Manoj Kumar Khokhar v. Rajasthan State and Others

High Court of Rajasthan · 11 Jan 2022
M. R. Shah; B. V. Nagaratna
Criminal Appeal No 36/2022 @ SLP (Crl) No 4062/2020
2022 INSC 36
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the High Court's bail order in a murder case, emphasizing the need for judicious exercise of discretion considering the offence's gravity and risk of trial interference.

Full Text
Translation output
गैर - प्रति वेद्य
भार का उच्च म न्यायालय
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 36/2022
(एसएलपी (सीआरएल) संख्या 4062/2020 से उत्पन्न)
मनोज क
ु मार खोखर … अपीलक ा0 (ओ)
बनाम
राजस्थान राज्य और अन्य ...उत्तरदा ा (ओ)
निनर्ण0य
नागरत्ना जे.
JUDGMENT

1. यह अपील आवेदक अपीलाथ> द्वारा निदनांक 7 मई 2020 को राजस्थान उच्च न्यायालय, पीठ जयपुर द्वारा एकल पीठ फ़ौजदारी निवनिव जमान प्राथ0ना पत्र संख्या 3601/2020 मे पारिर चुनौ ीग्रस् आदेश में प्रस् ु की गयी है, जिजससे प्राथनिमकी संख्या 407/2019 पुलिलस स्टेशन कालवाड़ क े संबं में आरोपी को जमान दे दी गई है, जो निक इस अपील में दि्Sव ीय प्रत्यथ> है।

2. अपीलक ा0 क े अनुसार, वह मृ क राम स्वरूप खोखर का पुत्र है और जिजसने 8 निदसंबर, 2019 को प्रथम सूचना रिरपोट0 संख्या 407/2019 भार ीय दंड संनिह ा, 1980 (इसक े पश्चा संतिक्षप्त ा क े लिलए "भा.द.स."क े रूप में संदर्भिभ ) की ारा 302 2022 INSC 36 क े ह अपने निप ा की हत्या क े अपरा क े लिलए दि्Sव ीय प्रत्यथ> आरोपी राम नारायर्ण जाट क े लिखलाफ दज0 कराई थी।

3. उक्त प्राथनिमकी निदनांक 8 निदसंबर, 2019 को अपीलक ा0 द्वारा रा 23:00 बजे से 23:30 बजे क े बीच दज0 कराई गई थी, जिजसमें कहा गया था निक उस निदन लगभग 16:00 बजे, उसक े निप ा, जिजसकी आयु लगभग 55 वर्ष0, पर प्रत्यथ> अभिभयुक्त ने लालपुरा पचर बस स्टैंड पर जान से मारने की नीय से हमला निकया था। प्रत्यथ>-आरोपी ने मृ क को जमीन पर पटक निदया, उसकी छा ी पर बैठ गया और जबरदस् ी उसका गला घोंट निदया, जिजससे उसकी मौ हो गई। प्रत्यथ>-आरोपी क े क ु छ साभिथयों ने, जो घटना स्थल पर मौजूद थे, हमला करने और मृ क को मारने में उसकी मदद की। सूचनाक ा0 अपीलक ा0 ने प्राथनिमकी में आगे कहा निक प्रत्यथ>- आरोपी, उसक े भाइयों अथा0 ् अजु0न, सत्यनारायर्ण और ओकरामल और मृ क क े बीच पहले से ही प्रति द्वंनिद्व ा थी। मृ क ने पहले अपीलक ा0 और परिरवार क े क ु छ सदस्यों को इस रह की प्रति द्वंनिद्व ा क े बारे में सूतिच निकया था और ब ाया था निक इस कारर्ण वह अपनी सुरक्षा क े बारे में आशंनिक था। घटना क े निदन प्रत्यथ>-आरोपी अपने एक भाई ओकरामल क े साथ सुबह अपीलक ा0 क े घर गया था और मृ क क े साथ दुर्व्यय0वहार निकया था। 9 निदसंबर, 2019 को आयोजिज शवपरीक्षा की रिरपोट0 में दज0 निकया गया है निक मृ क की "मृत्यु पूव0 गला घोंटने क े कारर्ण श्वासावरो " क े परिरर्णामस्वरूप मृत्यु हुई थी।

4. प्रत्यथ>-आरोपी को उक्त प्राथनिमकी संख्या 407/2019 क े संबं में 10 निदसंबर, 2019 को निगरफ् ार निकया गया था और उसे न्यातियक निहरास में भेज निदया गया था। प्रत्यथ>-अभिभयुक्त लगभग एक वर्ष0 और पांच महीने की अवति क े लिलए न्यातियक निहरास में रहा जब क निक उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेनिप आदेश द्वारा उसे जमान नहीं दी गई।

5. उपरोक्त प्राथनिमकी क े संबं में जांच करने क े बाद पुलिलस द्वारा अति रिरक्त मेट्रोपोलिलटन मजिजस्ट्रेट, जयपुर क े न्यायालय क े समक्ष आरोप पत्र प्रस् ु निकया गया। निदनांक 12 माच0, 2020 क े आदेश द्वारा अति रिरक्त मेट्रोपोलिलटन मजिजस्ट्रेट ने अपरा का संज्ञान लिलया और मामले को निवचारर्ण और अति निनर्ण0य क े लिलए जिजला एवं सत्र न्यायालय को सुपुद0 कर निदया।

6. प्रत्यथ>-आरोपी ने पहले दो मौकों पर अति रिरक्त मेट्रोपॉलिलटन मजिजस्ट्रेट नंबर 9, जयपुर मेट्रोपॉलिलटन, जयपुर की अदाल क े समक्ष दंड प्रनिpया संनिह ा, 1973 की ारा 437 (संक्षेप में, "द.प्र.सं.") क े ह जमान की मांग करने वाले आवेदनों को प्रस् ु निकया था। इसे 23 जनवरी, 2020 और 6 माच0, 2020 क े आदेशों द्वारा अस्वीकार कर निदया गया। आरोपी ने द.प्र.सं. की ारा 439 क े ह जमान यातिचका भी दायर की थी, जिजसे अति रिरक्त सत्र न्याया ीश नंबर 5, जयपुर मेट्रोपॉलिलटन ने 12 माच0, 2020 क े आदेश द्वारा अभिभयुक्तों क े लिखलाफ कभिथ अपरा ों की गंभीर ा क े संबं में खारिरज कर निदया था। प्रत्यथ> अभिभयुक्त ने उच्च न्यायालय क े समक्ष एक और जमान यातिचका दायर की और निदनांक 7 मई, 2020 क े आक्षेनिप आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने उसे जमान पर रिरहा निकया। प्रत्यथ> अभिभयुक्त को जमान निदए जाने से र्व्ययभिथ होकर, सूचनाक ा0-अपीलक ा0 ने इस े समक्ष यह अपील को प्रस् ु की है।

7. हमने अपीलक ा0 क े निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री बसं आर. और प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवद्वान अति वक्ता श्री आनिदत्य क ु मार चौ री को सुना है और अभिभलेख पर सामग्री का अवलोकन निकया है।

8. अपीलक ा0 क े निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने प्रस् ु निकया निक मृ क 2015 में मां ा भोपावासपचार गांव, झोटवाड़ा हसील, जयपुर, राजस्थान क े उप सरपंच क े रूप में निनवा0तिच हुए थे। आरोपी और उसक े परिरवार क े निवरो क े बावजूद उसे इस पद पर चुना गया। आरोपी क े परिरवार का गांव में काफी प्रभाव था और वे मृ क को फरवरी, 2020 में होने वाले सरपंच पद क े चुनाव लड़ने से रोकने की कोभिशश कर रहे थे। ऐसी राजनीति क शत्रु ा क े कारर्ण, प्रत्यथ> अभिभयुक्त अपने भाइयों अजु0न, सत्यनारायर्ण और ओकरामल क े साथ 8 निदसंबर, 2019 को सुबह अपीलक ा0 क े घर गया और मृ क क े साथ दुर्व्यय0वहार निकया और बाद में उसी निदन मृ क की हत्या कर दी। अपीलक ा0 क े अनुसार, मृ क अपने दोनों पैरों की 54% स्थायी शारीरिरक दुब0ल ा से पीनिड़ था और इसलिलए प्रत्यथ> अभिभयुक्त उस पर हावी हो गया था, जिजसने मृ क को जमीन पर पटक निदया था, उसकी छा ी पर बैठ गया और उसकी गद0न को दबा निदया, जिजसक े परिरर्णामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई।

9. आगे यह आग्रह निकया गया निक उच्च न्यायालय ने प्रत्यथ> अभिभयुक्त को जमान मंजूर करने में अपने निववेकाति कार का प्रयोग नहीं निकया है। उच्च न्यायालय ने कभिथ अपरा की गंभीर ा और उसे कारिर करने क े गंभीर रीक े को ध्यान में नहीं रखा है, जिजसमें शारीरिरक दुब0ल ा क े कारर्ण अपना बचाव करने में असमथ0 र्व्ययनिक्त क े लिखलाफ अपरा निकया गया था।

10. यह क 0 निदया गया निक आरोपी और मृ क क े परिरवार क े बीच पूव0 दुश्मनी क े थ्य को जमान देने क े संबं में अभिभयुक्त पर लगे आरोपों क े संदभ0 में उच्च न्यायालय द्वारा निवचार नहीं निकया गया है। प्रत्यथ>-आरोपी, भोपावासपचार गांव में उच्च राजनीति क प्रभाव का प्रयोग करने वाला र्व्ययनिक्त है, जिजसक े फरार होने या गवाहों या मृ क क े परिरवार को मकाने की संभावना से इनकार नहीं निकया जा सक ा है। ऐसे में जमान पर रिरहा होने से मुकदमे पर असर पड़ने से इंकार नहीं निकया जा सक ा। यह निक पुलिलस शुरू में प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े लिखलाफ प्राथनिमकी दज0 करने से भी निहचक रही थी। दरअसल, मृ क क े परिरजनों द्वारा थाने क े बाहर निकए गए निवरो प्रदश0न क े चल े ही आरोपी को पुलिलस ने 10 निदसंबर, 2019 को निगरफ् ार कर लिलया था। यह क 0 निदया गया निक आरोपी, गाँव का एक बहु प्रभावशाली र्व्ययनिक्त होने क े ना े, सबू ों क े साथ छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभानिव करक े मुकदमे को प्रभानिव कर सक ा है। अपीलक ा0 क े निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता क े अनुसार, उच्च न्यायालय ने इस मामले में जमान देने क े लिलए कारर्ण नहीं ब ाए हैं, जिजसमें आरोपी क े लिखलाफ एक जघन्य अपरा का आरोप लगाया गया है, जिजसक े लिलए, यनिद अभिभयुक्त को दोर्षी ठहराया जा ा है, ो उसे आजीवन कारावास या यहां क निक मृत्यु दंड की सजा दी जा सक ी है।उच्च न्यायालय ने एक बहु ही निpदि्zटक आदेश में, निबना निकसी भी क को खारिरज कर े हुए प्रत्यथ> अभिभयुक्त को जमान दे दी है। यह आग्रह निकया गया निक प्रत्यथ> अभिभयुक्त को जमान देना कानून क े स्थानिप जिसद्धां ों और इस े निनर्ण0यों क े निवपरी था। अपीलाथ>, जो मृ क का पुत्र है, की ओर से यह निनवेदन निकया गया निक आक्षेनिप आदेश को अपास् कर े हुए इस अपील को स्वीकार निकया जाए।

11. अपनी दलीलों क े समथ0न में, अपीलक ा0 क े निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने इस े क ु छ निनर्ण0यों पर भरोसा निकया, जिजन्हें आगे संदर्भिभ निकया जाएगा।

12. इसक े निवपरी, श्री आनिदत्य क ु मार चौ री, प्रत्यथ>-आरोपी क े निवद्वान अति वक्ता ने कथन निकया निक आक्षेनिप आदेश इस न्यायालय द्वारा निकसी भी हस् क्षेप की गारंटी देने वाली निकसी भी दुब0ल ा से ग्रस् नहीं है। अभिभयुक्त को झूठा फ ं साने क े लिलए सूचनाक ा0 अपीलक ा0 ने घटनाओं का एक असत्य संस्करर्ण सुनाया है। मृ क और अभिभयुक्त क े परिरवारों क े बीच पूव0 शत्रु ा से स्पष्ट रूप से इंकार कर े हुए यह कहा गया है निक दोनों परिरवारों ने सौहाद0पूर्ण0 संबं बनाए रखे, जो थ्य 7 फरवरी 2020 क े चाज0शीट क े निनष्कर्ष~ से प्रमाभिर्ण हो ा है, जिजसमें यह दज0 है निक मृ क और प्रत्यथ> अभिभयुक्त एक ही गांव क े थे और रिरटायरमेंट क े बाद से दोनों रोजाना लालपुरा बस स्टैंड पर साथ में ाश खेल े थे और ऐसा कोई सबू नहीं है जो उनक े बीच दुश्मनी का सूचक हो। 8 निदसंबर, 2019 को मृ क और अभिभयुक्तों क े बीच अचानक हुई हाथापाई एक अक े ली घटना थी और जो उनक े बीच पहले से चल रहे निकसी निववाद क े संबं में नहीं थी। यह भी कहा गया निक सूचनाक ा0 अपीलक ा0 द्वारा प्राथनिमकी दज0 करने में काफी और अस्पष्टीक ृ देरी हुई थी जो इस थ्य का प्रमार्ण है निक यह एक बाद क े निवचार क े रूप में दज0 निकया गया था और इसलिलए यह घटना क े अपीलक ा0 क े संस्करर्ण की झूठी प्रक ृ ति व उसकी प्रस् ुति क े समथ0न में थ्यों का सही वर्ण0न नहीं कर ा है। प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवद्वान अति वक्ता ने घटना क े चश्मदीद गवाहों क े बयानों पर भरोसा कर े हुए कहा है निक घटना की ारीख मृ क और प्रत्यथ> े बीच अचानक हाथापाई हुई और आरोपी ने मृ क का गला घोंट निदया। अलग होने क े बाद, मृ क बसस्टॉप पर एक बेंच पर बैठ गया लेनिकन बाद में बेहोश हो गया और उसे ुरं अस्प ाल ले जाया गया जहां उसकी मौ हो गई। एक चश्मदीद गवाह, अथा0 ् मंगलचंद द्वारा आगे यह कहा गया है निक अभिभयुक्त क े भाई घटना क े समय उपदि्स्थ नहीं थे । प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवद्वान अति वक्ता ने निनरंजन सिंसह और अन्य बनाम प्रभाकर राजाराम खरोटे और अन्य, [1980] 2 एससीसी 559 को यह क 0 देने क े लिलए संदर्भिभ निकया निक जमान अज> पर फ ै सला करने वाली अदाल को मामले की खूनिबयों पर निवस् ृ चचा0 से बचना चानिहए चूंनिक ट्रायल से पहले क े चरर्ण में थ्यों की निवस् ृ चचा0 से निनष्पक्ष सुनवाई पर प्रति क ू ल प्रभाव पड़ ा है। इसक े अलावा, प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवद्वान अति वक्ता ने प्रस् ु निकया निक प्राथनिमकी संख्या 407/2019 क े संबं में जांच सभी रह से पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र प्रस् ु निकया जा चुका है।इसलिलए, निकसी गवाह को प्रभानिव करने या साक्ष्य क े साथ छेड़छाड़ करने क े बारे में कोई सवाल नहीं उठ ा है। अभिभयुक्त की समाज में गहरी जड़ें हैं और इसलिलए वह फ़रार होने का प्रयास नहीं करेगा। इसक े अलावा, आरोपी का कोई आपराति क इति हास भी नहीं है और निवचारा ीन घटना अचानक हाथापाई क े परिरर्णामस्वरूप हुई और इसलिलए, प्रथम दृष्टया, आरोपी क े लिखलाफ आईपीसी की ारा 300 क े ह अपरा नहीं बनाया जा ा है। इसलिलए, प्रत्यथ> अभिभयुक्त को जमान देने का आक्षेनिप आदेश इस न्यायालय द्वारा हस् क्षेप की मांग नहीं कर ा है।

13. सूचनाक ा0 अपीलक ा0 क े निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री बसं आर. क े इस क को ध्यान में रख े हुए निक अभिभयुक्त प्रत्यथ> को जमान देने का आक्षेनिप आदेश निकसी भी क 0 से परे है और ऐसा आदेश आकदि्स्मक और गूढ़़ है, हम उच्च न्यायालय द्वारा पारिर निदनांक 7 मई 2020 क े आक्षेनिप आदेश का अंश निनकाल े हैं, जो जमान देने क े लिलए न्यायालय का " क 0 " है, जो निनम्नानुसार है: "मैंने प्रस् ुति याें पर निवचार निकया है और चालान क े कागजा और पोस्टमॉट0म रिरपोट0 का अवलोकन निकया है, लेनिकन मामले क े गुर्ण और दोर्षों पर कोई राय र्व्ययक्त निकए निबना, मैं आरोपी यातिचकाक ा0 को जमान पर रिरहा निकया जाना उतिच समझ ा हूं। इसलिलए, इस जमान आवेदन को स्वीकार निकया जा ा है और यह निनद‡श निदया जा ा है निक आरोपी यातिचकाक ा0 राम नारायर्ण जाट पुत्र श्री भिंभवा राम को उपरोक्त प्राथनिमकी क े संबं में दंड प्रनिpया संनिह ा की ारा 439 क े ह जमान पर रिरहा निकया जाएगा, बश ‡ वह 50,000/रुपये की राभिश का एक निनजी मुचलका और संबंति मजिजस्ट्रेट की सं ुनिष्ट क े लिलए समान राभिश का एक मुचलका इस श 0 क े साथ प्रस् ु कर ा है निक वह दंड प्रनिpया संनिह ा की खंड 437 (3) क े ह निन ा0रिर सभी श ~ का पालन करेगा।"

14. आगे काय0वाही करने से पहले, निकसी अभिभयुक्त को जमान मंजूर करने क े मामले में इस न्यायालय क े निनर्ण0यों को इस प्रकार निनर्दिदष्ट करना उपयोगी होगाः क) गुतिडकां नरजिसम्हुलु और अन्य बनाम लोक अभिभयोजक, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (1978) 1 एससीसी 240 में, न्यायमूर्ति क ृ ष्र्णा अय्यर ने निवचारर्ण क े अ ीन र्व्ययनिक्त की स्व ंत्र ा क े संदभ0 में भार क े संनिव ान क े अनुच्छेद 21 की अं व0स् ु 10 पर निवस् ार से चचा0 कर े हुए उन प्रमुख कारकों को अति कभिथ निकया है जिजन पर जमान मंजूर कर े समय निवचार निकया जाना चानिहए, जिजनका निनम्नलिललिख रूप में निनष्कर्ष0र्ण निकया गया हैः “7. इस प्रकार यह स्पष्ट है निक आरोप की प्रक ृ ति महत्वपूर्ण0 कारक है और साक्ष्य की प्रक ृ ति भी प्रासंनिगक है। सजा जिजसक े लिलए पाट> उत्तरदायी हो सक ी है, अगर दोर्षी ठहराया जा ा है या सजा की पुनिष्ट की जा ी है, ो मुद्दे पर भी असर पड़ ा है।

8. एक अन्य सुसंग कारक यह है निक क्या न्याय क े अनुpम को उस र्व्ययनिक्त द्वारा निवफल निकया जाएगा जो न्यायालय क े उदार अति कार क्षेत्र को क ु छ समय क े लिलए मुक्त करने की मांग कर ा है।

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9. इस प्रकार कानूनी जिसद्धां और र्व्ययवहार न्यायालय को मान्य कर े हैं निक आवेदक द्वारा अभिभयोजन पक्ष क े गवाहों क े साथ हस् क्षेप करने या अन्यथा न्याय की प्रनिpया को प्रदूनिर्ष करने की संभावना पर निवचार निकया जाए। इस संदभ0 में, यह न क े वल पारंपरिरक है बदि्“क क 0 संग भी है निक जमान क े लिलए आवेदन करने वाले र्व्ययनिक्त क े पूव0वृत्त की जांच की जाए ानिक यह प ा लगाया जा सक े निक क्या उसका निवपरी रिरकॉड0 है-निवशेर्ष रूप से एक रिरकॉड0 जो ब ा ा है निक जमान पर रह े हुए उसक े गंभीर अपरा करने की संभावना है। आद ों क े संबं में, यह आपराति क इति हास का निहस्सा है निक एक निवचारहीन जमान आदेश ने जमान ी को प्रत्यथ> क े आपराति क रिरकॉड0 क े बारे में और अति क ब ाने क े अवसर का लाभ उठाने में सक्षम बनाया है, इसलिलए यह अप्रासंनिगक नहीं है।" (ख) प्रह्लाद सिंसह भाटी बनाम एनसीटी ऑफ निदल्ली और अन्य - (2001) 4 एससीसी 280 में, इस न्यायालय ने उन पहलुओं पर प्रकाश डाला जिजन पर जमान मांगने वाले आवेदन पर निवचार कर े समय न्यायालय द्वारा निवचार निकया जाना है। इसे निनम्नलिललिख रूप में निनकाला जा सक ा हैः "जमान देने क े अति कार क्षेत्र का प्रयोग प्रत्येक मामले की परिरदि्स्थति यों क े संबं में अच्छी रह से स्थानिप जिसद्धां ों क े आ ार पर निकया जाना चानिहए, न निक मनमाने रीक े से। जमान मंजूर कर े समय, न्यायालय को आरोपों की प्रक ृ ति, उनक े समथ0न में साक्ष्य की प्रक ृ ति, दंड की गंभीर ा, जो दोर्षजिसतिद्ध में शानिमल होगी, अभिभयुक्त का चरिरत्र, र्व्ययवहार, सा न और दि्स्थति, ऐसी परिरदि्स्थति यां जो अभिभयुक्त क े लिलए निवभिशष्ट हैं, निवचारर्ण में अभिभयुक्त की उपदि्स्थति सुनिनतिश्च करने की युनिक्तयुक्त संभावना, गवाहों क े साथ छेड़छाड़ निकए जाने की युनिक्तयुक्त आशंका, जन ा या राज्य क े र्व्ययापक निह ों और इसी रह क े अन्य निवचारों को ध्यान में रखना होगा। यह भी ध्यान रखा जाना चानिहए निक जमान मंजूर करने क े प्रयोजनों क े लिलए निव ान मंडल ने "साक्ष्य" क े बजाय "निवश्वास करने क े लिलए युनिक्तयुक्त आ ार" शब्दों का उपयोग निकया है जिजसका अथ0 है निक जमान की मंजूरी से संबंति न्यायालय क े वल यह सं ुष्ट कर सक ा है निक क्या अभिभयुक्त क े निवरुद्ध कोई वास् निवक मामला है और अभिभयोजन आरोप क े समथ0न में प्रथमदृष्टया साक्ष्य प्रस् ु करने में समथ0 होगा।" (ग) राम गोविंवद उपाध्याय बनाम सुदश0न सिंसह - (2002) 3 एससीसी 598 में, न्यायमूर्ति बनज> क े माध्यम से बोल े हुए, इस अदाल ने इस बा पर जोर निदया निक जमान क े मामलों में निववेकाति कार का प्रयोग करने वाली अदाल को इसे निववेकपूर्ण0 रीक े से करना होगा। इस बा पर प्रकाश डाल े हुए निक ठोस क 0 क े निबना जमान को निनतिश्च रूप से नहीं निदया जा सक ा है, इस न्यायालय ने इस प्रकार कहा: "3. हालांनिक जमान की मंजूरी एक निववेका ीन आदेश है, लेनिकन इसक े लिलए इस रह क े निववेकाति कार का निववेकपूर्ण0 रीक े से इस् ेमाल करने की जरूर है, न निक सामान्य ौर पर। निबना निकसी ठोस कारर्ण क े जमान क े आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सक ा है। थानिप, यह अभिभलिललिख करने की आवश्यक ा नहीं है निक जमान की मंजूरी न्यायालय द्वारा निनपटाए जा रहे मामले क े प्रासंनिगक थ्यों पर निनभ0र है और थानिप, थ्य हमेशा प्रत्येक मामले में भिभन्न हो े हैं। हालांनिक समाज में अभिभयुक्तों की निनयुनिक्त पर निवचार निकया जा सक ा है, लेनिकन यह अपने आप में े मामले में एक माग0दश0क कारक नहीं हो सक ा है और इसे हमेशा जमान देने वाली अन्य परिरदि्स्थति यों क े साथ जोड़ा जाना चानिहए और होना चानिहए। अपरा की प्रक ृ ति जमान देने क े लिलए बुनिनयादी निवचारों में से एक है - अपरा जिज ना जघन्य है, जमान खारिरज होने की संभावना उ नी ही अति क है, हालांनिक, यह मामले क े थ्यात्मक मैनिट्रक्स पर निनभ0र कर ा है।" (घ) क“यार्ण चन्द्र सरकार बनाम राजेश रंजन उफ 0 पzपू यादव और अन्य (2004) 7 एससीसी 528 मे, इस न्यायालय ने अभिभनिन ा0रिर निकया निक यद्यनिप यह स्थानिप है निक जमान आवेदन पर निवचार करने वाला न्यायालय साक्ष्य की निवस् ृ जांच नहीं कर सक ा है और मामले क े गुर्ण-दोर्ष पर निवस् ृ चचा0 नहीं कर सक ा है, न्यायालय से जमान की मंजूरी को न्यायोतिच ठहराने वाले प्रथमदृष्टया कारर्णों को इंनिग करने की अपेक्षा की जा ी है। (ङ) प्रशां क ु मार सरकार बनाम आशीर्ष चटज> (2010) 14 एससीसी 496 में, इस न्यायालय ने यह म र्व्ययक्त निकया है निक जहां उच्च न्यायालय ने यांनित्रक रूप से जमान मंजूर की है, वहां उक्त आदेश निदमाग न लगाने क े दोर्ष से ग्रस् होगा, जो इसे अवै बना ा है। इस न्यायालय ने उन परिरदि्स्थति यों क े संबं में र्व्ययवस्था दी जिजनक े ह जमान देने क े आदेश को रद्द निकया जा सक ा है। ऐसा करने में, जमान देने क े लिलए अदाल क े फ ै सले को जिजन कारकों को निनद‡भिश करना चानिहए था, उन्हें भी निनम्नानुसार निवस् ृ निकया गया है: "यह परंपरा है निक यह न्यायालय, आम ौर पर, अभिभयुक्त को जमान देने या खारिरज करने क े उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश में हस् क्षेप नहीं कर ा है। थानिप, उच्च े लिलए भी यह समान रूप से आवश्यक है निक वह इस मुद्दे पर इस े अनेक निनर्ण0यों में अति कभिथ आ ारभू जिसद्धां ों का निववेकपूर्ण0, साव ानीपूव0क और कड़ाई से अनुपालन कर े हुए अपने निववेकाति कार का प्रयोग करे।यह अच्छी रह से स्थानिप है निक, अन्य परिरदि्स्थति यों क े बीच, जमान क े लिलए आवेदन पर निवचार कर े समय ध्यान निदए जाने वाले कारक हैंः(i) क्या यह निवश्वास करने का कोई प्रथम दृष्टया या उतिच आ ार है निक अभिभयुक्त ने अपरा निकया था; (ii) आरोप की प्रक ृ ति और गंभीर ा; (iii) दोर्षजिसतिद्ध की दशा में दंड की गंभीर ा, (iv) जमान पर रिरहा होने पर अभिभयुक्त क े फरार होने या भाग जाने का ख रा; (v) अभिभयुक्त का चरिरत्र, र्व्ययवहार, सा न, पद और दि्स्थति; (vi) अपरा क े दोहराए जाने की संभावना; (vii) गवाहों क े प्रभानिव होने की उतिच आशंका; और (viii) निनतिश्च रूप से जमान देने से न्याय क े निवफल होने का ख रा।" (च) एक अन्य कारक, अभिभरक्षा की अवति है, जिजसे जमान आवेदन पर निनर्ण0य लेने में अदाल ों क े निनर्ण0य का माग0दश0न करना चानिहए। थानिप, जैसा निक ऐश मोहम्मद बनाम भिशवराज सिंसह @लल्ला बाहु और अन्य (2012) 9 एससीसी 446 में उल्लेख निकया गया है, अभिभरक्षा की अवति को परिरदि्स्थति यों की समग्र ा और अभिभयुक्त क े आपराति क पूव0वृत्त/ पृष्ठभूनिम, यनिद कोई हो, क े साथ-साथ ौला जाना चानिहए। इसक े अति रिरक्त, ऐसी परिरदि्स्थति यां जो जमान की मंजूरी को न्यायोतिच ठहरा सक ी हैं, जमान चाहने वाले अभिभयुक्त की र्व्ययनिक्तग स्व ंत्र ा क े साथ-साथ अभिभयुक्त को छोड़ने में अं व0लिल सामाजिजक चिंच ा क े र्व्ययापक संदभ0 में पर निवचार निकया जाना है। (छ) नीरू यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2016) 15 एससीसी 422 मे, ज़मान देने का निनर्ण0य ले े समय सं ुलन में रखे जाने वाले निवचारों पर इस े निनर्ण0यों की एक श्रृंखला का उल्लेख करने क े बाद, न्यायमूर्ति दीपक निमश्रा (उस समय न्यायमूर्ति क े रूप में) द्वारा अनुच्छेद 15 और 18 में निनम्नानुसार अवलोकन निकया गया: "15. यह कानून की दि्स्थति होने क े कारर्ण, यह बादल रनिह आकाश की रह स्पष्ट है निक उच्च न्यायालय ने अभिभयुक्त क े आपराति क इति हास को पूरी रह से नजरअंदाज कर निदया है। उच्च न्यायालय ने सम ा क े जिसद्धां को महत्व निदया है। एक निहस्ट्रीशीटर अपरा ों की प्रक ृ ति में शानिमल है जिजसे हमने यहां पुन: प्रस् ु निकया है, यह मामूली अपरा नहीं हैं ानिक उसे निहरास में न रखा जाए, लेनिकन अपरा जघन्य प्रक ृ ति क े हैं और इस रह क े अपरा निकसी भी रह से कम नहीं माने जा सक े हैं। इस रह क े मामले एक निवश्लेर्षर्णात्मक निदमाग को गज0ना और निबजली क े साथ मूसला ार बारिरश की संभावना की भांति प्रभानिव कर े हैं। कानून उम्मीद कर ा है निक न्यायपालिलका इस रह क े आरोपी र्व्ययनिक्तयों को बड़े पैमाने पर स्वीकार कर े समय स क 0 रहेगी और इसलिलए, निववेकपूर्ण0 रीक े से निनर्ण0य क े प्रयोग करने पर जोर निदया जा ा है। x x x

18. मामले से अलग होने से पहले, हम लाभ क े साथ दोहरा सक े हैं निक यह जमान रद्द करने की अपील नहीं है क्योंनिक रद्द करने की मांग पय0वेक्षर्ण परिरदि्स्थति यों क े कारर्ण नहीं की गई है। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश को रद्द करने की मांग की गई है क्योंनिक कई प्रासंनिगक कारकों पर ध्यान नहीं निदया गया है, जिजसमें अभिभयुक्तों क े आपराति क पूव0वृत्त शानिमल हैं और यह आदेश को निवचलिल कर ा है। इसलिलए, अपरिरहाय0 परिरर्णाम आक्षेनिप आदेश की अवहेलना है।" (ज) अनिनल क ु मार यादव बनाम राज्य (एनसीटी निदल्ली (2018)12 एससीसी 129 में, इस न्यायालय ने जमान क े रद्दकरर्ण क े आदेश की अपील पर निवचार कर े हुए क ु छ महत्वपूर्ण0 बा ों का उल्लेख निकया है जिजनक े बारे में न्यायालय को यह निनर्ण0य कर े समय ध्यान रखना चानिहए निक जमान मंजूर की जाए या नहीं। ऐसा कर े हुए, इस न्यायालय ने कहा है निक यद्यनिप उन निवचारर्णों की एक निवस् ृ सूची निवनिह करना संभव नहीं है जो जमान आवेदन का निवनिनश्चय करने में न्यायालय का माग0दश0न कर े हैं, विंक ु जमान मंजूर करने वाले आदेश की प्राथनिमक अपेक्षा यह है निक यह े आदेश का निववेकपूर्ण0 प्रयोग का परिरर्णाम होना चानिहए।इस न्यायालय क े निनष्कर्ष0 निनम्नानुसार निनकाले गए हैं: “17. जमान मंजूर कर े समय, सुसंग निवचार निनम्नलिललिख हैंः(i) अपरा की गंभीर ा की प्रक ृ ति; (ii) साक्ष्य की प्रक ृ ति और परिरदि्स्थति याँ जो अभिभयुक्त क े लिलए निवभिशष्ट हैं; और (iii) अभिभयुक्त क े न्याय से भागने की संभावना; (iv) उसकी रिरहाई का अभिभयोजन पक्ष क े गवाहों पर पड़ने वाला प्रभाव, समाज पर इसका प्रभाव; और (v) उसक े छेड़छाड़ की संभावना।इसमें कोई संदेह नहीं है निक यह सूची पूरी नहीं है। जमान की मंजूरी या इनकार क े संबं में कोई कठोर निनयम नहीं हैं, प्रत्येक मामले पर अपने गुर्ण-दोर्ष क े आ ार पर निवचार निकया जाना है।यह मामला हमेशा न्यायालय द्वारा न्याय क े निववेकपूर्ण0 प्रयोग की मांग कर ा है।" i) रमेश भवन राठौड़ बनाम निवशनभाई हीराभाई मकवाना मकवाना (कोली) और अन्य, (2021) 6 एससीसी 230 मे, इस न्यायालय ने निनर्ण0यों की एक श्रृंखला को निनर्दिदष्ट करने क े बाद जमान की मंजूरी क े लिलए कारर्ण निन ा0रिर करने की आवश्यक ा और महत्व पर जोर निदया।इस अदाल ने स्पष्ट रूप से देखा निक जमान देने वाली अदाल अपने न्यातियक निदमाग को लागू करने क े अपने क 0र्व्यय को टाल नहीं सक ी है और कारर्णों को इंनिग कर ी है निक क्यों जमान दी गई या अस्वीकार कर दी गई। इस न्यायालय की निटzपभिर्णयों को निनम्नानुसार उद्धृ निकया गया हैः "35. हम व 0मान मामले में आदेशों क े अनुpमर्ण में उच्च न्यायालय की निटzपभिर्णयों को अस्वीकार कर े हैं यह दज0 कर े हुए की पक्षों क े अति वक्ता "एक और क 0 पूर्ण0 आदेश क े लिलए दबाव नहीं डाल े हैं।"जमान देना एक ऐसा मामला है जो आपराति क न्याय क े उतिच प्रशासन में अभिभयुक्तों की स्व ंत्र ा, राज्य क े निह और अपरा क े पीनिड़ ों को अं व0लिल कर ा है। यह एक सुस्थानिप जिसद्धां है निक यह निन ा0रिर करने क े लिलए निक क्या जमान दी जानी चानिहए, उच्च न्यायालय, या उस मामले क े लिलए, दंड प्रनिpया संनिह ा की ारा 439 क े ह निकसी आवेदन का निवनिनश्चय करने वाला सत्र न्यायालय गुर्णागुर्ण क े आ ार पर थ्यों क े निवस् ृ मू“यांकन पर आरंभ नहीं करेगा क्योंनिक आपराति क निवचारर्ण अभी होना है। जमान पर फ ै सला सुना े समय ये निटzपभिर्णयां भी मुकदमे क े न ीजे पर बाध्यकारी नहीं होंगी। विंक ु जमान मंजूर करने वाला न्यायालय यह निवनिनश्चय करने क े प्रयोजन क े लिलए निक जमान मंजूर की जाए या नहीं, न्यातियक मदि्स् ष्क को लागू करने और संतिक्षप्त कारर्ण, जो भी हो, अभिभलिललिख करने क े अपने क 0र्व्यय से निवर नहीं हो सक ा है। पक्षकारों की सहमति से उच्च न्यायालय का यह क 0र्व्यय समाप्त नहीं हो सक ा निक वह यह ब ाए निक उसने जमान क्यों दी है या क्यों नहीं दी है। यही कारर्ण है निक आवेदन क े परिरर्णाम का एक रफ अभिभयुक्त की स्व ंत्र ा और दूसरी रफ आपराति क न्याया ीश क े उतिच प्रव 0न में साव0जनिनक निह पर महत्वपूर्ण0 प्रभाव पड़ ा है.पीनिड़ ों और उनक े परिरवारों क े अति कार भी दांव पर हैं। ये मामले दो र्व्ययनिक्तग पक्षों क े निनजी अति कारों से संबंति नहीं हैं, जैसा निक दीवानी काय0वाही में हो ा है। आपराति क कानून को उतिच रूप से लागू करना जननिह का मामला है। इसलिलए, हमें उस रीक े को अस्वीकार करना चानिहए जिजसमें मामलों क े व 0मान बैच में एक क े बाद एक आदेशों ने दज0 निकया है निक "संबंति पक्षों क े अति वक्ता आगे क े क 0 संग आदेश क े लिलए दबाव नहीं डाल े हैं।" यनिद पया0प्त कारर्णों को दज0 नहीं करने क े लिलए यह एक छद्म शब्द है, ो इस रह का फॉमू0ला न्यातियक जांच से आदेश को बचा नहीं सक ा है।

36. दंड प्रनिpया संनिह ा की ारा 439 क े ह जमान देना न्यातियक निववेक क े प्रयोग से जुड़ा मामला है।जमान देने या अस्वीकार करने में न्यातियक निववेक निकसी अन्य निववेक क े मामले में जो एक न्यातियक संस्था क े रूप में अदाल में निननिह है, असंरतिच नहीं है। कारर्णों को अभिभलिललिख करने का क 0र्व्यय एक महत्वपूर्ण0 सुरक्षा है जो यह सुनिनतिश्च कर ा है निक न्यायालय को सौंपे गए निववेकाति कार का प्रयोग न्यायसंग रीक े से निकया जाए।न्यातियक आदेश में कारर्णों का अभिभलेखन यह सुनिनतिश्च कर ा है निक आदेश में अं र्दिननिह निवचार प्रनिpया जांच क े अ ीन है और यह कारर्ण और न्याय क े वस् ुनिनष्ठ मानकों को पूरा कर ी है।" (ञ) हाल ही में भूपेन्द्र सिंसह बनाम राजस्थान राज्य और अन्य (2021 की आपराति क अपील संख्या 1279) वाले मामले में, इस न्यायालय ने यह अव ारिर करने की अपीलीय शनिक्त क े प्रयोग क े संबं में म र्व्ययक्त निकया निक क्या जमान रद्द करने क े आवेदन से भिभन्न वै कारर्णों से जमान मंजूर की गई है। अथा0 ् यह न्यायालय इस आ ार पर जमान मंजूर करने क े निवक ृ आदेश को अपास् करने और जमान रद्द करने क े बीच निवभेद कर ा है निक अभिभयुक्त ने स्वयं गल आचरर्ण निकया है या ऐसे रद्द करने की अपेक्षा करने वाले क ु छ नए थ्यों क े कारर्ण। मनिहपाल बनाम राजेश क ु मार, (2020) 2 एससीसी 118 को उद्धृ कर े हुए, इस न्यायालय ने निनम्नलिललिख म र्व्ययक्त निकयाः “16. जमान मंजूर करने वाले निकसी आदेश की शुद्ध ा का आंकलन करने में अपीलीय न्यायालय की शनिक्त को निनद‡भिश करने वाले निवचार, जमान क े रद्दकरर्ण क े लिलए आवेदन क े आंकलन से अलग हैं। जमान मंजूर करने वाले निकसी आदेश की शुद्ध ा का परीक्षर्ण इस आ ार पर निकया जा ा है निक क्या जमान मंजूर करने में निववेकाति कार का अनुतिच या मनमाना प्रयोग निकया गया था। कसौटी यह है निक जमान देने का आदेश निवक ृ, अवै या अनुतिच है। दूसरी ओर, जमान रद्द करने क े लिलए आवेदन की जांच आम ौर पर पय0वेक्षर्णीय परिरदि्स्थति यों क े अदि्स् त्व की निनहाई पर या जिजस र्व्ययनिक्त को जमान दी गई है, उसक े द्वारा जमान की श ~ क े उल्लंघन पर की जा ी है।" (ट) अभिभयुक्त-प्रत्यथ> क े निवद्वान अति वक्ता ने म्याकला म0राजम और अन्य बनाम ेलंगाना राज्य और अन्य - (2020) 2 एसएससी 743 में इस अदाल क े फ ै सले पर भरोसा निकया है निक जमान देने क े लिलए निवस् ृ कारर्णों को निनर्दिदष्ट करने की आवश्यक ा नहीं है। सार यह है निक अदाल द्वारा ज़मान दे े हुए मामले क े रिरकॉड0 का अवलोकन निकया जाना चानिहए था। उक्त मामले क े थ्य यह हैं निक पंद्रह र्व्ययनिक्तयों क े लिखलाफ भार ीय दंड संनिह ा, 1860 की ारा 148, 120 बी, 302 सपनिठ ारा 149 क े ह अपरा ों क े लिलए भिशकाय दज0 की गई थी।इसमें आरोपी ने प्र ान सत्र न्याया ीश क े समक्ष जमान क े लिलए एक आवेदन निदया, जिजसने क े स डायरी, गवाहों क े बयानों और अन्य संबंति अभिभलेखों क े अवलोकन क े बाद आरोपी को एक आदेश क े माध्यम से जमान पर रिरहा कर निदया, जिजसमें रिरकॉड0 पर मौजूद सामग्री पर निवस् ृ चचा0 नहीं की गई थी। उच्च न्यायालय ने इस आ ार पर जमान मुचलका को रद्द कर निदया निक प्र ान सत्र न्याया ीश ने जमान मंजूर करने क े आदेश में रिरकॉड0 पर सामग्री पर चचा0 नहीं की थी। इस न्यायालय क े समक्ष अभिभयुक्तों द्वारा की गई एक अपील में, ज़मान देने क े आदेश को बहाल कर निदया गया था और ज़मान देने से पहले कारर्णों को अभिभलेख मे दज0 करने और अभिभलेख पर मौजूद सामग्री पर चचा0 करने क े लिलए न्यायालय क े क 0र्व्यय क े रूप में निनम्नलिललिख निटzपभिर्णयां की गई ं: "10. जमान रद्द करने क े मामले में प्रयोग की जाने वाली शनिक्त क े दायरे पर इस न्यायालय द्वारा निन ा0रिर कानून का अवलोकन करने क े बाद, यह जांचना आवश्यक है क्या सत्र न्यायालय द्वारा ज़मान देने वाला आदेश निवक ृ है और दुब0ल ाओं से ग्रस् है जिजसक े परिरर्णामस्वरूप न्याय की हानिन हुई है। बेशक, सत्र न्यायालय ने अभिभलेख पर मौजूद सामग्री पर निवस् ार से चचा0 नहीं की, लेनिकन जिजस आदेश से जमान दी गई थी, उससे संक े निमल ा है निक जमान देने से पहले पूरी सामग्री का अध्ययन निकया गया था। यह न ो भिशकाय क ा0 प्रत्यथ> नं॰ 2 और न ही राज्य का यह मामला है निक अपीलक ा0ओं को जमान दे े समय प्रासंनिगक निवचारों को सत्र न्यायालय द्वारा ध्यान में नहीं रखा गया है। सत्र न्यायालय का आदेश जिजसक े द्वारा अपीलक ा0ओं को जमान दी गई थी, को निवक ृ नहीं कहा जा सक ा क्योंनिक सत्र न्यायालय इस थ्य से अवग था निक जांच पूरी हो चुकी थी और अपीलक ा0 द्वारा सबू ों क े साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं थी।

11. जमान रद्द करने क े लिलए दायर यातिचका सत्र न्यायालय द्वारा पारिर आदेश की अवै ा और जमान मंजूर निकए जाने क े बाद उनकी रिरहाई क े बाद अपीलक ा0ओं क े आचरर्ण दोनों क े आ ार पर है। निकसी बोज्जा रविंवदर द्वारा पुलिलस आयुक्त, करीमनगर को दायर की गई भिशकाय को प्रत्यथ> संख्या 2 द्वारा रिरकॉड0 में रखा गया है। भिशकाय में कहा गया है निक अपीलक ा0 गांव में स्व ंत्र रूप से घूम रहे थे और गवाहों को मका रहे थे। हमने भिशकाय का अध्ययन निकया और पाया निक उसमें लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं। इस बारे में कोई उल्लेख नहीं है निक 15 में से कौन सा आरोपी गवाहों को मकाने क े काय~ में लिलप्त था या साक्ष्य क े साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रहा था।

12. पक्षकारों की ओर से की गई प्रस् ुति यों पर निवचार करने और अभिभलेख पर सामग्री की जांच करने क े बाद, हमारी राय है निक उच्च न्यायालय अपीलक ा0ओं की जमान रद्द करने में सही नहीं था। सत्र न्याया ीश द्वारा जमान मंजूर करने क े आदेश को निवक ृ नहीं कहा जा सक ा है। अपीलक ा0 द्वारा गवाहों को प्रभानिव करने का आरोप लगाने वाली भिशकाय अस्पष्ट है और गवाहों को मकाने में अपीलक ा0ओं की संलिलप्त ा क े बारे में कोई निववरर्ण नहीं है। इसलिलए, अपीलों को अनुमति दी जा ी है और उच्च न्यायालय का निनर्ण0य रद्द कर निदया जा ा है।" थानिप, हमारा यह म है निक उक्त निनर्ण0य निनम्नलिललिख कारर्णों से इस मामले क े थ्यों पर लागू नहीं हो ा हैः सबसे पहले, इस न्यायालय ने पूव¨क्त निनर्ण0य में अभिभयुक्त को जमान देने क े आदेश को इस आ ार पर बहाल कर निदया निक यद्यनिप सत्र न्यायालय द्वारा े आदेश में अभिभलेख पर मौजूद सामग्री क े बारे में कोई चचा0 नहीं की गई थी, यह सत्र न्यायालय क े उस आदेश से स्पष्ट था जिजसमें जमान दी गई थी, निक जमान देने का निनर्ण0य अभिभलेख पर संपूर्ण0 सामग्री क े अवलोकन क े बाद लिलया गया था। जबनिक सामग्री को निवशेर्ष रूप से संदर्भिभ नहीं निकया गया हो, जमान मंजूर करने वाला आदेश इस थ्य का संक े था निक यह गहन निवचार-निवमश0 क े बाद य निकया गया था। थानिप, व 0मान मामले में, उच्च न्यायालय क े आक्षेनिप आदेशों में ऐसा कोई संक े नहीं देखा जा सक ा है जो इस थ्य का सूचक होगा निक जमान मंजूर करने का निनर्ण0य करने से पूव0 अभिभलेख पर रखी गई सामग्री का अवलोकन निकया गया था। दूसरा, संबंति अभिभयुक्त द्वारा निनर्दिदष्ट निकया गया मामला एक अपरा था, जो कभिथ रूप से पंद्रह र्व्ययनिक्तयों द्वारा निकया गया था।इसमें भिशकाय क ा0 ने ऐसे पंद्रह र्व्ययनिक्तयों में से प्रत्येक को निवशेर्ष रूप से भूनिमकाएं नहीं सौंपी थीं। इस प्रकार यह पाया गया निक आरोप अस्पष्ट होने क े कारर्ण प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं बनाया जा सक ा था, जिजसमें अभिभयुक्त को जमान की मंजूरी को न्यायोचिंच ठहराया गया था। हाला निक, मौजूदा मामले में, सूचनाक ा0 अपीलक ा0 द्वारा क े वल एक अभिभयुक्त का नाम लिलया गया है और उसकी भूनिमका निवभिशष्ट है। इसलिलए, मामले क े थ्यों पर भरोसा निकया गया, जो हमारे सम्मुख है उससे काफी अलग है, हम पा े हैं निक प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवद्वान अति वक्ता द्वारा भरोसा निकए गए निनर्ण0य से उसक े मामले में कोई सहाय ा नहीं निमलेगी। (ठ) अभिभयुक्त को जमान देने क े आदेश पर पहुंचने क े लिलए बुतिद्ध क े प्रयोग और निववेक क े न्यायपूर्ण0 प्रयोग की आवश्यक ा पर इस न्यायालय का सबसे हालिलया निनर्ण0य बृजमनी देवी बनाम पzपू क ु मार और अन्य (आपराति क अपील संख्या 1663 / 2021) क े मामले में है जिजसका निनस् ारर्ण 17 निदसंबर, 2021 को निकया गया, जिजसमें इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ ने अभिभयुक्तों को जमान देने वाले उच्च न्यायालय क े एक अनुतिच और आकदि्स्मक आदेश को रद्द कर े हुए कहा निक: "जबनिक हम इस थ्य क े प्रति सचे हैं निक निकसी र्व्ययनिक्त की स्व ंत्र ा एक अमू“य अति कार है, साथ ही साथ जमान क े लिलए आवेदन पर निवचार कर े समय निकसी े लिखलाफ आरोपों की गंभीर प्रक ृ ति और उन थ्यों को नज़र-अंदाज़ नही निकया जा सक ा है, जिजनका मामले से संबं है, निवशेर्ष रूप से जब आरोप झूठे, ुच्छ या ंग करने वाले प्रक ृ ति क े नहीं हो सक े हैं, लेनिकन अभिभलेख पर लाई गई पया0प्त सामग्री द्वारा समर्भिथ हों, ानिक न्यायालय प्रथम दृष्टया निकसी निनष्कर्ष0 पर पहुंच सक े । जमान मंजूर करने क े लिलए आवेदन पर निवचार कर े समय प्रथमदृष्टया निनष्कर्ष0 को कारर्णों से समर्भिथ निकया जाना चानिहए और अभिभलेख पर लाए गए मामले क े महत्वपूर्ण0 थ्यों को ध्यान में रख े हुए उस पर पहुंचा जाना चानिहए।अपरा की प्रक ृ ति, अभिभयुक्त की आपराति क पृष्ठभूनिम, यनिद कोई हो, और दंड की प्रक ृ ति, जो े निवरुद्ध अभिभकभिथ अपरा क े संबं में दोर्षजिसतिद्ध क े पश्चा ् होगी, क े संबं में सुझाए गए थ्यों पर सम्यक निवचार निकया जाना चानिहए।"

15. निकसी न्यायालय द्वारा निकए गए निनर्ण0य क े लिलए कारर्ण ब ाने क े क 0र्व्यय क े पहलू पर, या उस मामले क े लिलए, यहां क निक एक अ 0-न्यातियक प्राति कारी द्वारा भी, pांति एसोजिसएट्स प्राइवेट लिलनिमटेड और अन्य बनाम मसूद अहमद खान और अन्य (2010) 9 एससीसी 496 में इस न्यायालय क े एक निनर्ण0य को संदर्भिभ करना उपयोगी होगा, जिजसमें कई निनर्ण0यों को निनर्दिदष्ट करने क े बाद इस न्यायालय ने अनुच्छेद 47 में इस विंबदु पर कानून को संक्षेप में प्रस् ु निकया। इस मामले क े उद्देश्य क े लिलए प्रासंनिगक जिसद्धां नीचे उद्धृ निकए गए हैं: “(क) कारर्णों को अभिभलिललिख करने पर जोर देने का अभिभप्राय न्याय क े र्व्ययापक जिसद्धां की सेवा करना है निक न्याय न क े वल निकया जाना चानिहए बदि्“क यह भी प्र ी होना चानिहए निक निकया गया है। (ख) कारर्णों को अभिभलिललिख करना न्यातियक और अ 0 न्यातियक या यहां क निक प्रशासनिनक शनिक्त क े निकसी भी संभानिव मनमाने प्रयोग पर वै अवरो क े रूप में भी काय0 कर ा है। (ग) कारर्णों से यह आश्वस् हो ा है निक निनर्ण0य करने वाले ने प्रासंनिगक आ ारों पर और बाहरी निवचारों की अवहेलना करक े निववेकाति कार का प्रयोग निकया है। (घ) न्यातियक, अ 0 न्यातियक और यहां क निक प्रशासनिनक निनकायों द्वारा प्राक ृ ति क न्याय क े जिसद्धां ों का पालन करने क े रूप में क 0 वास् व में निनर्ण0य लेने की प्रनिpया का एक अनिनवाय0 घटक बन गया है। (ङ) कानून क े शासन और संवै ानिनक शासन क े लिलए प्रति बद्ध सभी देशों में जारी न्यातियक प्रवृलित्त प्रासंनिगक थ्यों क े आ ार पर क 0 संग निनर्ण0यों क े पक्ष में है। वस् ु ः यह न्यातियक निनर्ण0यन की जीवन ारा है, इस जिसद्धां को न्यायोतिच ठहरा े हुए निक क 0 न्याय की आत्मा है। (च) इन निदनों न्यातियक या अ 0-न्यातियक म उ ने ही भिभन्न हो सक े हैं जिज ने उन्हें देने वाले न्याया ीश और प्राति कारी।ये सभी निनर्ण0य एक सामान्य उद्देश्य की पूर्ति कर े हैं जो इस कारर्ण से प्रदर्भिश हो ा है निक प्रासंनिगक कारकों पर निनष्पक्ष रूप से निवचार निकया गया है।न्याय निव रर्ण प्रर्णाली में वानिदयों क े निवश्वास को बनाए रखने क े लिलए यह महत्वपूर्ण0 है। (छ) क 0 पर आग्रह न्यातियक उत्तरदातियत्व और पारदर्भिश ा दोनों क े लिलए एक आवश्यक ा है। (ज) यनिद एक न्याया ीश या अ 0-न्यातियक प्राति करर्ण अपनी निनर्ण0य लेने की प्रनिpया क े बारे में पया0प्त रूप से स्पष्टवादी नहीं है, ो यह जानना असंभव है निक निनर्ण0य लेने वाला र्व्ययनिक्त पूव¨दाहरर्ण क े जिसद्धां क े प्रति निनष्ठावान है या वृतिद्धवाद क े जिसद्धां ों क े प्रति । (झ) निनर्ण0यों क े समथ0न में क 0 ठोस, स्पष्ट और संतिक्षप्त होने चानिहए। क~ का ढोंग या "रबर स्टैम्प क~" को एक वै निनर्ण0य लेने की प्रनिpया क े साथ नहीं जोड़ा जाना चानिहए। (ञ) इस पर संदेह नहीं निकया जा सक ा है निक पारदर्भिश ा न्यातियक शनिक्तयों क े दुरुपयोग पर संयम की अनिनवाय0 ा है।निनर्ण0य लेने में पारदर्भिश ा न क े वल न्याया ीशों और निनर्ण0य लेने वालों की गलति यों की संभावना को कम कर ी है बदि्“क उन्हें र्व्ययापक जांच क े अ ीन भी बना ी है।(देखें - न्यातियक स्पष्टवानिद ा क े बचाव में डेनिवड शानिपरो [(1987) 100 हाव0ड0 लॉ रिरर्व्ययू 731 37) (ट) सभी सामान्य कानून क्षेत्राति कारों में निनर्ण0य भनिवष्य क े लिलए उदाहरर्ण स्थानिप करने में महत्वपूर्ण0 भूनिमका निनभा े हैं।इसलिलए, कानून क े निवकास क े लिलए, निनर्ण0य क े लिलए क 0 देने की आवश्यक ा सार है और वस् ु ः "उतिच प्रनिpया" का एक निहस्सा है।" हालांनिक उपरोक्त निनर्ण0य राष्ट्रीय उपभोक्ता निववाद निनवारर्ण आयोग द्वारा एक गूढ़ आदेश द्वारा एक पुनरीक्षर्ण यातिचका को खारिरज करने क े संदभ0 में निदया गया था, निकसी मामले का निनर्ण0य कर े समय कारर्ण ब ाने की आवश्यक ा पर उक्त निनर्ण0य पर भरोसा निकया जा सक ा है।

16. लैनिटन सूनिक्त "सेसेंट राशन लेनिगस सेसट इzसा लेक्स" का अथ0 है " क 0 कानून की आत्मा है, और जब निकसी निवशेर्ष कानून का कारर्ण समाप्त हो जा ा है, ो कानून भी समाप्त हो जा ा है", भी उपयुक्त है।

17. हमने उपरोक्त आक्षेनिप आदेश क े प्रासंनिगक निहस्सों को निनकाला है।शुरुआ में, हम देख े हैं निक निनकाले गए भाग ही जमान मंजूर कर े समय उच्च न्यायालय क े " क 0 " का निहस्सा हैं। जैसा निक उपरोक्त निनर्ण0यों से उल्लेख निकया गया है, निकसी े लिलए जमान मंजूर कर े समय निवस् ृ कारर्ण देना आवश्यक नहीं है, निवशेर्ष रूप से जब मामला प्रारंभिभक चरर्ण में हो और अभिभयुक्तों द्वारा निकए गए अपरा ों क े आरोपों को इस रह स्पष्ट नहीं निकया गया होगा। यह आभास देने क े लिलए निवस् ृ निववरर्ण दज0 नहीं निकया जा सक ा है निक यह मामला ऐसा है जिजसक े परिरर्णामस्वरूप े लिलए एक आवेदन पर एक आदेश पारिर कर े समय दोर्षजिसतिद्ध या, इसक े निवपरी, बरी हो जाएगी। हालाँनिक, ज़मान आवेदन पर निनर्ण0य लेने वाला न्यायालय मामले क े भौति क पहलुओं से अपने निनर्ण0य को पूरी रह से अलग नहीं कर सक ा है जैसे अभिभयुक्त क े निवरुद्ध लगाए गए आरोप; सजा की गंभीर ा यनिद आरोप उतिच संदेह से परे सानिब हो े हैं और इसक े परिरर्णामस्वरूप दोर्षजिसतिद्ध होगी; अभिभयुक्त द्वारा प्रभानिव निकए जा रहे गवाहों की उतिच आशंका; सबू ों से छेड़छाड़; अभिभयोजन पक्ष क े मामले में ुच्छ ा; अभिभयुक्तों की आपराति क पृष्टभूनिम; और आरोपी क े लिखलाफ आरोप क े समथ0न में न्यायालय की प्रथम दृष्टया सं ुनिष्ट।

18. अं ोगत्वा, जमान क े लिलए आवेदन पर निवचार करने वाले न्यायालय को एक ओर अभिभयुक्त द्वारा निकए गए अभिभकभिथ अपरा को ध्यान में रख े हुए और दूसरी ओर मामले क े निवचारर्ण की शुद्ध ा सुनिनतिश्च कर े हुए न्यायसंग रीति से और निवति क े स्थानिप जिसद्धां ों क े अनुसार निववेकाति कार का प्रयोग करना होगा।

19. इस प्रकार, जबनिक ज़मान देने क े लिलए निवस् ृ कारर्ण निनर्दिदष्ट नहीं निकए जा सक े हैं या न्यायालय द्वारा ज़मान आवेदन पर निवचार कर े हुए मामले की खूनिबयों की र्व्ययापक चचा0 नहीं की जा सक ी है, एक क 0 या प्रासंनिगक कारर्णों से रनिह आदेश का परिरर्णाम नहीं हो सक ा है जमान देने बाब ।ऐसे मामले में अभिभयोजन पक्ष या आवेदक को एक उच्च मंच क े समक्ष आदेश का निवरो करने का अति कार है। जैसा निक गुरचरर्ण सिंसह बनाम राज्य (निदल्ली प्रशासन) 1978 निpनिमनल एलजे 129 में उल्लेख निकया गया है। जब एक अभिभयुक्त को जमान दी गई है, ो राज्य, यनिद इस रह की जमान देने क े बाद नई परिरदि्स्थति यां उत्पन्न हुई हैं, ो द.प्र.सं. की ारा 439 (2) क े ह जमान रद्द करने की मांग कर े हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सक ा है। हालाँनिक, यनिद ज़मान निदए जाने क े बाद से कोई नई परिरदि्स्थति उत्पन्न नहीं हुई है, ो राज्य इस आ ार पर ज़मान देने क े आदेश क े लिखलाफ अपील कर सक ा है निक यह निवक ृ या अवै है या भौति क पहलुओं की अनदेखी करक े निकया गया है, जिजससे प्रथम दृष्टया आरोपी क े लिखलाफ मामला बन ा है।

20. उपयु0क्त चचा0 को ध्यान में रख े हुए, हम अब व 0मान मामले क े थ्यों पर निवचार करेंगे। प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवरुद्ध अभिभकथन और साथ ही बार में उठाई गई दलीलों को ऊपर निवस् ार से वर्भिर्ण निकया गया है।इस पर निवचार करने पर मामले क े निनम्नलिललिख पहलू सामने आएंगेः क) प्रत्यथ>-आरोपी क े लिखलाफ आरोप मृ क राम स्वरूप खोखर की हत्या क े संबं में आईपीसी की ारा 302 क े ह है, जो सूचनाक ा0 अपीलक ा0 क े निप ा थे, जो एक निवकलांग र्व्ययनिक्त थे। इस प्रकार, प्रत्यथ> अभिभयुक्त क े निवरुद्ध आरोनिप अपरा गंभीर प्रक ृ ति का है। (ख) अभिभयुक्त क े निवरुद्ध आरोप यह है निक उसने उस मृ क को परास् कर निदया जो उसक े दोनों पैरों में निवक ृ ति से पीनिड़ था, उसे जमीन पर पटक निदया, उस पर बैठ गया और उसका गला घोंट निदया। पोस्टमॉट0म रिरपोट0 क े अनुसार, मौ का कारर्ण पोस्टमॉट0म से पहले गला घोटना था। (ग) यह अपीलक ा0 का भी मामला है निक प्रत्यथ> अभिभयुक्त भोपावासपाचर गांव में महत्वपूर्ण0 राजनीति क प्रभाव का प्रयोग करने वाला र्व्ययनिक्त है और उसक े कारर्ण, सूचना देने वाले को उसक े निवरुद्ध प्राथनिमकी दज0 कराने में कनिठनाई हुई। आरोपी को उसकी निगरफ् ारी की मांग कर े हुए एक पुलिलस स्टेशन क े बाहर निवरो प्रदश0न क े बाद ही निगरफ् ार निकया गया था।इस प्रकार, यनिद जमान पर हैं ो अभिभयुक्त द्वारा गवाहों को मकाने या अन्यथा प्रभानिव करने की संभावना से इंकार नहीं निकया जा सक ा है। घ) यह निक प्रत्यथ> अभिभयुक्त ने पहले दो मौकों पर अति रिरक्त मेट्रोपोलिलटन मजिजस्ट्रेट, जयपुर की अदाल क े समक्ष द.प्र.सं. की ारा 437 क े ह जमान की मांग करने वाले आवेदनों को प्रस् ु निकया था। इन्हें 23 जनवरी, 2020 और 6 माच0, 2020 क े आदेशों द्वारा अस्वीकार कर निदया गया। आरोपी ने द.प्र.सं. की ारा 439 क े ह जमान अज> भी दायर की थी, जिजसे अति रिरक्त सत्र न्याया ीश, जयपुर मेट्रोपोलिलस ने 12 माच0, 2020 क े आदेश द्वारा अभिभयुक्तों क े लिखलाफ कभिथ अपरा ों की गंभीर ा क े संबं में खारिरज कर निदया था। (ङ) उच्च न्यायालय ने निदनांक 7 मई, 2020 क े आक्षेनिप आदेश में जमान देने क े संदभ0 में मामले क े पूव¨क्त पहलुओं पर निवचार नहीं निकया है।

21. उपरोक्त उद्धृ निनर्ण0यों क े आलोक में व 0मान मामले क े पूव¨क्त थ्यों पर निवचार करने क े बाद, हम नहीं सोच े हैं निक यह मामला प्रत्यथ> क े लिखलाफ आरोपों की गंभीर ा को ध्यान में रख े हुए प्रत्यथ> को जमान देने क े लिलए एक उपयुक्त मामला है। आश्चय0जनक रूप से, राजस्थान राज्य ने आक्षेनिप आदेश क े निवरुद्ध कोई अपील दायर नहीं की है।

22. उच्च न्यायालय ने मामले क े पूव¨क्त ादि्त्वक पहलुओं की अनदेखी कर दी है और एक बहु ही गूढ़ और आकदि्स्मक आदेश द्वारा, सुसंग क 0 क े अनुसार, अभिभयुक्त को जमान दे दी है। हम पा े हैं निक प्रत्यथ> अभिभयुक्त द्वारा दायर जमान क े लिलए आवेदन की अनुमति देकर उच्च न्यायालय सही नहीं था। इसलिलए निदनांक 7 मई, 2020 का आक्षेनिप आदेश अपास् निकया जा ा है। अपील स्वीकार की जा ी है।

23. प्रत्यथ> अभिभयुक्त जमान पर है। उनका जमान मुचलका रद्द निकया जा ा है और उन्हें आज से दो सप्ताह की अवति क े भी र संबंति जेल अति कारिरयों क े समक्ष आत्मसमप0र्ण करने का निनद‡श निदया जा ा है। एम. आर. शाह बी. वी. नागरत्ना नई निदल्ली 11 जनवरी, 2022 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.