Indian Overseas Bank v. Om Prakash Lal Srivastava

Supreme Court of India · 19 Jan 2022
Sanjay Vikash Kaul; M. M. Sundresh
Civil Appeal No 267 of 2022
2020 SCC Online SC 782
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that departmental disciplinary proceedings require proof on preponderance of probabilities, remitted the matter for expert examination of disputed signatures, and upheld the dismissal subject to further inquiry.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 267/2022
इंति$यन ओवरसीज बैंक और अन्य .... अपीलार्थी-
बनाम
ओम प्रकाश लाल श्रीवास् व ...प्रत्यर्थी-
विन र्ण3 य
न्यायमूर्ति संजय विकशन कौल
JUDGMENT

1. एक राष्ट्रीयक ृ बैंक-अपीलक ा3 ने प्रत्यर्थी- क े खि>लाफ विवभागीय काय3वाही क े अनुसरर्ण में एक कम3चारी क े रूप में अंति म कदम उठाया, सिजसमें उसे विवभिभन्न मामलों में दोषी पाया गया, सिजसमें साव3जविनक न क े संरक्षक क े रूप में क 3व्य का उल्लंघन और बेईमानी, ो>ा ड़ी या दस् ावेजी हेरफ े र शाविमल है।औद्योविगक न्यायाति करर्ण ने अं ः अपीलक ा3-बैंक क े विनर्ण3य को बरकरार र>ा, लेविकन इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनर्ण3य क े संदभ[3] में पांच आरोपों को साविब नहीं पाया गया जबविक दो आरोपों क े ह मामला सीविम जनादेश क े सार्थी औद्योविगक न्यायाति करर्ण को वापस भेज विदया गया र्थीा।

2. हालाँविक, इस न्यायालय द्वारा विदनांक 5.3.2019 को उक्त विनर्ण3य पर रोक लगा दी गई र्थीी। थ्य: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. प्रत्यर्थी- को विदनांक 14.9.1981 को क्लक 3 -सह-क ै भिशयर क े रूप में अपीलक ा3-बैंक में विनयोसिज विकया गया र्थीा।अपीलार्थी--बैंक को प्रत्यर्थी- की भाभी श्रीम ी मीरा श्रीवास् व से विदनांक 8.10.1994 को एक भिशकाय प्राप्त हुई विक प्रत्यर्थी- ने जाली हस् ाक्षर कर प्रत्यर्थी- और उसकी भाभी क े संयुक्त नाम से बच >ा ा संख्या 7882 >ोला और संचाखिल विकया र्थीा और कल्यार्ण विनगम खिलविमटे$ द्वारा अं रिरम राह क े रूप में जारी विकए गए 20,000/- रुपये क े ति$मां$ $्राफ्ट को भुनाया, सिजसमें उसक े पति एक जूविनयर इंजीविनयर क े रूप में काय3र र्थीे, सिजनकी दुभा3ग्य से विदनांक 15.4.1994 को एक सड़क दुघ3टना में मृत्यु हो गई र्थीी।प्रत्यर्थी- को गोर>पुर शा>ा में गंभीर कदाचार क े क ृ त्यों क े खिलए बैंक द्वारा विदनांक 5.11.1994 को विनलंबन कर विदया गया र्थीा और उसे विदनांक 22.3.1995 का आरोप पत्र जारी विकया गया र्थीा।आरोप विनम्नानुसार हैं: “आरोप संख्या 1: विदनांक 28.9.94 को आप शा>ा प्रबं क श्री आर.एन. सक्सेना क े विवभिशष्ट विनदnशों का उल्लंघन कर े हुए श्री टी.क े श्री र अति कारी से जावक समाशो न चेक प्राप्त विकए विबना समाशो न गृह गए और इस प्रकार आपने जानबूझकर अवज्ञा का काय[3] विकया जो विक विदनांक 19.10.66 क े विद्वपक्षीय समझौ े क े प्रस् र 19.[5] (ई) क े ह एक घोर कदाचार है। आरोप संख्या 2: आपने जब श्री ए.क े. चक्रव - एवं अति कारी श्री एस.एन.पाण्$ेय ने उक्त चेक को प्रा ः 10.30 बजे से पूव[3] विक्लयरिंरग हाउस में सौंप विदया ब उनक े द्वारा विदए गए विवभिशष्ट विनदnशों क े बावजूद विदनांक 28.9.94 को विदन क े 2,21,161.47 रुपये क े आउटवा$3 विक्लयरिंरग चेक क े खिलए शाविमल करने से इनकार कर विदया, जो जानबूझकर अवज्ञा का काय[3] है और विद्वपक्षीय समझौ ा विदनांक 19.10.66 क े प्रस् र 19.[5] (ई) क े ह एक घोर कदाचार है। आरोप संख्या 3: विदनांक 28.9.94 को विदन क े 2,21,161.47 रुपये क े आउटवा$3 विक्लयरिंरग चेक क े खिलए शाविमल करने से इनकार करक े, आपने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds संबंति बैंक क े ग्राहकों को असुविव ा और कविठनाई का कारर्ण बना विदया और इस प्रकार बैंक क े विह ों क े प्रति क ू ल काम विकया, जो विद्वपक्षीय समझौ ा विदनांक 19.10.66 क े प्रस् र 19.5(जे) क आरोप संख्या 4: आपने ो>े और बेईमानी से अपने और अपनी भाभी श्रीम ी मीरा श्रीवास् व क े संयुक्त नाम पर जाली हस् ाक्षर करक े बच बैंक >ा ा संख्या 7882 >ोला जो विक बैंक क े खिलए हाविनकारक है और 19.10.66 विदनांविक क े विद्वपक्षीय समझौ े क े प्रस् र 19.[5] (जे) क े ह एक घोर कदाचार है। आरोप संख्या 5: आपने ो>े से और बेईमानी से संयुक्त >ा ा संख्या 7882 से 20,000/- रुपये (श्रीम ी मीरा श्रीवास् व क े पक्ष में जारी ति$मां$ $्राफ्ट की काय3वाही होने क े ना े और >ा े में जमा विकया गया) की दो विनकासी पच- में श्रीम ी मीरा श्रीवास् व क े जाली हस् ाक्षर करक े क्रमश: 20.5.94 और 13.6.94 को 7,000/- रुपये और 13,000/- रुपये की दो विकस् ों में विनकाले गए, जो विक बैंक क े प्रति क ू ल काय[3] है और 19.10.66 विदनांविक विद्वपक्षीय समझौ े क े प्रस् र 19.[5] (जे) क े ह एक घोर कदाचार है। आरोप संख्या 6: विदनांक 9.11.94 को शा>ा प्रबं क श्री आर.एन. सक्सेना सविह क ु छ बाहरी व्यविक्तयों एवं स्टाफ सदस्यों का घेराव कर, शा>ा प्रबं क को असंसदीय भाषा में मकाकर एवं गाली-गलौज कर र्थीा शा>ा प्रबं क क े अटैची, मेज की दराज र्थीा उसकी जेब की लाशी लेने क े बाद जबरन विनलंबन आदेश की प्रति को ले खिलया, आपने उपद्रवी, उच्छ ृ ं>ल और अभद्र ा वाला व्यवहार विकया है जो विक विद्वपक्षीय समझौ ा 19.10.66 विदनांविक क े प्रस् र 19.[5] (सी) क आरोप संख्या 7: विनलंबन आदेश 5.11.94 विदनांक की $ुप्लीक े ट प्रति में विनविह आपकी स्वयं की पाव ी और ii) उपस्थिस्र्थीति रसिजस्टर में आपक े नाम को सफ े द पदार्थी3 से विमटाकर आपने शा>ा क े अभिभले> क े सार्थी छेड़छाड़ की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds और इस रह बैंक क े प्रति क ू ल काम विकया जो विद्वपक्षीय समझौ ा 19.10.66 विदनांविक क े प्रस् र 19.5(जे) क े ह एक घोर कदाचार है।”

4. प्रत्यर्थी- ने आरोप पत्र क े जवाब में आरोपों से इनकार विकया।आरोपों पर विनर्ण3य लेने क े खिलए एक जांच अति कारी विनयुक्त विकया गया र्थीा।अपीलक ा3 का मामला यह है विक प्राक ृ ति क न्याय क े सभी सिसद्धां ों का पालन विकया गया र्थीा और प्रत्यर्थी- को अपीलक ा3-बैंक द्वारा अवलम्ब खिलए गए सभी दस् ावेजों/सामग्री क े सार्थी आपूर्ति की गई र्थीी। जांच अति कारी ने जांच पूरी की और विदनांक 6.12.1995 की रिरपोट[3] प्रस् ु कर े हुए कहा विक प्रत्यर्थी- क े खि>लाफ सभी आरोप साविब हो गए हैं। न ीज न, प्रत्यर्थी- को विदनांक 28.2.1996 को कारर्ण ब ाओ नोविटस क े सार्थी अनुशासनात्मक प्राति करर्ण द्वारा सेवा से ब>ा3स् गी की सजा का प्रस् ाव विदया गया र्थीा।प्रत्यर्थी- ने प्रत्युत्तर प्रस् ु विकया लेविकन अनुशासविनक प्राति कारी ने प्रत्युत्तर पर विवचार करने क े बाद विनष्कष[3] को बरकरार र>ा और आदेश विदनांक 11.5.1996 क े ह सेवा से ब>ा3स् गी का जुमा3ना लगाया।

5. प्रत्यर्थी- ने अपीलीय प्राति कारी क े समक्ष अपील दायर की, लेविकन अपीलीय प्राति कारी ने विदनांक 10.9.1996 क े आदेश की अपील को >ारिरज कर विदया।6. प्रत्यर्थी- ने एक औद्योविगक विववाद को बढ़ाने की मांग की और क ें द्र सरकार ने इस मुद्दे पर पीठासीन अति कारी, क ें द्र सरकार विट्रब्यूनल-कम-लेबर कोट[3], कानपुर को सरकारी आदेश 30.10.2003 विदनांविक क े विववाद का उल्ले> विकया विक क्या ब>ा3स् गी का जुमा3ना लगाने वाले प्रबं न की कार3वाई उतिच और कानूनी र्थीी।

7. विट्रब्यूनल क े समक्ष काय3वाही की गई और विट्रब्यूनल ने घरेलू जांच की विनष्पक्ष ा क े सवाल पर एक प्रारंभिभक मुद्दा बनाया।विट्रब्यूनल क े आदेश विदनांक 15.11.2011 ने अपीलक ा3 क े खि>लाफ प्रारंभिभक मुद्दे का फ ै सला विकया क्योंविक अपीलक ा3-प्रबं न/बैंक मूल दस् ावेजों को पेश करने में विवफल रहा र्थीा और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds संबंति पेजों की अति कांश फोटोप्रति याँ पठनीय नहीं र्थीी।इस प्रकार, यह विनष्कष[3] विनकाला गया विक प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों का उल्लंघन र्थीा।हालांविक, विट्रब्यूनल ने अपीलक ा3-बैंक को सबू प्रस् ु करक े प्रत्यर्थी- क े खि>लाफ आरोप साविब करने का अवसर विदया।बैंक ने पांच गवाहों को पेश करक े अपने सबू प्रस् ु विकया, जबविक प्रत्यर्थी- ने स्वयं की जांच की। विट्रब्यूनल ने विनर्ण3य 21.2.2013 विदनांविक द्वारा प्रत्यर्थी- क े विवरुद्ध संदभ[3] का उत्तर विदया विक अपीलक ा3 - बैंक/प्रबं न प्रत्यर्थी- क े खि>लाफ सभी आरोपों को स्र्थीाविप करने में सफल रहा है। सजा की अवति क े मुद्दे पर भी यह माना गया विक यह आरोप प्रत्यर्थी- क े खि>लाफ लगाए गए आरोपों क े अनुरूप र्थीा और साविब हुआ।

8. अपीलक ा3 ने इलाहाबाद में न्यातियक उच्च न्यायालय क े समक्ष, रिरट यातिचका(सी) संख्या 53458/2013 होने क े ना े रिरट यातिचका दायर करक े विट्रब्यूनल क े इस आदेश को चुनौ ी देने की मांग की। आक्षेविप विनर्ण3य विदनांक 31.5.2018 क े अनुसार, आरोप 4 और 5 क े संबं में मामले को वापस भेज े समय उक्त रिरट यातिचका को अनुमति दी गई है। आक्षेविप विनर्ण3य में कहा गया विक जब पूव[3] की विवभागीय काय3वाही नैसर्गिगक न्याय क े सिसद्धां ों का उल्लंघन करने वाली पाई गई र्थीी, ब आरोप संख्या 1, 2, 3, 6 और 7 की ुलना में कोई विनष्कष[3] नहीं विनकाला जाना चाविहए र्थीा, इस दलील क े आ ार पर विक बैंक ने क े वल आरोप संख्या 4 और 5 क े संबं में साक्ष्य प्रस् ु विकए। आरोप संख्या 4 और 5 क े संबं में यह राय र्थीी विक प्रत्यर्थी- क े अनुरो पर श्रीम ी मीरा श्रीवास् व क े हस् ाक्षरों की ुलना विकसी विवशेषज्ञ द्वारा उनक े स्वीक ृ हस् ाक्षरों से की जानी चाविहए र्थीी और भी सही विनष्कष[3] पर पहुंचा जा सक ा र्थीा विक क्या प्रति वादी द्वारा वापसी फॉम[3] जाली है या नहीं और विट्रब्यूनल को एक विवशेषज्ञ की रह काम करने से बचना चाविहए र्थीा। ऐसा इसखिलए र्थीा क्योंविक ो>ा ड़ी का आरोप लगाया गया Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds र्थीा और जांच क े स् र का मानक होना चाविहए र्थीा सिजसका एक आपराति क न्यायालय द्वारा सहारा खिलया जा ा है।

9. हम इस स् र पर नोविटस कर सक े हैं विक जांच अति कारी ने इस बा का विवरो विकया र्थीा विक बैंकर की नजर से प्रश्नग हस् ाक्षर की ुलना में स्वीकार विकए गए हस् ाक्षर का अवलोकन कर े समय यह कहा जा सक ा है विक समान ा का अभाव है।श्रीम ी मीरा श्रीवास् व का दावा र्थीा विक बैंक जाने क े विबना भी यह >ा ा ो>ा ड़ी से >ोला गया र्थीा। 7,000/- रूपये और 13,000/- रूपये क े दो विनकासी पर्तिचयों क े संबं में स्थिस्र्थीति समान र्थीी।श्रीम ी मीरा श्रीवास् व ने अपने बयान में इस बा की पुविष्ट की र्थीी।बयान में उसने स्वीकार विकया विक उसक े और प्रत्यर्थी- दोनों संयुक्त परिरवार क े सदस्य र्थीे, लेविकन $्राफ्ट को प्रत्यर्थी- को सुरतिक्ष र>ने क े खिलए विदए गए र्थीे और जब $ेढ़ महीने क े बाद उसने प्रत्यर्थी- को अपना $्राफ्ट वापस करने क े खिलए कहा ो उसने एक या दूसरे बहाने से ऐसा करने से इनकार कर विदया।इस प्रकार, दो या ीन महीने बाद उसने बैंक से भिशकाय विकया विक शा>ा में $्राफ्ट को भुना खिलया गया र्थीा। भिशकाय करने पर उसे बैंक से पैसे विमले। उसकी सिजरह में यह कभी नहीं ब ाया गया विक वह >ा ा >ोलने क े खिलए बैंक गई र्थीी और >ा ा >ोलने क े फॉम[3] पर उसक े हस् ाक्षर र्थीे और न ही उसे यह ब ाया गया र्थीा विक वह 7,000/- रुपये और 13,000/- रुपये की राभिश विनकालने क े खिलए बैंक गई र्थीी। उसका बयान जांच अति कारी और औद्योविगक न्यायाति करर्ण दोनों द्वारा विवश्वसनीय र्थीा। अपीलार्थी- क े कर्थीन:-

10. अपीलक ा3 क े विवद्वान अति वक्ता का कर्थीन यह र्थीा विक उच्च न्यायालय ने अनुशासनात्मक काय3वाही क े खिलए आपराति क काय3वाही क े प्रमार्ण क े मानकों को लागू करने में त्रुविट की क्योंविक अनुशासनात्मक काय3वाही में एक कम3चारी द्वारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds कदाचार का मूल्यांकन संभावनाओं और साक्ष्य की प्रबल ा क े आ ार पर विकया जाना चाविहए।यह विद>ाने क े खिलए पया3प्त साक्ष्य र्थीे विक प्रत्यर्थी- ने भिशकाय क ा3 श्रीम ी मीरा श्रीवास् व क े हस् ाक्षरों में हेरफ े र करक े उसक े पति क े विन न पर मुआवजे क े रूप में ो>ा ड़ी और जालसाजी की, >ा ा >ोला, >ा े का संचालन विकया और 20,000/- रूपये की राभिश का लेनदेन विकया।प्रत्यर्थी- ने परिरवादी का अपनी भाभी होने का फायदा उठाया।परिरवादी ने विट्रब्यूनल क े समक्ष शपर्थी पर स्पष्ट और स्पष्ट गवाही दी है और उसकी सिजरह में इसक े विवपरी कु छ भी नहीं विनकला र्थीा।वास् व में इस पहलू क े बारे में यह कहा गया र्थीा विक कोई भौति क सिजरह नहीं र्थीी और उसक े बयान पर संदेह करने का कोई कारर्ण नहीं है।

11. जहां क शेष आरोपों का संबं है, दस् ावेजों क े माध्यम से विवभिशष्ट विनष्कष[3] विनकाला गया विक अवज्ञा, उच्च अति कारिरयों क े आदेशों की अवहेलना करना, गल रीक े से विनलंबन पत्रों बनाने संबंति आरोप भी साविब हुए र्थीे और यहां क विक वे स्वयं द्वारा सेवा से ब>ा3स् गी की सजा देने क े खिलए पया3प्त र्थीे। प्रत्यर्थी- क े कर्थीन:-

12. दूसरी ओर प्रत्यर्थी- क े विवद्वान अति वक्ता ने क 3 विदया विक आरोप संख्या 4 और 5 क े अलावा आक्षेविप विनर्ण3य क े आरोपों क े संदभ[3] में विकसी भी मामले में साविब नहीं हुए क्योंविक उस संबं में कोई साक्ष्य नहीं विदया गया र्थीा और क े वल दस् ावेजों पर अवलंब नहीं खिलया जा सक ा र्थीा।

13. यह आगे कहा गया विक आरोप संख्या 4 और 5 भी साविब नहीं हुए र्थीे और लखिल पोपली बनाम क े नरा बैंक 1, विवशेष रूप से प्रस् र 13 में इस न्यायालय क े विनर्ण3य का उल्ले> करने की मांग की गई र्थीी जो विनम्नानुसार है:

Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds “13. यह ध्यान विदया जाना चाविहए विक साक्ष्य अति विनयम की ारा 45 और 47 क े ह, न्यायालय को दूसरों की राय पर विवचार करना होगा, जबविक उक्त अति विनयम की ारा 73 क े ह, न्यायालय स्वयं की ुलना में अपनी राय बना सक ा है।खिल>ावट की पहचान क े साक्ष्य को साक्ष्य अति विनयम क े ीन >ं$ों पर विवचार विकया जा ा है। वे ारा 45,47 और 73 हैं। ारा 45 और 47 क े ह दोनों साक्ष्य एक म क े हैं।पहले मामले में यह वैज्ञाविनक ुलना द्वारा हो ा है और बाद में बार-बार अवलोकन और अनुभवों क े परिरर्णामस्वरूप परिरतिच ा क े आ ार पर हो ा है। दोनों मामलों में, न्यायालय को ऐसे माध्यमों से स्वयं को सं ुष्ट करने की आवश्यक ा है जो यह विनष्कष[3] विनकालने क े उपलब् हैं विक राय पर कार3वाई की जा सक ी है।हस् ले> विवशेषज्ञ की राय क े बावजूद, न्यायालय स्वीक ृ ले>न की ुलना विववाविद ले>न से कर सक ा है और अपना स्व ंत्र विनष्कष[3] विनकाल सक ा है। ुलना का यह काय[3] साक्ष्य अति विनयम की ारा 73 क े ह स्वीकाय[3] है। आम ौर पर, ारा 45 और 73 एक दूसरे क े पूरक हैं।हस् ले>न विवशेषज्ञ क े साक्ष्य को अविनवाय[3] रूप से प्रमाभिर्ण करने की आवश्यक ा नहीं है।न्यायालय को यह य करना है विक इस रह क े अविनयंवित्र साक्ष्य को स्वीकार करना है या नहीं।यह स्पष्ट है विक जब विवशेषज्ञों क े साक्ष्य नहीं हो े हैं, ब भी न्यायालय क े पास ले>न की ुलना करने और मामले को य करने की शविक्त हो ी है। [दे>ें मुरारी लाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1980)1 एससीसी 704]" विनष्कष3ः

14. पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ता क े विवरो ी क“ पर विवचार करने पर, हमारा विवचार है विक उच्च न्यायालय आक्षेविप विनर्ण3य में विनष्कष[3] पर पहुंचने और विनदnश देने में त्रुविट की है इसखिलए इस मामले को अब एक हस् ले>न विवशेषज्ञ की राय लेने क े खिलए एक बार विफर औद्योविगक न्यायाति करर्ण को प्रेविष विकया जाना है।

15. हम इस सीमा पर जोर देना चाह े हैं विक भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह अति कार क्षेत्र का प्रयोग कर े हुए उच्च न्यायालय द्वारा विट्रब्यूनल क े विनर्ण3य Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds की जांच क े खिलए क ु छ अं र्गिनविह कानूनी सीमाएं हैं। हम जीई पावर इंति$या खिलविमटे$ (पूव[3] में मेसस[3] अल्स्टॉम प्रोजेक्ट्स खिलविमटे$ क े रूप में ) बनाम ए. अजीज 2 में इस न्यायालय क े फ ै सले का उल्ले> कर सक े हैं। यविद कोई न्यातियक त्रुविट या प्राक ृ ति क न्याय का उल्लंघन या अभिभले> में स्पष्ट विवति क त्रुविट नहीं है ो उच्च न्यायालय क े खिलए अपीलीय न्यायालय क े रूप में विववाद का गुर्णावगुर्ण नहीं विमल सक ा। वह भी, हस् ाक्षरों क े दो समूहों क े संबं में गविठ एक राय क े पहलू पर, जहां बैंक क े एक अति कारी द्वारा पूछ ाछ की गई र्थीी, जो हस् ाक्षरों की ुलना में एक राय में यह आया र्थीा विक उनमें क्या अं र है।इसे 'बैंकर की नजर' क े परिरप्रेक्ष्य से दे>ा गया है।यह विनति– रूप से, प्रत्यर्थी- की भाभी की गवाही क े अलावा है।

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16. हमारे पास प्रस् र 9 में दज[3] थ्यात्मक कर्थीन क े संदभ[3] में पक्षकारों क े खिलए विवद्वान अति वक्ता क े क“ पर ध्यान देने क े दौरान है विक जांच अति कारी ने 'बैंकर की नजर से' से प्रश्नग हस् ाक्षर से ुलना में स्वीक ृ हस् ाक्षर का अवलोकन कर े हुए स्वयं की राय दी र्थीी, यह क े वल जांच अति कारी का ही विवचार नहीं र्थीा बस्थिल्क प्रत्यर्थी- श्रीम ी मीरा श्रीवास् व की भाभी क े बयान पर आ ारिर र्थीा। श्रीम ी मीरा श्रीवास् व का बयान स्पष्ट र्थीा।वह एक संयुक्त परिरवार में रह रही र्थीी सिजसमें से प्रत्यर्थी- एक सदस्य र्थीा।दुभा3ग्य से उसने एक दुघ3टना में अपने पति को >ो विदया।दो $्राफ्ट उसक े विनयोक्ता से प्राप्त विकए गए र्थीे और उन $्राफ्टों को प्रत्यर्थी- की कस्ट$ी में र>ा गया र्थीा, संभव ः इसखिलए विक वह एक बैंकर और उसक े मृ पति का बड़ा भाई र्थीा। उसे उसी क े लाभों को देने क े बजाय, प्रत्यर्थी- अपने और अपनी भाभी क े नाम पर संयुक्त रूप से >ा ा >ोलने, $्राफ्ट पेश करने और उसी क े विवविनयोग क े सार्थी राभिश विनकालने लगा।श्रीम ी मीरा श्रीवास् व न ो >ा ा >ोलने क े फॉम[3] या हस् ाक्षर का$3 पर हस् ाक्षर करने क े खिलए बैंक गई र्थीी, 2 2020 SCC Online SC 782. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds न ही उन्होंने $्राफ्ट प्रस् ु विकया र्थीा और न ही नकदीकरर्ण वाउचर पर हस् ाक्षर विकए र्थीे।वास् व में, यह क े वल ब हो ा है जब उसने बैंक द्वारा पूछ ाछ की गई राभिश प्राप्त न होने की भिशकाय की और कम से कम पैसा उसे हस् ां रिर कर विदया गया र्थीा।उसकी सिजरह से क ु छ भी प ा नहीं चला, न ही इस बा क े खिलए उसे सिजरह में र>ा गया र्थीा विक वह कभी बैंक गई र्थीी, >ा ा >ोला र्थीा या नकदीकरर्ण वाउचर पर हस् ाक्षर विकए र्थीे।परिरवार में रिरश् ों में >टास नहीं र्थीी और न ही विकसी रिरश् ेदार द्वारा प्रत्यर्थी- को "विफक्स" करने का कोई प्रयास ही विकया गया र्थीा।हमारे विवचार में यह साक्ष्य प्रत्यर्थी- को फ ं साने क े खिलए पया3प्त र्थीा।

17. ऐसा प्र ी हो ा है विक उच्च न्यायालय ने उक्त उद्देश्य क े खिलए एक हस् ले>न विवशेषज्ञ की आवश्यक ा पूरी कर े हुए विवभागीय काय3वाही क े खिलए आपराति क काय3वाही का परीक्षर्ण लागू विकया है।यह इस न्यायालय द्वारा विन ा3रिर विवति क स्थिस्र्थीति क े विवपरी होगा। हमारे खिलए आशू सुरेंद्रनार्थी ति वारी बनाम पुखिलस उपा ीक्षक, ईओ$ब्ल्यू, सीबीआई 3 में हाखिलया फ ै सले का उल्ले> करना पया3प्त होगा विक विवभागीय काय3वाविहयों में प्रमार्ण का मानक, संभाव्य ा की प्र ान ा पर आ ारिर होने क े कारर्ण, आपराति क काय3वाही में प्रमार्ण क े मानक से क ु छ कम है जहाँ मामले को युविक्तयुक्त संदेह से परे साविब करना हो ा है।

18. हम यह भी दे> सक े हैं विक उच्च न्यायालय का म है विक औद्योविगक न्यायाति करर्ण द्वारा वास् व में क े वल आरोप संख्या 4 और 5 पर ही विवचार विकया जा सक ा र्थीा, सिजसक े खिलए एक हस् ले>न विवशेषज्ञ की राय में और साक्ष्य की आवश्यक ा र्थीी।जहां क अन्य आरोपों का संबं है, यह विनष्कष[3] विनकाला गया विक आगे कोई सबू नहीं विदया गया र्थीा।

Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

19. हमारे विवचार में यह न ो सही दृविष्टकोर्ण है और न ही अभिभले> से बाहर है। साक्ष्य प्रति पाविद विकया गया र्थीा।पहले भी, बैंक क े अभिभले> से प ा चलने वाले अन्य शुल्कों क े संबं में, जो प्रत्यर्थी- क े आचरर्ण को दशा3 ी है जो प्रत्यर्थी- क े आचरर्ण को दशा3 ा है जो स्वयं आरोप य करने क े रीक े और उसक े समर्थी3न में सामने आई सामग्री से स्पष्ट है।इस प्रकार, अन्य आरोपों क े पहलू को भी उस रीक े से >ारिरज नहीं विकया जा सक ा र्थीा सिजस रह से इसका ात्पय[3] है।इस मामले को वापस भेजे जाने पर, एम$ब्ल्यू-3 और एम$ब्ल्यू-4 होने क े कारर्ण इन पहलुओं क े बारे में दो गवाहों ने बयान विदया। प्रत्यर्थी- एक क्लक 3 -कम-क ै भिशयर र्थीा। यह विवश्वास का पद है। प्रत्यर्थी- ने उस विवश्वास को ोड़ा। वास् व में, प्रत्यर्थी- ने एक विव वा भाभी क े सार्थी-सार्थी बैंक क े विवश्वास को भी ोड़ा है, सिजससे यह विवति क या नैति क आ ार पर हस् क्षेप का मामला मुस्थिश्कल से ही बन ा है। प्रत्यर्थी- पर लगाई गई सजा को भी शायद ही अनुपा हीन कहा जा सक ा है। प्रत्यर्थी- क े स्र्थीाविप आचरर्ण ने उसे सेवा में बने रहने का अति कार नहीं विदया।

20. इस प्रकार, हम यह दे> े हैं विक उच्च न्यायालय क े आक्षेविप आदेश 31.5.2018 विदनांविक को अपास् विकया जा सक ा है और औद्योविगक न्यायाति करर्ण क े विनर्ण3य 21.2.2013 विदनांविक की चुनौ ी को विनरस् विकया जा ा है।

21. दनुसार अपील को पक्षकारों को अपनी लाग वहन करने क े खिलए छोड़ने की अनुमति दी जा ी है।...........................................… [न्यायमूर्ति संजय विकशन कौल]...........................................… Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds [न्यायमूर्ति एम. एम. सुन्द्रेश] नई विदल्ली 19 जनवरी, 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds