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आपराधि क अपीलीय क्षेत्राधि कार
आपराधि क अपील सं. 1605/2021
(विर्वोशेष अनुमधित याधि&का (आपराधि क) संख्या 8425/2021 से उत्पन्न)
कल्लू खान ...अपीलार्थी2
बनाम
राजस्र्थीान राज्य ...प्रधितर्वोादी
विनर्ण:य
जे.क
े . माहेश्वरी, जे.
JUDGMENT
1. अनुमधित दी गई।
2. यह अपील आपराधि क अपील संख्या 491/2012 में राजस्र्थीान उच्च न्यायालय की खंडपीठ जयपुर द्वारा पारिरत विनर्ण:य विदनांक 25.11.2017 से उत्पन्न हुई है, जिजसमें विर्वोशेष न्याया ीश (एन.डी.पी.एस.), झालार्वोाड़, राजस्र्थीान क े सत्र क े स संख्या 49/2011 में अपीलकता: को नारकोविOक ड्रग्स एंड साइकोO्रॉविपक सबस्Oेंस एक्O (बाद में "एनडीपीएस अधि विनयम" क े रूप में संदर्भिभत) की ारा 8 और 21 क े तहत दोषी ठहराया गया और 1,00,000/- (एक लाख) क े जुमा:ने क े सार्थी 10 साल क े कठोर कारार्वोास की सजा सुनाई गई है। उच्च न्यायालय ने सजा और सजा की पुविZ करते हुए धिडफ़ॉल्O सजा को 2 साल से घOाकर 1 साल कर विदया।
3. अभिभयोजन पक्ष क े आरोपों क े अनुसार संक्षेप में तथ्यों को घOना की विदनांक 24.04.2011 को भर्वोानी मंडी र्थीाना प्रभारी एस.आई.प्रर्णर्वोीर सिंसह (पीडब्ल्यू6) कांस्Oेबल प्रीतम सिंसह (पीडब्ल्यू1), सरदार सिंसह (पीडब्ल्यू 2) और राजेंद्र प्रसाद (पीडब्ल्यू 8), क े सार्थी सुलिलया &ौकी से सुनेल तक सुबह लगभग 6:05 बजे विनयविमत गश्त पर र्थीा और झोकविड़या पहुं&ा। झोकविड़या से भर्वोानी मंडी लौOते समय, 2021 INSC 873 उन्होंने आरोपी कल्लू खान को विबना नंबर की मोOरसाइविकल पर विर्वोपरीत विदशा से आते देखा। पुलिलस क े पेO्रोलिंलग र्वोाहन को देख कल्लू खां पीछे मुड़ा और उसने भागने का प्रयास विकया। पुलिलस पाO[2] ने उसक े आ&रर्ण पर संदेह करते हुए उसे पकड़ लिलया और पूछताछ की। उसक े व्यर्वोहार क े बारे में पूछताछ में आरोपी कल्लू खान ने संतोषजनक जर्वोाब नहीं विदया। संदेह होने पर, एस.आई. प्रर्णर्वोीर सिंसह (पीडब्ल्यू 6) ने कांस्Oेबल प्रीतम सिंसह (पीडब्ल्यू1) को आरोपी कल्लू खान और उस मोOरसाइविकल की भी, जिजस पर र्वोह सर्वोार र्थीा, की तलाश क े लिलए स्र्वोतंत्र गर्वोाह की व्यर्वोस्र्थीा करने का आदेश विदया। कांस्Oेबल प्रीतम सिंसह (पीडब्ल्यू1) ने उन्हें एक रिरपोO: सौंपी विक तलाशी क े लिलए स्र्वोतंत्र गर्वोाह तत्काल नहीं विमल सका। तत्पश्चात, अभिभयुक्त क े आ&रर्ण को देखते हुए, एस.आई. प्रर्णर्वोीर सिंसह (पीडब्ल्यू.6) ने कांस्Oेबल सरदार सिंसह (पीडब्ल्यू2) और कांस्Oेबल राजेंद्र प्रसाद (पीडब्ल्यू.8) से सहमधित प्राप्त की और उन्हें र्वोाहन की तलाशी क े लिलए गर्वोाह बनाया।
4. तत्पश्चात् अभिभयुक्त कल्लू खां को एन.डी.पी.एस. अधि विनयम की ारा 50 क े तहत नोविOस देकर सूधि&त विकया गया विक राजपवित्रत अधि कारी या मजिजस्O्रेO क े समक्ष उसकी तलाशी ली जा सकती है, जिजस पर उसने एस.ए&.ओ. द्वारा तलाशी क े लिलए सहमधित प्रदान की। सहमधित क े बाद उसक े शरीर और मोOरसाइविकल की तलाशी ली गई। व्यविक्तगत तलाशी क े दौरान, उसक े पास से कोई आपलिsजनक पदार्थी: बरामद नहीं हुआ, जबविक मोOरसाइविकल की तलाशी में मोOरसाइविकल की सीO क े नी&े एक पॉलीभिर्थीन बैग विमला, जिजसमें स्मैक जैसा विदखने र्वोाला भूरा पदार्थी: र्थीा, जो एक कागज पर जल गया र्थीा और इसकी गं से, यह स्मैक होने की पुविZ की गई र्थीी। पदार्थी: का र्वोजन 900 ग्राम र्थीा, जिजसमें से दो नमूने तैयार विकए गए, उन्हें सीलबंद विकया गया और क्रमशः 'ए' और 'बी' क े रूप में धि&विxत विकया गया। शेष पदार्थी: को 'सी' धि&न्हिन्हत एक अन्य बैग में रखा गया और सील कर विदया गया, जिजसक े बाद आरोपी कल्लू खान को पुलिलस स्Oेशन ले जाया गया और उसक े लिखलाफ अपरा संख्या 130/2011 क े रूप में ारा 8 और 21 क े तहत अपरा दज: विकया गया और जां& की गई। विर्वोर्वोे&ना पूरी होने पर आरोपी कल्लू खान क े विर्वोरुद्ध विर्वोशेष न्याया ीश की अदालत में आरोप पत्र दालिखल विकया गया, जहां एनडीपीएस एक्O की ारा 8 र्वो 21 क े तहत आरोप तय विकए गए। अभिभयुक्त ने अपने अपरा को अस्र्वोीकार कर अन्र्वोीक्षा की मांग की।
5. विर्वो&ारर्ण न्यायालय ने साक्ष्य दज: करने क े बाद, कांस्Oेबल प्रीतम सिंसह (PW[1]), कांस्Oेबल सरदार सिंसह (PW[2]), एसआई प्रर्णर्वोीर सिंसह (PW[6]) और कांस्Oेबल राजेंद्र प्रसाद (PW[8]) और कांस्Oेबल राजेंद्र प्रसाद (PW[8]) की गर्वोाही में बल पाया और अभिभविन ा:रिरत विकया विक अभिभयोजन पक्ष ने अपना मामला युविक्तयुक्त संदेह से परे जिसद्ध विकया है। विर्वो&ारर्ण न्यायालय ने आगे कहा विक, घOना की जगह सार्वो:जविनक सड़क पर है जो भर्वोानी मंडी से सुनेल की ओर जाती है। बताया जाता है विक प्रयासों क े बार्वोजूद स्र्वोतंत्र गर्वोाहों की अनुपलब् ता क े कारर्ण एस.आई.प्रर्णर्वोीर सिंसह (PW[6]) ने अस्र्थीायी रूप से भर्वोानीमंडी र्थीाने क े प्रभारी क े रूप में पदस्र्थीापन कर सहमधित उपरांत तलाशी एर्वों जब्ती की काय:र्वोाही की और उसे पूरा विकया । यह देखा गया है विक यद्यविप तलाशी सतही तौर पर की गई प्रतीत होती है, लेविकन पुलिलस कर्मिमयों क े साक्ष्य को क े र्वोल इसलिलए खारिरज नहीं विकया जा सकता है विक र्वोे विर्वोभागीय गर्वोाह हैं। आरोपी से पुलिलस कर्मिमयों की कोई दुश्मनी नहीं र्थीी और न ही विकसी गर्वोाह ने मामले में कोई विदल&स्पी विदखाई। इस प्रकार, विर्वो&ारर्ण न्याायलय ने उन विनष्कष„ क े सार्थी आरोपी कल्लू खान को एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 8 और 21 क े तहत अपरा क े लिलए दोषी ठहराया और 1,00,000 रुपये क े जुमा:ने क े सार्थी दस साल क े सश्रम कारार्वोास और धिडफ़ॉल्O क े रूप से दो साल क े सा ारर्ण कारार्वोास भुगतने का विनद†श विदया।
6. अपीलकता: ने उच्च न्यायालय क े समक्ष अपील की और मुख्य रूप से इस आ ार पर अपनी &ुनौती दी; सबसे पहले, एस.आई. प्रर्णर्वोीर सिंसह (पीडब्ल्यू 6) को संबंधि त पुलिलस स्Oेशन क े र्थीाना प्रभारी क े रूप में तैनात नहीं विकया गया र्थीा, इसलिलए र्वोह तलाशी और जब्ती करने क े लिलए अधि क ृ त नहीं र्थीे। दूसरे, तलाशी और जब्ती की काय:र्वोाही में कोई स्र्वोतंत्र गर्वोाह शाविमल नहीं र्थीा, इसलिलए उक्त बरामदगी दूविषत है। तीसरा, अभिभयोजन पक्ष क े गर्वोाहों की गर्वोाही में स्पZ विर्वोरो ाभास हैं।
7. सुनर्वोाई क े बाद, उच्च न्यायालय अभिभयुक्त/अपीलकता: द्वारा उठाई गई दलीलों से प्रभाविर्वोत नहीं हुआ और यहां तक विक सबूतों क े पुनमू:ल्यांकन पर भी, विर्वो&ारर्ण न्यायालय क े विनष्कष„ से सहमत र्थीा। उच्च न्यायालय ने कहा, यह संयोग से बरामदगी का मामला है, जबविक पारगमन में आरोपी को सार्वो:जविनक सड़क पर पुलिलस गश्त दल द्वारा संदेह र्थीा, इसलिलए, र्वोसूली की काय:र्वोाही एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 43 द्वारा शाजिसत होगी। बहरहाल, उच्च न्यायालय ने सजा और मुख्य सजा क े विनष्कष„ को प्रभाविर्वोत विकए विबना धिडफ़ॉल्O सजा को दो साल से घOा विदया।
8. इस मामले की काय:र्वोाही क े अर्वोलोकन से पता &लता है विक 29.10.2021 को समप:र्ण प्रमार्ण पत्र को देखने पर यह पाया गया विक अपीलकता: 10 साल की सजा पहले ही काO &ुका र्थीा। &ूंविक अपीलकता: ने पहले ही मुख्य सजा काO ली है, हालांविक अंतरिरम जमानत पर रिरहा होने का विनद†श विदया। रिरपोO: आगे बताती है विक अपीलकता: को 1 लाख रुपये क े जुमा:ने की राभिश जमा करने पर 24.04.2021 को जमानत पर रिरहा कर विदया गया र्थीा। इस प्रकार, विर्वो&ारर्ण न्यायालय द्वारा दी गई और उच्च न्यायालय द्वारा पुविZ की गई सजा, अपीलकता: द्वारा जुमा:ने की राभिश जमा करते हुए पहले ही भुगत ली है।
9. श्री सी.एन.श्रीक ु मार, विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ र्वोकील ने अपीलकता: का प्रधितविनधि त्र्वो करते हुए दृढ़ता से आग्रह विकया है विक र्वोत:मान मामले में, विबना स्र्वोतंत्र गर्वोाहों क े पुलिलस गर्वोाहों की मदद से एक अनधि क ृ त अधि कारी द्वारा तलाशी और जब्ती की गई र्थीी। उन्होंने भारत संघ बनाम मोहनलाल और अन्य (2016) 3 एससीसी 379 में पारिरत इस न्यायालय क े फ ै सले पर भरोसा विकया है और तक: विदया है विक जब्त विकए गए नशीले ड्रग्स/साइकोO्रोविपक पदार्थी„ की हैंडलिंलग और विनपOान क े अभार्वो में, जब्त विकए गए र्वोर्जिजत पदार्थी„ क े जिसस्Oम में र्वोापस आने क े खतरे से इंकार नहीं विकया जा सकता है। विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ अधि र्वोक्ता आगे तक: विदये विक र्वोत:मान मामले में अभिभयोजन पक्ष ने अपने मामले को उधि&त संदेह से परे साविबत नहीं विकया है। एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 50(1) क े तहत अपेधिक्षत प्रविक्रया का पालन नहीं विकया गया है। र्वोाहन का स्र्वोाविमत्र्वो अभिभयुक्त का नहीं है, हालांविक अभिभयुक्त क े अपरा क े होने में र्वोाहन का लिंलक गायब है। साक्ष्य क े दौरान प्रधितबंधि त सामग्री को न्यायालय में पेश नहीं विकया गया है। उक्त तक: क े सार्थी, यह तक: विदया जाता है विक विर्वो&ारर्ण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने अपीलकता: क े अपरा को साविबत करने में त्रुविO की है, और उसे एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 8 और 21 क े तहत आरोपों क े लिलए सजा सुनाई है।
10. दूसरी ओर, राज्य का प्रधितविनधि त्र्वो करने र्वोाले विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता का तक: है विक यह अभिभयुक्त की व्यविक्तगत तलाशी से र्वोर्जिजत र्वोस्तु की बरामदगी पर आ ारिरत मामला नहीं है, र्वोास्तर्वो में, बरामदगी मोOर साइविकल से हुई है अर्थीा:त अपरा करने में प्रयुक्त र्वोाहन से। इसलिलए, एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 50 का अविनर्वोाय: अनुपालन मामले में आकर्मिषत नहीं करता है। विर्वोजयसिंसह &ंदूभा जडेजा बनाम गुजरात राज्य (2011) 1 एससीसी 609 में इस अदालत क े संर्वोै ाविनक पीठ क े फ ै सले पर भरोसा विकया गया है, जिजसे पंजाब राज्य बनाम बलसिंजदर सिंसह (2019) 10 एससीसी 473 क े मामले में भी रखा गया है। यह आग्रह विकया जाता है विक र्वोसूली मोOर साइविकल से एक मौका र्वोसूली है, जिजसका उपयोग अपरा क े घविOत होने क े समय विकया गया, इसलिलए, एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 43 क े प्रार्वो ान आकर्मिषत होंगे। एस.क े.राजू बनाम पधिश्चम बंगाल राज्य (2018) 9 एससीसी 708 में इस न्यायालय क े फ ै सले पर भरोसा विकया गया है। एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 43 क े अनुसार, प्रर्णर्वोीर सिंसह पीडब्लू 6 तलाशी और जब्ती क े लिलए सक्षम है और उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर सही विनष्कष: दज: विकया है। यह भी तक: विदया गया है विक अगर तलाशी और जब्ती अन्यर्थीा साविबत हो जाती है, तो अदालत में र्वोर्जिजत र्वोस्तु को पेश करने की आर्वोश्यकता नहीं है। यह आग्रह विकया जाता है विक स्र्वोतंत्र गर्वोाह क े विबना पुलिलस गर्वोाहों क े आ ार पर सजा हमेशा घातक नहीं होती है। उक्त विर्वोर्वोाद क े समर्थी:न में, सुरिंरदर क ु मार बनाम पंजाब राज्य (2020) 2 SCC 563 में इस न्यायालय क े फ ै सले पर भरोसा विकया गया है ताविक यह आग्रह विकया जा सक े विक क े र्वोल इसलिलए विक अभिभयोजन पक्ष ने विकसी स्र्वोतंत्र गर्वोाह की जां& नहीं की, जरूरी नहीं विक यह विनष्कष: विनकाला जाए विक अभिभयुक्त झूठा फ ं साया गया। उक्त विनर्ण:य में, जरनैल सिंसह बनाम पंजाब राज्य (2011) 3 एससीसी 521 क े मामले में विन ा:रिरत कानून की विफर से पुविZ की गई है। अंत में यह आग्रह विकया गया विक समर्वोत[2] विनष्कष„ में आमतौर पर तब तक हस्तक्षेप करने की आर्वोश्यकता नहीं होती जब तक विक कोई विर्वोक ृ धित न हो। राज्य बनाम क ृ ष्र्ण गोपाल (1988) 4 SCC 302, गंगा क ु मार श्रीर्वोास्तर्वो बनाम विबहार राज्य (2005) 6 SCC 211, जरनैल सिंसह (सुप्रा) और एस.क े. सक्कर बनाम राज्य राज्य पधिश्चम बंगाल (2021) 4 एससीसी 483 में इस े विनर्ण:यों पर भरोसा विकया गया है। अपने अपरा को साविबत करने क े लिलए अभिभयुक्त क े सार्थी र्वोाहन का कोई संबं नहीं होने क े संबं में अपीलकता: क े तक: क े जर्वोाब में, रिरजर्वोान खान बनाम छsीसगढ़ राज्य (2020) 9 SCC 627 में इस अदालत क े एक फ ै सले पर भरोसा विकया गया है, अंत में अपील खारिरज करने क े संबं में प्रार्थी:ना की गई।
11. सुनर्वोाई एर्वों अभिभलेख तर्थीा लाए गए साक्ष्यों क े अर्वोलोकन क े पश्चात् यह स्पZ होता है विक अभिभयुक्तों को पकड़ने पर मोOर साइविकल की तलाशी लेने पर 900 ग्राम स्मैक जब्त की गई, जिजसे जब्ती एर्वों नमूना ज्ञापन तैयार विकया गया, जैसा विक विर्वोभागीय गर्वोाहों द्वारा जिसद्ध विकया गया है। र्वोत:मान मामले क े तथ्यों में, जहां सार्वो:जविनक सड़क से मौक े की र्वोसूली क े माध्यम से उपयोग विकए गए र्वोाहन से तलाशी और जब्ती की गई र्थीी, र्वोहां एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 43 क े प्रार्वो ान लागू होंगे। इस संबं में, एस. क े. राजू (सुप्रा) और एस. क े. सक्कर (सुप्रा) में इस े विनर्ण:यों से माग:दश:न लिलया जा सकता है। इसलिलए, इस मामले क े तथ्यों में प्रर्णर्वोीर सिंसह (PW[6]) द्वारा की गई र्वोसूली पर संदेह नहीं विकया जा सकता है।
12. अब इस तक: पर र्वोापस लौOते हुए विक अपरा करने क े लिलए जब्त की गई मोOर साइविकल आरोपी की नहीं है, हालांविक मोOर साइविकल से र्वोर्जिजत पदार्थी: की जब्ती को अभिभयुक्त क े अपरा को साविबत करने क े लिलए जोड़ा नहीं जा सकता है। विर्वो&ारर्ण न्यायालय ने गर्वोाहों, कांस्Oेबल प्रीतम सिंसह (PW[1]), कांस्Oेबल सरदार सिंसह (PW[2]), एसआई प्रर्णर्वोीर सिंसह (PW[6]) और कांस्Oेबल राजेंद्र प्रसाद (PW[8]) की गर्वोाही क े मूल्यांकन पर, जो विक गश्ती दल क े सदस्य र्थीे और जब्ती क े गर्वोाह र्थीे, उधि&त संदेह से परे साविबत माना विक इनक े गश्त क े दौरान अपीलकता: जब्त र्वोाहन को विर्वोपरीत विदशा से &लाते हुए आया र्थीा। पुलिलस र्वोाहन को देखते ही उसने अपनी मोOरसाइविकल र्वोापस ले ली र्थीी। हालांविक, पुलिलस Oीम ने आरोपी को पकड़कर रोक लिलया और र्वोाहन की तलाशी ली, जिजसमें र्वोाहन की सीO क े नी&े से जब्त प्रधितबंधि त स्मैक बरामद हुई । हालांविक, सार्वो:जविनक स्र्थीान पर तलाशी क े दौरान, आरोपी द्वारा &लाए जा रहे मोOर साइविकल से प्रधितबंधि त पदार्थी: को जब्त कर लिलया गया। इस प्रकार, अपीलकता: की मोOर साइविकल से मादक पदार्थी: की बरामदगी एक सार्वो:जविनक सड़क पर एक मौका र्वोसूली र्थीी। एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 43 क े अनुसार, ारा 42 में विनर्मिदZ विकसी भी विर्वोभाग क े विकसी भी अधि कारी क े पास विकसी सार्वो:जविनक स्र्थीान से, या विकसी मादक पदार्थी: या मन:प्रभार्वोी पदार्थी: या विनयंवित्रत पदार्थी: क े पारगमन में अभिभयुक्त को जब्त करने और विगरफ्तार करने की शविक्त है। कभिर्थीत अधि कारी विकसी भी व्यविक्त को तलाशी में विहरासत में ले सकता है जिजसक े पास यह विर्वोश्वास करने का कारर्ण है विक उसने एनडीपीएस अधि विनयम क े प्रार्वो ानों क े तहत दंडनीय अपरा विकया है, अगर मादक पदार्थी: या मन:प्रभार्वोी पदार्थी: का कब्जा गैरकानूनी प्रतीत होता है। अपीलकता: का प्रधितविनधि त्र्वो करने र्वोाले विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ र्वोकील प्रविक्रया का पालन करने में कोई कमी या विर्वो&ारर्ण न्यायालय द्वारा रिरकॉड: विकए गए विनष्कष„ क े लिलए प्रधितक ू लता विदखाने में असमर्थी: हैं, जिजसकी उच्च न्यायालय द्वारा पुविZ की गई है। उसक े पास से मोOर साइविकल की जब्ती संदेह से परे साविबत होती है, इसलिलए र्वोाहन क े स्र्वोाविमत्र्वो का प्रश्न प्रासंविगक नहीं है। इसी तरह क े तथ्यों में, रिरजर्वोान खान (उपरोक्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने पाया विक र्वोाहन का स्र्वोाविमत्र्वो सारहीन है। इसलिलए, विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ अधि र्वोक्ता द्वारा विदया गया तक: विनरा ार और गुर्णहीन है।
13. इस न्हिस्र्थीधित में, अपीलकता: द्वारा अदालत में नशीला पदार्थी: पेश न करने क े संबं में विदया गया तक:, जिजसक े कारर्ण अभिभयुक्तों को संदेह का लाभ विदया जाना &ाविहए, को विर्वोज्ञाविपत विकया जाना आर्वोश्यक है। राजस्र्थीान राज्य बनाम सही राम (2019) 10 एससीसी 649 क े मामले में, इस न्यायालय ने कहा विक जब सामग्री की जब्ती रिरकॉड: पर साविबत हो जाती है और विर्वोर्वोाविदत भी नहीं होती है, तो पूरे र्वोर्जिजत सामग्री को रिरकॉड: पर रखने की आर्वोश्यकता नहीं है। यह ऐसा मामला नहीं है जिजसमें अपीलकता: ने उधि&त संदेह से परे यह साविबत कर विदया है विक फोरेंजिसक जां& क े लिलए नमूने भेजते समय, सील बरकरार नहीं र्थीी या जब्त विकए गए पदार्थी: की सुरक्षा क े लिलए प्रविक्रया का भौधितक रूप से पालन नहीं विकया गया र्थीा या इसे ठीक से संग्रहीत नहीं विकया गया र्थीा, जैसा विक मोहन लाल (उपरोक्त) क े मामले में विर्वोविनर्मिदZ विकया गया है, जिजस मामले में प्रशासविनक पक्ष की ओर से विनद†शों का पालन करने क े लिलए विदया गया र्थीा। हालाँविक, मामले क े तथ्यों में, उक्त विनर्ण:य अपीलकता: क े लिलए विकसी भी तरह की मदद नहीं करता है।
14. इसी तरह, र्थीान क ु मार बनाम हरिरयार्णा राज्य (2020) 5 एससीसी 260 क े मामले में, इस न्यायालय ने पाया विक यविद जब्ती अन्यर्थीा साविबत होती है और र्वोर्जिजत सामग्री से लिलए गए और बाहर क े नमूनों को बरकरार रखा गया र्थीा; फोरेंजिसक विर्वोशेषज्ञ की रिरपोO: से र्वोर्जिजत सामग्री की क्षमता, प्रक ृ धित और गुर्णर्वोsा का पता &लता है, अपरा करने र्वोाले आर्वोश्यक तत्र्वो बनाए जाते हैं और न्यायालय में र्वोर्जिजत सामग्री का गैर-उत्पादन घातक नहीं है। जैसा विक ऊपर &&ा: की गई है, अपीलकता: यह विदखाने में विर्वोफल रहा है विक दो न्यायालयों द्वारा दज: विनष्कष: उक्त मुद्दे पर विकसी भी विर्वोक ृ धित या अर्वोै ता से ग्रस्त हैं और उसमें विकसी प्रकार क े हस्तक्षेप की आर्वोश्यकता है ।
15. इसक े सार्थी ही, एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 50 क े गैर- अनुपालन क े संबं में अपीलकता: द्वारा दी गई दलीलों में कोई दम नहीं है क्योंविक अभिभयुक्त क े शरीर से र्वोर्जिजत पदार्थी: की कोई जब्ती नहीं की गई है, जिजसका अनुपालन एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 50 क े प्रार्वो ान का अविनर्वोाय: रूप से पालन करना होगा। र्वोत:मान मामले में, सार्वो:जविनक स्र्थीान पर मोOर साइविकल की तलाशी में, प्रधितबंधि त सामग्री को जब्त विकया गया, जैसा विक खुलासा हुआ। इसलिलए, र्वोत:मान मामले में ारा 50 का अनुपालन आकर्मिषत नहीं करता है। विर्वोजयसिंसह (उपरोक्त) क े मामले में यह तय है विक क े र्वोल व्यविक्तगत तलाशी क े मामले में, अधि विनयम की ारा 50 क े प्रार्वो ानों का पालन विकया जाना आर्वोश्यक है, लेविकन र्वोाहन क े मामले में नहीं जैसा विक र्वोत:मान मामले में है, सुरिंरदर क ु मार (सुप्रा) और बलसिंजदर सिंसह (सुप्रा) क े फ ै सलों क े बाद। इस न्यायालय क े तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, अधि र्वोक्ता द्वारा एनडीपीएस अधि विनयम की ारा 50 क े गैर-अनुपालन क े तक: को विनरस्त विकया जाता है।
16. दो अदालतों द्वारा रिरकॉड: विकए गए विकसी भी स्र्वोतंत्र गर्वोाह की खरीद क े विबना, पूरी तरह से पुलिलस गर्वोाहों की गर्वोाही पर भरोसा करने क े संबं में उठाए गए मुद्दे को भी इस अदालत द्वारा सुरिंरदर क ु मार (सुप्रा) क े मामले में विनपOाया गया है, क े र्वोल इसलिलए विक स्र्वोतंत्र गर्वोाहों का परीक्षर्ण नहीं विकया गया, यह विनष्कष: नहीं विनकाला जा सका विक अभिभयुक्त को झूठा फ ं साया गया है। इसलिलए, उक्त मुद्दा भी अच्छी तरह से सुलझा हुआ है और विर्वोशेष रूप से, र्वोत:मान मामले क े तथ्यों को देखते हुए, जब अभिभयुक्त का आ&रर्ण संविदग् पाया गया और उसक े द्वारा उपयोग विकए गए र्वोाहन से एक मौका बरामदगी सार्वो:जविनक स्र्थीान से की गई और उधि&त संदेह से परे साविबत हुई, अपीलकता: इस मुद्दे पर कोई लाभ नहीं उठा सकता है। हमारे विर्वो&ार में, न्यायालयों क े समर्वोत[2] विनष्कष„ में हस्तक्षेप की आर्वोश्यकता नहीं है।
17. यह देखना है विक क ृ ष्र्ण गोपाल (उपरोक्त) क े विनर्ण:य क े अनुसार, यह माना जाता है विक भारत क े संविर्वो ान क े अनुच्छेद 136 क े तहत शविक्त क े प्रयोग में हस्तक्षेप क े र्वोल तभी विकया जा सकता है, जब विर्वो&ारर्ण न्यायालय का फ ै सला घोर त्रुविO से दूविषत होता है। इस न्यायालय क े पास गंगा कु मार श्रीर्वोास्तर्वो (सुप्रा) क े मामले में उक्त मुद्दे पर पुनर्मिर्वो&ार करने का एक अर्वोसर है, जिजससे यह तय हो गया है विक हस्तक्षेप तब विकया जा सकता है जब सामान्य सार्वो:जविनक महत्र्वो क े कानून का सर्वोाल उठता है या कोई विनर्ण:य न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरता है। यह माना जाता है विक मामले में, कानून या प्रविक्रया की विकसी भी त्रुविO से विनष्कष: खराब होता है या प्राक ृ धितक न्याय क े जिसद्धांतों क े विर्वोपरीत पाया जाता है, और सबूतों को गलत तरीक े से पढ़ा जाता है, या जहां उच्च न्यायालय क े विनष्कष: स्पZ रूप से विर्वोक ृ त और रिरकॉड: पर सबूतों से असमर्थी: हैं, अनुच्छेद 136 क े तहत हस्तक्षेप क े लिलए कहा जा सकता है। जरनैल सिंसह (उपरोक्त) क े मामले में उक्त जिसद्धांत को विफर से दोहराया गया है, गंगा क ु मार श्रीर्वोास्तर्वो (उपरोक्त) में विन ा:रिरत कानून की पुविZ करते हुए। हाल ही में, एस.क े.सक्कर (सुप्रा) क े मामले में भी, इस न्यायालय ने भारत क े संविर्वो ान क े अनुच्छेद 136 क े तहत इस न्यायालय द्वारा शविक्त क े प्रयोग में हस्तक्षेप की गुंजाइश क े मुद्दे की विफर से पुविZ की है।
18. पूर्वो:गामी &&ा: क े मद्देनजर, र्वोत:मान मामले क े तथ्यों को देखते हुए, हमारी सुविर्वो&ारिरत राय में, आरोपों क े लिलए अभिभयुक्तों को दोषी ठहराने र्वोाले न्यायालयों द्वारा समर्वोत[2] रूप से दज: विकए गए विनष्कष: और विन ा:रिरत सजा काOने क े लिलए उसे विनद†भिशत करने क े लिलए, इस न्यायालय द्वारा विकसी भी प्रधितक ू लता, अर्वोै ता, र्वोांभिछत हस्तक्षेप से ग्रस्त नहीं है।
19. तद्नुसार, हम इस अपील में कोई गुर्ण नहीं पाते हैं। अत: इसे खारिरज विकया जाता है। &ूंविक अपीलकता: पहले ही दी गई सजा काO &ुका है और जुमा:ने की राभिश जमा करने क े बाद रिरहा हो &ुका है, इसलिलए, आगे कोई विनद†श जारी करने की आर्वोश्यकता नहीं है। [इंविदरा बनज2] [जे.क े. महेश्वरी] नयी विदल्ली; 11 विदसंबर, 2021 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.