; B. V. Nagarathna
Civil Appeal No. 6947 of 2021

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 6947/2021
उत्तर प्रदेश वन विनगम लखनऊ और अन्य ... अपीलार्थी1(गण)
बनाम
विवजय क
ु मार यादव और अन्य ... प्रत्यर्थी1 (गण)
विनण9य
माननीय न्यायमूर्ति एम.आर. शाह,
JUDGMENT

1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रिरट अपील संख्या - 54718/2005 में पारिर 20.02.2019 क े आक्षेविप फ ै सले और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर े हुए, उत्तर प्रदेश वन विनगम लखनऊ और अन्य ने व 9मान अपील को प्रस् ु की गइ[9] है।

2. प्रारभं में, यह ध्यान विदया जाना चाविहए विक विदनांविक 03.07.2019 क े आदेश क े अनुसार इस न्यायालय ने इस सीमा क नोविटस जारी विकया विक उच्च न्यायालय क े द्वारा 2,46,922.56 रुपये की वसूली की सजा क े आदेश को बरकरार रखा जाना चाविहए र्थीा सिजसे जाँचा अति कारी क े द्वारा सिसद्घ विकया जाना चाविहए र्थीा।

3. हमने संबंति पक्षकारों क े विवद्व अति वक्ताआें को सुना।

4. प्रारभं में, यह ध्यान विदया जाना आवश्यक है विक अब क 2,46,922.56 रुपये की सीमा क नुकसान पहुंचाने क े आरोप को जांच अति कारी द्वारा साविब विकया जाना चाविहए र्थीा। हालांविक, अनुशासनात्मक प्राति करण क े द्वारा अन्य आरापों में अपनी असहमति जाविहर विक, सिजनको जांच अति कारी द्वारा साविब नहीं विकया गया र्थीा और उक्त असहमति पर कोई नोविटस जारी विकए विबना, अनुशासनात्मक प्राति करण आगे बढ़ा और सजा का आदेश पारिर विकया, सिजसे विवति\ विवरूद्घ माना गया है और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े विवपरी माना गया र्थीा। इसलिलए, जांच अति कारी द्वारा 2,46,922.56 रूपये की सीमा क नुकसान पहुंचाने क े आरोप को सिसद्घ विकया जाना चाविहए, उच्च न्यायालय को Rs. 2,46,922.56 की वसूली क े लिलए सजा क े आदेश को बरकरार रखा जाना चाविहए र्थीा।

5. उपरोक्त क े मद्देनजर, हम उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण9य और आदेश क े द्वारा 2,46,922.56 रुपये की वसूली की सजा क े आदेश को पोषणीय बनाने क े लिलए संशोति कर े हैं, सिजसे जांच अति कारी द्वारा साविब विकया जाना र्थीा। यह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk सूतिच विकया गया है विक प्रति वादी कम9चारी जब से सेवाविनवृलित्त हुआ है। ब से कानूनी प्रविfया क े ह जो भी राथिश देय है को सेवाविनवृलित्त लाभों क े लिलए विदया जाना है, उपराेक्त की वसूली/कटौ ी करने क े बाद बची हुइ[9] राथिश को प्रति वादी को भुग ान विकया जा सक ा है।

6. व 9मान अपील दनुसार पूव क्त सीमा क आंथिशक रूप से अनुम है और मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों क े ह लाग क े रूप में कोई आदेश नहीं होगा।............................................. [माननीय न्यायमूर्ति एम.आर. शाह]............................................. [माननीय न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना] नई विदल्ली, 23 नवंबर, 2021 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk