क्षेत्रीय प्रबं क, यूको बैंक और अन्य v. कृष्ण कुमार भारद्वाज

Supreme Court of India · 18 Feb 2022
अजय रस् ोगी; अभय एस. ओका
सिसविवल अपील संख्या (एस) - 1457/2022 (एस.एल.पी. (सिसविवल) संख्या. 13953/2021 से उत्पन्न)
2022 INSC 203
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court restored the dismissal of a bank officer for gross negligence in cash custody, holding that judicial review of departmental inquiries is limited and the High Court erred in interfering with the disciplinary findings.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या (एस) - 1457/2022
(एस.एल.पी. (सिसविवल) संख्या. 13953/2021 से उत्पन्न)
क्षेत्रीय प्रबं क, यूको बैंक और अन्य ..... अपीलक ा4 (एस)
बनाम

ृ ष्ण क
ु मार भारद्वाज .... प्रत्यर्थी= (गण)
विनण4य
माननीय न्यायमूर्ति रस् ोगी,
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई।

2. यह त्काल अपील विवद्व एकल न्याया ीश क े विदनांविक 19 अक्टूबर, 2019 आदेश की पुष्टी कर े हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खण्ड पीठ द्वारा पारिर विदनांविक 21 जनवरी, 2021 विनण4य और आदेश क े विवरूद्घ विनदSशिश की गई है सिजसक े अनुसरण में जांच काय4वाही और परिरणामी सजा दोषी प्रत्यर्थी= पर अति रोविप कर दी गई को रद्द और अपास् कर विदया गया र्थीा।

3. जब चोरी की घटना की हुइ[4] र्थीी ब दोषी प्रत्यर्थी= 10/11 नवंबर, 1999 को सहायक प्रबं क, सेवला शाखा क े रूप में सेवार र्थीा। नकदी क े संयुक्त संरक्षक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2022 INSC 203 में से एक होने क े ना े दोषी प्रत्यर्थी= ति जोरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयों की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीा और बैंक क े विदशाविनदSशों क े अनुसार सभी एहति या ी कदम उठाने में विवफल रहा और दोषी प्रत्यर्थी= की ओर से कशिर्थी लापरवाही क े कारण अनुतिच रीक े से चाविबयों को संभालने में हुइ[4] चूक क े परिरणामस्वरूप ति जोरी से नकदी की चोरी/हाविन हुई। अपने आति कारिरक क 4व्यों क े विनव4हन में उनक े द्वारा विकए गए इस रह क े अपरा क े लिलए, उन्हें यूको बैंक अति कारी कम4चारी (अनुशासन और अपील) विवविनयम 1976 (ए स्मिस्मन पश्चा "विवविनयम 1976" क े रूप में संदर्भिभ ) क े विवविनयमन 12 क े ह प्रदत्त शविक्त क े प्रयोग में विदनांविक 29 नवंम्बर 1999 क े आदेश क े ह विनलंविब विकया गया र्थीा।

4. बाद में, आरोप पत्र 7 विदसंबर, 1999 को चार आरोपों क े लेख क े सार्थी पेश विकया गया र्थीा और 13 माच[4], 2000 क े एक शुतिद्घपत्र क े द्वारा उस पर एक और आरोप संख्या 5 बढ़ाया गया। 13 माच[4], 2000 क े ह एक अति रिरक्त आरोप संख्या 5 क े सार्थी विदनांक 7 विदसंबर, 1999 क े आरोपों क े लेखों को उद्धृ करना उतिच होगा जो विनम्नानुसार हैः

1. नकदी क े संयुक्त संरक्षकों में से एक होने क े ना े, श्री क े क े भारद्वाज नकदी/स्ट्रांग कमरे की चाविबयों की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीे, उन्होंने बैंक क े विदशाविनदSशों क े अनुसार अपने स्टाफ क े व्यविक्तयों पर नजर नहीं रखी, इसक े बजाय ति जोरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयों की सुरक्षा क े लिलए विदशाविनदSशों का भी उल्लंघन कर े हुए शाखा परिरसर में उन्होंनें चाविबयों को रा भर एक अलमीरा में छोड़ विदया। वह अत्यति क लापरवाही र्थीे और चाविबयों को लापरवाही क े रीक े से संभालने क े परिरणामस्वरूप चोरी/ति जोरी से 12 लाख रूपयें का नुकसान हुआ।

2. श्री क े. क े. भारद्वाज, नकदी क े संयुक्त संरक्षकों में से एक होने क े ना े, 10.11.1999 को करेंसी चेस्ट, बेलगंज शाखा, आगरा को अति शेष नकदी भेजने की व्यवस्र्थीा नहीं की, यद्यविप अपेतिक्ष दैविनक आवश्यक ा क े औस से बहु अति क नकदी शेष र्थीी। इस प्रकार, vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd उन्होंने बैंक क े विह को सुविनतिश्च करने और उनकी रक्षा क े लिलए सभी संभव कदम नहीं उठाए और अपने क 4व्यों का विनव4हन पूरी विनष्ठा और परिरश्रम क े सार्थी नहीं विकया, जो संशोंति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण) विवविनयम, 1976 क े विवविनयमन 3 (1) का उल्लंघन है।

3. नकदी का लेन-देन बंद होने क े बाद 10.11.1999 को शाखा छोड़ने से पहले, श्री क े क े भारद्वाज ने सेवला शाखा, आगरा क े मुख्य हॉल और शौचालय की ओर जाने क े रास् े बीच एक पीछे क े गेट को बंद करने क े बारे में जांच नहीं की, सिजससे 10.11.99 को विबना बंद विकये/खुला छोड विदया गया र्थीा। इस प्रकार, उन्होंने बैंक क े विह को सुविनतिश्च करने और उनकी रक्षा क े लिलए सभी संभव कदम नहीं उठाए और पूरी विनष्ठा और परिरश्रम क े सार्थी अपने क 4व्यों का विनव4हन करने में विवफल रहे, जो संशोति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण) विवविनयम, 1976 क

4. श्री भारद्वाज ने एक ारक से दूसरे को चाविबयों क े हस् ां रण को नोट करने क े लिलए बना मुख्य रसिजस्टर में व्यौरा को नहीं भरा। उन्होंने स्वंय मुख्य क ै शिशयर क े सार्थी शाखा क े ति जाेरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयों का प्रभार लेने वाले मुख्य रसिजस्टर पर हस् ाक्षर नहीं विकए र्थीे। इस प्रकार, वह विनष्ठा और परिरश्रम क े सार्थी अपने क 4व्यों का विनव4हन करने में विवफल रहा, जो संशोति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण)

5. विक श्री क े. क े. भारद्वाज 10 नवंबर, 1999 को 12.00 लाख रुपये में सेवला शाखा क े नकदी की चोरी क े अपरा में एक पूव4व = उद्देश्य वाले विकसी व्यविक्त क े सार्थी विमले हुए र्थीे। इस प्रकार वह अत्यं ईमानदारी और विनष्ठा क े सार्थी अपने क 4व्यों का विनव4हन करने में विवफल रहे, जो संशोति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण) विवविनयमन, 1976 क े विवविनयमन का उल्लंघन है।

5. जांच अति कारी ने विवविनयम, 1976 की योजना क े ह विन ा4रिर प्रविvया क े संदभ[4] में विवभागीय जांच की और सुनवाई क े अवसर की पुविष्ट करने और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े अनुपालन क े बाद, अति भारिर आरोपों सं. 1,[3] और 4 को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 31 जुलाई, 2001 की रिरपोट[4] क े द्वारा साविब विकया। हालांविक, चाज[4] नं 2 और 5 साविब नहीं हुए।

6. यह एक स्वीकार विकया गया थ्य है विक सिजस ारीख को चोरी हुई र्थीी, यानी 10/11 नवंबर, 1999 को, श्री विवनोद क ु मार खन्ना आगरा शाखा सेवला क े प्रबं क र्थीे। उस अवति क े दौरान, व 4मान प्रत्यर्थी= सहायक प्रबं क र्थीे और एक श्री क े एल खंडेलवाल सहायक प्रबं क (नकदी) र्थीे। उनक े अलावा, चार अन्य लिलविपक सेवला शाखा में ैना र्थीे और श्री विवनोद कु मार खन्ना उस विदन ड्यूटी पर नहीं र्थीे जब यह घटना हुई र्थीी। संरक्षक क े हस् ाक्षर व 4मान दोषी प्रत्यर्थी= और श्री क े एल खांडेवाल (सहायक प्रबं क (नकद)) की पुविष्ट की गई और इसक े समर्थी4न में, दस् ावेज़ ME 2/1 से ME 2/5 को रिरकॉड[4] पर रखा गया।

7. जांच अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट[4] में थ्यात्मक बयानों को दज[4] विकया र्थीा विक दोषी प्रत्यर्थी= उस विदन चाविबयों का संरक्षक र्थीा, अर्थीा4, 10/11 नवंबर, 1999 को जब चोरी हुई र्थीी और वह नकदी क े संयुक्त संरक्षक में से एक र्थीा और चाविबयों/नकदी की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीा। रिरकॉड[4] पर रखे गए दस् ावेजी साक्ष्यों क े उतिच मूल्यांकन क े बाद, जांच अति कारी क े आरोप सं 1,[3] और 4 दोषी प्रत्यर्थी= क े लिखलाफ साविब हुए। अशिभलेख पर उपस्मिस्र्थी दस् ावेजी साक्ष्यों क े उतिच मूल्यांकन करने आैर जाँच अति कारी क े द्वारा थ्यों क े विवस् ृ अध्ययन करने र्थीा दज[4] विकए विनष्कष€ क े सार क े ह अपने विनष्कष[4] पर पहुचने क े लिलए आराेप संख्या 1,[3] आैर 4 जो प्रत्यर्थी= अपरा ी क े विवरूद्घ साविब विकए गये र्थीे वे यहां संदर्भिभ विकए गए हैंः आरोप सं. 1 जांच अति कारी क े विनष्कष4ःvLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd मैंने पी.ओ. और डी.आर./सी.एस.आे. की सामग्री की पूरी रह से जांच की है और इस संबं में मेरे विनष्कष[4] विनम्नानुसार हैंः संबंति पक्षों द्वारा जांच काय4वाही क े दौरान मेरे सामने रखे गए सभी थ्यों और सामग्री को ध्यान में रख े हुए, मैं प्रस् ु अति कारी द्वारा स्र्थीाविप क€ और थ्यों क े सार्थी सहम हूं, सिजन्होंने ME 2/1 से 5, ME 6/1 & amp 2, ME 10, ME 10/1 और 2, ME 11, ME 3, ME 13, ME 12, ME 14, ME 15, ME 20, ME 27, DE 30, DE 31/1 और 2, DE 32, ME 1/5, ME 23, ME 24, DE 2/115 क े आ ार पर नंबर 1 से संबंति थ्यों को स्र्थीाविप विकया है । इसलिलए, मैं उस आरोप संख्या 1 को श्री क े क े भारद्वाज, सीएसओ क े विवरूद्घ साविब कर ा हूं। आरेाप सं. 3 मैंने पी.ओ. और डी.आर./सी.एस.ओ की सामग्री की पूरी रह से जांच की है सामग्री को ध्यान में रख े हुए, मैं प्रस् ु अति कारी द्वारा स्र्थीाविप क€ और थ्यों क े सार्थी सहम हूं, सिजन्होंने दस् ावेजी साक्ष्य अर्थीा4 ्, ME 3, ME 12, ME 13, ME 14, ME 15, ME 16, ME 17 और ME 18 क े आ ार पर चाज[4] नंबर 3 से संबंति थ्यों को स्र्थीाविप विकया है।ME 14 क े अनुसार vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सीएसओ ने 10.11.99 को लगभग 4.45 बजे शाखा छोड़ दी र्थीी, और ME 12 और ME 13 क े अनुसार प्रबं क, श्री वीक े खन्ना ने 10.11.99 को लगभग

2.00 बजे शाखा छोड़ दी र्थीी। प्रबं क, श्री क े क े भारद्वाज शाखा की सुरक्षा सुविनतिश्च करना प्रबं क का बाध्य क 4व्य है और प्रबं क की अनुपस्मिस्र्थीति में यह स्वचालिल रूप से सहायक प्रबं क, जो शाखा में दूसरे नंबर पर है को चला जा ा है। इस प्रकार, सहायक प्रबं क श्री क े क े भारद्वाज ने 10.11.1999 को सेवला शाखा को छोड़ े समय, प्रबं क की अनुपस्मिस्र्थीति में, 10.11.99 क े काय4विदवश क े समापन पर शाखा में संक े क /भारी मात्रा में नकदी संचय (27,84,002.17 रुपये) क े मद्देनजर शाखा की सुरक्षा और व्यवस्र्थीा क े बारे में पूरी रह से सुविनतिश्च विकया जाना चाविहए। सुरक्षा में शिशशिर्थील ा भी ME 15 से स्पष्ट है। इसलिलए, पीओ द्वारा यह अच्छी रह से पुविष्ट की जा ी है विक सहायक शाखा की सुरक्षा क े मामले में प्रबं क की अनुपस्मिस्र्थीति में 10.11.99 को शाखा छोड़ने क े दौरान प्रबं क अपने क 4व्य में लापरवाही कर रहा र्थीा। इसलिलए, मैं उस चाज[4] नंबर 3 को श्री क े क े भारद्वाज, सीएसओ क े विवरूद्घ साविब कर ा हूं आरोप सं. 4 मैंने पी.ओ. और डी.आर./सी.एस.ओ की सामग्री की पूरी रह से जांच की है सामग्री को ध्यान में रख े हुए, मैं प्रस् ु अति कारी द्वारा स्र्थीाविप और थ्यों क े सार्थी सहमति व्यक्त कर ा हूं, सिजन्होंने ME 6/1&2 से स्र्थीाविप विकया है विक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd "सभी महत्वपूण[4] क ुं जी की रखवाली का रिरकॉड[4] एक प्रमुख रसिजस्टर में रखा जाना चाविहए र्थीा"। चाविबयों की अशिभरक्षा में सभी परिरव 4न ुरं संरक्षकों क े हस् ाक्षरों क े अ ीन विकए जाने चाविहए। ME 8 और ME 22/1 और 2 vमशः 1.8.1995 और 2.7.1994 से सहायक प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकद) से संबंति क ुं जी रसिजस्टर में पोस्टिंस्टग क े अ ूरे रिरकॉड[4] की पुविष्ट कर े हैं। यह उपरोक्त अशिभलेखों से स्र्थीाविप है विक सहायक प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) जो सेवला आगरा शाखा में संयुक्त संरक्षक र्थीे, ने शाखा क े ति जोरी/स्ट्रॉन्ग रूम की चाविबयों का प्रभार लेने पर संबंति प्रमुख रसिजस्टरों पर हस् ाक्षर नहीं विकए र्थीे और मुख्य रसिजस्टरों को बनाए नहीं रखा र्थीा। इसलिलए, मैं उस आरेाप संख्या 4 को मान ा हूं, जो श्री क े क े भारद्वाज, सीएसओ क े लिखलाफ साविब हुआ है।

8. अनुशासनात्मक प्राति करण ने दोषी प्रत्यर्थी= को सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े बाद, जांच अति कारी क े विनष्कष€ क े सार्थी सहमति व्यक्त की और प्राक ृ ति क न्याय क े अनुपालन में, 31 विदसंबर, 2001 क े आदेश से सेवा से बखा4स् गी का दंड भविवष्य में रोजगार क े लिलए अयोग्य ा क े सार्थी विदया जा ा है।

9. अपीलीय प्राति कारी क े समक्ष विवभागीय अपील में प्रति वादी द्वारा अनुशासनात्मक प्राति करण क े आदेश को चुनौ ी दी गई। अपीलीय प्राति कारी ने जांच क े रिरकॉड[4] पर पुनर्विवचार करने क े बाद, आरोप सं. 3 क े संबं में दोषी प्रत्यर्थी= द्वारा विदए गए प्रस् ुति करण में औतिचत्य पाया, लेविकन अब क आरोप सं. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 1 और 4 क े संदभ[4] में जहां क विनष्कष[4] का संबं है, अपीलीय प्राति कारी ने जांच अति कारी द्वारा दज[4] की गई विनष्कष[4] क े सार्थी सहमति व्यक्त की और े विवविनयमन 17 क े ह शविक्त क े प्रयोग में अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा पुविष्ट की और 23 विदसंबर, 2002 क े अपने आदेश द्वारा सजा को संशोति विकया, सिजसका उद्घरण विनम्नानुसार हैः इसलिलए, मैं अपीलीय प्राति कारी क े रूप में विनविह शविक्तयों क े प्रयोग में, और यूको बैंक अति कारी कम4चारी (अनुशासन और अपील) विवविनयम, 1976 क े विवविनयमन 17 क े संदभ[4] में, जैसा विक संशोति विकया गया है, विनम्नलिललिख आदेश पारिर कर ा हूंः आरोप संख्या 1 सिसद्ध श्री क े क े भारद्वाज (पीएफएम संख्या - 23213) को बैंक की सेवा से अविनवाय[4] रूप से सेवाविनवृत्त विकया जाएगा। आराेप संख्या 2 साविब नहीं हुआ दोषमुक्त आरोप संख्या 3 साविब नहीं हुआ दोषमुक्त आरेाप संख्या 4 - - सिसद्ध श्री भारद्वाज क े मूल वे न को 4 (चार) वष€ की अवति क े लिलए वे नमान में दो चरणों में कम विकया जाएगा। यह आगे विनदSशिश विकया गया है विक वह कटौ ी की अवति क े दौरान वे न वृतिद्ध अर्जिज करेगा और इस अवति की समाविŽ पर कमी का प्रभाव उसक े भविवष्य क े वे न वृतिद्ध को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd आगे बढ़ाने का होगा। आरोप संख्या 5 साविब नहीं हुआ दोषमुक्त उपरोक्त दंड समव = रूप से चलेंगे, र्थीाविप, चूंविक श्री भारद्वाज क े विवरुद्ध कोई नैति क अ म ा नहीं पाई जा रही है, इसलिलए उन्हें संदेय सभी टर्विमनल लाभों क े सार्थी भुग ान विकया जाएगा।

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10. अपीलीय प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश को संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह प्रत्यर्थी= द्वारा चुनौ ी दी गई र्थीी। विवद्व एकल न्याया ीश, जांच क े रिरकॉड[4] पर ध्यान देने क े बाद, इस विनष्कष[4] पर पहुंचे विक श्री विवनोद क ु मार खन्ना उस ारीख पर शाखा प्रबं क र्थीे, जब घटना हुई र्थीी, अर्थीा4, 10/11 नवंबर, 1999 और संयुक्त सिजम्मेदारी शाखा प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) की र्थीी। चूंविक व 4मान दोषी प्रत्यर्थी= सहायक प्रबं क र्थीा, इसलिलए उसे चूक क े लिलए सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा र्थीा और 19 अक्टूबर 2019 क े अपने आदेश क े ह दोषी प्रत्यर्थी= को दी गई सजा क े आदेश को अपास् विकया जा ा है।

11. व 4मान अपीलक ा4 क े द्वारा प्रस् ु विकए गए लेटस[4] पेटेंट अपील पर, आक्षेविप फ ै सले क े ह खण्ड पीठ ने जांच की रिरपोट[4] का परीक्षण कर े समय ध्यान नहीं विदया और आदेश क े ह विवद्व एकल न्याया ीश द्वारा आक्षेविप विनष्कष€ को विफर से प्रस् ु विकया है और अपील को 21 जनवरी, 2021 क े आदेश द्वारा खारिरज कर विदया है जो हमारे सामने चुनौ ी का विवषय है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

12. थ्यों को पूरा करने क े लिलए, यह अंविक करना प्रासंविगक हो सक ा है विक विवद्वान एकल न्याया ीश और खंडपीठ द्वारा आक्षेविप विनण4य पारिर करने में थ्यात्मक त्रुविट की गई र्थीी विक श्री विवनोद क ु मार खन्ना, जो उस समय सेवला, आगरा शाखा क े प्रबं क र्थीे को भी आरोप पत्र विदया गया र्थीा और उन्हें भी विवभागीय जांच का सामना करना पड़ा र्थीा लेविकन उनक े लिखलाफ आरोप यह र्थीा विक दोषी प्रत्यर्थी= पूरी रह से जानकारी र्थीी विक वह नकदी का संरक्षक र्थीा क े बावजूद (स्टेशनरी कक्ष में एक अलमारी में ति जोरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयां रा भर रखना) और बैंक क े विनयमों क े अनुसार उसे अपनी व्यविक्तग अशिभरक्षा में नहीं रख े हुए, उन्होंने उस कम4चारी क े लिखलाफ उतिच कदम नहीं उठाया जो कशिर्थी ौर पर शाखा में ही चेस्ट की चाविबयों की रा भर सुरक्षा कर ा र्थीा, जो एक घोर लापरवाही र्थीी जो विक उन्हें शाखा क े प्रबं क क े रूप में अपने क 4व्यों क े विनव4हन करने क े लिलए प्रति बद्घ र्थीे और उनकी पय4वेक्षी लापरवाही क े लिलए, 17 विदसंबर, 1999 की चाज4शीट क े आने क े बाद, उन्हें भी दोषी ठहराया गया र्थीा उनकी पय4वेक्षी लापरवाही जो उन्होंने अपने क 4व्यों क े विनव4हन में की र्थीी और 28 फरवरी, 2002 क े एक आदेश द्वारा दंतिड विकया गया र्थीा।

13. अपीलार्थी= क े विवद्वान अति वक्ता का विनवेदन है विक प्रत्यर्थी= ने अपने क 4व्यों क े विनव4हन में जो घोर कदाचार विकया र्थीा, उसक े लिलए विवविनयम 1976 क े ह विन ा4रिर प्रविvया क े अनुसार जांच की गई र्थीी और प्रति वादी क े मामले में विवभागीय अति कारिरयों या उच्च न्यायालय क े समक्ष ऐसा पहले कभी हुआ विक जांच विवविनयम, 1976 की योजना क े ह विन ा4रिर प्रविvया क े अनुसार जाँच नहीं की गई हो या रिरकॉड[4] जो आरोप क े लिलए प्रासंविगक र्थीा, और सिजसे मांगा गया र्थीा, उसे उपलब् नहीं कराया गया र्थीा और क्या रिरकॉड[4] की अनुपलब् ा क े कारण उसक े सार्थी पक्षपा विकया गया है या अनुशासनात्मक/अपील प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश प्राक े सिसद्धां ों का उल्लंघन है जबविक आरोप vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd संख्या 1 और 4 क े संदभ[4] में जांच अति कारी क े विनष्कष€ को बरकरार रख े हुए और परिरणामी दंड विदया गया है।

14. सार्थी ही, विवद्व अति वक्ता ने आगे कहा विक उच्च न्यायालय क े विवद्व एकल न्याया ीश ने इस आ ार पर काय4वाही की है विक यह प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) र्थीे जो सिजम्मेदार अति कारी र्थीे और उनकी लापरवाही क े कारण, शाखा क े ति जोरी से 10 नवंबर, 1999 को चोरी की गई है जो थ्यात्मक रूप से गल प्र ी हो ी है। यह दोषी प्रत्यर्थी= र्थीा जो सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी उस प्रांसविगक समय में संरक्षक और चाशिभयों का प्रभारी र्थीा और जाॅंच अति कारी द्वारा दज[4] विकए गये विनष्कष[4] इस अशिभलेख उपस्मिस्र्थी दस् ावेजी साक्ष्यों का समर्थी4न कर े है और आगे विकसी भी स् र पर दोषी प्रत्यर्थी= पर कोइ[4] पूछ ाछ नहीं की गई र्थीी जब उनक े द्वारा प्रशासविनक या अपीलीय अति कारी क े समक्ष रिरपोट[4] प्रस् ु की जबकी उनहोंनें अपनी रिरपोट[4] में जाँच अति कारी क े द्वारा दज[4] विकए विनष्कष€ का विवरो विकया र्थीा। यह स्पष्ट त्रुविट है सिजसे उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने दोषी प्रत्यर्थी= क े लिखलाफ की गई विवभागीय जांच में हस् क्षेप विकया है सिजसमें आरोप सं. 1 और 4 अं ः उनक े लिखलाफ साविब हुए। दी गई परिरस्मिस्र्थीति यों में, आक्षेविप फ ै सले में उच्च न्यायालय द्वारा हस् क्षेप पोषणीय नहीं है और इस न्यायालय द्वारा हस् क्षेप विकए जाने क े योग्य है।

15. इसक े विवपरी, दूसरी ओर प्रति वादी क े लिलए विवद्व अति वक्ता यह प्रस् ु कर े है विक प्रति वादी सहायक प्रबं क र्थीा और सिजम्मेदारी शाखा क े प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) की र्थीी और प्रस् ु कर ा है विक जांच अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट[4] में दज[4] विकया गया विनष्कष[4] विवक ृ है और बरकरार रखने योग्य नहीं है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

16. विवद्व अति वक्ता आगे प्रस् ु कर े हैं विक पक्षपा ी होने क े कारण जांच अति कारी क े लिखलाफ उनक े द्वारा दलील दी गई र्थीी, लेविकन विकसी ने भी उनक े अनुरो पर ध्यान नहीं विदया है और आगे प्रस् ु विकया है विक उनक े द्वारा मांगे गए दस् ावेज अनुरो क े बावजूद उपलब् नहीं कराये गये र्थीे और अनुशासनात्मक/ अपीलीय प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश विबना विकसी कारण वाले और प्रक ृ ति में गूढ़ होने क े कारण विवति क े अनुसार बरकरार रखने योग्य नहीं हैं।

17. हमने पक्षकारों क े विवद्व अति वक्ताआें को सुना और उनकी सहाय ा से रिरकॉड[4] पर उपलब् सामग्री का अवलोकन विकया है।

18. भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 136 क े ह संवै ाविनक न्यायालयों द्वारा विवभागीय /अपीलीय अति कारिरयों द्वारा विनव4हन विकए गए अनुशासनात्मक जांच क े मामलों में न्यातियक समीक्षा की शविक्त कानून की त्रुविटयों या प्राक े उल्लंघन को प्रकट करने वाली प्रविvयात्मक त्रुविटयों की सीमाओं द्वारा अच्छी रह से परिरचालिल है और यह एक अपीलीय प्राति कारी क े रूप में मेरिरट क े आ ार पर मामले को स्र्थीविग करने क े समान नहीं है, सिजसकी पहले इस न्यायालय द्वारा बीसी च ुवSदी बनाम भार संघ और अन्य[1]; विहमाचल प्रदेश राज्य विवद्यु बोड[4] लिलविमटेड बनाम महेश दविहया2; में जांच की गई र्थीी और हाल ही में इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ (सिजसमें हम मे से एक सदस्य है) उप महाप्रबं क (अपीलीय प्राति कारी) और अन्य बनाम अजय क ु मार श्रीवास् व[3] सिजसमें इस न्यायालय ने विनम्नानुसार अव ारिर विकया गया हैः 1 1995(6) SCC 749 2 2017(1) SCC 768 3 2021(2) SCC 612 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

24. इस प्रकार यह य विकया जा ा है विक संवै ाविनक न्यायालयों की न्यातियक समीक्षा की शविक्त, विनण4य लेने की प्रविvया का मूल्यांकन है न विक स्वयं विनण4य की योग्य ा का मूल्यांकन करने की प्रविvया है। यह प्रविvया में विनष्पक्ष ा सुविनतिश्च करना है और विनष्कष[4] की विनष्पक्ष ा सुविनतिश्च करना नहीं है। विकसी भी रीक े की नैसर्विगक न्याय क े विकसी भी विनयम से असंग ा या जाँच क े रीक े में विदए गये वैद्याविनक विनयमों का उल्ल ंन या जहां अुशासनात्मक प्राति करण क े द्वारा विनण4य या विनष्कष[4] विबना विकसी साक्ष्यों क े विदये गये हो, यविद एेसा हो ो, दोषी अपरा ी क े विवरूद्घ विकसी भी काय4वाही में न्यायालय/न्यायाति करण हस् क्षेप कर सक ा है। यविद विनष्कष[4] या विनण4य ऐसा हो ा है जैसे विक कोई उतिच विनष्कश[4] क े रूप कभी नहीं पहुंचा हो ा या जहां अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा प्राŽ साक्ष्य पर विवचार करने पर प्राŽ विनष्कष[4] या रिरकॉड[4] क े आ ार पर विवशिशष्ट त्रुविट या सभी साक्ष्यो क े आ ार पर, उत्प्रेषण लेख जारी विकया जा सक ा है। संक्षेप में, न्यातियक समीक्षा क े दायरे को थ्य क े रूप में प्राति करण क े विनण4य की शुद्ध ा या क 4 शील ा की परीक्षा क नहीं बढ़ाया जा सक ा है।

25. जब लोक सेवक क े लिखलाफ कशिर्थी कदाचार क े लिलए अनुशासनात्मक जांच की जा ी है, ो न्यायालय को जांच और विन ा4रण करना हैः (i) क्या जांच सक्षम प्राति कारी द्वारा आयोसिज की गई र्थीी। (ii) क्या प्राक े विनयमों का अनुपालन विकया जा ा है । (iii) क्या विनष्कष[4] या विनण4य क ु छ सबू ों पर आ ारिर हैं और प्राति करण क े पास थ्य या विनष्कष[4] क े थ्य क पहुंचने की शविक्त और अति कार क्षेत्र है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

26. यह अच्छी रह से सुस्र्थीाविप है विक जहां जांच अति कारी अनुशासनात्मक प्राति करण नहीं है, जांच की रिरपोट[4] प्राŽ करने पर, अनुशासनात्मक प्राति करण पूव[4] जाँच अति कारी द्वारा दज[4] विनष्कष€ से सहम हो सक ा है या नहीं भी हो सक ा है, असहमति की स्मिस्र्थीति में, अनुशासनात्मक प्राति करण को असहमति क े कारणों को दज[4] करना होगा और यविद रिरकॉड[4] पर उपलब् साक्ष्य इस रह क े प्रयोग क े लिलए पया4Ž हैं ो दोषी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े बाद अपने स्वयं क े विनष्कष€ को दज[4] कर सक ा है या मामले को आगे की जांच क े लिलए जांच अति कारी को भेज सक े हैं।

27. यह सच है विक साक्ष्य क े सख् विनयम विवभागीय जांच काय4वाही पर लागू नहीं हो े हैं। हालांविक, कानून की एकमात्र आवश्यक ा यह है विक अपरा ी क े लिखलाफ आरोप ऐसे सबू ों क े आ ार पर स्र्थीाविप विकया जाना चाविहए, सिजस पर एक उतिच व्यविक्त यर्थीोतिच और विनष्पक्ष ा क े सार्थी काय[4] कर सक ा है, जो अपरा ी कम4चारी क े लिखलाफ आरोप की गंभीर ा को बरकरार रख ा है। यह सच है विक विवभागीय जांच की काय4वाही में भी क े वल अनुमान अपरा क े विनष्कष[4] को बनाए नहीं रख सक े।

28. संवै ाविनक न्यायालय संविव ान क े अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 136 क े अ ीन न्यातियक पुनर्विवलोकन की अपनी अति कारिर ा का प्रयोग कर े हुए विवभागीय जांच काय4वाविहयों में आए थ्य क े विनष्कष€ में हस् क्षेप नहीं करेगा सिसवाय दुभा4वना या विवक ृ ति क े मामले को छोड़कर जहां विकसी विनष्कष[4] का समर्थी4न करने क े लिलए कोई सबू नहीं है या जहां एक विनष्कष[4] ऐसा है विक कोई भी व्यविक्त उन विनष्कष€ पर यर्थीोतिच और विनष्पक्ष ा क े सार्थी काम नहीं कर सक ा र्थीा और जब क विवभागीय प्राति करण द्वारा प्राŽ विनष्कष[4] का समर्थी4न करने क े लिलए क ु छ सबू हैं, ब क उसे बनाए रखा जाना चाविहए। ' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

19. त्काल मामले क े थ्यों को उल्लेख कर े हुए, खण्ड पीठ ने इस आ ार पर काय4वाही की है विक सिजम्मेदारी सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी शाखा प्रबं क की र्थीी। इसलिलए, प्रति वादी को उन अति कारिरयों की चूक क े लिलए सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा र्थीा और उक्त नींव पर काय4वाही कर े हुए, दोषी प्रत्यर्थी= पर लगाए गए दंड को अपास् कर विदया, लेविकन जांच का रिरकॉड[4] स्पष्ट रूप से प्रकट कर ा है विक यह उच्च न्यायालय की एक थ्यात्मक त्रुविट र्थीी जबविक दोषी प्रत्यर्थी= की आं रिरक जांच को अपास् विकया जा ा और परिरणामी सजा को प्रति वादी पर अति रोविप की जा ी है।

20. जांच क े दौरान, एक दस् ावेजी साक्ष्य रिरकॉड[4] में आया विक यद्यविप श्री विवनोद क ु मार खन्ना शाखा क े प्रबं क र्थीे, लेविकन ारीख, यानी, 10/11 नवंबर, 1999, सिजस विदन चोरी हुई र्थीी, नकदी क े संरक्षक सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी प्रत्यर्थी= र्थीे। जांच अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट[4] में यह विनष्कष[4] दज[4] विकया गया है विक दोषी प्रत्यर्थी= नकदी का संरक्षक र्थीा जो रा भर स्टेशनरी रूम की आलमारी में नकदी सुरतिक्ष /स्ट्रांग रूम की चाबी रख ा र्थीा और उसे सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी बैंक क े विनयमों क े अनुसार अपनी व्यविक्तग विहरास में नहीं रख ा र्थीा। थ्य क े विनष्कष[4] की पुविष्ट अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति करण द्वारा प्रति वादी क े अपरा को बरकरार रखने क े लिलए र्थीी क्योंविक वह एक संरक्षक क े रूप में अपने क 4व्यों क े विनव4हन में विवफल रहा र्थीा जब चोरी 10/11 नवंबर, 1999 को हुई र्थीी, लेविकन उच्च आक्षेविप फ ै सले में न्यायालय ने जांच अति कारी द्वारा उस सिजम्मेदारी क े संदभ[4] में दज[4] की गये विनष्कष[4] की जांच करने क े लिलए प्रयास नहीं विकया है, जो दोषी प्रत्यर्थी= चोरी क े समय प्रासंविगक बिंबदु पर नकदी क े संरक्षक क े रूप में विनव4हन करने में विवफल रहा र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

21. इसक े अलावा, जांच अति कारी द्वारा जो विनष्कष[4] दज[4] विकया गया है, उसे अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी द्वारा विफर से देखा गया है और जांच क े रिरकॉड[4] की मूल्यांकन और सम्यक विवचारशील ा से, अपीलीय प्राति कारी ने आरोप सं. 3 से अपरा ी को दोषमुक्त कर े हुए आरोप सं. 1 और 4 को उसक े लिखलाफ साविब विकया और 23 विदसंबर, 2002 क े एक आदेश द्वारा उसे दंतिड विकया। न ो विवद्व एकल न्याया ीश और न ही उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने उस विनष्कष[4] को ध्यानपूव4क देखा है सिजसे जांच अति कारी द्वारा आरेाप संख्या 1 और 4 क े संदभ[4] में दज[4] विकया गया और उसका अवलोकन विकया गया और उसक े बाद अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी द्वारा दोषी प्रत्यर्थी= पर दंड क े आदेश क े ह जुमा4ने को अति रोविप विकया।

22. हमारे विवचार में, उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेविप आदेश में जो विनष्कष[4] दज[4] विकये गये है, वह अपोषणीय है और रिरकॉड[4] पर उपलब् जांच की रिरपोट[4] क े सार्थी समर्भिर्थी नहीं है।

23. प्रत्यर्थी= क े विवद्व अति वक्ता द्वारा प्रस् ु विकया विक जांच अति कारी पक्षपा ी र्थीा और इसलिलए उसने उसक े सार्थी पक्षपा विकया, यह कहने क े लिलए पया4Ž है विक क े वल यह आरोप लगाना विक वह पक्षपा ी र्थीा पया4Ž नहीं है जब क विक जांच क े दौरान या अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी क े समक्ष उसक े द्वारा रखी गई सामग्री द्वारा समर्भिर्थी न हो। यहां क विक उच्च न्यायालय क े समक्ष भी कोई प्रस् ुति करण नहीं विकया गया र्थीा और यह अस्वीक ृ ति क े अलावा कोई विवचार नहीं कर ा है।

24. जहां क दस् ावेज की आपूर्ति न करने क े संबं में प्रस् ुति करण का संबं है, जांच अति कारी ने पाया है विक दोषी प्रत्यर्थी= द्वारा मांगा गया रिरकॉड[4] उसे उपलब् कराया गया र्थीा, एक क े अति रिरक्त जो गोपनीय प्रक ृ ति का र्थीा, विफर भी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd उसे विनरीक्षण क े लिलए अनुमति दी गई र्थीी। उसी समय, प्रति वादी यह विदखाने में विवफल रहा विक उसक े द्वारा मांगे गए दस् ावेजों की कशिर्थी गैर-आपूर्ति क े संदभ[4] में उसे क्या पूवा4ग्रह हुआ है।

25. प्रति वादी क े लिलए विवद्व अति वक्ता को आगे प्रस् ु विकया विक अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी क े विनण4य का विबना विकसी कारण का और गूढ़ प्रक ृ ति का हो े हुए भी सम्बस्मिन् है, यह कहना खेदजनक है विक अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी क े दोनों आदेश रिरकॉड[4] पर हैं और जाँच अति कारी द्वारा प्राŽ विनष्कष€ का अनुमोदन कर े समय माहत्वपूण[4] कारण विदए गये हैै। अपीलीय प्राति कारी भी, जांच क े रिरकॉड[4] का उतिच मूल्यांकन क े बाद और अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा पुविष्ट क े बाद, इस विनष्कष[4] पर पहुंचे विक आरोप सं. 3 क े संदभ[4] में दज[4] विकये गये विनष्कष[4] साविब नहीं हुए और आरोप सं. 1 और 4 साविब हुए सिजसक े आ ार पर उन्हें 23 विदसंबर, 2002 क े आदेश क े ह सजा को संशोति करने क े लिलए प्रयास विकया गया र्थीा।

26. हमारे विवचार में, उच्च न्यायालय ने दोषी प्रत्यर्थी= क े लिखलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक काय4वाही में हस् क्षेप कर े हुए अपनी अति कारिर ा को पार कर विदया है और अपोषणीय होने क े कारण अपास् होने क े योग्य है।

27. न ीज न, अपील सफल हो ी है और अनुमति दी जा ी है। 21 जनवरी, 2021 को उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े फ ै सले को दनुसार रद्द आैर अपास् विकया जा ा है। कोई लाग नहीं।

28. यविद कोई लंविब आवेदन हो, का विनस् ारण विकया जा ा है।................................................ vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (मानननीय न्यायमूर्ति अजय रस् ोगी)................................................... (माननीय न्यायमूर्ति अभय एस. ओका) नई विदल्ली 18 फरवरी, 2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd