Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
दीवानी अपील सं. 6477 वर्ष 2021
वहाब उद्दीन एवं अन्य ... अपीलार्थी)(गण)
बनाम
क
ु . मीनाक्षी गहलो एवं अन्य ...प्रत्यर्थी) (गण)
निनणय
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT
1. 1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा निवशेर्ष अपील संख्या 638 वर्ष 2012 में पारिर 23.01.2020 निदनांनिक आक्षेनिप निनणय और आदेश mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA से असं ुष्ट और व्यथिर्थी होकर, जिDसमें उच्च न्यायालय की तिFवीDन बेंच ने उक्त अपील को खारिरD कर निदया और निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर निनणय और आदेश की पुनिष्ट की है जिDसमें निवद्वान एकल न्याया ीश ने प्रति वादी सं. 4 द्वारा की गयी रिरट यातिचका को स्वीकार कर लिलया र्थीा और व मान मामले क े अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त को अपास् व खारिरD कर निदया, मूल प्रति वादी सं. 3 से 5 ने जिDनकी निनयुनिक्त उच्च न्यायालय द्वारा खारिरD की गयी र्थीी, यह अपील की है।
2. इस अपील क े थ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं:- 2.[1] वर्ष 1987 में मुरादाबाद की न्यायपालिलका में अंग्रेDी और हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद को भरने क े लिलए एक प्रति योगी परीक्षा आयोजिD की गई र्थीी। व मान मामले क े अपीलार्थी) ने शुरू में अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए भाग लिलया र्थीा। अंग्रेDी आशुलिलनिपक (जिDसमें व मान मामले क े अपीलार्थी) का नाम शानिमल हैं) और हिंहदी आशुलिलनिपक की चयन सूची 14.07.1987 को ैयार की गई र्थीी। हालांनिक, चूंनिक अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए न्यायालय में कोई रिरनिक्तयां नहीं र्थीीं, इसलिलए अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए चयनिन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व्यनिक्तयों की सूची में (व मान मामले क े अपीलार्थी) सनिह ) कोई निनयुनिक्त नहीं दी गई ।अ ीनस्र्थी जिसनिवल न्यायालयों क े मंनि[स् रीय स्र्थीापना निनयम, 1947 क े निनयम 14 (3) क े अनुसार (ए द्श्मि^मन्पश्चा 'निनयम, 1947' क े रूप में संदर्भिभ ) चयन सूची को एक वर्ष क े लिलए वै रहना र्थीा और 14.07.1987 निदनांनिक उक्त चयन सूची निदनांक 13.07.1988 को समाप्त हो गयी। द्नन् र हिंहदी आशुलिलनिपक को चयन सूची क े अनुसार निनयुनिक्त दे दी गयी। हालांनिक, चूंनिक निहन्दी आशुलिलनिपक क े पद पर क ु छ अस्र्थीायी प्रक ृ ति की अवकाश रिरनिक्तयां र्थीी इसलिलए उन अवकाश रिरनिक्तयों क े सापेक्ष अपीलार्थी)गण को अस्र्थीायी आ ार एक माह की अवति 14.10.1987 से 15.11.1987 क निनयुनिक्त दी गयी। इस स् र पर, यह ध्यान निदया Dाना चानिहए निक उनक े संबंति निनयुनिक्त प[ों में यह निवनिनर्दिदष्ट रूप से कहा गया र्थीा निक निनयनिम कमचारिरयों द्वारा अपना कायभार ग्रहण कर लेने पर उनकी निनयुनिक्तयों को समाप्त कर निदया Dाएगा। यह निक उसक े बाद 24.09.1988 को हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद पर नये जिसरे से परीक्षा आयोजिD की गई र्थीी जिDसक े अनुसरण में, प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को योग्य ा और चयन सूची क े अनुसार हिंहदी आशुलिलनिपक पद पर निनयुक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निकया गया। इसलिलए, व मान मामले क े प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को निनयुक्त निकया गया र्थीा। चूंनिक व मान मामले क े अपीलार्थी)गण को एक अस्र्थीायी प्रकृ ति की अवकाश रिरनिक्त क े सापेक्ष निनयुक्त निकया गया र्थीा,निनयनिम कमचारिरयों द्वारा अपना कायभार ग्रहण कर लेने क े बाद उनकी सेवाओं को समाप्त करना अपेतिक्ष र्थीा। हालांनिक, अपीलार्थी) द्वारा जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद को अभ्यावेदन निदया गया। जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद ने उस पर अपनी निटप्पणी उप पंDीयक, उच्च न्यायालय को भेD दी। उप पंDीयक, उच्च न्यायालय ने जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद को 22.05.1990 निदनांनिक प्रशासनिनक आदेश द्वारा निनदlश निदया निक पूव-स्टेनो और हिंहदी स्टेनो निदनांनिक 14.07.1987 की अनुमोनिद सूची ैयार की Dाए और उनक े नाम को मेरिरट क े क्रम में व्यवश्मिस्र्थी निकया Dाय। इस स् र पर, यह ध्यान निदया Dाना आव^यक है निक 22.05.1990 निदनांनिक संसूचना में, यह स्पष्ट रूप से उल्लेख निकया गया र्थीा निक अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त अस्र्थीायी और अवकाश की रिरनिक्तयों पर र्थीी। ऐसा प्र ी हो ा है निक इसक े बाद हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए अपीलार्थी)गण का टाइहिंपग/स्पीF टेस्ट कराया गया र्थीा। प्रभारी अति कारी ने 29.05.1990 को अपीलार्थी) और एक अन्य उम्मीदवार का हिंहदी टाइहिंपग परीक्षण कराया। उक्त परीक्षा में ीनों Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपीलार्थी)गणों को निनयम, 1947 क े निनयम 5 (सी) क े अनुसार योग्य नहीं पाया गया और उनका टाइहिंपग टेस्ट निन ारिर से कम पाया गया। इस प्रकार, अपीलार्थी) हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए स्पीF टेस्ट में निवफल रहे उपरोक्त क े बावDूद उच्च न्यायालय को सूतिच निकए निबना निक अपीलार्थी) स्पीF टेस्ट में निवफल रहे हैं, जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद ने इस मामले क े प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 की सेवाओं को समाप्त कर निदया, जिDन्हें उतिच प्रनिक्रया क े बाद और 1947 क े निनयमों क े अनुपालन में चुना गया र्थीा और प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को बखास् कर 05.06.1990 को अपीलार्थी)गण को प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 क े पदों क े सापेक्ष निनयुक्त कर निदया। अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त और प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 की बखास् गी को प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष चुनौ ी दी। निवद्वान एकल न्याया ीश ने उक्त रिरट को स्वीकार कर व मान मामले क े अपीलार्थी)गणों की निनयुनिक्त को रद्द व अपास् कर निदया और व मान मामले क े प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 की सेवाओं को समाप्त करने क े समापन आदेश को अपास् कर निदया। तिFवीDन बेंच द्वारा निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर आक्षेनिप आदेश और निनणय क े लिखलाफ निवशेर्ष अपील को 23.01.2020 को खारिरD कर निदया गया। इसलिलए, व मान अपील की गयी है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3. अपीलार्थी)गण की ओर से प्रस् ु निवद्वान अति वक्ता श्री परदीप गुप्ता, ने क निदया है निक मामले क े थ्यों और परिरश्मिस्र्थीति यों में निवशेर्ष रूप से ब Dबनिक अपीलार्थी)गणों ने लगभग 29 वर्षu क काम निकया और वह भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 22.05.1990 निदनांनिक आदेश द्वारा आशुलिलनिपक क े रूप में अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त का अनुमोदन निकया और जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद को निनयुनिक्त प[ Dारी करने का निनदlश निदया और द्नुरूप निदनांक 05.06.1990 को निनयुनिक्त प[ Dारी निकए गए, उनकी निनयुनिक्तयों को रद्द करना उतिच नहीं है। यह Dोर देकर कहा गया है निक इस कारण निनयम, 1947 क े निनयम 14 (3) निनयम 11 क े ह मेरिरट क े आ ार पर बनी भ ) सूची पर लागू नहीं होगा और निनयम 12 क े ह क े वल आरतिक्ष श्रेणी क े उम्मीदवारों पर लागू निकया Dा सक ा है। यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय ने अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त को अपास् करने क े लिलए उक्त निनयम पर अवलंब लेकर [ुनिट की है। आगे यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय ने 14.10.1987 एवं 15.10.1987 आनिद क े आदेशों द्वारा अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त को अवकाश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रिरनिक्त क े सापेक्ष मानकर [ुनिट की है और इस पर निवचार करने में निवफल रहा है निक अपीलार्थी)गण ने 30 वर्षu से अति क लगा ार काम निकया है। उच्च न्यायालय ने इस थ्य को ठीक से नहीं देखा निक यद्यनिप निक प्रत्यर्थी) संख्या 1 से 3 की निनयुनिक्त 29.11.1988 निदनांनिक चयन सूची क े आ ार पर अनुमोनिद की गयी र्थीी, लेनिकन उन्हें निनयुनिक्त वर्ष 2012 में दी गई र्थीी, अर्थीा 29.11.1988 निदनांनिक चयन सूची क े 24 वर्षu से अति क समयावति क े बाद। इसलिलए यह कहा गया है निक प्रत्यर्थी)गण की निनयुनिक्त का अनुमोदन करने का कोई औतिचत्य नहीं है Dब वे पहले से ही आयु वर्जिD अर्थीा, 50 वर्ष क े हो गए र्थीे।
4. उपरोक्त कर्थीन कर े हुए, व मान अपील को अनुमति देने और अपीलार्थी)गण की सेवाओं की रक्षा करने क े लिलए प्रार्थीना की गयी है।
5. उच्च न्यायालय इलाहाबाद की ओर से प्रस् ु निवद्वान अति वक्ता सुश्री प्रीति का निद्ववेदी ने व मान अपील का निवरो निकया है। यह कहा गया है निक अपीलार्थी)गण ने शुरू में वर्ष 1987 में अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए भाग लिलया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हालांनिक, चूंनिक रिरनिक्तयां नहीं र्थीी, इसलिलए उनक े नाम 14.07.1987 को चयनिन सूची में रखे गए र्थीे। यह कहा गया है निक चयन सूची क े वल एक वर्ष क े लिलए वै र्थीी और निनयम, 1947 क े निनयम 14 (3) में निननिह प्राव ानों क े मद्देनDर 13.07.1988 को समाप्त हो गयी। यह कहा गया है निक अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद की रिरनिक्त न होने क े कारण अपीलार्थी)गण को अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद पर निनयुनिक्त नहीं दी गयी र्थीी। यह कहा गया है निक,हालांनिक, वर्ष 1987 में, हिंहदी े पद पर अस्र्थीायी प्रक ृ ति की क ु छ अवकाश रिरनिक्तयां र्थीीं और इसलिलए अपीलार्थी)गण को 14.10.1987 से 15.11. 1987 क एक महीने की अवति क े लिलए अवकाश रिरनिक्तयों क े सापेक्ष अस्र्थीायी आ ार पर निनयुक्त निकया गया र्थीा। यह कहा गया है निक उनक े निनयुनिक्त प[ में यह साफ -साफ कहा गया र्थीा निक निनयनिम कमचारिरयों द्वारा अपना कायभार ग्रहण कर लेने पर उनकी निनयुनिक्त समाप्त कर दी Dाएगी। यह कहा गया है निक उसक े बाद नई भ ) प्रनिक्रया शुरू की गई र्थीी और हिंहदी आशुलिलनिपक पद क े लिलए 24.09.1988 को परीक्षा करायी गयी को हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए नई परीक्षा आयोजिD की गई र्थीी और जिDसक े अनुसरण में प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 निनयुक्त निकए गए र्थीे। यह कहा गया है निक हालांनिक इसक े बाद अपीलार्थी)गण द्वारा जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को अभ्यावेदन निदया गया र्थीा, जिDसे उच्च न्यायालय को भेDा गया और उप निनबं क, उच्च न्यायालय ने प्रशासनिनक आदेश निदनांनिक 22.05.1990 द्वारा हालांनिक यह नोट निकया गया निक अपीलार्थी)गण को अस्र्थीायी रूप से निनयुक्त निकया गया र्थीा, यह निनदlश निदया निक पूव-आशुलिलनिपकों और हिंहदी आशुलिलनिपक निदनांनिक 14.07.1987 की अनुमोनिद सूची ैयार की Dाए और उनक े नाम मेरिरट क े क्रम में व्यवश्मिस्र्थी निकए Dाएं। यह कहा गया है निक उसक े अनुसरण में निनयमों क े अनुसार अपीलार्थी)गण का स्पीF टेस्ट कराया गया अपीलार्थी)गण हिंहदी े पद क े लिलए आव^यक न्यून म गति दक्ष ा प्राप्त करने में निवफल रहे यह एक ऐसा थ्य र्थीा Dो उच्च न्यायालय को सूतिच नहीं निकया गया र्थीा। यह कहा गया है निक उपरोक्त क े बावDूद जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद ने अपीलार्थी) को Dारी रखा और प्रत्यर्थी) संख्या 1 से 3 की सेवाओं को समाप्त कर निदया, जिDन्हें निनय प्रनिक्रया क े बाद और 1947 क े निनयमों क े अनुपालन में निनयुक्त निकया गया र्थीा और प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 क े पदों क े सापेक्ष निनयुक्त निकया। यह कहा गया है निक इसलिलए, उच्च न्यायालय ने अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त को ठीक ही रद्द कर निदया है व प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 की बखास् गी को समाप्त कर निदया है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
6. यह कहा गया है निक अपीलार्थी) निकसी भी अनु ोर्ष क े हकदार नहीं हैं क्योंनिक उन्हें उतिच चयन प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद पर कभी निनयुक्त नहीं निकया गया र्थीा। यह कहा गया है निक, इसक े निवपरी प्रत्यर्थी)गण उतिच चयन प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद निनयुक्त निकये गये र्थीे। यह कहा गया है निक प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 मूल स्वीक ृ पदों पर निनयुक्त निकये गये र्थीे। यह कहा गया है निक ऐसा नहीं हो सक ा निक एक स्वीकृ पद पर दो व्यनिक्त काम करें। यह कहा गया है निक इसलिलए सम्यक प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद प्रत्यर्थी) संख्या 1 से 3 का चयन और निनयुनिक्त निहन्दी आशुलिलनिपक क े पद पर हो Dाने पर और अपीलार्थी) को अवकाश रिरनिक्त पर निनयुनिक्त निमल Dाने क े परिरणामस्वरूप प्रत्यर्थी) संख्या 1 से 3 को निनयुक्त निकया Dाना है और अपीलार्थी) को सम्यक चयन प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद निवति व चयनिन लोगों क े लिलए हटना होगा। यह कहा गया निक इसलिलए, उच्च न्यायालय ने आक्षेनिप निनणय और आदेश को पारिर करने में कोई [ुनिट नहीं की है। यह कहा गया है निक भार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े संनिव ान क े अनुच्छेद 136 क े ह शनिक्तयों क े प्रयोग में इस न्यायालय क े निकसी भी हस् क्षेप का कोई मामला नहीं बन ा है।
7. प्रति वादी सं. 1 से 3 की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता Fॉ. आशु ोर्ष गग ने निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर और तिFवाDन बेंच द्वारा अथिभपुष्ट आक्षेनिप निनणय और आदेश का समर्थीन उच्च न्यायालय की ओर से प्रस् ु अति वक्ता द्वारा निदये गये कu का सहारा लेकर निकया है।
8. संबंति पक्षों क े निवद्वान अति वक्ताओं को निवस् ार से सुना।
9. सबसे पहले, इस पर ध्यान देना आव^यक है निक शुरू में अपीलार्थी)गण ने अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए चयन प्रनिक्रया में वर्ष 1987 में भाग लिलया र्थीा। चूंनिक जिDला न्यायालय मुरादाबाद में अंग्रेDी आशुलिलनिपक की कोई रिरनिक्तयां नहीं र्थीीं, इसलिलए अपीलार्थी)गण को अंग्रेDी आशुलिलनिपक क े पद पर निनयुक्त नहीं निकया गया र्थीा जिDसक े लिलए उन्होंने आवेदन निकया र्थीा। हालांनिक, उनका नाम 14.07.1987 की चयन सूची में रखा गया र्थीा। निनयम 1947 क े निनयम 14 (3) क े अनुसार,चयन सूची की वै ा एक वर्ष क े लिलए र्थीी और इसलिलए, 14.07.1987 निदनांनिक उक्त चयन सूची 13.07.1988 को समाप्त हो गयी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इसक े बाद अपीलार्थी) समाप्त चयन सूची क े आ ार पर निकसी भी निनयुनिक्त का दावा नहीं कर सक े र्थीे। हालांनिक, ऐसा प्र ी हो ा है निक हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद पर अस्र्थीायी प्रक ृ ति की क ु छ अवकाश रिरनिक्तयां र्थीीं और इसलिलए, अपीलार्थी) को 14.10.1987 से 15.11.1987 क एक महीने की अवति क े लिलए, उक्त अवकाश रिरनिक्तयों पर अस्र्थीायी आ ार पर निनयुक्त निकया गया र्थीा। इस स् र पर, यह ध्यान निदया Dाना चानिहए निक निनयुनिक्त प[ में ही यह कहा गया र्थीा निक निनयनिम कमचारी द्वारा अपना कायभार ग्रहण कर लेने पर उनकी निनयुनिक्त समाप्त कर दी Dाएगी। यह निववाद का निवर्षय नहीं है निक उसक े बाद 24.09.1988 को हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए एक नई परीक्षा आयोजिD की गई र्थीी और प्रत्यर्थी) संख्या 1 से 3 निनयुक्त निकए गए र्थीे। हालांनिक, इसक े बाद अपीलार्थी)गण की सेवाएं प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 क े हिंहदी आशुलिलनिपक क े पद क े लिलए चयनिन हो Dाने पर समाप्त की Dानी र्थीी, उप निनबं क उच्च न्यायालय क े 22.05.1990 निदनांनिक संचार क े अनुसरण में, जिDसक े द्वारा पूव-आशुलिलनिपक और हिंहदी आशुलिलनिपक निदनांनिक 14.07.1987 की अनुमोनिद सूची उनक े मेरिरट क े क्रम में व्यवश्मिस्र्थी निकए Dाने का निनदlश निदया गया र्थीा, और यद्यनिप अपीलार्थी) हिंहदी े पद क े लिलए गति परीक्षण को निनयम, 1947 क े निनयम 5 (ग) क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुसार आव^यक रूप से उत्तीण करने में निवफल रहे,जिDला न्याया ीश, मुरादाबाद ने अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त की और प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 की सेवाओं को समाप्त कर निदया। अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त और प्रत्यर्थीीा संख्या 1 से 3 की सेवा समानिप्त को उच्च न्यायालय द्वारा ठीक ही रद्द कर निदया गया है प्रर्थीम ो इस आ ार पर निक वर्ष 1990 में ऐसा कोई निनदlश Dारी नहीं निकया Dा सक ा र्थीा निक 14.07.1987 निदनांनिक चयन सूची क े आ ार पर Dो 13.07.1988 को समाप्त हो गई, क े आ ार पर निनयुनिक्त की Dाए; दूसरी बा, अपीलार्थी) हिंहदी े पद क े लिलए गति परीक्षण को उत्तीण करने में निवफल रहे; ीसरा, अपीलार्थी)गण को चयन की उतिच प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद निनयुक्त नहीं निकया गया, जिDसक े सापेक्ष प्रत्यर्थीीा संख्या 1 से 3 का चयन और निनयुनिक्त नए जिसरे से 24. 09. 1988 को निहन्दी आशुलिलनिपकों क े लिलए करायी गयी परीक्षा क े आ ार पर निकया गया र्थीा और उसक े बाद उन्हें चयन की उतिच प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद निनयुक्त निकया गया र्थीा और वर्ष 1987 में अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त अवकाश की रिरनिक्तयों क े सापेक्ष की गयी र्थीी और निनयुनिक्त आदेश में ही यह स्पष्ट रूप से उल्लेख निकया गया र्थीा निक उनकी निनयुनिक्त को निनयनिम कमचारिरयों द्वारा अपना कायभार ग्रहण कर लेने पर समाप्त कर दी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Dाएगी। उपरोक्त थ्य एवं परिरश्मिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए उच्च न्यायालय ने ठीक ही अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त को रद्द एवं अपास् कर निदया है और प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को बखास् करने का आदेश रद्द एवं अपास् कर निदया Dो निक निनयम 1947 क े अनुसार सम्यक प्रनिक्रया का पालन करने क े बाद चयनिन हुए र्थीे। अपीलार्थी)गण की ओर से निदया गया यह क निक प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को वर्ष 2012 में निनयुक्त निकया गया र्थीा, थ्यात्मक रूप से गल है क्योंनिक वर्ष 1988 में ही प्रत्यर्थीीा संख्या 1 से 3 को निनयुक्त निकया गया र्थीा और उनकी सेवाओं को वर्ष 1990 में जिDलान्याया ीश मुरादाबाद द्वारा समाप्त कर निदया गया र्थीा और उसक े बाद उच्च न्यायालय की तिFवीDन बेंच द्वारा पारिर अं रिरम आदेशों क े अनुसार, प्रत्यर्थीीा संख्या 1 से 3 को भी वर्ष 2012 में समायोजिD निकया गया र्थीा। इसलिलए, इस आ ार पर प्रत्यर्थीीा सं. 1 से 3 को 1992-2012 क े बीच की अवति में Dो क्षति हुई उसमें उनकी कोई गल ी नहीं र्थीी। क े लिलए उनकी कोई गल ी नहीं हुई है और हालांनिक उन्हें चुना गया र्थीा और बाद में निनयुक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निकया गया र्थीा। वास् व में, अपीलार्थी) ने अवै रूप से लाभ उठाया है और उन्हें उच्च न्यायालय क े अं रिरम आदेश क े अनुसार सेवा में Dारी रखा गया। अपीलार्थी)गण उच्च न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेश क े अनुसार पूव क्त पद पर बने रहना निवति क दृनिष्ट से ठीक नहीं है और न क े वल यह निक सेवा में उनकी निनरं र ा निवति क रूप से दोर्षपूण है, उसक े बाद उन्हें यह क देने की अनुमति नहीं दी Dा सक ी है निक उन्होंने लंबे समय क काम निकया है इसलिलए उनकी सेवाओं को संरतिक्ष निकया Dाना चानिहए, हालांनिक उनकी निनयुनिक्तयां कानूनी रूप पोर्षणीय नहीं हैं। उनकी निनयुनिक्तयों को अवै मान लिलए Dाने पर और यह निक उन्हें अन्य योग्य उम्मीदवारों क े स्र्थीान पर निनयुनिक्त का कोई अति कार नहीं है, आव^यक परिरणाम घनिट होगा। प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को समायोजिD / निनयुक्त कर लिलए Dाने पर, जिDन्हें निनय प्रनिक्रया क े बाद चुना गया र्थीा और अपीलार्थी)गण की निनयुनिक्त अवकाश रिरनिक्त पर इस श क े सार्थी की गयी र्थीी निक निनयनिम कमचारिरयों द्वारा कायभार ग्रहण कर लिलए Dाने पर उनकी निनयुनिक्त समाप्त कर दी Dाएगी, इसलिलए आव^यक परिरणाम घनिट होगा और अपीलार्थी)गण की सेवाओं को समाप्त निकया Dाएगा। दुभाग्य से, ऐसा हुआ है निक 2012 क े बाद हिंहदी े पद पर अपीलार्थी) क े सार्थी-सार्थी प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 कायर हैं Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Dो अनुमन्य नहीं है। एक स्वीक ृ पद पर दो व्यनिक्तयों की निनयुनिक्त नहीं हो सक ी है। अन्यर्थीा, राज्य पर एक स्वीक ृ पद पर दो व्यनिक्तयों का निवत्तीय बोझ पड़ेगा। इन परिरश्मिस्र्थीति यों में सेवाओं में Dारी रखने और पेंशन लाभ आनिद का भुग ान करने की अपीलार्थी)गण की प्रार्थीना को अनुमति नहीं दी Dा सक ी है। अपीलार्थी)गण निकसी भी अनु ोर्ष क े हकदार नहीं हैं। वास् व में, वे 1988 क े बाद सेवा में बने रहने से लाभाश्मिन्व हुए, हालांनिक वर्ष 1988 में नए चयन क े बाद और प्रत्यर्थी) सं. 1 से 3 को निनयम 1947 क े ह निनय प्रनिक्रया का पालन कर निनयुक्त निकये Dाने क े बाद उनकी सेवाओं को समाप्त करने की आव^यक ा र्थीी। उपरोक्त कारणों क े मद्देनDर और यहां ब ाए गए कारणों से, व मान अपील निवफल हो Dा ी है और यह खारिरD निकए Dाने क े योग्य है और दनुसार खारिरD कर निदया Dा ा है। लाग क े रूप में कोई आदेश नहीं होगा।................................ [न्यायमूर्ति एमआर शाह] Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA................................[न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना] नई निदल्ली, 13 नवंबर, 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA