Satya Dev Bhargava v. Rajasthan State

Supreme Court of India · 17 Feb 2022 · 2022 INSC 197
B. R. Gavai; L. Nageswara Rao
Civil Appeal No 1422 of 2022
2022 INSC 197
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld Rajasthan's policy granting bonus marks only to contractual employees with in-state NHM/NRHM experience, ruling it constitutionally valid and not arbitrary under Article 14.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय अधि कारिरता
सिसविर्वोल अपील संख्या 1422/2022
[एसएलपी (सी) संख्या 24434/2019 से उत्पन्न]
सत्य देर्वो भगौर और अन्य - अपीलकता-
बनाम
राजस्थान राज्य और अन्य - प्रधितर्वोादी

े साथ
सिसविर्वोल अपील संख्या 1426-1430/2022
[एसएलपी (सी) संख्या 7341-7345/2020 से उत्पन्न]
सिसविर्वोल अपील संख्या 1431-1437/2022
[एसएलपी (सी) संख्या 8155-8161/2020 से उत्पन्न]
सिसविर्वोल अपील संख्या 1438-1440/2022
[एसएलपी (सी) संख्या 13124-13126/2020 से उत्पन्न]
सिसविर्वोल अपील संख्या 1423-1425/2022
[एसएलपी (सी) संख्या 6142-6144/2021 से उत्पन्न]
विनर्ण-य
बी. आर. गर्वोई, न्याया ीश
2022 INSC 197
JUDGMENT

1. अनुमधित अनुदत्त की गई।

2. अपीलों क े इस समूह में, अपीलकता-ओं ने राजस्थान उच्च न्यायालय, जो पुर की खण्ड पीठ द्वारा पारिरत विदनांक 13.08.2019 क े आदेश (सिजसे इसमें इसक े बाद उच्च न्यायालय क े रूप में संदर्भिभत विकया गया है) की आलोचना की है, सिजसमें उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश क े आदेश विदनांक 28.08.2018 को चुनौती देते हुए राजस्थान राज्य द्वारा दायर अपील को स्र्वोीकार कर लिलया गया। उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने उक्त आदेश क े माध्यम से अपीलार्भिथयों द्वारा दायर रिरट याधिचकाओं को स्र्वोीकार कर लिलया था और प्रत्यथX राज्य को विनदYश विदया था विक र्वोे अपीलार्भिथयों को बोनस अंक प्रदान करें, सिजन्होंने राजस्थान राज्य क े अलार्वोा अन्य राज्यों में राष्ट्रीय स्र्वोास्थ्य विमशन योजनाओं (इसमें इसक े बाद एनएचएम क े रूप में संदर्भिभत) और राष्ट्रीय ग्रामीर्ण स्र्वोास्थ्य विमशन योजनाओं (इसमें इसक े बाद एनआरएचएम क े रूप में संदर्भिभत) क े तहत काम विकया है।

3. संबद्ध विर्वोशेष अनुमधित याधिचकाओं से उत्पन्न सिसविर्वोल अपीलों में अपीलकता- अथा-त्, एसएलपी (सी) संख्या 7341-7345/2020, एसएलपी (सी) संख्या 8155-8161/2020 और एसएलपी (सी) संख्या 13124-13126/2020 इसी तरह क े उम्मीदर्वोार हैं, जो मूल रूप से उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश क े समक्ष रिरट याधिचकाकता- थे, सिजन्होंने मुख्य मामले में अपीलकता-ओं क े समान राहत की मांग की थी। एकल न्याया ीश ने विदनांक 29.08.2019 क े एक सामान्य आदेश क े माध्यम से उक्त रिरट याधिचकाओं को खारिरज कर विदया था। यहां अपीलकता-ओं ने उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष अपील की। खण्ड पीठ ने मुख्य मामले में विदए गए आक्षेविपत फ ै सले का भरोसा करते हुए विदनांक 23 माच- 2020 को जारी सामान्य आदेश क े माध्यम से अपीलों को खारिरज कर विदया। इससे व्यथिथत होने क े कारर्ण, अपीलाथX इस न्यायालय क े समक्ष हैं ।

4. एसएलपी (सी) संख्या 6142-6144/2021 से उत्पन्न सिसविर्वोल अपीलों में अपीलकता- समान रूप से रखे गए उम्मीदर्वोारों का एक अन्य समूह हैं। उन्होंने विदनांक 28.02.2019 को उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा पारिरत फ ै सले से व्यथिथत होकर एकल न्याया ीश द्वारा पारिरत विदनांक 26.11.2018 क े आदेश को चुनौती देते हुए अपनी अपीलों को खारिरज कर विदया, सिजसक े तहत दो अलग-अलग रिरट याधिचकाओं को खारिरज कर विदया गया था।

5. इन सभी अपीलों पर एक साथ सुनर्वोाई की जाती है।

6. सुविर्वो ा क े लिलए, एसएलपी (सी) संख्या 24434/2019 से उत्पन्न सिसविर्वोल अपील क े तथ्यों को विर्वोचार में लिलया गया है। राजस्थान राज्य ने राजस्थान आयुर्वोYविदक, यूनानी, होम्योपैथी और प्राक ृ धितक धिचविकत्सा सेर्वोा (संशो न) विनयम, 2013 (सिजसे इसमें इसक े बाद ''विनयम''कहा गया है) क े रूप में जाने र्वोाले विनयम बनाए हैं। उक्त विनयमों का विनयम 19 इस प्रकार हैः “19. आर्वोेदनों की जांच- विनयुविक्त प्राधि कारी अपने द्वारा प्राप्त आर्वोेदनों की जांच करेगा और इन विनयमों क े तहत विनयुविक्त क े लिलए उतने उम्मीदर्वोारों की आर्वोश्यकता होगी, सिजतने साक्षात्कार क े लिलए र्वोांछनीय प्रतीत होते हैंः नर्सिंसग क ं पाउंडर जूविनयर ग्रेड क े पद पर विनयुविक्त क े मामले में, विनयुविक्त प्राधि कारी द्वारा सरकार, मुख्यमंत्री बीपीएल जीर्वोन रक्षा कोष, राष्ट्रीय ग्रामीर्ण स्र्वोास्थ्य विमशन, जैसा भी मामला हो, क े तहत समान काय- पर अनुभर्वो की अर्वोधि को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा विनर्दिदष्ट विनयमों और बोनस अंकों क े साथ संलग्न अनुसूची में विनर्दिदष्ट ऐसी योग्यता परीक्षा में प्राप्त अंकों क े आ ार पर योग्यता तैयार की जाएगी। बशतY विक विकसी उम्मीदर्वोार की पात्रता या अन्यथा क े बारे में विनयुक्त करने र्वोाले प्राधि करर्ण का विनर्ण-य अंधितम हो।"

7. राजस्थान सरकार ने विदनांक 30 मई, 2018 को एक अधि सूचना जारी की थी, सिजसमें यह प्रार्वो ान विकया गया था विक ऐसे उम्मीदर्वोार सिजन्होंने सरकार, मुख्यमंत्री बीपीएल लाइफ सेविंर्वोग फ ं ड, एनआरएचएम मेधिडक े यर रिरलीफ सोसाइटी, एड्स विनयंत्रर्ण सोसाइटी, राष्ट्रीय टीबी विनयंत्रर्ण काय-क्रम, झालार्वोाड़ अस्पताल और मेधिडकल कॉलेज सोसाइटी, सामेविकत रोग विनग-रानी परिरयोजना या राज्य स्र्वोास्थ्य और परिरर्वोार कल्यार्ण संस्थान (एसआईएचएफडब्ल्यू) क े तहत काम विकया है, र्वोे प्राप्त अनुभर्वो क े अनुसार बोनस अंकों क े हकदार होंगे। 1 साल क े अनुभर्वो क े लिलए, बोनस अंक 10 होंगे, 2 साल क े लिलए बोनस अंक 20 होंगे और 3 साल क े अनुभर्वो क े लिलए यह 30 होंगे। विर्वोज्ञापन में यह भी प्रार्वो ान विकया गया है विक क े र्वोल ऐसे उम्मीदर्वोार सिजनक े पास सक्षम प्राधि कारी से अनुभर्वो प्रमार्ण पत्र है, जैसा विक उक्त विर्वोज्ञापन में उल्लेख विकया गया है, र्वोे ही बोनस अंकों क े हकदार होंगे।

8. यहां अपीलकता-, सिजनक े पास विर्वोथिभन्न राज्यों में संविर्वोदा क े आ ार पर एनआरएचएम योजना क े तहत काम करने का अनुभर्वो है, उन्होंने विर्वोथिभन्न रिरट याधिचकाओं क े माध्यम से उच्च न्यायालय का दरर्वोाजा खटखटाया, सिजसमें राजस्थान राज्य को यह विनदYश देने की मांग की गई विक र्वोह याधिचकाकता-ओं क े अनुभर्वो प्रमार्ण पत्र को प्रधितग्रहर्ण करे, जो विर्वोथिभन्न राज्यों क े एनआरएचएम अधि कारिरयों द्वारा जारी विकया गया था, ताविक उन्हें बोनस अंक प्राप्त करने क े लिलए योग्य बनाया जा सक े । उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने विदनांक 28.08.2018 क े आदेश द्वारा उक्त रिरट याधिचकाओं को अनुमधित दी और राजस्थान राज्य को उन अपीलकता-ओं को बोनस अंक देने का विनदYश विदया सिजन्होंने विर्वोथिभन्न राज्यों में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम विकया था।

9. एकल न्याया ीश द्वारा पारिरत आदेश से व्यथिथत होकर राजस्थान राज्य ने उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ का दरर्वोाजा खटखटाया। खण्ड पीठ ने विदनांक 13.08.2018 क े आदेश द्वारा अपील को यह कहते हुए स्र्वोीकार कर लिलया विक राजस्थान राज्य का इरादा राजस्थान राज्य क े भीतर योजनाओं में काय-रत लोगों को बोनस अंक देने का लाभ देना था न विक अन्य राज्यों में। इससे व्यथिथत होने क े कारर्ण, अपीलाथX इस न्यायालय क े समक्ष हैं ।

10. हमने श्री ऋषभ संचेती, श्री विहमांशु जैन और सुश्री अल्पना शमा-, अपीलकता-ओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता और डॉ. मनीष सिंसघर्वोी, राजस्थान राज्य क े विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ अधि र्वोक्ता को सुना है।

11. अपीलार्भिथयों का मुख्य तक - यह है विक कथिथत विनयमों क े विनयम 19 का एक सामान्य पठन स्पष्ट रूप से दशा-ता है विक एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत देश में कहीं भी काम करने का अनुभर्वो एक उम्मीदर्वोार को बोनस अंक प्राप्त करने क े लिलए अह-ता प्राप्त करने क े लिलए पया-प्त होगा। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक राजस्थान राज्य में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले सभी संविर्वोदा कम-चारिरयों द्वारा विकया जा रहा काय- र्वोही है जो अन्य राज्यों में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले कम-चारिरयों द्वारा विकया जा रहा है। विर्वोद्वत र्वोकील ने प्रस्तुत विकया विक मूल रूप से ये सभी संविर्वोदा कम-चारी एम्बुलेंस में नर्सिंसग सहायक क े रूप में काम कर रहे हैं। इसलिलए, यह प्रस्तुत विकया जाता है विक उक्त विनयमों का विनयम 19 ही एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत देश में कहीं भी काम करने र्वोाले उम्मीदर्वोार को बोनस अंक प्राप्त करने क े लिलए अह-ता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। उम्मीदर्वोार को इस आ ार पर इससे र्वोंधिचत नहीं विकया जा सकता है विक राजस्थान राज्य में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले क े र्वोल कम-चारी ही ऐसे लाभ क े हकदार हैं।

12. अपीलार्भिथयों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने प्रस्तुत विकया विक राजस्थान राज्य में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले कम-चारिरयों क े बीच राजस्थान राज्य क े बाहर काम करने र्वोाले कम-चारिरयों क े बीच भेदभार्वो करना, प्राप्त विकए जाने र्वोाले उद्देश्य क े साथ कोई संबं नहीं है और इस प्रकार, यह स्पष्ट रूप से मनमाना और भारतीय संविर्वो ान क े अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

13. राजस्थान सरकार की ओर से पेश र्वोरिरष्ठ अधि र्वोक्ता डॉ. सिंसघर्वोी ने प्रधितर्वोाद विकया विक यविद विर्वोज्ञापन क े साथ-साथ विनयम 19 को उधिचत परिरप्रेक्ष्य में पढ़ा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा विक बोनस अंकों का लाभ क े र्वोल उन कम-चारिरयों को उपलब् है सिजन्होंने राजस्थान राज्य में अपनी सेर्वोाएं प्रदान की हैं। र्वोह प्रस्तुत करता है विक राजस्थान विर्वोथिभन्न प्रकार की स्थलाक ृ धितयों र्वोाला एक विर्वोशाल राज्य है। उन्होंने आगे कहा विक विनयम 19 का उद्देश्य क े र्वोल राज्य सरकार क े साथ या राजस्थान राज्य में विनष्पाविदत या काया-न्विन्र्वोत योजनाओं क े तहत संविर्वोदा कम-चारिरयों द्वारा प्रदान की जाने र्वोाली सेर्वोाओं को अधितरिरक्त महत्र्वो देना है। उन्होंने कहा विक खण्ड पीठ ने इस पहलू का सही अथ- लगाया है और राज्य द्वारा दायर अपील को स्र्वोीकार विकया है।

14. विनयम 19, जो हमारे द्वारा आरंभ में ही प्रस्तुत विकया गया है, में यह उपबं है विक नस- कम्पाउंडर जूविनयर ग्रेड क े पद पर विनयुविक्त क े मामले में, उक्त विनयमों क े साथ संलग्न अनुसूची में विर्वोविनर्दिदष्ट ऐसी अह-ता परीक्षा में प्राप्त अंकों क े आ ार पर विनयुविक्त प्राधि कारी द्वारा योग्यता तैयार की जाएगी। इसमें यह भी प्रार्वो ान विकया गया है विक सरकार, मुख्यमंत्री बीपीएल जीर्वोन रक्षा कोष और राष्ट्रीय ग्रामीर्ण स्र्वोास्थ्य विमशन क े तहत इसी तरह क े काय‹ पर अनुभर्वो की लंबाई को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा विनर्दिदष्ट विकए गए बोनस अंकों को योग्यता अंकों में जोड़ा जाएगा।

15. रिरकॉड- में रखी गई सामग्री से यह प्रतीत होता है विक राजस्थान राज्य की नीधित यह है विक नस- क ं पाउंडर जूविनयर ग्रेड का चयन करते समय, ऐसे कम-चारिरयों को बोनस अंक विदए जाने चाविहए सिजन्होंने राज्य सरकार क े तहत और विर्वोथिभन्न योजनाओं क े तहत समान काय- विकया है।इस प्रकार सर्वोाल यह उठता है विक क्या ऐसे बोनस अंक अन्य राज्यों में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले संविर्वोदा कम-चारिरयों क े लिलए भी उपलब् होंगे।

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16. यह सामान्य बात है विक जब तक नीधित स्पष्ट रूप से भेदभार्वोपूर्ण- और मनमानी नहीं पाई जाती, न्यायालय नीधितगत मामलों में हस्तक्षेप करने में ीमी गधित से काम करेंगे। यह न्यायालय उस न्विस्थधित में नीधितगत विनर्ण-य में हस्तक्षेप नहीं करेगा जब कोई राज्य यह बताने की न्विस्थधित में हो विक नीधित को लागू करने में बो गम्य विर्वोथिभन्नता है और इस तरह क े बो गम्य विर्वोथिभन्नता का उस उद्देश्य क े साथ संबं है सिजसे प्राप्त विकया जाना है।

17. इस न्यायालय ने क ृ ष्र्णन कक्कथ बनाम क े रल सरकार और अन्य क े मामले में इस प्रकार मत व्यक्त विकया हैः "36. संविर्वो ान क े अनुच्छेद 14 क े संदभ- में तक - हीनता और मनमानेपन का पता लगाने क े लिलए यह आर्वोश्यक नहीं है विक राज्य सरकार क े नीधितगत विनर्ण-य में बुधिद्धमत्ता का पता लगाने क े लिलए कोई अभ्यास विकया जाए। यह महत्र्वोपूर्ण- नहीं है विक एक बेहतर या अधि क व्यापक नीधितगत विनर्ण-य लिलया जा सकता था। यह भी उतना ही महत्र्वोहीन है विक यह प्रदर्भिशत विकया जा सकता है विक नीधितगत विनर्ण-य मूख-तापूर्ण- है और सिजस उद्देश्य क े लिलए ऐसा विनर्ण-य लिलया गया है, उसक े विर्वोफल हो जाने की संभार्वोना है। जब तक विक नीधितगत विनर्ण-य स्पष्ट रूप से मनमाना या मनमाना नहीं होता और विकसी भी कारर्ण से सूधिचत नहीं विकया जाता है या यह भेदभार्वो से ग्रस्त है या अधि विनयम क े विकसी कानून या प्रार्वो ानों का उल्लंघन करता है, नीधितगत विनर्ण-य को रद्द नहीं विकया जा सकता है। यह ध्यान में रखा जाना चाविहए विक अर्वोै ता और असंर्वोै ाविनकता क े संदभ- में एक सार्वो-जविनक नीधित का परीक्षर्ण करने क े सीविमत उद्देश्य को छोड़कर, अदालतों को सार्वो-जविनक नीधित क े अज्ञात समुद्र में उतरने से बचना चाविहए।" 18 शेर सिंसह और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य र्वोाले मामले में इस न्यायालय की तीन न्याया ीशों की न्यायपीठ ने इस प्रकार मत व्यक्त विकया हैः “तथ्य यह है विक न्यायालय सरकारी नीधित क े मामलों में न्यून हस्तक्षेप करेंगे, सिसर्वोाय उन मामलों क े जहां यह विदखाया गया है विक विनर्ण-य अनुधिचत, दुभा-र्वोनापूर्ण- या विकसी भी र्वोै ाविनक विनदYशों क े विर्वोपरीत है।"

19. जब विर्वोज्ञापन क े खंड 7 क े उपखंड (ii) क े साथ विनयम 19 पढ़ा जाता है तो राजस्थान राज्य की नीधित और उद्देश्य स्पष्ट हो जाएगा।विर्वोज्ञापन क े खंड 7 क े उप- खंड (ii) में उन अधि कारिरयों को सूचीबद्ध विकया गया है जो संविर्वोदा कम-चारिरयों क े लिलए अनुभर्वो प्रमार्ण पत्र जारी करने क े लिलए सक्षम हैं। इस सूची से पता चलता है विक अधि कांश सक्षम अधि कारी र्वोे अधि कारी हैं जो सरकारी मेधिडकल कॉलेज, सरकारी डेंटल कॉलेज, विनदेशक, सार्वो-जविनक स्र्वोास्थ्य, राज्य क े सभी मुख्य धिचविकत्सा और स्र्वोास्थ्य अधि कारी, सभी प्राथविमक धिचविकत्सा अधि कारी आविद संस्थान क े प्रमुख हैं। जहां तक एनएचएम/एड्स का संबं है, सक्षम प्राधि कारी का उल्लेख एनएचएम/एड्स क े परिरयोजना विनदेशक क े रूप में विकया गया है।हम पाते हैं विक परिरयोजना विनदेशक, एनएचएम/एड्स 'को देश में कहीं भी एनएचएम/एनआरएचएम का परिरयोजना विनदेशक होना उक्त शब्दों को विबना संदभ- क े पढ़ना होगा। जब विर्वोज्ञापन क े खंड (7) क े उप-खंड (ii) में राजस्थान राज्य में विर्वोथिभन्न प्रधितष्ठानों क े प्रमुख अन्य सभी अधि कारिरयों का उल्लेख विकया गया है, तो 'परिरयोजना विनदेशक, एनएचएम'शब्द का अथ- राजस्थान राज्य क े भीतर 'परिरयोजना विनदेशक, एनएचएम'क े रूप में विकया जाएगा।

20. यद्यविप आक्षेविपत आदेश में इस पहलू पर विर्वोस्तार से विर्वोचार नहीं विकया गया है, विफर भी जगदीश प्रसाद और अन्य बनाम राजस्थान राज्य और अन्य र्वोाले मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा की गई विटप्पर्णी का उल्लेख करना उधिचत होगाः “उपलब् कराए गए रिरकॉड- क े अर्वोलोकन से राजस्थान सरकार ने संविर्वोदा क े आ ार पर और राजस्थान सरकार तथा मेडी क े यर रिरलीफ सोसाइटी द्वारा विनयंवित्रत विर्वोथिभन्न योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले व्यविक्तयों क े लिलए कई प्रथिशक्षर्ण काय-क्रम आयोसिजत विकए हैं। प्रथिशक्षर्ण काय-क्रम मुख्य रूप से राजस्थान राज्य क े आविदर्वोासी और शुष्क क्षेत्रों सविहत ग्रामीर्ण क्षेत्रों में विर्वोथिशष्ट काय- प्रर्णाली से संबंधि त हैं।यह भी ध्यान दें प्रासंविगक है विक इस तरह क े प्रथिशक्षर्णों में भागीदारी अविनर्वोाय- है और इसमें शाविमल न होने क े परिरर्णामस्र्वोरूप सेर्वोा अनुबं का नर्वोीकरर्ण नहीं विकया जा सकता है। राजस्थान सरकार और मेडी क े यर रिरलीफ सोसाइटी क े साथ काम करने र्वोाले नस- ग्रेड-II क े काम क े समान अनुभर्वो र्वोाले व्यविक्त विर्वोथिभन्न अस्पतालों और स्र्वोास्थ्य परिरयोजनाओं से संबद्ध अन्य संस्थानों में तैनात हैं और ऐसे व्यविक्तयों को राज्य में काम करने का विर्वोशेष ज्ञान है। ऐसा ज्ञान रखने र्वोाला व्यविक्त विनधि”त रूप से राज्य में काम करने का अनुभर्वो न रखने र्वोाले व्यविक्तयों से अलग र्वोग- बनाता है। यह भी ध्यान दें योग्य है विक यह लाभ राजस्थान में काम करने क े साथ सेर्वोा की अर्वोधि क े आ ार पर विदया गया है, न विक पात्रता क े आ ार पर। योग्यता रखने र्वोाला व्यविक्त विकसी भी अनुभर्वो क े बार्वोजूद भतX की प्रविक्रया का सामना करने का हकदार है। अन्य राज्यों में प्राप्त अनुभर्वो की तुलना राजस्थान राज्य में काम करने क े अनुभर्वो से नहीं की जा सकती है क्योंविक प्रत्येक राज्य की अपनी समस्याएं और मुद्दे हैं और ऐसी परिरन्विस्थधितयों से विनपटने क े लिलए प्रथिशधिक्षत व्यविक्त अलग-अलग स्थान पर खड़े हैं।"

21. इस प्रकार यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है विक जगदीश प्रसाद (पूर्वो क्त) क े मामले में खण्ड पीठ ने रिरकॉड- पर विर्वोचार करने क े बाद यह विनष्कष- विनकाला है विक राजस्थान सरकार ने संविर्वोदा क े आ ार पर और साथ ही विर्वोथिभन्न योजनाओं क े तहत इसक े साथ काम करने र्वोाले व्यविक्तयों क े लिलए कई प्रथिशक्षर्ण काय-क्रम आयोसिजत विकए हैं। प्रथिशक्षर्ण काय-क्रम मुख्य रूप से राजस्थान राज्य क े आविदर्वोासी और शुष्क क्षेत्रों सविहत ग्रामीर्ण क्षेत्रों में विर्वोथिशष्ट काय- प्रर्णाली से संबंधि त हैं। खण्ड पीठ ने यह विनष्कष- विनकाला है विक इस तरह क े प्रथिशक्षर्ण में भागीदारी अविनर्वोाय- है और इसमें शाविमल नहीं होने से सेर्वोा अनुबं ों का नर्वोीकरर्ण नहीं होगा। यह माना गया है विक राजस्थान राज्य में काम करने में विर्वोशेष ज्ञान रखने र्वोाले व्यविक्त राज्य में काम करने का ऐसा अनुभर्वो नहीं रखने र्वोाले व्यविक्तयों से अलग र्वोग- बनाते हैं।यह पाया गया विक राज्य की नीधित द्वारा विदया गया लाभ क े र्वोल अनुभर्वो क े आ ार पर थोड़ा और अधि क महत्र्वो देने का था और सभी उम्मीदर्वोारों को चयन प्रविक्रया की कठोरता से गुजरना आर्वोश्यक था। खण्ड पीठ ने स्पष्ट रूप से यह विनर्ण-य विदया है विक अन्य राज्यों में अनुभर्वोी उम्मीदर्वोारों की तुलना राजस्थान राज्य में काम करने र्वोाले उम्मीदर्वोारों क े साथ नहीं की जा सकती है, क्योंविक प्रत्येक राज्य की अपनी समस्याएं और मुद्दे हैं और ऐसी परिरन्विस्थधितयों से विनपटने क े लिलए प्रथिशधिक्षत व्यविक्त एक अलग स्तर पर खड़े हैं।

22. हम खण्ड पीठ की पूर्वो क्त विटप्पथिर्णयों से पूरी तरह सहमत हैं। हमने पाया है विक राजस्थान राज्य की नीधित क े र्वोल ऐसे कम-चारिरयों क े लिलए बोनस अंकों का लाभ सीविमत करने की है सिजन्होंने राजस्थान राज्य में विर्वोथिभन्न संगठनों क े तहत काम विकया है और राजस्थान राज्य में एनएचएम/एनआरएचएम योजनाओं क े तहत काम करने र्वोाले कम-चारिरयों को मनमाना नहीं कहा जा सकता है।

23. यह भी उल्लेखनीय है विक इस न्यायालय ने सधिचर्वोालय दैविनक र्वोेतन भोगी कम-चारी संघ, जयपुर बनाम राजस्थान राज्य और अन्य क े मामले में कम-चारिरयों द्वारा प्रदान की गई सेर्वोाओं को महत्र्वो देने तदथ- राजस्थान राज्य की नीधित को बरकरार रखा है, जहां सेर्वोाओं का उपयोग राज्य द्वारा अस्थायी या तदथ- आ ार पर विकया गया था।

24. इस मामले की दृविष्ट से, हम आक्षेविपत विनर्ण-य में हस्तक्षेप करने का कोई कारर्ण नहीं पाते हैं। अपीलें खारिरज की जाती हैं।

25. खच‹ क े बारे में कोई आदेश नहीं विकया जाता है। लंविबत आर्वोेदन, यविद कोई हो, का विनस्तारर्ण उपयु-क्त शत‹ क े अनुसार विकया जाएगा। न्याया ीश [एल. नागेश्वर रार्वो] न्याया ीश [बी. आर. गर्वोई] नई विदल्ली 17 फरर्वोरी, 2022 यह अनुर्वोाद आर्दिटविफथिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुर्वोास'क े जरिरए अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है। अस्र्वोीकरर्ण: यह विनर्ण-य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण-य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाथिर्णक होगा और विनष्पादन और काया-न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।