Newtech Promoters and Developers Pvt. Ltd. v. State of U.P. & Ors.

Supreme Court of India · 11 Nov 2021
Uday Umesh Lalit; Ajay Rastogi; Abin Rout Bose
Civil Appeal Nos. 6745-6749 of 2021 @ SLP (Civil) Nos. 3711-3715 of 2021
civil appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the prospective but retrospective application of the Real Estate Act, affirming the Regulatory Authority's jurisdiction to order refunds and compensation, and dismissed appeals challenging its constitutional validity.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 6745 - 6749 वर्ष" 2021
(एस.एल.पी. (सविवल) सं. 3711 3715 वर्ष" 2021)
मैसस" न्यूटेक प्रमोटस" एंड डेवलपस" प्रा. लिल. लिलविमटेड ..... अपीलार्थी2 (गण)
बनाम
उ.प्र. राज्य एवं अन्य आवि: .... प्रत्यर्थी2 (गण)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6750 वर्ष" 2021
एसएलपी (:ीवानी) सं. 14733 वर्ष" 2020 से उत्पन्न)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6751 वर्ष" 2021
(एसएलपी (:ीवानी) सं. 2647 वर्ष" 2021 से उत्पन्न)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6752 वर्ष" 2021
(एसएलपी (:ीवानी) सं. 3185 ऑफ 2021 से उत्पन्न)
सार्थी में mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
सिसविवल अपील सं. 6753 वर्ष" 2021
(एसएलपी (:ीवानी) सं. 3426 ऑफ 2021 से उत्पन्न)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6754 ऑफ 2021
(एसएलपी (सिसविवल) सं. 6199 ऑफ 2021 से उत्पन्न)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6755 वर्ष" 2021
(एस.एल.पी. (:ीवानी) सं. 6671 वर्ष" 2021 से उत्पन्न)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6756 वर्ष" 2021
(एसएलपी (सिसविवल) सं. 6711 वर्ष" 2021 से उत्पन्न)
सार्थी में
सिसविवल अपील सं. 6757 वर्ष" 2021
(एसएलपी (सिसविवल) सं. 1670 वर्ष" 2021 से उत्पन्न)
विनण"य
माननीय न्यायमूर्ति रस् ोगी।
JUDGMENT

1. अनुमति प्र:ान की गई। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. व "मान अपीलें प्रमोटर/रिरयल एस्टेट डेवलपर क े आग्रह पर रिरयल एस्टेट (विवविनयमन और विवकास) अति विनयम, 2016 (यर्थीासं:र्भिभ "अति विनयम"), उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट (विवविनयमन और विवकास) विनयम, 2016 ( यर्थीासं:र्भिभ "विनयम") समान विववाद्यकों र्थीा कति पय प्राव ानों और उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण (यर्थीासं:र्भिभ "प्राति करण") क े विQयाकलाप को चुनौ ी:े े हुए:ायर गई ंहैं, हालांविक माननीय उच्च न्यायालय ने इसको सुभिभन्न आ:ेश पारिर करक े विनस् ारिर कर वि:या है, चूंविक उसमें वही प्रश्न सतिन्नविह हैं सिXनको व "मान विनण"य क े द्वारा विनस् ारिर विकया Xा रहा है।

3. यहां प्रत्यर्थी2 (गण) आवंटी/ Q े ा हैं सिXन्होंने इस विवश्वास पर अपनी गाढ़ी कमाई से की गई बच का महत्वपूण" विहस्सा विनवेश विकया है विक प्रमोटर /रिरयल एस्टेट डेवलपर गृह Qय करार क े ह उस गृह का कब्Xा सौंप:ेंगे, लेविकन उनका विवश्वास ब विहल गया Xब प्रमोटर करार की श _ क े ह इकाई/भूखंड/ भवन का कब्Xा सौंपने में विवफल हो गये और Q े ाओं द्वारा अति विनयम की ारा 31 क े ह ब्याX सविह विनवेश की गई रकम की वापसी क े लिलए परिरवा: प्रस् ु विकया गया।

4. पक्षकारों को सुनने क े बा: गृह खरी:ारों/आवंविटयों क े आग्रह पर:X" की गई भिशकाय क े आ ार पर प्राति करण क े एकल स:स्य द्वारा आक्षेविप आ:ेश पारिर विकया गया और (एमसीएलआर + 1%) ब्याX सविह मूल नराभिश, Xैसा विक अति विनयम क े ह राज्य सरकार विवविह करे, वापस करने क े विन:eश Xारी विकया गया।कारबार क े सामान्य अनुQम में, प्राति करण द्वारा पारिर आ:ेश अति विनयम की ारा 43 (5) क े ह अपील योग्य है, बश e विक अपीलीय न्यायाति करण क े समक्ष ारा 43 (5) क े ह 3 पूव" Xमा का वै ाविनक अनुपालन विकया Xा रहा है, लेविकन प्रमोटर/रिरयल एस्टेट डेवलपस" ने संविव ान mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े अनुच्छे: 226 और 227 क े ह एक रिरट यातिचका:ायर करक े उच्च न्यायालय का:रवाXा खटखटाया, Xो प्राति करण द्वारा क्षेत्राति कार क े विबना पारिर विकए गए आ:ेश पर सवाल उठा ा है क्योंविक यह प्राति करण क े स:स्य द्वारा पारिर विकया गया है, अपीलक ा"ओं क े अनुसार सिXनको अति विनयम की ारा 18 क े ह उस राभिश की वापसी क े आ:ेश का कोई क्षेत्राति कार प्राप्त नहीं है और वै ाविनक अपील:ायर करने क े लिलए अति विनयम की ारा 43 (5) क े ह परिरकल्पिoप पूव" Xमा की श " को भी चुनौ ी वि:या है और इलाहाबा: उच्च न्यायालय क े रिरट अति कारिर ा में विवचार क े लिलए क ु छ सहायक प्रश्न उठाए हैं। उच्च न्यायालय द्वारा उनक े द्वारा:ायर रिरट यातिचकाओं को खारिरX कर े हुए आ:ेश पारिर विकया है इस बा:ुखी होकर, प्रमोटरों/अचल संपलित्त डेवलपस" की पहल पर व "मान अपीलें:ायर की हैं।

5. हमारे समक्ष प्रस् ु कानूनी क " पर विवचार करने से पूव", हम अति विनयम 2016 की योXना क े बारे में एक सरसरी विनगाह डालना उतिच समझ े हैं Xो पक्षकारों द्वारा प्रस् ु क_ क े मूoयांकन करने क े लिलए प्रासंविगक हो सक ा है। अति विनयम, 2016 क े उद्देश्य और आ ार

6. विपछले:ो:शकों में, Xनसंख्या की वृतिt और शहरीकरण की ओर लोगों क े आकर्ष"ण क े सार्थी, आवास की मांग कई गुना बढ़ गई।सरकार ने बढ़ ी मांग से विनपटने क े लिलए विवभिभन्न आवास योXनाओं को भी प्रस् ु विकया, लेविकन सच ो यह है विक आवास क्षेत्र की मांगों को सरकार द्वारा अपने स् र पर विवभिभन्न कारणों से आवश्यक ा को पूरा करने क े लिलए पूरा नहीं विकया Xा सका, आवास की बढ़ ी मांग को पूरा करने में प्राइवेट व्यविv रिरयल स्टेट सेक्टर में प्रवेश विकये। हालांविक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA साव"Xविनक और विनXी:ोनों बैंकों से ऋण की उपलब् ा आसान हो गई है, विफर भी ब्याX की उच्च:र और ईएमआई ने लोगों पर अति रिरv विवत्तीय बोझ डाला है।

7. वि:ए गए समय में, अचल संपलित्त और आवास क्षेत्र काफी ह: क अविनयविम र्थीा और इसका परिरणाम यह र्थीा विक उपभोvा प्रभावी ंत्र क े अभाव में विबoडरों और डेवलपस" क े प्रति Xवाब:ेही क े लिलए पूरी Xानकारी प्राप्त करने में असमर्थी" र्थीे।हालांविक, उपभोvा संरक्षण अति विनयम, 1986 अचल संपलित्त क्षेत्र में घर खरी:ारों की मांग को पूरा करने क े लिलए उपलब् र्थीा, लेविकन सच यह है विक यह ंत्र अचल संपलित्त क्षेत्र में घर खरी:ारों और प्रमोटरों की Xरूर ों को पूरा करने क े लिलए अपया"प्त र्थीा।

8. इस समय, रिरयल एस्टेट सेक्टर में Xवाब:ेही को प्रवर्ति करने क े लिलए एक पय"वेक्षण ंत्र स्र्थीाविप करने और त्वरिर विववा: विनवारण ंत्र क े लिलए एक सहायक मशीनरी उपलब् कराने और कानून क े ह अनुमेय सीमा क कानून क े माध्यम से घर खरी:ारों द्वारा विकए गए विनवेश की सुरक्षा क े लिलए रिरयल एस्टेट (विवविनयमन) विव ेयक की अति आवश्यक ा महसूस की गई र्थीी।

9. अति विनयम क े उद्देश्य और आ ार क े संबं में Xो कर्थीन विकया गया है उससे यह:र्भिश हो ा है विक विनयामक प्राति करण की प्रार्थीविमक ल्पिस्र्थीति प्रमोटरों पर डाली गई बाध्य ा का अनुपालन सुविनति{ करने क े लिलए अति कार क्षेत्र वाले अचल संपलित्त क्षेत्र को विवविनयविम करना है।इस विवर्षय क े उद्देश्य और आ ार क े संबं में Xो कर्थीन विकया है वह ाल्पित्वक है Xो इस प्रकार है: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रिरयल एस्टेट सेक्टर:ेश में आवास और बुविनया:ी ढांचे की आवश्यक ा और मांग को पूरा करने में उत्प्रेरक भूविमका विनभा ा है।Xबविक हाल क े वर्ष_ में इस क्षेत्र में काफी वृतिt हुई है, यह व्यावसातियक ा और मानकीकरण की अनुपल्पिस्र्थीति और पया"प्त उपभोvा संरक्षण की कमी क े सार्थी काफी ह: क अविनयविम रहा है।यद्यविप उपभोvा संरक्षण अति विनयम, 1986 अचल संपलित्त बाXार में खरी:ारों क े लिलए एक मंच क े रूप में उपलब् है र्थीाविप इसका आश्रय क े वल उपचारात्मक है और उस क्षेत्र में खरी:ारों और प्रमोटरों की सभी चिंच ाओं को:ूर करने क े लिलए पया"प्त नहीं है। मानकीकरण की कमी उद्योग क े स्वस्र्थी और व्यवल्पिस्र्थी विवकास क े लिलए एक बा ा रही है।इसलिलए, विवभिभन्न मंचों में इस क्षेत्र को विवविनयविम करने की आवश्यक ा पर Xोर वि:या गया है।

2. उपरोv क े दृष्टग, रिरयल एस्टेट क्षेत्र में प्रभावी उपभोvा संरक्षण, एकरूप ा और व्यावसातियक प्रर्थीाओं और लेन:ेन क े मानकीकरण क े विह में एक क ें द्रीय कानून, अर्थीा" ्, रिरयल एस्टेट (विवविनयमन और विवकास) विव ेयक, 2013 होना आवश्यक हो Xा ा है।प्रस् ाविव विव ेयक रिरयल एस्टेट क्षेत्र क े विवविनयमन और संव "न क े लिलए रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण (प्राति करण) की स्र्थीापना और भूखंड, अपाट"मेंट या भवन की विबQी सुविनति{ करने क े लिलए, यर्थीाल्पिस्र्थीति, एक क ु शल और पार:श[2] रीक े से और रिरयल एस्टेट क्षेत्र में उपभोvाओं क े विह ों की रक्षा करने क े लिलए उपबं कर ा है और प्राति करण क े विनण"यों, विन:eशों या आ:ेशों से अपील सुनने क े लिलए रिरयल एस्टेट अपीलीय न्यायाति करण की स्र्थीापना कर ा है।"

10. यह उपभोvाओं क े प्रति अति क Xवाब:ेही सुविनति{ करने, ोखा ड़ी और विवलंब और व "मान उच्च लेन:ेन लाग ों को भी काफी कम करने और:ोनों पर क ु छ सिXम्मे:ारिरयों को लागू करक े उपभोvाओं और प्रमोटरों क े विह ों को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सं ुलिल करने और संविव:ात्मक श _ की पार:र्भिश ा लाने क े लिलए,Xवाब:ेही क े न्यून म मानक य करने और फास्ट ट्रैक विववा: समा ान ंत्र विवकसिस करने क े लिलए लाया गया र्थीा ।इसमें इस क्षेत्र में व्यावसातियक ा और मानकीकरण को शाविमल करने का भी प्रस् ाव विकया गया है, सिXससे:ीघा"वति में त्वरिर विवकास और विनवेश का माग" प्रशस् होगा।

11. उद्देश्यों और कारणों से संबंति क ु छ प्रासंविगक विववरण विनम्नानुसार विनकाले गए हैं: "4... (घ) प्रस् ाविव विव ान क े अ ीन उपबंति रीति में आवंविटयों को ऐसे प्रति कर का सं:ाय करने क े लिलए प्रव "क पर:ातियत्व अति रोविप करना, यवि: वह प्रस् ाविव विव ान क े अ ीन उस पर अति रोविप विकसी बाध्य ा का विनव"हन करने में असफल रह ा है (एफ) प्राति करण क े काय_ में, अन्य बा ों क े सार्थी - (i) ) अचल संपलित्त क्षेत्र क े विवकास से संबंति मामलों में उपयुv सरकार को सलाह:ेना (i) i) ) सभी अचल संपलित्त परिरयोXनाओं क े रिरकॉड" की एक, ऐसे विववरणों क े सार्थी Xो विन ा"रिर विकए Xा सक े हैं, वेबसाइट प्रकाभिश करना और बनाए रखना, सिXसक े लिलए पंXीकरण विकया गया है, (i) i) i) ) प्रस् ाविव कानून क े ह प्रमोटरों, आवंविटयों और अचल संपलित्त एXेंटों पर डाली गई बाध्य ाओं का अनुपालन सुविनति{ करना, शाविमल होंगे।... (i) ) प्रस् ाविव विव ान की ारा 12,14 और 16 क े अ ीन प्रति कर का न्यायविनण"यन करने क े लिलए प्राति करण द्वारा न्यायविनण"यन अति कारी विनयुv करना। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA......

12. यह विव ेयक रिरयल एस्टेट सेक्टर क े विवविनयमन और संव "न क े लिलए प्राति करण की स्र्थीापना का प्राव ान कर ा है, सिXससे विक प्लाट, अपाट"मेंट या विबल्डिंoडग की विबQी या रिरयल एस्टेट प्रोXेक्ट की विबQी:क्ष और पार:श[2] रीक े से सुविनति{ कर रिरयल एस्टेट सेक्टर में उपभोvाओं क े विह ों की रक्षा की Xा सक े और विवविनयामक प्राति करण और न्यायविनण"यन अति कारी की स्र्थीापना करक े और प:ानुQम में अपीलीय न्यायाति करण की स्र्थीापना करक े त्वरिर विववा: विनवारण ंत्र क े लिलए न्यायविनण"यन ंत्र स्र्थीाविप करने का उपबं है सिXसे मुख्य रूप से घर खरी:ारों द्वारा की गई भिशकाय क े शीघ्र विनस् ारण क े लिलए इस अति विनयम संस: द्वारा वर्ष" 2016 में अति विनयविम विकया गया है ।

13. इस परिरप्रेक्ष्य में मामले की Xांच करने क े लिलए विक भार में एक घर का क्या अर्थी" है पर विवचार करें ।आंकड़ों से प ा चल ा है विक एक औस भार ीय परिरवार की क ु ल संपलित्त का लगभग 77% अचल संपलित्त में हो ा है और यह उसक े Xीवनकाल में विकसी व्यविv का सबसे बड़ा विनवेश है।भार में अचल संपलित्त की विवतिचत्र विवशेर्ष ा है।खरी:ार घर क े लिलए भुग ान करने क े लिलए पैसे उ ार ले ा है और सार्थी ही सार्थी एक फाइनेंसर की भूविमका विनभा ा है क्योंविक विबल्डिंoडग प्रोXेक्ट्स मनी अपफ्र ं ट एकत्र कर े हैं और यह खरी:ार को बहु कमXोर ल्पिस्र्थीति में डाल:े ा है । वि:वाला और शो न अक्षम ा अति विनयम, 2018 में संशो न ने घर क े खरी:ारों को विवत्तीय लेन:ारों क े रूप में मान्य ा प्र:ान की और व "मान अति विनयमन घर क े खरी:ारों क े पक्ष में सबसे महत्वपूण" विनयामक हस् क्षेप है और और समय बी ने क े सार्थी, इसका प्रभाव पड़ा है विक यह बाXार में न्यून म मानकों य करने की सीमारेखा बन चुकी है।इससे पहले, रिरयल एस्टेट क्षेत्र पूरी रह से अविनयविम र्थीा और उनक े व्यापार रूपरेखा में कोई पार:र्भिश ा नहीं र्थीी और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व "मान अति विनयम क े बा:, संभाविव घर खरी:ारों क े लिलए यह Xांचने क े लिलए खुला है विक अति विनयम, 2016 क े ह एक परिरयोXना को मंXूरी:ी गई है या नहीं, Xो कम से कम उस व्यविv को सं ुविष्ट प्र:ान कर ी है Xो आXीवन विनवेश करने क े लिलए आगे आ रहा है।

14. यह विक परिरयोXना को वै ाविनक रूप से विवविनयविम विकए Xाने क े अलावा, यह परिरयोXना क े पूरा होने क े संबं में क ु छ प्रामाभिणक ा और डेवलपर और घर खरी:ार पर घर खरी:ारों क े समझौ े और शासना:ेश क े वै ाविनक अनुपालन क े विनयमों और श _ का पालन करने क े लिलए एक वै ाविनक:ातियत्व:े ा है। इसक े अलावा, कोई भी परिरयोXना Xो अति विनयम, 2016 क े ह अनुमोवि: है, प्रमोटर को बैंकों से न Xुटाने में म:: कर ी है, यह उन आंकड़ों:शा" ा है सिXसमें खरी:ार अनुमोवि: परिरयोXनाओं में अपनी सं ुविष्ट व्यv कर े हैं Xो न क े वल घर खरी:ारों क े लिलए बल्पिoक प्रमोटरों और रिरयल एस्टेट एXेंटों क े लिलए भी फाय:ेमं: है।

135,130 characters total

15. अति विनयम का अध्याय II अचल संपलित्त परिरयोXनाओं क े पंXीकरण से संबंति है। ारा 3 रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण क े सार्थी चल रही परिरयोXनाओं सविह अचल संपलित्त परिरयोXनाओं क े पूव" पंXीकरण को अविनवाय" कर ी है। ारा 4 में रिरयल एस्टेट परिरयोXनाओं क े पंXीकरण क े लिलए प्रव "क द्वारा आवे:न क े अवयवों को विन ा"रिर विकया गया है। 10-a. विवशेर्ष रूप से, प्रमोटर को आवे:न में ारा 4 की उप ारा 2(l)(c) )(c) ) क े ह परिरयोXना को पूरा करने की समय सीमा का उल्लेख करना आवश्यक है। ारा 5 प्राति करण द्वारा पंXीकरण करने से संबंति है और अन्य बा ों क े सार्थी- सार्थी यह भी कहा गया है विक कोई भी आवे:न ब क अस्वीकार नहीं विकया Xाएगा Xब क विक आवे:क को मामले में सुनवाई का अवसर नहीं वि:या गया हो। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति विनयम की ारा 5(3) क े अनुसार, परिरयोXना क े पूरा होने क े सार्थी ही पंXीकरण समाप्त हो Xा ा है। ारा 6 क े ह, प्राति करण प्रत्येक मामले क े थ्यों या अप्रत्याभिश घटना क े आ ार पर पंXीकरण की समयसीमा का विवस् ार कर सक ा है। ारा 7 पंXीकरण क े विनरसन से संबंति है। ारा 8 क े अनुसार, प्राति करण अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी शेर्ष विवकास काय_ को पूरा करने क े लिलए बाध्य है Xहां पंXीकरण की चूक या विनरसन हो ा है।

16. अध्याय III में 'प्रमोटर क े काय" और क "व्य' वि:ए गए हैं, Xो व "मान मामले क े प्रयोXन क े लिलए प्रासंविगक है। ारा 11 में प्रमोटरों क े काय_ और क "व्यों पर विवस् ार से ब ाया गया है। ारा 11 की उप- ारा (4) क े ह, प्रमोटरों पर कई:ातियत्व डाले गए हैं। खंड 11 की उप-खंड (5) क े ह, प्रमोटर आवंटन को रद्द कर सक ा है यवि: आवंटी/घर खरी:ार विबQी क े लिलए समझौ े की श _ का कोई भंग कर ा है, और ऐसे मामले में, पीविड़ आवंटी को प्राति करण से संपक " करने का अति कार है।

17. ारा 12 में यह प्राव ान है विक यवि: प्रमोटर द्वारा कोई चूक की Xा रही है, या ो नोविटस, विवज्ञापन या प्रॉस्पेक्टस में विनविह Xानकारी क े सं:भ" में या मॉडल अपाट"मेंट, भूखंड या भवन क े आ ार पर Xो विकसी भी गल या गल बयान क े कारण आवंटी/घर खरी:ार को कोई नुकसान या क्षति पहुंचा ा है या परिरयोXना से वापस लेना चाह ा है, ो उसे प्रमोटर द्वारा अति विनयम क े ह विन ा"रिर रीक े से मुआवXा वि:या Xाएगा।

18. ारा 14 प्रमोटरों द्वारा स्वीक ृ योXनाओं और परिरयोXना विवविनर्दि:ष्ट पालन से संबंति है और ारा 14 (3) आवंविट ी को उस ल्पिस्र्थीति में मुआवXा प्राप्त करने का अति कार:े ी है Xहां कोई संरचनात्मक:ोर्ष हो ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

19. अति विनयम की ारा 18 (1) परिरणाम की बा कर ी है यवि: प्रमोटर विबQी क े लिलए समझौ े क े सं:भ" में विकसी अपाट"मेंट, भूखंड या भवन को पूरा करने में विवफल रह ा है या परिरयोXना को विनर्दि:ष्ट ति भिर्थी क पूरा करने में असमर्थी" है या डेवलपर क े रूप में अपने व्यवसाय को बं: करने क े कारण या ो पर

17. ारा 12 में यह प्राव ान है विक यवि: प्रोत्साहक द्वारा कोई चूक की Xा ी है, चाहे नोविटस, विवज्ञापन या विववरभिणका में विनविह Xानकारी क े सं:भ" में या मॉडल अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन क े आ ार पर, सिXससे विकसी गल या असत्य कर्थीन क े कारण आवंटी/घर खरी:ार को कोई नुकसान या क्षति पहुंच ी हो या परिरयोXना से हटना चाह ा है, ो उसे अति विनयम क े अन् ग" विवविह रीति से प्रोत्साहक द्वारा क्षति पूर्ति की Xाएगी।

18. ारा 14 प्रोत्साहकों द्वारा स्वीक ृ योXनाओं और परिरयोXनाओं क े विवविन:eशों क े अनुपालन से संबंति है और ारा 14 (3) आवंटी को विकसी संरचनात्मक:ोर्ष की ल्पिस्र्थीति में मुआवXा प्राप्त करने का अति कार:े ी है।

19. अति विनयम की ारा 18 (1) में प्रोत्साहक द्वारा विकसी अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन का कब्Xा:ेने में विवफल रहने की ल्पिस्र्थीति में, चाहे विबQी क े लिलए समझौ े क े सं:भ" में या विन ा"रिर ति भिर्थी क परिरयोXना को पूरा करने में असमर्थी" रहने क े कारण या एक डेवलपर क े रूप में अति विनयम क े ह पंXीकरण क े विनलंबन या रद्द होने क े कारण या विकसी अन्य कारण से अपने व्यवसाय को बं: करने की ल्पिस्र्थीति यों में, आवंटी/घर खरी:ार को ऐसी:र पर, Xो इस संबं में विन ा"रिर विकया Xाए, ब्याX क े सार्थी राभिश का रिरफ ं ड मांगने का विनर्दिववा: अति कार:े ा है।

20. अति विनयम की ारा 18 (2) में कहा गया है विक यवि: ऐसी भूविम क े:ोर्षपूण" मालिलकाना हक क े कारण आवंटी को नुकसान हो ा है, सिXस पर परिरयोXना विवकसिस की Xा रही है या विवकसिस की गई है, ो प्रोत्साहक आवंटी को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मुआवXा:ेगा और ारा 18 (2) क े ह मुआवXे क े लिलए इस रह क े:ावे पर त्समय प्रवृत्त विकसी भी विवति क े ह विन ा"रिर परिरसीमा क े अन् ग" रोक नहीं लगाई Xाएगी।

21. अति विनयम की ारा 18 (3) में कहा गया है विक यवि: प्रोत्साहक अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों या विवविनयमों क े ह या विबQी क े लिलए समझौ े क े विनयमों और श _ क े अनुसार विकसी भी अन्य:ातियत्व का विनव"हन करने में विवफल रह ा है, ो प्रोत्साहक अति विनयम क े ह विवविह रीति से आवंविटयों को 'मुआवXा' का भुग ान करने क े लिलए उत्तर:ायी होगा।

22. यवि: हम अति विनयम की ारा 18 की उप- ारा (1), (2) और (3) का संयुv रूप से अध्ययन कर े हैं, ो उसमें वर्भिण विवभिभन्न आकल्पिस्मक ाओं, (क) आवंटी या ो परिरयोXना से हट कर रिरफ ं ड माँग सक ा है; (ख) इस रह का रिरफ ं ड ब्याX क े सार्थी विकया Xा सक ा है Xो विवविह विकया Xाए; (ग) इसक े अलावा अति विनयम की ारा 18 (2) और 18 (3) क े ह:ेय मुआवXे का:ावा भी विकया Xा सक ा है; (घ) आवंटी क े पास स्व ंत्र ा है, यवि: वह परिरयोXना से हटने का इरा:ा नहीं रख ा है, ो प्रोत्साहक द्वारा कब्Xा सौंपने में हुई प्रत्येक माह की:ेरी क े लिलए विन ा"रिर:रों पर ब्याX का भुग ान करने की आवश्यक ा होगी। 23.:नुसार, अति विनयम की ारा 19 में आवंविटयों क े “अति कारों और क "व्यों” का उल्लेख विकया गया है। ारा 19 (3) आवंटी को, Xैसा भी मामला हो, अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन क े कब्Xे का:ावा करने का हक:ार बना ी है। ारा 19 (4) में प्राव ान है विक यवि: प्रोत्साहक समझौ े क े अनुसार अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन का कब्Xा:ेने में विवफल रह ा है या असमर्थी" रह ा है, ो यह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आवंटी को अति विनयम क े ह विवविह रीति से ब्याX और मुआवXे क े सार्थी भुग ान की गई राभिश क े रिरफ ं ड का:ावा करने का हक:ार बना ा है।

24. ारा 19 (4) अति विनयम की ारा 18 (1) का लगभग एक प्रारूविपक प्राव ान है। ये:ोनों प्राव ान आबंटी क े अति कार को:ो अलग-अलग उपचारों क े रूप में मान्य ा:े े हैं, अर्थीा" ् कब्Xा और मुआवXा:ेने में:ेरी क े लिलए ब्याX या ब्याX क े सार्थी राभिश की वापसी।

25. अति विनयम की ारा 18 (1) (क) और ारा 19 (4) क े ह विनर्दि:ष्ट रिरफ ं ड मांगने क े आवंटी क े विनर्दिववा: अति कार विकसी भी आकल्पिस्मक ल्पिस्र्थीति या उसक े अनुबं ों पर विनभ"र नहीं है। ऐसा प्र ी हो ा है विक विव ातियका ने माँग विकए Xाने पर रिरफ ं ड का यह अति कार Xानबूझकर एक विनरपेक्ष साव"भौविमक अति कार क े रूप में प्र:ान विकया है, यवि: प्रोत्साहक समझौ े की श _ क े ह विन ा"रिर समय क े भी र अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन का कब्Xा:ेने में विवफल रह ा है, Xो विकसी भी रह की अप्रत्याभिश घटनाओं या न्यायालय/न्यायाति करण क े स्र्थीगन आ:ेशों क े कारण ही क्यों न हुआ हो, सिXसक े लिलए विकसी भी रह से आवंटी/घर खरी:ार सिXम्मे:ार नहीं है, ो प्रोत्साहक का यह:ातियत्व होगा विक वह माँगे Xाने पर राज्य सरकार द्वारा विन ा"रिर:र पर ब्याX क े सार्थी राभिश वापस करे, सिXसमें अति विनयम क े प्राव ान क े अनुसार मुआवXा भी शाविमल है परं ु यवि: आवंटी परिरयोXना से हटना नहीं चाह ा है, ो वह कब्Xा सौंपने क की अवति क े लिलए विन ा"रिर:र पर ब्याX का हक:ार होगा।

26. यवि: हम प्राति कारी की शविv की बा करें, ो ारा 31 क े ह यह परिरकल्पिoप है विक अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों और विवविनयमों क े प्राव ानों क े अति Qमण या उल्लंघन क े लिलए भिशकाय ें प्राति कारी या न्यायविनण"यन अति कारी क े पास:X" की Xा सक ी हैं। इस रह की भिशकाय विकसी भी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “प्रोत्साहक, आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट” क े लिखलाफ:X" की Xा सक ी है और इसे विकसी भी “पीविड़ व्यविv” द्वारा:ायर विकया Xा सक ा है और इसे स्पष्टीकरण क े सार्थी पढ़ा Xाना चाविहए, "व्यविv" में आवंविटयों का संघ या त्समय प्रवृत्त विकसी विवति क े ह पंXीक ृ कोई स्वैल्पिच्छक उपभोvा संघ शाविमल है। सिXस रूप और रीक े से भिशकाय:X" की Xानी है वह ारा 31 की उप ारा (2) क े ह उपलब् कराया गया है।

27. ारा 32 रिरयल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा:ेने क े लिलए प्राति करण क े काय_ का उल्लेख कर ी है और अति विनयम की ारा 34 से 38 प्रोत्साहकों, आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंटों पर इसक े विवविनयमों क े अनुपालन क े संबं में प्राति करण की शविvयों और काय_ की अलग-अलग प्रक ृ ति को मान्य ा:े ी है और विकसी भी प्रोत्साहक, आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट क े मामले की Xांच करने क े लिलए एक या अति क व्यविvयों को विनयुv करने और यवि: प्रोत्साहक,आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट अति विनयम, विनयमों या विवविनयमों क े ह अपने काय_ का विनव"हन करने में विवफल रह े है ो अं रिरम आ:ेश पारिर करने और प्रोत्साहक, आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट को समय-समय पर विन:eश Xारी करने और यवि: आवश्यक हो ो:ातियत्व का विनव"हन करने में विवफल रहने पर अर्थी":ण्ड लगा सक ा है।

28. सार्थी ही, अति विनयम क े अध्याय 8 में अपरा ों, शाल्पिस् यों और न्यायविनण"यन क े बारे में ब ाया गया है। ारा 59 से 68 में विवभिभन्न प्रकार की शाल्पिस् यों का उल्लेख है। इनमें से प्रत्येक प्राव ान में स्पष्ट रूप से कहा गया है विक इसक े ह शाल्पिस् प्राति करण द्वारा विन ा"रिर की Xानी चाविहए।

29. हमारा अति विनयम की ारा 71 पर विवचार कर रहे हैं सिXसका शीर्ष"क है "न्यायविनण"यन करने की शविv" Xो विक न्यायविनण"यन अति कारी क े लिलए विवभिशष्ट है। ारा 71 की उप ारा (1) इन शब्:ों क े सार्थी शुरू हो ी है, '' ारा 12,14,18 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और 19 क े ह मुआवXे का विनण"य करने क े उद्देश्य हे ु”, प्राति करण को संबंति व्यविv को सुनवाई का उतिच अवसर:े े हुए विवविह रीति से Xांच करने क े लिलए उपयुv सरकार से परामश" क े प{ा, न्यातियक अति कारी क े रूप में एक ऐसे न्यातियक अति कारी को विनयुv करना चाविहए Xो सिXला न्याया ीश क े रैंक से कम न हो। सार्थी ही, उप ारा (2) में न्यायविनण"यन अति कारी पर यह बाध्य ा डाली गई है विक उप ारा (1) क े अ ीन मुआवXे का विन ा"रण कर े समय आवे:न पर यर्थीासंभव शीघ्र ा से विवचार विकया Xाए और 60 वि:नों क े भी र उसका विनस् ारण विकया Xाए। यवि: आवे:न क े विनस् ारण में 60 वि:नों की वै ाविनक अवति से अति क विवलंब हो रहा है ो अवति बढ़ाने क े लिलए कारण:X" विकए Xाने चाविहए।

30. ारा 71 की उप ारा (3) क े अ ीन, न्यायविनण"यन अति कारी को मामले क े थ्यों और परिरल्पिस्र्थीति यों से परिरतिच व्यविvयों को न क े वल ऐसे साक्ष्य:ेने क े लिलए Xो न्यायविनण"यन क े लिलए उपयोगी और प्रासंविगक हों, या कोई:स् ावेX प्रस् ु करने क े लिलए समन करने और उपल्पिस्र्थीति रहने को बाध्य करने की शविv:ी गयी है, उससे ारा 72 क े अ ीन विनर्दि:ष्ट विवभिभन्न माप:ंडों पर ध्यान:ेने की अपेक्षा की Xा ी है Xो, Xैसा विक मामला हो, व्यभिर्थी व्यविv को:ेय मुआवXे और ब्याX की मात्रा का विन ा"रण करने क े लिलए संपूण" ो नहीं लेविकन उद्बो नात्मक है।

31. हमारे द्वारा पक्षकारों क े विवद्वान अति वvा को सुनने क े प{ा, व "मान अपील समूहों में हमारे विवचार क े लिलए विनम्नलिललिख प्रश्न उभरकर सामने आ े हैंः-

1. क्या अति विनयम 2016 पूव"व्यापी है या अपने प्रव "न में पूव"व्यापी है और यवि: भार क े संविव ान की कसौटी पर इसका परीक्षण विकया Xाए ो इसका विवति क परिरणाम क्या होगा? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. क्या प्राति कारी को ारा 12,14,18 और 19 क े ह आवंटी को राभिश की वापसी/रिरफ ं ड विन:eभिश करने का अति कार क्षेत्र है या क्षेत्राति कार अति विनयम की ारा 71 क े अ ीन अनन्य रूप से न्यायविनण"यन अति कारी क े पास है?

3. क्या अति विनयम की ारा 81 अति विनयम की ारा 31 क े अ ीन संल्पिस्र्थी की गई भिशकाय ों को सुनने क े लिलए प्राति कारी को अपनी शविvयां एकल स:स्य को प्रत्यायोसिX करने क े लिलए प्राति क ृ कर ी है?

4. क्या अपील क े सारवान अति कार पर विवचार क े लिलए अति विनयम की ारा 43 (5) क े परं ुक क े अ ीन पूव"-Xमा की श " विवति ः पोर्षणीय है?

5. क्या प्राति करण को अति विनयम की ारा 40 (1) क े ह मूल राभिश की वसूली क े लिलए वसूली प्रमाण पत्र Xारी करने का अति कार है? प्रश्न 1: क्या अति विनयम 2016 पूव"व्यापी है या अपने प्रव "न में पूव"व्यापी है और यवि: भार क े संविव ान की कसौटी पर इसका परीक्षण विकया Xाए ो इसका विवति क परिरणाम क्या होगा?

32. यह विवर्षय विवशेर्ष रूप से व "मान में Xारी परिरयोXनाओं क े सं:भ" में अति विनयम 2016 क े प्राव ानों क े पूव"व्यापी प्रयोज्य ा से संबंति है। यवि: हम अति विनयम क े उद्देश्यों, कारणों और योXना पर ध्यान:ें, ो यह स्पष्ट हो ा है विक संस: ने इस विवर्षय पर व्यापक विवचार-विवमश" करने क े बा:, स्वविववेक से, प्रभावी उपभोvा संरक्षण, रिरयल एस्टेट क्षेत्र में व्यापार प्रर्थीाओं और लेन:ेन की एकरूप ा और मानकीकरण, उपभोvाओं क े प्रति अति क Xवाब:ेही सुविनति{ करने, ोखा ड़ी और:ेरी और उच्च लेन:ेन लाग ों को:ूर करने क े लिलए एक क ें द्रीय कानून बनाना आवश्यक समझा और:नुसार उपभोvाओं और प्रोत्साहकों क े विह ों को सं ुलिल करने क े लिलए:ोनों पर क ु छ शाल्पिस् और सिXम्मे:ारिरयां mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति रोविप करने का प्रयास विकया। इस विवर्षय पर विवचार-विवमश" वर्ष" 2013 से चल रहा र्थीा, लेविकन अति विनयम को अं ः 2016 में अति विनयविम विकया गया, Xो 25 माच", 2016 से प्रभावी हुआ।

33. अति विनयम 2016 क े अध्याय 2 क े ह, रिरयल एस्टेट परिरयोXनाओं का पंXीकरण अविनवाय" कर वि:या गया र्थीा और कानून को लागू करने क े लिलए और ारा 3 की उप ारा (1) क े ह इसका स्र्थीान लेने क े लिलए, यह वै ाविनक बनाया गया विक अति विनयम क े ह स्र्थीाविप एक रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण क े सार्थी रिरयल एस्टेट परिरयोXना को पंXीक ृ विकए विबना, कोई भी प्रोत्साहक विकसी भी रिरयल एस्टेट परिरयोXना में प्लॉट, अपाट"मेंट या भवन,Xैसा मामला हो, को खरी:ने क े लिलए विकसी भी रीक े से विवज्ञापन, प्रचार, आरतिक्ष, विबQी या विबQी की पेशकश नहीं करेगा, या विकसी भी व्यविv को खरी:ने क े लिलए आमंवित्र नहीं करेगा लेविकन ारा 3 (1) क े परं ुक की सहाय ा से, यह अति:ेभिश विकया गया र्थीा विक ऐसी परिरयोXनाएं Xो अति विनयम क े प्रारंभ होने की ारीख को चल रही हैं और विवशेर्ष रूप से उन परिरयोXनाओं को सिXन्हें पूरा होने का प्रमाण पत्र Xारी नहीं विकया गया है, ऐसे प्रोत्साहक अति विनयम क े प्रारंभ होने की ारीख से ीन महीने की अवति क े भी र उv परिरयोXना क े पंXीकरण क े लिलए प्राति करण को आवे:न करने क े लिलए बाध्य होंगे। अति विनयम की ारा 3 की उप- ारा (2) क े ह आने वाली परिरयोXनाओं को क ु छ छ ू ट:ी Xा रही है, सिXसक े परिरणामस्वरूप, ऐसे सभी घर खरी:ारों क े समझौ े, सिXन्हें पक्षकारों द्वारा पारस्परिरक रूप से विनष्पावि: विकया गया है, चालू परिरयोXनाएं क े पूण" होने पर विव ायी अति:ेश का पालन करना होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

34. "चालू परिरयोXना" शब्: को अति विनयम क े ह इस रह से परिरभाविर्ष नहीं विकया गया है, Xबविक "रिरयल एस्टेट परिरयोXना" शब्: को अति विनयम की ारा 2 (Xेडएन) क े ह परिरभाविर्ष विकया गया है, Xो इस प्रकार हैः "2 (Xेडएन) "रिरयल एस्टेट परिरयोXना" से, यर्थीाल्पिस्र्थीति, सभी या क ु छ अपाट"मेंट या भूखंडों या भवन को बेचने क े प्रयोXन क े लिलए विकसी भवन या अपाट"मेंट से बने भवन का विवकास या विकसी विवद्यमान भवन या उसक े विकसी भाग को अपाट"मेंट में परिरवर्ति करना या भूखंडों या अपाट"मेंट क े लिलए भूविम का विवकास अभिभप्रे है और इसक े अं ग" सामान्य क्षेत्र, विवकास काय", उन पर सभी सु ार और संरचनाएं और उनसे संबंति सभी सुखाति कार, अति कार और अनुर्षंविगक चीXे शाविमल हैं."

35. अति विनयम का आशय चल रही रिरयल एस्टेट परिरयोXना पर भी लागू होने का है। उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट (विवविनयमन एवं विवकास) विनयमावली, 2016 क े विनयम 2 (X) क े ह 'चालू परिरयोXना' शब्: को परिरभाविर्ष विकया गया है Xो इस प्रकार हैः "2 (X) "चालू परिरयोXना" "से ऐसी परिरयोXना अभिभप्रे है Xहां विवकास चल रहा है और सिXसक े लिलए पूण" ा प्रमाणपत्र Xारी नहीं विकया गया है किंक ु ऐसी परिरयोXनाओं को अपवर्जिX विकया गया है Xो इन विनयमों की अति सूचना की ारीख को विनम्नलिललिख मान:ंडों में से विकसी को पूरा कर ी हैंः (i) ) Xहां सेवाएं रखरखाव क े लिलए स्र्थीानीय प्राति करण को सौंप:ी गई हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

(i) i) ) Xहां सामान्य क्षेत्र और सुविव ाएं रखरखाव क े लिलए विनवासी कoयाण संघ को सौंप:ी गई हैं।

(i) i) i) ) Xहां सभी विवकास काय" पूरे कर लिलए गए हैं और अपाट"मेंट/मकान/भूखंडों क े साठ प्रति श की विबQी /पट्टा विवलेख विनष्पावि: विकए Xा चुक े हैं।

(i) v) Xहां सभी विवकास काय" पूरे कर लिलए गए हैं और पूण" ा प्रमाण पत्र Xारी करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी क े समक्ष आवे:न विकया Xा चुका है।

36. अति विनयम की ारा 2(र्थी) क े ह ‘पूण" ा प्रमाणपत्र’ और ारा (Xेडएफ) क े ह ‘कब्Xा प्रमाणपत्र’ को परिरभाविर्ष विकया गया है, Xो इस प्रकार हैः “2(र्थी) ''पूण" ा प्रमाणपत्र'' से सक्षम प्राति कारी द्वारा Xारी विकया गया पूण" ा प्रमाणपत्र या ऐसा अन्य प्रमाणपत्र, चाहे वह विकसी भी नाम से Xाना Xा ा हो, सिXसमें यह प्रमाभिण विकया गया हो विक रिरयल एस्टेट परिरयोXना उसी स्वीक ृ योXना, ले-आउट योXना और विवभिशष्ट ाओं क े अनुसार विवकसिस की गई है Xैसा विक स्र्थीानीय विवति क े ह सक्षम प्राति कारी द्वारा अनुमोवि: विकया गया है; "2(Xेडएफ) "कब्Xा प्रमाण पत्र" से स्र्थीानीय कानूनों क े ह विकसी भवन में, सिXसमें Xल, स्वच्छ ा और विबXली Xैसे नागरिरक बुविनया:ी ढांचे की व्यवस्र्थीा हो, अति वास की अनुमति:ेने क े लिलए सक्षम प्राति कारी द्वारा Xारी विकया गया कब्Xा प्रमाण पत्र या ऐसा अन्य प्रमाण पत्र, चाहे वह विकसी भी नाम से Xाना Xा ा हो;" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

37. अति विनयम 2016 की योXना और विवशेर्ष रूप से ारा 3 को:ेख े हुए, सिXनकी एक विवस् ृ चचा" की गई है, अति विनयम से पहले शुरू होने वाली सभी चालू परिरयोXनाएं और सिXनक े संबं में पूण" ा प्रमाण पत्र Xारी नहीं विकए गए हैं, अति विनयम क े अन् ग" आ ी हैं। इससे प ा चल ा है विक विव ायी मंशा अति विनयम को न क े वल उन परिरयोXनाओं पर लागू करने की है Xो अति विनयम क े लागू होने क े बा: अभी क शुरू नहीं हुई र्थीीं बल्पिoक चालू परिरयोXनाओं को भी अपने अन् ग" लाने और इसक े प्रारंभ से ही उनमें से प्रत्येक पर कु छ क "व्यों और सिXम्मे:ारिरयों को अति रोविप कर े हुए विह ारकों,आबंविटयों/घर खरी:ारों, प्रोत्साहकों और रिरयल एस्टेट एXेंटों क े परस्पर अति कारों की रक्षा करने की है। और रिरयल एस्टेट प्राति करण क े अन् ग" अविवविनयविम रिरयल एस्टेट क्षेत्र का विवविनयमन, प्रशासन और पय"वेक्षण करना है।

38. अपीलक ा" क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वvा श्री कविपल सिसब्बल का Xोर इस बा पर है विक विवQय करार वर्ष" 2010- 11 में विनष्पावि: विकया गया र्थीा, अति विनयम क े लागू होने से बहु पहले, और व "मान अति विनयम की पूव"व्यापी प्रयोज्य ा है और अति विनयम क े ह चालू परिरयोXनाओं का पंXीकरण विनष्पावि: विबQी विवलेख क े ह प्रोत्साहक और आवंटी क े बीच स्र्थीाविप संविव:ात्मक अति कारों का उल्लंघन होगा Xो कानून में अनुज्ञेय है और आगे कहा है विक अति विनयम 2016 की ारा 13,18 (1), 19 (4) अपने पूव"व्यापी प्रयोज्य ा की सीमा क भार क े संविव ान क े अनुच्छे: 14,19 (1) (छ) का उल्लंघन है। 39.:ूसरी ओर,विवद्वान सॉलिलसिसटर Xनरल श्री ुर्षार मेह ा का क " है विक उद्देश्य और कारणों का परिरशीलन:शा" ा है विक अति विनयम सारवान अति कारिर ा को नहीं छीन ा है, बल्पिoक यह घर खरी:ारों क े विह ों की रक्षा कर ा है Xहां परिरयोXना/कब्Xे में:ेरी हो ी है और आगे कहा है विक अति विनयम की योXना की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पूव"व्यापी प्रयोज्य ा है, Xो विवति क े ह अनुम है। प्राव ान यह स्पष्ट कर े हैं विक यह भविवष्य में काम कर ा है, हालांविक, इसका संचालन पहले विकए गए काय" और ल्पिस्र्थीति पर आ ारिर है और इस मामले में पूव"व्यापक ा क े विवरूt पूवा"नुमान सी ा खंडन विकया Xा सक ा है। अति विनयम की शाल्पिब्:क व्याख्या यह प्रकट कर ी है विक उसमें “मौXू:ा” रिरयल एस्टेट परिरयोXना और अति विनयम की ारा 2 (Xेडएन) क े ह परिरभाविर्ष “नई” रिरयल एस्टेट परिरयोXना क े बीच अं र नहीं विकया गया है।

40. विवद्व अति वvा ने आगे कहा है विक मुख्य शब्: अर्थीा" “इस अति विनयम क े प्रव "न की ति भिर्थी पर चालू” का आवश्यक विनविह ार्थी", सी ा और विकसी अस्पष्ट ा क े विबना, है और इसमें वे परिरयोXनाएं शाविमल हैं Xो चल रही र्थीीं और Xहां क े वल पूण" ा प्रमाण पत्र Xारी करना लंविब है, विव ातियका का आशय यह र्थीा विक उन परिरयोXनाओं को भी अति विनयम क े ह पंXीक ृ विकया Xाना चाविहए। इसलिलए अति विनयम का:ायरा सभी परिरयोXनाओं को अपने अन् ग" लाना है बश e विक पूण" ा प्रमाण पत्र Xारी न विकया गया हो। अपीलक ा" का मामला कब्Xा प्रमाण पत्र पर आ ारिर है न विक पूण" ा प्रमाण पत्र पर। इस सं:भ" में, विवद्वान अति वvा का कर्थीन है विक उv परं ुक को ारा 3 (2) (ख) क े सार्थी पढ़ा Xाना चाविहए, Xो विवशेर्ष रूप से उन परिरयोXनाओं को अपवर्जिX कर ा है Xहां अति विनयम क े प्रारंभ से पहले पूण" ा प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ हो। इस प्रकार ारा 3 (2) क े ह आने वाली परिरयोXनाओं का अति विनयम क े अन् ग" पंXीकरण आवश्यक नहीं है। इस प्रकार अति विनयम का आशय इससे बं ा है विक विकसी परिरयोXना को पूण" ा प्रमाणपत्र विमला है या नहीं।

41. विव ान की साफ और स्पष्ट भार्षा प्रचालन में पूव"व्यापी है और सांविवति क विनमा"ण क े उद्देश्यपूण" व्याख्या विनयम को लागू करने से क े वल एक परिरणाम संभव mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है, अर्थीा" ्, विव ानमंडल ने यह सुविनति{ करने क े लिलए Xानबूझकर एक पूव"व्यापी कानून अति विनयविम विकया है, विक प्लॉट, अपाट"मेंट या भवन या रिरयल एस्टेट परिरयोXना की विबQी क ु शल और पार:श[2] रीक े से की Xाए ाविक रिरयल एस्टेट क्षेत्र में उपभोvाओं क े विह ों की सभी रीकों से रक्षा की Xा सक े और ारा 13,18 (1) और 19 (4) उपभोvाओं/आवंविटयों क े आर्भिर्थीक विह ों की रक्षा क े लिलए सभी लाभकारी प्राव ान हैं। इन परिरल्पिस्र्थीति यों में, यवि: अति विनयम को भविवष्यगामी माना Xा ा है ो ारा 31 क े ह विकसी भी आवंटी को चालू परिरयोXना क े लिलए न्यायविनण"यन ंत्र उपलब् नहीं होगा। इस प्रकार,यह इस मामले क े थ्यों पर भी अति विनयम की पूव"व्यापी प्रयोज्य ा पर अति भावी प्रभाव डालने वाली संविव:ात्मक श _ क े बारे में प्रस् ावकों क े क " को खारिरX कर ा है।

42. इस प्राव ान में इस बा पर Xोर वि:या गया है विक विकसी ऐसी परिरयोXना क े प्रोत्साहक को Xो पूण" नहीं है/पूण" ा प्रमाण-पत्र क े विबना है, उसे अति विनयम क े ह परिरयोXना का पंXीकरण कराना होगा, लेविकन परिरयोXना का पंXीकरण करा े समय प्रोत्साहक शेर्ष विवकास काय_ को पूरा करने क े लिलए नई समय-सीमा विवविह करना होगा और अति विनयम की योXना से हमें नहीं लग ा विक ारा 3 (1) का पहला परं ुक विकसी भी रीक े से भार क े संविव ान क े अनुच्छे: 14 और 19 (1) (Xी) का उल्लंघन कर ा है। संस: हमेशा कानून क े माप:ंडों क े भी र पूव"व 2 घटनाओं को प्रभाविव करने वाला कोई भी कानून बनाने क े लिलए सक्षम है।

43. बंबई राज्य (अब महाराष्ट्र) बनाम विवष्णु राज्य रामचंद्र[1] वाले मामले में, इस न्यायालय ने यह म व्यv विकया विक यवि: कानून क े संचालन क े लिलए आवश्यक ाओं का विहस्सा इसक े पारिर होने क े समय से पहले क े समय से लिलया गया हो, ो अति विनयम क े लागू होने क े बा: की गयी कार"वाई क े मामले में कानून पूव"व्यापी नहीं हो ा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

44. विवभिभन्न प्रकार की आवश्यक ाओं को पूरा करने क े लिलए, संस: द्वारा यह:ेखा गया विक अलिखल भार ीय स् र पर बड़ी संख्या में ऐसी रिरयल एस्टेट परिरयोXनाएं, Xहां आवंविटयों को कई वर्ष_ से कब्Xा नहीं विमला है और उपभोvा संरक्षण अति विनयम क े ह विवभिभन्न मंचों क े समक्ष:ायर की Xा रही भिशकाय ें उपभोvा/आवंविटयों को पया"प्त/सं ोर्षXनक परिरणाम:ेने में विवफल रही हैं और उनकी Xीवन भर की बच अवरूt है और आवंविटयों क े एक बड़े वग" ने ऋण या विवत्तीय संस्र्थीानों क े माध्यम से पैसा लेकर अपनी कविठन कमाई का विनवेश इस इस विवश्वास क े सार्थी विकया विक वे अपने अपाट"मेंट/फ्ल ै ट/यूविनट क े रूप में छ पाने में सक्षम होंगे।

45. त्समय, रिरयल एस्टेट क्षेत्र, प्रोत्साहक और आवंटी एवं विवकास काय_/:ातियत्वों को विवविनयविम करने क े लिलए कोई कानून नहीं र्थीा, यह बुरी रह से महसूस विकया गया विक व "मान में ऐसी चालू परिरयोXनाएं, सिXन्हें पूरा होने का प्रमाण पत्र Xारी नहीं विकया गया है, को अति विनयम, 2016 क े:ायरे में लाया Xाना चाविहए, ाविक आवंविटयों, प्रोत्साहकों, रिरयल एस्टेट एXेंटों क े विह ों की रक्षा स्पष्ट ः कानून क े:ायरे में की Xा सक े । क े वल इसलिलए विक यर्थीा विनवेवि: अति विनयम को इसक े संचालन में पूव"व्यापी बनाया गया है, इसे भार क े संविव ान क े अनुच्छे: 14 या 19 (1) (छ) का उल्लंघन नहीं कहा Xा सक ा है। इसक े विवपरी, संस: को वास् व में व्यापक Xनविह में पक्षकारों क े बीच विनष्पावि: पूव" विवद्यमान संविव:ा और अति कारों को अपने:ायरे में लेने क े लिलए भू लक्षी प्रभाव से भी कानून बनाने की शविv है।

46. अति विनयम क े ह इस रह क े:ातियत्वों क े उल्लंघन का परिरणाम परिरचालन में भविवष्यगामी हैं और यवि: चालू परिरयोXना, सिXसका पूरा होने का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं विकया गया है, को अति विनयम क े अन् ग" नहीं लाया Xा ा है, ो अविवकसिस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA चालू परिरयोXनाओं और शुरू होने वाली नई परिरयोXनाओं क े संबं में वग2करण की पूरी संभावना है।

47. भू लक्षी/भविवष्यलक्षी प्रभाव क े सार्थी कानून बनाने की विव ायी शविv अच्छी रह से मान्य ा प्राप्त है और अपीलक ा"ओं/प्रोत्साहकों क े लिलए यह कहना अनुज्ञेय नहीं होगा विक उनक े पास आवंविटयों को एक असहाय और:यनीय ल्पिस्र्थीति में छोड़ कर परिरयोXना को पूरा करने का कोई विनविह अति कार है Xो कम से कम कानून क े:ायरे में स्वीकाय" नहीं हो सक ा है

48. भू लक्षी और पूव"व्यापी क े बीच इस न्यायालय द्वारा Xय महाकाली रोलिंलग विमoस बनाम भार संघ एवं अन्य[2] क े मामले में अं र विकया गया है, Xो इस प्रकार हैः- "8. "भू लक्षी" से अभिभप्रे है पीछे मुड़कर:ेखना, प्रश्नग अति विनयम क े पूव" विवद्यमान विकसी अति विनयम या चीXों क े सन्:भ" में अ ी पर विवचार करना। भू लक्षी कानून का अर्थी" उस कानून से हो ा है, अपने लागू होने से पहले हुए काय_ या थ्यों या अति कारों को प्रभाविव करने क े लिलए बनाया Xा ा है। पूव"व्यापी अति विनयम का अर्थी" हो ा है, एक ऐसा अति विनयम Xो संव्यवहारों या प्रति:ायों पर एक नया:ातियत्व सृसिX कर ा है या विनविह अति कारों को नष्ट या बाति कर ा है।”

49. इसक े अति रिरv, इस न्यायालय ने शांति क ं डक्टर प्राइवेट लिलविमटेड एवं अन्य बनाम असम राज्य विवद्यु बोड" एवं अन्य[3] वाले मामले में विनम्नव ारिर विकया:- 2 2007(12) SCC 198 3 2019(19) SCC 529 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "67. विव ान क े सं:भ" में पूव"व्यापक ा विकसी ऐसे संव्यवहार या काय" पर नई विवति की प्रयोज्य ा है Xो अति विनयम क े प्रख्यापन से पहले पूरा हो गया हो।

68. व "मान मामले में, भुग ान करने क े लिलए Q े ा का:ातियत्व और सिXस वि:न से ारा 3 और 4 क े ह भुग ान और ब्याX:ेय हो Xा ा है, वह ऐसी घटना से संबंति नहीं है Xो 1993 क े अति विनयम से पहले हुई र्थीी, यह कहना भी हमारे लिलए आवश्यक नहीं है विक 1993 का अति विनयम प्रव "न में पूव"व्यापी है अति विनयम स्पष्ट ः भविवर्षयलक्षी है और इसे प्रचालन में भू लक्षी क े रूप में अभिभव्यv करना आवश्यक नहीं है। इसलिलए हम 31 अगस्, 2016 वि:नांविक [शांति क ं डक्टर (प्रा) लिल. बनाम असम राज्य एसईबी, (2016) 15 एससीसी 13] एक न्याया ीश की ऐसी राय से सहम नहीं हैं विक 1993 का अति विनयम पूव"व्यापी है।

50. इस न्यायालय द्वारा विवनी ा शमा" बनाम राक े श शमा" एवं अन्य[4], क े मामले में वि:ए गए हाल क े विनण"य में सिXसमें इस न्यायालय ने किंह:ू उत्तराति कार अति अति विनयम, 1956 की ारा 6 (1) क े:ायरे की व्याख्या की है, कानून क े पूव"व्यापी विव ान को विनम्नव ारिर विकया:- "61 भविवर्षयलक्षी कानून नए अति कारों को इसक े अति विनयमन की ारीख से प्र:ान कर ा है। भू लक्षी अति विनयम पीछे की ओर काय" कर ा है और मौXू:ा अति विनयमों क े ह अर्जिX विनविह अति कारों को छीन ले ा है या नष्ट कर:े ा है। एक पूव"व्यापी विव ान वह है Xो भू लक्षी रूप से काम नहीं कर ा है। यह भविवष्य ् काम कर ा है। हालांविक, इसका संचालन पहले क े चरिरत्र या ल्पिस्र्थीति पर आ ारिर हो ा है सिXसे पूव"व 2 घटनाओं से लिलया 4 2020(9) SCC 1 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गया हो। संशोति ारा 6 क े ह, चूंविक अति कार Xन्म से वि:या गया है, यानी एक पूव"व 2 घटना, और प्राव ान संशो न अति विनयम की ारीख को और उससे अति कारों का:ावा करने से संबंति हैं।”

51. इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक विव ान क े वल इसलिलए भू लक्षी नहीं है विक यह मौXू:ा अति कारों या इसकी भू लक्षी समीक्षा को प्रभाविव कर ा है क्योंविक इसकी कार"वाई क े लिलए आवश्यक ाओं का एक विहस्सा इसक े पारिर होने क े पहले समय से लिलया गया है, सार्थी ही, पूव"व्यापी विव ान से एक ऐसा विव ान अभिभप्रे है Xो पहले से ही पारिर संव्यवहारों या विवचारों पर एक नया:ातियत्व अति रोविप कर ा है या विनविह अति कारों को नष्ट या हाविन पहुंचा ा है।

52. संस: ने अति विनयम की ारा 3 (1) क े ह व "मान में चल रही रिरयल एस्टेट परिरयोXनाओं को कानून क े:ायरे में लाने का प्रयास विकया, सिXसमें अति विनयम की ारा 3 (1) क े ह भविवष्य में मौXू:ा या आगामी सभी प्रकार की विवकासात्मक गति विवति यों सविह “मौXू:ा भवन या उसक े एक विहस्से को अपाट"मेंट में परिरवर्ति करना” प: का उपयोग करक े विकया, विव ातियका का इरा:ा उन परिरयोXनाओं को शाविमल करना है Xो चल रही र्थीीं और Xहां अति विनयम क े:ायरे में पूण" ा प्रमाण पत्र Xारी नहीं विकया गया है।

53. यहां क विक विबQी या घर खरी:ारों क े समझौ े की श ¯ भी विनति{ रूप से डेवलपर क े इरा:े को इंविग कर ी हैं विक सक्षम प्राति कारिरयों द्वारा Xारी विकया गया कोई भी प{ात्व 2 विव ान, विनयम और विवविनयम आवि: पक्षकारों क े लिलए बाध्यकारी होंगे। खंडों ने फ्ल ै ट खरी:ार/आवंटी पर लागू होने और बाध्यकारी होने क े लिलए बा: क े कानूनों की प्रयोज्य ा को लागू विकया है और:ोनों में से कोई भी पक्ष, प्रोत्साहक/घर खरी:ार या आवंटी, अति विनयम क े ह अपनी सिXम्मे:ारिरयों/:ेन:ारिरयों से बच नहीं सक ा है और अति विनयम क े प्राव ानों क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उल्लंघन को उनकी चुनौ ी:े ा है और यह अति विनयम क े प्राव ानों क े ह प्राति करण की भू लक्षी प्रयोज्य ा क े लिलए अति भावी प्रभाव वाले अनुबं की श _ क े बारे में अपीलार्थी2 द्वारा वि:ए गए क " को खारिरX कर ा है Xो पूरी रह से गल है और अस्वीकार विकए Xाने योग्य है।

54. अति विनयम 2016 की योXना से, इसका अनुप्रयोग पूव"व्यापी स्वरूप में है और सुरतिक्ष रूप से यह कहा Xा सक ा है विक पहले से पूरी हो चुकी परिरयोXनाएं या सिXन्हें पूरा होने का प्रमाण पत्र वि:या गया है, इसक े:ायरे में नहीं हैं और इसलिलए, विनविह या प्रोद्भू अति कार, यवि: कोई हो, विकसी भी रह से प्रभाविव नहीं हो े हैं। इसक े सार्थी ही, यह अति विनयम 2016 क े अति:ेश का संभाविव रूप से पालन करने क े लिलए ारा 3 क े ह चल रही परिरयोXनाओं और भविवष्य की परिरयोXनाओं को पंXीक ृ करने क े बा: लागू होगा। प्रश्न संख्या 2: क्या प्राति करण क े पास अति विनयम की ारा 12,14,18 और 19 क े ह आवंटी को राभिश की वापसी/रिरफ ं ड विन:eभिश करने का अति कार क्षेत्र है या यह क्षेत्राति कार अति विनयम की ारा 71 क े ह अनन्य रूप से न्यायविनण"यन अति कारी क े पास है?

55. प्रश्न की Xांच करने से पहले, हमें अति विनयम की योXना क े सार्थी-सार्थी प्राति करण द्वारा अति विनयम की ारा 84 और 85 क े ह अपनी शविvयों का उपयोग कर े हुए बनाए गए विनयमों/विवविनयमों को एक समग्र दृविष्टकोण से:ेखना होगा Xो रिरयल एस्टेट परिरयोXना क े प्रोत्साहक क े लिलए कु छ काय_ और क "व्यों को अभिभविन ा"रिर कर ा है और यवि: प्रोत्साहक अध्याय 3 क े ह अपनी:ातियत्वों को पूरा करने में विवफल रह ा है ो इसक े गंभीर परिरणाम हो े हैं। ारा 12,14,18 और 19 में क ु छ:ातियत्वों का उल्लेख है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

56. ारा 12, Xो इन यातिचकाओं में विवचारणीय है, इस प्रकार हैः "12. Xहां कोई व्यविv नोविटस विवज्ञापन या प्रोस्पेक्टस में विनविह Xानकारी क े आ ार पर या विकसी मॉडल अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन क े आ ार पर अविग्रम राभिश या Xमा कर ा है, और इसमें शाविमल विकसी भी गल, असत्य बा क े कारण कोई नुकसान या क्षति उठा ा है, ो उसे प्रोत्साहक द्वारा इस अति विनयम क े अ ीन विवविह रीति से मुआवXा वि:या Xाएगा;” बश e विक इस रह क े गल, झूठे कर्थीन से प्रभाविव व्यविv को नोविटस, विवज्ञापन या प्रोस्पेक्टस में विनविह, या मॉडल अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन, Xैसा भी मामला हो, प्रस् ाविव परिरयोXना से बाहर विनकलने का इरा:ा है, ो उसे ब्याX क े सार्थी उसका पूरा विनवेश वापस कर वि:या Xाएगा, एवं मुआवXा उस रीति से Xो इस अति विनयम क े अ ीन विवविह हो।”

57. ारा 14 प्रोत्साहकों द्वारा स्वीक ृ योXनाओं और परिरयोXना विवविन:eशों क े अनुपालन से संबंति है। ारा 14 (3) आवंटी को शविv प्र:ान कर ी है विक वह विकसी संरचनात्मक:ोर्ष या कारीगरी में कोई अन्य:ोर्ष आवि: होने की ल्पिस्र्थीति में मुआवXा प्राप्त कर सक ा है। ारा 14 (3) विनम्नव है:- “(3) इस रह क े विवकास से संबंति विबQी क े समझौ े क े अनुसार यवि: विकसी भी संरचनात्मक:ोर्ष या कारीगरी, गुणवत्ता या सेवाओं क े प्राव ान या प्रोत्साहक क े विकसी अन्य:ातियत्व में कोई अन्य:ोर्ष है, Xो कब्Xा सौंपने की ारीख से पांच साल की अवति क े भी र आबंविट व्यविv द्वारा प्रोत्साहक क े संज्ञान में लाया Xा ा है, ो यह प्रोत्साहक का क "व्य होगा विक वह विबना विकसी अति रिरv शुoक क े 30 वि:नों क े भी र इस रह की त्रुविटयों को ठीक करे और यवि: प्रोत्साहक इस रह की त्रुविटयों को समय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर ठीक करने में विवफल रह ा है, ो पीविड़ आवंटी इस अति विनयम क े अं ग" यर्थीा उपबंति रीति से उतिच मुआवXा प्राप्त करने क े हक:ार होंगे।”

58. ारा 18:ो नोट 'राभिश की वापसी और मुआवXा' से प्रोरंभ हो ी है। इन:ोनों शब्:ों अर्थीा" ‘राभिश की वापसी’ और ‘मुआवXा' में भे: विकया गया है। ारा 18 इस प्रकार हैः

18. (1) यवि: प्रोत्साहक विकसी अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन को पूरा करने में विवफल रह ा है या उसका कब्Xा:ेने में असमर्थी" रह ा है, ो (क) विवQय क े लिलए करार क े विनबं नों क े अनुसार या, यर्थीाल्पिस्र्थीति, उसमें विवविनर्दि:ष्ट ारीख क सम्यक ् रूप से पूरा करक े या (ख) इस अति विनयम क े अ ीन या विकसी अन्य कारण से पंXीकरण क े विनलंबन या प्रति संहरण क े कारण विवकासक ा" क े रूप में उसक े कारबार क े बं: हो Xाने क े कारण, – वह आवंविटयों की मांग पर, यवि: आवंटी उपलब् विकसी अन्य उपचार पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना परिरयोXना से वापस हटना चाह ा है, ो वह उस अपाट"मेंट, भूखंड, भवन, Xैसा भी मामला हो, क े संबं में उसे प्राप्त राभिश को ऐसी:र पर ब्याX क े सार्थी वापस कर:े, Xो इस संबं में इस अति विनयम क े ह विवविह की गयी हो, सिXसमें मुआवXा भी शाविमल है: बश e विक Xहां कोई आवंटी परिरयोXना से बाहर विनकलने का इरा:ा नहीं रख ा है, वहां उसे विवलंब क े प्रत्येक महीने क े लिलए प्रोत्साहक द्वारा, कब्Xा सौंपे Xाने क, ऐसी:र पर ब्याX का भुग ान विकया Xाएगा, Xो विन ा"रिर की Xाए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (2) भूविम क े:ोर्षपूण" मालिलकाना हक, सिXस पर परिरयोXना विवकसिस की Xा रही है या विवकसिस की गई है, क े कारण हुए विकसी भी नुकसान की ल्पिस्र्थीति में प्रोत्साहक द्वारा इस अति विनयम क े ह विवविह रीति से आवंविटयों को मुआवXा वि:या Xाएगा और इस उप- ारा क े ह मुआवXे क े लिलए:ावा विकसी भी कानून क े ह प्र:ान की गई परिरसीमा से बाति नहीं होगा। (3) यवि: प्रोत्साहक इस अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों या विवविनयमों क े ह या विबQी क े लिलए समझौ े क े विनयमों और श _ क े अनुसार उस पर भारिर विकसी भी अन्य:ातियत्व का विनव"हन करने में विवफल रह ा है, ो वह आवंविटयों को इस रह क े मुआवXे का भुग ान उस रीति से करने क े लिलए उत्तर:ायी होगा Xो इस अति विनयम क े ह विवविह हो। (प्रभाव वर्ति )

59. अध्याय 4 में आवंविटयों क े अति कारों और क "व्यों का उल्लेख है और विवशेर्ष रूप से ारा 19 (4) में आवंविटयों को भुग ान की गई राभिश की वापसी का अति कार वि:या गया है। ारा 19 (4) इस प्रकार हैः- (4) आवंटी प्रोत्साहक से विन ा"रिर:र पर ब्याX सविह भुग ान की गई राभिश क े रिरफ ं ड का:ावा करने का हक:ार होगा और मुआवXा इस अति विनयम अ ीन यर्थीा उपबंति रीति से, यवि: प्रोत्साहक विबQी क े समझौ े की श _ क े अनुसार या इस अति विनयम क े प्राव ानों या इसक े ह बनाए गए विनयमों या विवविनयमों क े ह अपने पंXीकरण क े विनलंबन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA या विनरस् ीकरण क े कारण एक डेवलपर क े रूप में अपने व्यवसाय को बं: करने क े कारण अपाट"मेंट, प्लॉट या भवन का कब्Xा:ेने में विवफल रह ा है या असमर्थी" रह ा है।

60. ारा 31 प्राति कारी क े समक्ष भिशकाय ें:ालिखल करने से संबंति है और इस प्रकार हैः प्राति करण या न्यायविनण"यन अति कारी क े समक्ष भिशकाय ें:ालिखल करना - (1) कोई भी व्यभिर्थी व्यविv विकसी भी प्रोत्साहक, आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट क े लिखलाफ, Xैसा भी मामला हो, इस अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों और विवविनयमों क े प्राव ानों क े विकसी भी उल्लंघन या विवरो क े लिलए प्राति करण या न्यातियक अति कारी क े समक्ष भिशकाय:X" करा सक ा है। स्पष्टीकरण-इस उप ारा क े उद्देश्य क े लिलए 'व्यविv' में आवंविटयों का संघ या विकसी कानून क े ह पंXीक ृ स्वैल्पिच्छक उपभोvा संघ शाविमल होगा। उप ारा (1) क े अ ीन परिरवा::ालिखल करने क े लिलए प्रारूप, रीति और फीस ऐसी होगी Xो विवविह की Xाए।

61. ारा 71 मुआवXे का अति विनण"य कर े समय न्यायविनण"यन अति कारी में विनविह शविvयों से संबंति है, Xो इस प्रकार है:

71. अति विनण"य की शविv (1) ारा 12,14,18 और ारा 19 क े अ ीन मुआवXे का विन ा"रण करने क े प्रयोXन क े लिलए प्राति करण उपयुv सरकार क े परामश" से एक या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति क न्यातियक अति कारी, Xो सिXला न्याया ीश है या रहा है, की विनयुविv करेगा Xो संबंति व्यविv को सुनवाई का उतिच एवं युविvयुv अवसर प्र:ान करने क े प{ा ् विवविह रीति से Xांच करेगा: बश e विक कोई व्यविv सिXसकी भिशकाय ारा 12,14,18 और ारा 19 क े अं ग" आने वाले मामलों क े संबं में उपभोvा विववा: विनवारण मंच या उपभोvा संरक्षण अति विनयम, 1986 (1986 का 68 वां) की ारा 9 क े अं ग" स्र्थीाविप उपभोvा विववा: विनवारण आयोग या राष्ट्रीय उपभोvा भिशकाय विनवारण आयोग क े समक्ष इस अति विनयम क े लागू होने से पहले लंविब है, वह, यर्थीाल्पिस्र्थीति, ऐसे मंच या आयोग की अनुमति से उसक े समक्ष लंविब भिशकाय को वापस ले सक ा है और इस अति विनयम क े ह न्यायविनण"यन अति कारी क े समक्ष एक आवे:न:ायर कर सक ा है। (2) उप ारा (1) क े अ ीन मुआवXा अति विनण[2] करने क े लिलए आवे:न पर न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा यर्थीासंभव शीघ्र ा से काय"वाही की Xाएगी और आवे:न प्राप्त होने की ारीख से साठ वि:न की अवति क े भी र इसका विनस् ारण विकया Xाएगाः बश e विक Xहाँ इस रह क े विकसी भी आवे:न का विनपटारा 60 वि:नों की उv अवति क े भी र नहीं विकया Xा सका हो, ो न्यायविनण"यन अति कारी उस अवति क े भी र आवे:न का विनस् ारण नहीं करने क े लिलए अपने कारणों को लिललिख में:X" करेगा। (3) Xांच कर े समय न्यायविनणा"यक अति कारी को मामले क े थ्यों और परिरल्पिस्र्थीति यों से अवग विकसी व्यविv को साक्ष्य:ेने या कोई:स् ावेX पेश करने क े लिलए समन करने और उसे बाध्य करने की शविv होगी Xो न्यायविनण"यन अति कारी की राय में विवर्षय क े लिलए उपयोगी या प्रासंविगक हो। और यवि:, ऐसी Xांच पर, उसे समा ान हो Xा ा है विक वह व्यविv mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उप ारा (1) में विवविनर्दि:ष्ट ाराओं में से विकसी उपबं का अनुपालन करने में विवफल रहा है, ो वह उन ाराओं में से विकसी क े उपबं ों क े अनुसार, यर्थीाल्पिस्र्थीति सिXसे उतिच समझ ा हो, ऐसे मुआवXे या ब्याX का सं:ाय करने का विन:ेश:े सक ा है।

62. मुआवXे का विन ा"रण कर े समय विवचार विकए Xाने वाले व्यापक कारकों का ारा 72 क े अ ीन उपबं विकया गया है Xो विनम्नानुसार हैः “ ारा 71 क े ह मुआवXे या ब्याX की मात्रा,Xैसा भी मामला हो, का विन ा"रण कर े समय न्यायविनण"यन अति कारी विनम्नलिललिख कारकों का ध्यान रखेगा, अर्थीा" ्ः - (क) तिडफॉoट क े परिरणामस्वरूप की गई असमान लाभ या अनुतिच लाभ की राभिश, Xहां कहीं भी मापनीय हो; (ख) तिडफॉoट क े परिरणामस्वरूप हुई हाविन की रकम (ग) तिडफॉoट की पुनरावृलित्तक प्रक ृ ति (घ) ऐसे अन्य कारक सिXन्हें न्यायविनण"यन अति कारी न्यायविह में आवश्यक समझ ा हो।”

63. उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण ने अति विनयम 2016 की ारा 85 क े ह अपनी शविvयों का उपयोग कर े हुए 27 फरवरी, 2019 को उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण (सामान्य) विवविनयम, 2019 (ए ल्पिश्मनप{ा विवविनयम 2019 क े रूप में सं:र्भिभ ) क े रूप में अपने विवविनयम ैयार विकए हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

64. विवविनयम 18 से 23 न्यातियक काय"वाही क े अलावा प्राति करण की बैठकों से संबंति हैं। विवविनयमन 24 अति विनण"यन काय"वाही क े अध्याय में आ ा है और इस प्रकार हैः “24 (क) प्राति करण क े समक्ष:ायर भिशकाय ों क े संबं में न्यातियक काय"वाही क े लिलए, प्राति करण आ:ेश द्वारा विन:eश:े सक ा है विक विवभिशष्ट मामलों या मुद्दों की सुनवाई और विनण"य प्राति करण क े अध्यक्ष या विकसी स:स्य की एकल पीठ द्वारा विकया Xाए। (ख) प्राति करण, राज्य सरकार क े परामश" से, अति विनयम क े ह स्वीकाय" मुआवXे क े मामलों का विनण"य करने क े उद्देश्य से उत्तर प्र:ेश रेरा क े पैनल में न्यायविनण"यन अति कारिरयों की विनयुविv करेगा। (ग) व्यभिर्थी व्यविvयों को प्राति करण क े समक्ष एम -फॉम" में ऑनलाइन भिशकाय:X" करानी होगी। मुआवXे क े:ावों को भी फॉम" एम में शाविमल विकया Xाएगा। प्राति करण अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े उल्लंघन क े सभी प्रश्नों का विनण"य करेगा, यह मुआवXे क े न्यातियक विनण"य से संबंति प्रश्न को उत्तर प्र:ेश रेरा क े पैनल क े न्यायविनण"यन अति कारिरयों में से एक क े पास भेXेगा, Xो विफर मामले को ेXी से और प्रार्थीविमक ा क े आ ार पर 60 वि:नों क े भी र अभिभविन ा"रिर करेगा। (घ) यू. पी. रेरा क े पैनल क े न्यायविनण"यन अति कारी अध्यक्ष क े विनण"य क े अनुसार लखनऊ या गौ म बुtनगर में न्यायालय आहू करेंगे। एनसीआर क े सिXलों से संबंति भिशकाय ों पर गौ म बुtनगर में सुनवाई की Xाएगी, Xबविक राज्य क े शेर्ष सिXलों की भिशकाय ों पर लखनऊ में सुनवाई की Xाएगी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

65. विकसी व्यभिर्थी व्यविv द्वारा अति विनयम या उसक े ह बनाए गए विनयमों या विवविनयमों क े विकसी भी उल्लंघन क े लिलए विनयामक प्राति करण क े समक्ष भिशकाय को विनयम 33 (1) क े ह विन ा"रिर प्रविQया क े अनुसार फॉम" (एम) में प्रस् ु करना होगा, सिXसका विनयामक प्राति करण को अनुसरण करना होगा। इसक े सार्थी ही, कोई भी व्यविv Xो ारा 12,14,18 और 19 क े ह मुआवXे का:ावा करना चाह ा है, उसे अति विनयम की ारा 71 (3) क े ह उपबंति प्रविQया क े अनुसार ारा 72 में वि:ये गये कारकों को ध्यान में एवं विनयमावली 2016 क े विनयम 34(1) में विवविह रीति से मुआवXे का विन ा"रण करने क े लिलए फॉम" (एन) में अपनी भिशकाय प्रस् ु करना होगा।

66. उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट (विवविनयमन एवं विवकास) विनयमावली, 2016 क े विनयम 33 (1) और 34 (1), Xो विवविनयामक प्राति करण/न्यायविनण"यन अति कारी की अति विनण"यन शविvयों से संबंति हैं,इस प्रकार हैं:- “33 (1) कोई भी व्यभिर्थी व्यविv अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों और विवविनयमों क े ह विकसी भी उल्लंघन क े लिलए विनयामक प्राति करण क े पास भिशकाय:X" करा सक ा है, सिसवाय उनक े, सिXनक े बारे में न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा फॉम" 'एम' में विनण"य लिलया Xाएगा,सिXसक े सार्थी शुoक क े रूप में विनयामक प्राति करण क े पक्ष में राष्ट्रीयक ृ बैंक का एक हXार रुपये का तिडमांड ड्राफ्ट लगा होगा और उस स्र्थीान क े बैंक की मुख्य शाखा में:ेय होगा Xहां उv विनयामक प्राति करण की पीठ ल्पिस्र्थी है। व्याख्या-इस उप विनयम क े उद्देश्य क े लिलए “व्यविv” में आवंविटयों का संघ या त्समय प्रवृत्त विवति क े ह पंXीक ृ स्वैल्पिच्छक उपभोvा संघ शाविमल होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 34 (1) कोई भी व्यभिर्थी व्यविv ारा 12,14,18 और 19 क े ह मुआवXे क े लिलए न्यातियक अति कारी क े पास फॉम" एन में भिशकाय:X" करा सक ा है, सिXसक े सार्थी शुoक क े रूप में विनयामक प्राति करण क े पक्ष में राष्ट्रीयक ृ बैंक का एक हXार रुपये का तिडमांड ड्राफ्ट लगा होगा और उस स्र्थीान क े बैंक की मुख्य शाखा में:ेय होगा Xहां उv विनयामक प्राति करण का शेर्ष विहस्सा अवल्पिस्र्थी है। (प्रभाव वर्ति )

67. विनयमावली, 2016 क े विनयम 33 (2) में उस प्रविQया का वण"न विकया गया है सिXसका पालन प्राति करण को अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े प्राव ानों क े उल्लंघन या आरोपों की Xांच करने में करना है। सार्थी ही, विनयम 34 (2) मुआवXे और ब्याX की मात्रा,सिXसका पीविड़ व्यविv अति विनयम क े प्राव ानों क े ह हक:ार है, का विन ा"रण कर े समय न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा अपनाई Xाने वाली प्रविQया का वण"न कर ा है।

68. अपीलार्थी2 क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वvा श्री कविपल सिसब्बल का कर्थीन है विक 'प्राति करण' और 'न्यायविनण"यन अति कारी':ोनों पूरी रह से अलग क्षेत्रों में काय" कर े हैं। प्राति करण और न्यायविनण"यन अति कारी अति विनयम की ारा 2 (झ) और 2 (क) क े ह परिरभाविर्ष विकए गए हैं और इसलिलए, विव ान और उनकी शविvयों और संबंति क्षेत्राति कारों का स्पष्ट रूप से विव ान में ही वण"न विकया गया है।

69. अति विनयम, 2016 की ारा 12,14,18 और 19 क े ह भिशकाय ों का विनस् ारण करने का अति कार क्षेत्र विवशेर्ष रूप से ारा 71 क े ह न्यायविनण"यन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति कारी को वि:या गया है। ऐसी भिशकाय ों क े विनस् ारण में, न्यायविनण"यन अति कारी को ही ारा 71 (3) क े ह ारा 72 में वर्भिण व्यापक मान:ंडों को ध्यान में रख े हुए Xांच करने और रिरफ ं ड क े सार्थी-सार्थी मुआवXे और ब्याX क े भुग ान का विन:eश:ेने क े लिलए शविvयां प्राप्त हैं। ऐसी भिशकाय ों को 60 वि:नों क े भी र कानूनी रूप से विनपटाया Xाना चाविहए, सिXसमें विवफल रहने पर कारणों को:X" विकया Xाना चाविहए।

70. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा क े अनुसार, ारा 71 (1) क े परन् ुक क े अनुसार, ारा 12,14,18 और 19 क े ह भिशकाय ों, Xो पहले उपभोvा संरक्षण अति विनयम, 1986 क े ह स्र्थीाविप प्राति करण क े समक्ष लंविब र्थीीं, का विनण"य करने का अति कार क्षेत्र न्यायविनण"यन अति कारी क े पास है। उनक े अनुसार, विव ायी आशय स्पष्ट और साफ है विक रिरफ ं ड और ब्याX क े लिलए वा: हे ुक सविह ारा 12,14,18 और 19 से उत्पन्न अति कारों क े समूह से उद्भू भिशकाय ों को उपभोvा संरक्षण अति विनयम क े ह स्र्थीाविप मंचों से वापस ले लिलया Xाए और ब:ले में इस अति विनयम क े ह न्यायविनण"यन अति कारी क े समक्ष:ायर विकया Xाए Xो इस का अति विनण"य करेगा और ऐसा विव ायी आशय होने क े ना े, ारा 12,14,18 और 19 क े ह उत्पन्न मामलों की Xांच की Xाएगी और विवति क अति:ेश क े ह अनन्य रूप से न्याय विनण"यन अति कारी द्वारा अभिभविन ा"रिर की Xाएगी।

71. इसक े विवपरी, प्रति वा:ी क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वvा सुश्री मा वी:ीवान ने उच्च न्यायाल क े आक्षेविप विनण"य में अभिभलिललिख विनष्कर्ष_ का समर्थी"न कर े हुए कहा विक अति विनयम में विवभिशष्ट उपचार अर्थीा" ् एक ओर 'राभिश/विनवेश का रिरफ ं ड और:ूसरी ओर 'मुआवXा' का अलग से अव ारण करने का प्राव ान है। उनक े अनुसार, मांगे Xाने पर रिरफ ं ड का अति कार एक वै ाविनक अति कार है, Xो मूल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रूप से, प्रासंविगक और वैचारिरक रूप से मुआवXा प्राप्त करने क े अति कार से अलग है। Xबविक रिरफ ं ड का अति कार विव ातियका द्वारा इस थ्य को मान्य ा:ेने से उत्पन्न हो ा है विक घर खरी:ार “अपनी Xेब से” विवत्तीय लेन:ार हैं, मुआवXे का अति कार क्षति या नुकसान की भरपाई करने का प्रयास कर ा है।

72. इस प्रकार, रिरफ ं ड और मुआवXा अति विनयम क े ह:ो अलग-अलग अति कार हैं और इन्हें आपस में नहीं विमलाया Xा सक ा है। सिXस रीक े से:ोनों का विन ा"रण विकया Xाना है, उसक े लिलए एक अलग प्रविQया की आवश्यक ा होगी और इसमें अलग-अलग विवचारण शाविमल होंगे। उनक े अनुसार, मुआवXे क े विन ा"रण में एक पूण" न्यातियक प्रविQया शाविमल है Xो रिरफ ं ड विन ा"रिर करने की ुलना में अति क Xविटल है। ऐसा करने क े लिलए, यह कहना गल होगा विक विव ातियका का इरा:ा आवंविटयों और मकान खरी:ारों को मुv करना र्थीा। अति कारों को विमलाने और/या आवंविटयों न्यायविनण"यन अति कारी क े पास भेXने परिरणाम मांग पर रिरफ ं ड क े अति कार की समयबt ा से समझौ े क े समान होगा। इससे आवंविटयों को मुआवXा मांगने से रोका Xा सक े गा क्योंविक इस प्रविQया में उपायों को Xोड़ वि:या Xाएगा और रिरफ ं ड की उपलब् ा में अपेक्षाक ृ:ेरी होगी क्योंविक मुआवXे क े लिलए अति क विवस् ृ न्यातियक प्रविQया की आवश्यक ा होगी (भले ही इसे 60 वि:नों में पूरा विकया Xाना आवश्यक हो)। मांग पर रिरफ ं ड क े:ावे का विन ा"रण करने क े लिलए प्राति कारी Xबविक मुआवXे क े:ावे का विन ा"रण करने क े लिलए न्यायविनण"यन अति कारी।

73. "मांग पर" प: Xो "राभिश की वापसी" "क े अति कार का अनुसरण कर ी है, उस प्रार्थीविमक ा, ात्कालिलक ा और समीचीन ा का संक े है Xो वापसी क े अति कार को प्र:ान गई है। इस प्रकार, उनक े अनुसार, 'मुआवXा' और 'राभिश की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वापसी' अभिभव्यविv प्रति:ान का एक काय" है, और प्रति:ान का:ातियत्व अनुतिच समृतिt या अन्यायपूण" लाभ प्राप्त करने वाले व्यविv या प्राति करण पर है।

74. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक ऊपर वर्भिण सं:भ" में रिरफ ं ड क े अति कार की भावना को पूण" रूप से प्रभावी बनाने क े लिलए, इसमें कोई सं:ेह नहीं हो सक ा है विक रिरफ ं ड क े अति कार का विन ा"रण प्राति कारी पर छोड़ वि:या Xाना चाविहए, Xबविक अति विनयम की ारा 71 क े अनुसार मुआवXे का विन ा"रण न्यायविनण"यन अति कारी क े पास होना चाविहए। विवद्वान अति वvा क े अनुसार, प्राति करण प्रोत्साहक और आवंटी क े बीच हुए मानक समझौ े से पूण" ः परिरतिच हो ा है इसलिलए रिरफ ं ड:ावों का विनस् ारण प्राति करण द्वारा आसानी से और प्रभावी ढंग से विकया Xा सक ा है और रिरफ ं ड पर ब्याX उपयुv सरकार द्वारा विन ा"रिर:र पर उपलब् होना चाविहए। मामलों क े व "मान समूह में, विन ा"रिर ब्याX:र (एमसीएलआर + 1%) है, सिXसे उत्तर प्र:ेश सरकार द्वारा अति सूतिच विकया गया है।

75. विव ातियका ने अपने विववेक से विवविनयामक प्राति कारी/न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा प्रयोग की Xाने वाली शविv का विनरूपण करने क े लिलए अलग-अलग विवभिशष्ट उपबं विकया है। “राभिश का रिरफ ं ड” और “मुआवXा”:ो अलग-अलग घटक हैं, सिXनक े लिलए आवंविट व्यविv या पीविड़ व्यविv:ावा करने का हक:ार है, यवि: प्रोत्साहक अति विनयम क े ह प्र:ान की गई Xांच और ंत्र क े सार्थी कब्Xा सौंपने में सक्षम नहीं है। Xहाँ क अति विनयम की ारा 19 (4) और ारा 18 (1) क े ह मांगे Xाने पर राभिश क े रिरफ ं ड का संबं है, यह विवविनयामक प्राति करण क े अति कार क्षेत्र क े भी र विनविह है। ारा 71 अति विनयम की ारा 72 क े ह सं:र्भिभ व्यापक रूपरेखा को ध्यान में रख े हुए अति विनयम की ारा 71 (3) क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ह Xांच करने क े बा: ारा 12,14,18 और 19 क े ह मुआवXे का विनण"य लेने क े लिलए न्यायविनण"यन अति कारी क े अति कार क्षेत्र का सृXन कर ी है।

76. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा द्वारा वि:या गया क " विक ारा 71 (1) क े ह परं ुक न्यायविनण"यन अति कारी को उपभोvा विववा: विनवारण मंच/आयोग क े समक्ष लंविब ारा 12,14,18 और 19 क े ह की गई भिशकाय ों की Xांच करने क े लिलए सशv बना ा है,एक अलग सं:भ" में है और यह उन उपभोvाओं क े लिलए एक बार की व्यवस्र्थीा र्थीी सिXनक े समग्र:ावे उपभोvा फोरम/आयोग क े समक्ष लंविब हैं, क्योंविक उपभोvा संरक्षण अति विनयम क े ह, इस बा में कोई अं र नहीं है विक भिशकाय अति विनयम की ारा 71 (1) क े ह परिरभाविर्ष राभिश या मुआवXे क े लिलए है, लेविकन अति विनयम 2016 क े प्रभावी होने क े बा:, यवि: कोई व्यविv प्रोत्साहक या रिरयल एस्टेट एXेंट क े लिखलाफ मुआवXे से अलग, रिरफ ं ड क े लिलए भिशकाय करना चाह ा है, यह विवविनयामक प्राति करण क े पास और न्यायविनण"यन अति कारी को मुआवXा:ेने क े लिलए:ायर विकया Xाना चाविहए, और अति विनयम की ारा 31 क े ह Xब कोई भिशकाय की गई हो ो अति विनयम क े ह विन ा"रिर प्रविQया क े अनुसार प्राति करण/न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा न्यायविनण"यन की प्रविQया में ेXी लाने क े लिलए विनरूपण विकया गया है।

77. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा द्वारा आगे कहा गया है विक राभिश की वापसी प्रोत्साहक को प्रति क ू ल रूप से प्रभाविव कर ी है और इस रह क े प्रश्न पर न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा बेह र परिरप्रेक्ष्य में विवचार विकया Xा सक ा है। इस:लील का कोई आ ार नहीं है, क्योंविक विव ायी इरा:ा और अति:ेश स्पष्ट है विक ारा 18 (1) आवंविटयों क े लिलए मांग पर राभिश का रिरफ ं ड पाने का एक अXेय अति कार है, यवि: प्रोत्साहक विबQी क े लिलए समझौ े क े सं:भ" में कब्Xा सौंपने में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA असमर्थी" है या विनर्दि:ष्ट ति भिर्थी क परिरयोXना को पूरा करने में विवफल रहा है और प्रोत्साहक अपना बचाव करने क े लिलए Xो औतिचत्य पेश करना चाह ा है, वह है विक अति विनयम की योXना क े ह राभिश की विनकासी क्यों नहीं की Xा सक ी है, वह महत्वहीन और विवविनयामक प्राति कारी विनर्दिववा: थ्यों की संवीक्षा की संतिक्षप्त प्रक ृ ति क े सार्थी, ब्याX क े सार्थी उस राभिश क े रिरफ ं ड का विन ा"रण कर सक ा है Xो आवंटी ने परिरयोXना से वापसी की मांग कर े समय Xमा की है, ब्याX भी अति विनयम क े ह विन ा"रिर विकया गया है, Xैसा विक व "मान मामले में, उत्तर प्र:ेश राज्य ने एमसीएलआर + 1% विन ा"रिर विकया है, सिXसमें प्राति करण को कोई विववेकाति कार नहीं वि:या गया है और अति विनयम की ारा ारा 71 (3) सपविठ ारा 72 क े ह विन ा"रिर प्रविQया क े अनुसार मुआवXे का:ावा भी कर सक ा है।

78. इस न्यायालय ने अति विनयम की ारा 18 का विनव"चन कर े समय इम्पीरिरया स्ट्रक्चस" लिलविमटेड बनाम अविनल पटनी एवं अन्य[5] क े मामले में यह अभिभविन ा"रिर विकया विक ारा 18, यवि: प्रोत्साहक मकान खरी:ार क े समझौ े क े पैरा 25 में विनर्दि:ष्ट ति भिर्थी क े अनुसार अपाट"मेंट का कब्Xा:ेने में असमर्थी" है या उसे पूरा करने में विवफल रह ा है, ो आवंटी को प्रोत्साहक क े पास Xमा की गई राभिश और विन ा"रिर:र पर ब्याX का रिरफ ं ड पाने का अति कार प्र:ान कर ा है। "25. रेरा अति विनयम की ारा 18 क े अनुसार, यवि: कोई प्रोत्साहक समझौ े में विनर्दि:ष्ट ति भिर्थी क पूरा विकए गए अपाट"मेंट का कब्Xा:ेने में विवफल रह ा है या असमर्थी" हो ा है, ो प्रोत्साहक मांग पर उस अपाट"मेंट क े संबं में प्राप्त राभिश को रिरफ ं ड करने क े लिलए उत्तर:ायी होगा,यवि: आवंटी परिरयोXना से वापस हटना चाह ा है। आवंटी का ऐसा अति कार 5 2020(10) SCC 783 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “उसे उपलब् अन्य उपचार पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना”,विवशेर्ष रूप से उसे उपलब् है। आवंटी को इस प्रकार वि:या गया अति कार विनर्दिववा: है और यवि: इसका लाभ उठाया Xा ा है ो आवंटी द्वारा Xमा की गई रकम ब्याX सविह ऐसी:र पर लौटाई Xानी होगी, Xो विन ा"रिर की Xाए। ारा 18 (1) क े परं ुक में ऐसी ल्पिस्र्थीति की परिरकoपना की गई है, Xहां आवंटी परिरयोXना से पीछे हटने का इरा:ा नहीं रख ा है। उस ल्पिस्र्थीति में वह कब्Xा सौंपे Xाने क प्रत्येक महीने की:ेरी क े लिलए ब्याX का भुग ान पाने का हक:ार है और उसे भुग ान विकया Xाना चाविहए। यह आवंटी पर विनभ"र कर ा है विक वह ारा 18 (1) क े ह या ारा 18 (1) क े परं ुक क े ह कार"वाई करे। विहमांशु विगरिर का मामला:ूसरी श्रेणी में आया। इस प्रकार रेरा अति विनयम विनति{ रूप से उन आवंविटयों क े लिलए एक उपाय प्र:ान कर ा है Xो परिरयोXना से वापस लेना चाह े हैं या अपने विनवेश की वापसी का:ावा करना चाह े हैं। (प्रभाव वर्ति )

79. पक्षकारों क े विह ों की रक्षा करने क े लिलए, विवविनयामक प्राति करण/न्यायविनणा"यक अति कारी द्वारा विवविनति{ विकए Xाने पर, यह हमेशा ारा 43 (5) क े अ ीन अति करण क े समक्ष अपील विकए Xाने क े अध्य ीन हो ा है, बश e विक अति विनयम की ारा 58 क े अ ीन उच्च न्यायालय क े समक्ष अपील में पूव" -Xमा की श " का अनुपालन विकया Xाए और इस प्रकार, विव ानमंडल ने सभी प्रQमों पर युविvयुv विनब"न् न और रक्षोपाय रखे हैं।

80. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक यवि: आवंटी ने समझौ े की श _ का उल्लंघन विकया है और विफर भी रिरफ ं ड का:ावा विकया Xा ा है, Xो संभव है, ो इसका विन ा"रण न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा विकया Xाना चाविहए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रकर्थीन आकर्ष"क प्र ी हो ा है, लेविकन विव ायी इरा:े से समर्भिर्थी नहीं है, क्योंविक यवि: आवंटी ने विकस् ें भंग की है या समझौ े का कोई उल्लंघन विकया है, ो प्रोत्साहक को अति विनयम की ारा 11 (5) क े सं:भ" में आवंटन रद्द करने का अति कार है और ारा 11 की उप- ारा 5 क े परं ुक क े सं:भ" में आवंटी को प्रोत्साहक द्वारा समझौ े की समाविप्त या रद्द करने पर सवाल उठाने क े लिलए विनयामक प्राति करण से संपक " करने में सक्षम बनाया गया है और इस प्रकार, प्रोत्साहक क े विह ों की समान रूप से रक्षा की गई है।

81. अति विनयम की ारा 71 (1) क े शुरूआ ी शब्:ों से यह स्पष्ट हो ा है विक न्यायविनण"यन अति कारी का काय"क्षेत्र और काय" अति विनयम की ारा 12,14,18 और 19 क े अ ीन “मुआवXे क े विन ा"रण” का है। यवि: विव ायी आशय न्यायविनण"यन अति कारी की शविvयों को विवस् ारिर करने का हो ा ो ारा 71 (1) क े शब्: अलग हो े। इसक े विवपरी अति विनयम की ारा 71 (2) क े शुरूआ ी शब्:ों से यह स्पष्ट हो Xा ा है विक न्यायविनण"यन अति कारी क े समक्ष आवे:न क े वल मुआवXे क े विन ा"रण क े लिलए है। यहां क विक अति विनयम की ारा 71 (3) में यह:ोहराया Xा ा है विक न्यायविनण"यन अति कारी ारा 12, 14,18 और 19 क े प्राव ानों क े अनुसार, Xैसा भी मामला हो, ऐसे मुआवXे या ब्याX का भुग ान करने का विन:eश:े सक ा है। इसे अति विनयम की ारा 72 क े प्रारंभिभक शब्:ों क े सार्थी:ेखा Xाना चाविहए, सिXसमें कहा गया है विक “ ारा 71 क े ह मुआवXे या ब्याX की मात्रा,Xैसा भी मामला हो, का विन ा"रण कर े समय, न्यायविनण"यन अति कारी को अति विनयम की ारा 71 क े ह विवविह, मुआवXे का विन ा"रण कर े समय अपनाए Xाने वाले व्यापक माप:ंडों” को ध्यान में रखना होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

82. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक यवि: प्राति कारी और न्यायविनण"यन अति कारी या ो एक ही प्रश्न पर अलग-अलग विनष्कर्ष_ पर पहुंच े हैं या एक ही भिशकाय में, ो व्यभिर्थी व्यविv अति विनयम की ारा 71 क े ह भिशकाय का विनण"य करने क े लिलए न्यायविनण"यन अति कारी क े लिलए विवविह समय-सीमा क े अं:र मुआवXे और ब्याX क े भुग ान में से एक क े सार्थी कई राह की मांग कर रहा है। कम से कम इस संबं में ऐसा कोई प्राव ान नहीं है सिXसे विवविनयामक प्राति करण क े समक्ष की गयी भिशकाय क े शीघ्र विनस् ारण क े लिलए सं:र्भिभ विकया Xा सक े । यह विनवे:न इस कारण से उतिच नहीं हो सक ा है विक विवविनयामक प्राति कारी और न्यायविनण"यन अति कारी क े पास विनविह अति कार क्षेत्र का पूण" परिरसीमन है। यवि: अति विनयम की ारा 12,14, 18 और 19 क े प्राव ानों का कोई उल्लंघन प्रोत्साहक द्वारा विकया Xा ा है ो इस रह की भिशकाय सी े विवविनयामक प्राति करण क े समक्ष:ायर की Xानी चाविहए। न्यायविनण"यन अति कारी को अति विनयम की ारा 71 क े अनुसार मुआवXे का विन ा"रण करने क े लिलए सं:र्भिभ विकया Xा रहा है और:नुसार प्राति करण द्वारा उन भिशकाय ों को कारगर बनाने क े लिलए विनयम और विवविनयम बनाए गए हैं Xो या ो ारा 12,14,18 और 19 क े प्राव ानों क े उल्लंघन क े कारण या मुआवXे का विन ा"रण करने क े लिलए व्यभिर्थी व्यविv द्वारा विकए Xा े हैं और:ी गयी परिरल्पिस्र्थीति यों में, विवविनयामक प्राति करण या न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा विकसी भी असंग ा का कोई सवाल नहीं उठ ा है।

83. Xहां क एक सार्थी:ो अनु ोर्षों की मांग कर े हुए एकल भिशकाय:X" की Xा ी है, ो यह कहना पया"प्त है विक विनयम बनाए Xाने क े बा:, पीविड़ व्यविv को एक अलग प्रारूप में भिशकाय:X" करनी होगी। यवि: ारा 12,14,18 और 19 क े प्राव ानों का उल्लंघन हो ा है, ो पीविड़ व्यविv को विनयम 33 (1) और 34 (1) क े ह फॉम" (एम) या मुआवXे क े लिलए फॉम" (एन) में भिशकाय:X" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करानी होगी।:ोनों अति नण"यन प्रविQयाओं में Xांच की प्रविQया अलग-अलग है और Xैसा विक:ेखा गया है, विकसी असंग ा क े लिलए कोई Xगह नहीं है और न्यायविनण"यन की शविv अलग-अलग है, विफर भी यवि: समग्र आवे:न:ायर विकया Xा ा है, ो उतिच चरण में अलग विकया Xा सक ा है।

84. Xहां क ारा 71 की उप ारा (2) क े अ ीन यर्थीाविनर्दि:ष्ट न्यायविनण"यन अति कारी क े समक्ष आवे:न क े शीघ्र विनस् ारण का संबं है यह उप ारणा की गई है विक अति विनयम की ारा 71 (3) क े अ ीन उपबंति न्यायविनण"यन ंत्र का विनस् ारण 60 वि:नों क े भी र विकया Xाना चाविहए। विवविनयामक प्राति करण से यह अपेक्षा की Xा ी है विक वह आवे:नों का ेXी से विनस् ारण करेगा और अति विनयम की ारा 71 (3) क े ह सं:र्भिभ 60 वि:नों क े अति:ेश को बाति नहीं करेगा।

85. सिXन उपबं ों का विवस् ृ सं:भ" वि:या गया है, यवि: हम विनव"चन क े शाल्पिब्:क विनयम क े सार्थी चल े हैं विक Xब कानून क े शब्: स्पष्ट, साफ और सी े हैं, ो न्यायालय उसक े परिरणाम की परवाह विकए विबना उस अर्थी" को प्रभावी करने क े लिलए बाध्य हैं। इसमें कोई सं:ेह नहीं है और यह हमेशा सलाह:ी Xा ी है विक विव ायी ज्ञान की शाल्पिब्:क अर्थी_ में व्याख्या की Xाए Xैसा विक विव ातियका द्वारा आशतिय है और न्यायालयों से यह अपेक्षा नहीं की Xा ी है विक वे Xांच करें और विव ायी ज्ञान को प्रति स्र्थीाविप कर े हुए समा ान खोXें, इससे हमेशा बचा Xा Xाना चाविहए।

86. अति विनयम की योXना से, सिXसका एक विवस् ृ सं:भ" वि:या गया है और विवविनयामक प्राति कारी और न्यायविनण"यन अति कारी क े लिलए वर्भिण न्यायविनण"यन की शविv को ध्यान में रख े हुए, अंति म रूप से यह विनष्कर्ष" विनकल ा है विक यद्यविप अति विनयम 'रिरफ ं ड', 'ब्याX', 'शाल्पिस् ' और 'मुआवXा' Xैसी विवभिभन्न प:ों को इंविग कर ा है, ारा 18 और 19 क े संयुv पठन से स्पष्ट रूप से यह प्रकट हो ा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है विक Xब यह राभिश क े रिरफ ं ड, रिरफ ं ड की रकम पर ब्याX, या कब्Xे क े विवलंविब परिर:ान क े लिलए ब्याX क े भुग ान या शाल्पिस् और उस पर ब्याX का विन:eश कर ा है, ो यह विवविनयामक प्राति कारी ही हो ा है सिXसक े पास भिशकाय क े परिरणाम की Xांच करने और अव ारण करने की शविv हो ी है। सार्थी ही, Xब ारा 12,14,18 और 19 क े ह मुआवXे और उस पर ब्याX क े विन ा"रण क े रूप में अनु ोर्ष की याचना का प्रश्न आ ा है, ो न्यायविनण"यन अति कारी को अनन्य रूप से अति विनयम की ारा 71 सपविठ ारा 72 क े सं:भ" में यह विन ा"रिर करने की शविv हो ी है। हमारे विवचार में, Xैसा विक प्रार्थी"ना की गई है, यवि: ारा 12,14,18 और 19 क े ह अति विनण"यन को मुआवXे क े अलावा, न्यायविनण"यन अति कारी को वि:या Xा ा है ो यह ारा 71 क े ह न्यायविनण"यन अति कारी की शविvयों और काय_ क े:ायरे का विवस् ार करने Xैसा हो सक ा है और यह अति विनयम 2016 क े अति:ेश क े लिखलाफ होगा। प्रश्न संख्या 3: क्या अति विनयम की ारा 81, अति विनयम की ारा 31 क े ह संल्पिस्र्थी भिशकाय ों को सुनने क े लिलए प्राति करण को अपनी शविvयां विकसी एकल स:स्य को प्रत्यायोसिX करने क े लिलए प्राति क ृ कर ी है?

87. उत्तर प्र:ेश राज्य क े प्रति वा:ी प्राति करण का विवभिशष्ट नXरिरया है विक क े वल अति विनयम की ारा 31 क े ह भिशकाय ों की सुनवाई क े लिलए ही प्राति करण क े एकल स:स्य को शविvयाँ प्रत्यायोसिX करने की शविv ारा 81 क े ह सौंपी गई है। इस संकट को:ूर करने क े लिलए, प्राति करण ने 14 अगस्, 2018 को आयोसिX अपनी पहली बैठक में भिशकाय ों की सुनवाई:ो -:ो स:स्यों वाली पीठों को सौंपने का फ ै सला विकया र्थीा, लेविकन बा: में घर खरी:ारों द्वारा की गई भिशकाय ों की मात्रा को:ेख े हुए, Xो लगभग 36,826 भिशकाय ें र्थीीं, प्राति करण ने 5 वि:संबर, 2018 को आयोसिX अपनी बा: की बैठक में अति विनयम की ारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 31 क े ह:ालिखल की गई राभिश क े रिरफ ं ड से संबंति भिशकाय ों की सुनवाई का अति कार एकल स:स्य को:े वि:या।

88. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा श्री गोपाल शंकरनारायणन का कर्थीन हैं विक यवि: यह न्यायालय इस विनष्कर्ष" पर पहुंच ा है विक मुआवXे क े अलावा, Xहां कहीं भी राभिश और ब्याX आवि: क े रिरफ ं ड सविह अन्य सभी त्व /घटक का प्रश्न अभिभविन ा"रण क े लिलए प्राति करण क े पास आये, उस ल्पिस्र्थीति में शविv ारा 21 क े ह गविठ प्राति करण क े पास विनविह हो ी है और अति विनयम की ारा 81 क े ह शविv क े उपयोग में प्राति करण क े एकल स:स्य को शविv प्रत्यायोसिX करने का विवकoप नहीं हो ा है और ऐसा प्रत्यायोXन प्राति करण क े पास विनविह शविv का पूरी रह से:ुरुपयोग है और ब्याX क े सार्थी राभिश की वापसी का विन:eश करने में प्राति करण क े एकल स:स्य द्वारा पारिर आ:ेश पूरी रह से विबना विकसी अति कारिर ा क े हो ा है और यह अति विनयम की योXना का उल्लंघन है।

89. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक प्राति करण क े एकल स:स्य द्वारा पारिर आ:ेश विबना अति कारिर ा वाला हो ा है और यह कोरम गैर-कानूनी से ग्रस् हो ा है। अति विनयम की ारा 21 में स्पष्ट रूप से प्राव ान विकया गया है विक प्राति करण में एक अध्यक्ष और सरकार द्वारा विनयुv विकए Xाने वाले कम से कम:ो पूण"कालिलक स:स्य होंगे। प्राति करण द्वारा बनाए गए विवविनयम,2019 का विवविनयम 24 (क) मूल कानून क े स्पष्ट उल्लंघन में है विक शविv का प्रत्यायोXन वग", मामलों की श्रेणी का हो सक ा है, Xो प्राति करण क े स:स्य क े लिलए विवभिशष्ट हो सक ा है, लेविकन ारा 81 क े ह शविv का उपयोग कर प्राति करण क े एकल स:स्य को शविv का सामान्य प्रत्यायोXन अति विनयम क े ह अनुध्या नहीं है और ारा 12,14,18 और 19 क े ह विववा:ों का विनण"य करने में प्राति करण क े एकल स:स्य को प्रत्यायोXन अति कारिर रविह है और यही कारण है सिXसक े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपीलार्थी2 ने संविव ान क े अनुच्छे: 226 क े ह उच्च न्यायालय का:रवाXा खटखटाया है और आगे इस न्यायालय की शरण ली है।

90. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक अति विनयम क े सामान्य पठन से, प्राति करण की भूविमका एक अt" न्यातियक विनकाय की है Xो इसक े आ ार का विनमा"ण कर ा है। प्राति करण की न्यायविनण"यन भूविमका ारा 5,6,[7] (2), 9 (3) और 31 क े ह विवशेर्ष रूप से मान्य ा प्राप्त है Xहां प्राति करण को प्राक ृ ति क न्याय क े सिसtां ों क े अनुपालन क े बा::ूसरे पक्ष की बा सुननी हो ी है, कानून क े अनुसार आ:ेश पारिर करना हो ा है।

91. ारा 31 व्यभिर्थी व्यविv को अति विनयम क े उपबं ों या इसक े अ ीन बनाए गए विनयमों और विवविनयमों क े विकसी भी उल्लंघन क े लिलए प्राति करण या न्यायविनण"यन अति कारी क े समक्ष भिशकाय:X" करने की अनुमति:े ी है और यह प्राति करण द्वारा प्रयोग की Xाने वाली एक अ " न्यातियक शविv है सिXसका प्रत्यायोXन अति विनयम की ारा 81 की आड़ में प्राति करण क े विकसी एक स:स्य को नहीं विकया Xा सक ा है, इसक े अलावा, क ु छ ऐसे प्राव ान हैं Xहां क े वल प्राति करण को कार"वाई शुरू करने या Xांच करने की शविv है Xैसे ारा 35 (1), 35 (2), 36 या 38, शविvयों का उपयोग प्राति करण द्वारा अनन्य रूप से विकया Xा ा है और यह विन ा"रिर करने क े लिलए विक क्या कोई कार"वाई अ " न्यातियक है या नहीं, मानक बम्बई प्रां बनाम क ु शल:ास एस आडवाणी एवं अन्य[6] क े मामले में वि:या गया है सिXसका स अनुसरण संविव ान पीठ द्वारा भिशवXी नार्थीूभाई बनाम भार 6 1950 SCR 621 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संघ[7]; हरिरनगर चीनी विमल लिलविमटेड बनाम श्याम सुं:र झुनझुनवाला एवं अन्य[8] क े मामलों में वि:ए विनण"यों में विकया गया है।

92. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक उनक े अनुसार, वे शविvयां Xो अति विनयम की ारा 12,14,18 और 19 क े ह प्राति करण द्वारा प्रयोग की गयी हों, न्यातियक काय" की व्यवस्र्थीा है सिXसे प्रकट रूप से प्र:ान विकए विबना विकसी भी रह से प्रत्यायोसिX नहीं विकया Xा सक ा है। क्वींस बेंच क े:ो विनण"यों बरनाड" बनाम नेशनल डॉक लेबर बोड"9 और वाइन बनाम नेशनल डॉक लेबर बोड"10 का अवलंब और उसकी सहाय ा ले े हुए विवद्वान अति वvा ने क " वि:या है विक ऊपर उप:र्भिश विनण"य यह स्पष्ट कर े हैं विक न्यातियक शविv का प्रत्यायोXन प्रकट रूप से होना चाविहए; विक विकसी अt" न्यातियक विनकाय क े लिलए कोरम का उपबं उस विनकाय क े अन्य स:स्यों को शविv प्रत्यायोXन द्वारा अपवर्जिX कर े हुए हो ा है;और काय"भार क े कारण विवति क आवश्यक ा को नXरअं:ाX नहीं कर सक े। इन सिसtां ों को इस न्यायालय द्वारा लगा ार बम्बई नगर विनगम बनाम ोंडू नारायण चौ री11, साहनी सिसoक विमoस (प्राइवेट) लिलविमटेड एवं अन्य बनाम कम"चारी राज्य बीमा विनगम12, Xगन्नार्थी मंवि:र प्रबं सविमति बनाम सिसt मठ एवं अन्य13 वाले मामलों में अपनाया गया है। 7 1960(2) SCR 775 8 1962(2) SCR 339 9 1953(2) QB 18 10 1956(1) QB 658 11 1965(2) SCR 929 12 1994(5) SCC 346 13 2015(16) SCC 542 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

93. विवद्वान अति वvा ने कहा है विक इस न्यायालय द्वारा यह लगा ार अभिभविन ा"रिर विकया गया है विक प्रक ृ ति में अt" न्यातियक होने क े कारण, उप ारणा यह है विक इसका प्रयोग सक्षम प्राति कारी द्वारा विकया Xाना चाविहए और विकसी अन्य द्वारा नहीं, Xब क विक विवति अभिभव्यv रूप से या स्पष्ट विनविह ार्थी" द्वारा इसकी अनुमति न:े।

94. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक आवश्यक विनविह ार्थी" क े बावXू:, प्राति करण की न्यातियक शविv बहु-स:स्यीय प्राति कण द्वारा इसक े विकसी स:स्य को नहीं सौंपी Xा सक ी है। यवि: काम क े बोझ क े बारे में व्यावहारिरक विवचार हैं, ो सरकार ारा 20 (1) क े:ूसरे परं ुक क े सं:भ" में हमेशा एक से अति क प्राति करण स्र्थीाविप कर सक ी है।

95. इसक े विवपरी, प्रति वा:ी क े लिलए विवद्वान वरिरष्ठ अति वvा श्री:ेव:त्त काम, का कहना है विक अपीलार्थी2 की भिशकाय मुख्य रूप से इस मुद्दे पर रही है विक एकल स:स्य अति विनयम की ारा 31 क े ह भिशकाय ों को सुनने क े लिलए शविv का उपयोग करने क े लिलए सक्षम नहीं है और ारा 81 क े प्रयोग में प्राति करण द्वारा अपनी शविv का प्रत्यायोXन अति कारिर ा से परे है।

96. विवद्वान अति वvा ने कहा है विक वास् व में प्राति करण का पूरा कामकाX एकल स:स्य को नहीं सौंपा गया है। क े वल ारा 31 क े ह भिशकाय ों की सुनवाई ही प्राति करण क े एकल स:स्य को कानून क े ह यर्थीा अति:ेभिश, ऐसी भिशकाय ों क े त्वरिर विनपटान क े समग्र उद्देश्य को ध्यान में रख े हुए, सौंपी गयी है। उनक े अनुसार, यह कहना थ्यात्मक रूप से गल है विक प्राति करण क े अन्य काय_ Xैसे ारा 38 क े ह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Xुमा"ना लगाना, ारा 7 क े ह पंXीकरण को रद्द करना या ारा 32 या 33 क े ह प्राति करण क े काय_ को प्राति करण क े एकल स:स्य को सौंप वि:या गया है।

97. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक प्रश्न यह नहीं है विक क्या विकसी एक स:स्य को प्रत्यायोXन बुरा है, बल्पिoक प्रश्न यह है विक क्या ारा 12,14,18 और 19 क े सं:भ" में भिशकाय ों को सुनने की एकल स:स्य को प्रत्यायोसिX की गई शविv कानून क े ह अनुज्ञेय है। इस पर ध्यान:ेना चाविहए विक अति विनयम क े ह प्राति करण में कई अन्य शविvयां और काय" विनविह हैं, सिXन्हें प्राति करण ने Xानबूझकर एकल स:स्य को नहीं सौंपा है।

98. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक 5 वि:संबर, 2018 वि:नांविक विवशेर्ष आ:ेश सपविठ विवविनयमन, 24 द्वारा ारा 81 क े ह शविv क े प्रत्यायोXन क े अनुसरण में अति विनयम की ारा 31 क े ह न वापसी से संबंति मामलों की सुनवाई क े लिलए प्राति करण द्वारा एक एकल स:स्य को अति क ृ विकया गया है।

99. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक लगभग एक समान योXना में, सेबी अति विनयम की ारा 29-क प्रत्यायोXन करने की शविv:े ी है और सेबी अति विनयम की ारा 19 बोड" को अपनी शविv बोड" क े विकसी भी स:स्य को प्रत्यायोसिX करने की शविv प्र:ान कर ी है। सिXसका इस न्यायालय द्वारा सौराष्ट्र कच्छ स्टॉक एक्सचेंX लिलविमटेड बनाम भार ीय प्रति भूति और विवविनमय बोड" एवं अन्य14 क े मामले में परीक्षण विकया गया है। न्यायालय ने संबंति प्राति करण द्वारा अपने एकल स:स्य को शविv प्रत्यायोXन विकया Xाना अनुमोवि: विकया और ारिर विकया विक इस रह क े प्रत्यायोXन को हमेशा कानून में अनुमति है Xब क विक विवविनर्दि:ष्ट रूप से प्रति बंति न विकया Xाए और Xब क न्यातियक शविv क े प्रत्यायोXन क े लिलए विव ायी मंXूरी है, ब क वैसी कोई अवै ा नहीं है, Xैसा 14 2012(13) SCC 501 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विक बॉम्बे नगर विनगम विनगम (उपरोv); उत्तर प्र:ेश राज्य बनाम बटुक:ेव पति वित्रपाठी एवं अन्य15 हेंX इंतिडया प्राइवेट लिलविमटेड एवं अन्य बनाम उत्तर प्र:ेश राज्य क े मामलों में ारिर विकया गया है। और उसकी सहाय ा ले े हुए विवद्वान अति वvा ने कहा है विक अति विनयम की ारा 18 क े ह राभिश और ब्याX क े रिरफ ं ड क े लिलए आवे:न पर विनण"य लेने में प्राति करण क े एकल स:स्य को शविv का ऐसा प्रत्यायोXन प्राति कण की अति कारिर ा क े भी र है, इसलिलए भी विक अ:ाल क े समक्ष लंविब अपीलों क े मामलों में ारा 81 क े ह प्रत्यायोXन करने की शविv पर कोई प्रश्न नहीं उठाया गया है।

100. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक अति विनयम की ारा 21 प्राति करण क े गठन से संबंति है और न्यून म पीठ संख्या से संबंति नहीं है। वि:ए गए समय में विव ातियका ने प्राति करण द्वारा भिशकाय ों की सुनवाई क े लिलए न्यून म पीठ/कोरम संख्या विन ा"रिर करने से Xानबूझकर परहेX विकया है। सार्थी ही, अति विनयम की ारा 43 (3) क े ह क े वल अपीलीय न्यायाति करण की एक पीठ/कोरम विन ा"रिर कर ा है और आगे कहा है विक कानून द्वारा न्यून म पीठ/कोरम संख्या विन ा"रिर विकए Xाने क े अभाव में, प्राति करण की संरचना को ही न्यून म पीठ संख्या क े रूप में मानना अस्वीकाय" है।

101. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक ारा 29 और 81 एक:ूसरे क े लिलए विवरो में नहीं हैं और भिभन्न-भिभन्न क्षेत्रों में काय" कर े हैं। ारा 29 प्राति करण की बैठकों से संबंति है और अपने:ायरे में उन अ " न्यातियक काय_ की परिरकoपना नहीं कर ा है सिXन्हें अति विनयम प्राति कार पर डाल ा है। ारा 29 क े ह "बैठक ें " शब्: उन अ "-न्यातियक काय_ से संबंति नहीं है सिXन्हें ारा 31 क े 15 1978(2) SCC 102 16 2012(5) SCC 443 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ह प्राति कारी को सं:र्भिभ विकया Xा ा है। यह क े वल नीति ग, विवविनयामक विवर्षयों पर बैठक को सं:र्भिभ कर सक ी है और ारा 32 और 33 क े ह ध्यान आक ृ ष्ट कर सक ी है Xो नीति, विवविनयामक प्रक ृ ति की है। ारा 29 (3) और (4), Xो प्राति करण क े समक्ष 'प्रश्नों' क े बारे में बा कर ी है, को 'आवे:न' प्राप्त होने क े 60 वि:नों क े भी र विनपटाया Xाना चाविहए और अति विनयम की ारा 31 में उसिल्ललिख विकसी भी 'भिशकाय ' का कोई सं:भ" नहीं है।

102. अति विनयम की योXना की Xांच करने क े लिलए कति पय उपबं ों पर ध्यान:ेना सुसंग हो सक ा है। "21. प्राति करण में एक अध्यक्ष और समुतिच सरकार द्वारा विनयुv विकए Xाने वाले कम से कम:ो पूण"कालिलक स:स्य होंगे।

29. (1) प्राति करण ऐसे स्र्थीानों और समयों पर बैठक करेगा और अपनी बैठकों में काय" क े संचालन क े संबं में प्रविQया क े ऐसे विनयमों का पालन करेगा (ऐसी बैठकों में कोरम सविह ), Xो प्राति करण द्वारा बनाए गए विवविनयमों द्वारा विवविनर्दि:ष्ट विकए Xाएं। (2) यवि: अध्यक्ष विकसी कारण से प्राति करण की बैठक में भाग लेने में असमर्थी" है ो बैठक में उपल्पिस्र्थी स:स्यों द्वारा चुना गया कोई अन्य स:स्य बैठक की अध्यक्ष ा करेगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 64 (3) प्राति करण की विकसी भी बैठक क े समक्ष आने वाले सभी प्रश्नों का विनण"य उपल्पिस्र्थी और म:ान करने वाले स:स्यों द्वारा बहुम से विकया Xाएगा और म ों की समान ा की ल्पिस्र्थीति में अध्यक्ष या उ सकी अनुपल्पिस्र्थीति में पीठासीन व्यविv का:ूसरा या विनणा"यक म होगा। (4) प्राति करण क े समक्ष आने वाले प्रश्नों पर यर्थीासंभव शीघ्र ा से कार"वाई की Xाएगी और प्राति करण आवे:न प्राप्त होने की ारीख से साठ वि:न की अवति क े भी र उनका विनस् ारण करेगाः बश e विक इस रह क े विकसी भी आवे:न को 60 वि:नों की उv अवति क े भी र विनस् ारिर न विकया Xा सका हो, ो प्राति करण उस अवति क े भी र आवे:न का विनस् ार न कर पाने क े लिलए अपने कारणों को लिललिख में:X" करेगा।

31. (1) कोई भी व्यभिर्थी व्यविv विकसी भी प्रस् ावक, आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट क े लिखलाफ, Xैसा भी मामला हो, इस अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों और विवविनयमों क े प्राव ानों क े विकसी भी उल्लंघन या विवरो क े लिलए प्राति करण या न्याय विनण"यन अति कारी क े पास भिशकाय:X" करा सक ा है। स्पष्टीकरण- इस उप ारा क े प्रयोXन क े लिलए '' व्यविv '' क े अं ग" आवंविटयों का संघ या त्समय प्रवृत्त विकसी विवति क े अ ीन पंXीक ृ स्वैल्पिच्छक उपभोvा संघ सल्पिम्मलिल होगा। उप ारा (1) क े अ ीन भिशकाय:ालिखल करने क े लिलए प्रारूप, रीति और फीस ऐसी होगी Xो विवविनर्दि:ष्ट की Xाए।

81. प्राति करण लिललिख रूप में सामान्य या विवशेर्ष आ:ेश द्वारा प्राति करण क े विकसी स:स्य, अति कारी या विकसी अन्य व्यविv को ऐसी श _, यवि: कोई हों, क े अ ीन रह े हुए, Xो आ:ेश में विवविनर्दि:ष्ट की Xाएं, इस अति विनयम क े अ ीन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपनी शविvयां और क ृ त्य ( ारा 85 क े अ ीन विवविनयम बनाने की शविv क े सिसवाय) प्रत्यायोसिX कर सक े गा, Xो वह आवश्यक समझे।

103. अति विनयम की ारा 21 प्राति करण क े गठन से संबंति है सिXसमें एक अध्यक्ष और समुतिच सरकार द्वारा विनयुv विकए Xाने वाले कम से कम:ो पूण"कालिलक स:स्य शाविमल हैं, लेविकन इसमें स्पष्ट रूप से न्यून म का उल्लेख नहीं है। अति विनयम की ारा 43 (3) क े ह रिरयल एस्टेट अपीलीय न्यायाति करण का गठन कर े समय एक ही समय में पीठ की संख्या क े सार्थी- सार्थी न्यून म बेंच/कोरम भी विन ा"रिर विकया Xा ा है।

104. अपीलार्थी2 का Xोर अति विनयम की ारा 29 पर र्थीा Xो प्राति करण की बैठकों क े कोरम को इंविग कर ा है। विवभिशष्ट परं ुक विक न्यून म कोरम क े सार्थी प्राति करण की बैठक होगी, प्राति करण की बैठक का ऐसा काय" वास् व में अति विनयम की ारा 81 क े ह शविv का उपयोग कर े हुए प्राति करण क े विकसी एक स:स्य को नहीं सौंपा Xा सक ा है।

105. ारा 29 क े ह बैठक शब्: प्राति करण का अ " न्यातियक रूप से काय" से संबंति नहीं है । यह क े वल उन बैठकों, नीति /विवविनयामक मुद्दों को सं:र्भिभ कर ा है सिXन्हें ारा 31 क े ह प्राति करण को विनव"हन करने क े लिलए अति:ेभिश विकया गया है। यह:ेखा Xा सक ा है विक ारा 32 और ारा 33 नीति, विनयामक विन:eश क े रूप में हैं सिXनका अति विनयम की ारा 29 क े ह सम्पूण" विनकाय क े रूप में काय" कर े हुए विनवा"ह करने क े लिलए प्राति करण को विनर्दिववा: रूप से अति:ेभिश विकया गया है।

106. इसे और Xोड़ने क े लिलए, अति विनयम की ारा 29 (3) और (4) प्राति कारी क े समक्ष उन प्रश्नों क े बारे में ब ा ी है सिXनका विनपटान आवे:न प्राप्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA होने क े 60 वि:नों क े भी र विकया Xाना चाविहए । यह:ेखा Xा सक ा है विक अति विनयम की ारा 31 क े ह सं:र्भिभ विकसी भी भिशकाय का कोई सं:भ" नहीं है। अति विनयम की ारा 29 और 81 एक:ूसरे क े विवपरी हैं। इसक े विवपरी,:ोनों अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर े हैं। ारा 29 विह ारकों क े विह में नीति ग /विवविनयामक विनण"य लेने क े लिलए आयोसिX की Xाने वाली प्राति करण की बैठकों क े बारे में है और इसक े:ायरे में न्यातियक काय_ की परिरकoपना नहीं की गई है, सिXन्हें अति विनयम प्राति कार पर डाल ा है। ारा 29 से परिरलतिक्ष विव ायी आशय इस क " को मान्य ा:े ा है विक नीति ग मामलों पर प्राति करण की पूरी शविv द्वारा विवचार और विनण"य विकया Xाना चाविहए ाविक नीति ग विनण"य प्राति करण क े स:स्यों और अध्यक्ष क े अर्जिX अनुभव को प्रति किंबविब करें।

107. यह नोट करना प्रासंविगक होगा विक 5 वि:संबर, 2018 को आयोसिX अपनी बैठक में प्राति करण ने ारा 31 क े ह भिशकाय ों क े विनस् ारण क े लिलए अति विनयम की ारा 81 क े ह अपनी शविv का उपयोग कर े हुए प्राति करण क े एक ही स:स्य को अपनी शविv सौंप:ी। 5 वि:संबर, 2018 को इस उद्देश्य क े लिलए आयोसिX प्रासंविगक बैठक क े विववरण नीचे उtृ विकए गए हैंः

5. 01 उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट विवविनयामक प्राति करण की:ोनों पीठों ने माह वि:सम्बर 2018 में र्थीा त्प{ा ् भी आवश्यक ानुसार एकल पीठों क े रूप में काय" कर े हुए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लखनऊ एवं गौ मबुt नगर में एक ही ति भिर्थी पर भिशकाय प्रकरणों क े विनस् ारण का प्रस् ाव - - - - एXेंडे पर किंब:ुवार विनण"य इस प्रकार हैः एXेंडा विबन्:ु संख्या 1: वि:संबर 2018 में उत्तर प्र:ेश रिरयल एस्टेट विनयामक प्राति करण की:ोनों पीठों द्वारा सुनवाई क े संबं में और बा: में आवश्यक ा क े अनुसार एकल पीठों क े रूप में काम कर े हुए लखनऊ और गौ मबुt नगर में एक ही ारीख को भिशकाय मामलों क े विनस् ारण क े लिलए। विनण"य: इस प्रस् ाव को प्राति करण द्वारा अनुमोवि: कर वि:या गया र्थीा....... '' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

108. प्राति करण क े एकल स:स्य को शविv क े प्रत्यायोXन क े अनुसरण में, अति विनयम की ारा 31 क े ह राभिश और ब्याX की वापसी क े लिलए आवंविटयों/घर खरी:ारों द्वारा:ायर की गई भिशकाय ों पर अति विनयम क े प्राव ानों क े अनुसार पक्षों को सुनने क े बा: प्राति करण क े एकल स:स्य द्वारा विनण"य लिलया गया।

109. इस न्यायालय ने सेबी अति विनयम की ारा 29 ए और ारा 19 क े ह शविv क े प्रत्यायोXन क े सम ुoय प्राव ानों की Xांच कर े हुए, सिXसने बोड" को बोड" क े विकसी भी स:स्य को अपनी शविv प्रत्यायोसिX करने का अति कार वि:या र्थीा, यह अभिभविन ा"रिर विकया विक बोड" लिललिख रूप में अपनी शविv बोड" क े विकसी भी स:स्य को सौंप सक ा है और यह कानून में मान्य है Xैसा विक इस न्यायालय द्वारा सौराष्ट्र कच्छ स्टॉक एक्सचेंX लिलविमटेड (उपरोv) क े मामले में विनम्नानुसार ारिर विकया गया है:- “6. उच्च न्यायालय ने विवशेर्ष सिसविवल आवे:न को आ:ेश वि:नांविक 19-11- 2007 (सौराष्ट्र कच्छ स्टॉक एक्सचेंX लिलविमटेड बनाम सेबी, विवशेर्ष सिसविवल आवे:न संख्या 23902, वर्ष" 2007, 19-11-2007 को अति विनण[2] (गुXरा )) द्वारा खारिरX कर वि:या और विनम्नलिललिख रीक े से अपीलक ा" क े प्रकर्थीन पर विवचार विकयाः ारा 29-क को यहां पुनः प्रस् ु विकया गया हैः “29 क. प्रत्यायोXन की शविv: क े न्द्रीय सरकार, राXपत्र में प्रकाभिश आ:ेश द्वारा, यह विन:ेश:े सक ी है विक इस अति विनयम क े विकसी उपबं क े अ ीन उसक े द्वारा प्रयोvव्य शविvयां ( ारा 30 क े अ ीन शविv को छोड़कर) ऐसे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मामलों क े संबं में और ऐसी श _ क े अ ीन, यवि: कोई हों, Xो आ:ेश में विवविनर्दि:ष्ट की Xाएं, भार ीय प्रति भूति और विवविनमय बोड" या भार ीय रिरXव" बैंक अति विनयम, 1934 (1934 का 2) की ारा 3 क े अ ीन गविठ भार ीय रिरXव" बैंक द्वारा भी प्रयोvव्य होंगी। ' क ें द्र सरकार द्वारा Xारी अति सूचना वि:नांविक 13-9-1994 इस प्रकार हैः प्रति भूति संविव:ा (विवविनयमन) अति विनयम, 1956 (1956 का 42 वाँ) की ारा 29 ए द्वारा प्र:त्त शविvयों का प्रयोग कर े हुए क े न्द्र सरकार ने विन:eश वि:या है विक ारा 3, ारा 4 की ारा (1), (2), (3) और (4), ारा 5, ारा 7-क की उप- ारा (2), ारा 13, ारा 18 की उप- ारा (2), ारा 22 और ारा 28 की उप- ारा (2) क े ह उसक े द्वारा प्रयोग की Xाने वाली शविvयां भार ीय प्रति भूति और विवविनमय बोड" द्वारा भी प्रयोvव्य होंगी। सेबी अति विनयम, 1992 की ारा 19 इस प्रकार हैः ''19. प्रत्यायोXन - बोड", लिललिख रूप में सामान्य या विवशेर्ष आ:ेश द्वारा बोड" क े विकसी स:स्य, अति कारी या विकसी अन्य व्यविv को ऐसी श _, यवि: कोई हों, क े अ ीन रह े हुए, Xो आ:ेश में विवविनर्दि:ष्ट की Xाएं, इस अति विनयम क े अ ीन अपनी शविvयां और काय" ( ारा 29 क े अ ीन शविvयों को छोड़कर) Xो वह आवश्यक समझे, प्रत्यायोसिX कर सक ा है। इस प्रकार, एससीआर अति अति विनयम, 1956 की ारा 29 क सपविठ सेबी अति विनयम की ारा 19 क े ह शविv का प्रयोग कर े हुए Xारी की गई 13.9.1994 वि:नांविक उपरोv अति सूचना का अर्थी" होगा विक बोड" लिललिख रूप में बोड" क े विकसी भी स:स्य को अपनी शविv सौंप सक ा है और इसलिलए, सेबी अति विनयम, 1992 की ारा 11 क े ह बोड" क े पूण"कालिलक स:स्य द्वारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उपयोग की गई शविv, या यहां क विक एससीआर अति अति विनयम, 1956 की ारा 5 क े ह वापसी या मान्य ा को भी अन्यायपूण" या मनमाना नहीं कहा Xा सक ा है और इसलिलए, श्री शेलेट की इस:लील को स्वीकार नहीं विकया Xा सक ा है विक यातिचकाक ा" को अपील का कोई उपचार उपलब् नहीं है।”

9. सिसविवल अपील क े पैरा 2 में, विवति का विनम्नलिललिख प्रश्न विवरतिच विकया गया हैः “क्या सेबी क े पूण"कालिलक एकल स:स्य को इस सिसtां पर विकसी स्टॉक एक्सचेंX को:ी गई मान्य ा को रद्द करने या वापस लेने का कोई अति कार नहीं है विक प्रति विनति आगे अपनी शविvयों को प्रत्यायोसिX नहीं कर सक ा है, और क्या वह आ:ेश अति कारिर ा रविह है सिXसे चुनौ ी:ी गयी है?” हमारे विवचार से, उपयु"v प्रश्न पर विवचार करना आवश्यक नहीं है क्योंविक हम पा े हैं विक यही प्रश्न अपीलक ा" द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष भार क े संविव ान क े अनुच्छे: 226 क े अ ीन असा ारण क्षेत्राति कार क े अन् ग" उठाया गया र्थीा। Xैसाविक ऊपर उल्लेख विकया गया है, उच्च न्यायालय ने अपने 19 सिस म्बर, 2007 क े आ:ेश में [सौराष्ट्र कच्छ स्टॉक एक्सचेंX लिल. बनाम सेबी विवशेर्ष सिसविवल अपील सं. 23902 वर्ष" 2007, 19.11.2007 को विनण[2] (गुX)) में ारिर विकया विक भार ीय प्रति भूति और विवविनमय बोड" अति विनयम, 1992 की ारा 11 क े ह सेबी क े पूण"कालिलक स:स्य द्वारा 1956 क े अति विनयम की ारा 5 क े ह मान्य ा को वापस लेने को अति विनयम क े प्राव ानों को कमXोर करना नहीं कहा Xा सक ा है। उच्च न्यायालय क े उv आ:ेश क े लिखलाफ विवशेर्ष अपील को इस न्यायालय द्वारा 10.03.2008 को खारिरX कर वि:या गया। ( सौराष्ट्र कच्छ स्टॉक एक्सचेंX लिल. बनाम सेबी, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एसएलपी (सी) सं. 5197 वर्ष" 2008, 10.3.2008 को विनण[2] ) इसी प्रश्न को व "मान अपील में विफर से खोलने की अनुमति नहीं:ी Xा सक ी।

110. सेबी अति विनयम क े ह शविvयों क े प्रत्यायोXन का स्पष्ट प्राव ान अति विनयम 2016 की ारा 81 क े समान है। इस न्यायालय ने कहा विक यवि: कानून क े ह सक्षम प्राति कारी द्वारा शविv प्रत्यायोसिX की गई है, ो इस रह की कार"वाई, यवि: एक ही स:स्य द्वारा प्रयोग की Xा रही है, को अति विनयम क े प्राव ानों को कम करना नहीं कहा Xा सक ा है।

111. हेंX इंतिडया प्राइवेट लिलविमटेड एवं अन्य (उपरोv) में, विवपणन सविमति द्वारा पारिर आ:ेशों की Xांच करने क े लिलए राज्य क ृ विर्ष बाXार बोड" को राज्य कानून की ारा 32 क े ह पुनरीक्षण शविvयां प्र:ान की गई र्थीीं। इसकी ारा 33 ने बोड" को अपनी शविvयां विन:ेशक को प्रत्यायोसिX करने की शविv प्र:ान की र्थीी। मामले क े थ्यों में, स्वयं विन:ेशक द्वारा नहीं बल्पिoक प:ानुQम में विनचले स् र क े क ु छ अति कारी द्वारा पुनरीक्षण क े प्रयोग पर आपलित्त की गई र्थीी। इस न्यायालय ने ारा 2 (X) में यर्थीा उपबंति 'विन:ेशक' की परिरभार्षा को ध्यान में रख े हुए इस अति विनयम क े ह अपने सभी या विकसी भी काय" को करने क े लिलए विन:ेशक द्वारा अति क ृ विकसी अन्य अति कारी को शाविमल कर े हुए विनम्नलिललिख रूप में अभिभविन ा"रिर विकया हैः “34. अब यह सत्य है विक मामलों क े व "मान बैच में अं व"लिल विह सारवान हैं और सिXन लोगों से उनक े विवरुt उठाई गई मांगों को पूरा करने क े लिलए कहा गया है वे चाहेंगे विक उनक े मामलों की सुनवाई बोड" द्वारा नाविम वरिरष्ठ अति कारी या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति कारिरयों की सविमति द्वारा की Xाए। लेविकन बाXार सविमति द्वारा उठाई गई मांगों को चुनौ ी:ेने वाले विवचारार्थी" उत्पन्न होने वाले मामलों की संख्या और ऐसे मामलों में आम ौर पर विनण"य क े लिलए आने वाले विववा:ों की प्रक ृ ति क े बारे में विकसी डेटा क े अभाव में, इस न्यायालय क े लिलए व "मान में मौXू: ंत्र में ब:लाव का विन:eश:ेना संभव नहीं होगा। पुनरीक्षण का विनण"य करने की शविv बोड" में विनविह है सिXसे उस काय" को विन:ेशक को सौंपने की शविv भी प्राप्त है। Xब क विन:ेशक को बोड" में विनविह पुनरीक्षण शविv का प्रयोग करने क े लिलए सांविवति क मंXूरी है, कोई भी क " विक ऐसा प्रत्यायोXन या ो अननुज्ञेय है या विववा:ों क े न्यायविनण"यन क े लिलए उपयुv मशीनरी प्र:ान करने क े उद्देश्य को पूरा नहीं कर ा है, अस्वीकार विकया Xाएगा।

112. अति विनयम 2016 की ारा 81 प्राति करण को लिललिख रूप में सामान्य या विवशेर्ष आ:ेश द्वारा प्राति करण क े विकसी भी स:स्य को अपनी शविvयां सौंपने का अति कार:े ी है, Xो आ:ेश में विनर्दि:ष्ट श _ क े अ ीन होगा, Xैसे विक अति विनयम क े ह शविvयां और काय" अति विनयम की ारा 31 क े ह:ायर की गई भिशकाय ों सविह आवे:नों/भिशकाय ों क े त्वरिर विनस् ारण क े लिलए स्पष्ट रूप से इसक े विकसी भी स:स्य को:ी गयी हैं और क े वल ारा 85 क े ह विवविनयम बनाना ही अपवर्जिX विकया गया है, अति विनयम क े प्राव ानों क े ह स:स्यों का एक सामान्य और विवशेर्ष आ:ेश द्वारा ऐसी शविv का उपयोग करना हमेशा अनुमेय है।

113. व "मान मामले में, प्राति करण ने 5 वि:संबर, 2018 वि:नांविक विवशेर्ष आ:ेश द्वारा ारा 31 क े ह भिशकाय ों क े विनस् ारण की शविv प्रत्यायोसिX की है। Xहां क ब्याX क े सार्थी राभिश क े रिरफ ं ड का संबं है, इसे प्रविQया में सख् ी से यांवित्रक नहीं माना Xा सक ा है, लेविकन प्राति करण द्वारा की Xाने वाली Xांच mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनर्दिववा::स् ावेXी साक्ष्य पर आ ारिर एक संतिक्षप्त प्रविQया है, सिXसमें यह इंविग विकया Xा ा है विक आवंटी/ घर खरी:ार ने विक ना विनवेश विकया र्थीा और सक्षम प्राति कारी द्वारा विन ा"रिर ब्याX, इसमें एकल प्राति कारी स:स्य क े लिलए विववेकाति कार का कोई स्र्थीान नहीं, यवि: प्राति करण द्वारा अति विनयम की ारा 81 क े ह अपनी शविv का उपयोग करक े इस प्रविQया को प्रत्यायोसिX विकया गया है ो इसे अति विनयम क े प्राव ानों को कमXोर करना नहीं कहा Xा सक ा।

114. अति विनयम की ारा 29 क े:ायरे की व्याख्या क े सन्:भ" में अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा द्वारा Xो विनवे:न विकया Xा रहा है, वह क े वल नीति ग मामलों क सीविम है और इसे अति विनयम की ारा 81 क े विवरो क े रूप में नहीं पढ़ा Xा सक ा है और यवि: प्रोत्साहकों विवद्वान अति वvा क े क " को स्वीकार विकया Xाए ो, ो ारा 81 का अति:ेश ही समाप्त हो Xाएगा।

115. विवति क े विनव"चन का यह एक सुस्र्थीाविप सिसtां है विक न्यायालय को ारा शाल्पिब्:क अर्थी" में पढ़ना चाविहए और वह अपनी सुविव ा क े अनुसार इसे विफर से नहीं लिलख सक ा और न ही विनमा"ण का कोई सिसtां न्यायालय को इस ारा को इस रह से पढ़ने की अनुमति:े ा है विक इसे कु छ ह: क यह समाप्त हो Xाए। अति विनयम की ारा 81 सकारात्मक रूप से एक सामान्य या एक विवशेर्ष आ:ेश द्वारा अपनी शविvयों और काय_ को विकसी भी स:स्य को प्रत्यायोसिX करने की शविv प्राति करण को:े ी है सिसवाय अति विनयम की ारा 85 क े ह विवविनयम बनाने की शविv को छोड़कर। अन्य शविvयाँ, यवि: सामान्य या विवशेर्ष आ:ेश द्वारा प्राति करण क े विकसी एकल स:स्य को प्रत्यायोसिX की Xा ी हैं ो वह वास् व में अति विनयम की ारा 81 क े:ायरे में होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

116. प्रोत्साहकों क े विवद्वान अति वvा द्वारा आगे क " वि:या गया है विक अति विनयम की ारा 81 प्राति करण को विकसी अति कारी या विकसी अन्य व्यविv को भी प्रत्यायोXन की शविv:े ी है, यह सच है विक प्राति करण, सामान्य या विवशेर्ष आ:ेश द्वारा, प्राति करण क े विकसी भी स:स्य या अति कारी या विकसी अन्य व्यविv को अपनी शविvयों और काय_ में से विकसी भी काय" या शविv प्रत्यायोसिX कर सक ा है, लेविकन हम विकसी ीसरे पक्ष को शविv क े प्रत्यायोXन का परीक्षण नहीं कर रहे हैं। अति क विवभिशष्ट रूप से, यह न्यायालय इस सीविम प्रश्न का परीक्षण कर रहा है विक क्या अति विनयम की ारा 81 क े ह शविv अति विनयम की ारा 31 क े ह भिशकाय पर विनण"य लेने क े लिलए प्राति करण द्वारा अपने विकसी भी स:स्य को प्रत्यायोसिX की Xा सक ी है। प्रोत्साहकों क े विवद्वान अति वvा द्वारा Xो विनवे:न विकया गया है वह परिरकoपनात्मक है Xो व "मान मामले क े थ्यों क े लिलए संग नहीं है। यवि: प्रत्यायोXन ऐसे किंब:ु पर विकया Xा ा है Xो अति विनयम की योXना का उल्लंघन कर ा है या उसे पूरा नहीं कर ा सिXस उद्देश्य क े लिलए अति विनयम की ारा 81 क े ह प्रत्यायोXन करने की शविv को अति:ेभिश विकया गया है, ो ऐसे में, हमेशा न्यातियक समीक्षा का विवकoप होगा।

117. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा ने आगे क " वि:या है विक अति विनयम की ारा 81 प्राति कारी को प्राति कारी क े विकसी भी स:स्य को ऐसी शविvयां और काय" प्रत्यायोसिX करने की अनुमति:े ी है Xो मुख्य रूप से प्रशासविनक या लिलविपक प्रक ृ ति की हैं और संभव ः ऐसे विकसी भी प्रमुख काय" को शाविमल नहीं विकया गया है सिXसका विनव"हन प्राति कारी द्वारा विकया Xाना है, न्यातियक काय" अप्रत्यायोज्य हैं क्योंविक ये प्राति कारी क े मुख्य काय" हैं। यह विनवे:न इस कारण से उतिच नहीं हो सक ा है विक अति विनयम की ारा 31 क े ह भिशकाय ों पर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनण"य लेने में प्राति करण द्वारा प्रयोग की Xाने वाली शविv अ " -न्यातियक प्रक ृ ति की है Xो प्रत्यायोXन योग्य है बश e कानून में ऐसा प्राव ान हो। Xैसा विक पहले ही:ेखा Xा चुका है, अति विनयम की ारा 81 प्राति कारी को सामान्य या विवशेर्ष आ:ेश द्वारा अपने विकसी भी स:स्य को अपनी शविv और काय" प्रत्यायोसिX करने का अति कार:े ी है।

118. व "मान मामले में, अति विनयम की ारा 81 क े ह अपनी शविv का उपयोग कर े हुए, प्राति करण ने 5 वि:संबर, 2018 को एक विवशेर्ष आ:ेश द्वारा अति विनयम की ारा 31 क े ह भिशकाय ों का विनस् ारण करने और विनण"य लेने क े लिलए प्राति करण क े एकल स:स्य को अपनी शविv प्रत्यायोसिX की और कानून में इसकी अनुमति है, इसलिलए इसे अति विनयम क े अति:ेश का उल्लंघन नहीं कहा Xा सक ा है। लेविकन अति विनयम की ारा 71 क े ह उपयुv सरकार क े परामश" से प्राति करण द्वारा विनयुv विकए गए न्यायविनण"यन अति कारी की शविvयाँ अति विनयम की ारा 81 क े ह शविvयों क े प्रयोग में प्रत्यायोसिX नहीं की Xा सक ी हैं।

119. अति विनयम, 2016 की योXना में एक अन् भू" ंत्र का प्राव ान है और ारा 31 क े ह प्राति करण द्वारा विकसी भिशकाय पर पारिर कोई भी आ:ेश ारा 43 (5) क े ह अति करण क े समक्ष अपील योग्य है और आगे सिसविवल प्रविQया संविह ा, 1908 की ारा 100 क े ह विनर्दि:ष्ट एक या एक से अति क आ ार पर अति विनयम की ारा 58 क े ह उच्च न्यायालय में अपील की Xा सक ी है, यवि: प्राति कारी द्वारा संगणना में या आवंटी/घर खरी:ार को प्रति:ेय राभिश में कोई स्पष्ट त्रुविट की Xा ी है, ो पीविड़ व्यविv द्वारा की गई भिशकाय पर अपीलीय चरण में विवचार विकया Xा सक ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

120. अति विनयम, 2016 की योXना क े ह उपबंति उपचारात्मक ंत्र को ध्यान में रख े हुए, हमारे विवचार में, अति विनयम की ारा 31 क े अन् ग" आने वाले आवे:नों/भिशकाय ों पर विनण"य लेने क े लिलए अपने एक स:स्य को प्राति करण अति विनयम की ारा 81 क े ह शविv प्रत्यायोसिX विकया Xाना न क े वल अच्छी रह से परिरभाविर्ष है, बल्पिoक स्पष्ट रूप से अनुमेय है और इसे कानून क े अति:ेश का उल्लंघन नहीं माना Xा सक ा। प्रश्न संख्या 4: क्या अपील क े सारवान अति कार को स्वीकार करने क े लिलए अति विनयम की ारा 43 (5) क े परं ुक क े ह पूव" Xमा की श " विवति द्वारा पोर्षणीय है?

121. अति करण क े समक्ष अपील स्वीकार विकए Xाने हे ु पूव" Xमा करने क े लिलए अति विनयम की ारा 43 (5) क े परं ुक क े अन् ग" श " को चुनौ ी का परीक्षण करने से पूव", अति विनयम, 2016 की ारा 43 (5) पर ध्यान:ेना उतिच होगा। ारा 43 (5) इस प्रकार हैः "43. रिरयल एस्टेट अपीलीय न्यायाति करण की स्र्थीापना-... (5) इस अति विनयम क े अ ीन प्राति करण या न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा वि:ए गए विकसी विन:ेश या विवविन{य या आ:ेश से व्यभिर्थी कोई व्यविv मामले पर क्षेत्राति कार रखने वाले अपील अति करण क े समक्ष अपील कर सक ा हैः बश e विक Xहां कोई प्रोत्साहक अपीलीय न्यायाति करण में अपील:ायर कर ा है, वहां यह ब क अपील स्वीकार नहीं की Xाएगी Xब क विक प्रोत्साहक ने अपीलीय न्यायाति करण में Xुमा"ना का कम से कम ीस प्रति श या अपीलीय न्यायाति करण द्वारा विन ा"रिर इससे अति क प्रति श Xमा नहीं कर वि:या हो, या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उv अपील की सुनवाई से पहले उस पर लगाए गए ब्याX और मुआवXे सविह या:ोनों, Xैसा मामला हो, क े सार्थी क ु ल राभिश का भुग ान न विकया हो। स्पष्टीकरण- इस उप ारा क े प्रयोXन क े लिलए '' व्यविv '' क े अं ग" आवंविटयों का संघ या त्समय प्रवृत्त विकसी कानून क े ह पंXीक ृ स्वैल्पिच्छक उपभोvा संघ शाविमल होगा।

122. यह प्रत्यक्ष रूप से:ेखा Xा सक ा है विक अति विनयम की ारा 43 (5) में अपील न्यायाति करण क े समक्ष अपील:ायर करने की परिरकoपना की गई है यवि: प्रोत्साहक Xुमा"ना लगाने क े प्राति करण या न्यायविनण"यन अति कारी क े आ:ेश क े लिखलाफ अपील करना चाह ा है ो उसे Xुमा"ना राभिश का कम से कम 30 प्रति श या अपीलीय न्यायाति करण द्वारा विन:eभिश इससे अति क राभिश Xमा करानी होगी। Xहां विकसी अन्य आ:ेश क े लिखलाफ अपील की Xा ी है, सिXसमें आवंटी को राभिश की वापसी शाविमल हो ी है, वहां प्रोत्साहक को अपील:ायर विकए Xाने से पहले अपील न्यायाति करण क े पास क ु ल राभिश Xमा करनी हो ी है, सिXसमें उस पर लगाया गया ब्याX और मुआवXा, यवि: कोई हो, या:ोनों, शाविमल हो ा हैं।

123. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वvा द्वारा:ी गई:लील यह है विक प्राति कारी/न्यायविनण"यन अति कारी क े आ:ेश क े लिखलाफ अपील का सारवान अति कार पूव" Xमा की पूर्ति पर विनभ"र नहीं रह सक ा है Xो अन्यर्थीा क े वल विबoडरों पर ही लगाया गया है और क े वल अपील करने वाले विबoडरों/प्रोत्साहकों से यह अपेतिक्ष है विक वे अति करण द्वारा अपील स्वीकार विकए Xाने क े लिलए पूव" Xमा करें, अति विनयम क े प्राव ानों क े ह यर्थीा परिरभाविर्ष, विह ारकों क े बीच भे:भावपूण" है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

124. विवद्वान अति वvा ने आगे कहा है विक यवि: प्राति करण या न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा गणना की गई संपूण" राभिश, शाल्पिस् क े 30 प्रति श सविह, Xमा की Xानी है, ो एक रफ प्र:ान विकया गया अपील का उपचार:ूसरी रफ ले लिलया Xा रहा है क्योंविक प्रोत्साहक विवत्तीय रूप से संकट में है और प्राति कारी/न्यायविनण"यन अति कारी द्वारा पूरी गणना की गई राभिश Xमा करने में असमर्थी" है। अपीलीय प्रQम पर अपने बचाव क े मूoयांकन का अति कार, Xो कानून क े ह उसे उपलब् कराया गया है, क े वल प्रोत्साहक की अपील पर विवचार करने से पूव" Xमा की भारी अविनवाय" आवश्यक ा क े कारण विनरर्थी"क हो Xा ा Xो अति विनयम की ारा 43 (5) क े ह अपील करना चाह ा है, उनक े अनुसार इस मामले क े थ्यों और परिरल्पिस्र्थीति यों में यह असंवै ाविनक है और भार क े संविव ान क े अनुच्छे: 14 का उल्लंघन कर ा है।

125. प्रर्थीम दृष्टया यह क " आकर्ष"क प्र ी हो ा है, लेविकन कानून में पोर्षणीय नहीं है क्योंविक अति विनयम की योXना का अवलोकन यह स्पष्ट कर ा है विक Xहाँ अति विनयम की ारा 19 क े ह आवंविटयों क े क ं ों पर सीविम अति कार और क "व्यों का प्राव ान विकया गया है, वहीं प्रोत्साहकों क े लिलए भी कई महत्वपूण" क "व्यों और:ातियत्वों का पालन करना Xरूरी है Xैसे अति विनयम 2016 क े अध्याय III और VIII क े ह पंXीकरण, प्रोत्साहकों क े क "व्य, प्रोत्साहकों क े:ातियत्व, स्वीक ृ योXनाओं का पालन, रिरयल एस्टेट का बीमा, Xुमा"ना, ब्याX और मुआवXे का भुग ान आवि: प्रोत्साहकों भारिर विकया गया है। उपभोvाओं और प्रोत्साहकों क े बीच यह वग2करण आवंविटयों/घर खरी:ारों और प्रोत्साहकों पर डाले गए अति कारों, क "व्यों और:ातियत्वों क े बीच बो गम्य अं र पर आ ारिर है और यह उपभोvाओं क े विह ों की रक्षा क े लिलए अति विनयम क े उद्देश्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और लक्ष्य को आगे बढ़ा ा है। प्रोत्साहकों और आवंविटयों की स्पष्ट रूप से पहचान की Xा सक ी है, सिXन पर अति विनयम क े विवभिभन्न प्राव ानों क े ह अलग-अलग विवचार विकया गया है।

126. इसलिलए, प्रर्थीम ः विवभे: का प्रश्न ही नहीं उठ ा है Xो अभिभकभिर्थी विकया गया है क्योंविक वे विवभिशष्ट और विवभिभन्न श्रेभिणयों/वग_ क े अं ग" आ े हैं।

127. यह भी:ेखा Xा सक ा है विक व "मान रिरयल एस्टेट क्षेत्र क े ह, सिXसे अब अति विनयम 2016 क े प्राव ानों क े ह विवविनयविम विकया Xा रहा है, भुग ान की राभिश क े रिरफ ं ड क े लिलए भिशकाय, Xो आवंटी/उपभोvा ने प्रोत्साहक क े पास Xमा की है और बा: में, Xब प्रोत्साहक पक्षों क े बीच समझौ े की श _ का भंग कर े हुए कब्Xे को सौंपने में असमर्थी" रह ा है, उनक े द्वारा Xमा की गई राभिश क े रिरफ ं ड की मांग करने वाले उपभोvा/आवंटी क े अनुरो पर और संबंति पक्षों द्वारा उपलब् कराए गए समकालीन:स् ावेXी साक्ष्य क े आ ार पर थ्यों की Xांच क े बा:, विव ातियका ने अपने विववेक से यह सुविनति{ विकया है विक प्राति करण द्वारा संगभिण न को कम से कम संरतिक्ष विकया Xाना चाविहए यवि: प्रोत्साहक न्यायाति करण क े समक्ष अपील करने का इरा:ा रख ा है और बा: क े चरण में अपील विवफल हो Xा ी है, ो उपभोvा/आवंटी क े लिलए वह राभिश प्राप्त करना मुल्पिश्कल हो Xा ा है और प्राति करण द्वारा विन ा"रिर की गयी राभिश की प्राविप्त क े लिलए उपभोvा /आवंटी को होने वाली परेशाविनयों से उसे बचाया Xा सक ा है।

128. इसक े सार्थी ही, यह अपीलीय चरण में अविववेकपूण" और अनावश्यक मुक:मेबाXी से बचाएगा और यवि: प्रोत्साहक को लग ा है विक कोई स्पष्ट सारवान अविनयविम ा की Xा रही है या हो रही है ो उसे प्रति बंति करेगा या प्रर्थीम चरण में उसक े बचाव को समझा नहीं गया है, वह अभिभलेख पर साक्ष्य क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पुनः मूoयांकन क े लिलए अपील करेगा बश e पूव" Xमा की श " का पया"प्त अनुपालन विकया Xाए, अपीलीय चरण में न्यायविनण"यन क े लिलए पक्षकारों क े अति कारों को आसानी से बचाया Xा सक ा है।

129. ऐसे अनेक कानून हैं सिXनमें अपीलीय मंच /अति करण द्वारा थ्यों और विवति क े पुनमू"oयांकन क े लिलए अपील स्वीकार विकए Xाने से पूव" Xमा की Xाने वाली विन ा"रिर सांविवति क राभिश की श " का उपबं है और इस न्यायालय द्वारा इसका भी परीक्षण विकया गया है। एस ए आर एफ एई एस आई अति विनयम, 2002 की ारा 18 का परं ुक, Xो पूव" Xमा की का उपबं कर ी है, इस प्रकार हैः “18. अपीलीय न्यायाति करण में अपील... परं ु यह और विक कोई अपील ब क स्वीकार नहीं की Xाएगी Xब क विक उ ारक ा" ने प्रति भू:ेन:ारों द्वारा:ावा विकए गए या ऋण वसूली न्यायाति करण द्वारा विन ा"रिर की गयी ऋण की राभिश का पचास प्रति श, इनमें से Xो भी कम हो, अपीलीय न्यायाति करण में Xमा न कर वि:या होः परं ु यह भी विक अपीलीय न्यायाति करण अति करण, लेखबt विकए Xाने वाले कारणों से,:ूसरे परन् ुक में विनर्दि:ष्ट ऋण क े संबं में रकम को पच्चीस प्रति श से अन्यून क घटा सक ा है।”

130. विव ानमंडल का आशय यह सुविनति{ करना प्र ी हो ा है विक तिडQी ारक (सफल पक्षकार) क े अति कारों का संरक्षण विकया Xाए और क े वल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वास् विवक सद्भावपूण" अपीलों पर विवचार विकया Xाए। एस ए आर एफ ए ई एस आई अति विनयम की ारा 18 की व्याख्या कर े हुए, इस न्यायालय ने नारायण चंद्र घोर्ष बनाम यूको बैंक एवं अन्य17 क े मामले में यह म व्यv विकया:- “8. यह सुस्र्थीाविप है विक Xब कोई अति विनयम अति कार प्र:ान कर ा है ो अपील का अति कार प्र:ान कर े समय, विव ातियका ऐसे अति कार क े प्रयोग क े लिलए श ¯ अति रोविप कर सक ी है, बश ¯ विक यह इ नी कविठन न हों विक वे अनुतिच प्रति बं ों क े बराबर हों, सिXससे अति कार लगभग अवास् विवक हो Xा ा हो। अति विनयम क े उद्देश्य को ध्यान में रख े हुए, उv परं ुक में Xोड़ी गई श _ को कविठन नहीं कहा Xा सक ा है। इस प्रकार, हम यह अभिभविन ा"रिर कर े हैं विक अति विनयम की ारा 18 की उप ारा (1) क े अ ीन पूव" Xमा की अपेक्षा आज्ञापक है और अति विनयम की ारा 18 में अं र्दिवष्ट उपबं ों को पूण" रूप से प्रभावी न करने का कोई कारण नहीं है। हमें यह अभिभविन ा"रिर करने में कोई विहचविकचाहट नहीं है विक अति विनयम की ारा 18(1) क े:ूसरे परं ुक क े ह Xमा की श " उv ारा क े ह अपील करने क े लिलए पूव"व 2 श " होने क े कारण, अपीलक ा" को उv अविनवाय" आवश्यक ा का अनुपालन करने का विन:eश वि:ए विबना अपील को स्वीकार करने में अपीलीय न्यायाति करण ने विवति क त्रुविट की।”

131. हर:ेवी असनानी बनाम राXस्र्थीान राज्य एवं अन्य 18 क े मामले में, राXस्र्थीान स्टाम्प अति विनयम, 1998 की ारा 65 (1) क े परं ुक की वै ा पर विवचार विकया गया, सिXसक े सं:भ" में कोई भी पुनरीक्षण आवे:न ब क स्वीकार नहीं विकया Xा सक ा र्थीा Xब क विक इसक े सार्थी वसूली योग्य राभिश क े 50 प्रति श क े भुग ान का सं ोर्षXनक प्रमाण न हो। आंध्र प्र:ेश सरकार एवं अन्य

Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बनाम पी लक्ष्मी:ेवी18 (श्रीम ी) क े मामले सविह इस न्यायालय क े पूव" विनण"यों का अवलंब ले े हुए चुनौ ी को खारिरX कर वि:या गया और पी. लक्ष्मी:ेवी (उपरोv) क े मामले में व्यv विवचार हर:ेवी अशनानी (ऊपरोv) क े मामले में:ोहराया गया सिXसमें इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख अभिभविन ा"रिर विकया र्थीाः “ इस ल्पिस्र्थीति में हमारी राय में विकसी भी पक्ष क े पास ारा 47-क क े परं ुक क े ह पंXीकरण अति कारी द्वारा की गई अत्यति क मांग को चुनौ ी:ेने क े लिलए एक रिरट यातिचका:ायर करने का विवकoप चुनने की स्व ंत्र ा हो ी है सिXसमें यह कहा Xाना चाविहए विक विन ा"रण मनमाना और/या असंग विवचारों पर आ ारिर है, और उस मामले में उच्च न्यायालय क े लिलए यह विवकoप हो ा है, विक यवि: वह सं ुष्ट है विक आरोप सही है, ो वह मांग को मनमाना घोविर्ष करक े स्टांप अति विनयम की ारा 47-क क े परं ुक क े ह ऐसी अत्यति क मांग को अपास् कर सक ा है। यह सुस्र्थीाविप है विक मनमानापन संविव ान क े अनुच्छे: 14 का उल्लंघन कर ा है। (मेनका गां ी बनाम भार संघ [(1978) 1 एससीसी 248]। इसलिलए, पक्षकार इस ल्पिस्र्थीति में उपचारहीन नहीं है।”

132. सार्थी ही, उपभोvा संरक्षण अति विनयम, 1986 की ारा 19 में पूव"- मध्यव 2 Xमा क े लिलए एक श " विवविह की गई है सिXसमें यह उपबं विकया गया है विक कोई अपील ब क स्वीकार नहीं की Xाएगी Xब क विक राज्य आयोग द्वारा अति विनण[2] राभिश का 50 प्रति श या 35,000/- रुपए, Xो भी कम हो, राष्ट्रीय उपभोvा विववा: विनवारण आयोग (एनसीडीआरसी) क े समक्ष Xमा नहीं विकया Xा ा है। श्रीनार्थी कारपोरेशन एवं अन्य बनाम उपभोvा भिशक्षा अनुसं ान

Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरर्ष: एवं अन्य21 क े मामले में हरिरयाणा राज्य बनाम मारुति उद्योग लिलविमटेड एवं अन्य20 क े मामले में वि:ए विनण"य का अवलंब ले े हुए न्यायालय ने ारिर विकया विक ऐसी श " महत्वहीन अपीलों से बचने क े लिलए विकया Xा ा है। "7. उपभोvा संरक्षण अति विनयम, 1986 की ारा 19 राज्य आयोग द्वारा ारा 17 क े खंड (क) क े उपखंड (i) ) द्वारा प्र:त्त अपनी शविv का प्रयोग कर े हुए विकए गए आ:ेश क े विवरुt अपीलों से संबंति है और उv ारा इस प्रकार हैः "19. अपीलें- राज्य आयोग द्वारा ारा 17 क े खंड (क) क े उपखंड (i) ) द्वारा प्र:त्त शविvयों का प्रयोग कर े हुए विकए गए विकसी आ:ेश से व्यभिर्थी कोई भी व्यविv ऐसे आ:ेश की ारीख से ीस वि:न की अवति क े भी र ऐसे प्रारूप और रीक े से राष्ट्रीय आयोग में अपील कर सक ा है, Xो विन ा"रिर विकया Xाए: बश e विक राष्ट्रीय आयोग ीस वि:न की उv अवति की समाविप्त क े बा: अपील स्वीकार कर सक ा है यवि: उसे यह समा ान हो Xा ा है विक उस अवति क े भी र इसे:ालिखल न करने क े लिलए पया"प्त कारण र्थीाः बश e यह और विक विकसी ऐसे व्यविv द्वारा, सिXससे राज्य आयोग क े आ:ेश क े अनुसार विकसी रकम का भुग ान करने की अपेक्षा की Xा ी है, द्वारा कोई अपील राष्ट्रीय आयोग द्वारा ब क स्वीकार नहीं की Xाएगी Xब क विक अपीलक ा" ने विवविह रीति में राभिश का पचास प्रति श या पैं ीस हXार रुपए, इनमें से Xो भी कम हो, Xमा न कर वि:या हो। 21 2014(8) SCC 657 20 2000(7) SCC 348 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उपयु"v ारा 19 क े पठन से, हम पा े हैं विक अति विनयम की ारा 19 का:ूसरा परं ुक राष्ट्रीय आयोग द्वारा स्वीकार की Xाने वाली अपील क े लिलए अपेतिक्ष 'पूव" -Xमा' से संबंति है। अति विनयम की ारा 19 क े:ूसरे परं ुक में राष्ट्रीय आयोग क े समक्ष अपील पर विवचार करने क े लिलए पूव"-Xमा करना अविनवाय" विकया गया है। राष्ट्रीय आयोग इसक े लिलए राज्य आयोग क े आ:ेश क े सं:भ" में राभिश का 50 प्रति श या 35,000 रुपये, Xो भी कम हो, राष्ट्रीय आयोग द्वारा अपील स्वीकार करने क े लिलए अपेतिक्ष कर ा है। Xब क अपीलक ा" ने पूव" -Xमा राभिश Xमा नहीं कर:ी है, अपील राष्ट्रीय आयोग द्वारा स्वीकार नहीं की Xा सक ी है। राज्य आयोग क े आ:ेश क े सं:भ" में राभिश का 50 प्रति श Xमा करने की पूव" विन ा"रिर Xमा श " या अपील पर विवचार करने क े लिलए 35,000 रुपये की पूव" श " होने क े कारण इसका स्र्थीगन आ:ेश क े सार्थी कोई संबं नहीं है, Xैसा विक राष्ट्रीय आयोग द्वारा आ:ेश पारिर विकया Xा सक ा है या नहीं भी विकया Xा सक ा है। अनावश्यक अपीलों से बचने क े लिलए पूव" Xमान Xमा की श " है।"

133. इसी प्रकार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विवकास अति विनयम, 2006 की ारा 19 क े ह, आपूर्ति क ा" क े अलावा विकसी भी अपीलक ा" को सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविव ा परिरर्ष: या वैकल्पिoपक विववा: समा ान सेवाएं प्र:ान करने वाले विकसी संस्र्थीान या क ें द्र द्वारा विकए गए विकसी भी तिडQी, अति विनण"य या आ:ेश क े लिखलाफ अपील करने क े लिलए 75 प्रति श पूव" Xमा करना आवश्यक है। ारा 19 इस प्रकार हैः “19. तिडQी, पंचाट या आ:ेश को रद्द आ:ेश क े लिलए आवे:न- परिरर्षद् द्वारा स्वयं या वैकल्पिoपक विववा: समा ान सेवाएं प्र:ान करने वाली विकसी संस्र्थीा या क ें द्र द्वारा की गई विकसी तिडQी, पंचाट या अन्य आ:ेश को अपास् करने क े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया गया आवे:न, सिXसे परिरर्षद् द्वारा सं:र्भिभ विकया गया है, विकसी न्यायालय द्वारा ब क स्वीकार नहीं विकया Xाएगा Xब क विक अपीलक ा" (Xो आपूर्ति क ा" नहीं है ) ने यर्थीाल्पिस्र्थीति, तिडQी, अति विनण"य या अन्य आ:ेश क े सं:भ" में रकम का, Xो ऐसे न्यायालय द्वारा विन:ेभिश रीति में हो, उसक े पास सत्तर प्रति श Xमा न कर वि:या हो: तिडQी, अति विनण"य या आ:ेश को अपास् करने क े लिलए आवे:न क े विनस् ारण क े लंविब रहने क, न्यायालय आ:ेश:ेगा विक Xमा की गई राभिश का ऐसा प्रति श आपूर्ति क ा" को भुग ान विकया Xाएगा, Xैसा वह मामले की परिरल्पिस्र्थीति यों में उतिच समझे, ऐसी श _ क े अ ीन, Xो वह अति रोविप करना आवश्यक समझे।”

134. इसी प्रकार, पूव"-Xमा की श " का हाल ही में इस न्यायालय ने टेकनीमोंट प्राइवेट लिलविमटेड (सिXसे पहले टेकनीमोंट आईसीबी प्राइवेट लिलविमटेड क े नाम से Xाना Xा ा र्थीा) बनाम पंXाब राज्य एवं अन्य22, क े मामले में परीक्षण विकया Xहां पंXाब मूoय संवर्ति कर अति विनयम, 2005 (पीवैट) की ारा 62 (5) की वै ा को बरकरार रखा, Xो पहली अपील की सुनवाई क े लिलए पूव" Xमा राभिश क े रूप में 25 प्रति श की श " लगा ी है। पीवैट अति विनयम की ारा 62 (5) इस प्रकार हैः "62. प्रर्थीम अपील... (5) कोई अपील ब क स्वीकार नहीं की Xाएगी Xब क विक ऐसी अपील क े सार्थी कर, शाल्पिस् और ब्याX, यवि: कोई हो, की क ु ल रकम का न्यून म पचीस प्रति श, भुग ान का सं ोर्षXनक साक्ष्य न हो। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA....”

135. ध्यान:ेने योग्य बा यह है विक व "मान विव ान का आशय यह प्र ी हो ा है विक इस प्रकार अनुध्या राभिश Xमा करक े प्रस् ावकों को अपनी सद्भावना:शा"नी चाविहए। 136 यह वास् व में, अपील का अति कार है Xो विव ान की विनर्दिमति है। सांविवति क उपबं क े विबना, ऐसा अति कार सृसिX करना व्यभिर्थी व्यविv को अपील:ायर करने का हक:ार नहीं बना ा है। यह न ही यह पूण" अति कार है न ही प्राक ृ ति क न्याय का एक घटक, सिXसक े सिसtां ों का सभी न्यातियक और अ " न्यातियक मुक:मों में पालन विकया Xाना चाविहए और यह हमेशा अनु:ान की श _ क े सार्थी सीमांविक विकया Xा ा है। इस समय विव ातियका को यह अति कार है विक वह कानून बना सक ी है विक प्राति करण द्वारा पारिर आ:ेश क े लिखलाफ कोई अपील नहीं की Xाएगी या पूव" श ", यवि: कोई हो, को पूरा करने पर अपील की Xा सक ी है।

137. हमारे सुविवचारिर म में, अति विनयम की ारा 43 (5) क े ह प्रोत्साहक पर डासा गया पूव" Xमा का:ातियत्व, अपने आप में एक वग" है, और प्रोत्साहक ने उस न को प्राप्त विकया है, सिXसकी अपील घर क े खरी:ारों/आवंविटयों द्वारा रिरफ ं ड क े लिलए विकया Xा रहा है और पहले स्र्थीान पर सक्षम प्राति कारी द्वारा विन ा"रिर विकया गया है, यवि: विव ातियका अपने विववेक से यह सुविनति{ करना चाह ी है विक अति विनयम की ारा 43 (5) क े ह परिरकल्पिoप रूप में पूव"- Xमा का:ातियत्व क े अनुपालन क े बा: प्रोत्साहक अपील करना चाह ा है ो उसे अनुच्छे: 14 या 19 (1) (छ) का उल्लंघन नहीं कहा Xा सक ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रश्न संख्या 5: क्या प्राति करण को अति विनयम की ारा 40 (1) क े ह मूल राभिश की वसूली क े लिलए वसूली प्रमाण पत्र Xारी करने का अति कार है?

138. इस प्रश्न का परीक्षण करने क े लिलए, ारा 40 को ध्यान में रखना उतिच होगा सिXसमें ब्याX या Xुमा"ना या मुआवXे की वसूली क े बारे में भूविम राXस्व अवभिशष्ट क े रूप में वसूली की Xानी है, Xो इस प्रकार हैः

40. ब्याX या शाल्पिस् या मुआवXे की वसूली और आ:ेश का प्रव "न, आवि: - (1) यवि: कोई प्रोत्साहक या आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट, Xैसा भी मामला हो, इस अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों और विवविनयमों क े ह न्यायविनण"यन अति कारी या विनयामक प्राति करण या अपीलीय प्राति करण द्वारा उस पर लगाए गए विकसी भी ब्याX या:ंड या मुआवXे का भुग ान करने में विवफल रह ा है, ो यह ऐसे प्रोत्साहक या आवंटी या रिरयल एस्टेट एXेंट से अवभिशष्ट भूविम राXस्व क े बकाये क े रूप में विवविह रीक े से वसूल विकया Xाएगा। (2) यवि: कोई न्यायविनण"यन अति कारी या विनयामक प्राति करण या अपीलीय न्यायाति करण, Xैसा भी मामला हो, कोई आ:ेश Xारी कर ा है या विकसी व्यविv को कोई काय" करने का विन:eश:े ा है, या कोई काय" करने से रोक ा है, सिXसे इस अति विनयम या इसक े ह बनाए गए विनयमों या विवविनयमों क े ह करने क े लिलए सशv विकया गया है, ो विकसी भी व्यविv द्वारा ऐसे आ:ेश या विन:eश का पालन करने में विवफल रहने की ल्पिस्र्थीति में, उसे ऐसी रीक े से लागू विकया Xाएगा, Xो विन ा"रिर विकया Xाए।”

139. अपीलक ा"ओं/प्रोत्साहकों का क " यह है विक अति विनयम की ारा 40 (1) क े ह क े वल प्राति करण द्वारा लगाए गए ब्याX या Xुमा"ना को भूविम राXस्व अवभिशष्ट क े रूप में वसूला Xा सक ा है और प्राति करण द्वारा विन ा"रिर मूल राभिश mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े लिलए कोई वसूली प्रमाण पत्र Xारी नहीं विकया Xा सक ा है। यवि: हम अति विनयम की योXना का परीक्षण करें, ो मूल राभिश क े रिरफ ं ड का विन:eश:ेने क े लिलए प्राति कार की शविv ारा 18 में स्पष्ट है और:ेय ब्याX मूल राभिश पर है,:ूसरे शब्:ों में, सक्षम प्राति कारी द्वारा विन ा"रिर की Xा रही मूल राभिश क े अभाव में कोई ब्याX नहीं है। इसक े अलावा, कानून को इस प्रकार पढ़ा गया है विक इसका अर्थी" यह है विक ब्याX क े सार्थी मूल राभिश एक संयुv राभिश बन गई है सिXसे अति विनयम की ारा 40 (1) क े ह भूविम राXस्व अवभिशष्ट क े रूप में वसूल विकया Xाना है।

140. यह कानून का स्र्थीाविप सिसtां है विक यवि: स्पष्ट व्याख्या अति विनयम क े अति:ेश और उद्देश्य को पूरा नहीं कर ी है, ो इस न्यायालय को कानून की भावना और उद्देश्य क े अनुरूप कानून की व्याख्या करनी होगी। वास् व में प्रोत्साहक द्वारा प्राप्त राभिश क े रिरफ ं ड क े संबं में प्राति करण की शविvयों का स्पष्ट प्राव ान ारा 18 में है, ब्याX Xो मूल राभिश पर:ेय है:ूसरे शब्:ों में मूल राभिश क े अभाव में कोई ब्याX नहीं होगा सिXसका विन ा"रण प्राति कारी द्वारा विकया Xाएगा और प्राव ान का पाठ इस प्रकार यह आभास:े ा है विक ब्याX क े सार्थी मूल राभिश ारा 40 (1) क े ह राXस्व बकाया की भांति वसूली योग्य हो Xा ा है। वसूली क े अति कार क े सार्थी अति विनयम की योXना क े विनमा"ण में सामंXस्य स्र्थीाविप कर े हुए, ेXी से वसूली क े लिलए प्राव ान करने क े विव ातियका क े इरा:े को ध्यान में रख े हुए आवंटी द्वारा विनवेश की गई राभिश और उस पर ब्याX - स्व ः स्पष्ट है। हालांविक, यवि: ारा 40 (1) का कड़ाई से अर्थी" लगाया Xा ा है और इसका अर्थी" यह समझा Xा ा है विक क े वल Xुमा"ना और मूल राभिश पर ब्याX भूविम राXस्व अवभिशष्ट क े रूप में वसूल विकया Xा सक ा है, ो यह अति विनयम क े मूल उद्देश्य को विवफल कर:ेगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 141 अति विनयम की योXना को ध्यान में रख े हुए, प्राति कारी द्वारा संगभिण /परिरकलिल ब्याX क े सार्थी उसकी अपनी आXीवन बच है और इस रह का बकाया कानून में प्रव "नीय हो Xा ा है। अति विनयम की ारा 40 (1) में क ु छ अस्पष्ट ा वि:खाई:े ी है विक हमारे विवचार से, अति विनयम क े उद्देश्य क े सार्थी उपबं को प्रभावी बनाकर, प्राव ानों में से विकसी एक को भी लागू करने की अनुमति:ी Xा ी है, विव ातियका क े उद्देश्य और उपरोv सिसtां को ध्यान में रख े हुए, हम यह स्पष्ट कर े हैं विक आबंविट ों /घर खरी:ारों को या ो प्राति करण द्वारा या न्यातियक अति कारी द्वारा इस आ:ेश क े सं:भ" में विन ा"रिर और वापसी योग्य राभिश अति विनयम की ारा 40 (1) की परिरति क े भी र वसूल की Xा सक ी है।

142. चचा" का परिरणाम यह है विक हमें व "मान अपीलों में आक्षेविप विनण"य में कोई त्रुविट नहीं विमल ी है ।न ीX न,अपीलों क े समूह का विनस् ारण उपरोv श _ में विकया Xा ा है। हालांविक, हम यह स्पष्ट कर े हैं विक यवि: अपीलार्थी2 (गण) प्राति करण क े आ:ेश क े लिखलाफ अपीलीय न्यायाति करण क े समक्ष अपील करना चाह ा है, ो उसक े लिलए आX से 30 वि:नों क े भी र चुनौ ी:ेने का विवकoप हो सक ा है, बश e अपीलार्थी2 (गण) अति विनयम की ारा 43 (5) क े परं ुक क े ह अनुध्या पूव" Xमा की श " का पालन करे, सिXसका विनण"य न्यायाति करण द्वारा कानून क े अनुसार अपने स्वयं क े गुणों पर विकया Xा सक ा है। कोई लाग नहीं।

143. लंविब आवे:न, यवि: कोई हो, विनस् ारिर विकए Xा े हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ………………... ( न्यायमूर्ति उ:य उमेश ललिल ) ………………... (न्यायमूर्ति अXय रस् ोगी) ………………... (न्यायमूर्ति अविनरुt बोस) नई वि:ल्ली 11 नवंबर, 2021 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA