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भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील सं. 169-170 वर्ष% 2022
(एसएलपी (सी) सं. 11596-11597 वर्ष% 2020 से उद्भू )
उ.प्र. राज्य द्वारा
सति0व (आबकारी) एवं अन्य .... अपीलार्थी4 (गण)
बनाम
एम/एस मैकडॉवेल एंड क
ं पनी लिलविमटेड .... प्रत्यर्थी4 (गण)
विनण%य
न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी
विवर्षयवस् ु
प्रारंभिभक और संतिक्षप्त रूपरेखा ...........................................................2
प्रासंविगक थ्यात्मक पहलू और पृष्ठभूविमः आग की घटना और नष्ट हो गई शराब
पर उत्पाद शुल्क की मांग.................................................................... 6 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
आग से पहले................................................................................... 6
आग की घटना और प्रासंविगक रिरपोट%...................................................... 8
आग में नष्ट शराब पर उत्पाद शुल्क की मांग........................................... 11
उच्च न्यायालय में रिरट याति0का और उसमें अं रिरम आदेश.......................... 17
10.04.2017 और 06.11.2019 विदनांविक आक्षेविप आदेश : उच्च न्यायालय
ने रिरट याति0का को अनुमति दी और परिरणामी आदेश पारिर विकए................ 18
विवरो ी क
% ..............................................................................… 21
विन ा%रण क
े लिलए प्रश्न........................................................................ 33
प्रासंविगक वै ाविनक प्राव ान............................................................... 34
क्या प्रश्नग मांग विवति द्वारा अति क
ृ है?..............................................41
क्या प्रति वादी क
ं पनी आग में नष्ट हो गई शराब पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने
क
े लिलए उत्तरदायी है........................................................................ 49
तिडस्टिस्टलरी और गोदाम पर विवभाग का विनयंत्रणः प्रभाव............................... 50
लापरवाही ................................................................................... 52
दैवीय क
ृ त्य.....................................................................................56
अपरिरहाय% दुघ%टना.............................................................................61
अन् र्निनविह लापरवाही.......................................................................63
प्रति वादी क
ं पनी ही उत्तरदायी ............................................................ 65 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
बीमा कवरेज क
े वल शराब क
े मूल्य का : प्रभाव...................................... 70
सारांश.......................................................................................... 74
विनष्कर्ष%......................................................................................... 75
प्रारंभिभक और संतिक्षप्त रूपरेखा
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT
2. इन अपीलों क े माध्यम से, उत्तर प्रदेश राज्य और आबकारी विवभाग से संबंति इसक े अति कारिरयों क े सार्थी -सार्थी सिजला मसिजस्ट्रेट, शाहजहाँपुर ने अविनवाय% रूप से विवविव बें0 सं. 4493 वर्ष% 2006 क े मामले में 10.04.2017 विदनांविक आदेश पर सवाल उठाया है सिजसक े ह इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ[1] ने आग में नष्ट हुई शराब से हुए आबकारी राजस्व क्षति क े लिलए याति0काक ा% कम्पनी (व %मान मामले में प्रति वादी) क े विवरुद्ध उठायी गयी मांग को रद्द कर विदया। अपीलार्थी4 ने सिस.प्र. सं. 90936 वर्ष% 2019 में विदये गये 06.11.2019 विदनांविक आदेश पर भी सवाल उठाया है, सिजसक े ह उच्च न्यायालय ने अपीलक ा% संख्या 2 (आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश[2] ) को विनदrश विदया विक वह उक्त रिरट याति0का में विदये गये आदेश क े अनुसरण में रिरट 1ए स्टिsमनपश्चा ् "उच्च न्यायालय" क े रूप में भी संदर्भिभ । 2ए स्टिsमनपश्चा ् "आबकारी आयुक्त" क े रूप में भी संदर्भिभ । mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA याति0काक ा% द्वारा जमा की गयी राभिश की वापसी क े आवेदन पर शीघ्र अंति म विनण%य ले।
3. इस मामले में उठाए गए मुद्दों पर 00ा% करने से पहले, हम आगामी 00ा% क े संदभy को इंविग करने क े लिलए मामले की एक संतिक्षप्त रूपरेखा दे दें। 3.[1] इस मुकदमे की शुरूआ आगजनी की एक घटना से हुई जो 10.04.2003 को प्रति वादी क ं पनी की तिडस्टिस्टलरी क े एक गोदाम में घटी। इस आग में विवभिभन्न ब्रांडों क े इंतिडयन मेड फॉरेन लिलकर[3] क े 35,642 क े स नष्ट हो गए। इस आरंभिभक रिरपोट% क े प्राप्त होने क े बाद विक आग संभव ः विबजली क े शॉट% सर्निकट क े कारण लगी र्थीी, विवभाग ने प्रति वादी क ं पनी से शराब क े इस रह क े नष्ट होने क े कारण हुए आबकारी शुल्क क्षति को वसूलने का प्रस् ाव विदया। प्रति वादी ने कहा विक इसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई र्थीी और इसलिलए, उत्तर प्रदेश बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर विनयम, 1969[4] क े विनयम 7 (11) और उत्तर प्रदेश आबकारी विनयमावली5 क े विनयम 709 ह उत्पाद शुल्क क े कभिर्थी नुकसान की वसूली का कोई मामला नहीं बन ा है। 3.[2] हालांविक, आबकारी आयुक्त ने अपने 11.07.2006 विदनांविक आदेश द्वारा, प्रति वादी क े कर्थीन को खारिरज कर विदया और शराब नष्ट होने क े कारण हुए उत्पाद शुल्क क े नुकसान क े लिलए रु. 6,39,32,449.44 की माँग की। दनुसार, सिजला मसिजस्ट्रेट, शाहजहाँपुर ने प्रति वादी को एक सप्ताह क े भी र राभिश जमा करने क े लिलए कहा। 3संक्षेप में 'आईएमएफएल' 4 ए स्टिsमनपश्चा ् " विनयमावली 1969" क े रूप में संदर्भिभ 5ए स्टिsमनपश्चा ् 'आबकारी विनयमावली' क े रूप में संदर्भिभ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 3.[3] पूव क्त मांग और वसूली क े कदमों को 0ुनौ ी दे े हुए, प्रति वादी-क ं पनी ने एक रिरट याति0का6 दायर की, सिजसमें उच्च न्यायालय ने 25.07.2006 विदनांविक एक अं रिरम आदेश क े माध्यम से, प्रति वादी क ं पनी (रिरट याति0काक ा%) क े द्वारा 3 करोड़ रुपये की राभिश जमा करने की श % पर काय%वाही पर रोक लगा दी। इस अं रिरम आदेश क े लिखलाफ अपील करने क े लिलए विवशेर्ष अनुमति की मांग करने वाली याति0का को इस न्यायालय ने 14.08.2006 को खारिरज कर विदया। इसक े बाद, विदनांक 21.08.2006 को, प्रति वादी क ं पनी ने 3 करोड़ रुपये की उक्त राभिश सिजला मसिजस्ट्रेट, शाहजहाँपुर क े पास जमा कर विदया। 3.[4] प्रति वादी क ं पनी द्वारा दायर रिरट याति0का को उच्च न्यायालय द्वारा 10.04.2017 विदनांविक अपने आदेश द्वारा अनुमति दी गई, अविनवाय% रूप से इन विनष्कर्षy क े सार्थी विक विनयम 1969 का विनयम 7 (11) (ए) इस मामले में लागू नहीं हो ा क्योंविक आईएमएफएल की बॉटलिंलग और भंडारण क े सं0ालन में कोई बबा%दी नहीं हुई र्थीी; यह विक आबकारी विनयमावली का विनयम 709 लागू हो ा सिजसक े लिलए लापरवाही दशा%या जाना र्थीा; यह विक आबकारी आयुक्त द्वारा पारिर आदेश याति0काक ा% की ओर से लापरवाही क े विकसी ठोस सबू क े विबना अनुमानों पर आ ारिर र्थीा; और यह विक ‘घटना दैवीय क ृ त्य क े अलावा क ु छ नहीं ‘र्थीी। उच्च न्यायालय ने दनुसार आबकारी राजस्व क े कभिर्थी नुकसान की मांग और वसूली क े आक्षेविप आदेश को अपास् कर विदया। त्पश्चा, रिरट याति0का में अं रिरम आदेश क े अनुसार जमा की गई राभिश को वापस करने में विवभाग क े विवफल रहने क े कारण, प्रति वादी क ं पनी ने उच्च न्यायालय क े समक्ष एक आवेदन विदया, सिजस पर 06.11.2019 विदनांविक आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने आबकारी आयुक्त को 0ार सप्ताह क े भी र रिरफ ं ड क े आवेदन पर विनण%य लेने का विनदrश विदया। 6 प्रकीण% बें0 सं. 4493 2006 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 3.[5] जैसा विक देखा गया है, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 10.04.2017 और 06.11.2019 विदनांविक पूव क्त आदेशों पर इन अपीलों में सवाल उठाए गए हैं। अपीलार्थी4 का कहना है विक उच्च न्यायालय का यह विनष्कर्ष% उति0 नहीं है विक विव0ारा ीन घटना दैवीय क ृ त्य र्थीा न विक प्रति वादी की ओर से लापरवाही का। अपीलार्थी4 ने यह कहने क े लिलए विनयम 1969 क े विनयम 7 (11) (ए) और आबकारी विनयमावली क े विनयम 708 और 709 का अवलंब लिलया है विक प्रति वादी क ं पनी आग में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक पर देय उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए विबल्क ु ल उत्तरदायी है। बीमा कवरेज क े प्रभाव से संबंति एक सहायक पहलू, क े वल शराब क े मूल्य का, और प्रति वादी क ं पनी द्वारा बीमा दावा प्राप्त करना भी उठाया गया है। इसक े विवपरी, यह कहा गया है विक व %मान मामले में उत्पाद शुल्क क े दावे को लागू नहीं विकया जा सक ा है, क्योंविक यह विवति द्वारा अति क ृ नहीं है और यह विक प्रति वादी आग में नष्ट हुए आईएमएफएल पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी नहीं है, खासकर जब इसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं र्थीी।
4. पूव%गामी रूपरेखा से संक े विमल ा है विक इस मामले में क ें द्र बिंबदु यह है विक क्या अपीलार्थी4 आग में नष्ट शराब पर आबकारी शुल्क लगाने का हकदार हैं, और दनुसार, प्रति वादी भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी है? जैसा विक इस क ें द्र बिंबदु क े संबं में, ीन प्रमुख प्रश्नों को विन ा%रण की आवsयक ा होगी, जैसा विक देखा गया। प्रासंविगक थ्यात्मक पहलू और पृष्ठभूविमः आग की घटना और नष्ट हुई शराब पर आबकारी शुल्क की मांग
5. इसमें शाविमल प्रश्नों क े संबं में, हम प्रासंविगक थ्यात्मक और पृष्ठभूविम पहलुओं पर संक्षेप में ध्यान दे सक े हैं, विवशेर्ष रूप से प्रति वादी क ं पनी क े कामकाज से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रासंविगक और प्रश्नग आसवनी और गोदाम की व्यवस्र्थीा क े सार्थी-सार्थी आग की घटना और उत्पाद शुल्क की मांग, सिजसक े कारण व %मान मुकदमा विकया गया है। आग की घटना से पहले
6. प्रति वादी क ं पनी आईएमएफएल क े विवभिभन्न ब्रांडों क े आसवन, बॉटलिंलग और वेंडिंडग क े व्यवसाय में लगी है। इन गति विवति यों क े उद्देsय से, प्रति वादी को फॉम% पीडी-2 में तिडस्टिस्टलरी यूविनट रोजा, शाहजहाँपुर में पीने योग्य शराब क े आसवन और विनमा%ण क े लिलए एक तिडस्टिस्टलरी स्र्थीाविप करने और 0लाने क े लिलए लाइसेंस विदया गया र्थीा और विनयम 1969 क े ह फॉम% एफएल -3 और एफएल-3 ए में आईएमएफएल क े र्थीोक विवक्रय क े लिलए लाइसेंस भी विदया गया र्थीा। प्रति वादी क ं पनी वर्ष% 1994 से लाइसेंस प्राप्त परिरसर में काम कर रही र्थीी।
7. हमें आसवन, बॉटलिंलग और भंडारण की प्रविक्रयाओं की विवभिभन्न विवशेर्ष ाओं क े बारे में विवस् ार से ब ाने की आवsयक ा नहीं है, लेविकन, रिरकॉड% में पक्षकारों द्वारा विव0ारा ीन परिरसर में विवद्यु प्रति ष्ठानों और अविŽशमन उपायों से संबंति लाए गये क ु छ थ्यों को उपयोगी रूप से देखा जा सक ा है। 7.[1] विदनांक 19.09.2002 को, सहायक विवद्यु विनरीक्षक, उत्तर प्रदेश सरकार, शाहजहाँपुर क्षेत्र, शाहजहाँपुर, ने प्रति वादी क ं पनी क े उक्त परिरसर का आवति क विनरीक्षण करने क े पश्चा, विवद्यु प्रति ष्ठानों से संबंति विनम्नलिललिख विटप्पणी की:- "(क) भार ीय विवद्यु विनयम, 1956 क े प्रासंविगक विनयमों को यहां विकए गए पृष्ठांकन क े सिसवाय अनुपालन विकया जा रहा र्थीा। (ख) बाद क े पृष्ठ में उसि•लिख विववरण भार ीय विवद्यु विनयम, 1956 क े अनुसार नहीं हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इसलिलए, सुरक्षा क े विह में, आपसे अनुरो है विक आपको विकसी भी अति क ृ इलेक्ट्रीभिशयन को लगाकर कमी को सु ारना 0ाविहए और भार ीय विवद्यु विनयम, 1956 क े अनुरूप अनुपालन क े बाद एक महीने क े भी र रिरपोट% भेजनी 0ाविहए। xxx xxx xxx विनयम 35: यह पाया गया है विक ‘0े ावनी’ क ु छ प्रमुख स्र्थीानों पर नहीं लगी है। उसे लगाया/स्र्थीाविप विकया जाना 0ाविहए। विनयम 61 (2): टबा%इन क े विव रण बोड% पैनल क े एक बिंबदु पर, अर्थी% वायरिंरग एक प ले ार से की गई है। इसलिलए इसे हटा कर स्टिस्ट्रप अर्थिंर्थीग की जानी 0ाविहए।” (रेखांकन विकया गया) पूव क्त क े जवाब में, प्रति वादी क ं पनी ने अपने 23.09.2002 विदनांविक पत्र में कहा विक रिरपोट% में ब ाया गया काम पूरा हो गया र्थीा। 7.[2] उपरोक्त क े अलावा, ऐसा प्र ी हो ा है विक तिडस्टिस्टलरी में उत्पादन संयंत्र में क ु छ संशो न/उन्नयन काय% विकया गया र्थीा और उस संबं में, आबकारी विनरीक्षक, उत्पादन अनुभाग, रोजा तिडस्टिस्टलरी, शाहजहाँपुर ने अपने 26.12.2002 विदनांविक पत्र में प्रति वादी को सलाह दी र्थीी विक विवद्यु और गैस वेल्डिंल्डग काय% पूरी सुरक्षा क े सार्थी अविŽ सुरक्षा क े मानक रीक े और आवsयक अविŽशमन उपकरण सुविनतिश्च कर े हुए साव ानीपूव%क विनष्पाविद विकया जाए। उक्त आबकारी विनरीक्षक ने प्रति वादी को आगाह विकया विक "यविद आपकी लापरवाही क े कारण ऐसा हो ा है ो आप राजस्व/अन्य नुकसान क े लिलए सिजम्मेदार होंगे।" 7.[3] विदनांक 01.03.2003 को, फायर विब्रगेड अति कारी, शाहजहाँपुर क े काया%लय ने विव0ारा ीन परिरसर का विनरीक्षण करने क े बाद 06.02.2003 से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 30.09.2003 क े बी0 की अवति क े लिलए अविŽशमन विवभाग का अनापलित्त प्रमाण पत्र जारी विकया। इस विनरीक्षण में, फायर विब्रगेड अति कारी ने इस थ्य पर ध्यान विदया विक विवभिभन्न प्रकार क े अविŽशमन उपकरण और अन्य अविŽशमन उपकरण सही स्र्थीान पर र्थीे और काम करने की स्टिस्र्थीति में र्थीे, सिजन्हें प्रति वादी क ं पनी क े मुख्य अभिभयं ा द्वारा विफर से भरा गया र्थीा। हालांविक, उपकरणों क े रिरविफलिंलग और परीक्षण क े संबं में एक विनदrश विदया गया र्थीा और विनम्नलिललिख शब्दों में बेह र अविŽशमन व्यवस्र्थीा क े लिलए फोम इंस्टॉलेशन का भी सुझाव विदया गया र्थीाः- आपको विनदrभिश विकया जा ा है विक भविवष्य में फायर फाइबिंटग इंस्ट्रूमेंट्स (फायर एक्सबिंटगुइशर) को रिरविफलिंलग से पहले फायर स्टेशन शाहजहाँपुर में परीक्षण विकया जाना 0ाविहए।यह भी सुझाव विदया जा ा है विक, अविŽशमन व्यवस्र्थीा क े बेह र प्रबं न क े लिलए, तिडस्टिस्टलेशन प्लांट में फोम इंस्टॉलेशन विकया जाना 0ाविहए।इस सुझाव क े सार्थी, अविŽशमन विवभाग का अनापलित्त प्रमाण पत्र 06.02.2003 से 30.09.2003 क े बी0 की अवति क े लिलए विदया जा ा है, क्योंविक उक्त फम% ने 06.02.2003 को अविŽशमन विवभाग को परीक्षण शुल्क जमा विकया है। " आग की घटना और प्रासंविगक रिरपोट%
8. विव0ारा ीन परिरसर में विवद्यु प्रति ष्ठानों और अविŽशमन उपायों क े संबं में रिरकॉड% की स्टिस्र्थीति पूव क्त र्थीी। हालांविक, 10.04.2003 को, प्रति वादी क ं पनी क े एक गोदाम में आग लगने की घटना हुई,सिजसक े परिरणामस्वरूप विनर्निम आईएमएफएल क े 35,642 क े स नष्ट हो गए। 8.[1] प्रति वादी क ं पनी का क % यह रहा है विक विव0ारा ीन गोदाम को 10.04.2003 को दोपहर 12:00 बजे भोजनावकाश क े लिलए तिडस्टिस्टलरी क े प्रभारी आबकारी विनरीक्षक और क ं पनी क े प्रति विनति की संयुक्त लॉक और 0ाबी से बंद कर विदया गया र्थीा और उस समय, क ु छ भी आपलित्तजनक नहीं देखा गया र्थीा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और स्टॉक सुरतिक्ष स्टिस्र्थीति में र्थीे। हालांविक, लगभग 12:55 बजे, गोदाम से ुआं विनकल ा देखा गया। त्पश्चा, तिडस्टिस्टलरी क े प्रभारी आबकारी विनरीक्षक को ुरं सूति0 विकया गया और संयुक्त ाले खोले गए और यह देखा गया विक आईएमएफएल क े स्टॉक में आग लग गई र्थीी। इस आग की जानकारी पुलिलस विवभाग और अविŽशमन विवभाग और अन्य आबकारी अति कारिरयों को भी दी गई र्थीी। प्रकर्थीन और रिरकॉड% पर मौजूद सामग्री क े अनुसार, ऐसा प्र ी हो ा है विक अविŽशमन कम[4] 11.04.2003 को सुबह 5:00 बजे क आग पर काबू पा सक े ।
9. यह माना जा ा है विक प्रश्नग घटना क े बारे में जानकारी विमलने पर, उप आबकारी आयुक्त, बरेली, विदनांक 10.04.2003 को लगभग 06:30 बजे तिडस्टिस्टलरी पहुं0े और विवभाग क े अन्य अति कारिरयों और प्रति वादी क ं पनी क े प्रबं क क े सार्थी घटना स्र्थील का विनरीक्षण विकया। घटना स्र्थील विनरीक्षण कर ैयार की गई अपनी प्रारंभिभक रिरपोट% में, उक्त तिडप्टी एक्साइज कविमश्नर ने आग को विनयंवित्र करने और आग बुझाने क े प्रयासों पर ध्यान विदया, सार्थी ही शराब की पया%प्त मात्रा में हुई क्षति पर भी ध्यान विदया और यह भी संक े विदया विक इस आग क े संभाविव कारणों क े बारे में पूछ ाछ करने पर, उन्हें सूति0 विकया गया विक विबजली की आपूर्ति में शॉट% सर्निकट क े कारण ही ऐसा। अपीलार्थी4 क े अनुसार, यहां क विक संबंति र्थीाना प्रभारी ने अपनी जां0 रिरपोट% में विदनांक 11.04.2003 को यह राय व्यक्त विकया विक आग लगने का कारण विबजली का शॉट% सर्निकट र्थीा।
10. विदनांक 13.04.2003 को, उत्तर प्रदेश अविŽशमन सेवा क े अविŽशमन अति कारी ने भी घटना की रिरपोट% ैयार की और आग को विनयंवित्र विकये जाने क े प्रयासों का का सिजक्र विकया। हालांविक, उन्होंने संक े विदया विक आग का कारण अज्ञा र्थीा। इस रिरपोट% का प्रासंविगक विहस्सा, पुलिलस उपा ीक्षक द्वारा काउंटर हस् ाक्षरिर, जैसा विक प्रति वादी द्वारा रिरकॉड% पर रखा गया है, विनम्नानुसार हैःmn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "आग की सू0ना विमलने पर, अविŽशमन सेवा इकाई घटना स्र्थील पर पहुं0ी। पहुं0ने पर, यह देखा गया विक इंतिडयन मेड फॉरेन लिलकर क े गोदाम का अगला विहस्सा बुरी रह से आग में जल रहा र्थीा, जो रोसा कोठी, मैसस% मैकडॉवेल क ं पनी लिलविमटेड, र्थीाना-आर. _ _, सिजला-शाहजहाँपुर में स्टिस्र्थी है, और आग एक भयानक स्टिस्र्थीति में र्थीी, सिजसे उपलब् उपकरण की मदद से मैसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड क े कम%0ारिरयों द्वारा बुझाया जा रहा र्थीा, लेविकन आग उनक े लिलए विनयंत्रण से बाहर र्थीी। आग की भयानक स्टिस्र्थीति को देखने क े बाद, ुरं एक मोटर फायर इंजन में दो लाइनें लगाकर आग को विनयंवित्र करने का काम शुरू विकया, उसक े ुरं बाद दूसरा मोटर फायर इंजन कसबा- ति लहर से लाया गया। आग को बुझाने में अन्य इकाई ओसवाल रासायविनक उव%रक और ओसीएफ ने भी मदद की, और पया%प्त परिरश्रम क े बाद, डल्डिंस्टग की प्रविक्रया शुरू की गई और जीवन को जोलिखम में डालने क े बाद और कई घंटों क े बाद, आग को विनयंवित्र /बुझाया गया। आग की जां0/विनरीक्षण पर, यह पाया गया विक आग क े कारण, गो-डाउन में रखी शराब नष्ट हो गयी र्थीी। इसलिलए, इस आग में भवन और शराब जोड़ने क े बाद, क ु ल विमलाकर, स्टेशन अति कारी क े अनुसार, लगभग 2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 1 करोड़ मूल्य की संपलित्त ब0ा ली गयी र्थीी। आग लगने का कारण अज्ञा र्थीा। इसलिलए, पूरा काम पूरा करने क े बाद, फायर सर्निवस यूविनट यह विनदrश देने क े बाद फायर स्टेशन में लौट आई विक अगर विफर से आग विदख ी है, ो फायर स्टेशन को ुरं सूति0 विकया जाना 0ाविहए। हम वापस फायर स्टेशन पर आ गए। " (रेखांविक विकया गया)
11. एक अन्य रिरपोट% विदनांक 02.08.2003 को सहायक आबकारी आयुक्त, रोजा तिडस्टिस्टलरी, शाहजहाँपुर द्वारा आबकारी आयुक्त को सौंपी गई, सिजसमें ब0ा ली गयी शराब का विहसाब सार्थी ही आग में नष्ट हुए स्टॉक और आग क े कारण पर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उनकी विटप्पभिणयों का विववरण विदया गया। इस रिरपोट% का प्रासंविगक विहस्सा विनम्नानुसार उपयोगी रूप से विनकाला जा सक ा हैः "(0) आग का कारणः आग की घटना क े बाद मेरे द्वारा तिडस्टलरी में एक विवस् ृ जां0 और विनरीक्षण विकया गया। पैरा (डी) में उसि•लिख सभी अति कारिरयों ने भी पूछ ाछ की और मामले की विवस् ार से जां0 की। सभी जां0 अति कारी भी इस विनष्कर्ष% पर पहुं0े हैं विक विनर्निववाद रूप से आग लगने का कारण अज्ञा र्थीा। मेरी जां0 और गणना काय% क े दौरान भी, मेरे ज्ञान में कोई थ्य या सबू नहीं आया, जो इंविग कर ा हो विक तिडस्टिस्टलर की ओर से या तिडस्टिस्टलरी में प्रति विनयुक्त आबकारी कम%0ारिरयों की ओर से कोई लापरवाही र्थीी। यह भी प्र ी नहीं हो ा है विक उक्त घटना जानबूझकर उनमें से विकसी ने की र्थीी। वास् व में, तिडस्टिस्टलर और एक्साइज स्टाफ ने आग की घटना क े दौरान और बाद में बड़ी दक्ष ा और परिरश्रम क े सार्थी संयुक्त रूप से काम विकया है। सिजससे-----स्टॉक को क्षति ग्रस् स्टॉक से ब0ाया जा सका र्थीा। इस थ्य की पुविष्ट की गई, संयुक्त आबकारी आयुक्त की जां0 विदनांक 30.04.2003, उप आबकारी आयुक्त, बरेली प्रभारी, बरेली, की जां0 विदनांक 10.04.03, फायर विब्रगेड अति कारी, की जां0 रिरपोट% विदनांक 13.04.03 और र्थीाना प्रभारी की अंति म रिरपोट% विदनांक 11.04.03,सिजनकी प्रति याँ संलŽ हैं, से भी हो ी है। र्थीाना प्रभारी की रिरपोट% में घटना का कारण संभव ः विबजली में शॉट% सर्निकट क े कारण है।मैंने मलबे में जली हुई क े बल भी देखी र्थीी, लेविकन मेरी राय में क ु छ भी पुविष्ट नहीं की जा सक ी है। यह ऐसी घटना हो सक ी है, सिजसका कारण अज्ञा है। तिडस्टिस्टलर स् र पर, विदसंबर क े महीने में, अविŽ सुरक्षा मानक क े अनुसार उपकरण स्र्थीाविप विकए गए र्थीे और तिडस्टिस्टलरी फायर विब्रगेड अति कारी, शाहजहाँपुर द्वारा पत्र संख्या 39/विदनांक 26.12.02 क े संबं में सुरक्षा आदेश पत्र संख्या मेमो/एफएस/विदनांक 1.03.03 विदए गए र्थीे,और अच्छी स्टिस्र्थीति में उपकरण क े होने संबं ी प्रमाण पत्र प्राप्त विकया। तिडस्टलरी ने यूपी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवद्यु विवभाग द्वारा विवद्यु क ै बल स्र्थीापना क े संबं में प्रमाण पत्र भी प्रस् ु विकया। मेरे द्वारा 14.04.03 और 21.04.03 विदनांविक पत्र भेजे जाने क े अनुरूप, आग की घटना क े पूव% उपरोक्त विबन्दुओं क े मद्देनजर, आग की घटना क े दौरान और उसक े बाद, क्षति ग्रस् स्टॉक की गणना और आग की घटना क े संभाविव कारण पर 00ा% की गई।' (रेखांविक विकया गया) आग में नष्ट हुई शराब पर उत्पाद शुल्क की मांग
12. इस थ्य क े मद्देनजर विक संग्रही शराब की पया%प्त मात्रा आग में नष्ट हो गई और इसका परिरणाम, अन्य बा ों क े सार्थी, उत्पाद शुल्क राजस्व क े नुकसान क े रूप में हुआ, आबकारी विवभाग ने प्रति वादी क ं पनी से इस नुकसान की वसूली का प्रस् ाव विदया। 12.[1] सव%प्रर्थीम, विदनांक 24.09.2003 को, सहायक आबकारी आयुक्त, रोजा तिडस्टिस्टलरी/शाहजहाँपुर द्वारा एक कारण ब ाओ नोविटस नंबर 463/CAA/रोजा तिडस्टिस्टलरी/शाहजहाँपुर प्रति वादी क ं पनी को जारी विकया गया र्थीा, सिजसमें विनयम 1969 क े विनयम 7 (11) क े मद्देनजर उत्पाद शुल्क की वसूली क े संबं में स्पष्टीकरण मांगा गया र्थीा, क्योंविक प्रति वादी कभिर्थी रूप से शराब क े स्टॉक को सुरतिक्ष रखने की अपनी सिजम्मेदारी में विवफल रहा र्थीा। 01. 10. 2003 विदनांविक अपने प्रति विक्रया पत्र में, प्रति वादी क ं पनी ने कहा विक उक्त आग की घटना क े संबं में उसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई र्थीी। विनयम 1969 का विनयम 7 (11) लागू नहीं हो ा और आबकारी विनयमावली का विनयम 709 क े वल लापरवाही क े मामले में लागू होगा, जो साविब नहीं हुआ र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 12.[2] आबकारी आयुक्त ने हालांविक, प्रति वादी क ं पनी से आबकारी शुल्क वसूलने का प्रस् ाव विदया और 27.11.2003 को सरकार क े प्रमुख सति0व को विनदrश प्राप्त करने क े लिलए एक पत्र भेजा। उक्त प्र ान सति0व ने 17.02.2004 विदनांविक अपने प्रति विक्रया पत्र में कहा विक आग में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक पर आबकारी शुल्क लगाने का प्राव ान आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 में विकया गया है और इसक े आ ार पर आबकारी आयुक्त आगे बढ़ने क े लिलए पया%प्त सक्षम र्थीा।प्रमुख सति0व ने अन्य बा ों क े सार्थी यह कहा विक- क ृ पया मेसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड, रोजा, शाहजहाँपुर में 10.04.2003 की आग की घटना में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक पर आबकारी शुल्क लगाने क े संबं में सिजला मसिजस्ट्रेट शाहजहाँपुर को विदए जाने वाले विनदrशों क े संबं में 27 नवंबर, 2003 क े अपने पत्र संख्या जी-43/9-अल्कोहल/रोजा-आग की घटना का संदभ% लें।
1. इस संबं में मुझे आपसे यह कहने की सलाह दी गई है विक 10.04.2003 को मैकडावेल एंड क ं पनी लिलविमटेड, रोजा शाहजहाँपुर में उपरोक्त आग की घटना में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक में शाविमल आबकारी शुल्क लगाने क े संबं में प्राव ान आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 में विदया गया है, सिजसक े आ ार पर काय% करने क े लिलए आप पया%प्त सक्षम हैं।
2. उपरोक्त आग की घटना में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक पर आबकारी शुल्क लगाने क े बारे में आपका प्रस् ाव ठीक है। क ृ पया जल्द से जल्द आवsयक कदम उठाएं और 15 विदनों क े भी र सरकार को सूति0 करें।" 12.[3] प्र ान सति0व से इस आशय का पत्र प्राप्त होने पर,आबकारी आयुक्त ने विदनांक 23.02.2004 को सिजला मसिजस्ट्रेट को विनयम 1969 क े विनयम 7 (11) क े ह देय आबकारी शुल्क विन ा%रिर करने क े लिलए कहा। प्राति कारिरयों की ओर से इस रह क े कदमों पर ध्यान देने क े बाद, प्रति वादी क ं पनी ने अपने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 08.06.2004 विदनांविक आबकारी आयुक्त को संबोति पत्र में विवरो कर े हुए अनुरो विकया विक सक्षम प्राति कारी को पहले यह विन ा%रिर करना होगा विक क्या विबक्री क े लिलए शराब क े पहुं0ने से पहले ही आग क े कारण नष्ट हुई आईएमएफएल पर आबकारी शुल्क लगाया जा सक ा है या नहीं। यह भी कहा गया विक विनदrश क े वल आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 क े संदभ% में आगे बढ़ने क े लिलए विदए जा सक े हैं न विक विनयम 1969 क े विनयम 7 (11) क े अनुसार। आबकारी आयुक्त ने अपने 12.05.2005 विदनांविक पत्र में प्रति वादी क ं पनी से एक बिंबदु-वार जवाब मांगा और इस पत्र का उत्तर 16.05.2005 को विदया गया, सिजसमें प्रति वादी क ं पनी ने कहा विक आग की घटना मानव विनयंत्रण से परे कारणों से हुई र्थीी और वहाँ क ं पनी की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई। 12.[4] विफर भी, प्रति वादी क ं पनी ने अपने पत्र विदनांक 05.06.2005 में कहा विक उनक े पास अविŽशमन विवभाग द्वारा जारी एक प्रमाण पत्र र्थीा, जो 03.09.2003 क वै र्थीा, यह विक उपयुक्त अविŽ सुरक्षा उपकरण स्र्थीाविप विकए गए र्थीे; यह विक 19.09.2002 को विबजली सुरक्षा प्रमाण पत्र भी विदया गया र्थीा; यह विक एमसीबी स्र्थीाविप विकए गए र्थीे; यह विदखाने क े लिलए कोई सामग्री नहीं र्थीी विक क ं पनी की ओर से लापरवाही क े कारण घविट दुघ%टना र्थीी; और यह विक आबकारी शुल्क क े संबं में बीमा कराने की कोई अविनवाय% ा नहीं र्थीी। पूव क्त उत्तर आबकारी आयुक्त द्वारा प्र ान सति0व, आबकारी को उनक े पत्र विदनांक 29.06.2005 क े सार्थी भेज विदया गया र्थीा। त्पश्चा, राज्य सरकार ने 27.12.2005 क े अपने पत्र में कहा विक प्र0लिल दरों पर आबकारी शुल्क राजस्व क े विह में प्रति वादी क ं पनी पर लगाया जाना 0ाविहए।
13. सं0ार क े पूव क्त आदान -प्रदान का परिरणाम आबकारी आयुक्त क े 11.07.2006 विदनांविक आक्षेविप आदेश क े रूप में हुआ सिजसमें, आबकारी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA राजस्व की हाविन क े लिलए प्रति वादी क ं पनी से रू. 6,39,32,449.44 की राभिश वसूल करने की मांग की गई। आबकारी आयुक्त ने, अन्य बा ों क े सार्थी, विनरीक्षण रिरपोटy पर अवलंब लिलया और माना विक प्रति वादी शराब की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीा, लेविकन ऐसी सुरक्षा सुविनतिश्च करने में विवफल रहा। अच्छी गुणवत्ता क े फायर-प्रूफ इलेस्टिक्ट्रक उपकरण प्रदान नहीं करने की लापरवाही बर ी र्थीी और शराब का बीमा लिलया र्थीा, लेविकन उत्पाद शुल्क का नहीं। विववाद की जड़ यह 11.07.2006 विदनांविक आदेश विनम्नानुसार पुनः प्रस् ु विकया जा सक ा हैः आबकारी आयुक्त काया%लय, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद नंबर 7244/9-अल्कोहल/131/रोजा/आग की घटना इलाहाबाद विदनांक-11.07.2006 आदेश मैसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड, रोजा, सिजला शाहजहाँपुर एक पीडी-2 लाइसेंस प्राप्त तिडस्टिस्टलरी है। उपयु%क्त तिडस्टलरी को उत्तर प्रदेश बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर रूल्स, 1969 क े ह FL-3 और FL 3A लाइसेंस विदया गया है और अपने ब्रांड और हरबाट%सन ब्रांड की भार ीय विनर्निम विवदेशी शराब की बॉटलिंलग कर ा रहा है। विदनांक 10.04.2003 को, तिडस्टिस्टलरी क े एफएल-3 और एफएल 3 ए गोदाम में आग लगने की घटना क े कारण, विवभिभन्न ब्रांडों क े भार ीय विनर्निम विवदेशी शराब क े 35,642 (पैं ीस हजार छह सौ बयालीस) क े स नष्ट हो गए। जां0 क े दौरान, यह प ा 0ला है विक मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड ने सीलबंद गोदाम में रखे गए इंतिडयन मेड फॉरेन लिलकर का बीमा लिलया र्थीा।तिडस्टलरी को भी इसक े लिलए क्ल े म विमला है। एक कारण ब ाओ नोविटस सं. 463/CAA/रोजा तिडस्टिस्टलरी/शाहजहाँपुर विदनांक 24.09.2003 को सीलबंद गोदाम में रखी गई शराब क े जलने क े संबं में मैक्डॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड को विदया गया र्थीा। मेसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड द्वारा अपने 01.10.2003 विदनांविक स्पष्टीकरण में उपरोक्त कारण ब ाओ नोविटस क े जवाब में कहा गया है विक आग की घटना दैवी घटना है और इस पर उनका कोई विनयंत्रण नहीं है। विदनांक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 10.04.2003 को, उप आबकारी आयुक्त बरेली द्वारा विकए गए स्पॉट विनरीक्षण क े दौरान, प्रबं क कार्निमक श्री अनुराग वन ने कहा विक संभव ः विबजली की आपूर्ति में शॉट% सर्निकट क े कारण आग लगी र्थीी। स्टेशन अति कारी श्री राम 0ंद्र विमशन, सिजला शाहजहाँपुर ने अपनी जां0 रिरपोट% में विदनांक 11.04.2003 को कहा है विक आग लगने का कारण विबजली का शॉट% सर्निकट है। मेसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड का विनरीक्षण संयुक्त आबकारी आयुक्त (टास्क फोस%) और उप आबकारी आयुक्त (कानून) द्वारा विकया गया र्थीा। विनरीक्षण में पाया गया है विक गोदाम बहु पुराना है और इसकी मरम्म भी नहीं की गई है। यह भी उ•ेख करना आवsयक है विक विब्रविटश काल क े समय से तिडस्टिस्टलरी में मैसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड और तिडस्टिस्टलरी और सील गोदाम पुराने भवन में 0ल रहे हैं। गोदाम की छ एस्बेस्टस शीट से बनी र्थीी। गोदाम में पुरानी इलेस्टिक्ट्रक वायरिंरग क े कारण शॉट% सर्निकट हो सक ा है। इस संबं में सिजला अति कारी, शाहजहाँपुर ने अपने पत्र सं. 689/ओएसडी/क ैं प/2004 विदनांक 01.04.2004 क े द्वारा घटना पर माग%दश%न/विनदrश क े लिलए अनुरो विकया। आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश ने अपने पत्र सं. जी-43/9-शराब/रोजा आग की घटना विदनांक 17.11.2003 क े द्वारा इस घटना को सरकार को संदर्भिभ विकया सिजसमें सरकार ने पत्र सं. 3763 ई-2/13-03 विदनांक 17.02.2004 क े द्वारा विनदrश विदया विक शराब क े नष्ट हुए वग% पर उस समय प्र0लिल शराब क े वग% पर उत्पाद शुल्क लगाया जा सक ा है और यह भी विनदrश विदया गया विक आबकारी आयुक्त इस घटना में कार%वाई करने में सक्षम है। सरकार द्वारा विकए गए विनदrश क े परिरप्रेक्ष्य में, मामला यह है विक मैसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड, रोजा शाहजहाँपुर ने यूपी बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर रूल्स, 1969 क े ह एफएल-3 और एफएल 3 ए का लाइसेंस लिलया र्थीा। उपयु%क्त विनयमों क े विनयम 7 (11) (ए) क े अनुसार, लाइसेंस ारी 1% से अति क की बबा%दी पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी है। गोदाम में रखी गई शराब की सुरक्षा क े लिलए उपाय/साव ानी बर ना लाइसेंस ारक की सिजम्मेदारी र्थीी, लेविकन गोदाम में रखी गई शराब की उति0 सुरक्षा नहीं की गई। लाइसेंस ारी ने शराब, बो ल, लेबल आविद की कीम का बीमा लिलया र्थीा, लेविकन शराब पर लगाए गए आबकारी शुल्क का बीमा नहीं mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कराया गया र्थीा। इस रह, लाइसेंस ारी ने अपने शराब क े मूल्य को सुरतिक्ष कर लिलया है। लाइसेंस ारी को इस घटना में कोई नुकसान नहीं हुआ है और जो भी नुकसान हुआ है वह बीमा से वसूला विकया गया है। इसलिलए, शायद लाइसेंस ारी विबजली क े उपकरणों क े बारे में लापरवाह र्थीा। लाइसेंस ारी को लाइसेंस ले े समय विनयमों और श y क े बारे में प ा र्थीा विक उसे मात्रा क े 1% से अति क स्टॉक विकए गए शराब क े अपव्यय पर आबकारी शुल्क का भुग ान करना है। यह जानकारी होने क े बावजूद, लाइसेंस ारी ने अच्छी गुणवत्ता क े फायर प्रूफ इलेस्टिक्ट्रक उपकरणों की व्यवस्र्थीा नहीं की, सिजसक े कारण प्रश्नग घटना घटी। शराब क े स्टॉक की सुरक्षा में तिडस्टिस्टलर द्वारा की गई लापरवाही को दैवीय घटना नहीं माना जा सक ा है। लाइसेंस उसे यूपी बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर रूल्स, 1969 क े ह विदया गया है। उन विनयमों क े विनयम 7 (11) (ए) क े ह 1% से अति क अपव्यय पर आबकारी शुल्क लगाने का प्राव ान है। लाइसेंस ारी लाइसेंस की श y से इनकार नहीं कर सक ा है। माननीय उच्च म न्यायालय की संविव ान पीठ द्वारा हर शंकर एवं अन्य बनाम उप आबकारी और करा ान आयुक्त एवं अन्य (1997) 1 एससीसी 737 क े मामले में विदये गये विनण%य में यह स्पष्ट विकया गया है विक लाइसेंस ारी ने 1969 क े विव0ारा ीन विनयमों को ध्यान से पढ़ने क े बाद लाइसेंस लिलया है और अब वह लाइसेंस की श y से बाहर नहीं विनकल सक ा है। लाइसेंस ारी ने उत्तर प्रदेश बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर रूल्स 1969 को खुली आंखों से पढ़ने क े बाद लाइसेंस प्राप्त विकया है, इसलिलए वह विनयमों का पालन करने से छ ू ट नहीं पा सक ा है। इसका उ•ेख खोडे तिडस्टिस्टलरीज लिलविमटेड एवं अन्य बनाम कना%टक राज्य एवं अन्य (1975) एससीसी 576 क े मामले में विदये विनण%य क े बिंबदु (ज) "राज्य अपने राजस्व को अति क म करने की दृविष्ट से व्यापार या व्यवसाय क े लिलए लाइसेंस बे0ने क े विकसी भी रीक े को अपना सक ा है जब क विक अपनाई गई विवति भेदभावपूण% न हो।" यूपी बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर रूल्स, 1969 क े विनयम 7 (11) (ए) से स्पष्ट है विक ये विनयम राजस्व को सुरतिक्ष करने क े लिलए बनाए गये हैं। राज्य को शराब बनाने, रखने, परिरवहन, आया -विनया% पर विवशेर्षाति कार है। राजस्व में वृतिद्ध क े लिलए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA साव%जविनक विह में राज्य शराब क े व्यवसाय की कड़ाई से विनगरानी कर ा है ाविक न ो इसका दुरुपयोग विकया जा सक े और न ही इससे राजस्व का नुकसान हो सक े । यूपी बॉटलिंलग ऑफ फॉरेन लिलकर रूल्स, 1969 क े विनयम 7 (11) (ए) क े अनुसार उपयु%क्त क े संबं में, शराब क े विवभिभन्न ब्रांडों पर वर्ष% 2003-2004 क े लिलए घटना क े समय प्र0लिल दर क े अनुसार रुपये 6,39,32,449.44/- (रुपये छह करोड़ बत्तीस लाख बत्तीस हजार 0ार सौ 0ालीस और क े वल 0ालीस पैसे) का उत्पाद शुल्क मेसस% मैकडॉवेल एंड क ं पनी लिलविमटेड, रोजा, सिजला शाहजहाँपुर पर देय है। गेजेंद्र पाल आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश। " (रेखांविक विकया गया) 13.[1] आबकारी आयुक्त द्वारा पारिर आदेश क े अनुसार सिजला मसिजस्ट्रेट,शाहजहाँपुर ने वसूली की काय%वाही शुरू की और प्रति वादी क ं पनी को एक सप्ताह क े भी र रू. 6,39,32,449.44 रुपये की पूव क्त राभिश जमा करने का विनदrश विदया। उच्च न्यायालय में रिरट याति0का और मामले में अं रिरम आदेश
14. आबकारी आयुक्त द्वारा की गयी मांग और सिजला मसिजस्ट्रेट द्वारा अपनाई गई वसूली की काय%वाही से पीविड़ होकर, प्रति वादी क ं पनी ने रिरट याति0का विवविव बें0 नंबर 4493 वर्ष% 2006, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ, लखनऊ में विनम्नलिललिख प्रार्थी%नाओं क े सार्थी दालिखल की- "i. उत्प्रेर्षण प्रक ृ ति का रिरट आदेश या विनदrश जारी विकया जाए सिजसक े द्वारा रिरकॉड% की माँग की जाए और 11 जुलाई, 2006 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विदनांविक आबकारी आयुक्त,उ.प्र. क े आक्षेविप आदेश और सिजला मसिजस्ट्रेट शाहजहाँपुर, उ.प्र. क े 17 जुलाई, 2006 विदनांविक पत्र को रद्द विकया जाए। ii. परमादेश की प्रक ृ ति का रिरट आदेश या विनदrश प्रति वादी गण को जारी विकया जाए विक 10 अप्रैल,2003 को शाहजहाँपुर में आग दुघ%टना क े कारण नष्ट हुए भार ीय विनर्निम विवदेशी शराब की मात्रा क े संबं में कभिर्थी मांग क े लिलए याति0काक ा% से विकसी भी राभिश की वसूली न की जाए। iii. परमादेश की प्रक ृ ति का रिरट आदेश या विनदrश जारी विकया जाए, भार ीय विनर्निम विवदेशी शराब विनयम, 1969 क े विनयम 7 (11) को शून्य घोविर्ष कर े हुए और उ.प्र. आबकारी अति विनयम क े विवरूद्ध घोविर्ष कर े हुए। iv उत्प्रेर्षण की प्रक ृ ति का रिरट/आदेश या विनदrश जारी विकया जाए रिरकॉड% मांगने क े लिलए और राज्य सरकार क े उस आदेश को रद्द कर े हुए जो प्र ान सति0व (आबकारी) क े पत्र विदनांविक 17.02.2004 द्वारा क े संसूति0 विकया गया र्थीा।
14.1. उक्त रिरट याति0का में, उच्च न्यायालय द्वारा 25.07.2006 को एक अं रिरम आदेश पारिर विकया गया र्थीा, सिजसमें प्रति वादी क ं पनी द्वारा आबकारी आयुक्त क े पास 3 करोड़ रूपये जमा करने की श % पर वसूली की काय%वाही स्र्थीविग करने का आदेश विदया गया र्थीा। प्रति वादी क ं पनी ने विव.अ.या. (सी) सं. 12902 वर्ष% 2006 क े माध्यम से 25.07.2006 विदनांविक इस अं रिरम आदेश को 0ुनौ ी देने का प्रयास विकया, लेविकन, इस न्यायालय ने अं रिरम आदेश में हस् क्षेप करने से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA इनकार कर विदया और विवशेर्ष अनुमति याति0का विदनांक 14.08.2006 को खारिरज कर दी गई। त्पश्चा, प्रति वादी क ं पनी ने उक्त 3 करोड़ की राभिश सिजला मसिजस्ट्रेट, शाहजहाँपुर क े पास विदनांक 21.08.2006 को जमा की। अपीलार्थी4 ने विदनांक 08.09.2006 को रिरट याति0का में अपना जवाबी हलफनामा दायर विकया और रिरट याति0का को अं ः उच्च न्यायालय ने 10.04.2017 क े अपने फ ै सले द्वारा अभिभविन ा%रिर विकया गया। विदनांक 10.04.2017 और 06.11.2019 क े आक्षेविप आदेश: उच्च न्यायालय ने रिरट याति0का को अनुमति दी और परिरणामी आदेश पारिर विकए
15. उच्च न्यायालय ने 10.04.2017 विदनांविक अपने आक्षेविप आदेश में, विनयम 1969 और आबकारी विनयमावली क े सार्थी-सार्थी पूव क्त पृष्ठभूविम पहलुओं पर ध्यान देने क े बाद, इस थ्य का उ•ेख विकया विक यद्यविप रिरट याति0का में विनयम 1969 क े विनयम 7 (11) की वै ा पर सवाल उठाया गया र्थीा, लेविकन इस मामले पर बहस कर े हुए, क ं पनी क े विवद्वान अति वक्ता ने अपनी 0ुनौ ी को अविनवाय% रूप से इस आ ार क सीविम कर विदया विक क ं पनी को क े वल भी दोर्षी ठहराया जा सक ा र्थीा जब उत्पाद शुल्क का नुकसान होने में उसकी ओर से कोई लापरवाही हुई हो ी, लेविकन, व %मान मामले में, क ं पनी की ओर से कोई लापरवाही नहीं बर ी गयी और यह दैवीय घटना र्थीी और इसलिलए, क ं पनी पर कोई दातियत्व अति रोविप नहीं विकया जा सक ा। उच्च न्यायालय ने कहा विक विनयम 1969 क े विनयम 7 (11) (क) अपव्यय से संबंति होने क े कारण, आईएमएफएल की बॉटलिंलग और भंडारण क े सं0ालन में प्रयोज्य नहीं है, लेविकन आग क े कारण स्टिस्परिरट का नुकसान हुआ र्थीा। उच्च न्यायालय ने कहा उस संबं में आबकारी विनयमावली का विनयम 709 लागू होगा,यविद क ं पनी की विकसी भी लापरवाही क े कारण उत्पाद शुल्क में नुकसान विदखाया जा ा है, यह नुकसान की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भरपाई करने क े लिलए लिलए उत्तरदायी होगी। उच्च न्यायालय ने, अन्य बा ों क े सार्थी, विनम्नानुसार ारिर विकया - “26. विनयमावली, 1969 का विनयम 7 (11) (क) में अपव्यय की बा की गई है जो आईएमएफएल की बॉटलिंलग और भंडारण क े सं0ालन में हुई हो, लेविकन यहां ऐसा मामला नहीं है जहां आईएमएफएल की बॉटलिंलग और भंडारण क े सं0ालन में कोई बबा%दी हो लेविकन आग क े कारण स्टिस्परिरट की कु ल हाविन हुई है और इससे उत्पाद शुल्क को नुकसान हुआ है।
27. हमारे विव0ार में, यह उ.प्र. आबकारी विनयमावली का विनयम, 709 है जो लागू हो ा है और यविद याति0काक ा% को विकसी भी लापरवाही क े कारण उत्पाद शुल्क में नुकसान विदखाया जा सक ा है, ो उक्त नुकसान की भरपाई करने क े लिलए उत्तरदायी है। इसलिलए, पूव% श %, याति0काक ा% की ओर से 'लापरवाही' का थ्य है। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है विक विनयमावली, 1969 क े विनयम 7 (11) (क) का व %मान मामले में कोई उपयोग नहीं है और यह उ.प्र. आबकारी विनयमावली का विनयम 709 है जो आक ृ ष्ट हो ा है। "
16. इसक े बाद, उच्च न्यायालय ने 11.07.2006 क े आक्षेविप आदेश का विवश्लेर्षण विकया और कहा विक उसमें विदए गए विनष्कर्षy में सार की कमी र्थीी और क े वल अनुमान और सुना-सुनाया र्थीा। उच्च न्यायालय ने पाया विक क ं पनी की ओर से कोई स्पष्ट लापरवाही नहीं र्थीी और उसने यह विनष्कर्ष% भी दज% विकया विक यह घटना दैवीय क ृ त्य क े अलावा और क ु छ नहीं र्थीी। उच्च न्यायालय ने आगे कहा विक लापरवाही राजकोर्षीय दातियत्व क े लिलए पूव%व 4 श % है, ऐसी कोई भी देय ा ब क य नहीं की जा सक ी जब क विक विकसी सामग्री क े आ ार पर लापरवाही नहीं पाई जा ी और यह विदखाने क े लिलए विक विकसी भी सामग्री क े अभाव में विक क ं पनी की ओर से विकसी भी लापरवाही क े कारण नुकसान हुआ र्थीा, विव0ारा ीन मांग पूरी रह से अवै और अस्टिस्र्थीर र्थीी। उच्च न्यायालय ने विनम्नलिललिख विटप्पभिणयों और विनष्कर्षy क े सार्थी प्रश्नग माँग को अपास् विकया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “29. याति0काक ा% को लापरवाही का दोर्षी ठहराने क े लिलए, ईसीयूपी ने 11.7.2006 विदनांविक आक्षेविप आदेश द्वारा यह स्वीकार कर े हुए विक पुलिलस अति कारिरयों क े सार्थी -सार्थी संयुक्त विनरीक्षण रिरपोट% में, विबजली की आपूर्ति से 'शॉट% सर्निकट ' को संभाविव कारण ब ाया गया है, लेविकन ऐसा कह े हुए, यह आगे कहा गया है विक (i) गोदाम बहु पुराना है और ठीक से मरम्म नहीं हुई है (ii) तिडस्टलरी विब्रविटश काल की है, तिडस्टलरी और गोदाम दोनों पुराने भवनों में 0ल रहे हैं (iii) गोदाम की छ एविबस्टोस शीट से बनी है और गोदाम में पुराने विवद्यु ार क े कारण शॉट% सर्निकट होने की संभावना है (iv) उत्पाद शुल्क का बीमा प्राप्त नहीं विकया गया र्थीा, हालांविक स्टिस्परिरट का बीमा विकया गया र्थीा (v) लाइसेंस ारी विवद्यु उपकरणों क े रखरखाव में संभव ः लापरवाही कर रहा र्थीा (vi)लाइसेंस ारी ने विवद्यु उपकरणों का बीमा नहीं कराया र्थीा। (vii) विवद्यु उपकरण अच्छी कोविट क े अविŽरो ी नहीं र्थीे। सिजसकी वजह से यह हादसा हुआ। इसलिलए, यह दैवीय काय% नहीं है। जब हमने प्रति वादीगण क े विवद्वान अति वक्ता से पूछा विक कहां से प्रति वादीगण को जानकारी विमली है विक आग उपकरण अच्छी गुणवत्ता क े नहीं र्थीे और घटना का कारण बने या तिडस्टिस्टलरी में विवद्यु उपकरणों क े रखरखाव में लापरवाही बर ी जा रही र्थीी, ो वह रिरकॉड% पर विकसी भी सामग्री को इंविग नहीं कर सक े, जहां से ईसीयूपी द्वारा ैयार विकए गए अनुमान को पुष्ट विकया जा सक े या उति0 ठहराया जा सक े । वास् व में, पूव क्त अनुमान क ु छ भी नहीं, क े वल ईसीयूपी की ओर से सारहीन अनुमान और सुनी सुनायी बा े हैं। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
30. इसक े विवपरी, समय-समय पर विवभिभन्न अति कारिरयों, सिजन्होंने साइट का दौरा विकया है, ने स्पष्ट रूप से ब ाया है विक याति0काक ा% की ओर से कोई स्पष्ट लापरवाही नहीं र्थीी। यह घटना दैवीय काय% क े अलावा और क ु छ नहीं र्थीी। जब कोई विवत्तीय दातियत्व कति पय श % पर आ ारिर हो, अर्थीा% उस व्यविक्त की ओर से सिजसे सिजम्मेदार ठहराया जाना है, उस स्टिस्र्थीति में, ब क कोई सिजम्मेदारी य नहीं की जा सक ी है जब क विक ऐसी लापरवाही को विकसी सामग्री क े आ ार पर स्र्थीाविप नहीं विकया जा ा है। यह थ्य विक इमार पुरानी र्थीी या वायरिंरग पुराने र्थीे, विबजली विवभाग या अविŽशमन विवभाग या यहां क विक आबकारी अति कारिरयों द्वारा या ो आग लगाने क े लिलए ख रनाक या प्रवण होने की ओर इशारा विकया गया र्थीा, जो अनुबंति तिडस्टलरी, भंडारण और गोदाम क े प्रभारी र्थीे।
31. इसक े अलावा, तिडस्टलरी में स्र्थीाविप विवद्यु उपकरण अच्छी गुणवत्ता क े नहीं र्थीे, यह भी अनुमान है क्योंविक इसे मजबू करने क े लिलए कोई सामग्री नहीं विदखाई गई र्थीी। यह विदखाने क े लिलए विकसी भी सामग्री क े अभाव में विक याति0काक ा% की ओर से विकसी भी लापरवाही क े कारण नुकसान हुआ है, हम पा े हैं विक इस रिरट याति0का में की गई मांग पूरी रह से अवै है और इसे बरकरार नहीं रख सक ी है।
32. दनुसार रिरट याति0का को स्वीकार विकया जा ा है। 11. 7. 2006 और 17.7.2006 विदनांविक आक्षेविप आदेश ए द्द्वारा अपास् विकए जा े हैं। कोई लाग नहीं। " mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (रेखांकन विकया गया)
17. पूव क्त विनण%य क े बाद, प्रति वादी क ं पनी ने अं रिरम आदेश क े अनुपालन में जमा विकए गये 3 करोड़ रुपये की राभिश की वापसी/समायोजन क े लिलए विनदrश की प्रार्थी%ना की। उक्त आवेदन, सीएम नंबर 90936 वर्ष% 2019 र्थीा सिजस पर उच्च न्यायालय ने विव0ार विकया और 06.11.2019 विदनांविक आदेश द्वारा अनुमति दी सिजसमें आबकारी आयुक्त से इस थ्य को ध्यान में रख े हुए क ं पनी द्वारा विदए गए आवेदन को अभिभविन ा%रिर करने की अपेक्षा र्थीी विक न अं रिरम आदेश क े अनुसरण में जमा विकया गया र्थीा और बाद में, रिरट याति0का को अनुमति दी गई र्थीी। विवरो ी क %
18. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेशों को 0ुनौ ी दे े हुए,अपीलार्थी4 क े विवद्वान अति वक्ता ने अविनवाय% रूप से दोहरा क % विदया हैः एक, विक यह स्पष्ट रूप से प्रति वादी क ं पनी की ओर से लापरवाही का मामला र्थीा जहां आग की घटना को दैवीय क ृ त्य नहीं कहा जा सक ा है और दूसरा, विक यूपी आबकारी अति विनयम,, आबकारी विनयमावली और 1969 क े विनयमों क े प्रयोज्य प्राव ानों क े अनुसार, आग में नष्ट हुई शराब पर उत्पाद शुल्क की मांग को ठीक ही उठाया गया है। विवद्वान अति वक्ता ने मामले क े एक अन्य पहलू पर न्यायालय को भी अवग कराया है, जो विक आग में नष्ट हुए आईएमएफएल की लाग क े सापेक्ष प्रति वादी क ं पनी द्वारा प्राप्त बीमा दावे क े संबं में है। 7 ए स्टिsमनपश्चा ् "1910 क े अति विनयम" से भी संदर्भिभ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
19. विवद्वान अति वक्ता का कहना है विक ईश्वर का काय% एक अपरिरहाय%, अप्रत्याभिश और अनुति0 रूप से गंभीर घटना है जो प्राक ृ ति क शविक्तयों द्वारा विबना विकसी मानवीय हस् क्षेप क े हो ी है, जैसे भूक ं प, विबजली, बाढ़ आविद। यह मानव विनयंत्रण क े बाहर एक प्राक ृ ति क ख रा है सिजसक े लिलए विकसी भी व्यविक्त को सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है। यह कहा गया है विक तिडस्टिस्टलरी में आग लगने की घटना ब दैवीय काय% हो ी यविद, भूक ं प या विबजली जैसी क ु छ ऐसी घटना हुई हो ी, लेविकन घटना क े समय ऐसा कोई प्राक ृ ति क शविक्त परिर0ालन में नहीं र्थीा और इस घटना क े लिलए विकसी प्राक ृ ति क शविक्त को सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है, बस्टिल्क क े वल क ु छ मानवीय गल ी को सिजम्मेदार ठहराया जा सक ा है। विवद्वान अति वक्ता का कर्थीन है विक जब प्राक ृ ति क शविक्त इस परिरदृsय में नहीं र्थीी ो घटना क े पीछे स्पष्ट रूप से प्रति वादी क ं पनी की ओर से लापरवाही क े त्वों को संदर्भिभ विकया जाएगा। विवद्वान अति वक्ता ने क % को विवस् ार दे े हुए कहा विक लापरवाही एक विवभिशष्ट अपक ृ त्य है और अविनवाय% रूप वह स क % ा बर ने में विवफल ा को दशा% ा है जो परिरस्टिस्र्थीति यों की मांग र्थीी। उन कy क े समर्थी%न में विक व %मान घटना दैवीय क ृ त्य नहीं है, विवद्वान अति वक्ता ने संभागीय विनयंत्रक, क े एसआरटीसी बनाम महादेव शेट्टी एवं अन्य:(2003) 7 एससीसी 197, वोहरा साविदकभाई राजकभाई एवं अन्य बनाम गुजरा राज्य एवं अन्य:(2016) 12 एससीसी 1 और पटेल रोडवेज लिलविमटेड बनाम विबड़ला यामाहा लिलविमटेडः (2000) 4 एससीसी 91 क े मामलों को संदर्भिभ कर अवलंब लिलया है।
19. 1 अपीलार्थी4 क े विवद्वान अति वक्ता का कर्थीन है विक व %मान मामले में गोदाम सिजसमें बड़ी मात्रा में अत्यति क ज्वलनशील आईएमएफएल का भंडारण विकया गया र्थीा, में आग की घटना शॉट%-सर्निकट क े कारण हुई र्थीी जो, स्पष्ट रूप से एक ऐसी घटना र्थीी सिजससे ब0ा जा सक ा र्थीा, यविद प्रत्यर्थी4 कम्पनी द्वारा उति0 आवsयक कदम उठाए जा े। यह कहा गया है विक बड़ी मात्रा में मादक वाष्प हवा में होने क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कारण तिडस्टिस्टलरी भी आग क े लिलए अति संवेदनशील हो ी हैं और प्रति वादी क ं पनी को ऐसी विकसी भी घटना से ब0ने क े लिलए देखभाल और साव ानी बर ने की आवsयक ा र्थीी। विनरीक्षण रिरपोटy क े संदभ% में, विवद्वान अति वक्ता ने क % विदया है विक विव0ारा ीन घटना से पहले भी, विवद्यु प्रति ष्ठानों और वायरिंरग में दोर्षों और कविमयों का संक े विदया गया र्थीा और जब शॉट%-सर्निकट क े कारण आग की घटना हुई, ो क ं पनी क े वल यह कह कर नहीं ब0 सक ी विक उन्होंने सभी विनवारक उपायों का पालन विकया र्थीा या अविŽशमन विवभाग से प्रमाण पत्र लिलया र्थीा।
20. आग में नष्ट हुई आईएमएफएल पर उत्पाद शुल्क की मांग और वसूली क े अपीलार्थी4 क े हक और इस रह का भुग ान करने क े लिलए प्रति वादी क ं पनी की प्रासंविगक देय ा क े संबं में, अपीलार्थी4 क े विवद्वान अति वक्ता ने प्रासंविगक वै ाविनक प्राव ानों का विवस् ृ संदभ% विदया है और कहा है विक विव0ारा ीन मांग कानून क े अनुरूप है और इसे बरकरार रखा जाना 0ाविहए।
21. भार क े संविव ान की सा वीं अनुसू0ी की सू0ी II की प्रविवविष्ट 8 और 51 क े संदभ% में, विवद्वान अति वक्ता का कर्थीन है विक नशीली शराब से संबंति विवर्षय पर कानून का पूरा क्षेत्र और सार्थी ही उत्पाद शुल्क और प्रति वाद क %व्यों से संबंति मामले राज्य विव ातियका क े क्षेत्र में हैं और व %मान उद्देsय क े लिलए, मामला 1910 क े अति विनयम, उत्पाद शुल्क विनयमावली और 1969 की विनयमावली में विनविह प्राव ानों द्वारा शासिस है।1910 क े अति विनयम की ारा 17,18,19,28,29 और 30 क े संदभ% में विवद्वान अति वक्ता ने कहा है विक विकसी भी नशीले पदार्थी% का विनमा%ण नहीं विकया जा सक ा है और विकसी भी शराब को विबक्री क े लिलए बो लबंद नहीं विकया जा सक ा है सिसवाय उस हे ु प्राति कार क े और उस संबं में विदए गए लाइसेंस क े विनयमों और श y क े अ ीन ( ारा 17) और, ारा 18 क े अनुसार, आबकारी आयुक्त तिडस्टिस्टलरी और गोदाम की स्र्थीापना क े लिलए एक लाइसेंस प्रदान mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर सक ा है सिजसमें ारा 17 क े ह विदए गए लाइसेंस क े ह स्टिस्परिरट का विनमा%ण विकया जा सक ा है। इसक े अलावा, ारा 19 क े अनुसार, विकसी भी नशीले पदार्थी% को विकसी भी तिडस्टिस्टलरी, शराब की भठ्ठी, गोदाम या भंडारण क े स्र्थीान से नहीं हटाया जा सक ा है, जब क विक शुल्क का भुग ान नहीं विकया गया हो या उसक े भुग ान क े लिलए एक बांड विनष्पाविद नहीं विकया गया हो। इस प्रकार यह कहा गया है विक विकसी भी नशीले पदार्थी% को हटाने क े लिलए पूव% श % इस रह क े भुग ान क े लिलए देय शुल्क या बांड क े विनष्पादन का वास् विवक भुग ान है। विवद्वान अति वक्ता ने आईएमएफएल की बॉटलिंलग क े लिलए प्रति वादी द्वारा उत्तर प्रदेश क े राज्यपाल क े पक्ष में विनष्पाविद बांड का उ•ेख विकया है और कहा है विक लाइसेंस ारी 1910 क े अति विनयम क े सभी प्राव ानों और उसक े ह बनाए गए विनयमों का पालन करने क े लिलए बाध्य है। 21.[1] विवद्वान अति वक्ता का यह क % है विक पीडी-2 लाइसेंस क े ह तिडस्टिस्टलरी स्र्थीाविप की गई है, प्रति वादी लाइसेंस क े विनयमों और श y का पालन करने क े लिलए बाध्य र्थीा और दनुसार, हमेशा 1910 क े अति विनयम क े प्राव ानों क े ह मांग की गई ड्यूटी जमा करने क े लिलए बाध्य रहा है, खासकर जब सभी सं0ालन, सिजसमें पीडी-2 लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र से बॉटलिंलग हॉल और गोदाम में शराब का हस् ां रण शाविमल है और विफर, प्रेर्षण सविह लाइसेंस की श y और तिडस्टिस्टलर द्वारा विनष्पाविद बांड क े अन् ग% आ े हैं। विफर भी, विवद्वान अति वक्ता का क % है विक 1969 की विनयमावली क े विनयम 7 (11) (क) क े संदभ% में, प्रति वादी क ं पनी 1 प्रति श से अति क अपव्यय पर शुल्क क े भुग ान क े लिलए सिजम्मेदार र्थीी और इस दातियत्व से ब0 नहीं सक ी है। आबकारी विनयमावली क े विनयम 813 क े संदभ% में, विवद्वान अति वक्ता ने कहा है विक इसक े संदभ% में, एक तिडस्टिस्टलरी में संग्रही विवभिभन्न प्रकार की स्टिस्परिरट क े लिलए मुफ् अपव्यय भत्ता प्रदान विकया जा ा है, लेविकन बो लबंद स्टिस्परिरट क े विवभिशष्ट बविहष्करण क े संबं में यह स्पष्ट है विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्टिस्परिरट क े बो लबंद और संग्रही हो जाने पर, लाइसेंस ारी आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 सपविठ 1969 की विनयमावली क े विनयम 7 (11) (क) क े संदभ% में बो लबंद स्टिस्परिरट क े अपव्यय क े मामले में उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी रह ा है। हर शंकर एवं अन्य बनाम आबकारी और करा ान उपायुक्त एवं अन्यः (1975) 1 एससीसी 737,क े मामले को संदर्भिभ कर े हुए विवद्वान अति वक्ता ने क % विदया है विक जब लाइसेंस ारी ने 1969 की विनयमावली को ध्यान से पढ़ने क े बाद लाइसेंस लिलया है, ो वह लाइसेंस की श y से बाहर नहीं हो सक ा है।
22. इस सवाल पर विक आईएमएफएल उत्पाद शुल्क क े लिलए कब योग्य हो ा है, ो विवद्वान अति वक्ता ने क % विदया है विक 1910 क े अति विनयम और उसक े ह विनयमों की योजना में, शराब क े विनमा%ण क े लिलए तिडस्टलरी में स्टिस्परिरट क े प्रवेश क े बिंबदु से उत्पाद शुल्क सही है और सस्टिम्मश्रण, विनमा%ण और बो लबंद करने क े बिंबदुओं सविह हर बिंबदु पर और उसक े बाद बो लबंद स्टिस्परिरट पर। इस प्रकार यह क % विदया गया है विक प्रति वादी क ं पनी अपने दावे में गल है विक गोदाम में नष्ट होने वाला सामान पर, उत्पाद शुल्क देय नहीं र्थीा। यह कहा गया है विक बो ल में सिजस समय स्टिस्परिरट को संग्रही विकया जा ा है, बो ल पर उत्पाद शुल्क लगाए जाने योग्य हो जा ा है, भले ही उसे गोदाम से बाहर न विनकाला जाए। 22.[1] 1910 क े अति विनयम की ारा 28 और 29 क े संदभ% में, विवद्वान अति वक्ता का कर्थीन है विक ये प्राव ान क्रमशः राज्य को उत्पाद शुल्क लगाने क े लिलए सशक्त बना े हैं और सिजस रीक े से शुल्क लगाया जाना है, वह स्पष्ट रूप से दशा% ा है विक उत्पाद शुल्क, जो वास् विवक शब्दों में राज्य क े अनन्य विवशेर्षाति कार की कीम है, तिडस्टिस्टलरी में विनर्निम शराब पर लगाया जा सक ा है और यह गल है विक उत्पाद शुल्क को बो लबंद स्टिस्परिरट पर नहीं लगाया जा सक ा है या क े वल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गोदाम से शराब की विनकासी पर मात्रांकन और संग्रहण कर क े लगाया जा सक ा है। विवद्वान अति वक्ता ने विवशेर्ष रूप से यूपी राज्य एवं अन्य बनाम मेसस% मोदी तिडस्टलरी आविद:(1995) 5 एससीसी 753, क े संबं में इस इस न्यायालय क े विनण%य का उ•ेख विकया है जो विवभिभन्न 0रणों और विवभिभन्न समयबिंबदुओं पर उत्पाद शुल्क की मांग की विवभिभन्न विवशेर्ष ाओं क े संबं में है। विवद्वान अति वक्ता ने यूपी राज्य एवं अन्य बनाम मेसस% मोहन मीविकन ब्रेवरी लिलविमटेड एवं एक अन्य:(2011) 13 एससीसी 588 क े मामले में विदए गये विनण%य का भी उ•ेख विकया है
23. जैसा विक प्रति वादी क े रुख क े एक अन्य पहलू क े संबं में है विक तिडस्टिस्टलरी में आबकारी विवभाग क े कम%0ारिरयों की विनयविम ैना ी है, पूरा सं0ालन आबकारी विवभाग क े विनयंत्रण और पय%वेक्षण क े ह रह ा है, अनुबंति गोदाम प्रति वादी और आबकारी विवभाग क े संयुक्त लॉक क े ह है, और शराब क े वल आबकारी विनरीक्षक द्वारा विवभाग का ाला खोलने पर जारी विकया जा ा है, विवद्वान अति वक्ता का क % है विक आबकारी अति कारिरयों की ऐसी ैना ी विनयमों का विक्रयान्वयन सुविनतिश्च करने क े लिलए और राज्य क े राजस्व विह ों की रक्षा क े लिलए आवsयक है। लेविकन इस मामले क े लिलए, तिडस्टिस्टलरी की सुरक्षा और भवन और प्रति ष्ठानों क े उति0 रखरखाव से विकसी भी दुघ%टना की रोकर्थीाम को आबकारी विवभाग में स्र्थीानां रिर नहीं विकया जा सक ा है और ऐसी सुरक्षा एकमात्र लाइसेंस ारी की सिजम्मेदारी र्थीी। इस प्रकार, विवद्वान अति वक्ता क े अनुसार, विव0ारा ीन आग की घटना, जो क े वल उति0 रखरखाव और प्रति ष्ठानों और /या उपकरणों क े रखरखाव में कमी क े कारण हुई, प्रति वादी क ं पनी अक े ले उत्तरदायी और सिजम्मेदार रह ी है।
24. कy क े एक अन्य विहस्से में, विवद्वान अति वक्ता ने इस थ्य का उ•ेख विकया है विक प्रति वादी क ं पनी ने शराब क े मूल्य का बीमा कवरेज लिलया र्थीा और इसलिलए, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बीमाक ा% द्वारा मुआवजा विदया गया र्थीा। विवद्वान अति वक्ता ने क % विदया है विक जब प्रति वादी क ं पनी को बीमा क ं पनी से शराब क े मूल्य की प्रति पूर्ति विमली, ो यह घटना शराब की विबक्री क े समान र्थीी और इस्टिक्वटी और विनष्पक्ष ा क े सिसद्धां ों पर, राज्य को इस रीक े से नुकसान नहीं पहुं0ाया जा सक ा है विक जब तिडस्टिस्टलर को शराब का मूल्य प्राप्त हुआ है, ब भी संबंति उत्पाद शुल्क राज्य को उपलब् नहीं कराया जाएगा। विवद्वान अति वक्ता ने यह भी क % विदया है विक शराब क े मूल्य का बीमा कवरेज ले े समय, उत्पाद शुल्क क े मूल्य का बीमा कवरेज लेने क े लिलए प्रति वादी क ं पनी की ओर से 0ूक, खुद प्रति वादी की ओर से लापरवाही है और इसक े भी, प्रति वादी बीमा कम्पनी से बरामद शराब क े मूल्य पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी है। इन कy क े समर्थी%न में, विवद्वान अति वक्ता ने रमपाल सत्यपाल बनाम क ें द्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त, नोएडा:(2004) 167 एल्ट,291 क े मामले में सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाति करण, उत्तरी पीठ, नई विद•ी8 द्वारा पारिर एक आदेश का उ•ेख विकया है। सिजसमें बारिरश क े पानी में माल (पान मसाला) क े नुकसान क े कारण शुल्क की छ ू ट को अस्वीकार कर विदया गया र्थीा, जब यह पाया गया विक मूल्यांविक ी को बीमा क ं पनी द्वारा एक ऐसी राभिश का मुआवजा विदया गया र्थीा जो शाविमल शुल्क से बहु अति क र्थीा।
25. इसक े विवपरी, प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने रिरट याति0का की अनुमति देने वाले उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश का समर्थी%न विकया है और यह क % विदया है विक आग की घटना क े संबं में प्रति वादी क ं पनी की ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई र्थीी और आग में नष्ट शराब पर उत्पाद शुल्क क े प्रति कोई दातियत्व नहीं बढ़ाया जा सक ा। इसक े अलावा, विवद्वान अति वक्ता भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 265 क े संदभ% में यह क % विदया 8 संक्षेप में 'सीईएसटीएटी' mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बिंक कर का उद्ग्रहण और सग्रहण विवति द्वारा प्राति क ृ विकया जाना 0ाविहए और 1910 क े अति विनयम, आबकारी विनयमावली और 1969 क े विनयमों क े ह, उत्पाद शुल्क क े वल तिडस्टलरी से आईएमएफएल जारी करने क े बिंबदु पर एकत्र विकया जा सक ा र्थीा और गोदाम में आग लगने क े कारण नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक पर उत्पाद शुल्क की मांग का कोई सवाल ही नहीं उत्पन्न हो ा। विवद्वान अति वक्ता ने यह भी कहा विक आग में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक क े संबं में, विकसी और को संपलित्त का हस् ां रण नहीं हुआ र्थीा और इसलिलए, उत्पाद शुल्क की वसूली क े अवसर पर कोई विबक्री नहीं हुई र्थीी।
26. यह दावा कर े हुए विक प्रति वादी ने तिडस्टलरी क े गोदाम में आईएमएफएल क े स्टॉक क े सुरतिक्ष रखरखाव/भंडारण की सभी साव ानी बर ी र्थीी, विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक आग बुझाने वाले उपकरण तिडस्टलरी परिरसर में स्र्थीाविप विकए गए र्थीे और अविŽशमन विवभाग ने आग क े से सुरक्षा क े संबं में तिडस्टलरी द्वारा बर ी जाने वाली साव ाविनयों से पूरी रह सं ुष्ट होने पर विदनांक 01.03.2003 को अनापलित्त प्रमाण पत्र जारी विकया; यह विक सहायक विवद्यु विनरीक्षक ने विनरीक्षण क े बाद विदनांक 19.09.2002 को प्रमाण पत्र जारी विकया और इस बा से सं ुष्ट होने पर विक विवद्यु वायरिंरग उपकरण आविद भार ीय विवद्यु अति विनयम, 1966 क े अनुसार र्थीे; यह विक तिडस्टलरी ने 06.10.1994 को काम करने का लाइसेंस प्राप्त विकया र्थीा सिजसे प्रति वर्ष% नवीनीक ृ विकया गया र्थीा और घटना की ारीख को मान्य र्थीा; यह विक विवशेर्ष रूप से सहायक आबकारी आयुक्त की विदनांक 02.08.2003 की रिरपोट% में कहा गया र्थीा विक आग का कारण विनतिश्च नहीं विकया जा सक ा और यह दशा%ने क े लिलए क ु छ भी नहीं है विक तिडस्टलरी में विकसी प्रकार की कोई लापरवाही बर ी जा रही र्थीी या आग जानबूझकर लगायी गयी र्थीी यहाँ क विक पुलिलस द्वारा दी गयी रिरपोट% में भी यह कहा गया है विक आग का कारण विनतिश्च नहीं विकया जा सका और प्रति वादी की ओर से विकसी लापरवाही का कोई उ•ेख mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विबल्क ु ल नहीं है; यह विक अविŽशमन विवभाग की रिरपोट% में भी, यह कहा गया है विक आग क े कारणों का विवविनश्चय नहीं विकया जा सका; यह विक सिजलाति कारी शाहजहाँपुर ने भी मुख्य सति0व (आबकारी) को भेजे अपने 21.10.2003 विदनांविक पत्र में आग क े कारणों का अज्ञा होना लिलखा और कहा विक तिडस्टलरी की ओर से लापरवाही का कोई साक्ष्य नहीं है। इन थ्यों और कारकों क े सार्थी, प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता का क % है विक आग की घटना सिजसक े कारण आईएमएफएल नष्ट हो गयी, प्रति वादी की विकसी भी लापरवाही क े कारण नहीं हुआ और इसक े सार्थी युलिग्म थ्य यह है विक तिडस्टिस्टलरी पर राज्य उत्पाद शुल्क विवभाग का पूण% विनयंत्रण और पय%वेक्षण र्थीा। इस प्रकार, विवद्वान अति वक्ता क े अनुसार, प्रति वादी की ओर से कोई लापरवाही नहीं है, आग में नष्ट हुई शराब पर उत्पाद शुल्क की कोई देय ा उस पर नहीं लगायी जा सक ी है।
27. यह सुविनतिश्च कर े हुए विक प्रति वादी की ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई र्थीी, विवद्वान अति वक्ता ने प्रति वादी क े लिखलाफ शुल्क की मांग की वै ा को स्वीकार विकया है। इस संबं में, विवद्वान अति वक्ता ने भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 265, अति विनयम,1910 क े प्राव ानों और उसक े ह विनयमों क े सार्थी-सार्थी आबकारी विनयमावली का भी उ•ेख विकया है और कहा है विक आबकारी विनयमावली का विनयम 708 राज्य सरकार को आग या 0ोरी या माप या सबू या विकसी अन्य कारण से तिडस्टलरी में संग्रही स्टिस्परिरट क े विवनाश, हाविन या क्षति क े लिलए सिजम्मेदारी से ब0ा ा है, इस कारण से विक संपूण% तिडस्टलरी (गोदाम सविह ) आबकारी विवभाग क े ाला और 0ाबी क े नी0े है। विवद्वान अति वक्ता ने आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 को यह कहने करने क े लिलए संदर्भिभ विकया है विक नुकसान की स्टिस्र्थीति में, तिडस्टलरी को उसी स्टिस्र्थीति में सरकार को हुए राजस्व क े नुकसान क े लिलए उत्तरदायी बनाया जा ा है जब यह उनकी लापरवाही क े कारण हुआ हो। विवद्वान अति वक्ता ने जोर देकर कहा है विक विनयम 709 क े संदभ% mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में, यविद तिडस्टलरी द्वारा स्टिस्परिरट क े स्टॉक की सुरतिक्ष अभिभरक्षा में लापरवाही नहीं बर ी गई है, ो उसे उत्पाद शुल्क क े ऐसे नुकसान क े लिलए भुग ान हे ु उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सक ा है जो दुघ%टना या मानवीय विनयंत्रण से बाहर क े कारकों द्वारा हुआ हो। 27.[1] विफर भी, विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक बो लबंद शराब क े भंडारण सविह संपूण% बो लबंद परिर0ालन उत्पाद शुल्क विनरीक्षक की कड़ी विनगरानी में विकए जा े हैं और स्टॉक को विवभाग और क ं पनी क े संयुक्त ाला और 0ाबी क े ह अलग- अलग कमरों में रखा जा ा है। 1969 क े विनयमों, विवशेर्ष रूप से इसक े विनयम 7 क े संदभ% में, विवद्वान अति वक्ता का कहना है विक संयुक्त ाले और 0ाभी क े ह इस प्रकार रखा गया स्टॉक उत्तर प्रदेश राज्य क े बाहर विनया% क े उद्देsय क े लिलए या उत्तर प्रदेश राज्य क े भी र र्थीोक विवक्र े ा क े उद्देsय क े लिलए जारी विकया जा ा है और बॉटलिंलग कमरों/गोदामों से शराब जारी करने क े बिंबदु पर ही उत्पाद शुल्क को विन ा%रिर विकया जा ा है और जारी करने की ारीख, समय और स्र्थीान क े संदभ% में एकत्र विकया जा ा है। इस संबं में, विवद्वान अति वक्ता ने 1910 क े अति विनयम की ारा 28 और 29 में विनविह प्राव ानों का भी उ•ेख विकया है और विफर से इस बा पर जोर विदया है विक इसक े ह राज्य सरकार ने अपनी अति सू0ना विदनांविक 30.03.1962 क े ह उत्पाद शुल्क की मात्रा, गणना और संग्रह क े लिलए आरंभ विबन्दु क े रूप में जारी विकए जाने क े विबन्दु का 0यन विकया है, जो यह स्पष्ट कर ा है विक शुल्क की दर विबक्री क े लिलए जारी होने की ारीख से जुड़ी है, न विक विनमा%ण की ारीख से। विवद्व अति वक्ता का कहना है विक आईएमएफएल को विबक्री क े लिलए गोदाम से जारी करने से पहले आग क े कारण नष्ट हो जाने क े कारण इस पर कोई उत्पाद शुल्क लगाने का प्रश्न ही नहीं उठ ा। विवद्वान अति वक्ता का कर्थीन है विक यद्यविप आबकारी अति विनयम क े ह शुल्क उत्पादन क े स् र पर लगाया जा ा है लेविकन शुल्क का संग्रहण क े वल विबक्री क े लिलए जारी विकए जाने पर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ही हो ी है इसलिलए उत्पादन क े बाद और विबक्री क े लिलए जारी विकए जाने से पहले विकसी दुघ%टना की स्टिस्र्थीति में, विनयमावली,1969 का विनयम 7(11) 1% बरबादी की अनुमति दे ा है और यविद बरबादी 1% से अति क है ो पूरा राभिश लेने की बा कर ा है और 0ोरी या आग से हाविन की स्टिस्र्थीति में, तिडस्टिस्टलरी उसी स्टिस्र्थीति में राजस्व क े नुकसान क े लिलए उत्तरदायी हो ी है जब उसकी ओर से कोई लापरवाही हो। विवद्वान अति वक्ता क े अनुसार, व %मान मामले में, जहां शराब विबक्री क े लिलए गोदाम से जारी नहीं की गई र्थीी और तिडस्टिस्टलरी की ओर से विकसी लापरवाही क े कारण नष्ट नहीं हुई र्थीी, वहां उत्पाद शुल्क क े उद्ग्रहण को अस्वीक ृ विकया जाना 0ाविहए, क्योंविक वह विवति द्वारा अति क ृ नहीं र्थीा और भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 265 की अपेक्षाओं क े अनुरूप नहीं र्थीा। विवद्वान अति वक्ता ने सोमैया ऑगrविनक (इंतिडया) प्राइवेट लिलविमटेड एवं एक अन्य बनाम उ.प्र. राज्य एवं एक अन्य (2001) 5 एस. सी. सी. 519 क े मामले को यह कहने क े लिलए संदर्भिभ विकया विक कर क े उद्ग्रहण और संग्रहण दोनों को विवति द्वारा प्राति क ृ विकया जाना 0ाविहए। विवद्वान अति वक्ता क े अनुसार, उच्च न्यायालय ने ठीक ही अभिभविन ा%रिर विकया है विक उत्पाद शुल्क विनयमावली का विनयम 709 लागू होगा और प्रति वादी पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा सक ा क्योंविक उसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई र्थीी।
28. बीमा क ं पनी द्वारा बीमा क े प्रभाव और आईएमएफएल क े मूल्य की प्रति पूर्ति क े संबं में,विवद्वान अति वक्ता ने माल की विबक्री अति विनयम, 1930 और उत्तर प्रदेश व्यापार कर अति विनयम, 1948 में भी विबक्री की परिरभार्षा का उ•ेख विकया है और कहा विक आग क े कारण नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक में न ो संपलित्त का कोई हस् ां रण हुआ र्थीा और न ही कोई विबक्री हुई र्थीी और आग में माल की हाविन क े कारण बीमाक ा% से प्राप्त दावे पर विव0ार नहीं विकया जा सक ा है। यह भी कहा विक उत्पाद शुल्क क े लिलए बीमा कवर न लेना एक अप्रासंविगक और विनरा ार थ्य र्थीा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क्योंविक उत्पाद शुल्क का भुग ान करने का दातियत्व क े वल भी उत्पन्न हो ा जब प्रति वादी क ं पनी की ओर से लापरवाही की गई हो ी, अन्यर्थीा नहीं। विवद्वान अति वक्ता ने यह भी कहा विक वास् व में, यविद प्रति वादी की ओर से कोई लापरवाही हुई हो ी ो बीमा क ं पनी ने स्वयं बीमा दावे का विनपटान नहीं विकया हो ा और बीमा दावे का विनपटान स्वयं यह साविब कर ा है विक प्रति वादी की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई र्थीी। यह भी विनवेदन विकया गया विक प्रति वादी क ं पनी ने मामले में कोई लाभ अर्जिज नहीं विकया र्थीा और वास् व में, वह उत्पाद शुल्क का भुग ान कर ा है जब यह अंति म उपभोक्ता से वसूल विकया जा ा है, लेविकन व %मान मामले में, जब प्रति वादी ने आगे नहीं बढ़ाया और विकसी भी उपभोक्ता से उत्पाद शुल्क वसूल नहीं विकया, ो प्रति वादी पर इसे लगाने का सवाल ही नहीं उठ ा है।
29. हमने पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्तागण को पया%प्त विवस् ार से सुना और प्रयोज्य विवति क े संदभ% में रिरकॉड% पर रखी गई सामग्री का परीक्षण विकया। विवविनश्चय क े लिलए प्रश्न
30. विवरो ी प्रकर्थीनों को ध्यान में रख े हुए, इस मामले में विवविनश्चय क े लिलए विनम्नलिललिख ीन प्रमुख प्रश्न उठ े हैंः क. इस बारे में विक क्या आग में नष्ट शराब पर उत्पाद शुल्क की मांग विवति द्वारा अति क ृ है और क्या 1910 क े अति विनयम, उत्पाद शुल्क विनयमावली और 1969 क े विनयमों क े प्रयोज्य प्राव ानों क े उति0 रूप से उठाई गयी है? ख. इस बारे में विक क्या अविŽ की घटना मानव विनयंत्रण से परे र्थीी और प्रति वादी क ं पनी पर कोई लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सक ा? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ग. इस थ्य का क्या प्रभाव होगा विक प्रति वादी क ं पनी ने क े वल शराब क े मूल्य का बीमा कवरेज लिलया र्थीा (और उस पर उत्पाद शुल्क का नहीं) और विफर, शराब क े मूल्य क े संबं में बीमा दावा प्राप्त विकया र्थीा? प्रासंविगक वै ाविनक प्राव ान
31. अं व%लिल प्रश्नों को ध्यान में रख े हुए, हम संवै ाविनक और वै ाविनक उपबं ों पर ध्यान दे सक े हैं, जो व %मान मामले में अपनी प्रासंविगक ा रख े हैं।
32. मूल संवै ाविनक आदेश विक विवति क े प्राति कार क े विबना कोई कर उद्गृही या संगृही नहीं विकया जाएगा, भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 265 में अं र्निवष्ट है, जो विनम्नानुसार हैः- “265. विवति क े प्राति कार क े विबना करों का अति रोपण नहीं -विवति क े प्राति कार क े विबना कोई कर उद्गृही या संगृही नहीं विकया जाएगा।”
32.1. भार क े संविव ान की सा वीं अनुसू0ी की सू0ी 2 (राज्य सू0ी) की प्रासंविगक प्रविवविष्ट 8 और 51 को भी उपयोगी रूप से विनम्नानुसार पुनः प्रस् ु विकया जा सक ा हैः- “8. मादक लिलकर, अर्थीा% ् मादक लिलकर का उत्पादन, विवविनमा%ण, कब्जा, परिरवहन, क्रय और विवक्रय.
51. राज्य में विवविनर्निम या उत्पाविद विनम्नलिललिख माल पर उत्पाद शुल्क और भार में अन्यत्र विवविनर्निम या उत्पाविद समान माल पर समान या कम दरों पर प्रति कारी शुल्कः- (क) मानव उपभोग क े लिलए मादक पेय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ख) अफीम, भार ीय भांग और अन्य स्वापक ओर्षति और स्वापक ओर्षति,बिंक ु इसक े अं ग% इस प्रविवविष्ट क े उप -पैरा (ख) में सस्टिम्मलिल अल्कोहल या विकसी पदार्थी% से युक्त और्ष ीय और शौ0ालय क े सामान नहीं है।
33. उत्तर प्रदेश राज्य में नशीली शराब और नशीली दवाओं से संबंति कानून मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश उत्पाद शुल्क अति विनयम, 1910 में विनविह प्राव ानों द्वारा शासिस है। ारा 3 में विनविह क ु छ प्रासंविगक परिरभार्षाएं और प्रासंविगक प्राव ान, सिजनका व %मान मामले में सी ा संबं है, जैसा विक ारा 17,18,19,28 और 29 में विनविह, विनम्नलिललिख हैःं
3. विनव%0न-इस अति विनयम में, जब क विक इस विवर्षय या संदभ% में कु छ प्रति क ू ल न हो - (1) ''उत्पाद शुल्क राजस्व '' से विकसी शुल्क, फीस, कर, जुमा%ने (न्यायालय द्वारा अति रोविप जुमा%ने से भिभन्न) से व्युत्पन्न या व्युत्पन्न योग्य राजस्व अभिभप्रे है या इस अति विनयम क े उपबं ों क े अ ीन या शराब या नशीली दवाओं से संबंति त्समय प्रवृत्त विकसी अन्य विवति क े अ ीन अति रोविप या आदेश विकया गया अति हरण अभिभप्रे है; * * * * * * (3 क) ''उत्पाद शुल्क'' और ''प्रति कारी शुल्क'' से कोई ऐसा उत्पाद शुल्क या प्रति कारी शुल्क अभिभप्रे है, जैसा भी मामला हो, जो संविव ान की सा वीं अनुसू0ी की सू0ी 2 की प्रविवविष्ट 51 में वर्भिण है। * * * * * * (8) "स्टिस्परिरट" "से आसवन द्वारा प्राप्त अल्कोहल युक्त कोई शराब अभिभप्रे है, 0ाहे वह विवक ृ हो या न हो" * * * * * * mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (11) "शराब" "से नशीली शराब अभिभप्रे है और इसमें शराब, स्टिस्परिरट, वाइन, री, प0वाई, बीयर और सभी रल शाविमल हैं, जो शराब से विमलकर या उसमें शाविमल हैं, कोई भी पदार्थी% सिजसे राज्य सरकार अति सू0ना द्वारा इस अति विनयम क े प्रयोजनों क े लिलए शराब घोविर्ष कर सक ी है। * * * * * * (22 क) ''उत्पाद शुल्क योग्य वस् ु '' से अभिभप्रे है - (क) मानव उपभोग क े लिलए कोई मादक शराब या (ख) कोई नशीली दवा * * * * * *
17. इस अति विनयम क े प्राव ानों क े अलावा नशीले पदार्थीy का विवविनमा%ण प्रति बंति -(1) (क) कोई नशीला पदार्थी% नहीं बनाया जाएगा। (ख) विकसी भी भांग क े पौ े (क ै नविबस सैविटवा) की खे ी नहीं की जाएगी (ग) भांग क े पौ े (क ै नविबस सैविटवा) का कोई भी भाग, सिजससे कोई नशीली दवा बनाई जा सक ी है, एकत्र नहीं विकया जाएगा (घ) विकसी भी प्रकार की शराब को विबक्री क े लिलए बो लबंद नहीं विकया जाएगा और (ङ) कोई भी व्यविक्त ाड़ी क े अलावा कोई भी नशीला पदार्थी%, उसे बनाने का सामान, ब %न या व्यवस्र्थीा नहीं रखेगा सिसवाय प्राति कार क े अ ीन और सिजला ीश द्वारा इस विनविमत्त विदए गए लाइसेंस क े विनबं नों और श y क े अ ीन रह े हुए, (2) ारा 18 क े ह आबकारी आयुक्त द्वारा इस संबं में विदए गए लाइसेंस क े विनयमों और श y क े अ ीन और प्राति कार क े ह ही विकसी तिडस्टिस्टलरी या ब्रुअरी या विवविनमा% ा का विनमा%ण या काम विकया जाएगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
18. भविट्टयों और गोदामों की स्र्थीापना या लाइसेंसिंसग- उत्पाद शुल्क आयुक्त - (क) एक तिडस्टिस्टलरी स्र्थीाविप कर सक ा है, सिजसमें ारा 17 क े ह विदए गए लाइसेंस क े ह ऐसी श y पर स्टिस्परिरट का विनमा%ण विकया जा सक ा है, सिजन्हें राज्य सरकार उति0 समझ ी है। (ख) इस प्रकार स्र्थीाविप विकसी तिडस्टिस्टलरी को बंद करना (ग) लाइसेंस, ऐसी श y पर जो राज्य सरकार तिडस्टिस्टलरी या ब्रूवरी या विवविनमा% ा क े विनमा%ण और काय% को अति रोविप करने क े लिलए उति0 समझे (घ) ऐसा गोदाम स्र्थीाविप करना या लाइसेंस देना सिजसमें कोई मादक पदार्थी% जमा विकया जा सक े और शुल्क का भुग ान विकए विबना रखा जा सक े. और (ङ) इस प्रकार स्र्थीाविप विकसी गोदाम को बंद करना.
19. तिडस्टिस्टलरी आविद से मादक पदार्थीy को हटाना-इस अति विनयम क े अ ीन स्र्थीाविप विकसी तिडस्टिस्टलरी, ब्रुअरी, फ ै क्ट्री, वेयरहाउस या भंडारण क े अन्य स्र्थीान से विकसी मादक पदार्थी% को ब क नहीं हटाया जाएगा जब क विक अध्याय 5 क े अ ीन देय शुल्क (यविद कोई हो) का भुग ान न कर विदया गया हो या उसक े भुग ान क े लिलए बांड विनष्पाविद न कर विदया गया हो। * * * * * *
28. उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं पर शुल्क-(1) उत्पाद शुल्क या प्रति कारी शुल्क, जैसा भी मामला हो, विकसी भी उत्पाद शुल्क योग्य वस् ु पर राज्य सरकार द्वारा विनदrभिश दर या दरों पर या ो आम ौर पर या विकसी विनर्निदष्ट स्र्थीानीय क्षेत्र क े लिलए लगाया जा सक ा है - (क) ारा 12 (1) क े उपबं ों क े अनुसार आयाति या (ख) ारा 13 क े उपबं ों क े अनुसार विनया% विकया गया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ग) परिरवहविन (घ) ारा 17 क े अ ीन विदए गए विकसी लाइसेंस क े अ ीन विवविनर्निम, संवर्ति या संगृही या स्र्थीाविप विकसी तिडस्टिस्टलरी या (ङ) ारा 18 क े अ ीन लाइसेंस प्राप्त विकसी तिडस्टिस्टलरी में विवविनर्निम बश r विनम्नलिललिख - (i) भार में आया की गई और भार ीय टैरिरफ अति विनयम, 1894 या समुद्री सीमा शुल्क अति विनयम, 1887 क े ह शुल्क क े लिलए ऐसे आया पर उत्तरदायी विकसी भी वस् ु पर शुल्क इस प्रकार नहीं लगाया जाएगा। व्याख्या- इस ारा क े ह शुल्क उन स्र्थीानों क े अनुसार अलग-अलग दरों पर लगाया जा सक ा है जहां विकसी भी उत्पाद शुल्क योग्य वस् ु को उपभोग क े लिलए हटाया जाना है, या इस रह की वस् ु की अलग-अलग शविक्त और गुणवत्ता क े अनुसार। (2) राज्य सरकार, पूव क्त रूप में उत्पाद शुल्क या प्रति कारी शुल्क अति रोविप करने में और अपनी दर विनय करने में, भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 47 में विवविनर्निदष्ट विनदेशक सिसद्धां ों से माग%दर्भिश होगी।
29. सिजस रीति से उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा-ऐसे विनयमों क े अ ीन रह े हुए, जो उत्पाद शुल्क आयुक्त भुग ान क े समय, स्र्थीान और रीक े को विवविनयविम करने क े लिलए विवविह करें, ऐसे शुल्क को विनम्नलिललिख में से एक या अति क रीकों से उद्गृही विकया जा सक ा हैः (क) ारा 12 (1) क े ह आया की गई उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं क े मामले में - (i) आया क े प्रां में या विनया% क े प्रां या क्षेत्र में भुग ान या (ii) ारा 18 (घ) क े ह लाइसेंस प्राप्त या स्र्थीाविप गोदाम से विबक्री क े लिलए जारी होने पर भुग ान द्वारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ख) ारा 13 क े अ ीन विनया% की गई उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं क े मामले में या ो विनया% क े प्रां में या प्रां में या आया क े भय से भुग ान द्वारा (ग) परिरवहन की जाने वाली उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं क े मामले में - (i) उस सिजले में भुग ान द्वारा, जहां से उत्पाद शुल्क योग्य वस् ु का परिरवहन विकया जाना है, या (ii) ारा 18 (घ) क े ह लाइसेंस प्राप्त या स्र्थीाविप गोदाम से विबक्री क े लिलए जारी होने पर भुग ान द्वारा (घ) ारा 17 (1) क े अ ीन विदए गए विकसी लाइसेंस क े अ ीन विवविनर्निम नशीली दवाओं क े मामले में - (i) ारा 17 (1) (क) क े प्राव ानों क े ह विदए गए लाइसेंस क े ह विवविनर्निम मात्रा पर प्रभारिर दर, या ारा 18 (डी) क े ह स्र्थीाविप या लाइसेंस प्राप्त विकसी गोदाम से जारी की गई मात्रा, (ii) जहां मादक दवा का उत्पादन ारा 17 (1) (बी) और (सी) क े प्राव ानों क े ह विदए गए लाइसेंस क े ह हेम्प प्लांट (क ै नविबस सटाइवा) से विकया जा ा है, या खे ी पर लगाए गए एकड़ दर, या एकत्र की गई राभिश पर प्रभारिर दर द्वारा (ङ) ारा 18 क े अ ीन लाइसेंस प्राप्त या स्र्थीाविप विकसी तिडस्टिस्टलरी या विकसी तिडस्टिस्टलरी ब्रुअरी या फ ै क्ट्री में विवविनर्निम स्टिस्परिरट या विबयर क े मामले में (i) तिडस्टिस्टलरी ब्रुअरी या फ ै क्ट्री, जैसी भी स्टिस्र्थीति हो, से उत्पाविद या जारी की गई मात्रा पर प्रभारिर दर से या ारा 18 (घ) क े ह स्र्थीाविप या लाइसेंस प्राप्त विकसी वेयरहाउस से जारी की गई। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ii) उपयोग में लाई जाने वाली सामविग्रयों की मात्रा क े आ ार पर या राज्य सरकार द्वारा विवविह, यर्थीास्टिस्र्थीति, ुलाई या वट% क े क्षरण की मात्रा क े आ ार पर परिरकलिल ऐसे पैमाने या सम ुल्य अनुपा ों क े अनुसार प्रभारिर दर सेः बश r विक, जहां ारा 18 (घ) क े ह स्र्थीाविप या लाइसेंस प्राप्त विकसी वेयरहाउस से विबक्री क े लिलए एक शुल्क योग्य वस् ु क े विनग%म पर भुग ान विकया जा ा है, वहां यह उस शुल्क की दर पर होगा जो उस ारीख को उस वस् ु पर लागू है जब वह वेयरहाउस से जारी की जा ी है।”
34. भविट्टयों में नष्ट हुई और अपभिशष्ट क े रूप में अनुमन्य स्टिस्परिरट क े नुकसान से संबंति आबकारी विनयमावली क े विनयम 708,709 और 813 इस प्रकार हैंः “708. तिडस्टिस्टलरीज में स्टिस्परिरट की क्षति क े लिलए सरकार का उत्तरदायी न होना - सरकार आग या 0ोरी, गेसिंजग या सबू या विकसी अन्य कारण से तिडस्टिस्टलरीज में संग्रही स्टिस्परिरट क े विकसी विवनाश, नुकसान या क्षति क े लिलए उत्तरदायी नहीं होगी। आग या अन्य दुघ%टना क े मामले में तिडस्टिस्टलरी क े प्रभारी अति कारी ुरं उपस्टिस्र्थी होंगे और विदन या रा में विकसी भी समय परिरसर को खोलेंगे।
709. तिडस्टिस्टलरिरयों में स्टिस्परिरट क े नुकसान आविद क े लिलए तिडस्टिस्टलर सिजम्मेदार -तिडस्टिस्टलर अपनी तिडस्टिस्टलरी में स्टिस्परिरट क े स्टॉक की सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार होंगे और उनकी लापरवाही क े कारण सरकार को होने वाले विकसी भी राजस्व नुकसान की भरपाई करने क े लिलए उत्तरदायी होंगे। * * * * * *
813. अनुमन्य क्षय- तिडस्टिस्टलरी में संग्रही विवभिभन्न प्रकार की स्टिस्परिरट (बो लबंद स्टिस्परिरट को छोड़कर) क े लिलए अनुमन्य क्षय इस प्रकार होंगे: प्रति श (1) सादी एवं मसालेदार स्टिस्परिरट 0.[7] mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (2) अपछविन स्टिस्परिरट एवं परिरष्क ृ स्टिस्परिरट 0.[4] (3) तिडने0ड% स्टिस्परिरट 0.[5] यविद विकसी भी प्रकार की स्टिस्परिरट पर कु ल अपव्यय 3 प्रति श से अति क नहीं हो ा है ो अनुमन्य क्षय से अति क शुद्ध अपव्यय पर शुल्क लगाया जाएगा। लेविकन यविद क ु ल अपव्यय 1.[5] प्रति श से अति क है ो विनम्नलिललिख दरों पर अनुमन्य क्षय को अस्वीकार कर े हुए संपूण% अपव्यय पर शुल्क लगाया जाएगाः (1) सादा और अपछविन स्टिस्परिरट – सादा स्टिस्परिरट क े मामले में देसी स्टिस्परिरट पर लगाए जाने वाले शुल्क की उच्च म दर पर और परिरष्क ृ स्टिस्परिरट क े मामले में आईएमएफएल पर लगाए जाने वाले शुल्क की उच्च म दर पर। (2) मसालेदार देशी स्टिस्परिरट सविह परिरष्क ृ स्टिस्परिरट -उस स्टिस्परिरट पर लगाए जाने वाले शुल्क की दर से। (3) तिडने0ड% स्टिस्परिरट -ऐसी स्टिस्परिरट पर लगाए जाने वाले खरीद कर की उच्च म दर पर शास्टिस्: बश r विक उत्पाद शुल्क आयुक्त की सं ुविष्ट क े लिलए यह साविब विकया जा ा है विक विन ा%रिर सीमा से अति क की कमी या बबा%दी विकसी दुघ%टना या अन्य अपरिरहाय% कारण से हुई है, ो ऐसी कमी या बबा%दी पर शुल्क का भुग ान करने की आवsयक ा नहीं होगी। जब अपव्यय विन ा%रिर सीमा से अति क नहीं हो ा है, ो प्रभारी अति कारी द्वारा कोई कार%वाई करने की आवsयक ा नहीं हो ी है, लेविकन जब मासिसक स्टॉक ले े समय विकसी भी मामले में अति रिरक्त पाया जा ा है, ो प्रभारी अति कारी को तिडस्टिस्टलरों से लिललिख स्पष्टीकरण प्राप्त करना 0ाविहए और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरस्टिस्र्थीति यों की पूरी रिरपोट% क े सार्थी इसे सहायक उत्पाद आयुक्त/उप उत्पाद आयुक्त को भेजना 0ाविहए। सहायक उत्पाद शुल्क आयुक्त/उप उत्पाद शुल्क आयुक्त अति रिरक्त अपव्यय पर शुल्क लगाएगा यविद वह सं ुष्ट हो जा ा है विक विन ा%रिर सीमा से अति क अपव्यय विकसी दुघ%टना या विकसी अपरिरहाय% कारण से नहीं हुआ है। यविद विकसी दुघ%टना या अपरिरहाय% कारण से अति रिरक्त अपव्यय हो ा है, ो मामले को आदेश क े लिलए आबकारी आयुक्त को भेजा जाएगा।
35. एक मादक पेय से संबंति एक प्रमुख गति विवति, अर्थीा% ्, विवदेशी शराब की बॉटलिंलग और भंडारण, उत्तर प्रदेश राज्य में 1969 क े विनयमों द्वारा विवविनयविम की जा ी है, सिजसमें अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी -सार्थी शराब बनाने वाले को बो ल स्टिस्परिरट और शराब की बो ल क े लिलए बो ल लाइसेंस फॉम% एफएल-3 में प्रदान करने का प्राव ान है। इस रह क े लाइसेंस की विवभिभन्न सामान्य श » इन विनयमों क े विनयम 6 में विनविह हैं और विफर एफएल-3 लाइसेंस क े ह बांड में आईएमएफएल को बॉटलिंलग करने क े संबं में अति रिरक्त विवशेर्ष श » विनयम 7 में विनविह हैं। विनयम 7 में बॉटलिंलग और भंडारण क े वास् विवक सं0ालन और पय%वेक्षण क े बारे में व्यापक प्राव ान विकए गए हैं। व %मान प्रयोजन क े लिलए, क े वल विनयम 7 क े उपखंड (11) पर ध्यान देने की आवsयक ा है और उसे यहां पुनः प्रस् ु विकया गया है (अन्य उपखंडों का लोप कर े हुए, जो प्रासंविगक नहीं है):- “7. एफएल-3 लाइसेंस क े ह बॉन्ड में भार विनर्निम विवदेशी शराब की बॉटलिंलग क े लिलए विनम्नलिललिख अति रिरक्त विवशेर्ष श » लागू होंगीः * * * * * * (11)(क) बॉटलिंलग और भंडारण में वास् विवक नुकसान क े लिलए एक महीने क े दौरान संग्रही स्टिस्परिरट की क ु ल मात्रा पर अनुमन्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क्षय दर एक प्रति श बनाया जा सक ा है। लाइसेंस ारी एक प्रति श से अति क अपव्यय पर शुल्क क े भुग ान क े लिलए सिजम्मेदार होगा। (ख) जब अपव्यय विन ा%रिर सीमा से अति क नहीं हो ा है, ो उत्पाद शुल्क विनरीक्षक द्वारा कोई कार%वाई करने की आवsयक ा नहीं है, लेविकन यविद मासिसक स्टॉक क े समय अति रिरक्त पाया जा ा है, ो उत्पाद शुल्क विनरीक्षक प्रपत्र एफ. एल. बी.-10 में महीने क े पां0वें विदन क कलेक्टर को एक विववरण प्रस् ु करेगा, सिजसमें वास् विवक अपव्यय की मात्रा और अति रिरक्त अपव्यय पर लाइसेंसी द्वारा भुग ान विकए जाने वाले शुल्क का उ•ेख होगा। विववरण प्राप्त होने पर सिजला ीश भार ीय विनर्निम विवदेशी स्टिस्परिरट पर लगाए जाने वाले शुल्क की पूण% दर पर लाइसेंस ारी से शुल्क की वसूली करेगा। * * * * * * * * *
36. आगे बढ़ने से पहले, हम संक्षेप में यह ब ा सक े हैं विक इस मामले में आग में नष्ट आईएमएफएल विनःसंदेह 1910 क े अति विनयम की ारा 3 क े खंड (8), (11) और (22-क) क े अर्थी% में स्टिस्परिरट, शराब और उत्पाद शुल्क योग्य वस् ु क े विववरण से विमल ी है, क्योंविक यह आसवन द्वारा प्राप्त अल्कोहल युक्त मादक शराब र्थीी और इसका विनमा%ण प्रति वादी की तिडस्टिस्टलरी में ारा 17 क े संदभ% में विदए गए लाइसेंस क े ह विकया गया र्थीा और इसे 1910 क े अति विनयम की ारा 18 क े संदभ% में स्र्थीाविप गोदाम में रखा गया र्थीा। इस प्रकार, इस शराब (आईएमएफएल) को भंडारण क े स्र्थीान से ब क नहीं हटाया जा सक ा र्थीा जब क विक इस पर देय उत्पाद शुल्क का भुग ान न विकया गया हो या इसक े भुग ान क े लिलए बांड का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनष्पादन न विकया गया हो। शुल्क ारा 28 क े संदभ% में देय र्थीा और इसकी दर वह र्थीी जो ारा 29 क े संदभ% में वेयरहाउस से इसक े जारी होने की ारीख को लागू र्थीी। बॉटलिंलग और भंडारण में वास् विवक नुकसान क े लिलए एक महीने क े दौरान संग्रही शराब की क ु ल मात्रा पर 1% क का क्षय स्वीकाय% र्थीा और अन्यर्थीा, कोई क्षय भत्ता स्वीकाय% नहीं र्थीा। इसक े अलावा, सरकार विकसी भी कारण से इस संग्रही शराब की मात्रा में विकसी भी नुकसान क े लिलए उत्तरदायी नहीं र्थीी और दूसरी ओर, तिडस्टिस्टलरी, अर्थीा% ्, प्रति वादी इसकी सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीा और क ु ल मात्रा क े अनुमेय एक प्रति श से अति क भंडारण क े दौरान विकसी भी नुकसान क े कारण राजस्व की हाविन को पूरा करने क े लिलए भी उत्तरदायी र्थीा। इस अति देश को ध्यान में रख े हुए, जैसा विक विनर्निदष्ट विकया गया है, क े वल एक प्रति श क अनुमन्य को छोड़कर, संग्रही क ु ल मात्रा की बबा%दी पर उत्पाद शुल्क क े भुग ान क े लिलए प्रति वादी पूरी रह से उत्तरदायी र्थीा। 1910 क े अति विनयम, उत्पाद शुल्क विनयमावली और 1969 क े विनयमों क े उपरोक्त उद्धृ उपबं ों क े संयुक्त पठन से उभरने वाली इन प्रमुख विवशेर्ष ाओं को ध्यान में रख े हुए, हम इस मामले में अव ारण क े लिलए आवsयक प्रश्नों पर विव0ार कर सक े हैं। क्या प्रश्नग मांग विवति द्वारा प्राति क ृ है?
37. उपयु%क्त प्राव ानों क े संदभ% में, प्रति वादी क ं पनी की ओर से प्रकर्थीनों का मुख्य मुद्दा यह रहा है विक अनुबंति वेयरहाउस से जारी विकया जाना ही उत्पाद शुल्क की मात्रा और गणना का बिंबदु है और आग में नष्ट हो गई शराब क े संबं में उस बिंबदु/0रण क नहीं पहुं0ने पर उत्पाद शुल्क की मांग का प्रश्न नहीं उठ ा है। यह भी कहा विकया गया है विक 1969 क े विनयमों क े विनयम 7 (11) का कोई उपयोग नहीं है और क े वल आबकारी विनयमावली का विनयम 709 लागू हो सक ा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है सिजसक े लिलए तिडस्टिस्टलरी की ओर से लापरवाही साविब करने की आवsयक ा है। लागू विनयम से संबंति मुद्दे को उठाने से पहले, हम प्रति वादी की ओर से उठाए गए मूल प्रश्न पर विव0ार कर सक े हैं, अर्थीा% ्, क्या मांग इस कारण से अनति क ृ है विक शुल्क मात्रा और गणना क े बिंबदु/0रण नहीं पहुं0ा र्थीा और गोदाम में रह े ही शराब नष्ट हो गई र्थीी।
38. जैसा विक देखा गया है, इस रह का क % विक शराब क े जारी विकए जाने की स्टिस्र्थीति क पहुं0 न पाने क े कारण ड्यूटी की मांग अनति क ृ रह ी है, इस रह से उच्च न्यायालय क े समक्ष नहीं उठाया गया र्थीा और न ही उच्च न्यायालय ने उस आ ार पर कार%वाई की र्थीी। 0ाहे जो भी हो, इसक े विवपरी भी क % अमान्य रह ा है और इसे अस्वीकार विकया जाना आवsयक है।
39. यह एक मौलिलक संवै ाविनक अति देश है और इसक े विवस् ार में जाने की आवsयक ा नहीं है विक संविव ान क े अनुच्छेद 265 क े अनुसार, कर का उद्ग्रहण और संग्रहण दोनों विवति द्वारा प्राति क ृ होना 0ाविहए, जैसा विक सोमैया ऑगrविनक्स (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा अभिभविन ा%रिर विकया गया है। यह एक सामान्य बा है विक सू0ी 2 की प्रविवविष्ट 51 क े आ ार पर, राज्य को राज्य में विनर्निम या उत्पाविद मानव उपभोग क े लिलए शराब पर उत्पाद शुल्क लगाने क े लिलए अति क ृ विकया गया है। प्रति वादी क ं पनी की ओर से, प्रश्नग शराब पर, जो आग में नष्ट हो गई र्थीी और विववाद्यक क े बिंबदु क नहीं पहुं0ी र्थीी, उत्पाद शुल्क उद्गृही करने क े अपीलार्थी4-राज्य क े प्राति कार क े बारे में उठाए गए प्रश्न का पया%प्त उत्तर उस घटना और उस बिंबदु से संबंति सिसद्धां ों क े संदभ% में विदया जा सक ा है जहां राज्य को उत्पाद शुल्क उद्गृही करने का अति कार है और उसका भुग ान करने क े लिलए प्रति वादी का त्संबं ी दातियत्व अस्टिस् त्व में आ ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 39.[1] उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम विद•ी क्लॉर्थी विमल्स एवं एक अन्य (1991) 1 एस. सी. सी. 454, क े मामले में न्यायालय ने इस प्रश्न पर विव0ार विकया विक क्या परिरवहन में शराब की बबा%दी पर उत्पाद शुल्क लगाया जा सक ा र्थीा और यह अभिभविन ा%रिर विकया विक विवभेदक शुल्क, जो अत्यति क अपव्यय रिरपोट% विकए जाने पर लगाया गया र्थीा, उसका उत्पाद शुल्क होना खत्म नहीं हुआ, भले ही यह अति रिरक्त अपव्यय की घोर्षणा पर लगाया गया र्थीा, क्योंविक 'कर योग्य विबन्दु शराब का उत्पादन या विनमा%ण र्थीा।' इस न्यायालय ने आगे यह स्पष्ट विकया विक उत्पाद शुल्क क े वल एक बिंबदु बना रहा, जो 1910 क े अति विनयम की ारा 28 में वर्भिण बिंबदुओं में से एक बिंबदु पर लगाया जा सक ा र्थीा। इस न्यायालय द्वारा प्रासंविगक विटप्पभिणयों और विवति की घोर्षणा को उपयोगी रूप से इस प्रकार प्रस् ु विकया जा सक ा हैः- “8. अति विनयम की मूल ारा 28 को अब इसकी ारा (1) क े रूप में पुनः संख्यांविक विकया गया है और 1970 क े उत्तर प्रदेश अति विनयम 7 की ारा 2 द्वारा अं ःस्र्थीाविप ाराएं (2) और (3) स्पष्ट रूप से भार ीय विनर्निम विवदेशी शराब को शाविमल कर ी हैं।इस बारे में कोई विववाद नहीं हो सक ा विक विमलिलटरी रम ारा क े ह उत्पाद शुल्क योग्य भार ीय विनर्निम विवदेशी शराब में से एक है। पहला, यह उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं पर एक शुल्क है, न विक वस् ुओं की विबक्री या विबक्री से प्राप्त राभिश पर। यह उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं क े उत्पादन या विनमा%ण से संबंति है। कर योग्य बिंबदु शराब का उत्पादन या विनमा%ण है। दूसरा, जैसा विक ए. बी. अब्दुल काविदर बनाम क े रल राज्यःए. आई. आर. 1962 एस. सी. 922 क े अनुसार, उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं क े विनमा%ण और उत्पादन पर लगाया गया उत्पाद शुल्क क े वल इसलिलए समाप्त नहीं हो ा है क्योंविक विनमा%ण या उत्पादन क े बाद क े 0रण में विवति व लगाया जा ा है। यह मामला क ें द्रीय उत्पाद शुल्क का र्थीा, लेविकन यह सिसद्धां यहां भी समान रूप से लागू हो ा है। ऐसा नहीं है विक तिडस्टिस्टलरी से शराब जारी करने क े 0रण लगाए जाने क े कारण या अति रिरक्त अपव्यय की घोर्षणा क े बाद एकत्र mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकए जाने क े कारण यह उत्पाद शुल्क नहीं रह ा। उत्पाद शुल्क क े उद्ग्रहण पर सू0ी-II की प्रविवविष्ट 51 क े ह विव ायी क्षम ा क े वल राज्य में विवविनर्निम या उत्पाविद वस् ुओं से संबंति है जैसा विक विबमल 0ंद्र बनज[4] बनाम मध्य प्रदेश राज्यः1970 (2) एससीसी 467 क े मामले में ारिर विकया गया। इस बा पर कोई विववाद नहीं है विक विनया% विकए गए विमलिलटरी रम का उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य में विकया गया र्थीा। मैसूर राज्य बनाम डी. कवासजी 1970 (3) एस. सी. सी. 710 जो मैसूर उत्पाद शुल्क अति विनयम पर र्थीा, में यह अभिभविन ा%रिर विकया गया र्थीा विक उत्पाद शुल्क विनतिश्च रूप से उत्पाद शुल्क योग्य वस् ुओं क े उत्पादन या विवविनमा%ण से विनकट ा से संबंति होना 0ाविहए और इससे कोई फक % नहीं पड़ ा विक यह उत्पादन या विवविनमा%ण क े समय न लगाकर बस्टिल्क बाद क े 0रण में लगाया गया र्थीा और भले ही इसे खुदरा विवक्र े ा से एकत्र विकया गया र्थीा। इसलिलए, इस मामले में अलग-अलग शुल्क का एक उत्पाद शुल्क क े रूप में रहना खत्म नहीं हुआ, भले ही यह अति रिरक्त अपव्यय की घोर्षणा क े बाद विनया% क पर लगाया गया र्थीा। कर योग्य बिंबदु अभी भी उत्पादन या विनमा%ण ही र्थीा। * * * * * *
17. यविद विकसी खेप में सैन्य रम की मात्रा में से कु छ विहस्से को परिरवहन में बबा%दी का दावा विकया जा ा है और उस सीमा क विनया% नहीं विकया जा ा है, ो राज्य क े पास उति0 स्पष्टीकरण क े अभाव में यह अनुमान लगाने का कारण होगा विक इसका विनस् ारण विनया% क े अलावा अन्य रीक े से विकया गया है और उस पर अलग-अलग उत्पाद शुल्क लगाया गया है। एक अति विनयम का अर्थी% उस शरार को ध्यान में रख े हुए लगाया जाना 0ाविहए सिजसका समा ान करने क े लिलए इसे तिडजाइन विकया गया र्थीा। इसमें कोई विववाद नहीं है विक उत्पाद शुल्क एकल बिंबदु शुल्क है और इसे ारा 28 में उसि•लिख बिंबदुओं में से विकसी एक पर लगाया जा सक ा है। (अंडरलाइन विकया गया) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
39. 2. मेसस% मोहन मीविकन ब्रूअरी लिलविमटेड (उपयु%क्त) क े मामले में, ब्रूअरी में अत्यति क अपव्यय क े संबं में बीयर की उत्पाद शुल्क करा ान का प्रश्न उठा। विद•ी कपड़ा विमल क े मामले में उपयु%क्त विनण%य क े सार्थी-सार्थी कई अन्य फ ै सलों और 1910 क े अति विनयम की ारा 29 (ङ) (ट) की व्याख्या क े संदभ% में, इस न्यायालय ने पुविष्ट की विक शराब (उस मामले में बीयर) पर उत्पाद शुल्क की अविनवाय% ा विनम्नलिललिख शब्दों में विनमा%ण या उत्पादन क े 0रण में हुईः - “33. उत्तर प्रदेश उत्पाद शुल्क अति विनयम की ारा 29 (ङ) (ट) यह स्पष्ट कर ी है विक विकसी ब्रुअरी में विनर्निम बीयर क े मामले में, ब्रूअरी से उत्पाविद या जारी की गई या विकसी गोदाम से जारी की गई मात्रा पर प्रभारिर दर से उत्पाद शुल्क लगाया जा सक ा है। इसका म लब है विक विफल्टरेशन की प्रविक्रया से गुजरने वाली बीयर क े संबं में, विफल्टरेशन प्रविक्रया क े अं में उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा जब इसे भंडारण/बॉटलिंलग टैंक में प्राप्त विकया जा ा है या जब इसे ब्रूवरी से जारी विकया जा ा है। विकण्वन पात्रों से सी े खीं0े गए ड्राट विबयर क े संबं में, आगे की प्रविक्रया या विनस्पंदन क े विबना, उत्पाद शुल्क की विनकासी या ो विकण्वन प्रविक्रया क े अं में या जब इसे ब्रूवरी से जारी विकया जा ा है। (अंडरलाइन विकया गया)
40. वही उपबं [अर्थीा% ्, 1910 क े अति विनयम की ारा 29 (ङ) (ट)], सिजसकी व्याख्या इस न्यायालय द्वारा विकसी ब्रुअरी में विवविनर्निम विबयर क े संबं में मेसस% मोहन मीविकन क े पूव क्त विनण%य में की गई है, ारा 18 क े अ ीन स्र्थीाविप तिडस्टिस्टलरी में विवविनर्निम स्टिस्परिरट क े मामले में आवsयक परिरव %नों क े सार्थी लागू हो ा है। विनःसंदेह, प्रश्नग शराब प्रति वादी क ं पनी द्वारा ारा 18 क े ह स्र्थीाविप अपनी तिडस्टिस्टलरी में की गई र्थीी। इस प्रकार उत्पाविद शराब आसवन प्रविक्रया क े अं में उत्पाद शुल्क क े लिलए ब योग्य हो जा ी र्थीी जब इसे भंडारण/बॉटलिंलग टैंकों में प्राप्त विकया जा ा र्थीा या जब इसे आसवन से जारी विकया जा ा र्थीा। इसे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दूसरे शब्दों में कहें ो कर योग्य बिंबदु इस शराब का उत्पादन या विनमा%ण र्थीा, क्योंविक यह वस् ुओं पर एक शुल्क र्थीा, न विक वस् ुओं की विबक्री या विबक्री से प्राप्त राभिश पर।
41. ारा 19 क े अनुसार, कोई भी मादक पदार्थी% (और इसमें स्पष्ट रूप से प्रत्यर्थी4 द्वारा विनर्निम शराब भी शाविमल है) तिडस्टिस्टलरी या भंडारण स्र्थीान से ब क नहीं हटाया जा सक ा है जब क विक उस पर उद्ग्रहणीय शुल्क का भुग ान न विकया गया हो या उसक े भुग ान क े लिलए एक बांड का विनष्पादन न विकया गया हो। अति विनयम और विनयमों की समग्र योजना पर विव0ार कर े हुए ारा 19 में 'हटाना' अभिभव्यविक्त की व्याख्या करना उति0 नहीं होगा, सिजसमें उत्पाविद या विवविनर्निम और भंडारिर की गई स्टिस्परिरट की क ु ल मात्रा की अनुमेय सीमा से अति क की बबा%दी शाविमल हो। 1910 क े अति विनयम की ारा 17 से 19 और 28 और 29 की योजना और इस न्यायालय क े उद्धरणों पर एक व्यापक नजर डालने पर यह संदेह नहीं रह जा ा है विक आसवन की प्रविक्रया क े अं में या आसवन से शराब जारी विकए जाने क े समय शराब उत्पाद शुल्क लगाए जाने क े योग्य हो 0ुकी र्थीी। इस शुल्क की मात्रा का बिंबदु, भले ही ारा 29 क े प्राव ान क े संदभ% में विबक्री क े लिलए जारी होने की ारीख से समय क े बिंबदु से जुड़ा हुआ हो, 'शुल्क लगाए जाने क े बिंबदु' से संबंति नहीं है, जो शराब को आसु करने और बॉटलिंलग टैंक में प्राप्त होने या अन्यर्थीा तिडस्टिस्टलरी से जारी विकए जाने पर हो जा ा है। दूसरे शब्दों में, अनुबंति वेयरहाउस में रखी गई शराब पहले से ही उत्पाद शुल्क क े अ ीन हो गई र्थीी, सिजससे वेयरहाउस से विबक्री क े लिलए जारी होने की ारीख और समय पर लागू दर क े अनुसार शुल्क को प्रभारिर विकया जाना र्थीा। यह दोहराया जा ा है विक कर योग्य बिंबदु शराब का उत्पादन या विनमा%ण र्थीी, न विक विबक्री। इस मामले की दृविष्ट से, यह क % विक प्रश्नग शुल्क अति रोपण विवति द्वारा प्राति क ृ नहीं है और भार mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े संविव ान क े अनुच्छेद 265 द्वारा प्रभाविव है, अमान्य है और इसे अस्वीकार विकया जाना अपेतिक्ष है।
42. जहां क प्रश्नग मांग क े लिलए लागू विनयमों का संबं है, उच्च न्यायालय ने यह क % विदया है विक व %मान विनयम सं0ालन में अपव्यय का मामला नहीं र्थीा और इसलिलए, 1969 क े विनयमों का विनयम 7 (11) लागू नहीं होगा। प्रति वादी क ं पनी ने यह भी क % विदया है विक 1969 क े विनयमों का विनयम 7 (11) अप्रयोज्य है और यह कहा गया है विक राज्य सरकार ने भी आबकारी आयुक्त को आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 क े ह काय%वाही करने का विनदrश विदया र्थीा, न विक 1969 क े विनयमों क े विनयम 7 (11) क े ह, जो क े वल सं0ालन और भंडारण क े सामान्य क्रम में अपव्यय से संबंति है। यह भी क % विदया गया है विक सरकार द्वारा आबकारी विनयमावली क े क े वल विनयम 709 का सहारा लिलया जा सक ा है, लेविकन उस स्टिस्र्थीति में, तिडस्टिस्टलरी को क े वल भी उत्तरदायी बनाया जा सक ा है जब यह विदखाया जा सक ा है विक तिडस्टिस्टलरी की ओर से विकसी भी लापरवाही क े कारण सरकार को नुकसान हुआ है।
43. उपयु%क्त कy क े संबं में, यद्यविप प्रश्नग मांग आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 क े लिलए अविनवाय% रूप से संदर्भिभ होगी, लेविकन 1969 क े विनयमों क े विनयम 7 (11) में बॉटलिंलग और भंडारण में वास् विवक हाविन क े लिलए एक महीने क े दौरान संग्रही स्टिस्परिरट की क ु ल मात्रा पर 1% क क े भत्ते का प्राव ान है और लाइसेंस ारी 1% से अति क अपव्यय पर शुल्क क े भुग ान क े लिलए सिजम्मेदार हो ा है। यह विनयम 7 (11) यह स्पष्ट कर ा है विक भंडारण में होने वाली बबा%दी क े संबं में भी भत्ता एक महीने क े दौरान संग्रही स्टिस्परिरट की कु ल मात्रा का क े वल 1 प्रति श है। इस प्राव ान को आबकारी विनयमावली क े विनयम 813 क े सार्थी भी पढ़ा जा सक ा है, जो विनर्निदष्ट प्रति श क े सार्थी तिडस्टिस्टलरी में विवभिभन्न mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रकार की स्टिस्परिरट क े लिलए मुफ् अपभिशष्ट भत्ता प्रदान कर ा है, नाम ः सादा और मसालेदार स्टिस्परिरट (0.7%), संशोति और परिरष्क ृ स्टिस्परिरट (0.4%), और तिडने0ड% स्टिस्परिरट (0.5%)। इस मामले का महत्वपूण% पहलू यह है विक हालांविक विवभिभन्न प्रकार की स्टिस्परिरट क े लिलए अपव्यय भत्ता प्रदान विकया जा ा है, लेविकन इसमें विवशेर्ष रूप से बो लबंद स्टिस्परिरट को बाहर रखा गया है।
44. कानून क े प्रासंविगक प्राव ानों पर एक व्यापक दृविष्ट यह स्पष्ट कर ी है विक जहां क आईएमएफएल का संबं है, बो लबंद स्टिस्परिरट क े संबं में विकसी भी बबा%दी भत्ते क े लिलए उत्पाद शुल्क विनयमावली में कोई प्राव ान नहीं विकया गया है, लेविकन 1969 क े विनयमों क े विनयम 7 (11) क े अनुसार, एक महीने क े दौरान संग्रही की गई स्टिस्परिरट की क ु ल मात्रा पर 1% क क े भत्ते को बॉटलिंलग और भंडारण में वास् विवक नुकसान क े लिलए अनुमति दी जा सक ी है। इसक े अलावा विकसी भी रह की बबा%दी या हाविन क े लिलए कोई भी भत्ता, जाविहर है, अननुज्ञेय है। यह क % अबूझ नहीं है। जैसा विक देखा गया है, आसवन की प्रविक्रया से गुजरी शराब क े संबं में, आसवन प्रविक्रया क े अं में या जब इसे आसवन से जारी विकया गया, ब वह उत्पाद शुल्क क े योग्य हो गयी। इस प्रकार, बो लबंद स्टिस्परिरट की कोई भी हाविन या बबा%दी सी े ौर पर उत्पाद शुल्क की हाविन होगी, जो पहले से ही वसूली योग्य हो गई र्थीी। विनयम बनाने वाले प्राति करण ने लाइसेंसी को महीने क े दौरान संग्रही स्टिस्परिरट की क ु ल मात्रा पर 1% से अति क अपव्यय पर शुल्क क े भुग ान क े लिलए सिजम्मेदार बना े समय यह सुविनतिश्च करने क े लिलए पया%प्त साव ानी बर ी है विक विकसी भी अपव्यय क े काय% द्वारा बो लबंद स्टिस्परिरट क े आ ार पर सरकार को उत्पाद शुल्क राजस्व की कोई हेराफ े री न हो। इस प्रकार, न ो प्रति वादी क ं पनी की ओर से क % और न ही विनयम 7 (11) की अप्रयोज्य ा क े बारे में उच्च न्यायालय की विटप्पभिणयाँ स्वीकार की जा सकी। दूसरे शब्दों में, 1969 क े विनयमों क े विनयम 7 (11) को कानूनी परिरणामों क े लिलए ध्यान mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में रखना आवsयक है विक जहां क बो लबंद स्टिस्परिरट का संबं है, लाइसेंसी 1% से अति क विकसी भी प्रकार की बबा%दी पर शुल्क क े भुग ान क े लिलए सिजम्मेदार है। इस प्राव ान क े सार्थी, आबकारी विनयमावली क े विनयम 709 में यह स्पष्ट विकया गया है विक तिडस्टिस्टलरी स्टिस्परिरट क े स्टॉक की सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार है और उनकी लापरवाही से सरकार को होने वाले विकसी भी राजस्व नुकसान की भरपाई करने क े लिलए उत्तरदायी है।
45. इसलिलए, प्रति वादी क ं पनी की ओर से उठाए गए कानूनी मुद्दे का एक सी ा जवाब यह है विक प्रश्नग मांग को अनति क ृ नहीं कहा जा सक ा है, लेविकन, इसकी वै ा इस सवाल क े जवाब पर विनभ%र करेगी विक क्या उत्पाद शुल्क विनयमावली क े विनयम 709 क े संदभ% में प्रति वादी क ं पनी पर लापरवाही का आरोप लगाया जा सक ा है। हम 00ा% क े अगले खंड में इस प्रश्न से संबंति विवभिभन्न विवशेर्ष ाओं की जां0 करेंगे। क्या प्रति वादी क ं पनी आग में नष्ट शराब पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी है 46 जैसा विक देखा गया है, प्रश्नग आग की घटना ने आबकारी आयुक्त को प्रति वादी क ं पनी से आग में नष्ट हुए आईएमएफएल क े स्टॉक पर उत्पाद शुल्क की वसूली का प्रस् ाव करने क े लिलए प्रेरिर विकया और प्रति वादी क ं पनी ने कहा विक यह घटना मानव विनयंत्रण से परे कारणों से हुई र्थीी और इसकी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई र्थीी। र्थीाविप, अं ः, आबकारी आयुक्त ने अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी यह अभिभविन ा%रिर कर े हुए 11.07.2006 विदनांविक आदेश पारिर विकया विक प्रति वादी क ं पनी ने अच्छी गुणवत्ता क े अविŽ रो ी विवद्यु उपकरणों की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व्यवस्र्थीा नहीं की र्थीी, सिजसक े कारण यह घटना हुई र्थीी और तिडस्टलिलरी में स्टॉक क े सार्थी हुई लापरवाही को दैवीय क ृ त्य नहीं कहा जा सक ा । उच्च न्यायालय ने हालांविक कहा विक आबकारी आयुक्त द्वारा विनकाला गया विनष्कर्ष% सारहीन र्थीा एवं अनुमानों पर आ ारिर र्थीा। उच्च न्यायालय ने यह भी म व्यक्त विकया है विक जब कोई राजकोर्षीय दातियत्व पूव%व 4 श %, अर्थीा% ् संबंति व्यविक्त की ओर से की गई लापरवाही पर स्र्थीाविप विकया गया हो, ब कोई सिजम्मेदारी ब क य नहीं की जा सक ी जब क विक ऐसी लापरवाही विकसी सामग्री पर आ ारिर न हो। अपीलार्थी4 क े अनुसार, प्रश्नग घटना क े लिलए प्रति वादी क ं पनी की ओर विकसी लापरवाही को ही सिजम्मेदार ठहराया जा सक ा है और यह ईश्वर का काय% नहीं र्थीा क्योंविक विवद्यु अवस्र्थीापना और शॉट% सर्निकट में गल ी क े कारण ऐसा हुआ और घटना से ब0ा जा सक ा र्थीा यविद प्रति वादी क ं पनी द्वारा उति0 और आवsयक देखभाल की गई हो ी। दूसरी ओर, प्रति वादी की ओर से, हालांविक, दैवीय क ृ त्य से संबंति सिसद्धां ों का हमारे सामने इस प्रकार उ•ेख नहीं विकया गया है, लेविकन क % यह है विक आग स्टिस्परिरट क े स्टॉक की सुरतिक्ष अभिभरक्षा बनाए रखने में प्रति वादी क ं पनी की ओर से विकसी लापरवाही क े कारण नहीं हुई र्थीी और यह घटना ऐसी र्थीी जो मानव विनयंत्रण से परे कारणों से हुई र्थीी। यह भी क % विदया गया है विक पूरी तिडस्टिस्टलरी (गोदाम सविह ) विवभाग क े लॉक और 0ाबी क े ह है और विवभाग तिडस्टिस्टलरी पर पूण% विनयंत्रण और पय%वेक्षण कर रहा है और इसलिलए, प्रति वादी पर लापरवाही की बा अति रोविप नहीं की जा सक ी। तिडस्टिस्टलरी और गोदाम पर विवभाग क े विनयंत्रण का प्रभाव:
47. विवरो ी प्रस् ुति यों को ध्यान में रख े हुए, हम तिडस्टिस्टलरी और गोदाम पर राज्य उत्पाद शुल्क विवभाग क े पय%वेक्षण और विनयंत्रण से संबंति मुद्दे से शुरू कर सक े हैं। प्रति वादी क ं पनी की ओर से इस संबं में विदए गए क % विनरा ार हैं और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े वल अस्वीकार विकए जाने क े लिलए नोट विकया गया है। 1910 क े अति विनयम, 1969 क े विनयम और उत्पाद शुल्क विनयमावली की योजना में यह स्पष्ट है विक सरकार आग या 0ोरी या विकसी अन्य कारण से तिडस्टिस्टलरी में संग्रही विकसी भी स्टिस्परिरट क े विवनाश, नुकसान या क्षति क े लिलए उत्तरदायी नहीं है (उत्पाद शुल्क विनयमावली क े विनयम 708 क े अनुसार)। दूसरी ओर, तिडस्टिस्टलरी को स्टिस्परिरट क े स्टॉक की सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए उत्तरदायी बनाया गया है और उसे उनकी लापरवाही क े कारण सरकार को हुए विकसी भी राजस्व नुकसान की भरपाई करने क े लिलए भी उत्तरदायी बनाया गया है। 47.[1] अपीलार्थी4 की ओर से यह उति0 ही प्रति वाद विकया गया है विक तिडस्टिस्टलरी में आबकारी अति कारिरयों की विनयुविक्त का उद्देsय राजस्व संग्रह करक े राज्य क े विह ों की रक्षा करना और 0ोरी, बबा%दी, अवै विबक्री क े विकसी भी काय% पर रोक लगाना और विनयमों का उति0 काया%न्वयन सुविनतिश्च करना है। आबकारी विनयमावली का विनयम 736 यह स्पष्ट कर ा है विक उन भवनों या कमरों क े दरवाजे सिजनका उपयोग स्टिस्परिरट क े भंडारण क े लिलए विकया जा ा है, उन पर दोहरे ाले हैं, जहां एक ाला आबकारी विवभाग का है और दूसरा तिडस्टिस्टलरी का है। 1969 क े विनयमों और उत्पाद शुल्क विनयमावली क े अन्य प्राव ानों में यह भी स्पष्ट विकया गया है विक तिडस्टिस्टलरी की सामान्य व्यवस्र्थीा और प्रबं न क े संबं में,विवस् ृ प्राव ान विकए गए हैं जैसे विक पाइप क ै से विबछाए जाएंगे, विफक्स विकए जाएंगे और पेंट विकए जाएंगे, विक क ै से लॉक ाले जड़े जाएं आविद। तिडस्टलरी क े प्रबं न में छोटे से परिरव %न क े लिलए भी आबकारी आयुक्त की पूव% अनुमति (विनयम 771) आवsयक हो ी है और मरम्म आविद की भी सू0ना देनी हो ी है (विनयम 772). उनक े विववरण पत्र में प्रत्येक 0रण में तिडस्टिस्टलरी क े कामकाज पर आबकारी विवभाग क े सख् पय%वेक्षण और विनयंत्रण का प्राव ान है, लेविकन यह पय%वेक्षण और विनयंत्रण तिडस्टिस्टलरी को स्टिस्परिरट क े भंडार की सुरतिक्ष अभिभरक्षा और अपव्यय से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ब0ने की विदशा में अपने क %व्य और सिजम्मेदारी से मुक्त नहीं कर ा है। इस संबं में विकसी भी संदेह को उत्पाद शुल्क विनयमावली क े विनयम 708 और 709 और 1969 क े विनयमों क े विनयम 7 (11) क े संयुक्त अध्ययन से प्रभावी रूप से दूर विकया जा सक ा है। इसलिलए, प्रति वादी क ं पनी की ओर से इस संबं में विकए गए आग्रह को अस्वीकार विकया जा ा है. लापरवाही
48. अब, इस मामले क े मूल में प्रवेश करने क े लिलए, अर्थीा% ्, क्या आग में शराब क े नष्ट होने से सरकार को हुई राजस्व की हाविन क े लिलए प्रति वादी क ं पनी की ओर हुई विकसी लापरवाही को सिजम्मेदार ठहराया जा सक ा है, हम लापरवाही क े आ ार पर बनने वाले दातियत्व से संबंति कानूनी सिसद्धां ों और लापरवाही क े आ ार पर विकसी भी दावे क े संबं में अपवादों और ब0ाव को पर भी ध्यान दे सक े हैं।
49. "लापरवाही" “अपक ृ त्य” का एक ऐसा वग% है जो दातियत्व की ओर ले जा ा है। "उत्तरदातियत्व" का न्यायशास्त्रीय सिसद्धां सालमण्ड क े न्यायशास्त्र[9] में सटीक रूप से विनम्नव परिरभाविर्ष है:- "उत्तरदातियत्व या सिजम्मेदारी आवsयक ा का बं न है जो अपरा ी और गल ी क े उप0ार क े बी0 मौजूद हो ी है।" "दातियत्व" क %व्य क े उ•ंघन से उत्पन्न हो ा है, जो विकसी काय% या 0ूक क े रूप में हो सक ा है। हमें, व %मान प्रयोजन क े लिलए, उत्तरदातियत्व क े सिसविवल या विक्रविमनल और उप0ारात्मक या दांतिडक लक्षणों क े वग4करण पर गहराई से विव0ार करने की आवsयक ा नहीं है। व %मान मामले में, हम मुख्य रूप से लापरवाही से 9 12 वां संस्करण, पृ. 349 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उत्पन्न दातियत्व क े प्रश्न पर विव0ार कर रहे हैं। अं व%लिल प्रश्नों और लागू उपबं ों को ध्यान में रख े हुए, शब्दकोशों और विवविनतिश्च मामलों क े संदभ% में 'लापरवाही' शब्द क े अर्थी% और भाव को समझना उति0 होगा। 49.[1] क ं साइज ऑक्सफोड% तिडक्शनरी 10 में लापरवाही शब्द को विनम्नानुसार परिरभाविर्ष विकया गया और समझाया गया हैः- “लापरवाही' विकसी बा पर उति0 ध्यान देने में विवफल ा, विवति - साव ानी क े क %व्य का उ•ंघन सिजससे क्षति हुई हो” इस पद का विवशेर्षण ‘लापरवाह’ है और इसका विक्रया विवशेर्षण ‘लापरवाही से’ है। गहराई से समझने क े लिलए इन अभिभव्यविक्तयों को विक्रया 'उपेक्षा करना,लापरवाही करना' क े सार्थी सहसंबद्ध करने की आवsयक ा है सिजसे उसी शब्दकोश में विनम्नलिललिख रूप में परिरभाविर्ष विकया और समझाया गया हैः- “उपेक्षा करना - विक्र. उति0 देखभाल या ध्यान देने में विवफल रहना। कु छ करने में विवफल- सं. उपेक्षा करने की दशा या प्रविक्रया - क ु छ करने में विवफल ा।
49.2. वेबस्टर की र्थीड% न्यू इंटरनेशनल तिडक्शनरी 11 में 'लापरवाह' और 'लापरवाही' शब्दों को विनम्नानुसार परिरभाविर्ष विकया और समझाया गया हैः- "उपेक्षा, लापरवाही करना 1 a: कम या कोई ध्यान या सम्मान नहीं देना: इस प्रकार से व्यवहार करना जैसे इसका कोई महत्व न हो या कम महत्व हो। न मानना, कम < क ु छ अति महत्वपूण% विवर्षयों को ~ed -ed -ब्रूस पेन> <~ed -ed छात्रों की वास् विवक आवsयक ा> b: सम्यक या पया%प्त ध्यान न देना: उति0 ध्यान न देना … 2: लापरवाही से क ु छ करने में 0ूक (वह जो विकया 10 11 वां संस्करण सं संस्करणस्करण, पृ. 958. 11 1976 सं संस्करणस्करण खं संस्करण. II पृ. 1513 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जाना र्थीा) या पूरी रह या लगभग पूरी रह: लापरवाही या आशय से अपूण% या विबना ध्यान विदए छोड़ना: “लापरवाही 1 a: लापरवाह होने की स्टिस्र्थीति या प्रविक्रया b: जैसा एक सामान्य बुतिद्ध का व्यविक्त कर ा वैसा न करना;” 49.[3] ब्लैक की लॉ तिडक्शनरी12 में 'लापरवाही' और इसक े कई रूपों और विवशेर्ष ाओं को समझाया गया है। व %मान प्रयोजन क े लिलए, हम उपयोगी रूप से विनम्नलिललिख प्रासंविगक अंशों को उद्धृ कर सक े हैंः- “लापरवाही,(14 ग) 1. देखभाल क े मानक का प्रयोग करने में विवफल ा जो विक एक उति0 विववेकपूण% व्यविक्त ने समान स्टिस्र्थीति में प्रयोग की होगी; कोई भी आ0रण जो दूसरों को नुकसान क े अनुति0 जोलिखम से ब0ाने क े लिलए स्र्थीाविप कानूनी मानक से नी0े आ ा है, उस आ0रण को छोड़कर जो जानबूझकर, जानबूझकर, या जानबूझकर दूसरों क े अति कारों की अवहेलना कर ा है; एक उति0 और विववेकपूण% व्यविक्त विवशेर्ष परिरस्टिस्र्थीति यों में क्या नहीं करेगा, या ऐसा करने में विवफल ा जो ऐसा व्यविक्त ऐसी परिरस्टिस्र्थीति यों में करेगा… सविक्रय लापरवाही(1875) विकसी सकारात्मक या सही काय% क े परिरणामस्वरूप होने वाली लापरवाही, जैसे विक अवरो क े माध्यम से गाड़ी 0लाना Cf विनस्टिष्क्रय उपेक्षा। जानबूझकर लापरवाही (1909) लापरवाही सिजसमें क ा% को इस अनुति0 जोलिखम क े बारे में प ा है विक वह या वह गंभीर लापरवाही कर रहा है। आकस्टिस्मक लापरवाही एक वादी की विवफल ा (1) अपने परिरवेश पर उति0 ध्यान देने में वादी की असफल ा, सिजससे विक प्रति वादी की लापरवाही से उत्पन्न ख रे का प ा लगाया जा सक े, (2) एक बार ख रे से ब0ने क े लिलए 12 10th सं संस्करणस्करण पृ. 1196-1198 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उति0 योग्य ा, देखभाल, परिरश्रम और कौशल का उपयोग विकया जा सक े, या (3) भविवष्य क े ख रों से ब0ने क े लिलए एक क % संग व्यविक्त की रह ैयार हो सक े । घोर लापरवाही(16 ग) 1.र्थीोड़ा सा भी परिरश्रम या देखभाल की कमी। घोर उपेक्षा और सा ारण उपेक्षा क े बी0 अं र मात्रा का है, गुणवत्ता का नहीं। पारंपरिरक रूप से घोर लापरवाही को इस रह क े काम में भी की 0ूक कहा जा ा है जैसे विक आद न लापरवाह और असाव ान लोग वास् व में अपने स्वयं क े प्रति या संपलित्त को ख रे से ब0ाने क े लिलए प्रयास कर े हैं। - जानबूझकर और मनमाने रीक े से विकया गया कदा0ार भी कहा जा ा है 2. विकसी कानूनी क %व्य क े प्रति लापरवाही और दूसरे पक्ष को होने वाले परिरणामों की स0े अवहेलना, जो आम ौर पर उदाहरणीय भरपाई वसूल सक े हैं। लापरवाही; प्र0ंड लापरवाही; इराद न लापरवाही; इराद न और प्र0ंड लापरवाही; इराद न और प्र0ंड कदा0ार; ख रनाक लापरवाही; बड़ी लापरवाही। अनजाने में लापरवाही(18 ग) लापरवाही, सिजसमें क ा% को उस अनुति0 जोलिखम क े बारे में प ा नहीं है, जो वह पैदा कर रहा है, लेविकन इसे पहले से ही देख लेना 0ाविहए र्थीा और इससे ब0ना 0ाविहए र्थीा। सा ारण लापरवाही भी कहा जा ा है। विनस्टिष्क्रय उपेक्षा.(18 सी) काय% करने में विकसी व्यविक्त की विवफल ा या 0ूक क े परिरणामस्वरूप लापरवाही, जैसे साव%जविनक संपलित्त से ख रनाक स्टिस्र्थीति यों को हटाने में विवफल रहना। Cf. सविक्रय उपेक्षा. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 49.[4] पी. रामनार्थी अय्यर क े एडवांस्ड लॉ लेस्टिक्सकन13 में अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी 'लापरवाही' पद क े विवभिभन्न अर्थीy का उ•ेख विनम्नलिललिख शब्दों में विकया गया हैः- “लापरवाही. उस देखभाल का उपयोग करने में विवफल ा जो एक क % संग और विववेकशील व्यविक्त उस या वैसी परिरस्टिस्र्थीति यों में उपयोग कर ा। कानून में लापरवाही क %व्य पालन में कमी को दशा% ी है। ऐसी देखभाल का उपयोग करने में विवफल ा जो एक विववेकपूण% और साव ान व्यविक्त समान परिरस्टिस्र्थीति यों में उपयोग करेगा। लापरवाही "ऐसी देखभाल, स क % ा और सजग ा की कमी है, जैसी परिरस्टिस्र्थीति यों क े ह उति0 और सामान्य विववेक द्वारा उपयोग विकया जा ा।"
50. न्यायशास्त्र पर साल्मंड14 में विग्रल बनाम जनरल आयरन स्क्र ू कोलिलयरी क ं.: (1866) एल. आर. 1 सी. पी. को संदर्भिभ विकया गया है विक लापरवाही "ऐसी देखभाल की अनुपस्टिस्र्थीति है जैसा करना प्रति वादी का क %व्य र्थीा " आगे आशतिय एवं अनाशतिय लापरवाही क े सूक्ष्म अं र की व्याख्या की गयी है- दूसरी बा यह है विक लापरवाही या बेपरवाही आवsयक रूप से विव0ार या अनाशय ा में शाविमल नहीं है। विनःसंदेह यह इसका सबसे सामान्य रूप है, लेविकन यह एकमात्र रूप नहीं है। अगर मैं विकसी को नुकसान पहुं0ा ा हूं, इसलिलए नहीं विक मैं ऐसा करना 0ाह ा र्थीा, बस्टिल्क इसलिलए विक मैंने विव0ार नहीं विकया और अपने काम की ख रनाक प्रक ृ ति पर ध्यान नहीं विदया, या मूख% ापूण% रीक े से यह मान ा र्थीा विक कोई ख रा नहीं है, ो मैं विनतिश्च रूप से लापरवाही का दोर्षी हूं। लेविकन एक और प्रकार की लापरवाही है, सिजसमें कोई असाव ानी या लापरवाही नहीं है। अगर मैं विकसी भीड़भाड़ वाली सड़क 13 5 वां संस्करण सं संस्करणस्करण खं संस्करणड 3 पृ. 3435 14 उपरोक्त पृ. 380 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर गुस्से से गाड़ी 0ला ा हूं, ो मुझे इस बा का पूरा एहसास होगा विक मैं दूसरे लोगों को विक ने गंभीर जोलिखम में डाल सक ा हूं। मेरा विकसी को 0ोट पहुं0ाने का इरादा नहीं है, लेविकन मैं जानबूझकर और जान े हुए उन्हें ख रे में डाल ा हूं। विफर भी अगर कोई घा क दुघ%टना हो ी है, ो मैं, कम से कम, जानबूझकर नहीं, ो लापरवाही से की गई हत्या क े लिलए सिजम्मेदार हूं। जब मैं जानबूझकर विकसी अन्य को गल रीक े से नुकसान पहुं0ाने का जोलिखम उठा ा हूं, लेविकन उसे नुकसान पहुं0ाने की इच्छा क े विबना, और वास् व में नुकसान हो ा है, ो यह जानबूझकर विकया माना जाएगा, क्योंविक यह वांभिछ नहीं र्थीा, न ही अनजाने में, क्योंविक यह संभव र्थीा या यहां क विक संभाविव भी र्थीा, लेविकन विफर भी लापरवाही से हुआ माना जाएगा (सी)। लापरवाही ब पया%प्त देखभाल का उपयोग करने में विवफल ा हो ी है, और यह विवफल ा विवभिभन्न कारकों क े कारण हो सक ी है।”
51. इस विवर्षय पर विवति व्यवस्र्थीाओं को और बढ़ाए विबना, महाराष्ट्र राज्य और अन्य बनाम क ं 0नमाला विवजयसिंसह भिशक r एवं अन्य (1995) 5 एससीसी 659 वाले मामले में इस न्यायालय द्वारा संक्षेप में समझाए गए 'लापरवाही' शब्द क े विनव%0न पर ध्यान देना पया%प्त होगा सिजसमें कहा गया है:- "9... 'लापरवाही' क ु छ ऐसा करने की 0ूक है जो एक क % संग व्यविक्त से करने की उम्मीद की जा ी है या एक विववेकशील व्यविक्त से करने की उम्मीद की जा ी है।"
52. इसलिलए, व %मान प्रयोजन क े लिलए यर्थीोति0 रूप से संक्षेप में यह कहा जा सक ा है विक उस साव ानी का प्रयोग करने में विवफल ा, जो एक युविक्तयुक्त रूप से विववेकशील व्यविक्त आम ौर पर इसी रह की परिरस्टिस्र्थीति यों में प्रयोग कर ा है, लापरवाही क े रूप में माना जाएगा। यह आवsयक नहीं है विक लापरवाही हमेशा आशतिय हो जहां अपरा ी को अनुति0 जोलिखम पैदा होने की जानकारी हो, लेविकन यह असाव ानी या विनस्टिष्क्रय भी हो सक ा है, जो दूरदर्भिश ा की कमी या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकसी 0ूक क े कारण उत्पन्न हो ी है। र्थीाविप, यह प्रश्न विक क्या लापरवादी क े कारण दातियत्व प्रति वादी क ं पनी पर र्थीोपा जा सक ा है या नहीं, इसका विन ा%रण उपेक्षा क े अभिभकर्थीन क े अपवाद और ब0ाव से संबंति अन्य पहलुओं पर विव0ार विकए विबना नहीं विकया जा सक ा है। दैवीय क ृ त्य विवभाग और उच्च न्यायालय क े समक्ष अपने दावों में, प्रति वादी क ं पनी ने 'दैवीय क ृ त्य' से संबंति सिसद्धां ों का अवलंब लेेने का प्रयास विकया और यह सुझाव देने की कोभिशश की गई विक यविद क ं पनी द्वारा पूरी रह से ध्यान विदए जाने क े बावजूद आग लगी, ो यह क ु छ और नहीं बस्टिल्क दैवीय क ृ त्य र्थीा, सिजस पर विकसी भी रह का मानवीय विनयंत्रण नहीं र्थीा। उच्च न्यायालय ने प्रकर्थीनों क े इस विहस्से को स्वीकार कर लिलया है। यद्यविप हमारे समक्ष क % में, प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने इस सिसद्धां पर अति क जोर नहीं विदया है, लेविकन प्रासंविगक पृष्ठभूविम को देख े हुए, यह उति0 होगा विक दैवीय क ृ त्य से संबंति क ु छ विवशेर्ष ाओं और दातियत्व क े न्यायशास्त्रीय सिसद्धां ों क े संदभ% में इसक े अर्थी% पर ध्यान विदया जाए।
54. पी. रामनार्थी अय्यर क े एडवांस्ड लॉ लेस्टिक्सकन15 में 'दैवीय क ृ त्य' या 'अनहोनी' शब्द क े विवभिभन्न अर्थीy को ग्रंर्थी और उद्धरणों क े संदभ% में विवविनर्निदष्ट विकया गया है। व %मान उद्देsय क े लिलए क ु छ प्रासंविगक पहलुओं को उपयोगी रूप से नी0े उद्धृ विकया जा सक ा हैः- “सभी प्राक ृ ति क 0ीजें, मानवीय गति विवति यों क े विवपरी, दैवीय क ृ त्य का गठन कर ी हैं, न विक क े वल उनमें सिजनमें असा ारण मात्रा में बिंहसा हो ी हैं या बहु असामान्य घटनाएं। यह अं र क े वल प्रकार का है न विक मात्रा का। घटना की बिंहसा या दुल%भ ा क े वल इस बा पर विव0ार करने क े लिलए प्रासंविगक है विक 15 5 वां संस्करण सं संस्करणस्करण पृ.83 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क्या इसे उति0 देखभाल से रोका जा सक ा र्थीा या नहीं: यविद ऐसा नहीं हो सका ो यह दैवीय काय% है जो दातियत्व से मुविक्त विदलाएगा, 0ाहे उसका कारण विक ना ही छोटा या सामान्य क्यों न रहा हो। यविद यह सही है, ो घटना की अप्रत्याभिश प्रक ृ ति क े वल यह विदखाएगी विक प्रश्नग दैवीय काय% ऐसा र्थीा सिजसे प्रति वादी को पूवा%नुमान लगाने या उसक े लिखलाफ उपाय करने का कोई क %व्य नहीं र्थीा। क े वल ऐसे मामले में ही दैवीय काय% ब0ाव प्रदान करेगा। ” -आर. एफ. वी. ह्यूस्टन. सालमंड ऑन द लॉ ऑफ टॉट्स% 330 (17 वां संस्करण 1977)। “एक प्राक ृ ति क काय% जैसे ूफान, बाढ़ या भूक ं प सिजसका पूवा%नुमान नहीं लगाया जा सक ा और आम ौर पर विकसी व्यविक्त को इसक े परिरणामस्वरूप होने वाले नुकसान क े लिलए जवाबदेह नहीं बना ा। ऐसी कोई भी घटना जो इ नी असामान्य हो विक इसे विकसी भी मात्रा में मानवीय देखभाल और प्रयास से रोका नहीं जा सक ा र्थीा, जैसे विबजली, ज्वारीय लहरें या बाढ़ आविद, जो एक ठेक े दार जैसे विक माल वाहक को राह दे ी है एवं इसक े परिरणामस्वरूप होने वाले नुकसान क े लिलए विकसी भी देनदारी से मुक्त कर ी है। “..यह माना जा सक ा है विक इसमें गंभीर आं ी, बफÌले ूफान, ूफान, 0क्रवा और ज्वार-भाटा जैसी प्रक ृ ति की अप्रत्याभिश घटनाएं शाविमल हैं। लेविकन प्रत्येक अप्रत्याभिश हवा और ूफान दातियत्व से मुक्त होने क े एक बहाने क े रूप में काम नहीं कर े हैं, यविद उनक े होने का पूवा%नुमान लगाने की उति0 संभावना हो। दैवीय काय% कोई बहाना नहीं दे ा है, जब क विक यह इ ना अप्रत्याभिश न हो विक समय और स्र्थीान की परिरस्टिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए विकसी भी उति0 मानव दूरदर्भिश ा से घटना का पूवा%नुमान न लगाया जा सक े ।” 54.[1] महादेव शेट्टी (उपयु%क्त) का मामला एक वाहन दुघ%टना में घायल होने क े कारण दावेदार को हुई हाविन से संबंति है, सिजसने उसे पैराप्लेसिजक बना विदया र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिजस बस में वह एक यात्री र्थीा, वह ऊ ं 0ाई से नी0े विगरने क े बाद गड्ढे में विगर गई। उसक े दावा याति0का क े विवरो में अपीलक ा% विनगम का रुख यह र्थीा विक दुघ%टना उ ावलेपन और लापरवाही से गाड़ी 0लाने क े कारण नहीं हुई र्थीी, बस्टिल्क यह दैवीय क ृ त्य र्थीा। इस संदभ% में न्यायालय ने मानवीय 0ूक क े विवपरी दैवीय क ृ त्य से संबंति त्वों की विववे0ना की- "9. "दैवीय क ृ त्य" पद मानवीय हस् क्षेप से मुक्त प्राक ृ ति क बलों जैसे विबजली, ूफान आविद क े सं0ालन को दशा% ी है। इसमें गंभीर आं ी, बफÌले ूफान, ूफान, 0क्रवा, ज्वारीय लहरें और इस रह की अप्रत्याभिश घटनाएं शाविमल हो सक ी हैं। लेविकन प्रत्येक अप्रत्याभिश हवा और ूफान दातियत्व से मुक्त होने क े एक बहाने क े रूप में काम नहीं कर े हैं, यविद उनक े होने का पूवा%नुमान लगाने की उति0 संभावना हो। दैवीय काय% कोई बहाना नहीं दे ा है जब क विक यह इ ना अप्रत्याभिश न हो विक समय और स्र्थीान की परिरस्टिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए कोई भी उति0 मानव दूरदर्भिश ा घटना का पूवा%नुमान न लगा सक े । उदाहरण क े लिलए, जहां कई वर्षy क े अनुभव से विनवारक कार%वाई की जा सक ी है, लॉड% वेस्टबरी ने दैवीय काय% (स्कॉ0 कानूनों में डैमनम फ े टेल ) को एक ऐसी घटना क े रूप में परिरभाविर्ष विकया, सिजसक े लिखलाफ कोई भी मानव दूरदर्भिश ा काय% नहीं कर सक ी है और सिजसकी संभावना को पह0ानने क े लिलए मानव विववेक बाध्य नहीं है। ऐसा प्र ी हो ा है विक यह दैवीय काय% क े सच्चे अर्थी% क े प्रति विनकट म दृविष्टकोण है। लाड% ब्लैंकबग% ने इसे हमारे मानवीय प्रयासों को नकार े हुए होने वाली अकाट्य घटना ब ाया सिजसक े बारे में न जाना जा सक े ।”
54. 2 वोहरा सविदकभाई राजाभाई (पूव क्त) क े मामले में, प्रति वादी द्वारा बनाए गए एक बां से छोड़े गए पानी ने अपीलार्थी4 की भूविम को भर विदया और उसमें वृक्षारोपण को नष्ट कर विदया। दूसरी ओर, अपीलार्थी4 ने क % विदया विक आगामी मानसून क े मौसम को ध्यान में रख े हुए पानी क े विनम्न स् र को बनाए नहीं रखने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में प्रति वादीगण की ओर से यह सरासर लापरवाही र्थीी और इसलिलए, अपीलार्थी4 को हुई क्षति का संबं सी े ौर पर लापरवाही क े पूव क्त काय% से र्थीा और इसे बारिरश को सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा और इसलिलए, प्रत्यर्थी4 इसे दैवीय काय% नहीं कह सक े और खुद को नुकसान पहुं0ाने वाले दातियत्व से मुक्त नहीं कर सक े। विन0ली अदाल और उच्च न्यायालय ने प्रति वादी क े मामले को स्वीकार विकया विक उन्हें भारी बारिरश ने पानी छोड़ने क े लिलए मजबूर विकया गया र्थीा और यह विक अपीलार्थी4 की भूविम नदी क े विकनारे स्टिस्र्थी र्थीी और, इसलिलए, भारी बारिरश क े कारण, नदी ओवरफ्लो हो सक ी र्थीी सिजसक े परिरणामस्वरूप विकसी भी स्टिस्र्थीति में पानी अपीलार्थी4 क े खे ों में प्रवेश कर सक ा र्थीा।
54.2. 1 अपील में, इस न्यायालय ने, इस प्रश्न की जां0 कर े हुए विक क्या यह घोर लापरवाही का मामला र्थीा, विटप्पणी की विक प्रति वादी अपीलार्थी4 क े आरोपों का ठीक से खंडन नहीं विकया विक आगामी मानसून को देख े हुए उति0 स् र पर पानी का रखरखाव नहीं विकया गया र्थीा। उन्होंने इस आशय की अपनी दलील का भी समर्थी%न नहीं विकया विक अगर पानी छोड़ा नहीं गया हो ा, ो यह बां को ोड़ दे ा और इस क ृ त्य से अति क साव%जविनक नुकसान हो ा। इस न्यायालय ने अभिभविन ा%रिर विकया विक 0ूंविक बां का विनमा%ण और रखरखाव प्रति वादी द्वारा विकया जा ा र्थीा और अपीलार्थी4 को कभिर्थी बां से पानी छोड़ने क े परिरणामस्वरूप नुकसान उठाना पड़ा र्थीा, यह साविब करने की सिजम्मेदारी प्रति वादी की र्थीी विक उन्होंने बां में पानी क े उति0 स् र को बनाए रखने में उति0 साव ानी बर ी र्थीी। इस न्यायालय ने आगे अभिभविन ा%रिर विकया विक प्रति वादी प्रश्नग बां क े मालिलक र्थीे और उनसे अपेक्षा की जा ी है विक वे बां को ऐसी स्टिस्र्थीति में रखेंगे सिजससे पड़ोसिसयों या राहगीरों को विकसी भी प्रकार क े नुकसान या क्षति से ब0ाया जा सक े । इस न्यायालय ने पाया विक क े वल यह कहने से विक मानसून की बारिरश क े कारण बां में पानी का स् र बढ़ गया है और पानी को साव%जविनक विह में छोड़ा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गया र्थीा, इसे लापरवाही क े आरोप को दूर करने वाली प्रति वादी की दलील नहीं माना जा सक ा। "दैवीय काय%" क े ब0ाव को अस्वीकार कर े हुए, इस न्यायालय ने इस प्रकार व्याख्या कीः- “22....दैवीय काय% वह है जो प्रक ृ ति का प्रत्यक्ष, बिंहसक, आकस्टिस्मक और अप्रति रोध्य काय% है, सिजसका विकसी भी प्रकार की योग्य ा से पूवा%नुमान नहीं लगाया जा सक ा र्थीा, या यविद पूवा%नुमान लगाया गया हो ा, ो मानव देखभाल और कौशल की विकसी भी मात्रा से रोका नहीं जा सक ा र्थीा। आम ौर पर, वे काय% जो प्रक ृ ति की प्रार्थीविमक शविक्तयों क े कारण हो े हैं, जो मनुष्य या अन्य कारण से जुड़े नहीं हो े हैं, वे दैवीय कायy की श्रेणी में आ े हैं। उदाहरण क े लिलएः ूफान, आं ी, विबजली, बारिरश का असा ारण विगरना, असा ारण उच्च ज्वार, असा ारण गंभीर बफ %, या एक ज्वारीय बोर जो बी0 पानी में जहाज डुबो दे ा है। यहां महत्वपूण% बा ये है विक ये जरूरी नहीं है विक ये अनोखा हो या ये पहली बार हो। यह पया%प्त है विक यह असा ारण है और जैसा विक उति0 रूप से पूवा%नुमान नहीं लगाया जा सक ा है।” 54.[3] पटेल रोडवेज (उपयु%क्त) का मामला अविनवाय% रूप से एक सामान्य वाहक क े दातियत्व से संबंति र्थीा जब उसे सौंपा गया माल अपीलक ा% क े गोदाम में लगी आग में नष्ट हो गया र्थीा। जहां क एक सामान्य वाहक क े दातियत्व क े संबं में लापरवाही का प्रश्न है, इस न्यायालय ने सरकार ऑन एविवडेंस (15 वां संस्करण,
1999) क े पृष्ट 1724 क े एक पैराग्राफ से एक उद्धरण संदर्भिभ विकया और ारिर विकया विक एक विनयम क े रूप में लापरवाही की उप ारणा नहीं की जानी 0ाविहए। बस्टिल्क यह उप ारणा की जानी 0ाविहए विक सामान्य साव ानी बर ी गयी। लेविकन यह विनयम उन आम वाहकों क े मामले में लागू नहीं हो ा है,सिजन्हें साव%जविनक नीति क े आ ार पर, यह माना जा ा है विक यविद उनकी देखभाल में सौंपे गए सामान खो गए हैं या क्षति ग्रस् हो गए हैं या तिडलीवरी में देरी हुई है ो लापरवाही की गई है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
55. व %मान मामला ऐसा नहीं र्थीा विक ूफान, बाढ़, विबजली या भूक ं प जैसी प्रक ृ ति की शविक्तयों क े कारण क ु छ हुआ हो या आग लगी हो। जब विकसी बाहरी प्राक ृ ति क शविक्त द्वारा क ु छ भी औ0क या बिंहसक रीक े से न हुआ हो, ो प्रश्नग आग की घटना कानूनी भार्षा में क ु छ भी हो लेविकन दैवीय काय% नहीं र्थीी। इस संबं में उच्च न्यायालय की विटप्पभिणयां ठोस प्र ी नहीं हो ी हैं और इन्हें अस्वीक ृ विकया जाना अपेतिक्ष है। अपरिरहाय% दुघ%टना
56. प्रति वादी क ं पनी की ओर से इस न्यायालय क े समक्ष क % यह विदया गया विक क ं पनी ने सभी साव ाविनयां बर ी र्थीीं जो उससे अपेतिक्ष र्थीीं और विफर भी यविद आग की घटना हुई, ो यह क ु छ ऐसा र्थीा जो मानव विनयंत्रण से परे र्थीा सिजसक े लिलए प्रति वादी क ं पनी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सक ा र्थीा। क % की इस पद्धति को, अति क से अति क, उत्तरदातियत्व को शासिस करने वाले विनयमों क े एक अन्य अपवाद क े रूप में लिलया जा सक ा है, जहां अपरिरहाय% दुघ%टना को आम ौर पर अपवाद क े आ ार क े रूप में मान्य ा दी जा ी है। एक बार विफर, हम साल्मंड16 द्वारा ब ाए गए सिसद्धां ों का उ•ेख इस प्रकार कर सक े हैंः गल ी की रह, दुघ%टना या ो सदोर्ष हो ी है या अपरिरहाय% हो ी है। यह उस स्टिस्र्थीति में सदोर्ष हो ी है जब लापरवाही की वजह से हो ी है, लेविकन ब अपरिरहाय% हो ी है जब इससे ब0ने क े लिलए विवति द्वारा अपेतिक्ष मानक से अति क देख-रेख की आवsयक ा हो ी है। सदोर्ष दुघ%टना कोई ब0ाव नहीं है, सिसवाय उन असा ारण मामलों क े सिजनमें गल इरादा उत्तरदातियत्व का विवभिशष्ट और आवsयक आ ार है। अपरिरहाय% दुघ%टना आम ौर पर सिसविवल और आपराति क कानून दोनों में एक अच्छा ब0ाव है। 16 उपरोक्त पृ पृ. 399 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA र्थीाविप, इस विनयम क े कम से कम सिसविवल विवति में महत्वपूण% अपवाद हैं। ये ऐसे मामले हैं सिजनमें कानून इस बा पर जोर दे ा है विक कोई व्यविक्त अपने जोलिखम पर काय% करेगा और दुघ%टना होने की संभावना का लाभ उठाएगा। यविद वह जंगली जानवरों (एफ) को रखना 0ाह ा है, या पानी क े जलाशय का विनमा%ण करना 0ाह ा है (जी), या अपनी भूविम पर कोई भी ऐसा पदार्थी% जमा करना 0ाह ा है जो उसक े पड़ोसिसयों को नुकसान पहुं0ा सक ा है यविद वह रिरस जा ा है (ए0), ो वह इन सभी 0ीजों को खुद करेगा (हालांविक उनमें से कोई भी गल नहीं है), और आने वाले सभी नुकसान क े लिलए जवाबदेह होगा, भले ही अावsयक साव ानी बर ी गयी हो।
57. प्रति वादी क ं पनी द्वारा इस संबं में "अपरिरहाय% दुघ%टना" वाले क % को स्वीकार करने क े लिलए, यह देखा जाना 0ाविहए विक क्या प्रश्नग आग की घटना को रोकने क े लिलए प्रति वादी क ं पनी को विवति द्वारा अपेतिक्ष मानक से परे या उससे अति क देखभाल की आवsयक ा हो ी। इस प्रकार सवाल यह होगा विक प्रश्नग शराब की सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए सामान्य और उति0 आवsयक ा क्या र्थीी और क्या प्रति वादी क ं पनी, ऐसी सभी सामान्य और उति0 आवsयक ाओं पर ध्यान देने क े बावजूद, प्रश्नग आग को नहीं रोक सक ी र्थीी। इस प्रश्न का समुति0 उत्तर ढूंढ े समय, हमें अभिभलेख पर उपलब् सामग्री क े सार्थी -सार्थी सभी आसपास क े कारकों और परिरस्टिस्र्थीति यों पर भी समग्र रूप से विव0ार करना होगा। इस संबं में, आगे बढ़ने से पहले, हम एक महत्वपूण% माग%दश%क सिसद्धां - 0ीजें खुद बोल ी हैं-का सहारा ले सक े हैं सिजसक े द्वारा लापरवाही को क े वल दुघ%टना क े थ्य से ही माना जा सक ा है, उप ारणा दुघ%टना की प्रक ृ ति और आसपास क े कारकों पर विनभ%र कर ी है। 0ीजें खुद बोल ी हैं mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
58. 0ीजें खुद बोल ी हैं इस कहाव को समझने क े लिलए हम इस न्यायालय क े क ु छ विनण%यों को उपयोगी रूप से विनर्निदष्ट कर सक े हैं। विनतिश्च ही ये विनण%य वाहन दुघ%टनाओं से संबंति हैं, लेविकन उनमें विनविह सिसद्धां यही है- 0ीजें खुद बोल ी हैं । 58.[1] sयाम सुंदर एवं अन्य बनाम राजस्र्थीान राज्यः(1974) 1 एस. सी. सी. 690 एक ऐसा मामला र्थीा जहां पीविड़ एक ट्रक में यात्रा कर रहा र्थीा सिजसक े इंजन में आग लग गई और वाहन से क ू द े समय वह सड़क क े विकनारे एक पत्र्थीर पर टकरा गया और मौक े पर ही उसकी मौ हो गई। उस मामले में उच्च न्यायालय ने अभिभविन ा%रिर विकया विक क े वल ट्रक में आग लगना 0ालक की ओर से लापरवाही का सबू नहीं होगा और इस उविक्त का कोई प्रयोग नहीं होगा। र्थीाविप, इस न्यायालय ने अन्य बा ों क े सार्थी -सार्थी विनम्नलिललिख को इंविग विकया और अभिभविन ा%रिर विकया:- “9…0ीजें खुद बोल ी हैं इस उविक्त का सहारा ब लिलया जा ा है जहाँ कोई दुघ%टना हुई हो सिजसका कारण प्रति वादी क े संज्ञान क े भी र हो। क े वल यह थ्य विक दुघ%टना का कारण अज्ञा है, अभिभयोक्ता को नुकसान की वसूली करने से नहीं रोक ा है, यविद परिरस्टिस्र्थीति यों से लिलया जाने वाला उति0 विनष्कर्ष%, जो ज्ञा हैं, यह है विक यह प्रति वादी की लापरवाही क े कारण हुआ र्थीा। दुघ%टना का थ्य कभी-कभी लापरवाही का साक्ष्य बन सक ा है और ब यह उविक्त 0ीजें खुद बोल ी हैं लागू हो ी है।
58.1. इस न्यायालय ने ब स्कॉट बनाम लंदन एवं सेंट क ै र्थीरीन डॉक्स (1865) 3 ए0 एंड सी 596,601 क े मामले से विनम्नलिललिख उद्धरण विदयाः- "... जहां विकसी 0ीज को प्रति वादी या उसक े नौकरों क े प्रबं न क े ह विदखाया गया है, और दुघ%टना ऐसी है विक 0ीजों क े सामान्य क्रम में ऐसा नहीं हो ा है, यविद प्रबं न वाले लोग उति0 देखभाल कर े हैं, ो यह वहन कर ा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है विक उति0 साक्ष्य, प्रति वाविदयों द्वारा स्पष्टीकरण क े अभाव में, विक दुघ%टना देखभाल क े अभाव में हुई।” 58.1.[2] इस न्यायालय ने उपेक्षा जविन लापरवाही क े मामलों में इस उविक्त क े प्र0ालन की व्याख्या कर े हुए अभिभविन ा%रिर विकया:- “दुघ%टना का क े वल होना अन्य कारणों की ुलना में प्रति वादी की ओर से की गई लापरवाही क े सार्थी अति क संग हो सक ा है। यह उविक्त सामान्य बुतिद्ध पर आ ारिर है और इसका उद्देsय न्याय करना है जब काय%कारण और प्रति वादी द्वारा बर ी गयी साव ानी से संबंति थ्य शुरू में वादी क े लिलए अज्ञा हों और प्रति वादी की जानकारी में हों या होने 0ाविहए (देखें बाक % वे बनाम एस. वेल्स ट्रांसो [(1950) 1 ऑल ईआर 392,399])।” 58.[2] पुष्पाबाई पुरुर्षोत्तम उदेसी एवं अन्य बनाम मैसस% रंजी सिजबिंनग एंड प्रेसिंसग क ं पनी (प्राइवेट) लिलविमटेड एवं एक अन्य (1977) 2 एस. सी. सी. 745,क े मामले में इस न्यायालय ने एक बार विफर से इस सिसद्धां क े लागू होने की व्याख्या की और विनम्नलिललिख इसकी विवभिभन्न विवशेर्ष ाओं को समझायाः- “6. सामान्य विनयम यह है विक अभिभयोक्ता को लापरवाही साविब करनी हो ी है, लेविकन क ु छ मामलों में अभिभयोक्ता को काफी कविठनाई हो ी है क्योंविक दुघ%टना का सही कारण उसे ज्ञा नहीं है, बस्टिल्क क े वल प्रति अभिभयोक्ता की जानकारी में है, अभिभयोक्ता दुघ%टना साविब कर सक ा है लेविकन यह साविब नहीं कर सक ा विक प्रति अभिभयोक्ता की ओर से लापरवाही क ै से हुई। इस कविठनाई से ब0ने क े लिलए 0ीजें खुद बोल ी हैं क े सिसद्धां को लागू विकया जाना 0ाविहए। इस उविक्त क े शब्दों का सामान्य ात्पय% यह है विक दुघ%टना स्वंय में ब ा ी है या अपनी कहानी सुना ी है। ऐसे मामले हो े हैं सिजनमें दुघ%टना अपने आप बोल ी है ाविक अभिभयोक्ता क े लिलए यह साविब करना पया%प्त हो विक दुघ%टना हुई है और इसक े अलावा क ु छ नहीं। उस स्टिस्र्थीति में प्रति वादी को यह स्र्थीाविप करना होगा विक दुघ%टना उसकी स्वयं की लापरवाही से नहीं बस्टिल्क mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकसी अन्य कारण से हुई र्थीी। सालमंड आन द लॉ आफ टाट्स% (15 वां संस्करण) पृ.306 कह ा हैः 0ीजें खुद बोल ी हैं ब लागू हो ा है जब भी यह इ ना असंभव हो ा है विक इस रह की दुघ%टना प्रति वादी की लापरवाही क े विबना हुई हो ी विक एक उति0 जूरी को विबना विकसी सबू क े प ा 0ल सक े विक ऐसा हुआ र्थीा। हाल्सबरी लाज ऑफ इंग्लैंड, ीसरा संस्करण, खंड 28, पृ.77 में इस स्टिस्र्थीति का उ•ेख इस प्रकार विकया गया हैः "सामान्य विनयम का एक अपवाद है विक कभिर्थी लापरवाही क े सबू का बोझ पहली बार अभिभयोक्ता पर पड़ ा है, जहां पहले से ही स्र्थीाविप थ्य इस रह क े हैं विक उनसे उत्पन्न उति0 और प्राक ृ ति क विनष्कर्ष% यह है विक भिशकाय की गई हाविन प्रति अभिभयोक्ता की लापरवाही क े कारण हुई र्थीी, या जहां लापरवाही क े रूप में आरोविप घटना प्रति अभिभयोक्ता की ओर से लापरवाही की "अपनी कहानी" ब ा ी है, इस प्रकार ब ाई गई कहानी स्पष्ट और साफ है।" जहां कहाव लागू की जा ी है वहां प्रति वादी पर यह विदखाने का भार हो ा है विक वास् व में उसने लापरवाही नहीं की र्थीी या यह विक दुघ%टना संभव ः इस रह से हुई होगी सिजसमें उसकी ओर से लापरवाही शाविमल नहीं र्थीी।" प्रति वादी क ं पनी उत्तरदायी है
59. ऊपर जो 00ा% की गई है, उससे यह स्पष्ट है विक इस मामले में, प्रश्नग गोदाम वास् व में आग में तिघर गया और उसमें संग्रही शराब नष्ट हो गई ।यहां प्रति वादी क ं पनी को आग में नष्ट शराब पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए भी उत्तरदायी ठहराया जा सक ा है जब उसे संग्रही शराब की सुरतिक्ष अभिभरक्षा सुविनतिश्च करने में लापरवाही की हो। इस पहलू क े संबं में, यह थ्य विक तिडस्टिस्टलरी और गोदाम पर विवभाग का विनयंत्रण और पय%वेक्षण र्थीा, प्रति वादी को अपने दातियत्व से मुक्त नहीं करेगा। इसक े अलावा, प्रश्नग आग की घटना को “दैवीय काय%” नहीं कहा जा सक ा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
60. ब यह मामला इस प्रश्न क पहुं0 जा ा है विक क्या आग की घटना को अपरिरहाय% दुघ%टना कहा जा सक ा है। इस मामले में, हमें इस बा की जां0 करने की आवsयक ा है विक प्रश्नग शराब की सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए सामान्य और उति0 आवsयक ा क्या र्थीी और आसपास क े कारकों से क्या विनष्कर्ष% विनकाला जा सक ा र्थीा। 60.[1] ध्यान देने योग्य बुविनयादी कारकों में से एक यह है विक प्रश्नग वस् ुएं सा ारण वस् ुएं नहीं र्थीीं, बस्टिल्क उनमें अल्कोहल र्थीा, जो अपनी प्रक ृ ति क े अनुसार अत्यति क ज्वलनशील हो ा है। इसलिलए, देखभाल की एक विवशेर्ष प्रक ृ ति जो सामान्य वस् ुओं क े संबं में पया%प्त हो सक ी है, प्रश्नग वस् ुओं क े लिलए पया%प्त या उति0 नहीं हो सक ी है। 60.[2] विदनांक 19. 09. 2002 को सहायक विवद्यु विनरीक्षक ने, सिजसने प्रश्नग परिरसर का आवति क विनरीक्षण विकया र्थीा, दो विटप्पभिणयां की,उनमें से एक मामूली पहलू यह र्थीा विक 'साव ानी' प्लेट को क ु छ प्रमुख स्र्थीान पर नहीं रखा गया र्थीा, लेविकन दूसरा अवलोकन यह र्थीा विक विव रण पैनल क े एक बिंबदु पर, अर्थी% वायरिंरग में प ले ार प्रयोग विकए गये र्थीे। यह सुझाव विदया गया र्थीा विक उसे हटाया जाना 0ाविहए और स्टिस्ट्रप अर्थी% वायरिंरग की जानी 0ाविहए।17 01.03.2003 को, अनापलित्त प्रमाण पत्र जारी कर े समय, अविŽशमन अति कारी ने, अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी, देखा विक अविŽशमन उपकरण सही जगह पर र्थीे और काम करने की स्टिस्र्थीति में र्थीे, लेविकन भविवष्य में, रिरविफलिंलग से पहले अविŽशमन क ें द्र शाहजहाँपुर में उनका परीक्षण कराया जाना 0ाविहए; और यह भी सुझाव विदया गया विक अविŽशमन व्यवस्र्थीा क े बेह र प्रबं न क े लिलए फोम स्र्थीापना प्रदान की जानी 0ाविहए।18 17 पैराग्राफ 7.[1] उपरोक्त पृ द्वारा 18 पैराग्राफ 7.[3] उपरोक्त पृ द्वारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 60.2.[1] अभिभलेख पर रखी गई सामग्री से, यह सामने नहीं आ रहा है विक क्या वास् व में स्टिस्ट्रप अर्थिंर्थीग की गई र्थीी, हालांविक प्रति वादी क ं पनी ने आम ौर पर अपने 23.09.2002 विदनांविक पत्र में कहा विक जो सहायक विवद्यु विनरीक्षक द्वारा इंविग विकया गया र्थीा वह विकया गया र्थीा। कब और विकस रीक े से स्टिस्ट्रप अर्थी% वायरिंरग की गई और यह बा सामने नहीं आ रही है। इसक े अलावा, यह भी सामने नहीं आ रहा है विक क्या फोम इंस्टॉलेशन प्रदान विकए गए र्थीे, जैसा विक फायर विब्रगेड अति कारी ने सुझाव विदया र्थीा। अत्यति क ज्वलनशील सामग्री क े लिलए अति रिरक्त साव ानी की आवsयक ा को देख े हुए, इनमें से विकसी भी पहलू क े महत्व का लाभ नहीं उठाया जा सक ा है। 60.[3] हालांविक यह स0 है विक प्रश्नग आग की घटना से संबंति रिरपोट% में विदए गए सुझावों क े अनुसार आग लगने क े सही कारण का प ा नहीं 0ल सका, लेविकन इस बा क े संक े र्थीे विक आबकारी अति कारी और स्टेशन हाउस अति कारी सविह अति कारिरयों ने जले हुए ारों को देखा र्थीा और यह ब ाया गया र्थीा विक आग संभव ः शॉट% सर्निकट क े कारण लगी र्थीी। इन थ्यों और अन्य थ्यों को ध्यान में रख े हुए विक गोदाम पुराना र्थीा और गोदाम की छ एस्बेस्टस शीट से बनी र्थीी, आबकारी आयुक्त ने 11.07.2006 क े अपने आदेश में आशंका व्यक्त विकया र्थीा विक गोदाम में पुरानी विबजली की ारों में शॉट% सर्निकट हो सक ा र्थीा और उस संदभ% में, लाइसेंसी ने अच्छी गुणवत्ता क े फायर प्रूफ विबजली उपकरणों की व्यवस्र्थीा नहीं की र्थीी, सिजसक े कारण यह घटना हुई।
61. इस समय 'शॉट% सर्निकट' क े संबं में भी क ु छ शब्द प्रासंविगक होंगे। 61.[1] एफ. एस. विक्रस्टिस्पन द्वारा कनीकी शब्दावली19 में शॉट% सर्निकट की व्याख्या इस प्रकार की गई हैः - 19 11 वां संस्करण सं संस्करणस्करण पृ. 369 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “शॉट% सर्निकट (विवद्यु ): विवद्यु परिरपर्थी क े पार कम प्रति रो का एक माग% जो विवद्यु प्रवाह क े असामान्य प्रवाह का कारण बन ा है।”
61.2. मैकग्रो-विहल एनसाइक्लोपीतिडया ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी20 में शॉट% सर्निकट की प्रासंविगक विवशेर्ष ाएं इस प्रकार हैंः- “एक विवद्यु नेटवक % या प्रणाली में विवभिभन्न क्षम ा क े दो बिंबदुओं क े बी0 अपेक्षाक ृ कम प्रति रो की एक असामान्य स्टिस्र्थीति (एक 0ाप सविह ), 0ाहे वह गल ी से या जानबूझकर की गई हो। देखें सर्निकट (विवद्यु ) और इलेस्टिक्ट्रकल इंपेडेंस। इस शब्द का सामान्य उपयोग विवद्यु इन्सुलेशन की विवफल ा, प्राक ृ ति क कारणों (विबजली, हवा, आविद), या मानव कारणों (दुघ%टनाएं, घुसपैठ, आविद) से उत्पन्न एक अवांछनीय स्टिस्र्थीति को दशा% ा है। हालांविक, विवश्लेर्षणात्मक दृविष्टकोण से, शॉट% सर्निकट एक गंभीर स्टिस्र्थीति का प्रति विनति त्व कर ा है सिजस पर सर्निकट तिडजाइनर को एक विवद्यु प्रणाली को तिडजाइन कर े समय विव0ार करना 0ाविहए जो सभी संभव परिर0ालन स्टिस्र्थीति यों का सामना करे। इस प्रकार शॉट% सर्निकट सर्निकट तिडजाइन मापदंडों ( ार का आकार आविद) क े सार्थी-सार्थी सुरक्षात्मक प्रणालिलयों को विन ा%रिर करने में महत्वपूण% है जो शॉटrड त्व को अलग करने का इरादा रख े हैं। देखें विवद्यु सुरक्षा उपकरण -इलेस्टिक्ट्रकल इंसुलेशन एंड लाइटबिंनग एंड सज% प्रोटेक्शन।" 61.[3] व %मान मामले में, यहां क विक जब आग लगने क े सटीक कारण का प ा नहीं 0ल सका, ब सहायक आबकारी आयुक्त की विदनांक 02.08.200321 की रिरपोट% में संक े विदए गए र्थीे विक मलबे में जले हुए क े बल देखे गए र्थीे और संभावना शॉट% सर्निकट की र्थीी, क े वल अनुमान लगाया जा सक ा है विक विबजली क े प्रति ष्ठानों 20 6 वां संस्करण सं संस्करणस्करण खं संस्करणड 16 पृ. 387 21 पैराग्राफ 11 उपरोक्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (उपकरण और/या वायरिंरग) में क ु छ खराबी या कमी र्थीी, सिजसक े कारण करंट का असामान्य प्रवाह हुआ और इस प्रकार आग लगने की घटना हुई।
62. जैसा विक देखा गया है, प्रश्नग आग की घटना प्रक ृ ति की विकसी भी शविक्त क े सं0ालन क े कारण नहीं हुई र्थीी। ऐसा भी नहीं है विक आग विकसी की शरार का न ीजा र्थीी। उ•ेखनीय है विक 10.04.2003 को लगभग 12:55 बजे शुरू हुई आग पर अविŽशमन कर्निमयों द्वारा 11.04.2003 को सुबह 5:00 बजे क ही काबू पाया जा सका। जब सभी प्रासंविगक कारकों को संति0 रूप से ध्यान में रखा जा ा है, ो हमें यह स्वीकार करने में कविठनाई हो ी है विक आग और उसक े परिरणामस्वरूप होने वाला नुकसान मानव क े विनयंत्रण से बाहर र्थीा, सिजसे अपरिरहाय% दुघ%टना कहा जा सक ा है। जाविहर है, आग अपने आप नहीं लगी र्थीी और उति0 रूप से लगाए गए अविŽ रो ी विवद्यु प्रति ष्ठानों और अविŽशमन उपायों क े सार्थी, यह घटना टाली जा सक ी र्थीी या कम से कम नुकसान को कम विकया जा सक ा र्थीा।
63. जैसा विक देखा गया है, 'लापरवाही' का दोर्ष हमेशा सविक्रय उपेक्षा या घोर लापरवाही का होना आवsयक नहीं। बस्टिल्क यह अनजाने में हुई लापरवाही या विनस्टिष्क्रय उपेक्षा का भी हो सक ा है। यह कहने क े लिलए अति क 00ा% की आवsयक ा नहीं है विक प्रश्नग माल अत्यति क ज्वलनशील होने क े कारण, उनकी सुरतिक्ष अभिभरक्षा क े लिलए अति रिरक्त और अत्यति क देखभाल की आवsयक ा हो ी है और इस संबं में कोई भिशभिर्थील ा या विनस्टिष्क्रय ा अनुज्ञेय नहीं र्थीी। इसे अलग रह से कहें ो, प्रश्नग वस् ुओं की सुरतिक्ष अभिभरक्षा सुविनतिश्च करने क े लिलए जो आवsयक र्थीा वह र्थीा दूरदर्भिश ा क े सार्थी सुरक्षा उपायों को बढ़ाना। जब प्रति वादी गोदाम क े भी र प्रश्नग माल को आग से ब0ाने में सक्षम नहीं र्थीा और जब अन्य सभी कारकों, जैसा विक ऊपर ध्यान विदया गया है, को ध्यान में रखा जा ा है, ो उत्पाद शुल्क विनयमावली क े विनयम 709 में अनुध्या लापरवाही क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुसार प्रति वादी क ं पनी प्रत्यक्ष रूप से सिजम्मेदार है। दूसरे शब्दों में, भले ही व %मान मामला प्रति वादी क ं पनी की ओर से लापरवाही या अनजाने में 0ूक का हो, यह उत्पाद शुल्क विनयमावली क े विनयम 709 क े प्रयोजन क े लिलए 'लापरवाही' की परिरभार्षा क े भी र आएगा। 63.[1] थ्यों और परिरस्टिस्र्थीति यों क े विदए गए सेट में, हम उच्च न्यायालय क े दृविष्टकोण और विव0ारों का समर्थी%न करने में असमर्थी% हैं, जहां इसने मूल रूप से इस आ ार पर काय% विकया विक प्रश्नग घटना 'दैवीय क ृ त्य' क े प्रति संदर्भिभ र्थीी। जैसा विक देखा गया है, प्रश्नग घटना प्रक ृ ति की विकसी भी शविक्त क े कारण नहीं र्थीी और इसे दैवीय काय% नहीं कहा जा सक ा। उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 11.07.2006 को विदए गए उत्पाद शुल्क आयुक्त क े आदेश की आलो0ना, सिजसमें की गई विटप्पभिणयों और विनष्कर्षy को संदेह और अनुमान पर आ ारिर माना गया, को भी अस्वीक ृ विकया जाना आवsयक है। जो उत्पाद शुल्क आयुक्त ने विदनांक 11.07.2006 क े आदेश में पाया र्थीा, वह उनक े विनष्कर्ष% र्थीे, 0ीजें खुद बोल ी हैं सिसद्दां क े प्रयोग में थ्यों और परिरस्टिस्र्थीति यों से विनकाले गए र्थीे।
64. इसलिलए, हमें उच्च न्यायालय क े आदेश को अस्वीक ृ करने और विदनांक 11.07.2006 क े आदेश में उत्पाद शुल्क आयुक्त क े विव0ारों का समर्थी%न करने में कोई संको0 नहीं है। क े वल शराब क े मूल्य का बीमा कवरेजः का प्रभाव
65. मामले पर विनष्कर्ष% विनकालने से पहले, प्रति वादी क ं पनी द्वारा क े वल शराब क े मूल्य पर न विक उसपर देय उत्पाद शुल्क क े मूल्य क े बारे में ली गई बीमा कवरेज से संबंति इस मामले की एक और विवशेर्ष ा क े बारे में भी विव0ार करना उति0 होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
66. कभिर्थी रूप से, प्रति वादी क ं पनी ने शराब क े मूल्य का बीमा कवरेज लिलया र्थीा और वास् व में बीमाक ा% से शराब का ऐसा मूल्य प्राप्त विकया र्थीा। हालांविक, प्रति वादी क ं पनी ने शराब क े इस रह क े मूल्य पर देय उत्पाद शुल्क का बीमा कवरेज नहीं लिलया। अपीलार्थी4 का क % है विक जब तिडस्टिस्टलर को इस्टिक्वटी और विनष्पक्ष ा क े सिसद्धां ों पर शराब का मूल्य प्राप्त हुआ है, ो उन्हें संबंति उत्पाद शुल्क उपलब् कराया जाना 0ाविहए। यह भी क % विदया गया है विक शराब क े मूल्य का कवरेज ले े समय उत्पाद शुल्क क े मूल्य का बीमा कवरेज लेने क े लिलए प्रति वादी क ं पनी की ओर से 0ूक अपने आप में लापरवाही है। दूसरी ओर, प्रति वादी का कर्थीन है विक बीमाक ा% से प्राप्त दावे को प्रति फल नहीं कहा जा सक ा है क्योंविक माल में संपलित्त का कोई हस् ां रण नहीं र्थीा और कोई विबक्री नहीं हुई र्थीी। यह भी कहा गया विक विवति की ऐसी कोई अपेक्षा नहीं र्थीी विक प्रति वादी क ं पनी को उत्पाद शुल्क का बीमा कवरेज भी लेना र्थीा। विफर भी, यह भी कहा गया है विक स्वयं बीमाक ा% द्वारा बीमा दावे की मंजूरी से प ा 0ल ा है विक प्रति वादी की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई र्थीी। आबकारी आयुक्त ने विदनांक 11.07.2006 क े अपने आदेश में पाया है विक तिडस्टिस्टलर ने वस् ुओं क े मूल्य का बीमा लिलया र्थीा और इस कारण से भी, यह आग क े लिखलाफ सभी रह की देखभाल करने में भिशभिर्थील रहा।
67. इस मामले की समग्र ा की जां0 करने क े पश्चा ्, हमारा स्पष्ट म है विक इस मामले में प्रति वादी क ं पनी का दातियत्व इस थ्य से अति क सुदृढ़ है विक उसने शराब क े मूल्य का बीमा कवरेज लिलया र्थीा और वास् व में बीमाक ा% से ऐसा दावा प्राप्त विकया र्थीा। इसक े अलावा, उत्पाद शुल्क देय ा क े जोलिखम का बीमा करने में विवफल ा प्रति वादी को उस देय ा से बाहर नहीं विनकाल सक ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
68. जैसा विक देखा गया है, प्र0लिल विवति की योजना में, जब उत्पाद शुल्क वस् ुओं पर है और कर योग्य बिंबदु शराब का उत्पादन या विनमा%ण है, ो शराब का विनमा%ण हो े ही उत्पाद शुल्क का भुग ान करने का दातियत्व उत्पन्न हो गया र्थीा। इसक े बाद, जब शराब आग में नष्ट हो गई, लेविकन इसका मूल्य बीमाक ा% से लिलया गया र्थीा, ो हमारे विव0ार से, ये घटनाएं 1910 क े अति विनयम की ारा 29 (ङ) क े परं ुक क े उद्देsय से एक गोदाम से विबक्री क े लिलए एक उत्पाद शुल्क योग्य वस् ु क े व्यापक रूप से जारी विकए जाने का जवाब देंगी। इसे अलग रीक े से रख े हुए, प्रति वादी द्वारा माल क े मूल्य पर बीमा दावा प्राप्त करना आग की ारीख से संबंति र्थीा और प्रति वादी उस दर पर उत्पाद शुल्क का भुग ान करने क े लिलए उत्तरदायी हो गया जो आग की ारीख पर लागू र्थीी, सिजसे गोदाम से जारी करने की ारीख माना जाएगा। 68.[1] थ्यों और परिरस्टिस्र्थीति यों क े विदए गए सेट में, हम म%पाल सत्यपाल (उपयु%क्त) क े मामले में सीईएसटीएटी क े विनण%य क े बारे में विवस् ार से नहीं ब ा रहे हैं, सिजसमें वर्षा% क े पानी में पान मसाला क े नुकसान क े कारण शुल्क में छ ू ट की अनुमति नहीं दी गई र्थीी, जब यह पाया गया विक विन ा%रिर ी को बीमा क ं पनी द्वारा एक ऐसी राभिश से मुआवजा विदया गया र्थीा जो शाविमल शुल्क से बहु अति क र्थीी, लेविकन, व %मान मामले में यह कर्थीन विक माल बे0ा नहीं गया र्थीा और उपभोक्ताओं से शुल्क की वसूली नहीं की गई र्थीी, प्रति वादी क ं पनी क े पक्ष में नहीं जा े। यह प्रति वादी क ं पनी क े लिलए आवsयक उपाय करने और यह सुविनतिश्च करने का ध्यान रखना र्थीा विक माल क े विनमा%ण क े बाद देय उत्पाद शुल्क अपीलार्थी4 क पहुं0 जाए।
69. मामले क े इस भाग का एक और पहलू बना हुआ है, और हम अपीलार्थी4 से सहम हैं, विक शराब क े मूल्य पर इस रह का कवरेज ले े समय उत्पाद शुल्क mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA का बीमा कवरेज नहीं लेना प्रति वादी क ं पनी की ओर से लापरवाही क े बराबर है। जैसा विक देखा गया है, 'लापरवाही' क े अलग-अलग अर्थी% हैं और कोई भी विवशेर्ष काय% या 0ूक, जो थ्यों क े एक विवशेर्ष सेट में लापरवाही नहीं हो सक ी है, वह भी अन्य थ्यों क े सेट में लापरवाही क े बराबर हो सक ी है। व %मान मामले क े थ्यों में, जहां शराब क े विनमा%ण पर उत्पाद शुल्क देय हो गया र्थीा, यह स्पष्ट रूप से एक उति0 और विववेकपूण% तिडस्टिस्टलर क े रूप में प्रति वादी क ं पनी से न क े वल शराब और उसक े मूल्य, बस्टिल्क सरकार क े सम ुल्य विह, अर्थीा% ् उत्पाद राजस्व की रक्षा क े लिलए सभी आवsयक कदम उठाने की उम्मीद की गई र्थीी। आबकारी आयुक्त का यह विनष्कर्ष% विनकालना उति0 ठहराया गया विक प्रति वादी क ं पनी अपने उद्देsय क े लिलए माल का मूल्य सुरतिक्ष करने क े बाद, आग जैसी विकसी भी दुघ%टना क े कारण सरकार को होने वाले विकसी भी नुकसान से ब0ने क े लिलए सभी आवsयक देखभाल करने में स0े और स क % नहीं र्थीी।
70. इस क % में विक यविद प्रति वादी क ं पनी की ओर से कोई लापरवाही हुई हो ी ो उस बीमाक ा% ने बीमा दावे का भुग ान नहीं विकया हो ा, उसकी अपनी कविमयां हैं। अविŽ बीमा पॉलिलसी क े विनयम अभिभलेख पर नहीं रखे गए हैं और यह अनुमान नहीं लगाया जा सक ा है विक उस पॉलिलसी क े विनयम और श » क्या र्थीीं सिजसक े ह बीमाक ा% ने प्रति वादी क ं पनी क े दावे को स्वीकार विकया। दूसरा, सिजसे बीमाक ा% द्वारा बीमा दावे क े प्रयोजन क े लिलए लापरवाही क े रूप में नहीं माना गया र्थीा, वह आग में शराब क े नुकसान क े कारण राजस्व की हाविन क े संबं में अपीलार्थी4 पर स्व ः बाध्यकारी उप ारणा नहीं बन जाएगा। प्रति वादी क े इस रह क े क % को क े वल अस्वीकार विकया जा सक ा है। सारांश
71. उपरोक्त 00ा% क े सार रूप में हम ारिर कर े हैं विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i). अपीलार्थी4 द्वारा प्रति वादी क ं पनी क े लिखलाफ, आग में नष्ट हुई शराब पर उत्पाद शुल्क की मांग, कानून द्वारा अति क ृ है और उति0 रूप से 1910 क े अति विनयम, उत्पाद शुल्क मैनुअल और 1969 क े विनयमों क े लागू प्राव ानों क े अनुसार उठायी गयी है। (ii). प्रश्नग आग की घटना को मानव विनयंत्रण से परे की घटना नहीं कहा जा सक ा है और उच्च न्यायालय ने यह अभिभविन ा%रिर करने में गल ी की है विक प्रति वादी क ं पनी पर कोई लापरवाही अति रोविप नहीं की जा सक ी। (iii). यह थ्य विक प्रति वादी क ं पनी ने क े वल शराब क े मूल्य (और उसक े बाद उत्पाद शुल्क नहीं) का बीमा कवरेज लिलया र्थीा और विफर, शराब क े मूल्य क े संबं में बीमा दावा प्राप्त विकया र्थीा, प्रति वादी क ं पनी क े लिखलाफ भी सं0ालिल हो ा है और प्रति वादी क ं पनी की लापरवाही क े बारे में विनष्कर्ष% को मजबू कर ा है।
71.1. पूव%गामी 00ा% का परिरणाम यह है विक यह अपील सफल होने की हकदार है और प्रति वादी क ं पनी द्वारा दायर रिरट याति0का खारिरज विकए जाने योग्य है। एक आवsयक परिरणाम क े रूप में, प्रति वादी क ं पनी द्वारा अपने रिरफ ं ड आवेदन पर विव0ार करने क े लिलए दालिखल विकया गया विवविव आवेदन विनरर्थी%क हो जा ा है और इस रह से खारिरज विकए जाने योग्य है। विनष्कर्ष%
72. दनुसार, और उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए, इस अपील को स्वीकार विकया जा ा है और प्रकीण% बें0 सं. 4493 वर्ष% 2006 में विदनांक 10.04.2017 एवं सिस.प्र.सं. 90936 वर्ष% 2019 में विदनांविक 06.11.2019 आक्षेविप आदेशों को अपास् विकया जा ा है। रिरट याति0का र्थीा प्रति वादी क ं पनी द्वारा दालिखल विवविव mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आवेदन को खारिरज कर विदया जा ा है, लेविकन लाग क े बारे में कोई आदेश नहीं होगा।............................................. (न्यायमूर्ति ए. एम. खानविवलकर)............................................. (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी)............................................. (न्यायमूर्ति क ृ ष्ण मुरारी) नई विद•ी 05 जनवरी, 2022 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA