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भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 7411/2021
वि$जनौर अ$(न कोऑपरेवि+व $ैंक लिलविम+ेड, वि$जनौर और अन्य ... अपीलार्थी3
$नाम
मीनल अग्रवाल और अन्य ... प्रत्यर्थी3
विन र्ण( य
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह
JUDGMENT
1. रिर+ याति>का संख्या 15194/2021 में इलाहा$ाद में उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनर्ण(य और आदेश 16.08.2021 विदनांविक से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, सिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने प्रत्यर्थी3 संख्या 1 (मूल रिर+ याति>काक ा() द्वारा दायर की गई उक्त रिर+ याति>का को अनुमति प्रदान की है और भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए अपीलक ा(-$ैंक ने एकमुश् विनप+ान (ओ+ीएस) क े लिलए मूल रिर+ याति>काक ा( क े आवेदन पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने क े लिलए को विनदYश दे े हुए परमादेश की एक रिर+ जारी की है, $ैंक ने व (मान अपील दालिZल की है।
2. संक्षेप में व (मान अपील क े थ्य इस प्रकार हैं: यह विक मूल रिर+ याति>काक ा( ने $ैंक से लगभग 1 करोड़ रूपये की क्र े तिड+ सुविव ा प्राप्त की र्थीी।$ैंक क े सार्थी उक्त ऋर्ण Zा े को "नॉन-परफाॉर्मिंमग असे+, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (एनपीए)" क े रूप में वग3क ृ विकया गया र्थीा। $ैंक ने विवत्तीय आस्तिi यों क े प्रति भूति करर्ण और पुनर्निनमा(र्ण और सुरक्षा विह अति विनयम, 2002 (ए स्तिiमनपश्चा 'सरफ े सी अति विनयम' क े रूप में संदर्भिभ ) क े प्राव ानों क े ह काय(वाही भी शुरू की।यह विक दो अन्य ऋर्ण Zा े भी र्थीे सिजन्हें प्रत्यर्थी3 संख्या 1- मूल रिर+ याति>काक ा( द्वारा विनयविम रूप से >लाया जा रहा र्थीा, सिजसका अर्थी( है विक भुग ान को दो अन्य ऋर्ण Zा ों क े सं$ं में विनयविम विकया गया र्थीा।हालांविक, जहां क व (मान ऋर्ण Zा े का सं$ं है, सिजसे एनपीए घोविo विकया गया र्थीा, ओ+ीएस क े लाभ को $ढ़ाने क े लिलए आवेदन प्रi ु करने क विकसी भी राथिश का भुग ान नहीं विकया गया र्थीा। 2.[1] यह विक $ैंक द्वारा वन +ाइम से+लमें+ iकीम विदनांक 01.08.2013 को ओ+ीएस सक ु( लर द्वारा जारी की गई र्थीी सिजसमें प्राव ान र्थीा विक उक्त परिरपत्र में विनविह श s का पालन करने पर, ओ+ीएस का लाभ देनदार द्वारा लिलया जा सक ा है।ओ+ीएस योजना का लाभ विदनांक 30.11.2019 क $ढ़ाया गया।मूल रिर+ याति>काक ा( ने विदनांक 22.07.2019 को ओ+ीएस क े आवेदन क े ह अपने मामले पर विव>ार क े लिलए एक आवेदन प्रi ु विकया।संसू>ना 17.09.2019 विदनांविक क े माध्यम से, ओ+ीएस क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसका आवेदन इस आ ार पर Zारिरज कर विदया गया विक वह ओ+ीएस योजना क े ह ओ+ीएस क े लिलए पात्र नहीं है और यह विक विगरवी रZी गई संपलित्त की नीलामी द्वारा ऋर्ण की वसूली की जा सक ी है और ऋर्ण राथिश की वसूली की संभावना है और उसक े ऋर्ण Zा े को 'एनपीए' घोविo विकया गया है। ऐसा प्र ी हो ा है विक एनपीए पात्र ा से $ाहर आने क े लिलए, मूल रिर+ याति>काक ा( ने विदनांक 02.03.2020 को 60 लाZ रुपये की राथिश जमा की, अर्थीा(, उसक े पूव( क े आवेदन को इस आ ार पर Zारिरज कर विदया विक उसका ऋर्ण Zा ा “एनपीए” है, वह ओ+ीएस योजना क े लिलए पात्र नहीं है। 2.2. $ैंक क े $ोड( ने विदनांक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 28.12.2020 को एक प्रi ाव भी पारिर विकया विक मूल रिर+ याति>काक ा( ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े लिलए पात्र नहीं है, इस कारर्ण से विक ऋर्ण Zा ा पूरी रह से वसूली योग्य है और ऋर्ण राथिश की वसूली क े लिलए सभी उपाय अभी क समाप्त नहीं हुए हैं और ऋर्ण राथिश की वसूली की संभावना अभी भी है।
2.3. मूल रिर+ याति>काक ा( ने उच्च न्यायालय क े समक्ष रिर+ याति>का संख्या 18221/2020 की रिर+ याति>का दायर की, सिजसमें $ैंक द्वारा ओ+ीएस योजना का लाभ देने क े लिलए उसक े आवेदन को Zारिरज कर े हुए विदनांक 17.09.2019 क े आदेश को >ुनौ ी दी गई र्थीी।उच्च न्यायालय ने विदनांक 25.01.2021 क े आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने $ैंक को मूल रिर+ याति>काक ा( की थिशकाय पर विव>ार करने और उसे सुनवाई का उति> अवसर प्रदान करने क े $ाद विदनांक 22.07.2019 क े उनक े अभ्यावेदन पर विनर्ण(य लेने का विनदYश दे े हुए यर्थीासंभव शीघ्र ा से और अति मान ः >ार सप्ताह की अवति क े भी र उक्त रिर+ याति>का का विनप+ारा विकया। यह ध्यान देने की आवश्यक ा है विक उक्त रिर+ याति>का में, मूल रिर+ याति>काक ा( ने $ैंक को ओ+ीएस का लाभ देने का विनदYश देने वाले परमादेश क े लिलए भी प्रार्थी(ना की ाविक मूल रिर+ याति>काक ा( वo( 2013 में लिलए गए ऋर्ण क े लिलए अपनी $काया राथिश का भुग ान करने क े लिलए एक $ार में पूरी राथिश जमा कर सक े, सिजसे उच्च न्यायालय द्वारा iवीकार नहीं विकया गया र्थीा और उच्च न्यायालय ने क े वल $ैंक को उसकी थिशकाय पर विव>ार करने और विदनांक 22.07.2019 को उसक े अभ्यावेदन पर विनर्ण(य लेने का विनदYश विदया र्थीा।
2.4. इसक े $ाद, मूल रिर+ याति>काक ा( ने विफर से ओ+ीएस क े ह लाभ देने क े लिलए $ैंक को विदनांक 06.02.2021 को एक आवेदन प्रi ु विकया, सिजसे $ैंक द्वारा विदनांक 08.01.2021 और 25.02.2021 क े संसू>ना क े माध्यम से विफर से Zारिरज कर विदया गया र्थीा। मूल रिर+ याति>काक ा( ने उच्च न्यायालय क े समक्ष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रिर+ याति>का संख्या 15194/ 2021 एक नई रिर+ याति>का दायर की, सिजसमें ओ+ीएस क े लाभ क े अनुदान क े लिलए उसक े आवेदन को Zारिरज कर े हुए विदनांक 08.01.2021 और 25.02.2021 क े उपरोक्त आक्षेविप आदेशों को रद्द करने की प्रार्थी(ना की गई और परिरपत्र संख्या सी-108 और सी-121 क े माध्यम से जारी ओ+ीएस का लाभ देने क े लिलए $ैंक को विनदYश देने क े लिलए परमादेश की एक रिर+ क े लिलए भी प्रार्थी(ना की।
2.5. जवा$ में विवi ृ शपर्थीपत्र दालिZल करक े $ैंक ने पूव क्त रिर+ याति>का का पुरजोर विवरो विकया।अन्य $ा ों क े सार्थी -सार्थी यह कहा गया र्थीा विक रिर+ याति>काक ा( ओ+ीएस योजना क े ह कोई राह पाने का हकदार नहीं र्थीा क्योंविक ऋर्ण राथिश की वसूली की संभावनाएं कम नहीं हो ी हैं और स्तिiर्थीर रह ी हैं और पया(प्त मात्रा में संपलित्त $ैंक क े पास विगरवी रZी गई है और इसलिलए विगरवी रZी गई संपलित्त की नीलामी करक े $ैंक ऋर्ण राथिश की वसूली कर सक ा है।यह भी कहा गया विक उनका मामला ओ+ीएस क े लिलए पात्र श्रेर्णी क े अं ग( नहीं आ ा है। यह कहा गया र्थीा विक मूल रिर+ याति>काक ा( का मामला भी विनप+ान सलाहकार सविमति को विव>ार क े लिलए भेजा गया र्थीा, सिजसने रिर+ याति>काक ा( को सुनने क े $ाद ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसक े आवेदन को भी Zारिरज कर विदया। भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह आक्षेविप विनर्ण(य और आदेश और शविक्तयों क े प्रयोग से, उच्च न्यायालय ने परमादेश की रिर+ जारी की है और $ैंक को ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसक े आवेदन पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने का विनदYश विदया है।
2.6. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनर्ण(य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, सिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए $ैंक को ओ+ीएस क े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसक े आवेदन पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने क े लिलए $ैंक को विनदYश देने क े लिलए एक परमादेश जारी विकया है, $ैंक ने व (मान अपील दालिZल की है। अपीलार्थी3- $ैंक की ओर से पेश वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता श्री मीनाक्षी अरोड़ा, एवं प्रत्यर्थी3 संख्या 1 की ओर से वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता श्री वी.क े. शुक्ला पेश हुए। 3.[1] यहां अपीलक ा( की ओर से पेश हुई वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा ने जोरदार रीक े से कहा विक उच्च न्यायालय ने ओ+ीएस क े अनुदान क े लिलए मूल रिर+ याति>काक ा( क े आवेदन पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने क े लिलए $ैंक को विनदYश देने वाले परमादेश की रिर+ जारी करने में महत्वपूर्ण( गल ी की है, सिजसक े अनुसार, $ैंक की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता को भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए पारिर नहीं विकया जा सक ा र्थीा।
3.2. यह पुरजोर रीक े से कहा गया है विक $ैंक और सार्थी ही विनप+ान सलाहकार सविमति द्वारा इस रह क े एक स>े विनर्ण(य लिलया गया र्थीा विक मूल रिर+ याति>काक ा( ओ+ीएस क े लाभ क े लिलए पात्र नहीं है क्योंविक वह ओ+ीएस का लाभ उठाने क े लिलए पात्र ा मानदंड को पूरा नहीं कर रही है।
3.3. यह आगे कहा गया है विक आर$ीआई क े विदशाविनदYशों क े सार्थी -सार्थी ओ+ीएस योजना को ध्यान में रZ े हुए और वह भी मूल रिर+ याति>काक ा( को एक अवसर देने क े $ाद एक स>े विनर्ण(य लिलया गया र्थीा और इसलिलए इसे उच्च न्यायालय द्वारा अपाi नहीं विकया जाना >ाविहए र्थीा।
3.4. यह आगे कहा गया है विक इस प्रकार ओ+ीएस का लाभ विकसी भी व्यविक्त द्वारा अति कार क े रूप में मांगा/प्रार्थी(ना नहीं विकया जा सक ा है जो >ूक में है।यह कहा गया है विक ओ+ीएस का लाभ आर$ीआई द्वारा जारी विदशाविनदYशों क े सार्थी- सार्थी ओ+ीएस योजना में श s क े अनुसार विदया जाना है।यह कहा गया है विक यविद mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह पाया जा ा है विक विगरवी रZी गई संपलित्त की नीलामी करक े और /या अन्य संपलित्तयों की नीलामी करक े ऋर्ण राथिश की वसूली की संभावना है, सिजन्हें प्रति भू क े रूप में रZा जा ा है और पूरी ऋर्ण राथिश की वसूली की संभावना कम नहीं हो ी है, $ैंक ओ+ीएस योजना क े ह लाभ देने से इनकार करने में न्यायोति> है। 3.[5] यह कहा गया है विक व (मान मामले में, अन्य दो ऋर्ण Zा ों में, मूल रिर+ याति>काक ा( भुग ान कर रहा है, हालांविक, जहाँ क व (मान ऋर्ण Zा े का सं$ं है विदनांक 2.3.2020 क कोई भी राथिश जमा नहीं की गई र्थीी।यह प्रi ु विकया जा ा है विक 60 लाZ रुपये की राथिश मूल रिर+ याति>काक ा( द्वारा एनपीए से $ाहर आने क े लिलए > ुराई से जमा विकए गए र्थीे। यह क े वल $ कहा गया है ज$ ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसका पहला आवेदन विदनांक 17.09.2019 को Zारिरज कर विदया गया र्थीा, इसलिलए मूल रिर+ याति>काक ा( ने एनपीए से $ाहर आने और ओ+ीएस योजना क े ह लाभ लेने क े लिलए 60 लाZ रुपये की राथिश जमा की। ओ+ीएस योजना क े ह यह कहा गया है विक, एक $ार ज$ Zा े को एनपीए घोविo कर विदया जा ा है और कोई भी राथिश जमा नहीं की जा ी है ज$ क विक ओ+ीएस क े ह लाभ क े अनुदान क े लिलए आवेदन दायर नहीं विकया जा ा है और विगरवी रZी गई संपलित्त या प्रति भू क े रूप में रZी गई अन्य संपलित्तयों की नीलामी करक े पूरी ऋर्ण राथिश की वसूली न कर ली जाय, ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े आवेदन को अiवीकार विकया जा सक ा है।
3.6. इसलिलए यह कहा गया है विक व (मान मामले में, जैसा विक यह पाया गया र्थीा विक मूल रिर+ याति>काक ा( ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए पात्र नहीं है, उसक े आवेदन को $ैंक क े सार्थी-सार्थी विनप+ान सलाहकार सविमति द्वारा सही रीक े से Zारिरज कर विदया गया र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
3.7. यह आगे कहा गया है विक ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसक े आवेदन को अiवीकार करने का विनर्ण(य आर$ीआई द्वारा जारी विदशाविनदYशों क े सार्थी-सार्थी ओ+ीएस योजना क े अनुरूप र्थीा। यह कहा गया है विक उच्च न्यायालय को उसक े पक्ष में विकसी पूर्ण( /विनविह अति कार क े अभाव में, ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसक े मामले पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने क े लिलए $ैंक को विनदYश देने क े लिलए परमादेश की रिर+ जारी नहीं करनी >ाविहए र्थीी।
3.8. अपीलक ा(-$ैंक की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा ने इलाहा$ाद उच्च न्यायालय क े विनर्ण(यों एम.एम. एक्सेसरीज $नाम यूपी फाइनेंस कॉप रेशन, कानपुर एआईआर 2002 ऑल 96 क े मामले में और सार्थी ही एक अन्य विनर्ण(य विवविपन क ु मार गुप्ता $नाम शाZा प्र$ं क, यूविनयन $ैंक ऑफ इंतिडया, ज्ञानपुर एआईआर 2004 ऑल 319 क े मामले में उक्त दोनों विनर्ण(यों में कह े हुए अत्यति क अवलम्$ लिलया है, यह विवशेo रूप से उच्च न्यायालय द्वारा अव ारिर विकया गया है विक भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए ओ+ीएस का लाभ देने का विनदYश देने वाला परमादेश की ऐसी कोई रिर+ जारी नहीं की जा सक ी है। यह कहा गया है विक यद्यविप उपरोक्त विनर्ण(यों को उच्च न्यायालय क े समक्ष उद्धृ विकया गया र्थीा पर उच्च न्यायालय द्वारा उन पर न ो विव>ार विकया गया है और न ही ध्यान विदया गया है। 3.[9] उपरोक्त क ( प्रi ु कर े हुए, व (मान अपील की अनुमति देने और और ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए मूल रिर+ याति>काक ा( क े मामले पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने क े लिलए $ैंक को विनदYश देने वाले उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश को रद्द और अपाi करने की प्रार्थी(ना की जा ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. व (मान अपील का प्रत्यर्थी3 संख्या 1- मूल रिर+ याति>काक ा( की ओर से पेश वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता श्री वी.क े. शुक्ला द्वारा पुरजोर विवरो विकया गया है।यह कहा गया है विक व (मान मामले में यह पाया गया विक यद्यविप मूल रिर+ याति>काक ा( ओ+ीएस योजना क े ह पूरी राथिश जमा करने क े लिलए ैयार और इच्छ ु क है और हालांविक वह ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े अनुदान क े लिलए पात्र है ो ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसका आवेदन Zारिरज कर विदया गया र्थीा जो मनमाना और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां क े लिZलाफ पाया गया र्थीा, उच्च न्यायालय ने ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए मूल रिर+ याति>काक ा( क े आवेदन को Zारिरज करने क े फ ै सले को सही ठहराया है।
4.1. यह कहा गया है विक ओ+ीएस योजना क े ह, एक ऋर्णक ा( को आवेदन क े सार्थी क ु ल राथिश का कम से कम 25% जमा करना आवश्यक है, हालांविक मूल रिर+ याति>काक ा( ने भुग ान की जाने वाली राथिश का 50% से अति क जमा विकया- इससे पहले विक ओ+ीएस क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसक े आवेदन पर विव>ार विकया जा ा है।यह कहा गया है विक उक्त राथिश का >ेक $ैंक द्वारा iवीकार विकया गया र्थीा और यहां क विक एनपीए Zा े में भी जमा विकया गया र्थीा, सिजससे प ा >ल ा है विक ओ+ीएस क े लिलए उसका अनुरो iवीकार कर लिलया गया है।यह कहा गया है विक इसक े $ाद ओ+ीएस क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए आवेदन को अiवीकार करना दुभा(वनापूर्ण( और मनमाना है और इसलिलए उच्च न्यायालय ने सही ढंग से परमादेश रिर+ जारी की है और $ैंक को ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उसक े मामले पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने का विनदYश विदया है।
4.2. यह आगे कहा गया है विक जैसे विक मूल रिर+ याति>काक ा( को $ैंक द्वारा परेशान विकया जा रहा र्थीा, ज$ वह ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े लिलए पात्र mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्थीा। यह कहा गया है विक $ैंक ने एक गल /गुप्त मकसद क े सार्थी जान$ूझकर उसकी संपलित्त हड़पने क े लिलए ओ+ीएस योजना क े ह लाभ देने से इनकार कर विदया। इसलिलए यह प्रार्थी(ना की जा ी है विक भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 136 क े ह शविक्तयों क े प्रयोग में, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर न्यातियक विनर्ण(य और आदेश में हi क्षेप न विकया जाए।
5. सं$ंति पक्षों क े लिलए विवद्वान अति वक्ता को सुनने क े $ाद, विनम्नलिललिZ मुद्दों/ प्रश्नों को इस न्यायालय क े विव>ार क े लिलए प्रi ु विकया जा ा है: i) क्या ओ+ीएस योजना क े ह लाभ की प्रार्थी(ना अति कार क े रूप में की जा सक ी है?; (ii) क्या भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े अ ीन शविक्तयों क े प्रयोग में उच्च न्यायालय $ैंक को ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े अनुदान पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने क े लिलए $ैंक को विनदYश देने वाले परमादेशों की रिर+ जारी कर सक ा है और वह भी ओ+ीएस योजना क े ह उसिŽलिZ पात्र ा मानदंड को समाप्त कर ा है? 5.[1] उपरोक्त मुद्दों/प्रश्नों पर विव>ार कर े समय, ओ+ीएस योजना क े प्रासंविगक Zंडों को संदर्भिभ विकया जाना आवश्यक है जो विनम्नानुसार हैं:
1. परिर>य: - राज्य क े शहरी सहकारी $ैंकों द्वारा संiर्थीानों/सदiयों को समय-समय पर विव रिर विवथिभन्न प्रकार क े ऋर्णों का एक $ड़ा विहiसा व (मान में समय -समय पर ऋर्ण क े रूप में अवरुद्ध है।ऐसे व्यपग ऋर्णों की वसूली क े सं$ं में माम कोथिशशों क े $ावजूद लं$े समय से ऋर्णों की वसूली नहीं हो रही है.भार ीय रिरजव( $ैंक द्वारा समय-समय पर ओ+ीएस क े लिलए जारी विदशा-विनदYशों क े अनुसार, राज्य में गैर-विनष्पाविद परिरसंपलित्तयों की वसूली क े लिलए संशोति mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एकमुश् विनप+ान (ओ+ीएस) को लागू करने का विनर्ण(य लिलया गया है ाविक $ैंक क े गंभीर काला ी ऋर्ण अति क म वसूली प्राप्त करने क े लिलए $>ाया जा सक ा है।
2. कवरेज (क+-ऑफ-डे+): - भार ीय रिरज़व( $ैंक द्वारा संशोति विदशाविनदYशों क े अनुसार विदनांक 31.3.2013 से संiर्थीाओं/व्यविक्तयों पर सभी प्रकार क े ऋर्णों को संविदग् या हाविन संपलित्त क े रूप में वग3क ृ करने क े सं$ं में यह योजना लागू होगी। भार ीय रिरजव( $ैंक द्वारा संशोति विदशाविनदYशों क े अनुसार, यह योजना 31.03.2013 से संiर्थीानों और व्यविक्तयों पर सभी प्रकार क े ऋर्णों क े सं$ं में लागू है, जो विक संविदग् या हाविन वाली संपलित्तयों की श्रेर्णी में हो या उक्त ति थिर्थी को अवमानक में वग3क ृ विकया गया हो।तिडफॉल्+रों की विनम्नलिललिZ श्रेथिर्णयां इस योजना क े ह पात्र नहीं होंगी: ऋर्ण की अदायगी में iवैस्तिच्छक तिडफॉल्+र, (सिजस व्यविक्त या संiर्थीा ने ऋर्ण लेने क े $ाद विकi का भुग ान न विकया हो, वह ऋर्ण का भुग ान करने में सक्षम नहीं होगा, उसे तिडफॉल्+र की श्रेर्णी में माना जाएगा)।
2. ोZा ड़ी और जालसाजी क े मामले।
3. वे नभोगी कम(>ारिरयों द्वारा लिलए गए ऋर्ण।
4. काला ी का ऐसा ऋर्ण जो $ैंक सति>व/सं>ालक द्वारा लिलया गया हो या सिजसकी गारं+ी $ैंक क े विकसी विनदेशक या सं>ालक क े विनक+ सं$ं ी या विकसी संiर्थीा द्वारा ली गई हो सिजसमें व (मान या पूव( विनदेशक का विह विनविह हो।
5. ऐसा काला ी ऋर्ण सिजसकी गारं+ी सरकार द्वारा दी गई हो।
6. सरकार द्वारा अनुमोविद सरकारी विवभागों/संiर्थीाओं द्वारा लिलए गए ऋर्ण। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
7. परक्राम्य एन.पी.ए./$काया ऋर्ण सीमा विकसी संगठन/व्यविक्तग सदiय क े सभी प्रकार क े ऋर्ण Zा ों को एकवित्र करने वाली नराथिश है, सिजसक े लिलए एकमुश् समझौ ा विकया जा सक ा है विक ऋर्ण की सीमा समाप्त हो जाएगी।
8. व्यविक्तग ऋर्णक ा( 10.00 लाZ रूपये
9. संiर्थीाग उ ारक ा( 50.00 लाZ रूपये उपरोक्त सीमा से अति क क े मामलों में, एकमुश् विनप+ान क े लिलए सं$ंति $ैंक क े विनदेशक मंडल द्वारा अलग से योजना $नाकर सहकारी सविमति यों क े विन$न् क क े पूव( का अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
4. $न्दो$i सूत्र: (क) गैर-विनष्पाविद आस्तिi यों क े Zा े सिजन्हें 31 मा>( 2013 को संविदग् /हाविन क े रूप में वग3क ृ विकया गया र्थीा या होना >ाविहए र्थीा, नराथिश की वसूली उस Zा े में कु ल शेo (मूल न और ब्याज) क े $रा$र होगी सिजस ारीZ को Zा े को संविदग् और हाविन क े रूप में वग3क ृ विकया गया है।यविद ऐसे Zा ों में संविदग् /हाविन श्रेर्णी क े वग3करर्ण की ति थिर्थी क े $ाद ब्याज लगाया गया है, ो उसे माफ विकया जा सक ा है, यह नीति सभी ऋर्णक ा(ओं और तिडफाल्+रों पर समान रूप से लागू होगी। (Z) तिडफाल्+र की सहमति से इस योजना क े ह $न्दो$i की कु ल राथिश एकमुश् जमा करनी होगी, लेविकन यविद तिडफाल्+र सारी नराथिश एकमुश् जमा करने में असमर्थी( है, ो सहमति पत्र की ति थिर्थी क ऐसी राथिश का 25 प्रति श और शेo 75 प्रति श की वसूली क े लिलए, एक वo( की अवति में ीन समान विकश् ों में नराथिश जमा करनी होगी सिजस पर $न्दो$i की ति थिर्थी से अंति म कज( अदायगी की ति थिर्थी क न्यून म ऋर्ण ब्याज की दर से ब्याज देय होगा।दंडात्मक ब्याज, कानूनी Z>( और अन्य Z>s को माफ कर विदया जाएगा।
5. राह देने का प्राति कारी:mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA योजना का अनुमोदन स$से पहले उत्तर प्रदेश सहकारी सविमति अति विनयम में विनविह प्राव ानों क े ह गविठ सं$ंति $ैंक प्र$ं न सविमति द्वारा विकया जायेगा और 5.00 लाZ रू. क क े एकमुश् विनप+ान मामलों पर विनर्ण(य लेने का अति कार होगा और 5.00 लाZ रू. से अति क क े मामलों क े लिलए रसिजi+्रार सहकारी सविमति यों, उत्तर प्रदेश का पूवा(नुमोदन प्राप्त करना होगा। इस उद्देश्य क े लिलए, $ैंक एक $न्दो$i सलाहकार सविमति का गठन करेगा, जो प्राप्त आवेदनों की जां> करने क े $ाद विनर्ण(य क े लिलए प्राति कारी क े समक्ष पात्र ा क े भी र आने वाले उपयुक्त मामलों को प्रi ु करेगा।$ैंक वि$ना विकसी भेदभाव क े ऋर्ण प्राप्तक ा(ओं क े सार्थी $न्दो$i से सं$ंति विदशा-विनदYशों का पालन करेगा।मुख्य काय(कारी अति कारिरयों/विनदेशक मंडल द्वारा नीति यों से कोई विव>लन नहीं होगा।प्र$ं न सविमति या आम सभा की अगली $ैठक में $ंदो$i ी सविमति क े विनर्ण(य की पुविष्ट की जाएगी।
6. $न्दो$i सलाहकार सविमति ।प्राप्त मामलों की जां> करने और सक्षम प्राति कारी क े समक्ष पात्र मामलों को प्रi ु करने क े $ाद, यह विनम्नानुसार होगा:
1. $ैंक प्रेसीडेन्+ क े >ेयरमैन
2. सति>व/काय(कारी अति कारी सं$ंति सदiय/संयोजक
3. सदiय विनदेशक मंडल द्वारा नाविम एक विनदेशक और एक अन्य व्यविक्त और $ैंक अति कारी सिजसे $ैंकिंकग / प्र$ं न या कानून क े क्षेत्र में पया(प्त अनुभव हो। $न्दो$i सलाहकार सविमति क े प्रयोजन क े लिलए ीन सदiय होंगे जो सदiय से प्राप्त आवेदन की जां> करेंगे और इसकी iपष्ट सिसफारिरश करने क े $ाद उसे विनदेशक मंडल क े समक्ष प्रi ु करेंगे।सिसफारिरश कर े समय, विनम्नलिललिZ किं$दुओं पर विव>ार विकया जाएगा -
1. त्काल लोन की सिसफारिरश करने वाले अति कारी को व्यविक्तग रूप से ऋर्ण iवीक ृ नहीं करना >ाविहए र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. यह अं रर्ण रिरजव( $ैंक द्वारा विन ा(रिर श s क े अनुसार विकया गया है।
3. लोन देने क े $ाद पया(प्त साव ानी $र ी गयी है।
4. ऋर्ण की वसूली क े प्रयास विकए गए हैं और वसूली की संभावना को कम विकया गया है। विनदेशक मंडल उति> विव>ार क े $ाद एकमुश् भुग ान को मंजूरी देगा।सविमति क े विनर्ण(य (एस.ए.सी.) की प्रत्येक माह विनदेशक मंडल द्वारा समीक्षा की जाएगी और विन ा(रिर समय-सीमा क े भी र विनप+ान की काय(वाही पूरी की जाएगी। 5.[2] इसलिलए, जारी विकए गए विदशाविनदYशों क े अनुसार, ओ+ीएस योजना क े लाभ क े अनुदान को अति कार क े रूप में प्रार्थी(ना नहीं की जा सक ी है और यह योजना में उसिŽलिZ पात्र ा मानदंडों को पूरा करने क े अ ीन है। ओ+ीएस योजना क े ह अपात्र तिडफॉल्+रों का उŽेZ Zंड 2 में विकया गया है, जो यहां प्रi ु विकया गया है। ऋर्ण की अदायगी में विवलफ ु ल तिडफॉल्+र और एक व्यविक्त सिजसने ऋर्ण लेने क े $ाद एक भी विकi का भुग ान नहीं विकया है और ऋर्ण का भुग ान करने में सक्षम नहीं होगा, उसे "तिडफॉल्+र" की श्रेर्णी में माना जाएगा और ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े अनुदान क े लिलए पात्र नहीं होगा।इसी रह, वह व्यविक्त सिजसका Zा ा 'एनपीए' घोविo विकया गया हो, वह भी पात्र नहीं होगा।विदशाविनदYशों क े अनुसार,प्राप्त आवेदनों की जां> क े उद्देश्य से $ैंक को एक विनप+ान सलाहकार सविमति का गठन करना आवश्यक है और उसक े $ाद उक्त सविमति को ओ+ीएस योजना क े अनुसार पात्र ा पर विव>ार करने क े $ाद यह विनर्ण(य लेना होगा विक कोई तिडफाल्+र ओ+ीएस योजना क े लाभ का हकदार है या नहीं।सिसफारिरशें कर े समय, $न्दो$i सलाहकार सविमति को विव>ार करना होगा विक क्या ऋर्ण नराथिश की वसूली क े लिलए प्रयास विकए गए हैं और वसूली की संभावना कम से कम की गई है, सिजसका अर्थी( है विक यविद राथिश की वसूली की संभावना है, ो या ो उति> mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA काय(वाही शुरू करक े या विगरवी रZी गई संपलित्त और /या उ ारक ा( और/या गारं+र द्वारा प्रति भूति क े रूप में दी गई संपलित्तयाों की नीलामी करक े, ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए ऋर्णक ा( द्वारा प्रi ु आवेदन को अiवीकार विकया जा सक ा है।
6. व (मान मामले में, इस थ्य क े $ावजूद विक प्रति शपर्थीपत्र क े माध्यम से उच्च न्यायालय क े समक्ष यह विवशेo रूप से इंविग विकया गया र्थीा विक (i) सरफ े सी अति विनयम क े ह वसूली की काय(वाही लंवि$ है; (ii) ऋर्णक ा( और उसक े पति ने दो क्र े तिड+ सुविव ाओं का लाभ उठाया है और दोनों ऋर्ण Zा ों को विनयविम रूप से $नाए रZा गया है और न विनयविम आ ार पर जमा विकया जा रहा है; (iii) $न्दो$i सलाहकार सविमति ने विनष्कo( विनकाला विक उ ारक ा( अच्छी विवत्तीय स्तिiर्थीति में है और यविद कोई वसूली की जानी है ो विगरवी रZी गई संपलित्त की नीलामी करक े $ैंक पूरी ऋर्ण राथिश की वसूली कर सक ा है, उच्च न्यायालय पूव क्त पहलुओं पर उनक े वाi विवक परिरप्रेक्ष्य में विव>ार करने में विवफल रहा है और परमादेश की रिर+ जारी विकया है सिजससे ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े अनुदान को अति कार क े रूप में दावा विकया जा सक ा है।
7. व (मान मामले में, $ैंक क े सार्थी-सार्थी $न्दो$i सलाहकार सविमति द्वारा एक स>े विनर्ण(य लिलया गया र्थीा जो $ोड( क े विदनांक 28.12.2020 क े प्रi ाव और 08.01.2021 क े विनर्ण(य से परिरलतिक्ष हो ा है।यहां क विक व्यविक्तग सुनवाई विदनांक 25.02.2021 को $न्दो$i सलाहकार सविमति द्वारा मूल रिर+ याति>काक ा( को दी गई र्थीी।उच्च न्यायालय ने आक्षेविप विनर्ण(य और आदेश में कहा है विक मूल रिर+ याति>काक ा( को कोई अवसर नहीं विदया गया र्थीा, जो थ्यात्मक रूप से गल है।इसलिलए, विनर्ण(य को प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां का उŽंघन नहीं कहा जा सक ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
8. आक्षेविप विनर्ण(य एवं आदेश पारिर कर े समय, उच्च न्यायालय ने $ैंक की ओर से प्रi ुति यों क े जवा$ में कहा विक ऋर्ण राथिश की वसूली की सभी संभावनाएं हैं और सरफ े सी अति विनयम क े ह काय(वाही शुरू कर राथिश की वसूली का प्रयास विकया जा रहा है और विगरवी रZी गई संपलित्तयों की नीलामी की जा सक ी है, यह देZा गया है विक सरफ े सी अति विनयम क े ह काय(वाही सा वos से लंवि$ है और और $ैंक अपने $काए की वसूली करने में असमर्थी( रहा है और इसलिलए वसूली की आशा भ्रामक है। यह विनष्कo( अथिभलेZ पर विकसी भी सामग्री द्वारा समर्भिर्थी नहीं है।क े वल इसलिलए विक सरफ े सी अति विनयम क े ह काय(वाही सा साल क लंवि$ रही है, $ैंक को उसी क े लिलए सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है।$ैंक की कोई गल ी नहीं पाई जा सक ी।सिजस पर विव>ार करने की आवश्यक ा है वह $ैंक द्वारा एक स>े विनर्ण(य है विक $ैंक विगरवी रZी गई संपलित्त की नीलामी करक े पूरी ऋर्ण राथिश की वसूली करने में सक्षम होगा और $ैंक द्वारा यह सो> - समझकर प्रयोग विकया जा ा है विक ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने और कम राथिश की वसूली करने क े $जाय, संपूर्ण( ऋर्ण राथिश की वसूली की सभी संभावनाएं हैं।यह अं ः $ैंक क े लिलए अपने विह में एक स>े विनर्ण(य लेने और $काया ऋर्ण को सुरतिक्ष /पुनप्रा(प्त करने क े लिलए है।विकसी भी $ैंक को ओ+ीएस योजना क े ह कम राथिश iवीकार करने क े लिलए $ाध्य नहीं विकया जा सक ा है, इस थ्य क े $ावजूद विक $ैंक सुरतिक्ष संपलित्त / विगरवी संपलित्त की नीलामी करक े पूरी ऋर्ण राथिश की वसूली करने में सक्षम है।ज$ $ैंक द्वारा ऋर्ण का विव रर्ण विकया जा ा है और $काया राथिश $ैंक को देय और भुग ान हो ा है, यह हमेशा $ैंक क े विह में और अपने वाथिर्णस्तिज्यक ज्ञान में एक स>े विनर्ण(य लेगा।
9. अन्यर्थीा, जैसा विक यहां देZा गया है, कोई भी ऋर्णक ा(, अति कार क े रूप में, एकमुश् $न्दो$i योजना क े लाभ क े अनुदान क े लिलए प्रार्थी(ना नहीं कर सक ा है।विकसी विदए गए मामले में, ऐसा हो सक ा है विक एक व्यविक्त एक $ड़ी नराथिश mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ऋर्ण लेगा, उदाहरर्ण क े लिलए 100 करोड़ रूपये। ऋर्ण लेने क े $ाद, वह जान$ूझकर विकश् ों क े लिलए विकसी भी राथिश का भुग ान नहीं कर सक ा है, हालांविक भुग ान करने में सक्षम है।वह ओ+ीएस योजना की प्र ीक्षा करेगा और विफर ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए प्रार्थी(ना करेगा, सिजसक े ह ऋर्ण Zा े क े ह देय और देय राथिश से हमेशा कम राथिश का भुग ान करना होगा।यह, पूरी ऋर्ण राथिश की वसूली की पूरी संभावना होने क े $ावजूद, सिजसे विगरवी रZी गई / सुरतिक्ष संपलित्तयों को $े>कर प्राप्त विकया जा सक ा है। यविद यह माना जा ा है विक अति कार क े रूप में ऋर्णक ा( अभी भी ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े लिलए आवेदन कर सक ा है, उस स्तिiर्थीति में यह एक $ेईमान ऋर्णक ा( को अति मूल्य देना होगा, जो इस थ्य क े $ावजूद विक वह भुग ान करने में सक्षम है और यह थ्य विक $ैंक विगरवी /सुरतिक्ष संपलित्तयों को $े>कर भी पूरी ऋर्ण राथिश या ो उ ारक ा( और /या गारं+र से वसूल करने में सक्षम है, ऐसा इसलिलए है क्योंविक ओ+ीएस योजना क े ह एक देनदार को ऋर्ण Zा े क े ह देय और वाi विवक देय राथिश से कम राथिश का भुग ान करना पड़ ा है।ओ+ीएस योजना की पेशकश कर े समय $ैंक का ऐसा इरादा नहीं हो सक ा है और यह इस योजना का उद्देश्य नहीं हो सक ा है जो इस रह की $ेईमानी को प्रोत्साविह कर सक ा है।
10. यविद तिडफाल्+र इकाई/व्यविक्त की ओर से विवत्तीय विनगम/$ैंक को उसक े द्वारा प्रi ाविव श s पर एकमुश् $न्दो$i करने क े लिलए $ाध्य करने या विनदYथिश करने क े लिलए प्रार्थी(ना की जा ी है, ो प्रत्येक तिडफाल्+र इकाई/व्यविक्त जो उसक े द्वारा विकए गए समझौ े की श s क े अनुसार अपनी $काया राथिश का भुग ान करने में सक्षम है/उसक े पक्ष में एकमुश् $न्दो$i प्राप्त करना >ाह ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कौन अपने दातियत्व को कम नहीं करना >ाह ा और ऋर्ण Zा े क े ह भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी नराथिश से कम राथिश का भुग ान करना >ाह ा है ? व (मान मामले में, यह नो+ विकया जा ा है विक मूल रिर+ याति>काक ा( और उनक े पति दो अन्य ऋर्ण Zा ों में विनयविम रूप से भुग ान कर रहे हैं और उन Zा ों को विनयविम कर विदया गया है।म ल$ इस प्रकार, उनक े पास व (मान ऋर्ण Zा े क े सं$ं में भी भुग ान करने की क्षम ा है और उक्त थ्य क े $ावजूद, व (मान ऋर्ण Zा े में एक भी राथिश/विकi का भुग ान नहीं विकया गया है सिजसक े लिलए मूल याति>काक ा( ओ+ीएस योजना क े ह लाभ क े लिलए प्रार्थी(ना कर रहा है।
11. पूव क्त >>ा( का सार और सार यह होगा विक विकसी विवत्तीय संiर्थीान/$ैंक को उ ारक ा( को ओ+ीएस का लाभ सकारात्मक रूप से देने का विनदYश दे े हुए कहा गया विक भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए उच्च न्यायालय द्वारा परमादेश की कोई रिर+ जारी नहीं की जा सक ी है। ओ+ीएस क े ह लाभ का अनुदान हमेशा ओ+ीएस योजना क े ह उसिŽलिZ पात्र ा मानदंड और समय-समय पर जारी विदशा-विनदYशों क े अ ीन हो ा है।यविद $ैंक/विवत्तीय संiर्थीान की राय है विक ऋर्णी क े पास भुग ान करने की क्षम ा है और/या $ैंक/विवत्तीय संiर्थीा या ो ऋर्णी और/या गारं+र से विगरवी रZी गई संपलित्त/प्रति भू संपलित्त की नीलामी करक े संपूर्ण( ऋर्ण राथिश की वसूली करने में सक्षम है, ो ओ+ीएस योजना क े ह $ैंक को लाभ देने से इनकार करना न्यायसंग होगा।अं ः, इस रह का विनर्ण(य उस $ैंक क े व्यावसातियक ज्ञान पर छोड़ विदया जाना >ाविहए सिजसकी राथिश शाविमल है और यह हमेशा माना जाना >ाविहए विक विवत्तीय संiर्थीान/$ैंक ओ+ीएस योजना क े ह लाभ प्रदान करना है या नहीं, इसमें शाविमल जनविह को ध्यान में रZ े हुए और ऊपर वर्भिर्ण कारकों को ध्यान में रZ े हुए एक विववेकपूर्ण( विनर्ण(य लेगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
12. पूव क्त >>ा( को ध्यान में रZ े हुए और उपरोक्त कारर्णों क े लिलए, हमारा दृढ़ म है विक व (मान मामले में उच्च न्यायालय ने भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह अपनी शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए परमादेश की रिर+ जारी करने में अपीलक ा(-$ैंक को मूल रिर+ याति>काक ा( को ओ+ीएस क े लाभ पर सकारात्मक रूप से विव>ार करने/अनुदान देने का विनदYश देने में महत्वपूर्ण( त्रुवि+ की है।अ: उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनर्ण(य और आदेश अनुरक्षर्णीय नहीं है और विनरi और अपाi विकए जाने योग्य है और दनुसार विनरi और अपाi विकया जा ा है।
13. दनुसार व (मान अपील को अनुमति दी जा ी है।हालांविक, मामले क े थ्यों और परिरस्तिiर्थीति यों में, लाग क े सं$ं में कोई आदेश नहीं होगा।....................................................… [न्यायमूर्ति एम. आर. शाह].............................................… [$ी. वी. नागरत्न] नई विदŽी; 15 विदसं$र, 2021 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA