(1) अनुमति प्रदान की गई। (2) अपीलक ा@ ने जून, 2015 में एक निवज्ञापन जारी निकया जिजसमें ग्राम पंचाय अति कारी क े पद को भरने क े लिलए आवेदन मांगे गए थे।उत्तर प्रदेश राज्य में पंचाय ी राज मंत्री श्री क ै लाश यादव थे।निवज्ञापन क े अनुसार निदनांक 21.02.2016 परीक्षा होनी थी।श्री क ै लाश यादव का निदनांक 09.02.2016 को निन न हो गया। (3) परीक्षा में प्रश्न संख्या 46 इस प्रकार थाः “46. व @मान में उत्तर प्रदेश में पंचाय ी राज मंत्री कौन हैं? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
D. श्री दुगा@ प्रसाद यादव" (4) उत्तर क ुं जी निदनांक 25.02.2016 को प्रकाशिश हुई।जैसा निक प्रश्न संख्या 46 क े संबं में आयोग क े निनण@य से स्पष्ट है निक निदनांक 21.02.2016 को परीक्षा हुई थी, श्री क ै लाश यादव जिजनका नाम निवकल्प बी क े संदभ@ में सही उत्तर क े रूप में निदखाया गया था, का निन न हो गया था और इसलिलए, निवकल्प बी सही उत्तर नहीं होगा। वास् व में यह एक अप्रत्याशिश घटना थी जिजसे अं र्दृ@निष्ट क े लाभ क े साथ देखा जा सक ा है। दनुसार अपीलाथ[7] आयोग ने निदनांक 29.03.2016 को निनम्नलिललिख निनण@य लिलयाः क्रम संख्या निवचार क े लिलए मुद्दा निनण@य 1 ग्राम पंचाय अति कारी (सामान्य चयन) परीक्षा, 2015 की लिललिख परीक्षा क े प्रश्न पत्र की उत्तर क ुं जी में निदए गए उत्तर क े लिखलाफ अभ्यर्थिथयों द्वारा की गई आपलित्तयों क े संबं में निदनांक 21 फरवरी, 2016 (रनिववार) को आयोजिज ग्राम पंचाय अति कारी (सामान्य चयन) परीक्षा-2015 की लिललिख परीक्षा की उत्तर क ुं जी क े लिखलाफ अभ्यर्थिथयों द्वारा उठाए गए आपलित्तयों की समीक्षा/जांच क े दौरान, इस पहलू पर ध्यान आया निक एक प्रश्न (सेट ए-55, सेट बी-45, सेट सी-46 और सेट डी-63) क े उत्तर का सही निवकल्प उत्तर प्रदेश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े पंचाय ी राज मंत्री श्री क ै लाश यादव हैं (निवकल्प-'बी'), लिललिख परीक्षा की ारीख 21 फरवरी, 2016 से पहले यानी निदनांक 09 फरवरी, 2016 को श्री यादव की मृत्यु नहीं हुई थी, प्रत्येक प्रश्न क े लिलए 01 (एक) अंक य निकया गया है। ब ाई गई स्थिस्थति में उतिच निवचार करने क े बाद सव@सम्मति से यह निनण@य लिलया गया निक जिजन अभ्यर्थिथयों ने निवकल्प ('बी') को सही उत्तर क े रूप में चुना है या उक्त प्रश्न क े लिलए निकसी भी निवकल्प को तिचनिv नहीं निकया है, उन्हें 01 (एक) अंक निदया जाएगा और इस प्रश्न क े सही उत्तर क े रूप में निवकल्प ए, सी, डी को चुनने वाले अभ्यर्थिथयों क े संबं में कोई कार@वाई की आवश्यक ा नहीं है। (5) परिरणाम निदनांक 24.12.2016 को घोनिy निकए गए।परिरणामों क े आ ार पर निदनांक 27.12.2016 को अपीलक ा@ ने रिरनिक्तयों को भरने क े लिलए जिसफारिरशें की।उक्त परीक्षा में प्रति वादी एक अभ्यथ[7] था।प्रश्न संख्या 46 क े संबं में, उसने निवकल्प संख्या ए को चुना और उसने 86 अंक प्राप्त निकए।प्रति वादी ओबीसी वग@ का था और उसक े लिलए कट ऑफ अंक 87 निन ा@रिर थे।वह आवश्यक कट ऑफ से एक अंक कम हो गया।उसने एक रिरट यातिचका दालिखल की जिजसकी परिरणति इस व @मान अपील में हो गई।उक्त रिरट यातिचका में मांगी गई प्राथ@ना पर ध्यान निदया जा सक ा है: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "इसलिलए यह सम्मानपूव@क प्राथ@ना की जा ी है निक माननीय न्यायालय निनम्नलिललिख क ृ पा प्रदान करें: - क. परमादेश की रिरट की प्रक ृ ति में एक रिरट, आदेश या निनद•श जारी करें और प्रति वादी संख्या 2 और 3 को निनद•श और आदेश दें निक वह यातिचकाक ा@ को बुकलेट श्रृंखला 'सी' क े प्रश्न संख्या 46 का अंक प्रदान करें और एक नई चयन सूची ैयार करें। ख. परमादेश की रिरट की प्रक ृ ति में एक रिरट, आदेश या निनद•श जारी करें, जिजसमें प्रति वादी संख्या 2 और 3 को निनद•श निदया गया हो निक वह याची क े अभ्यथ@न पर निवचार करने क े लिलए चयनिन अभ्यथ[7] या यातिचकाक ा@ को ग्राम पंचाय अति कारी परीक्षा-2015 (निवज्ञापन संख्या 7(3)/2015 (सामान्य चयन) में ग्राम पंचाय अति कारी क े पद पर समायोजिज निकया जाए। ग. माननीय न्यायालय कोई अन्य रिरट, आदेश या निनद•श जारी करें जो मामले की परिरस्थिस्थति यों में उतिच हो जिजससे न्याय क े उद्देश्यों को सुरतिक्ष निकया जा सक े अन्यथा यातिचकाक ा@ओं को अपूरणीय क्षति होगी। घ. यातिचकाक ा@ओं को यातिचका की लाग अति निनण[7] निकया जाए।" (6) निवद्व एकल न्याया ीश ने प्रति वादी क े निववाद में गुण-दोy नहीं पाया और रिरट यातिचका खारिरज कर दी गई। (7) हालांनिक, आक्षेनिप निनण@य से तिडवीजन बेंच ने प्रति वादी द्वारा दायर अपील की अनुमति दी।खंडपीठ ने निवचार निकया निक इस मामले में कोई निववाद नहीं है निक चयन परीक्षा की ति शिथ पर प्रश्न संख्या 46 क े सभी निवकल्प गल थे जो त्कालीन मंत्री क े दुखद निन न क े कारण था।प्रश्न का उत्तर न देने वालों को अंक देना उतिच नहीं माना जा सक ा। ो श्री क ै लाश यादव क े मंत्री बनने क े निवकल्प का भी उत्तर निमल गया। तिडवीजन बेंच ने अपीलक ा@ को निनण@य लेने का निनद•श निदया निक या ो बुकलेट श्रृंखला Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 'सी' क े प्रश्न संख्या 46 को हटा दें या प्रति वादी को भी अंक निदया जाए और यनिद वह अंक निदये जाने पर मेरिरट में आ ा है ो मेरिरट स्थिस्थति क े अनुसार आगे की उतिच कार@वाई की जाए।(8) हमने अपीलक ा@ की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता और प्रति वादी की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता को सुना। 4 सीए सं 7720/2021 (@एसएलपी (सी) सं. 10914/2021) (9) अपीलाथ[7] की ओर से उपस्थिस्थ निवद्वान अति वक्ता का क @ है निक प्रश्न संख्या 46 को हटाने का निनद•श गंभीर पूवा@ग्रह का कारण बनेगा।वy@ 2015 में शुरू हुए चयन क े आ ार पर और निदनांक 21.02.2016 को हुई परीक्षा क े बाद जिजसक े संबं में परिरणाम निदनांक 24.12.2016 को प्रकाशिश हुआ था और जिजसक े अनुसरण में अभ्यर्थिथयों की संख्या की निनयुनिक्तयों को मू @ रूप निदया गया था, उन्हें निफर से काम करना होगा।इसमें कोई संदेह नहीं है निक अपीलक ा@ क े निवद्वान अति वक्ता, द्वारा क ु लपति कानपुर निवश्वनिवद्यालय बनाम समीर गुप्ता (1983) 4 एससीसी 309 मामले में इस न्यायालय क े निनण@य द्वारा लिलए गए र्दृनिष्टकोण से समथ@न प्राप्त निकया। यह उनका क @ है निक अपीलक ा@ आयोग द्वारा उठाए गए र्दृनिष्टकोण को स्पष्ट रूप से निवक ृ नहीं माना जा सक ा है।इस रह क े निनष्कy@ पर पहुंचने पर यह न्यातियक समीक्षा काय@वाही में जांच निनकाय द्वारा लिलये गए र्दृनिष्टकोण को स्थानिप करने पर निवचार नहीं हो सक ा है।वह निनम्नलिललिख रीक े से क @ को सही ठहराएगा।यह कहा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गया निक जहां क निवकल्प 'बी' जो श्री क ै लाश यादव है, को मंजूरी देकर प्रश्न संख्या 46 का उत्तर देने वाले अभ्यर्थिथयों को अंक देने का निनण@य लेने का था प्रत्यक्ष रूप से आयोग का निवचार था निक वह व्यनिक्त वास् व में मंत्री थे और उत्तर सही भी हो ा लेनिकन परीक्षा की ारीख से महज 12 निदन पहले उनका निन न हो गया।जहां क उन अभ्यर्थिथयों का संबं है जिजन्होंने संबंति प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास नहीं निकया, न्यायालय को यह निवचार करने क े लिलए राजी निकया जा ा है निक यह देख े हुए निक प्रश्न क े सभी उत्तर परीक्षा की ारीख क े अनुसार सही नहीं थे और यनिद कोई अभ्यथ[7] प्रश्न का उत्तर नहीं दे ा है ो यह उसक े लिखलाफ काम नहीं करना चानिहए। 5 सीए सं 7720/2021 (@एसएलपी (सी) सं. 10914/2021) यह प्रति वादी क े मामले क े निबल्क ु ल निवपरी है, जिजसने निनस्संदेह निवकल्प 'ए' को चुना है जिजसे निकसी भी समय सही उत्तर नहीं माना जा सक ा है।दूसरे शब्दों में प्रति वादी का मामला उस अभ्यथ[7] से शिभन्न स् र पर उठा है जिजसने स्पष्ट रूप से गल उत्तर निदया है।ऐसी परिरस्थिस्थति यों में, वह हमारी स्वीक ृ ति क े लिलए इस जिसद्धां की सराहना करेंगे निक निकसी निनकाय द्वारा चयन क े मामले में, जब क निक कोई निनण@य स्पष्ट रूप से निवक ृ न हो, न्यायालय को व्यावहारिरक र्दृनिष्टकोण अपनाना चानिहए। (10) इसक े निवपरी, प्रति वादी क े निवद्वान अति वक्ता ने पुरजोर क @ निदया निक प्रति वादी जो ओबीसी वग@ से संबंति है, ने 86 अंक प्राप्त निकए थे जो निक कट ऑफ अंक से क े वल एक अंक कम था।उन्हें यह ब ाने में कष्ट हो रहा था निक उच्च न्यायालय ने जो निनद•श निदया है वह यह है निक यनिद आयोग ने प्रश्न संख्या 46 को नहीं हटाया, ो उन्हें प्रश्न संख्या 46 क े लिलए एक अंक देकर स्थिस्थति पर निफर से काम करना चानिहए और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसक े बाद, यनिद उसने पया@प्त उच्च अंक प्राप्त निकए निक उसका चयन सुरतिक्ष हो सक े ो अक े ले उसे ही लाभ निमलेगा।इससे भी महत्वपूण@ बा यह है निक उन्होंने अंकु र श्रीवास् व और अन्य व्यनिक्त ने रिरट यातिचका संख्या 10779/2018 दायर निकया। 6 सीए सं 7720/2021 (@एसएलपी (सी) सं. 10914/2021) उक्त मामले में अपीलक ा@ का पक्ष यह था निक बोड@ भर क े सभी अभ्यर्थिथयों को प्रश्न क े लिलए एक अंक की अनुमति देने का निनण@य लिलया गया है।वह ब ा े हैं निक उक्त मामले में पारिर आदेश क े अवलोकन से प ा चल ा है निक उच्च न्यायालय ने अपीलक ा@ द्वारा प्रस् ु यातिचका को देख े हुए रिरट यातिचका को खारिरज कर निदया क्योंनिक यातिचकाक ा@ओं की शिशकाय नहीं बची थी।वह आगे हमारे सामने यह भी क @ देंगे निक न्यायालय इस न्यायालय द्वारा गुरु नानक देव निवश्वनिवद्यालय बनाम सौनिमल गग@ और अन्य (2005) 13 एससीसी 749 में निन ा@रिर जिसद्धां को ध्यान में रख े हुए उनकी समस्या पर संपक @ कर सक ा है। इसमें, ीन निवद्वान न्याया ीशों ने गल उत्तरों या बस्थिल्क गल प्रश्नों/अस्पष्ट प्रश्नों की समस्या क े निनस् ारण क े अन्य बा ों क े साथ-साथ यह अव ारिर निकया निक "निकसी ऐसे छात्र को अंक देना पूण@ या अन्यायपूण@ है जिजसने उन प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास क नहीं निकया।"इसलिलए, इस मामले क े थ्यों में वह दर्थिश करेंगे निक जिसद्धां उपयुक्त है और प्रत्यथ[7] क े लिलए उस तिचv को अस्वीकार करने का कोई औतिचत्य नहीं है जिजसका वह हर मायने में हकदार है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (11) इस मामले में वy@ 2015 में निवज्ञापन जारी कर चयन शुरू हुआ था।परीक्षा निदनांक 21.02.2016 को हुई थी।प्रश्न संख्या 46 का निवकल्प 'बी' सही उत्तर हो ा, लेनिकन परीक्षा से ठीक 12 निदन पहले मंत्री की असामतियक मृत्यु हो गई।दूसरे शब्दों में, जिजस ारीख को परीक्षक ने उस प्रश्न का समा ान निकया जिजससे हम संबंति हैं, यह उस प्रश्न का मामला नहीं है जो सही निवकल्प क े निबना था। 7 सीए सं 7720/2021 (@एसएलपी (सी) सं. 10914/2021) उस समय यह कोई अस्पष्ट प्रश्न नहीं था।परिरस्थिस्थति यों ने आयोग और अभ्यर्थिथयों दोनों को पीछे छोड़ निदया, हालांनिक, परीक्षा की ारीख क े अनुसार निवकल्प 'बी' गल उत्तर होगा।कोई भी निवकल्प संभव ः सही उत्तर नहीं हो सक ा है।इसलिलए उस पर आयोग बैठा और निनण@य लिलया।यह ध्यान देने योग्य है निक प्रति वादी ने रिरट यातिचका में उक्त निनण@य को इस रूप में लागू करने का निवकल्प नहीं चुना है।दूसरे, हम इस थ्य से बेखबर नहीं हो सक े हैं निक उस समय क, तिडवीजन बेंच ने आक्षेनिप निनण@य निदनांक 18.02.21 का प्रति पादन निकया है निक चयन क े रूप में निनयुनिक्तयों को आगे बढ़ाने में कई निनण@य निदये जा चुक े हैं।इसलिलए, इस स् र पर प्रश्न को हटाने की निदशा उपयुक्त उपाय नहीं हो सक ी है, हालांनिक आम ौर पर हमने इस रह की निदशा क े पीछे जिसद्धां पर सवाल नहीं उठाया होगा।जहां क अन्य निवकल्प जो अपीलक ा@ को निनद•श क े रूप में प्रस् ु निकया गया है, जो प्रति वादी को एक अंक देने क े लिलए है और हमें अनिनवाय@ रूप से अपीलक ा@ द्वारा लिलए गए निनण@य की अवै ा क े आ ार पर इस रह क े निनद•श को सफल ापूव@क लागू करना होगा।. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (12) हमारा निवचार है निक न्यातियक समीक्षा का जिसद्धां जो ऐसे मामले में उतिच है, वास् व में न्यायालय की शनिक्त प्रक ृ ति में पय@वेक्षी है और अति कार क्षेत्र एक अपीलीय निनकाय का नहीं है।निनण@य लेने की प्रनिक्रया की वै ा की चुनौ ी को प्रासंनिगक प्रजिसद्ध इनपुट क े संदभ@ में सराहा जाना चानिहए। 8 सीए सं 7720/2021 (@एसएलपी (सी) सं. 10914/2021) जैसा निक पहले ही देखा जा चुका है, इस थ्य क े अलावा निक इस रह क े निनण@य पर सवाल नहीं उठाया जा ा है और यहां क निक जैसा है वैसा ही निनण@य लिलया जा रहा है और इसकी वै ा की जांच करने क े लिलए आगे बढ़ रहा है, हमें प्रति वादी की आपलित्त को इस आ ार पर बनाए रखना मुस्थिश्कल हो सक ा है निक अपीलक ा@ आयोग ने उन लोगों को अंक देने का भी फ ै सला निकया है जिजन्होंने प्रश्न का उत्तर देने का कोई प्रयास नहीं निकया है। (13) हम पहले ही गुरु नानक देव निवश्वनिवद्यालय (उपरोक्त) में ीन निवद्वान न्याया ीशों की खंडपीठ द्वारा व्यक्त निकए गए र्दृनिष्टकोण पर ध्यान दे चुक े हैं।लेनिकन हम इस मामले क े थ्यों में उक्त जिसद्धां को लागू करने में न्यायसंग नहीं हो सक े हैं।यह एक ऐसा मामला है जहां परीक्षा हुई थी, वास् व में निवकल्प क े रूप में निदए गए उत्तरों में से कोई भी सही नहीं था।वास् व में जिजस ारीख को प्रश्न था वह उत्तर (निवकल्प 'बी') सही था।यही वह क @ है जो स्पष्ट रूप से निवकल्प 'बी' पर निटक करक े उत्तर देने वालों को अंक देने का निनण@य लेने में अपीलक ा@ आयोग क े साथ मूल्यांकन निकया गया है। जिजन्होंने निकसी भी निवकल्प का उत्तर नहीं निदया, उन्हें अपीलक ा@ क े आ ार पर अंक निदए गए निक कोई भी उत्तर सही नहीं था।दूसरी ओर, प्रति वादी ने उन अभ्यर्थिथयों क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एक वग@ का प्रति निनति त्व निकया, जिजन्होंने आगे बढ़कर एक उत्तर निदया जो निकसी भी समय निकसी भी मानदंड से सही नहीं था।इसलिलए, यह यहाँ है निक आयोग ने उन श्रेशिणयों क े बीच अं र निकया, जिजन्हें संक्षेप में, स्पष्ट रूप से मनमाना नहीं माना जाएगा। 9 सीए सं 7720/2021 (@एसएलपी (सी) सं. 10914/2021) (14) जहां क उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश क े रूप में अन्य मुकदमेबाजी जिजसमें अपीलक ा@ आयोग क े वकील ने यह निनण@य निकया निक सभी अभ्यर्थिथयों को एक अंक निदये जाने और प्रति वादी द्वारा उस पर आ ारिर क @ का संबं है, अपीलक ा@ का पक्ष यह है निक प्रति वादी की स्थिस्थति में निकसी भी अभ्यथ[7] को जिजसने गल उत्तर निदया है (निवकल्प बी क े अलावा अन्य उत्तर) को एक अंक नहीं निदया गया है।हम इस कथन को अशिभलिललिख कर े हैं।इसे प्रत्युत्तर शपथपत्र का भी निहस्सा ब ाया जा रहा है। (15) ऐसी परिरस्थिस्थति यों में इस मामले क े थ्यों में हमारा निवचार है निक अपीलाथ[7] ने हस् क्षेप का मामला बनाया है।अपील को अनुमति है दी जा ी है और आक्षेनिप निनण@य को अपास् निकया जा ा है। खच• क े रूप में कोई आदेश नहीं होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA.............................................… ( माननीय न्यायमूर्ति क े.एम. जोसेफ).............................................… ( माननीय न्यायमूर्ति पानिमनिदघन् म श्री नरजिसम्हा) नई निदल्ली; 14 निदसंबर, 2021 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA