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भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या (एस) - 1457/2022
(एस.एल.पी. (सिसविवल) संख्या. 13953/2021 से उत्पन्न)
क्षेत्रीय प्रबं क, यूको बैंक और अन्य ..... अपीलक ा4 (एस)
बनाम
क
ृ ष्ण क
ु मार भारद्वाज .... प्रत्यर्थी= (गण)
विनण4य
माननीय न्यायमूर्ति रस् ोगी,
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. यह त्काल अपील विवद्व एकल न्याया ीश क े विदनांविक 19 अक्टूबर, 2019 आदेश की पुष्टी कर े हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खण्ड पीठ द्वारा पारिर विदनांविक 21 जनवरी, 2021 विनण4य और आदेश क े विवरूद्घ विनदSशिश की गई है सिजसक े अनुसरण में जांच काय4वाही और परिरणामी सजा दोषी प्रत्यर्थी= पर अति रोविप कर दी गई को रद्द और अपास् कर विदया गया र्थीा।
3. जब चोरी की घटना की हुइ[4] र्थीी ब दोषी प्रत्यर्थी= 10/11 नवंबर, 1999 को सहायक प्रबं क, सेवला शाखा क े रूप में सेवार र्थीा। नकदी क े संयुक्त संरक्षक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में से एक होने क े ना े दोषी प्रत्यर्थी= ति जोरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयों की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीा और बैंक क े विदशाविनदSशों क े अनुसार सभी एहति या ी कदम उठाने में विवफल रहा और दोषी प्रत्यर्थी= की ओर से कशिर्थी लापरवाही क े कारण अनुतिच रीक े से चाविबयों को संभालने में हुइ[4] चूक क े परिरणामस्वरूप ति जोरी से नकदी की चोरी/हाविन हुई। अपने आति कारिरक क 4व्यों क े विनव4हन में उनक े द्वारा विकए गए इस रह क े अपरा क े लिलए, उन्हें यूको बैंक अति कारी कम4चारी (अनुशासन और अपील) विवविनयम 1976 (ए स्मिस्मन पश्चा "विवविनयम 1976" क े रूप में संदर्भिभ ) क े विवविनयमन 12 क े ह प्रदत्त शविक्त क े प्रयोग में विदनांविक 29 नवंम्बर 1999 क े आदेश क े ह विनलंविब विकया गया र्थीा।
4. बाद में, आरोप पत्र 7 विदसंबर, 1999 को चार आरोपों क े लेख क े सार्थी पेश विकया गया र्थीा और 13 माच[4], 2000 क े एक शुतिद्घपत्र क े द्वारा उस पर एक और आरोप संख्या 5 बढ़ाया गया। 13 माच[4], 2000 क े ह एक अति रिरक्त आरोप संख्या 5 क े सार्थी विदनांक 7 विदसंबर, 1999 क े आरोपों क े लेखों को उद्धृ करना उतिच होगा जो विनम्नानुसार हैः
1. नकदी क े संयुक्त संरक्षकों में से एक होने क े ना े, श्री क े क े भारद्वाज नकदी/स्ट्रांग कमरे की चाविबयों की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीे, उन्होंने बैंक क े विदशाविनदSशों क े अनुसार अपने स्टाफ क े व्यविक्तयों पर नजर नहीं रखी, इसक े बजाय ति जोरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयों की सुरक्षा क े लिलए विदशाविनदSशों का भी उल्लंघन कर े हुए शाखा परिरसर में उन्होंनें चाविबयों को रा भर एक अलमीरा में छोड़ विदया। वह अत्यति क लापरवाही र्थीे और चाविबयों को लापरवाही क े रीक े से संभालने क े परिरणामस्वरूप चोरी/ति जोरी से 12 लाख रूपयें का नुकसान हुआ।
2. श्री क े. क े. भारद्वाज, नकदी क े संयुक्त संरक्षकों में से एक होने क े ना े, 10.11.1999 को करेंसी चेस्ट, बेलगंज शाखा, आगरा को अति शेष नकदी भेजने की व्यवस्र्थीा नहीं की, यद्यविप अपेतिक्ष दैविनक आवश्यक ा क े औस से बहु अति क नकदी शेष र्थीी। इस प्रकार, vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd उन्होंने बैंक क े विह को सुविनतिश्च करने और उनकी रक्षा क े लिलए सभी संभव कदम नहीं उठाए और अपने क 4व्यों का विनव4हन पूरी विनष्ठा और परिरश्रम क े सार्थी नहीं विकया, जो संशोंति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण) विवविनयम, 1976 क े विवविनयमन 3 (1) का उल्लंघन है।
3. नकदी का लेन-देन बंद होने क े बाद 10.11.1999 को शाखा छोड़ने से पहले, श्री क े क े भारद्वाज ने सेवला शाखा, आगरा क े मुख्य हॉल और शौचालय की ओर जाने क े रास् े बीच एक पीछे क े गेट को बंद करने क े बारे में जांच नहीं की, सिजससे 10.11.99 को विबना बंद विकये/खुला छोड विदया गया र्थीा। इस प्रकार, उन्होंने बैंक क े विह को सुविनतिश्च करने और उनकी रक्षा क े लिलए सभी संभव कदम नहीं उठाए और पूरी विनष्ठा और परिरश्रम क े सार्थी अपने क 4व्यों का विनव4हन करने में विवफल रहे, जो संशोति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण) विवविनयम, 1976 क
4. श्री भारद्वाज ने एक ारक से दूसरे को चाविबयों क े हस् ां रण को नोट करने क े लिलए बना मुख्य रसिजस्टर में व्यौरा को नहीं भरा। उन्होंने स्वंय मुख्य क ै शिशयर क े सार्थी शाखा क े ति जाेरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयों का प्रभार लेने वाले मुख्य रसिजस्टर पर हस् ाक्षर नहीं विकए र्थीे। इस प्रकार, वह विनष्ठा और परिरश्रम क े सार्थी अपने क 4व्यों का विनव4हन करने में विवफल रहा, जो संशोति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण)
5. विक श्री क े. क े. भारद्वाज 10 नवंबर, 1999 को 12.00 लाख रुपये में सेवला शाखा क े नकदी की चोरी क े अपरा में एक पूव4व = उद्देश्य वाले विकसी व्यविक्त क े सार्थी विमले हुए र्थीे। इस प्रकार वह अत्यं ईमानदारी और विनष्ठा क े सार्थी अपने क 4व्यों का विनव4हन करने में विवफल रहे, जो संशोति यूको बैंक अति कारी कम4चारी (आचरण) विवविनयमन, 1976 क े विवविनयमन का उल्लंघन है।
5. जांच अति कारी ने विवविनयम, 1976 की योजना क े ह विन ा4रिर प्रविvया क े संदभ[4] में विवभागीय जांच की और सुनवाई क े अवसर की पुविष्ट करने और प्राक ृ ति क न्याय क े सिसद्धां ों क े अनुपालन क े बाद, अति भारिर आरोपों सं. 1,[3] और 4 को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 31 जुलाई, 2001 की रिरपोट[4] क े द्वारा साविब विकया। हालांविक, चाज[4] नं 2 और 5 साविब नहीं हुए।
6. यह एक स्वीकार विकया गया थ्य है विक सिजस ारीख को चोरी हुई र्थीी, यानी 10/11 नवंबर, 1999 को, श्री विवनोद क ु मार खन्ना आगरा शाखा सेवला क े प्रबं क र्थीे। उस अवति क े दौरान, व 4मान प्रत्यर्थी= सहायक प्रबं क र्थीे और एक श्री क े एल खंडेलवाल सहायक प्रबं क (नकदी) र्थीे। उनक े अलावा, चार अन्य लिलविपक सेवला शाखा में ैना र्थीे और श्री विवनोद कु मार खन्ना उस विदन ड्यूटी पर नहीं र्थीे जब यह घटना हुई र्थीी। संरक्षक क े हस् ाक्षर व 4मान दोषी प्रत्यर्थी= और श्री क े एल खांडेवाल (सहायक प्रबं क (नकद)) की पुविष्ट की गई और इसक े समर्थी4न में, दस् ावेज़ ME 2/1 से ME 2/5 को रिरकॉड[4] पर रखा गया।
7. जांच अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट[4] में थ्यात्मक बयानों को दज[4] विकया र्थीा विक दोषी प्रत्यर्थी= उस विदन चाविबयों का संरक्षक र्थीा, अर्थीा4, 10/11 नवंबर, 1999 को जब चोरी हुई र्थीी और वह नकदी क े संयुक्त संरक्षक में से एक र्थीा और चाविबयों/नकदी की सुरक्षा क े लिलए सिजम्मेदार र्थीा। रिरकॉड[4] पर रखे गए दस् ावेजी साक्ष्यों क े उतिच मूल्यांकन क े बाद, जांच अति कारी क े आरोप सं 1,[3] और 4 दोषी प्रत्यर्थी= क े लिखलाफ साविब हुए। अशिभलेख पर उपस्मिस्र्थी दस् ावेजी साक्ष्यों क े उतिच मूल्यांकन करने आैर जाँच अति कारी क े द्वारा थ्यों क े विवस् ृ अध्ययन करने र्थीा दज[4] विकए विनष्कष€ क े सार क े ह अपने विनष्कष[4] पर पहुचने क े लिलए आराेप संख्या 1,[3] आैर 4 जो प्रत्यर्थी= अपरा ी क े विवरूद्घ साविब विकए गये र्थीे वे यहां संदर्भिभ विकए गए हैंः आरोप सं. 1 जांच अति कारी क े विनष्कष4ःvLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd मैंने पी.ओ. और डी.आर./सी.एस.आे. की सामग्री की पूरी रह से जांच की है और इस संबं में मेरे विनष्कष[4] विनम्नानुसार हैंः संबंति पक्षों द्वारा जांच काय4वाही क े दौरान मेरे सामने रखे गए सभी थ्यों और सामग्री को ध्यान में रख े हुए, मैं प्रस् ु अति कारी द्वारा स्र्थीाविप क€ और थ्यों क े सार्थी सहम हूं, सिजन्होंने ME 2/1 से 5, ME 6/1 & amp 2, ME 10, ME 10/1 और 2, ME 11, ME 3, ME 13, ME 12, ME 14, ME 15, ME 20, ME 27, DE 30, DE 31/1 और 2, DE 32, ME 1/5, ME 23, ME 24, DE 2/115 क े आ ार पर नंबर 1 से संबंति थ्यों को स्र्थीाविप विकया है । इसलिलए, मैं उस आरोप संख्या 1 को श्री क े क े भारद्वाज, सीएसओ क े विवरूद्घ साविब कर ा हूं। आरेाप सं. 3 मैंने पी.ओ. और डी.आर./सी.एस.ओ की सामग्री की पूरी रह से जांच की है सामग्री को ध्यान में रख े हुए, मैं प्रस् ु अति कारी द्वारा स्र्थीाविप क€ और थ्यों क े सार्थी सहम हूं, सिजन्होंने दस् ावेजी साक्ष्य अर्थीा4 ्, ME 3, ME 12, ME 13, ME 14, ME 15, ME 16, ME 17 और ME 18 क े आ ार पर चाज[4] नंबर 3 से संबंति थ्यों को स्र्थीाविप विकया है।ME 14 क े अनुसार vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सीएसओ ने 10.11.99 को लगभग 4.45 बजे शाखा छोड़ दी र्थीी, और ME 12 और ME 13 क े अनुसार प्रबं क, श्री वीक े खन्ना ने 10.11.99 को लगभग
2.00 बजे शाखा छोड़ दी र्थीी। प्रबं क, श्री क े क े भारद्वाज शाखा की सुरक्षा सुविनतिश्च करना प्रबं क का बाध्य क 4व्य है और प्रबं क की अनुपस्मिस्र्थीति में यह स्वचालिल रूप से सहायक प्रबं क, जो शाखा में दूसरे नंबर पर है को चला जा ा है। इस प्रकार, सहायक प्रबं क श्री क े क े भारद्वाज ने 10.11.1999 को सेवला शाखा को छोड़ े समय, प्रबं क की अनुपस्मिस्र्थीति में, 10.11.99 क े काय4विदवश क े समापन पर शाखा में संक े क /भारी मात्रा में नकदी संचय (27,84,002.17 रुपये) क े मद्देनजर शाखा की सुरक्षा और व्यवस्र्थीा क े बारे में पूरी रह से सुविनतिश्च विकया जाना चाविहए। सुरक्षा में शिशशिर्थील ा भी ME 15 से स्पष्ट है। इसलिलए, पीओ द्वारा यह अच्छी रह से पुविष्ट की जा ी है विक सहायक शाखा की सुरक्षा क े मामले में प्रबं क की अनुपस्मिस्र्थीति में 10.11.99 को शाखा छोड़ने क े दौरान प्रबं क अपने क 4व्य में लापरवाही कर रहा र्थीा। इसलिलए, मैं उस चाज[4] नंबर 3 को श्री क े क े भारद्वाज, सीएसओ क े विवरूद्घ साविब कर ा हूं आरोप सं. 4 मैंने पी.ओ. और डी.आर./सी.एस.ओ की सामग्री की पूरी रह से जांच की है सामग्री को ध्यान में रख े हुए, मैं प्रस् ु अति कारी द्वारा स्र्थीाविप और थ्यों क े सार्थी सहमति व्यक्त कर ा हूं, सिजन्होंने ME 6/1&2 से स्र्थीाविप विकया है विक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd "सभी महत्वपूण[4] क ुं जी की रखवाली का रिरकॉड[4] एक प्रमुख रसिजस्टर में रखा जाना चाविहए र्थीा"। चाविबयों की अशिभरक्षा में सभी परिरव 4न ुरं संरक्षकों क े हस् ाक्षरों क े अ ीन विकए जाने चाविहए। ME 8 और ME 22/1 और 2 vमशः 1.8.1995 और 2.7.1994 से सहायक प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकद) से संबंति क ुं जी रसिजस्टर में पोस्टिंस्टग क े अ ूरे रिरकॉड[4] की पुविष्ट कर े हैं। यह उपरोक्त अशिभलेखों से स्र्थीाविप है विक सहायक प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) जो सेवला आगरा शाखा में संयुक्त संरक्षक र्थीे, ने शाखा क े ति जोरी/स्ट्रॉन्ग रूम की चाविबयों का प्रभार लेने पर संबंति प्रमुख रसिजस्टरों पर हस् ाक्षर नहीं विकए र्थीे और मुख्य रसिजस्टरों को बनाए नहीं रखा र्थीा। इसलिलए, मैं उस आरेाप संख्या 4 को मान ा हूं, जो श्री क े क े भारद्वाज, सीएसओ क े लिखलाफ साविब हुआ है।
8. अनुशासनात्मक प्राति करण ने दोषी प्रत्यर्थी= को सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े बाद, जांच अति कारी क े विनष्कष€ क े सार्थी सहमति व्यक्त की और प्राक ृ ति क न्याय क े अनुपालन में, 31 विदसंबर, 2001 क े आदेश से सेवा से बखा4स् गी का दंड भविवष्य में रोजगार क े लिलए अयोग्य ा क े सार्थी विदया जा ा है।
9. अपीलीय प्राति कारी क े समक्ष विवभागीय अपील में प्रति वादी द्वारा अनुशासनात्मक प्राति करण क े आदेश को चुनौ ी दी गई। अपीलीय प्राति कारी ने जांच क े रिरकॉड[4] पर पुनर्विवचार करने क े बाद, आरोप सं. 3 क े संबं में दोषी प्रत्यर्थी= द्वारा विदए गए प्रस् ुति करण में औतिचत्य पाया, लेविकन अब क आरोप सं. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 1 और 4 क े संदभ[4] में जहां क विनष्कष[4] का संबं है, अपीलीय प्राति कारी ने जांच अति कारी द्वारा दज[4] की गई विनष्कष[4] क े सार्थी सहमति व्यक्त की और े विवविनयमन 17 क े ह शविक्त क े प्रयोग में अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा पुविष्ट की और 23 विदसंबर, 2002 क े अपने आदेश द्वारा सजा को संशोति विकया, सिजसका उद्घरण विनम्नानुसार हैः इसलिलए, मैं अपीलीय प्राति कारी क े रूप में विनविह शविक्तयों क े प्रयोग में, और यूको बैंक अति कारी कम4चारी (अनुशासन और अपील) विवविनयम, 1976 क े विवविनयमन 17 क े संदभ[4] में, जैसा विक संशोति विकया गया है, विनम्नलिललिख आदेश पारिर कर ा हूंः आरोप संख्या 1 सिसद्ध श्री क े क े भारद्वाज (पीएफएम संख्या - 23213) को बैंक की सेवा से अविनवाय[4] रूप से सेवाविनवृत्त विकया जाएगा। आराेप संख्या 2 साविब नहीं हुआ दोषमुक्त आरोप संख्या 3 साविब नहीं हुआ दोषमुक्त आरेाप संख्या 4 - - सिसद्ध श्री भारद्वाज क े मूल वे न को 4 (चार) वष€ की अवति क े लिलए वे नमान में दो चरणों में कम विकया जाएगा। यह आगे विनदSशिश विकया गया है विक वह कटौ ी की अवति क े दौरान वे न वृतिद्ध अर्जिज करेगा और इस अवति की समाविŽ पर कमी का प्रभाव उसक े भविवष्य क े वे न वृतिद्ध को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd आगे बढ़ाने का होगा। आरोप संख्या 5 साविब नहीं हुआ दोषमुक्त उपरोक्त दंड समव = रूप से चलेंगे, र्थीाविप, चूंविक श्री भारद्वाज क े विवरुद्ध कोई नैति क अ म ा नहीं पाई जा रही है, इसलिलए उन्हें संदेय सभी टर्विमनल लाभों क े सार्थी भुग ान विकया जाएगा।
10. अपीलीय प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश को संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह प्रत्यर्थी= द्वारा चुनौ ी दी गई र्थीी। विवद्व एकल न्याया ीश, जांच क े रिरकॉड[4] पर ध्यान देने क े बाद, इस विनष्कष[4] पर पहुंचे विक श्री विवनोद क ु मार खन्ना उस ारीख पर शाखा प्रबं क र्थीे, जब घटना हुई र्थीी, अर्थीा4, 10/11 नवंबर, 1999 और संयुक्त सिजम्मेदारी शाखा प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) की र्थीी। चूंविक व 4मान दोषी प्रत्यर्थी= सहायक प्रबं क र्थीा, इसलिलए उसे चूक क े लिलए सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा र्थीा और 19 अक्टूबर 2019 क े अपने आदेश क े ह दोषी प्रत्यर्थी= को दी गई सजा क े आदेश को अपास् विकया जा ा है।
11. व 4मान अपीलक ा4 क े द्वारा प्रस् ु विकए गए लेटस[4] पेटेंट अपील पर, आक्षेविप फ ै सले क े ह खण्ड पीठ ने जांच की रिरपोट[4] का परीक्षण कर े समय ध्यान नहीं विदया और आदेश क े ह विवद्व एकल न्याया ीश द्वारा आक्षेविप विनष्कष€ को विफर से प्रस् ु विकया है और अपील को 21 जनवरी, 2021 क े आदेश द्वारा खारिरज कर विदया है जो हमारे सामने चुनौ ी का विवषय है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
12. थ्यों को पूरा करने क े लिलए, यह अंविक करना प्रासंविगक हो सक ा है विक विवद्वान एकल न्याया ीश और खंडपीठ द्वारा आक्षेविप विनण4य पारिर करने में थ्यात्मक त्रुविट की गई र्थीी विक श्री विवनोद क ु मार खन्ना, जो उस समय सेवला, आगरा शाखा क े प्रबं क र्थीे को भी आरोप पत्र विदया गया र्थीा और उन्हें भी विवभागीय जांच का सामना करना पड़ा र्थीा लेविकन उनक े लिखलाफ आरोप यह र्थीा विक दोषी प्रत्यर्थी= पूरी रह से जानकारी र्थीी विक वह नकदी का संरक्षक र्थीा क े बावजूद (स्टेशनरी कक्ष में एक अलमारी में ति जोरी/स्ट्रांग रूम की चाविबयां रा भर रखना) और बैंक क े विनयमों क े अनुसार उसे अपनी व्यविक्तग अशिभरक्षा में नहीं रख े हुए, उन्होंने उस कम4चारी क े लिखलाफ उतिच कदम नहीं उठाया जो कशिर्थी ौर पर शाखा में ही चेस्ट की चाविबयों की रा भर सुरक्षा कर ा र्थीा, जो एक घोर लापरवाही र्थीी जो विक उन्हें शाखा क े प्रबं क क े रूप में अपने क 4व्यों क े विनव4हन करने क े लिलए प्रति बद्घ र्थीे और उनकी पय4वेक्षी लापरवाही क े लिलए, 17 विदसंबर, 1999 की चाज4शीट क े आने क े बाद, उन्हें भी दोषी ठहराया गया र्थीा उनकी पय4वेक्षी लापरवाही जो उन्होंने अपने क 4व्यों क े विनव4हन में की र्थीी और 28 फरवरी, 2002 क े एक आदेश द्वारा दंतिड विकया गया र्थीा।
13. अपीलार्थी= क े विवद्वान अति वक्ता का विनवेदन है विक प्रत्यर्थी= ने अपने क 4व्यों क े विनव4हन में जो घोर कदाचार विकया र्थीा, उसक े लिलए विवविनयम 1976 क े ह विन ा4रिर प्रविvया क े अनुसार जांच की गई र्थीी और प्रति वादी क े मामले में विवभागीय अति कारिरयों या उच्च न्यायालय क े समक्ष ऐसा पहले कभी हुआ विक जांच विवविनयम, 1976 की योजना क े ह विन ा4रिर प्रविvया क े अनुसार जाँच नहीं की गई हो या रिरकॉड[4] जो आरोप क े लिलए प्रासंविगक र्थीा, और सिजसे मांगा गया र्थीा, उसे उपलब् नहीं कराया गया र्थीा और क्या रिरकॉड[4] की अनुपलब् ा क े कारण उसक े सार्थी पक्षपा विकया गया है या अनुशासनात्मक/अपील प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश प्राक े सिसद्धां ों का उल्लंघन है जबविक आरोप vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd संख्या 1 और 4 क े संदभ[4] में जांच अति कारी क े विनष्कष€ को बरकरार रख े हुए और परिरणामी दंड विदया गया है।
14. सार्थी ही, विवद्व अति वक्ता ने आगे कहा विक उच्च न्यायालय क े विवद्व एकल न्याया ीश ने इस आ ार पर काय4वाही की है विक यह प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) र्थीे जो सिजम्मेदार अति कारी र्थीे और उनकी लापरवाही क े कारण, शाखा क े ति जोरी से 10 नवंबर, 1999 को चोरी की गई है जो थ्यात्मक रूप से गल प्र ी हो ी है। यह दोषी प्रत्यर्थी= र्थीा जो सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी उस प्रांसविगक समय में संरक्षक और चाशिभयों का प्रभारी र्थीा और जाॅंच अति कारी द्वारा दज[4] विकए गये विनष्कष[4] इस अशिभलेख उपस्मिस्र्थी दस् ावेजी साक्ष्यों का समर्थी4न कर े है और आगे विकसी भी स् र पर दोषी प्रत्यर्थी= पर कोइ[4] पूछ ाछ नहीं की गई र्थीी जब उनक े द्वारा प्रशासविनक या अपीलीय अति कारी क े समक्ष रिरपोट[4] प्रस् ु की जबकी उनहोंनें अपनी रिरपोट[4] में जाँच अति कारी क े द्वारा दज[4] विकए विनष्कष€ का विवरो विकया र्थीा। यह स्पष्ट त्रुविट है सिजसे उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने दोषी प्रत्यर्थी= क े लिखलाफ की गई विवभागीय जांच में हस् क्षेप विकया है सिजसमें आरोप सं. 1 और 4 अं ः उनक े लिखलाफ साविब हुए। दी गई परिरस्मिस्र्थीति यों में, आक्षेविप फ ै सले में उच्च न्यायालय द्वारा हस् क्षेप पोषणीय नहीं है और इस न्यायालय द्वारा हस् क्षेप विकए जाने क े योग्य है।
15. इसक े विवपरी, दूसरी ओर प्रति वादी क े लिलए विवद्व अति वक्ता यह प्रस् ु कर े है विक प्रति वादी सहायक प्रबं क र्थीा और सिजम्मेदारी शाखा क े प्रबं क और सहायक प्रबं क (नकदी) की र्थीी और प्रस् ु कर ा है विक जांच अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट[4] में दज[4] विकया गया विनष्कष[4] विवक ृ है और बरकरार रखने योग्य नहीं है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
16. विवद्व अति वक्ता आगे प्रस् ु कर े हैं विक पक्षपा ी होने क े कारण जांच अति कारी क े लिखलाफ उनक े द्वारा दलील दी गई र्थीी, लेविकन विकसी ने भी उनक े अनुरो पर ध्यान नहीं विदया है और आगे प्रस् ु विकया है विक उनक े द्वारा मांगे गए दस् ावेज अनुरो क े बावजूद उपलब् नहीं कराये गये र्थीे और अनुशासनात्मक/ अपीलीय प्राति कारी द्वारा पारिर आदेश विबना विकसी कारण वाले और प्रक ृ ति में गूढ़ होने क े कारण विवति क े अनुसार बरकरार रखने योग्य नहीं हैं।
17. हमने पक्षकारों क े विवद्व अति वक्ताआें को सुना और उनकी सहाय ा से रिरकॉड[4] पर उपलब् सामग्री का अवलोकन विकया है।
18. भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 136 क े ह संवै ाविनक न्यायालयों द्वारा विवभागीय /अपीलीय अति कारिरयों द्वारा विनव4हन विकए गए अनुशासनात्मक जांच क े मामलों में न्यातियक समीक्षा की शविक्त कानून की त्रुविटयों या प्राक े उल्लंघन को प्रकट करने वाली प्रविvयात्मक त्रुविटयों की सीमाओं द्वारा अच्छी रह से परिरचालिल है और यह एक अपीलीय प्राति कारी क े रूप में मेरिरट क े आ ार पर मामले को स्र्थीविग करने क े समान नहीं है, सिजसकी पहले इस न्यायालय द्वारा बीसी च ुवSदी बनाम भार संघ और अन्य[1]; विहमाचल प्रदेश राज्य विवद्यु बोड[4] लिलविमटेड बनाम महेश दविहया2; में जांच की गई र्थीी और हाल ही में इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ (सिजसमें हम मे से एक सदस्य है) उप महाप्रबं क (अपीलीय प्राति कारी) और अन्य बनाम अजय क ु मार श्रीवास् व[3] सिजसमें इस न्यायालय ने विनम्नानुसार अव ारिर विकया गया हैः 1 1995(6) SCC 749 2 2017(1) SCC 768 3 2021(2) SCC 612 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
24. इस प्रकार यह य विकया जा ा है विक संवै ाविनक न्यायालयों की न्यातियक समीक्षा की शविक्त, विनण4य लेने की प्रविvया का मूल्यांकन है न विक स्वयं विनण4य की योग्य ा का मूल्यांकन करने की प्रविvया है। यह प्रविvया में विनष्पक्ष ा सुविनतिश्च करना है और विनष्कष[4] की विनष्पक्ष ा सुविनतिश्च करना नहीं है। विकसी भी रीक े की नैसर्विगक न्याय क े विकसी भी विनयम से असंग ा या जाँच क े रीक े में विदए गये वैद्याविनक विनयमों का उल्ल ंन या जहां अुशासनात्मक प्राति करण क े द्वारा विनण4य या विनष्कष[4] विबना विकसी साक्ष्यों क े विदये गये हो, यविद एेसा हो ो, दोषी अपरा ी क े विवरूद्घ विकसी भी काय4वाही में न्यायालय/न्यायाति करण हस् क्षेप कर सक ा है। यविद विनष्कष[4] या विनण4य ऐसा हो ा है जैसे विक कोई उतिच विनष्कश[4] क े रूप कभी नहीं पहुंचा हो ा या जहां अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा प्राŽ साक्ष्य पर विवचार करने पर प्राŽ विनष्कष[4] या रिरकॉड[4] क े आ ार पर विवशिशष्ट त्रुविट या सभी साक्ष्यो क े आ ार पर, उत्प्रेषण लेख जारी विकया जा सक ा है। संक्षेप में, न्यातियक समीक्षा क े दायरे को थ्य क े रूप में प्राति करण क े विनण4य की शुद्ध ा या क 4 शील ा की परीक्षा क नहीं बढ़ाया जा सक ा है।
25. जब लोक सेवक क े लिखलाफ कशिर्थी कदाचार क े लिलए अनुशासनात्मक जांच की जा ी है, ो न्यायालय को जांच और विन ा4रण करना हैः (i) क्या जांच सक्षम प्राति कारी द्वारा आयोसिज की गई र्थीी। (ii) क्या प्राक े विनयमों का अनुपालन विकया जा ा है । (iii) क्या विनष्कष[4] या विनण4य क ु छ सबू ों पर आ ारिर हैं और प्राति करण क े पास थ्य या विनष्कष[4] क े थ्य क पहुंचने की शविक्त और अति कार क्षेत्र है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
26. यह अच्छी रह से सुस्र्थीाविप है विक जहां जांच अति कारी अनुशासनात्मक प्राति करण नहीं है, जांच की रिरपोट[4] प्राŽ करने पर, अनुशासनात्मक प्राति करण पूव[4] जाँच अति कारी द्वारा दज[4] विनष्कष€ से सहम हो सक ा है या नहीं भी हो सक ा है, असहमति की स्मिस्र्थीति में, अनुशासनात्मक प्राति करण को असहमति क े कारणों को दज[4] करना होगा और यविद रिरकॉड[4] पर उपलब् साक्ष्य इस रह क े प्रयोग क े लिलए पया4Ž हैं ो दोषी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने क े बाद अपने स्वयं क े विनष्कष€ को दज[4] कर सक ा है या मामले को आगे की जांच क े लिलए जांच अति कारी को भेज सक े हैं।
27. यह सच है विक साक्ष्य क े सख् विनयम विवभागीय जांच काय4वाही पर लागू नहीं हो े हैं। हालांविक, कानून की एकमात्र आवश्यक ा यह है विक अपरा ी क े लिखलाफ आरोप ऐसे सबू ों क े आ ार पर स्र्थीाविप विकया जाना चाविहए, सिजस पर एक उतिच व्यविक्त यर्थीोतिच और विनष्पक्ष ा क े सार्थी काय[4] कर सक ा है, जो अपरा ी कम4चारी क े लिखलाफ आरोप की गंभीर ा को बरकरार रख ा है। यह सच है विक विवभागीय जांच की काय4वाही में भी क े वल अनुमान अपरा क े विनष्कष[4] को बनाए नहीं रख सक े।
28. संवै ाविनक न्यायालय संविव ान क े अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 136 क े अ ीन न्यातियक पुनर्विवलोकन की अपनी अति कारिर ा का प्रयोग कर े हुए विवभागीय जांच काय4वाविहयों में आए थ्य क े विनष्कष€ में हस् क्षेप नहीं करेगा सिसवाय दुभा4वना या विवक ृ ति क े मामले को छोड़कर जहां विकसी विनष्कष[4] का समर्थी4न करने क े लिलए कोई सबू नहीं है या जहां एक विनष्कष[4] ऐसा है विक कोई भी व्यविक्त उन विनष्कष€ पर यर्थीोतिच और विनष्पक्ष ा क े सार्थी काम नहीं कर सक ा र्थीा और जब क विवभागीय प्राति करण द्वारा प्राŽ विनष्कष[4] का समर्थी4न करने क े लिलए क ु छ सबू हैं, ब क उसे बनाए रखा जाना चाविहए। ' vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
19. त्काल मामले क े थ्यों को उल्लेख कर े हुए, खण्ड पीठ ने इस आ ार पर काय4वाही की है विक सिजम्मेदारी सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी शाखा प्रबं क की र्थीी। इसलिलए, प्रति वादी को उन अति कारिरयों की चूक क े लिलए सिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा र्थीा और उक्त नींव पर काय4वाही कर े हुए, दोषी प्रत्यर्थी= पर लगाए गए दंड को अपास् कर विदया, लेविकन जांच का रिरकॉड[4] स्पष्ट रूप से प्रकट कर ा है विक यह उच्च न्यायालय की एक थ्यात्मक त्रुविट र्थीी जबविक दोषी प्रत्यर्थी= की आं रिरक जांच को अपास् विकया जा ा और परिरणामी सजा को प्रति वादी पर अति रोविप की जा ी है।
20. जांच क े दौरान, एक दस् ावेजी साक्ष्य रिरकॉड[4] में आया विक यद्यविप श्री विवनोद क ु मार खन्ना शाखा क े प्रबं क र्थीे, लेविकन ारीख, यानी, 10/11 नवंबर, 1999, सिजस विदन चोरी हुई र्थीी, नकदी क े संरक्षक सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी प्रत्यर्थी= र्थीे। जांच अति कारी द्वारा अपनी रिरपोट[4] में यह विनष्कष[4] दज[4] विकया गया है विक दोषी प्रत्यर्थी= नकदी का संरक्षक र्थीा जो रा भर स्टेशनरी रूम की आलमारी में नकदी सुरतिक्ष /स्ट्रांग रूम की चाबी रख ा र्थीा और उसे सहायक प्रबं क (नकदी) क े सार्थी बैंक क े विनयमों क े अनुसार अपनी व्यविक्तग विहरास में नहीं रख ा र्थीा। थ्य क े विनष्कष[4] की पुविष्ट अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति करण द्वारा प्रति वादी क े अपरा को बरकरार रखने क े लिलए र्थीी क्योंविक वह एक संरक्षक क े रूप में अपने क 4व्यों क े विनव4हन में विवफल रहा र्थीा जब चोरी 10/11 नवंबर, 1999 को हुई र्थीी, लेविकन उच्च आक्षेविप फ ै सले में न्यायालय ने जांच अति कारी द्वारा उस सिजम्मेदारी क े संदभ[4] में दज[4] की गये विनष्कष[4] की जांच करने क े लिलए प्रयास नहीं विकया है, जो दोषी प्रत्यर्थी= चोरी क े समय प्रासंविगक बिंबदु पर नकदी क े संरक्षक क े रूप में विनव4हन करने में विवफल रहा र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
21. इसक े अलावा, जांच अति कारी द्वारा जो विनष्कष[4] दज[4] विकया गया है, उसे अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी द्वारा विफर से देखा गया है और जांच क े रिरकॉड[4] की मूल्यांकन और सम्यक विवचारशील ा से, अपीलीय प्राति कारी ने आरोप सं. 3 से अपरा ी को दोषमुक्त कर े हुए आरोप सं. 1 और 4 को उसक े लिखलाफ साविब विकया और 23 विदसंबर, 2002 क े एक आदेश द्वारा उसे दंतिड विकया। न ो विवद्व एकल न्याया ीश और न ही उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने उस विनष्कष[4] को ध्यानपूव4क देखा है सिजसे जांच अति कारी द्वारा आरेाप संख्या 1 और 4 क े संदभ[4] में दज[4] विकया गया और उसका अवलोकन विकया गया और उसक े बाद अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी द्वारा दोषी प्रत्यर्थी= पर दंड क े आदेश क े ह जुमा4ने को अति रोविप विकया।
22. हमारे विवचार में, उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेविप आदेश में जो विनष्कष[4] दज[4] विकये गये है, वह अपोषणीय है और रिरकॉड[4] पर उपलब् जांच की रिरपोट[4] क े सार्थी समर्भिर्थी नहीं है।
23. प्रत्यर्थी= क े विवद्व अति वक्ता द्वारा प्रस् ु विकया विक जांच अति कारी पक्षपा ी र्थीा और इसलिलए उसने उसक े सार्थी पक्षपा विकया, यह कहने क े लिलए पया4Ž है विक क े वल यह आरोप लगाना विक वह पक्षपा ी र्थीा पया4Ž नहीं है जब क विक जांच क े दौरान या अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी क े समक्ष उसक े द्वारा रखी गई सामग्री द्वारा समर्भिर्थी न हो। यहां क विक उच्च न्यायालय क े समक्ष भी कोई प्रस् ुति करण नहीं विकया गया र्थीा और यह अस्वीक ृ ति क े अलावा कोई विवचार नहीं कर ा है।
24. जहां क दस् ावेज की आपूर्ति न करने क े संबं में प्रस् ुति करण का संबं है, जांच अति कारी ने पाया है विक दोषी प्रत्यर्थी= द्वारा मांगा गया रिरकॉड[4] उसे उपलब् कराया गया र्थीा, एक क े अति रिरक्त जो गोपनीय प्रक ृ ति का र्थीा, विफर भी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd उसे विनरीक्षण क े लिलए अनुमति दी गई र्थीी। उसी समय, प्रति वादी यह विदखाने में विवफल रहा विक उसक े द्वारा मांगे गए दस् ावेजों की कशिर्थी गैर-आपूर्ति क े संदभ[4] में उसे क्या पूवा4ग्रह हुआ है।
25. प्रति वादी क े लिलए विवद्व अति वक्ता को आगे प्रस् ु विकया विक अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी क े विनण4य का विबना विकसी कारण का और गूढ़ प्रक ृ ति का हो े हुए भी सम्बस्मिन् है, यह कहना खेदजनक है विक अनुशासनात्मक/अपीलीय प्राति कारी क े दोनों आदेश रिरकॉड[4] पर हैं और जाँच अति कारी द्वारा प्राŽ विनष्कष€ का अनुमोदन कर े समय माहत्वपूण[4] कारण विदए गये हैै। अपीलीय प्राति कारी भी, जांच क े रिरकॉड[4] का उतिच मूल्यांकन क े बाद और अनुशासनात्मक प्राति करण द्वारा पुविष्ट क े बाद, इस विनष्कष[4] पर पहुंचे विक आरोप सं. 3 क े संदभ[4] में दज[4] विकये गये विनष्कष[4] साविब नहीं हुए और आरोप सं. 1 और 4 साविब हुए सिजसक े आ ार पर उन्हें 23 विदसंबर, 2002 क े आदेश क े ह सजा को संशोति करने क े लिलए प्रयास विकया गया र्थीा।
26. हमारे विवचार में, उच्च न्यायालय ने दोषी प्रत्यर्थी= क े लिखलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक काय4वाही में हस् क्षेप कर े हुए अपनी अति कारिर ा को पार कर विदया है और अपोषणीय होने क े कारण अपास् होने क े योग्य है।
27. न ीज न, अपील सफल हो ी है और अनुमति दी जा ी है। 21 जनवरी, 2021 को उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े फ ै सले को दनुसार रद्द आैर अपास् विकया जा ा है। कोई लाग नहीं।
28. यविद कोई लंविब आवेदन हो, का विनस् ारण विकया जा ा है।................................................ vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (मानननीय न्यायमूर्ति अजय रस् ोगी)................................................... (माननीय न्यायमूर्ति अभय एस. ओका) नई विदल्ली 18 फरवरी, 2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd