Uttar Pradesh State Road Transport Corporation v. Gajra North

Supreme Court of India · 08 Dec 2021
Hemant Gupta; V. Ramasubramanian
Civil Appeal No. 7536 of 2021 @ SLP (Civil) No. 12369 of 2021
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the removal of an employee by the Uttar Pradesh State Road Transport Corporation, holding that a proper departmental inquiry and sufficient evidence justify disciplinary action with limited scope for judicial interference.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 7536 वर्ष# 2021
(एसएलपी (दीवानी) सं. 12369 वर्ष# 2021 से उद्भू )
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिरवहन निनगम ...... अपीलार्थी8 (गण)
बनाम
गजा र नार्थी ...... प्रत्यर्थी8 (गण)
निनण#य
न्यायमूर्ति हेमन् गुप्ता
अनुमति प्रदान की गयी।
JUDGMENT

2. निनयोक्ता की ओर से व #मान अपील में चुनौ ी का निवर्षय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 20.1.2021 का आदेश है, जिजसक े ह औद्योनिगक न्यायाति करण[1] द्वारा पारिर 22.10.2008 क े आदेश में हस् क्षेप नहीं निकया गया 1 संक्षेप में, ‘अति करण’ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्थीा। न्यायाति करण ने निनदSश निदया र्थीा निक प्रत्यर्थी82 को सेवा में बहाल निकया जाए और 50% वे न का भुग ान उस अवति क े लिलए निकया जाए जब वह निनयोजन में नहीं र्थीा।

3. निदनांक 14.12.2001 को कदाचार क े कारण कम#कार को परिरचालक क े रूप में सेवा से हटा निदया गया र्थीा। उन्होंने औद्योनिगक निववाद उठाया जिजसे न्यायाति करण को भेजा गया र्थीा। 5.5.2008 को, न्यायाति करण ने एक प्रारंभिभक निनष्कर्ष# पर आया निक निवचारा ीन कम#कार क े लि]लाफ लगाए गए आरोपों की आं रिरक जांच निनष्पक्ष और उतिच नहीं र्थीी। इसलिलए, निनयोक्ता ने 12.11.1998 को वाहन का निनरीक्षण करने वाले सहायक या ाया निनरीक्षक[3] शेर्षमभिण निमश्रा की जांच करक े साक्ष्य प्रस् ु निकया।उक्त गवाह ने उनक े द्वारा सहायक क्षेत्रीय प्रबं क को प्रदश# पी/10 क े रूप में प्रस् ु रिरपोट# का समर्थी#न निकया। उसने बयान निदया निक उसने कटरा में बस की जाँच की, जब बस बांदा से इलाहाबाद आ रही र्थीी। बस क े सभी 17 यानित्रयों ने कहा र्थीा निक उन्होंने पैसे निदए र्थीे लेनिकन परिरचालक ने एक भी निटकट नहीं दी। इस प्रकार, निनरीक्षक ने निनष्कर्ष# निनकाला निक सभी यात्री निबना निटकट र्थीे। उन्होनें यह भी ब ाया निक जब उन्होंने यानित्रयों क े बयान को दज# करने की कोभिशश की, ो परिरचालक ने उनक े सार्थी दुर्व्यय#वहार निकया और भद्दे शब्दों का इस् ेमाल निकया, जिजसे वह अदाल क े सामने बोल भी नहीं सक े। जिजरह में, उन्होंने बयान निदया निक उनकी रिरपोट# निदनांक 13.11.1998 की र्थीी और इस रिरपोट# में चालक या परिरचालक क े हस् ाक्षर नहीं हैं। इसक े अलावा, निकसी भी यात्री का कोई बयान दालि]ल नहीं निकया गया र्थीा। 2 संक्षेप में, ‘कम#कार’ 3 संक्षेप में, 'निनरीक्षक' Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

4. निवद्वान न्यायाति करण ने उक्त कर्थीन पर निवचार कर े हुए, हटाने क े आदेश को अपास् कर निदया सार्थी ही अभिभनिन ा#रिर निकया निक निनरीक्षक को उन यानित्रयों क े बयान दज# करने चानिहए र्थीे जो निबना निटकट यात्रा कर े पाए गए हैं और यनिद उन्होंने अपने बयान दज# करने में अनिनच्छा निद]ाई है, ो कम से कम उनक े मौलि]क बयान, नाम और प े प्रस् ु निकए जाने चानिहए र्थीे। न्यायाति करण ने यह भी पाया निक निनरीक्षक ने 12.11.1998 को बस का निनरीक्षण निकया, सानिब नहीं हुआ र्थीा। यह भी दे]ा गया निक यनिद परिरचालक ने निनरीक्षक क े सार्थी दुर्व्यय#वहार निकया र्थीा, ो संबंति पुलिलस स्टेशन में एफआईआर क्यों नहीं दज# कराई गई। इन आ ारों पर, निवद्वान न्यायाति करण ने हटाने क े आदेश को अपास् कर निदया।

5. औद्योनिगक निववाद अति निनयम, 1947[4] क े ह अति निनणा#यक का दायरा दे]ा जा सक ा है। जो आं रिरक जांच की गई है, उसे अति निनयम की ारा 11 क क े संदभ# में न्यायाति करण क े समक्ष निववानिद करने की अनुमति दी जा सक ी है। इस न्यायालय ने कम#कार, मेसस# फायरस्टोन टायर एंड रबर क ं पनी ऑफ इंतिडया (पी) लिलनिमटेड बनाम प्रबं न और अन्य[5] में अभिभनिन ा#रिर निकया निक अति निनयम की ारा 11 क क े संदभ# में, यनिद आं रिरक जांच की गई है और कदाचार का निनष्कर्ष# अभिभलिललि] निकया जा ा है, ो अति निनयम क े ह प्राति कारिरयों क े पास सबू ों को निफर से दे]ने और ]ुद को सं ुष्ट करने क े लिलए पूरी शनिक्त और अति कार क्षेत्र है निक क्या सबू कदाचार क े निनष्कर्ष# को सही ठहरा े हैं। लेनिकन जहां जांच दोर्षपूण# पाई जा ी है, निनयोक्ता 4 संक्षेप में, 'अति निनयम' 5 (1973) 1 एससीसी 813 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्राति करण क े समक्ष कदाचार सानिब करने क े लिलए सबू पेश कर सक ा है। न्यायालय ने इस प्रकार अभिभनिन ा#रिर निकयाः "32. उन निनण#यों से, निनम्नलिललि] जिसद्धां मोटे ौर पर सामने आ े हैंः- (1) अनुशासनात्मक कार#वाई करने और सजा क े परिरमाण पर निनण#य लेने का अति कार मुख्य रूप से प्रबं कीय काय# हैं, लेनिकन यनिद निकसी निववाद को न्यायाति करण को संदर्भिभ निकया जा ा है, ो उसे यह दे]ने की शनिक्त है निक क्या निनयोक्ता की कार#वाई उतिच है। (2) दंड अति रोनिप करने से पूव#, निकसी निनयोजक से स्र्थीायी आदेशों, यनिद लागू हों, क े उपबं ों और प्राक ृ ति क न्याय क े जिसद्धां ों क े अनुसार उतिच जांच करने की अपेक्षा की जा ी है। जांच एक ]ाली औपचारिरक ा नहीं होनी चानिहए। (3) जब निकसी निनयोक्ता द्वारा उतिच जांच की गई है, और उक्त जांच में प्रस् ु निकए गए साक्ष्यों से कदाचार का निनष्कर्ष# क # संग रूप से निनकल ा है, ो न्यायाति करण क े पास अपीलीय निनकाय क े रूप में निनयोक्ता क े निनण#य पर निनण#य देने का कोई क्षेत्राति कार नहीं है।निनयोक्ता क े निनण#य में हस् क्षेप भी उतिच होगा जब जांच में आए निनष्कर्ष# निवक ृ हों या प्रबं न उत्पीड़न, अनुतिच श्रम र्व्ययवहार या दुभा#वना का दोर्षी है।। (4) यहां क निक यनिद निकसी निनयोक्ता द्वारा कोई जांच नहीं की गई है या यनिद उसक े द्वारा की गई जांच दोर्षपूण# पाई गई है, ो न्यायाति करण को आदेश की वै ा क े बारे में ]ुद को सं ुष्ट करने क े लिलए, निनयोक्ता और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कम#चारी को उसक े समक्ष साक्ष्य प्रस् ु करने क े लिलए अवसर देना र्थीा। निनयोक्ता क े पास निवकल्प है निक वह पहली बार अपनी कार#वाई को सही ठहराने क े लिलए साक्ष्य प्रस् ु करे और कम#चारी क े पास निवकल्प है निक वह इसक े निवरूद्ध साक्ष्य प्रस् ु करे। (5) निनयोक्ता क े जांच न करने का प्रभाव यह है निक न्यायाति करण को क े वल इस पर निवचार नहीं करना होगा निक क्या कोई प्रर्थीम दृष्टया मामला र्थीा। दूसरी ओर, बड़े पैमाने पर न्यायाति करण क े समक्ष मुद्दा ब]ा#स् गी या उन्मुनिक्त क े आक्षेनिप आदेश की मेरिरट का है और उसक े समक्ष प्रस् ु निकए गए साक्ष्य पर स्वयं य करना होगा निक कभिर्थी कदाचार सानिब हुआ है या नहीं। ऐसे मामलों में, प्रबं कीय कायy क े अभ्यास क े बारे में बिंबदु निबल्क ु ल भी उत्पन्न नहीं हो ा है।दोर्षपूण# जांच उसी रह है जैसे कोई जांच हुई ही न हो। (6) न्यायाति करण को क े वल उस कार#वाई क े औतिचत्य में पहली बार उसक े समक्ष र]े गए साक्ष्य पर निवचार करने की अति कारिर ा प्राप्त हो ी है, यनिद कोई जांच नहीं की गई है या निकसी निनयोक्ता द्वारा की गई जांच दोर्षपूण# पाई गई है। (7) इसे कभी मान्य ा नहीं दी गई है निक न्यायाति करण को ुरं निबना निकसी और चीज क े, ब]ा#स् या उन्मुक्त कम#चारी की बहाली को निनदSश देना चानिहए, यनिद एक बार यह पाया जा ा है निक कोई आं रिरक जांच नहीं हुई है या उक्त जांच दोर्षपूण# पाई गई है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (8) कोई निनयोक्ता, जो अपनी कार#वाई को सही ठहराने क े लिलए पहली बार न्यायाति करण क े अवसर का लाभ उठाना चाह ा है, उसे उतिच स् र पर इसक े लिलए कहना चानिहए।यनिद ऐसा अवसर मांगा जा ा है, ो न्यायाति करण क े पास इसका इनकार करने की कोई शनिक्त नहीं है।न्यायाति करण क े समक्ष पहली बार निनयोक्ता को साक्ष्य प्रस् ु करने का अवसर देना प्रबं न और कम#चारी दोनों क े निह में है और यह न्यायाति करण को कभिर्थी कदाचार क े बारे में सं ुष्ट होने में सक्षम बना ा है। (9) एक बार निकसी निनयोजक द्वारा की गई जांच में या पहली बार े समक्ष र]े गए साक्ष्य द्वारा कदाचार सानिब हो जा ा है, ो अति रोनिप दंड पर न्यायाति करण द्वारा हस् क्षेप नहीं निकया जा सक ा है जिसवाय उन मामलों क े, जहां दंड इ ना कठोर है निक वह उत्पीड़न कर ा हो। (10) निकसी निवशेर्ष मामले में, ब]ा#स् गी क े आदेश को अपास् करने क े बाद, चाहे निकसी कम#कार को बहाल निकया जाए या मुआवजे का भुग ान निकया जाए, ो अब यह श्रम न्यायालय या न्यायाति करण क े न्यातियक निनण#य क े अ ीन हो ा है, जैसा निक इस न्यायालय द्वारा द मैनेजमेंट ऑफ पनिनटोल टी एस्टेट बनाम द वक # मैन, 1971-1 एससीसी 742 क े वाद में अभिभनिन ा#रिर निकया गया है।"

6. यह प्रश्न निक क्या निनयोक्ता को लिललि] बयान में कदाचार सानिब करने क े लिलए स्व ंत्र ा की आवश्यक ा है या बाद क े चरण में साक्ष्य प्रस् ु कर सक ा है, इस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय की एक संनिव ान पीठ द्वारा कना#टक राज्य सड़क परिरवहन निनगम बनाम श्रीम ी लक्ष्मीदेवम्मा और अन्य[6] क े मामले में निवचार निकया गया र्थीा। इसमें यह न्यायालय शंभू नार्थी गोयल बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा व अन्य[7] र्थीा राजेंद्र झा बनाम पीठासीन अति कारी, श्रम न्यायालय, बोकारो स्टील जिसटी, जिजला नबाद व अन्य[8] क े दो निनण#यों क े बीच एक टकराव, यनिद कोई हो, की जांच कर रहा र्थीा। न्यायालय की बहुम राय में दे]ा गया निक ऐसे न्यायाति करण या न्यायालय द्वारा निवचारा ीन अपने निनण#य क े औतिचत्य में श्रम न्यायालय या औद्योनिगक न्यायाति करण क े समक्ष साक्ष्य प्रस् ु करने का प्रबं न का अति कार एक वै ानिनक अति कार नहीं है। यह वास् व में प्रबं न और कम#कार क े बीच निववादों क े निनस् ारण में काय#वाही की देरी और बहुल ा से बचने क े लिलए इस न्यायालय द्वारा निन ा#रिर एक प्रनि•या है। "17. न्यायाति करण/श्रम न्यायालय क े लिलए प्रबं न को एक अवसर प्रदान करने क े उद्देश्य को ध्यान में र] े हुए, हमारा निवचार है निक शंभू नार्थी गोयल क े मामले में इस अदाल द्वारा जारी निकए गए निनदSशों को न्यायसंग और निनष्पक्ष होने क े कारण परिरवर्ति करने की आवश्यक ा नहीं है।इस प्रनि•या क े लिलए प्रबं न की ओर से कोई भिशकाय नहीं की जा सक ी है क्योंनिक साक्ष्य प्रस् ु करने का यह अवसर प्रबं न द्वारा क े वल एक वैकल्पिल्पक यातिचका क े रूप में मांगा जा रहा है, न निक इसकी आं रिरक जांच में अवै ा की ग्राह्य ा क े रूप में।सार्थी ही, 6 एआईआर 2001 एससी 2090 7 (1983) 4 एससीसी 491 8 1984 सप्लीमेंटरी एससीसी 520 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह कम#कारों क े लिलए भी फायदेमंद है क्योंनिक उन्हें इस थ्य से अवग कराया जाएगा निक प्रबं न द्वारा नए साक्ष्य पेश निकए जाने की संभावना है, इसलिलए वे अपना ]ंडन या अन्य साक्ष्य ैयार र] सक े हैं।।यह प्रनि•या प्रबं न को देरी से आवेदन करने की अनुमति देने में संभानिव देरी को भी समाप्त कर ी है जिजससे श्रम न्यायालय/न्यायाति करण क े समक्ष काय#वाही लंबी हो सक ी है।हमारी राय में, शंभू नार्थी गोयल क े मामले में निन ा#रिर प्रनि•या न्यायसंग और निनष्पक्ष है।

18. एक अन्य कारण है निक हमें शंभू नार्थी गोयल क े मामले में इस न्यायालय द्वारा निन ा#रिर प्रनि•या को स्वीकार करना चानिहए।यह ध्यान निदया जाना चानिहए निक यह निनण#य 27 जिस ंबर 1983 को निदया गया र्थीा। इसने इस न्यायालय क े लगभग सभी पहले क े निनण#यों पर ध्यान निदया है और प्रबं न द्वारा साक्ष्य प्रस् ु करने क े अति कार का प्रयोग करने की प्रनि•या निन ा#रिर की है जो हमने अभिभनिन ा#रिर निकया है, न ो वह दमनकारी है और न ही अति निनयम क े उद्देश्य और योजना क े निवपरी है। यह निनण#य लगभग 18 वर्षy क लागू रहा, हमारी राय में, निनण[8] ानुसरण (स्टेअर तिडसाईजिसस) का जिसद्धां हमें उक्त निनण#य को यह दे]ने क े लिलए अनुमोनिद कर ा है निक एक लंबे समय से चले आ रहे निनण#य को निबना ठोस कारण क े हटाया नहीं जा ा है।"

7. अब मेरिरट पर, निवति क े जिसद्धां ों को ध्यान में र] े हुए, अपीलक ा#ओं-निनयोक्ता क े निवद्वान अति वक्ता ने कहा निक भार ीय साक्ष्य अति निनयम 18729 निकसी भी 9 संक्षेप में, 'साक्ष्य अति निनयम' Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय में या उससे समक्ष की सभी न्यातियक काय#वाही पर लागू हो ा है। चूंनिक आं रिरक जांच अदाल द्वारा नहीं की गयी है, इसलिलए साक्ष्य अति निनयम क े कठोर निनयम ऐसी आं रिरक जांच पर लागू नहीं हो े हैं। इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ द्वारा हरिरयाणा राज्य और एक अन्य बनाम र न सिंसह10 में निदए गए निनण#य पर अवलम्ब लिलया गया है जिजसमें एक परिरचालक क े संबं में, जिजसक े द्वारा निटकट जारी न करना पाया गया र्थीा, इस न्यायालय ने निनम्नानुसार अभिभनिन ा#रिर निकयाः "4. यह सुस्र्थीानिप है निक भार ीय साक्ष्य अति निनयम क े ह साक्ष्य क े कठोर और परिरष्क ृ निनयम आं रिरक जांच में लागू नहीं हो सक े हैं। निकसी प्रज्ञावान मल्पिस् ष्क क े र्व्ययनिक्त क े लिलए ार्किकक रूप से प्रमाणक सभी सामग्री अनुमेय हैं। अनुश्रु साक्ष्य में कोई बुराई नहीं है, बश S इसमें क # संग संबं और निवश्वसनीय ा हो। यह सच है निक निवभागीय अति कारिरयों और प्रशासनिनक न्यायाति करणों को ऐसी सामग्री का मूल्यांकन करने में साव ानी बर नी चानिहए और लापरवाही से उसे नजरअंदाज नहीं करना चानिहए जो भार ीय साक्ष्य अति निनयम क े ह सुसंग नहीं होने क े बारे में सख् शब्दों में कहा गया है। इसक े लिलए निनण#य को संदर्भिभ करना या पाठ्य पुस् कों का हवाला देना आवश्यक नहीं है, हालांनिक दोनों पक्षों क े अति वक्ताओं द्वारा निवति क निनण#यों और अन्य प्राति कारिरयों की ओर हमारा ध्यान आक ृ ष्ट निकया गया है।न्यातियक दृनिष्टकोण का सार वस् ुनिनष्ठ ा, बाहरी सामनिग्रयों का अपवज#न और प्राक े निनयमों पर निवचार करना और पालन करना है। बेशक, निनष्पक्ष ा ही आ ार है और यनिद निवक ृ ति या 10 (1977) 2 एससीसी 491 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मनमानापन, पूवा#ग्रह या निनण#य की स्व ंत्र ा का लोप निनकाले गए निनष्कर्ष# को दूनिर्ष कर ा है, ो ऐसे निनष्कर्ष# को भले ही वह आं रिरक मामलों क े न्यायाति करण का हो, उसे अच्छा नहीं माना जा सक ा।हालांनिक अ ीनस्र्थी न्यायालयों ने शायद इस बा पर जोर देकर ]ुद को गल निदशा में निनदSभिश निकया निक जो यात्री चढ़े और उ रे, उनको वै निनष्कर्ष# अभिभलिललि] निकए जाने से पहले ढ़ूँढा जाना चानिहए और न्यायाति करण क े समक्ष लाया जाना चानिहए। अमेरिरकी निवति शास्त्र क े क ु छ अंशों क े आ ार पर प्रत्यर्थी8 क े अति वक्ता ने जिजस 'अवभिशष्ट' निनयम (निनण#य कम से कम निकसी साक्ष्य द्वारा समर्भिर्थी होने क े निनयम) का उल्ले] निकया है, वह उस सीमा क नहीं जा ा है और न ही हल्सबरी का प्रस् र (निवचार) ऐसी कठोर आवश्यक ा पर जोर दे ा है। सा ारण बिंबदु यह है निक क्या क ु छ सबू र्थीे या कोई सबू नहीं र्थीा- यह सा ारण अदाल की काय#वाही को निनयंनित्र करने वाले कनीकी निनयमों क े अर्थी# में नहीं है बल्पिल्क निनष्पक्ष सा ारण अर्थी# में यह है, निक जो सामान्य समझ और प्रज्ञावान र्व्ययनिक्त स्वीकार करेंगे।इस रह से दे]ने पर, एक आं रिरक मामलों क े न्यायाति करण द्वारा अभिभलिललि] निनष्कर्ष# क े साक्ष्य में साक्ष्य की पया#प्त ा जांच से परे है। निनष्कर्ष# क े समर्थी#न में निकसी सबू की अनुपल्पिस्र्थीति निनति’ रूप से अदाल की जांच क े लिलए उपलब् है क्योंनिक यह अभिभले] पर स्पष्ट निवति की त्रुनिट क े समान है। हम इस मामले में यह पा े हैं, निक प्रत्यर्थी8 क े लि]लाफ लगाए गए आरोप क े लिलए फ्लाइंग स्क्वाड क े निनरीक्षक चमनलाल का सबू प्रासंनिगक है। इसलिलए, हम यह मानने में असमर्थी# हैं निक आदेश उस आ ार पर अवै है।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

8. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिरवहन निनगम बनाम सुरेश चंद शमा#11 क े मामले में निदए गए निनण#य में इस न्यायालय ने उच्च न्यायालय क े आदेश को अपास् कर निदया जिजसमें रिरट यातिचका को यह अभिभ ारिर हुए अनुमति दी गई र्थीी निक निबना निटकट यानित्रयों की जांच नहीं की गई है और नकदी र]ने वाले कम#चारी की जांच नहीं की गई है। इस न्यायालय ने र न सिंसह क े मामले में इस न्यायालय क े निनण#य पर अवलम्ब लिलया और पाया निक सेवा से ब]ा#स् गी की सजा कम#चारी क े जिसद्ध अपरा से असंग नहीं र्थीी।

9. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ]ण्ड़पीठ, जिजससे निवद्वान एकल पीठ बाध्य र्थीी, ने प्रबन् निनदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिरवहन निनगम व अन्य बनाम राजेंद्र प्रसाद12 क े निनण#य में निनयोक्ता की अपील की अनुमति दी, जिजसमें न्यायाति करण ने पाया निक निनरीक्षण क े समय निबना निटकट यानित्रयों की जांच नहीं की गई र्थीी। इसलिलए सजा क े आदेश को प्राक े जिसद्धां ों क े उल्लंघन में अपास् कर निदया गया र्थीा।उच्च न्यायालय की ]ण्ड़पीठ ने इस प्रकार अभिभनिन ा#रिर निकयाः "24. उपरोक्त क े मद्देनजर, हम दावाक ा#/प्रत्यर्थी8 क े निवद्वान अति वक्ता द्वारा इस आशय क े क # में कोई सार नहीं पा े हैं निक जांच क े दौरान यानित्रयों का परीक्षण निकया जाना र्थीा और दनुसार, हम अभिभनिन ा#रिर कर े हैं निक न्यायाति करण द्वारा निदए गए यानित्रयों की जांच क े संबं में निनष्कर्ष# निवति क े प्रति क ू ल है और ऐसा होने से यह अपोर्षणीय है।यह इस कारण से भी है निक दावाक ा#/प्रत्यर्थी8 सनिह गवाहों की जांच करने क े बाद 11 (2010) 6 एससीसी 555 12 2019 एससीसी ऑनलाइन ऑल 5152 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जांच अति कारी ने माना निक दावाक ा# /प्रत्यर्थी8 क े लि]लाफ लगाए गए आरोप सानिब पाए गए। xx xx xx

37. इसक े अलावा, व #मान मामले में दावाक ा#/प्रत्यर्थी8-राजेंद्र प्रसाद बस का परिरचालक है और उसे बस में यात्रा करने वाले यानित्रयों से निटकट लेने और इसे निनगम क े पास जमा करने का क #र्व्यय सौंपा गया र्थीा, हालांनिक व #मान मामले में अभिभले] पर मौजूद साक्ष्यों से, जो ल्पिस्र्थीति उभर ी है वह इस आशय की है निक उसने 16 यानित्रयों/र्व्ययनिक्तयों से निकराया एकत्र निकया, लेनिकन उसे जमा नहीं निकया।"

10. दूसरी ओर, प्रत्यर्थी8-कम#कार क े निवद्वान अति वक्ता ने क # निदया निक निनरीक्षक का बयान निवश्वास पैदा नहीं कर ा है क्योंनिक उसने यानित्रयों क े नाम और प े दज# नहीं निकए र्थीे। कम#कार का मामला यह नहीं है निक यानित्रयों की जांच की आवश्यक ा र्थीी, लेनिकन कम से कम क ु छ सबू होने चानिहए र्थीे निक ऐसे यात्री र्थीे जो निबना निटकट यात्रा कर े पाए गए र्थीे। चूंनिक मूल साक्ष्य अभिभले] पर उपलब् नहीं हैं, इसलिलए े निनष्कर्ष# को अवै या अनुतिच नहीं कहा जा सक ा है, जिजसे उच्च न्यायालय द्वारा ठीक ही हस् क्षेप नहीं निकया गया र्थीा।

11. हम पा े हैं निक न्यायाति करण और उच्च न्यायालय का आदेश स्पष्ट रूप से गल है और कानून में पोर्षणीय नहीं है। निनयोक्ता क े प्रति निनति की इस प्रश्न पर प्रति -परीक्षा नहीं की गई है निक उसने 12.11.1998 को बस का निनरीक्षण नहीं निकया है।उसने गवाही दी है निक जब उसने यानित्रयों क े बयान दज# करने की कोभिशश की, ो Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरचालक ने उसक े सार्थी दुर्व्यय#वहार निकया और अमया#निद शब्दों का प्रयोग निकया। यहां क निक बयान क े इस भाग को भी प्रति -परीक्षा में प्रति वानिद नहीं निकया गया है। इसलिलए यह थ्य निक निनरीक्षक ने यानित्रयों क े नाम और प े दज# नहीं निकए, इसे अनुतिच नहीं कहा जा सक ा है। चूंनिक यात्री कम निकराया देने वाले यात्री हैं, इसलिलए वे परिरचालक क े लि]लाफ निकसी भी कार#वाई क े मुद्दों पर शानिमल होने में संकोच कर सक े हैं। निनरीक्षक ने पाया र्थीा निक 17 यानित्रयों को निटकट जारी नहीं निकया गया र्थीा और निनरीक्षक क े इस बयान को भी जिजरह में प्रति वानिद नहीं निकया गया है। न्यायाति करण या उच्च न्यायालय अति निनणा#यक क े समक्ष कम#कार क े कदाचार क े संबं में निनयोक्ता द्वारा र]े गए सबू ों को ]ारिरज नहीं कर सक ा र्थीा।निफर भी एफआईआर दज# न कराना निनयोक्ता द्वारा परीतिक्ष निकए गए गवाह क े लि]लाफ परिरल्पिस्र्थीति नहीं हो सक ी है। निकसी कम#चारी क े लि]लाफ आपराति क काय#वाही शुरू करना या काय#वाही शुरू नहीं करना निवभागीय काय#वाही में कदाचार सानिब करने क े लिलए कोई प्रभाव नहीं डाल ा है। इसलिलए हम पा े हैं निक सेवा से हटाने क े आदेश को निकसी भी रह से अनुतिच और अन्यायपूण# नहीं कहा जा सक ा है जिजससे न्यायाति करण और उच्च न्यायालय को हस् क्षेप करने की आवश्यक ा हो। न्यायाति करण द्वारा अभिभलिललि] निकए गए ीनों कारण निबल्क ु ल निवक ृ हैं और निकसी भी सबू द्वारा समर्भिर्थी नहीं हैं। न्यायाति करण ने निवति क े मूल जिसद्धां ों का गल प्रयोग निकया र्थीा और उसक े बाद उच्च न्यायालय ने आदेश की गल पुनिष्ट की है।

12. परिरणामस्वरूप, अपील को अनुमति दी जा ी है। उच्च न्यायालय और े आदेशों को अपास् निकया जा ा है। 14.12.2001 निदनांनिक सजा क े आदेश को ए द्द्वारा बहाल निकया जा ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ……….………………........ (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता) ………………………........ (न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन) नई निदल्ली; 8 निदसंबर 2021. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA