Full Text
भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपीलीय अति कारिर ा
सि विवल याति का ं० 5966/2021
(विवशेष अनुमति याति का (सि विवल) ं. 5435/2020 े उत्पन्न)
अजय क
ु मार शुक्ला और अन्य ....अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
अरविंवद राय और अन्य .....प्रत्यर्थी3 (गण)
ार्थी में
सि विवल याति का ं 5969 वष: 2021
(विवशेष अनुमति याति का (सि विवल) ं. 8783/2020 े उत्पन्न)
आशीष क
ु मार श्रीवास् व और अन्य .......अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
राजेश क
ु मार सिं ह और अन्य .............प्रत्यर्थी3 (गण)
और
सि विवल याति का ं 5967 वष: 2021
(विवशेष अनुमति याति का (सि विवल) ं. 5706 ऑफ 2020 े उत्पन्न)
मनोज क
ु मार शुक्ला और अन्य .............अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
राजेश क
ु मार सिं ह और अन्य ...........प्रत्यर्थी3 (गण)
और
उद्घोषणा
“क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क
े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क
े लिलए है और विक ी अन्य
उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क
े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी
ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क
े उद्देश्यों क
े लिलए मान्य होगा।"
सि विवल अपील ं. 5968 वष: 2021
(विवशेष अनुमति याति का (सि विवल) ं. 5850 न् 2020 े उत्पन्न)
महेश ंद्र ब नी और अन्य ........अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
म]द्र सिं ह और अन्य ..........प्रत्यर्थी3 (गण)
विन ण: य
मा० न्यायमूर्ति विवYम नार्थी।
JUDGMENT
1. मूल रिरट याति काक ा:ओं (उच्च न्यायालय क े मक्ष) ने विवशेष अपील ंख्या 819 वष: 2019, राजेश क ु मार सिं ह और एक अन्य बनाम राजीव नैन उपाध्याय और 24 अन्य क े मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा विदनांक 04.12.2019 को पारिर विनण:य और आदेश की शुद्ध ा को ुनौ ी दे े हुए व:मान अपीलों को दायर विकया है सिज क े द्वारा खण्ड पीठ ने अपील की अनुज्ञा कर े हुए विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनण:य एवं आदेश को अपास् कर रिरट याति का को खारिरज कर विदया है। पृष्ठभूविमः
2. उत्तर प्रदेश राज्य, लघु सिं ाई विवभाग में कविनष्ठ अणिभयं ा क े रूप में काय: कर रहे अपीलक ा: विदनांक 05.03.2010 की अंति म वरिरष्ठ ा ू ी े व्यणिर्थी होकर रिरट याति का ंख्या 53123 वष: 2012, राजीव नैन उपाध्याय और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य, दायर कर उक्त विनण:य एवं आदेश विदनांविक 04.12.2019 को ुनौ ी विदया गया है। अपीलक ा:, जो विक मूल रिरट उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" याति काक ा: है, मैक े विनकल और सि विवल शाखा े हैं जबविक प्राइवेट प्रत्यर्थी3 क ृ विष शाखा े हैं।
3. मूल रूप े याति का ब अ फल हो गई जब वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी दी गई र्थीी सिज का प्रकाशन 05.03.2010 को विकया गया र्थीा। हालांविक, जब याति का विव ारा ीन र्थीी ो उ मय ंशो न कर विदनांक 05.09.2006 को प्रकाणिश पूव: की वरिरष्ठ ा ू ी को भी ुनौ ी विदया गया र्थीा। उक्त ंशो न को अनुज्ञा कर विदया गया र्थीा। इ प्रकार, ंशो न क े बाद सिज अनु ोष दावा विकया विकया गया र्थीा वह इ प्रकार हैः "प्रार्थी:ना" इ रिरट याति का में उच्च न्यायालय क े मक्ष विनम्नलिललिख प्रार्थी:ना की गई है जो इ प्रकार हैः माननीय न्यायालय े विवनम्र प्रार्थी:ना है विकः i. मुख्य अणिभयं ा (लघु सिं ाई), उ.प्र. लखनऊ द्वारा जारी काया:लय आदेश विदनांविक 05.03.2010 और उ में ंलग्न वरिरष्ठ ा ू ी (रिरट याति का का अनुलग्नक 12) को खारिरज कर परमादेश की प्रक ृ ति में एक रिरट, आदेश या विनद|श जारी करने की क ृ पा करें। ii. प्रत्यर्थिर्थीयों को आदेणिश कर े हुए उपयुक्त प्रक ृ ति का एक रिरट,आदेश या विनद|श जारी करने की क ृ पा करें विक वह इ माननीय न्यायालय यर्थीाविनर्दिदष्ट अवति क े भी र उ.प्र. रकार ेवक वरिरष्ठ ा विनयम 1998 े ंग ंशोति वरिरष्ठ ा ू ी ैयार कर प्रकाणिश करें। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" iii. आक्षेविप काया:लय आदेश क े आ ार पर कोई कार:वाई करने े प्रत्यर्थी3 को रोक े हुए उपयुक्त प्रक ृ ति का एक रिरट, आदेश या विनद|श जारी करने की क ृ पा करें। iv. जै ा माननीय न्यायालय मामले की परिरस्थिस्र्थीति यों में युविक्तयुक्त और उति मझें रिरट, आदेश या विनद|श जारी करने की क ृ पा करें। v. व:मान रिरट याति का क े दौरान याति काक ा: को ख | का आदेश करने की क ृ पा करने करें। उच्च न्यायालय क े मक्ष रिरट याति का में मूल प्रार्थी:ना क े बाद यह प्रार्थी:ना जोड़ी गईः विनम्नलिललिख प्रार्थी:नाओं को प्रार्थी:ना ं. (i) क े उपरान् प्रार्थी:ना ं. (ia) ) और (ib) ) क े रूप में जोड़ा जा क ा है। (क) वरिरष्ठ ा ू ी विदनांविक 5.9.2006 को रद्द कर अणिभलेख का उत्प्रेषण की क ृ पा करें। (ख) प्रत्यर्थिर्थीयों को 5.9.2006 की वरिरष्ठ ा ू ी क े आ ार पर प्रत्यर्थिर्थीयों को कोई लाभ प्रदान कर परमादेश रिरट जारी करने की क ृ पा करें।"
4. विवद्वान एकल न्याया ीश ने विदनांक 14.05.2019 को एक विनण:य और आदेश पारिर कर विदनांक 05.09.2006 और 05.03.2010 की वरिरष्ठ ा ू ी को रद्द कर े हुए रिरट याति का को अनुज्ञा कर विदया और आगे उत्तर प्रदेश शा कीय ेवक वरिरष्ठ ा विनयमावली, 1991 ( ंक्षेप में "विनयम 199 1") क े विनयम 5 क े अनु ार नई वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े लिलए प्रत्यर्थिर्थीयों को विनद|णिश कर े हुए परमादेश रिरट जारी विकया। इ में यह भी उपबं र्थीा विक रिरट याति काएँ विव ारा ीन ा क े मय पदोन्नति की गई र्थीी उ में हस् क्षेप नहीं विकया उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" जाएग, विकन् ु यह विनयमावली, 1991 क े विनयम 5 क े अनु ार ैयार की जाने वाली नई वरिरष्ठ ा ू ी क े अ ीन रहेगा। विवद्वान एकल न्याया ीश ने उपरोक्त विनष्कष† पर पहुं ने क े लिलए विनम्नलिललिख आ ार अणिभलिललिख विकये हैं जो इ प्रकार हैंः (क) ु ंग विनयमों और वरिरष्ठ ा क े विन ा:रण की योजना की जां करने क े बाद, यह अणिभलिललिख विकया गया र्थीा विक मौजूदा वरिरष्ठ ा ू ी न क े वल सि विवल और यांवित्रक शाखा े ंबंति कविनष्ठ अणिभयं ाओं क े विह क े लिलए पूवा:ग्रह कारिर करेगी, बस्थि‡क उनकी पदोन्नति की ंभावनाओं को भी प्रभाविव करेगी।यह पूरे विवभाग क े प्रशा न और काम पर प्रति क ू ल प्रभाव डालेगा। विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनण:य का अनुच्छेद 21 नी े पुनः उद्धृ विकया जा ा हैः
21. ऊपरोक्त परिरदृश्य न क े वल सि विवल और मैक े विनकल इंजीविनयरिंरग शाखा े ंबंति जूविनयर इंजीविनयरों की पदोन्नति की ंभावनाओं को प्रभाविव कर उनक े विह ों क े लिलए न क े वल पूवा:ग्रह होगा, बस्थि‡क विवभाग द्वारा प्रबंति विकए जाने वाले काय: की आवश्यक ा पर भी प्रति क ू ल प्रभाव डालेगा।" (ख) विवलम्ब और देरी े ग्रस् याति का क े ंबं में मूल रिरट याति का पर प्रति वाविदयों द्वारा की गई आपलित्त पर विवस् ृ रूप े विव ार विकया गया। इ विंबदु पर विवति को व्यापक ा े विव ार करने क े उपरान् यह अणिभलिललिख विकया गया र्थीा विक ऐ े मामलों में जहां वरिरष्ठ ा विववाविद हो वहां ीन े ार वष: की देरी घा क नहीं होगी। णिशबा शंकर महापात्र बनाम उड़ी ा राज्य 1 क े विनण:य का अवलम्ब लेकर यह अव ारिर विकया गया र्थीा विक व:मान मामले में, कोई विवलम्ब या देरी 1 (2010) 12 ए. ी. ी. 471 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" नहीं हुई र्थीी। यह भी अणिभलिललिख विकया गया विक एक बार वरिरष्ठ ा विन ा:रण को इ आ ार पर गंभीर ुनौ ी विदया गया र्थीा विक वरिरष्ठ ा ू ी को विनयमानु ार ैयार विकया गया र्थीा, रिरट याति का पर मेरिरट क े आ ार पर विव ार विकया जाना जरूरी र्थीा। (घ) एक ही यन े ंबंति आयोग द्वारा ीन अलग-अलग ूति यां अग्रेविष की गई र्थीीं और इ लिलए, ीन ूति यों में े उम्मीदवारों की एक ामान्य आन् रिरक मेरिरट ैयार की जानी ाविहए र्थीी और दनु ार वरिरष्ठ ा य की जानी ाविहए र्थीी। ई) क्षम प्राति कारी और राज्य ने क े वल एक ही यन े उत्पन्न ीन यविन ूति यों की प्राविŽ की ारीख क े आ ार पर वरिरष्ठ ा ू ी का विन ा:रण करक े कानून की एक गंभीर त्रुविट कारिर विकया। इ रह की कार:वाई का न ो कानून में मर्थी:न विकया जा क ा है और न ही थ्यों पर और न ही वरिरष्ठ ा विन ा:रिर करने क े काय: को ऐ ी आकस्थिस्मक परिरस्थिस्र्थीति पर छोड़ा जा क ा है। ( ) यन ू ी क े प्रेषण की ारीख, क‡पना क े विक ी भी खंड द्वारा वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े लिलए एक विन ा:रिर कारक नहीं हो क ी है। क्षम प्राति कारी और राज्य ने विनयमावली, 1991 में विनविह विवणिशष्ट प्राव ानों क े विवपरी काम विकया है। जै े विक उनकी कार:वाई मनमानी है और ाव:जविनक रोजगार क े मामलों में मान अव र की ंवै ाविनक भावना क े विवरूद्ध भी है।
5. विवद्वान एकल न्याया ीश क े फ ै ले को इन्ट्रा कोट: अपील क े माध्यम े ुनौ ी दी गई है जो विवशेष अपील ंख्या 819/2019 क े रूप में पंजीक ृ है। खण्ड़पीठ ने विदनांक 04.12.2019 को फ ै ले और आदेश पारिर कर विवद्वान उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" एकल न्याय ीश क े फ ै ले को को रद्द कर विदया और अपील खारिरज दी। इ फ ै ले ने अनेक रिरट याति काओं को जन्म विदया है। खण्ड़पीठ ने उक्त विनष्कष† पर पहुं ने क े लिलए विनम्नलिललिख विनष्कष: अणिभलिललिख विकयेः (क) मूल रिरट याति काक ा:ओं की ओर े अदाल का दरवाजा खटखटाने में अ ा ारण देरी हुई क्योंविक 2006 की वरिरष्ठ ा ू ी, जो 2009 की वरिरष्ठ ा ू ी का आ ार बनी र्थीी, सिज को उति मय क े भी र ुनौ ी नहीं दी गई र्थीी। (ख) मूल रिरट याति काक ा:ओं ने विदनांक 05.09.2006 की अंति म वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी नहीं दी है, मुख्य रूप े उ ी को स्वीकार विकया है जै े विक उनक े दावे को अति ग्रहण क े सि द्धां द्वारा रोक विदया जाएगा। (ग) भी प्रभाविव कविनष्ठ अणिभयं ाओं को पक्षकार नहीं बनाया जाना आवश्यक पक्षकारों क े अ ंयोजन क े सि द्धां क े आ ार पर घा क होगा। (घ) यन/विनयुविक्त प्रविYया में भाग लेने वाले अपीलक ा: बाद में यन प्रविYया को ुनौ ी नहीं दे क े क्योंविक इ ुनौ ी े विवबं और मौन म्मति क े सि द्धां प्रभाविव हो जाएगा। ई) विवद्वान एकल न्याया ीश विनयमावली, 1991 क े विनयम 5 क े अनु ार वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने का विनद|श ही नहीं र्थीा क्योंविक विनयम 8 ही लागू होगा न विक विनयम 5। थ्यः
6. अपील क े इ शाखाक े न्यायविनण:यन क े ु ंग थ्य इ प्रकार हैंः (क) मुख्य अणिभयं ा, लघु सिं ाई विवभाग विदनांक 18.06.1998 को उत्तर प्रदेश लोक ेवा आयोग ( ंक्षेप में "आयोग") को लघु सिं ाई विवभाग में कविनष्ठ अणिभयं ाओं क े 206 पदों की भ 3 क े लिलए अति या न उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" भेजा। इन पदों को Yमशः 50:30:20 क े अनुपा में क ृ विष, मैक े विनकल और सि विवल शाखामें विवभासिज विकया गया र्थीा। (ख) आयोग ने कविनष्ठ अणिभयं ाओं क े पद क े लिलए आवेदन आमंवित्र कर े हुए 1998-1999 का विवज्ञापन ं. 3 जारी विकया। परीक्षा प्रविYया दो स् रों में र्थीी एक स्Yीविंनग टेस्ट जो विदनांक 18.10.1998 को आयोसिज विकया गयी र्थीी और इ स्Yीविंनग टेस्ट को अह: ा प्राŽ करने क े बाद, आयोग द्वारा एक ाक्षात्कार आयोसिज विकया जाना र्थीा। स्Yीविंनग टेस्ट का परिरणाम विदनांक 06.01.1999 को घोविष विकया गया र्थीा और उ क े बाद, क ृ विष इंजीविनयरिंरग में तिडप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों क े लिलए आयोग द्वारा विदनांक 07.06.1999 े विदनांक 26.06.1999 क ाक्षात्कार आयोसिज विकए गए र्थीे।जहां क मैक े विनकल इंजीविनयरिंरग में तिडप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों का प्रश्न र्थीा, उनक े ाक्षात्कार विदनांक 24.06.1999 े 02.07.1999 क े बी आयोसिज विकए गए र्थीे और अं में सि विवल इंजीविनयरिंरग में तिडप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों क े ाक्षात्कार विदनांक 07.07.1999 े 22.12.1999 क े बी आयोसिज विकए गए र्थीे।परिरणामों को अंति म रूप देने क े बाद, आयोग ने ीन अलग-अलग यन ूति यों को राज्य रकार क े लघु सिं ाई विवभाग को भेज विदयाः (i) विदनांक 28.09.1999 को, क ृ विष इंजीविनयरिंरग े ंबंति उम्मीदवारों की यन ू ी; उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (ii) विदनांक 06.01.2000 को, मैक े विनकल इंजीविनयरिंरग े ंबंति उम्मीदवारों की यन ू ी और, (iii) अं में विदनांक 07.11.2000 को, सि विवल इंजीविनयरिंरग े ंबंति उम्मीदवारों की यन ू ी। नोटः विवभाग को अग्रेविष की गई ीन ूति यों की ति णिर्थीयों क े बारे में कु छ विव ंगति है। आयोग ने अपने द्वारा दायर हलफनामों में अलग -अलग ारीखें ब ाई ं हैं।हालांविक, थ्य यह है विक ीन अलग-अलग शाखाकी ू ी भेजने का Yम उ ी Yम में क ृ विष, यांवित्रक और सि विवल है। उनमें े एक शपर्थीपत्र में क ृ विष, मैक े विनकल और सि विवल जूविनयर इंजीविनयरों क े लिलए 06.01.2000,27.01.2000 और 07.11.2000 ीन ति णिर्थीयां दी गई ं हैं। एक अन्य हलफनामे में यह उ ी Yम में 28.09.1999,06.01.2000 और 07.11.2000 दी गई ं हैं।इ क े बाद हमने इन ारीखों को Yमशः 28.09.1999,06.01.2000 और 07.11.2000 विव ारिर विकया है। (ग) आयोग द्वारा अग्रेविष उपरोक्त ीनों यन ूति यों क े आ ार पर, विनयुविक्त पत्र 08.10.2001 को जारी विकए गए र्थीे। विनयुविक्त पत्र े स्पष्ट रूप े ंक े विमल ा है विक वरिरष्ठ ा क े ंबं में यह मुद्दा बाद में य विकया जाएगा। विदनांक 08.10.2001 को जारी विनयुविक्त पत्रों क े अनु ार, याति काक ा: और प्राइवेट प्रत्यर्थी3 ने ज्वाइन कर लिलया र्थीा। (घ) वष: 2006 में, 01.01.1989 क े बाद विनयुक्त भी कविनष्ठ अणिभयं ाओं क े ंबं में विदनांक 17.03.2006 क े काया:लय आदेश की एक अस्र्थीायी वरिरष्ठ ा ू ी प्रकाणिश की गई र्थीी। बाद में, काया:लय क े आदेश विदनांक 05.09.2006 को अंति म वरिरष्ठ ा ू ी प्रकाणिश की गई।उक्त काया:लय उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आदेश क े अंति म वाक्य में लिलखा है विक आयोग द्वारा यविन उम्मीदवारों की वरिरष्ठ ा को उनकी योग्य ा क े Yम में रखा गया है। (ड) विवभाग ने वष: 2009 में वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने की एक नई कवायद की क्योंविक पहली बार लघु सिं ाई विवभाग क े कविनष्ठ अणिभयं ाओं े ंबंति विनयम बनाए गए र्थीे।इन विनयमों का ंदभ: क ु छ मय बाद विदया जाएगा। ( ) दनु ार, अनंति म वरिरष्ठ ा ू ी काया:लय आदेश विदनांक 29.12.2009 को आपलित्तयों को आमंवित्र कर े हुए प्रकाणिश की गई र्थीी। प्राŽ आपलित्तयों पर विव ार विकया गया र्थीा और काया:लय क े आदेश विदनांक 05.03.2010 को अंति म वरिरष्ठ ा ू ी प्रकाणिश विकया गया र्थीा। काया:लय आदेश विदनांविक 05.03.2010 क े अनुच्छेद 11 क े बाद वाले प्रस् र में, यह ंदभ: विदया गया र्थीा विक आयोग ने को ीन अलग -अलग ूति याँ यानी विदनांक 2-28-09-1999 को क ृ विष ंकाय, विदनांक 06-01-2000 को मैक े विनकल ंकाय और विदनांक 07-11-2000 को सि विवल ंकाय े ंबंति ू ी प्रेविष की र्थीीं। (छ) विवभाग ने ीनों ूति यों क े उम्मीदवारों को एक ही अनुYम में रखा र्थीा क्योंविक उन्होंने ंबंति ूति यों में वरिरष्ठ ा प्राŽ विकया गया र्थीा। उदाहरण क े ौर पर, आयोग द्वारा अग्रेविष यविद क ृ विष शाखामें 30 उम्मीदवार हो े, ो उन भी उम्मीदवारों को Yम ं. 1 े 30 उ ी Yम में उनक े द्वारा प्राŽ अंको क े आ ार पर शीष: पर रखा जा ा, यविद 20 उम्मीदवार मैक े विनकल ू ी में हो े ो उन्हें आयोग द्वारा उ ी ू ी में उनक े द्वारा प्राŽ अंकों क े आ ार पर Yम ंख्या 31 े 50 में क ृ विष शाखा क े नी े रखा जा ा और, यविद सि विवल शाखा में 50 उम्मीदवार हो े, ो उन्हें उ ी Yम में मैक े विनकल े नी े Yम ं. 51 े 100 में रखा जा ा। जै ा विक विकया गया र्थीा। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (ज) विदनांक 05.03.2010 को अंति म ू ी क े प्रकाशन क े बाद ही वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने की इ विव ा क े बारे में अपीलक ा:ओं को प ा ला क्योंविक इ े पहले वे इ विवश्वा में र्थीे विक विवभाग ने आयोग द्वारा प्रेविष यन और परिरणाम क े मु ाविब उ विवषय में ीनों शाखाों क े बी वरिरष्ठ ा ू ी ैयार की र्थीी। इ प्रकार उन्हें ीनों शाखाों अर्थीा: क ृ विष, मैक े विनकल और सि विवल की परीक्षा में प्राŽ अंकों क े आ ार पर परस्पर योग्य ा पर विव ार करक े वरिरष्ठ ा ू ी को ही करने क े लिलए अभ्यावेदन करने क े लिलए मजबूर विकया गया र्थीा और ीनों शाखाकी यन ू ी प्राŽ होने क े Yम में वरिरष्ठ ा ू ी ैयार आदेश क े बजाय आयोग द्वारा अग्रेविष विकया गया। जब उनक े अभ्यावेदन पर कोई विव ार नहीं विदया गया ो अपीलक ा:ओं ने रिरट याति का ंख्या 53123/2012 दायर कर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। (झ) जै ा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, एकल न्याया ीश ने रिरट याति का की अऩुज्ञा कर विदया र्थीा जबविक खण्ड पीठ इ रिरट याति का को खारिरज कर विदया र्थीा परिरणामस्वरूप व:मान अपील दायर की गई ंहैं। वै ाविनक प्राव ान: विनयमावली
7. इ े पहले विक हम आगे बढ़ें, वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े लिलए ु ंग विनयमों की एक व्यापक रूपरेखा को ंदर्थिभ विकया जाना ाविहए। ंविव ान क े अनुच्छेद 309 क े ह व:प्रर्थीम वा:ति क ु ंग विनयमावली, 1991 बनायी गई र्थीी जो उ मय अस्थिस् त्व में र्थीी जब वष: 1998-1999 में अपीलक ा:ओं और प्रत्यर्थिर्थीयों का यन विकया गया र्थीा। उक्त विनयमावली का भाग II वरिरष्ठ ा क े विन ा:रण े ंबंति है। इ का विनयम 5 में वरिरष्ठ ा का उपबं कर ा है जहां उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विनयुविक्तयां क े वल ी ी भ 3 द्वारा की जा ी हैं। उक्त विनयम को पुनः प्रस् ु विकया जा रहा हैः “5. जहां विनयुविक्तयां क े वल ी ी भ 3 द्वारा की जा ी हैं वहांं वरिरष्ठ ा- जहां ेवा विनयमों क े अनु ार विनयुविक्तयां क े वल ी ी भ 3 द्वारा की जानी हैं, विक ी यन क े परिरणाम आ ार पर विनयुक्त व्यविक्तयों क े बी की वरिरष्ठ ा वही होगी जै ा विक आयोग या विमति द्वारा ैयार मेरिरट ू ी में प्रदर्थिश विकया गया है, जै ा मामला हो। प्रति बं यह है विक ी ी भ 3 द्वारा यविन उम्मीदवार अपनी वरिरष्ठ ा खो क ा है, यविद वह वै कारणों क े विबना उ मय ज्वाइन करने में विवफल रह ा है जब उ े रिरविक्त की पेशकश की जा ी है, ब उन कारणों की वै ा क े बारे में विनयुविक्त प्राति कारी का विनण:य अंति म होगा। इ क े अति रिरक्त प्रति बं यह है विक उत्तरव 3 यन क े परिरणाम पर सिजनकी विनयुक्त हुई है वह व्यविक्त पूव: यन क े परिरणाम पर विनयुक्त व्यविक्तयों े कविनष्ठ माना जाएगा। स्पस्टीकरण.- जहां एक ही वष: में, विनयविम और आपा कालीन भ 3 क े लिलए अलग-अलग यन विकया जा ा हैं वहां विनयविम भ 3 क े लिलए यन को पूव: यन माना जाएगा।”
8. उपरोक्त प्राव ान का र री ौर पर पढ़़ने े यह विन ा:रिर हो जा ा है विक विक ी यन क े परिरणामस्वरूप विनयुक्त व्यविक्तयों की बी की वरिरष्ठ ा, यर्थीास्थिस्र्थीति, आयोग या विमति द्वारा ैयार की गई मेरिरट ू ी क े आ ार पर होगी। आयोग े अणिभप्रे उत्तर प्रदेश लोक ेवा आयोग े है और विमति े अणिभप्रे विनयुविक्त क े लिलए यन करने क े लिलए गविठ विमति े है। व:मान मामले में, आयोग ने ही यन विकया र्थीा। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
9. विनयमाावली, 1991 क े विनयम 8 में वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने ंबं ी प्राव ान है जहां विनयुविक्तयां और पदोन्नति दोनों ी ी भ 3 द्वारा की गई र्थीीं। उक्त विनयम इ प्रकार हैः जहां पदोन्नति और ी ी भ 3 द्वारा विनयुविक्तयां की जा ी हैं वहां वरिरष्ठ ा (1) जहां ेवा विनयमों क े अनु ार पदोन्नति और ी ी भ 3 दोनों क े द्वारा विनयुविक्तयां की जा ी हैं, वहां विनयुक्त व्यविक्तयों की वरिरष्ठ ा, उनकी मूल विनयुविक्तयों क े आदेश की ारीख े अव ारिर की जाएगी और यविद दो या अति क व्यविक्तयों की विनयुविक्त एक ार्थी उ Yम में की जा ी है सिज में उनक े नामों की व्यवस्र्थीा विनयुविक्त आदेश में की गई हैः बश | विक यविद विनयुविक्त आदेश विक ी विवशेष पूव:व 3 ति णिर्थी को ब ा ा है, सिज क े प्रभाव े विक ी व्यविक्त को पया:Ž रूप े विनयुक्त विकया जा ा है, ो उ ारीख को मूल विनयुविक्त क े आदेश की ारीख माना जाएगा और अन्य मामलों में, इ का अर्थी: होगा विक आदेश विदया जाएः इ क े अति रिरक्त प्रति बं यह है विक ी े भ 3 विकया गया उम्मीदवार अपनी वरिरष्ठ ा खो क ा है, यविद वह वै कारणों क े विबना ज्वाइन करने में ब विवफल रह ा है जब उ े रिरविक्त प्रस् ाविव की जा ी है, विकन् ु उ कारण की वै ा क े बारे में विनयुविक्त प्राति कारी का विनण:य अंति म होगा। (2) विक ी यन क े परिरणाम पर विनयुक्त व्यविक्तयों की वरिरष्ठ ा अं र - (क) ी ी भ 3 क े माध्यम े, यर्थीास्थिस्र्थीति, वही होगा जो आयोग या विमति द्वारा ैयार की गई मेरिरट ू ी में विदखाया गया है। (बी) पदोन्नति द्वारा, विनयम 6 या विनयम 7 में प्रति पाविद सि द्धां ों क े अनु ार विन ा:रिर विकया जाएगा, यर्थीास्थिस्र्थीति, पदोन्नति एकल क ै डर अर्थीवा अनेक क ै डर की जानी है। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (3) जहां विनयुविक्तयां विक ी एक यन क े परिरणाम पर पदोन्नति और ी ी भ 3 दोनों द्वारा की जा ी हैं, ी ी भ 3 में पदोन्नति की वरिरष्ठ ा एक Yीय Yम में (प्रर्थीम पदोन्नति होने क े ना े), जहां क हो क े, दो स्रो ों क े लिलए विन ा:रिर कोटा क े अनु ार विन ा:रिर की जाएगी । दृष्टां (1) जहां पदोन्नति और ी ी भ 3 का कोटा 1 क े अनुपा में हैःवरिरष्ठ ा विनम्नलिललिख आदेश में होगी - पहला पदोन्न विद्व ीय ी ी भ 3 भ 3 और इ ी रह, (2) जहां उक्त कोटा 1 क े अनुपा में हैःवरिरष्ठ ा विनम्नलिललिख आदेश में होगी - पहला पदोन्न विद्व ीय े ुर्थी: ी ी भ 3 पां वां प्रपदोन्न छठा ी ी भ 3 छः े आठ ी भ 3 और इ प्रकार हैः बश | - उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (i) जहां विनयुविक्त विक ी स्रो े विन ा:रिर कोटा े अति क की जा ी है, कोटा े अति क विनयुक्त व्यविक्तयों को वरिरष्ठ ा क े लिलए, बाद क े वष: या वष† में उ कोटे में डाल दी जाएगी जहां कोटे क े मु ाविबक रिरविक्तयां मौजूद होगी। (ii) जहां विक ी भी स्रो े विनयुविक्तयां विन ा:रिर कोटा े कम हो जा ी हैं और ऐ ी अ ूरी रिरविक्तयों क े विवरूद्ध विनयुविक्त बाद क े वष: या वष† में की जा ी है, इ लिलए विनयुक्त विकए गए व्यविक्तयों को विक ी भी विपछले वष: की वरिरष्ठ ा नहीं विमलेगी, लेविकन उ वष: की वरिरष्ठ ा प्राŽ होगी सिज में उनकी विनयुविक्तयां की गई ंहैं, ब उनक े नाम अन्य विनयुविक्तयों क े Yीय Yम में नामों क े बाद शीष: पर रखे जाएंगे। (iii) जहां ेवा विनयमों क े अनु ार, विक ी भी स्रो े अपूण: रिरविक्तयां, ंबंति ेवा विनयमों में उसिल्ललिख परिरस्थिस्र्थीति यों में दू रे स्रो े भरी जा क ी हैं और कोटा े अति क में विनयुविक्त की जा ी है, ब विनयुक्त विकए गए व्यविक्तयों को उ ी वष: की वरिरष्ठ ा प्राŽ होगी जै े विक वे अपने कोटे की रिरविक्तयों क े विवरूद्ध विनयुक्त विकए गए हैं।"
10. उपरोक्त विनयम को ेवा में प्रयोग विकया गया है जहां ी ी भ 3 और पदोन्नति की ंयुक्त ू ी ैयार की जानी है। हालाँविक, यहां क विक यह विनयम उप-विनयम 2 (ए) में स्पष्ट रूप े उपबंति कर ा है विक ी ी भ 3 क े माध्यम े विक ी भी यन क े परिरणाम जारी होने पर विनयुक्त व्यविक्तयों की वरिरष्ठ ा में अं र वही होगी जै ा विक आयोग द्वारा या विमति द्वारा,यर्थीास्थिस्र्थीति, ैयार की गई मेरिरट ू ी में उल्लेख विकया गया है। जो भाषा प्रयोग की गई है र्थीा सिज रीति का उपबं विकया है वह प्रयुक्त विनयम 5 की रह है जहां पर क े वल ी ी भ 3 की वरिरष्ठ ा ू ी पर विव ार विकया जा ा है।
11. विनयमावली, 1991 का भाग III वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने े ंबंति है। विनयम 9 क े अनु ार, जै े ही विनयुविक्तयां की जा ी हैं, विनयुविक्त प्राति कारी एक अस्र्थीायी वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करेगा, वही आपलित्तयों को आमंवित्र करने वाले उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ंबंति व्यविक्तयों क े बी प्र ारिर विकया जाएगा।विनयुविक्त प्राति कारी, आपलित्तयों का विनपटारा करने क े बाद, अंति म वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करेगा। विनयम 9 यहां पुनः प्रस् ु विकया जा ा हैः “9. वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करना- (1) जै े ही विक ी ेवा में विनयुविक्तयां की जा ी हैं, विनयुविक्त प्राति कारी इन विनयमों क े प्राव ानों क े अनु ार ेवा में पया:Ž रूप े विनयुक्त व्यविक्तयों की एक अस्र्थीायी वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करेगा। (2) अस्र्थीायी वरिरष्ठ ा ू ी उति अवति की ू ना द्वारा आपलित्तयों को आमंवित्र करने वाले ंबंति व्यविक्तयों क े बी परिर ालिल की जाएगी, जो अस्र्थीायी वरिरष्ठ ा क े प्र लन की ारीख े ा विदनों े कम नहीं होगी। (3) इन विनयमों क े वै ा क े विवरूद्ध कोई आपलित्त स्वीकाय: नहीं होगी। (4) विनयुविक्त प्राति कारी क: ंग आदेश द्वारा आपलित्त का विनपटारा करने क े बाद अंति म वरिरष्ठ ा ू ी जारी करेगा। (5) उ शाखाकी वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करना आवश्यक नहीं होगा सिज में विनयुविक्तयां क े वल एक ही शाखा े प्रोन्नति द्वारा की जा ी हैं।
12. वष: 2009 में, ंविव ान क े अनुच्छेद 309 क े ह पुनः उत्तर प्रदेश लघु सिं ाई विवभाग अ ीनस्र्थी इंजीविनयरिंरग ेवा विनयमावली, 2009 ( ंक्षेप में विनयमावली, 2009) ैयार की गई र्थीी। विनयमावली, 2009 का भाग V में भ 3 की प्रविYया का उपबं विकया गया सिज में विनयम 14 े 17 शाविमल र्थीे। विनयम 15 (4) उपबं कर ा है विक आयोग लिललिख परीक्षा क े ार्थी- ार्थी ाक्षात्कार में प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा प्राŽ अंकों की क ु ल ंख्या क े अनु ार अपनी प्रवीण ा क े Yम में उम्मीदवारों की एक ू ी ैयार करेगा और दनु ार ऐ े उम्मीदवारों की सि फारिरश करेगा सिजनकों वे विनयुविक्त क े लिलए उपयुक्त मान े हैं। उक्त ू ी उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ैयार करने क े बाद, आयोग इ े विनयुविक्त प्राति करण को भेज देगा।विनयम 15 क े उप-विनयम (5) में यह भी प्राव ान विकया गया है विक यविद इंजीविनयरिंरग की एक े अति क शाखाओं में भ 3 की जा रही र्थीी, ो ऐ े मामलों में, आयोग उम्मीदवारों की एक ंयुक्त यन ू ी ैयार करना ाविहए र्थीा, जै ा विक लिललिख परीक्षा और ाक्षात्कार में उम्मीदवारों द्वारा प्राŽ अंकों क े योग े प्रकट हो ा है और उ ी ू ी को विनयम 15 (4) क े ह अग्रेविष ू ी क े अलावा विनयुविक्त प्राति कारी को भी भेजेगा।विनयमावली, 2009 क े विनयम 14-17 नी े विदए गए हैंः- विनयम 14 रिरविक्तयों का विन ा:रणः विनयुविक्त प्राति कारी भ 3 क े वष: क े दौरान भरे जाने वाले रिरविक्तयों की ंख्या विन ा:रिर कर आयोग को ूति करेगा और विनयम 6 क े ह अनु ूति जाति, अनु ूति जनजाति और अन्य श्रेणिणयों क े उम्मीदवारों क े लिलए आरतिक्ष रिरविक्तयों की ंख्या भी विन ा:रिर करेगा।। विनयम 15 ी ी भ 3 क े लिलए प्रविYयाः (1) प्रति योगी परीक्षा में उपस्थिस्र्थी होने की अनुमति क े लिलए आवेदन आयोग द्वारा जारी विवज्ञापन में प्रकाणिश विन ा:रिर प्रपत्र में आयोग द्वारा जारी विकया जाएगा। (2) विक ी भी उम्मीदवार को परीक्षा में प्रवेश नहीं विदया जाएगा जब क विक वह आयोग द्वारा जारी प्रवेश प्रमाण पत्र ारण नहीं कर ा है। (3) लिललिख परीक्षा क े परिरणाम प्राŽ होने और ारणीबद्ध होने क े बाद, आयोग विनयम 6 क े अनु ार अनु ूति जाति, अनु ूति जनजाति और अन्य श्रेणिणयों क े उम्मीदवारों का उति प्रति विनति त्व प्राŽ करने की आवश्यक ा क े ंबं में, ाक्षात्कार क े लिलए उ ने उम्मीदवारों को बुलाएगा, सिज ना इ ंबं में आयोग द्वारा विन ा:रिर मानक क विकए गए हैं। ाक्षात्कार में प्रत्येक उम्मीदवार को विदए गए अंकों को लिललिख परीक्षा में उ क े द्वारा प्राŽ अंकों में जोड़ा जाएगा। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (4) आयोग प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा लिललिख परीक्षा और ाक्षात्कार में प्राŽ अंकों क े योग द्वारा प्रकट की गई उनकी प्रवीण ा क े Yम में उम्मीदवारों की ू ी ैयार करेगा और इ नी ंख्या में उम्मीदवारों की सि फारिरश करेगा सिज नी वे विनयुविक्त क े आदेश उपयुक्त मझ े हैं। यविद दो या दो े अति क उम्मीदवार कु ल विमलाकर मान अंक प्राŽ कर े हैं, ो लिललिख परीक्षाओं में उच्च अंक प्राŽ करने वाले उम्मीदवार का नाम ू ी में उच्च रखा जाएगा।यविद दो या दो े अति क उम्मीदवार लिललिख परीक्षा में भी मान अंक प्राŽ कर े हैं, ो आयु में वरिरष्ठ उम्मीदवार का नाम ू ी में उच्च रखा जाएगा।आयोग विनयुविक्त प्राति कारी को ू ी अग्रेविष करेगा। (5) यविद भ 3 विनयम 5 की ारा (1) में विनर्दिदष्ट विनयुविक्त इंजीविनयरिंरग की एक े अति क शाखाओं में की जा रही है, ो ऐ े आयोग लिललिख परीक्षा और ाक्षात्कार में प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा प्राŽ अंकों की क ु ल ंख्या क े अनु ार प्रवीण ा क े Yम में उम्मीदवारों की एक ंयुक्त ू ी भी ैयार करेगा और उप विनयम (4) क े ह ू ी क े ार्थी विनयुविक्त प्राति कारी को भी प्रेविष करेगा। विनयम 16 पदोन्नति द्वारा भ 3 क े लिलए प्रविYया पदोन्नति द्वारा भ 3 मय - मय पर ंशोति लोक ेवा आयोग (प्रविYया) विनयमावली, 1970 क े ार्थी परामश: में यन द्वारा उत्तर प्रदेश पदोन्नति क े अनु ार अयोग्य की अस्वीक ृ ति क े अ ीन वरिरष्ठ ा क े आ ार पर की जाएगी। विनयम 17 ंयुक्त यन ू ी यविद भ 3 क े विक ी वष: में विनयुविक्तयां ी ी भ 3 र्थीा प्रोन्नति दोनों प्रकार े की जा ी हैं ो ु ंग ूति यों े अभ्यर्थिर्थीयों क े प्रर्थीम नाम पदोन्नति द्वारा विनयुक्त व्यविक्त की ू ी में इ प्रकार नाम लेकर एक ंयुक्त यन ू ी ैयार की जायेगी विक विन ा:रिर प्रति श बना रहे।विनयम 21 वरिरष्ठ ा ेवा में विक ी भी श्रेणी क े पदों पर विनयुक्त व्यविक्तयों की वरिरष्ठ ा उत्तर प्रदेश रकार क े ेवक वरिरष्ठ ा विनयमवली, 1991 क े अनु ार विन ा:रिर की जाएगी, जै ा विक मय- मय पर ंशोति विकया गया है। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
13. उपरोक्त क े अलावा, विनयम 21 में स्पष्ट रूप े प्राव ान विकया गया है विक पया:Ž रूप े विनयुक्त भी व्यविक्तयों की वरिरष्ठ ा विनयम 1991 क े अनु ार विन ा:रिर की जाएगी।उक्त विनयमावली, 2009 का एक अन्य प्रा ंविगक पहलू यह र्थीा विक ीनों शाखाएं अर्थीा: क ृ विष, सि विवल और मैक े विनकल विमलकर अ ीनस्र्थी इंजीविनयरिंरग ेवा का एक शाखाबनाएंगी। विनयम 21 यहां पुनः प्रस् ु विकया जा ा हैः विनयम 21 वरिरष्ठ ा ेवा में विक ी भी श्रेणी क े पदों पर विनयुक्त व्यविक्तयों की वरिरष्ठ ा उत्तर प्रदेश रकार क े ेवक वरिरष्ठ ा विनयमावली, 1991 क े अनु ार विन ा:रिर की जाएगी, जै ा विक मय- मय पर ंशोति विकया गया है।
14. लघु सिं ाई विवभाग क े विनयमावली, 2009 े पहले, वष: 1991 में उत्तर प्रदेश इंजीविनयरिंरग ेवा (लघु सिं ाई विवभाग) विनयमावली, 1991 ृसिज अन्य विनयमों का ंग्रह मौजूद र्थीा। ये विनयम विवभाग क े हायक, काय:कारी, अ ीक्षक और मुख्य अणिभयं ा की भ 3 े ंबंति र्थीे, लेविकन कविनष्ठ अणिभयं ा की भ 3 े ंबंति नहीं र्थीे। जै ा विक इन विनयमों का ंदभ: याति का में विदया गया है, उनका उल्लेख विकया गया है, लेविकन यह बहु अति क प्रा ंविगक नहीं हो क ा है।
15. अपीलक ा:ओं की ओर े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता, श्री सि द्धार्थी: दवे और ुश्री प्रीति का विद्ववेदी, विवद्वान अति वक्ता ने क: प्रस् ु विकया है।विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों की ओर े वरिरष्ठ वकील, श्री गोपाल शंकरनारायणन और विवद्वान अति वक्ता, श्री रोविह स्टालेकर ने अदाल को ंबोति विकया है।उत्तर प्रदेश राज्य की ओर े विवद्वान अति वक्ता और आयोग क े विवद्वान अति वक्ता ने भी अपने-अपने क: प्रस् ु विकया है। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अपीलक ा:ओं का मामलाः
16. अपीलक ा:ओं ने विनम्नलिललिख क: विदया हैंः (क) अपीलक ा:ओं की ओर े न्यायालय आने में कोई देरी नहीं हुई है, क्योंविक उन्होंने पहली बार 2010 में ीखा र्थीा जब अंति म वरिरष्ठ ा ू ी 05.03.2010 को प्रकाणिश की गई र्थीी विक आयोग द्वारा अग्रेविष ीन अलग-अलग यन ूति यां र्थीीं और ऐ ी यन ू ी प्राŽ होने की ारीख क े आ ार पर, वरिरष्ठ ा ू ी ैयार की गई है, जो वै ाविनक विनयमों क े विवपरी र्थीी। ख) ूंविक 1991 की वरिरष्ठ ा विनयमावली एवं विनयमावली 2009 क े विवपरी वरिरष्ठ ा ू ी बनाने में विनण:य लेने की प्रविYया को ुनौ ी दी गयी र्थीी, इ लिलए यह कहा गया र्थीा विक भी प्रभाविव अणिभयं ाओं को ंयोजन करना जरूरी नहीं र्थीा।वास् व में ऐ े प्रभाविव अणिभयं ाओं में े 18 को पहले े ही रिरट याति का में ंयोसिज विकया गया र्थीा और इ लिलए, भी प्रभाविव कविनष्ठ अणिभयं ाओं क े लिलए, उनक े विह ों का पहले े ही प्रति विनति त्व विकया गया र्थीा। (ग) वष: 2009-2010 की दू री वरिरष्ठ ा ू ी ैयार की जानी र्थीी क्योंविक विनयमावली, 2009 प्रव:न में र्थीी सिज क े लिलए एक नई वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने की आवश्यक ा र्थीी।यविद नई वरिरष्ठ ा ू ी प्रकाणिश की जा ी है ो पहले की वरिरष्ठ ा ू ी अपना महत्व खो देगी।पश्चा व 3 वरिरष्ठ ा ू ी को उति अवति क े भी र ुनौ ी दी गई र्थीी। इ प्रकार प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा प्रस् ु विवलम्ब क े क: में कोई बल नहीं है। प्रत्यर्थिर्थीयों का मामलाः
17. प्रत्यर्थिर्थीयों की ओर े विवद्वान अति वक्ता ने विनम्नलिललिख क: प्रस् ु विकया हैः उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (क) यह विक मूल रिरट याति काक ा:ओं यानी अपीलक ा:ओं ने अ ा ारण विवलम्ब कर अदाल का दरवाजा खटखटाया र्थीा और इ लिलए, उनका दावा स्वीकार नहीं विकया जा क ा और उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ ने उक्त विनवेदन को ही ठहराया। (ख) उन्होंने खण्ड़पीठ द्वारा अणिभलिलविक विकए गए कारणों क े लिलए खण्ड़पीठ क े फ ै ले को ही ठहराने की मांग की; (ग) मेरिरट क े आ ार पर यह विनवेदन विकया जा ा है विक वरिरष्ठ ा ू ी विनयमावली, 1991 और विनयमावली, 2009 क े अनु ार ैयार की गई र्थीी। (घ) वष: 2006 या 2010 की वरिरष्ठ ा ूति यों को ैयार करने में विक ी कानूनी प्राव ान का उल्लंघन नहीं है। ा:ः
18. यह स्वीक ृ है विक ीन शाखा यानी क ृ विष, मैक े विनकल और सि विवल क े लिलए एक ही यन र्थीा। यह भी थ्य स्वीकार विकया जा ा है विक लघु सिं ाई विवभाग में कविनष्ठ अणिभयं ाओं की एक शाखा है और इ लिलए, कविनष्ठ अणिभयं ाओं की एक वरिरष्ठ ा ू ी होनी ाविहए। आयोग द्वारा आयोसिज लिललिख परीक्षा में दो प्रश्नपत्र शाविमल र्थीे, सिज में े एक भी शाखा क े लिलए अविनवाय: र्थीा और दू रा प्रश्नपत्र इंजीविनयरिंरग ीनों शाखाों क ृ विष, मैक े विनकल या सि विवल क े लिलए र्थीा। वास् व में, एक परीक्षा र्थीी। इ क े बाद, ाक्षात्कार आयोसिज विकए गए। आयोग ने उच्च न्यायालय क े मक्ष दायर विदनांक 07.04.2019 और 13.05.2019 क े अपने हलफनामों में स्पष्ट रूप े कहा र्थीा विक एक परीक्षा क े लिलए एक यन र्थीा। हालांविक, क ु छ मुकदमेबाजी और उच्च न्यायालय द्वारा अति विनण[3] रोक क े कारण सि विवल इंजीविनयरिंरग की शाखा की ू ी लगभग 10 े 11 महीने बाद प्रेविष की उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" गई र्थीी। आयोग ने उच्च न्यायालय क े मक्ष अपने पूरक प्रति -शपर्थी पत्र में यह भी स्वीकार विकया विक उ ने ीनों शाखाकी ंयुक्त मेरिरट ू ी ैयार नहीं की र्थीी, बस्थि‡क इ े ैयार करने क े लिलए विनयुक्त प्राति कारी पर छोड़ विदया र्थीा। यर्थीार्थी: ा क े उद्देश्यों े आयोग की ओर े दायर पूरक प्रति -शपर्थीपत्र विदनांविक 07.04.2019 क े पैराग्राफ 6,8,[9] और 10 नी े उद्धृ विकया जा ा हैंः “6. यह उल्लेखनीय है विक सि विवल शाखा में उपलब् रिरविक्तयों क े ापेक्ष यन प्रविYया क े दौरान, माननीय न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा रिरट याति का ंख्या 066 वष: 2000, सि याराम और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य में विदनांक 01.11.2000 को स्टे आदेश पारिर विकया गया र्थीा और इ लिलए विदनांक 01.03.2000 क े आदेश क े अनुपालन में, अनुशं ा विवलंब े अर्थीा: 07.11.2000 को विवभाग को भेजी गई र्थीी। xxx xxx xxx
8. ूंविक ीनों शाखाओं क े लिलए आवश्यक शैक्षणिणक योग्य ा अलग र्थीी, अलग े इ लिलए भ 3 की गई र्थीी और उ क े बाद विवभाग को यविन उम्मीदवारों क े ंबं में ू ी/सि फारिरशें अलग े भेजी गई र्थीीं।
9. इ क े अति रिरक्त यह विनवेदन विकया जा ा है विक कविनष्ठ अणिभयं ा क े पद पर भ 3 दो मुख्य स्रो ों अर्थीा: ी ी भ 3 और विवभागीय पदोन्नति े की जा ी है, इ लिलए अं र-वरिरष्ठ ा ू ी को उ.प्र. रकार ेवक वरिरष्ठ ा विनयमावली, 1991 क े विनयम 8 क े अनु ार अंति म रूप विदया जाएगा। इ लिलए, याति काक ा:ओं की वरिरष्ठ ा ू ी को क े वल लघु सिं ाई विवभाग द्वारा अंति म रूप विदया जाएगा और लघु सिं ाई विवभाग द्वारा वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने में प्रत्यर्थी3 की कोई भूविमका नहीं है।
10. इ क े अति रिरक्त यह विनवेदन विकया जा ा है विक कविनष्ठ अणिभयं ाओं की वरिरष्ठ ा ू ी ैयार कर प्रकाणिश करना ंबंति विवभाग का काम है उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और यविद कोई विव ंगति हो ी है, ो ंबंति विवभाग इ का स्पष्टीकरण दे क ा है।
19. आयोग द्वारा दायर विद्व ीय पूरक प्रति -शपर्थीपत्र विदनांविक 3.05.2019 का प्रस् र 3 े 7 विनम्नव हैंः “3. इ माननीय न्यायालय क े मक्ष यह विनवेदन विकया जा क ा है विक ीन शाखाओं अर्थीा: क ृ विष, सि विवल और यांवित्रक क े लिलए लघु सिं ाई विवभाग द्वारा 50:30:20 क े अनुपा में कविनष्ठ अणिभयं ाओं की भ 3 क े लिलए मांग क े आ ार पर, उत्तरदा ा प्रत्यर्थी3 ने विवज्ञापन ंख्या 3/1998-99 जारी विकया, सिज में ंबंति शाखा में अपेतिक्ष योग्य ा रखने वाले उम्मीदवारों े आवेदन आमंवित्र विकए गए र्थीे।
4. यह स्पष्ट रूप े उल्लेख विकया जा ा है विक ीनों शाखाएँ अर्थीा: सि विवल, यांवित्रक और क ृ विष क े लिलए यन की प्रविYया मान र्थीी। विदनांक 18-10-1998 को एक स्Yीविंनग टेस्ट आयोसिज की गई र्थीी और उ क े बाद विनयमों और विवविनयमों क े अनु ार अह: उम्मीदवारों को ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया गया र्थीा।
5. यह विक उन उम्मीदवारों क े लिलए भ 3 प्रविYया को आगे बढ़ाया गया र्थीा सिजनको क ृ विष, सि विवल और यांवित्रक शाखा क े ंबं में ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया गया र्थीा और ाक्षात्कार आयोसिज विकया गया र्थीा और उक्त ीन शाखाओं में े उम्मीदवारों का यन उन रिरविक्तयों क े ापेक्ष विकया गया र्थीा जो क ृ विष और यांवित्रक शाखा में उपलब् र्थीे और यन ूति यों को Yमशः और 06.01.2000 और 28.09.1999 को विवभाग को भेजा गया र्थीा।
6. यह उल्लेखनीय है विक सि विवल शाखा में उपलब् रिरविक्तयों क े ापेक्ष यन प्रविYया क े दौरान, स्टे आदेश विदनांक 1.03.2000 इ की लखनऊ पीठ द्वारा पारिर विकया गया र्थीा। माननीय न्यायालय ने रिरट उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" याति का ंख्या ंख्या 66 वष: 2000, सि याराम और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य में विदनांक 01.03.2000 क े आदेश क े अनुपालन में अनुशं ा को विवलंब े 07.11.2000 को विवभाग को भेजा र्थीा।
7. यह विक आगे, आयोग ीनों शाखाओं की मूल माक: शीट, मेरिरट ू ी आविद क े लिलए यन प्रविYया क े अणिभलेखों का प ा लगाने में क्षम रहा है और विनद|श होने पर आयोग उ े माननीय न्यायालय क े मक्ष प्रस् ु करने की स्थिस्र्थीति में है।
20. विनयुविक्त प्राति कारी ने वास् व में आयोग द्वारा अग्र ारिर ीन यन ूति यों को एक क े बाद एक अलग-अलग ति णिर्थीयों पर ीन यन ू ी प्राŽ करने की ति णिर्थी क े अनु ार रखकर वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े रीक े में त्रुविट की है ।यह विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों, राज्य या आयोग में े विक ी का भी मामला नहीं है विक विनयुविक्त पत्र अलग-अलग जारी विकए गए हैं और जब यविन ूति यां प्राŽ हुई र्थीीं। दरअ ल नवंबर 2000 में सि विवल शाखा की ी री ू ी विमलने क े करीब 10 े 11 महीने बाद ीनों शाखा क े विनयुविक्त पत्र अक्टूबर 2001 में जारी विकए गए र्थीे। प्रत्यक्ष रूप े एक विनरीक्षण क े द्वारा, विनयुविक्त प्राति कारी वष: 1991 क े वरिरष्ठ ा विनयमों क े ह आवश्यक ंयुक्त वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने में विवफल रहा, ाहे वह अपीलक ा:ओं और विनजी-प्रत्यर्थिर्थीयों क े यन क े ंबं में विनयम 5 या विनयम 8 हो।
21. अब हम न्यायालय में आने में देरी और विवशेष रूप े वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी देने क े मुद्दे पर कानून पर ा: कर क े हैं। विवद्वान एकल न्याया ीश ने णिशबा शंकर महापात्र बनाम उड़ी ा राज्य ( ुप्रा) क े मामले में इ न्यायालय क े क े विनण:य का अवलम्ब लिलया र्थीा। माननीय न्यायमूर्ति डॉ. बी.ए. ौहान, ने लम्बे मय े ली आ रही वरिरष्ठ ा क े बावजूद देर े दायर याति का पर ुनवाई क े प्रश्न पर विव ार करने क े बाद ंविव ान पीठ क े फ ै लों विह एक दज:न े उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अति क मामलों पर ा: कर अं ः पैरा 30 में अवलोकन विक वरिरष्ठ ा ू ी जो ीन े ार ाल े अति क मय े विबना ुनौ ी क े अस्थिस् त्व में है, उ में छेड़छाड़ नहीं विकया जाना ाविहए। अनुच्छेद 30 में यह भी कहा गया है विक यविद कोई ीन ार ाल बाद वरिरष्ठ ा क े मुद्दे पर आपलित्त कर ा है, ो मुति मं पर इ देरी का ं ोषजनक स्पष्टीकरण देना होगा। अनुच्छेद 30 नी े पुनः उद्धृ विकया जा रहा हैः- “30. इ प्रकार, उपरोक्त क े दृविष्टग, ुस्र्थीाविप विवति क प्रस्र्थीापना यह है विक एक बार वरिरष्ठ ा य हो जाने क े बाद और यह एक उति अवति क े लिलए अस्थिस् त्व में रह ा है, उ क े लिलए विक ी भी ुनौ ी को स्वीकार नहीं विकया जाना ाविहए।क े आर मुद्गल में, इ न्यायालय ने ुस्पष्ट शब्दों में कहा है विक एक वरिरष्ठ ा ू ी जो 3 े 4 ाल क अप्रकाणिश रह ी है उ में छेड़छाड़ नहीं विकया जाना ाविहए।इ प्रकार, वरिरष्ठ ा को ुनौ ी देने क े लिलए 3-4 वष: अवति उति है और यविद कोई इ अवति े परे वरिरष्ठ ा क े मुद्दे पर आपलित्त कर ा है, ो उ े ं ोषजनक स्पष्टीकरण प्रस् ु करक े, हायक मं े ंपक: करने में देरी की व्याख्या करनी होगी।"
22. दू री ओर, खण्ड़पीठ ने देरी क े आ ार पर अपीलक ा:ओं को जवाब न देकर इ न्यायालय क े विनम्नलिललिख विनण:यों का अवलम्ब लिलया। दयाराम अ नंद गुर हानी बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य 2 बी. ए. बजाज और एक अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य 3 लारें ेसि ल तिड ूजा बनाम भार ंघ और अन्य 4 2 (1984) 3 एस.सी.सी. 36 3 (1998) 2 एस.सी.सी. 523 4 (1976) 1 एस.सी.सी. 599 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आर. ए. मकाशी और अन्य बनाम आई. एम. मेनन और अन्य[5]
23. दयाराम आ ानंद गुर ाहनी ( ुप्रा) क े मामले में नौ वष: का विवलंब हुआ। बी०ए ० बाजवा ( ुप्रा) क े मामले में, एक दशक े अति क की देरी हुई र्थीी। मालकॉम लॉरें ेसि ल डी 'ए आउजा ( ुप्रा) में, देरी पन्द्रह वष: की की देरी हुई र्थीी और आर.ए. मकाशी ( ुप्रा) में आठ वष: की देरी की देरी हुई र्थीी। इन भी मामलों में, इ अदाल ने कहा है विवलम्ब का स्पष्टीकरण नहीं विदया गया है। वष: 2010 क े विनण:य णिशबा शंकर महापात्रा ( ुप्रा) में यह कह गया है विक वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी देने क े लिलए ीन े ार ाल की अवति उति है और यविद इ अवति क े बाद ुनौ ी विदया जा ा है ो विवलम्ब का स्पष्टीकरण देना होगा।
24. उपरोक्त कानूनी प्रस्र्थीापना क े दृविष्टग, अब हमें व:मान मामले क े थ्यों की जां करना होगा, प्रर्थीम, क्या ीन े ार ाल े अति क की देरी हुई र्थीी और विद्व ीय, यविद ीन े ार ाल े अति क की देरी हुई र्थीी, ो क्या उ का ं ोषजनक रूप े स्पष्टीकरण विदया गया है।
25. अक्टूबर, 2001 में जब विनयुविक्त पत्र जारी विकए गए ो उ में यह श: लगाई गई र्थीी विक वरिरष्ठ ा का विन ा:रिर बाद में विनयमानु ार विकया जाएगी। यह स्वीक ृ है विक वष: 2006 े पूव:, अपीलक ा:ओं की वरिरष्ठ ा ू ी अति ूति नहीं की गई र्थीी।मा:, 2006 में, जब अस्र्थीायी ू ी प्रकाणिश की गई र्थीी, ो इ में ीनों यन ूति यों का उल्लेख नहीं विकया गया र्थीा और न ही अंति म वरिरष्ठ ा ू ी 05.09.2006 को प्रकाशन क े मय इ थ्य का उल्लेख विकया गया र्थीा। बस्थि‡क, इ में स्पष्ट रूप े इ बा का उल्लेख विकया गया र्थीा विक वरिरष्ठ ा ू ी मेरिरट क े आ ार पर ैयार की गई र्थीी। यह वास् व में एक गल 5 (1982) 1 एस.सी.सी. 379 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" बयान र्थीा। वरिरष्ठ ा ू ी मेरिरट क े आ ार पर नहीं, बस्थि‡क एक क े बाद एक ीन अलग-अलग यन ूति यों की प्राविŽ क े आ ार पर ैयार की गई र्थीी। ूंविक क ृ विष े ंबंति ू ी पहली बार 28.09.1999 को प्राŽ हुई र्थीी, क ृ विष शाखा क े भी यविन उम्मीदवारों को मूह में शीष: पर रखा गया र्थीा, उ क े बाद यांवित्रकी े ंबंति ू ी 06.01.2000 को प्राŽ हुई, उन्हें क ृ विष शाखा क े नी े रखा गया र्थीा और अं में, सि विवल शाखा ू ी 07.11.2000 को प्राŽ हुई, उन्हें अं में रखा गया र्थीा।
26. विनयमावली, 1991 क े विनयम 5 और 8 में स्पष्ट रूप े उल्लेख विकया गया है विक ी ी भ 3 क े यन क े लिलए एक ू ी होगी। एक यन क े लिलए ीन अलग-अलग ूति याँ बनाना विनयमावली, 1991 क े विनयम 5 और 8 में विनविह प्राव ानों क े विवपरी र्थीा। विनयमावली, 2009 में स्पष्ट रूप े उल्लेख विकया गया है विक वरिरष्ठ ा वष: 1991 क े विनयमावली क े अनु ार विन ा:रिर कर ैयार की जाएगी। विनयमावली, 1991 क े विनयम 5, क े वल ी ी भ 3 क े माध्यम े विकए गए यन े ंबंति है जबविक विनयम 8 त् ंबं ी स्थिस्र्थीति े ंबंति हैं जहां वरिरष्ठ ा ू ी को ी ी भ 3 और पदोन्नति दोनों े ैयार विकया जाना है। हालाँविक, इन दोनों विनयमों में रेखांविक सि द्धां मान हैं विक एक यन क े लिलए एक ू ी होनी ाविहए, जै ा विक विनयम 8 (2) (ए) और विनयम 1991 क े विनयम 5 े स्पष्ट है।
27. एक बार जब यह स्र्थीाविप हो जा ा है विक वरिरष्ठ ा ू ी विनयमावली, 1991 में विन ा:रिर वै ाविनक प्राव ानों क े उल्लंघन में ैयार की गई र्थीी, ो वरिरष्ठ ा ू ी में हस् क्षेप विकया जा क ा है। विनयुक्त करने वाला प्राति करण ांविवति क विनयमों े बं ा होगा और ांविवति क विनयमों का कोई भी उल्लंघन या उनकी अवहेलना वरिरष्ठ ा ू ी को दूविष कर देगी। यह मनमाना, विनयमों क े उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विवरूद्ध और ंविव ान क े अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन कर ा है। उपरोक्त का एकमात्र अपवाद वह है जहां अनुति देरी को स्पष्ट नहीं विकया गया है।
28. व:मान मामले में, यविद हम अपीलक ा:ओं क े क† को स्वीकार कर े हैं, ो देरी क ु छ महीने या एक वष: हो क ी है, र्थीाविप, यविद हम विनजी प्रत्यर्थिर्थीयों क े क† को स्वीकार कर े हैं, ो देरी पां ाल की हो क ी है। पहली आकस्थिस्मक ा में, विक ी स्पष्टीकरण की आवश्यक ा नहीं होगी। र्थीाविप, दू री आकस्थिस्मक ा में, यविद अपीलक ा: देरी को ं ोषजनक ढंग े मझाने में फल हो जा ा है ो भी इ बा ा को दूर विकया जा क ा है। व:मान मामले क े थ्यों में 05.09.2006 की अंति म वरिरष्ठ ा ू ी जो हमें प्राŽ हुआ इ में कहीं भी उल्लेख नहीं है विक अलग-अलग शाखाओं की ीन अलग-अलग ूति याँ र्थीीं और वे अलग-अलग ारीखों पर प्राŽ हुई र्थीीं। इ क े विवपरी, इ आशय का विवणिशष्ट ौर े कर्थीन विकया गया र्थीा विक ू ी योग्य ा क े आ ार पर ैयार की गई र्थीी। इ प्रकार, यह नहीं कहा जा क ा है विक अंति म ू ी क े प्रकाशन क े मय विदनांक 05.09.2006 को आयोग द्वारा ीन अलग-अलग ति णिर्थीयों पर भेजी गई ीन अलग-अलग यविन ूति यों क े बारे में अपीलक ा: को जानकारी र्थीी।
29. यहां यह उल्लेख करना भी ार्थी:क होगा विक अपीलक ा:ओं क े पा गए ीन अलग-अलग ूति यों क े बारे में उ मय जानने का कोई अव र नहीं र्थीा जब आयोग द्वारा उ को भेजा गया र्थीा अर्थीवा उ क े बाद विक ी भी मय क्योविक काया:लय आदेश विदनांक 08.10.2001 क े ह ीनों शाखा क े भी यविन उम्मीदवारों क े विनयुविक्त पत्र एक ार्थी जारी विकए गए र्थीे। यह उल्लेख करना भी प्रा ंविगक होगा विक 05.09.2006 की वरिरष्ठ ा ू ी को अंति म रूप देने वाले आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं विकया गया है विक आयोग े ीन शाखाों की ीन अलग-अलग ूति यां प्राŽ हुई र्थीीं और एक क े बाद एक प्राŽ हुई र्थीीं। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
30. विदनांक 29. 12. 2009 को अस्र्थीायी ू ी की अति ू ना क े ने क े मय इ बा का उल्लेख कहीं भी यह नहीं विकया गया र्थीा विक ीन अलग -अलग ति णिर्थीयों पर ीन अलग-अलग ूति याँ प्राŽ हुई र्थीीं। जै े विक यह अणिभकणिर्थी नहीं विकया जा क ा र्थीा विक उ स् र पर भी अपीलक ा:ओं ने ामान्य वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े ंबं में आपलित्तयां दज: नहीं की र्थीीं। जब अंति म वरिरष्ठ ा ू ी 05 मा:, 2010 को प्रकाणिश की गई और ू ी को अंति म रूप देने वाले आदेश में विवभाग द्वारा यह उल्लेख विकया गया विक ीन अलग-अलग ति णिर्थीयों पर ीन अलग-अलग ूति यां प्राŽ हुई र्थीीं और उ ी Yम में ंयुक्त वरिरष्ठ ा ैयार की गई र्थीी। इ प्रकार, यह पहली बार है विक अपीलक ा:ओं को 05.03.2010 को अंति म वरिरष्ठ ा ू ी क े प्रकाशन पर त्रुविट क े बारे में प ा ला।
31. प्रत्यर्थी3 ऐ ी कोई भी ामग्री विदखाने में क्षम नहीं रहे हैं जो स्पष्ट रूप े ंक े कर क े विक अपीलक ा:ओं को ीन अलग-अलग ूति यों और इ क े आ ार पर वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने का ज्ञान र्थीा। अपील @ ए.एल.पी.( ी) ंख्या 5435 वष: 2020 क े काया:लय आदेश विदनांविक 17.03.2006 अनुलग्नक-पी-30 का हवाला देकर प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा एक ुच्छ प्रया विकया गया है, जो ऐ ा आदेश है सिज में अस्र्थीायी वरिरष्ठ ा ू ी को अति ूति विकया गया है। इ क े प्रस् र 3 में उल्लेख विकया गया है विक आयोग द्वारा यविन कविनष्ठ अणिभयं ाओं की यन ू ी प्राŽ हो गई है, वरिरष्ठ ा उ अनुYम में दी गई है। पैरा 3 इ प्रकार हैः "3: सिज Yम में आयोग द्वारा यविन कविनष्ठ अणिभयं ाओं की यन ू ी प्राŽ हुई है, उ ी Yम में उ में वर्थिण वरिरष्ठ ा क े अनु ार वरिरष्ठ ा दी गई है। ” उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
32. उपयु:क्त प्रस् र को पढ़ने पर विक ी भी शाखा क े विक ी भी विववरण, यन क े वष:, यन विक विवज्ञापन क े आ ार पर विकया जा रहा है या उन ति णिर्थीयों क े बारे नहीं ब ा ा है सिजन ति णिर्थीयों पर अलग-अलग ूति यां प्राŽ हुई र्थीीं। यह एक ामान्य कर्थीन है। प्रत्यर्थिर्थीयों का यह क: प्रस् र 5 में अणिभलिललिख थ्यों और उ ी काया:लय क े आदेश विदनांक 05.09.2006 क े पैरा 25 में यर्थीा अन् र्दिवष्ट अंति म वाक्य क े दृविष्टग पूरी रह े बलहीन है। हम उ का विवश्लेषण करेंगे विकन् ु लेविकन इ े पहले उन्हें यहां पुन: प्रस् ु विकया जा ा है: “5. श्री विवनोद क ु मार सिं ह ने अपना नाम वरिरष्ठ ा ू ी में दज: करने और क ृ विष/मैक े विनकल/सि विवल इंजीविनयरिंरग को 50:30:20 क े अनुपा में वरिरष्ठ ा देने का अनुरो विकया है। इ ंबं में, यह स्पष्ट है विक उपरोक्त अनुपा क े वल भ 3 क े लिलए है। आयोग े 6.01.2000, 27.01.2000 और 07.11.2000 को ू ी भेजी गई र्थीी। इ लिलए, इ अनुYम में, योग्य ा क े आ ार पर, वरिरष्ठ ा का पहले ही मू‡यांकन विकया जा ुका है। श्री विवनय क ु मार का नाम वरिरष्ठ ा ू ी में अपेतिक्ष स्र्थीान पर दज: विकया गया है क्योंविक उनका नाम उ में दज: विकया जाना शेष र्थीा और जै ा विक इ वरिरष्ठ ा ू ी में उनका नाम जोड़ने और दज: करने का अनुरो विकया गया र्थीा। xxx xxx xxx xxx
25. “लोक ेवा आयोग े यविन उम्मीदवारों की वरिरष्ठ ा को उनक े योग्य ा Yम में रखा गया है।”
33. पैरा 5 पढ़ने पर पुनः उल्लेख विमल ा है विक ीन ूति याँ आयोग को प्राŽ हुई र्थीीं और उ ी Yम में योग्य ा क े आ ार पर वरिरष्ठ ा का विन ा:रण विकया गया है। प्रस् र 5 एक विवनोद क ु मार सिं ह की आपलित्त े ंबंति र्थीा, जो वरिरष्ठ ा ू ी में अपना नाम दज: करने और 50:30:20 क े अनुपा में वरिरष्ठ ा प्रदान उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" करने का अनुरो कर रहा र्थीा। क्षम प्राति कारी ने अनुरो पर अनुमति प्रदान कर े हुए पाया विक विवनोद क ु मार सिं ह का नाम दज: विकया जाना छ ू ट गया र्थीा और दनु ार इ े अपेतिक्ष स्र्थीान पर माविवष्ट र्थीा। इ क े अलावा, इ काया:लय क े आदेश क े अंति म वाक्य में स्पष्ट रूप े उल्लेख विकया गया है विक आयोग े यविन उम्मीदवारों की वरिरष्ठ ा को उनकी योग्य ा क े Yम में रखा गया है। यह ीन अलग-अलग शाखा की वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े लिलए विक ी भी अलग योग्य ा का उल्लेख नहीं कर ा है।
34. विनयमावली 2009 आने क े बाद वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े लिलए नए सि रे े प्रया शुरू विकया गया र्थीा। विदनांक 29.12.2009 क े काया:लय आदेश द्वारा एक अस्र्थीायी ू ी अति ूति की गई र्थीीइ काया:लय आदेश में उल्लेख विकया गया है विक वरिरष्ठ ा ू ी विनयमावली, 1991 क े अनु ार ैयार की जानी है। इ अस्र्थीायी ू ी को अंति म रूप दे े मय, विदनांक 05.03.2010 क े काया:लय आदेश क े ह, हमें महेश ंद बागानी और महेश क ु मार द्वारा एक की गई आपलित्त क े विनस् ारण का ंदभ: विमल ा है सिज में उन्होंने स्पष्ट रूप े आयोग को भेजे गए मांग पत्र और अन्य ंबंति पहलुओं क े स्पष्टीकरण की मांग की र्थीी। इ काया:लय आदेश क े प्रस् र 11 में, यह उल्लेख विकया गया है विक आयोग ने Yमशः 06.01.2000, 27.01.2000 और 07.11.2000 को क ृ विष, मैक े विनकल और सि विवल शाखाकी ीन ूति यों को अलग-अलग भेज विदया र्थीा। इ में आगे उल्लेख विकया गया है विक यह उ ी Yम में र्थीा अर्थीा: ् प्राविŽ की ारीख विक ंयुक्त वरिरष्ठ ा का मू‡यांकन विकया गया र्थीा। इ प्रकार, विफर े वरिरष्ठ ा ू ी को उ ी Yम में अंति म रूप विदया गया, जै ा विक ीन ूति याँ प्राŽ हुई हैं। इ क े बाद यह अभ्यावेदन विकया गया विक वष: 2001 की ी ी भ 3 की वरिरष्ठ ा ू ी विनयमों क े विवपरी गल रीक े े ैयार की गई र्थीी, हालांविक, जब कोई कार:वाई नहीं हुई, उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ो राजीव नैन उपाध्याय और ौदह अन्य ने अक्टूबर 2012 में रिरट याति का ंख्या 53123/2012 क े माध्यम े उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया सिज को दो े ढाई वष: की अवति क े भी र दायर विकया गया र्थीा और काया:लय आदेश विदनांक 05.03.2010 क े उपरान् क वे अपने अभ्यावेदन का अनु रण कर रहे र्थीे। उपरोक्त थ्यों े यह स्पष्ट है विक प्रर्थीम आकस्थिस्मक ा या विद्व ीय आकस्थिस्मक ा में, अपीलक ा:ओं को दोषी नहीं पाया जा क ा है। खण्ड़पीठ ने यह मानने में त्रुविट की विक अपीलक ा: द्वारा दज: विकए गए दावे में देरी और कमी है।
35. विवलम्ब क े आ ार पर वै ाविनक प्राव ानों क े विवपरी ैयार की गई वरिरष्ठ ा ू ी का ब ाव करने की दलील कविठन प्रस्र्थीापना होगी। इ क े अति रिरक्त अपीलार्थिर्थीयों यह विनवेदन विकया है विक कोई विवलंब नहीं हुआ है क्योंविक ीन अलग-अलग ूति यों क े बारे में उन्हें मा:, 2010 में प ा ला र्थीा, भले ही यह मान लिलया गया र्थीा विक क ु छ विवलंब हुआ र्थीा और 2009-2010 में वै ाविनक विनयमों क े प्राव ानों क े विवपरी एक नई वरिरष्ठ ा ू ी ैयार की जा रही र्थीी, ऐ ी वरिरष्ठ ा ू ी को पां ाल क े विवलंब क े आ ार पर कायम नहीं रखा जा क ा है और इ का ब ाव नहीं विकया जा क ा है।
36. पक्षकारों द्वारा यह भी स्वीकार विकया जा ा है विक उच्च ग्रेड में जूविनयर इंजीविनयरों की अगली पदोन्नति हायक अणिभयं ा क े पद पर है। हायक अणिभयं ा क े शाखामें, हायक अणिभयं ाओं का क े वल एक शाखासि वाय कोई अलग शाखानहीं है। यह कविनष्ठ अणिभयं ाओं क े शाखा की वरिरष्ठ ा ू ी है जो हायक अणिभयं ाओं क े पद क े लिलए फीडर शाखाहोगा। वष: 2001 क े यन क े क ृ विष शाखा क े जूविनयर इंजीविनय:, मैक े विनकल और सि विवल शाखाक े एक ही यन में ुने गए जूविनयर इंजीविनय: पर ी े मा: करेंगे, भले ही क ु छ या कई क ृ विष शाखा जूविनयर इंजीविनय: की मग्र योग्य ा हो क ी है। मैक े विनकल और उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" सि विवल शाखा क े क ु छ या कई इंजीविनयरों की ुलना में कम। विनयुविक्त प्राति कारी को आयोग द्वारा ैयार विकए गए यन परीक्षा में प्राŽ अंकों क े आ ार पर प्रदश:न या प्रवीण ा क े आ ार पर एक ंयुक्त मेरिरट ू ी ैयार करनी ाविहए। अन्यर्थीा यह कम योग्य ा वाले उम्मीदवार की ुलना में अति क योग्य ा वाले उम्मीदवार क े रूप में पदोन्नति क े लिलए विव ार क े अति कार विवरूद्ध वंति करने क े मान होगा। पदोन्नति क े अति कार को मौलिलक अति कार नहीं माना जा ा है, लेविकन पदोन्नति क े लिलए विव ार अब एक मौलिलक अति कार क े रूप में विवकसि विकया गया है।
37. इ न्यायालय ने मय- मय पर पदोन्नति क े लिलए विव ारिर विकये जाने क े अति कार को मौलिलक अति कार मानने पर बल विदया है, जै ा विक न्यायमूर्ति क े ० रामास्वामी ने लिलफ्ट इरिरगेशन कारपोरेशन लिलविमटेड क े विनदेशक और अन्य बनाम प्रभा विकरण मोहं ी और अन्य[6] क े मामले में रिरपोट: क े पैराग्राफ 4 में ारिर विकया र्थीा, जो विनम्नव हैः “4. पदोन्नति का कोई मौलिलक अति कार नहीं है, लेविकन विक ी कम: ारी को ु ंग विनयमों क े अनु ार क े वल पदोन्नति क े लिलए विव ार विकए जाने का अति कार है।इ परिरप्रेक्ष्य में हमारे दृविष्टकोण े उच्च न्यायालय का विनष्कष: है विक विनगम द्वारा ैयार ग्रेडेशन ू ी प्रत्यर्थी3/रिरट याति काक ा: क े ंविव ान क े अनुच्छेद 16 क े ार्थी पविठ मान ा क े अति कार का उल्लंघन है, और प्र यर्थी3/रिरट याति काक ा: को अन्यायपूण: रूप े इ े वंति विकया गया र्थीा, यह स्पष्ट रूप े अनुति है। 6 (1991) 2 एस.सी.सी.295 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
38. अजी सिं ह बनाम पंजाब राज्य[7] क े मामले में ंविव ान पीठ ने भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 (1) पर जोर दे े हुए यह अणिभविन ा:रिर विकया विक यविद कोई व्यविक्त जो पात्र ा और पदोन्नति क े मानदंडों को पूरा कर ा है लेविकन विफर भी पदोन्नति क े लिलए विव ार नहीं विकया जा ा है, ो उ क े मूल अति कार का स्पष्ट उल्लंघन होगा। माननीय न्यायमूर्ति जगन्नार्थी राव ने स्वयं ओर े बोल े हुए विनम्नलिललिख म व्यक्त विकयाः "21:अनुच्छेद 14 और 16 (1): पदोन्नति क े लिलए विव ार विकये जाने का अति कार मौलिलक अति कार है। 22: अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 (1) विनकट ा े जुड़े हुए हैं।वे व्यविक्त क े व्यविक्तग अति कारों े ंबंति हैं।अनुच्छेद 14 यह अपेक्षा कर ा है विक "राज्य विक ी व्यविक्त को विवति क े मक्ष मान ा या विवति यों क े मान ंरक्षण े वंति नहीं करेगा"अनुच्छेद 16 (1) एक कारात्मक आदेश जारी कर ा है विक "राज्य क े अ ीन विक ी भी काया:लय में रोजगार या विनयुविक्त े ंबंति मामलों में भी नागरिरकों क े लिलए अव र की मान ा होगी।"इ न्यायालय द्वारा यह बार-बार कहा गया है विक अनुच्छेद 16 का खंड (1) अनुच्छेद 14 का एक पहलू है और इ की जड़ें अनुच्छेद 14 े हैं।उक्त खंड अनुच्छेद 14 में व्यापक ा को विवविनर्दिदष्ट कर ा है और ंवै ाविनक अर्थी: में "राज्य क े अ ीन विक ी पद पर रोजगार और विनयुविक्त क े मामलों में अव र की मान ा " की पह ान कर ा है।"रोजगार" शब्द व्यापक होने क े कारण, इ में कोई विववाद नहीं है विक यह प्रारंणिभक स् र की भ 3 क े स् र े ऊपर क े पदों पर पदोन्नति क े पहलू को अपने दायरे में मान ा है।अनुच्छेद 16(1) पदोन्नति क े लिलए उन प्रत्येक कम: ारिरयों पर विव ार करने का मौलिलक अति क प्रदान कर ा है जो कम: ारी पदोन्नति क े लिलए अन्यर्थीा पात्र है अर्थीवा सिज कम: ारी पर विव ार विकया जा क ा है। यहां मान अव र का अर्थी: है पदोन्नति क े लिलए 7 (1999) 7 एस.सी.सी. 209 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" "विव ार विकए जाने" का अति कार।यविद कोई व्यविक्त पात्र ा और क्षेत्र क े मानदंडों को पूरा कर ा है, लेविकन पदोन्नति क े लिलए विव ार नहीं विकया जा ा है, ो पदोन्नति क े लिलए उ क े मौलिलक अति कार का स्पष्ट उल्लंघन होगा, जो उ का व्यविक्तग अति कार है। मान अव र पर आ ारिर पदोन्नति और ऐ ी पदोन्नति े जुड़ी वरिरष्ठ ा अनुच्छेद 16 (1) क े ह मौलिलक अति कार क े पहलू हैं। xxxx xxxx xxxx
27. हमारी राय में, उक्त म अशोक क ु मार गुŽा क े मामले में व्यक्त कर जगदीश लाल और अन्य मामलों में इ का पालन विकया गया र्थीा, यविद यह विन ा:रिर करने का इरादा है विक पदोन्नति द्वारा भ 3 क े ु ंग विनयमों क े अनु ार पदोन्नति क े लिलए "माना" जाने क े लिलए कम: ारिरयों को अति कार की गारंटी (अर्थीा: वरिरष्ठ ा या योग्य ा क े आ ार पर) क े वल एक वै ाविनक अति कार है और मौलिलक अति कार नहीं है, हम प्रस् ाव को स्वीकार नहीं कर क े है। हम पहले ही ब ा ुक े हैं विक पदोन्नति क े लिलए "विव ार विकए जाने" क े अति कार क े अर्थी: में पदोन्नति क े मामले में मान अव र का अति कार वास् व में अनुच्छेद 16 (1) क े ह गारंटीक ृ एक मौलिलक अति कार है और इ पर कभी विक ी अन्य में ंदेह नहीं विकया गया है।
39. इ न्यायालय ने मेजर जनरल ए. एम. सिं ह, वीए एम बनाम भार ंघ और अन्य[8] वाले मामले में एक बार पुनः कानूनी स्थिस्र्थीति, अर्थीा: ् भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 क े ह स्र्थीाविप मौलिलक अति कार क े रूप में पदोन्नति क े लिलए विव ार विकए जाने का अति कार को दोहराया। अनुच्छेद 28 े ु ंग विनष्कष: नी े पुनः प्रस् ु विकया जा ा हैः 8 (2014) 3 एस.सी.सी. 670 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “28. विव ारणीय प्रश्न यह उठ ा है विक क्या अपीलक ा: क े दावे पर विव ार न करने े भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 14 और 16 क े ह उ े प्राŽ मूल अति कार का उल्लंघन होगा।पूव¬क्त प्रश्न का उत्तर हां में होगा, इ श: क े अ ीन विक प्रत्यर्थी3 लेस्थिफ्टनेंट -जनरल की रिरविक्त को भरने क े इच्छ ु क र्थीे, जब यह 1-1-2007 को उपलब् हो गया र्थीा।प्रति -शपर्थीपत्र में दर्थिश थ्यात्मक स्थिस्र्थीति े प ा ल ा है विक प्रत्यर्थी3गण वास् व में उक्त रिरविक्त को भरने क े इच्छ ु क र्थीे।इ मामले क े उपरोक्त दृविष्टकोण में, यविद अपीलक ा: ब े वरिरष्ठ ेवार मेजर -जनरल विव ारिर विकये जाने क े योग्य र्थीा (जो वह विनस् ंदेह र्थीा), उ क े पा विनतिश्च रूप े उपरोक्त रिरविक्त क े ापेक्ष उपयुक्त पाए जाने पर विव ारिर कर पदोन्नति विकये जाने का मौलिलक अति कार र्थीा। ऐ ा न होने पर, वह भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 14 द्वारा प्रदत्त विवति क े मक्ष मान ा क े अपने मौलिलक अति कार और विवति क े मान ंरक्षण े वंति हो जाएगा।हमारा विव ार है विक यह भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 14 क े ह विनविह मौलिलक अति कार का लाभ प्रदान करने क े लिलए उ े दो अव रों पर ब े पहले 29-2-2008 क े राष्ट्रपति क े आदेश द्वारा, और उ क े बाद, 30-5- 2008 क े एक और राष्ट्रपति क े आदेश द्वारा ेवा में विवस् ार की अनुमति दी गई र्थीी, ।उपरोक्त आदेश स्पष्ट रूप े दर्थिश है विक ेवा में पूव¬क्त विवस् ार अपीलक ा: को ीन महीने (और एक महीने की आगे की अवति क े लिलए), या ए ी ी की मंजूरी क, जो भी पहले हो, क े लिलए विदया गया र्थीा।पूव¬क्त आदेशों क े अनु ार, प्रत्यर्थी3 अपीलक ा: क े ार्थी न्यायोति व्यवहार करना ाह े र्थीे, ाविक उ े लेस्थिफ्टनेंट -जनरल क े पद पर पदोन्नति का म्मान प्राŽ करने में क्षम बनाया जा क े (यविद यन बोड: द्वारा उनक े पक्ष में की गई सि फारिरश को क ै विबनेट की विनयुविक्त विमति द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा, पुविष्ट की जा ी है)।अपीलक ा: को लेस्थिफ्टनेंट जनरल क े पद पर पदोन्नति क े लिलए म्यक विव ार करने े वंति करने मेंं अति कारिरयों की कार:वाई े भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 14 क े ह उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उ क े मौलिलक अति कार का उल्लंघन हो ा। प्रत्यर्थिर्थीयों क े हार्थीों ऐ ी कार:वाई विनतिश्च रूप े मनमानी होगी।"
40. यविद वरिरष्ठ ा ू ी को बनाए रखने की अनुमति दी जा ी है, ो क ृ विष शाखा क े कविनष्ठ अणिभयं ाओं की ुलना में यांवित्रक और सि विवल शाखाओं में अति क मे ावी इंजीविनयरों को पदोन्नति क े लिलए विव ार विकए जाने क े अति कार े वंति हो जाएंगे और वास् व में उनका अति कार उ ी यन में यविन क ृ विष ारा क े भी कविनष्ठ अणिभयं ाओं को पदोन्नति प्रदान विकए जाने क े बाद ही प्राŽ होगा। इन कारणों े भी प्रश्नग वरिरष्ठ ा ू ी जानी ाविहए।
41. अपीलक ा:ओं क े लिखलाफ मुकदमा न लाने क े लिलए उच्च न्यायालय द्वारा लिलया गया दू रा आ ार यह र्थीा विक उन्होंने भी प्रभाविव जूविनयर इंजीविनयरों को ंयोसिज नहीं विकया र्थीा। उक्त प्रस्र्थीापना क े लिलए, उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने रंजन क ु मार और अन्य बनाम विबहार राज्य और अन्य[9] क े मामले में इ न्यायालय क े विनण:य का अवलम्ब लिलया है। उपरोक्त मामला यन और विनयुविक्त क े ंबं में इ आ ार पर र्थीा विक यह विबना विक ी लिललिख परीक्षा क े क े वल ाक्षात्कार क े आ ार पर विकया गया र्थीा।उच्च न्यायालय ने इ रह क े यन और विनयुविक्तयों को रद्द कर विदया र्थीा, यहां क विक उन विनयुविक्तयों को भी रद्द क विदया जो इ याति का में पक्षकार नहीं र्थीे। यह इन परिरस्थिस्र्थीति यों में र्थीा विक इ न्यायालय ने माना विक उन विनयुविक्तयों को रद्द नहीं विकया जा क ा जो पक्षकार नहीं र्थीे। स्पष्ट है विक उक्त मामले क े थ्य णिभन्न हैं।
42. उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने प्रबो वमा: और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य10 वाले मामले में इ न्यायालय क े एक अन्य विनण:य का भी 9 (2014) 16 एस.सी.सी. 187 10 (1984) 4 एस.सी.सी. 251 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अवलम्ब लिलया। यह मामला विफर े विनयुविक्तयों को ुनौ ी देने े ंबंति है और उक्त मामले में प्रति विनति हैसि य े भी कोई अणिभयोजन नहीं विकया गया र्थीा। ऐ ी परिरस्थिस्र्थीति यों में, इ न्यायालय ने कहा विक आवश्यक पक्षों अ ंयोजन कारण याति का खारिरज विकये जाने क े योग्य र्थीी। वास् व में, यह विनण:य अपीलक ा:ओं की मदद कर ा हैै । इ का पैरा 50 नी े पुन: उद्धृ है: "50 (1): उच्च न्यायालय को ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह विक ी रिरट याति का की ुनवाई और विनपटारा अपने मक्ष उपस्थिस्र्थी व्यविक्तयों को ुने विबना नहीं करना ाविहए, जो व्यविक्त इ विनण:य े प्रभाविव होगे, अर्थीवा प्रत्यर्थिर्थीयों में े क ु छ प्रति विनति की क्षम ा में न्यायालय क े मक्ष उपस्थिस् हों यविद उनकी ंख्या उन्हें व्यविक्तग रूप े प्रत्यर्थी3 क े रूप में शाविमल करने क े लिलए बहु बड़ी है, और, यविद याति काक ा: उनक े ार्थी शाविमल होने े इनकार कर े हैं, ो उच्च न्यायालय को आवश्यक पक्षों को शाविमल न करने की याति का को खारिरज कर देना ाविहए।"
43. खण्ड पीठ ने उपयु:क्त प्रस्र्थीापना क े लिलए सिज ी रे मामले का अवलम्ब लिलया गया वह उत्तरां ल राज्य बनाम मदन मोहन जोशी और अन्य11 र्थीा जहां विक ी भी प्रभाविव पक्षकार को प्रति विनति क क्षम ा मे भी ंयोसिज नहीं विकया गया र्थीा। ऐ ी परिरस्थिस्र्थीति यों में, इ न्यायालय ने मूल याति यों को क ु छ प्रभाविव णिशक्षकों को अपने प्रति विन त्व क्षम ा ंयोसिज करने क े लिलए आवेदन देने की स्व ंत्रा दे े हुए हुए इ मामले को उच्च न्यायालय में वाप भेज विदया।
44. उपरोक्त प्रस् ाव पर खण्ड़पीठ द्वारा अवलस्थिम्ब ौर्थीा मामला इंदु शेखर सिं ह और अन्य बनाम उ.प्र. राज्य और अन्य12 र्थीा। इ मामले में भी प्रभाविव 11 (2008) 6 एस.सी.सी. 797 12 (2006) 8 एस.सी.सी. 129 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पक्षकारों को ंयोसिज नहीं विकया गया र्थीा और इ न्यायालय ने प्रबो वमा: (पूव¬क्त) में इ न्यायालय क े विनण:य क े विनण:य का अवलम्ब लिलया गया र्थीा।
45. वित्रदीप क ु मार ठींगर और अन्य बनाम पतिश्चम बंगाल राज्य13 क े मामले में न्यायमूर्ति ठक्कर ने यह अणिभविन ा:रिर विकया विक मामला आवश्यक पक्षकारों की क ु ंयोजन की परिरति क े भी र आ ा है क्योंविक सिजन 66 उम्मीदवारों क े विवरुद्ध णिशकाय की गई र्थीी उनमें विवरूद्ध कोई भी पक्षकार नहीं र्थीा। यह आगे अणिभविन ा:रिर विकया गया विक क ु छ प्रत्यर्थी3 को प्रति विनति क्षम ा में शाविमल विकया जाना ाविहए र्थीा। प्रस् र 41 को नी े पुनः प्रस् ु विकया गया हैः "41. जहां क 66 अभ्यर्थिर्थीयों क े ंरक्षण क े ंबं है ो अणिभलेखों े स्पष्ट है विक उनका नाम रोजगार काया:लय द्वारा प्रायोसिज विकया गया र्थीा और 1998- 1999 में उनका यन कर विनयुविक्त प्रदान कर विदया गया र्थीा। सिजन अभ्यर्थिर्थीयों का यन नहीं हो पाया र्थीा उन्होंने अपनी मस्या को उठाकर विट्रब्यूनल क े मक्ष आवेदन प्रस् ु कर णिशकाय की विक उन्हें ( यविन उम्मीदवारों) मूल आवेदन में प्रत्यर्थी3 क े रूप में ज्वाइन कराया जाना ाविहए, जबविक नहीं विकया गया र्थीा। विक ी भी मामले में, उनमें े क ु छ को "प्रति विनति क्षम ा" में प्रत्यर्थिर्थीयों क े रूप में रखा जाना ाविहए र्थीा। वह भी नहीं विकया गया। इ लिलए, विट्रब्यूनल यह मानने में पूरी रह े ही र्थीा विक यविन और विनयुक्त उम्मीदवारों की अनुपस्थिस्र्थीति में और उन्हें ुनवाई का अव र विदए विबना, उनक े यन को विन ा:रिर नहीं विकया जा क ा है।"
46. मुक ु ल क ु मार त्यागी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य14 क े हालिलया मामले में न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने इ बा पर जोर विदया विक सिजन उम्मीदवारों क े विवरूद्ध मामला ल रहा है उनकी की लंबी ू ी मौजूद है ो 13 (2009) 1 एस.सी.सी. 768 14 (2020) 4 एस.सी.सी. 86 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उनमे े प्रत्येक उम्मीदवार को पक्षकार बनाना अनावश्यक और अप्रा ंविगक हो जा ा है। यविद क ु छ उम्मीदवारों को पक्षकार बनाया जा ा है ो यह कहा जाएगा विक वे बाकी उम्मीदवारों क े विह ों का भी प्रति विनति त्व कर रहे हैं। विनण:य क े अनुच्छेद 75 का ु ंग भाग विनमनव है:
75. आगे हम यह उल्लेख कर क े हैं विक खण्ड़पीठ ने रिरट याति का में भी यविन उम्मीदवारों क े ंयोसिज न विकये जाने ंबं ी े ंबंति क: पर विव ार विकया लेविकन खण्ड़पीठ ने उपरोक्त क: पर अपना विनण:य आ ारिर नहीं विकया है। जब बड़ी ंख्या में उम्मीदवारों की यन ू ी में ंयोसिज विकया जाना मनमाना या अवै प्रविYया क े आ ार पर हो ा है, ो पीविड़ पक्ष णिशकाय कर क े हैं और ऐ े मामलों में प्रत्येक व्यविक्त को पक्षकार बनाने की आवश्यक ा पर जोर नहीं विदया जा क ा है। इ क े अलावा, जब यन ू ी में 2211 उम्मीदवारों क े नाम शाविमल र्थीे, ो ुनौ ी की प्रक ृ ति को देख े हुए प्रत्येक उम्मीदवार को पक्षकार बनाना अनावश्यक हो जा ा है, सिज का रिरट याति का में उल्लेख विकया गया र्थीा। इ क े अलावा, क ु छ यविन उम्मीदवारों को प्रति विनति की क्षम ा में रिरट याति का में भी ंयोसिज विकया गया र्थीा।
47. व:मान मामला वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने े ंबंति है और वह भी ऐ ी स्थिस्र्थीति में जब अपीलक ा:ओं (मूल रिरट याति काक ा:ओं) को उनक े द्वारा प्राŽ अंकों या आयोग द्वारा आयोसिज परीक्षा में उनकी दक्ष ा का भी प ा नहीं र्थीा। इ आ ार पर ुनौ ी दी गई र्थीी विक वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े विनयमों का पालन नहीं विकया गया र्थीा। इ रिरट याति का में 18 विनजी प्रत्यर्थी3 र्थीे। मूल याति काक ा: यह नहीं जान क े र्थीे विक भी कौन प्रभाविव होंगे।इ प्रकार उन्होंने मोटे ौर पर 18 ऐ े कविनष्ठ अणिभयं ाओं को पक्षकार बनाया र्थीा जो प्रति क ू ल रूप े प्रभाविव हो क े र्थीे। ेवा न्यायशास्त्र, मय और विफर े ंबंति मामलों में यह माना गया है विक प्रभाविव होने वाले प्रत्येक व्यविक्त को उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ंयोसिज करना आवश्यक नहीं है, लेविकन यविद ऐ े प्रभाविव कम: ारिरयों क े एक वग: को ंयोसिज विकया जा ा है, ो भी क े विह का प्रति विनति त्व और ंरक्षण विकया जा ा है। उपरोक्त क े दृविष्टग, यह ुस्र्थीाविप है विक विक प्रभाविव कम: ारिरयों में े क ु छ का पक्षकारों क े योजन क े सि द्धान् का पया:Ž अनुपालन होगा और वे अपनी प्रति विनति क्षम ा में भी प्रभाविव व्यविक्तयों क े विह ों की रक्षा कर क े हैं। भी पक्षकारों क े अ ंयोजन को घा क नहीं माना जा क ा है।
48. खण्ड़पीठ ने एक ऐ े मुद्दे पर भी विव ार विकया है जो हमारे अनु ार पूरी रह े अप्रा ंविगक और व:मान अपीलों क े न्यायविनण:यन क े लिलए प्रति क ू ल र्थीा। खण्ड़पीठ क े फ ै ले क े प्रस् र 45 में एक ऐ े मुद्दे का ंदभ: है जहां कोई पक्षकार यन/विनयुविक्त प्रविYया में भाग लेने का परिरकलिल अव र प्राŽ कर ा है और बाद में अ फल होने क े बाद मुकर जा ा है, जो विवबं क े सि द्धां े प्रभाविव होगा। उक्त प्रस् ाव क े लिलए, खण्ड़पीठ ने विनण:य क े पैराग्राफ 46,47,48 और 49 में विवस् ृ ा: की और कई विनण:यन विवति यों का अवलम्ब लिलया। हमारे विव ार में, यह मुद्दा विब‡क ु ल प्रा ंविगक नहीं र्थीा।व:मान मामले में उक्त मुद्दा नहीं उठ ा है । अपीलक ा:ओं/मूल रिरट याति काक ा:ओं ने यन प्रविYया को कभी ुनौ ी नहीं दी र्थीी। क े वल वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने को ुनौ ी दी गई र्थीी। ऐ े में खंडपीठ की यह ा: पूरी रह े अप्रा ंविगक है।
49. खंडपीठ ने आगे अनुच्छेद 51 में ामान्य और अस्पष्ट रीक े े अणिभलिललिख विकया र्थीा विक विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा सिजन प्राति कारिरयों का अवलम्ब लिलया गया र्थीा वह थ्य े ंबंति अलग परिरस्थिस्र्थीति र्थीी जो लागू नहीं र्थीी। खंडपीठ ने विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा अवलस्थिम्ब विनण:यों पर विव ार नहीं विकया, बस्थि‡क क े वल यह विटप्पणी की। हमारी राय यह है विक विवद्वान एकल उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" न्याया ीश द्वारा सिजन प्राति कारिरयों का अवलम्ब लिलया गया र्थीा, प्रा ंविगक र्थीा और ही रीक े े लागू विकया गया र्थीा।
50. इ क े अलावा, खंडपीठ ने पैरा 51, 52, 53 में यह कह े हुए काय:वाही की गई विक 11 वष: का विवलम्ब हुआ है, 11 वष: क े विवलम्ब की गणना का आ ार यह र्थीा विक 2006 की वरिरष्ठ ा ू ी को वष: 2017 में अपीलक ा:ओं द्वारा ंशो न क े माध्यम े ुनौ ी दी गई र्थीी और इ लिलए 11 वष: का विवलम्ब हुआ र्थीा। खण्ड़पीठ द्वारा इ ा: को भी बरकरार नहीं रखा जा क ा है। पहली वरिरष्ठ ा ू ी 2006 में ैयार की गई र्थीी। यह खुला ा नहीं विकया गया र्थीा विक ीन अलग-अलग ूति यों को उनकी योग्य ा क े आ ार पर स्व ंत्र रूप े व्यवहार करक े वरिरष्ठ ा ू ी क ै े ैयार की गई है, लेविकन ीन ूति यों की ंयुक्त योग्य ा क े परिरणामस्वरूप नहीं। अपीलक ा:ओं को इ त्रुविट का प ा 2010 में ही ल गया और इ क े ुरं बाद उन्होंने 2010 की वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी दी। यहां क विक अगर उन्होंने 2006 की वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी नहीं दी, ो 2010 की वरिरष्ठ ा ू ी की दैव पुनरीक्षा, मीक्षा और नए सि रे े ैयार की जा क ा है, अगर इ े रद्द विकया जा ा। अपीलक ा:ओं को कोई नुक ान नहीं हो क ा र्थीा, भले ही उन्होंने 2006 की वरिरष्ठ ा ू ी को ुनौ ी नहीं विदया है।
51. एकल यन क े ंबं में पैराग्राफ 54, 55, 56 में जो क: विदया है वह भी विनयमावली, 1991 पविठ विनयमावली 2009 क े आ ार पर कायम नहीं रखा जा क ा है।
52. अं में, खण्ड़पीठ क े फ ै ले का पैराग्राफ 57 जो विनयमावली, 1991 क े विनयम 5 और 8 े ंबंति है, हम पुनः क े वल यह कह क े हैं विक, क्या वह विनयम 5 या विनयम 8 लागू र्थीा जो लागू र्थीा, विक ी यन की ी ी भर्ति यों उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पारस्परिरक वरिरष्ठ ा उनक े प्रदश:न और आयोग या विमति,यर्थीास्थिस्र्थीति, परीक्षा में प्राŽ अंकों क े आ ार पर एक स्थिम्मलिल ू ी होनी ाविहए। है, विवद्वान एकल न्याया ीश ने विYयात्मक भाग में उल्लेख विकया है विक विनयम 5 क े अनु ार एक नई वरिरष्ठ ा ू ी ैयार विकया जाना ाविहए और स्पष्ट रूप े विनयम 8 क े प्रभाव पर विव ार नहीं विकया गया जो इ विनण:य को दूविष नहीं करेगा क्योंविक ी ी भ 3 में वरिरष्ठ ा ू ी को ैयार करने आ ार दोनों विनयमावली में एक ही र्थीा। यह उल्लेख विकया जा क ा है विक ी ी भ 3 और पदोन्नति क े बी कोई अं र अं र नहीं है।
53. ऊपरोक्त कारणों पर विव ार करने क े उपरान् हम पा े हैं विक खण्डपीठ ने अपील को मंजूर करने और रिरट याति का को खारिरज करने में त्रुविट कारिर विकया है, विवद्वान एकल न्याया ीश अंति म वरिरष्ठ ा ू ी को अपास् करने और विनयमावली, 1991 क े विनयम 5 या विनयम 8 अनु ार नई वरिरष्ठ ा ू ी ैयार करने क े लिलए विनयुविक्त प्राति कारी को विनद|श देने क े अपने विव ार में ही र्थीा।
54. दनु ार, अपील अनुज्ञा की जा ी है। उच्च न्यायालय की खण्ड़पीठ क े आक्षेविप विनण:य विदनांविक 04.12.2019 अपास् विकया जा ा है और एकल न्याया ीश द्वारा पारिर विनण:य विदनांविक 14.05.2019 बरकरार रखा जा ा है।
55. वाद व्यय क े ंबं में कोई आदेश नहीं विदया जा रहा है।
56. यविद कोई लंविब आवेदन है ो उ का भी विनपटारा विकया जा ा है। न्यायामूर्ति डॉ. डी. वाई. ंद्र ूड़....................................… न्यायामूर्ति विवYम नार्थी उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"................................… न्यायामूर्ति बी. वी. नागरत्न.................................… नई विदल्ली 08 विद ंबर 2021 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण:य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनबKति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण:य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विYयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"