Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. - 6868 वर्ष 2021
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ... अपीलार्थी* (गण)
बनाम
विवकास क
ु मार सिंसह एवं अन्य ... प्रत्यर्थी* (गण)
विनणय
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह
JUDGMENT
1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ (लखनऊ पीठ) द्वारा पारिर 24.07.2020 विदनांविक विनणय और आदेश विदनांक से व्यथिर्थी और असं ुष्ट होकर, सिHसमें उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने व मान मामले क े अपीलार्थी*, उ.प्र. राज्य एवं अन्य, द्वारा दायर विवशेर्ष अनुमति यातिJका (तिडफ े क्टिMNव परिरवाद सं. 187 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वर्ष 2020) को खारिरH कर विदया और मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) स् र-II क े पद पर विवभागीय पदोन्नति क े लिलए Hारी 18.03.2019 एवं 10.05.2019 विदनांविक अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) पात्र ा सूJी को रद्द् एवं अपास् करने वाले विनणय एवं आदेश की अथिभपुविष्ट की और परमादेश रिरN Hारी कर े हुए, अपीलार्थी* - सक्षम प्राति कारी को को आदेश विदया विक मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) लेवल - II क े पद पर पदोन्नति क े लिलए मूल रिरN यातिJकाक ा को यू.पी. सरकारी सेवकों की पदोन्नति क े लिलए अहक सेवा में रिरयाय विनयमावली, 2006, क े अनुसार न्यून म सेवाअवति में छ ू N दे े हुए अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की पात्र ा सूJी ैयार करे, - उ.प्र. एवं अन्य ने व मान अपील की है।
2. इस अपील क े थ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं -
2. 1 प्रत्यर्थी*-मूल रिरN यातिJकाक ा (ए क्टि`मनपश्चा 'मूल रिरN यातिJकाक ा क े रूप में संदर्भिभ ) विवथिभन्न स्र्थीानों पर अ ीक्षक अथिभयं ा क े रूप में अपने क व्यों का विनवहन कर रहे हैं। वे मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) स् र-II क े पद पर पदोन्नति का दावा कर े हैं। मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) स् र-II क े पद पर भ * उत्तर प्रदेश इंHीविनयर सेवा (सिंसJाई विवभाग) (समूह क) सेवा विनयमावली, 1990 (ए क्टि`मनपश्चा 'विनयमावली, 1990' क े रूप में संदर्भिभ ) द्वारा शासिस हो ी है। उपयुक्त विनयमावली क े विनयम 5 (iii) क े अनुसार, मुख्य अथिभयं ा क े पद पर पदोन्नति सिसविवल या मैक े विनकल शाखा में मूल रूप से विनयुक्त उन अ ीक्षण अथिभयं ाओं में से होगी, सिHन्होंने भ * वर्ष क े पहले विदन पच्चीस (25) वर्ष की सेवा (अ ीक्षक अथिभयं ा क े रूप में कम से कम ीन वर्ष की सेवा सविह ) पूरी कर ली है। राज्य सरकार द्वारा विदनांक 22.03.1984 को Hारी, लोक सेवा आयोग क े दायरे में आने वाले दो पदों पर Jयन/पदोन्नति क े लिलए विदशा-विनदjश विन ारिर करने वाले कायालय परिरपत्र क े अनुसार पदोन्नति क े लिलए मानक मेरिरN होगी। राज्य Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सरकार ने पदोन्नति क े लिलए अहक सेवा में उत्तर प्रदेश सरकारी कमJारी रिरयाय विनयमावली, 2006 (ए क्टि`मनपश्चा विनयमावली, 2006 क े रूप में संदर्भिभ ) भी ैयार विकया है, Hो यह विन ारिर कर ा है विक यविद पात्र ा क े क्षेत्र में योग्य व्यविक्तयों की अपेतिक्ष संख्या उपलब् नहीं है, ो सरकार द्वारा कार्मिमक विवभाग क े परामश से प्रशासविनक विवभाग में विन ारिर न्यून म सेवा अवति में परिरवीक्षा काल को छोड़कर 50 प्रति श क की छ ू N दी Hा सक ी है।
2. 2 विनयोक्ता प्राति कारी ने भ * वर्ष 2018-2019 क े लिलए मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) स् र-II की 26 रिरविक्तयों का विन ारण विकया। पात्र ा सूJी (लोक सेवा आयोग क े दायरे से बाहर क े पदों पर ) उत्तर प्रदेश पदोन्नति (Jयन द्वारा) विनयमावली 1986 (ए क्टि`मनपश्चा विनयमावली, 1986 क े रूप में संदर्भिभ ) क े विनयम 4 क े अनुसार ैयार की Hानी र्थीी। सिHसमें, यर्थीासंभव, रिरविक्तयों की संख्या से ीन गुना वरिरष्ठ उम्मीदवारों क े नाम शाविमल विकए गए र्थीे। Jूंविक विनयमावली, 1986 क े अनुसार मुख्य अथिभयं ा की 26 रिरविक्तयां विन ारिर की गई र्थीीं, इसलिलए क ु ल 78 अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) मुख्य अथिभयं ा पद पर पदोन्नति क े लिलए पात्र माने गये।
2. 3 विदनांक 23.07.2018 को, भ * वर्ष 2018-2019 क े लिलए क ु ल 78 अ ीक्षण अथिभयं ाओं (सिसविवल) की पात्र ा सूJी ैयार की गई। मूल यातिJकाक ाओं क े नाम क्रम संख्या 60,63,64,67,72 और 74 पर पाए गए। र्थीाविप, Jूंविक उन्होंने 25 वर्ष की सेवा पूरी नहीं की र्थीी, Hो विक विनयमावली, 1990 क े अनुसार अपेतिक्ष र्थीा, पदोन्नति क े लिलए उनकी उम्मादवारी पर विवJार नहीं विकया गया। विदनांक 07.03.2019 को पुन: 59 अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की भ * वर्ष 2018-2019 क े लिलए एक संशोति पात्र ा सूJी ैयार की गई और मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नामों को इस आ ार पर बाहर रखा गया विक उन्होंने 25 साल Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की सेवा पूरी नहीं की र्थीी। पुन: 18.03.2019 को, भ * वर्ष 2018- 2019 क े लिलए 44 अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की एक और संशोति पात्र ा सूJी ैयार की गई सिHसमें भी मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नाम शाविमल नहीं र्थीे। अं में 10.05.2019 को मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नामों को छोड़कर 41 अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की एक अन्य संशोति सूJी ैयार की गई। इसलिलए, मूल रिरN यातिJकाक ाओं ने सिंसJाई और Hल संसा न विवभाग में मुख्य अथिभयं ा क े पद पर े लिलए अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की पात्र ा सूJी विदनांविक 18.03.2019 और 10.05.2019 को इस आ ार पर Jुनौ ी दे े हुए उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरN यातिJका संख्या 14962 (एस / एस) वर्ष 2019 दायर विकया विक वे रिरयाय विनयमावली, 2006 क े अनुसार न्यून म अहकारी सेवा अवति में छ ू N क े हकदार र्थीे। विनणय और आदेश विदनांविक 11.12.2019 द्वारा, विवद्वान एकल न्याया ीश ने मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) क े पद पर पदोन्नति क े लिलए, रिरयाय विनयमावली 2006 यर्थीा संशोति 2013, क े अनुसार न्यून म अहकारी सेवाअवति में छ ू N दे े हुए, मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नाम सविह अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की पात्र ा सूJी ैयार करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी को आदेश दे े हुए परमादेश रिरN Hारी की। परिरणामस्वरूप, मुख्य अथिभयं ा क े पद पर े लिलए विनरीक्षण अथिभयं ाओं की 18.03.2019 और 10.05.2019 विदनांविक सूJी को रद्द एवं अपास् कर विदया। 2.[4] विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनणय और आदेश से क्षुब् होकर, उत्तर प्रदेश राज्य ने खंडपीठ क े समक्ष विवशेर्ष अपील दायर की और आक्षेविप विनणय और आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने विवशेर्ष अपील को खारिरH कर विदया है और विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर विनणय और आदेश की पुविष्ट की । Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. अपीलार्थी* की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री सखा राम सिंसह र्थीा मूल रिरN यातिJकाक ा प्रति वादी की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री राणा मुखH*, उपक्टिस्र्थी हुए।
4. राज्य की ओर से उपक्टिस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री सखा राम सिंसह ने Hोर देकर कहा है विक मूल रूप से मूल रिरN यातिJकाक ाओं ने विनयमावली, 1990 क े विनयम 5(iii) में विनविह पात्र ा मानदंडों को पूरा नहीं विकया है। यह कहा गया है विक इसलिलए मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नामों को मुख्य अथिभयं ा (सिसविवल) क े पद पर े लिलए अ ीक्षण अथिभयं ा (सिसविवल) की पात्र ा सूJी से बाहर रखा गया र्थीा। यह कहा गया है विक इस प्रकार सक्षम प्राति कारी द्वारा ैयार की गई पात्र ा सूJी विनयमावली, 1990 क े विनयम 5 (iii) में विनविह प्राव ानों क े अनुरूप र्थीी। 4.[1] यह कहा गया है विक रिरयाय विनयम, 2006 क े ह छ ू N प्रदान करना विववेका ीन है और सक्षम प्राति कारी को छ ू N देने का विनदjश देने वाली कोई रिरN Hारी नहीं की Hा सक ी है। यह कहा गया है विक रिरयाय विनयम, 2006 क े विनयम 4 में प्रयुक्त शब्द 'कर सक ा है' है और क े वल उस मामले में Hहां पात्र ा क े क्षेत्र में पात्र व्यविक्तयों की आव`यक संख्या उपलब् न हो। यह कहा गया है विक कोई भी कमJारी अति कार क े रूप में छ ू N का दावा नहीं कर सक ा है। 4.[2] इसलिलए यह कहा गया है विक कथिर्थी रूप से मूल रिरN यातिJकाक ाओं ने 25 वर्ष की सेवा पूरी करने की पात्र ा मानदंड को पूरा नहीं विकया र्थीा, उनक े नाम को मुख्य अथिभयं ा क े पद पर पदोन्नति क े लिलए पात्र ा सूJी में शाविमल करने की आव`यक ा नहीं र्थीी। यह कहा गया है विक उच्च न्यायालय ने 18.03.2019 और 10.05.2019 विदनांविक पात्र ा सूतिJयों को रद्द करने और अपास् करक े गल ी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की है, Hो विक विनयमावली, 1990 क े विनयम 5 (iii) और 8 (iii) क े वै ाविनक प्राव ानों क े पूण अनुरूप र्थीे। 4.[3] उपरोक्त विनवेदन कर े हुए, व मान अपील को स्वीकार करने की प्रार्थीना की गयी है।
5. व मान अपील का विवरो प्रति वाविदयों- मूल रिरN यातिJकाक ाओं की ओर से उपक्टिस्र्थी वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता श्री राणा मुखH* द्वारा विकया गया है। यह कहा गया है विक मामले क े थ्यों और परिरक्टिस्र्थीति यों में और ठोस कारण ब ा े हुए विवद्वान एकल न्याया ीश ने मूल रिरN यातिJकाक ाओं को छ ू N देने क े लिलए अपीलक ा - सक्षम प्राति कारी को आदेश दे े हुए परमादेश का रिरN Hारी विकया। यह कहा गया है विक विवद्वान एकल न्याया ीश ने ठीक ही माना विक पात्र ा सूJी 1:3 क े अनुपा को लागू कर े हुए ैयार की Hानी Jाविहए ाविक अति क मे ावी उम्मीदवार हों। इसलिलए यह कहा गया विक पूरी रह से 25 वर्ष की सेवा पूरी न करने क े कनीकी आ ार पर, मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नामों को बाहर रखा गया र्थीा और विवथिशष्ट रिरयाय विनयम, 2006 हैं, Hो अहक सेवा में छ ू N प्रदान कर े हैं, उच्च न्यायालय ने रिरयाय विनयमावली, 2006 क े विनयम 4 क े अनुसार छ ू N प्रदान करने क े लिलए परमादेश की रिरN Hारी करक े कोई त्रुविN नहीं की है।
6. हमने संबंति पक्षों क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ताओं को विवस् ार से सुना।
7. प्रारंभ में, यह ध्यान देने की आव`यक ा है विक विवद्वान एकल न्याया ीश ने परमादेश की रिरN Hारी कर सक्षम प्राति कारी को अहक सेवा में रिरयाय े अनुसार छ ू N प्रदान करने का आदेश विदया और परिरणामस्वरूप पात्र ा सूJी विदनांविक 18.03.2019 और 10.05.2019 को रद्द Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और अपास् कर विदया। यह भी ध्यान विदया Hाना Jाविहए विक विनयमावली, 1990 क े अनुसार, पात्र होने की श x में से एक यह है विक अ ीक्षण अथिभयं ा ने 25 वर्ष की सेवा (अ ीक्षण अथिभयं ा क े रूप में कम से कम ीन वर्ष की सेवा सविह ) पूरी कर ली हो। यह एक स्वीक ृ क्टिस्र्थीति है विक मूल रिरN यातिJकाक ा पात्र ा मानदंड को पूरा नहीं कर े Mयोंविक उनक े पास 25 वर्ष की सेवाअवति पूरी करने की अहक सेवा नहीं र्थीी। इस प्रकार, विवभाग द्वारा पात्र ा सूJी पूण ः विनयमावली, 1990 क े विनयम 5(iii) और विनयम 8(iii) क े अनुसार ैयार की गई र्थीी। मूल रिरN यातिJकाक ाओं क े नामों को मुख्य अथिभयं ा क े पद पर े लिलए ैयार की गयी अ ीक्षण अथिभयं ाओं की पात्र ा सूJी से इस आ ार पर हNा विदया गया र्थीा विक वे विनयमावली, 1990 क े अनुसार पात्र ा मानदंड को पूरा नहीं कर े हैं। इसलिलए, उच्च न्यायालय को उक्त पात्र ा सूतिJयों को रद्द नहीं करना Jाविहए र्थीा, Hो विक इस रह पूरी रह से विनयमावली, 1990 क े अनुसार ैयार की गयी र्थीी। 7.[1] इसक े बाद विवद्वान एकल न्याया ीश ने 18.03.2019 और 10.05.2019 विदनांविक पात्र ा सूतिJयों को रद्द और अपास् कर े हुए सक्षम अति कारी को अहक सेवा में छ ू N देने क े लिलए आदेश या विनदjश देने क े लिलए परमादेश रिरN Hारी की Hो इस प्रकार रिरयाय विनयमावली 2006 क े ह अनुमेय र्थीा। रिरयाय े विनयम 4 में प्रयुक्त शब्द "कर सक ा है" है। इसलिलए, छ ू N सक्षम प्राति कारी क े विववेक पर दी Hा सक ी है। छ ू N की प्रार्थीना अति कार क े रूप में नहीं की Hा सक ी। यविद छ ू N न देने का सJे विनणय लिलया Hा ा है, ो क े वल इसलिलए विक विनयम छ ू N की अनुमति दे ा है, सक्षम प्राति कारी को अहक सेवा में छ ू N देने का विनदjश देने वाला कोई परमादेश Hारी नहीं विकया Hा सक ा है। अ: उच्च न्यायालय ने अहक सेवा में छ ू N प्रदान करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी को आदेश देने वाले परमादेश की रिरN Hारी करक े गंभीर त्रुविN की है। परिरणामस्वरूप, उच्च Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय ने 18.03.2019 और 10.05.2019 विदनांविक पात्र ा सूतिJयों को रद्द और अपास् करक े भी गल ी की है, Hो विक पूरी रह से विनयमावली, 1990 और े अनुरूप ैयार की गई र्थीी। विवद्वान एकल न्याया ीश एवं सार्थी ही सार्थी उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारिर विनणय एवं आदेश विवति क रूप से पोर्षणीय नहीं हैं।
8. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और ऊपर ब ाए गए कारणों से, व मान अपील सफल हो ी है। विवशेर्ष अपील (तिडफ े क्टिMNव परिरवाद सं. 187 वर्ष 2020) में खंडपीठ द्वारा पारिर आक्षेविप विनणय और आदेश और रिरN यातिJका संख्या 14962 (एस / एस) वर्ष 2019 में विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर 11.12.2019 विदनांविक विनणय एवं आदेश को ए द्द्वारा रद्द एवं अपास् विकया Hा ा है। परिरणामस्वरूप, मूल रिरN यातिJकाक ाओं द्वारा दायर रिरN यातिJका संख्या 14962 (एस / एस) वर्ष 2019 खारिरH की Hा ी है। दनुसार व मान अपील को अनुमति दी Hा ी है, र्थीाविप, लाग क े संबं में कोई आदेश नहीं होगा। लंविब आवेदन, यविद कोई हों, भी विनस् ारिर विकये Hा े हैं। ………………………… [न्यायमूर्ति एम.आर.शाह]